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Transcript [EN]: आपके अवचेतन मन की शक्ति | The Power Of Your Subconscious Mind | Full Audiobook in Hindi | J. Murphy

Author:BETTER LIFE

Summary

The video presents a Hindi summary of Joseph Murphy’s The Power of Your Subconscious Mind, explaining that our subconscious (subconscious mind) holds immense power to heal, attract wealth, improve health, and transform life when guided by positive beliefs, prayers, and affirmations. It emphasizes that thoughts and beliefs imprint on the subconscious like a recording, influencing outcomes in health, finances, relationships, and success, while cautions against negative thinking and fear. Through numerous real-life examples and practical techniques—self-suggestion, guided prayers, mental imagery, and disciplined practice—the book shows how to align conscious intent with subconscious belief to manifest miracles, better health, and prosperity. The chapters cover how to use faith, nightly routines, sleep, forgiveness, and ethical living to nurture harmony, happiness, and sustained success.

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नमस्कार दोस्तों हमारे चैनल बटर लाइफ में आपका स्वागत है आज हम आपके लिए लेकर आए हैं पुस्तक डी पावर ऑफ योर सबकॉन्शियस मन यानी आपके अवचेतन मां की शक्ति पुस्तक की पुरी समरी हिंदी में लिखी गई किताब डी पावर ऑफ योर सब कॉन्शियस मन ना केवल पुरी दुनिया के बकरी दर्ज में फेमस है बल्कि इसने हमारे मन के सब कॉन्शियस पावर्स को सामने लाने की कोशिश की है इस बुक में सब कॉन्शियस मन के इस्तेमाल से हुए चमत्कारों को बहुत सारे रियल लाइफ बेस्ड एग्जांपल्स के थ्रू समझाया गया है जो रीडर को इस पर यकीन करने के लिए मजबूर करते हैं दोस्तों डी पावर ऑफ योर सब कॉन्शियस मन के लेखक जोसेफ मर्फी का जन्म आयरलैंड में हुआ था और बाद के दोनों में वे अमेरिका में बस गए थे साइकोलॉजी में एचडी करने के बाद उन्होंने दुनिया के अलग-अलग धर्म पर रिसर्च किया और इसी सिलसिले में फिर भारत भी आए थे निकॉन वर्ल्ड फेमस बुक्स लिखने के बाद जब लोगों ने उनसे उनकी बायोग्राफी लिखने की मांग की तो माफी ने कहा की उनका जीवन उनकी पुस्तकों में पाया जा सकता है इस तरह अपनी पुरी जीवन में उन्होंने 30 से ज्यादा पुस्तक नहीं लिखी दिन में डी मिरेकल्स ऑफ मन डायनामिक योर इंफिनिटी पावर तू बी रिच डी अमेजिंग लॉस ऑफ कॉस्मिक मन इत्यादि है जिम सबसे फेमस है डी पावर ऑफ योर सब कॉन्शियस मन यानी आपके अवचेतन मां की शक्ति दोस्तों इस अमेजिंग बुक को जन से पहले आई जानते हैं की बुक हमारी लाइफ में भी चमत्कार कैसे कर शक्ति है इस पुस्तक की शुरुआत इसी सवाल से होती है दोस्तों लेखक करते हैं की चमत्कार जैसी चीज पर विश्वास नहीं करते होंगे पर यह सच में हो सकता है बशर्ते की आप अपने सब कॉन्शियस मन का इस्तेमाल पर भरोसा करने की बजे यह बुक हमें हमारी किस्मत अपने सब कॉन्शियस मन के इस्तेमाल से खुद लिखने को प्रेरित करती है सब कॉन्शियस मन को हिंदी में कहते हैं अवचेतन मां इसका अर्थ है की हमारे दिमाग का वो हिस्सा जो चेतन में नहीं है मतलब वह कॉन्शियसली कम नहीं करता इसे आसन भाषा में समझिए देखिए हमारा दिमाग दो हसन में बंता है एक कॉन्शियस और दूसरा सब कॉन्शियस हमारा कॉन्शियस मन हमारे लॉजिकल केमोन को कंट्रोल करता है जैसे फैसला करना प्लानिंग करना किसी भी प्रकार की नई स्किल भाषा सीखना वगैरा वही सब कॉन्शियस मन का मुख्य कम हमारे फिजिकल फंक्शंस को कंट्रोल करना होता है जैसे हमारा सांस लेना खाना पचना चीज याद रखना हमारी फीलींगस और इमोशंस को कंट्रोल करना आदि हमारी हार्टबीट और ब्लू सरकुलेशन भी सब कॉन्शियस मन ही प्रोसेस करते हैं इस तरह हमारी बॉडी का 95% कम सब कॉन्शियस मन के द्वारा ही किया जाता है चलिए दोस्तों अब हम अपनी बुक पर वापस आते हैं तो हम इस बुक को पढ़ने के बाद होने वाले मिरेकल्स को समझ रहे थे दोस्तों इसे सिलसिले में बुक की शुरुआत में राइटर हमसे कुछ और सवाल पूछते हैं जिनके जवाब शायद आप नहीं जानते होंगे जैसे ऐसा क्यों है की कोई व्यक्ति दुखी है तो कोई सुखी एक अमीर है तो दूसरा गरीब एक व्यक्ति तनावग्रस्त है तो दूसरा आत्मविश्वासी और खुश एक व्यक्ति सफल है तो दूसरा असफल एक व्यक्ति जहां अपने कम में जीनियस है तो दूसरा जिंदगी भर मेहनत करके भी कुछ हासिल कर अपने में नाकाम एक व्यक्ति जो एक भयंकर जानलेवा बीमारी से ठीक हो जाता है तो दूसरा नहीं इतने सारे धार में दयालु और अच्छे लोग आखिर क्यों इतनी शारीरिक और मानसिक परेशानियां को झेलते हैं जहां एक व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन से खुश है तो वहीं दूसरा तनावग्रस्त और परेशान ऐसा क्यों है क्या आपके पास इन सवालों के कोई जवाब है जी हां बिल्कुल है इनके जवाब छिपे हैं आपके सब कौन सी स्माइल में और आपको जरूर है उन्हें ढूंढने की दोस्तों इसी तरह इस बुक मर्फी ने उन जवाबों को ढूंढने का तरीका बताया है और उनके शब्दों में वो कहते हैं की मुझे पूरा विश्वास है की इस बुक की सीक्रेट जन के बाद आप उसे चमत्कारी शक्ति को जान पाएंगे जो आदमी ही मौजूद है आपके सब कॉन्शियस मन के पास और यही शक्ति आपको दुख निराशा और परेशानियां की दाल से बाहर निकलेगी ये शक्ति आपको अपनी मंजिल तक पहचाने में गाइड करेगी आपकी परेशानियां सुलझाएगी आपके सब कॉन्शियस मन की यह चमत्कारी शक्ति आपको फिर से स्वस्थ और शक्तिशाली बनाएगी और अगर एक बार आपने इस व्यक्ति का इस्तेमाल करना सिख लिया तो आप लीडर आत्मविश्वासी आजाद और सफल हो जाएंगे दोस्तों पुस्तक में आगे लेखक कहते हैं की इस चमत्कारी शक्ति को कैसे पाया जा सकता है वह करती हैं की इसके लिए जरूरी है की आप इस पर विश्वास करें लेकिन बिना किसी प्रूफ के तो शायद आपके लिए विश्वास करना कठिन होगा इसीलिए लेखक कहते हैं की उन्होंने सार्कोमा नाम की ट्यूमर का इलाज इसी अवचेतन मां की शक्ति से किया था जिसने हमारे शरीर की रचना की है और जो हमारे शरीर के सभी जरूरी केमोन को कंट्रोल करती है उन्होंने जी टेक्निक से उसे भयंकर ट्यूमर का इलाज किया उसकी चर्चा पुस्तक में आगे विस्तार से की गई है दोस्तों आगे लेखक प्रेयर्स यानी प्रार्थना के बड़े में बात करते हैं वह कहते हैं की आप जानते हैं हमारे सब कॉन्शियस मन की पावर्स को जागने में प्रार्थना कितनी अद्भुत टेक्निक के रूप में कम करती है साथ ही हमें यह भी बताया किस तरह से की जाति करती है दोस्तों प्रार्थना हम सभी करते हैं पर अधिकतर समय जब हम किसी मुश्किल या मुसीबत या बीमारी की स्थिति में होते हैं तो अचानक हमारी मुंह से प्रार्थनाएं निकलते है बेशक हम मुसीबत में प्रार्थना करते हैं लेकिन प्रार्थना को हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए हम मुसीबत का इंतजार ही क्यों करें दोस्तों प्रार्थना के विषय में लेखक जोसेफ मर्फी ने गहन रिसर्च किया और इसके साइंटिफिक प्रभावों को हमारे सामने लाने की कोशिश की बच्चों की छोटी-छोटी प्रार्थनाएं खाने से पहले ईश्वर का स्मरण और ईश्वर की आराधना में एक अद्भुत शक्ति होती है पुस्तक में इस पर भी आगे विस्तार से बात की जाएगी लेखक बताते हैं की उनसे हजारों लोग यह सवाल पूछते हैं की बार-बार प्रार्थना करने के बावजूद हमें वह चीज क्यों नहीं मिलती जो हमने प्रार्थना में मांगी है इस पुस्तक में दोस्तों लेखक कहते हैं की हमारे अवचेतन मां की चमत्कारी शक्तियां उसे समय भी मौजूद थी जब हमारा जन्म भी नहीं हुआ था ये दुनिया भी नहीं थी जीवन की शुरुआत इसी शक्ति से होती है लेखक हमसे यह आग्रह करते हैं की हमें तो बस मेंटली और इमोशनली उसे अच्छी चीज के साथ जुड़ना है जिसे हम अपना हकीकत बनाना चाहते के बड़े में समझते जैन दोस्तों है इसे सुनने के बाद आपको इस पुस्तक को खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी क्योंकि केवल इस एक वीडियो में आपको इस बुक की अमेजिंग समरी बताने का प्रयास हमने बहुत मेहनत से किया है इसीलिए हम आशा करते हैं की आपको इस पुस्तक की कंप्लीट समरी जानकर अच्छा लगेगा और आप इस पुस्तक के राज जान कर अपना जीवन बादल पानी में सक्षम होंगे आई शुरुआत करते हैं दोस्तों पहले अध्याय का नाम है आपकी भीतर बहुत बड़ा खजाना है दोस्तों यहां लेखक किस ख़ज़ाने की बात कर रहे हैं वह कहते हैं की इस ख़ज़ाने को हासिल करने के लिए हमें केवल अपने मां की आंखें खोल कर उसे देखना भर है हमारी भीतर शक्तियों का एक ऐसा भंडार है जिसमें से सुख समृद्धि और आनंद का जीवन जिया जा सकता है और हमारे लिए हर वह जरूरी चीज निकाल जा शक्ति है जिसकी हमें आवश्यकता है कई लोग अपनी इस शक्ति को इसीलिए नहीं जान पाते क्योंकि उन्हें अपने अंदर मौजूद अपनी अनलिमिटेड नॉलेज और अनंत प्यार के भंडार का पता ही नहीं होता अब लेखक एक चुंबक का एग्जांपल देते हैं और कहते हैं की लोहे का एक चुंबकीय टुकड़ा अपनी भर से 12 गुना ज्यादा वजन उठा सकता है वही अगर हम इसकी चुंबकीय शक्ति को हटा दें तो यह एक पंख तक नहीं हिल सकता जी तरह यह लोहा दो प्रकार का होता है लेखक कहते हैं की लोग भी दो प्रकार के होते हैं एक वह जिम ठीक चुंबकीय लोहे की तरह गन पे जाते हैं और दूसरे वह जो बिल्कुल साधारण लोहे की तरह है और यह आस्था से भरपूर होते हैं यह जानते हैं की इनका जन्म केवल जितने और सफल होने के लिए हुआ नहीं रहते की अगर मैं फेल हो गया तो क्या करूंगा अगर मेरा पैसा डब गया तो नहीं बाबा मैं नहीं करूंगा लोग मेरी हंसी उड़ाएंगे ऐसे लोग बहुत बड़ी तादाद में होते हैं और अपनी जिंदगी में आगे तक नहीं जा पाते उनका जो डर होता है ना वह उन्हें इस जगह पर रॉक रखना है जहां वह अभी है लेखक कहते हैं की आप भी चुंबकीय व्यक्ति बन सकते की आप इतिहास के सबसे बड़े रहस्य को जान लेने और उसे पर अमल करने लगी नजर में ये रहस्य न्यूक्लियर एनर्जी ग्रहण पर पहुंचे अंतरिक्ष यह और ब्लैक होल वगैरा हो सकते हैं लेकिन सही जवाब इनमें से कोई नहीं है दोस्तों यह रहस्य है आपके सब कॉन्शियस मन में पी जान वाली अमेजिंग चमत्कारी शक्ति यही वो आखिरी जगह है जी पर बहुत कम लोग रिसर्च करते हैं और इसी करण यह रहस्य बहुत कम लोगों को ही पता है आपके सब कॉन्शियस मन में छिपी इन अमेजिंग पावर्स का इस्तेमाल कर आप अपने जीवन में बहुत साड़ी सेहत दौलत और आनंद का सकते हो का इस्तेमाल कैसे करें इसीलिए इस बैंक में आपको जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में इसे इस्तेमाल आप अपने आदर्श जीवन साथी को आकर्षित कर सकते हैं सही बिजनेस पार्टनर या हर वो लोग जिन्हें आप आकर्षित करना चाहते हैं कुकर सकते हैं यह शक्ति आपको बताएगी की आप धनी कैसे बन सकते हैं फाइनेंशली इंडिपेंडेंस कैसे बन सकते हैं ताकि जैसा आपका दिल चाहता है आप वैसे बने करें और रहे इतना ही नहीं यह शक्ति आपकी टूटी दिल का इलाज कर शक्ति है आपके परेशान मां को शांत कर शक्ति है की आप किसी भी क्षेत्र में सक्सेस हासिल करना चाहते हैं तो आपको इसकी थिअरीज यानी सिद्धांतों को समझना होगा अब थिअरीज सिद्धांत से आप क्या समझते हैं देखिए साइंस में आपने थिअरीज बेस्ड अलग-अलग एक्सपेरिमेंट जरूर की होंगे इनमें क्या होता है एक प्रोसेस की कैसे करना है और एक रिजल्ट और यह थिअरीज हर कंडीशन में सच और शाश्वत होती है अब आप कहेंगे की इन थिअरीज का हमारे सक्सेस से क्या रिलेशन है आई देखते हैं की लेखक हमें किस प्रकार समझते हैं लेखक कहते हैं की जब हम इन शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे तभी हम जान पाएंगे की रिजल्ट क्या होंगे ठीक वैसे ही रिजल्ट्स जैसे हम एक्सपेरिमेंट में पाते हैं लेखक बताते हैं की उन्होंने कई सालों तक केमिस्ट का कम किया था अपनी शुरुआती ट्रेनिंग में उन्होंने यह शिखा की जब हम हाइड्रोजन की दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु मिलने हैं तो रिजल्ट हमेशा पानी होता है यह रिजल्ट कभी कब्र या अक्सर नहीं बल्कि हमेशा एक ही होता है इसी तरह जब हम एक परमाणु कार्बन का और एक ऑक्सीजन का मिलने हैं तो कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बंटी है जो सभी प्राणियों के लिए जहरीली है पर वही अगर हम इसमें ऑक्सीजन का एक और परमाणु मिलने हैं तो यह कार्बन डाइऑक्साइड बन जाति है जो पौधों के लिए जीवनदायी है ये सभी एक ऐसी तथ्य है जो हर स्थिति में हर समय सच होगी इन्हें ही हमसे सिद्धांत या थ्योरी कहते हैं इसी तरह लेखक कहते हैं की कम करने की दृष्टि से या नजरिया में भी यही बात लागू होती है यहां अपने सब कॉन्शियस मन की पावर से सक्सेस हासिल करने के लिए आपको एक सिद्धांत या तेरी को सीखना होगा जी प्रकार साइंस की यह थिअरीज सच इस प्रकार यह थ्योरी भी सच है की आप अपने सब कॉन्शियस मन पर जो छाप छोड़ते हैं वह स्थिति अनुभव और घटना के रूप में बाहर निकलते है आपका अवचेतन मां एक सिद्धांत है यह विश्वास के नियम पर अपना कम करता है मतलब आपको पहले अपने सबकॉन्शियस मन की पावर्स पर विश्वास करना पड़ेगा आपको जानना होगा की इस पर विश्वास कैसे करते हैं दोस्तों मर्फी बताते हैं की इस विश्वास करें इसके केमोन पर विश्वास करें और खुद पर विश्वास करें आपको सफलता उसे चीज के करण नहीं मिलती जिसमें आप विश्वास करते हैं बल्कि उसे विश्वास के करण मिलती है जी पर आप विश्वास करते इसीलिए हमें ऐसे झूठ और अंधविश्वासों से सावधान रहने की जरूर है जो हमें डरते हैं जागते हैं उसे सच और सिद्धांतों पर विश्वास करना शुरू करें जो कभी नहीं बदलते अपने मां को स्वास्थ्य सुख शांति और अच्छी भावनाओं से भर दे आपके जीवन में चमत्कार होने लगेंगे इस पुस्तक का हर अध्याय सच्चे उदाहरण देकर बताता है की आप अवचेतन मां के नियमों को किस तरह प्रयोग कर सकते सब कॉन्शियस मन पर विश्वास के एक सच्चे उदाहरण से बर्फी हमें बताते हैं की हम किस तरह अपने सब कॉन्शियस मन पर विश्वास कर जीत हासिल कर सकते हैं एक बार एक महान ओपेरा गायक एंड्रयू को केरोसू मंच पर गाने से घबरा रहे थे डर के मारे उनके गले में ऐंठन होने लगी उन्हें ऐसा ग रहा था जैसे अब वह कभी नहीं ग पाएंगे वो मंच के पीछे अपने कॉस्टयूम में तैयार खड़े थे उनका चेहरा पसीने से तार हो गया था कुछ ही समय में उन्हें हजारों की भीड़ में मंच पर गाना था अचानक कांपते हुए उन्होंने कहा मैं नहीं ग सकता सब लोग मुझमें पर हसेंगे तो मेरा करियर खत्म हो गया मैं नहीं खाऊंगा लेकिन इस पाल वह दोबारा मंच की और मुड़े तभी अचानक से बोले मेरे अंदर जो छोटा मैं है जो डरपोक और भयभीत है वह मेरे अंदर से मेरे बड़े मैं यानी आत्मविश्वास और साहस का गला ढाबा रहा है वे दोबारा स्टेज की और मुड़े और टैंकर खड़े हो गए उन्होंने अपनी भीतर के छोटे मेको ऑर्डर दिया बाहर निकाल जो मेरे भीतर का बड़ा मैं गाना गाना चाहता है वे चिल्लाए निकाल जो बाहर निकाल जो बड़ा मैं गाने वाला है अब चमत्कार हुआ उनके ऐसा बोलते ही उनके सब कॉन्शियस मन ने उनके अंदर की अनलिमिटेड पावर को आजाद कर दिया और जब भी मंच पर गए तो उन्होंने इतना शानदार गया की सभी लोग मंत्र मुग्ध हो गए और वे इतिहास के पन्नों में अमर हो गए ऐसा क्यों हुआ ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अपने मन की सब कॉन्शियस पावर्स पर बिलीव किया दोस्तों आगे लेखक कहते हैं की कैप्टन एक जहाज का मलिक होता है मतलब एक बार समुद्र में जान के बाद जहाज का पूरा कंट्रोल केवल कैप्टन के पास होता है और बाकी लोग उसके ऑर्डर्स को मानते हैं इसी तरह हमारा कॉन्शियस मन हमारे जहाज मतलब हमारे शरीर का कैप्टन होता है हमारा कॉन्शियस मन अपने विश्वास और एक्सपीरियंस के बेस पर हमारे सब कॉन्शियस मन को ऑर्डर्स देता है और हमारा सबकॉन्शियस मन उसे चुपचाप मां लेट है वो सवाल नहीं करता या यह नहीं पूछता की किस बेस पर कॉन्शियस मन ने उसे यह ऑर्डर दिया है दोस्तों अगर आप खुद से बार-बार ऐसा कहेंगे की मेरे पास इसे खरीदने के पैसे नहीं है तो आपका सब कॉन्शियस मन आपकी बात मां लेट है और वह इस बात को पक्का कर देता है की आपके पास जीवन चाहे चीज खरीदने के लिए कभी पैसे ना हो एक दिन नीना नाम की एक लड़की एक दुकान के पास से गुजरे तो उसकी नजर डिस्प्ले विंडो में रखें एक सुंदर बैग पर पड़ी उसने बड़ी आशा से उसे देखा फिर कीमत देखते ही उसके मुंह से हा निकाल गई वो खुद से खाने ही वाली थी की मैं इतना महंगा बैक तो खरीद ही नहीं पाऊंगी लेकिन तभी उसे इस पुस्तक के लेखक जो सिर्फ मैराफी के एक लेक्चर की बात याद ए गई की कभी भी किसी नेगेटिव सेंटेंस को पूरा मत करना इसे इस समय पलट कर पॉजिटिव बना दो और चमत्कार होता देखो फिर नीना ने अपने वाक्य को सकारात्मक में बदलते हुए कहा की यह बैग मेरा है यह बेचे के लिए ही तो यहां है है मैं मानसिक रूप से इसे एक्सेप्ट करती हूं और विश्वास करती हूं की मेरा सब कॉन्शियस मन इसे मुझे दिलाने में मेरी मदद करेगा अपने मंगेतर से मिले वो रैपर में लिपटा एक गिफ्ट लाया था नीना ने उसे खोल और उसमें से वही सुंदर बैग निकाला जिसे उसने दोपहर में शॉप पर देखा था ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने अपनी इस इच्छा को अपने सब कॉन्शियस मन में पहुंच दिया था जिसके पास कुछ भी हासिल करने की शक्ति है दोस्तों इस तरह इस बुक के पहले पाठ का अंत होता है इसमें हमने शिखा की जीवन का नियम विश्वास का नियम है और यह विश्वास आपके दिमाग का विचार है उन चीजों में बिल्कुल विश्वास ना करें जो आपको नुकसान पहुंच या चोट पहुंचाई बल्कि अपने सब कॉन्शियस मन की शक्तियों पर विश्वास करें ये विश्वास रखें की ये आपका इलाज करेगी आपको इंस्पायर करेगी और आपको शक्तिशाली बनाएगी आप जैसा विश्वास करेगी ये आपको वैसा ही फल देगी बस अपने विचारों को बादल लेने किस्मत खुद बी खुद बादल जाएगी आई दोस्तों देखते हैं की पाठ दो जिसका नाम है आपका दिमाग कैसे कम करता है मैं लेखक हमारे सब कॉन्शियस मन के बड़े में हमें क्या बताना चाहते हैं दोस्तों अब तक आपने यह तो जान लिया की हमारे दिमाग के दो भाग होते हैं चेतन और अब चेतन मां यानी कॉन्शियस और सबकॉन्शियस मन हमारा दिमाग ही हमारी सब्जी कीमती संपत्ति है और इसकी शक्तियां हमें तभी मिल पाएंगे जब हम इसका उपयोग करना सिख जाएंगे लेखक कहते हैं की जब हमारा सबकॉन्शियस मन किसी विचार को स्वीकार करता है तो वो इस पर कम करने लगता है और हैरानी की बात तो ये है की चाहे ये विचार अच्छे हो या बुरे ये दोनों पर समाज रूप से कम करता है जैसा की हमने पिछले अध्याय में भी देखा था की अगर नीना यह स्वीकार कर लेती की यह बैग वह कभी नहीं खरीद शक्ति तो वह बैग उसे नहीं मिलता क्योंकि उसका सब कॉन्शियस मन उसके उसे नेगेटिव विचार पर कम करने लगता और ऐसी परिस्थितियों बनाता जिससे वह बैग उसका ना हो लेकिन उसने अपने सब कॉन्शियस मन से उसे बैग को स्वीकार और शाम तक उसे वह बैग मिल गया दोस्तों इसी तरह अगर हम नकारात्मक सोचेंगे तो हमारा सब कॉन्शियस मन असफलता तनाव और दुख की परिस्थितियों बनाएगी दूसरी तरफ अगर पॉजिटिव यानी सकारात्मक सोचेंगे सृजनात्मक सोचेंगे तो हमें सफलता स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है दोस्तों आगे लेखक ने हमें हमारे कॉन्शियस और सबकॉन्शियस मन के प्रति और भी डिफरेंस बताएं हैं वो कहते हैं की हमें इन दोनों को पुरी तरह से अलग ही समझना चाहिए बल्कि यह तो एक ही मस्तिष्क में होने वाले दो अलग-अलग एक्टिविटीज के क्षेत्र हैं हमारा कॉन्शियस मन तार्किक होता है मतलब संदेह कर सकता है वह तारक कर सकता है प्रश्न कर सकता है और इसीलिए हम अपने जीवन के सभी फैसला जैसे पुस्तक चुना जीवनसाथी चुना या घर खरीदने जैसे फैसला कर पाते हैं वही इसी के साथ हमारे शरीर के अनिवार्य कम जैसे हार्टबीट रक्त संचार और पाचन क्रिया और सांस लेने ऐसी प्रक्रियाएं हमारा सब कॉन्शियस मन करता है हम अपने सब गॉर्जियस मन पर जो छाप छोड़ते स्वीकार भी कर लेट है मतलब अगर आप मानते हैं की आप में कॉन्फिडेंस नहीं है तो आपका सब कॉन्शियस मन आपको कभी कॉन्फिडेंट नहीं बने देगा मतलब आप का सकते हैं की हमारा सब कॉन्शियस मन एक ऐसी मिट्टी है जिसमें हम सभी तरह के बी बी सकते हैं चाहे वो अच्छी किम के हो या बुरे इसमें होने वाली फसल आपकी बी पर निर्भर करती है यहां बी से मतलब आपकी सोच से है और फसल उसे सोच के परिणाम से दोस्तों आगे लेखक बताते हैं की मनोवैज्ञानिक भी हमारे सब कॉन्शियस मन पर बहुत सारे एक्सपेरिमेंट करते हैं वह कहते हैं की आपने देखा होगा जब किसी व्यक्ति को हिप्नोटाइज किया जाता है तो वह व्यक्ति इन बटन को स्वीकार कर लेट है जो हिप्नोटिस्ट एक्सपर्ट उसे कहता है मतलब अगर वह कहे की तुम हिटलर हो तो वो मां लेट है या अगर वह हिप्नोटिस्ट यह कहे की तुम कुत्ता हो या बिल्ली हो तो वो वैसा ही व्यवहार करने लगता है जैसा की ये करते हैं कुछ समय के लिए वो व्यक्ति पुरी तरह से अपनी पर्सनालिटी बादल लेट है मतलब अगर वह हिप्नोटिस्ट एक्सपर्ट किसी व्यक्ति से कहे की तापमान जीरो डिग्री से भी नीचे है और वह बर्फ की तरह जाम गया है या वो संगमरमर की मूर्ति है तो वो इसी अनुरूप व्यवहार करने लगेगा लेखक कहते हैं की हमारे कॉन्शियस मन को यथार्थवादी मां अर्थात ऑब्जेक्टिव मन भी कहा जाता है क्योंकि इसका संबंध आपकी भारी दुनिया से होता है और इसके साधन हमारी पांच इंद्रिय है हमारी आंख नाक कान मुंह और त्वचा इसे जो भी ज्ञान प्राप्त किया जाता है हमारा कॉन्शियस मन मतलब चेतन मां उसके आधार पर तारक और विचार और अनुभव प्राप्त करता है जबकि हमारा अवचेतन मां कल्पना वादी मां या सब्जेक्टिव मन कहलाता है क्योंकि यह हमारी इंद्रियों के मध्य से नहीं बल्कि हमारे अंदर ज्ञान से महसूस करता है दोस्तों अब लेखक हमसे एक सवाल पूछते हैं की क्या आप डर चिंता और तनाव या ऐसी निकॉन नकारात्मक सोच से परेशान है है इसका इलाज है अपने सब कॉन्शियस मन की शक्ति को पहचान कर उसे आजादी खुशी और संपूर्ण सेहत का आदेश देना ऑर्डर देना अब देखा सुझाव की जबरदस्ती शक्ति की बात करते हैं जैसा की आप जानते हैं हमारा अवचेतन मां तारक वितरक नहीं कर सकता ना ही कुछ सोच सकता है यह कम चेतन मां मतलब कॉन्शियस मन का है अवचेतन मां यानी सब कॉन्शियस मन तो बस आपके द्वारा छोड़ी गई झापड़ कम करता है यह सुझाव दे नहीं सकता बल्कि आपके और किसी और के द्वारा दी गई सुझाव को सच मानकर उसे पर भी कम करने लगता है दोस्तों लेखक कहते हैं की डिक्शनरी हमें बताती है की सुझाव का अर्थ होता है किसी चीज को किसी के मस्तिष्क में डालना अब ये सुझाव जो हमें दिए जाते हैं यह निर्भर करता है हम पर की हम इसे स्वीकार करते हैं या नहीं अगर हमारे कॉन्शियस मन से हम सोचते हैं की हम कॉन्फिडेंट हैं तो वह व्यक्ति जो हमें ही सुझाव दे रहा है की आप में कॉन्फिडेंस नहीं है और हमें बादाम खाना चाहिए या यह नुस्खा अपनाना चाहिए तो कॉन्फिडेंस ए जाएगा तो इससे हमारे अवचेतन मां पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारा चेतन मां यानी कॉन्शियस यह जानता है की हम कॉन्फिडेंट है दोस्तों अब लेखक हमें आत्म सुझाव यानी सेल्फ सजेशन की शक्ति एक दिन उनका एक ऑडिशन था वो ऑडिशन के लिए एक्साइड थी लेकिन कहानी ना कहानी उन्हें खुद पर शक था की क्या वो अच्छा ग पाएंगे और वो खुद से कहती रही की जब गाने का वक्त आएगा तो मैं बहुत बड़ा गाउंगी वो मुझे पसंद नहीं करेंगे और फिर क्या हुआ इस आत्मा सुझाव यानी सेल्फ सजेशन की वजह से उनके सब कॉन्शियस मन ने इसे एक सच मां इस अनुरूप परिस्थितियों बनाने में जट गया उसे सिंगर का डर हकीकत बन गया और जैसा उसने सोचा सब कुछ ठीक वैसा ही हुआ इस घटना के एक हफ्ते बाद उसने थान लिया की अब उसे खुद को सकारात्मक यानी पॉजिटिव सेल्फ सजेशन देना है वह हर दिन तीन बार खाली कमरे में शांत बैठ आंखें बैंड कर खुद को यह सुझाव देती की मैं बहुत अच्छा गति हूं मैं शांत और आत्मविश्वास ही हूं और एक सप्ताह बाद सचमुच जब उसका फिर से ऑडिशन हुआ तो उसमें बहुत अच्छा गया इस तरह उसके सब कॉन्शियस मन ने उसके सेल्फ सजेशन को सच बना दिया दोस्तों अब लेखक यहां आत्म सुझाव यानी सेल्फ सजेशन का एक और उदाहरण देते हैं अक्सर हम अपने दैनिक जीवन में भी कहते हैं की ओ अब मुझे चीज याद नहीं रहती या मैं पढ़ा हुआ जल्दी भूल जाति हूं आप भूल जाते हैं की आपका अवचेतन मां आपकी बातें सुन रहा है और वह इसे हकीकत में बादल देगा एक महिला जो चीज याद रखना में एक्सपर्ट थी वह स्वयं को यह आत्मा सुझाव देती है की अब धीरे-धीरे उसकी याददाश्त कमजोर हो रही है तो वो सच में अपनी याद रखना की क्षमता में परिवर्तन पाती है हालांकि जल्द ही उसे एहसास हो जाता है की ऐसा उसकी नकारात्मक आत्म सुझाव से हो रहा है तो वो इसे उलट स्वयं को सकारात्मक सुझाव देने लगती है दोस्तों अब लेखक बाहरी सुझाव पर बात करते हैं अक्सर हमें बाहरी लोग भी नकारात्मक सुझाव देते हैं जैसे तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए तुम फेल हो जाओगे तुम बिल्कुल गलत हो और ऐसा ही हजारों और हम इन्हें स्वीकार कर सच बना देते हैं हमें तुरंत उसका विरोध करना चाहिए और इसकी शक्ति आपको आपका सब कॉन्शियस मन देगा पर इसके लिए आपको यह समझना है की आपको उन्हें स्वा करता है देखिए यह बाहरी सुझाव आपको हर जगह मिलेंगे घर ऑफिस दफ्तर क्लब इत्यादि पर आपको यह समझना होगा की उनका उद्देश्य यह होता है की आप वैसा ही सोच जैसा वो चाहते हैं और वैसा ही कम करें भले ही इससे आपको नुकसान और उन्हें फायदा पहुंचे दोस्तों क्योंकि आपको पहले भी बताया गया है की आपका अवचेतन मां बहस नहीं करता तो जब आप कहते हैं की आपको जिम्मेदारी निभाई नहीं आई या आप यह नहीं कर सकते या अब आपकी उम्र बहुत ज्यादा हो गई है या मैं गलत घर में पैदा हो गया हूं तो आपका मां इसके अनुरूप प्रतिक्रिया करता है दोस्तों यही पर दूसरे अध्याय का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की आप अपने चेतन मां के कैप्टन है और अपनी किस्मत के मलिक है इसीलिए याद रखें इस रात के पास चुन्नी की शक्ति है जिंदगी को चुने खुशियों को चुने सेहत को चुने प्यार को चुने आई दोस्तों देखते हैं की पार्टी जिसका नाम है आपके अवचेतन मां की चमत्कारी शक्ति में लेखक हमारे सब कॉन्शियस मन के किन चमत्कारों से पर्दा उठाते हैं दोस्तों अब तक हमने यह तो जान लिया की हमारा अवचेतन मां यादों को समझौता है दिल की धड़कन और रक्त संचार को कंट्रोल करता है हमारी पाचन क्रिया को अंजाम देता है और इसे सभी समस्याओं के जवाब भी पता है यहां लेखक बताते हैं की हमारा अवचेतन मां कभी नहीं सता और कभी आराम भी नहीं करता यहां जो सिर्फ मैराफी इस घटना के मध्य से बताते हैं की किस प्रकार अवचेतन मां द्वारा एक भयंकर बीमारी का इलाज किया गया बल्कि एक सजन से मिले थे जिनका नाम डॉक्टर एक स्कॉटिश सजन थे और अब तक उन्होंने सभी तरह के कल मिलकर 450 से ज्यादा ऑपरेशन किया थे जिम आंख कान और गले के ऑपरेशन के अलावा अंग काटने और ट्यूमर तथा कैंसर की गांठ हटाने जैसे ऑपरेशन भी थे दोस्तों उसे समय आज की तरह बेहोश करने की तकनीक नहीं थी इसीलिए उसे समय केवल मानसिक एनेस्थीसिया दिया जाता था मरीज का कहना था की उन्हें कोई दर्द नहीं हुआ और ऑपरेशन के दौरान भी उनमें से कोई भी नहीं मारा मानसिक एनेस्थीसिया में मैरिज को मानसिक रूप से यह विश्वास दिलाया जाता है की उन्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा और उनका ऑपरेशन सफल रहेगा इसमें हमारे चेतन मनी अपनी प्रतिक्रिया दिखाई और मैरिज में ऑपरेशन के दर्द को सहने की इतनी शक्ति दी की उसे महसूस भी नहीं हुआ की उसका ऑपरेशन किया जा रहा है इस तरह हमारा अवचेतन मां हमें हर दर्द से मुक्त कर सकता है सवाल चाहे जो भी हो हमारा अवचेतन मां सभी सवालों के जवाब जानता है और चमत्कार करता है दोस्तों आगे लेखक हमें बताते हैं की हमारा अवचेतन मां यानी हमारा सब कॉन्शियस मन एक पुस्तक की तरह है इस पुस्तक में आप जो भी विचार विश्वास मत सिद्धांत या राय लिखने हैं या जैसी छाप छोड़ते हैं वैसे ही परिस्थितियों घटनाओं के रूप में व्यक्त होती है तो आप इसके भीतर जो लिखेंगे वही आपको दिखाई देगा आप इसमें जो भी लिखेंगे इस पर आपका अवचेतन मां अमल करेगा किसी प्रकार का बहस नहीं करेगा या सवाल नहीं पूछेगा आगे लेखक हमसे कहते हैं की जब भी हम अपनी नकारात्मक सोच से खुद को नुकसान पहुंचने हैं तो यह हमारे अवचेतन मां में दाखिल हो जाते हैं अब लेखक स्वयं के उदाहरण से बताते हैं की किस प्रकार उन्होंने अपने अवचेतन मां की शक्ति से अपने चरण रोग यानी स्क्रीन डिजीज को ठीक किया इस पुस्तक को लिखने से 40 साल पहले लेखक को एक बार चरण रोग हुआ था चरण रोग अर्थात स्क्रीन डिजीज वह सबसे अच्छे डॉक्टर के पास गए और उन डॉक्टर ने सबसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से उनका इलाज किया लेकिन इससे उन्हें कोई भी फायदा नहीं हुआ और लेखक की स्थिति बिगड़ी चली गई एक दिन वह एक बहुत बड़े साइकोलॉजिस्ट के पास गए साइकोलॉजिस्ट ने उन्हें समझाया की हमारे शरीर का निर्माण हमारा अवचेतन मां करता है इसीलिए वही इसी दोबारा ठीक भी कर सकता है बस इसके लिए आवश्यकता है तो केवल उसे सकारात्मक और आदर्श सोच की जो लेखक को उसके अवचेतन मां तक पहुंचाना है अब लेखक को साइकोलॉजिस्ट की बात पुरी तरह से समझ ए गई थी और उन्होंने अपने अवचेतन मां के लिए एक सीधी प्रार्थना तैयार की उन्होंने स्वयं से कहा की मैं जानता हूं की इस समय मेरे भीतर अद्भुत शक्तियां हैं जो जानती हैं की मेरा इलाज कैसे करना है और इसी शक्ति ने मेरे शरीर के सभी अंग मांसपेशियां और हड्डियां बनाई है और मैं इस व्यक्ति का धन्यवाद देता हूं जो मुझे संपूर्ण बना रही हैं लेखक ने इस प्रार्थना प्रतिदिन 2 से 3 बार जोर-जोर से दोहराया और 3 महीने बाद उनका चरण रोग पुरी तरह से ठीक हो गया डॉक्टर चक्र गए लेकिन लेखक जानते थे की उनके साथ किस शक्ति का चमत्कार हुआ था दोस्तों चिंता डर और तनाव हमारी जीवन में अनेक प्रकार की बढ़ाएं दाल हमारे शरीर को अलग-अलग रोगन से ग्रस्त कर देते हैं इसीलिए डॉक्टर आजकल तनाव संबंधी बीमारियों पर बहुत ध्यान दे रहे हैं इसी प्रकार लेखक यहां एक और रियल लाइफ एग्जांपल से बताते हैं की किस प्रकार एक महिला ने अपने अवचेतन मां की शक्ति से अपनी आंखों की रोशनी वापस पी डॉक्टर ने भी उनकी आंखों को जवाब दे दिया था लेकिन जब वह एक धर्म स्थल पर इस आस्था से गई की वह ठीक हो जाएगी तो उन्होंने वहां का पानी अपनी आंखों पर लगाया और स्वयं पर विश्वास नतीजतन उनके अवचेतन मां ने उनकी आंखों की मेरी हुई कोशिकाओं को फिर से जीवित कर दिया और वो देखने लगी इस चमत्कार ने डॉक्टर को भी हैरान कर दिया और डॉक्टर ने जब उनकी रिपोर्ट को देखा तो उन्होंने पाया की अब उनकी कोशिकाएं ठीक हो रही थी और ऐसा उनके अवचेतन मां की शक्ति के करण हुआ था दोस्तों यही पर तीसरी पाठ का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार हम अपने अवचेतन मां का प्रयोग स्वयं को सेहतमंद बनाने के लिए कर सकते हैं इसके अतिरिक्त भयंकर जानलेवा बीमारियों के इलाज में भी इसकी शक्ति कारगर है बस जरूर है तो केवल अपनी अवचेतन मां को सकारात्मक आदेश देने की जी पर कम कर वह उसे सच्चाई और चमत्कार में बादल देगा आई दोस्तों देखते हैं की पाठ 4 जिसका नाम है प्राचीन कल में मानसिक उपचार में लेखक हमारे अवचेतन मां के किन आयाम के बड़े में बात करते हैं लेखक ने विभिन्न संस्कृतियों और धर्म का गहन अध्ययन किया जिसमें उन्होंने पाया की पुराने समय में लोगों को एक ऐसी शक्ति पर विश्वास हुआ करता था जो यह मानती थी की वह भयंकर से भयंकर बीमारी को ठीक कर शक्ति है और सभी देश का इतिहास इस विश्वास की पुष्टि भी करता है और यह शक्ति पुजारी और धर्म गुरुओं के पास होती थी जींस वह बीमारियों का इलाज करते थे दुनिया भर में अंतर केवल इतना था की इनकी तरीके अलग-अलग थे लेकिन जो एक चीज समाज थी वह यह थी की इनमें ईश्वर की आराधना शामिल होती थी इसके अलावा लोग जंतर तावीजों अंगूठियां और तस्वीरें तथा मेट्रो का भी प्रयोग करते थे लेखक अब हमसे एक सवाल पूछते हैं की दुनिया के सभी हसन में बिना किसी तकनीक के वो इलाज सफल कैसे हुए और इसका जवाब आसन है जी हां इलाज इसीलिए संभव हो पाया क्योंकि रोगी के उन धर्मगुरुओं और पुजारी पर अंधे विश्वास ने उनके अवचेतन मां की उपचारक शक्ति को आजाद कर दिया इसके बाद लेखक दुनिया भर के ऐसे निकॉन धर्म और स्थलों का जिक्र करते हैं जहां रोगियों का उपचार किया जाता है और ये उपचार अवचेतन मां की शक्तियों से ही होता है लेखक बताते हैं की जब एक रोगी आस्था से जुड़कर स्वयं की अवचेतन मां को सकारात्मक संदेश देता है तो चमत्कार होता है अब लेखक अपने एक रिश्तेदार का उदाहरण देते हैं जो पार्थ ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं उन्हें एक बार टीवी हो गया है उनके बेटे ने उनकी मदद करने का फैसला किया उसने अपने पिता को बताया की वह हाल ही में एक शक्तिशाली सन्यासी से मिला था यह सन्यासी यूरोप के प्रसिद्ध धर्म स्थल का उपचार था उसे सन्यासी के पास एक अंगूठी थी जिसे चुने भर से सदियों से अनगिनत रोगी ठीक हो रहे थे जब उसने उसे सन्यासी को अपने पिता की बीमारी के बड़े में बताया और उनसे अंगूठी उधर मांगी तो सन्यासी तैयार हो गया जब बेटे ने अपने पिता को वह चमत्कारी अंगूठी दिखाई तो उन्होंने झट से वो अंगूठी उनके हाथ से ले ली और उसे अपनी साइन से लगाया और मां ही मां प्रार्थना कर सो गए सुबह तक वह पुरी तरह से ठीक हो चुके थे और रिपोर्ट्स बता रही थी की अब उन्हें टीवी नहीं है लेखक कहते हैं की इस तरह के चमत्कार होते रहते हैं और यह हमारे अवचेतन मां के लिए कोई बड़ी बात नहीं है है लेकिन इस चमत्कार के बड़े में सबसे आश्चर्य की बात यह थी की बेटे ने अपने पिता को जी अंगूठी के बड़े में बताया था और वह पुरी कहानी सुने थी वो सब कुछ पुरी तरह से मनगढ़ंत थी और उसने वो अंगूठी फुटपाथ से एक सामान्य टुकड़ा समझकर उठा लिया था फिर उसने वो अंगूठी अपने पिता को दे दी थी दोस्तों अब तो आप ही समझ गए होगी की उनके पिता का उपचार किस शक्ति ने किया था वह कोई चमत्कारी अंगूठी नहीं थी बल्कि चमत्कार तो उनके विश्वास का था जी पर उनके अवचेतन मां ने कम कर दिया था दोस्तों अब लेखक हमारे अवचेतन मां की शाश्वत औपचारिक सिद्धांत के बड़े में बात करते हैं इसका मतलब क्या है मतलब यह की वह सिद्धांत जो पुरी दुनिया में समाज रूप से लागू होते हैं और हर स्थिति में सच होते हैं इस बड़े में हमने थोड़ा सा पहले भी जाना की किस प्रकार एक व्यक्ति को हिप्नोटाइज करके हम उसमें किसी भी बीमारी के लक्षण पैदा कर सकते हैं यदि उसे कहा जाए की उसे लकवा मार गया है और वो चल नहीं सकता तो वो वैसा ही व्यवहार करने लगेगा इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को घास से एलर्जी है और जब हम उसे हिप्नोटाइज करके किसी कागज के फूल को घास समझना को कहानी तो उसमें तुरंत एलर्जी के सभी लक्षण प्रकट हो जाएंगे आपको क्या लगता है ऐसा उसे कागज के करण हुआ या उसे सुझाव के करण जो उसे हिप्नोटिस्ट ने दिया दोस्तों इन उदाहरणों से हमें पता चला है की लक्षण हमारे अवचेतन मां के करण पैदा हुए थे और इनका इलाज भी अवचेतन मां में ही होता है अवचेतन मां पर दुनिया भर के विभिन्न लोगों ने अपने विचार प्रकट किया हैं जिम एक विचार यह भी है है की यह आस्था से जुड़ी होती है और आस्था चमत्कार करती है यह सच्ची हो या झूठी हमेशा चमत्कार करेगी ऐसे ही आस्था के दो और उदाहरण लेखक हमारे सामने पेस करते हैं वह बताते हैं की बार नहीं नाम की एक व्यक्ति ने उन्हें एक आदमी की कहानी सुने जिसकी जब में लकवा मार गया था बार नहीं एक डॉक्टर था हर तरह के इलाज का उसे व्यक्ति पर कोई फायदा नहीं हो रहा था इसीलिए बार नहीं नाम के उसे डॉक्टर ने उसे व्यक्ति को बताया की उसे एक नई तकनीक मिली है जिससे उसकी जीव पुरी तरह से ठीक हो जाएगी उन्होंने केवल एक साधारण थर्मोमीटर उनके जब पर लगा दिया और मैरिज को लगा की शायद यही वह तकनीक है जो उसे बिल्कुल ठीक कर देगी कुछ ही पल्लू में वह खुशी से चिल्लाने लगा क्योंकि अब वह सफलतापूर्वक अपनी जीव को घुमा सकता था दोस्तों आप ही समझ जाइए की यह चमत्कार उसे साधारण से थर्मोमीटर का था या उसे व्यक्ति के विश्वास का जिसका प्रभाव उसके अवचेतन मां के चमत्कार के रूप में व्यक्त हुआ इसी तरह डॉक्टर बने एक और उदाहरण लेखक को बताते हैं वह बताते हैं की एक बार उनके ऑफिस में एक युवती आई उसकी आवाज पुरी तरह से चली गई थी जब उन्होंने जांच किया और उसे विश्वास दिलाया की बिजली के प्रयोग से उनकी आवाज वापस ए शक्ति है और ऐसा का उन्होंने अपने इंडक्शन अपेरटस से उसके गले को थोड़ा सा हिलाया और कहा की अब तुम बोल शक्ति हो इसके बाद उन्होंने ए बी सी और फिर अपना नाम बोलने को कहा और उसे युवती ने साफ-साफ बोला उसकी आवाज वापस लोट आई थी यहां भी हम समझ सकते हैं की चमत्कार किसका था उसे साधारण से बिजली के यंत्र का या फिर अपने विश्वास का की वो ठीक हो जाएगी दोस्तों यह आप पर छोड़ दी हूं दोस्तों यही पर चौथ पाठ का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की इलाज की केवल एक भीम है और वो है आस्था और इलाज की केवल एक ही शक्ति है जिसका नाम है आपका अवचेतन मां चाहे आपकी आस्था सच्ची हो या झूठी आपको इसके परिणाम मिलेंगे आपका अवचेतन मां उसे आस्था पर कम करेगा और अगर वह सकारात्मक है तो चमत्कार जरूर होगा आई दोस्तों अब हम चलते हैं अगले पाठ की तरफ जो है पाठ 5 आधुनिक युग में मानसिक उपचार दोस्तों पिछले पाठ में आपने जाना की प्राचीन समय में किस प्रकार मानसिक उपचार द्वारा चमत्कार किया जाता था लेकिन अब हम जानेंगे की आज के समय में वह कौन सी चीज हैं जींस मानसिक उपचार किया जाता है मानसिक उपचार यानी आपको ठीक करने के लिए आपके मां का इस्तेमाल किया जाता है दोस्तों लेखक कहते हैं की उपचार की यह शक्ति आखिर कहां है तो इसका जवाब है ये शक्ति आपके सब कॉन्शियस मन यानी अवचेतन मां में रहती है लेखक कहते हैं की एक पुरानी कहावत है की डॉक्टर गाव पर पट्टी बंद देता है लेकिन ईश्वर उसे ठीक करता है दोस्तों लेखक का मानना है की जब तक रोगी के मां में जीने की आशा ना हो तब तक दुनिया का बड़े से बड़ा डॉक्टर उसका इलाज करके उसे ठीक नहीं कर सकता इसीलिए डॉक्टर कभी किसी मैरिज को ठीक नहीं करता बल्कि वह स्वयं रोगी है जो खुद को ठीक करता है यहां डॉक्टर केवल उसे अवरुद्ध को हटाने की भूमिका निभाते हैं जो उसे ठीक होने से रॉक रही है जैसे एक मनोवैज्ञानिक उसके मानसिक अवरोध को हट्टा है ताकि उसकी अभिजीत और मां में ठीक होने की शक्ति एक्टिव हो सके और इसी तरह एक सजन उसकी शारीरिक अवरोध को हट्टा है ताकि उसके ठीक होने की शक्ति सामान्य ढंग से कम करने लगे दोस्तों यहां लेखक कहते हैं की उपचार की शक्ति केवल एक ही होती है हालांकि इसे अलग-अलग नाम से पुकार जाता है हम इसे प्रकृति जीवन ईश्वर आदि कहते हैं लेकिन इन सब का इशारा एक ही और होता है और वो है हमारा अवचेतन मां दोस्तों आज के समय में मानसिक इलाज इस सच्चाई पर निर्भर करता है की जैसी आपकी आस्था होगी और आपको शक्ति देगा विश्वास के नियम की बात की गई है जिसमें लेखक कहते हैं की जैसा आप विश्वास करेंगे वैसा ही आपको मिलेगा लेकिन ऐसी चीज में विश्वास करना पागलपन है जो आपको चोट या नुकसान पहुंच क्योंकि आपका अवचेतन मां उसे सच में बादल देगा आज के समय में प्रार्थना चिकित्सा यानी प्रेयर थेरेपी से भी मानसिक उपचार किया जाता है इसीलिए लेखक अब हमें इसके पीछे का विज्ञान समझते हैं इसके अंतर्गत आपको अपने मां में एक ऐसी तस्वीर या विचार या योजना की कल्पना करनी होती है जिसे आप अनुभव करना चाहते हैं और जब पुरी आस्था से आप इस पर विश्वास रखते हैं तो आपको अपनी प्रार्थना का जवाब मिल जाता है इसे ही प्रार्थना चिकित्सा अर्थात प्रेयर थेरेपी कहा जाता है अब मां लीजिए आप प्रेयर थेरेपी से किसी बीमारी का इलाज करना चाहते हैं अगर आप जानते हैं की आपकी बीमारी जो भी हो वह केवल आपके भयानक नेगेटिव थॉट्स यानी नकारात्मक विचारों के करण हुई है और आपको विश्वास है की यदि आप अपनी नेगेटिव थॉट्स को बाहर निकाल देंगे तो यकीन मानिए आप ठीक हो जाएंगे और यह चमत्कार आपके साथ भी होगा इस थेरेपी में आप खुद को याद दिलाते हैं की आपके पास हर बीमारी के इलाज की शक्ति है और आप इस सच्चाई पर विश्वास करते हैं और आपका डर धीरे-धीरे कम होने लगता है और अंततः आप पुरी तरह से ठीक होकर अपने भीतर के नकारात्मक विश्वासो को हर देते हैं दोस्तों यहां लेखक हमें आस्था उपचार यानी फेथ हीलिंग के बड़े में भी बताते हैं और समझते हैं की हमारा अवचेतन मां किस प्रकार आंधी आस्था से शक्ति प्राप्त करता है आस्था उपचार का मतलब इलाज करने का ऐसा तरीका है जिसमें आपकी आस्था का इस्तेमाल किया जाता है और यह इलाज वह व्यक्ति करता है जिसे लोग समझते हैं की उसके पास ऐसी शक्ति है जिससे वो उन्हें ठीक कर देगा इस तरह उनकी आंधी आस्था यानी उनका ब्लाइंड फिट उन्हें ठीक कर देता है ऐसे व्यक्ति जो इस प्रकार की आस्था का प्रयोग इलाज के लिए करते हैं उन्हें आस्था उपचार कहते हैं दुनिया के अलग-अलग हसन में यह अपने रोगियों का इलाज नृत्य मंत्र और आत्माओं को बुलाकर ऐसे निकॉन त्रिकोण से करते हैं इसके अलावा रोगी व्यक्ति को किसी खास चिन्ह को छूकर अगरबत्ती या धूप दीप जलाकर या फिर बटिया के कार्य को पिलाकर ठीक करने का प्रोसेस किया जाता है मतलब जो भी चीज रोगी को उसे तरीके में सच्चा विश्वास दिलाने में कामयाब हो जाति है वही विश्वास उसके इलाज को संभव बनती है लेखक कहते की जो भी चीज आपको डर और चिंता से दूर हटाकर आस्था और विश्वास की और ले जाएगी वहीं आपका इलाज करेगी दोस्तों लेखक कहते हैं की यह तो हमने जान लिया की प्रार्थना जब हम स्वयं के लिए करते हैं तो यह 100% कम करती है बशती की वह प्रार्थना वैज्ञानिक हो लेकिन क्या यह प्रार्थना दूसरों के लिए कम करती है आई एक उदाहरण के मध्य से लेखक हमें क्या समझने का प्रयास करते हैं जानते हैं वह कहते हैं की मां लीजिए आप लॉस एंजेल्स में रहते हैं और आपको यह सूचना मिलती है की आपकी मां न्यू यॉर्क में रहती है जो बहुत बीमा है तो सबसे पहले तो आप यही सोचेंगे की आपको तुरंत अपनी मां के पास जाना होगा लेकिन अगर यह संभव नहीं हुआ तो यानी आप अपने घर परिवार और नौकरी छोड़कर जान में सक्षम ना हो पे तो तो क्या आपकी आस्था की शक्ति आप अपनी मां के लिए प्रयोग कर सकते हैं लेखक कहते हैं की हां अब बिल्कुल ऐसा कर सकते हैं वो बताते हैं की भले ही आप उनके पास शारीरिक रूप से मौजूद ना हो लेकिन आपकी प्रार्थनाएं उन तक जरूर पहुंचेंगे क्योंकि परमपिता हम सबके अंदर रहते हैं रचनात्मक मस्तिष्क एक है हमें तो बस अपने मां में स्वास्थ्य और सामंजस्य की आस्था भरनी है और इसकी प्रतिक्रिया अपने आप होती है मस्तिष्क के इस सिद्धांत में समय यह स्थान से कोई फर्क नहीं पड़ता वही मस्तिष्क आपकी मां में और आप में समाज रूप से कम करता है चाहे आप कहानी भी रहे अब लेखक हमें अनुपस्थित उपचार यानी अब्सेंट ट्रीटमेंट का एक उदाहरण देते हैं जो लॉस एंजेल्स में घटित हुआ था एक महिला को जब यह पता चला की न्यूयॉर्क में रहने वाले उनकी मां एक भयंकर हृदय रोग से पीड़ित हो गई है और वो अपनी मां के पास नहीं जा शक्ति तो उन्होंने उनके लिए प्रार्थना की आई बताते हैं की उन्होंने अपनी मां के लिए क्या प्रार्थना की जो सफल हुई उन्होंने प्रार्थना की की उपचार करने की शक्ति मेरी मां के पास है मैं अपने मस्तिष्क में अपनी मां के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य की कामना करती हूं और जी शक्ति ने मेरी मां के शरीर और उनके सभी अंग बनाए हैं मैं उसे शक्ति को उनके अस्तित्व के हर परमाणु में भर रही हूं और उनकी कोशिका की शांति की कामना करती हूं जो डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं उनका मार्गदर्शन ईश्वर कर रहे हैं और जो भी मेरी मां को ऊ रहे हैं उन्हें सही कम करने का आदेश मिल रहा है मैं जानती हूं की रोग सच नहीं है क्योंकि अगर ऐसा होता तो किसी का इलाज नहीं हो पता मैं प्यार और जीवन की समर्थक हूं मैं यह आदेश देती हूं की मेरी मां के शरीर में सेहत और शांति व्यक्त हो उसे महिला ने इस प्रार्थना को कई बार दोहराया और कुछ दिन बाद उसकी मां की हालात में सुधार हुआ डॉक्टर से हैरान थे और उन्होंने महिला को उसकी आस्था के लिए बधाई दी दोस्तों इसके बाद लेखक एक और उदाहरण देते हैं जिसमें एक रोगी ने आस्था की शक्ति से स्वयं के कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का इलाज किया और जब रिपोर्ट अच्छी गई तो पता चला की सचमुच अब उसके शरीर में कैंसर की एक भी कोशिकाएं नहीं थी लेखक कहते हैं की जी प्रकार यह शक्ति प्रार्थना के लिए कम करती है ठीक इस प्रकार यह उन नकारात्मक बटन पर भी कम करती है जिसकी रात जब आप बीमा होते हैं या दर्द में होते हैं तो लगाते रहते हैं अपने दर्द और लक्षणों की रात लगाने से अवचेतन मां इनकी शक्तियों को बड़ा देता है और आपको अपने दैनिक जीवन में कम करने से रोकना है इसीलिए लेखक एक बार फिर से हमें कुछ भी नकारात्मक सोने से सावधान करते हैं और यही पर उनके पांचवें पाठ का अंत होता है इसमें हमें लेखक उन चीजों का पता लगाने के लिए कहते हैं जो हमारा इलाज करती हैं और उन पर विश्वास करने का आग्रह करते हैं जो हमारे अवचेतन मां को हमारा इलाज करने की शक्ति देती है आई दोस्तों अब हम चलते हैं पाठ 6 की तरफ जिसका नाम है मानसिक उपचार की व्यवहारिक तकनीकी इस पाठ में लेखक उन तकनीक और सही वीडियो के बड़े में बताएंगे जिनका इस्तेमाल आप ऐसी प्रार्थना करने में लगा सकते हैं जींस चमत्कार होता है लेखक कहते हैं की इस दुनिया में कुछ भी संयुक्त से नहीं होता यह दुनिया नियम कायदे की है अगर आप गलत तकनीक से प्रार्थना करते हैं तो आपकी प्रार्थना हवा में गुब्बारे की तरह लटकती रहेगी इसीलिए लेखक चाहते हैं की हम वैज्ञानिक प्रार्थना करें जो सही जगह पर पहुंचे और उनका चमत्कार हमें हमारी जीवन में दिखाई दे प्रार्थना अलग-अलग त्रिकोण से की जाति है लेकिन लेखक ने पुस्तक में अलग-अलग धर्म की वीडियो पर प्रकाश डालने की बजाएं उनके प्रभावित त्रिकोण और उन्हें अपनी रोज की जिंदगी में शामिल करने की आदत पर ध्यान केंद्रित किया है वो कहते हैं की प्रार्थना हमारी आत्मा की सच्ची मनोकामना होती है और यह सबसे गहरी जरूर से निकलते है और जीवन में आप जो पन चाहते हैं उन चीजों को सरकार करती है दोस्तों एक वैज्ञानिक प्रार्थना हमारे सकारात्मक विचार को हमारी अवचेतन मां तक पहचाने की तकनीक है जिसमें हम अपने अवचेतन मां को प्रेरित करते हैं पुस्तक में आगे लेखक हमारे अवचेतन मां के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार करने को कहते समय उसके ब्लूप्रिंट में हम रुचि लेते महान चिंता और नकारात्मकता ही प्रकट होगी इसीलिए हमें अपने अवचेतन मां के लिए एक ऐसा ब्लूप्रिंट बनाना चाहिए जो शांति खुशी और सद्भाव का एहसास कारण और फिर हमारा अवचेतन मां उसे स्वीकार कर लगा और उन चीजों को संभव बनाएगी जो भी आपने उसे ब्लूप्रिंट में लिए हैं दोस्तों अब लेखक हम इस सच्ची प्रार्थना और इसी करने की वैज्ञानिक कल के बड़े में बताते हैं वह एक पंक्ति कहते हैं की मैंगो और वो तुम्हें मिल जाएगा खोजो और तुम का लोग खटखटाओ और दरवाजा खुला जाएगा इसका अर्थ है की हम जो भी चीज मांगेंगे वह हमें मिल जाएगी जब खटखटाएंगे तो हमारे लिए दरवाजे खुला जाएंगे और जिसे हम खोज रहे हैं उसे का लेंगे लेकिन आपको उन्हें पूरे विश्वास से मांगना होगा तभी आपको मिलेगा हमें मां में उसकी तस्वीर बनानी होगी तभी हमारे अवचेतन मां की शक्ति इस पर कम कर शक्ति है और इसे सच कर शक्ति है इस तस्वीर को हमें पुरी निष्ठा से बनाना होगा हमें इसे अपनी कल्पना में गणना होगा ठीक वैसे ही जैसे आर्किटेक्ट इमारत बनाने से पहले उसकी एक तस्वीर बनती है फिर वो उसे उसे भाव से देखते हैं जैसे वे उसे बांदा देखना चाहते हैं और कुछ दोनों बाद इमारत बनकर तैयार हो जाति है लेखक कहते हैं की वह भी इस तकनीक का प्रयोग करते हैं जब कभी उन्हें मंच पर जाना होता है भाषण देने से पहले वह पूरे सभागार की एक काल्पनिक तस्वीर अपने अवचेतन मां तक पहुंच देते हैं और ऐसी कामना करते हैं की जितने भी लोग उन्हें सुनने आए हैं उन्हें लेखक को सुनकर बहुत अच्छा ग रहा है और वह ठीक और सुंदरता से भारत है और इसके बाद वह पुरी तस्वीर को मुक्त कर देते हैं और मंच पर पहुंच जाते हैं दोस्तों अब लेखक प्रार्थना की एक और विधि का जिक्र करते हैं जिसका नाम है मानसिक फिल्म विधि दोस्तों आपने भी यह कहावत सनी होगी की एक तस्वीर 1000 शब्दों के बराबर होती है इस विधि में हम अपनी दुनिया में अपने लिए जैसी स्थिति चाहते हैं उसे एक फिल्म की तरह बना कर अपने अवचेतन मां तक पहुंचने हैं अब लेखक इस विधि का एक चमत्कारी उदाहरण देते हैं जो स्वयं उन्हें के साथ घटित हुआ वह बताते हैं की कुछ साल पहले उन्हें एक लेक्चर टूर पर जाना था और इस सिलसिले में उन्हें बहुत सारे राज्यों में जाना पड़ा वो किसी इलाके में एक परमानेंट जगह चाहते थे ताकि वहां से वह आसानी से जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें उन्होंने दूर-दूर तक सफर किया लेकिन उन्हें परमानेंट जगह नहीं मिली एक रात जब वो तक गए तो उन्होंने अपने होटल के कमरे में पलंग पर सोते समय यह कल्पना की की वो बहुत सारे लोगों के सामने भाषण दे रहे हैं और वो लोगों से का रहे हैं की मुझे यहां आकर बहुत खुशी हुई और मैंने इतने अच्छे अवसर के लिए प्रार्थना की थी लेखक कहते हैं की जब उनकी आंख खली तो उन्होंने देखा की उनके सामने कोई भीड़ नहीं थी पर वो इस बात से संतुष्ट थे की उनकी यह फिल्म उनके अवचेतन मां तक पहुंच चुकी थी और अब वह अपने तरीके से इसे सच में बादल देगा अगली सुबह जब वह जागे तो उन्हें एक संस्थान से फोन आया जो का रहे थे की वह लेखक को अपना डायरेक्टर बनाना चाहते हैं लेखक ने उनका प्रपोज एक्सेप्ट किया और कई साल तक वहां बहुत ही आरामदा कम किया वो कहते हैं की अगर आपकी मानसिक तस्वीर और फिल्म में आपकी आस्था है तो वो 100% हकीकत बन जाएगा दोस्तों अब लेखक प्रार्थना की एक और विधि का जिक्र करते हैं जिसका नाम है बोडोएं तकनीक इस तकनीक इसीलिए है क्योंकि नैंसी स्कूल ऑफ हीलिंग के एक साइको थैरेपिस्ट जिनका नाम था ने यह पाया की अब चेतन मां तक अपनी बात पहचाने का सबसे अच्छा तरीका नींद की अवस्था में पहुंचने पर अपनी बात पहुंचाना है क्योंकि इस समय हमारे शरीर के बहुत सारे प्रयास कम हो जाते हैं और चिंतन द्वारा हम शांति से अपनी बात अपने अवचेतन मां तक पहुंच सकते [संगीत] घर में रहने वाली इस युवा विधवा के अपने परिवार के साथ संबंध बिगड़ गए थे और उनके स्वर्गीय पति ने पुरी जायदाद उनके नाम कर दी थी उनके बच्चों ने वसीयत को गैरकानूनी ठहरने के लिए कोर्ट में मुकदमा डायर किया जब इस विधवा ने लेखक से मदद मांगी तो उन्होंने उन्हें बॉडॉइन तकनीक बताई विधवा ने ऐसा ही किया उन्हें दी अवस्था में अपने अवचेतन मां तक यह बात पहुंचाई की जो हुआ ईश्वर की इच्छा के अनुरूप हुआ और लगातार 10 दोनों तक उन्होंने पूरे विश्वास से इसे दोहराया 11वीं दिन उन्हें अपने वकील का फोन आया जिन्होंने कहा की उनके बच्चों ने मुकदमा वापस ले लिया है और समझौता करने के लिए तैयार हो गए हैं यह सचमुच चमत्कार था क्योंकि उन्हें अवस्था में हमारा चेतन मां निष्क्रिय हो जाता है इसीलिए सोनी से ठीक पहले और जैन की तुरंत बाद हमें अवचेतन मां तक हर वह बात पहुंच देनी चाहिए जींस हमें लाभ हो क्योंकि ये बिल्कुल सही समय है दोस्तों इसके बाद लेखक हमें प्रार्थना के लिए सकारात्मक घोषणा यानी पॉजिटिव अनाउंसमेंट के तरीके बताते हैं जिसमें वो कहते हैं की हमें प्रार्थना में निरर्थक दोहराव नहीं करना चाहिए सकारात्मक घोषणा इतनी शक्तिशाली है की यह आपके अवचेतन मां पर बिल्कुल स्पष्ट छाप छोड़ती है लेखक ने यह सकारात्मक घोषणा तब की थी जब उनकी बहन का ऑपरेशन होने वाला था उन्होंने पुरी शांति और सद्भाव से अपनी बहन के लिए प्रार्थना की उन्होंने कहा की यह प्रार्थना मैं अपनी बहन के लिए कर रहा हूं वो बिल्कुल ठीक [संगीत] और मांसपेशियां बादल रही हैं और यह बदलाव उसके अवचेतन मां के ब्लूप्रिंट के अनुसार हो रहा है उसके अंदर नदी की तरह जीवन बा रहा है वह पुरी तरह से स्वस्थ हो रही है और शांति तथा प्रेम का समुद्र उसके भीतर की बीमारियों को दो रहा है दो सप्ताह के भीतर उनकी बहन पुरी तरह से ठीक हो गई और आश्चर्यजनक बात यह थी की अब उसकी रिपोर्ट्स में कोई गड़बड़ नहीं थी डॉक्टर ने उसे कहा की उसकी हालात में आश्चर्य जनक सुधार हुआ है और अब उन्हें ऑपरेशन की कोई जरूर नहीं है यह चमत्कार लेखक की प्रार्थना का था जिन्होंने इस सकारात्मक प्रार्थना को उनके अवचेतन मां तक पहुंचा था लेखक कहते हैं की हमें तब तक सकारात्मक घोषणा करते रहना चाहिए जब तक की हमें संतुष्टि ना मिल जाए इसके बाद लेखक प्रार्थना की एक और विधि बताते हैं जिसका नाम है तर्कपूर्ण विधि वह बताते हैं की इसमें हम मैरिज और खुद को ये विश्वास दिलाते हैं की उनकी बीमारी उनके अवचेतन मां की झूठ विश्वास और डर के करण है इसमें हम अपनी मस्तिष्क से तारक करते हैं और रोगी को यह विश्वास दिलाते हैं की उसकी बीमारी उसके नकारात्मक विचारों के करण है और यदि वह इन विचारों को बादल दे तो उसका इलाज किया जा सकता है इसमें हम रोगी को यह विश्वास दिलाते है की उसके विचारों का बदलाव ही उसके उपचार का आधार है आगे लेखक हमें बताते हैं की जब हम इस प्रार्थना को ईश्वर से जोड़ने हैं तो यह और भी शक्तिशाली हो जाति है और हमारे अवचेतन मां पर एक गहरी छाप छोड़ दी है प्रार्थना करते समय जब हम ईश्वर का स्मरण करते हैं तो उसमें सद्भाव शांति और सेहत की भावना आई है दोस्तों छठी पाठ का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की प्राचीन समय से लेकर आधुनिक समय तक किस प्रकार अलग-अलग त्रिकोण से प्रार्थना करके हम अपनी भावनाओं को अवचेतन मां तक पहुंचने हैं और जीवन में चमत्कार पाते हैं दोस्तों अब हम शुरू करते हैं पाठ 7 जिसका नाम है अवचेतन मां का झुकाव जीवन की तरफ होता है हमारे जीवन घर में 90% से भी ज्यादा भूमिका हमारी अवचेतन मां की होती है अगर हम इसकी अद्भुत शक्तियों का प्रयोग नहीं करते हैं तो हमारा जीवन सीमाओं में बांध राहत है हमारा अवचेतन मां हमारे शरीर का निर्माता है और इसके लिए सबसे जरूरी केमोन को अंजाम देता है यह हमारी मदद करता है और हमें नुकसान से बचाने की कोशिश करता है हमारा अवचेतन मां हमसे अनुभूतियां प्रार्थना और मनोकामनाओं के जारी बात करता है यह हमेशा हमें प्रेरित करता है यदि एक बार हमने अपने अवचेतन मां की शक्तियों को जान लिया और उसके साथ सामंजस्य बना लिया तो हमारे जीवन में चमत्कार होना निश्चित है इसके बाद लेखक हमें बताते हैं की किस प्रकार हमारा अवचेतन मां वैज्ञानिक त्रिकोण से अपनी कार्य विधि को अंजाम देता है यानी कम करता है हमारा चेतन मां यानी कॉन्शियस मन सोचा गया और सच माना गया हर विचार हमारी कोरटेक्स द्वारा दिमाग की हर भाग तक भेजता है यह हमारी अवचेतन मां का साथ देते हैं और अब चेतन मां इस पर कम करने लगता है और हमारे संसार में इन चीजों को वास्तविकता में बादल देता है हमारी बुद्धि हमारी शरीर की देखभाल करती है लेखक कहते हैं की जब हम कोशिकाओं के बड़े में अध्ययन करते हैं तो हमें पता चला है की हमारी कोशिकाओं का समूह एक सामूहिक बुद्धि का निर्माण करती है ताकि हमारी कॉन्शियस मन द्वारा भेजो गया हर आदेश सामंजस्य के साथ पूरा हो कई लोग कहते हैं की बुद्धि हमारे शरीर की रक्षा करती है बशर्ते की हम इसे अपना कम करने दे लेकिन हमारा चेतन मां यानी कॉन्शियस मन इसमें हस्तक्षेप करता है क्योंकि हमारा कॉन्शियस मन बाहर की दुनिया से संपर्क रखना है और डर झूठ विश्वास इत्यादि द्वारा नकारात्मक विचार उत्पन्न करने लगता है इस वजह से हमारे अवचेतन मां के पास इस पर कम करने के अलावा और कोई चार नहीं बचत हम चाहे या ना चाहे हमारा अवचेतन मां दिन रात कम करता है इसका झुकाव हमेशा जीवन की दिशा में होता है वैज्ञानिकों का कहना है की 11 मीना में हमारा शरीर नया बन जाता है इसका अर्थ है की आप शारीरिक रूप से केवल 11 महीने बूढ़े हैं अगर आप डर गुस्सा जलन और दुर्भावना के विचारों से अपने शरीर में दोष और रोग लेट हैं तो इसके लिए केवल आप ही दोषी और जिम्मेदार है की जी प्रकार अंधेरे से छुटकारा अपने का तरीका रोशनी करना है ठंड से बचाने का तरीका गर्मी है इसी प्रकार नेगेटिव सोच से बचाने का तरीका पॉजिटिव सोचना है अपनी अवचेतन मां में अच्छाई की घोषणा करें बुराई अपने आप खत्म हो जाएगी हमारी जीवन में सेहतमंद और स्वस्थ होना तो स्वाभाविक है और यह हमारे शरीर की सामान्य भीम का सूचक है लेकिन हमारा बीमा होना असामान्य है और इसका यह भी मतलब है की आप जीवन की दिशा में उल्टी तरफ जा रहे हैं और नेगेटिव सोच रहे हैं हमारे जीवन का नियम विकास का नियम है यदि आपकी सोच और आपके विचार आपके अवचेतन मां में सामंजस्य नहीं बना का रहे तो यह विचार आपसे चिपक जाएंगे और आपको सताने लगेंगे इससे आपको परेशानी होगी और अंत में यह बीमारी पैदा करेंगे इसलिए जल्द से वर्ल्ड अगर इन विचारों को नहीं छोड़ गया तो शायद यह मृत्यु का करण भी बन सकते हैं अब पुस्तक में एक उदाहरण दिया गया है जिसमें बताया गया है की किस प्रकार एक व्यक्ति ने अपनी रीड की टीवी को अपनी अवचेतन मां की शक्ति से ठीक किया इंडियाना में रहने वाले एंड्रयूज को यह बीमारी हो गई थी वो अपाहिज हो गया था और अपने हाथों और घुटनों के बाल चला था डॉक्टर ने भी उसकी बीमारी को जवाब दे दिया था लेकिन एंड्रयूज ने हिम्मत नहीं हरि वह प्रार्थना करने लगा और उसने अपने अवचेतन मां में सकारात्मक घोषणा की और इसे दिन में कई बार दोहराया और दूसरों के लिए भी प्रार्थना की वह कहता था की मैं पूर्ण शक्तिशाली और सशक्त हूं स्वयं के लिए और दूसरों के लिए नई प्रार्थना का फल कई गुना होकर उसके पास लोटा जब भी उसके मां में नकारात्मक भावनाएं आई वह तुरंत सकारात्मक सोने लगता और इसी का परिणाम यह हुआ की उसकी अवचेतन मां ने चमत्कार कर दिया और वह पुरी तरह से स्वस्थ और सशक्त बन गया दोस्तों यही पर सातवें पाठ का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की हमारा अवचेतन मां जीवन की और झुका हुआ होता है और प्रतिदिन 24 घंटे कम करता है इसीलिए अपनी नकारात्मक सोच से हमें इसके कार्य में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए आई दोस्तों अब हम चलते हैं अगले अध्याय की तरफ यानी अध्याय आठ जिसका नाम है मनचाही परिणाम कैसे पाएं पाठ की शुरुआत में लेखक कहते हैं की हर व्यक्ति यह बात जानता है की सभी प्रार्थनाएं सफल नहीं होती और जिन लोगों की प्रार्थनाएं सफल नहीं प्रार्थनाएं कामिनी नहीं करती लेखक कहते हैं की एक सफल प्रार्थना करने के लिए हमें उसके वैज्ञानिक आधार की स्पष्ट समझ हनी चाहिए यदि हमें अपनी प्रार्थनाओं के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं तो हमें क्या करना चाहिए लेखक बताते हैं की ऐसे में हमें उन कर्म का पता लगाना चाहिए जिससे हमारी प्रार्थना असफल हुई यह करण या तो विश्वास की कमी हो सकते हैं या फिर बहुत ज्यादा कोशिश कई लोग अवचेतन मां के कम करने के तरीके को पुरी तरह से नहीं समझ पाते और अपनी प्रार्थना को खुद असफल कर देते हैं आपको यह याद रखना चाहिए की आपका अवचेतन मां किसी भी बात को स्वीकार करता है और उसे पर तुरंत कम करने लगता है और उसके लक्ष्य को पानी में एडी छोटी का जोर लगा देता है अगर आप नकारात्मक बातें ही सोचते हैं तो आपका अवचेतन मां आपके लिए मुश्किल असफलता और दुविधा पैदा करता है अगर आपके विचार सकारात्मक और सद्भावपूर्ण है तो आपको सही जवाब जरूर मिलेगा याद रखें अपने अवचेतन मां पर किसी भी कम को करने का जबरदस्ती दबाव ना डालें ऐसे में आप असफल हो जाएंगे और जो परिणाम आप चाहते हैं वह आपसे दूर हो जाएंगे अब चेतन मां आस्था पर कम करता है आपके दबाव डालने पर नहीं यदि आप प्रार्थना कर रहे हैं साथ ही मां में यह भी का रहे हैं की मुझे उम्मीद नहीं है की यह कम करेगा या नहीं या मैं उलझन में हूं और मुझे नहीं लगता की मेरी इच्छा कभी पुरी होगी तो आपके अवचेतन मां की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी ऐसे में आप कहानी नहीं पहुंच पाएंगे ऐसे में आपका अवचेतन मां ठीक इस तरह बौखला जाएगा जी तरह आप टैक्सी में बैठे किसी ड्राइवर को एक दर्जन अलग-अलग जगह बता दें और कहानी की भी आपको सभी जगह पर एक साथ ले जाए तो वो दुविधा में पद जाएगा अवचेतन मां की असीमित शक्तियों के साथ कम करते समय आपके मां में केवल एक स्पष्ट विचार और उसे पर आपका विश्वास होना चाहिए लेखक कहते हैं की अपने अवचेतन मां को कम करने का भरपूर समय दें ये आराम से कम करता है अवचेतन मां सबसे समझदार है और हमारे शरीर का मास्टर यह किसी भी अंग को ठीक करने के लिए बहुत सारे तरीके जानता है इसीलिए आप केवल आदेश दें जो सकारात्मक हो और वह अपना कम अच्छी तरह से करेगा है और स्वतंत्र है नकारात्मक विचारों के आने पर इनका प्रतिरोध करें एक छोटे बच्चे की तरह सरल आस्था रखें और आप पाएंगे की आपके अवचेतन मां ने इस पर कम करना शुरू कर दिया है लेकिन यह कल्पना अनुशासित हनी चाहिए यहां लेखक बाइबल ग्रंथ का उदाहरण देते हुए कहते हैं की उसमें भी साक्षात लिखा है की आप प्रार्थना में जो भी मांगे वह आपको विश्वास करने पर जरूर मिलेगा यहां अनुशासित कल्पना से मतलब है ऐसी कल्पना करना जो वैज्ञानिक हो और हमारे अवचेतन मां तक पहुंच रही हो प्रार्थना में सफलता अपने के लिए एक व्यक्ति इन तीन बटन पर अमल करता है तो उसकी प्रार्थना अवश्य सफल होगी किसी भी समस्या को स्वीकार करना चाहिए अब इस समस्या को हमें अपने वहीं इसे सुलझाने का सबसे अच्छा समाधान जानता है अब हमें अपने अवचेतन मां पर विश्वास रखना है और आस्था रखती है की यह कम ठीक हो जाएगा इन तीन बटन को माने के बाद चमत्कार होगा सेहतमंद होने के लिए अपने इस विचार को केवल अपने अवचेतन मां तक पुरी आस्था के साथ पहुंच दें इसके बाद आप आराम से बैठ जैन और खुद को इसकी शक्ति की हवाले कर दें हर स्थिति में कहें की सब ठीक हो जाएगा और यह समय भी गुर्जर जाएगा दोस्तों पुस्तक में अब आगे लेखक हमें सावधान करते हैं और कहते हैं की हमें हमारी प्रार्थना की विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं जब आपकी प्रार्थना में आस्था की कमी होगी और यह आपकी अवचेतन मां को मजबूर करने की कोशिश करेगी तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे इस तरह वह प्रार्थना हर कामयाब हो जाएगी यहां लेखक हमें एक उदाहरण द्वारा इसे समझने का प्रयास भी करते हैं वह कहते हैं की शायद आपके साथ भी यह घटना हुई होगी आप परीक्षा में बैठे हैं और जैसे ही आपको आंसर सीट मिलती है तो आपका दिमाग अचानक पुरी तरह से खाली हो जाता है आपको ऐसा लगता है की आपने जितना पढ़ा है वो सब आपका साथ छोड़ रहे हैं आपको कुछ भी याद नहीं आता आप डरते हैं और दिमाग पर जोर डालते हैं लेकिन जितना ज्यादा आप जोर डालते हैं आपका ज्ञान आपसे उतना ही दूर चला जाता है दुखी होकर आप कुछ पाल के लिए एग्जाम हाल से बाहर निकलते हैं जब आप थोड़ा ठीक महसूस करते हैं क्योंकि बाहर आपका मानसिक दबाव थोड़ा कम हो गया है तो अब जब आप ठीक महसूस करते हैं तो आप पाते हैं की जिन जवानों को थोड़ी डर पहले आप सोने की कोशिश कर रही थी वह अचानक आपके दिमाग में आने लगता हैं अब आपको एहसास होता है की जब आपने अपने दिमाग पर उन्हें याद रखना के लिए जोर दिया तो आप सब भूल गए इसे विपरीत प्रयास का नियम कहते हैं क्योंकि जब आपने खुद को उन्हें याद रखना के लिए मजबूर किया तो आप सब भूल गए यही बात आपकी प्रार्थना और हर उसे भावना पर लागू होती है जिसे आप अपने अवचेतन मां पर जबरदस्ती ठोकने की कोशिश करते हैं इसीलिए लेखक कहते हैं की हमें अपनी इच्छाओं और कल्पनाओं को संघर्ष से बचाने के लिए उन्हें भी अवस्था में अपने अवचेतन मां तक अपने विचार पहचाने चाहिए क्योंकि इस समय हमारे शरीर के अधिकतर प्रयास बहुत कम हो जाते हैं सोनी से ठीक पहले और जैन के ठीक बाद आपका अवचेतन मां सबसे सशक्त होता है इस समय जब आप कल्पना करते हैं की आपने किसी बड़ी उपलब्धि को हासिल कर लिया है और आप बहुत रोमांस महसूस करते हैं तो आपका अवचेतन मां आपकी इस कल्पना और मनोकामना को वास्तविकता यानी चमत्कार में बादल देता है अब लेखक एक महिला का उदाहरण देते हैं और हमें बताते हैं की किस प्रकार उसने उन्हें दी अवस्था में अपने अवचेतन मां तक अपनी कल्पना को पहुंचकर उसे वास्तविकता में बादल दिया दोस्तों आठवी अध्याय का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की हमें अपने अवचेतन मां पर किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए और ना ही इसके कम पर किसी भी प्रकार का शक करना चाहिए क्योंकि जहां हमारी आस्था कमजोर पड़ती है वही हमारा अवचेतन मां उसे पर कम करना बैंड कर देता है दोस्तों बढ़ते हैं आगे क्या सीखने की कोशिश करता है जिसका नाम है व्यक्ति का प्रयोग कैसे करें शायद यही वो अध्याय है जिसका आप बेसब्री से इंतजार कर रहे होंगे दोस्तों इसमें शायद लेखक हमें यह बताने वाले हैं की अब हम अपनी अवचेतन मां का प्रयोग अमीर बने के लिए कैसे कर सकते हैं आज के समय में जहां महंगाई आसमान ऊ रही है वहां हम सबकी इच्छा होती है की हम भी दौलतमंद बने और अपनी जरूर और शौक दोनों पूरे कर पे दोस्तों पाठ की शुरुआत में लेखक हमसे कहते हैं की हम अपने जीवन में ऐसे लोगों को जानते होंगे जो हफ्ते में केवल कुछ घंटे कम करते हैं और बहुत सारे पैसे काम लेते हैं जो लोग ज्यादा मेहनत नहीं करते हैं वह सोचते हैं की हम खून पसीना बहाकर ही और कड़ी मेहनत करके ही अमीर बन सकते हैं जींस प्रेम है और जो हम करना चाहते हैं और जींस हमें खुशी मिलती है उनका मानना है की दौलत हमारी मस्तिष्क में रहती है और यह व्यक्ति के अवचेतन पर विश्वास से ज्यादा और कुछ नहीं है आप यह कहकर लखपति नहीं बन सकते की मैं लखपति हूं बहुत सारे लोगों के साथ ही दिक्कत होती है की जब उनका बिजनेस कमजोर हो जाता है और स्टॉक मार्केट गिरने लगता है तो वो बेब्स नजर आते हैं इतनी असुरक्षित महसूस करने लगता हैं की वह अपने अवचेतन मां को नकारात्मक संदेश भेजते हैं और उनका अवचेतन मां उन्हें हकीकत में बादल देता है वह यह जान ही नहीं पाते की यदि वे उसे समय सकारात्मक रहते तो यह जान पाते की उनकी भीतर कभी ना खत्म होने वाला संपत्ति का बहुत बड़ा भंडार पड़ा है जी व्यक्ति ने गरीबी की मानसिकता ही बना ली है वह व्यक्ति खुद को हमेशा गरीब स्थिति नहीं पता है लेकिन इसके ठीक विपरीत जिनका मस्तिष्क दौलत के विचारों से भारत राहत है वो तमाम सुख सुविधाओं में जीवन बिताता है ईश्वर यह कभी नहीं चाहता की हम गरीबी में जिएं बसे की हम कभी नकारात्मक ना सोच और अपने दिमाग से हर गलत विचार को साफ करके सही विचार भर दें दोस्तों इस अध्याय को सुनते समय शायद आप यह सोच रहे होंगे की मुझे भी दौलत और सफलता चाहिए तो लेखक कहते हैं की प्रतिदिन तीन से कर बार कर से पांच मिनट यह शब्द दोहरा सफलता और दौलत इन शब्दों में अद्भुत शक्ति है यह हमारे अवचेतन मां को प्रेरित करती है और ऐसी परिस्थितियों प्रकट करती हैं जींस यह चीज सच्चाई में बादल जाए की मैं बहुत पैसे वाला हूं बल्कि आप अपने अंदर शक्तियों पर भरोसा कर रहे हैं धन की भावना से ही धन उत्पन्न होता है और इस बात को हमेशा याद रखें हमारा अवचेतन मां एक बैंक की तरह है जिसका पैसा कभी खत्म नहीं हो सकता इसमें आप जो जमा करते हैं जी भी चीज की छाप छोड़ते हैं चाहे वो दौलत का विचार हो या गरीबी का आपको वही मिलता है लेखक के पास ऐसी बहुत सिकायतें आई हैं जिम लोग अक्सर उनसे कहते हैं की मैं हफ्तों और मीना से का रहा हूं की मैं दौलतमंद हूं मैं अमीर हूं लेकिन कुछ नहीं हो रहा है लेकिन धीरे-धीरे लेखक को यह एहसास हुआ की जब वो खुद से यह का रही थी की मैं दौलतमंद हूं और अमीर हूं तो उन्हें कहानी ना कहानी अपने मां में ही लगता था की वह खुद से झूठ बोल रहे हैं इसी तरह लेखक को एक और व्यक्ति ने बताया की वह इस सकारात्मक घोषणा से तक गया है की वह अमीर और अब उसकी स्थितियां पहले से ज्यादा खराब है क्योंकि अपने अवचेतन मां को ऐसा कहते समय वह जानता था की यह सच नहीं है इसीलिए इस तरह के वाक्य को आपका अवचेतन मां जानकारी देता है और आपको कुछ नहीं मिलता जब तक हम इन्हें सचमुच स्वीकार नहीं करते तब तक हमारा अवचेतन मां इस पर विश्वास नहीं करता और इस पर कम नहीं करता इसीलिए इस मानसिक संघर्ष से बचाने के लिए लेखक हमें एक उपाय बताते हैं वह एक कथन रात को ठीक सोनी से पहले बोलने की सलाह देते हैं वो कथन है की दिन रात में अपनी रुचि में समृद्ध हो रहा हूं इस पॉजिटिव अनाउंसमेंट से कोई बहस नहीं होगी क्योंकि यह आपके कॉन्शियस मन से बहस नहीं करेगी लेखक एक उदाहरण के मध्य से ऐसे ही एक कथन का चमत्कार हमें बताते हैं एक दिन उनके पास एक बहुत ही चिंतित बिजनेसमैन आया उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी इसीलिए लेखक ने उसे अपने ऑफिस में शांत बैठकर एक कथन दोहराने को कहा वो कथन था मेरी बिक्री हर दिन बाढ़ रही है और इसी तरह बढ़नी रहेगी इस कथन के करण उनका कॉन्शियस और सब कॉन्शियस मन मिलकर यह कम करने लगे और फिर उन्हें अच्छे परिणाम मिले लेखक हमें सुझाव देते हैं की जी तरह पूरे चक पर कभी साइन नहीं करना चाहिए ठीक इस तरह हमें इस तरह की बातें भी कभी नहीं सोचनी चाहिए की कम चलने के लिए मेरे पास पैसे नहीं है मैं गरीब हूं तुम मेरे पास पैसे की तंगी है मेरे पास कर्ज की किस्त नहीं चुका अपने के करण अपना घर तक गिरवी रखना की स्थिति है याद रखिए जब आप इस तरह की नकारात्मक कथन अपने मां में सोचते हैं तो आपका अवचेतन मां इसे आग्रह के रूप में स्वीकार करता है और अपने तरीके से इन पर कम करना शुरू कर देता है नतीजतन आपके जीवन में बढ़ाएं मुश्किलें और तनावपूर्ण स्थितियां पैदा हो जाति हैं दोस्तों हमारा अवचेतन मां हमें हर चीज का बास देता है जिसमें दौलत की भावना है उसमें हमारा अवचेतन मां उसे बास लगाकर अर्थात बहुत साड़ी दौलत देगा लेकिन जिसमें कमी की भावना है वह उसमें भी प्यास लगाएगी और कमी को बढ़ाएगी खुद के सब कॉन्शियस मन को ऐसे पॉजिटिव अनाउंसमेंट यानी सकारात्मक घोषणाएं करने के बाद शायद का सकते हैं की मैंने ऐसा किया था लेकिन कुछ नहीं हुआ और आपको रिजल्ट ना मिले लेखक कहते हैं की आपका करण यह था की शायद आप 10 मिनट बाद ही डर गए थे और आपने स्वयं उसे सकारात्मक विचार को जानकारी दिया था जिसकी आपने घोषणा की थी ये बात बिल्कुल ऐसी ही हुई जैसे की आपने दिन में कोई बी जमीन में बॉय और इस दिन आपने उसे खुद कर वापस निकाल लिया आप उसे बी की जड़ी निकालने और बढ़ाने का मौका ही नहीं देते लेखक कहते हैं की जैसे ही आप ये खाने वाले हो की मैं उसे चीज के पैसे नहीं दे पाऊंगा इससे पहले की आप इस नकारात्मक वाक्य को पूरा करें आप इसे बदलकर यह का दें की मैं सभी त्रिकोण से अमीर बनेगा और सकारात्मक कर दें हमारे अवचेतन मां में विचारों की कभी कमी नहीं होती इसके अंदर अनगिनत विचार है जो हमारे कॉन्शियस मन यानी चेतन मां में अनगिनत त्रिकोण से पैसे भरने के लिए तैयार हैं बशर्ते की आप सकारात्मक विचार पर विश्वास रखें इस दौरान लेखक केवल इस बात पर जोर देना चाहते हम अपने अवचेतन मां को यह विश्वास दिल दें की दौलत हमारी है और हमारे जीवन में शामिल हो रही है तो अंततः आपको यह मिल जाएगी चाहे किसी भी रूप में मिले दोस्तों दुनिया में काफी सारे लोग तंगी का जीवन गुजरते हैं अब लेखक इस तंगी के असली कर्म पर रोशनी डालते हैं और कहते हैं की आपने कई लोगों को उनका जीवन तंगी में गुजरते देखा होगा जो अपने महीने का खर्च चलने के लिए भी संघर्ष करते हैं क्या आपने कभी उनकी बातें सनी है वे हमेशा उन लोगों की निंदा करते हैं जो अपने जीवन में सफल हुए हैं और कहते हैं की ओ आदमी तो बदमाश है बेकार है उनकी टांगे का यही एक करण है क्योंकि वह इस चीज की निंदा करते हैं जिसे वह चाहते हैं वे अपने अमीर साथियों की आलोचना करते हैं क्योंकि वह उनकी सक्सेस से जलते हैं दौलत को दूर भागने का सबसे तेज तरीका अमीर लोगों की निंदा करना ही है इसके अलावा लेखक एक और भावना की बात करते हैं जो दौलत के बीच सबसे बड़ी बड़ा बंता है और वो भावना है ईर्ष्या यानी जलन की भावना मां लीजिए आप अपने किसी प्रतिस्पर्धी को बैंक में बहुत सारे पैसे जमा करते हुए देखते हैं लेकिन इस पंक्ति में आप भी हैं जिसके पास बहुत थोड़े रुपए हैं तो आप अपने प्रतिस्पर्धी को देखकर जलन की भावना महसूस करेंगे इस भावना से उभरते का एक तरीका है की आप इस समय अपने मां में कहें की कितनी बढ़िया बात है मुझे उसे व्यक्ति की संपत्ति पर खुशी होती है इसीलिए मैं चाहता हूं है की वह और भी ज्यादा पैसे कमाई जलन की भावना विनाशकारी होती है क्योंकि यह आपको नेगेटिव सिचुएशन में रखती है इसीलिए पैसे पास आने की बजे आपसे दूर भाग जाते हैं क्योंकि आप किसी और के पैसे या धन संपत्ति से चिढ़ महसूस करते हैं इसीलिए लेखक कहते हैं की आप तत्काल दवा करें की आप उन्हें इससे भी ज्यादा दौलतमंद देखना चाहते हैं यह आपके नेगेटिव थॉट्स को हटा देगा और आपके अवचेतन मां को दौलत प्रधान करने का आदेश देगा यदि आप इस बात की चिंता कर रहे हैं की कोई बेईमानी से पैसे काम रहा है तो इस तरह की चिंता करना छोड़ दीजिए अगर आपका शक सही है और आप जानते हैं की इस तरह के व्यक्ति अपने मस्तिष्क के नियम का गलत प्रयोग कर रहे हैं तो समय के साथ यह नियम उन्हें परिणाम भी देगा और आप सावधान रहे उनकी आलोचना ना करें और इसके करण आपको पहले ही बताए गए हैं दोस्तों अब लेखक हमें अमीर बने की एक ट्रिक बताते हैं जिसे हम अपने अवचेतन मां के साथ प्रयोग कर सकते हैं वो कहते हैं की रात को सोते समय दौलत शब्द को शांति और सरलता से दोहराएं और बार-बार ऐसा करें किसी लोरी की तरह परिणाम देखकर आप हैरान हो जाएंगे क्योंकि दौलत एक पहाड़ की तरह आपकी तरफ आएगी और आपकी अभी चेतन मां की जादू शक्ति इसकी सबसे बड़ी मिसल है दोस्तों अध्याय यही पर समाप्त होता है जिसमें हमने शिखा की किस तरह हम अपने अवचेतन मां की शक्तियों का प्रयोग धनवान बने के लिए कर सकते हैं आपको तो केवल धन का विचार सफलता पूर्वक पूरे विश्वास और आस्था के साथ अपने मां तक पहुंचाना होगा यहां मां से अर्थ आपकी अवचेतन मां से है आई दोस्तों देखते हैं की पाठ 10 जिसका नाम है आपको अमीर बने का हक है मैं लेखक हमें क्या बताना चाहते हैं लेखक कहते हैं की अमीर बन्ना हमारा बुनियादी अधिकार है क्योंकि आप इस दुनिया में एक अच्छा जीवन जीने स्वस्थ खुश और आजाद रहने के लिए आए हैं इसीलिए आपको इतने पैसों का हक होना चाहिए जितने की आपको जरूर है और जो आपको एक सुखी और समृद्ध जीवन जीने के लिए आवश्यक होगी जब आप अपनी चेतन मां की शक्ति से दौलतमंद होने का आनंद ले सकते हैं तो तंगी में क्यों रहा जाए इस अध्याय में हम सीखेंगे की हम पैसों से दोस्ती कैसे कर सकते हैं और अगर एक बार आपने पैसों से दोस्ती कर ली तो आपके पास एन केवल अपनी जरूर पुरी करने का पैसा होगा बल्कि उससे भी ज्यादा पैसों कमरे में सोने में कभी शर्मिंदगी महसूस एन करें क्योंकि इस ब्रह्मांड के सभी लोग इसकी इच्छा रखते हैं पैसों की सोच रखना ना सिर्फ अच्छा है बल्कि बहुत ही अच्छा है लेखक कहते हैं की जी प्रकार हमारे शरीर को स्वस्थ रखना के लिए रक्त की आवश्यकता होती है इस प्रकार हमें आर्थिक रूप से स्वस्थ रखना के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है धन ही किसी राष्ट्र की आर्थिक सेहत का मापन होता है और किसी व्यक्ति के जीवन में सुंदरता स्वतंत्रता और प्रचुरता का प्रतीक भी होता है इतिहास गवाह है प्रत्येक युग में किसी एन किसी रूप में धन का प्रयोग होता रहा है चाहे वह सोना हो चांदी हो मां के हो या कोई और चीज पुराने समय में लोगों की दौलत उनके भिड़े गायों और बैलों से की जाति थी लेकिन अब हम पैसों प्रयोग करते हैं क्योंकि इसका करण स्पष्ट है अब हम बेल चुकाने के लिए अपने साथ भिड़े को लेकर नहीं जा सकते बल्कि पैसे या चेक के रूप में भुगतान करते हैं इसीलिए यह जानना आपके लिए जरूरी हो जाता है की हम अमीर बने की र पर कैसे चलें ताकि हमारी ज़रूरतें और शौक पूरे करने के पैसे आए लेखक बताते हैं की एक बार जब हम अपने अवचेतन मां की शक्तियां समझ लेते हैं तो हमारे पास उसकी आध्यात्मिक मानसिक और अमीर बने के सभी रास्तों का नक्शा ए जाता है जिसने भी अपने मस्तिष्क के नियमों को अच्छे से समझ लिया उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं हो शक्ति फिर चाहे स्थिति कैसी भी रहे स्टॉक मार्केट का कुछ भी हाल रहे या हड़ताल रहे उसके पास हर स्थिति में धन रहेगा क्योंकि एक बार उसने दौलत का विचार अपने अवचेतन मां तक पहुंच दिया है और नतीजतन अवचेतन मां उसे धन देता राहत है चाहे वो जहां भी रहे दोस्तों अब लेखक हमें बताते हैं की हमारे पास अधिक पैसे नहीं होने के क्या करण है शायद अभी आप सोच रहे होंगे की मैं ज्यादा कमाई का हकदार हूं और ये बिल्कुल सही भी है लेकिन यह उन्हें मिलती नहीं है इसका सबसे बड़ा करण यही है की वो अपने मां में या खुलकर इसकी निंदा करते हैं या तो वो ज्यादा पैसों को गंदा कहते हैं या ऐसा समझते हैं की पैसा ही सभी बुराइयों की जड़ है उनका यह भाव उनके अवचेतन मां में धन के प्रति गलत संदेश देता है और उनका अवचेतन मां भी उनके संदेश पर कम करने लगता है और उनकी जीवन में पैसों की कमी करता राहत है दोस्तों अब लेखक हमें सावधान करते हैं और बताते हैं की हम इस दुनिया हमें एक संतुलित जीवन जीने केवल धन अर्जित करना ही हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए बल्कि एक संतुलित जीवन के लिए हमें प्रेम स्वास्थ्य सद्भाव और शांति की भी जरूर है यही करण है की केवल देर साड़ी पैसे कठे करने को ही हमें अपना लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए क्योंकि हमारे जीवन की कई परिस्थितियों ऐसी होती है जहां हमें धन की आवश्यकता नहीं होती बल्कि वहां प्रेम सद्भाव और मानसिक शांति की आवश्यकता होती है इसीलिए हमें अपने अवचेतन मां की शक्ति का प्रयोग एक संतुलित जीवन के लिए करना चाहिए जिसमें आप असीमित धन की मांग तो कर ही सकते हैं लेकिन साथ ही आप मानसिक शांति और सद्भाव और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दे सकते हैं दोस्तों लेखक कहते हैं की गरीबी एक मानसिक रोग है क्योंकि कोई ऐसी स्थिति में आपको यह समझना चाहिए की आपके जीवन में धन का प्रवाह नहीं हो रहा है और आपके साथ कोई ना कोई गड़बड़ है आप इस दुनिया में गरीबी का जीवन जीने नहीं आए हैं इसीलिए आपको अपने अवचेतन मां का प्रयोग खुद को एक खुश और समृद्धि जीवन देने में करना चाहिए हमें धन के बड़े में सभी अजीबोगरीब विश्वास और अंत विश्वास अपने दिमाग से निकाल देने चाहिए कभी धन को गंदा नहीं समझना चाहिए यदि आप इसे बड़ा सोचते हैं तो यह आपकी जीवन से पंख लगाकर इस प्रकार उड़ जाएगा जी प्रकार एक पंछी आसमान में उड़ जाता है आप जिसकी आलोचना करते हैं आप उसे कभी नहीं का सकते यही अवचेतन मां का नियम है हमें धन की प्रति अपना नजरिया ठीक रखना चाहिए और लेखक के अनुसार यह वाक्य दोहराना चाहिए की मैं धन से प्रेम करता हूं और मुझे यह पसंद है मैं पुरी समझदारी से इसका अच्छा प्रयोग करता हूं और मेरी जीवन में धन ए रहा है मैं खुशी से इसे आजाद करता हूं और यह कई गुना होकर मेरे पास वापस लौटता है यह बहुत ही अच्छा है और मैं इसका प्रयोग भलाई के लिए करता हूं मैं मानसिक रूप से इस स्वीकार करता हूं और इसके प्रति कृतज्ञ हूं दोस्तों अब लेखक हमें धन को आकर्षित करने के कुछ और त्रिकोण के बड़े में बताते हैं जिसमें वे अपने जीवन की एक उदाहरण से हमें प्रेरित करते हैं वह बताते हैं की कई साल पहले वह ऑस्ट्रेलिया में एक युवक से मिले और उसे युवक ने लेखक को बताया की उसने डॉक्टर बने का सपना देखा था इसीलिए वह युवक विज्ञान की कक्षा में गया और उसका प्रदर्शन भी बहुत अच्छा था लेकिन मेडिकल कॉलेज का घर छूना उसके लिए संभव नहीं था क्योंकि उसके माता पिता अब इस दुनिया में नहीं थे और वह अपना गुजर अपने मोहल्ले के अस्पतालों में डॉक्टर के ऑफिस की सफाई करके किया करता था लेखक ने उसे बताया की जी प्रकार एक बॉय गया बिन अपनी तरफ हर उसे चीज को आकर्षित करता है जो उसे उगने के लिए जरूरी होती है ठीक इस प्रकार हमें अपने अवचेतन मां में जी चीज की जीवन में आवश्यकता हो का बी बोना चाहिए उसे युवक ने लेखक की बटन को अपने जीवन में प्रयोग करने का सोचा और उसने अपने मां में एक मेडिकल डिप्लोमा सर्टिफिकेट की तस्वीर बनाई जिसमें उसका नाम बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था उसे यह काल्पनिक तस्वीर बनाने में ज्यादा मुश्किल ही नहीं आई क्योंकि वो जिन डॉक्टर के ऑफिस में सफाई किया करता था उनकी दीवारों पर वैसे सर्टिफिकेट टांगे होते थे और वह युवक उन पर जमीन धूल को साफ करके उन्हें चमकता था इसीलिए उसकी तस्वीर युवक को अच्छे से याद हो गई लगभग 4 महीने तक हर रात वो युवक सर्टिफिकेट वाली तस्वीर की तकनीक आजमाता रहा एक दिन जी डॉक्टर के ऑफिस में वह सफाई करता था उसने उसे युवक से पूछा की क्या वो उसका असिस्टेंट बनेगा डॉक्टर ने उसे ट्रेनिंग में भेजना का पूरा खर्च उठाया जहां उसने सभी मेडिकल योग्यताएं सखी और इसके बाद वो युवक डॉक्टर का असिस्टेंट बन गया इस युवक की प्रतिभा से डॉक्टर इतना प्रभावित हुआ की उसने बाद में उसे मेडिकल कॉलेज भेजो और अभी वही युवक कनाडा में एक सीनरी डॉक्टर है दोस्तों इस उदाहरण में हम देख सकते हैं की उसे युवक ने काल्पनिक तस्वीर की तकनीक द्वारा किस प्रकार अपने अवचेतन मां की शक्ति का प्रयोग अपने सपना को पूरा करने में किया यह आकर्षण का नियम था यानी उसने अपने सपना अट्रैक्ट किया उसे अपने अवचेतन मां की शक्ति पर पूरा विश्वास था जो उसके सपना को हकीकत में बदलने के लिए जरूरी था दोस्तों आप भी इस शक्ति का प्रयोग कर सकते की आपको आपके अवचेतन मां पर पूरा विश्वास हो आगे लेखक एक स्थिति की बात करते हैं जब लोग मेहनती तो होते हैं कम तो करते हैं पर उनकी तनख्वाह नहीं बढ़नी लेखक इसका भी करण देते हैं वो कहते हैं की अपने बस के प्रति मानसिक विरोध रखकर आप अपने अवचेतन मां में उसे कंपनी के बंधन तोड़ रहे हैं जब आप अपनी कंपनी और बस की भर भर के आलोचना करते हैं तो बाहरी दुनिया में इसका प्रभाव होता है एक दिन आपको आपका बस यह खाने को मजबूर होगा की हमें आपकी जरूर नहीं है जबकि सच तो यह है की आपने अपनी नकारात्मक सोच से ही स्वयं को निकलवाया है और यह स्थिति आपकी अवचेतन मां पर छोड़ें गए छाप का नतीजा है दोस्तों अपने अवचेतन मां की शक्ति का प्रयोग आप शेर मार्केट में भी कर सकते हैं कैसे आई समझते हैं जब भी आप अपने शेरों और बोनस के बड़े में चिंतित महसूस करें तो धीरे से अपने मां में यह दवा करें की मेरी बुद्धि मेरी सभी वित्तीय मामलों को कंट्रोल करती है और उसकी निगरानी करती है मुझे पूरा विश्वास है की मैं जो भी करूंगा वो मेरे लिए समृद्ध होगा अगर आप इन बटन का दौरान बार-बार पुरी आस्था और विश्वास से करेंगे तो आप पाएंगे की आपका अवचेतन मां आपका मार्गदर्शन समझदारी भारी निवेश की और करेगा इतना ही नहीं आपको कभी भी नुकसान नहीं होगा क्योंकि आपका अवचेतन मां अब आपके साथ होगा जो आपको जोखिम भारी शेरों को बेचे से पहले सचेत कर देगा पुस्तक में आगे लेखक कहते हैं की बिना दिए हमें कुछ नहीं मिल सकता आई देखते हैं की इसमें लेखक हमें क्या समझते हैं बड़े स्टोर्स पर आपने सिक्योरिटी अच्छी होगी जो वहां समाज चुराने वाले चोरों को रॉक सके हर दिन ये सिक्योरिटी कुछ लोगों को पकड़ी है जो चोरी करते हुए पकड़े जाते हैं लेखक कहते हैं की इस तरह चोरी करने वाले लोग कमी और सीमा के माहौल में रहते हैं यह दूसरों की चीज चुराने के चक्कर में अपनी शांति ईमानदारी और विश्वास को भी चूड़ा लेते हैं इसका हमारे चेतन मां पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है और उसे तक गलत संदेश पहुंचता है नतीजतन ऐसे लोगों के जीवन में मानसिक अशांति और नुकसान आता है अगर ऐसे लोग मानसिक रूप से अपने अवचेतन मां की शक्तियों का आह्वान करें तो उनके जीवन में भी सफलता और समृद्धि 100% आएगी हो और वो खुद को और समाज को लाभ पहुंच पाएंगे दोस्तों यह अध्याय समाप्त करने से पहले लेखक हमें एक वाक्य बताते हैं जिसका दोरा यदि हम सोनी से पहले करते हैं तथा इस वाक्य पर पूरा विश्वास रखकर इसे अपने अवचेतन मां तक पहुंचने तो इसका चमत्कार आपको अवश्य दिखाई देगा यह वाक्य है की मैं अमीर खुश और सफल हूं और यह मेरा अधिकार है मैं अपने अवचेतन मां की असीमित समृद्धि पर पुरी आस्था रखना हूं गान मेरी और पुरी स्वतंत्रता से प्रचुरता से और अनंत रूप में प्रवाहित हो रहा है मैं हमेशा अपनी अवचेतन मां के साथ हूं मैं अपनी प्रतिभा को स्वतंत्रता से देखा हूं और मुझे मेरे अवचेतन मां द्वारा वित्तीय वरदान मिलते हैं यह अद्भुत और मैं कृतज्ञ हूं इसी वाक्य के साथ दसवें अध्याय की समाप्ति होती है जिसमें हमने जाना की किस प्रकार हम धन को आकर्षित कर सकते हैं अवचेतन मां के असीमित धन के भंडार से दौलतमंद बन सकते जरूर है तो केवल उसमें आस्था रखते हुए अपना संदेश उसे तक पहचाने की आई दोस्तों देखते हैं पाठ 11 जिसका नाम है आपका अवचेतन मां सफलता में साझेदारी है की मध्य से लेखक हमारे अवचेतन मां के किस राज को खोलने हैं दोस्तों जब भी हम अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति चाहते हैं तो हम एक शब्द में इसे सक्सेस या सफलता कहते हैं लेकिन जोसेफ मर्फी हमें सफलता की तीन पैदानों के बड़े में बताते हैं आई जानते हैं की वह तीन पायदान कौन से हैं जिन पर चलकर हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं इसका पहले पायदान है की हम अपने जीवन में उसे कम का पता लगे जिसे हम करना चाहते हैं और जिससे हमें प्यार है क्योंकि जब तक आप अपने कम से प्यार नहीं करते तब तक आप उसमें खुद को सफल नहीं मानते भले ही पुरी दुनिया को सफल कहती हो दोस्तों इस समय आप का सकते हैं की मैं तो अपने उसे कम का पता लगाने में समर्थ हूं जिससे मुझे प्रेम है और यह स्वाभाविक भी है ऐसी स्थिति में लेखक हमें एक प्रार्थना बताते हैं जिसका दोहराव कर हम यह जान सकते हैं की हमें कौन सा कम पसंद है जो हमें सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाएगा यह प्रार्थना है की मैं अपने अवचेतन मां की असीमित बुद्धिमता पर पूरा विश्वास करता हूं और यह आस्था रखना हूं की यह मेरे जीवन में मेरी सच्ची जगह प्रकट कर रही है इस प्रार्थना को सकारात्मक तरीके से यदि अवचेतन मां के सामने दोहराया जाए तो नी संदेह है की एक दिन आप जरूर सफलता की ऊंचाइयों को ऊ रहे होंगे सफलता का दूसरा पायदान लेखक हमें बताते हैं की इसमें किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञ या स्पेशलिटी हासिल करना है और उसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करना है मां लीजिए कोई विद्यार्थी साइंस विषय को चुनकर केमिस्ट्री के क्षेत्र में विशेषज्ञ प्राप्त करना चाहता है तो उसे अपना पूरा ध्यान इस क्षेत्र पर केंद्रित करना चाहिए ताकि वह उसकी पहचान बन जाए इसके लिए उसे इस विषय में दिलचस्प लेनी चाहिए और उसके मां में दुनिया की सेवा करने की भावना हनी चाहिए सफलता का तीसरा पायदान अंतिम है यह सबसे महत्वपूर्ण है इससे दूसरों का भी भला हो इसका उद्देश्य दुनिया की सेवा करना और उन्हें लाभ पहुंचाना होना चाहिए दोस्तों यदि कोई व्यक्ति सफलता के इन तीनों पैदानों पर चला है तो वो अवश्य सफलता के शिखर पर पहुंचता है पुस्तक में आगे लेखक सच्ची सफलता को मापनी के पैमाने पर बात करते हैं लेखक बताते हैं की जब कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए सफल नजर आता है लेकिन उसका कमाया हुआ धन चोरी और धोखे से हासिल किया गया है तो वह धन पंख लगाकर उड़ जाता है इसके अतिरिक्त जब हम किसी दूसरे को लूटने हैं तो हम खुद को धोखा देते हैं और लूटने हैं हम जैसा महसूस करते हैं वही होता है हम जी चीज में विश्वास करते हैं वही होता है सफल व्यक्ति केवल अपने कम से प्यार करता है और खुद को पुरी तरह एक्सप्रेस करता है एक सक्सेसफुल व्यक्ति केवल दौलत इकट्ठा करना ही अपना उद्देश्य नहीं बनाता बल्कि वो तो इससे ऊंचे आदर्श पर कम करता है सफलता के तीन पैदानों पर चलते समय आपको अपने अवचेतन मां की शक्तियों को कभी नहीं भूलना चाहिए यही शक्ति आपकी सफलता सुनिश्चित करती है यदि आपने अपने अवचेतन मां के नियम सिख लिए और खुद को पुरी तरह अभिव्यक्त करने लगे जिससे आपकी प्रतिभा से दूसरों को भी लाभ पहुंच रहा हो तो आप समझ जाइए की आप सच्ची सफलता के ऐसे मार्ग पर हैं जहां ईश्वर आपके साथ है ऐसे में कौन आपके खिलाफ खड़ा हो सकता है आकाश और पाताल में भी ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो आपको सफलता तक पहुंचने से पीछे खींच सके दोस्तों अब लेखक हमें बहुत सारे सच्चे उदाहरणों के मध्य से यह बताते हैं की किस प्रकार अलग-अलग क्षेत्र में लोगों ने अपने अवचेतन मां का प्रयोग किया चाहे वह बिजनेस हो शेर मार्केट हो या फिर उनका अपना व्यवसाय हो और सफलता पी लेखक ऐसे ही एक उदाहरण का जिक्र करते हैं जिसमें 16 साल का एक लड़का किस प्रकार अपनी असफलता को सफलता में बदलते है इस बच्चे का नाम तोड़ एम था इस बच्चे ने लेखक को बताया की मैं हर चीज में फेल हो रहा हूं और मैं नहीं जानता की मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है मुझे लगता है की मैं पागल हो जाऊंगा और इससे पहले की मेरे स्कूल वाले मुझे स्कूल से निकले मैं खुद ही निकाल जाऊंगा लेखक को पता चला की लड़के का नजरिया बहुत गड़बड़ था वो अपनी पढ़ाई में भी ठीक नहीं था और अपने टीचर और दोस्तों के प्रति भी ईर्ष्या भाव रखना था लेखक ने उसे बताया की वह किस प्रकार अपने स्कूल में सफल होने के लिए अपने अवचेतन मां का प्रयोग कर सकता है लेखक ने एक प्रार्थना बताई जिसे वो सोनी से ठीक पहले और सुबह जैन के ठीक बाद दोहराने लगा क्योंकि अवचेतन मां तक विचार पहचाने के लिए की सबसे अच्छे समय होते हैं उसने यह सकारात्मक प्रार्थना की की मुझे मालूम है की मेरा अवचेतन मां मेरी यादों का भंडार है मैं हर उसे चीज को इकट्ठा करता हूं जो मैंने पड़ी है और टीचर्स की क्लास में सुना है मेरी याददाश्त भी बहुत तेज है बशर्ते मैं इसका इस्तेमाल करूं मेरा अवचेतन मां मुझे हर वह चीज लगातार बताता है जो मुझे परीक्षा में पढ़ने की जरूर है और मैं अपने सभी टीचर और दोस्तों के प्रति प्रेम और सद्भावना रखना हूं मैं चाहता हूं की वह भी अपने जीवन में सफल हो और उन्हें अच्छी चीज मिले नतीजतन उसके जीवन बड़े चमत्कार हुआ और वह अपना जीवन शांतिपूर्वक बीता रहा है वो अभी कल्पना करता है की उसकी टीचर उसकी तारीफ कर रही हैं और उसकी सफलता पर उसे बधाई दे रहे हैं दोस्तों अब लेखक हमें बताते हैं की हम अपने अवचेतन मां का प्रयोग किस प्रकार खरीदने और बेचे संबंधी केमोन में कर सकते हैं मां लीजिए आप एक अच्छा घर खरीदना चाहते हैं और आपको मनचाहे परिणाम नहीं मिल का रहे हैं तो आप इस प्रार्थना का इस्तेमाल की शक्ति से ऐसा घर का सकते हैं जिसकी शायद आपने कल्पना भी नहीं की होगी यह प्रार्थना कुछ इस प्रकार है मैं जानता हूं की मेरा अवचेतन मां परम बुद्धिमान है इसकी शक्ति मुझे एक ऐसा घर बताएगी जो मेरी साड़ी जरूर को पूरा करेगा और मैं उसे खरीद पाऊंगा मैं मैं मानता हूं की मेरा अवचेतन मां मेरे आग्रह को स्वीकार करेगा और मैं उसे पर पुरी आस्था और विश्वास रखना हूं दोस्तों लेखक कहते हैं की आपको इस प्रार्थना का जवाब किसी भी रूप में मिल सकता है चाहे वो अखबार का विज्ञापन हो या फिर आपके दोस्त बताएं इसी तरह एक और प्रार्थना वो चीज बेचे के लिए भी बताते हैं जिसे बहुत से लोगों ने अपनाया और सफल भी हुए दोस्तों अगर आप यह प्रार्थना जानना चाहते हैं तो कृपया हमें कमेंट करके बताइए हम इस पर एक वीडियो अलग से बनाएंगे दोस्तों 11वीं अध्याय का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की सफलता का अर्थ केवल पैसे कमाने से नहीं है बल्कि जीवन में शांति सुख और खुशी से भी है इसके बाद लेखक हमें सफलता प्राप्त करने के लिए अवचेतन मां के प्रयोग बताते हैं अलग-अलग क्षेत्र में विशेषज्ञ यानी स्पेशलिटी प्राप्त करने में भी यह हमारी सहायता करता है आई दोस्तों अब चलते हैं अध्याय 12 की तरफ जिसका नाम है वैज्ञानिक अवचेतन मां का प्रयोग कैसे करते हैं मिले हक हमें क्या बताना चाहते हैं लेखक हमें ऐसे महान वैज्ञानिकों का उदाहरण देते हैं जिन्होंने अपने अवचेतन मां का प्रयोग कर पुरी दुनिया में नाम कमाया इनमें आइंस्टीन मारकोनी और एडिशन जैसे वैज्ञानिक है निकोल टेस्ला को भी अपने अवचेतन मां की शक्ति पर पूरा विश्वास था और उन्होंने इसका इस्तेमाल नया अविष्कार और शोध के लिए किया इसके लिए वह पहले उसे चीज की एक काल्पनिक तस्वीर अपने अवचेतन मां के हवाले कर देते थे जिसे वे सच होता देखना चाहते थे एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था की मेरी मशीन हमेशा मेरी कल्पना के अनुसार ही कम करती है और 20 सालों में इसने हमेशा मेरा साथ दिया है जोसेफ मर्फी एक ऐसी वैज्ञानिक का उदाहरण देते हैं जिन्होंने अपनी अवचेतन मां की शक्ति से अपनी समस्या सुलझाया इसके बाद एक और उदाहरण देकर बताते हैं की एक असाधारण डॉक्टर ने डायबिटीज की समस्या का समाधान अपने अवचेतन मां की शक्ति से किया दोस्तों उसे समय डायबिटीज का कोई इलाज नहीं था और डॉक्टर फ्रेडरिक बेंटिक डायबिटीज की दवा का आविष्कार करना चाहते थे उन्होंने बहुत प्रयास किया पर हर बार वे असफल हुए काफी दोनों तक प्रयास करने के बाद एक दिन उनके अवचेतन मां ने उन्हें यह निर्देश दिया की वे किस प्रकार डायबिटीज की दवा बना सकते हैं वे अपने अवचेतन मां के इशारे को समझ गए और इसी से उन्होंने इंसुलिन की खोज कर अपने की प्रेरणा बल्कि जो आज अनगिनत लोगों के लिए अमृत के समाज कम कर रही है की ध्यान दीजिए डॉक्टर बंटिंग काफी समय से इस दवा के बड़े में अपनी चेतन मां से खोजना की कोशिश कर रहे थे और परिणाम स्वरूप उनके अवचेतन माने इस पर कम किया इससे यह निष्कर्ष निकलता है की हो सकता है की हमें कुछ समय तक जवाब ना मिले लेकिन इससे हमें दुखी नहीं होना है हमें तो बस अपने अवचेतन मां पर पुरी आस्था रखते हुए रात को सोनी से ठीक पहले अपनी समस्या उसके हवाले कर देनी है कभी भी अपने अवचेतन मां के कम पर संदेह ना करें अब जो सिर्फ मैराफी हमें एक बहुत ही साहस भारत उदाहरण देते हैं जिसमें एक वैज्ञानिक ने अपने अवचेतन मां का इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत कंसंट्रेशन कैंप से भाग देने कर दिया था इस वैज्ञानिक का नाम डॉक्टर लोहार वान था यह वैज्ञानिक अपनी कहानी बताते हुए कहते हैं की मैं रूस के एक कोयला खदान में बंदी था और मैंने जय में अपनी चारों तरफ बुरी तरह लोगों को मरते हुए देखा था पहरेदार बहुत करूर थे और सभी अफसर चालाकी से हम पर नजर रखती थी थोड़े से मेडिकल चेकअप के बाद हर कैदी का कोयल का एक कोटा निश्चित कर दिया जाता था वो बताते हैं की इनका कोटा 300 पाउंड का था जो कैदी अपना कोटा पूरा नहीं कर पता था उसकी राशन में कटौती कर दी जाति थी और धीरे-धीरे वह मा जाता था इस वैज्ञानिक ने यहां से भागने की सूची और यह जानते थे की इनका अवचेतन मां कोई एन कोई रास्ता जरूर खोज ले उनकी पुरी परिवार को मित दिया था और इनकी दोस्तों को भी मार दिया था इसी समय वैज्ञानिक ने अपने अवचेतन मां से कहा की मैं लॉस एंजेल्स जाना चाहता हूं और तुम्हें इसका रास्ता खोजना है वैज्ञानिक बताते हैं की मुझे लॉस एंजेल्स की तस्वीर याद थी क्योंकि मैं अक्सर उन्हें देखा करता था इसीलिए मैं उन्हें बार-बार याद करने लगा इसके साथ ही मैं यह भी कल्पना करने लगा की मैं उन्हें रास्तों पर अपनी पत्नी से मिल रहा हूं ये साड़ी कल्पनाएं अपनी मस्तिष्क में बहुत स्पष्ट और वास्तविक बना कर मैंने अपने अवचेतन मां तक पहुंच दी कैंप में हर दिन एक पहरेदार कैदियों की गिनती करता था एक दिन एक पहरेदार जब कैदियों की गिनती करने आया तो उसने शुरू किया 123 और वैज्ञानिक का 17वां नंबर आया लेकिन इसी दौरान पहरेदार को किसी ने बुला लिया और मौका देखकर वैज्ञानिक भाग गया पहरेदार जब वापस आया तो उसने अगले आदमी से 17 नंबर गन्ना शुरू किया और इस तरह पहरेदार को पता नहीं चल पाया की एक कैदी गायब है और ना ही वहां के कैदियों को वैज्ञानिक लगातार 24 घंटे भगत रहा और अंततः एक सुनसान गांव में पहुंच जहां उसने कुछ मछलियां पड़कर खाएं इसके बाद वो एक ट्रेन में बैठ गया जो पोलैंड जा रही थी यहां से कुछ ऐसे इत्तेफाक हुए जींस उनके अवचेतन मां में सूजी गई साड़ी कल्पनाएं सच हो गई और वे लॉस एंजेल्स में अपनी पत्नी से मिल पे ठीक जैसा उन्होंने सोचा था यह वैज्ञानिक बताते हैं की मैं कभी भी अवचेतन मां के चमत्कार पर हैरान होना बैंड नहीं कर सकता क्योंकि इसके पास ऐसे तरीके हैं जिसके बड़े में हमें कुछ नहीं पता जो सिर्फ मैराफी बताते हैं की पुरातत्व यानी आर्कियोलॉजिस्ट भी अपने अवचेतन मां का प्रयोग खुदाई के दौरान प्राचीन दृश्य के पुनर्निर्माण भी करते हैं जिससे वहां का अमृत अतीत फिर से जीवंत बन जाता है खुदाई के दौरान मिले अवशेषों और प्राचीन इमारत के टुकड़ों को देखकर उसे समय की सभ्यताओं के रहना सहन की कल्पना करते हैं और अपने मस्तिष्क में इसका डाटा तैयार कर अपने में सक्षम हो पाते हैं दोस्तों यही पर 12वीं अध्याय का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार वैज्ञानिक भी इसका प्रयोग कर चुके हैं और इसके रहस्य को हमारे सामने लाने का प्रयास करते रहे हैं आई दोस्तों अब हम बढ़ते हैं अगले अध्याय की तरफ जिसका नाम है अध्याय 13 आपका अवचेतन मां और नींद के चमत्कार उठाना चाहते हैं दोस्तों लेखक कहते हैं की हम अपने दिन के 24 घंटे में से 8 घंटे सोनी में बिताते हैं और यह जीवन का अनिवार्य नियम है कई लोग कहते हैं की वो दिन भर कम करके तक जाते हैं और रात को अपने शरीर को आराम देना चाहते हैं इसीलिए सोना बहुत जरूरी है लेकिन यह उनकी गलतफहमी है क्योंकि नींद में भी हमारा शरीर आराम नहीं करता हमारा दिल फेफड़े और पाचन क्रिया लगातार कम करते रहते हैं इसके अतिरिक्त हमारे नाखून और बाल भी बढ़ते रहते हैं इन्हीं क्रियो की तरह हमारा अवचेतन मां भी कभी नहीं सता या आराम नहीं करता यह हमेशा एक्टिव राहत है और अपनी सभी शक्तियों को कंट्रोल करता है नींद में ही हमारा सब कॉन्शियस मन यानी अवचेतन मां आराम से अपना कम कर पता है क्योंकि हमारा कॉन्शियस मन सोया राहत है और व्यवधान नहीं दाल पता इसीलिए अक्सर हमें कुछ सवालों के जवाब नींद नहीं मिलते हैं दोस्तों लेखक कहते हैं की दिन भर हमारा मां बहुत साड़ी चिंता विवाद और संघर्ष में उलझा जाता है लेकिन जब हम नींद में होते हैं तो हम इस प्रकार के सभी शोर शराबी और संघर्ष से दूर है जाते हैं इस समय हमारी इंद्रियां भी सो जाति है और हमारा अवचेतन मां शक्तिशाली अवस्था में ए जाता है नींद हमारे जीवन के लिए अति आवश्यक है जब हमारी नींद पुरी नहीं होती तो हम तनावग्रस्त और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को न्यूनतम 6 घंटे की नींद जरूरी होती है किसी भी प्रकार की कटौती नींद में नहीं की जा शक्ति नहीं तो व्यक्ति को भविष्य में बहुत बड़ी शारीरिक और मानसिक हनी हो शक्ति है इसीलिए लेखक नींद के महत्व को प्रकाशित करते हुए कहते हैं की जीवन में स्फूर्ति लाने के लिए यह अति अनिवार्य है आखिर हमें नींद की इतनी जरूर क्यों है 1964 में 17 साल के एक लड़के ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में लगातार 264 घंटे यानी 11 दोनों तक जैन के लिए अपना नाम दर्ज कराया हालांकि इससे उसे नुकसान भी हुआ क्योंकि उसकी सोने की क्षमता में कमी ए गई उसकी शब्दों का उच्चारण खराब हो गया और उसकी याददाश्त में भी कम ए गई एक वैज्ञानिक ने प्रयोग कर यह बताया की हमारा थक हुआ दिमाग नींद के लिए इतना उत्सुक राहत है की वह इसे पानी के लिए कोई भी बलिदान दे सकता है यदि आप सोनी जान से पहले प्रार्थना करते हैं तो आपका अवचेतन मां उसे पर कम करता है और वह प्रार्थना आपकी रक्षा करती है अब जोसेफ मर्फी अपने जीवन की एक घटना बताते हैं की किस प्रकार उन्होंने अपने अवचेतन मां के निर्देशों को सपना में देखा दरअसल कई साल पहले लेखक को एक ऐसी नौकरी का प्रस्ताव मिला जो बहुत ही अच्छा था लेकिन लेखक ने इस मामले में अपने अवचेतन मां से मार्गदर्शन लेने के लिए प्रार्थना की इस संदर्भ में उन्होंने एक प्रार्थना की की मेरी भीतर मेरे अब चेतन मां की बुद्धिमता सब कुछ जानती है और मेरा मार्गदर्शन करती है जब मुझे जवाब मिलेगा तो मैं उसे पहचान कर आगे कम रखूंगा उन्होंने यह प्रार्थना सोनी जान से ठीक पहले और रात को सपना में उन्होंने देखा की उनका एक पुराना दोस्त उनके पास आया जिसके हाथ में एक अखबार था उसने लेखक से कहा की इन हैडलाइंस को देखो और वहां मत जो अखबार की हैडलाइंस में हिंसा की खबरें थी जहां लेखक को नौकरी मिली थी इसीलिए लेखक कहते हैं की हमारा अवचेतन मां सब कुछ जानता है इस सपना ने मुझे एक खतरे की स्थिति से बच्चा लिया और मैं समझ गया था की यह मेरी अवचेतन मां का इशारा था दोस्तों लेखक कहते हैं की हमारा सब कॉन्शियस मन इतना शक्तिशाली है की इसी हमारा भविष्य भी पता है क्योंकि हमारा भविष्य हमारी सोच का परिणाम है यदि हम प्रार्थना करने का फैसला करते हैं तो हम भविष्य में आने वाले खतरों से बैक सकते हैं यह प्रार्थना यदि वैज्ञानिक हो तो आप अपने भविष्य के निर्माता खुद बन सकते हैं वह कहते हैं की इंसान जैसा होता है वैसा ही उसे काटना भी पड़ता है दोस्तों अब लेखक ऐसी घटनाओं का जिक्र करते हैं जिम लोगों ने अपने नींद में अवचेतन मां की बात सनी और उनसे चमत्कार हुआ बगैर अब हम आपको इस अध्याय के एक बहुत ही अच्छे सुझाव से परिचित करना चाहते हैं जिसमें लेखक कहते हैं की यदि आप अनिद्रा से पीड़ित हैं यानी आपको नींद ना आने की शिकायत है तो आप उनके द्वारा बताई गई प्रार्थना को सोनी से ठीक पहले करके एक अच्छी नींद का सकते हैं इस प्रार्थना को धीरे-धीरे शांति और प्यार से दोहराना चाहिए मेरे पैरों के अंगूठे और टखने स्थिर हैं मेरे पेट की मांसपेशियां भी स्थिर है मेरे हाथ फेफड़े हृदय गार्डन मस्तिष्क चेहरा आंखें और मेरा पूरा मां शिथिल है मेरा शरीर भी शिथिल है मैं सभी को पुरी तरह शांति और स्वास्थ्य की कामना करता हूं मैं संतुलित हूं शांत हूं और मैं सुरक्षा शांति और आराम से हूं मेरे पूरे अस्तित्व को एक गहरी शांति शांत करती है मैं जानता हूं की मैं जीवन और प्रेम से अपने एहसास का उपचार करता हूं मैं स्वयं को प्रेम और शांति की चादर में लपेटकर सबके प्रति सद्भावना से भारत सता हूं मैं जब सुबह उठेगा तो मेरा जीवन प्रेम और खुशियों से भारत रहेगा मेरी चारों तरफ प्रेम बरसेगा मुझे किसी की बुराई का डर नहीं होगा और मैं खुशी से जिऊंगा चलूंगा और जागूंगा दोस्तों लेखक की यह प्रार्थना यही पर समाप्त होती है हमारी आपसे विनती है की यदि आप इस प्रार्थना को याद ना रख पे तो चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि यह प्रार्थना हमने हमारे युटुब चैनल पर स्लीप अवर मिशन के अंतर्गत बनाई है जो आपको रात को सोनी में मदद करेगी और एक चमत्कारी सुबह आपका इंतजार करेगी दोस्तों यही पर इस अध्याय का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार नींद में हमारा अवचेतन मां शांति से अपना कम करता है और इसी समय यह सबसे शक्तिशाली अवस्था में होता है यह सोते समय हमारा मार्गदर्शन करता है यही करण है की नींद हमारे लिए बहुत जरूरी है और हमें एक संतुलित नींद को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए आई दोस्तों अब हम बढ़ते हैं अगले अध्याय की और यानी अध्याय 14 आपका अवचेतन मां और वैवाहिक समस्याएं और जानते हैं की इसमें हमारा अवचेतन मां कैसे सहायक है लेखक कहते हैं की सभी तरह की वैवाहिक समस्याएं हमारे मां की शक्तियों को सही तरह से ना समझ अपने के करण ही पैदा होती हैं अगर पति और पत्नी दोनों ही मां के नियम का सही प्रयोग करें तो उनकी बीच लड़ाई झगड़ा गायब हो जाएगा जी प्रकार बाकी समस्याओं का जन्म हमारे चेतन और अवचेतन मां के संघर्ष के करण उत्पन्न होता है वैवाहिक समस्याएं भी इसी का नतीजा है यह हमारी मस्तिष्क के ना समझी का परिणाम होता है वह कहते हैं की विवाह की सच्ची वास्तविकता का आधार अध्यात्म नींद से होना चाहिए हमारे दिल के प्रेम से होना चाहिए एक विवाह में प्रेम ईमानदारी और सच्चाई तीनों का होना आवश्यक केवल समाज में प्रतिष्ठा पन की दौलत पे हिस्सा पन है तो यह विवाह सच्चा नहीं होगा ऐसे ही यदि कोई महिला अपनी आर्थिक स्थिति से टांग आकर आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से शादी करती है तो यह भी गलत है क्योंकि उसका आधार गलत है यह कम मस्तिष्क के नियमों के खिलाफ होते हैं नतीजतन ऐसी विवाह तनावपूर्ण और संघर्षों से भरे होते हैं लेखक कहते हैं की यदि कोई महिला या पुरुष इस अध्याय में बताए गए तकनीक को अपने तो ना केवल उन्हें सेहत यह संपत्ति की कमी होगी बल्कि उनके वैवाहिक जीवन में शांति प्रेम और सुरक्षा सुनिश्चित होगी एक संतुलित वैवाहिक जीवन के लिए अभिलेख एक महिला को आदर्श पति को आकर्षित करने के उपाय पर प्रकाश डालते हैं और एक पुरुष को आदर्श पत्नी को आकर्षित करने के लेखक कहते हैं की हमें एक ऐसे आदर्श जीवन साथी की कल्पना करनी चाहिए जिन्हें हम अपने जीवन में चाहते हैं और अपने अवचेतन मां पर उनके गुना की छाप छोड़ने चाहिए ऐसा हम इस प्रार्थना के द्वारा कर सकते हैं इस प्रार्थना को करने से पहले एक स्त्री को सोनी से पहले कुर्सी पर बैठकर आंखें बैंड कर लेनी चाहिए अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़ देने के बाद शांत होकर अपने अवचेतन मां से बात करनी चाहिए और इस वाक्य को दोहराना चाहिए मैं एक ऐसे आदर्श पुरुष को आकर्षित करती हूं जो सच्चा है ईमानदार है शांत है खुश है और समृद्ध है मैं जिन गुना की प्रशंसा करती हूं वो मेरे अवचेतन मां में पहुंच रहे हैं यह मेरी जीवन का हिस्सा बन जाए और मेरा अवचेतन मां इसे सरकार कर दे ऐसी मेरी कामना है ठीक इसी प्रकार पुरुष के लिए निम्नलिखित प्रार्थना हो शक्ति है मैं एक ऐसी महिला को आकर्षित कर रहा हूं जिसके साथ मेरा संतुलन होगा हमारा मेल आध्यात्मिक क्योंकि इसमें प्रेम होगा यह प्रेम हमारी जोड़ी को एक आदर्श बनाएगी मैं जानता हूं की मैं इस महिला को शांति प्रेम और खुशी दे सकता हूं मैं अपने मां को यह आदेश देता हूं स्त्री आध्यात्मिक ईमानदार और निष्ठावान है हमारा सामंजस्य अच्छा है वह खुश मिजाज है मैं अपने ऐसे जीवनसाथी को स्वीकार करता हूं पुस्तक में अपने विचार व्यक्त करते हैं क्या तलाक लेना सही है यह सवाल एक महिला ने लेखक से तब किया जब उसका पति उसे शराब पीकर मारता और पिता था नसे में वो उसके पैसे भी चूड़ा लेट था वो चुपचाप सहती रही क्योंकि वो तलाक को अनैतिक मंत्री थी किंतु जब उसने लेखक से सलाह ली तो लेखक ने कहा की यदि दो दिल प्रेम ईमानदारी और सामंजस्वी में होते हैं तो यह सच्चा विवाह होता है बंधन तो दिलों से होता है लेखक की बात सुनने के बाद महिला समझ गई थी की अब उसे क्या करना है थान लिया की अब वह मजबूरन दांत और मार नहीं सहेगी केवल इसीलिए क्योंकि एक बार किसी ने यह का दिया की आज से तुम पति पत्नी हो लेखक कहते हैं की यदि आप असमंजस में है की क्या करना है तो स्वयं के अवचेतन मां से मार्गदर्शन मांगे हर सवाल का जवाब होता है और यह आपको मिलेगा आपकी आत्मा खामोशी में आपको जो जवाब देगी उसे पर अमल करें आगे लेखक कहते हैं की तलाक की मानसिकता तलाक से पहले शुरू होती है कानूनी कार्यवाही तो बाद में शुरू होती है यह नजरिया विवाह के अस्तित्व को कमजोर करता है जिसमें नफरत एक दूसरे को अलग करती है और प्रेम दोनों को मिलता है तलाक की स्थिति मानसिक नियम के खिलाफ जान के करण होती है एक बार एकदम पति तलाक लेने वाले थे लेकिन लेखक ने उन्हें एक साथ रहने की सलाह दी और प्रार्थना चिकित्सा के बड़े में बताया वह दोनों एक दूसरे के प्रति सद्भावना और प्रेम जताने लगे एक साथ प्रार्थना करने लगे और शाम को बारी-बारी से भजन भी करने लगे उनकी सच्ची कोशिश ने उनके अवचेतन मां में सकारात्मक जागी और उनका वैवाहिक जीवन सुंदर हो गया दंपति को यह सुनिश्चित करना चाहिए की उनके बीच चिड़चिड़ा पर ना हो कई बार पत्नी के चिड़चिड़ा स्वभाव का करण उसे पर ध्यान ना दिया जाना होता है इसीलिए उसकी जीवनसाथी को चाहिए की वह उसे पर ध्यान दें और उसकी सराहन करें ताकि यह चिड़चिड़ापन किसी बड़ी समस्या का करण ना बने यदि पति पत्नी छोटी मोती बटन पर एक दूसरे के खिलाफ सोने लगता हैं तो यह विकृत मानसिकता का रूप धरण कर लेती है और वैज्ञानिक रूप से इसे व्यभिचार कहा जाता है इसका अर्थ है नकारात्मक चीजों पर ध्यान देना इसीलिए लेखक कहते हैं की हमें अपने मतभेदों को कुशलता से मोड देना चाहिए और अपने अवचेतन मां में शांति प्रेम और सामंजस्य बनाना चाहिए ताकि उनकी जीवन में सद्भावना और मधुर संबंधों की उत्पत्ति हो कभी भी अपनी पड़ोसियों या रिश्तेदारों से वैवाहिक समस्या के बड़े में बात करना एक बहुत बड़ी गलती है हमें अपनी निजी बटन का प्रदर्शन बाहर नहीं करना चाहिए अपनी लड़ाइयां को अपनी तक ही सीमित रखना चाहिए क्योंकि इन्हें बाहर बताने से समस्याएं और भी विगत रूप धरण कर शक्ति हैं इसके अतिरिक्त लेखक यह भी कहते हैं की पति पत्नी को एक दूसरे को वैसा बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए जैसा वह चाहते थे क्योंकि इसे उनका अपमान होता है और यह खुशी से मूर्खतापूर्ण होती है जो वैवाहिक जीवन को तबाह कर देती है इन्हीं सुझावों के साथ इस अध्याय का अंत होता है जिसमें हम सीखने हैं की अपने वैवाहिक जीवन में शांति सद्भाव और मधुरता लाने के लिए किस प्रकार हम अपने अवचेतन मां पर सकारात्मक विचारों की छाप छोड़ चमत्कार का सकते चलिए दोस्तों अब हम बढ़ते हैं नए अध्याय की तरफ यानी अध्याय 15 आपका अवचेतन मां और खुशी अध्याय की शुरुआत एक तथ्य से होती है जिसमें लेखक हमें बताते हैं की 19वीं साड़ी की सबसे महान खोज भौतिक शास्त्र में नहीं थी बल्कि यह आस्था से प्रेरित अवचेतन मां के शक्ति की थी हर व्यक्ति में शक्ति का एक ऐसा भंडार है जो कभी खत्म नहीं हो सकता और दुनिया की किसी भी समस्या को परस्त कर सकता है शक्ति का एहसास आपको तब होगा जब आपकी जीवन में सच्ची खुशी और वह आत्मविश्वास आएगा जिससे आप किसी भी कमजोरी से उभर सकते हैं जब आपको यह विश्वास हो जाएगा की आपका अवचेतन मां दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्या उलझा सकता है और बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज कर सकता है और आपके सपनों को सच कर सकता है तब आपको एहसास होगा की आपकी पास कितनी चमत्कारी शक्तियां हैं लेखक कहते हैं की डी बुक ऑफ प्रोवर्ब्स कहती है की जो ईश्वर में भरोसा करता है वह सुखी राहत है यहां ईश्वर का संदर्भ अपने अवचेतन मां से समझिए जब आप सबकी प्रति सद्भाव प्रेम और शांति रखते हैं तो आप अपनी जीवन में इन्हें परिणाम स्वरूप पाते हैं आपके पास खुश रहने की पुरी स्वतंत्रता है इसीलिए इसे चुनिया आपका अभी चेतन मां है इसे अपने आप सरकार कर देगा आपको तो केवल इसे सूचना भर है और पुरी आस्था से पूरे विश्वास से सुबह उठाते ही अपनी आंखें खोलने ही एक सकारात्मक प्रार्थना करें दोस्तों इस प्रार्थना की भी एक वीडियो हमने हमारे चैनल पर बनाई है जिसे सुनकर आपका दिन चमत्कारिक रूप से बादल जाएगा और आपकी जीवन में खुशियां शांति और प्रेम दस्तक देंगे कई सालों पहले एक बार लेखक आयरलैंड गए थे और वहां वह किसान के घर में ठाकरे थे वो किसान बहुत खुशनुमा राहत था वो इतना खुश राहत था की एक दिन लेखक ने उसकी खुशी का राज पूछा किसान ने उसे बताया की यह तो उसकी आदत है वह रात को सोते समय अपने परिवार फसल और जानवरों को दुआएं देता है और अच्छी फसल के लिए ईश्वर को धन्यवाद देता है सुबह वह फिर इसी प्रार्थना को दोहराता है लेखक समझ गए की यह विचार उनके अवचेतन मां में पहुंच जाते हैं और उनकी आदत बन उन्हें खुशी प्रेम और आनंद के रूप में व्यक्त करते हैं इसके लिए यह जरूरी है की आप में खुश रहने की इच्छा हनी चाहिए दुखी तनावग्रस्त और निरसा रहने से जीवन में नकारात्मकता और निकॉन बीमारियां आई है लेखक कहते हैं की हमें इस तरह के विचार कभी नहीं रखती चाहिए की मैं सफल नहीं हो पाऊंगा सभी लोग मेरे खिलाफ है मेरा कम बड़ा है और अब तो इससे भी ज्यादा बड़ा होने वाला है सब कर सकते हैं लेकिन मैं नहीं कर सकता आज का दिन बहुत बेकार है हर चीज बेकार हो रही है तो आप अपनी और केवल ऐसी घटनाओं को आकर्षित करेंगे जो आपको और दुखी करेंगे और ऐसे विचारों को आपकी सच्चाई बना देंगे 19वीं साड़ी के महान दार्शनिक राल्फ वाल्डो एमरसन ने एक बार कहा था की इंसान वही होता है जैसा वो सोचता है और यह सोच आदतन आपकी मस्तिष्क में रहते हैं और आपके जीवन में प्रकट होने लगता हैं दोस्तों कभी भी अपनी खुशियों को सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए जैसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए की यदि मेरे पास इतने पैसे होते तो मैं सुखी होता या ऐसी कर होती ऐसे कपड़े होते ऐसा टेलीविजन होता या ऐसा घर होता तो मैं अधिक सुखी राहत दौलत कभी आपको सुखी नहीं बना शक्ति सच्चा सुख तो मानसिक और आध्यात्मिक अवस्था की एक ऐसी स्थिति से है जिसमें आप सेहतमंद शांत और सद्भाव महसूस करें और कहते हैं सबसे सुखी व्यक्ति वही है जो लगातार अपने अंदर की सर्वश्रेष्ठ स्वरूप को बाहर लता है और उसका अभ्यास करता है ईश्वर हमारे भीतर सबसे ऊंचा और सबसे अच्छा है इसीलिए ईश्वर के प्रति प्रेम आस्था और विश्वास रखना चाहिए सुख और सदगुण एक दूसरे को पूरा करते हैं इसीलिए जिम सदगुण है वो सुखी रहते हैं किसी भी बाहरी चीज से खुद को प्रभावित मत होने दीजिए बल्कि सब कुछ अपने भीतर के ईश्वर को समर्पित कर दीजिए दोस्तों इस पाठ का यही पर अंत होता है जिसमें हमने जाना की किस प्रकार हम सुख का चुनाव कर अपना जीवन शांति और सद्भाव में बिताते हैं खुशी एक अच्छी आदत है और हमें इसका चुनाव करना चाहिए इस पर विचार करना चाहिए प्रतिदिन ईश्वर के प्रति धन्यवाद रखती चाहिए आई दोस्तों बढ़ते हैं अगले पाठ की तरफ जिसका नाम है अध्याय 16 आपका अवचेतन मां तथा सद्भावपूर्ण मानवीय संबंध दोस्तों अब तक हमने जाना की हमारा अवचेतन मां एक रिकॉर्डिंग मशीन की तरह है जिसमें हम जैसी छाप छोड़ते हैं वह वैसी ही ध्वनि उत्पन्न करता है लेखक कहते हैं की हम स्वयं के लिए दूसरों से जैसा व्यवहार चाहते हैं दूसरों के साथ हमें भी वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम चाहते हैं की लोग हमारे बड़े में सोच वैसा ही हमें उनके बड़े में सोचना चाहिए जैसा हम चाहते हैं की लोग हमारे बड़े में महसूस करें हमें भी वैसा ही उनके बड़े में महसूस करना चाहिए जैसा हम चाहते हैं की लोग हमारे लिए कम करें हमें भी उनके लिए वैसा ही कम करना चाहिए लेखक कहते हैं की हो सकता है की आप किसी ऑफिस में कम करते हो और किसी के प्रति उनके सामने विनम्र व्यवहार करती हूं लेकिन पीट-पीछे उनकी बुराई करते हो और उनके प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं यह विचार विनाशकारी है यह हमारे लिए नेगेटिव एनर्जी उत्पन्न करते हैं और हमारी फुर्ती शक्ति और सद्भावना को खत्म कर देते हैं आगे चलकर ऐसी भावनाएं हमारे अंदर बहुत तरह की रोग उत्पन्न करती हैं और तमाम तरह की मुश्किलों से हमारा जीवन दूबर कर देती है लेखक कहते हैं की हमें किसी का भी मूल्यांकन गलत आधार पर नहीं करना चाहिए मूल्यांकन करने का मतलब है की आप किसी के प्रति कैसी सोच रखते हैं किस प्रकार उन्हें जज करते हैं और किसी आधार पर उनके लिए मानसिक फैसला पर पहुंचने हैं यानी आप उन्हें को जज करते हैं यदि एक बार आप अपने अवचेतन मां के नियम को जान लेते हैं और यह समझ जाते हैं की यह किस तरह कम करता है तो आप दूसरों के प्रति सोने महसूस करने और कम करने में सटक रहेंगे क्योंकि ऐसा करके आप अपनी प्रति सही कम विचार और भाव की स्थिति बनाएंगे बर्फी यह भी कहते हैं की जी आधार पर आप दूसरों का मूल्यांकन करते हैं इस आधार पर आपका भी मूल्यांकन होता है आप दूसरों के साथ जितनी भलाई करते हैं वह इस आधार पर आपकी और वापस लौटेगी और आप जितनी बुराई करते हैं वह भी आपके मस्तिष्क के नियम के अनुसार आपकी और वापस लौटेगी इसीलिए लेखक कहते हैं की हमें किसी के प्रति नकारात्मक भावना नहीं रखती चाहिए क्योंकि आप दूसरों के बड़े में जैसा सोचते हैं और महसूस करते हैं अंत में वह की और वापस लौटता है लेखक बताते हैं की एक बारिक सेल्समेन उनसे मिलने आया वो अपनी सेल्स मैनेजर के व्यवहार के करण परेशान था वो 10 साल से जी कंपनी में कम कर रहा था उसे वहां कभी प्रमोशन नहीं मिला उसने लेखक को आंकड़े दिखाएं जींस यह स्पष्ट हो रहा था की बाकी सेल्समेन के प्रमोशन हो गए थे इस वजह से इस सेल्समेन को अपने साथ भेदभाव महसूस होने लगा और बहुत सारे इवेंट्स में मैनेजर इस सेल्समेन की खिलाई उड़ता था जो इसे अपमानजनक भी लगता था लेखक ने सेल्समेन की पुरी बात सुनने के बाद उसे सुझाव दिया की इसका करण काफी हद तक उसकी स्वयं के अंदर है वह मां ही मां मैनेजर के प्रति नकारात्मक भाव रखना था वह मैनेजर की आलोचना और निंदा करता था इसी विचार के करण अवचेतन मां ऐसी परिस्थितियों बनाने लगा जो शीर्ष मां के लिए मुश्किल खड़ी करने लगे लेखक की बातचीत खत्म होने पर सेल्समेन को यह एहसास हो गया की ऐसी परिस्थितियों उसकी अंदरुनी भावना के करण है और वो समझ गया की यह विनाशकारी है लेखक ने सेल्समेन को ऐसी प्रार्थना बताई जिसे दोहराने पर उसके जीवन में चमत्कारी बदलाव आए लेखक ने उसे काल्पनिक मानसिक तस्वीर बनाना भी सिखाया सेल्समेन ने इसका प्रयोग किया और ऐसी काल्पनिक तस्वीर बनाई जिसमें मैनेजर उसकी प्रशंसा करते थे और उसकी तारीफ करते थे उसने अपने इस तस्वीर को अपने अवचेतन मां तक पहुंच दिया और फिर हुआ चमत्कार एक दिन अचानक सेल्समेन के पास फोन आया जिसमें उसके मैनेजर उसे बधाई दे रहे थे और उन्होंने कहा की उसका प्रमोशन कर दिया गया है और इससे उसकी जिम्मेदारियां और तनख्वाह भी बाढ़ गई है दोस्तों इससे हमने शिखा की किस प्रकार किसी का रात्मक मूल्यांकन करने से इसका बड़ा नतीजा हमें ही भुगतना पड़ता है और यदि एक बार इसे सकारात्मक कर लिया जाए तो हमारा जीवन खुशियों और सद्भाव से भर जाता है पुस्तक में लेखक हमें भावनात्मक रूप से परिपक्व बने की सलाह देते हैं वो कहते हैं की कोई व्यक्ति जो चाहे कहे वो आपको तब तक नहीं चड्ढा सकता जब तक की आप उसे भावनात्मक रूप से विचलित करने की अनुमति ना दें कोई व्यक्ति आपको केवल एक ही तरीके से विचलित कर सकता है और वो है आपकी सोच के द्वारा भावनात्मक रूप से परिपक्व बने का मतलब है की हम ऐसी बचकानी प्रवृत्ति से दूर हो जैन जो हमें विचलित करें और हमें भावनात्मक रूप से थिस पहुंचाएं जीवन में केवल अपने लक्ष्य को याद रखें किसी भी व्यक्ति वास्तु या स्थान को यह इजाजत ना दें की वह आपकी शांति और सेहत का दुरुपयोग करें दोस्तों इस दुनिया में बहुत तरह के लोग हैं इसीलिए यह मुश्किल लोगों के रहने की भी बहुत संभावनाएं होती हैं ऐसे लोग अपराधी मानसिकता के होते हैं और समाज के लिए भी मुश्किल ही पैदा करते हैं लेखक कहते हैं की ऐसे लोगों के प्रति नकारात्मक भाव रखना से हम अपने लिए नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं इसीलिए इन लोगों के लिए बुराई के बदले भलाई देने का प्रयास करना चाहिए इससे हम अपने लिए एक ऐसी दल बनाते हैं जो इनके मुश्किल और बुरी नज़रिया का प्रभाव हम पर नहीं पढ़ने देती लेखक कहते हैं की हमें दुनिया में किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन के लक्ष्य उद्देश्य से भड़काने की शक्ति नहीं देनी चाहिए हमें प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने का प्रयास करना चाहिए और मानवता की सेवा और ईश्वर विश्वास रखना चाहिए अपने आदर्श की प्रति हमेशा ईमानदार रहना चाहिए सबसे प्रेम करना चाहिए सेहत खुशी और मानसिक शांति हमें उपहार स्वरूप मिलेगी दोस्तों इस अध्याय का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार भावनात्मक रूप से परिपक्व बने हमारे अवचेतन मां के लिए हम एक दल बना सकते हैं जब हम दूसरों की भलाई करते हैं उनके प्रति दया भावना रखते हैं उनसे प्रेम करते हैं तो यह कई गुना होकर निकॉन प्रकार से हमारे पास वापस लौटती है दोस्तों चलते हैं अगले अध्याय की तरफ यानी अध्याय 17 जिसका नाम है क्षमा के लिए अवचेतन मां का प्रयोग कैसे करें दोस्तों लेखक कहते हैं की ईश्वर का इस दुनिया के दुख और अराजक परिस्थितियों से कोई लेना देना नहीं है यह परिस्थितियों हमारी विध्वंसक सोच का नतीजा होती है इसीलिए अपनी मुश्किल और बीमारी के लिए ईश्वर को दोष देना एक बहुत बड़ी गलती है लोग अपनी बीमारी और कष्ट के लिए ईश्वर की आलोचना करके अपने शरीर में मानसिक अवरोध उत्पन्न करते हैं और छोटे से छोटे तथा बड़ी से बड़ी घटनाओं के लिए ईश्वर को जिम्मेदार ठहरते हैं उन पर गुस्सा होते हैं लेखक कहते हैं की जब तक हम लोग ईश्वर के बड़े में नकारात्मक सोच रखेंगे तब तक हमारा अवचेतन मां इन नकारात्मक चीजों को सच्चाई में बदलते रहेगा लोग यह समझ ही नहीं पाते की ऐसे में वो खुद को ही सजा दे रहे हैं उन्हें सच देखने की हिम्मत बंधनी होगी आत्मनिर्भर बन्ना होगा और किसी भी बाहरी व्यक्ति की निंदा और उनके प्रति राज द्वेष और क्रोध नहीं ए शक्ति जब आप ईश्वर में आस्था रखते हैं उन्हें हर स्थिति में शक्तिशाली मानते हैं तो यह आपके अवचेतन मां पर एक गहरी छाप छोड़ना है और असंख्य त्रिकोण से आपको लाभान्वित करता है लेखक कहते हैं की जीवन का सिद्धांत हमारे लिए किसी प्रकार के दुश्मनी नहीं रखना ये हमेशा माफ करता है हमारे लिए सेहत सद्भाव और शांति का वातावरण बनाने का प्रयास करता है यह तो हमारी नकारात्मक सोच होती है जो इस जीवन के सिद्धांत के प्रवाह को रॉक देती है और अपने हस्तक्षेप से हमारे लिए मुश्किल ही करती है जो सिर्फ मैराफी कहते हैं की हमें दूसरों को माफ करना सीखना चाहिए किसी की भी आलोचना नहीं करनी चाहिए या किसी के द्वारा की गई आलोचना से स्वयं को चोट नहीं पहुंचाना चाहिए दोस्तों अब लेखक हमें बताते हैं की क्यों हमें आवश्यकता पढ़ने पर करूं बने की भी आवश्यकता है करूं बन्ना अर्थात दया भाव रखना वे अपनी जीवन की ऐसी अलग-अलग घटनाओं और उदाहरणों के मध्य से हम एक क्षमा और इसके विभिन्न रूपन का महत्व बताते हैं ऐसे ही एक घटना यह कुछ साल पहले लेखक एक चर्च में शादी करने गए दुल्हन तो तैयार थी लेकिन दूल्हा 2 घंटे तक नहीं आया सभी ने उसके आने का बहुत डर तक इंतजार किया लेकिन फिर भी उसके आने की कोई सूचना नहीं मिली लेखक ने सोचा इतने आंसू बहाने के बाद शायद जिंदगी में यह युवती दूल्हे को कभी माफ नहीं करेगी लेकिन युवती ने लेखक से कहा की मैंने ईश्वर से प्रार्थना की थी पर शायद उसका ना आना ईश्वर का ही मार्गदर्शन है और मैं इसे स्वीकार करती हूं क्योंकि मैं उन्हें पुरी आस्था से मानती हूं युवती आगे कहती है की इस विवाह के लिए बहुत उत्सुक थी लेकिन मुझे लगता है की यह सही समय नहीं है सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि हम दोनों के लिए लेखक ने सोचा की यदि इस समय कोई और व्यक्ति होता तो वह भावनात्मक रूप से टूट जाता और हंगामा मचा देता लेखक कहते हैं की हमारे साथ जो होता है अच्छे के लिए होता है इसीलिए बिना किसी संदेह के इन्हें स्वीकार कर इन पर भरोसा करना चाहिए वैसा ही भरोसा जैसा बचपन में आप अपने माता पिता पर किया करते थे और है लेखक कहते हैं की क्षमा करना प्रेम का ही एक हिस्सा है और क्षमा करने का केवल यह अर्थ नहीं है की आप उसे पसंद करते हैं या उनके साथ अपने संबंध अच्छे रखना चाहते प्रेम और शांति को प्राथमिकता देकर स्थिति सामान्य रखना का प्रयास करते हैं बाइबल कहती है की एक दूसरे से प्रेम करो यह कम इतना भी मुश्किल नहीं है बल्कि इसे हम सब मिलकर कर सकते हैं आप दूसरों के लिए सेहत खुशी शांति और सद्भाव की कामना करें संबंध अपने आप प्रेम पूर्ण हो जाएंगे क्योंकि जैसा हम दूसरों के लिए सोचते हैं और महसूस करते हैं हमारे साथ वैसा ही होता है क्या इससे सरल कुछ और हो सकता है अब लेखक ऐसी एक सकारात्मक घोषणा बताते हैं जिसे हम क्षमा करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं और हमें यह ऐसी असीम शांति दे शक्ति है जिसकी शायद हमने कल्पना भी नहीं की होगी आगे लेखक कहते हैं की याद है आपको आपका वह समय जब आपके दांत निकले गए थे कितना दर्द हुआ था ना लेकिन क्या आपको इसका दर्द अभी भी याद है जाहिर है आप कहेंगे नहीं मुझे दर्द याद है लेकिन महसूस नहीं होता इसी उदाहरण से लेखक को समझना चाहते हैं की जब हम किसी को सचमुच माफ कर देते हैं तो वो घटना हमें याद रहती है लेकिन उसकी चोट हमें महसूस नहीं होती यह क्षमा का एसिड टेस्ट करना है यह क्षमा की सच्ची कल है लेकिन यदि अभी आप उन भावनाओं से आहट होते हैं जिन्हें आपने क्षमा कर दिया है तो शायद आप अभी क्षमा करने की सच्ची कल से काफी पीछे हैं दोस्तों इस अध्याय का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार क्षमा करने से हमारे जीवन में एक नई शांति और सद्भाव की उत्पत्ति होती है यह ना केवल दूसरों के गाव को भारती है बल्कि हमारे चोट पर भी मरहम का कम करती है दूसरों को माफ करना सीखें देश नफरत और दुर्भावना से एन केवल हम अनेक प्रकार के रोगन को आमंत्रित करते हैं बल्कि यह हमारा जीवन भी तनावपूर्ण और परेशानियां से भारत बने लगता है आई दोस्तों बढ़ते हैं 18 अध्याय की तरफ जिसका नाम है आपका अवचेतन मानसिक अवरोध कैसे हट्टा है दोस्तों लेखक कहते हैं की मां लीजिए आपके सामने कोई समस्या ए जाए और आपको कोई रास्ता ना दिखाई दे रहा हो तो आप क्या करेंगे समस्या का हाल समस्या में ही होता है इसीलिए इनकी जवाब जन के लिए हमें अवचेतन मां की शक्ति का प्रयोग करना चाहिए हमें उनका जवाब सुनने का प्रयास करना चाहिए जो वह हमें बताना चाहता है लेखक बताते हैं की किसी आदत को बनाने या तोड़ने के लिए भी अवचेतन मां की शक्ति कारगर है हम सभी अपने आदतों के हिसाब से जीना चाहते हैं याद है जब आपने साइकिल चलाना कर चलाना या तैरना शिखा था तो आपने इन केमोन को बार-बार किया था ताकि कार्य हमारी अवचेतन मां में सेट हो की किस प्रकार उसमें बुरी आदत थी और उसने अपने अवचेतन मां की शक्ति से उसे छोड़ उसे व्यक्ति का नाम बॉब था जब वो लेखक के पास आया तो वह बहुत निरसा था और उसने लेखक से कहा की शराब मेरी नौकरी और मेरे परिवार को पी गई है मेरी पत्नी मुझे बात तक नहीं करती और ना ही मुझे अपने बच्चों से मिलने देती है मैं नहीं जानता की मैं क्या करूं लेखक ने उससे पूछा की क्या आपने कभी शराब छोड़ने की कोशिश नहीं की तो उसने कहा मैंने बहुत बार की और छोड़ी भी है लेकिन कुछ समय बाद इसकी आदत वापस ग जाति है और मेरा मां बेकाबू हो जाता है और फिर मैं नसे में डब जाता हूं उसने बार-बार शराब छोड़ने की कोशिश की और असफल हुआ उसकी असफलता ने उसे तथा विश्वास दिल दिया की अब वह शराब कभी नहीं छोड़ सकता फिर लेखक ने उसे व्यक्ति को चेतन और अवचेतन मां के केमोन में तालमेल बैठना सिखाया इन दोनों की मदद से अवचेतन मां में बाई गई इच्छा सरकार हो जाति है बॉब समझ गया की अब उसे क्या करना है उसने एक स्पष्ट समझना है की उसे उसके अपने विचार के अलावा कोई और चीज ठीक नहीं कर शक्ति इसीलिए उसे बहुत ज्यादा कोशिशें करने की जरूर नहीं है बॉब ने अपने शरीर को शिथिल कर प्रैक्टिस की और उसे निष्क्रिय अवस्था में पहुंच दिया उसने अपने मस्तिष्क में काल्पनिक तस्वीर बनाई जिसमें उसने कल्पना की की उसकी बेटी उसे गले लगा कर उसका स्वागत कर रही है और का रही है डैडी कितना अच्छा हुआ की आप फिर से लोट आए उसने रोज इसी तरह बैठकर मनन किया ध्यान भड़काने पर वह फिर से अपनी बेटी की मानसिक तस्वीर याद करने लगता और उसकी मुस्कान से जैसे उसे लगता की उसका मस्तिष्क जीवंत उठाता उसने इसे जारी रखा क्योंकि उसे पूरा विश्वास था की डर सभी ही सही अवचेतन मां चमत्कार जरूर करेगा उसने शांति से अपने विचारों में संतुलन बनाया और जब भी उसे पीने की तालाब लगती वो अपनी कल्पना को याद करने लगता आज बॉब अपने परिवार के साथ एक सुखी जीवन जी रहा है वो सफल हो गया था क्योंकि उसके विश्वास ने उसकी कल्पना को सच्चाई में बादल दिया आज वह एक ऐसा शांतिपूर्ण जीवन जी रहा है जिससे उसका परिवार बहुत खुश है वो अपने कम में भी सफल है अब लेखक बहुत सारे उदाहरणों के मध्य से हमें अवचेतन मां की शक्ति से परिचित करने का एक बार फिर से प्रयास करते हैं लेखक कहते हैं की यदि हम शराबी या बुरी आदतों की आदि हैं तो हमें इन्हें स्वीकार करना चाहिए इनकी आरोपी से बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कई लोग शराबी इसीलिए बन जाते हैं क्योंकि वह इसे स्वीकार नहीं करते की वे इसे पीते हैं आपको स्वयं से यह घोषणा करनी चाहिए की अब मैं इसे कभी नहीं छोडूंगा लेखक कहते हैं की यदि आप में किसी आदत से छुटकारा अपने की तीव्र इच्छा है तो ऐसा समझ लीजिए की आपका 51% इलाज हो चुका है क्योंकि आप जो भी विचार अपने दिमाग में डालते हैं आपका मस्तिष्क उसे पर कम करने लगता है इसके बाद लेखक शराब घूरी के विभिन्न कर्म पर प्रकाश डालते हैं और कहते हैं की इंसान जैसा सोचता है वो वैसा ही बन जाता है एक शराबी में कुंता और हैं भावना होती है जिससे वह दुश्मनी की भावना उत्पन्न करने लगता है उसके पास ऐसे अनंत बहाने होते हैं जींस वो अपने शराब का बचाव कर सकता है लेकिन असली करण उसके अपने विचार है अब लेखक हमें तीन जादू बताते हैं जिनका इस्तेमाल कर हम अपनी बुरी से बुरी आदत को छोड़ने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं पहले कम है की हम इस स्थिर हो जाना है और अपने दिमाग को शांत कर लेना है अब एक ऐसी अवस्था में पहुंच जाना है जहां हम शिथिल महसूस करें दूसरा कम है की हमें एक छोटा वाक्य लेना है जिसे हम आसानी से याद रख सकें और बार-बार इसका दोहराव करना है तीसरा कम है की सोनी से ठीक पहले हम आंखें बैंड करके इनका दोहराव करें और इनकी कल्पना करें और पूरे विश्वास से इन्हें लगातार करते रहे आपका अवचेतन मां आपको वो शक्ति देगा जिससे आप अपनी बुरी आदतों से छुटकारा का लेंगे और फिर आपको इसके चमत्कार पर विश्वास हो जाएगा दोस्तों इस अध्याय का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार हम अपने अवचेतन मां की शक्ति का प्रयोग सी बुरी आदत को छोड़ने और अच्छी आदत को अपने के लिए कर सकते हैं आशा है आप इन्हें अपने जीवन में अपनाएंगे और बुरी आदतों को छोड़ने का प्रयास करेंगे आई दोस्तों देखते हैं पाठ 19 जिसका नाम है डर को भागने के लिए अवचेतन मां का प्रयोग कैसे करें पाठ की शुरुआत लेखक एक घटना से करते हैं जिसमें वो बताते हैं की किस प्रकार उनके एक विद्यार्थी को एक व्यवसायिक सम्मेलन में भाषण देने के लिए बुलाया गया था और उन्हें 1000 लोगों के सामने भाषण देने के बड़े में सोच कर ही डर ग रहा था उसने अपने डर पर विजय अपने की सूची यह विजय अवचेतन मां की शक्ति के करण ही संभव हो पी क्योंकि उसे विद्यार्थी के अनुसार वह कई रातों तक लगभग 5 मिनट तक कुर्सी पर शांत बैठकर सकारात्मक प्रार्थना करता है इस तरीके से उसके अवचेतन मां ने उसके आदेश पर कम किया और जब भाषण देने का समय आया तो विद्यार्थी ने पूरे आत्मविश्वास से बहुत सफल भाषण दिया लेखक कहते हैं की डर मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है डर ही व्यक्ति की असफलता और निकॉन बीमारियों का करण होता है इस दुनिया में लाखों करोड़ लोग अलग-अलग चीजों से डरते हैं किसी को मौत का डर है तो किसी को बीमारी का किसी को भविष्य का तो किसी को बुढ़ापे का लेकिन डर केवल हमारे दिमाग का एक विचार है इसका यह मतलब है की हम अपने विचारों से ही डेयर हुए हैं यह डर बिल्कुल इस प्रकार का है जैसे किसी छोटे बच्चे को डराया जाता है की उसके बिस्तर के नीचे रक्षा है और वह बच्चा तब तक दारा राहत है जब तक वह इतना परिपक्व नहीं समझ जाए की उसके बिस्तर पीछे कुछ भी नहीं है इसी तरह हमारे अधिकांश डर सच नहीं होते 19वीं साड़ी के एक महान दार्शनिक इमर्शन ने कहा था की जी कम से आप डरते हैं उसे करें और डर की मृत्यु निश्चित है लेखक कहते हैं की मैं इतना डरता था की मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं कभी हजारों श्रोताओं के सामने भाषण दे पाऊंगा यदि इस पुस्तक को आप इस समय सुन रहे हैं को लिख पाऊंगा लेखक ने एमरसन की बात पर अमल किया और अपने डर पर जीत पी लेखक ने हर वो कम किया जिससे वो डरते थे और नतीजतन वह अपने डर से उभर गए दोस्तों आपको याद होगा की पिछले अध्याय में हमने आपको एक गायिका का उदाहरण दिया था लेखक यहां फिर से इस गायिका का उदाहरण देकर कहते हैं की वह युवा ओपरा सिंगर अपने मंच की डर के करण खतरे में पद गई थी जब उसे ऑडिशन के लिए बुलाया गया तो उसने बहुत ही खराब प्रदर्शन किया था हालांकि वो इस बात से दरी हुई थी की अगर वो अपने मंच के डर से नहीं उभरे तो एक बार फिर फेल हो जाएगी उसने अपने डर पर जीत अपने के लिए अपने अवचेतन मां से प्रार्थना की वो एक कमरे में बैठकर अपने शरीर को शिथिल करके सकारात्मक सुझाव दी थी और स्वयं से कहती की मैं बहुत अच्छा गति हूं मैं आत्मविश्वासी हूं एक सप्ताह के भीतर वह आत्मविश्वास से भारी महसूस करने लगी और समय आने पर उसने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया दोस्तों विद्यार्थियों की शिकायत आई है की विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले तक तो सब कुछ याद राहत है और परीक्षा के बाद भी सभी जवाब याद रहते हैं लेकिन परीक्षा के समय उनका दिमाग बिल्कुल खाली हो जाता है ऐसी समस्या केवल उन विद्यार्थियों की ही नहीं बल्कि हमारे जीवन की भी है इसके स्पष्टीकरण के रूप में लेखक कहते हैं की इसका करण हमारे अवचेतन मां का नियम है वो वही विचार सरकार कर देता है जी पर हम सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं और इस दौरान विद्यार्थी सफल होने की अपेक्षा सफलता के डर को प्राथमिकता देते हैं और इसी को सोचते हैं नतीजतन अवचेतन मां उनकी इस असफलता के सोच और डर को सच कर देता है और भुलक्कड़ पर लाकर असफलता उत्पन्न कर देता है डर के निकॉन प्रकार है आगे लेखक जी प्रकार की बात करते हैं वह पानी का डर लेखक बताते हैं की जब वह 10 साल के थे तो अचानक एक स्विमिंग ताल में गिर गए थे और उन्हें तैरना नहीं रहा था वह डूबने लगे उन्होंने बाहर निकालने की पुरी कोशिश की मगर हर कोशिश नाकाम हुई अंत में जब वो पुरी तरह डूबने ही वाले थे तो एक व्यक्ति की नजर उन पर पड़ी और उसने लेखक को बचाया लेखक के मुंह में और फेफड़े में पानी भर आया था और यही करण था की बरसों तक लेखक पानी से डरते रहे एक दिन उन्होंने अपनी समस्या एक वैज्ञानिक को बताई और उन्होंने लेखक को समझाया की आप अभी स्विमिंग ताल में उतारो पानी की तरफ देखो यह तो केवल हाइड्रोजन के दो परमाणुओं और ऑक्सीजन के एक परमाणु से बना एक रासायनिक योगी इच्छा है और ना ही जागरूकता पर तुम्हारे पास तो दोनों है पानी निष्क्रिय है तुम इसे जोर आवाज में कहो की मैं तुम पर जीत अपने वाला हूं और मैं अपने अवचेतन मां की शक्ति से यह जीत का लूंगा फिर लेखक पानी में उतार गए जब उन्होंने अपने सर्वशक्तिमान अवचेतन मां की शक्ति से अपना मानसिक नजरिया बदला और स्वयं में विश्वास रखा तो वह अपने पानी के डर से उभर पानी में जीत गए और आज वो हर सुबह तैरते हैं लेखक कहते हैं की याद रखें आप पानी के मलिक हैं पानी आपका नहीं आगे लेखक ऐसे ही और भी डर से उभरते की तकनीक बताते हैं जिनका प्रयोग हम उसे डर पर जीत अपने में कर सकते हैं यह तकनीक लेखक ने मंच पर खड़े होकर हजारों लोगों को सिखाई देखते हैं की वह कौन सी तकनीक है लेखक बताते हैं की मां लीजिए आपको ऊंची जगह से डर लगता है तो आप कल्पना कीजिए की आप पहाड़ों पर घूम रहे हैं और इसकी सच्चाई को पूरे दिल से महसूस कीजिए वहां की ताजी हवा पहाड़ी फूल और प्राकृतिक छठ के आनंद को महसूस कीजिए यदि आप मानसिक रूप से इसे करते रहेंगे तो आपका शारीरिक डर भी नष्ट हो जाएगा ऐसे ही तकनीक आप हर उसे डर पर जीत अपने के लिए कर सकते हैं जो आपको मुश्किल में डालते हैं आपको तो केवल उसे डर के खिलाफ एक कल्पना करनी है और उसे सफलता पूर्वक अपने अवचेतन मां तक पहुंचकर स्वयं पर पूरा विश्वास रखना है दोस्तों अब लेखक सामान्य और सामान्य डर के बीच अंतर बताते हैं और कहते हैं की जब हम अचानक किसी तेज आवाज से डर जाते हैं या फिर गिरने से जो स्वाभाविक डर हमें महसूस होता है वह सामान्य डर है और यह अच्छा है जैसे सड़क पर चलते समय अपनी और आई गाड़ी को देखकर बचाने के लिए दूर है जाते हैं जिससे आपके टक्कर लगे का डर आपके पीछे हटे से ताल जाता है इसके अलावा बाकी सभी डर असामान्य डर है जो हमारे जीवन में अलग-अलग अनुभवों से पैदा होते हैं इसमें हमें लोगों द्वारा भी डराया जाता है और समय के साथ हमें अलग-अलग चीजों से डर लगता है असामान्य डर का जवाब देने के लिए हमें मानसिक रूप से पहले उसके खिलाफ सोचना चाहिए यह हमारे अवचेतन मां की शक्ति को उसे डर के खिलाफ लड़ने की ताकत जगत है और हमारा मनोबल बढ़ता है और उसे डर के खिलाफ लड़ने का आत्मविश्वास देता है दोस्तों इन्हीं उपाय के साथ इस अध्याय का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की हम अपने अवचेतन मां की शक्ति का प्रयोग किसी भी डर से उबर में किस प्रकार कर सकते हैं आप किसी असामान्य डर पर जीत हासिल कर सकते हैं और तब आप जान जाते हैं की आपका अवचेतन मां किसी भी स्थिति को बादल सकता है और हमारे दिल की बड़ी से बड़ी इच्छा को सरकार कर सकता है इस पुस्तक के अंतिम अध्याय की और जिसका नाम है हमेशा मां से युवा कैसे रहा जाए दोस्तों इस अध्याय में हम जानेंगे की हम किस प्रकार हमेशा अपने मां से युवा बने र सकते हैं लेखक कहते हैं की हमारा अवचेतन मां कभी बुध नहीं होता यह अमर है इसके अलावा हमारे अंदर सत्य शांति सद्भावना धैर्य और दयालुता के ऐसे गन पे जाते हैं जो कभी बूढ़े नहीं होते और अगर हम इन गुना को अपने जीवन में प्राथमिकता देते हैं है और इन्हें फालनी फूल ने देते हैं तो हमारा मां इससे हमेशा युवा बना राहत है समय के साथ हम अपने दिल और दिमाग पर बुढ़ापे का डर हेवी कर लेते हैं और जानबूझकर अपनी सक्रियता को समाप्त कर देते हैं लेकिन इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो ये साबित कर देते हैं की बुढ़ापा तो केवल उम्र का एक बड़ा है और यह उनके मस्तिष्क की रचनात्मक शक्तियों को खत्म नहीं कर सकता लेखक कहते हैं की यह एक ऐसा समय है जब हमारी बुद्धि का उदय अपने चर्म पर होता है लेकिन लोग इस उम्र को दुख का एक नजरिया बनाकर उसका डर अपने जीवन में भर लेते हैं और इसे अपना अंत समझते हैं यह गलत है अपने दिमाग से हमेशा यह बात निकाल देनी चाहिए की 65 70 या 80 साल की उम्र आपके लिए अंत का दूसरा नाम है की यह तो एक नई शुरुआत हो शक्ति है शायद पहले से भी अच्छी और हमें इसकी उम्मीद रखती चाहिए क्योंकि हमारा अवचेतन मां इसे सरकार कर देगा लेखक का मानना है की बुढ़ापा एक दुखद घटना नहीं है बल्कि ये तो एक परिवर्तन है मानव जीवन हमेशा आगे की और चला है और इसका कोई अंत नहीं है हम कभी बुद्धि नहीं होते क्योंकि हमारा जीवन जिसे ईश्वर माना जाता है वह कभी बुध नहीं होता लेखक कहते हैं की बाइबल के अनुसार ईश्वर ही जीवन है और यह अविनाशी है लेखक हमसे यह आग्रह करते हैं की हमें बुढ़ापे को पुरी कृतज्ञता से स्वीकार करना चाहिए इस उम्र की अपनी सुंदर महिमा और नियत होती है जिसमें अनंत शांति सुंदरता सद्भावना प्रेम और समझ के गन होते हैं और यह गन कभी बुद्धि नहीं होते ना ही मरते हैं1:

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