0:00 यूपीपीसीएस प्री में जितना टाइम बचा हुआ 0:01 है अगर आपको एक्चुअली में कट ऑफ निकालना 0:03 है तो ट्राइड एंड टेस्टेड फार्मूला यूज़ 0:05 करो। एससीएस का कंपाइलेशन लिस्टिंग जो 0:08 हमने अपडेट और रिवाइज करके दिया है सिर्फ 0:09 उससे पढ़ाई कर लो। उसके साथ हमारा करंट 0:11 अफेयर लगा लो। नवंबर 2025 से लेके अभी तक 0:13 का पूरा मिसलेनियस पापा जो हम देंगे वो जो 0:15 है पढ़ लेना। इकोनमी पापा वीडियो बजट पापा 0:17 वीडियो विडो ये पढ़ाई वाला काम हो गया। और 0:19 इसके साथ एससीएस की पेड क्वज़ और एसएस की 0:20 टेस्ट सीरीज़ लगा लो। ये तीन चीज करके चाहे 0:22 जैसा पेपर आ जाए ईजी मॉडरेट टपटिकल 0:24 कॉन्सप्चुअल फ़क्चुअल हिंदी हर हाल में कट 0:26 ऑफ आपका आराम से निकल सकता है क्योंकि ये 0:28 तीनों चीज मिला के लगभग 130 से 135 0:30 क्वेश्चन आ जाते हैं भाई कट ऑफ के लिए 0:32 ज्यादा से ज्यादा 90 95 भी अगर सही हो गए 0:35 तो आराम से कट ऑफ निकल जाता है। एक और चीज 0:37 है कि भाई एससीएस की जो टेस्ट सीरीज होती 0:39 है ना उसमें हम उसी तरह के क्वेश्चन बनाते 0:41 हैं जैसे आजकल पूछे जा रहे हैं नए 0:43 डायनेमिक पैटर्न में और जैसे पूछे जा सकते 0:44 हैं आजकल यूपीएससी 2026 के बाद तो जरूर 0:47 इसमें ध्यान दें कि क्वेश्चन की प्रैक्टिस 0:49 सिर्फ ऐसे क्वेश्चन से करें जो एक्चुअली 0:52 जैसे आ सकते हैं आसान क्वेश्चन ईजी 0:54 क्वेश्चन लगाने से कभी कठिन क्वेश्चन 0:55 सॉल्व नहीं होंगे। कठिन अगर क्वेश्चन आ 0:57 रहे हैं एग्जाम में तो कठिन क्वेश्चन की 0:59 ही टेस्ट सीरीज लगानी पड़ेगी जो सिर्फ 1:00 स्टडी फॉर सिविल सर्विज में आपको मिल सकती 1:02 है। हमारी टेस्ट सीरीज आप ऐप से ज्वाइन कर 1:04 सकते हैं। उसको लगाएं पूरा इवन आप हमारी 1:06 टेस्ट सीरीज और पेड क्विज दोनों ऐप से भी 1:07 मिल जाएगी। Telegram में भी मिल जाएगी। 1:08 सिर्फ टेस्ट सीरीज और अगर पेड क्विज भी 1:10 लगा लें आप ना तो भी कम से कम 50% सवाल 1:13 आपका पीसीएस प्री का सही। 1:21 तो अंततः हम लिस्टिंग का वीडियो लेकर 1:23 प्रस्तुत हैं। पर्यावरण और पारिस्थितिकी 1:25 छोटा सा टॉपिक। अगर बाकी विषयों को आप 1:28 जनरल स्टडी के देखेंगे तो उसकी तुलना में 1:30 पर्यावरण और पारिस्थितिकी यानी एनवायरमेंट 1:32 और इकोलॉजी यह सबसे छोटे दायरे में सिमटा 1:35 हुआ होता है। करंट अफेयर इसका एक मेजर 1:37 पोर्शन है लेकिन जो स्टैटिक पार्ट है वो 1:39 सीमित है। सीमित चीजें पढ़कर कम मात्रा 1:42 में चीजों को पढ़कर आप ज्यादा से ज्यादा 1:44 प्रश्नों को सही कर सकते हैं। करंट अफेयर 1:46 आपको वैसे भी पढ़ना है। उसे आप इग्नोर 1:48 करके जा नहीं सकते। छोड़कर जाने का विचार 1:51 तो है नहीं करंट अफेयर को। तो वो पढ़ेंगे 1:53 तो उसमें पर्यावरण और पारिस्थितिकी से 1:55 जुड़े हुए जितने लेटेस्ट चीजें हैं जितने 1:56 लेटेस्ट मुद्दे हैं वो कवर हो जाएंगे। 1:58 बाकी स्टैटिक पार्ट इसका बहुत ज्यादा नहीं 2:00 होता है। तुलनात्मक रूप से बाकी विषयों के 2:03 तो ये आसान चीज है। 2:05 [गला साफ़ करने की आवाज़] जो चीज आसानी से 2:06 कवर हो जाए और ज्यादा से ज्यादा उसका 2:08 आउटपुट आपको मिले। ज्यादा से ज्यादा 2:09 बेनिफिट मिले वह आपको सबसे पहले खत्म करनी 2:12 चाहिए। ठीक है? तो पर्यावरण और 2:14 पारिस्थितिकी उन्हीं मुद्दों में से 2:15 उन्हीं विषयों में से एक। लिस्टिंग का यह 2:18 वीडियो है। लिस्ट यानी पूरी सूची और सूची 2:20 किस चीज की? तो तथ्यों की तथ्य यानी फैक्ट 2:23 पर्यावरण पारिस्थितिकी से जुड़े हुए जितने 2:25 भी हैं जितने आवश्यक हैं वैसे तो बहुत 2:28 सारे हैं लेकिन जितने आवश्यक है और जितने 2:30 स्टैटिक पोर्शन में आपको कवर करके जाने 2:32 चाहिए वो सब यहां मौजूद है। कंपाइलेशन का 2:35 अलग से आएगा। कांसेप्ट वहां पर क्लियर हो 2:37 जाएगा जो फैक्ट है यहां पर आप उसे रट 2:39 लीजिएगा। तो ये एक तरह से रटने वाला काम 2:42 है इस वीडियो में और कुछ नहीं है। 2:43 कांसेप्ट है लेकिन उतने नहीं है। 2:45 कंपाइलेशन में आपको डिटेल वही चीजें 2:47 मिलेंगी। तो उसकी चिंता मत करिए। उसका 2:49 वीडियो अलग आएगा। पहले इसको देख लीजिए। 2:51 जितने फैक्ट है उनको समेट लीजिए। हिंदी 2:54 माध्यम में है लेकिन लिस्ट में या फिर 2:55 किसी फ़क्चुअल चीज में क्या हिंदी और क्या 2:57 अंग्रेजी वही स्थान का नाम, वही 3:00 बायोस्फीयर रिजर्व, वही सारी चीजें आप 3:02 हिंदी में भी देखेंगे। वही सारी चीजें 3:04 अंग्रेजी में देखेंगे। भाई किसी लोकेशन का 3:06 नाम ट्रांसलेट तो आप कर नहीं सकते। तो 3:08 ज्यादातर चीजें आपको आसानी से समझ में आ 3:10 जाएंगी। आप माध्यम किसी भी किसी भी माध्यम 3:13 के हो इससे फर्क नहीं पड़ता है। अगर आप 3:15 हमारे पेड कोर्सर्सेस की जानकारी चाहते 3:17 हैं तो तीन-तीन नंबर दिए हैं भाई। आप किसी 3:19 पर भी संपर्क कर लीजिएगा। इन नंबरों पर आप 3:22 फोन कर सकते हैं और ये नंबर सर का है तो 3:24 इस पे आप सिर्फ WhatsApp कर सकते हैं। फोन 3:26 करेंगे तो कोई जवाब नहीं मिलेगा। ठीक है? 3:28 आगे चलते हैं। तो असली बात शुरू होती है 3:31 यहां से। हर बार जब आप पर्यावरण पढ़ना 3:33 शुरू करते हैं तो ये प्रश्न उठता है कि 3:35 पर्यावरण असल में है क्या? तो वैसे तो 3:38 एनवायरन एनवायरमेंट एनवायरमेंट जो शब्द है 3:41 अंग्रेजी का है ना तो उसका यहां 3:44 ट्रांसलेशन किया गया है कि भाई एनवायरोन 3:46 जो है वो एक फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। 3:48 पर्यावरण से उसका कोई ताल्लुक नहीं है। 3:50 पर्यावरण एक शुद्ध हिंदी का शब्द है जो कि 3:51 संस्कृत से आया हुआ है। तत्सम लेकिन 3:54 इनवायरोन जो है ये फ्रांसीसी शब्द है। 3:56 इनवायरोन का मतलब होता है घेरना। वैसे ही 3:58 हिंदी में परी का मतलब होता है घेरना। परी 4:01 मतलब चारों ओर। परी शब्द जो है ये परिधि 4:04 से बना हुआ है। वृत्त जब आप पढ़ते हैं ना 4:06 रेखा गणित में ज्यामिति पढ़ते हैं 4:08 ज्योमेट्री उसमें वृत्त बनाते हैं। बीच 4:10 में एक केंद्र होता है। आपको एक निश्चित 4:12 त्रिज्या यानी रेडियस मिल मिलती है। मान 4:14 लीजिए 5 सें.मी. 3 सें.मी. आप गोला प्रकार 4:17 उठाते हैं। ठीक है? जो लंगड़ा प्रकार कहा 4:19 जाता है। एक पैर उसका आधा ही होता है। ठीक 4:21 है? उठाते हैं और केंद्र पर ऐसे उसकी सुई 4:24 रखकर घुमा देते हैं। पेंसिल उसके दूसरे 4:26 हिस्से में लगी होती है। और जो चीज बनती 4:28 है जो आकृति आपके सामने बनकर आती है वो 4:30 वृत्त होती है। अब वृत्त का जो ये दायरा 4:33 है ये घेरा है इसी को कहा जाता है परिधि। 4:36 ठीक? एक केंद्र को उसके चारों ओर ये दायरा 4:38 घेर रहा है और यही जो दायरा है ये जो आवरण 4:42 एक तरह का है इसको परिधि कहा जाता है। और 4:44 उसी से यह परी शब्द निकाला गया है। परी का 4:46 मतलब होता है चारों ओर। वैसे ही एनवायरून 4:49 का मतलब होता है घेरना। ठीक। और पर्यावरण 4:53 शब्द को अगर आप देख रहे हैं तो परी के साथ 4:55 एक और चीज जिसमें संधि विग्रह आप करते हैं 4:57 ना तो परिधन आवरण। परिधन आवरण। आवरण मतलब 5:01 ढक्कन। किसी चीज के ऊपर अगर आवरण पड़ा है 5:05 तो आप उसे उठाकर मतलब आवरण को हटाएंगे तभी 5:07 उस चीज का दर्शन होगा। अदरवाइज वो चीज ढकी 5:10 हुई है, सुरक्षित है। जैसे आपने फोर 5:12 व्हीलर खरीदी या टू व्हीलर है आपकी। धूल 5:14 मिट्टी पड़ रही है, धूप से खराब हो रही 5:16 है, बारिश का पानी उस पर जा रहा है। आप एक 5:18 वाटर प्रूफ उस पे कवर डाल दीजिए। ठीक? अब 5:22 क्या हुआ? वो आवरण उसकी रक्षा करेगा। वो 5:24 कवर उसकी रक्षा करेगा। ऐसे ही बहुत सारी 5:26 चीजों को आप आवरण पहना कर रखते हैं। आप 5:28 खुद धूप में निकलते हैं तो ऊपर से सर ढक 5:30 कर जाते हैं या छाता लगा कर जाते हैं तो 5:32 वो भी क्या है? आवरण है। ठीक वैसे ही 5:34 हमारे चारों ओर भी एक आवरण मौजूद है। 5:37 हमारे का मतलब यहां पर समस्त जीव जाति से 5:39 है। समस्त प्राणियों से है। सारे जितने भी 5:42 प्राणी पृथ्वी पर मौजूद हैं इस जैवमंडल 5:44 में। जैवमंडल आगे का शब्द है लेकिन यहां 5:46 इस्तेमाल किया। तो उन सभी जीवों के चारों 5:48 ओर एक आवरण मौजूद है जो कि बाहरी प्रकोपों 5:51 से बाहरी जो आपदाएं हैं या बाहरी जो 5:54 विसंगतियां हैं उनसे उनकी रक्षा करता है। 5:57 और वही जो आवरण है उसको हम पर्यावरण कहते 5:59 हैं। ये एक ऐसा आवरण है जो ना सिर्फ आपको 6:02 ढकता है बल्कि आपको पोषित करता है। आपको 6:04 खाने पीने के लिए चीजें उपलब्ध कराता है। 6:06 आपको रहने के लिए आवास देता है। यही आपका 6:09 आवास है। यही आपकी आजीविका है। यही आपका 6:11 सब कुछ है। और यही आपका रक्षक भी है। 6:13 प्रोटेक्टर भी है। ठीक है? तो यही चीज 6:15 कहलाती है पर्यावरण और मजे की बात यह है 6:17 कि यह दुष्ट स्वार्थी मनुष्य जो है क्षमा 6:20 कीजिएगा शुरुआत में ही इतने अभद्र शब्दों 6:23 का इस्तेमाल किया लेकिन यह मनुष्य ऐसा है 6:25 कि अपने इसी आवरण को खाता जा रहा है। बाकी 6:28 कोई ऐसा गद्दार प्राणी नहीं है जो कि अपने 6:30 ही खोल को काट कर कुतर कर चूहों की तरह 6:32 उसमें छेद बना डाले। लेकिन मनुष्य की 6:34 फितरत ऐसी है कि वो करता है ऐसा। लोग 6:37 कहेंगे कि मैम जी भाषण दे रही हूं। नहीं 6:39 भाषण नहीं दे रहे हैं। लेकिन पर्यावरण आप 6:41 बार-बार पढ़ते हैं तो उसका अर्थ ही क्या 6:43 है? जब आप उसकी गहराई ना समझ सके। चलिए 6:46 तो यहां देखिए एनवायरन का मतलब होता है 6:48 घेरना। 6:50 किसको घेरना? तो जो जैविक घटक है, अजैविक 6:53 घटक है, सबको चारों ओर से घेर कर 6:55 प्रोटेक्ट करना, सुरक्षित रखना। ठीक है? 6:57 अब आगे चलते हैं। जीवन और विकास की 6:59 संभावनाएं इसी घेरे में संभव हो पाती है। 7:01 अगर यह घेरा नहीं होता तो जीवन नहीं होता। 7:04 दूसरा मामला है विश्व पर्यावरण दिवस का। 7:07 तो भाई विश्व पर्यावरण दिवस जो है यह 7:09 स्टॉकहोम कन्वेंशन जो हुआ था, स्टॉकहोम 7:12 सम्मेलन हुआ था, उसी की वर्षगांठ के तौर 7:14 पर सेलिब्रेट किया जाता है। तो 1972 का जो 7:17 स्टॉकहोम सम्मेलन था ये हुआ था स्वीडन 7:20 में। ठीक है? जगह दी हुई है स्वीडन। याद 7:22 रखिएगा। और पहला पर्यावरण दिवस मनाया गया 7:25 उसके ठीक अगले साल जब तय किया गया ये जो 7:28 स्टार होम सम्मेलन है ना यहां तय किया 7:30 जाता है कि अब जब भी अगले बार ये तारीख 7:32 आएगी 5 तारीख 5 जून की तारीख 5 जून से 7:35 लेकर वो चलता है कुछ दिनों तक तो 5 जून की 7:38 तारीख जब अगले साल आएगी या उसके अगले साल 7:40 आती रहेगी तो उसमें हम वर्षगांठ इसकी 7:42 मनाएंगे सेलिब्रेट करेंगे जैसे आप अपना 7:44 जन्मदिन मनाते हैं ना या कोई दिवस मनाते 7:46 हैं बिल्कुल वैसे ही तो अगले साल 5 जून 7:48 1973 यानी ये तारीख देख रहे हैं तो इसमें 7:51 पहला पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और पहली 7:54 थीम इसकी थी केवल एक पृथ्वी। केवल एक 7:57 पृथ्वी ओनली वन अर्थ। ठीक है? 8:01 आगे देखिए यूएईपी यानी यूनाइटेड नेशन 8:04 एनवायरमेंटल एनवायरमेंट प्रोग्राम। ये 8:06 देखें संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम 8:08 जो है इसकी स्थापना हुई 1972 में। सब वही 8:10 73 72 के आसपास के हैं। जो सम्मेलन हुआ था 8:14 स्टॉकहोम में उसी का परिणाम था कि इसकी 8:16 स्थापना होती है। मुख्यालय इस पर्यावरण 8:19 कार्यक्रम का नैरोबी में है। नैरोबी 8:21 अर्थात केन्या में। 8:23 इसके बाद थोड़ा सा अपने देश में आते हैं। 8:25 ये तो पूरी दुनिया की बात हो रही है। 8:27 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 बार-बार 8:30 इससे दोहराद दोहरा कर प्रश्न पूछे जाते 8:33 हैं। तो थोड़ा ठीक से इसको पढ़ लीजिएगा। 8:36 1984 में जब भोपाल गैस कांड होता है, 8:38 रातोंरात जब फैक्ट्री में रिसाव शुरू होता 8:41 है, कार्बाइड की फैक्ट्री रहती है। रिसाव 8:44 वहां शुरू होता है, लीकेज शुरू हो जाता है 8:46 और प्लांट के फटने का ब्लास्ट होने का 8:48 वहां खतरा उत्पन्न हो जाता है। तो तय होता 8:50 है कि भाई वहां से गैस को रिलीज़ कर दो 8:52 ताकि प्रेशर कम हो जाए और ये जो खतरा है 8:54 उसको टाला जा सके। लेकिन समस्या ये रहती 8:57 है कि जो गैस वहां से रिलीज़ होती है वो 8:58 इतनी ज्यादा और पूछा जाता है कौन सी गैस 9:01 रिलीज़ होती है। है ना? तो कुल मिलाकर 9:03 वहां से रिलीज होने के बाद वो गैस कितनी 9:05 तबाही फैलाएगी ये जानते थे वहां पर जो लोग 9:07 थे फैक्ट्री के मालिक थे या जो जितने 9:09 विशेषज्ञ थे चेतावनी भी जारी होती है 9:12 लेकिन रात का समय रहता है और वो चेतावनी 9:14 जब तक लोगों तक पहुंचती है उससे पहले गैस 9:15 पहुंच जाती है और इतनी भारी तादाद में लोग 9:18 मरे थे गिनती सरकारी आंकड़ों में कम आपको 9:21 दिखाई देती है लेकिन असल मौतें और असल जो 9:24 लोगों कीिंदगियां गई थी और बर्बाद हुई थी 9:25 उससे ज्यादा वो कहीं मतलब भारी मात्रा में 9:28 थी तो उसके बाद यह चर्चा उठती है कि ऐसी 9:31 विनाशकारी चीज पर अंकुश होना चाहिए और 9:33 अंकुश होना चाहिए तो संविधान का जो 9:35 अनुच्छेद है 253 9:37 उसका इस्तेमाल करके यह अधिनियम पास किया 9:40 गया और इसमें बहुत सारे प्रावधान है। इसको 9:42 छाता विधान यानी अंब्रेला लेजिसलेशन कहा 9:45 जाता है। पर्यावरण शिक्षा केंद्र की बात 9:48 करें तो इसका जो मुख्यालय है ये अहमदाबाद 9:50 में है यानी गुजरात में स्थापना इसकी 9:52 अगस्त 1984 में ही हुई थी। पर्यावरण में 9:55 हम संरक्षण की बात करते हैं और पूरी 9:57 दुनिया पर्यावरण के संरक्षण की बात कर रही 9:59 है। लेकिन हमारा जो संविधान है उसमें 10:01 पर्यावरण संरक्षण की चर्चा पहले से ही 10:03 मौजूद है। भले ही हम उसको नजरअंदाज कर दे 10:06 और अपने फायदे की चीजों को सिर्फ देखें। 10:08 लेकिन मौजूद है उसमें बातें जैसे। आप 10:11 देखें। सबसे पहले तो 48 ए यह जो संविधान 10:14 का अनुच्छेद आर्टिकल नंबर 48 ए है यह नीति 10:17 निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाला 10:19 आर्टिकल है और इसमें कहा गया कि राज्य के 10:22 द्वारा पर्यावरण की यानी जो हमारे चारों 10:24 ओर की पारिस्थितिकी जीव जाति हैं या 10:27 वनस्पतियां है या समूचा पर्यावरण है उसकी 10:29 रक्षा का प्रयास किया जाना चाहिए। यह 10:32 राज्य का कर्तव्य है और उसके बाद नागरिक 10:34 कर्तव्य भी है। मौलिक कर्तव्य में भी उसका 10:36 वर्णन है। 51 ए का जो क्लॉज़ जी है उसमें 10:40 नागरिकों के कर्तव्य के अंतर्गत भी 10:41 पर्यावरण की रक्षा को जोड़ा गया है। 10:44 नागरिकों के कर्तव्य में बहुत सारे 10:45 कर्तव्य गिनाए गए हैं। बस दिक्कत ये है ना 10:48 कि इसे बाध्यकारी नहीं बनाया गया है। मतलब 10:51 नागरिक नागरिकों के ये कर्तव्य हैं। आपको 10:53 इस कर्तव्य का पालन करना चाहिए। अगर आप 10:55 भारत के नागरिक हैं। लेकिन आपके ऊपर कोई 10:57 ऐसी गला दबाने वाली जबरदस्ती नहीं है कि 10:59 आप पालन करिए ही। 11:01 लेकिन असल में अगर आज के परिप्रेक्ष को 11:03 देखा जाए और लोगों की फितरत प्रवृत्ति को 11:05 देखा जाए तो यह जो मौलिक कर्तव्य हैं इनको 11:08 अनिवार्य बना देना चाहिए। जैसे रूस में 11:10 कुछ हद तक जो मौलिक कर्तव्य हैं उनकी 11:12 अनिवार्यता है और ये वहीं से ये प्रेरित 11:14 भी हैं सोवियत संघ से रूस आज वाला नहीं 11:16 पहले का जो सोवियत संघ ठीक है? तो ये जो 11:19 नागरिक कर्तव्य हैं इनको कंपलसरी बना देना 11:22 चाहिए। सभी को ना भी बनाए तो जो प्रकृति 11:25 की रक्षा वाला है, पर्यावरण की रक्षा वाला 11:27 है, देश की रक्षा वाला है, जीव जातियों की 11:29 रक्षा वाला है उन सब को अनिवार्य बना देना 11:31 चाहिए। ठीक बात है? आगे चलते है। 42वां 11:34 संविधान संशोधन अधिनियम जो है 1976 द्वारा 11:36 ये जोड़ा गया था। मतलब बताया जा रहा है 11:38 मौलिक कर्तव्य कब जोड़ा गया था? तो वो तो 11:40 पॉलिटी में आप वैसे भी कवर कर चुके हैं। 11:42 यहां पर सिर्फ इतना जानना है कि पर्यावरण 11:44 से संबंधित कौन-कौन से आर्टिकल संविधान 11:46 में मौजूद है। बाकी हमें पूरी राज्य 11:48 व्यवस्था से यहां मतलब नहीं। तो पर्यावरण 11:51 कई प्रकार का होता है। मनुष्य के 11:53 दृष्टिकोण से देखा जाए तो तीन प्रकार का 11:55 होता है। भौतिक, अजैविक। ठीक है? जिसमें 11:58 स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल आते हैं। 12:00 जैविक पर्यावरण होता है जिसमें हम लोग आते 12:02 हैं। बाकी प्राणी आते हैं और वनस्पतियां 12:04 आती है। इसके अतिरिक्त एक और पर्यावरण की 12:08 वैरायटी होती है। ये है अपना सांस्कृतिक 12:10 पर्यावरण जिसमें कि धार्मिक, पारिवारिक, 12:12 शैक्षिक, सामाजिक ये सारी प्रणालियां, 12:14 सारा सिस्टम कवर होता है। तो हमने चर्चा 12:17 की स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल की। 12:20 स्थलमंडल मतलब पृथ्वी का 29 फीसदी हिस्सा। 12:23 29% भाग जो है ये स्थलमंडल है यानी जमीन 12:26 है। आप वैसे भी जानते हैं कि पृथ्वी हमारी 12:28 अंतरिक्ष में देखने पर अंतरिक्ष में कहीं 12:30 भी किसी ग्रह से या किसी स्पेस स्टेशन से 12:32 आप देखते हैं नीले रंग की दिखाई देती है। 12:35 उसका ज्यादातर हिस्सा नीला चमकीला गेंद की 12:37 तरह से दिखाई देती है। उसके पीछे वजह है 12:40 इसके सरफेस पर ढेर सारा पानी। तो पानी ही 12:42 ज्यादा है। भले ही पीने लायक ना हो, 12:44 इस्तेमाल के लायक ना हो। महासागरों में 12:46 भरा हो खारा पानी। लेकिन पानी की तादाद 12:48 बहुत ज्यादा है। उसकी तुलना में जमीन यानी 12:50 स्थल खंड काफी कम। तो वही चीज है। 29% 12:53 हिस्सा सिर्फ जमीन है। बाकी जो है जलमंडल 12:55 है और बहुत सारा है। अभी आगे देखेंगे। हां 12:57 पृथ्वी तीन परतों से बनी हुई है। तीन 13:00 परतें सियाल, सीमा और निफे। निफे सबसे 13:03 अंतिम बीच वाली परत है। मतलब केंद्र है 13:05 उसका कोर जिसे आप कहते हैं। और बाकी ऊपरी 13:08 परत जो परपटी कहलाती है यानी क्रस्ट 13:11 कहलाती है। वो सियाल है यानी सिलिकॉन और 13:13 एल्युमिनियम उसमें पाए जाते हैं मूल रूप 13:15 से। बीच का जो हिस्सा है सिलिकॉन और 13:17 मैग्नीशियम वाला वो असल में सीमा है यानी 13:19 उसे आप मध्य भाग अर्थात मेंटल कहते हैं। 13:23 अब मेंटल जो है वो वास्तव में मेंटल है। 13:26 कहने का मतलब ये है कि उसके अंदर केमिकल 13:28 कॉम्बिनेशन बड़े विचित्र हैं। बहुत तरह की 13:31 बहुत तरह के तत्व पाए जाते हैं और बहुत 13:32 तरह की पदार्थों की अवस्थाएं भी पाई जाती 13:34 है। ये बीच का हिस्सा है ना? अंदर कोर है। 13:38 और उसके बाद ऊपर हमारी क्रस्ट है। क्रस्ट 13:40 मूल रूप से पत्थर है। और पत्थर किस तरह का 13:42 है? है वही सिलिकॉन और एलुमिनियम का 13:44 मिक्सचर है। लेकिन बीच का जो हिस्सा जो 13:46 सैंडविच बीच में हो गया है ये चौड़ा भी 13:48 काफी है। असल में इसमें बहुत तरह के 13:51 रसायनों का समायोजन होता है। ठीक? अब आगे 13:54 चलते हैं। ये निफे जो है इसमें ऊपरी 13:56 हिस्सा मतलब कोर की बात हो रही है। तो कोर 13:58 का जो आउटर पार्ट होता है, आउटर कोर होती 14:00 है, बाहरी कोर होती है। वो कैसी होती है? 14:02 लिक्विड स्टेट में है मतलब जेली जैसी है 14:04 और एक दिशा में निश्चित गतिमान है। 14:05 गोल-गोल घूम रही है। जिससे कि 14:07 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड जनरेट होता है 14:09 जो कि पृथ्वी के चारों ओर एक चुंबकीय 14:11 क्षेत्र बनाता है और पृथ्वी को प्रोटेक्ट 14:12 करता है बाहरी जो आपदाएं हैं उनसे मतलब 14:15 सेलेस्टियल जितनी चीजें आती है बाहर से 14:17 चाहे वो सूर्य का विकिरण हो या अन्य चीजें 14:19 हो उनसे प्रोटेक्ट करता है। तो ये घूम रहा 14:21 है लिक्विड और एकदम बीच का जो केंद्र है 14:23 वो पूरी तरह से ठोस है। तो ये संरचना 14:26 हमारी पृथ्वी की है। स्थलमंडल की चर्चा हो 14:28 रही थी, इसलिए इसमें यह जिक्र किया गया कि 14:30 समूची पृथ्वी है कैसी? बाकी जलमंडल कैसा 14:33 है? तो जलमंडल में पृथ्वी की सतह पर नीचे 14:36 और ऊपर मौजूद सारा पानी कवर होता है। 14:39 सिर्फ हम महासागरों की बात नहीं करते जब 14:41 हम जलमंडल की चर्चा करते हैं। उसमें जितना 14:43 भी प्रकार का पानी हो सकता है मतलब जल हो 14:45 सकता है। उसमें से बहुत सारे जल के स्रोत 14:48 या जल का स्वरूप ऐसा है जो कि चट्टानों के 14:51 साथ या अन्य जो भौतिक तत्व है उनके साथ 14:54 बंधा हुआ है। यानी वो मुक्त अवस्था में 14:56 नहीं पाया जाता है और ना हम उसे मुक्त 14:57 अवस्था में प्राप्त करके अभी जो हमारे पास 14:59 टेक्नोलॉजी उपलब्ध है इस्तेमाल कर सकते 15:01 हैं। नहीं कर सकते है ना। तो कुल मिलाकर 15:04 सारे ही प्रकार का जितने भी प्रकार का जल 15:06 का जल राशि मौजूद है, जल का भंडार मौजूद 15:08 है, सबको हम जलमंडल में कवर करते हैं। 71% 15:11 हिस्सा पृथ्वी की जो सतह है, पृथ्वी की जो 15:15 सतह है, उसका 71% हिस्सा पानी से ढका हुआ 15:18 है। और पृथ्वी के कुल सतह क्षेत्रफल का 15:21 यानी जो सरफेस एरिया है उसका लगभग 5. 10 15:24 मिलियन वर्ग कि.मी. ठीक है? 510 मिलियन 15:28 स्क्वायर किलोमीटर जिसमें से कि पानी लगभग 15:31 361 मिलियन किलोमीटर है। मतलब कुल सतह का 15:35 क्षेत्रफल पृथ्वी का कितना है? 510 है और 15:38 उसमें से भी पानी वाला जो हिस्सा है वो 15:40 361 है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बचा 15:43 ही कितना। है ना? अब नंबर आता है इसके बाद 15:46 वायुमंडल का। पृथ्वी के चारों ओर गैसों का 15:48 आवरण है। ये सौभाग्य की बात है। हर 15:51 सेलेस्टियल बॉडी के चारों ओर ये गैसों का 15:53 आवरण यानी वायुमंडल हो यह आवश्यक नहीं। 15:56 सबसे बड़ी सौभाग्य की बात तो यह है और 15:58 अच्छी चीज है कि यह गैसों का आवरण जीवन के 16:01 लिए अनुकूल है जो कि और किसी ग्रह के पास 16:04 ऐसा नहीं है। बहुत से ग्रह हैं जिनका कि 16:06 वायुमंडल है लेकिन जीवन के लिए अनुकूल 16:08 परिस्थितियां नहीं है। वह सिर्फ पृथ्वी के 16:10 पास है। कम से कम अभी तक जितने ज्ञात ग्रह 16:12 और जो पिंड है हमें मालूम हुए हैं मतलब 16:16 जिन पर रिसर्च हुई। ठीक है? ठीक है? तो ये 16:18 जो गैसों का आवरण है ये मूल रूप से पृथ्वी 16:20 के गुरुत्वाकर्षण की वजह से है। अब आप सोच 16:23 रहे होंगे कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ही 16:25 इतना पावरफुल कैसे हो गया? बाकी जो ग्रह 16:28 हैं उनके पास भी होना चाहिए और होता भी 16:29 है। ये तो द्रव्यमान पर निर्भर करता है। 16:31 है ना? तो बृहस्पति के पास सबसे ज्यादा 16:33 गुरुत्वाकर्षण है। लेकिन बृहस्पति के ऊपर 16:35 तो आंधियां चल रही है। असल में मैटर ये 16:38 नहीं करता है कि आपके पास गुरुत्वाकर्षण 16:40 कितना है और कितना द्रव्यमान है। वो तो 16:42 ठीक है कि वो गैसों को बांध कर रखेगा। तो 16:44 बृहस्पति के चारों ओर भी उसका वायुमंडल। 16:46 लेकिन जीवन जीने के लिए अनुकूल जो गैसें 16:48 चाहिए कार्बन डाइऑक्साइड चाहिए, ऑक्सीजन 16:50 चाहिए, नाइट्रोजन भी कुछ हद तक चाहिए। 16:52 बाकी जो छोटी छोटी मात्रा में हमारे 16:55 वायुमंडल में उपस्थित गैसें होती हैं वो 16:57 सब भी चाहिए। ठीक है? सबका समायोजन हमें 16:59 जीवित रहने के काबिल बनाता है या जीवन के 17:01 लिए अनुकूल परिस्थिति बनाता है। तो वो 17:04 सारी उन ग्रहों के पास नहीं है। जो जो भी 17:06 है उनके पास नहीं है। ठीक है? तो कुल 17:09 मिलाकर गुरुत्वाकर्षण के बल पर यह पूरा जो 17:11 वायुमंडल है यह टिका हुआ है और 17:13 गुरुत्वाकर्षण का केंद्र जैसे-जैसे दूर 17:16 होता जाएगा वैसे-वैसे प्रभाव भी कम होता 17:18 जाएगा। तो पृथ्वी पता लगा यहां पर है तो 17:20 गुरुत्वाकर्षण का जो प्रभाव है वो इसी 17:22 दायरे में ज्यादा रहेगा यानी निचले हिस्से 17:24 में। तो क्षोभमंडल और समताप मंडल तक तो 17:26 बढ़िया काम करता है। उसके बाद धीरे-धीरे 17:28 करके थिन होने लगता है, पतला होने लगता 17:30 है। क्षीणता इसमें आने लगती है। क्योंकि 17:33 अब पृथ्वी की पकड़ इन हवाओं के झुंड पर ये 17:36 जो गैसेस हैं इनके ऊपर कम होने लगती है। 17:38 कमजोर पड़ने लगती है। तो ये गैसें जो है 17:40 ना ये बिखरने लगती है। इनके अणु दूर-दूर 17:42 होने लगते हैं और विलीन होने लगते हैं। आप 17:44 देखेंगे कि जो सबसे बाहरी हिस्सा है 17:46 एक्सोस्फीयर जिसे कहा जाता है बहिर्मंडल। 17:48 उसका बाहरी हिस्सा मतलब उसकी जो आउटर 17:51 लिमिट है उसका हम पता नहीं लगा पाते। 17:52 क्योंकि वो अंतरिक्ष में बिखर गया है। 17:54 ग्रेविटी जहां पर जीरो हुई या जहां से 17:57 प्रभाव उसका काम करना बंद किया वहीं से वो 17:59 विलीन हो गया। अंतरिक्ष में कहां विलीन 18:01 हुआ? उसकी बॉर्डर लाइन खींचना मुश्किल है। 18:03 तो यही है निश्चित ऊपरी सीमा नहीं है। 18:05 अच्छा इसके बाद कुछ अजैविक और जैविक तत्व 18:08 हैं। वही बायोटिक एबायोटिक कंपोनेंट। जो 18:11 बायोटिक कंपोनेंट है वो सभी आप जानते ही 18:13 हैं। हम लोग भी उसमें मौजूद हैं। सूक्ष्म 18:15 जीव भी मौजूद है। बहुत सारे हैं। और बाकी 18:17 जितने जीव-जंतु हैं वो आते हैं और 18:19 वनस्पतियां अनिवार्य रूप से आती हैं। है 18:21 ना? अजैविक तत्व वैसे तो जिंदा नहीं होते 18:24 हैं लेकिन जीवन के लिए अनुकूल दशा बनाने 18:26 में और यहां तक कि जीवन को उत्पन्न करने 18:29 में इन्हीं का अभिन्न योगदान है। अगर हम 18:31 अपने शरीर को देखते हैं या किसी भी जीवित 18:33 प्राणी के या जीवित जो चीज है उसके शरीर 18:35 को देखते हैं उसकी संरचना को देखने का 18:38 प्रयास करते हैं बारीकी से साइंटिफिकली तो 18:40 हम पाते हैं कि उसमें वही अजैविक घटक हैं 18:42 जो कि आपस में कॉम्बिनेशन बनाते हैं तो 18:44 कोशिकाएं बनती हैं। डीएनए बनता है। तमाम 18:47 चीजें जो हमारे शरीर के अंदर छोटी से लेकर 18:49 बड़ी तक मौजूद हैं वो सब किससे बनी हुई 18:51 है? वो सब अजैविक तत्वों से ही बनी हुई 18:53 है। तो इन अजैविक तत्वों का ही जो समायोजन 18:55 है यह क्या करता है? यह जीवित प्राणियों 18:58 का निर्माण करता है। जीवित प्राणी कहीं 19:00 जादू से नहीं आ गए कि एकदम से ऐसे मंत्र 19:02 मारा और खड़े हो गए। यह अजैविक तत्वों के 19:05 ही दुर्लभ संयोजन से बने हुए हैं। और इनका 19:07 ये दुर्लभ संयोजन हुआ कैसे आखिर? क्यों 19:10 नहीं है? ऐसे भी हो जाता है कि हम यहां 19:12 कार्बन रख दे, वहां ऑक्सीजन रख दे, वहां 19:14 हाइड्रोजन रख दे और अपने आप कोई प्राणी बन 19:16 जाए। ऐसा नहीं होता है। तो यह दुर्लभ 19:19 संयोजन सूर्य की वजह से हुआ है। सूर्य का 19:22 प्रकाश ही उस जीवन की संभावना को तराशने 19:24 का काम करता है। पत्थर सामने है और शिल्पी 19:27 को बिठा दिया गया। तो शिल्पकार क्या 19:29 करेगा? उस पत्थर को काट छांट कर मनचाही 19:32 आकृति उससे निकाल लेगा। तो वह शिल्पी अपने 19:34 पूरे सौरमंडल में सूर्य है। इसीलिए सूर्य 19:37 को पिता कहा जाता है भारतीय संस्कृति में। 19:39 यह हमें आकार देता है। हमें शरीर देता है। 19:42 ठीक है? और माता है पृथ्वी जहां हमारा 19:45 पालन पोषण होता है। तो जैव तत्व भाई यहां 19:48 आध्यात्मिक होने की बात नहीं की जा रही 19:50 है। अपने अपना जो भारतीय दर्शन है ना वो 19:52 विज्ञान से गहराई से जुड़ा हुआ है। और 19:55 थोड़ा सा रुचि लेकर नहीं पढ़ेंगे तो ये 19:56 तथ्य दिमाग में घुसेंगे भी नहीं। अब आप 19:59 सोच रहे होंगे कि ये परिभाषा क्यों पढ़ाई 20:00 जा रही है? तो परिभाषा से संबंधित आपको वन 20:02 लाइनर ऐसे जो मतलब चार पांच स्टेटमेंट 20:06 देकर और ट्रू फॉल्स खोजने वाले यानी गलत 20:08 सही तलाशने वाले जो प्रश्न होते हैं वो दे 20:10 दिए जाते हैं। तो उसे आप कहां से हल 20:12 करेंगे? जब तक आपको ये समझ में नहीं आएगा। 20:14 बाकी डिटेल कंपाइलेशन में होगा। यहां 20:16 देखिए। अच्छा पर्यावरण की परिभाषा तो आपने 20:19 देखी। पारिस्थितिकी का जरा देख लीजिए। तो 20:22 पारिस्थितिकी जो है इसमें आप देखें कि 20:24 जीवो और उनके भौतिक पर्यावरण। पर्यावरण 20:26 क्या था? जीव को चारों ओर से ढक कर पालने 20:28 पोसने वाला एक ढक्कन आवरण। और 20:31 पारिस्थितिकी क्या है? यह जीवों और उनके 20:33 भौतिक पर्यावरण के बीच के संबंध का 20:35 वैज्ञानिक अध्ययन है। 20:38 जो भी जीवित प्राणी हैं उनका अपने आसपास 20:40 के भौतिक पर्यावरण के साथ, फिजिकल 20:42 एनवायरमेंट के साथ तालमेल होता है और अगर 20:44 वो तालमेल ना रहे तो प्राणी जीवित नहीं रह 20:46 पाएंगे। ये सीधी बात है। तो वह जो तालमेल 20:49 है वो कैसा है? किस तरह का रिलेशन है? 20:52 उसको जानने का प्रयास मनुष्य हमेशा करता 20:54 है। बाकी प्राणी नहीं करते हैं। बाकी 20:56 प्राणी अपना तालमेल बिठाकर रहते हैं। 20:58 प्रकृति के हिसाब से रहते हैं। तालमेल ऐसा 21:01 होता है कि प्रकृति जैसे चलाती है वैसे 21:03 चलते हैं। प्रकृति को अपने हिसाब से ढालने 21:06 का प्रयास नहीं करते हैं। लेकिन मनुष्य 21:07 खुराफाती स्वभाव का है। ज्यादा बुद्धि भी 21:10 दोष का कारण बनती है। तो वह सोचता है कि 21:12 भला ऐसा क्यों है? तो वह अध्ययन करने में 21:15 लग जाता है, रिसर्च करने में लग जाता है 21:17 और वही रिसर्च रिसर्च की जो विधा है, 21:20 रिसर्च का जो विज्ञान है, उसी को कहा जाता 21:22 है इकोलॉजी यानी पारिस्थितिकी। 21:24 तो यह अध्ययन जीवन, पर्यावरण और उनके बीच 21:27 की जटिल अंतर क्रियाओं को समझने में मदद 21:30 करता है। तो परिभाषा यह कहती है कि जीवों 21:33 के पार पारस्परिक 21:35 या वातावरण के साथ मतलब जीवों का आपसी 21:38 तालमेल भी होता है। आपस में भी एक दूसरे 21:40 से लेना देना होता है। ठीक है? तो वह 21:42 पारस्परिक और वातावरण के साथ उनका जो 21:45 संबंध होता है उसका जब आप वैज्ञानिक 21:47 अध्ययन करते हैं उसकी साइंटिफिक स्टडी 21:49 करते हैं तो वही चीज कहलाती है 21:50 पारिस्थितिकी यानी इकोलॉजी। 21:53 अब ये पारिस्थितिकी शब्द और असल में 21:55 पारिस्थितिकी शब्द नहीं वो तो हिंदी 21:57 रूपांतरण है। इकोलॉजी शब्द। इकोलॉजी शब्द 22:01 जो है ये किससे बना हुआ है? यह ओकियोलॉजी 22:05 से बना हुआ है। कहने का मतलब यह है कि 22:06 अर्निस्ट हैकेल नाम के जो व्यक्ति थे यह 22:08 जर्मन साइंटिस्ट हैं और समय था 1866 का। 22:12 ग्रीक भाषा ये है। ओकियोस का मतलब होता है 22:14 या ओकियोस कहा जाता है इसे। इसका मतलब 22:17 होता है घर। ठीक है? घर या फिर रहने का 22:20 स्थान। और लोगोस का मतलब होता है अध्ययन। 22:23 तो हम अपने घर के बारे में पढ़ते हैं। अब 22:25 घर के बारे में अगर आपको अपने घर के बारे 22:27 में रिसर्च करनी हो तब आप क्या करेंगे? 22:30 वहां रहने वाले सारे परिवार के सदस्य 22:32 कौन-कौन से हैं? घर का पूरा जो सिस्टम है 22:35 वह कैसे चलता है? कैसे अर्निंग होती है? 22:38 कहां से बजट बनता है? और कैसे सामान आता 22:40 है? कितनी कितने खर्चे में पूरा निपटारा 22:43 होता है? जो सदस्य हैं उनका आपस में 22:45 तालमेल कैसा है? आपस में उनका व्यवहार 22:47 कैसा है? एक दूसरे से उनकी जो गतिविधियां 22:50 है वो ठीक है या नहीं? किसका किससे ज्यादा 22:52 गहरा कनेक्शन है? किसका किसके बिना काम 22:54 नहीं चल सकता है? है ना? कौन सदस्य उसमें 22:57 कमजोर है? कौन मजबूत है? किसकी क्या 22:58 खासियत है? ये सब आप अध्ययन करेंगे ना अगर 23:01 आपको अपने घर पर रिसर्च करने के लिए कह 23:02 दिया जाए और उतना ही नहीं आप घर जिस जमीन 23:05 पर बना हुआ है घर की बनावट कैसी है कब का 23:08 बना है मजबूत है या कमजोर है कितनी मंजिल 23:10 कितने कमरे वो सब भी देखेंगे तो ठीक वैसे 23:13 ही यहां भी आप अपने घर का अध्ययन कर रहे 23:15 होते हैं और घर है हमारी प्रकृति हमारी 23:17 पृथ्वी ठीक है इसके बाद एक शब्द आता है 23:21 जैव वासिकी 23:23 नाम से शब्द का अर्थ वैसे भी स्पष्ट है 23:25 लेकिन यहां किसने शब्द का इस्तेमाल किया 23:28 मतलब शब्द का पहली पहली बार प्रयोग किया 23:30 तो नाम दिया है ये है आईजे एस हिलेयर ठीक 23:33 है आईजे एस हिलेयर इन्होंने विभिन्न जीवों 23:37 के मध्य आपसी संबंधों का अध्ययन करने वाले 23:39 विज्ञान को कहा जैवसिकी 23:42 ठीक है नाम याद रखिएगा पूछा जाता है किसने 23:45 किस शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसा नहीं है 23:47 कि हिलेयर महोदय जो है वो एकाएक उठे और 23:49 कहे कि जैव वासिकी होती है मतलब ये 23:52 विज्ञान है एक ऐसा नहीं वो शब्द को इजाद 23:54 नहीं कर रहे थे वो तो रिसर्च पेपर लिख रहे 23:56 थे शोध पत्र इन बड़े-बड़े बड़े 23:58 वैज्ञानिकों के होते हैं लंबे चौड़े और उस 24:00 शोध पत्र में तमाम खास शब्दों का उल्लेख 24:03 उल्लेख किया जाता है जो कि लोगों के लिए 24:05 नए होते हैं। टेक्नोलॉजी की साइंस की 24:07 दुनिया में नए होते हैं। तो उन शब्दों को 24:09 उनसे काट कर अलग कर दिया जाता है कि भाई 24:11 इस पूरे लंबे से खर्रे में जो लंबा शोध 24:15 पत्र है रिसर्च पेपर है उसमें ये शब्द है। 24:17 अब इस शब्द को थोड़ा फेमस करते हैं। इस 24:20 शब्द का हम इस्तेमाल करते हैं। ये नया 24:21 मिला है। नई चीज की ओर दिमाग ज्यादा 24:23 आकर्षित होता है। तो वैसे ही अपना पीछे 24:26 आपने इकोलॉजी देखा और यहां पर जैववासिकी 24:28 को देख रहे हैं। अब इसके बाद यहां आ जाइए। 24:30 देखिए प्रारंभिक पारिस्थितिकी दृष्टिकोण 24:32 कैसा था? यानी शुरुआत में जब हमने 24:34 पारिस्थितिकी को और पर्यावरण को पढ़ना 24:35 सीखना समझना आरंभ किया तो वो समय कौन सा 24:39 था? जाहिर सी बात है कि ऐसी जो टेक्निकल 24:42 चीजें हैं अगर हम एकदम इनकी जड़ खोजने 24:44 जाएंगे तो यूनान में जाएंगे। यूनानी 24:46 पुराने जो यूनानी वनस्पति विज्ञानी थे 24:48 इनका नाम था थियोफ्रेड्स। 24:51 लगभग यह बात है 371 से लेकर 287 ईसा पूर्व 24:55 इतिहास की घटनाओं से आप इन्हें जरा तालमेल 24:57 लगाएंगे तो आपको समझ में आएगा कि उस समय 24:59 यहां राजा रजवाड़े शासन कर रहे थे। ठीक 25:02 है? तो यह उन शुरुआती विद्वानों में से एक 25:05 थे जिन्होंने कि पारिस्थितिकी दृष्टिकोण 25:07 को अपनाया था। और पारिस्थितिकी यानी 25:10 इकोलॉजी शब्द बनने से सदियों पहले यह समय 25:13 काफी पीछे का है ना। ये ध्यान दीजिएगा कि 25:15 ये बिफोर जीसस क्राइस्ट ईसा मसीह के जन्म 25:18 से 371 साल पीछे की बात ठीक है आप समझ 25:22 सकते हैं कितना पुराना है तो वही कहा गया 25:24 कि पारिस्थितिकी यानी इकोलॉजी शब्द बनने 25:26 से सदियों पहले ही उन्होंने पौधों का 25:28 अध्ययन करके अध्ययन किया पौधों का अध्ययन 25:31 इसलिए किया क्योंकि पौधे ही पहले आए 25:33 पृथ्वी पर पौधे पहले उगे उसके बाद ही जीवन 25:36 की दशाएं बाकी अन्य प्राणियों के लिए 25:38 अनुकूल बनी तो पौधों का अध्ययन करके उनके 25:40 आवास पर्यावरण की स्थितियों जैसे कि 25:43 जलवायु नमी धूप पहाड़ ढलान इन सब के 25:47 संदर्भ में अध्ययन करके उन्होंने जो 25:48 प्रारंभिक पारिस्थितिकी दृष्टिकोण है उसको 25:51 लोगों के सामने प्रस्तुत किया। लेकिन उस 25:53 समय के जो वैज्ञानिक होते थे वो असल में 25:55 वैज्ञानिक ऐसे लैब वाले वैज्ञानिक नहीं थे 25:57 कि लैब में बैठे हुए हैं वहां पर अपना 26:00 लेकर डीएनए और आरएनए रिसर्च कर रहे हैं या 26:03 फिर कुछ भी मतलब उनके पास इंस्ट्रूमेंट्स 26:05 हैं अपरेटस हैं जिससे कि वो रिसर्च कर रहे 26:08 हैं और सबके सामने ऐसे प्रूफ दिखा रहे हैं 26:10 लिखित प्रूफ दिखा रहे हैं विजुअल प्रूफ 26:12 दिखा रहे हैं लोग मान रहे हैं ऐसा नहीं 26:14 होता था पहले के जो वैज्ञानिक होते थे वो 26:16 असल में दार्शनिक होते थे दर्शन की उनके 26:19 अंदर गहरी समझ होती थी विज्ञान भी दर्शन 26:21 से गहराई से जुड़ा हुआ पहले से ही चाहे वो 26:23 भारतीय दर्शन हो या विदेशी दर्शन हो 26:25 पश्चिमी तो ये दार्शनिक होते थे लोगों को 26:28 ऐसे प्रवचन की तरह सुनाते थे कि पहले 26:30 वनस्पतियां धरती पर आई वनस्पतियों ने अपना 26:33 पूरा साम्राज्य कायम किया और वनस्पतियों 26:35 ने कुछ ऐसी दशा उत्पन्न की जिसकी वजह से 26:37 बागी जीव जो है वो उत्पन्न हुए एक-एक करके 26:39 तो लोग कहते थे कि इनका दिमाग फिर गया है 26:41 चल दिया है तो ज्यादातर लोग इन्हें पागल 26:44 समझते थे मतलब इन दार्शनिकों को सुकरात और 26:46 उनके शिष्यों का भी यही हाल था और बाकी जो 26:49 दार्शनिक हैं उनकी भी स्थिति कुछ ज्यादा 26:51 बेहतर नहीं थी। अभी जब आप ज्योग्राफी 26:53 पढ़ते हैं तो उसमें जियोसेंट्रिक और 26:55 हेलियोसेंट्रिक हाइपोथेसिस आप देखते हैं 26:57 ना तो वो जब आई थी कॉपरनिकस की हो या 27:00 जिसकी भी हो बहुत ज्यादा अकलमंद नहीं समझा 27:02 जाता था। यहां तक कि अल्बर्ट आइंस्टीन के 27:04 भी जमाने में आप देखेंगे कि जब वो जब उनके 27:06 द्वारा थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को दिया जाता 27:08 है तो उस गहरे सिद्धांत को समझने वाले 27:11 बहुत गिने चुने लोग थे और बाकी लोग उनकी 27:13 खिल्ली उड़ाते थे। ठीक है? तो तत्काल में 27:16 आपको समझा जाए ये आवश्यक नहीं है। लेकिन 27:18 जो प्रारंभिक पारिस्थितिकी दृष्टिकोण है 27:20 ये थ थियोफ्लेट्स के द्वारा दिया गया था। 27:24 इन्हें कितनी आलोचना झेल झेलनी पड़ी होगी 27:27 ये समझने वाली बात। समुदाय की अवधारणा 27:31 क्या है? तो पारिस्थितिकी में इस अवधारणा 27:32 को जंतुओं पर लागू करने का जो श्रेय है वो 27:34 कार्ल मोबियस का है। कार्ल मोबियस को याद 27:36 रखिएगा। 1877 काफी बाद के हैं। इकोलॉजिकल 27:40 ट्रांजिशन क्या होता है? इकोलॉजिकल 27:43 ट्रांजिशन यानी पारिस्थितिकी संक्रमण। यह 27:46 कासेप्ट 1976 का है। जॉन बेनेट के द्वारा 27:49 दिया गया था और एक मिडोज़ रिपोर्ट करके 27:52 पेपर जारी हुआ था। इसको द लिमिट टू ग्रोथ 27:54 भी कहा जाता है। इस अवधारणा को उसी से 27:57 लिया गया था। लेकिन मूल रूप से इस अवधारणा 27:59 को मतलब इस कांसेप्ट को सबके सामने रखने 28:01 का और इसे बकायदा एक्सप्लेन करने का काम 28:03 ये जॉन बेनेट का है। तो हमें इसी इन्हीं 28:05 को इसका श्रेय देना चाहिए। ठीक है? ठीक 28:08 है? वैसे ही ये रिसर्च पेपर है। द लिमिट 28:09 टू ग्रोथ मतलब वृद्धि की भी एक सीमा होती 28:12 है। इसके बाद डीप इकोलॉजी को आप देख रहे 28:14 हैं। नॉर्वेजियन ये दार्शनिक है। इनका नाम 28:17 है आर अर्नेनेसनेस। ठीक है? ऑर्नेनेसनेस 28:21 कहा जाता है। तो डीप इकोलॉजी शब्द को 28:23 इन्होंने इस्तेमाल किया। बुखारेस्ट में एक 28:25 कन्वेंशन हो रहा था। एक सम्मेलन हो रहा 28:27 था। वहां पर ये बोल रहे थे, भाषण दे रहे 28:29 थे। उसी में इन्होंने डीप इकोलॉजी शब्द का 28:31 इस्तेमाल किया। जब बड़े लोग बोलते हैं 28:33 उनके दिमाग में कुछ शब्द निकलते हैं या 28:35 फिर शब्द उपजते हैं और उसको वो अपनी जुबान 28:37 से बाहर ले आते हैं तो वह शब्द भले ही 28:39 सुनने में साधारण लगे लेकिन वो अविस्मरणीय 28:42 बन जाते हैं। लोग उन्हें लंबे समय तक याद 28:43 रखते हैं। बाद में इसे अमेरिकी पर्यावरण 28:47 वित्त थे जॉर्ज सेशंस उनके साथ मिलकर आगे 28:50 विकसित किया गया। मामला टेक्नोलॉजी का हो 28:53 और अमेरिका उसमें अपनी टांग ना अड़ाए ऐसा 28:55 नहीं हो सकता है। अच्छा भारत में इसकी 28:56 शुरुआत कैसे हुई? तो भारत में अगर देखा 28:58 जाए गहराई से तो बहुत पहले ही शुरुआत हो 29:00 चुकी थी। हम अपनी प्रकृति को सोचने और 29:03 समझने का प्रयास काफी समय पूर्व स्टार्ट 29:05 कर चुके थे। है ना? गुरुत्वाकर्षण इत्यादि 29:08 के बारे में लोगों को पहले से मालूम था। 29:10 भले ही जग जाहिर नहीं किया गया। हम फालतू 29:12 की चीजों में उलझे रह गए। तो भारत में 29:15 पारिस्थितिकी के जनक थे रामदेव मिश्र। 29:17 इकोलॉजी का इन्हें जनक माना जाता है। ये 29:19 पर्यावरण विद और वनस्पति शास्त्री थे। 29:22 भारत सरकार ने 1972 में पर्यावरण योजना और 29:24 समन्वय के लिए एक संस्थागत तंत्र के रूप 29:26 में नेशनल कम कमेट ऑन कमेट ऑन एनवायरमेंटल 29:30 प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ठीक है नेशनल 29:33 कमेटी ऑन एनवायरमेंटल प्लानिंग प्लानिंग 29:35 एंड कोऑर्डिनेशन एनसीपीसी इसको कहा जाता 29:38 है इसकी स्थापना की थी पूछा जा सकता है कि 29:40 भाई इस समिति की स्थापना कब हुई तो आप समय 29:42 याद रखिए अब इसके बाद क्या होता है कि 29:44 1980 में पर्यावरण विभाग और उसके बाद फिर 29:47 पर्यावरण और वन मंत्रालय स्थापित होता है। 29:49 एक कड़ी में सब जुड़े हुए हैं। सबसे पहले 29:51 एक कमेटी गठित होती है जिसका एनवायरमेंटल 29:54 प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन से कनेक्शन था। 29:56 उसके ठीक कुछ 8 साल बाद लगभग आठ साल बाद 29:59 पर्यावरण विभाग बनता है और फिर उसके 5 साल 30:01 बाद आप देखते हैं कि एक मंत्रालय बन जाता 30:03 है तो पर्यावरण को धीरे-धीरे करके हमने 30:06 महत्व देना सीखा और तब तक हम सचेत हुए जब 30:09 तक कि बहुत विलंब हो चुका है और हमने 30:12 बर्बाद ज्यादा कर लिया है। समष्टि को देख 30:14 लेते हैं। एक निश्चित क्षेत्र में रहने 30:16 वाली एक ही प्रजाति ध्यान दीजिएगा। बारीक 30:18 यहां शब्द का अंतर होगा और शब्दों के अपने 30:21 अर्थ हैं। इसलिए थोड़ा सा ध्यान देकर आपको 30:23 देखना होगा। ठीक है? ठीक है? समष्टि का 30:25 मतलब क्या होता है? एक निश्चित क्षेत्र 30:27 में रहने वाली एक ही प्रजाति के जीवों के 30:29 समूह को समष्टि कहा जाता है। शर्त यह है 30:31 कि एक ही प्रजाति होनी चाहिए। अगर शेर है 30:33 तो शेर ही होना चाहिए। चीता है तो चीता ही 30:36 होना चाहिए। बंदर है तो बंदर ही होना 30:38 चाहिए। मनुष्य है तो मनुष्य ही होना 30:39 चाहिए। और यह जीव ऐसे होने चाहिए जो आपस 30:42 में अंतः क्रिया करें। भाई एक ही प्रजाति 30:44 के जीव हैं तो निश्चित तौर पर आपस में 30:45 अंतः क्रिया करेंगे। प्रजाति अगर अलग होती 30:48 तो भी अंतः क्रिया होती। मतलब एक दूसरे से 30:50 लेना देना होता। है ना? हम अपने जिस माहौल 30:54 में रह रहे होते हैं उसके चारों ओर और भी 30:56 जीव पाए जाते हैं। है ना? आप अपने आसपास 30:59 गाय भैंस को टहलता हुआ देखते हैं। बंदर आ 31:01 जाते हैं। आप पीछे पड़ जाते हैं उनके। 31:03 कुत्ते आसपास मंडराते रहते हैं। है ना? 31:05 बहुत सारे जीव होते हैं। पक्षी तमाम तरह 31:07 के हैं। कीड़े मकोड़े हैं। तो रहते सारे 31:09 जीव हैं आसपास। लेकिन यहां शर्त है कि 31:11 प्रजाति एक ही होनी चाहिए। तब जाकर उनकी 31:13 अंतः क्रिया आपस में हो रही है अथवा नहीं। 31:15 इसको देखेंगे और ऐसे ऐसा जो झुंड है उसको 31:18 हम समष्टि कहेंगे। 31:20 समुदाय क्या होता है? समुदाय में 31:22 प्रजातियां अलग-अलग होती हैं। ठीक है? एक 31:25 क्षेत्र में रहने वाली विभिन्न प्रजातियां 31:27 विभिन्न प्रजातियों के जीवों का जो समूह 31:29 है उसको हम समुदाय कहते हैं। जो कि आपस 31:32 में अंतः क्रिया करते हो। ऐसा ना हो कि सब 31:34 एक पास रह रहे हो और एक दूसरे से कोई मतलब 31:36 ही ना हो। और ऐसा हो ही नहीं सकता है। अगर 31:39 कुछ जीव प्रजातियां जो कि अलग-अलग हैं, 31:41 कुछ हाथी रह रहे हैं, कुछ घोड़े रह रहे 31:43 हैं, कुछ गाय भैंस रह रही है, कुछ मनुष्य 31:46 रह रहे हैं। अगर आसपास रह रहे हैं अगल-बगल 31:50 और उनका हैबिटेट साझा हो रहा है आपस में। 31:53 ठीक है? तो ऐसी परिस्थिति में उनके बीच 31:55 में अंतः क्रिया ना हो, यह हो ही नहीं 31:57 सकता है। तो समुदाय ऐसे ही बनते हैं। 31:59 पर्यावास का मतलब क्या है? पर्यावास 32:01 तात्पर्य है उस भौतिक पर्यावरण से वह 32:04 स्थान जहां कि कोई जीव रहता है। ठीक है? 32:07 मतलब जीव का पता जैसे आप कहीं किसी गली 32:09 में रहते हैं, किसी मोहल्ले में रहते हैं, 32:10 किसी अपार्टमेंट में रहते हैं तो वह आपका 32:13 एक एड्रेस होता है, पता होता है। ठीक वैसे 32:16 ही किसी किसी भी जीव का किसी भी जीवित 32:18 प्राणी का एक पारिस्थितिकीय पता होता है, 32:20 एक प्राकृतिक पता होता है। उसी को हम कहते 32:23 हैं पर्यावास। और इस पते पर आपको मिलेगा 32:25 क्या-क्या? तो उस जीव को रहने के लिए 32:27 स्थान मिलेगा, उस जीव को खाने के लिए भोजन 32:30 मिलेगा, पानी मिलेगा। और सबसे बड़ी बात 32:31 आश्रय मिलेगा। ठीक है? 32:35 पर्यावास यानी हैबिटेट आपने देखा। अब इसके 32:38 बाद नंबर आता है नीश का यानी निकेत का। 32:41 हिंदी में हम लोग कहते हैं निकेत वैसे 32:43 कहते हैं नीश। किसी भी प्रजाति के समस्त 32:46 क्रियाकलाप और कार्यात्मक लक्षण जिसके 32:48 द्वारा वह पर्यावरण के संसाधनों का 32:50 इस्तेमाल करती है। वह कहलाता है निकेत 32:54 यानी नीश। जोसेफ ग्रीनेल्स के द्वारा सबसे 32:57 पहले यह शब्द इस्तेमाल किया गया नीश। इसका 32:59 मतलब ये हुआ कि हैबिटेट में तो कई सारी 33:02 प्रजातियां एक साथ रह सकती हैं। ठीक है? 33:05 मतलब एक पता है, एक कॉलोनी है और उस 33:07 कॉलोनी में बहुत सारे लोग रह रहे हैं। कोई 33:09 प्रोफेसर है, कोई डॉक्टर है, कोई इंजीनियर 33:11 है, सब रह रहे हैं। है ना? लेकिन अगर आप 33:15 नीश की बात करते हैं, निकेत की बात करते 33:17 हैं तो उसमें मतलब नीश जो है ना वो दो 33:20 प्रजातियों के बीच में साझा नहीं हो सकता 33:22 है। क्योंकि नीश जो है वो असल में उनका 33:24 व्यवसाय है। उनके जीने खाने का जरिया है 33:26 और जीने खाने का जरिया अगर आपस में साझा 33:29 होगा तो प्रकृति में तब भीषण टकराव होता 33:31 है। पता लगा जो इनका व्यवसाय है वही इनका 33:34 भी व्यवसाय है। मिस्टर ए का जो व्यवसाय है 33:36 मिस्टर ए का जो जीवन यापन का स्रोत है 33:38 जिससे कि वह जीवित रहेंगे खा पीकर। ठीक 33:40 है? अपना गुजारा करेंगे। वही चीज जो है वो 33:43 B को भी चाहिए। दोनों के बीच में भिड़ंत हो 33:45 जाएगी और उसमें से जो 20 पड़ेगा जो भारी 33:47 पड़ेगा जो योग्य होगा वही जीवित रहेगा। अब 33:50 यहां योग्यतम की उत्तरजीविवता का सिद्धांत 33:52 30 इस पर भी लागू होगा। ठीक है? जो 33:54 सर्वाइव करने की ताकत रखेगा जिसके अंदर 33:56 ज्यादा स्टैमिना होगा वो दूसरे पर भारी 33:58 पड़ जाएगा या तो उसको मार मार डालेगा। और 34:01 नहीं मार पाया तो उस जगह से कम से कम 34:03 खदेड़ देगा कि जाओ कोई दूसरा नीच ढूंढो जो 34:06 कि सिर्फ तुम्हारा हो। किसी दूसरे के नीच 34:08 में साझा मत करो। तो नीश जो है ना वो साझा 34:11 नहीं हो सकता है। ध्यान दीजिएगा। हैबिटेट 34:13 एक हो सकता है। निकेत एक नहीं हो सकता है। 34:15 ये दोनों के बीच का मुख्य अंतर। तो वही 34:18 निकेत की विशिष्टता यहां दी हुई है कि 34:20 किसी भी पर्यावास में दो प्रजातियों का 34:22 निकेत समान नहीं हो सकता है। और अगर समान 34:24 होता है तो स्पर्धा होती है जब तक कि 34:25 दूसरा वहां से चला ना जाए यानी विस्थापित 34:27 ना हो जाए। अच्छा अगला शब्द आता है इकोन। 34:31 यह शब्द बड़े महत्वपूर्ण है। इन सभी से 34:34 प्रश्न बन भी चुके हैं और बनने की पूरी 34:36 पूरी संभावना रहती है। इकोोटोोन होता क्या 34:39 है? दो अलग-अलग पारिस्थितिकी तंत्रों जैसे 34:41 कि वन और घास का मैदान जंगल है और घास का 34:45 मैदान है। दोनों अलग-अलग हैं। या फिर आप 34:48 नदी और समुद्र को ले लीजिए। इनके बीच का 34:50 जो संक्रमण क्षेत्र है वो इकोन कहलाता है। 34:52 जैसे मैंग्रोव, एस््ुरी है ना? ये सब क्या 34:56 है? ये संक्रमण क्षेत्र ही तो है। जैसे 34:57 ए्चुरी है। नदी समुद्र में मिल रही है। 35:00 ए्चुरी बन रही है। या मैंग्रोव का भी जो 35:03 तंत्र होता है। मैंग्रोव क्या है? खारे 35:04 पानी में उगने वाले पौधे हैं, वनस्पतियां 35:06 हैं, गरान जिनको कहा जाता है। तो मैंग्रोव 35:09 भी जो है वो एक तरह का इगोटन है। वहां दो 35:11 तरह के पारिस्थितिकी तंत्र आपस में 35:13 संयोजित हो रहे हैं, मिल रहे हैं। वही चीज 35:16 जंगल और घास के मैदान के बीच की भी हो 35:18 सकती है। तो ये जो इकोन है इनके बारे में 35:20 एक खास बात देखी गई है कि इन पर जो 35:23 पर्यावरण के बदलाव है, पर्यावरण का जो 35:26 संकट है, पारिस्थितिकी संकट जिसको आप कहते 35:28 हैं, उसका गहरा असर पड़ता है। मतलब अगर 35:30 कुछ नष्ट होने की संभावना होती है तो 35:33 विनाश इनको जल्दी प्रभावित करता है। लेकिन 35:35 दूसरी इसकी अच्छी बात क्या होती है कि 35:38 इनके अंदर रीजनरेशन पावर अच्छी होती है और 35:40 रीजनरेशन पावर से भी जो बढ़कर चीज है कि 35:42 ये बहुत ज्यादा प्रोडक्टिव होते हैं। इकोन 35:45 यानी ट्रांजिशन एरिया एक संक्रमण क्षेत्र 35:47 तो जितनी उत्पादकता उन दो अलग-अलग 35:49 पारिस्थितिकी तंत्रों में नहीं होती है 35:51 उतनी इन इस मिश्रित क्षेत्र में होती है। 35:54 इनका दायरा सीमित होता है। ये बहुत ज्यादा 35:56 बड़े दायरे में नहीं फैले होते हैं। लेकिन 35:58 जितने भी दायरे में यह फैले होते हैं, 36:00 उतने में इनका प्रोडक्शन बहुत अच्छा होता 36:02 है, प्रोडक्टिव होते हैं पर्यावरण के लिए। 36:04 यानी बहुत उपयोगी होते हैं। एज इफेक्ट 36:07 दिया हुआ है कि इकोटोन यानि संक्रमण 36:08 क्षेत्र में दो अलग-अलग तंत्रों के मिलने 36:10 की वजह से जीवो की विविधता बहुत ज्यादा 36:12 होती है। उनकी डेंसिटी बहुत ज्यादा होती 36:14 है। दोनों जो मूल तंत्र है उनसे कहीं 36:16 ज्यादा होती है और इसी को एज इफेक्ट कहा 36:18 जाता है। जो बात अभी आपको बताई ना उसी को 36:20 एक परिभाषा में ढाल दिया गया है। इसके बाद 36:23 नंबर आती है यह देखिए। सबसे महत्वपूर्ण 36:26 चीज तो यही है वहन क्षमता। 36:28 और आज के समय में हमारी पृथ्वी अपनी वहन 36:31 क्षमता से कहीं ज्यादा वहन कर रही है और 36:34 करा रही है। जितनी पृथ्वी के पास वहन 36:37 क्षमता है मतलब प्राणियों को ढोने की 36:39 शक्ति है। प्राण जो जीव जातियां हैं उनकी 36:41 आवश्यकता को पूरी करने की शक्ति है। उससे 36:44 कहीं ज्यादा पृथ्वी दबाव झेल रही है। 36:47 संसाधन डगमगा रहे हैं। खत्म हो रहे हैं। 36:49 पृथ्वी चरमरा रही है। जैसे एक टूटी कुर्सी 36:52 पर आप बैठ जाइए। उसके चारों पैर अब टूटने 36:54 की कगार पे हैं और आपका वजन बढ़ता जा रहा 36:56 है। तो वही स्थिति हम मनुष्यों की हो गई 36:58 है। बाकी जीवों की आवश्यकता नहीं बढ़ रही 37:00 है। उनकी आवश्यकता की जो चीजें हैं उनको 37:02 हम खाते जा रहे हैं। हमारी आवश्यकता खत्म 37:04 ही नहीं हो रही है। तो जीवों की वह अधिकतम 37:07 संख्या जिसे कि कोई पर्या विशिष्ट 37:08 पर्यावरण यहां पर्यावरण शब्द का सिर्फ 37:11 इस्तेमाल नहीं किया गया है। विशिष्ट 37:12 पर्यावरण बिना किसी नुकसान के स्थाई रूप 37:15 से पोषित कर सकता है। कोई नुकसान ना हो। 37:17 मतलब पर्यावरण को किसी भी तरह की हानि या 37:19 क्षति ना हो। जितना उस जीव प्रजाति ने 37:22 पर्यावरण से लिया उतना अपने आप वहां पर 37:24 प्रतिपूर्ति हो जाती हो, रिकवरी हो जाती 37:26 हो। ठीक है? ऐसी परिस्थिति हो। जैसे एक 37:29 चारागाह है घास का मैदान। अब वहां पर कुछ 37:32 पशु जो है वो चर रहे हैं। दो-तीन मवेशी 37:34 हैं। दो-तीन घोड़े हो सकते हैं। हाथ ये 37:37 हिरण हो सकते हैं या गाय भैंस ही हो सकती 37:39 हैं। बकरियां हो सकती है। मतलब सीमित 37:41 संख्या में और जो मैदान है घास का वो 37:44 थोड़ा बड़ा है। तो घास बेतहाशा उग रही है। 37:46 वो क्या करते हैं? चर जाते हैं। चर कर 37:48 घासों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं। 37:51 ठीक है? जितना चरते हैं फिर अगले दिन उस 37:53 उतनी ही घास फिर पनप जाती है। फिर चर लेते 37:55 हैं। फिर सीमित हो जाती है। तो ऐसे क्या 37:57 होता है? प्रकृति के अंदर संतुलन बना रहता 37:59 है। सारी चीजें नियंत्रित रहती है। मतलब 38:01 घास भी ज्यादा नहीं होगी। जीवों का पेट भी 38:03 भर जाएगा और पर्यावरण को किसी तरह की 38:05 क्षति भी नहीं पहुंचेगी बल्कि फायदा होगा। 38:07 लेकिन वही कल्पना करिए कि अभी वहां पर एक 38:09 पूरा झुंड आ जाए। बकरियों का, गायों का या 38:12 भेड़ों का और वो रोज वहां पर चढ़ना आरंभ 38:14 कर दे तो घास को उगने का समय ही नहीं 38:16 मिलेगा। यानी रिकवरी का टाइम खत्म हो गया। 38:19 प्रतिपूर्ति का समय खत्म हो गया। एक बार 38:21 फिर से अपने आप को सुधारने के लिए, रिफिल 38:23 करने के लिए प्रकृति को मौका ही नहीं मिल 38:25 रहा है। चारागाह को एक दिन चर कर पूरा 38:27 उजाड़ दिया गया और अगले दिन फिर चरने आ 38:29 गए। तो घास उगेगी ही नहीं, उग ही नहीं 38:31 पाएगी। धीरे-धीरे करके वो जमीन रेगिस्तान 38:34 में बदलने लगेगी। घास की जड़े मिट्टी को 38:36 बांध कर रखती है। अब वहां मृदा अपरदन शुरू 38:38 हो जाएगा। जब घास वहां से हटेगी और उग 38:41 नहीं पाएगी। जब बरसात होगी तो मिट्टी की 38:43 ऊपरी परत धुल जाएगी। जमीन बंजर होगी फिर 38:45 रेगिस्तान बन जाएगी। यह डेजर्टिफिकेशन का 38:48 एक क्रूर स्वरूप आप देखते हैं। कहने का 38:50 मतलब ये है कि ये वहन क्षमता जो है ये वही 38:52 लिमिट है जहां तक कि पर्यावरण हमें अच्छे 38:55 तरीके से खुशी-खुशी दे सकता है। इसके बाद 38:57 अब आगे चलते हैं। पारिस्थितिकी से जुड़ी 39:01 हुई चीजें हम देख रहे थे। अब पारितंत्र से 39:03 जुड़े हुए कुछ इंपॉर्टेंट फैक्ट है उनको 39:04 भी देख लेते हैं। तो पारितंत्र की परिभाषा 39:07 क्या कहती है? किसी क्षेत्र विशेष के 39:09 समस्त जीवों तथा जो निर्जीव भौतिक कारक 39:12 कारक होते हैं उनके बीच होने वाली जटिल 39:15 अन्योन क्रियाओं वाला पर्यावरण 39:18 जो क्रियाएं हैं वो कैसी है? जटिल है। 39:20 काफी उलझी हुई है एक दूसरे से। तो ऐसा जो 39:24 पर्यावरण है यह पारितंत्र को दर्शाता है 39:26 और यह प्रकृति की एक कार्यात्मक इकाई है। 39:29 फंक्शनल यूनिट है। ये स्थिर या फिर 39:31 निष्क्रिय नहीं रहती है। पारितंत्र शब्द 39:34 आया कहां से है? तो ए जी टॉसले नाम के एक 39:36 व्यक्ति थे। 1935 का समय है। उन्हीं के 39:39 द्वारा इस शब्द की रचना की गई थी। ठीक है? 39:42 एजी टॉसले ये सारे नाम आपके लिए कुछ नए 39:45 नहीं है। आप बार-बार इनको पढ़ते हैं। 39:47 ओकेओस और यहां देख रहे हैं आप सिस्टम मतलब 39:50 घर और तंत्र से ये मिलकर बना हुआ है। घर 39:53 का तंत्र जैसे आपके घर का एक सिस्टम होता 39:55 है और वो उसी तरीके से चलता है लंबे समय 39:57 से। ठीक वैसे ही प्रकृति का भी अपना एक 39:59 तंत्र है। अब एजी टंसले की चर्चा है तो 40:02 उनके योगदान को भी देख लीजिए। देखिए टॉसले 40:05 महोदय ने इकोलॉजी के विज्ञान को काफी 40:07 अच्छी परिभाषा दी। न्यू फाइटोलॉजिस्ट नाम 40:10 की एक पत्रिका थी मैगजीन थी। उसकी यह 40:12 स्थापना करते हैं 1902 में। नाम याद 40:15 रखिएगा और 1931 तक इसके संपादक के रूप में 40:19 काम करते हैं। ठीक है? 1931 तक इसके 40:22 संपादक के रूप में काम करते हैं। और उसके 40:25 बाद एजी टंसले जो है ये ब्रिटेन में 40:27 इकोलॉजी के विज्ञान के खोजकर्ता भी माने 40:29 जाते हैं। मतलब कुल मिलाकर बात ये है कि 40:31 अपने देश में तो इनका नाम रहता ही है। 40:33 उसके अलावा एक जो वैज्ञानिक पत्रिका है 40:36 साइंटिफिक मैगजीन है उसके ये संपादक हैं 40:38 और साथ ही साथ एक अह शोध पत्र लिखने वाले 40:42 विचारक दार्शनिक भी हैं। विचारक दार्शनिक 40:45 शब्द का इस्तेमाल यहां पर एक वैज्ञानिक के 40:47 लिए इसलिए किया गया क्योंकि गहराई से 40:48 सोचना और सिर्फ लैब में टेस्ट करके एक 40:51 प्रूफ दिखा देना दोनों में फर्क होता है। 40:53 तो यह जो ऐसे वैज्ञानिक होते थे ना चाहे 40:55 टैंसले को आप देख रहे हैं या इससे पीछे 40:57 वाले अर्निस्ट हेकल वगैरह तो ये सभी अपने 41:00 विचार व्यक्त करते थे कि ऐसा हो सकता है। 41:02 मतलब अपनी हाइपोथेसिस दिखाते थे। 41:06 जो प्राकृतिक पारितंत्र है उसकी भी 41:08 परिभाषा देख लेते हैं। तो प्रकृति में जो 41:10 स्वतः विद्यमान तंत्र होता है। अब स्वतः 41:12 विद्यमान तंत्र बहुत सारे हैं। जैसे जंगल 41:14 का अपना सिस्टम है। रेगिस्तान का अपना 41:16 सिस्टम है। नदियां अपने तरीके से उनके 41:19 अंदर भी एक पूरा पारितंत्र एक पूरी समूची 41:21 सृष्टि मौजूद है। समुद्र का पूछना ही नहीं 41:23 है। और ऐसे बहुत सारे तंत्र हैं। छोटे और 41:26 बड़े कुछ बहुत बड़े हैं तो कुछ बहुत छोटे 41:28 हैं। और ये सारे इकोसिस्टम ज्यादातर नहीं 41:31 बल्कि लगभग सारे इकोसिस्टम जो है वो सौर 41:33 ऊर्जा से चलते हैं। जिन इकोसिस्टम्स को हम 41:35 सोचते हैं कि यह सौर ऊर्जा से नहीं चल रहा 41:37 है। इसके पीछे कोई केमिकल एनर्जी या कुछ 41:39 और भी हो सकता है। लेकिन उसमें जब आप 41:42 गहराई से उतरते हैं और उसका शोध करते हैं 41:44 तो आपको मालूम होता है कि वो जो एनर्जी आप 41:47 समझ रहे थे कि वो केमिकल से आ रही है तो 41:48 केमिकल एनर्जी भी प्रोड्यूस होती है सोलर 41:51 एनर्जी का इस्तेमाल करके। मतलब अंततः जो 41:53 केंद्र है वो सूर्य है। सूर्य से ही सारी 41:56 ऊर्जा नियंत्रित होती है। तो इसमें जितने 41:58 भी तंत्र हैं जितने भी प्राकृतिक 41:59 पारितंत्र चल रहे हैं उनका सिस्टम चल रहा 42:01 है वो सब सोलर एनर्जी से चलते हैं। 42:03 डायरेक्ट अथवा इनडायरेक्ट। 42:06 कुछ के बारे में कहा गया कि हाइड्रोथर्मल 42:08 या फिर वेंट इकोसिस्टम या रासायनिक ऊर्जा। 42:10 तो ये सब कहां से आते हैं? इनका भी जो 42:12 अंतिम स्रोत है ना वो सूर्य ही है। अब 42:15 इसके बाद देखें मानव निर्मित पारितंत्र 42:17 को। तो मनुष्यों के द्वारा निर्मित जो 42:19 पारितंत्र होता है उसमें बगीचे, खेत, 42:21 एक्वेरियम ये सब आएंगे। ये सब सौर ऊर्जा 42:23 पर निर्भर है। इसमें कोई संदेह नहीं है। 42:25 लोग कहते हैं अब देखिए यहां पर देखिए कहा 42:28 गया ना कि खेत सौर ऊर्जा पर निर्भर है। अब 42:30 आप कहेंगे कि देखिए सौर ऊर्जा पर खेत 42:33 निर्भर है। जो नगरीय और औद्योगिक 42:35 पारितंत्र है वो कहां सौर ऊर्जा पर निर्भर 42:37 है। हमें जाड़े में धूप की आवश्यकता होती 42:39 है। गाड़ी और मशीनें चलाने के लिए तो हम 42:41 पेट्रोल डीजल का इस्तेमाल करते हैं। 42:42 सीएनजी चाहिए होता है। एलपीजी चाहिए होता 42:45 है। है ना? तो ये जीवाश्म ईंधन भाई लोग 42:48 कहां से आया? जीवाश्म ईंधन को बनाने के 42:50 लिए भी सौर ऊर्जा इस्तेमाल हुई है। 42:52 जीवाश्म ईंधन और क्या है? ये जीवित प्राणी 42:54 ही तो थे जो कि मर गए फिर दफन हो गए। फिर 42:56 दबाव में जाकर ये काले कीचड़ में कन्वर्ट 42:58 हो गए। पेट्रोलियम बन गए। उसको आप रिफाइन 43:01 कर करके इस्तेमाल करते हैं। तो ये जीवित 43:03 प्राणी आखिर इनका पोषण कैसे हुआ? ये दबे 43:06 और उसके बाद जो भीषण दबाव इन्होंने झेला 43:08 उन सब में जो अंतिम योगदान किसका था? वो 43:11 सोलर एनर्जी का था। तो सारी चीजें सौर 43:14 ऊर्जा से नियंत्रित होती हैं। कोई भी 43:16 इसमें से ऐसा सिस्टम नहीं है जो बिना 43:18 सूर्य के ना चल पाए। माफ़ कीजिएगा बिना 43:20 सूर्य के चल पाए। ठीक है? अच्छा इसके बाद 43:23 आप देखेंगे सबसे बड़ा पारितंत्र क्या है? 43:25 तो सबसे बड़ा पारितंत्र है समुद्र। ये तो 43:27 देख के ही मालूम होता है। जलमंडल का 97% 43:30 हिस्सा यही है। और समुद्री जल में नमक 43:34 पाया जाता है। 85% नमक पाया जाता है। वही 43:37 अपना NaCl सोडियम क्लोराइड। ठीक है? 43:41 एक और परिभाषा है जैवमंडल की। पृथ्वी के 43:44 चारों ओर व्याप्त सबसे बड़ा पारिस्थितिकी 43:46 तंत्र जो कि मृदा यानी मिट्टी, जल और वायु 43:49 की पतली परत से बनता है। ठीक है? उसमें 43:52 मिट्टी भी आ जाएगी, पानी भी आ जाएगी, आ 43:54 जाएगा और हवा भी आ जाएगी। तो इनकी पतली 43:56 परत से बनने वाला जो सबसे बड़े आकार का 43:59 विशालकाय पारिस्थितिकी तंत्र है उसी को हम 44:01 कहते हैं जैवमंडल और यह अपने अंदर रहने 44:04 वाले समूचे जीवों का भरण पोषण करता है। और 44:07 जलीय पारितंत्र के भी प्रकार अब देख लेते 44:09 हैं। अभी तक तो स्थलीय पारितंत्र जो है 44:11 उसको देखा हमने। तो यह जो जलीय पारितंत्र 44:14 है, इसमें पहला प्रकार होता है इसके 44:16 प्रकारों को ही देख रहे थे। तो स्थिर जल 44:18 का लेंटिक और लोटिक। तो जो बहता पानी है 44:22 उसमें आप समझ सकते हैं कौन-कौन चीजें 44:23 आएंगी। नदियां। नदियों की विशेषता यह है 44:26 कि लगातार प्रवाहित होती रहती है। कोई एक 44:28 स्रोत होता है। वहां से निकलती हैं और 44:30 उसके बाद अंततः समुद्र में या किसी बड़ी 44:32 नदी में मिल जाती हैं। स्थिर जल के 44:34 पारितंत्र भी समझना बहुत आसान है। झील, 44:36 झीलों का पानी मतलब झील का मतलब एक बड़ा 44:38 गड्ढा जिसके अंदर पानी स्टोर हो रहा है। 44:41 तालाब उसी का छोटा रूप। दलदल जो है वो भी 44:44 आपके स्थिर जल के ही पारितंत्र कहे 44:46 जाएंगे। क्योंकि अंततः उनके अंदर भी पानी 44:47 ही है। और वह ठहरा हुआ पानी। इसके बाद अब 44:51 नंबर आता है ऐुरी का यानी ज्वार नदमुख 44:55 इसको हिंदी में कहा जाता है ज्वार नदमुख 44:57 वैसे ऐुरी आप कहते हैं नदी का मीठा पानी 45:00 और समुद्र का खारा पानी आपस में जिस स्थान 45:03 पर मिलता है वहां बनती है ए्चुरी डेल्टा 45:06 जितना इनका बड़ा आकार नहीं होता है डेल्टा 45:09 बड़े आकार के होते हैं आमतौर पर ए्चुरी 45:11 उतनी बड़े साइज की नहीं होती है तो दायरा 45:14 इनका भले ही छोटा हो लेकिन नदी और समुद्र 45:17 दोनों की तुलना में ये ज्यादा उत्पादक 45:19 क्षेत्र होते हैं नदी नदी बहुत बड़ी है। 45:21 समुद्र उससे भी कहीं ज्यादा बड़े हैं। 45:23 लेकिन उन दोनों की उत्पादकता की अगर तुलना 45:25 करें तो वह इस ऐरी की उत्पादकता के सामने 45:28 फीकी पड़ जाती है। ठीक है? नर्मदा को आप 45:32 देखते हैं ना अरब सागर में गिरने से पहले 45:33 एक छोटी सी एचुरी बनाती है। तो ऐसी ही 45:36 ऐरिया बनती है। ज्यादातर तब होता है ऐसा 45:38 जब नदी बिना किसी लागपेट के समुद्र में 45:40 समा जाए। यानी बहुत ज्यादा लंबा रास्ता 45:42 उसे ना तय करना पड़े। प्रवाह तेज ही रहे। 45:45 बहुत धीमे प्रवाह के साथ अंत में लंबी 45:47 दूरी तय करते हुए अगर समुद्र में जाकर 45:49 मिलेगी तो बीच में बहुत सारा बहुत सारी जो 45:52 सिल्ट है वो जमा हो जाएगी। डेल्टाओं का 45:54 निर्माण होने लगेगा तो फिर डेल्टा बनेगा 45:56 हिस्ट्री नहीं बनेगी। है ना? बहुत सारी 45:58 वितरिकाएं बन जाएंगी उसकी। आप देखते हैं 46:00 कि पश्चिमी घाट के जो पश्चिमी घाट का फुट 46:03 हिल एरिया है, गिरिपथ क्षेत्र है, वहां से 46:06 निकलने वाली नदियां एक लंबा रास्ता तय 46:08 करती हैं और पूर्वी घाट वाले क्षेत्र से 46:10 ढलान से होते हुए नीचे उतरती हैं और बंगाल 46:12 की खाड़ी में समा जाती हैं। लेकिन इस लंबे 46:14 रास्ते में एक तो उनका बहाव पहले से ही 46:16 धीमा हो चुका होता है। दूसरा जब लंबे 46:19 रास्ते के एकदम आखिरी मुहाने पर पहुंचती 46:21 हैं तो वहां बहुत सारी उनकी 46:22 डिस्ट्रीब्यूटरीज बन जाती हैं। वितरिकाएं 46:23 बन जाती हैं। अब उन वितरिकाओं में बहते 46:26 हुए बीच में सिल्ट का जमाव हो गया तो 46:27 बड़े-बड़े डेल्टा बनते हैं। बड़े-बड़े 46:29 साइज के डेल्टा और वह पूरा पूर्वी घाट की 46:32 चौड़ाई को बढ़ाते हैं तो वह फर्टाइल एरिया 46:34 तो होता है लेकिन ए्चुरी बनने के लिए 46:35 आदर्श संभावना वहां पर नहीं बनती है। 46:38 ए्चुरी बनती है नर्मदा के द्वारा और जो 46:40 पश्चिमी घाट का क्षेत्र है वो इसके लिए 46:42 उपयुक्त भी है। नदियां बहुत ज्यादा संघर्ष 46:44 नहीं करती है। सीधे समुद्र में जाकर धारा 46:47 प्रवाह गिरती हैं। तो ऐसे में कम मौका 46:49 मिलता है और ज्यादा मात्रा में सिल्ट का 46:51 जमाव नहीं होता है। तो एक छोटा सा क्षेत्र 46:53 डेवलप होता है जिसको कि ऐरी कहते हैं। आप 46:55 भूगोल नहीं पढ़ रहे हैं लेकिन पर्यावरण की 46:56 चर्चा है तो उसमें थोड़ी सी ये चीजें आ 46:59 जाती हैं। अब इसके बाद अजैविक घटक है। 47:02 अजैविक घटक में कुछ तो भौतिक होते हैं। 47:04 भौतिक में सबसे अहम चीज है सबसे मुख्य और 47:06 इसके बिना एकदम काम नहीं चलेगा। यह है 47:08 सूर्य का प्रकाश। बाकी जितने घटक आप देख 47:11 रहे हैं वो सब सूर्य के प्रकाश से ही 47:13 कंट्रोल होते हैं। चाहे वो तापमान हो, 47:15 चाहे वो आद्रता हो यहां तक कि दबाव भी। 47:17 दबाव जो है ना वह भी अंततः सूर्य के 47:19 प्रकाश पर ही जाकर केंद्रित होता है। अब 47:23 आप उसके पीछे गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय 47:25 क्षेत्र और परिक्रमण परिभ्रमण ना जाने 47:28 कितनी चीजों को ले आएंगे। लेकिन अंततः अगर 47:30 उसको आप गहराई से पकड़ेंगे ना तो आपको 47:32 लगेगा कि ये सब सोलर रेडिएशन और सोलर 47:34 रेडिएशन से ज्यादा सूर्य की ग्रेविटी पर 47:36 कंट्रोल होते हैं। और उसके बाद आप आगे 47:38 देखें यहां पर जो अजैविक घटक है उसके 47:40 दूसरे प्रकार में अकार्बनिक घटक आते हैं। 47:43 अकार्बनिक घटक में कार्बन डाइऑक्साइड खुद 47:45 है। ध्यान दीजिएगा ये कार्बन अकेला नहीं 47:48 है। यहां पर यौगिक की बात हो रही है। 47:49 दूसरा नाइट्रोजन है, ऑक्सीजन है, पानी खुद 47:52 है, चट्टान हैं। चट्टानों में बहुत तरह के 47:55 तत्व हैं और मिट्टी है। मिट्टी के अंदर भी 47:57 प्रचुर मात्रा में तत्वों का आपस में 47:58 कॉम्बिनेशन है। मिट्टी कैसी है उस पर 48:00 निर्भर करता है। लेकिन ये अकार्बनिक है और 48:03 कार्बनिक में जितने भी कार्बनिक पदार्थ है 48:05 वो सब आ जाएंगे। सभी निर्जीव ही तो है। 48:07 भले ही उनसे सजीवों का निर्माण होता है। 48:09 जैसे प्रोटीन है, लिपिड है। ये सब सजीव और 48:11 निर्जीव के बीच की कड़ी बनते हैं। है ना? 48:14 इनके इनके द्वारा ही एक सजीव शरीर बन पाता 48:16 है। तो अब जैविक घटकों पर थोड़ा और ठीक से 48:20 बात कर लेते हैं। मतलब इनकी थोड़ी और पोल 48:22 खोल लेते हैं। तो इसमें पहले इनको 48:24 वर्गीकृत कर दिया गया है। बंटवारा कर दिया 48:26 गया है। जैविक घटकों में जो पहली वैरायटी 48:29 होती है वो होती है प्रोडक्शन करने वालों 48:31 की। यानी ये होते हैं स्वपोषी। अपना भोजन 48:33 खुद बनाते हैं और दूसरों को भी भोजन 48:35 उपलब्ध कराते हैं। अगर यह बीच में मौजूद 48:37 ना हो तो लोग भूखे मर जाएंगे। कोई सोलर 48:40 पैनल नहीं है कि खड़े होकर चार्ज हो 48:42 जाएंगे। है ना? उन्हें कोई ना कोई माध्यम 48:45 चाहिए। हम मनुष्यों को भी अपने अंदर सूर्य 48:47 ऊर्जा मतलब सूर्य की ऊर्जा को प्राप्त 48:49 करने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। 48:52 तो हरे पौधे, शैवाल और कुछ बैक्टीरिया जो 48:55 कि मूल रूप से प्रकाश संश्लेषण करते हैं 48:57 यानी फोटोसिंथेसिस करते हैं। उसके जरिए 49:00 अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक पदार्थों 49:02 का निर्माण करते हैं। तो ये कहलाते हैं 49:06 उत्पादक। यह अपना भोजन तो खुद बनाते ही 49:08 हैं। सीधे-सीधे शब्दों में अगर कहा जाए तो 49:11 सौर ऊर्जा को सौर विकिरण को यह रासायनिक 49:13 ऊर्जा में परिवर्तित करने की काबिलियत 49:15 रखते हैं। और ये काबिलियत सिर्फ इन्हीं के 49:18 पास होती है। या तो हरे पौधों के पास या 49:20 शैवालों के पास यहां तक कि कुछ बैक्टीरिया 49:22 के पास। ये मनुष्यों के पास या किसी और 49:24 जानवर के पास नहीं होती। हम मनुष्य चाहे 49:28 जितने अकलमंद हो जाए जितनी टेक्नोलॉजी 49:29 हमारे हाथ में आ जाए लेकिन ये पावर कुदरती 49:32 तौर पर हमारे पास नहीं। ठीक है? तो इसके 49:35 लिए हमें निर्भर रहना पड़ता है इन जीवों 49:36 पर यानी हरे पौधों पर, शैवालों पर या फिर 49:39 बैक्टीरिया पर मूल रूप से हरे पौधों पर। 49:42 तो यहां कुछ बैक्टीरिया बैक्टीरिया जो है 49:45 उनके बारे में भी कहा गया कि ये 49:46 काइमोसिंथेसिस का इस्तेमाल करते हैं। कुल 49:48 मिलाकर बात ये है कि यही झुंड है जो कि 49:50 फोटोसिंथेसिस कर सकता है। हम मनुष्य या 49:53 बाकी जीव नहीं कर सकते हैं। इसके बाद नंबर 49:55 आता है खाने वालों का। अभी तो खिलाने 49:58 वालों को आपने देखा। इसमें है सबसे पहले 50:00 उपभोक्ता। यह है परपोषी। दूसरे के दूसरे 50:03 पर आश्रित है और दूसरा मतलब हरे पौधे। 50:07 इसमें पहली वैरायटी पूरी तरह से हरे पौधों 50:09 पर आश्रित है। शाकाहारी। उसके बाद है 50:12 मांसाहारी। मांसाहारी ऐसे हैं जो कि 50:14 शाकाहारी जीवों को खाते हैं। कभी-कभी 50:16 मांसाहारी जीवों को भी खा लेते हैं। मतलब 50:18 कुल मिलाकर इनका मुख्य भोजन है मांस। और 50:21 कुछ प्राणी ऐसे होते हैं जिन्हें जो कुछ 50:23 मिलेगा वह सब खा सकते हैं। मतलब मांस भी 50:25 खा सकते हैं, सब्जियां भी खा सकते हैं। 50:27 यहां तक कि सड़ी गली चीजों का भी सेवन कर 50:29 सकते हैं जो कि अखाद्य है। तो ऐसे जो 50:32 प्राणी होते हैं इनको सर्वाहारी कहा जाता 50:34 है। इसमें कुत्ता, सूअर और कौवे जैसे जीव 50:37 आते हैं और उसके अलावा आप देखेंगे 50:39 मनुष्यों को भी रखा जाता है। ठीक है? तो 50:42 सर्वाहारी प्राणी हां मनुष्य भी 50:44 परिस्थितियां बिगड़ने पर कुछ भी खा सकता 50:45 है। तो उपभोक्ता की श्रेणी ये है। इसके 50:50 बाद है अपघटक और ये हम खाते हैं तो करते 50:52 क्या है असल में? जैसे शाकाहारी जीव है 50:55 मान लीजिए हिरण है तो वो क्या कर रहा है? 50:57 घास चर रहा है। घास से वो रासायनिक ऊर्जा 50:59 को अपने अंदर ट्रांसफर कर रहा है। घास के 51:01 अंदर संचित जो केमिकल एनर्जी है जो कि असल 51:04 में सौर ऊर्जा का ही रूपांतरित रूप है। 51:05 बदला हुआ स्वरूप है। उसको वो इस्तेमाल कर 51:08 रहा है। अपने लिए स्टोर कर रहा है। अब 51:10 हिरण को किसी भेड़िए ने या किसी तेंदुए ने 51:12 या किसी बाघ ने खा लिया। तो बाघ का तो पेट 51:15 भर गया। उसको जो एनर्जी प्राप्त हुई वो 51:16 हिरण के अंदर स्टोर की हुई एनर्जी थी। 51:18 उसका भी सिर्फ एक हिस्सा ही मिलेगा छोटा 51:20 सा। अभी 10% रूल भी देखेंगे। ठीक है? तो 51:23 इस प्रकार से यहां चलता है। मतलब रासायनिक 51:26 ऊर्जा आप शिफ्ट होगी एक जीव से दूसरे जीव 51:28 में। इसके बाद नंबर आता है कुछ अपरदकों 51:31 का। ये क्या करते हैं? जैसे केंचुआ हो 51:34 गया, दीमक हो गया, कण खजूरे भी इसी में 51:36 शामिल होते हैं। ये ऐसे प्राणी होते हैं 51:37 जो कि मृत कार्बनिक पदार्थों को जिन्हें 51:39 कि डेट्रिटस कहा जाता है इनको खा खाते हैं 51:43 और खाते हैं इसके बाद इनके छोटे-छोटे 51:45 टुकड़े तोड़ देते हैं जिससे कि इनका अपघटन 51:47 हो जाता है और ये वापस प्रकृति में विलीन 51:50 हो जाते हैं। ये पूरी प्रक्रिया जो 51:52 प्रकृति के अंदर चल रही है। जीवों का पोषण 51:54 फिर जीवों की मृत्यु एक समय के बाद फिर 51:57 उनके शरीर का विघटन सड़ना गलना फिर उनका 51:59 मिट्टी में मिल जाना नष्ट हो जाना। फिर एक 52:01 बार वहां से ऊर्जा का विमुक्त होना, 52:03 विभिन्न तत्वों का निकलना और पर्यावरण को 52:06 वापस प्राप्त हो जाना, फिर नए जीवों का 52:08 निर्माण ये पूरा चक्र है। चल रहा है। इसे 52:10 सृष्टि का चक्र या प्रकृति का चक्र आप कह 52:12 सकते हैं। इसके बाद है खाद्य श्रृंखला। 52:17 पारितंत्र में भोजन ऊर्जा को भोजन के रूप 52:19 में एक प्राणी से दूसरे प्राणी तक 52:21 पहुंचाने वाली जो कड़ी होती है, उसको कहा 52:23 जाता है उत्पादक। 52:26 मतलब शुरुआत यहीं से होती है ना यह कहने 52:29 का मतलब है। तो उसको कहा जाता है खाद्य 52:31 श्रंखला। ठीक है? कहने का मतलब यह कि 52:34 ऊर्जा का ट्रांसफर हो रहा है एक व्यक्ति 52:36 से एक ट्रॉपिक लेवल से दूसरे ट्रॉपिक लेवल 52:39 में। दूसरे ट्रॉपिक लेवल से तीसरे ट्रॉपिक 52:42 लेवल में और 100% नहीं ट्रांसफर हो रहा 52:44 है। सिर्फ 10% रूल लागू होता है। 100% का 52:47 भी 10% 100 का भी 10% फिर जितना 10% 52:51 प्राप्त हुआ उसका भी 10% प्रतिशत मतलब 52:53 कहने का तात्पर्य ये है कि ये जो 10% रूल 52:55 है ये क्या होता है? घटाता जाता है ऊर्जा 52:58 को। मतलब एक ट्रॉपिक लेवल से जब दूसरे 53:00 ट्रॉपिक लेवल में ऊर्जा का रूपांतरण होता 53:02 है, ट्रांसफर होता है तो वहां पर ऊर्जा की 53:04 मात्रा बहुत सीमित हो जाती है। यही वजह है 53:06 कि खाद्य श्रंखलाएं बहुत ज्यादा लंबी नहीं 53:08 होती है। ये चार या पांच ट्रॉपिक लेवल तक 53:11 मैक्सिमम जाती है। उसके बाद लंबी नहीं 53:12 खींच पाती है। वहीं समापन हो जाता है। तो 53:15 ये कड़ी है। चराई खाद्य श्रृंखला या घास 53:18 के मैदान की खाद्य श्रृंखला आप इसको 53:20 कहेंगे। इसकी शुरुआत हरे पौधों से होती 53:22 है। यानी स्वपोषी जो उत्पादक है वहीं से 53:24 होती है। और इन स्वपोषी जीवों को खाने 53:26 वाले शाकाहारी माफ़ कीजिएगा स्वपोषी जीव का 53:30 मतलब यहां पर पौधों से है। तो इन पौधों को 53:32 खाने वाले जो जीव है वो शाकाहारी जीव 53:35 कहलाएंगे। और इन शाकाहारी जीवों को खाने 53:37 वाले मांसाहारी होंगे। यह स्थलीय और जलीय 53:40 दोनों पारितंत्रों में पाया जाता है। 53:41 ध्यान दीजिएगा। इसके बाद एक और खाद्य 53:44 श्रंखला यानी एक और फूड चेन बनती है जो कि 53:46 है अपर्द खाद्य श्रंखला। इसमें मृत 53:49 कार्बनिक पदार्थों से सब कुछ शुरू होता 53:51 है। मरे हुए जो जीव हैं, सड़े गले पदार्थ 53:53 हैं जिनके अंदर कार्बन मौजूद है वहां पर 53:57 बैक्टीरिया काम करते हैं और वो क्या करते 53:59 हैं? इन्हें छोटे-छोटे सरल अणुओं पे 54:01 तोड़ने का काम करते हैं। उससे उन्हें तो 54:02 पोषण मिलता ही है। साथ ही साथ इनके जो 54:04 जटिल अणु हैं, जटिल कार्बनिक पदार्थ है, 54:07 पूरा जो जमा जमाया शरीर है वो विघटित हो 54:10 जाता है और सड़ गल कर अंत में प्रकृति में 54:12 विलीन हो जाता है। इसके बाद अब नंबर आता 54:14 है खाद्य जाल का क्योंकि प्रकृति बहुत 54:16 उलझी हुई चीज है। ये पूरा पारितंत्र सिर्फ 54:20 एक फूड चेन से नहीं चल सकता है। सिर्फ कुछ 54:22 प्रकार के प्राणियों से नहीं चल सकता है। 54:24 अनगिनत प्रजातियां हैं और उतनी ही ज्यादा 54:26 उलझी हुई फूड चेन है। एक फूड चेन बनी, एक 54:29 खाद्य श्रृंखला बनी, फिर दूसरी बनी, फिर 54:30 तीसरी बनी। और यह आसपास ही बनती गई। तो जब 54:33 आसपास बनती गई, तो इनका आपस में इंटरेक्शन 54:36 होने लगा। मतलब एक ट्रॉपिक लेवल वाली जो 54:38 फूड चेन है, वो चली जा रही है। चली जा रही 54:41 है। दूसरी उसके पैरेलल जा रही है। फिर 54:43 तीसरी उसके पैरेलल जा रही है। और फिर 54:45 इन्हें इन इन जो फूड चेन है, इनके अंदर जो 54:48 मौजूद जीव जातियां हैं, वो एक दूसरे से 54:51 लेनदेन कर रही हैं। मान लीजिए कि बीच में 54:53 कहीं कोई कमी आ गई तो फिर ये जो जीव 54:55 जातियां हैं ये क्या करेंगी? जो अपने बगल 54:57 वाली सबसे नजदीकी फूड चेन होगी उससे 54:59 कांटेक्ट करेंगी और वहां पर उपस्थित 55:01 पदार्थ से अपना काम चला लेंगी। इससे क्या 55:03 होगा? यह प्रजातियां नष्ट होने से बच 55:05 जाएंगी। भले ही जो संसाधन है वो सीमित हो 55:08 गए। यहां पर मान लीजिए समाप्त हो गए तो 55:10 संसाधन इन्होंने मतलब जो रिसोर्सेज हैं 55:12 यहां से प्राप्त कर लिए। इनमें कम हुआ तो 55:14 इन्होंने यहां से प्राप्त कर लिए। इनके 55:16 अंदर जो कम है यहां से भी ले सकते हैं। 55:18 मतलब आपस में इनका भी इंटरेक्शन चलता रहता 55:20 है। तो ऐसे करके ये जो खाद्य श्रृंखलाएं 55:22 हैं ना ये पूरा ऐसे जाल बन जाती है। उलझ 55:24 जाती है। एक नेट तैयार हो जाता है। इसीलिए 55:27 इसका नाम रखा गया है खाद्य जाल। ये खाद्य 55:29 श्रृंखलाओं का ही पूरा आपस में तालमेल है 55:31 यानी उलझा हुआ स्वरूप। 55:33 तो एक जंतु जो है वह कई सारी खाद्य 55:36 श्रंखलाओं का मेंबर हो सकता है। एक फूड 55:38 नेट के अंदर आप देखेंगे कि एक प्राणी बहुत 55:41 सारी खाद्य श्रंखलाओं में मेंबर हो सकता 55:43 है। मतलब उन सभी खाद्य श्रंखलाओं में उसकी 55:45 उपस्थिति को आप देख सकते हैं जहांजहां से 55:47 कि उसकी आवश्यकताएं पूरी होती हो या 55:49 जहां-जहां वो आवश्यकता पूर्ति का माध्यम 55:51 बनता हो। दोनों चीजें ऊर्जा का प्रवाह 55:54 हमेशा एक दिशा में होता है। लौट कर ऊर्जा 55:56 नहीं आती है। ध्यान दीजिएगा। और हमेशा जब 55:59 नीचे से ऊपर के स्तर में आप जाएंगे यानी 56:01 पहले ट्रॉपिक लेवल से आखिरी ट्रॉपिक लेवल 56:03 में तो ऊर्जा की मात्रा हमेशा कम होती 56:05 जाएगी। संख्या पिरामिड को देख लीजिए। 56:07 पिरामिड तीन प्रकार के आपने पढ़े हैं 56:09 पर्यावरण में और कंपाइलेशन में आप देखेंगे 56:11 भी। तो पहला होता है नंबर पिरामिड यानी 56:13 संख्या पिरामिड। प्रत्येक पोषी स्तर पर 56:15 जीवों की संख्या का यह प्रतिनिधित्व करता 56:18 है। प्रत्येक जो ट्रॉपिक लेवल होता है उस 56:20 पर जीवों की तादाद को यह दिखाता है। और एक 56:23 पारितंत्र का अगर आप संख्या पिरामिड 56:25 बनाएंगे तो ये सीधा भी हो सकता है और 56:27 उल्टा भी हो सकता है। अब ये इस पर निर्भर 56:29 करता है कि पारितंत्र कौन सा है। घास के 56:32 मैदान की अगर बात की करेंगे आप घास का 56:34 मैदान अगर पारितंत्र है तो आप देखेंगे कि 56:37 घास संख्या में ज्यादा है। घास तो बहुत 56:39 बेतहाशा उगती है। अगर उनको पौधे के हिसाब 56:42 से गिनना हो तो बड़ा टेढ़ा काम। है ना? तो 56:45 घास के एक मैदान में आप घासों की तादाद 56:47 गिन नहीं सकते। अनगिनत होती है। और उस पर 56:50 रहने वाले जो मतलब आश्रित रहने वाले जो 56:53 शाकाहारी जीव हैं उनकी तादाद घासों जितनी 56:55 नहीं होती। कितने भी ज्यादा जीव हो, कितने 56:57 भी कीड़े-मकोड़े हो या छोटे प्राणी हो 57:00 लेकिन वो घास की संख्या जितने मात्रा में 57:02 नहीं होंगे। उनसे कम होगी। और उन शाकाहारी 57:05 जीवों को खाने वाले जो मांसाहारी जीव हैं 57:07 वो उन शाकाहारी जीवों की भी तुलना में कम 57:09 होंगे। जैसे तुलनात्मक रूप से आप देखें कि 57:12 एक घास का मैदान है बड़ा सा। है ना? अब 57:14 उसमें बहुत सारे टिड्डे रह रहे हैं। 57:17 क्रिकेट्स रह रहे हैं। ग्रॉस हॉपर रह रहे 57:19 हैं और वो घास के जो तिनके हैं उनको खाते 57:22 हैं। मतलब घास के अलग-अलग पार्ट्स का 57:24 पार्ट्स को खाकर अपना पेट भरते हैं। अब इन 57:26 टिड्डों को खाने वाले वहां पर मेंढक हैं। 57:29 तो आप देखेंगे कि घास बहुत आयात है। पूरे 57:31 मैदान को ढके हुए हैं। टिड्डों की संख्या 57:33 उस घास की तुलना में कम है। और मेंढकों की 57:35 तादाद इन टिड्डों की तुलना में इन जो 57:37 क्रिकेट्स हैं इनकी तुलना में और कम है। 57:39 अगर कुछ 1000 क्रिकेट्स वहां पर रह रहे हो 57:43 मान लीजिए तो मेंढक उसकी तुलना में कुछ 57:45 सैकड़े में ही होंगे। सैकड़े भी कम ही 57:47 मतलब 50 60 की संख्या हो सकती है। एक घास 57:49 के मैदान में उतने ही वयस्क मेंढक टिकेंगे 57:52 या छोटे-छोटे बच्चों की गिनती करेंगे। ठीक 57:54 है? मतलब कहने का ये कि घास की तुलना में 57:57 जो उन पर निर्भर रहने वाले जीव हैं और फिर 57:59 उन पर निर्भर रहने वाले जो मांसाहारी जीव 58:01 हैं वो क्रमशः घटते जाएंगे। तो ऐसी 58:04 परिस्थिति में जो घास वाला पिरामिड होगा 58:05 वो कैसा होगा? सीधा वो। 58:08 ठीक है? जहां पर उत्पादकों की तादाद 58:11 ज्यादा हो और उपभोक्ता उनकी तुलना में कम 58:13 हो, वहां पर पिरामिड का आधार यानी जो बेस 58:16 है वह हमेशा चौड़ा होता है। ऐसी स्थिति 58:18 में पिरामिड हमेशा सीधा बनेगा। और अगर यही 58:21 जो उत्पादक है ये संख्या में कम है और इन 58:24 पर निर्भर रहने वाले उपभोक्ताओं की तादाद 58:27 ज्यादा है तो पिरामिड कैसा बनेगा? उल्टा। 58:29 क्योंकि इसका बेस जहां पर प्रोडक्शन हो 58:31 रहा है वो तादाद जीवों की कम है। जीव 58:34 द्रव्यमान का पिरामिड कैसा होता है? जैसे 58:36 जो जलीय पारितंत्र है वहां पे ब्लू ग्रीन 58:39 एल्ग को आप देखते हैं नील हरित शैवाल तो 58:42 जनसंख्या इनकी तो बहुत ज्यादा होती 58:44 क्योंकि रोज पैदा होते हैं लेकिन जितने 58:45 रोज पैदा होते हैं उतनी ही तादाद में मरते 58:48 भी है इनकी मोटैलिटी भी उतनी ही अच्छी 58:49 खासी होती है तो परिणाम ये होता है कि 58:51 जितने पैदा हुए उतने ही मरे तो सीमित 58:53 मात्रा में होते हैं ठीक है और इन पर 58:55 निर्भर रहने वाले जीव बहुत सारे तो ऐसी 58:58 स्थिति में वहां पर पिरामिड उलट जाता है 59:00 जीव द्रव्यमान यानी बायोमास वाला जो 59:02 पिरामिड है उसका क्या हालचाल है यह हमेशा 59:05 जो स्थलीय पारितंत्र होते हैं वहां पर 59:07 सीधा होता है। ठीक है? टेरेस्ट्रियल जो 59:10 इकोसिस्टम है उसके अंदर ये सीधा होता है। 59:13 और जब आप इसे जलीय पारितंत्र में ले 59:15 जाएंगे एक्वाटिक इकोसिस्टम में तो वहां पर 59:18 आप देखेंगे कि ये इनवर्टेड हो जाएगा यानी 59:20 उल्टा हो जाएगा। ऊर्जा पिरामिड की हमेशा 59:23 अच्छाई होती है कि ये सीधा होता है। ऊर्जा 59:25 का प्रवाह हमेशा एक दिशा में होता है। वो 59:26 कभी उलट नहीं सकता। तो यही बात है। आगे 59:29 चलते हैं। ठीक है? ठीक है? अब यहां देखें 59:32 अगर आप अगला टॉपिक तो ये है जैव 59:34 भूरासायनिक चक्र यानी बायोकेमिकल साइकिल 59:37 इसको कहा जाता है। और यह जो जियोकेमिकल 59:39 साइकिल है इसमें आप समझ सकते हैं कि ये 59:41 चक्रीय प्रक्रम है। जैसे जल चक्र है, 59:43 नाइट्रोजन चक्र है, कार्बन चक्र है, सल्फर 59:45 चक्र है। ये सभी जो है ये जीवो और 59:47 पर्यावरण के माध्यम से तत्वों के संचलन या 59:50 परिसंचण के रूप में परिभाषित किए जाते 59:52 हैं। अब ये जो भूजव रासायनिक चक्र हैं, 59:56 इनकी वैरायटी नीचे दी हुई है। जैसे कि 59:58 पहला है आपका कार्बन चक्र। कार्बन वह भू 1:00:01 कार्बन चक्र की बात की जा रही है। कार्बन 1:00:03 चक्र वह भूजव रासायनिक चक्र है जिसमें कि 1:00:06 पृथ्वी पर ठीक है? पृथ्वी पर कार्बन, 1:00:08 मृदा, जल और वायुमंडल में विनियमित होता 1:00:11 है। यानी लेनदेन कार्बन का होता है। 1:00:13 कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में मौजूद है 1:00:16 थोड़ी मात्रा में। तो वहां से कार्बन 1:00:17 डाइऑक्साइड को हरे पौधे ग्रहण कर रहे हैं। 1:00:20 ऑक्सीजन को छोड़ रहे हैं। अब वह कार्बन 1:00:22 डाइऑक्साइड उसका जो कार्बन है वो हरे 1:00:24 पौधों के अंदर संचित हो रहा है। ठीक वैसे 1:00:28 ही जो जीवित प्राणी है वो क्या कर रहे 1:00:29 हैं? वो कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ रहे 1:00:31 हैं। ऑक्सीजन को ग्रहण कर रहे हैं। तो 1:00:33 कार्बन का भंडारण एक तो हरे पौधों के अंदर 1:00:35 है। हरे पौधों का सेवन जो करेगा उसको भी 1:00:37 कार्बन प्राप्त होगा और उसके अंदर 1:00:39 कार्बनिक पदार्थों का संचय होता जाएगा। 1:00:41 कार्बनिक यौगिकों का संचय होगा। जब वो 1:00:43 प्राणी मरेगा तो वहां से भी कार्बन मुक्त 1:00:45 होगा। प्लस जो जीवित जीवधारी है वो मुक्त 1:00:47 कर रहे हैं कार्बन मतलब कार्बन डाइऑक्साइड 1:00:50 तो वहां से कार्बन डाइऑक्साइड रिलीज हो 1:00:52 रही है। तो यह पुनर्चक्रण चलता रहता है। 1:00:54 हरे पौधों के द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को 1:00:56 अब्सॉर्ब किया जाता है और बाकी जो जीवित 1:00:58 प्राणी हैं जो कि आमतौर पर उपभोक्ता हैं 1:01:01 वह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। तो 1:01:04 वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड जो है ये 1:01:06 कार्बन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और यह 1:01:09 चक्र वायुमंडल में कार्बन का संतुलन बनाए 1:01:11 रखता है जो कि संतुलन अभी बिगड़ता जा रहा 1:01:13 है। क्योंकि जितना मात्रा में कार्बन 1:01:15 डाइऑक्साइड रिलीज हो रही है उतनी ज्यादा 1:01:18 मात्रा में खपाई नहीं जा पा रही है। 1:01:20 क्योंकि इसे खपाने वाले एकमात्र माध्यम है 1:01:22 हरे पौधे और उनकी तादाद हमने पहले से ही 1:01:25 सीमित कर दी है और कम होते जा रहे हैं 1:01:27 खत्म होते जा रहे हैं। दूसरी ओर कार्बन का 1:01:29 उत्सर्जन बढ़ता जा रहा है। तो ऐसी स्थिति 1:01:31 में एक असंतुलन होना स्वाभाविक है और वो 1:01:34 समस्या उत्पन्न कर रहा है। ये जो ग्लोबल 1:01:35 वार्मिंग हम लोग चिल्ला रहे हैं वो उसी की 1:01:37 वजह से हो रही है। हालांकि अकेली कार्बन 1:01:39 डाइऑक्साइड जिम्मेदार नहीं है लेकिन सबसे 1:01:41 बड़ा विलयन यही है। इसके बाद नाइट्रोजन 1:01:43 चक्र को आप देख रहे हैं तो नाइट्रोजन चक्र 1:01:45 भी एक जैव भू रासायनिक चक्र है निसंदेह जो 1:01:48 कि प्रकृति में नाइट्रोजन और कार्बनिक माफ 1:01:51 कीजिएगा नाइट्रोजनिक जो यौगिक हैं उनके 1:01:53 रूपांतरण को सीधा दर्शाता है। आप जानते 1:01:55 हैं कि वायुमंडल में सबसे ज्यादा तादाद 1:01:57 में पाई जाती है नाइट्रोजन और नाइट्रोजन 1:02:00 एक तटस्थ गैस है जो कि आग को जलने में 1:02:02 सपोर्ट नहीं करती है। ये तो इसका रासायनिक 1:02:04 गुण हो गया। वायुमंडल पर वायुमंडल जो है 1:02:08 यह पृथ्वी में पूरी पृथ्वी के चारों ओर के 1:02:10 जो आसपास की चीजें हैं उनमें मौजूद सबसे 1:02:12 बड़ा भंडार है नाइट्रोजन का। पौधे मूल रूप 1:02:16 से मिट्टी से नाइट्रेट देख रहे हैं 1:02:19 नाइट्रेट और अमोनियम इन आयनों के रूप में 1:02:22 इनके ऊपर जो माइनस और प्लस चार्ज लगा है 1:02:24 उससे आप समझ लीजिएगा कि ये आयन है। 1:02:25 नाइट्रेट और अमोनियम जो है ये आयन है। तो 1:02:29 इन आयनों के रूप में नाइट्रोजन को पौधे 1:02:31 ग्रहण करते हैं। और वहां वो भी कहां से 1:02:33 ग्रहण करते हैं? मिट्टी से ग्रहण करते हैं 1:02:35 और जंतु पौधे या अन्य जो जीव हैं मतलब 1:02:38 जितने भी जीवित प्राणी हैं उनको भोजन के 1:02:40 रूप में ग्रहण कर करने के लिए मतलब भोजन 1:02:42 के जो आवश्यक तत्व है वो ग्रहण करते हैं। 1:02:44 उसमें नाइट्रोजन की भी आवश्यकता होती है। 1:02:47 नाइट्रोजन आपको प्रोटीन आपके शरीर में 1:02:49 प्रोटीन अहम चीज है उसके बिना शरीर बनेगा 1:02:51 ही नहीं। तो प्रोटीन को बनाने के लिए 1:02:53 नाइट्रोजन चाहिए। न्यूक्लिक अम्लों को 1:02:55 बनाने के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता मतलब 1:02:56 ये एक अनिवार्य घटक है। आवश्यक घटक नहीं 1:02:59 है बल्कि अनिवार्य घटक है। 78% हिस्सा 1:03:02 हमारे वायुमंडल का इसी से बना हुआ है। और 1:03:05 नाइट्रोजन जीवन के लिए आवश्यक बहुत सारे 1:03:07 अणुओं में पार्टिसिपेट करता है। जैसे कि 1:03:09 प्रोटीन के अलावा न्यूक्लिक एसिड जो है 1:03:11 डीएनए आरएनए और बहुत सारे विटामिंस भी ऐसे 1:03:14 हैं। नाइट्रोजन चक्र की कुछ पांच 1:03:16 प्रक्रियाएं होती है जिन पर कि आयोग 1:03:18 बार-बार प्रश्न पूछता है और वो प्रश्न 1:03:20 आपके यहीं से हल हो जाएंगे। ज्यादा आपको 1:03:22 भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये जो 1:03:24 लिस्टिंग का वीडियो है ना थोड़ा सा हो 1:03:26 सकता है कि मेरे प्रवचन करने की वजह से 1:03:27 लंबा खींच जाए। लेकिन अगर आप इसे इत्मीनान 1:03:30 से देख लेते हैं तो बहुत सारे प्रश्न और 1:03:32 अगर संयोग अच्छा रहा मान लीजिए कि चांस 1:03:34 बहुत बढ़िया रहा तो लगभग सारे प्रश्न आप 1:03:38 हल करने में सक्षम होंगे। कोई भी 1:03:39 एनवायरमेंट का क्वेश्चन गलत नहीं होगा। 1:03:41 सारे तथ्य हमने समेट के इसमें इकट्ठे कर 1:03:44 लिए। तो नाइट्रोजन स्थिरीकरण की बात हो 1:03:46 रही है। गैसीय नाइट्रोजन का अमोनिया में 1:03:48 कन्वर्ट होना। ठीक है? जो गैसीय नाइट्रोजन 1:03:51 है, गैस की अवस्था में वायुमंडल में मौजूद 1:03:53 नाइट्रोजन है, वह अमोनिया में कन्वर्ट हो 1:03:56 रही है। तो उसको हम कहेंगे नाइट्रोजन 1:03:58 स्थिर हो रही है। नाइट्रोजन का स्थिरीकरण 1:04:00 हो रहा है। इसके बाद एक और प्रक्रिया होती 1:04:02 है नाइट्रीकरण। यहां पर अमोनिया जो है ये 1:04:05 नाइट्रेट या फिर नाइट्राइट। या तो 1:04:08 नाइट्रेट में या फिर नाइट्राइट में बदल 1:04:10 जाती है। इसके बाद तीसरा प्रोसेस है 1:04:12 स्वांगीकरण। नाइट्रेट और अमोनिया का मतलब 1:04:16 हमने क्या देखा कि नाइट्रो अमोनिया जो है 1:04:18 वो पहले नाइट्राइट या नाइट्रेट में बदली। 1:04:20 अब ये जो नाइट्रेट या नाइट्राइट है ये 1:04:22 क्या कर रहे हैं? ये प्रोटीन अथवा डी एन ऐ 1:04:24 में बदल जा रहे हैं। और अमोनीकरण में क्या 1:04:27 होगा? अब ये प्रोटीन और डीएनए में बदले तो 1:04:29 कोई नया जीव बना। अब वह जीव कुछ लंबे समय 1:04:32 तक जिया उसके बाद समाप्त हो गया। जब 1:04:34 समाप्त हो गया तो जो मरा हुआ उसका शरीर है 1:04:37 या जो उसके अपशिष्ट हैं उनका फिर से 1:04:39 अमोनिया में कन्वर्ट होना यही कहलाता है 1:04:41 अमोनीकरण। और फिर अंतिम प्रक्रिया है 1:04:44 विनाइट्रीकरण। यहां एक बार फिर से 1:04:46 नाइट्रेट जो है वह वापस गैसीय नाइट्रोजन 1:04:48 में बदल जाता है और वायुमंडल को वापस दे 1:04:51 दिया जाता है। यानी जहां से आया था वहीं 1:04:53 चला गया। 1:04:55 जलचक्र क्या इसमें देख सकते हैं आप? जल 1:04:59 चक्र बाकी चक्रों जितना उलझा नहीं है। 1:05:01 बिल्कुल सीधा है। इसमें आप देखें कि 1:05:02 वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल, जीवमंडल इनके 1:05:04 बीच में जल की निरंतर गति और पुनर्चक्रण 1:05:07 की ये प्रक्रिया है। वाष्पीकरण, 1:05:09 वाष्पोत्सर्जन, संघनन, वर्षण, अंत्यसंधन, 1:05:13 अधश्रवण, सतही अपवाह, भूजल प्रवाह ये सब 1:05:17 सारी प्रक्रियाएं हैं। थोड़ा सुनने में 1:05:19 नाम कठिन लग सकते हैं। लेकिन ये जलचक्र की 1:05:22 ही प्रक्रियाएं हैं। जैसे ही पानी घुलनशील 1:05:25 खनिज युक्त चट्टानों में से या उनके ऊपर 1:05:27 से बहता है। चट्टानों के ऊपर से होकर पानी 1:05:30 बहता है। यह कोई अचंभे की बात तो है नहीं। 1:05:33 आप आराम से समझ सकते हैं। नदियों का पानी, 1:05:35 झरने का पानी या किसी और स्रोत का पानी। 1:05:38 तो जो चट्टानों में मौजूद खनिज होते हैं 1:05:40 क्योंकि पानी का बहाव है तो पानी घर्षण कर 1:05:42 रहा है चट्टान के साथ। तो चट्टान के भी जो 1:05:44 तत्व है वो पानी में मिलते जाते हैं, 1:05:45 मिलते जाते हैं। तो कुछ खनिज जो है वो 1:05:48 पानी में घुल जाते हैं। और इस प्रकार से 1:05:50 नदियां भूमि से समुद्र तक कई पोषक तत्व ले 1:05:53 जाती हैं। और इसका उपयोग समुद्री जीवों 1:05:56 द्वारा किया जाता है। नदियां आजकल पोषक 1:05:58 तत्व से ज्यादा प्रदूषण ले जा रही है 1:06:00 समुद्र में और समुद्र के अंदर जो डायरेक्ट 1:06:02 प्रदूषण जा रहा है वो तो कहना ही क्या? 1:06:04 दोनों मिलकर महासागर को भी तबाह किए हुए 1:06:07 हैं। और समुद्र और नदी के बीच में सबसे 1:06:09 बड़ा अंतर यही है कि नदी तो प्रदूषित होगी 1:06:12 और उसमें बहाव अगर बना रहा तो धीरे-धीरे 1:06:14 करके मान लीजिए कि प्रदूषण को हमने स्टॉप 1:06:16 कर दिया। मतलब जितना अपशिष्ट हम नदी के 1:06:19 अंदर गिरा रहे हैं या जा रहा है उन सबको 1:06:21 हमने रोक दिया जो कि नहीं रोक रहे हैं अभी 1:06:23 तत्काल में। लेकिन अगर ऐसा कर दिया तो नदी 1:06:25 साफ हो जाएगी। ठीक है? नदी में बहाव है तो 1:06:27 कचरा धीरे-धीरे करके साफ हो जाएगा। पानी 1:06:30 क्लियर हो जाएगा। लेकिन समुद्र का क्या? 1:06:32 समुद्र को आप साफ भी नहीं कर सकते। वो एक 1:06:35 ऐसे गंदे गड्ढे की तरह से बन जाएगा जिसके 1:06:38 अंदर कचरा अब जमा हो चुका है। और वो इतनी 1:06:41 ज्यादा मात्रा में है कि उसे आप कहीं भी 1:06:43 ले आकर डंप नहीं कर सकते। है ना? दूसरी 1:06:45 पृथ्वी तैयार हो जाएगी। और उसके अंदर अगर 1:06:49 रहने दिया तो वो एक गटर वाली स्थिति है कि 1:06:51 उसके अंदर बहाव ही नहीं है। नदी में तो 1:06:53 गनीमत थी कि बहाव था। यहां बहाव नहीं है। 1:06:55 पानी उसी के अंदर सड़ रहा है। तो एक 1:06:57 प्रदूषित तालाब जैसा बड़े तालाब जैसा 1:06:59 समुद्र बन जाएगा। फिलहाल आगे देखें तो 1:07:02 नदियां आमतौर पर करती क्या है? अपने साथ 1:07:03 जो पोषक तत्व ले जाती है वो समुद्र में 1:07:05 उेल देती हैं। समुद्र के अंदर जो 1:07:07 न्यूट्रिएंट्स की आपूर्ति होती है वो ऐसे 1:07:09 ही होती है। तो जल एक चक्रीय रूप में किसी 1:07:12 भी पारितंत्र के एक घटक से दूसरे घटक में 1:07:14 जाता रहता है। अब समुद्र में नदियों का 1:07:16 पानी गया। वहां पर जो जीवधारी है वो उससे 1:07:19 पोषण प्राप्त कर रहे हैं। उसके बाद फिर 1:07:21 समुद्र के पानी का वाष्पीकरण हो गया। 1:07:23 वाष्प बनकर उड़ा। आसमान में गया। बादल 1:07:25 बने। वहां से संघनन हुआ। फिर पानी बरसा। 1:07:27 है ना? तो ये सामान्य प्रक्रिया है। इसके 1:07:30 बाद ऑक्सीजन चक्र है। पृथ्वी पर बहुत अधिक 1:07:32 मात्रा में तो नहीं लेकिन हां एक अच्छी 1:07:34 मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है। सबसे 1:07:35 ज्यादा तो नाइट्रोजन पाया जाता है। और 1:07:38 इसकी मात्रा मूल रूप से वायुमंडल में 21% 1:07:41 है। 1:07:42 आणविक ऑक्सीजन होती है। मतलब ऑक्सीजन का 1:07:45 एक अणु होता है जिसमें कि ऑक्सीजन के दो 1:07:47 परमाणु पाए जाते हैं। O2 का यही मतलब है। 1:07:49 ऐसे ही ओजोन को आप देखते हैं तो ये ओजोन 1:07:51 का एक अणु है जिसमें कि ऑक्सीजन के तीन 1:07:53 परमाणु होते हैं। तो ये टू और थ्री का यही 1:07:56 मतलब यहां होता है। फिलहाल आप जानते भी 1:07:58 हैं। तो कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प 1:08:01 जैसे यौगिकों में भी ऑक्सीजन पाई जाती है। 1:08:03 भूपर्पटी यानी जो अर्थ की क्रस्ट है वहां 1:08:05 पर ये धातुओं और जो सिलिकॉन के ऑक्साइड है 1:08:08 अब सिलिकॉन डाइऑक्साइड है तो उसमें क्या 1:08:09 है? ऑक्सीजन मौजूद है। तो वहां भी ये 1:08:12 यौगिक अवस्था में होती है। कार्बोनेट, 1:08:14 सल्फेट, नाइट्रेट इस तरह के जो पदार्थ 1:08:16 होते हैं, खनिज होते हैं उनमें पाई जाती 1:08:18 है। अगर हम अपने शरीर के अंदर या अन्य 1:08:20 जीवधारियों के शरीर के अंदर देखें तो 1:08:22 जितने भी जैविक अणु है, जैविक अणुओं में 1:08:24 जैसे कार्बोहाइड्रेट्स 1:08:27 ठीक है? कार्बोहाइड्रेट्रेट्स, 1:08:29 प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड, वसा, लिपिड जो 1:08:32 भी आप कहिए मतलब इन सभी के लिए ऑक्सीजन एक 1:08:35 अनिवार्य घटक है। तो ऑक्सीजन चक्र ये 1:08:38 नियंत्रित होता है और ऑक्सीजन चक्र को 1:08:40 विनियमित करने वाले जो एकमात्र स्रोत है 1:08:42 वो हरे पौधे हैं। वही कार्बन डाइऑक्साइड 1:08:45 को प्रोसेस करके ऑक्सीजन रिलीज करते हैं। 1:08:47 ऑक्सीजन को बाहर छोड़ते हैं। और कोई ऐसा 1:08:50 हमारे पास इंस्ट्रूमेंट नहीं है जिससे कि 1:08:52 हम ऑक्सीजन को छुड़वा सके इतने बड़े 1:08:54 पैमाने पर। तो यह ऑक्सीजन का उत्सर्जन 1:08:56 करके बाकी जीवधारियों को बांटने का और 1:08:58 पूरे ऑक्सीजन चक्र को नियंत्रित करने का 1:09:00 काम हरे पौधे करते हैं या यह जो उत्पादक 1:09:03 है ये करते हैं। मतलब फोटोसिंथेसिस की 1:09:06 प्रक्रिया जहां-जहां होगी वहां वहां ये 1:09:07 चीज होगी। तो इनकी तादाद सिकुड़ती जा रही 1:09:10 है। ये चिंताजनक बात है। अब यहां मामला 1:09:12 बदल गया है। हम भूजव रासायनिक चक्र को 1:09:15 पहले ही देख चुके हैं। अब हमें देखना 1:09:16 चाहिए 1:09:18 वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण 1:09:21 कानून और नीतियां। यहां से भी बहुत तेज 1:09:23 प्रश्न पूछे जाते हैं। तो आइए बिना देर 1:09:26 किए देखना आरंभ करते हैं। देखिए कानून 1:09:28 दिया है, वर्ष दिया है, उद्देश्य दिया है। 1:09:30 सबसे पहले भारतीय वन अधिनियम है 1927 का 1:09:33 है अंग्रेजों के समय का। बताइए किस 1:09:35 अंग्रेज का जमाना था? और उसके बाद आप 1:09:38 देखें 1:09:41 इसका उद्देश्य क्या रहा होगा? उद्देश्य था 1:09:44 वनों का संरक्षण करना, वन अपराधों की 1:09:46 रोकथाम करना और वन्य जीवों की सुरक्षा 1:09:48 करना। इसके बाद वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1:09:51 1972 का है। लुप्त प्राय प्रजातियों की 1:09:54 सुरक्षा, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारणों 1:09:56 की स्थापना। यह इसका उद्देश्य था। 1:09:59 सीधे-सीधे हम लोग 1927 से 1972 में आ गए। 1:10:03 तो आजाद भारत का ये सबसे पहला प्रयास था। 1:10:05 उसके बाद फिर एक के बाद एक आते हैं। जैव 1:10:08 विविधता अधिनियम है। ध्यान दीजिएगा कि 1:10:10 यहां पर हम वन्य जीवों की बात कर रहे हैं। 1:10:12 पूरे पर्यावरण की बात नहीं कर रहे हैं। 1:10:14 पर्यावरण संरक्षण वाले अभी नीचे आएंगे। तो 1:10:17 जैव विविधता अधिनियम है। 2002 में आया था। 1:10:19 जैव विविधता का संरक्षण, जैविक संसाधनों 1:10:22 का सतत इस्तेमाल यह इसका उद्देश्य था। वन 1:10:25 अधिकार अधिनियम 2006 का है। वनवासियों और 1:10:28 जनजातीय समुदायों के वन अधिकारों की रक्षा 1:10:30 इसका पर्पस। तो दो ये 1927, 1972, सन 2002 1:10:35 और 2006। 1:10:37 इसके पश्चात अब हमें देखने चाहिए पर्यावरण 1:10:39 संरक्षण कानून। तो सबसे पहले 1986 वाला ही 1:10:42 आएगा। सीधी बात है पर्यावरण की सुरक्षा और 1:10:44 प्रदूषण पर नियंत्रण। यह इसकी सबसे अहम 1:10:47 प्राथमिकता थी। ठीक है? सबसे मुख्य 1:10:51 प्राथमिकता थी। और उसके बाद नंबर आता है 1:10:53 जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम जो 1:10:55 कि 1974 का है। ये पर्यावरण संरक्षण 1:10:58 अधिनियम से भी पहले वाला है। 1:11:01 इसमें क्या था कि जल संसाधनों की रक्षा 1:11:03 करेंगे और जल प्रदूषण को रोकेंगे। अधिनियम 1:11:07 बना देना सरल है। एक लंबी चौड़ी मेज पर 1:11:10 एसी वाले हॉल में बैठकर चर्चा कर लेना और 1:11:12 आसान है। लंबे-लंबे भाषण देना मेरी तरह वो 1:11:15 भी बहुत आसान काम है। लेकिन इन तरीकों को 1:11:18 अमल में ले आना और मानना स्वीकार करना कि 1:11:21 हम सिर्फ उतना ही प्रकृति से लें जितना कि 1:11:23 आवश्यकता है। उससे ज्यादा एक टुकड़ा भी ना 1:11:25 लें। लोभ ना करें। यह बहुत मुश्किल काम है 1:11:29 और मनुष्य यही नहीं कर पा रहा है। बाकी सब 1:11:31 कर रहा है लेकिन यह नहीं कर पा रहा है और 1:11:33 यह जब तक नहीं करेगा तब तक कुछ नहीं होगा। 1:11:35 तो जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1:11:38 जो है ये आप देख रहे हैं। इसके बाद वायु 1:11:39 प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम ठीक 1:11:41 वैसे ही जैसे पानी वाला था वैसे ही हवा 1:11:43 वाला ये 1981 में आता है। इसका भी पैटर्न 1:11:47 वही है। वायु की गुणवत्ता बनाए रखेंगे और 1:11:49 वायु प्रदूषण को कम करेंगे। राष्ट्रीय 1:11:51 हरित अधिकरण अधिनियम नेशनल ग्रीन 1:11:54 ट्रिब्यूनल एक्ट जो है यह एनजीटी एक्ट 1:11:56 आपका 2010 का है। पर्यावरण से जुड़े हुए 1:11:59 मामलों में तुरंत सुनवाई क्योंकि अदालत 1:12:01 में अगर जाएगा जो आपके हाई कोर्ट, सुप्रीम 1:12:04 कोर्ट है या स्थानीय अदालतें हैं तो वहां 1:12:07 फाइलों के पुलिंदे और मुकदमों के ढेर वैसे 1:12:09 ही जमा रहते हैं। जजों के ऊपर काम का बोझ 1:12:12 वैसे ही इकट्ठा रहता है। बोझ तले सब दब 1:12:14 रहे होते हैं। अब उसमें पर्यावरण का कोई 1:12:16 मुद्दा पहुंच गया कि इतने सारे पेड़ काट 1:12:18 दिए गए या यहां पर अवैध खनन हो रहा है या 1:12:20 जो कुछ भी तो वह मामला एक अलग से उसमें सर 1:12:23 दर्द बन जाएगा और ऐसे मामलों में तत्काल 1:12:25 एक्शन की आवश्यकता होती है। हालांकि सारे 1:12:27 मामलों में त्वरित कार्रवाई ही चाहिए 1:12:29 लेकिन इसमें तो चाहिए ना तत्काल। कोई जंगल 1:12:31 कट रहा है अगर तत्काल एक्शन नहीं लेंगे तो 1:12:33 फिर बाद में क्या करेंगे? वहां पर सूना 1:12:34 उजाड़ मैदान देखने आएंगे। नहीं ना? तो 1:12:37 तत्काल में एक्शन की आवश्यकता होती है। 1:12:39 इसलिए त्वरित कार्रवाही के लिए ये काम 1:12:41 किया गया था। एनजीटी यानी जो ट्रिब्यूनल 1:12:43 है उसकी स्थापना की गई। इसके बाद आगे बढ़े 1:12:47 कुछ पर्यावरण संरक्षण नीतियां हैं। शुरू 1:12:49 करते हैं 1988 से। पहली है वन संरक्षण 1:12:53 नीति या राष्ट्रीय वन नीति इसको कहा जाता 1:12:55 है। वन संरक्षण नीति के नाम से आए तो आप 1:12:58 कंफ्यूज मत होइएगा। ये राष्ट्रीय वन नीति 1:13:00 ही है। और ये कब वाली है? तो 1988 की है। 1:13:04 पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिकी 1:13:06 संतुलन का अनुरक्षण करना। ठीक है? सुरक्षा 1:13:09 करना ये इसका उद्देश्य था। राष्ट्रीय जैव 1:13:12 विविधता कार्य योजना मतलब ये एक्शन प्लान 1:13:15 था 2008 का और इस एक्शन प्लान का अंततः 1:13:18 उद्देश्य था जैव विविधता का संरक्षण और 1:13:20 सतत इस्तेमाल मतलब उपयोग भी करें और 1:13:23 संरक्षण भी करें दोनों चीज जलवायु 1:13:26 परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना ये भी 1:13:28 एक एक्शन प्लान 2008 का ही है। जलवायु 1:13:30 परिवर्तन से निपटने के लिए एक नवीकरणीय 1:13:32 ऊर्जा और जल और कृषि सुधार पर आधारित 1:13:35 रिपोर्ट थी ये। इसके बाद राष्ट्रीय 1:13:37 पर्यावरण नीति 2006 सतत विकास की अवधारणा 1:13:40 तब तक आ चुकी थी और काफी चर्चित हो गई तो 1:13:43 सतत विकास और पारिस्थितिकी तंत्र की 1:13:45 सुरक्षा। जहां हमें पर्यावरण से संबंधित 1:13:47 या प्रकृति से जुड़ी हुई किसी आफत का 1:13:49 समाधान नहीं सूझता है ना, वहां पर हम ये 1:13:51 शब्द बहुत शौक से चिपका देते हैं। सतत 1:13:53 विकास कि सस्टेनेबल सारा डेवलपमेंट होगा 1:13:56 और आजकल एआई जो है कुछ शब्दों को बहुत 1:13:59 इत्मीनान से इस्तेमाल करता है। सस्टेनेबल 1:14:01 फ्लेक्सिबल और उसको हिंदी में ट्रांसलेट 1:14:04 करेगा तो कहेगा कि सतत और लचीला लचीली 1:14:07 इमारतों का निर्माण किया गया। सुनकर आपको 1:14:09 हंसी आती होगी लचीली इमारतें कैसी होती 1:14:11 है? रबर जैसी होती है। 1:14:13 वहां पर फ्लेक्सिबिलिटी का मतलब यह नहीं 1:14:15 होता। फ्लेक्सिबिलिटी का मतलब यह होता है 1:14:17 कि प्रकृति के जितने थपड़े हैं, प्रकृति की 1:14:20 जितनी विसंगतियां है, आपदाएं हैं, उनको 1:14:22 झेल सके, ऐसा निर्माण हम करें और वास्तव 1:14:25 में ऐसा निर्माण संभव ही नहीं है। अगर 1:14:26 प्रकृति नष्ट करने पर तो लाए तो कुछ नहीं 1:14:29 बचेगा। आप जितनी भी फ्लेक्सिबिलिटी आजमा 1:14:31 लीजिए कोई दिक्कत नहीं। 1:14:34 तो मतलब यह है कि जहां हमें कुछ नहीं 1:14:36 सूझता है वहां हम सस्टेनेबल शब्द चिपका 1:14:38 देते हैं। चलिए किताबी ही ज्ञान यहां लेना 1:14:40 भी है। तो देखिए तो यहां कहा गया कि 1:14:42 जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना 1:14:44 ये 2008 की है। अच्छा इसके बाद राष्ट्रीय 1:14:47 पर्यावरण नीति जो है ये 2006 की है। यहां 1:14:50 देखिए सतत विकास और पारिस्थितिकी तंत्र की 1:14:53 सुरक्षा इसका उद्देश्य है। प्रथम 1:14:54 राष्ट्रीय जल नीति 1987 की है। सितंबर 1:14:58 1987 में लागू की गई उसके बाद 2002 और 1:15:01 2012 में संशोधित किया गया। इसको अपडेट 1:15:03 किया जाता है समय के साथ-साथ। कुल मिलाकर 1:15:06 2012 वाली जो वाटर पॉलिसी है वो अपने देश 1:15:09 में चल रही है वर्तमान में। अभी क्या चल 1:15:11 रहा है वो आपको एग्जैक्टली पता होना 1:15:13 चाहिए। करंट सिचुएशन मालूम होनी चाहिए। 1:15:15 ठीक है? अब इसके बाद अगला जो हमारा तथ्य 1:15:17 है ये काफी ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अभी तक 1:15:20 जो पढ़ा वो भी महत्वपूर्ण था। सब कुछ यहां 1:15:22 इंपॉर्टेंट है। एक भी पेज स्किप करने लायक 1:15:24 नहीं है। तो देखें आप यहां पर भारत में 1:15:27 राष्ट्रीय उद्यान कौन-कौन से हैं? और पहली 1:15:29 चीज तो राष्ट्रीय उद्यान होता क्या है? 1:15:31 नेशनल पार्क क्या होते हैं? तो नेशनल 1:15:33 पार्क यानी राष्ट्रीय उद्यान ये ऐसे 1:15:35 क्षेत्र होते हैं जिसे कि राज्य सरकार 1:15:37 द्वारा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के 1:15:40 तहत वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत 1:15:44 वन्य जीव और उसके पर्यावरण संरक्षण 1:15:46 संवर्धन और विकास के लिए घोषित किया गया। 1:15:49 यह घोषित क्षेत्र होते हैं। इन्हें उच्च 1:15:52 सुरक्षा प्रदान की जाती है। पशुओं की चराई 1:15:54 यहां पर पूरी तरह से प्रतिबंधित होती है। 1:15:57 वन्य जीवों और वन उपज का विनाश करना पाबंद 1:16:00 होता है। ऐसा नहीं कर सकते। उनका दोहन 1:16:02 नहीं कर सकते और यहां से हम किसी भी जीव 1:16:04 प्रजाति को बाहर नहीं ले जा सकते जब तक कि 1:16:06 अपरिहार्य स्थिति ना बने और सरकारी सहमति 1:16:09 ना बने। कुल मिलाकर हर प्रकार की जो अवैध 1:16:11 गतिविधियां होती हैं जो कि जीवों को 1:16:13 डिस्टर्ब करें। पारिस्थितिकी को डिस्टर्ब 1:16:15 करें वो सब यहां पर प्रतिबंधित होती हैं। 1:16:18 सिवाय उन परिस्थितियों के जिनकी कि 1:16:20 अधिनियम के तहत विशेष रूप से अनुमति दी गई 1:16:22 है तो वो विशेष परिस्थितियां हर जगह होती 1:16:23 हैं। 1:16:25 अनुमत प्रावधानों के तहत निष्कासित वन उपज 1:16:28 का उपयोग नेशनल पार्क के अंदर और आसपास 1:16:30 रहने वाले लोगों की व्यक्तिगत और वास्तविक 1:16:31 जरूरतों के लिए किया जा सकता है। लेकिन हम 1:16:33 व्यवसायिक उद्देश्य से हरगिज़ नहीं कर 1:16:35 सकते। 1:16:37 तो निश्चित तौर पर भारत में अगर देखा जाए 1:16:40 तो यह जो नेशनल पार्क है यह आईयूसीएन की 1:16:42 संरक्षित श्रेणी वाली जो मतलब क्षेत्र 1:16:44 प्रबंधन श्रेणी जो है उसकी कैटेगरी टू के 1:16:46 अनुरूप माने जाते हैं। ठीक है? उसकी जो 1:16:48 कैटेगरी नंबर टू है सेकंड है उसके अंतर्गत 1:16:51 माने जाते हैं। और भारत में ऐसा पहला 1:16:53 राष्ट्रीय उद्यान बना था हेली नेशनल 1:16:55 पार्क। हेली नेशनल पार्क जो है ये 1936 1:16:58 में स्थापित किया गया था। और वही नेशनल 1:17:00 पार्क अभी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के नाम 1:17:03 से जाना जाता है। जिम कॉबेट जो है वह एक 1:17:06 शिकारी थे। अंग्रेज शिकारी थे। वन्य जीव 1:17:09 संरक्षण और रामगंगा नदी इस पार्क के बीच 1:17:12 से होकर गुजरती है। तो इसीलिए इसका नाम 1:17:13 रामगंगा नेशनल पार्क करने की करने का 1:17:16 प्रस्ताव था। लेकिन अभी तक हुआ नहीं। तो 1:17:19 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 भारत में 1:17:21 वन्य जीव संरक्षण के लिए कानूनी ढांचा 1:17:24 देता है। जो आधार मिलता है ना वन्य जीवों 1:17:26 की सुरक्षा का कि अच्छा इस जीव का शिकार 1:17:28 करेंगे तो ये सजा हो सकती है। इसके शिकार 1:17:30 करने पर कोई पाबंदी नहीं है। इसको मार 1:17:32 सकते हैं या इसके लिए कोई खास सजा नहीं 1:17:34 होती है। हल्की सजा होती है। ये सब कहां 1:17:36 से मालूम होता है? तो उसका स्रोत यही है 1:17:38 1972 का ये जो वाइल्ड लाइफफ़ प्रोटेक्शन 1:17:41 एक्ट और प्रोजेक्ट टाइगर 1972 की चर्चा हो 1:17:45 रही है। 73 की बात ना करें ऐसा नहीं हो 1:17:47 सकता है। तो प्रोजेक्ट टाइगर का शुभारंभ 1:17:49 हुआ था 1973 में और बाघों के यथास्थान 1:17:52 यानी इन सीटों संरक्षण और उनकी आवास की 1:17:55 सुरक्षा के लिए ये काम किया गया। जितने 1:17:58 जोशखरोश के साथ हमने बाघों की सुरक्षा पर 1:18:00 ध्यान दिया उतना ही अन्य जीव जातियों की 1:18:02 सुरक्षा पर ध्यान दिया होता तो यह नौबत 1:18:04 नहीं आई होती। बहुत सारे जीव जो है वो 1:18:06 विलुप्त होने की कगार पर तब तक पहुंच गए 1:18:08 और बहुत से हो भी गए और अभी अगर हाथियों 1:18:11 पर हमने ध्यान नहीं दिया तो ये जो एशियन 1:18:13 एलीफेंट्स हैं ये भी लुप्त हो जाएंगे और 1:18:15 दिखाई नहीं देंगे। इनकी भी स्थिति 1:18:16 डायनासोरों वाली हो जाएगी। बाघ को तो हमने 1:18:19 बचा लिया। अभी हाथी उससे भी ज्यादा संकट 1:18:21 में है। लोगों को महसूस नहीं हो रहा है 1:18:22 लेकिन उसकी स्थिति और ज्यादा खराब होती जा 1:18:24 रही है। इसके बाद आप देखेंगे हेमिस 1:18:27 राष्ट्रीय उद्यान। ये बात नहीं है कि 1:18:29 हाथियों के संरक्षण के लिए सरकार प्रयास 1:18:30 नहीं कर रही है। लेकिन उस जज्बे के साथ 1:18:32 नहीं कर रही। हेमिस राष्ट्रीय उद्यान 1:18:35 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में है। 1:18:37 क्षेत्रफल के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा 1:18:39 है। मतलब एरिया वाइज इसका जो साइज है 1:18:41 कितना है? तो तीन 3500 स्क्वायर कि.मी. से 1:18:45 भी ज्यादा है। ठीक है? अब 3500 कि.मी. 1:18:50 बहुत बड़ा दायरा होता है। यह जो ट्रांस 1:18:52 हिमालय वाला क्षेत्र है, वहां पर एक उच्च 1:18:54 ऊंचाई वाला संरक्षित क्षेत्र है और काफी 1:18:56 दुर्गम इलाका है। विशेष रूप से यहां का जो 1:18:58 स्नो लेपर्ड है, वह काफी फेमस। भारत का 1:19:02 सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान या तो सबसे 1:19:03 बड़े साइज का था हेमिस लद्दाख वाला और 1:19:06 सबसे छोटा है साउथ बटन। जैसा इसका नाम है 1:19:08 वैसा ही इसका साइज है बटन। ठीक है? तो ये 1:19:11 जो बटन आइलैंड है ये साउथ बटन आइलैंड 1:19:14 नेशनल पार्क अंडमान निकोबार द्वीप समूह 1:19:16 में मौजूद है। ठीक है? है। अंडमान निकोबार 1:19:18 द्वीप समूह में मौजूद है। यह पार्क रानी 1:19:20 झांसी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान का ही 1:19:22 हिस्सा है और हैवलाक द्वीप द्वीप से 24 1:19:25 कि.मी. की दूरी पर समुद्री राष्ट्रीय 1:19:28 उद्यान भी है। ये कच्छ की खाड़ी जामनगर 1:19:30 यानी गुजरात में मौजूद है। 1982 में बनाया 1:19:32 गया था। किंबबुल लमजाऊ नेशनल पार्क ये है। 1:19:34 मणिपुर का ही है। तैरता हुआ नेशनल पार्क। 1:19:37 यहां जो घास पाई जाती है वो पानी की एक 1:19:39 कीचड़ वाली सतह पर तैर रही है और किबुल 1:19:42 लमजाऊ में जो पानी है ये लोकटक झील मतलब 1:19:45 किंबुल लमजाऊ नेशनल पार्क का नाम है और जो 1:19:47 वहां तैरती हुई घास की जमीन है वो एक झील 1:19:50 के ऊपर है और वह जो दलदली झील है वो लोकटक 1:19:53 कही जाती है। ठीक है? उस लेखक को लोकटक 1:19:55 कहा जाता है। वहां एक विशेष प्रजाति का 1:19:57 हिरण पाया जाता है जिसको कि शंगाई कहते 1:19:59 हैं। जब वह घास की इस गुदगुदी जमीन पर 1:20:01 गद्देदार जमीन पर चलता है ऐसा लगता है 1:20:03 डांस कर रहा है। इसलिए उसको डांसिंग डियर 1:20:05 भी कहा जाता है। नृत्य करता हुआ हिरण। तो 1:20:09 किबुलमजाऊ नेशनल पार्क में जो ये पानी आता 1:20:11 है लोकटक झील के अंदर ये किस चीज का पानी 1:20:14 है? कहां से आता है? यह ब्रह्मपुत्र का 1:20:16 पानी है और कुछ नहीं। ठीक है? ब्रह्मपुत्र 1:20:18 का ही पानी गहरे स्थान पर इकट्ठा हो गया 1:20:20 है। इसके बाद आगे चलें। जिम कार्बेट 1:20:23 राष्ट्रीय उद्यान यानी वही हेली नेशनल 1:20:26 पार्क आप देखते हैं। यहां देखिए सबसे 1:20:29 पुराना नेशनल पार्क जिम कार्बेट उद्यान का 1:20:32 पुराना नाम भी दे दिया है। अभी पीछे देख 1:20:34 कर आए हैं। इसमें कुछ नई बात नहीं है। 1:20:35 अच्छा दुधवा को देख लीजिए। गैंडा परियोजना 1:20:37 यहीं से चलाई गई थी 1984 में और बाघ 1:20:40 परियोजना की शुरुआत उत्तराखंड में जिम 1:20:42 कार्बेट से ही की गई थी। प्रोजेक्ट टाइगर 1:20:44 जो है वो स्टार्ट हुआ था जिम कॉबेट से। 1:20:47 इसको याद रखिएगा। अब यहां पर भारत की कुछ 1:20:50 क्रिटिकल कंडीशन वाले जो नेशनल पार्क हैं 1:20:52 उनको देख लीजिए। क्रिटिकल इस मामले में भी 1:20:55 हैं क्योंकि यह दुर्गम इलाकों में है और 1:20:56 क्रिटिकल इस मामले में भी है इनकी जो चरम 1:20:58 स्थिति है वो इसलिए भी है कि यह अपनी 1:21:01 पारिस्थितिकी के लिए जाने जाते हैं और इन 1:21:03 पर खतरा भी उतना ही ज्यादा है। ठीक है? 1:21:05 सबसे पहले है नामदफा। 1:21:08 नामदफा का जब नाम आता है तो हमारे दिमाग 1:21:10 में उड़ने वाली गिलहरी आ जाती है जो कि 1:21:12 अपनी झबरी पूंछ को पैराशूट की तरह यूज़ 1:21:14 करके छलांग लगाती है। लगता है उड़ रही है। 1:21:16 ठीक है? तो नामदफा नेशनल पार्क जो है ये 1:21:19 अरुणाचल में है। सबसे पूर्वी सिरे पर है 1:21:21 ये भारत के जहां की अरुणाचल और म्यांमार 1:21:24 की सीमा आपस में मिल जाती है। यानी भारत 1:21:26 और म्यांमार के बॉर्डर आपस में मिलते हैं। 1:21:28 ये सबसे पूर्वी हो गया। सबसे उत्तरी हेमिस 1:21:30 है। लद्दाख में है। यह आपका स्नो लेपर्ड 1:21:33 है। इसकी जैव विविधता हिमालय पारितंत्र के 1:21:36 हिसाब से है। इसके बाद कच्छ की खाड़ी वाला 1:21:38 सबसे पश्चिमी है। वेस्टर्न मोस्ट मरीन 1:21:41 नेशनल पार्क इसको कहा जाता है। ये डॉल्फिन 1:21:43 को आप देख रहे हैं। इसके बाद आप सबसे 1:21:46 दक्षिण वाले को भी देख लीजिए। ये गैलिथिया 1:21:48 बे है। गैलिथिया बे पड़ेगा। अंडमान 1:21:49 निकोबार द्वीप समूह में। सबसे दक्षिण का 1:21:51 हो गया। और मन्नार की खाड़ी वाला जो है वो 1:21:54 भारत के मुख्य भूभाग पर। वैसे तो ये द्वीप 1:21:56 है ना अंडमान वाला। भले ही भारत का द्वीप 1:21:58 है लेकिन ये भारत की मुख्य भूमि से लगा तो 1:22:00 है नहीं अलग बिखरा हुआ है समुद्र में तो 1:22:03 अगर मुख्य जो जमीन है भारत की ये वाली 1:22:05 निचला हिस्सा वहां पे सबसे दक्षिणी अगर 1:22:07 देखा जाए तो ये मन्नार की खाड़ी समुद्री 1:22:09 राष्ट्रीय उद्यान है ये तमिलनाडु के तट पर 1:22:12 है सबसे दक्षिणी 1:22:14 तो ये सारे जो यहां उद्यान है इन्हें आपने 1:22:17 देखा कुल मिलाकर भारत में 107 ऐसे नेशनल 1:22:21 पार्क 107 नेशनल पार्क हैं और राज्यवार 1:22:24 इनको हम अब देखने जा रहे हैं जो कि मोस्ट 1:22:26 इंपॉर्टेंट है। आंख एकदम खोलकर और कान 1:22:28 खड़े कर कर सुनिए और देखिएगा। देखिए इसमें 1:22:31 राज्य का नाम दिया है, राष्ट्रीय उद्यान 1:22:33 का नाम दिया है, जिला क्षेत्र दिया है। और 1:22:35 हां अधिसूचित कब किया गया था इन्हें? बतौर 1:22:37 पार्क वो दिया हुआ है। तो उत्तर प्रदेश 1:22:40 में सिर्फ एक है दुधवा। ठीक है? और ये 1:22:43 दुधवा नेशनल पार्क लखीमपुर खीरी में पड़ता 1:22:45 है। 1977 का है। उत्तराखंड में छह हैं 1:22:48 टोटल। जिम कार्बेट, गंगोत्री, गोविंद, 1:22:50 नंदा देवी और राजाजी। राजाजी किस नाम पर? 1:22:53 चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर। तो 1:22:55 जिम कार्बेट यानी पुराना वाला हेली नेशनल 1:22:58 पार्क और अभी इसका नाम रखना चाहिए रामगंगा 1:23:00 नेशनल पार्क। यह नैनीताल पौड़ी गढ़वाल 1:23:02 वाली वाले रीजन में पड़ता है। 1936 का है 1:23:05 सबसे पुराना। गंगोत्री नेशनल पार्क 1:23:07 उत्तरकाशी में है। 89 का गोविंद वाला भी 1:23:10 वहीं पर है। 90 का है। नंदा देवी चमोली 1:23:13 में पड़ता है। 82 और राजाजी नेशनल पार्क 1:23:16 पौड़ी गढ़वाल हरिद्वार देहरादून पूरा फैला 1:23:18 हुआ है। 1983 में इसको अधिसूचित किया गया 1:23:20 था। इसके बाद है फूल फूलों की घाटी। ठीक 1:23:24 है? यह फूलों की घाटी नेशनल पार्क है। यह 1:23:27 जो राष्ट्रीय उद्यान है, यह भी चमोली का 1:23:29 है। 1982 का है। बिहार में सिर्फ एक नेशनल 1:23:32 पार्क है वाल्मीकि ये पश्चिमी चंपारण में 1:23:34 पड़ता है। 1990 में इसको अधिसूचित किया 1:23:36 गया था। इसके बाद पापीकोंडा नेशनल पार्क 1:23:38 ये आंध्र का है। आंध्र में कुल मिलाकर चार 1:23:41 क्षमा कीजिएगा। तीन है। आंध्र पहले एक 1:23:44 बड़ा प्रदेश होता था तो अभी तेलंगाना उससे 1:23:46 अलग हो गया। तो कुल मिलाकर पापीकोंडा, 1:23:49 राजीव गांधी और वेंकटेश्वर। तो पापीकुंडा 1:23:52 नेशनल पार्क जो है यह आप देखेंगे कि अलूरी 1:23:55 सीताराम राजू और पूर्वी गोदावरी क्षेत्र 1:23:57 जो है वहां पर मतलब एलुरू वाला जो रीजन है 1:24:00 और पूर्वी 1:24:02 गोदावरी वाला जो रीजन है ठीक है वहां पर 1:24:04 पड़ता है 2008 का समय था अधिसूचना इसको 1:24:07 प्राप्त हुई थी राजीव गांधी रामेश्वरम 1:24:09 राष्ट्रीय उद्यान कड़प्पा जो कुड़प्पा 1:24:11 वाला रीजन है वहां पर पड़ता है 2005 1:24:14 वेंकटेश्वर तिरुपति और कड़प्पा 1989 सबसे 1:24:17 पुराना यही है इसके बाद है मॉलिंग नेशनल 1:24:20 पार्क ये अरुणा अरुणाचल का है। नामदफा और 1:24:22 मौलिंग दोनों अरुणांचल के हैं। नामदफा 1:24:24 आपने देखा ही कि ये चांगलांग मतलब 1:24:26 अरुणांचल और म्यांमार का बॉर्डर है। वहां 1:24:29 पर स्थित है चांगलांग वहां पर पड़ता है। 1:24:31 1983 का ये अधिसूचित किया गया था। और 1:24:33 मॉलिंग जो है ये ऊपरी सियांग में मौजूद 1:24:35 है। मतलब पश्चिमी सियांग और पूर्वी सियांग 1:24:37 का ये जॉइंट है और 1986 में इसको अधिसूचना 1:24:40 प्राप्त हुई थी। असम में कई सारे हैं। 1:24:42 ध्यान से देखें इसे। तो असम में एक तो है 1:24:45 डिब्रू सखोआ जो कि तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ 1:24:48 में फैला हुआ है। यह 1999 का है। काजीरंग 1:24:51 का बहुत पुराना है 1974 का। एक सींग वाले 1:24:54 गैंडे के लिए जाना जाता है और एक सींग 1:24:56 वाले गैंडे के अलावा यहां हाथी इत्यादि भी 1:24:58 पाए जाते हैं। तो गोलाघाट नगांव और 1:25:00 सोनिकपुर मानस नेशनल पार्क चिरांग और 1:25:02 बक्सा में है 90 नामेरी सोपुर 1998 ओरंग 1:25:06 दरांग और सोनिकपुर दोनों में फैला हुआ है। 1:25:09 विस्तार इसका ठीक-ठाक है। 1999 रायमोना 1:25:12 असम का छठवां नेशनल पार्क है। ध्यान 1:25:15 दीजिएगा। असम का छठवां नेशनल पार्क है और 1:25:20 भारत का 105वां 1:25:22 ठीक है? असम का छठवां है और भारत का कौन 1:25:25 से नंबर का है? 105वां है। कोंकराझार में 1:25:28 इसकी लोकेशन है। जून 2021 में इसको 1:25:30 अधिसूचित किया गया था। जब अधिसूचना मिली 1:25:32 थी तो उसके कुछ समय बाद ही यूपीएससी का 1:25:34 प्रीलिम्स होने वाला था। तो खूब 1:25:37 चिल्ला-चिल्ला कर YouTube पे लेक्चर लोग 1:25:39 रिकॉर्ड करते थे कि याद रखना 105वां ये है 1:25:41 और 106वां ये है और उसके बाद प्रश्न बने 1:25:43 तो क्रिकेट पर प्रश्न पूछा गया। ठीक है? 1:25:46 तो आयोग कहां से पूछेगा इसका दावा आप नहीं 1:25:49 ठोक सकते हैं। चिल्लाने की जरूरत नहीं है। 1:25:50 आप सिर्फ फैक्ट बताइए। लोगों को तथ्यों से 1:25:53 अवगत कराइए। कांसेप्ट अपना क्लियर करवाइए। 1:25:55 बस यह दावा कहीं भी नहीं करना चाहिए कि यह 1:25:58 प्रश्न आ ही जाएगा। संस्था दूसरी है 1:26:00 परीक्षा कराने वाली प्रश्न बनाने वाली। 1:26:02 पेपर आपने तो सेट किया नहीं। चलिए तो वही 1:26:05 दावा हम भी नहीं करते हैं। बस हां ये है 1:26:07 कि ये जो लिस्टिंग का वीडियो है इसमें 1:26:09 शुरुआत में मैंने इसलिए कहा कि आपको 1:26:11 ज्यादातर प्रश्न यहां से मिल जाएंगे 1:26:12 क्योंकि पर्यावरण के लगभग सारे तथ्य हमने 1:26:14 समेटे हुए हैं। इसलिए ये संभावना है। दावा 1:26:17 किसी भी प्रकार का नहीं। लेकिन हां जितने 1:26:19 तथ्य आपको पढ़कर स्टैटिक पार्ट में जाने 1:26:21 चाहिए वह सब यहां मौजूद है। चलिए दहिंग 1:26:24 पटकई नेशनल पार्क जो है यह असम का सातवां 1:26:27 नेशनल पार्क है और भारत का 106वां है। ये 1:26:29 डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया में फैला है। वही 1:26:31 जून 2021 में इसको अधिसूचना मिली थी। इसके 1:26:33 बाद है छत्तीसगढ़। गुरु घासीदास संजय 1:26:36 राष्ट्रीय उद्यान। संजय राष्ट्रीय उद्यान 1:26:38 भी कहते हैं। गुरु घासीदास नेशनल पार्क भी 1:26:41 कहते हैं। तो ये है कहां पे? में ये 1:26:43 कोरिया नाम की जगह है। ये कोरिया वो साउथ 1:26:45 कोरिया नॉर्थ कोरिया नहीं है। कोरिया नाम 1:26:47 की जगह है छत्तीसगढ़ में। तो वहां पर 1:26:49 मौजूद है। ये 1981 में अधिसूचित हुआ था। 1:26:51 इंद्रावती कुटुरू नेशनल पार्क जो है ये 1:26:54 दंतेवाड़ा बीजापुर रीजन में फैला हुआ है। 1:26:56 82 का है। इसके बाद है कांगेर वैली बस्तर 1:27:00 में 1982 का। गोवा में है भगवान महावीर। 1:27:03 मोलम नेशनल पार्क उत्तरी गोवा में 1978 1:27:05 का। गुजरात में आ जाइए। कई सारे हैं। पहले 1:27:08 तो है बेलावदार यानी ब्लैक बक नेशनल पार्क 1:27:10 भावनगर में। फिर है 76 का है ये गिर नेशनल 1:27:14 पार्क एशियन जो लायन है वो सिर्फ यहीं पर 1:27:18 पाया जाता है। अब यहां से पुनर्वास करके 1:27:19 कहीं और ले जाए वो अलग बात है लेकिन 1:27:21 वर्तमान में सिर्फ यही इसका नेचुरल 1:27:23 हैबिटेट है। तो गिर नेशनल पार्क जूनागढ़ 1:27:25 और गिर तथा सोमनाथ वाले इलाके में फैला 1:27:27 हुआ है। 75 में इसको अधिसूचित अधिसूचित 1:27:30 किया गया था। कच्छ की खाड़ी समुद्री नेशनल 1:27:32 पार्क जो है ये जामगर अभी जस्ट पीछे देखकर 1:27:34 आए। बांसदा बांसदा ये नौसारी में पड़ेगा। 1:27:38 1979 का है। 1979 का हरियाणा में दो हैं। 1:27:41 कलेसर है और सुल्तानपुर है। कलेसर आपका 1:27:43 यमुनानगर में है। 2003 में अधिसूचित हुआ 1:27:45 था और यह है गुरुग्राम में सुल्तानपुर 1:27:47 वाला। ठीक है? सुल्तानपुर से अपने यूपी 1:27:50 में मत आ जाइएगा। सुल्तानपुर नेशनल पार्क 1:27:52 जो है ये गुरुग्राम में पड़ता है। 1991 1:27:54 में अधिसूचना मिली थी। इसके बाद हम आए 1:27:57 हिमाचल में। हिमाचल वैसे है तो छोटा सा 1:27:59 लेकिन यहां नेशनल पार्कक्स की संख्या काफी 1:28:01 अच्छी खासी है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क 1:28:03 कुल्लू में है बल्कि तीन कुल्लू में है। 1:28:06 इंदरकिला है, खीरगंगा है और ग्रेट हिमालयन 1:28:09 है। जगह अगर समान है तो आप उसको एक साथ 1:28:11 रखकर याद कर सकते हैं। हां, अधिसूचना का 1:28:13 समय भिन्न है। जैसे ग्रेट हिमालयन इसमें 1:28:15 सबसे पहले का है 1984। बाकी दोनों जो है 1:28:18 इंदरकिला और खीरगंगा दोनों 2010 के। पिन 1:28:21 वैली लाहौल स्पीति में है। यह 1987 का है। 1:28:24 और कर्नल शेरजंग सिंबल यह सिरमौरी में 1:28:27 पड़ता है। 2010 का है। झारखंड में सिर्फ 1:28:30 एक ही है। बेतला लातेहार में है। 1986 का 1:28:33 है। कर्नाटक में कई सारे हैं। अंशी 1:28:35 बांदीपुर, बनरघट्टा या बनरघट्टा, 1:28:37 कुद्रेमुख और नागरहुल। तो अंशी नेशनल 1:28:41 पार्क जो है यह आप देखेंगे उत्तर कन्नड़ 1:28:42 में है। 1987 का अधिसूचित है। वैसे ही 1:28:45 बांदीपुर है। मैसूर और चामराज नगर में 1:28:47 पड़ता है। 1974 का है। बेंगलुरु का 1:28:49 बनरघट्टा है 1974। कुद्रेमुख चिकमंगल इसकी 1:28:53 लोकेशन कहां पे है? है जो साउथ कन्नड़ है 1:28:55 चिकमंगल वाला एरिया है वहां पर है 1987 और 1:28:58 नागरले राजीव गांधी नेशनल पार्क ये कोडागू 1:29:01 मैसूर में पड़ता है 88 1:29:05 ठीक है यहां पर एक फिल्म की शूटिंग हुई थी 1:29:07 काफी पहले पुरानी कई दशकों पुरानी फिल्म 1:29:10 है बहादुर बच्चे देखिएगा नागर होले उसमें 1:29:12 पूरा उसी नेशनल पार्क की जो पृष्ठभूमि है 1:29:14 दिखाया गया है और वहां पर तस्करों का एक 1:29:16 झुंड सक्रिय रहता है बुद्धिमान बच्चे उन 1:29:18 तस्करों को अंत में पकड़वाते हैं। इसके 1:29:21 बाद है केरल। केरल में अनामुडी शोला शोला 1:29:24 जंगलों को कहा जाता है। ध्यान दीजिएगा ये 1:29:25 जंगलों को पश्चिमी घाट में संबोधित किया 1:29:27 जाता है। तो अनाइमुडी शोला नेशनल पार्क 1:29:30 है। इडुक्की में है और एवीकुलम नेशनल 1:29:32 पार्क है। ये भी इडुक्की में ही है। लेकिन 1:29:34 दोनों का समय थोड़ा भिन्न है। इसमें जो 1:29:35 अनाइमुडी है वो 2003 का अधिसूचित है लेकिन 1:29:38 एरवीकुलम बहुत बहुत ज्यादा पुराना है। ये 1:29:40 1978 का है। ठीक है? आगे चलें और भी है। 1:29:43 मथिकेतन शोला ये भी इडुक्की में है। 2003 1:29:46 का। पंपाशोला भी डुक्की में है और पेरियार 1:29:48 भी डुक्की और जो पथनमा ढिट्टा नाम की जगह 1:29:51 है वहां पर फैला हुआ है। इसमें से पेरियार 1:29:54 वाला ज्यादा पुराना है। दो काफी पुराने 1:29:56 हैं। एक तो आपने देखा इसमें एबिकुलम है 1:29:58 दूसरा आपका पेरियार है। पेरियार का जो 1:30:00 अधिसूचना का समय है वो 1982 का है। और अंत 1:30:03 में आता है देखिए ये भी पुराना ही है। 1:30:05 साइलेंट वैली साइलेंट वैली नेशनल पार्क ये 1:30:08 पलप्गढ़ जिले में पूरी तरह से है जिसको कि 1:30:09 पालघाट डिस्ट्रिक्ट भी कहा जाता है। 1984 1:30:12 का है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में अगर 1:30:14 आप देखेंगे मध्य प्रदेश इस मामले में काफ़ी 1:30:16 समृद्ध है। नौ नेशनल पार्क हैं और दो की 1:30:20 और प्रस्तावना है। मतलब दो और अभी प्रपोजल 1:30:22 में चल रहे हैं वो भी आ जाएंगे। तो अभी जो 1:30:24 है उनको देखिए संजय गांधी कान्हा माधव 1:30:27 पेंच सतपुड़ा पन्ना घुगुआ वन विहार 1:30:30 ओमकारेश्वर और कुनोपालपुर इतने सारे हैं। 1:30:33 एक-एक करके देखते हैं। संजय राष्ट्रीय 1:30:36 उद्यान सीधी में है और सीधी में इसकी जो 1:30:39 अधिसूचना इसको प्राप्त हुई है ये 1981 की 1:30:41 है। उसके बाद है कान्हा मंडला में 1955 1:30:45 माधव नेशनल पार्क शिवपुरी 1959 पेंच नेशनल 1:30:49 पार्क शिवनी छिंदवाड़ा 1975 सतपुड़ा नेशनल 1:30:52 पार्क होशंगाबाद 1981 पन्ना नेशनल पार्क 1:30:55 पन्ना छतरपुर फैला हुआ है 1981 अधिसूचना 1:30:59 का समय है ये ठीक है गुगुआ जीवाश्म ये 1:31:02 फासिल नेशनल पार्क है मंडला में डिंडोरी 1:31:04 में पड़ता है लोकेशन इसकी 1983 का है वन 1:31:07 विहार आपका भोपाल में है ही है 1979 का है 1:31:10 ओंकारेश्वर प्रस्तावित है। प्रपोजल इसका 1:31:12 है खंडवा देवास और खरगोन में यह पूरा फैला 1:31:15 हुआ एरिया है। इसको नेशनल पार्क घोषित 1:31:17 करने का प्लान 2025 में था प्रपोजल। 1:31:19 कुनोपालपुर आपका शिवपुर और मुरैना में 1:31:21 फैला हुआ है। इसके बाद आते हैं महाराष्ट्र 1:31:24 में। महाराष्ट्र में एक तो है चंदौली। 1:31:27 सांगली में पड़ता है 2004 गुगामल अमरावती 1:31:30 में 1975। नवेगांव नगजीरा कहा जाता है। 1:31:33 गोंदिया में है ये। गोंदिया जगह का नाम 1:31:35 है। 1975 में अधिसूचना प्राप्त हुई थी। 1:31:38 ठीक वैसे ही ये पेंच है। जवाहरलाल नेहरू 1:31:40 नेशनल पार्क भी इसको कहा जाता है। नागपुर 1:31:42 में पड़ता है। 1975 का है। संजय गांधी 1:31:44 बोरीवाली नेशनल पार्क ये ठाड़े मुंबई में 1:31:46 है। 1983 का है। सभी पुराने ही हैं। कुछ 1:31:49 को छोड़कर तडोबा भी पुराना ही है। ये काफी 1:31:51 पुराना है। 1955 का घोषित है। चंद्रपुर 1:31:54 में इसकी लोकेशन। मणिपुर में दो है। एक तो 1:31:56 किंबुलमजाऊ है। बिनपुर में ये 1977 का है। 1:32:00 और दूसरा है शिरोई। शिरोई आपका पड़ता है 1:32:02 इंफाल में। यह 82 का है। मेघालय में दो 1:32:07 है। एक तो बाल बालपक्रम है और दूसरा 1:32:09 नोकरेक है। बालपक्रम गारो हिल्स का जो 1:32:12 साउथर्न एरिया है वहां पर मौजूद है। 1986 1:32:14 की अधिसूचना इसकी है। और नोकरेक जो आप देख 1:32:16 रहे हैं ये पश्चिमी गारो हिल्स में पड़ता 1:32:19 है। 97 का है। इसके बाद मिजोरम में भी दो 1:32:23 मुरलन और पोंगपुई। मुरलन चंपई में है 1:32:26 1991। फमपुई नीला पर्वत इसको शाब्दिक अर्थ 1:32:29 के तौर पर देखा जाता है। लॉन्ग टलाई नाम 1:32:31 की जगह है। 1992 नागालैंड में सिर्फ एक है 1:32:34 इतांकी। यह दीमापुर में पड़ता है। 93 में 1:32:36 इसको अधिसूचित किया गया था। उड़ीसा में आ 1:32:38 जाइए। उड़ीसा में दो आप मुख्य देख रहे हैं 1:32:41 और यही है। एक है सिमलीपाल और दूसरा है 1:32:44 भीतरकणिका। तो भीतरकणिका जो है ये 1:32:46 केंद्रपाड़ा जिले में पड़ेगा। 1998 की 1:32:49 अधिसूचना इसको प्राप्त हुई है। 1:32:52 ठीक है? और सिमलीपाल मयूरभंज में है 2025 1:32:58 ठीक है। अच्छा सिमलीपाल का जो प्रस्ताव है 1:33:01 ना ये 2025 का अधिसूचित तो है ही है लेकिन 1:33:04 इसका जो प्रपोजल था वो काफी पुराना था। 1:33:06 1980 में पहली बार प्रस्तावित किया गया था 1:33:09 इसको। ठीक है? फिर 86 में जो इसका 1:33:11 प्रस्तावित क्षेत्रफल है उसको बढ़ा दिया 1:33:13 गया। लगभग 845 स्क्वायर कि.मी. के आसपास 1:33:16 कर दिया गया। फिर 45 साल का इंतजार इसको 1:33:19 करना पड़ा। ये बहुत लंबी कहानी हो गई। ठीक 1:33:22 है? सिमलीपाल नाम तो बहुत पुराना है लेकिन 1:33:24 इसको बहुत बाद में अधिसूचना मिलती है। 1:33:25 उसके पीछे की हिस्ट्री है। 45 साल इसको 1:33:27 लंबा इंतजार करना पड़ता है और अंत में फिर 1:33:29 24 अप्रैल की तारीख होती है। 24 अप्रैल की 1:33:32 जो तारीख होती है 2025 की उसमें जो ओसा की 1:33:35 सरकार है वो इसको अधिसूचित करती है और इस 1:33:37 प्रकार से सिमली पाल जो है ना ये 107वें 1:33:40 नंबर का नेशनल पार्क बनता है। ध्यान 1:33:42 दीजिए। 1:33:43 तो ठीक बात है। अब आगे चलते हैं और जिले 1:33:46 हैं, राज्य हैं उनको देखना है। राजस्थान 1:33:48 में आते हैं। यहां भी अच्छे खासे हैं। 1:33:50 जैसे मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान है सबसे 1:33:52 पहले। 1:33:54 ठीक है? जैसलमेर और बाड़मेर में फैला हुआ 1:33:56 है। 1980 का है। केवला देवघाना भरतपुर में 1:33:59 है। 1981 का है। रणथंबोर सवाई माधोपुर 1:34:03 डिस्ट्रिक्ट में पड़ता है। यहां देख रहे 1:34:04 हैं आप 1980 का है। मुकुंदरा हिल्स जो है 1:34:07 ये कोटा में है। 2004 का सरिस्का अलवर 1:34:11 जिले में पड़ता है। 1982 का है। सिक्किम 1:34:14 में है कंचनजंगा। उत्तरी सिक्किम में है। 1:34:16 77 1977 का है। मतलब 1977 का। तमिलनाडु 1:34:20 में भी कई नेशनल पार्क हैं। जैसे कि गुंदी 1:34:22 है सबसे पहले चेन्नई का 1978 का। फिर 1:34:25 मन्नार की खाड़ी वाला है। भारत की जमीन पर 1:34:27 सबसे दक्षिणी है ना? अगर अंडमान निकोबार 1:34:30 को नहीं देखें सिर्फ मुख्य भूमि को देखें 1:34:31 तो उसमें सबसे दक्षिण में यही नेशनल पार्क 1:34:34 मौजूद है। मन्नार की खाड़ी नेशनल पार्क 1:34:36 रामनाथपुरम तोती कोरिन में पड़ता है। और 1:34:38 ये तोती कोरिन वाला जो है इसको अधिसूचित 1:34:40 किया गया था 1986 में। अन्नामलाई नेशनल 1:34:43 पार्क जिसको कि इंदिरा गांधी नेशनल पार्क 1:34:45 भी कहा जाता है वो तिरुपुर जिला है। 1989 1:34:48 में इसे अधिसूचित किया गया था। वहां पर 1:34:50 पड़ता है तिरुपुर जिले में। मुदुमलाई 1:34:53 नीलगिरी में है और मुखर्ती जो है ये भी 1:34:55 नीलगिरी में ही है। दोनों 1990 के हैं। 1:34:58 इसके बाद आइए तेलंगाना में। अगर तेलंगाना 1:35:00 आंध्र में रहता तो फिर एक साथ पढ़ते लेकिन 1:35:02 यहां अलग-अलग। तो कासू ब्रह्मानंद रेड्डी 1:35:05 राष्ट्रीय उद्यान। यह हैदराबाद में है। 1:35:07 1998 का है। महावीर हरण वन हरिणा वनस्थली 1:35:11 राष्ट्रीय उद्यान कहा जाता है। यह रेड्डी 1:35:13 में पड़ता है। ठीक है? रेड्डी जगह है। 1:35:16 1994 में इसको अधिसूचना मिली थी। इसके बाद 1:35:18 है मृगावनी। ये रेड्डी में ये भी इसकी 1:35:21 लोकेशन है। 1994 में इसको अधिसूचित किया 1:35:23 गया था। त्रिपुरा में दो है। एक तो 1:35:25 क्लाउडेड लेपर्ड लेपर्ड नेशनल पार्क है और 1:35:28 दूसरा बिसन राजबरी नेशनल पार्क। तो 1:35:31 क्लाउडेड लेपर्ड नेशनल पार्क जो है यह 1:35:33 वेस्टर्न त्रिपुरा में है। 2007 की 1:35:34 अधिसूचना है। और बिसन नेशनल पार्क जो है 1:35:36 राजबरी वाला यह भी दक्षिणी त्रिपुरा में 1:35:39 पड़ता है और 2007 का ही अधिसूचित। इसके 1:35:42 बाद आइए पश्चिम बंगाल में चलते हैं। बुक्स 1:35:46 अलीपुर द्वार नाम की जगह है वहां पर 1992 1:35:49 में। गोरूमारा जलपाईगुड़ी में है 92 1:35:52 जलदापाड़ा लोकेशन ही जलदापाड़ा है 2012 1:35:56 नेरा वैली दार्जिलिंग 86 सिंगल लीला 1:35:59 दार्जिलिंग 86 सुंदरवन आप जानते ही हैं 24 1:36:03 परगना जिला है 1984 का है काफी पुराना है 1:36:06 कैंपेल बे नेशनल पार्क जो है ये अंडमान का 1:36:09 है 1982 में अधिसूचना मिली थी अंडमान 1:36:11 निकोबार आइलैंड इसका स्थान है और उसी 1:36:14 प्रकार से गैलिथिया बे है ये निकोबार में 1:36:17 पड़ता है 1992 में अधिसूचना मिली थी 1:36:19 महात्मा महात्मा गांधी मरीन बंदूर नेशनल 1:36:21 पार्क ये अंडमान का है 83 माउंट हेरियट 1:36:24 अंडमान का है 87 रानी झांसी समुद्री 1:36:27 राष्ट्रीय उद्यान अंडमान का ही है 96 1:36:30 सैंडल पीक अंडमान का है 79 1979 मिडिल बटन 1:36:36 आइलैंड पोर्ट ब्लेयर का है स ये 1987 का 1:36:40 है उसी प्रकार से नॉर्थ बटन आइलैंड अंडमान 1:36:43 का है ये 1979 यानी 1979 का है साउथ बटन 1:36:47 आइलैंड ये सारे बटन है छोटे-छोटे आकार के 1:36:50 द्वीपीय हिस्से तो अंडमान निकोबार द्वीप 1:36:52 समूह का ये भी क्षेत्र है 87 ठीक है 87 1:36:54 में इसको अधिसूचित किया गया था ज्यादातर 1:36:56 87 वाले हैं नहीं तो उसी के आसपास के हैं। 1:36:58 ठीक है अब आगे चलते हैं यहां देखिए जम्मू 1:37:00 कश्मीर को और लद्दाख को जम्मू कश्मीर में 1:37:03 कुल मिलाकर तीन है जिसमें से कि दो 1:37:05 श्रीनगर में और एक बारामूला में है। पहला 1:37:07 अपना सलीम अली नेशनल पार्क है जो कि 1:37:09 श्रीनगर में है। 92 में अधिसूचना मिली थी। 1:37:11 दूसरा है दाचीगाम। कश्मीरी स्टग यानी जो 1:37:14 लाल हिरन होता है उसके लिए प्रसिद्ध है। 1:37:16 तो दाचीगाम नेशनल पार्क श्रीनगर और 1:37:18 पुलवामा दोनों में फैला हुआ है। 1981 का 1:37:21 है। काजीनाग काजीनाग ठीक है? काजीनाग जो 1:37:25 नेशनल पार्क है ये बारामूला का है और ये 1:37:27 सन 2000 का है। किस्तवाड़ भी आप ध्यान 1:37:30 देंगे तो ये भी कश्मीर में ही है और 1:37:32 किस्तवाड़ जो है ये किस्तवाड़ और डोडा 1:37:34 जिलों में फैला हुआ है। 1981 में इसको 1:37:36 अधिसूचना मिली थी। लद्दाख का है 1:37:38 हेमिसाहाई। पहले ये कश्मीर का था लेकिन अब 1:37:40 लद्दाख जब केंद्र शासित प्रदेश अलग हो गया 1:37:43 तो ये लेह जिले में लद्दाख के पड़ता है। 1:37:45 1981 का है। तो ये तो हमने कुल मिलाकर देख 1:37:49 लिए सारे। अब भारत के जो पांच सबसे बड़े 1:37:51 वाले हैं क्षेत्रफल के आधार पर उनको देख 1:37:54 लेते हैं। सबसे पहले है हेमिस जम्मू 1:37:56 कश्मीर का 3350 स्क्वायर कि.मी. इसका टोटल 1:37:59 एरिया है। स्थापना हुई थी 1981 में। फिर 1:38:03 है डेजर्ट नेशनल पार्क। राजस्थान स्थापना 1:38:06 का समय 1992 3162 स्क्वायर किलोमीटर में 1:38:10 फैला हुआ है। गंगोत्री नेशनल पार्क 1:38:12 उत्तराखंड का 1989 का आज स्थापित है। 2900 1:38:17 2390.02 1:38:19 मतलब मोटे तौर पर 2390 स्क्वायर कि.मी. 1:38:22 विस्तार नामदफा भी अच्छा खासा बड़ा है। 1:38:24 1808 स्क्वायर कि.मी. 1983 अरुणाचल 1:38:28 कंचनजंगा आप सिक्किम में जानते ही हैं। 77 1:38:30 में इसे स्थापित किया गया था। यह 1784 1:38:33 स्क्वायर कि.मी. फैला हुआ है। सबसे बड़ा 1:38:36 इसमें हेमिस है। बाकी जितने हैं वह इसी 1:38:39 क्रम में छोटे हैं थोड़े से। इसके बाद अब 1:38:41 सबसे जो छोटे वाले हैं उनको भी देखेंगे। 1:38:43 लेकिन यहां भारत के नक्शे पर जरा राज्यभार 1:38:45 देख लीजिए। वही नेशनल पार्क है जिन्हें आप 1:38:47 देख कर आ रहे हैं। बस नक्शे में थोड़ा सा 1:38:49 एक बार नजर घुमा लेते हैं। तो शुरू करते 1:38:51 हैं उत्तर से ही। यहां देखें 1:38:55 कश्मीर वाले पहले देख लेते हैं। सलीम अली, 1:38:58 दाचीगाम, काजीनाग और किश्तवार जम्मू 1:39:00 कश्मीर। लद्दाख का सिर्फ एक है हेमिसाई। 1:39:04 उसके बाद ग्रेट हिमालयन इंदरकिला खीरगंगा 1:39:07 पिन वैली और कर्नल शेरजंग सिंबलवाड़ा यह 1:39:10 हिमाचल के हो गए। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान 1:39:13 सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान ये दोनों 1:39:15 कहां के हैं? तो कालेसर और सुल्तानपुर 1:39:18 दोनों आपके पड़ेंगे हरियाणा वाले इलाके 1:39:20 में। ठीक है? इसके बाद मरुभूमि केवलादेव, 1:39:24 मुकुंदरा हिल्स, रणथंबौर और सरिस्का बेशक 1:39:27 राजस्थान। 1:39:29 अपने यूपी में सिर्फ एक है। है ना? दुधवा 1:39:32 राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड में कई सारे 1:39:34 हैं। तो उत्तराखंड में आप देखेंगे कार्बेट 1:39:36 है, गंगोत्री है, गोविंद है, नंदा देवी 1:39:39 है, राजाजी है और वैली ऑफ़ फ्लावर यानी 1:39:41 फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान है। उसी 1:39:43 प्रकार से बिहार में भी सिर्फ एक है 1:39:45 वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान। सिक्किम में 1:39:48 आपका कंचनजंगा है छोटा सा। ठीक? ये देख 1:39:51 रहे हैं बुक्स, गोरूमारा, जलदापाड़ा, 1:39:54 नेरा, सिंगलीला, सुंदरवन ये सब जो है ये 1:39:56 पश्चिम बंगाल में हैं। 1:39:59 यहां वाले फिर यहां देखेंगे बलपक्रम और 1:40:02 नोकरेकिक। बलपक्रम और नोकरेक ये मेघालय के 1:40:05 हैं। क्लाउडेड लेपर्ड और बिसन यह दोनों 1:40:08 नेशनल पार्क त्रिपुरा के हैं। अगरतला 1:40:10 त्रिपुरा वाला एरिया आप देख रहे हैं। और 1:40:12 हां असम का देखें तो डिब्रूसखोवा काजीरंगा 1:40:14 मानस नामेरी ओरंग रायमोना देहिंग पटकई ये 1:40:18 सारे के सारे जो हैं ये असम के हैं। 1:40:20 नागालैंड में आप जानते ही हैं इतांकी है। 1:40:22 किंबु लमजाऊ आपका मणिपुर में है। मिजोरम 1:40:25 में मुरलिन और फोंगपुई है। नीचे आ जाते 1:40:27 हैं। जरा गुजरात को देखिए। थोड़ा ऊपर कर 1:40:29 लेते हैं। अब भारत के नक्शे को देखिए। तो 1:40:32 हां गुजरात का आप देखेंगे तो ब्लैक बक 1:40:34 बेलावदार यह हो गया इसके बाद गिर है 1:40:38 समुद्री राष्ट्रीय उद्यान है बांसदा है 1:40:41 चंदोली गोगामल नवेगांव नगजीरा पेंच संजय 1:40:44 गांधी और तडोबा ये आपके महाराष्ट्र के हो 1:40:46 गए मोलम जो है ये गोवा का हो गया अंशी 1:40:48 बांदीपुर बनरघट्टा कुदरेमुख नागर होले ये 1:40:51 सारे के सारे जो है ये कर्नाटक के हैं 1:40:53 अनाईमुडी शोला एरवीकुलम मण मथिकेतन शोला 1:40:57 पंपादुम शोला पेरियार साइलेंट वैली ये 1:40:59 सारे जो हैं यहां वाले थोड़ा हो सकता ब्लर 1:41:02 दिखाई दे रहा हो लेकिन यहां पर लिखा हुआ 1:41:04 है ये केरल के हो गए। तमिलनाडु में 1:41:06 कौन-कौन से हैं? तो गोइंदी है, मन्नार की 1:41:08 खाड़ी है, अन्नामलाई है, मधुमलाई है और 1:41:10 मुखर्ती है। उड़ीसा में भीतरकणिका और 1:41:13 सिमलीपाल है। आंध्र में कौन-कौन से हैं? 1:41:15 पापीकोंडा है, राजीव गांधी, रामेश्वरम और 1:41:17 श्री वेंकटेश्वर राष्ट्रीय उद्यान। मध्य 1:41:20 प्रदेश में नौ है टोटल। आप देखें बांधवगढ़ 1:41:23 संजय कान्हा माधव पेंच सतपुड़ा पन्ना 1:41:27 फौसिल नेशनल पार्क मंडलावाला वन विहार 1:41:30 भोपाल का ओमकारेश्वर और कुनोपालपुर 1:41:34 ठीक है और क्या बच गया है अच्छा तेलंगाना 1:41:37 रह गया बीच में आंध्र को देखा तेलंगाना 1:41:39 छूट गया तेलंगाना नीचे कासू ब्रह्मानंद 1:41:41 रेड्डी महावीर हरिणा और मृगावनी ये तीन जो 1:41:44 है ये तेलंगाना के हो गए वैसे ही अगर आप 1:41:46 अंडमान निकोबार में चले आएंगे तो यहां पर 1:41:48 आप देखेंगे कैंपेल बे गैलिथिया बे महात्मा 1:41:51 गांधी मरी मरीन, माउंट हेरियट, रानी 1:41:53 झांसी, सैंडल पीक, मिडिल बटन, नॉर्थ बटन 1:41:56 और साउथ बटन। इस तरीके से ये फैले हुए हैं 1:41:58 अंडमान निकोबार आइलैंड में। तो ये पूरा 1:42:00 विस्तार नेशनल पार्क का वही जो डाटा आपने 1:42:03 पीछे लिखित देखा है उसी को चित्र में 1:42:05 नक्शे में आप देख रहे थे ताकि दिमाग में 1:42:06 बैठे। अब इसके बाद देखेंगे नेशनल पार्क को 1:42:09 बहुत देख लिया। भारत में जो बाघ अभयारण्य 1:42:12 है टाइगर रिजर्व। तो बाघ संरक्षण 1:42:14 प्राधिकरण जो है अपने देश में यानी 1:42:16 एनटीसीए। इसका गठन वन्य जीव संरक्षण 1:42:19 अधिनियम 1972 की ही धारा यानी 38 एल क्लॉज़ 1:42:22 वन के अंतर्गत किया गया था। 1:42:25 ठीक है? धारा संख्या भी आपको पता होनी 1:42:27 चाहिए। लेकिन उससे ज्यादा यह महत्वपूर्ण 1:42:29 है कि आप जाने कि किस अधिनियम के अंतर्गत 1:42:31 इसको स्थापित किया गया है। प्रोजेक्ट 1:42:33 टाइगर जब लांच किया गया तो उसके तहत 1:42:35 राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण के लिए एक 1:42:37 अग्रणी पहल की गई। 1:42:40 और क्या खास बात हो सकती है? तो राष्ट्रीय 1:42:42 बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए और 1:42:45 भारतीय वन्य जीव संस्थान यानी डब्ल्यूआईआई 1:42:48 यह कई राज्य वन एजेंसियों और संरक्षण गैर 1:42:51 सरकारी संगठनों की सहायता से 2006 से 2006 1:42:56 से भारत सरकार की चार वर्षीय बाघ जनगणना 1:42:59 का नेतृत्व कर रहे हैं। जैसे आजकल इंसानों 1:43:02 की गणना चल रही है ना। अभी घरों की गणना 1:43:04 हुई है। आप देखते होंगे आपके घर पर ऐसे 1:43:07 कुछ विशिष्ट नंबर लिख दिए गए हैं जो 1:43:09 जनगणना कराने वाले मतलब करने वाले जो 1:43:11 कर्मचारी आते थे तो वो क्या करते थे? आपसे 1:43:14 पूरा डाटा अता-पता करते थे। Google मैप पर 1:43:16 आपके घर की लोकेशन वगैरह देखते थे और उसके 1:43:19 बाद सारा डाटा इकट्ठा करने के बाद चौक से 1:43:21 या मार्कर से आपके गेट या आपकी दीवारों पर 1:43:23 नंबर लिख कर जाते थे। ठीक है? कुछ अल्फा 1:43:26 न्यूममेरिक ऑर्डर में लिख कर जाते थे। तो 1:43:29 वैसे ही गणना होती है हर प्राणी की। 1:43:32 इंसानों की जैसे गणना होती है ठीक वैसे ही 1:43:34 और इन प्राणियों की गणना यह प्राणी खुद 1:43:36 नहीं करते हैं मनुष्य करता है तो बाघों की 1:43:38 गणना का तरीका क्या होता है पहले क्या 1:43:40 करते थे ना पहले फुटप्रिंट गिनते थे बाघ 1:43:42 के पंजे को गिनते थे पता लगता था एक ही 1:43:45 बाघ जो है वो 10 एरिया में चल दिया है तो 1:43:46 10 बार गिन गया तो इसमें समस्या होती थी 1:43:48 मतलब एग्जैक्ट नंबर नहीं प्राप्त होता था 1:43:51 मतलब इतने भी बेवकूफ गिनने वाले नहीं होते 1:43:53 थे लेकिन फिर भी जो फुटप्रिंट है उनके 1:43:55 आधार पर गिनना उतना भरोसेमंद नहीं होता है 1:43:58 तो उसके बाद जो बाघों के शरीर पर पैटर्न 1:44:00 होते हैं ना मतलब जो स्ट्रिप होती हैं, 1:44:02 पट्टियां होती हैं काली-काली। वह हर बाग 1:44:04 पर सिमिलर नहीं होता है। तो उसको अगर 1:44:07 बारीकी से समझ लिया जाए तो हमें पहचानने 1:44:09 में आसानी हो जाएगी कि अच्छा इसको हमने 1:44:10 गिन लिया है और इसको नहीं गिना है। तो 1:44:12 आजकल तो गिनने के हजार तरीके हो गए हैं। 1:44:14 बाघों की जनगणना का नेतृत्व ऐसे ही होता 1:44:16 है। और संख्या भी इनकी इतनी ज्यादा नहीं 1:44:19 है। मतलब 3000 के अंदर बाघ अगर हैं तो 1:44:21 उनको गिनना इतना मुश्किल काम नहीं है। ठीक 1:44:23 बात है। हिंसक पशु है और जंगली है। जंगल 1:44:25 में छिपा हुआ है। लेकिन सीमित है ना? 1:44:27 लाखों की तादाद में रहता, तो फिर गिनना 1:44:29 वैसे भी कठिन हो जाता। फिर कोई गिनता भी 1:44:31 नहीं। लोग खोज कर मारने लगते। तो आगे चलते 1:44:34 हैं। बाघ अभयारण्यों का गठन कोर या बफर 1:44:37 रणनीति पर किया गया है। इसके बाद आप 1:44:40 देखेंगे आंध्र प्रदेश में स्थित नागार्जुन 1:44:42 श्रीसैलम जो अभयारण्य है ये भारत का सबसे 1:44:45 बड़ा टाइगर रिजर्व टाइगर रिजर्व है। ध्यान 1:44:48 दीजिएगा। और यह प्रकाशम, नंदियाल और 1:44:52 पलनाडू नाम के जो जिले हैं आंध्र के वहां 1:44:54 फैला हुआ है। महाराष्ट्र में वर्धा जिले 1:44:56 का जो हिंगानी है वहां पर है बोर बोर 1:44:58 टाइगर रिजर्व। ये सबसे छोटे साइज का है। 1:45:01 सबसे छोटा है। बोर जो है वो सबसे छोटा है। 1:45:03 नागार्जुन सागर श्रीसैलम जो है या 1:45:06 नागार्जुन श्रीसैलम ये सबसे बड़ा है। 1:45:08 ध्यान दीजिएगा। भारत का पहला जो टाइगर 1:45:10 रिजर्व है ये जिम कॉर्बेट ही है। 1:45:12 लुप्तप्राय जो रॉयल बंगाल टाइगर था उसके 1:45:15 हैबिटेट का संरक्षण करने का प्रयास यहीं 1:45:17 से शुरू किया जाता है। हेली नेशनल पार्क 1:45:20 के रूप में स्थापित हुआ था ये 1936 में। 1:45:22 बाद में इसका नाम जिम कार्बेट के नाम पर 1:45:24 रख दिया गया। प्रसिद्ध संरक्षणवादी और 1:45:26 लेखक नहीं बल्कि प्रसिद्ध शिकारी भी थे 1:45:28 जिम कार्बेट। मतलब नाम तो यह होता था कि 1:45:30 खूंखार जानवरों का शिकार करते हैं जो 1:45:32 आदमखोर हो जाते हैं। लेकिन असल में शिकारी 1:45:34 थे और अंग्रेज सारे के सारे संरक्षण की 1:45:36 आड़ में आड़ में शिकार करते थे। बड़े 1:45:38 पैमाने पर हाथी और अन्य जो वन्य प्राणी थे 1:45:40 उनको शिकार बनाते थे अपना। बाकी हम 1:45:42 भारतीयों के लिए पाबंद कर देते थे कि नहीं 1:45:44 मारना नहीं है। लेकिन अपने खुद वही काम 1:45:47 करते थे। तो खैर वो उनकी मनमानी थी। यहां 1:45:49 पर जिम कार्बेट के नाम पर इसका नाम रखा 1:45:51 गया है और 1973 में यह भारत का पहला बाघ 1:45:54 अभयारण्य बन गया। 73 1:45:58 यह जो थारीदार बिल्ली है यानी बाघ इसके 1:46:01 संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसके 1:46:03 प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए एक 1:46:05 वैश्विक प्रणाली की आवश्यकता थी और इसीलिए 1:46:08 एक दिन तय किया गया कि इस दिन हम मिल 1:46:10 बैठकर इस बात पर विचार करेंगे। एक दिन तो 1:46:12 कम से कम ऐसा होना चाहिए। तो वो तारीख है 1:46:14 29 जुलाई की। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस इस 1:46:17 दिन मनाया जाता है। तो अंतरराष्ट्रीय बाघ 1:46:19 दिवस की शुरुआत हुई 2010 में रूस का जो 1:46:22 सेंट पीटर्सबर्ग है वहां पर एक टाइगर समिट 1:46:24 आयोजित की गई थी। जहां की जंगली बाघों की 1:46:26 संख्या में गिरावट और उनके विलुप्त होने 1:46:29 की स्थिति पर चिंता जाहिर की गई। ना सिर्फ 1:46:31 भारत में बल्कि पूरी दुनिया में यह जो 1:46:34 धारीदार बिल्ली है बड़े साइज की यह तादाद 1:46:37 में कम होती जा रही है। भारत में तो बढ़ 1:46:39 रहे हैं ज्यादा तादाद में है और अच्छी 1:46:41 खासी मात्रा है। लेकिन दुनिया के बाकी 1:46:43 हिस्सों में इनकी स्थिति बहुत खराब। तो 1:46:46 ऐसी स्थिति में इस पर चर्चा की गई कि ऐसा 1:46:48 काम करना चाहिए जिससे कि इनका संरक्षण हो 1:46:50 सके और इसी काम को प्रोत्साहित करने के 1:46:52 लिए एक तय किया गया दिन है जुलाई का जो कि 1:46:54 अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के तौर पर मनाया 1:46:56 जाता है। ये ध्यान दीजिएगा कि बाघ से पहले 1:47:00 भारत का राष्ट्रीय पशु बना था शेर। एशियन 1:47:03 लायन जो है वो सबसे पहले हमारा राष्ट्रीय 1:47:06 पशु था और ये 1973 से पहले तक रहा। लेकिन 1:47:09 जब 73 में प्रोजेक्ट टाइगर और फिर बाघ के 1:47:12 संरक्षण की बात होने लगी तो कहा गया कि 1:47:14 शेर को संरक्षण की अभी जरूरत नहीं है। 1:47:16 जाने दो इसको एक तरफ रखो। हम बाघ को अपना 1:47:18 राष्ट्रीय पशु बना लेते हैं ताकि लोग इस 1:47:20 पर फोकस करें। अगर ऐसी बात है तो फिर अब 1:47:23 जो एशियन लाइन है उसकी भी स्थिति बहुत 1:47:25 अच्छी नहीं है। गिर उसका प्राकृतिक आवास 1:47:27 भारत में एकमात्र वो नेचुरल हैबिटेट है जो 1:47:29 कि एशियन लायन के लिए बचा हुआ है। पहले 1:47:31 दायरा फैला हुआ था और वहां भी इनकी स्थिति 1:47:34 बहुत ज्यादा दयनीय है। जो एशियन लायन है 1:47:37 उनका जेनेटिक ऑर्डर अब उतना अच्छा नहीं रह 1:47:39 गया जितना पहले ये मजबूत और हट्टे-कट्टे 1:47:41 रहा करते थे। अफ्रीकी शेरों जितने यह बड़े 1:47:43 साइज के और उतने झबरेदार नहीं होते हैं। 1:47:46 लेकिन फिर भी जो मध्यम कद काठी होती है 1:47:48 उसमें मजबूत होते हैं। लेकिन इनकी 1:47:50 इम्यूनिटी और इनका जो स्ट्रक्चर है वो 1:47:52 लगातार डाउन हो रहा है। डिक्रीज करता जा 1:47:54 रहा है। ऊपर से डिस्टेंपर और तमाम तरह के 1:47:56 जो खतरनाक वायरस है उनका खतरा इनके सिर पर 1:47:58 मंडराता रहता है। तो संरक्षण की दरकार तो 1:48:00 इनको भी उतनी ही मजबूत है। उतनी ही मजबूत 1:48:02 संरक्षण की दरकार एशियन एलीिफेंट्स को है 1:48:05 और तमाम जीवों को है। लेकिन फिलहाल बाघ को 1:48:07 तवज्जो दी गई और इसे राष्ट्रीय पशु बनाया 1:48:09 गया 1973 में। 1:48:12 तो यहां कुछ वैरायटी है। जैसे कि आप 1:48:14 देखेंगे ग्लोबल टाइगर फोरम है जिसे कि आप 1:48:16 जीटीएफ कहते हैं और ग्लोबल टाइगर 1:48:18 इनिशिएटिव है जिसे कि आप जीटीआई कहते हैं। 1:48:20 ये दोनों है क्या चीज? पहले नंबर पर है 1:48:23 ग्लोबल टाइगर फोरम। यह एक अंतर सरकारी 1:48:26 अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो कि विशेष रूप 1:48:27 से बाघों के संरक्षण के लिए काम करता है। 1:48:29 यह कोई नई बात नहीं है। ये सब संरक्षण की 1:48:31 ही पहल है। नई बात यह है 1993 का जो समय 1:48:35 था नई दिल्ली में बाघ संरक्षण पर एक 1:48:37 गोष्ठी आयोजित की जाती है और वहां पर यह 1:48:40 तय किया गया कि बाघों की सुरक्षा के लिए 1:48:42 एक वैश्विक अभियान चलाया जाएगा और उसी के 1:48:44 तहत 94 में इसकी स्थापना हुई थी। ग्लोबल 1:48:47 टाइगर फोरम जो है इसकी स्थापना हुई थी और 1:48:49 इसका मुख्यालय है नई दिल्ली में। 3 साल 1:48:51 बाद इसकी बैठक होती है। अब यहां आप देख 1:48:55 रहे हैं ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव इसको 2008 1:48:57 में लांच किया गया था। इसे सरकारों, 1:48:59 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज, 1:49:01 संरक्षण, वैज्ञानिक समुदाय, निजी क्षेत्र 1:49:03 सबके एक विशिष्ट गठबंधन के रूप में 1:49:05 मिलीजुली जो साझा प्रतिक्रिया है, प्रयास 1:49:08 है, उसके रूप में लांच किया गया था। 1:49:10 उद्देश्य है जो जंगली बाघ है, उनको 1:49:12 विलुप्त होने से बचाना। 1:49:14 ठीक है? आगे बढ़ते हैं। 58 टाइगर रिजर्व 1:49:17 है यानी बाघ अभयारण्य है अपने देश में। तो 1:49:20 यहां पर राज्य दिया है, बाघ अभयारण्य का 1:49:22 नाम दिया है, अधिसूचना का समय और कुल 1:49:23 क्षेत्रफल दिया है। असम में कुल मिलाकर 1:49:27 चार हैं। काजीरंगा, मानस, नामेरी औरंग तो 1:49:30 काजीरंगा का अधिसूचना का समय है 2007 1173 1:49:33 स्क्वायर कि.मी. लगभग ये फैला हुआ है। 1:49:35 मानस 200837 1:49:38 स्क्वायर कि.मी. नामेरी सन 2000 का है 464 1:49:42 स्क्वायर कि.मी. ओरांग 2016 492 स्क्वायर 1:49:46 कि.मी. अरुणाचल में तीन है नामदफा पक्के 1:49:49 और कमलांग नामदफा 198752 1:49:53 पक्के 2012 1198.45 1:49:56 स्क्वायर कि.मी. कमलांग 2017 1:49:59 783 स्क्वायर कि.मी. आंध्र में सिर्फ एक 1:50:02 है नागार्जुन सागर श्रीसैलम 2007 और 1:50:04 क्षेत्रफल देखिए 3296 1:50:08 इसके बाद तेलंगाना में अमराबाद और कावल 1:50:10 है। ठीक है? तो अमराबाद जो है यह 2015 का 1:50:13 अधिसूचित है। कावल उससे थोड़ा पुराना है 1:50:15 2012 का है। दोनों का क्षेत्रफल वही और 1:50:19 2015 के आसपास है। बिहार में वाल्मीकि है 1:50:22 2012 का है 899। छत्तीसगढ़ में इंद्रावती 1:50:25 है। 2009 का ये है। 2799 स्क्वायर कि.मी. 1:50:28 इसका विस्तार है। इसके अलावा आप देखेंगे 1:50:31 छत्तीसगढ़ में इंद्रावती के अलावा अचानक 1:50:33 कमार अमरकंटक है। 2009 का 914 उदंती सीता 1:50:37 नदी है 2009 का और गुरु घासीदास तमोर 1:50:40 पिंगला जो कि 56वां टाइगर रिजर्व है 56वां 1:50:43 टाइगर रिजर्व है ये 204 में डिक्लेअ किया 1:50:45 गया था इसका जो टोटल एरिया है वो 2829 है 1:50:49 झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व है 2012 का 1:50:51 है 1129 स्क्वायर किमी लगभग या आप इसे 1:50:55 1130 ही मान लीजिए इतना इसका दायरा है 1:50:58 कर्नाटक में कई सारे हैं एक-एक करके देखें 1:51:00 बांदीपुर 2007 1456 नागर नागर होले 2007 1:51:04 ये नेशनल पार्क भी है और टाइगर रिजर्व भी 1:51:06 है। 2007 1205.76 1:51:09 भद्रा 2007 1064 काली 2007 1097 1:51:15 बिलीगिरींगा टेंपल या रंगनाथ टेंपल 2007 1:51:20 574.82 1:51:21 स्क्वायर कि.मी. केरल में आप देखेंगे दो 1:51:24 टाइगर रिजर्व है। एक तो पेरियार है 2007 1:51:26 का 925 स्क्वायर कि.मी. और परबीकुलम है। 1:51:29 परमकुलम को आप यहां पर देख रहे हैं। 1:51:31 2009643.66 1:51:35 मध्य प्रदेश में आइए। टाइगर स्टेट इसको 1:51:37 कहा जाता है। बाघों की सबसे ज्यादा तादाद 1:51:40 और संरक्षण के लिए सबसे ज्यादा सक्रिय 1:51:42 प्रयास। तो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व है 2007 1:51:44 का और इसका जो एरिया है इसका जो एरिया है 1:51:48 वह है 2133.30 1:51:50 कान्हा 200751.79 1:51:53 संजय दुबरी 2011 1674.50 1:51:57 पेंच 2007 1179.63 1:52:00 बांधवगढ़ 2007 1536.93 1:52:04 वीरांगना दुर्गावती ये 54वें नंबर का है। 1:52:07 2023 में डिक्लेअ हुआ था। 39.12 1:52:10 स्क्वायर कि.मी. इसका टोटल एरिया है। 1:52:12 पन्ना 2007 का है। 1598 1:52:17 10 स्क्वायर कि.मी. इसका विस्तार है। और 1:52:19 राता पानी 57वें नंबर का है। 2024 का है। 1:52:22 1271.4 1:52:23 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका एरिया है। माधव 1:52:26 टाइगर रिजर्व 58वें नंबर का है। 2025 का 1:52:28 है। 1651 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका 1:52:31 विस्तार है। इसके बाद आ जाइए महाराष्ट्र 1:52:33 में। तो मेलघाट है सबसे पहले 2007 का। 1:52:37 2768 52 स्क्वायर कि.मी. पेंच है 2007 का 1:52:41 741.22 1:52:42 स्क्वायर कि.मी. तदडोबा अंधेरी तडोबा 1:52:45 अंधेरी है 2007 का 1727.59 1:52:49 सह्याद्री 1:52:51 2012 1165.57 1:52:54 नवे गांव नगजीरा 2013 1894.94 1:52:58 और बोर सबसे छोटे आकार का 2014 816 1:53:02 स्क्वायर कि.मी. यह नेशनल पार्क के तौर पर 1:53:05 कहा गया था सबसे छोटा। यहां पर टाइगर 1:53:06 रिजर्व की बात हो रही है तो 18 816.27 1:53:10 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका एरिया है। 1:53:12 अच्छा मिजोरम में दंपा है एकमात्र 2007 का 1:53:14 है। 988 इसका टोटल विस्तार है। राजस्थान 1:53:18 में कई सारे हैं। जैसे आप देखें कि 1:53:20 रणथंबोर है सबसे पहले 2007 का है। 14119 1:53:24 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका विस्तार है। 1:53:26 सरिस्का है 2007 का 1213.34 1:53:30 मुकुंदरा 2013 759.99 1:53:34 रामगढ़ बिधारी बाग बाघ अभयारण्य या टाइगर 1:53:37 रिजर्व 52वें नंबर का था। 2022 का 1:53:39 डिक्लेअर था 1501.89 1:53:41 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका विस्तार। 1:53:44 धौलपुर करौली 55वां है। 2023 में डिक्लेअर 1:53:47 किया गया था। 1057.88 1:53:49 इसका टोटल विस्तार। 1:53:52 उत्तर प्रदेश में दुधवा तो है ही है। उसके 1:53:54 अलावा पीलीभीत है, अमनगढ़ है, रानीपुर है। 1:53:57 तो दुधवा जो है यह 2010 का डिक्लेअ हुआ 1:53:59 था। 2271 माफ़ कीजिएगा 221.77 1:54:03 स्क्वायर कि.मी. यानी वर्ग कि.मी. विस्तार 1:54:06 है। पीलीभीत 2014 730 अमनगढ़ 2012 80 छोटा 1:54:11 सा है। और रानीपुर चित्रकूट वाला 53वें 1:54:14 नंबर का वैसे पड़ेगा देश भर में। 2022 का 1:54:17 है। 529.36 1:54:19 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका विस्तार। 1:54:21 उत्तराखंड में आ जाते हैं। सबसे पहले है 1:54:23 जिम कार्बेट 1:54:25 2010 इसका समय है टाइगर रिजर्व के तौर पर 1:54:28 डिक्लेअर होने का। 1288.31 1:54:30 और राजाजी नेशनल पार्क और साथ में यहां पर 1:54:33 बात हो रही है टाइगर रिजर्व की। तो राजाजी 1:54:35 टाइगर रिजर्व 2015 में अधिसूचित हुआ था। 1:54:38 1075.17। 1:54:40 पश्चिम बंगाल में बुसा और सुंदरवन है। 1:54:42 बुसा 2009 का है। सुंदरवन 2007 का है। 1:54:44 सुंदरवन का साइज बड़ा है और यह रॉयल बंगाल 1:54:46 टाइगर का घर भी है। इसके बाद ओसा का 1:54:49 सतकोशिया है 2007 1963.87। 1:54:52 अच्छा तमिलनाडु में आते हैं। तो तमिलनाडु 1:54:55 में सबसे बड़े साइज का कौन सा है? कालकट 1:54:58 मुंडन थुरई जो है वो सबसे बड़ा है। और 1:55:00 नीचे बाघ अभयारण्यों को भी हम नक्शे पर 1:55:01 देखने वाले हैं। ठीक है? तो कालकट मुंडन 1:55:04 थुरई जो है ये 2007 का है 1601 अन्नामलाई 1:55:07 वो भी 2007 का और मुदुमलाई भी 2007 का 1:55:11 अन्नामलाई हालांकि बड़ा है और मुदुमलाई 1:55:13 थोड़ा सा छोटा है थोड़ा नहीं अच्छा खासा 1:55:15 छोटा है सत्यमंगलम आपका 1408 स्क्वायर 1:55:17 किमी का है 2013 में डिक्लेअ हुआ था और 1:55:20 श्री विल्ली पिथूर मेघामलाई 51व नंबर का 1:55:23 है 2021 का है 1016.57 1:55:26 स्क्वायर किमी टोटल इसका विस्तार है तो 1:55:28 यहां पर बना हुआ है नक्शा और इसमें वही 1:55:30 टाइगर रिजर्व दिए हुए हैं कुछ ज्यादा नई 1:55:32 जानकारी जानकारी नहीं है। बस नक्शे में दी 1:55:34 हुई है। जैसे आप देखे राजा जी और कॉबेट ये 1:55:36 उत्तराखंड में है। फिर यहां दुधवा, 1:55:38 पीलीभीत ये सब जो है ये यूपी के हैं। 1:55:40 रानीपुर यहां पर है। ठीक है? सरिस्का 1:55:44 रामगढ़, मुकुंदरा है, रणथंबोर ये सब 1:55:47 राजस्थान के हो गए। वैसे ही पन्ना है, 1:55:49 बांधवगढ़ है। और एक सेकंड जरा सा नीचे आ 1:55:54 जाते हैं। ये देखिए। 1:55:56 तो यहां पर पन्ना है। यह संजय दुबरी को आप 1:55:59 देख रहे हैं। यह बांधवगढ़ है। इसके बाद यह 1:56:01 दुर्गावती यहां सतपुड़ा सब आपस में मिक्स 1:56:03 हो गया है। इधर आप माधव को देख रहे हैं। 1:56:05 राधा पानी है। ये नवे गांव नगजीरा है। 1:56:07 छत्तीसगढ़ वाला इलाका आप देख रहे हैं। 1:56:09 अचानक कमार अमरकंटक है ना यहां पे पलामू 1:56:11 है। यहां अगर आप देखेंगे तो ओरंग है, 1:56:13 नामेरी है, काजीरंगा है, नमदापाड़ा है, 1:56:16 कमलांग है, अरुणांचल वाला पक्के टाइगर 1:56:18 रिजर्व है। और इधर वाल्मीकि है बिहार का 1:56:21 एकमात्र। वैसे ही वेस्ट बंगाल में यह 1:56:23 सुंदरवन है। सबसे ज्यादा बाघों के लिए 1:56:25 प्रसिद्ध क्षेत्र। उसके बाद यहां 1:56:27 सह्याद्री है महाराष्ट्र का। मेलघाट तो है 1:56:29 ही है। काली इधर नीचे आप देख रहे हैं। 1:56:31 अमराबाद और नाग नागार्जुन सागर श्रीलम है। 1:56:34 इंद्रावती इधर है। उदंती सीता नदी तडोबा 1:56:36 अंधेरी बोर मेलघाट सब आपने देखा है। कुछ 1:56:39 नया नहीं है इसमें। ठीक है? नॉन फॉरेस्ट 1:56:42 और फॉरेस्ट करके दोनों दिया हुआ है। जहां 1:56:44 ज्यादा हरियाली है वहां पर जंगली एरिया 1:56:46 है। इसमें कोई संदेह नहीं है। और जहां पर 1:56:48 नीला दिखाई दे रहा है वह पानी का क्षेत्र 1:56:49 है। ये तो मैप के सामान्य संकेत है। और ये 1:56:52 कोई बात नहीं है कि पानी रहेगा तो बाघ 1:56:54 नहीं रह सकता है। सुंदरवन वाला जो एरिया 1:56:56 है वहां पर मैंग्रोव वनस्पतियां उगती हैं। 1:56:59 समुद्र और नदी का मिलन होता है। तो ऐसे 1:57:01 पानी वाले इलाके में मतलब पानी के नमी 1:57:04 वाले इलाके में बाघ का पाया जाना और वो भी 1:57:06 नेचुरली पाया जाना ये थोड़ा अनोखी बात है। 1:57:08 बाग सूखी घास की जो लंबी-लंबी झाड़ियां और 1:57:11 मैदान होते हैं उनमें रहना पसंद करता है। 1:57:13 पानी चाहिए होता है लेकिन पानी गैंडे की 1:57:15 तरह नहीं चाहिए होता है कीचड़ वाला। लेकिन 1:57:17 यहां पर रॉयल बंगाल टाइगर शौक से रहता है। 1:57:20 तो ये चीज है। अब आगे चलते हैं। नीचे भी 1:57:22 है कई सारे जैसे नागर होले हैं, मधुमलाई 1:57:24 है। देख रहे हैं परमबीकुलम है, पेरियार 1:57:27 है, कलक्कड़ है। यहां सत्यमंगलम है। ये 1:57:30 बिलगिरींगा वाला है और ये शिवलिथुर है। ये 1:57:33 अनामलाई है। ये बांदीपुर है। भद्रा है। 1:57:35 चलिए आगे चलते हैं। तो अगला अभी बाघ 1:57:38 जनगणना बची हुई है क्योंकि टाइगर रिजर्व 1:57:40 देख रहे हैं तो पूरा काम इसका कर ही के 1:57:42 जाएंगे। 2022 की ये बाघ गणना है और इसके 1:57:44 आंकड़े जारी किए गए थे 9 अप्रैल 2023 को। 1:57:47 तो 2022 में बाघों की तादाद इस रिपोर्ट के 1:57:50 अनुसार 3167 हो गई। 3167 1:57:55 हो गई है जो कि वर्ष 2018 की जो बाघ गणना 1:57:58 थी उससे कहीं ज्यादा है। हालांकि वृद्धि 1:58:02 अगर वैसे देखी जाए तो कुछ खास नहीं है 1:58:03 लेकिन बात बाघों की हो रही है तो ठीक-ठाक 1:58:05 वृद्धि हुई। पहले इतनी थी अब इतनी हो गई। 1:58:10 4 साल का समय बाघों की संख्या में 6.7% की 1:58:14 वृद्धि हुई। एशियाई शेरों की तादाद भी 1:58:18 भारत में ही एकमात्र पाई जाती है। मतलब 1:58:20 एशिया वैसे तो बड़ा कॉन्टिनेंट है लेकिन 1:58:22 एशियाई शेर सिर्फ भारत में पाए जाते हैं। 1:58:24 2015 में लगभग इनकी आबादी 525 थी। 2020 1:58:28 में इनकी आबादी बढ़कर 675 हो गई। लेकिन 1:58:30 2020 के बाद वाला डाटा नहीं उपलब्ध। जंगली 1:58:34 बाघों की आबादी सबसे ज्यादा 70% जो है वह 1:58:37 भारत में है। इसका मतलब आप समझ रहे हैं 1:58:38 गिनती के कुछ हजार बाघ ही पूरे दुनिया भर 1:58:41 में हैं। और 2014 से 2018 के दौरान बाघों 1:58:46 की आबादी में लगभग 33% की वृद्धि हुई है 1:58:48 और 2018 से 22 के दौरान इनकी जो तादाद है 1:58:51 मतलब आबादी है वो सीमित सीमित मात्रा में 1:58:54 बढ़ी है। मतलब 6.7% के आसपास वृद्धि दर्ज 1:58:57 की गई थी। तो प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल 1:59:00 पूरे हो गए। और कब पूरे हुए? 9 अप्रैल 1:59:03 2023 को मैसूर कर्नाटक का जो है वहां पर 1:59:06 एक मेगा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित 1:59:07 किया गया और टाइगर शेर इस तरह की जो सात 1:59:10 बिग कैट प्रजातियां हैं बिल्लियों के 1:59:12 परिवार में जो बड़े सदस्य हैं उनके 1:59:14 संरक्षण के लिए बिग कैट अलायंस का शुभारंभ 1:59:17 किया गया। राष्ट्रीय बाघ गणनाएं यह बाघ 1:59:20 संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए जो है उसी 1:59:22 के द्वारा की जाती है। इसमें जो राज्य के 1:59:24 वन विभाग हैं, राज्यों के वन विभाग हैं और 1:59:26 एनजीओस हैं, वन्य जीव संस्थान है सब सहयोग 1:59:29 करते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ एनटीसीए 1:59:31 अकेले कर लेता है। इसमें गहरा सहयोग होता 1:59:33 है हर प्रकार का। मतलब व्यक्तिगत स्तर का, 1:59:36 व्यक्ति स्तर का, तकनीकी स्तर का। हर चार 1:59:39 साल के अंतराल पर यह गणना की जाती है। 1:59:42 राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए 1:59:44 जो है यह आप देखेंगे कि एक वैधानिक निकाय 1:59:47 है। जो मिनिस्ट्री है पर्यावरण मंत्रालय 1:59:50 है उसी के अधीन। ध्यान दीजिएगा ये वैधानिक 1:59:53 निकाय है। संवैधानिक नहीं है। कई बार ये 1:59:55 वैधानिक संवैधानिक में उलझाकर आपको पूछता 1:59:57 है। मतलब करेंगे क्या? पर्यावरण और पॉलिटी 1:59:59 यानी राज्य व्यवस्था दोनों को मिक्स करके 2:00:01 एक प्रश्न तैयार करेंगे। जिसमें कि 2:00:03 वैधानिक संवैधानिक का चक्कर होगा। हो सकता 2:00:05 है कुछ आर्टिकल दे दिए जाए और साथ में इस 2:00:07 प्राधिकरण की चर्चा कर दी जाए कि इस पर 2:00:09 दिए गए जो कथन है उनके संबंध में विचार 2:00:12 करिए और बताइए कि कौन सा कथन सही है या 2:00:14 कौन सा कथन गलत है। इस तरह के प्रश्न 2:00:16 यूपीएससी तो पहले पूछता ही था। अब 2:00:17 यूपीपीसीएस में भी पूछे जाते हैं। तो ठीक 2:00:20 है। 2005 में टाइगर टास्क फ़ोर्स की 2:00:22 सिफारिशों के बाद इसको स्थापित किया गया 2:00:24 था। एनटीसीए जो है इसका गठन वही वन्य जीव 2:00:26 संरक्षण अधिनियम 1972 और उसकी धारा 38 एल 2:00:29 क्लॉज़ वन के अंतर्गत किया गया है। ठीक है? 2:00:32 चलिए अब आगे चलते हैं। राज्यवार जो बाघ 2:00:34 जनगणना होती है उसका क्या 2022 2:00:38 में राज्यवार जो बाघ जनगणना हुई थी उसमें 2:00:40 मैसूर मेंकि प्रोजेक्ट टाइगर का 50 साल 2:00:43 अभी पूरा हुआ है तो हमने देखा ना बिग कैट 2:00:45 अलायंस का गठन किया गया वो सारा काम हुआ 2:00:48 मोदी जी आए थे और तमाम लोग इकट्ठे हुए थे 2:00:50 न्यूनतम आबादी बाघों की घोषित की गई 3167 2:00:54 जो कि कैमरा ट्रैप क्षेत्र का अनुमान है। 2:00:56 ये अनुमान है। ध्यान दीजिएगा। जन जनगणना 2:00:59 जो है ना यह बाघों की गणना या किसी भी 2:01:01 जंगली जीव की जब गणना की जाती है तो हम यह 2:01:03 नहीं कहते हैं कि एक्सजेक्टली इतने ही बाघ 2:01:05 हैं। मतलब इतने ही बाघ हैं। इससे ना तो एक 2:01:08 कम हो सकता है ना ज्यादा हो सकता है। 2:01:10 इसीलिए बहुत बार ऐसा होता है कि हम बहुत 2:01:12 सारी प्रजातियों को उनके जीते जी मुर्दा 2:01:15 घोषित कर देते हैं। मतलब कह देते हैं कि 2:01:16 ये प्रजाति अपने हैबिटेट में इतने साल से 2:01:18 दिखी नहीं। तो यह विलुप्त हो गई है और पता 2:01:21 लगता है अगले 10 साल में वह दिख जाती है। 2:01:24 तो कैमरे के द्वारा या जो ऐसे हमारी निगाह 2:01:26 में या सेटेलाइट से जो कुछ पकड़ में आता 2:01:28 है उसी के आधार पर हम अंदाजा लगाते हैं या 2:01:30 गणना करते हैं। हर बात को पर्सनली चाय पर 2:01:33 इनवाइट नहीं किया जाता है कि मिस्टर बताइए 2:01:35 आप आपका नाम क्या है और आप कितने साल के 2:01:38 हैं? कितने समय से यहां पर रह रहे हैं। है 2:01:40 ना? ये सब उनसे क्वेश्चन तो पूछ नहीं सकते 2:01:42 हैं। आदमी की जनगणना इतनी मुश्किल है तो 2:01:44 बाघों की जनगणना तो आप अंदाजा लगा ही सकते 2:01:46 हैं। तो ये सिर्फ एक अनुमान है। यानी इससे 2:01:48 ज्यादा भी हो सकते हैं, कम भी हो सकते 2:01:50 हैं। इसके बाद 29 जुलाई 2023 की बात है। 2:01:53 कॉर्बेट राष्ट्रीय माफ़ कीजिएगा कार्बेट 2:01:55 टाइगर रिजर्व जो है नेशनल पार्क के 2:01:57 अंतर्गत ही। यहां पर मनाया गया वैश्विक 2:02:00 बाघ दिवस और इसके मौके पर केंद्रीय राज्य 2:02:02 मंत्री थे अश्विनी कुमार चौबे। उनके 2:02:04 द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई। कुल मिलाकर 2:02:06 बात यह है कि कैमरा ट्रैप्ड 2:02:09 कैमरे की निगाह में आने वाला और कैमरे की 2:02:11 निगाह में नहीं आने वाला। दोनों जो 2:02:13 क्षेत्र हैं दोनों ओर से भारतीय वन्य जीव 2:02:16 संस्थान द्वारा डाटा का विश्लेषण किया गया 2:02:18 और बाघों की आबादी की जो ऊपरी सीमा है वो 2:02:20 इतनी रखी गई। 3925 2:02:25 समझ रहे हैं? ये न्यूनतम है 3167 कम से कम 2:02:29 इतने तो है ही। इससे ज्यादा ही होंगे कम 2:02:31 नहीं होंगे और ज्यादा कितने हैं? इतने 2:02:34 3925 हो सकता है इस समय तक 4000 हो गए हो 2:02:37 और औसतन संख्या 3682 होने का अनुमान है 2:02:40 जिसमें कि हर साल 6.1% की वार्षिक वृद्धि 2:02:43 हो रही है। तो 18 राज्यों में 58 टाइगर 2:02:46 रिजर्व्स का नेटवर्क है और प्रयास रंग 2:02:48 लाया है कुल मिलाकर दुनिया के लगभग 75% 2:02:51 जंगली बाघ की आबादी अपने यहां ही रहती है। 2:02:54 और बाघों की सबसे बड़ी आबादी यानी अकेले 2:02:57 785 बाघ जो है वह तो एमपी में ही है। उसके 2:02:59 बाद दूसरे नंबर पर है कर्नाटक। तीसरे नंबर 2:03:02 पर है उत्तराखंड। चौथे नंबर पर है 2:03:04 महाराष्ट्र। मध्य प्रदेश में जो छह बाघ 2:03:07 अभयारण्य अभी-अभी आप देखकर आए हैं उनमें 2:03:08 से बांधवगढ़। इस बाघ अभयारण्य में बाघों 2:03:12 की संख्या सबसे ज्यादा है। ठीक है? 2:03:14 बांधवगढ़ जो बाघ अभयारण्य है यहां बाघ 2:03:16 सबसे ज्यादा पाए जाते। अच्छा बांधवगढ़ 2:03:19 टाइगर रिजर्व जो है ना यहां बाघों की 2:03:20 संख्या अभी भी सबसे ज्यादा है और पहले भी 2:03:23 जो 90 का दशक हुआ करता था उस समय भी यहां 2:03:25 पर एक से एक बढ़कर बाघ पाए जाते थे। यहां 2:03:28 पर चार्जर नाम का एक बहुत ही फेमस बाग हुआ 2:03:31 करता था। कभी आप Google सर्च करिएगा या 2:03:32 आपने किया होगा, पढ़ा भी होगा इसके बारे 2:03:34 में। तो यह बहुत शक्तिशाली था। मतलब पूरा 2:03:36 आक्रामक एक अल्फा मेल जो होता है उस 2:03:39 कैटेगरी का था। और चार्जर नाम इसको मिला 2:03:41 क्यों था? क्योंकि ये लोगों को दौड़ाता 2:03:43 था। मतलब इसकी टेरिटरी थी और टेरिटरी इसका 2:03:45 जो साम्राज्य था वो बहुत बड़ा था। कोई भी 2:03:47 सफारी वाहन, कोई जीप, कोई हाथी पर सवार 2:03:49 होकर जो टूरिस्ट आते हैं वो सब इसकी इसका 2:03:52 जो इलाका होता था वहां जब प्रवेश करते थे 2:03:54 तो ये बहुत तेजी से झप झपटता था। बाकी बात 2:03:57 देखकर निकल जाए। आप फोटो खींच रहे हैं। वह 2:03:59 फोटो खिंचवा कर निकलते बने। है ना? आप 2:04:01 हल्ला कर रहे हैं। कोई दिक्कत नहीं। लेकिन 2:04:02 चार्जर सामने पड़ जाए तो हमला बोल देता 2:04:04 था। और ये मॉक चार्ज एक तरह से उसका होता 2:04:07 था। मतलब डराने का तरीका था। नुकसान किसी 2:04:10 को नहीं पहुंचाया। लेकिन हां रोमांच सभी 2:04:12 सभी को हो जाता था। भाई बाघ सामने से आ 2:04:14 रहा है। हमला कर दिया। और 1991 में जो 2:04:16 चक्रधारा रीजन था वहां के शक्तिशाली बाग 2:04:19 बंका को यह हरा देता है। वहां का जो एरिया 2:04:21 था बंका का उसका छीन लेता है और वहां पर 2:04:23 अपना वर्चस्व स्थापित कर देता है। और इसकी 2:04:25 जो वाइफ थी उसका नाम था सीता वो बहुत 2:04:27 मशहूर बाघिन थी। तो चारचार पॉइंट मतलब बाद 2:04:31 में क्या होता है ना इसी की जो वंशावली 2:04:32 होती है इसी के जो लड़के बच्चे होते हैं 2:04:34 क्योंकि इसका जीन बहुत स्ट्रांग रहता है। 2:04:35 तो इसकी जो आगे की पीढ़ी होती है वो भी 2:04:37 मजबूत बाघों की होती है। है ना? तो उसमें 2:04:40 जो इसके युवा बच्चे होते हैं उनहीं से 2:04:42 इसकी लड़ाई होने लगती है। अंत में टेरिटरी 2:04:44 की लड़ाई में घायल होता है और मारा जाता 2:04:46 है। तो इसके लिए चार्जर पॉइंट नाम से एक 2:04:49 पूरा जोन बनाया गया है और इसका एक स्मारक 2:04:50 भी है। ठीक है? आगे चलते हैं। कुछ रोचक 2:04:53 घटनाएं होती हैं जो कि ऐसे ही चर्चा में आ 2:04:55 जाती है। 58 बाघ संरक्षित क्षेत्रों में 2:04:58 से उत्तराखंड में क्बेट टाइगर रिजर्व में 2:05:00 सबसे अधिक यानी 260 बाघों की आबादी दर्ज 2:05:03 की गई है। तो अब आइए यहां पर जो टेबल बनी 2:05:05 है टैबुलर स्ट्रक्चर का यही अच्छा स्वरूप 2:05:08 होता है कि बात करते-करते हम सीधे फैक्ट 2:05:10 पर आ जाते हैं। तो यहां भी देखिए सबसे 2:05:12 ज्यादा बाघों की आबादी वाले राज्य हैं और 2:05:14 सबसे ज्यादा बाघों की संख्या वाले जो 2:05:17 राज्य हैं। माफ़ कीजिएगा अभयारण्य है वो 2:05:19 दिए हुए हैं। मतलब राज्यवार पहले देखेंगे 2:05:22 उसके बाद अभ्यारण्य के हिसाब से देखेंगे। 2:05:23 राज्यवार सबसे पहले है मध्य प्रदेश 785 2:05:26 बाग है। 2022 तक की स्थिति है। कर्नाटक 4 2:05:31 साल पर ये होती है तो आप समझ सकते हैं कि 2:05:33 अब ये कब होगी। कर्नाटक 563 उत्तराखंड 560 2:05:37 महाराष्ट्र 444 तमिलनाडु 306। जिम कार्बेट 2:05:41 देखिए सबसे ज्यादा बाघों की संख्या वाले 2:05:43 जो नेशनल पार्क बाघ अभयारण है नेशनल पार्क 2:05:46 तो ये है ही है उसके अलावा बाघ अभयारण है 2:05:48 तो उन बाघ अभयारण्यों में सबसे पहले नंबर 2:05:50 पर आता है जिम कार्बेट 260 बाघ यहां पाए 2:05:53 जाते हैं बांदीपुर न्यूनतम 260 बांदीपुर 2:05:57 कर्नाटक का 150 नागर होले कर्नाटक का 141 2:06:01 बांधवगढ़ मध्य प्रदेश का 135 दुधवा उत्तर 2:06:04 प्रदेश का 135 ये 2022 का डाटा है अब वन्य 2:06:09 जीव अभयारण्य यानी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को 2:06:11 देखिए। पहले तो वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरी होती 2:06:13 क्या है? ये जो वन्य जीव अभयारण्य है ये 2:06:16 असल में क्या होता है? किसी भी आरक्षित वन 2:06:18 या प्रादेशिक जल में शामिल क्षेत्र के 2:06:21 अलावा किसी भी क्षेत्र को राज्य सरकार 2:06:23 द्वारा अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया 2:06:24 जा सकता है। और अगर ऐसा क्षेत्र पर्या 2:06:26 पर्याप्त पारिस्थितिकी अपनी धारण करता है। 2:06:29 वहां पर पर्याप्त जीव-जंतु पाए जाते हैं। 2:06:31 फूल पौधे पाए जाते हैं। वृक्ष पाए जाते 2:06:33 हैं। वहां की जो वहां का जो ज्योग्राफिकल 2:06:37 स्ट्रक्चर है, भू आकृति विज्ञान है वो 2:06:39 परफेक्ट है। तो कुल मिलाकर यह पूरी तरह से 2:06:42 परफेक्ट या उत्कृष्ट माना जाता है। 2:06:44 पर्यावरण की रक्षा प्रचार और विकास के लिए 2:06:46 मतलब जीवों का वहां पोषण भली-भांति हो 2:06:48 सकता है ऐसा माना जाता है और ऐसे ही 2:06:51 क्षेत्रों को वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र 2:06:53 के तौर पर घोषित किया जाता है जो कि 2:06:55 संवेदनशील हो लेकिन पोषण देने वाले जहां 2:06:58 कि ज्यादा से ज्यादा जीवों का गुजारा हो 2:07:00 सके। आगे वही कहा गया कि वन्य जीव 2:07:02 अभयारण्य एक ऐसा स्थान होता है जहां कि 2:07:04 जानवरों के आवास और परिवेश को किसी भी 2:07:06 प्रकार के हस्तक्षेप से बचाया जा सके। कई 2:07:09 स्थानों पर अवैध शिकार, हत्या, जानवरों से 2:07:12 जानवरों को पकड़ने के लिए जो खुले तौर पर 2:07:14 प्रतिबंध है वह लागू। मतलब कुल मिलाकर 2:07:18 जानवरों का आपस में जो शांतिपूर्ण 2:07:19 अस्तित्व है उसको प्रदान करने का उद्देश्य 2:07:22 होता है। तो भारत के जो वन्य जीव अभयारण्य 2:07:24 है उनको आईयूसीएन श्रेणी चार के संरक्षित 2:07:27 क्षेत्रों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया 2:07:29 है। 72 का जो वन्य जीव संरक्षण अधिनियम था 2:07:32 उसमें राज्य सरकार को विशिष्ट क्षेत्रों 2:07:33 को वन्य जीव अभयारण्य घोषित करने की 2:07:35 अनुमति दी थी। वही क्षेत्र जिन्हें कि 2:07:37 पर्याप्त पारिस्थितिकी भू आकृति विज्ञान 2:07:39 और प्राकृतिक मूल्य का माना जाता था। असम 2:07:42 में मानस राष्ट्रीय उद्यान, मानस वन्यजीव 2:07:44 अभयारण्य यह भारत में स्थापित होने वाला 2:07:46 पहला अभयारण्य है और यह एक राष्ट्रीय 2:07:48 उद्यान है जो कि यूनेस्को प्राकृतिक विश्व 2:07:50 धरोहर स्थल प्रोजेक्ट टाइगर, हाथी रिजर्व 2:07:53 और बायोस्फीयर रिजर्व सभी के रूप में काम 2:07:55 करता है। ध्यान दीजिएगा यह जो राष्ट्रीय 2:07:58 उद्यान है मानस इसके बारे में बात की जा 2:08:00 रही है। एक नेशनल पार्क है। यूनेस्को की 2:08:02 वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। प्रोजेक्ट टाइगर 2:08:04 का हिस्सा है। उसके अलावा एलीिफेंट रिजर्व 2:08:07 है और बायोस्फीयर रिजर्व है। पूरा 2:08:08 मल्टीपर्पज है। कच्छ का रण यह भारत का 2:08:11 सबसे बड़ा वन्य जीव अभयारण्य है और गहीर 2:08:13 माथा आप जानते ही हैं कि यह ऑलिव रिडले जो 2:08:16 टर्टल होते हैं उनके लिए जाना जाता है। 2:08:19 ये जो कछुए हैं ये अमेरिका के तट से सीधा 2:08:22 भारत के तट पर पहुंचते हैं और यहां आकर 2:08:24 अपना घोंसला बनाते हैं यानी रेत में गड्ढे 2:08:26 खोदकर उसमें अंडे देते हैं और उसके बाद जब 2:08:29 प्रजनन की प्रक्रिया इनकी पूरी हो जाती है 2:08:31 तो ये वापस अपना समुद्र में लौट जाते हैं। 2:08:33 अपने अंडों को वही रेत में दबाकर छोड़ 2:08:35 जाते हैं। अंडे अंदर ही अंदर रेत के अंदर 2:08:38 परिपक्व होते हैं और फिर बच्चे उनमें से 2:08:39 निकलते हैं यानी छोटे-छोटे कछुए और वह रेत 2:08:42 के ऊपर आते हैं। फिर रेंग कर धीरे-धीरे 2:08:45 करके इनकी जो रफ्तार होती है ये समुद्र 2:08:47 में चले जाते हैं और पूरी जो कछुए के 2:08:50 बच्चों की आबादी है कुछ मारे जाते हैं कुछ 2:08:52 शिकारियों का शिकार बन जाते हैं। जितने 2:08:54 सक्सेसफुली समुद्र में उतर पाते हैं वो 2:08:56 जीते हैं और आगे जाकर वो अपनी आबादी 2:08:58 बढ़ाते हैं। ये इनका तरीका है। बीते जो 2:09:01 कुछ वर्ष हैं उसमें इन कछुओं की तादाद में 2:09:03 तेजी से कमी आ रही है। क्योंकि जो उड़ीसा 2:09:05 का समुद्री तट और इनका जो प्रजनन क्षेत्र 2:09:07 है वहां अतिक्रमण मनुष्य का मनुष्य का 2:09:09 हस्तक्षेप बहुत ज्यादा हो गया है। प्रदूषण 2:09:11 बहुत ज्यादा हो गया है। मछुआरे के जाल में 2:09:13 फंस के ये मारे जाते हैं। प्रिडेटर्स का 2:09:15 शिकार हो जाते हैं। जो समुद्री रेत है उस 2:09:17 पे पर्यटकों की आवाजाही से इनकी पूरी 2:09:19 प्रक्रिया ही बाधित हो जाती है। उसके 2:09:20 अलावा समुद्र में उतरते हैं तो वहां पता 2:09:22 लगा महासागर में तेल फैला हुआ है। जहाज का 2:09:24 तेल फैला हुआ है या किसी भी तरह का 2:09:26 प्रदूषण है। उसके ये शिकार बन जाते हैं।कि 2:09:28 नाजुक बच्चे हैं। है ना? है ना? बड़े-बड़े 2:09:30 समुद्री जीव शिकार बनते हैं। ये तो 2:09:32 छोटे-छोटे बच्चे हैं। और उसके अलावा जो भी 2:09:34 पैदा हो रहे हैं ना अंडे से बाहर निकल रहे 2:09:36 हैं और सर्वाइव कर रहे हैं सक्सेसफुली 2:09:38 उसमें भी मैक्सिमम मादा है। ये गर्मी 2:09:41 बढ़ने का असर है। जब ज्यादा गर्मी बढ़ती 2:09:43 है तो अंडे में से निकलने वाले जो बच्चे 2:09:45 होते हैं उनकी ज्यादा संभावना होती है कि 2:09:47 वो मादा होंगी। तो इसलिए इनकी आबादी 2:09:50 भविष्य में संकट में आने वाली है। ऐसा लग 2:09:52 रहा है। और ऐसा सारी जीव प्रजातियों के 2:09:55 साथ कमोबेश हो रहा है। लड़कियों की तादाद 2:09:57 बढ़ रही है। मतलब मादाओं की तादाद बढ़ रही 2:09:58 है। विभिन्न प्रजातियों पर यह शोध किया 2:10:01 गया और देखने के लिए मिला है। यह गर्मी 2:10:02 बढ़ने का असर है। मतलब ग्लोबल वार्मिंग का 2:10:04 असर है। फिलहाल गहिर माथा को इसके 2:10:07 पारिस्थितिकी महत्व पर विचार करने और 2:10:09 समुद्री कछुओं को बचाने के प्रयासों के 2:10:11 तहत 1997 में उड़ीसा सरकार द्वारा कछुआ 2:10:14 अभयारण्य घोषित किया गया। ठीक बात है। आगे 2:10:16 चलते हैं। यहां देखिए ये है वन्य जीव 2:10:20 अभयारण्य। प्रमुख जितने भी हैं राज्य दिया 2:10:22 है और वन्यजीव अभयारण्य कहां पर कितने 2:10:24 मतलब कौन-कौन से हैं वो दिया है राज्यवार। 2:10:26 हिमाचल में चंद्रताल है, पोंग डैम है, 2:10:29 रेणुका है, बांधली है, दरंग घाटी है, 2:10:30 धौलाधर है, तालरा है, नारगू है और शिकारी 2:10:33 देवी। दिल्ली में भी एक है। इंदिरा 2:10:36 प्रियदर्शनी 2:10:38 वन्य जीव अभयारण्य या फिर असोला भाटी भी 2:10:40 इसको कहा जाता है। आइए अब नागालैंड में 2:10:42 चलते हैं। नागालैंड में फकिम, पहाड़, 2:10:45 सिंहफन और पुलीब। झारखंड में दलमा या 2:10:48 डालमा इसको कहते हैं। गौतम बुद्ध, 2:10:50 हजारीबाग, पारसनाथ, पलामू, तोपंची, 2:10:53 लावालों, पालकोट, उधवा, उधवा लेख कोरडमा 2:10:57 महंदर और भेड़िया मिजोरम में दमफा थोरांग 2:11:01 लटांग गेंगपुई ख्वांगलांग और टोकालो 2:11:04 अरुणांचल में पखुई सेसा आर्किड और दिवांग 2:11:07 कर्नाटक में दांडेली घाट प्रभा चिंचोली 2:11:10 तालकावेरी सोमेश्वर तालकावेरी असल में 2:11:13 सोमेश्वर भद्रा भीमगढ़ ब्रह्मगिरी कावेरी 2:11:17 और पुष्पगिरी शरावती घाटी ये सारे जो हैं 2:11:20 ये कर्नाटक के वन्यजीव अभयारण्य उसके बाद 2:11:22 वन्य जीव अभयारण्यों को अगर देखें 2:11:25 त्रिपुरा में तो गुमती सिपाही जाला रोवा 2:11:27 और कृष्णा केरल में थ थडेकट है ये पक्षी 2:11:31 अभयारण्य है इडुक्की है नियार है 2:11:33 परंबीकुलम है मालाबार है पेरियार है 2:11:35 वायनाड है कुमारकाम है चिनार है ठीक है 2:11:38 चिनार है अरलम है और चिमोनी वैसे ही 2:11:41 उत्तराखंड में आएंगे तो यहां पर आप 2:11:43 देखेंगे केदारनाथ 2:11:46 अस्कोट कस्तूरी मृग बिनसार गोविंद और सोना 2:11:50 नदी नंदौर आंध्र में कोरिंका कोलेरू 2:11:53 नागार्जुन सागर श्रीसैलम मध्य प्रदेश में 2:11:54 आएंगे तो बोरी गांधी सागर राष्ट्रीय चंबल 2:11:58 उद्यान है। उसके अलावा पन्ना, राधा पानी, 2:12:00 सोनघड़ियाल और ओरछा तेलंगाना में पाखल एतुर 2:12:04 नगरम, कावल, किन्नेरसानी, पोरचम, 2:12:07 प्राणहिता, नागार्जुन सागर, श्रीसैलम ये 2:12:09 सारे वन्य जीव अभयारण्य है। वैसे ही 2:12:11 महाराष्ट्र में आ जाए फनसड़, बोर, कलसुबाई, 2:12:14 हरिश्चंद्र घाट, मेलाघाट, नागाजीरा ये 2:12:17 पक्षी अभयारण्य है। पेनगंगा, उमरे, 2:12:19 खारंगला, कोयना, भीमाशंकर, तुंगारेश्वर, 2:12:21 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, कनारगांव और 2:12:23 घोड़ाजड़ी। बिहार में भी कई सारे हैं जैसे 2:12:26 कि बरेला झील है। सलीम अली जुब्बा साहनी 2:12:29 पक्षी विहार इसको कहा जाता है। भीमबाद है। 2:12:32 गौतम बुद्ध कांवरले कैमूर वाल्मीकि 2:12:34 विक्रमशिला गंगा डालफिन। ठीक है? ये 2:12:37 राजगीर में पड़ता है। और ओसा में आ जाइए। 2:12:40 ओसा में भीतरकणिका चिल्का गहिरमाथा नंदन 2:12:44 कानन 2:12:46 सतकोशिया 2:12:48 सिमलीपाल बैसीपल्ली और हदगढ़ ये सारे फिर 2:12:52 चंडीगढ़ में यहां देखिए सुखना झील और सिटी 2:12:55 बर्ड है राजस्थान में माउंट आबू सरिस्का 2:12:58 जवाहर सागर राष्ट्रीय चंबल उद्यान 2:13:01 केवलादेव रामसागर शेरगढ़ कैला देवी 2:13:04 नाहरगढ़ राम रामगढ़ विस्तारी इसके बाद है 2:13:08 पंजाब में हरिके अबूवर अबोहर झज्जर और 2:13:11 बचोली पश्चिम बंगाल में सुंदरवन चिंतामणि 2:13:14 हालिडे बलरामपुर लोथियन और महानंदा 2:13:17 छत्तीसगढ़ में अचानक कमार सीता नदी 2:13:19 भैरमगढ़ बादलखोल भोरामदेव उदंती वाइल्ड 2:13:22 वाइल्ड बफेलो सेंचुरी है मतलब वहां जंगली 2:13:25 भैंस पाई जाती है इसके बाद असम में आ जाए 2:13:27 देपोरवील है पूर्वीकारी अगलोंग है 2:13:30 लावोखोवा है नंबोर है चक्रशिला है अमचंग 2:13:33 है और बुराचापारी 2:13:35 इसके बाद आगे बढ़े तो यहां देखेंगे आप 2:13:37 गोवा को गोवा में भगवान महावीर मोल्यम है, 2:13:40 बोंडला है और मदेई है। तमिलनाडु में कोडाई 2:13:44 नाल है, नलई है, पॉइंट कैलमर है, पुलीकट 2:13:46 है, सत्यमंगलम है, कलक्कड़ इंदिरा गांधी, 2:13:49 वेदांत थंगल, कावेरी कराई बेट्टी, काजू 2:13:52 बेली और थन गुजरात में कच्छ बस्टर्ड 2:13:56 सेंचुरी, गिर कच्छ की खाड़ी, नल सरोवर, 2:13:59 नारायण सरोवर, चिंकारा वाला, जंगली गधे के 2:14:01 लिए जो वाइल्ड एस के लिए बना हुआ सेंचुरी 2:14:04 है। पोरबंदर वाला है, बर्ड सेंचुरी उसको 2:14:07 भी ऐड कर लीजिए। जंबूगोंडा है। इसके अलावा 2:14:10 रतन महल है, थोल लेखक है, ससनगिरी है, 2:14:13 मिथियाल है। ये सारे गुजरात के हैं। सब के 2:14:15 सब गुजरात के हैं। उत्तर प्रदेश में भी 2:14:17 ठीक-ठाक है। ध्यान से देखिएगा। बखरा है, 2:14:19 कैमूर है, महावीर स्वामी है। राष्ट्रीय 2:14:22 चंबल उद्यान है। ओखला पक्षी विहार है। 2:14:24 पटना पक्षी विहार है। पटना नाम है लेकिन 2:14:26 ये है उत्तर प्रदेश में। हस्तिनापुर, 2:14:28 रानीपुर, सुहागी बरवा, सुरसरोवर, 2:14:31 चंद्रप्रभा, कतरनिया घाट, बिशनपुर माफ़ 2:14:33 कीजिएगा। किशनपुर, सोहेलवा ये सारे उत्तर 2:14:36 प्रदेश के हैं। हरियाणा में आते हैं। 2:14:38 भिंडावास, खपरवास, कालेसर, वीर शिकारगढ़, 2:14:42 छिछरा और नाहर। ठीक है? ये सारे मणिपुर 2:14:46 में यांगो पोकपी 2:14:49 लोकचाओ, खोंग जंगंबा। ठीक है? खोंग जंगंबा 2:14:54 चिंग इसको कहा जाता है। जिरी मकरू है, 2:14:56 कैलम है, थिंग थे और जिलाड और बनिंग है। 2:14:59 यह सारे हैं। इसके बाद आगे बढ़े। 2:15:03 दादरानगर हवेली और दमनदीप में एक ही है 2:15:06 सिर्फ। इसके बाद सिक्किम में आप देखेंगे 2:15:08 फबोंग लो कीतम बर्ड सेंचुरी और मैनम 2:15:11 पंगोलाखा है। अंडमान निकोबार में बंबू 2:15:14 आइलैंड है, बैरन है, बैरन है। चैनल आइलैंड 2:15:17 है, पीकाक है, टर्टल आइलैंड है, कर्ल्यू 2:15:19 है, मेगापोड है। जम्मू कश्मीर में गुलम्ग, 2:15:22 लिंब, नंदिनी, सुरिंसर मानसर। लक्षद्वीप 2:15:24 में लक्षद्वीप नहीं बल्कि लक्षद्वीप। ठीक 2:15:27 है? पूरा क्ष रहेगा। पिट्टी है। ठीक है? 2:15:29 पिट्टी बर्ड सेंचुरी। नेक्स्ट आगे बढ़ते 2:15:32 हैं। यहां देखिए शरावती घाटी ये अभयारण्य 2:15:35 और राज्य दिया हुआ है। वही चीज है। शरावती 2:15:38 घाटी जो अभयारण्य है ये कर्नाटक में है। 2:15:40 सतकोशिया गार्ज को आप देख रहे हैं उड़ीसा 2:15:42 में है। पिरोटन गुजरात में है। अटुर नगरम 2:15:45 तेलंगाना में है। गोमारा पश्चिम बंगाल में 2:15:47 है और पोजेरम तेलंगाना में है। आगे बढ़े। 2:15:50 यहां देखें आप पक्षी अभयारण्य को। वन्य 2:15:52 जीव अभयारण्य तो आपने देख लिए। पक्षी 2:15:54 अभयारण्य देख लेते हैं। तो पक्षी 2:15:56 अभयारण्यों में अगर देखा जाए तो भारत का 2:15:57 सबसे पुराना जो पक्षी अभयारण्य है यह 2:15:59 तमिलनाडु राज्य में है और यह है वेदांग 2:16:01 थंगल। इसकी स्थापना अंग्रेजों ने की थी। 2:16:05 उन ये 1798 का है। भरतपुर पक्षी अभयारण्य 2:16:08 जिसको कि केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान 2:16:10 के नाम से भी जाना जाता है। ये है 2:16:12 राजस्थान में। रायगंज वन्य जीव अभयारण्य 2:16:14 जिसको कि कुलिक कहा जाता है। यह पड़ता है 2:16:17 दिनाजपुर जिला उत्तरी दिनाजपुर जिला 2:16:20 रायगंज के पास में यानी वेस्ट बंगाल इसकी 2:16:22 लोकेशन है। कुमारकोम पक्षी अभयारण ये 2:16:25 वबानंद पक्षी अभयारण्य भी कहा जाता है और 2:16:27 ये केरल की जो वबानंद झील है उसी के पास 2:16:29 में मौजूद है। तो ये रही सूची राज्य दिया 2:16:33 है और पक्षी अभयारण्य का नाम दिया है। 2:16:35 सबसे पहले है कदलुंडी केरल में है। 2:16:39 कुमारकोम भी केरल में है। 2:16:42 मंगलवरम यह आपका केरल में है। पथिरमलम यह 2:16:46 भी केरल में है। थड्डे कट केरल में है। 2:16:49 इसके बाद नांगी और नकटी बिहार में है। 2:16:52 कांवर लेक बिहार में है। इसमें से बहुत 2:16:54 सारी जो है वो आप देखेंगे कि रामसर साइट्स 2:16:56 भी हैं। कुशेश्वर भी बिहार में है। नफसगढ़ 2:16:59 ड्रेन पक्षी अभयारण दिल्ली में है। सलीम 2:17:01 अली बर्ड सेंचुरी पक्षी अभयारण ये गोवा 2:17:04 में है। गोगा आपका गुजरात में है। सरसई 2:17:07 नवार उत्तर प्रदेश में है। लाख बहोसी 2:17:09 उत्तर प्रदेश में है। नवाबगंज भी वहीं पर 2:17:11 ओखला पटना समन समसपुर सांडी गो ये सब जो 2:17:15 है सांडी तक आपने देखा ये सब यूपी में है 2:17:17 गोगाबल आपका बिहार में है संजय गांधी 2:17:20 जैविक उद्यान ये भी बिहार में है 2:17:21 चिंतामोनी कर पक्षी अभियान ये आपका पश्चिम 2:17:24 बंगाल में खिजड़िया गुजरात में है कच्छ 2:17:28 बस्टर्ड भी गुजरात में है कुलिक पक्षी 2:17:30 अभयारण्य रायगंज में है पश्चिम बंगाल और 2:17:32 रसिक बिल जो है यह पश्चिम बंगाल में है 2:17:34 नलसरोवर गुजरात में पोरबंदर पक्षी विहार 2:17:38 ये भी गुजरात में है मयानी महाराष्ट्र में 2:17:41 है। करनाला भी महाराष्ट्र में है। थोल 2:17:43 लेखक पक्षी विहार गुजरात में है। बाजना 2:17:45 पक्षी विहार भी गुजरात में है। महान मतलब 2:17:48 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जो सेंचुरी है, 2:17:51 नेशनल पार्क है। यहां देख रहे हैं आप 2:17:53 महाराष्ट्र का है। नंदूर मधमेश्वर नंदूर 2:17:56 मधमेश्वर कहा जाता है। ये जो बर्ड सेंचुरी 2:17:58 है, पक्षी अभयारण है, ये महाराष्ट्र में 2:18:00 है। भिंडावास हरियाणा में है। वोकेरा 2:18:02 वेटलैंड है और ये वेटलैंड आपका जम्मू 2:18:04 कश्मीर में पड़ता है। नेक्स्ट आप यहां पर 2:18:07 खपरवास को देख रहे हैं। हरियाणा में है। 2:18:10 लांगटांग मिजोरम में है। गमगुल हिमाचल में 2:18:13 पड़ता है। और चिल्का झेल चिल्का झील या 2:18:15 चिल्का ले उड़ीसा की है ही है। अतिवेरी 2:18:18 कर्नाटक केवलादेव राजस्थान बांकापुर मोर 2:18:21 अभयारण्य है और ये कर्नाटक में है। 2:18:23 तालछापर राजस्थान में है। बोनाल पक्षी 2:18:25 अभयारण्य कर्नाटक में है। चित्रांगुदी 2:18:27 तमिलनाडु में है। गुडवी पक्षी अभयारण्य 2:18:30 कर्नाटक में है। करंजीकुलम पक्षी अभयारण्य 2:18:32 तमिलनाडु में है। कल कगलाडु पक्षी 2:18:35 अभयारण्य कर्नाटक में है। और कुथनकुलम जो 2:18:37 आप देख रहे हैं ये तमिलनाडु में है। मगदी 2:18:39 पक्षी अभयारण्य कर्नाटक में है। सुचिंद्रम 2:18:42 थेरूर पक्षी अभयारण्य तमिलनाडु में है। 2:18:44 मंदागड्डे पक्षी अभयारण्य कर्नाटक में है। 2:18:47 और उदय मार्तंडपुरम कहा जाता है। उदय 2:18:49 मार्तंडपुरम लिखा हुआ है। लेकिन असल में 2:18:51 उदय मार्तंडपुरम ये तमिलनाडु में है। 2:18:54 पुतनहल्ली झील है और ये बर्ड सेंचुरी है। 2:18:56 ये आपका कर्नाटक में पड़ेगा। वेदांग थंगल 2:18:59 तमिलनाडु का है। वेलोड भी तमिलनाडु का है 2:19:01 और वेटांगुंडी जो है ये भी तमिलनाडु का 2:19:04 है। ठीक है? ये तीन जो आप देख रहे हैं 2:19:07 लाइन से ये तीनों तमिलनाडु में इसके बाद 2:19:10 है रंगनाथ हिटू कर्नाटक का है। अटापाका जो 2:19:13 है ये आंध्र का है और नेल्लापट्ट जो है ये 2:19:15 भी आंध्र का दिखाई देता है। पुलीकट लेख 2:19:18 कहां पड़ेगा? आंध्र और तमिलनाडु दोनों में 2:19:20 फैला हुआ है। वैसे ही उपलपा जो है ये 2:19:23 आंध्र का है। तो यहां पर बना हुआ है नक्शा 2:19:25 और इसमें वही सारे वेटलैंड और पक्षी 2:19:27 अभयारण्य दे रखे हैं जो अभी आप देख कर आ 2:19:29 रहे हैं। ठीक है? तो शुरू करते हैं। इसमें 2:19:32 शुरू क्या करना है? देखा तो है ही है एक 2:19:34 बार इसमें भी देख लीजिए चित्र में भी 2:19:35 नक्शे में भी होकरा वेटलैंड जो है ये आपका 2:19:38 जम्मू कश्मीर का है भिंडावास खापरवास यह 2:19:40 पड़ेगा हरियाणा में नफजगढ़ ड्रेन पक्षी 2:19:42 अभयारण्य ये दिल्ली में है वैसे ही हिमाचल 2:19:45 में गमगूल है सरसई नवार लाख बहुसी नवाबगंज 2:19:48 ओखला पटना समन समसपुर सांडी ये सब यूपी 2:19:50 वाले हैं है नांगीनकटी 2:19:53 कवल कुशेश्वर गोगाबल संजय गांधी ये सब 2:19:55 बिहार के हैं। वैसे ही अगर आप इधर आएंगे 2:19:58 तो यहां लांगतांग को देख रहे हैं मिजोरम 2:20:00 में है। यहां देखेंगे केवला और तालछापर यह 2:20:03 राजस्थान का हो गया। गोगा, खिजड़िया, कच्छ 2:20:05 बस्टर्ड, नलसरोवर, पोरबंदर, थोल यह सब 2:20:08 गुजरात के हैं। ठीक है? मयानी, करनाला, 2:20:11 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ये सब महाराष्ट्र 2:20:13 वाला हो गया। चिंतामोनी अभयारण, कुलिक 2:20:15 पक्षी अभयारण्य ये सब पश्चिम बंगाल का हो 2:20:17 गया। अब आइए नीचे चलते हैं। नंदूर 2:20:19 मधमेश्वर जो है ये भी महाराष्ट्र का है। 2:20:22 अच्छा इसके बाद अतिवेरी पांकापुर बोनाल 2:20:25 गुडवी कगलाडू मगदी मंदागड्डे पुतनहल्ली 2:20:29 रंगनाथ हिडू ये सारे जो पक्षी अभयारण्य है 2:20:32 ये कर्नाटक के हैं। सलीम अली पक्षी 2:20:34 अभयारण्य ये सिर्फ एकमात्र है गोवा का और 2:20:35 गोवा है ही कितना बड़ा। इसके बाद कदुंडी, 2:20:39 कुमारकोम, मंगलवनम, पथर मल्लम और थड्डेकट 2:20:43 ये सारे केरल के हैं। तमिलनाडु में आप 2:20:46 देखिएगा तमिलनाडु में चित्रांगुली है 2:20:48 करंजीकुलम है कुथन कुथनकुलम है सुचिंद्रम 2:20:52 है उदय मार्तंडपुरम है वेदांग थंगल है 2:20:55 बेलोड है और वेटांगुटी ये सारे आंध्र 2:20:58 प्रदेश में अटापाका नीला नीलापट्टू पुलीकट 2:21:02 श्री पेसुनीला नरसिम्हा और उपलपाडू ये 2:21:06 सारे 2:21:08 ठीक है देख लिया आगे चलते हैं अब आ जाइए 2:21:10 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यानी बायोस्फीयर 2:21:13 रिजर्व 2:21:14 तो जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र ऐसे इलाके 2:21:17 होते हैं जो कि ज्योग्राफिकली अगर देखा 2:21:19 जाए तो जीव जंतुओं और प्राकृतिक भूभाग 2:21:21 दोनों को मिलाकर बनते हैं। मतलब जो जीव 2:21:23 प्रजातियां जहां रह रही हैं उनके 2:21:25 प्राकृतिक आवास को ही हम बचाएंगे। तो ये 2:21:27 बात तो पीछे हमने नेशनल पार्क में भी देखी 2:21:30 थी। लेकिन यह जो जीव प्रजातियां हैं ये 2:21:32 अकेले वहां नहीं रहती हैं। वहां मनुष्यों 2:21:34 का भी आवास होता है। मतलब मतलब मनुष्यों 2:21:36 की भी आवाजाही होती है। बाकी गतिविधियां 2:21:38 भी इस क्षेत्र में चल रही होती हैं। तो 2:21:40 उनको हम चलने देते हैं। वैसे ही चलने देते 2:21:42 हैं। मतलब एक बफर जोन जैसा बनाते हैं और 2:21:44 यह जो जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र होते हैं 2:21:46 यह एक तरह से एक साझी जीवन यापन की तकनीक 2:21:51 है। जैसा कि हमें पर्यावरण सिखाता है। 2:21:53 जैसा कि हमें प्रकृति सिखाती है। कि सारी 2:21:56 जो जीव प्रजातियां हैं सबको मिलजुलकर रहना 2:21:58 चाहिए। एक दूसरे से लेनदेन जो हमारा पहले 2:22:00 से ही चलता आ रहा है मतलब एक दूसरे पर जो 2:22:01 निर्भर निर्भरता है वो तो रहेगी ही लेकिन 2:22:04 हमें सबके सह अस्तित्व का ध्यान देना 2:22:06 चाहिए। तो जो हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट और 2:22:09 सह अस्तित्व की बात करते हैं शांतिपूर्ण 2:22:11 सह अस्तित्व की बात करते हैं उसी का साकार 2:22:13 स्वरूप है ये बायोस्फीयर रिजर्व। और इन 2:22:16 सभी बायोस्फीयर रिजर्व का जो केंद्र बिंदु 2:22:18 होता है वह आमतौर पर कोई नेशनल पार्क होता 2:22:19 है जहां के बहुत स्ट्रिक्ट रूल रूल 2:22:22 रेगुलेशन जो है वो काम करते हैं। ठीक बात 2:22:24 है। अब आगे देखते हैं। तो कुल मिलाकर 2:22:27 स्थानीय सामुदायिक प्रयास और वैज्ञानिक 2:22:29 प्रबंधन दोनों इसमें काम करता है। सतत 2:22:31 विकास को बढ़ावा देने के लिए जो यूनेस्को 2:22:32 का मैन एंड बायोस्फीयर यानी एम एबी 2:22:35 प्रोग्राम जो है मैब। उसी के अंतर्गत इनको 2:22:39 विकसित किया गया है। तो बायोस्फीयर रिजर्व 2:22:42 का जो कार्यक्रम है यह 1971 में यूनेस्को 2:22:44 ने शुरू किया था और इसकी घोषणा केंद्र 2:22:46 सरकार अधिसूचना जारी करके अपना दी थी। तो 2:22:49 मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के अंतर्गत 2:22:51 सरकारें इनको यह जो क्षेत्र हैं इनको 2:22:53 नामांकित करती है और बायोस्फीयर रिजर्व 2:22:55 बनाने का उद्देश्य वही होता है जीवन के 2:22:57 सभी रूपों और उनके सहायक तंत्रों को पूरी 2:22:59 तरह से विकसित करना उनके प्राकृतिक आवास 2:23:02 में उनका आवास बदले बिना सिर्फ हम बाहर 2:23:05 बाहर से निगरानी करते रहें और वो जिस 2:23:07 स्वाभाविक स्वरूप में पनप रहे हैं और जैसे 2:23:08 जहां पनप रहे हैं जो प्रजाति जहां रह रही 2:23:11 है उसको वहीं रहने देना। तो दुनिया का जो 2:23:14 पहला बायोस्फीयर रिजर्व है यहां दुनिया की 2:23:16 बात हो रही है। विश्व की बात हो रही है। 2:23:17 ध्यान दीजिएगा। 2:23:18 विश्व का पहला बायोस्फीयर रिजर्व 1979 में 2:23:21 स्थापित किया गया था। 1979 2:23:24 भारत में कुल मिलाकर इनकी संख्या 18 ही 2:23:26 है। मान्यता प्राप्त यूनेस्को के द्वारा 2:23:29 कुल मिलाकर 13 है। कच्छ की खाड़ी 12454 2:23:32 स्क्वायर कि.मी. ये सबसे बड़ा बायोस्फीयर 2:23:35 रिजर्व है। सबसे बड़ा है। और नीलगिरी 2:23:38 बायोस्फीयर रिजर्व सबसे पहला है जिसको कि 2:23:40 अधिसूचना मिली थी 1 सितंबर 1986 को। 2:23:42 डिब्रू सखोवा का क्षेत्रफल सबसे कम है। 2:23:45 हमने देखा कि कच्छ की खाड़ी वाला सबसे 2:23:47 बड़ा है। तो डिब्रू सखोवा जो यहां आप देख 2:23:49 रहे हैं असम वाला ये सबसे छोटा है 900 माफ़ 2:23:52 कीजिएगा 765 स्क्वायर कि.मी. इसका विस्तार 2:23:54 है स्क्वायर कि.मी. 2:23:56 हालांकि छोटा नहीं है उतना दायरा लेकिन अब 2:23:59 12000 से तुलना करेंगे तो छोटा लगेगा ही। 2:24:01 तो सबसे बड़ा है कच्छ की खाड़ी वाला और 2:24:03 सबसे छोटा है डिब्रू सखोवा। तो ये रहे वो 2:24:06 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र। ना सिर्फ 2:24:08 उनका नाम और अधिसूचना की तारीख दी है 2:24:10 बल्कि राज्य के साथ-साथ वहां पर रहने वाले 2:24:12 जीव-जंतु भी। वैसे तो बहुत सारे प्राणी 2:24:15 रहते हैं लेकिन जो मुख्य जीव पाए जाते हैं 2:24:16 जिनके लिए वो फेमस है तो वो यहां पर दिए 2:24:19 हुए हैं। नीलगिरी सबसे पहले 1986 2:24:22 क्षेत्रफल है 5520। ये वायनाड, नागरले, 2:24:25 बांदीपुर, मधुमलाई, नीलांबुर, साइलेंट 2:24:27 वैली, सिरवानी इन सब में फैला हुआ है। 2:24:30 यानी पूरा अच्छा खासा विस्तार है। और 2:24:32 तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक वाला पूरा 2:24:34 हिस्सा मतलब तीन राज्यों में इसका 2:24:36 विस्तार। नीलगिरी ताहर और सिंह पुच्छी 2:24:39 मकाक एक प्रकार की वानर प्रजाति है जिसका 2:24:42 कि जिसकी कि पूछ जो है वो शेर जैसी होती 2:24:44 है। तो ये दो यहां के मुख्य जीव-जंतु हैं। 2:24:46 बाकी तो मतलब पाए ही जाते हैं। इसके बाद 2:24:49 नंदा देवी है। चमोली पिथौरागढ़ और 2:24:51 बागेश्वर जिले में फैला हुआ है। उत्तराखंड 2:24:52 के 5860 इसका टोटल विस्तारण 1988 में 2:24:56 अधिसूचना मिली थी। स्नो लेपर्ड यहां की 2:24:58 खासियत है। उसके अलावा काला भालू, भूरा 2:25:00 भालू, कस्तूरी मृग, हिम मुर्गा, सुनहरा 2:25:03 बाघ क्षमा कीजिएगा। सुनहरा बाज और काला 2:25:07 बाज दोनों यहां पर पाए जाते हैं। ठीक है? 2:25:10 गोल्डन ईगल भी पाया जाता है और ब्लैक ईगल 2:25:13 भी पाया जाता है जिसको भी शिकारा कहा जाता 2:25:14 है। तो नंदा देवी जो बायोस्फीयर रिजर्व है 2:25:18 इसको आप देख रहे हैं। इसके बाद नोकरेक है 2:25:20 1988 820 स्क्वायर कि.मी. विस्तार है। रेड 2:25:23 पांडा यहां की खासियत। हालांकि ये पांडा 2:25:26 कहा जाता है लेकिन देखने में ये गिलहरी 2:25:28 जैसा लगता है। थोड़ा बड़े साइज का। 2:25:31 इसके बाद आप देख रहे हैं ग्रेट निकोबार को 2:25:34 885 स्क्वायर किलोमीटर विस्तार है। साल्ट 2:25:36 वाटर क्रोकोडाइल यहां पाए जाते हैं। जरा 2:25:38 सतर्क होकर जाइएगा। 1989 के टाइम में इसको 2:25:41 अधिसूचित किया गया था। मन्नार की खाड़ी 2:25:42 में आ जाते हैं। डगांग यानी समुद्री गाय 2:25:45 जो कि समुद्री घास को चरकर अपना जीवन यापन 2:25:47 करती है और बड़ी ही सीधी होती है। लेकिन 2:25:50 मनुष्य की विनाशकारी गतिविधियां और जो 2:25:52 जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसका तेजी से 2:25:54 शिकार हो रही है। तो 1989 में इसको 2:25:57 अधिसूचना मिली थी। 10,500 स्क्वायर कि.मी. 2:25:59 इसका विस्तार है। जलीय क्षेत्र है। इसके 2:26:02 बाद नंबर आता है मानस का 1989 2837 2:26:06 कोकराझार बोंगाई गांव बारापेट नलबाड़ी और 2:26:09 कामरूप असम का क्षेत्र है ही है। पूरा 2:26:11 विस्तार लाल पांडा और सुनहरा लंगूर इसकी 2:26:13 खासियत। दरांग जिला भी जो है असम का इसमें 2:26:16 कवर होता है। इसके बाद सुंदरवन आप समझ ही 2:26:18 रहे हैं। गंगा और ब्रह्मपुत्र का यह पूरा 2:26:20 तंत्र है। डेल्टाई सिस्टम है और 9630 2:26:23 स्क्वायर कि.मी. टोटल विस्तार है। 1989 2:26:25 में अधिसूचना मिली थी। रॉयल बंगाल टाइगर 2:26:28 का यह नेचुरल हैबिटेट है और ऐसा दुनिया 2:26:30 में पहली बार देखा जाता है कि कहीं भी 2:26:32 इतना भारीभरकम जो बाघ है अच्छी खासी 2:26:34 पर्सनालिटी वाला वो दलदली क्षेत्र में 2:26:36 रहता है। ऐसा पहली बार और एकमात्र यही 2:26:38 दिखाई देता है। सिमलीपाल ये उड़ीसा का है। 2:26:41 मयूरबंद जिला यहां गौर पाए जाते हैं। गौर 2:26:44 नहीं असल में गौर पाए जाते हैं। जिनको कि 2:26:46 गलती से कुछ जो बुद्धिमान लोग हैं वो 2:26:49 जंगली भैंस समझ लेते हैं। कहते हैं कि 2:26:51 अमेरिकन बाइससन की तरह से इंडियन बाइसन 2:26:54 है। तो बाईसन जो होते हैं वह असल में भैंस 2:26:56 होते हैं। मतलब भैंस की प्रजाति भैंस के 2:26:58 कुल से आते हैं। और यह जो गौर है यह सबसे 2:27:01 शक्तिशाली और सबसे बड़े आकार का मस्कुलर 2:27:03 बोबवियन होता है। ये गौवंश है। गाय के 2:27:06 परिवार का सबसे बड़ा सदस्य है। इसकी जो 2:27:08 मांसपेशियां होती है वो बिल्कुल एक 2:27:10 शाकाहारी पहलवान जैसी होती हैं। जिम में 2:27:12 भी वैसी बॉडी नहीं बनी। ठीक है? है तो गौर 2:27:15 गौर अलग चीज है और बायसन अलग चीज है। रॉयल 2:27:18 बंगाल टाइगर यहां देखें आप और जंगली हाथी 2:27:21 यह सब जो है यह सिमलीपाल की खासियत है 2:27:23 उड़ीसा डिब्रू सखोआ को आप देखेंगे 2:27:26 डिब्रूगढ़ और तनसुकिया जिले में असम में 2:27:28 पाया मतलब फैला हुआ है ये सुनहरा लंगूर 2:27:30 इसकी खासियत है 97 का अधिसूचित है दिहांग 2:27:33 दबांग अरुणाचल का है ही सियांग और दिवांग 2:27:35 घाटी का हिस्सा है यहां मृग हिरण पाया 2:27:38 जाता है मिशमी तकिन पाया जाता है लाल गोरल 2:27:41 पाया जाता है और एशियाई काला भालू पाया 2:27:43 जाता है घबराइए नहीं ये सारे जिंदा जीव ही 2:27:45 है और कुछ नहीं है इसके बाद आगे बढ़ते 2:27:48 हैं। अच्छा क्षेत्रफल इसका अच्छा खासा है। 2:27:50 दिहांग दीबांग का देखिए एरिया। 2:27:52 इसके बाद आता है मध्य प्रदेश का पंचमढ़ी। 2:27:55 यह मध्य प्रदेश के बैतूल, होशंगाबाद और 2:27:57 छिंदवाड़ा में फैला हुआ है। यहां जॉइंट 2:27:59 स्क्वेरल और फ्लाइंग स्क्वेरल दोनों पाई 2:28:01 जाती हैं। यानी जो विशालकाय गिलहरी है वो 2:28:04 भी मिलती है और उड़ने वाली गिलहरी भी। तो 2:28:06 कोई गिलहरी उड़ नहीं सकती है। लेकिन अपने 2:28:09 हाथ और पंजे की मांसपेशियों को फैलाकर और 2:28:11 अपनी पूंछ को पैराशूट की तरह यूज़ करके ये 2:28:14 गिलरियां लंबी छलांग लगाती है। तो ऐसा 2:28:15 लगता है कि उड़ रही। ठीक है। इसके बाद 2:28:19 कंचनजंगा है। सिक्किम मतलब कंचनजंगा की 2:28:22 पहाड़ी और सिक्किम का सिक्किम राज्य का 2:28:24 हिस्सा है। यह 2619 स्क्वायर कि.मी. 2:28:26 विस्तार है। रेड पांडा और स्नो लेपर्ड 2:28:29 इसकी खासियत है। अगस्ता मलाई आपका पड़ता 2:28:31 है तमिलनाडु में। तिरुणवेली और 2:28:33 कन्याकुमारी जिला है। कुछ हिस्सा केरल में 2:28:35 भी चला जाता है। तिरुवनंतपुरम कोल्लम और 2:28:37 पथनम थीटा जिले में। तो यहां नीलगिरी ताहर 2:28:40 के साथ-साथ हाथी पाए जाते हैं। 3500 2:28:42 स्क्वायर कि.मी. मोटे तौर पर एरिया है। 2:28:44 2001 में अधिसूचना मिली थी। अचानक अमरकंटक 2:28:47 है 3835 स्क्वायर किलोमीटर। मध्य प्रदेश 2:28:50 का अनूपपुर और डिंडोरी डिस्ट्रिक्ट है और 2:28:52 काला हिरण यहां पाया जाता है जिसको कि आप 2:28:54 चिंकारा कहते हैं। यहां भेड़िए पाए जाते 2:28:56 हैं और साथ ही साथ जॉइंट स्क्वेरल यहां भी 2:28:59 मिलती है। 2005 इसकी अधिसूचना का समय है। 2:29:02 अच्छा एक चीज है ये अचानक कमर अमरकंटक जो 2:29:05 है ये मध्य प्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ 2:29:07 को भी कवर करता है। बिलासपुर वाला हिस्सा 2:29:09 उसमें कवर होता है। कच्छ गुजरात राज्य का 2:29:12 कच्छ राजकोट सुरेंद्रनगर और पाटन जिला जो 2:29:14 है वो इसमें कवर हो रहा है। यहां पर जंगली 2:29:17 गधा पाया जाता है। भारतीय जंगली गधा 2008 2:29:19 का वक्त है इसको अधिसूचना मिली थी। कोल्ड 2:29:22 डेजर्ट कहां पाया जाएगा? ये पाया जाएगा 2:29:24 हिमालय क्षेत्र में। तो हिमाचल प्रदेश में 2:29:27 जो चंद्रताल और सरचू और किब्बर वन्य जीव 2:29:29 अभयारण्य है उसका हिस्सा ये पूरा कैप्चर 2:29:31 करता है। पिन वैली नेशनल पार्क के आसपास 2:29:33 का क्षेत्र। कुल मिलाकर यहां हिम तेुआ ही 2:29:36 खासियत है। विशेष रूप से क्षेत्र तो काफी 2:29:37 बड़ा है। 7770 2:29:40 शेषांचलम 2:29:41 ये आंध्र प्रदेश का जो चित्तूर और 2:29:43 कुड़प्पा जिला है उसके कुछ भाग को कवर 2:29:46 करता है। स्लेंटर लोरिस और पेंगुलिन जो कि 2:29:48 बहुत गंभीर रूप से लुप्त प्राय प्रजाति है 2:29:51 और शिकार होती है। मतलब शिकार इसको बनाया 2:29:52 जाता है अवैध तरीके से इसकी खाल के लिए। 2:29:55 तो ये यहां पर पाए जाते हैं। 2010 का समय 2:29:58 है। इसको अधिसूचना मिली थी। नेक्स्ट आप 2:30:01 देख रहे हैं पन्ना। यहां चीता, चीतल, 2:30:03 चिंकारा, सांभर और स्लॉथ पाए जाते हैं। 2:30:07 ठीक है? ये स्लॉट जो है ये बहुत ही सुस्त 2:30:10 होते हैं। मतलब एकदम धीमी रफ्तार में चलते 2:30:12 हैं। एकदम लगता है कि मरने वाले हैं। ऐसी 2:30:14 उनकी कंडीशन रहती है। जबकि वो जिंदा होते 2:30:16 हैं लेकिन आलसी होते हैं। स्वभावगत आलसी 2:30:19 होते हैं। 2998.98 2:30:22 स्क्वायर कि.मी. टोटल इसका विस्तार है। 2:30:24 मतलब इनको तेज भूख भी लगी रहे तो इनकी 2:30:26 रफ्तार तेज नहीं हो सकती। 2011 में इनको 2:30:29 अधिसूचना मिली थी पन्ना को। तो यहां पर ये 2:30:31 बायोस्फीयर रिजर्व है भारत के। यह पीआईबी 2:30:33 से लिया हुआ चित्र है लेकिन थोड़ा धुंधला 2:30:35 है। कोई बात नहीं देखें। कोल्ड डेजर्ट और 2:30:37 नंदा देवी यहां हिमालय क्षेत्र हो गया। 2:30:39 कंचनजंगा को आप देख रहे हैं। यहां दिहांग 2:30:41 दिबांग को देख रहे हैं। ये मानस डिब्रू 2:30:42 शिकवा है और नोकरेक ये मेघालय वाला और इधर 2:30:45 मतलब नॉर्थ ईस्ट का। इसके बाद ग्रेट रन जो 2:30:48 कच्छ का है गुजरात वाला पंचमढ़ी को आप 2:30:51 यहां पन्ना और पंचमढ़ी मध्य प्रदेश का देख 2:30:52 रहे हैं। सुंदरवन और सिमलीपाल ये उड़ीसा 2:30:55 और ये पश्चिम बंगाल का आपने देख लिया। 2:30:57 अचानक अमरकंटक और ये पूरा क्षेत्र मध्य 2:31:00 प्रदेश का आपने देखा शेषांचलम यहां आप आ 2:31:02 गए गल्फ ऑफ मन्नार नीलगिरी ये ग्रेट 2:31:05 निकोबार वाला हो गया यहां अगस्ता मलाई हो 2:31:07 गया इस तरीके से आपने बायोस्फीयर रिजर्व 2:31:09 को यहां पर नक्शे में भी मोटे तौर पर देख 2:31:11 लिया है तो अब यहां पर जो यूनेस्को के 2:31:13 नेटवर्क वाले 13 है वो तो रह ही गए उनको 2:31:15 भी देख लेते हैं। सबसे पहले नंबर आता है 2:31:17 नीलगिरी का और सबसे पहले इसी को शामिल 2:31:19 किया गया था 2000 सन 2000 में। ठीक है? 2:31:22 मन्नार की खाड़ी को 2001 में, सुंदरवन को 2:31:25 2001 में, नंदा देवी को 2004 में और नोकरे 2:31:27 को 2009 में, पंचमणि को 2009 में, 2:31:30 सिमलीपाल को 2009 में, अचानक अमरकंटक को 2:31:33 2012 में, ग्रेट निकोबार को उसके अगले साल 2:31:36 2013 में, फिर अगस्त्या मलाई को 3 साल बाद 2:31:39 2016 में, जग कंचनजंगा को 2 साल बाद 2018 2:31:43 में। ठीक है? 2:31:47 ये कोई लॉजिकल रीजनिंग नहीं चल रही है। 2:31:49 ऐसे ही पन्ना को देख रहे हैं आप। यह सन 2:31:51 2020 का है। फिर प्लस टू उसके बाद कोल्ड 2:31:54 डेजर्ट सीधे-सीधे आकर 2025 में बीच में 2:31:57 कोरोना की मार पड़ी थी। तो 5 साल बाद ये 2:31:59 कोल्ड डेजर्ट को भी यूनेस्को की लिस्ट में 2:32:01 शामिल किया गया। कुल मिलाकर 13 तो अभी 2:32:03 हमने बाघों को बचा लिया और कई सारी जीव 2:32:06 प्रजातियों के संरक्षण के उपाय किए। अब 2:32:08 एशियन एलीिफेंट का नंबर है। भारत में 2:32:10 वैश्विक स्तर पर काफीेंस है इस मामले में। 2:32:13 दुनिया के कुल जो जंगली एशियाई हाथी हैं 2:32:15 उनका लगभग 60% हिस्सा आपने देखा ना लगभग 2:32:19 70 से 72% आबादी जो है वो बाघों की रहती 2:32:22 है मोटे तौर पर और एशियन एलीिफेंट्स की भी 2:32:25 जो मैक्सिमम आबादी है 60% वो अपने यहां ही 2:32:28 निवास करती है और अपने यहां उनके जान पर 2:32:30 सबसे ज्यादा संकट भी है। 33 हाथी रिजर्व 2:32:33 14 राज्यों में फैले हुए हैं। 80000 2:32:35 स्क्वायर किलोमीटर से भी ज्यादा के जंगल 2:32:37 कवर करते हैं। विश्व हाथी दिवस मनाया जाता 2:32:40 है 12 अगस्त को और उद्देश्य है कि अभी 2:32:43 मौजूद जीवित जो धरती पर मौजूद सबसे बड़ा 2:32:45 स्तनपाई प्राणी है उसके सुरक्षा के महत्व 2:32:49 से लोगों को अवगत कराना। बताना कि हाथी जो 2:32:51 है वो सिर्फ आप भगवान गणेश का रूप मानकर 2:32:54 पूज लेते हैं और उसके बाद उसका भरपूर 2:32:56 दुरुपयोग करते हैं। अवैध शिकार हो जाता 2:32:58 है। उसका वाहन के रूप में इस्तेमाल करके 2:33:00 उसकी जिंदगी खराब कर देते हैं। आपके खेतों 2:33:03 में घुस आए तो उसके मुंह में पटाखा ठूस 2:33:05 देते हैं। है ना? ऐसे गणेश जी मानकर पूजा 2:33:07 करेंगे गणपति बप्पा और ले आगे उसके मुंह 2:33:09 में बम ठूस दिया बेमौत मारा गया तो इस तरह 2:33:14 की प्रकृतियों से बाज आइए इंसान बने रहिए 2:33:16 हैवान बनेंगे तो प्रकृति आपसे डबल हैवान 2:33:19 बनेगी और वो जब हिसाब करेगी ना तो देते 2:33:21 बहुत रोना आएगा आंसू कम पड़ जाएंगे तो कुल 2:33:25 मिलाकर बात ये है कि विश्व हाथी दिवस जो 2:33:27 है ये मनाया जाता है 12 अगस्त को एशियाई 2:33:29 और अफ्रीकी हाथी दोनों की दुर्दशा हो रही 2:33:31 है ऐसा नहीं है कि जो एशियन एलीिफेंट है 2:33:34 बेचारे वही भी इस दुर्दशा के शिकार जो 2:33:38 अफ्रीकी हाथी हैं उनकी भी स्थिति बहुत 2:33:39 अच्छी नहीं। इनका तो आकार प्रकार और बड़ा 2:33:42 होता है। बहुत लंबे-लंबे दांत होते हैं। 2:33:44 ये शिकार बनते हैं और तेज। तो दोनों की ओर 2:33:47 गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है और 2:33:49 इसीलिए यह दिवस मनाया गया। यह जंगल के 2:33:52 पारिस्थितिकी तंत्र की की स्टोन प्रजाति 2:33:54 के रूप में सेवा करते हैं। जंगल को हाथी 2:33:57 बहुत कुछ देते हैं। लोगों को लगता है कि 2:33:58 यह कितना खाते हैं। पूरे जंगल को रौद देते 2:34:01 हैं। इन्हें खाने के लिए ही पूरा जंगल 2:34:03 चाहिए। और कहीं घुस जाए तो फिर तबाही ही 2:34:05 तबाही है। रहने के लिए ढेर सारी जगह 2:34:07 चाहिए। लेकिन ये जंगल और पारिस्थितिकी 2:34:09 तंत्र को कितना देते हैं ये कोई नहीं 2:34:12 सोचता है। ठीक है? तो ये असल में कीस्टोन 2:34:15 प्रजाति हैं और एक कीस्टोन प्रजाति अगर 2:34:17 किसी पारितंत्र से किसी इकोसिस्टम से 2:34:19 रिप्लेस कर दी जाए तो वो इकोसिस्टम ऐसे 2:34:21 बहरा जाएगा ऐसे ढह जाएगा ना ये बहरा जाएगा 2:34:24 जो ये पूर्वांचल का शब्द है मतलब ऐसा 2:34:28 गिरेगा मतलब झटके में गिरेगा धराशाई हो 2:34:31 जाएगा जमीदोज हो जाएगा पता ही नहीं चलेगा 2:34:34 बहुत सारी प्रजातियां उस लोड को संभाल ही 2:34:36 नहीं पाएंगी जिसको कि इस की स्टोन ने 2:34:37 संभाला हुआ है। ठीक है? गिनती के पांच 2:34:40 हाथी जो हैं वो हजारों की संख्या में जो 2:34:43 बाकी जीव प्रजातियां हैं उनको रिप्लेस कर 2:34:45 सकते हैं। उनकी जगह ले सकते हैं। कहने का 2:34:47 मतलब यह है कि ये कीस्टोन प्रजाति है और 2:34:49 ऐसी प्रजातियों को तो हर कीमत पर बचाना 2:34:51 चाहिए। 7 दिसंबर 1992 को केंद्र सरकार 2:34:54 द्वारा जो सिंभूम यानी झारखंड का इलाका है 2:34:57 वहां पर प्रोजेक्ट एलीिफेंट को शुरू किया 2:34:59 गया था। लेकिन दुख की बात ये है कि जिस 2:35:01 जोश खरोश के साथ हम इस समय बड़ी बिल्लियों 2:35:03 को बचा रहे हैं। उस जोश के साथ हम हाथियों 2:35:05 का संरक्षण नहीं कर पा रहे हैं। वही वही 2:35:08 जज़्बा हमें चाहिए हाथियों को बचाने के 2:35:10 लिए। ठीक है? माइक नाम का जो प्रोग्राम है 2:35:13 बनाया गया है। हाथियों की अवैध हत्या पर 2:35:15 निगरानी लगाने के लिए। और दक्षिण एक 2:35:19 दक्षिण एशिया में शुरू किया गया था ये 2:35:20 प्रस्ताव के तहत। यहां देख रहे हैं आप। जो 2:35:23 माइक प्रोग्राम है इसको 1997 में 2:35:25 कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज मतलब जो कॉब का 2:35:27 जो 10वां सम्मेलन था कॉप 10 था उसमें 2:35:30 अपनाए गए प्रस्ताव के जरिए कन्वेंशन ऑन 2:35:32 इंटरनेशनल ट्रेड इनेंजर्ड स्पीशीज ऑफ 2:35:35 वाइल्ड फोना एंड फ्लोरा मतलब जो सिटीज था 2:35:38 उसके द्वारा स्टार्ट किया गया 2:35:41 तो कुल मिलाकर ये तो बात हुई दुनिया की 2:35:43 केंद्र सरकार क्या कर रही है जो मौजूदा 2:35:46 हाथी संरक्षण की नीति है उसकी समीक्षा 2:35:48 करने और भविष्य के हस्तक्षेप को तैयार 2:35:50 करने के लिए महेश रंगराजन के नेतृत्व में 2:35:52 एक टास्क फोर्स बना दी गई। सरकार यही करती 2:35:54 है या कोई भी बड़ी संस्था या बड़े जो 2:35:56 अधिनायक हैं देश चलाने का दुनिया चलाने का 2:36:00 दावा करते हैं वो अक्सर यही करते हैं। कोई 2:36:02 टास्क फोर्स बना देंगे। कोई कमेटी बना 2:36:04 देंगे। किसी आदमी को नियुक्त कर देंगे कि 2:36:06 भाई जांच पड़ताल करो। वो जांच पड़ताल की 2:36:08 रिपोर्ट आती रहेगी। जनता का आक्रोश धीमा 2:36:10 हो जाएगा। लोगों की जागरूकता ठंडी पड़ 2:36:12 जाएगी। और स्थिति जस की तस चलती रहेगी। 2:36:14 दुर्दशा वैसी की वैसी चलती रहेगी। ठीक है? 2:36:17 पेपर लीक के मामले में हड़ताल करिए, अनशन 2:36:20 करिए। उसके बाद आश्वासन हुआ कि हम एक 2:36:22 कमेटी गठित करेंगे। यह हो जाएगा, वो हो 2:36:25 जाएगा। भले कुछ ना हो। लेकिन तात्कालिक 2:36:27 तौर पर तो हमने आक्रोश को दबा दिया। और 2:36:29 ऐसा सिर्फ एक सरकार या एक अधिनायक नहीं 2:36:31 करता है। ये सब करते हैं। सत्ताधारी जितने 2:36:34 होते हैं सब इसी तरीके के हथकंडे आजमाते 2:36:36 हैं। वो सुधारना नहीं चाहते हैं। वो सिर्फ 2:36:38 मुंह बंद कर देते हैं तत्काल में। 2:36:41 तो वही चीज हाथियों के संरक्षण के साथ भी 2:36:43 हो रही है। यह हाथी टास्क फोर्स भी कुछ 2:36:45 नहीं कर पा रही है और जंगल बेतहाशा उजड़ते 2:36:47 जा रहे हैं। आप जानते हैं बहुत अच्छी तरह 2:36:49 से जानते हैं और पर्यावरण का तो ये 2:36:50 एकमात्र सूत्र है कि कोई भी प्रजाति अगर 2:36:52 विलुप्त हो रही है तो देखो कि उसका 2:36:54 हैबिटेट सुरक्षित है या नहीं। निश्चित तौर 2:36:56 पर नहीं होगा। किसी भी प्रजाति का अगर 2:36:59 आवास ही आप नष्ट कर देंगे तो वो नष्ट हो 2:37:01 जाएगी देर सवेेर। और हाथी तो बहुत बड़ा 2:37:03 जीव है। उसके आवासों को तो आप जो 2:37:06 इंडस्ट्रियल लोग हैं, बिजनेसमैन है उनको 2:37:08 बेचते जा रहे हैं, खत्म करते जा रहे हैं। 2:37:10 वहां इंडस्ट्रीज लग रही है। वहां पर 2:37:12 डेवलपमेंट आप कर रहे हैं। कॉरिडोर बना रहे 2:37:14 हैं। वहां पर अर्बन प्रोजेक्ट जो है उनको 2:37:17 विकसित कर रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर 2:37:18 डेवलपमेंट चल रहा है वाहवाही लूटने के 2:37:20 लिए। तो हाथी कहां जाएंगे? ठीक है? तो ये 2:37:24 हाथी टास्क फ़ोर्स गठित करने से नहीं होगा। 2:37:26 हमें इनके हैबिटेट को बचाना होगा यानी 2:37:27 जंगल को बचाना होगा। इसके बाद आप देखेंगे 2:37:30 यहां हाथी मेरे साथी नाम का अभियान शुरू 2:37:32 किया गया। हाथी मस्कट भी है इंडियन रेलवे 2:37:35 का लालटेन ले खड़ा रहता है बेचारा। तो 2:37:37 हाथियों के संरक्षण की दिशा में एक 2:37:39 महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। दिल्ली में 2:37:41 एलीिफेंट एट मंत्री स्तरीय बैठक जो है इस 2:37:44 उसमें इस पहल की घोषणा की गई। जो पर्यावरण 2:37:47 और वन मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट 2:37:49 यानी डब्ल्यूटीआई का संयुक्त प्रयास था। 2:37:52 तराई हाथी रिजर्व यह उत्तर प्रदेश में 2:37:54 दूसरा और भारत में 33वां हाथी रिजर्व। 2:37:57 दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर 2:37:59 रिजर्व, किशनपुर, कतरनिया घाट, वन्य जीव 2:38:02 अभयारण्य इसके जो पूरे क्षेत्र हैं वो कवर 2:38:04 होते हैं। समझ रहे हैं? टाइगर रिजर्व और 2:38:06 हाथी रिजर्व दोनों आपस में मर्ज कर सकते 2:38:08 हैं और करते भी हैं। तो आपने देखा कि तराई 2:38:11 हाथी रिजर्व जो है ये उत्तर प्रदेश का 2:38:13 दूसरा और भारत का 33वां है। ठीक है? है 2:38:15 अगस्त्या मलाई हाथी रिजर्व ये आपका 32वां 2:38:18 है। एलीिफेंट रिजर्व के तौर पर 32वें नंबर 2:38:20 का है। और वैसे अगर तमिलनाडु राज्य का 2:38:23 देखें तो पांचवें नंबर का है। ठीक है? 2:38:25 भारत का सबसे पहला जो हाथी अभयारण्य है ये 2:38:28 झारखंड का सिंहभूम है और हाथी भारत का 2:38:31 सबसे बड़ा स्थलीय स्तनपाई प्राणी है और 2:38:33 इसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की 2:38:36 अनुसूची एक में रखा गया है। यानी सबसे 2:38:38 ज्यादा संरक्षित जो अनुसूची है उसमें रखा 2:38:40 गया है। राष्ट्रीय विरासत पशु भी घोषित 2:38:43 किया गया इसे वर्ष 2010 में। अब यहां पर 2:38:46 भारत की जो पहली डीएनए आधारित हाथी गणना 2:38:48 है जो कि अक्टूबर 2025 में जारी की गई थी 2:38:52 उसको देखेंगे। 2:38:54 2021 से लेकर 2025 के बीच का डाटा है। 2:38:57 रिपोर्ट का आधिकारिक नाम क्या था? अखिल 2:38:59 भारतीय समकालिक हाथी अनुमान। ठीक है? अखिल 2:39:03 भारतीय समकालिक हाथी अनुमान। यह आप देख 2:39:06 रहे हैं पूरा नाम इसका दिया हुआ है। वैसे 2:39:09 अगर देखा जाए तो यह है क्या? सेंक्रोनियस 2:39:12 ऑल इंडिया एलीिफेंट एस्टिमेशन। ठीक है? ये 2:39:15 इसका पूरा नाम है। तो कुल मिलाकर यह डीएनए 2:39:18 आधारित जंगली हाथियों की मतलब जो खुले हुए 2:39:20 प्राकृतिक तौर पर रहने वाले एशियन एलीफेंट 2:39:23 है उनकी गणना का तरीका है। तो यह जनगणना 2:39:26 पर्यावरण मंत्रालय प्रोजेक्ट एिफेंट और 2:39:28 वाइल्ड लाइफफ़ इंस्टट्यूट ऑफ इंडिया इनके 2:39:30 द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई। 2:39:32 वर्तमान संख्या हाथियों की कुल है 22446 2:39:36 और संख्या देखकर खुश होने की आवश्यकता 2:39:39 नहीं है। यह बाघों जितनी पहुंच जाए जरूरी 2:39:41 थोड़ी है। बात ये है कि इसमें गिरावट आ 2:39:44 रही है। ये सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। 2:39:46 संख्या कितनी है उससे ज्यादा ये 2:39:48 इंपॉर्टेंट है कि ये स्टेबल है या नहीं या 2:39:50 लगातार इसमें गिरावट आ रही है। तो गिरावट 2:39:52 देखी गई है और गिरावट कैसी है? 25% किसी 2:39:55 भी प्रजाति के लिए बहुत भारी कमी है। 2017 2:39:58 से लेकर 2025 के बीच में 25% की जो है 2:40:01 भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2017 में इनकी 2:40:04 संख्या थी 29,964 अब घटकर सिर्फ 22,000 2:40:08 बची है। ठीक है? गिरावट का कारण क्या है? 2:40:11 आवास का नष्ट होना। और आवास का नष्ट होना 2:40:14 जो कारण होता है, यही बाकी समस्याओं की 2:40:16 जड़ बनता है। जिससे कि मनुष्य और हाथी आपस 2:40:19 में टकराने लगते हैं। क्यों? क्यों हाथी 2:40:21 को शौक थोड़ी लगा है कि वो खुले खेतों में 2:40:23 आकर गन्ना खाए आपका या आपके खेतों की 2:40:25 फसलों को चबा जाए। वो तो जंगल में वैसे भी 2:40:28 पीपल के पत्ते और जो जंगली वृक्ष हैं उनको 2:40:30 खाकर संतुष्ट रहता है। जंगल बचेंगे ही 2:40:32 नहीं तो क्या होगा? तब वो जंगल की सीमा का 2:40:34 अतिक्रमण करके जो जंगल काट के खेत बनाए गए 2:40:37 हैं वहां आएगा। वहां पर अपना पेट भरेगा। 2:40:39 पेट भरने के लिए तो कुछ करना ही पड़ेगा। 2:40:41 है ना? पेट भरने के लिए तो आदमी आदमी को 2:40:43 खा सके। ऐसी स्थिति बन जाती है जान बचाने 2:40:46 के लिए। तो वो भी तो जानवर है। तो ऐसी 2:40:48 स्थिति में संघर्ष तभी होता है जब हैबिटेट 2:40:50 नष्ट होता है। हैबिटेट नष्ट होने का मतलब 2:40:52 ये नहीं कि सिर छिपाने की जगह गई। सिर 2:40:54 छिपाने की जगह गई साथ-साथ खाने-पीने का 2:40:56 ठिकाना नष्ट हो गया। मतलब वह हैबिटेट जो 2:41:00 है वह सिर्फ रहने की जगह नहीं होती है। वह 2:41:01 खाने पीने का जरिया, सिर छुपाने का जरिया 2:41:04 और हर प्रकार का प्रोटेक्शन होता है। गणना 2:41:07 की जो नई तकनीक है उसमें डीएनए मार्क 2:41:09 रिककैप्चर टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल किया 2:41:11 जाता है जो कि विशिष्ट अनुवांशिक मार्करों 2:41:13 के माध्यम से की जाती है। ठीक है? पहले 2:41:16 क्या होता था कि पहले देखकर कि ये हाथी जा 2:41:19 रहा है। अच्छा इसको गिनो। या उसके जो मल 2:41:21 होते थे मतलब उसकी जो शौच होती थी उसके 2:41:23 आधार पर भी गिना जाता था। ये एक अनोखा 2:41:25 तरीका था। लेकिन यह उतना सटीक नहीं होता 2:41:27 था। ठीक वैसे ही जैसे बाघ के पंजे पहले 2:41:29 गिनते थे। तो पंजे के आधार पर गिनना थोड़ा 2:41:32 ट्रिकी हो जाता था। तो अभी डीएनए के आधार 2:41:34 पर साइंटिफिकली काम कर रहा है। सटीक 2:41:36 अनुमान के लिए यहां आप देखेंगे कि ये जो 2:41:38 एक्सप्लसिट कैप्चर रिकैप्चर मॉडल है इसका 2:41:42 इस्तेमाल किया जाता है। डाटा संग्रह के 2:41:44 लिए कुल 21,000 के आसपास नमूने इकट्ठे किए 2:41:47 गए। 465 व्यक्तिगत हाथियों की जो डीएनए 2:41:50 प्रोफाइल है उसको भी तैयार किया गया। तो 2:41:52 हाथियों की तादाद के मामले में जो टॉप 2:41:54 स्टेट्स हैं उसमें पहले नंबर पर है 2:41:56 कर्नाटक। 613 हाथी यहां गिने गए। असम में 2:42:00 4159। 2:42:02 जबकि असम एक समय था कि हाथियों का पूरा 2:42:05 इलाका हुआ करता था। और यहां से आप महाभारत 2:42:08 के युद्ध का वर्णन सुनते हैं ना। शोितपुर 2:42:10 का राजा था भगदत्त और भगदत्त जो है वो 2:42:13 हाथियों की सेना लेकर आया था। और हाथियों 2:42:16 की सेना जो है वह पूरा पांडवों की सेना 2:42:18 में खलबली मचा देती है। इतने ज्यादा 2:42:19 मोटे-मोटे और बड़े-बड़े हाथी रहते हैं। और 2:42:21 उतना ही नहीं वो जाने दीजिए महाभारत पर आप 2:42:23 विश्वास ना करें कहें कि काल्पनिक है। तो 2:42:26 चंद्रगुप्त मौर्य और सेलुकस निकेटर की 2:42:28 संधि तो आपने सुनी ही होगी। ऐसे ही 2:42:30 सैकड़ों हाथी उठाकर दे दिए। उसके बाद भी 2:42:32 उसके दरबार में और उसके राज्य में हाथियों 2:42:35 की कमी नहीं थी। हाथियों की कमी हुई तो 2:42:37 उड़ीसा वाला जो क्षेत्र है कलिंग वाला 2:42:39 उसको जीत लिया अशोक ने। वहां हाथी बहुत 2:42:41 अच्छे पाए जाते थे। है ना? तो मतलब ये है 2:42:43 कि हाथी एक समय था कि इस इलाके में कितने 2:42:45 ढेर सारे थे और अब सिर्फ गिनती के बचे हैं 2:42:47 4159 2:42:49 तमिलनाडु 3136 केरल में 2785 उत्तराखंड 2:42:53 में सिर्फ 10792 2:42:56 पश्चिमी घाट में सबसे ज्यादा हाथी हैं और 2:42:58 वही जंगल क्षेत्र अब बचा भी है तो 11934 2:43:02 उसके बाद उत्तर पूर्वी पहाड़ियां नॉर्थ 2:43:04 ईस्ट थोड़ा बहुत ब्रह्मपुत्र का क्षेत्र 2:43:06 चीन की कृपा से जब तक चीन चाहे नहीं तो 2:43:08 ब्रह्मपुत्र सूख गई अगर पानी आना बंद हो 2:43:11 गया उधर से तो ये जंगल भी धीरे-धीरे जाते 2:43:12 रहेंगे। सरकार तो लगी ही गई है। तो यहां 2:43:16 देखें आप 6559 टोटल गिनती हुई है। लगभग 2:43:19 इतने शिवालिक और गंगा के मैदान में ये 2:43:23 डाटा जो है ये 2062 के आसपास है जो कि 2:43:25 इतना ही है। इससे ज्यादा बदलने वाला नहीं 2:43:27 है। मध्य भारत और पूर्वी घाट में भी कुछ 2:43:29 1891 2:43:31 यहां देखिए 33 हाथी अभयारण्य है। उत्तर 2:43:34 पश्चिमी परिदृश्य है इसमें उत्तराखंड और 2:43:36 यूपी है। शिवालिक है उत्तराखंड का। उत्तर 2:43:38 प्रदेश का है उत्तर प्रदेश हाथी रिजर्व और 2:43:40 तराई। इसके बाद कामिंग और शोपुर जो कि 2:43:43 हाथियों का एक देश ही हुआ करता था। ये 2:43:45 लैंडस्केप है। इसमें अरुणाचल और असम आते 2:43:47 हैं। अरुणाचल का कामिंग है। शोपुर शोपुर 2:43:50 जो है वो असम का है। पूर्वी दक्षिण 2:43:52 लैंडस्केप में असम और अरुणाचल ही आते हैं। 2:43:54 देहिंग पटकई और दक्षिणी अरु अरुणांचल हाथी 2:43:56 रिजर्व है। इसके बाद मध्य वाला जो 2:43:59 परिदृश्य है पूर्व मध्य उसमें आप देखेंगे 2:44:01 तो यहां कई सारे राज्य आते हैं। जैसे कि 2:44:04 पश्चिम बंगाल मयूर झरना यहां का है। 2:44:07 झारखंड का सिंभूम है। छत्तीसगढ़ का लेमरू 2:44:09 और बादलखोल है। तमोर पिंगला उड़ीसा का 2:44:11 मयूरभंज महानदी और सललपुर। काजीरंगा का 2:44:15 कारबी अगलांग और इटांगकी लैंडस्केप जो है 2:44:18 इसमें नागालैंड आता है। सबसे पहले इटांग 2:44:20 और सिंफोन यहां टाइगर माफ़ कीजिएगा 2:44:22 एलीिफेंट रिजर्व है। और असम में काजीरंगा 2:44:25 है, कारबी अंगलांग है, धनसरी है और 2:44:27 लुडिगिंग है। ठीक है? ये सारे हैं। मेघालय 2:44:30 लैंड लैंडस्केप में गारो हिल्स हैं। वैसे 2:44:32 ही चिरांग रिपु जो है ये आपका असम का है। 2:44:34 उत्तर बंगाल, ग्रेटर मानस वाला। 2:44:36 ब्रह्मगिरी, नीलगिरी, पूर्वी घाट 2:44:38 लैंडस्केप को आ जाइए देखें तो इसमें कई 2:44:40 सारे जैसे कर्नाटक में मैसूर एलीिफेंट 2:44:42 रिजर्व है, दांडेली है। आंध्र प्रदेश में 2:44:45 रायला है। तमिलनाडु में कोयंबटूर और 2:44:47 नीलगिरी दोनों है। केरल में वायनाड और 2:44:48 नीलांबुर है। तमिलनाडु में अन्नामलाई और 2:44:50 अगस्तामलाई। 2:44:53 अन्नामलाई नेलयमपंथी और हाई रेंज 2:44:55 लैंडस्केप जो है इसमें केरल ही सिर्फ आता 2:44:57 है। अनाइमुडी एलीिफेंट रिजर्व इसमें शामिल 2:45:00 है। पेरियार अगस्तामलाई में श्री 2:45:01 विल्लीपथुर तमिलनाडु का है और केरल का 2:45:03 पेरियार। तो यह देख रहे हैं आप नक्शा और 2:45:06 इसमें वही सारे एलीिफेंट रिजर्व हैं 2:45:07 जिन्हें आप जस्ट अभी देख कर आ रहे हैं। 2:45:09 उत्तर प्रदेश का उत्तर प्रदेश और तराई 2:45:11 वाला है। उत्तराखंड का शिवालिक है। वैसे 2:45:13 ही आप देखेंगे वेस्ट बंगाल का मयूर झरना 2:45:15 और पूर्वी द्वार है। सिंहभूम आपका झारखंड 2:45:18 का हो गया। गारो हिल्स यहां मेघालय का हो 2:45:20 गया। वैसे ही असम में आप देखेंगे तो 2:45:22 काजीरंगा है, शोपुर है, धनश्री, दिहांग 2:45:24 पटकाई, चिरांग रिपु ये सारे हैं। इतांकी 2:45:27 रिजर्व है, सिंफन है। ये सब आप देखेंगे 2:45:30 नागालैंड का है। वैसे ही कामिंग है और 2:45:33 साउथ अरुणाचल है। ये अरुणाचल का हो गया। 2:45:35 ठीक है? 2:45:37 लेमरू आप देखें और बादलखोल तमोर पिंगला यह 2:45:40 सारे छत्तीसगढ़ के हैं। वैसे ही उड़ीसा का 2:45:43 मयूरभंज है महानदी है। सललपुर है। रायला 2:45:46 आप देखेंगे आंध्र प्रदेश का है। कर्नाटक 2:45:47 का मैसूर है। दांडेली है। है ना? वायनाड, 2:45:50 नीलामपुर, पेरियार, अनाईमुटी वाला जो है 2:45:52 ये आपका केरल का है। कोयंबटूर, नीलगिरी, 2:45:55 अनामलाई, अगस्त्यामलाई, श्रीव्लीपथूर ये 2:45:57 तमिलनाडु का है। ऐसे करके आपने देखा। अब 2:46:00 आगे चलते हैं। यहां पर मगरमच्छ का संरक्षण 2:46:02 भी होता है। तो कैसे होता है, कहां होता 2:46:04 है? 2:46:06 सबसे पहले नंबर पर तो गुंदी है तमिलनाडु 2:46:08 का गुदी राष्ट्रीय उद्यान फिर दूसरा है 2:46:10 नंदन कानन उड़ीसा का चंपल में भी होता है 2:46:13 राजस्थान का सतकोसिया सतकोसिया गार्ज 2:46:16 जिसको कहा जाता है ये जॉर्ज नहीं गार्ज है 2:46:18 ठीक है सतकोशिया गार्ज वन्य जीव अभयारण्य 2:46:20 उड़ीसा का है बितरकणिका उड़ीसा का है ओरंग 2:46:24 असम का है। कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास ये 2:46:27 लखनऊ में पड़ता है। लखनऊ का बाहरी इलाका 2:46:29 है उत्तर प्रदेश और चंबल अभयारण्य घड़ियाल 2:46:31 इको पार्क ये मध्य प्रदेश का है। 2:46:34 तो घड़ियाद और मगरमच्छों का संरक्षण 2:46:36 जहांजहां होता है वह देखें। कुकरैल उत्तर 2:46:39 प्रदेश का चंबल राजस्थान का चंबल ये इको 2:46:42 पार्क जो है ये मध्य प्रदेश का भी ओरंग 2:46:44 असम का वैसे ही नंदन कानन ओसा का सतकोशिया 2:46:47 और वितरकणिका भी गुंदी तमिलनाडु का ये 2:46:50 ज्यादा नहीं है याद हो जाएगा। इसके बाद आप 2:46:52 चिड़ियाघर में आ जाइए। जहां जानवरों की 2:46:54 आमतौर पर दुर्गति ही होती है। भारत का 2:46:56 सबसे पुराना जो चिड़ियाघर है वो अरिगनार 2:46:59 अन्ना जलॉजिकल पार्क जो कि चेन्नई में 2:47:02 1855 में खोला गया था और केंद्रीय 2:47:05 चिड़ियाघर प्राधिकरण ये सारी सारे जितने 2:47:07 भी देश भर में फैले हुए जू है यानी 2:47:10 चिड़ियाघर हैं उनको कंट्रोल करता है। उनका 2:47:12 विनियमन करता है। और यह वर्ल्ड एसोसिएशन 2:47:14 ऑफ़ ज एंड एक्वेरियम का एक सहयोगी सदस्य 2:47:17 हैं। तो ये जो जू है यानी चिड़ियाघर है ये 2:47:19 एक एक्स सी2 कंजर्वेशन का तरीका है। भले 2:47:22 ही यहां जानवरों की स्थिति बहुत अच्छी 2:47:24 नहीं होती है। जानवर भुखमरी के कगार पर और 2:47:26 बदहाल होते हैं। तो वह तो है ही है। लेकिन 2:47:30 उसके अलावा ये एक्स सी2 कंजर्वेशन का 2:47:32 तरीका है और एक्स सी2 कंजर्वेशन में ये 2:47:34 विसंगतियां आती हैं। अगर सही तरीके से 2:47:37 मैनेजमेंट ना किया जाए तो ये स्थितियां और 2:47:39 बिगड़ती है जो कि आमतौर पर ज्यादातर 2:47:40 चिड़ियाघरों में आप देखते हैं। शेर आपको 2:47:43 बिल्ली जैसा दिखाई देगा। भालू जो है वो 2:47:45 बकरी जैसा दिखाई देगा। मतलब उनका जो साइज 2:47:47 और उनका जो रुतबा है वही खत्म हो गया है। 2:47:50 ठीक है? तो श्री वेंकटेश्वर प्राणी उद्यान 2:47:53 जो है यह आंध्र प्रदेश के तिरुपति में 2:47:55 शेषांचलम की पहाड़ी की जो तलहटी है उस पर 2:47:57 स्थित है और क्षेत्रफल के लिहाज से यह 2:48:00 एशिया का सबसे बड़ा प्राणी उद्यान है। अब 2:48:03 आइए जरा भारत के चिड़ियाघरों की सूची देख 2:48:05 लेते हैं। मार्बल पैलेस डू कोलकाता का है। 2:48:08 वेस्ट बंगाल मैसूर चिड़ियाघर कर्नाटक। ठीक 2:48:11 है? महाराजा बाग चिड़ियाघर नागपुर 2:48:13 महाराष्ट्र। सयाजी वड़ोदरा गुजरात। नंदनवन 2:48:16 रायपुर छत्तीसगढ़। त्रिसूर केरल अलीपुर 2:48:20 कोलकाता पश्चिम बंगाल अमीरथी बेलौर 2:48:23 तमिलनाडु गोरेवाड़ा नागपुर महाराष्ट्र 2:48:26 गोपालपुर हिमाचल प्रदेश गुलाब बाग उदयपुर 2:48:30 मतलब राजस्थान डियर पार्क मिनीजू सलपुर का 2:48:33 है उड़ीसा का हिसार हरियाणा का हो गया ठीक 2:48:36 है इंदिरा गांधी राउरकेला उड़ीसा वैसे ही 2:48:39 इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान एक इंदिरा 2:48:41 गांधी पार्क है जो कि राउरकेला में है और 2:48:43 दूसरा इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान है जो 2:48:44 कि विशाखापटनम में है दोनों दो राज्य में 2:48:46 है ध्यान दीजिएगा इंदौर मध्य प्रदेश का 2:48:49 जयपुर जयपुर का मतलब ये नाम से ही है तो 2:48:52 पहचानना आसान है। जवाहर नेहरू यहां देखें 2:48:55 जवाहर जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान बोकारो 2:48:58 स्टील सिटी मतलब झारखंड का है। जीजा माता 2:49:01 मुंबई महाराष्ट्र काकती वारंगल तेलंगाना 2:49:04 कमला नेहरू प्राणी उद्यान कांकरिया 2:49:05 अहमदाबाद गुजरात कुरुक्षेत्र हरियाणा नवाब 2:49:08 वाजिद अली शाह लखनऊ उत्तर प्रदेश मद्रास 2:49:11 क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट चेन्नई तमिलनाडु 2:49:13 मैत्रीबाग भिलाई नगर छत्तीसगढ़ मांडा 2:49:16 जम्मू जम्मू सिटी जम्मू नागालैंड 2:49:20 चुमोकदिमा ये असल में जगह जो है ये 2:49:23 नागालैंड की है। नंदन कानन भुवनेश्वर 2:49:26 उड़ीसा राष्ट्रीय प्राणी उद्यान दिल्ली का 2:49:28 है और हैदराबाद का नेहरू प्राणी उद्यान है 2:49:30 तेलंगाना इसके बाद है पद्मजा नायडू 2:49:33 हिमालयन जियोलॉजिकल पार्क दार्जिलिंग 2:49:35 पश्चिम बंगाल परासिनी परासिनी कादबू स्नेक 2:49:39 पार्क ये सांपों का पार्क है कन्नूर में 2:49:41 है केरल में मोर और चिंकारा का प्रजनन 2:49:44 केंद्र ये रेवाड़ी हरियाणा में है पीलीकुआ 2:49:46 पीलीकुला कहा जाता है बेंगलुरु में है 2:49:48 कर्नाटक में तीतर प्रजनन केंद्र पंचकूला 2:49:50 में है एक मोरनीमी में भी है दोनों 2:49:52 पंचकूला में पड़ता है एक बेरवाला में है 2:49:54 एक मोरनी में है। ठीक है? दोनों हरियाणा 2:49:56 में है। इसके बाद जीवी पंत हाई एल्टीट्यूड 2:49:58 चिड़ियाघर ये नैनीताल में हो गया। राजीव 2:50:00 गांधी प्राणी उद्यान पुणे का है। 2:50:02 महाराष्ट्र का बिरसा जैविक उद्यान रांची 2:50:04 का है। झारखंड का बिरसा मुंडा के नाम पर। 2:50:06 ठीक वैसे ही रोहतक हरियाणा का है। 2:50:09 सक्करबाग आप देखेंगे जूनागढ़ का है यानी 2:50:11 गुजरात का। संजय गांधी जैविक पार्क पटना 2:50:14 का है। ठीक है? सरथाना सूरत का। 2:50:16 प्रद्युम्न राजकोट और सारनाथ वाराणसी का 2:50:20 है। इसके बाद सिपाही झोला। सिपाही जाला 2:50:24 असल में सिपाही झोला नहीं त्रिपुरा का है। 2:50:26 वेंकटेश्वर प्राणी उद्यान तिरुपति का है। 2:50:28 आंध्र प्रदेश का टाटा स्टील जूलॉजिकल 2:50:30 पार्क जमशेदपुर का है। तिरुवनंतपुरम 2:50:32 त्रिवेंद्रम का है। केरल का गिद्ध संरक्षण 2:50:34 प्रजनन केंद्र पिंजौर यानी हरियाणा का है। 2:50:37 इटावा सफारी पार्क उत्तर प्रदेश इटावा का 2:50:39 है। कानपुर प्राणी उद्यान उत्तर प्रदेश का 2:50:41 है। कानपुर पिंडारी माफ़ कीजिएगा। कानन 2:50:45 पिंडारी प्राणी उद्यान जो है ये बिलासपुर 2:50:47 का है। छत्तीसगढ़ का। सिद्धार्थ उद्यान ये 2:50:49 औरंगाबाद का है यानी महाराष्ट्र का 2:50:51 ग्वालियर मध्य प्रदेश अरिंगनार अन्ना 2:50:54 जलॉजिकल पार्क बंडालूर चेन्नई तमिलनाडु 2:50:56 असम चिड़ियाघर आप जानते हैं गुवाहाटी में 2:50:59 है यानी असम में है लोकेशन बनरघट्टा 2:51:01 बेंगलुरु में है बिरसा हिरण पार्क रांची 2:51:03 में है वैसे ही काला हिरणवाला पीपली में 2:51:05 है पीपली ये पीपली है असल में पीपली नहीं 2:51:08 है पीपली आपका बंगाल में चला जाएगा छतवीर 2:51:11 जो है यह महेंद्र चौधरी प्राणी उद्यान भी 2:51:13 कहा जाता है जीरकपुर पंजाब में है। चेन्नई 2:51:15 स्नेक पार्क आपका तमिलनाडु में है। 2:51:17 चिंकारा प्रजनन भिवानी हरियाणा में है। 2:51:19 वैसे ही मगरमच्छ प्रजनन के दो केंद्र आप 2:51:21 देख रहे हैं। एक कुरुक्षेत्र में है। 2:51:22 दूसरा मुंटा में है। कुरुक्षेत्र वाला 2:51:24 हरियाणा में है। मुंटा वाला रांची यानी 2:51:26 झारखंड में है। मगरमच्छ पुनर्वास और 2:51:28 अनुसंधान केंद्र ये त्रिवेंद्रम में पड़ता 2:51:30 है। मतलब एक ही प्रजाति के लिए अलग-अलग जो 2:51:33 केंद्र हैं उसमें कंफ्यूज होने की 2:51:34 आवश्यकता नहीं है। शहीद अशफाक उल्ला खान 2:51:36 प्राणी उद्यान गोरखपुर यानी यूपी में है। 2:51:40 यहां देखिए अब वन्य जीवों के संरक्षण से 2:51:42 संबंधित कुछ परियोजनाएं हैं। तो हंगुल 2:51:45 यानी कश्मीरी स्टक परियोजना जो है यह 1970 2:51:47 की है और इस परियोजना को आईयूसीए और 2:51:50 वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड फॉर नेचर इसके लिए 2:51:53 शुरू किया गया था। मतलब दोनों के सहयोग से 2:51:55 शुरू किया गया था। तो हंगुल जो है यह 2:51:57 कश्मीर राज्य का मतलब कश्मीर केंद्र शासित 2:51:59 प्रदेश का राजकीय पशु भी है और यह यूरोपीय 2:52:02 जो रेंडियर होता है ना जिस पर सेंथा क्लास 2:52:04 चढ़कर गिफ्ट लेकर आते हैं क्रिसमस में तो 2:52:06 उसी रेंडियर के परिवार का सदस्य है। ठंडे 2:52:09 इलाके में ये पाए जाते हैं और ये कश्मीर 2:52:12 पूछना ही नहीं है। तो कश्मीर स्थित 2:52:14 दाचीगाम उद्यान में भी ये पाया जाता है। 2:52:16 मतलब में ही ये पाया जाता है और कहीं नहीं 2:52:18 पाया जाता है। इसको कश्मीरी स्टैक भी कहा 2:52:20 जाता है। तो यह जो सा क्लास वाला हिरण है 2:52:24 मतलब रेंडियर है असल में यह पूरी तरह से 2:52:26 वो रेंडियर नहीं है लेकिन उसी की फैमिली 2:52:28 का है तो यह पाया जाता है आपके कश्मीर में 2:52:30 अब प्रोजेक्ट हंगुल को जम्मू कश्मीर की 2:52:32 गवर्नमेंट के द्वारा स्टार्ट किया गया था 2:52:34 1970 में एशियाई शेर के संरक्षण के लिए 2:52:37 गिर सिंह परियोजना है जो कि 1972 की ये 2:52:41 प्राकृतिक आवास है एशियाई शेरों का और 2:52:43 केंद्र सरकार के द्वारा इसको शुरू किया 2:52:45 गया था। इसके बाद प्रोजेक्ट टाइगर आपने 2:52:48 देखा ही था एनटीसीए संचालित कर रहा है 2:52:49 इसको 58 टाइगर रिजर्व है। 1 अप्रैल 1973 2:52:52 को जिम कार्बेट से शुरू किया गया था इसको 2:52:54 और इंदिरा गांधी के कार्यकाल में ये शुरू 2:52:56 हुआ कार्यक्रम कस्तूरी मृग परियोजना यहां 2:53:00 देख रहे हैं 1982 की है। केदारनाथ 2:53:02 अभयारण्य उत्तराखंड का जो है वहां पर ये 2:53:04 डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सपोर्ट से स्टार्ट की 2:53:06 जाती है। और ये जो कस्तूरी मृग यानी मस्क 2:53:09 टियर होते हैं ये असल में चंपाघाटी का जो 2:53:11 एरिया है वहां से लेकर सिक्किम तक पाए 2:53:13 जाते हैं। इनकी नाभि में कस्तूरी नाम का 2:53:15 एक रासायनिक पदार्थ होता है जो कि बहुत 2:53:17 तेज महक वाला होता है और उसके बहुत सारे 2:53:19 गुण होते हैं। औषधीय गुण होते हैं। 2:53:21 घड़ियाल प्रजनन परियोजना ये भारत सरकार के 2:53:25 संयुक्त मतलब भारत सरकार का अकेला काम 2:53:27 नहीं है। इसमें संयुक्त राष्ट्र विकास 2:53:28 कार्यक्रम यानी यूएनडीपी जो है वो सपोर्ट 2:53:31 कर रहा है। तो उड़ीसा में इस प्रोजेक्ट को 2:53:32 स्टार्ट किया गया था 1975 में और इसी 2:53:35 योजना का विस्तार फिर कुकरल में आप देखते 2:53:37 हैं यानी लखनऊ में। ना सिर्फ लखनऊ में 2:53:40 बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, अंडमान, 2:53:41 निकोबार, असम, बिहार, नागालैंड में भी 2:53:44 इसका विस्तार दिखाई देता है। इसके बाद 2:53:46 थामिन मृग परियोजना थामिन को ही संघाई 2:53:48 डियर या फिर डांसिंग डियर कहा जाता है 2:53:50 जिसके बारे में अभी पीछे चर्चा हुई थी। और 2:53:53 यह जो डांसिंग डियर है, यह पाया जाता है 2:53:55 कि लमजाओ नेशनल पार्क में। दुनिया का 2:53:58 एकमात्र तैरता हुआ यह नेशनल पार्क है और 2:54:00 यह मणिपुर का राजकीय पशु है। ऐसा नहीं है 2:54:03 कि इन तैरती हुई घास की जो गद्दियां हैं, 2:54:05 जमीनें हैं जिनको कि फुंडी कहा जाता है। 2:54:07 इन पर सिर्फ हिरण ही रहता है। इस पर लोग 2:54:10 भी रहते हैं। मतलब आबादी भी रहा करती है। 2:54:13 कुल मिलाकर ये एक झील है बड़ी सी और ये 2:54:16 इसी प्रकार की जो फुंडी आइलैंड्स हैं 2:54:18 उन्हीं पर आबादियां रहती है और पूरी बिखरी 2:54:20 हुई और ये ब्रह्मपुत्र का बेसिकली पानी। 2:54:23 तो ये 1977 का है। ठीक है? उसके बाद गैडा 2:54:26 परियोजना है। 1987 की है। एक सींग वाला 2:54:28 गैडा ध्यान दीजिएगा इस समय सिर्फ भारत में 2:54:31 पाया जाता है। एक समय था कि ये पूरा तराई, 2:54:33 नेपाल और चारों तरफ फैला हुआ था। एशिया के 2:54:35 अलग-अलग हिस्सों में पाया जाता था। लेकिन 2:54:37 अब सिर्फ ये भारत में पाया जाता है। और 2:54:39 उसमें भी असम का मानस अभयारण, काजीरंगा और 2:54:42 पश्चिम बंगाल का जलदापाड़ा यही मुख्य शरण 2:54:44 स्थली है। अगर इसको नष्ट कर दिया जाए तो 2:54:47 गैंडे खत्म हो जाएंगे। तो इनके सींग का 2:54:49 इस्तेमाल औषधि निर्माण के लिए होता है। 2:54:52 विदेशों में तो यहां तक नौबत आ गई है कि 2:54:54 गैडों के सींग रेतने पड़ते हैं। उनको 2:54:56 शिकार से बचाने के लिए जो दो सींग वाले 2:54:59 गैे होते हैं उनकी बात हो रही है। हाथी 2:55:01 परियोजना जो है ये प्रोजेक्ट एलीिफेंट के 2:55:03 रूप में आपने एक सिक्के पर गौर किया है। 2:55:05 ये चवन्नी होती थी। पहले 25 पैसे का 2:55:07 सिक्का आता था। तो एक साइड में तो 25 पैसे 2:55:10 लिखा होता था। दूसरे साइड में गैंडा बना 2:55:13 होता था। एक सींग वाला गैंडा। ऐसे एक सींग 2:55:15 होती थी और ये गैंडा होता था। ठीक है? तो 2:55:18 यह जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसा किया जाता 2:55:21 है कई बार। उस समय यह जो गैंडा परियोजना 2:55:23 है यह उसी समय स्टार्ट की गई थी और उसी 2:55:25 समय की वो चवन्नी है 25 पैसा उसप तारीख भी 2:55:29 आप देखिएगा लगभग उसी समय की लांच की गई। 2:55:32 ठीक बात है। अब तो प्रचलन से भी बाहर हो 2:55:33 गई है। लेकिन जिसके पास पुराने सिक्के 2:55:35 पड़े होंगे तो आप देखेंगे उठाकर ना तो उस 2:55:37 पर गैंडा बना हुआ है। ये गैंडा परियोजना 2:55:38 का ही द्योतक। तो ये देखा आपने। इसके बाद 2:55:41 हाथी प्रोजेक्ट को अभी जस्ट आप देख ही करा 2:55:43 रहे हैं। प्रोजेक्ट एलीिफेंट ये सिंभूम 2:55:45 जिले से स्टार्ट किया गया था। 1992 में 2:55:47 रेड पांडा प्रोजेक्ट ये वर्ल्ड वाइल्ड 2:55:49 लाइफफ़ फंड फॉर नेचर के सहयोग से जो पद्मजा 2:55:52 नायडू हिमा हिमालयन जियोलॉजिकल पार्क है 2:55:54 दार्जिलिंग का वहां से शुरू किया गया था। 2:55:56 सिक्किम का ध्यान दीजिएगा कि ये जो रेड 2:55:58 पांडा है ये राजकीय पशु है और ये पाया 2:56:01 जाता है पूर्वी हिमालय के पतझड़ी जंगलों 2:56:04 में जो पर्णपाती जंगल होते हैं जिनकी 2:56:06 पत्तियां झड़ती रहती हैं वहां पर पाया 2:56:08 जाता है। गंगा डॉल्फिन गंगेटिक डॉल्फिन के 2:56:11 लिए जो कंजर्वेशन प्रोग्राम चल रहा है वो 2:56:13 1997 का है। इसको सू भी कहा जाता है। ये 2:56:16 सिर्फ मीठे पानी में यानी फ्रेश वाटर में 2:56:18 रहती है और इसको 2009 5 अक्टूबर की जो 2:56:21 तारीख है ये बार-बार पूछा गया है। तो 5 2:56:23 अक्टूबर की तारीख में राष्ट्रीय जलीय जीव 2:56:25 घोषित किया गया। यह जन्म से अंधी होती है 2:56:27 मतलब आंख की संरचना तो होती है लेकिन 2:56:29 आंखें विकसित नहीं होती। विक्रमशिला गंगा 2:56:31 डॉल्फिन अभयारण्य जो है ये बिहार में है 2:56:33 और बिहार की जो गंगा का एरिया है वहां पर 2:56:35 डॉल्फिन की संख्या में एक अच्छी खासी 2:56:37 वृद्धि भी देखी गई। तो यह भी अनुसूची एक 2:56:39 में है। ध्यान दीजिएगा जो वाइल्ड लाइफ 2:56:41 प्रोटेक्शन एक्ट है उसके अंतर्गत कछुआ 2:56:43 संरक्षण वही ऑलिव रिडले के लिए है। 2:56:45 यूएनडीपी के द्वारा यह समर्थित है और 1999 2:56:47 का है। लेकिन उसके बावजूद कछुओं की तादाद 2:56:49 में लगातार कमी आ रही है। ना सिर्फ ऑलिव 2:56:51 रिडले बल्कि पूरे दुनिया भर के जो कछुए 2:56:54 हैं वो संकट में है। माइक कार्यक्रम 2:56:56 हाथियों के अवैध तस्करी और उनके अवैध 2:56:58 शिकार को रोकने के लिए है। 10 प्रमुख 2:57:01 स्थान इसमें चिन्हित किए गए हैं। तो माइक 2:57:02 स्थलों को आपको याद रखना चाहिए। वैसे ये 2:57:04 2003 का प्रोजेक्ट है। कौन-कौन से स्थान 2:57:07 है? ये पूछा जाता है तो चिरांग रिपु है 2:57:09 असम का दिहांग पटकई है असम का ईस्टर्न 2:57:12 द्वार है मतलब ईस्टर्न द्वार यानी पूर्वी 2:57:15 द्वार है इतना अंग्रेजी बोलने की जरूरत 2:57:16 नहीं है पश्चिम बंगाल का मयूर झरना पश्चिम 2:57:19 बंगाल का गारो हिल मेघालय का देवमाली मतलब 2:57:22 भाई जो हिंदी में है उसको हिंदी में ही 2:57:24 बोलो ना देवमाली जो है ये अरुणाचल का है 2:57:26 शिवालिक उत्तराखंड का है नीलगिरी है 2:57:28 तमिलनाडु का वेयनद है या बमबानद ये केरल 2:57:31 का है और मैसूर जो है ये कर्नाटक का ये 2:57:33 माइक एरिया है माइक स्थल है जो कि हाथियों 2:57:35 के लिए प्रोटेक्टेड 2:57:37 इसके बाद राइनो विज़न जिसको कि आईआरबी कहा 2:57:40 जाता है। इंडियन राइनो विज़न 2020 2005 में 2:57:44 इसको शुरू किया गया था। 2020 तक का लक्ष्य 2:57:46 रखा गया था कि असम के सात जो प्रोटेक्टेड 2:57:48 एरिया है संरक्षित क्षेत्र है वहां गैडो 2:57:51 की आबादी को 3000 तक पहुंचाना। इसमें 2:57:54 डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का सपोर्ट था। मतलब 2:57:55 डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की जो इंडियन ब्रांच है 2:57:57 उसका सहयोग था। बाकी असम सरकार और कई सारी 2:57:59 संस्थाएं इसमें मिलकर काम कर रही थी। 2:58:02 हालांकि प्रोजेक्ट अपने लक्ष्य को नहीं 2:58:03 प्राप्त कर पाया। गिद्ध संरक्षण परियोजना 2:58:06 का जो शुरुआती इतिहास है वो काफी दर्दनाक 2:58:09 है। गिद्ध एक समय था कि मवेशी मरे नहीं कि 2:58:11 पूरा इतनी तादाद में इकट्ठे हो जाते थे कि 2:58:13 लोगों को वहां भगाना पड़ता था। या तो शव 2:58:16 को हटा दो और नहीं तो गिद्धों को भगाओ 2:58:17 उसकी एक ड्यूटी लग जाती थी। मकान की छतें 2:58:20 जो है वो गिद्धों से और चीलों से ढक जाती 2:58:22 थी। ठीक है? और एक समय ऐसा आया कि इन्हें 2:58:26 मतलब खोजना पड़ता था देखने के लिए। ऐसे 2:58:28 दिखाई ही नहीं देते थे। कोई मवेशी मरता था 2:58:31 या कोई चीज मरती थी तो कौवे इकट्ठे हो 2:58:33 जाए, कुत्ते इकट्ठे हो जाए लेकिन गिद्ध 2:58:35 नहीं दिखाई देते थे। तो फिर जब जांच 2:58:37 पड़ताल शुरू हुई तो मालूम हुआ कि जो जानवर 2:58:39 मर रहे थे उन्हीं से ये भी मरने शुरू हो 2:58:41 गए। उन जानवरों को मरते समय अंतिम समय की 2:58:43 पीड़ा को घटाने के लिए या इलाज के लिए 2:58:45 हमने दर्द की दवाएं दी। दर्द के इंजेक्शन 2:58:48 दिए। अब दर्द निवारक दवाएं आमतौर पर या तो 2:58:51 डाइक्लोरोफिनेक या फिर एस एस क्लोरोफिनेक 2:58:54 इसी तरह की होती है दर्द निवारक जो आप 2:58:56 दर्द की सामान्य दवाएं खाते हैं रिलीफ 2:58:58 इत्यादि तमाम नाम से आती है तो उसमें डाई 2:59:00 क्लोरोफिने आम तौर पर मिला होता है ना तो 2:59:03 ये जानलेवा हो गया इन गिद्धों के लिए इनकी 2:59:05 किडनी लिवर कुल फेल हो जाता था मतलब इनके 2:59:07 जो आंतरिक अंग है वो काम करना बंद कर देते 2:59:10 थे और ये इनकी मृत्यु की बहुत तात्कालिक 2:59:12 वजह बनती थी ऐसा नहीं होता था कि बहुत समय 2:59:14 लग जाए बहुत जल्दी-जल्दी मरने लगे तो इनकी 2:59:17 आधी से अधिक आबादी तो साफ हो गई। जब आधी 2:59:19 से अधिक आबादी साफ हो गई तो उसके बाद 2:59:22 लोगों के कान खड़े हुए तो इनके संरक्षण का 2:59:24 उपाय शुरू किया गया। तो फिलहाल यह देखेंगे 2:59:25 आप कि पिंजौर हरियाणा का जो है ये देश में 2:59:27 पहला गिद्ध संरक्षण और प्रजनन केंद्र बनता 2:59:30 है 2006 में। 2:59:33 स्नो लेपर्ड वाला प्रोजेक्ट 2009 का है। 2:59:35 उच्च हिमालय राज्य जो है जैसे जम्मू 2:59:37 कश्मीर है, लद्दाख है ज्यादा ऊंचाई वाले। 2:59:38 हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल वहां 2:59:41 पर इसको शुरू किया गया। ग्रेट इंडियन 2:59:43 बस्टर्ड राजस्थान सरकार के द्वारा 2013 2:59:46 में स्टार्ट किया गया। इसका जो आवास है ये 2:59:48 रेगिस्तान ही है। राजस्थान का रेगिस्तान 2:59:51 और ये राजस्थान का राजकीय पक्षी है। इसको 2:59:53 वहां पर गोडावड़ कहा जाता है। इसके बाद 2:59:56 सिक्योर हिमालयन प्रोजेक्ट ये हिमालय की 2:59:58 सुरक्षा के लिए हिमालय के पारिस्थितिकी 2:59:59 तंत्र की सुरक्षा के लिए बेसिकली और साथ 3:00:02 ही साथ हिम तेुए के संरक्षण के लिए 3:00:04 स्टार्ट किया गया था। असल में ये वैश्विक 3:00:06 पर्यावरण सुविधा यानी जो जीएफ है यूएनडीपी 3:00:09 का प्रोग्राम और भारत सरकार की मिलीजुली 3:00:11 परियोजना थी। 3:00:13 तो इसमें हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर 3:00:15 जिसमें कि लद्दाख भी शामिल है। समय 2017 3:00:17 का है ना तो इसमें लद्दाख भी शामिल है और 3:00:20 सिक्किम राज्य वहां पर इसे संचालित किया 3:00:22 गया। प्रोजेक्ट डॉल्फिन आप समझ ही रहे हैं 3:00:24 2020 का है 15 अगस्त। 10 साल की परियोजना 3:00:26 नदी और समुद्री दोनों प्रकार की जो 3:00:28 डॉल्फिन है उनका संरक्षण करना इसका मूल 3:00:30 उद्देश्य। इसके बाद है प्रोजेक्ट लायन। 3:00:33 अगस्त 2020 एशियाई शेरों के संरक्षण के 3:00:35 लिए इस पहल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल 3:00:37 और शेरों को गिर के अलावा बर्दा वन्य जीव 3:00:40 अभयारण्य जो गुजरात का है वहां बसाने की 3:00:41 योजना भी इसमें शामिल है। हालांकि ये काफी 3:00:43 चैलेंजिंग है। प्रोजेक्ट चीता क्यों 3:00:47 चैलेंजिंग है उसका नमूना आप इधर देख 3:00:49 लीजिए। प्रोजेक्ट चीता 17 सितंबर 2022 3:00:52 दुनिया का पहला अंतर महाद्वीपीय चीता 3:00:54 स्थानांतरण प्रोजेक्ट है। नामीबिया और 3:00:56 साउथ अफ्रीका के अलग-अलग हिस्सों से चीतों 3:00:58 को ले आकर कूनो नेशनल पार्क जो मध्य 3:01:00 प्रदेश का है वहां बसाया गया और उसमें से 3:01:03 लगातार चीतों के मरने की खबरें आती हैं कि 3:01:05 अब ये चीता मर गया वो चीता मर गया। मतलब 3:01:07 नाम रखा गया यहां पे गामिनी और तमाम बच्चे 3:01:10 जो श्रावक पैदा हुए उसमें से भी ज्यादातर 3:01:12 सर्वाइव नहीं कर पाए। हालांकि कुछ जिंदा 3:01:14 रहे। तो यह होता है जब जगह बदली जाती है 3:01:17 ना हैबिटेट बदला जाता है माहौल बदलता है 3:01:20 तो जानवर सर्वाइव नहीं कर पाते हैं। 3:01:22 प्रोजेक्ट लाइन में बस गनीमत इतनी है कि 3:01:24 गुजरात से निकालकर गुजरात में ही बसाने की 3:01:26 बात हो रही है। कोई महाद्वीप नहीं बदला जा 3:01:28 रहा है। तो ऐसी स्थिति में सर्वाइव करने 3:01:30 की संभावना तो है लेकिन जो जगह इनके लिए 3:01:32 तय की गई है बर्दा वहां पे चैलेंजेस नहीं 3:01:35 होंगे इसकी क्या गारंटी है? है ना? शेर 3:01:38 जहां रहते हैं वहां उनका अपना एक इलाका 3:01:40 होता है। अपनी एक टेरिटरी होती है और वो 3:01:42 लंबे समय से उसमें सेट हो गए रहते हैं और 3:01:44 बाकी लोगों को बाकी प्रजातियों को भी उनकी 3:01:46 आदत पड़ गई रहती है। और जहां नए इलाके में 3:01:49 उनको छोड़ा जाता है वहां उनकी स्थिति बहुत 3:01:51 गड़बड़ हो जाती है। मतलब ये टेरिटरी को 3:01:53 पूरी तरह से प्रोटेक्ट करने वाले प्राणी 3:01:55 होते हैं। और इसका छोटा नमूना आप अपने गली 3:01:58 मोहल्ले के कुत्तों को देखकर कर सकते हैं। 3:02:00 ठीक है? जैसे कुत्ते अपने इलाके को लेकर 3:02:02 बड़े ससत होते हैं। मतलब उनके इलाके में 3:02:04 अगर कोई दूसरा सदस्य बाहर ही घुस गया तो 3:02:07 उसको खदेड़ेंगे जब तक नहीं तब तक शांति 3:02:09 नहीं होते हैं। तो शेरों के मामले में वो 3:02:10 स्थिति और हिंसक होती है। तो आपसी लड़ाई 3:02:13 और मनुष्यों के साथ इनके टकराव की 3:02:15 संभावनाएं बढ़ जाएंगी। ऐसी स्थिति में 3:02:17 थोड़ा सचेत होकर करने की जरूरत है। तो 3:02:18 प्रोजेक्ट चीता का आप देख रहे हैं 29 चीते 3:02:20 भारत लाए गए बोत्सवाना से। और ये 3:02:23 नामीबिया, साउथ अफ्रीका और बोत्सवाना से 3:02:25 कुल मिलाकर 29 लाए गए। कहां से कितने लाए 3:02:27 गए वो नहीं पूछा जाएगा। टोटल कितने लाए गए 3:02:30 वो ध्यान दीजिएगा। इसके बाद प्रोजेक्ट 3:02:32 नीलगिरी ताहर को देख रहे हैं। यह देखिए 3:02:34 2023 तमिलनाडु सरकार की यह परियोजना है। 3:02:37 नीलगिरी ताहर जो है ये तमिलनाडु का राजकीय 3:02:39 पशु है। पश्चिमी घाट का जो एव्विकुलम 3:02:41 नेशनल पार्क है वहां ये पाया जाता है। 3:02:43 इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस आईबीसीए 2023 की 3:02:47 है और प्रोजेक्ट टाइगर की जो 50वीं 3:02:49 वर्षगांठ है उसके मौके पर भारत के नेतृत्व 3:02:51 में इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस को स्टार्ट 3:02:54 किया गया था। सात बड़ी बिल्लियां जो पूरी 3:02:56 दुनिया में पाई जाती हैं। यह सात बड़ी 3:02:58 बिल्लियां कौन सी हैं? तो बाघ है इसमें। 3:03:00 शेर भी उसी में शामिल है। तेुआ है, हिम 3:03:02 तेुआ है, प्यूमा है, जगुआ है और चीता है। 3:03:05 जैगुआर भी इसी में शामिल है। ठीक है? बड़ा 3:03:07 शक्तिशाली होता है। तो ये सारे जो है ये 3:03:10 इनके संरक्षण के लिए काम किया जाएगा। और 3:03:12 इन सारी बड़ी बिल्लियों में जो चीता है यह 3:03:15 एकमात्र है जो कि म्याऊ म्याऊ करता है। 3:03:17 बाकी जितने हैं वह म्याऊ नहीं बोलते हैं। 3:03:19 बिल्लियां तो है लेकिन उनके बच्चे म्याऊ 3:03:21 बोलते हैं। वो बड़ी बिल्लियां दहाड़ती 3:03:22 हैं। तो इनका मुख्यालय है भारत में। इस 3:03:26 अलायंस का जो मुख्यालय है ये भारत में है। 3:03:28 दुनिया के लगभग 97 ऐसे देश जहां की इन सात 3:03:31 बड़ी बिल्लियों में से कोई ना कोई प्रजाति 3:03:33 प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। वह सब 3:03:35 इसमें सदस्य बन सकते है। ठीक है? आगे चलते 3:03:37 है। प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट 3:03:40 का आपस में विलय कर दिया गया। यह काम 3:03:41 देखें क्योंकि आप देखते हैं कि जहां भी 3:03:44 बाघ पाए जाते हैं उसके आसपास हाथी भी पाए 3:03:46 जाते हैं। आपने बहुत बार देखा होगा कि जो 3:03:48 बाघ सफारी होती है मतलब टाइगर प्रोटेक्टेड 3:03:51 एरिया होते हैं वहां जब टूरिस्ट टाइगर 3:03:53 देखने जाते हैं तो हाथी पर चढ़कर जाते 3:03:55 हैं। है ना? तो वो हाथी जो है वो आसपास ही 3:03:58 पाए जाते हैं और इनका सह अस्तित्व होता 3:04:00 है। दोनों में आपस में टकराव कभी नहीं 3:04:02 होता है। तो इसीलिए पर्यावरण मंत्रालय ने 3:04:05 हालांकि इसकी कुछ खामियां भी है। सब 3:04:07 अच्छाइयां ही नहीं है। लेकिन फिर भी 3:04:08 प्रशासनिक दक्षता बनाने के लिए और फंड को 3:04:11 बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए 2023 3:04:14 के जून महीने में दोनों परियोजनाओं का 3:04:16 विलय कर दिया और बना दिया प्रोजेक्ट टाइगर 3:04:19 एंड एलीिफेंट। एक नया प्रभाग तैयार हो 3:04:21 गया। सारे खर्चे हो रहे हैं। बहुत जगह 3:04:24 दुरुपयोग और अपव्यय हो रहा है और उसके बाद 3:04:26 यहां पर आकर पैसे का पैसे की किल्लत हो जा 3:04:29 रही है और फंड को बेहतर बनाने की जरूरत 3:04:31 पड़ जा रही है। खैर छोड़िए। तो यहां देखिए 3:04:33 आप प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीिफेंट 3:04:35 जो है एक नया प्रभाग बना दिया गया। अब 3:04:37 दोनों प्रोजेक्ट एक साथ मिलकर काम करेंगे। 3:04:39 यह तो सही है कि दोनों का अपना एक मतलब 3:04:41 साझा एरिया होता है। हैबिटेट में दोनों 3:04:43 दिखाई दे सकते हैं और देते भी हैं। 3:04:46 राष्ट्रीय समुद्री कछुआ कार्य योजना को आप 3:04:49 देखेंगे तो जो भारत की तट रेखा है उसके 3:04:51 साथ समुद्री कछुओं और उनके प्राकृतिक 3:04:53 आवासों के संरक्षण के लिए एक समन्वित 3:04:55 ढांचा प्रदान करना है। 2021 में इसको 3:04:57 स्टार्ट किया गया था। 2021 का ये 3:04:59 प्रोजेक्ट है। अब आ जाइए जैव विविधता 3:05:02 हॉटस्पॉट की ओर। बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट 3:05:05 जो है यह प्रकृति के ऐसे अनूठे क्षेत्र 3:05:07 हैं जहां प्रजातियों की अत्याधिक विविधता 3:05:09 और जो लोकल प्रजातियां हैं वह वहां पर पाई 3:05:12 जाती हैं। मतलब लोकल प्रजातियों से 3:05:14 तात्पर्य ऐसी प्रजातियां प्रजातियों से है 3:05:16 जो सिर्फ वहीं पाई जाती हैं जो सिर्फ वहीं 3:05:19 पाई जाती है और कहीं नहीं पाई जाती है। और 3:05:22 सिर्फ वहीं पाई जाती है तो निश्चित तौर पर 3:05:24 उनकी संख्या सीमित होगी। जहां भी पाई 3:05:26 जाएंगी गट्ठे वहीं मौजूद है और मनुष्य की 3:05:28 गतिविधियां कुछ ऐसी हुई है कि अब उनके ऊपर 3:05:30 गंभीर खतरा मंडरा रहा है। तो ऐसी 3:05:32 प्रजातियां जो हैं ये उस क्षेत्र को एक 3:05:36 संवेदनशील क्षेत्र बना देती है और ऐसा 3:05:38 क्षेत्र जहां की इस तरह की संकटग्रस्त 3:05:40 प्रजातियों की तादाद पाई जाती है उन्हीं 3:05:42 को हॉटस्पॉट के तौर पर घोषित किया जाता 3:05:44 है। लेकिन हां ये एक बात है कि 3:05:46 बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट घोषित करने के जो 3:05:48 नियम है वो बड़े कड़े हैं। नियम कुछ इस 3:05:52 प्रकार से हैं। जैसे आप देखें कि किसी 3:05:53 क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए उस 3:05:55 क्षेत्र में कम से कम 1500 स्थानिक 3:05:58 इंडेमिक संवहनी पौधे होने चाहिए। मतलब 3:06:00 संवहनी पौधों की स्थानिक प्रजातियां होनी 3:06:03 चाहिए। और उस क्षेत्र ने अपनी मूल 3:06:05 प्राकृतिक वनस्पति का कम से कम 70% हिस्सा 3:06:08 खो दिया हो। दूसरे शब्दों में इसी को समझे 3:06:11 तो मतलब सिर्फ 30% हिस्सा उस वनस्पति 3:06:14 प्रजाति का बचा हुआ जो कि वहां पर 3:06:15 इंडेंजर्ड है और वर्तमान में इसी वजह से 3:06:19 क्योंकि सख्त यहां पर कायदे हैं मानदंड है 3:06:21 तो इस वजह से 36 क्षेत्र ही हॉटस्पॉट के 3:06:23 रूप में पहचाने गए हैं और उसमें से भी आप 3:06:25 देखिए चार हॉटस्पॉट क्षेत्र जो है वो भारत 3:06:27 में है। तो दुनिया भर में 36 क्षेत्र 3:06:30 हॉटस्पॉट पृथ्वी भूमि की सतह का मात्र 3:06:32 सिर्फ 2.5% कवर करते हैं। लेकिन ये दुनिया 3:06:34 की आधी से ज्यादा पौधे की प्रजातियां ऐसी 3:06:37 प्रजातियां जो कि कहीं और नहीं पाई जाती 3:06:39 हैं और लगभग 43% पक्षी स्तनधारी सरिसप और 3:06:43 उभयचरों की प्रजातियों का समर्थन करते 3:06:45 हैं। पूर्वी हिमालय भारत के संदर्भ में 3:06:47 बात कर रहे हैं। पूर्वी हिमालय जो कि मूल 3:06:49 रूप से भारत बर्मा जैव विविधता हॉट 3:06:51 हॉटस्पॉट का हिस्सा था। इसमें भूटान उत्तर 3:06:53 पूर्वी भारत दक्षिणी और मध्य पूर्वी नेपाल 3:06:56 भी शामिल। 2004 में एक हॉटस्पॉट पुन 3:06:59 मूल्यांकन होता है और दो हॉटस्पॉट हिस्से 3:07:01 के रूप में इसका वर्गीकरण होता है। एक तो 3:07:03 इंडोवर्मा और दूसरा नव प्रतिष्ठित हिमालय। 3:07:06 दूसरा नव प्रतिष्ठित हिमालय। 3:07:09 ठीक है? जैव विविधता शब्द का सबसे पहली 3:07:12 बार प्रयोग ऑर्थर हरिस के द्वारा किया गया 3:07:14 था। 1916 में। ये अमेरिकी बॉटनी के 3:07:18 एक्सपर्ट थे। इसके बाद बायोडायवर्सिटी 3:07:20 शब्द को सबसे पहले वाल्टर जी रोजन के 3:07:22 द्वारा गढ़ा गया था। जैविक विविधता शब्द 3:07:25 का इस्तेमाल असल में ऑर्थर हरिस ने किया 3:07:27 था। और जैव विविधता शब्द यानी 3:07:30 बायोडायवर्सिटी प्रॉपर नाम देने वाले जो 3:07:32 व्यक्ति हैं वह वाल्टर जी रोजे हैं। तो 3:07:33 कंफ्यूज मत होइएगा दोनों में। और प्रसिद्ध 3:07:36 अमेरिकी जीव वैज्ञानिक थे इनका नाम है 3:07:38 एडवर्ड ओसबोर्न। ओसबोर्न विल्सन इनको कहा 3:07:41 जाता है। तो ये दुनिया के स्तर पर जैव 3:07:43 विविधता के जनक माने जाते हैं। और जैव 3:07:45 विविधता को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों 3:07:46 में बांटा गया है। अनुवांशिक, प्रजाति और 3:07:49 पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता। जैविक 3:07:52 विविधता हॉटस्पॉट की अवधारणा 1988 में 3:07:55 नॉर्मन मायर्स के द्वारा विकसित की गई थी। 3:07:58 नॉर्मन मायर्स के द्वारा विकसित की गई थी। 3:08:00 तो यहां पर आप देख रहे हैं कि भारत में 3:08:03 चार जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं टोटल। अभी 3:08:05 पीछे हमने उनकी चर्चा की है। तो यहां देख 3:08:06 लेंगे कि उनका विस्तार कहां पर है। कौन से 3:08:08 जीव और कौन सी वनस्पतियां पाई जाती है। 3:08:10 मतलब कोरा और पौना। तो हिमालय में संपूर्ण 3:08:13 हिमालय क्षेत्र आता है। संपूर्ण जो भारतीय 3:08:16 हिमालय क्षेत्र है वो पूरा हॉटस्पॉट है। 3:08:18 जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, 3:08:21 सिक्किम, अरुणाचल मतलब पूरा का पूरा 3:08:23 हिमालय और जो जीव पाए जाते हैं उसमें रेड 3:08:25 पांडा, हिमते, कस्तूरी मृग, हिमालय ताहर 3:08:28 नीलगिरी ताहर ही सिर्फ नहीं होता है। 3:08:30 हिमालय में भी ताहर पाया जाता है। तो ये 3:08:32 सब जो है ये जीव-जंतु हैं। इसके अलावा 3:08:35 रोडो डेंड्रॉन, 3:08:38 जूनपर, ब्लू पाइन, ओक यह सारे वृक्ष हैं। 3:08:42 पश्चिमी घाट और श्रीलंका वाला सह्याद्री 3:08:44 पर्वत श्रृंखला महाराष्ट्र, गोवा, 3:08:46 कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल इसमें कवर होते 3:08:48 हैं। इसमें सिंह पुच्छी मकाक है, लायन 3:08:50 टेल्ड मकाक, नीलगिरी ताहर है, नीलगिरी 3:08:52 लंगूर है, मालाबार लार्ज स्पॉटेड सीवेट 3:08:55 है। ठीक है? ये सब जीव पाए जाते हैं। 3:08:58 वनस्पतियों में नीलगिरी, स्ट्रॉबिलेंथस 3:09:00 है। ये कुंजी फूल कहा जाता है। सागोन है, 3:09:02 शीशम है, विभिन्न प्रकार के आर्किड हैं। 3:09:04 ये सब यहां पाए जाते हैं। इंडोबर्मा वाला 3:09:07 रीजन देख लेते हैं। अंडमान द्वीप समूह 3:09:09 इसमें आएगा और पूर्वोत्तर भारत आएगा। 3:09:10 ब्रह्मपुत्र के दक्षिण वाला इलाका। एशियन 3:09:13 एलीिफेंट, गिबन, लीफ डियर और कई प्रकार के 3:09:16 दुर्लभ कछुए। यह सब यहां के जीव हैं और 3:09:18 बड़े-बड़े बांस के पौधे जो कि सिर्फ वही 3:09:21 पाए जाते हैं। बांस के पौधे तो वैसे भारत 3:09:23 भर में मिलते हैं लेकिन यहां के अलग हैं 3:09:25 और उष्णकटिबंधीय सदाबहार वृक्ष जो कि यहीं 3:09:27 पर पाए जाते हैं। मतलब वृक्षों की जो 3:09:30 उष्णकटिबंधीय सदाबहार प्रजाति है ये वाली 3:09:33 वो सिर्फ यहीं मिलती है और कहीं नहीं। 3:09:34 उष्णकटिबंधीय वन तो कई जगहों पर मिलते 3:09:37 हैं। सुंडालैंड आप देखेंगे तो निकोबार 3:09:39 समूह को कवर करता है। दक्षिण पूर्व एशिया 3:09:41 का एक बड़ा हिस्सा। यहां साल्ट वाटर, 3:09:43 क्रोकोडाइल, डगोंग, समुद्री गाय, समुद्री 3:09:45 कछुए और मेगापोड नाम का एक पक्षी होता है 3:09:47 जो कि निकोबार आइलैंड में पाया जाता है। 3:09:49 वो यहां मौजूद है। नारियल के बड़े-बड़े 3:09:52 वृक्ष मैंग्रोव की प्रजातियां समुद्री घास 3:09:54 ये सब यहां के लिए खास। तो जैव विविधता 3:09:57 हॉटस्पॉट की जो अवधारणा है इसको एक समुद्र 3:09:59 विज्ञानी ने विकसित किया था। इनका नाम है 3:10:01 सिलविया अर्ल। सिलविया अर्ल। ठीक है? ये 3:10:05 ऐसे क्षेत्र हैं जो कि महासागरों के 3:10:07 स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा समुद्र के 3:10:09 क्षेत्र में अगर देखा जाए ये होप स्पॉट 3:10:11 है। हॉटस्पॉट नहीं है। थोड़ा सा शुरुआत 3:10:13 में जब हेडिंग पढ़ी गई ना तो बोलने में 3:10:15 मिस्टेक हुआ क्योंकि हॉटस्पॉट पढ़ते चले आ 3:10:17 रहे थे। हॉटस्पॉट तो है ही है। वो अलग चीज 3:10:19 है। यहां पर ये है होप स्पॉट। 3:10:23 यानी आशा के केंद्र जिनसे कि पर्यावरण की 3:10:26 उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। तो सिलविया अर् 3:10:28 के द्वारा इस अवधारणा को विकसित किया गया। 3:10:31 यह कासेप्ट है समुद्र के ऐसे इलाके जो कि 3:10:34 महासागरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को 3:10:36 मेंटेन करके रखते हैं और उसके लिए अत्यंत 3:10:39 महत्वपूर्ण है बल्कि अनिवार्य हैं। उनको 3:10:41 हम कहते हैं होप स्पॉट। तो मिशन ब्लू इसके 3:10:44 लिए चलाया गया दुनिया भर के स्तर पर और 3:10:46 170 से भी ज्यादा होप स्पॉट घोषित किए जा 3:10:49 चुके हैं। भारत के पास दो हैं। एक तो है 3:10:51 अंडमान निकोबार और दूसरा है लक्षद्वीप। 3:10:54 मतलब पूरा हिंद महासागर का एरिया जिसमें 3:10:56 कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह की जो कोरल 3:10:58 रीफ है ये सब सबसे सबसे जो समृद्ध समुद्री 3:11:01 प्रजातियां और क्षेत्र हैं उसके तौर पर 3:11:03 देखी जाती है और डगांग नाम की जो समुद्री 3:11:05 गाय पाई जाती है समुद्री कछुए पाए जाते 3:11:07 हैं विशालकाय क्लैंप पाए जाते हैं ये सब 3:11:10 यहां के खास लक्षद्वीप समूह की भी जो एटाल 3:11:13 प्रकार की प्रवाल भित्ति है कोरल रीफ है 3:11:15 जो कि पूरे द्वीप को ऐसे घेर कर गोल आकार 3:11:18 में पूरी फैली होती है मतलब घोड़े की नाल 3:11:21 के आकार में और ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र 3:11:23 के बढ़ते तापमान की वजह से यहां की जो 3:11:25 कोरल रिप है वो पूरी तरह से ब्लीचिंग के 3:11:26 खतरे में शामिल हो गई है। रंग उड़ता जा 3:11:28 रहा है। प्रवाल विरंजन यहां पर हो रहा है। 3:11:30 है ना? कोरल ब्लीचिंग हो रही है। तो ये 3:11:32 खतरे में है। तो ये सब जो है ये होप स्पॉट 3:11:34 है। भारत के संदर्भ में। दुनिया भर का 3:11:36 देखने की जरूरत नहीं है। अब घास के 3:11:38 मैदानों को देखते हैं। तो कहां पर घास के 3:11:40 मैदान को क्या कहते हैं? ये ज्योग्राफी का 3:11:42 भी टॉपिक है। यहां साझा हो गया है। 3:11:44 चारागाह पारिस्थितिकी तंत्र जो आपने पीछे 3:11:46 पढ़ा था। इसमें घास प्रधान जमीन होती है 3:11:49 और संक्रमण कालीन भू दृश्य भी इसको कहा 3:11:51 जाता है। मतलब जंगल कटते हैं तो घासे उगती 3:11:53 हैं। जहां पेड़ नहीं है वहां घासे जमेंग 3:11:55 है ना? और इन घासों में बहुत तरह की जड़ी 3:11:58 बूटियां होती है। बहुत सारी तरह की चीजें 3:12:00 होती है। घास निरुद्देश्य नहीं होती है। 3:12:02 हर वनस्पति का अपना महत्व होता है। पानी 3:12:05 जहां कम बरसता है, पानी जहां कम मिलता है 3:12:07 और जमीन खुली होती है, सूर्य के सीधे 3:12:09 प्रकाश के संपर्क में आती है, वहां घासे 3:12:11 तेजी से बढ़ती हैं। ठीक? पर्याप्त वर्षा 3:12:14 होगी तब तो वहां पर वर्षावन पैदा हो 3:12:15 जाएंगे। है ना? तो वो स्थिति नहीं होती 3:12:18 है। अब यहां देखें घास के मैदानों को 3:12:21 अलग-अलग हिस्सों में मतलब अलग-अलग देशों 3:12:23 और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जानते 3:12:25 हैं। जैसे दक्षिण अमेरिका का जो ब्राजील 3:12:27 है दक्षिण अमेरिका का जो ब्राजील है वहां 3:12:30 पर कैंपोस कहते हैं। दक्षिण अमेरिका के 3:12:33 वेनेजुला में लानोस कहते हैं। दक्षिण 3:12:35 अफ्रीका में वेल्ट्स कहते हैं। उत्तरी 3:12:37 अमेरिका में प्रेयरी कहते हैं। 3:12:39 ऑस्ट्रेलिया में डाउंस कहते हैं। 3:12:40 न्यूजीलैंड में कैंटरबरी कहते हैं। ये चीज 3:12:42 आपको रटी होगी। कुछ नया नहीं है इसमें। 3:12:45 लेकिन फिर भी देख लीजिए हंगरी में पुष्टाज 3:12:47 कहते हैं। यूरोप और नॉर्थ एशिया में 3:12:49 स्टेपीज कहते हैं। अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया 3:12:51 में समाना कहते हैं। दक्षिण दक्षिण 3:12:53 अमेरिका में अर्जेंटीना और उग्वे विशेष 3:12:55 तौर पर वहां पंपास कहा जाता है। तो दुनिया 3:12:58 भर के जो प्रमुख घास के मैदान है वो यहां 3:13:00 नक्शे पर दिए हुए हैं। दुनिया का नक्शा 3:13:02 बना हुआ है। ये रहा आपका उत्तरी अमेरिका, 3:13:03 दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इधर यूरोप 3:13:06 और इधर एशिया, इधर आपका ऑस्ट्रेलिया। ठीक 3:13:09 है? तो आ जाइए। यहां देखें अफ्रीका आपने 3:13:12 देखा। ठीक है? उत्तर अमेरिका में प्रयरी 3:13:14 दक्षिण अमेरिका में ब्राजील में कंपास हो 3:13:16 गया मतलब कैंपोस दक्षिण अमेरिका के 3:13:19 वेनेजुला में लानोस हो गया और दक्षिण 3:13:21 अमेरिका का ही जो अर्जेंटीना और उग्वे 3:13:23 वाला हिस्सा है वहां भी पंपास ही कहते 3:13:24 हैं। वैसे ही हंगरी में पुष्टाच कहा जाता 3:13:27 है। यूरोप और उत्तरी एशिया में स्टेपीज 3:13:29 कहते हैं। वैसे ही अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया 3:13:31 सवाना वाला जो क्षेत्र है माफ़ कीजिएगा। 3:13:33 अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया वाला जो इलाका है 3:13:35 खासतौर पर अफ्रीका वहां सवाना कहते हैं। 3:13:37 दक्षिण अफ्रीका में वेल्ड्स कहते हैं और 3:13:39 ऑस्ट्रेलिया में डाउंस कहा जाता है। 3:13:41 न्यूजीलैंड में कैंटरबरी कहते हैं। यहां 3:13:43 आप देखेंगे कि जो हल्के हरे रंग से 3:13:45 दर्शाया गया घास का मैदान है वो टपरेट है। 3:13:49 ठीक है? और जो गाढ़े थोड़ा गाढ़े हरे रंग से 3:13:52 दर्शाया गया है धानी कलर है। वो ट्रॉपिकल 3:13:54 सवाना है। तो ट्रॉपिकल सवाना आपको 3:13:57 कहां-कहां दिख रहा है? ये रहा ट्रॉपिकल 3:13:58 सवाना। यहां पे ट्रॉपिकल आपको सवाना टाइप 3:14:01 की जो जमीन है। हालांकि उसको स्टेपी कहा 3:14:03 जाता है। लेकिन यह ट्रॉपिकल है। इधर भी 3:14:05 ट्रॉपिकल है। इधर भी ट्रॉपिकल। ठीक है? और 3:14:07 यह देखेंगे आप तो ये वाला जो है ये 3:14:09 टेंपरेट है। वैसे ही यहां भी एक पट्टी 3:14:11 आपको टेंपरेट दिखाई दे रही है। नीचे भी 3:14:12 टेंपरेट है। यहां भी साथ-साथ टेंपरेट आपको 3:14:15 कुछ-कुछ दिख रहा है। ठीक है? अब आगे चलते 3:14:17 हैं। 3:14:19 यहां देखेंगे वानिकी शोध संस्थान। 3:14:22 तो आईएफ आईएफआर जो है इसकी यात्रा की 3:14:25 19वीं सदी का जो अंत था मतलब 19 सेंचुरी 3:14:28 समाप्त हो रही थी उस समय भारत में 3:14:30 वैज्ञानिक वानिकी के आगमन की शुरुआत होती 3:14:32 है। कहने का मतलब ये कि एक वन विद्यालय 3:14:34 स्थापित होता है और ये अंग्रेजों के जमाने 3:14:36 में स्थापित होता है 1878 में। उसके बाद 3:14:39 फिर 5 जून 1906 वानिकीय अनुसंधान को आगे 3:14:43 बढ़ाने के लिए इंपीरियल वन अनुसंधान 3:14:45 संस्थान जो है इंपीरियल फॉरेस्ट रिसर्च 3:14:47 इंस्टीट्यूट इसकी स्थापना इंग्लिश इंग्लिश 3:14:50 गवर्नमेंट यानी अंग्रेज सरकार के द्वारा 3:14:51 की जाती है। फिर इसके बाद अब जब देश आजाद 3:14:54 होता है उसके बाद 1986 का समय आता है। देश 3:14:57 के वाणिकीय अनुसंधान यानी वनों पर जो 3:14:59 रिसर्च होनी चाहिए उसको आगे बढ़ाने के लिए 3:15:01 उसके मामले में शिक्षा का प्रसार करना 3:15:03 रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ाना इसके लिए 3:15:05 फिर एक छात्र संगठन के रूप में भारतीय 3:15:08 वानिकीय अनुसंधान और शिक्षा परिषद इसका 3:15:10 गठन किया जाता है। तो 1 जून 1991 को 3:15:14 आईएफएस 3:15:15 आईसीएफआरआई जो है आईसीएफआरआई इसको 3:15:19 तत्कालीन पर्यावरण और वन मंत्रालय के तहत 3:15:21 एक स्वायत्त परिषद घोषित कर दिया जाता है। 3:15:24 ठीक है? ये ऑटोनॉमस काउंसिल घोषित हो जाती 3:15:27 है और सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम जो है 1860 3:15:30 वाला उसके तहत एक सोसाइटी घोषित कर दी 3:15:32 जाती है। तो परिषद जो है वो देश भर में 3:15:34 उपस्थित नौ क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान 3:15:37 है। पांच इसमें से केंद्र है जो कि जैव 3:15:39 भौगोलिक हैं। है ना? क्षेत्रीय अनुसंधान 3:15:41 संस्थान जोधपुर, देहरादून, शिमला, 3:15:43 हैदराबाद, कोयंबटू, रांची, बेंगलुरु, 3:15:45 जोराहाट जबलपुर में है। अगरतला में आप 3:15:47 देखेंगे आइजोल में केंद्र है। इलाहाबाद, 3:15:49 छिंदवाड़ा, विशाखापत्त्नम में केंद्र है। 3:15:52 भारत में जो वानिकी शोध संस्थान है उसमें 3:15:54 आईसीएफआर का आप देख रहे हैं कौशल विकास 3:15:56 केंद्र है। मध्य प्रदेश, छिंदवाड़ा में। 3:15:58 फिर उसी प्रकार से वन उत्पादकता संस्थान 3:16:01 यह झारखंड में है। रांची में। आईसीएफआरआई 3:16:04 का ही काष्ट विज्ञान और प्रौद्योगिकी 3:16:06 संस्थान यह कर्नाटक बेंगलुरु में है। 3:16:08 भारतीय वन प्रबंधन संस्थान मध्य प्रदेश 3:16:10 भोपाल में जीवीपथ हिमालय पर्यावरण और 3:16:13 विकास संस्थान उत्तराखंड में है। अल्मोड़ा 3:16:15 में उष्णकटिबंधीय वनस्पति अनुसंधान क्षमा 3:16:18 कीजिएगा। उष्णकटिबंधीय वनस्पति उद्यान और 3:16:21 अनुसंधान संस्थान जो है ये आपका केरल में 3:16:24 पड़ता है तिरुवनंतपुरम में। वैसे ही वन 3:16:26 अनुसंधान संस्थान ये पीछे भी देखा था आपने 3:16:27 देहरादून में काफी पुराना है उत्तराखंड 3:16:30 का। नेक्स्ट आप देख रहे हैं एरिड फॉरेस्ट 3:16:32 रिसर्च इंस्टट्यूटकि एरिड जोन का है तो 3:16:35 सूखे इलाके में यानी राजस्थान में जोधपुर 3:16:37 में प्लाईवुड उद्योग अनुसंधान प्रशिक्षण 3:16:39 संस्थान कर्नाटक का है बेंगलुरु का वर्षा 3:16:42 वन अनुसंधान संस्थान असम जोरहाट में वन 3:16:45 अनुवांशिकी और वृक्ष प्रजनन संस्थान 3:16:48 तमिलनाडु कोयंबटूर 3:16:50 पहाड़ी पुनस्थापन वन अनुसंधान संस्थान ये 3:16:53 प्रयागराज में है उत्तर प्रदेश के हिमालय 3:16:56 वन अनुसंधान संस्थान हिमाचल प्रदेश शिमला 3:16:59 वन जैव विविधता संस्थान तेलंगाना हैदराबाद 3:17:01 उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान मध्य 3:17:04 प्रदेश जबलपुर 3:17:06 नक्शा बना हुआ है नक्शे में देखिए हिमालय 3:17:09 वन अनुसंधान संस्थान वही लोकेशन है कुछ 3:17:11 नया नहीं है ये आपका हिमाचल में हो गया 3:17:13 आईसीएफआरआई का कौशल विकास केंद्र और 3:17:15 भारतीय प्रबंधन वन प्रबंधन संस्थान वन 3:17:18 अनुसंधान संस्थान ये सब मध्य प्रदेश में 3:17:20 हो गया ठीक है ठीक उसी प्रकार से राजस्थान 3:17:23 का एरिड वाला हो गया एरिड फॉरेस्ट फॉरेस्ट 3:17:25 रिसर्च इंस्टीट्यूट जीवी पथ हिमालय 3:17:27 पर्यावरण विकास और वन अनुसंधान संस्थान ये 3:17:29 उत्तराखंड का हो गया है ना उत्तर प्रदेश 3:17:32 में पारी पुनरस्थापन वाला हो गया 3:17:33 प्रयागराज का झारखंड में आईएफ आईसीएफआरआई 3:17:37 का जो वन उत्पादकता संस्थान है वो मौजूद 3:17:39 है वर्षा वन वाला असम में था है ना 3:17:42 प्लाईवुड वाला कर्नाटक में था एक सेकंड 3:17:45 यहां देखिए 3:17:47 भारतीय प्लाईवुड उद्योग वाला अनुसंधान 3:17:49 संस्थान और साथ ही साथ काष्ट विज्ञान 3:17:52 प्रौद्योगिकी संस्थान ये दोनों कर्नाटक का 3:17:54 हो गया तेलंगाना में वन जैव विविधता 3:17:55 संस्थान है वैसे ही आप देखेंगे केरल में 3:17:58 वनस्पति उद्यान और अनुसंधान संस्थान ये 3:18:00 उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का और वन अनुवंशिकी 3:18:03 और वृक्ष प्रजनन संस्थान ये तमिलनाडु का 3:18:05 है। तो वही संस्थान है उनको हमने चित्र 3:18:07 में देख लिया। अब यहां पर पर्यावरणीय 3:18:09 संरक्षण आंदोलन जो है उनको देखें। 3:18:12 बिश्नोई खेजड़ली आंदोलन कहा जाता है। ये 3:18:15 खेजड़ली गांव है। खेजड़ी गांव है। असल में 3:18:17 खेजड़ी एक पेड़ का नाम होता है। तो अमृता 3:18:20 देवी बिश्नोई के द्वारा इसको शुरू किया 3:18:22 गया था। और असल में संत जांभोजी के द्वारा 3:18:25 इसको शुरू किया गया। मतलब इसमें एक संत की 3:18:27 प्रेरणा थी। आध्यात्मिक पुट था। 1731 में 3:18:30 15वीं शताब्दी का अंत हो रहा था। राजस्थान 3:18:33 का खेजड़ली गांव जोधपुर इलाका है। दुनिया 3:18:36 का पहला और सबसे बड़ा चिपको आंदोलन इसको 3:18:39 कहा जाता है। वृक्ष बचाओ आंदोलन कहा जाता 3:18:41 है। राजा थे अजीत सिंह। उन्हीं के आदेश पर 3:18:43 वहां पर खेजड़ी के पेड़ों को काटा जा रहा 3:18:45 था। और खेजड़ी के पेड़ जो है ये राजस्थान 3:18:48 में रेगिस्तान के बादशाह कहे जाते हैं। 3:18:51 मल्टीपर्पज होते हैं। मतलब रेगिस्तान के 3:18:54 राजा होते हैं ये। तो इन वृक्षों को पकड़ 3:18:56 कर वहां की जो ब्नोई समुदाय के लोग हैं वो 3:18:58 चिपक जाते हैं। कहते हैं कि या तो यहां से 3:19:01 जाओ तुम लोग और नहीं तो अगर काटना है तो 3:19:03 हमारे साथ इन पेड़ों को काट दो। मतलब पहले 3:19:05 हमें काटो तब पेड़ों को काटो। अब राजा के 3:19:08 आदेश में अंधे जो ठेकेदार रहते हैं, भेजे 3:19:10 गए मजदूर रहते हैं वो लोगों को भी काट 3:19:12 डालते। आज का समय रहता तो हाहाकार मच 3:19:14 जाता। उस समय राजा थे अपना उनकी रजवाही चल 3:19:17 रही थी। ठीक है? तो कुल 363 लोगों ने अपना 3:19:21 बलिदान दिया। समझ रहे हैं? 363 लोगों ने 3:19:24 बलिदान दिया। मतलब सैकड़ों की संख्या में 3:19:26 खेजड़ी के पेड़ काटे गए होंगे और उतने ही 3:19:28 लोग मरे। इसके बाद आगे चलते हैं। ऐसे ही 3:19:31 आंदोलन की आज के समय में भी आवश्यकता है। 3:19:33 इसके बाद चिपको आंदोलन चलता है 1973 का। 3:19:36 शांतिपूर्ण अहिंसक आंदोलन था क्योंकि अब 3:19:38 समय बहुत बहुत बदल चुका है। कहां 15वीं 3:19:40 शताब्दी और कहां 1973 में। इस समय अगर ऐसा 3:19:44 300 400 लोगों को काट डाला जाएगा तो वो 3:19:46 नरसंहार बर्दाश्त के काबिल नहीं रहेगा। वो 3:19:48 भी आजाद भारत में संभव नहीं है। तो यह 3:19:50 अहिंसक आंदोलन था। 3:19:53 सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी, चंडी प्रसाद 3:19:56 भट्ट यह सब इसमें लीडर थे। इसके बाद 3:19:58 साइलेंट वैली आंदोलन है केरल के पलक्कड़ 3:20:01 में केरल शास्त्र साहित्य परिषद सुगाथा 3:20:03 कुमारी के द्वारा और आप देख रहे हैं कि 3:20:06 1973 का है। तो जो सैरंध्री घाटी यानी 3:20:10 साइलेंट वैली है, शांत घाटी है उसके 3:20:12 सदाबहार उष्णकटिबंधीय वनों को कुंती पूजा 3:20:14 नदी पर प्रस्तावित पन बिजली परियोजना के 3:20:16 डूब क्षेत्र में आने से बचाने का यहां काम 3:20:19 किया गया था। जब इस तरह के रिवर वैली 3:20:21 प्रोजेक्ट बनते हैं या मल्टीपर्पज डैम 3:20:23 प्रोजेक्ट बनते हैं तो उसमें यह बहुत बड़ा 3:20:25 खतरा होता है कि वहां की जो पारिस्थितिकी 3:20:26 है वह नष्ट हो जाएगी और होती है। खतरा 3:20:28 क्या होता है? वो सच में होती है। ठीक है? 3:20:31 मतलब कोई भी इस तरह का डैम या कोई 3:20:33 मल्टीपर्पस जो रिवर प्रोजेक्ट होता है, 3:20:36 नदी घाटी परियोजना होती है, ये ऐसे अर्बन 3:20:38 एरिया में तो बनती नहीं है कि अगल-बगल 3:20:40 गाड़ी मोटर चल रहा है, नीचे सड़क चल रही 3:20:42 है, ट्रैफिक चल रहा है, बहु मंजिला 3:20:43 इमारतें बनी हुई है। उसी में नदी बह रही 3:20:45 है। ऐसा तो नहीं होता है। नदी घाटियां और 3:20:48 उनका जो विस्तारित तेज प्रवाह वाला 3:20:49 क्षेत्र है, वो ऐसे इलाके में होता है जो 3:20:51 कि या तो जंगली ही होता है। नहीं तो फिर 3:20:53 वो किसी न किसी लिहाज से पारिस्थितिकी के 3:20:55 दृष्टिकोण से काफी इंपॉर्टेंट होता है। और 3:20:57 जब उस पर डैम बनाया जाता है, वहां रिजवायर 3:20:59 बनाया जाता है और तमाम तरह के परिवर्तन 3:21:01 किए जाते हैं तो उससे वहां पर जो जीव 3:21:03 जातियां हैं, वनस्पति प्रजातियां हैं, वह 3:21:05 सब तबाह होती हैं और हर जगह जहां-जहां ये 3:21:08 डैम प्रोजेक्ट बने हैं, वहां वहां ऐसा हुआ 3:21:10 है। ठीक है? और वो तात्कालिक असर है। 3:21:12 दीर्घकालिक असर तो फिर कहना ही क्या? आगे 3:21:15 आप देखेंगे यहां पर अविभाजित बिहार यानी 3:21:18 जब झारखंड उसी में शामिल था सिंहभूम वाला 3:21:20 इलाका तो ये जंगल बचाओ आंदोलन चला था 1980 3:21:23 का। वहां के लोकल आदिवासी इसको चलाए थे। 3:21:25 साल के वनों को काटकर सागौन के पेड़ लगाने 3:21:28 का विरोध किया गया था। साल के वृक्ष वहां 3:21:30 पर प्राकृतिक रूप से उगे हुए थे। लेकिन 3:21:32 सरकार अपना फायदा कमाना चाहती थी तो सागोन 3:21:35 के पेड़ लगाइए। अब सागोन के पेड़ लगाने 3:21:37 वाले किसान क्या सोचते हैं वो आप अच्छी 3:21:38 तरह जानते हैं। 3:21:41 सागोन के पेड़ लगाने वाले जो लोग होते हैं 3:21:43 ना आमतौर पर इमारती लकड़ी के उद्देश्य से 3:21:46 इसको लगाते हैं। साल के पेड़ लगाने का भी 3:21:48 वही उद्देश्य होता है। लेकिन सागोन के 3:21:49 मामले में ये जल्दी-जल्दी बढ़ता है तैयार 3:21:51 होता है। और 10 साल में इसकी लकड़ी जो है 3:21:53 वो अच्छी खासी कीमत दे देती है। तो 3:21:55 लगवाएंगे उसके बाद 10 साल बाद काट देंगे। 3:21:58 फिर जहां पेड़ थे वहां कुछ नहीं। जब तक 3:22:00 जिंदा है सागुन के पेड़ तब तक तो ठीक है। 3:22:02 तब तक कोई दिक्कत नहीं। लेकिन वो कितने 3:22:04 समय तक रहेंगे? काटकर आप उसका फर्नीचर बना 3:22:06 लीजिएगा। इमारती लकड़ी में इस्तेमाल कर 3:22:08 लीजिएगा। तो उसके बाद पेड़ साफ फिर नए 3:22:10 सिरे से आप पौधा रोपेंगे। मतलब ये 3:22:12 पारिस्थितिकी पारिस्थितिकी का और मिट्टी 3:22:14 का दोनों का विनाश मिट्टी का पोषण उतना 3:22:16 खींचा उस पेड़ ने और वो किसी काम नहीं 3:22:18 आया। है ना? तो ये राजनीतिक लालच का खेल 3:22:21 था। आदिवासियों ने इसका विरोध किया। इसके 3:22:23 बाद आगे बढ़ते हैं। यहां देखें आप नौदान्य 3:22:25 आंदोलन है जो कि वंदना शिवा के द्वारा 3:22:27 स्टार्ट किया गया था 1982 में। राष्ट्रीय 3:22:29 स्तर का जो इसका मुख्यालय है यह नई दिल्ली 3:22:32 में है और उद्देश्य वही है जैव विविधता का 3:22:34 संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देना। 3:22:36 एपिको आंदोलन पांडुरंग हेगड़े के द्वारा 3:22:38 1983 में पश्चिमी घाट क्षेत्र कर्नाटक का। 3:22:41 एपिको का मतलब होता है गले लगाना। तो 3:22:43 वृक्षों को गले लगाना मतलब वही साउथ 3:22:45 इंडिया का ये चिपको मूवमेंट है। मेघा 3:22:47 पाटकर, बाबा आमटे और अरुंधति राय के 3:22:49 द्वारा नर्मदा बचाओ आंदोलन चलाया गया था। 3:22:52 नर्मदा पर जो सरदार सरोवर डैम बन रहा था 3:22:55 उसका विरोध करने के लिए वहां विस्थापन और 3:22:57 पर्यावरणीय नुकसान बहुत बड़ा हो रहा था। 3:22:59 लेकिन सरकार एक नहीं सुनती है। कुल मिलाकर 3:23:01 1985 का है। वैसे ही बलियापाल आंदोलन है 3:23:04 उड़ीसा बालेश्वर का 1985 का। स्थानीय 3:23:07 ग्रामीणों के द्वारा विरोध किया गया। मतलब 3:23:09 सरकार के द्वारा बंगाल की खाड़ी का जो 3:23:11 तटीय क्षेत्र था वहां राष्ट्रीय परीक्षण 3:23:13 रेंज मतलब जो मिसाइलें इत्यादि का परीक्षण 3:23:16 करने के लिए इलाका है उसको विकसित किया जा 3:23:18 रहा था। और इस वजह से वहां की जो उपजाऊ 3:23:20 जमीन है वो नष्ट हो रही उस फर्टाइल जमीन 3:23:22 पर रॉकेट और मिसाइलें ल्च होंगी। तो उसका 3:23:25 विरोध हो रहा था। टिहरी आंदोलन चला लेकिन 3:23:28 उसके बावजूद टिहरी डैम दैत्य की तरह बनकर 3:23:30 खड़ा हो गया। 1990 का दशक। अब आप कहेंगे 3:23:32 कि बिजली कहां से मिलेगी जब आप दैत्य नहीं 3:23:34 खड़ा कीजिएगा। भाई बिजली से भी ज्यादा 3:23:36 कीमती इस समय पर्यावरण है। ठीक है? तो 3:23:39 उत्तराखंड को आप देख रहे हैं। उत्तराखंड 3:23:41 का क्षेत्र भागीरथी नदी। अलकनंदा और 3:23:43 भागीरथी जब मिलती है तो गंगा अपने असली 3:23:45 स्वरूप में आती है। तो अलकनंदा तो बहुत 3:23:47 दूर से सतोपथ से निकल कर चली आ रही है। 3:23:50 उसमें बहुत सारी नदियां सपोर्ट कर रही है। 3:23:51 लेकिन जब भागीरथी का जोश जोशीला वेग 3:23:54 अलकनंदा के साथ मिलता है तो रफ्तार बनती 3:23:56 है। पानी की मात्रा बढ़ती है और नदी अपने 3:23:59 पूरे वेग के साथ आगे बढ़ती है। पानी की 3:24:01 गुणवत्ता बनती है और प्रदूषण अपने आप साफ 3:24:03 हो जाता है। नदी के अंदर जो भी मैल कुचल 3:24:06 है, जो भी गंदी चीजें हैं, वो अपने आप 3:24:07 बहकर साफ हो जाती है। नदी साफ सुथरी रहती 3:24:10 है जब उसमें प्रवाह रहता है। नदी अपने 3:24:12 प्रवाह से जिंदा है। भागीरथी पर यह डैम 3:24:14 बना दिया गया। इसकी आधी धारा तो वहीं रुक 3:24:16 गई। मैदान में उल उल उलटते उलटते या फिर 3:24:20 आप देखें कि उतरते उतरते नदी अपने अपना 3:24:22 स्वरूप ही खो देती है। तो टिहरी बांध का 3:24:26 निर्माण किया गया। भूकंपीय खतरे वहां पर 3:24:28 थे। लोगों का विस्थापन और सबसे बड़ा तो 3:24:29 पारिस्थितिकी खतरा। अभी आप जो सुन रहे हैं 3:24:32 ना नेपाल की बाढ़ अभी सुना आपने? अभी जस्ट 3:24:34 कुछ दिनों पहले आई। और वैसी स्थिति अगर 3:24:37 ईश्वर ना करे उत्तराखंड में बनती है तो 3:24:39 टिहरी जैसे जो डैम है वह मतलब सीधा नरक का 3:24:41 द्वार दिखाने के लिए पर्याप्त है अकेले और 3:24:44 ना सिर्फ उत्तराखंड को दिखाएंगे बल्कि 3:24:46 यूपी को भी दिखाएंगे बिहार को भी दिखाएंगे 3:24:49 चिल्का बचाओ आंदोलन को देख रहे हैं आप 3:24:50 उड़ीसा चिल्का झील को देख लीजिए 1991 3:24:53 स्थानीय जो मछुआरा संघ है हालांकि टिहरी 3:24:55 डैम को बनाया ऐसे गया है कि वो इतनी जल्दी 3:24:57 ध्वस्त नहीं होगा दबाव झेल सकता है लेकिन 3:25:00 किस हद तक इस समय जो हिमालय में हो रहा है 3:25:03 वो कल्पना की सीमा से परे है मतलब 3:25:06 छोटी-छोटी नदियां बन रही है और जब बारिश 3:25:09 का पानी उनमें इकट्ठा होता है और ग्लेशियर 3:25:10 एक झटके में जब टूटता है और उन छोटी-छोटी 3:25:13 तटबंधों वाली नदियों में माफ़ कीजिएगा 3:25:15 झीलों में इकट्ठा होता है या मान लीजिए कि 3:25:18 किसी पहाड़ी नदी का ही रास्ता अवरुद्ध हो 3:25:19 गया जैसे नेपाल वाले मामले में हुआ था। एक 3:25:21 पहाड़ी नदी का रास्ता ही ग्लेशियर ने रोक 3:25:23 दिया। मलवा जो है रास्ता रोक देता है। अब 3:25:25 पूरा जो पानी का बहाव है वो जमने लगता है। 3:25:28 वहीं इकट्ठा होने लगता है। मतलब एक 3:25:29 छोटा-मोटा प्राकृतिक अस्थाई रिजवायर तैयार 3:25:32 होने लगता है। और उसके जब तटबंध टूटते हैं 3:25:35 तो एक झटके में वो पूरा पानी रिलीज होता 3:25:37 है और आगे बढ़ता है और जहां-जहां से 3:25:38 गुजरता है वहां वहां विनाश आता है। 3:25:41 उत्तराखंड में ऐसे सैकड़ों स्थान बन चुके 3:25:43 हैं और देर सवेर वहां भी ऐसी त्रासदी होगी 3:25:46 और होती रही है। मतलब अक्सर छिटपुट घटनाएं 3:25:49 सुनाई देती हैं और आगे इनकी जो बारंबारता 3:25:51 है वो बढ़ेगी। तो ऐसी स्थिति में अगर 3:25:54 रुकावट आती है भागीरथी या अलकनंदा के 3:25:56 रास्ते में तो टिहरी भी कितना संभाल 3:25:57 पाएगा? कितना भी मजबूत कंस्ट्रक्शन क्यों 3:26:00 ना हो प्रकृति की शक्ति के आगे नहीं टिक 3:26:02 सकता है। तो ये खतरनाक स्थिति है। हिमालय 3:26:04 क्षेत्र में इस तरह के डैम नहीं बनने 3:26:06 चाहिए। फिलहाल चिल्का बचाओ आंदोलन को आप 3:26:09 देख रहे हैं। जाहिर सी बात है कि उड़ीसा 3:26:12 की जो चिल्का झील है वहां पर इसको शुरू 3:26:14 किया गया था। मछुआरा संघ और छात्र लोग 3:26:15 इसमें शामिल थे। टाटा कंपनी और राज्य 3:26:18 सरकार का जॉइंट प्रोजेक्ट था झीगा 3:26:20 फार्मिंग का। श्रिंक फार्मिंग का और इससे 3:26:23 मछुआरों की आजीविका छिनने का खतरा था और 3:26:25 दूसरे दूसरा वहां की जो पारिस्थितिकी है 3:26:27 उसके खराब होने का भी खतरा था। इसके बाद 3:26:30 मैती मूवमेंट था कल्याण सिंह रावत के 3:26:31 नेतृत्व में चमोली जिला उत्तराखंड ये 1994 3:26:35 का है। मैती का मतलब होता है मायका। 3:26:37 पहाड़ी भाषा में उत्तराखंडी जो भाषा है 3:26:39 उसमें मैती मतलब मायका। 3:26:42 तो यहां पर जैसे अपने यहां जीजा साली 3:26:44 ठिठोली और जूता चोरी फिर जूता चोरी के एवज 3:26:47 में पैसे आठना यह सब रस्म चलती है। वहां 3:26:50 क्या होता है कि आपको पौधा लगाना होगा। ये 3:26:52 कितनी सुंदर परंपरा है। कहां जूता और कहां 3:26:55 नोटों की गड्डियां और कहां चमक दमक और 3:26:57 कहां अय्याशी और कहां पर एक पौधा। कितनी 3:27:00 सुंदर परंपरा है। आप सोच कर देखिए। तो यह 3:27:02 भावनात्मक परंपरा है जिसको कि शुरू किया 3:27:04 गया और आज भी इसको वहन किया जाता है और यह 3:27:06 सिर्फ उत्तराखंड नहीं राजस्थान के भी कुछ 3:27:08 इलाकों में मानी जाती है। मतलब कुछ इलाकों 3:27:10 में बेटी की विदाई के मौके पर या शादी के 3:27:13 मौके पर और कुछ इलाकों में बेटी के पैदा 3:27:15 होने के अवसर पर भी पौधे लगाए जाते हैं। 3:27:18 तो आप भी शुरू करिए अपने जन्मदिन के मौके 3:27:20 पर एक पौधा अवश्य लगाइए। और पौधा लगाना 3:27:22 बड़ी बात नहीं है। वो काम तो सरकार 3:27:24 धड़ल्ले से करती है। करोड़ों पौधे रिकॉर्ड 3:27:26 बनाएगी हर साल एक पेड़ मां के नाम। लेकिन 3:27:28 पौधे कितने जिंदा रहते हैं यह देखने वाली 3:27:30 बात है। तो जिसे लगाइए उसको पालिए पोसिए 3:27:33 उसको जिंदा रखिए। ये महत्वपूर्ण है। और 3:27:37 अगर लगा नहीं सकते पालपस नहीं सकते तो जो 3:27:39 लगे हुए हैं उन्हीं का संरक्षण करिए। 3:27:41 पर्यावरण से संबंधित पुरस्कार को देखते 3:27:43 हैं। तो पुरस्कार में पहला है गोल्डमैन 3:27:45 ग्रीन नोबेल इसको कहा जाता है। गोल्डमैन 3:27:47 फाउंडेशन के द्वारा इसको दिया जाता है। यह 3:27:49 यूनाइटेड स्टेट का है। 1989 में शुरू किया 3:27:52 गया था। दो लाख अमेरिकी डॉलर। ध्यान 3:27:54 दीजिएगा यह ₹ लाख नहीं है। दो लाख अमेरिकी 3:27:57 डॉलर और जाहिर सी बात है कि यह पर्यावरण 3:27:59 संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ा सम्मान है। 3:28:02 नोबेल का इसको जब श्रेय दिया गया तो इसका 3:28:04 मतलब है कि ये उच्च पुरस्कार है। जमीनी 3:28:07 स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने 3:28:09 वाले उल्लेखनीय लोगों को ये दिया जाता है 3:28:11 और छह भौगोलिक क्षेत्रों से इन्हें चुना 3:28:13 जाता है। तो भारत से भी बहुत से लोगों ने 3:28:15 इन्हें प्राप्त किया है। मतलब इस पुरस्कार 3:28:17 को प्राप्त किया है। एक तो है मेघा पाटकर 3:28:19 1992 एमसी मेहता 1996 राशिदा बी और चंपा 3:28:23 देवी शुक्ला 2004 रमेश अग्रवाल 2014 3:28:27 प्रफुल्ल सामंतारा 2017 और आलोक शुक्ला 3:28:30 2024 तो ये गोल्डमैन पुरस्कार बहुत सारे 3:28:33 भारतीयों को भी मिल चुका है। भारतीय लोगों 3:28:35 के ही नाम आपको याद रखने हैं। इसके बाद 3:28:37 राइट लिव्लीहुड सोसाइटी जो स्वीडन की है 3:28:40 उसके द्वारा एक राइट लिव्लीहुड पुरस्कार 3:28:41 दिया जाता है जिसको कि एक वैकल्पिक नोबेल 3:28:44 कहा जाता है। 1980 का है। 1 मिलियन 3:28:47 स्वीडिश क्रोना दिया जाता है इसमें। यह भी 3:28:49 अच्छा खासा है। और एक पर्यावरणीय संरक्षण, 3:28:51 मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र 3:28:53 में साहसिक कदम उठाने वाले व्यक्तियों को 3:28:55 ये दिया जाने वाला पुरस्कार। तो मेघा 3:28:57 पाटकर और बाबा आमटे को ये दिया गया था 3:28:59 नर्मदा बचाओ आंदोलन के परिप्रेक्ष में। 3:29:02 वंदना शिवा ने इसे प्राप्त किया था 93 3:29:04 में। और लाइफ नाम की एक पर्यावरण संस्था 3:29:07 थी। उसने 2021 में इसको प्राप्त किया था। 3:29:09 ग्लोबल 500 आप जानते ही हैं पर्यावरण की 3:29:12 रक्षा और सुरक्षा के लिए दिया जाने वाला 3:29:13 विलक्षण योगदान मतलब किसी के द्वारा अगर 3:29:16 विलक्षण योगदान दिया गया है तो उसके एवज 3:29:17 में उसे पुरस्कृत किया जाता है। 1987 में 3:29:21 इसको संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम 3:29:23 यानी यूनाइटेड नेशन एनवायरमेंटल प्रोग्राम 3:29:25 के द्वारा शुरू किया गया था। हालांकि 2005 3:29:28 में इसको बंद कर दिया गया और इसकी जगह पर 3:29:30 चैंपियंस ऑफ द अर्थ नाम का पुरस्कार यह 3:29:32 इसी की जगह पर शुरू हुआ है। ग्लोबल 500 के 3:29:36 स्थान पर चैंपियंस ऑफ द अर्थ भारत से इसे 3:29:39 प्राप्त करने वाले जो लोग हैं उसमें चंडी 3:29:40 प्रसाद भट्ट हैं, अनिल अग्रवाल हैं, डॉ. 3:29:42 एम एस स्वामीनाथन भी इसमें शामिल। नेक्स्ट 3:29:45 आप देख रहे हैं वही चैंपियंस ऑफ द अर्थ। 3:29:47 ग्लोबल 500 के स्थान पर विज्ञान, व्यवसाय, 3:29:50 नागरिक सम्मान और नीति के क्षेत्र में जो 3:29:52 उत्कृष्ट नेता हैं, पर्यावरण के लीडर हैं, 3:29:54 उनको सम्मानित किया जाता है। और यूएनईपी 3:29:57 के द्वारा ये शुरू किया गया था। अब यहां 3:29:59 पे आप देख रहे हैं कि भारतीय प्राप्तकर्ता 3:30:01 में नरेंद्र मोदी को दिया गया, कोचीन 3:30:03 इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिया गया। सौर 3:30:05 ऊर्जा से संचालित होने के मामले में, 3:30:07 अफरोज़ शाह को दिया गया, पूर्णिमा देवी को 3:30:09 दिया गया। ठीक है? हरगिला आर्मी के लिए। 3:30:12 आगे चलते हैं। अच्छा ये हरगिला आर्मी आप 3:30:15 समझ रहे हैं क्या चीज है? पूर्णिमा देवी 3:30:17 का नाम इसके साथ जुड़ा हुआ है। पूर्णिमा 3:30:19 देवी ने बहुत उल्लेखनीय काम इसमें किया 3:30:21 था। पूर्णिमा देवी वर्मन इनका नाम था। 3:30:23 इनको स्टार्क सिस्टर के नाम से भी जाना 3:30:25 जाता है। तो 20078 के आसपास ये इस अभियान 3:30:29 की नींव रखती हैं। पहले क्या होता था? असम 3:30:31 का जो ग्रामीण इलाका होता था। वहां पे ये 3:30:33 हरगिला नाम का पक्षी पाया जाता था जो कि 3:30:35 सारस के परिवार का है। ठीक है? सारस क्रेन 3:30:37 आप देखते हैं ना उत्तर प्रदेश का राजकीय 3:30:39 पक्षी है वैसे ही वो सारस के ही फैमिली का 3:30:41 होता है लेकिन वो जानवरों के अवशेष खाता 3:30:43 है मतलब सड़े गले मांस का सेवन करता है तो 3:30:46 इस तरह का अपमार्जक पक्षी है इसके जो 3:30:48 घोंसले होते थे पेड़ों पर लगते थे और उन 3:30:51 घोंसलों में मांस और हड्डियां रहती थी तो 3:30:53 वो बदबू करते थे गंदी महक आती थी सड़ी हुई 3:30:55 जैसे लाश की महक आए वैसी महक आती थी तो ये 3:30:58 और आकार में बहुत ऊंचा बड़ा होता है तो 3:31:00 अच्छा खासा मांस भी इसको चाहिए 5 फीट ऊंचे 3:31:03 पक्षी को मांस भी ढेर सारा चाहिए तो वहां 3:31:05 के लोग इस पक्षी का जहां घोंसला देखते थे 3:31:07 उस पेड़ को ही काट देते थे। धीरे-धीरे 3:31:09 करके ये पक्षी जो है ये खत्म होने के कगार 3:31:12 पे आया और असम में महामारियां उस इलाके 3:31:14 में फैलने लगी जहां ये जो सड़ा गला मांस 3:31:16 होता था उसको खाकर सफाई करता था। तो ये 3:31:19 प्राकृतिक सफाई कर्मी है। मतलब नेचुरल 3:31:21 स्कवेंजर है। और इसलिए अब ये एक जन आंदोलन 3:31:25 बनाया गया। इसमें होता क्या है कि घोंसलों 3:31:27 की सुरक्षा की जाती है। जो हरगिला पक्षी 3:31:29 है उसका अगर कोई बच्चा घोंसले से गिर गया 3:31:31 है तो उसको नेट लगाकर सुरक्षित ऊपर 3:31:33 पहुंचाया जाता है और गाने और नुक्कड़ नाटक 3:31:36 के जरिए पर्यावरण के प्रति और इस पक्षी के 3:31:38 संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया 3:31:40 जाता है। उसके अलावा जो असमिया कपड़े होते 3:31:42 हैं जैसे कि गस गमछा होता है, साड़ी होती 3:31:45 है उस पर भी हरगिला का चित्र उकेरा गया और 3:31:47 उसे बेचा गया जिससे कि इसको अंतरराष्ट्रीय 3:31:49 पहचान मिली। तो ये बहुत बड़ा मतलब लुप्त 3:31:51 लुप्त प्राय प्रजाति ये बन चुकी थी और 3:31:53 इसके संरक्षण के लिए पूर्णिमा देवी के 3:31:55 द्वारा बहुत बड़े स्तर पर काम किया गया। 3:31:57 आगे चलते हैं। तो यहां देख रहे हैं आप 3:31:59 गोल्डन पांडा पुरस्कार है। अगला वन्य 3:32:02 जीवों की प्रकृति आधारित जो सर्वश्रेष्ठ 3:32:04 डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं उसके लिए इसको 3:32:05 ग्रीन आस्कर कहा जाता है। ये ग्रीन ऑस्कर 3:32:08 कहा जाता है। भारत की ओर से प्राप्त होने 3:32:10 वाली जो प्राप्तकर्ता जो व्यक्ति हैं वो 3:32:12 है माइक पांडे और इनकी फिल्म थी सोर्स ऑफ 3:32:14 साइलेंस। चाइना फेडरेशन ऑफ लिटरेरी एंड 3:32:18 आर्ट सर्कल ऑफ सिचुआ यह प्रांत यहां 3:32:21 देखेंगे आप एक सेकंड रुक जाइए देखिए चाइना 3:32:24 फेडरेशन ऑफ लिटरेरी एंड आर्ट आर्ट सर्कल्स 3:32:27 और सिचुआ प्रांत की पीपल्स गवर्नमेंट 3:32:30 पीपल्स गवर्नमेंट जो है ये दोनों मिलकर 3:32:32 इसको देते हैं। दो इसमें संस्थाएं हैं। 3:32:34 2023 में इसको शुरू किया गया था। एसन 3:32:37 पुरस्कार को आप देख रहे हैं। ये यूके का 3:32:38 है। इसमें 400 यूरो ब्रिटिश पाउंड जो है 3:32:41 ये दिया जाता है। इसको हरित ऊर्जा का 3:32:43 आस्कर ही कहा जाता है। और भारत की ओर से 3:32:45 इसमें प्राप्त करने वाले जो व्यक्ति हैं 3:32:46 वो हरीश हांडे हैं। सेलको इंडिया के। 3:32:49 निपान फाउंडेशन के सहयोग से यूएनईपी के 3:32:51 द्वारा दिया जाता है। 1984 से शुरू किया 3:32:53 गया सासाकावा पुरस्कार। सासाकावा का 3:32:56 अवार्ड आप देख रहे हैं कितना बड़ा है। कुल 3:32:57 मिलाकर यह सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण 3:33:00 के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाले 3:33:02 व्यक्ति को मिलता है। एमएस स्वामीनाथन को 3:33:04 अब तक मिल चुका है। ठीक है? यहां तक हमने 3:33:06 देखा। 3:33:08 अगला पुरस्कार है आईएमओ। ठीक है? ये 3:33:11 डब्ल्यूएमओ यानी जो वर्ल्ड मेटोलॉजिकल 3:33:13 ऑर्गेनाइजेशन है यानी विश्व मौसम विज्ञान 3:33:15 संगठन है उसके द्वारा दिया जाता है। 1955 3:33:19 से इसको शुरू किया गया। एक स्वर्ण पदक 3:33:21 होता है इसमें। एक चर्म पत्र होता है, 3:33:24 स्क्रॉल होता है और एक मौद्रिक अनुदान 3:33:26 मतलब मुद्रा राशि दी जाती है, धनराशि दी 3:33:28 जाती है। कुल मिलाकर विश्व मौसम विज्ञान 3:33:31 संगठन का यह जो पुरस्कार है, यह मौसम 3:33:34 विज्ञान और जल विज्ञान के क्षेत्र में 3:33:36 उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दिया 3:33:38 जाता है। और इस क्षेत्र का यह सर्वोच्च 3:33:41 सम्मान है। तो पहला पुरस्कार नॉर्वे के 3:33:44 डॉ. हसलबर्ग को दिया गया था 1956 में। 3:33:47 यानी पुरस्कार शुरू होने के अगले वर्ष। 3:33:50 भारत में किसने प्राप्त किया है? तो भारत 3:33:52 में के आर रामनाथन के द्वारा प्राप्त किया 3:33:54 गया 61 में और दूसरा पी आर पिशारोती के 3:33:58 द्वारा प्राप्त किया गया 1989 में। इसके 3:34:01 बाद अगला पुरस्कार विटली। विटली फंड फॉर 3:34:04 नेचर है। डब्ल्यूएफ कहा जाता है। यूके का 3:34:06 है यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन का। और 3:34:09 ब्रिटिश पाउंड में यहां पर 500 ब्रिटिश 3:34:11 पाउंड मिलते हैं। टोटल धनराशि के तौर पर 3:34:13 पुरस्कार की राशि है। दिया क्यों जाता है? 3:34:16 तो वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में यह 3:34:18 मिलता है। 3:34:20 वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में अगर आप 3:34:22 व्यापक तरीके से काम करते हैं और आपका 3:34:24 कार्य उल्लेखनीय रहता है मतलब उससे सुधार 3:34:27 सच में आता है तो ऐसी परिस्थिति में ये 3:34:29 आपको मिलेगा और इसे इसीलिए ग्रीन ऑस्कर भी 3:34:32 कहा जाता है। तो भारत में अगर इसके 3:34:35 प्राप्तकर्ताओं को आप देखेंगे तो बरखा 3:34:37 सुब्बा है। ये 2026 में प्राप्त की है। 3:34:39 इसमें हम लोग लेटेस्ट से शुरू करके पीछे 3:34:41 गए हैं। तो बरखा सुब्बा को एकदम नवीनतम 3:34:44 मिला हुआ है। उसके अलावा पूर्णिमा बर्मन 3:34:46 को मिला था 204 में और 2017 में नुकम को 3:34:49 मिला था 2021 में। अपराजिता दत्ता को मिला 3:34:51 था 2013 में। चारुदत्त मित्र मिश्रा को 3:34:54 मिला था हिम तेुआ संरक्षण के लिए 2022 3:34:57 में। तो ये पीछे वाले पुरस्कार हैं और ये 3:34:59 वाला नवीनतम। आगे बढ़े और ये देखें कुछ और 3:35:04 पुरस्कार हैं। लेकिन अभी तक हमने विदेशी 3:35:05 पुरस्कारों को देखा है। अब सिर्फ हम अपने 3:35:07 देश के घोषित पुरस्कारों को देखेंगे यानी 3:35:09 पूरी तरह से भारतीय। 3:35:12 तो पहला पुरस्कार है इंदिरा गांधी 3:35:14 पर्यावरण पुरस्कार 87 में शुरू किया गया 3:35:16 था। ₹5 लाख की धनराशि और मतलब संगठन अगर 3:35:20 है तो ₹5 लाख की धनराशि कोई ऑर्गेनाइजेशन 3:35:23 है और अगर कोई व्यक्तिगत है तो उस स्थिति 3:35:25 में पांच तीन और ₹ लाख की जो श्रेणियां 3:35:28 बनी हुई है इसमें उसके हिसाब से धन दिया 3:35:30 जाता है। तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र 3:35:32 में उत्कृष्ट और स्थाई योगदान देने वाले 3:35:34 जो संगठन हैं उनको ये प्रदान किया जाता 3:35:37 है। ध्यान दीजिएगा सिर्फ एक बार योगदान 3:35:38 दिया फिर ठंडे पड़ गए दूसरा काम करने लगे 3:35:41 ऐसा नहीं। निरंतर उनका उस क्षेत्र में 3:35:43 मतलब पर्यावरण के संरक्षण के क्षेत्र में 3:35:45 अभिन्न योगदान रहे। निरंतर निरंतरता 3:35:48 आवश्यक है। पहले प्राप्तकर्ता इसमें कौन 3:35:50 है? बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी। यह 3:35:52 एक संगठन है। तो ₹5 लाख इसको दिए गए थे। 3:35:55 पैसा मैटर नहीं करता है। ऐसे पुरस्कारों 3:35:57 में यह सम्मान मिलना बड़ी बात होती है। 3:36:01 ₹1 लाख का नगद पुरस्कार दिया जाता है। 3:36:03 राजीव गांधी वन्य जीव संरक्षण पुरस्कार के 3:36:05 धनराशि के तौर पर 1998 में इसे शुरू किया 3:36:08 गया था। पहली प्राप्तकर्ता इसमें एक 3:36:10 संस्था है और यह डब्ल्यूडब्ल्यूएफ यानी 3:36:13 वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड फॉर नेचर का 3:36:15 भारतीय संस्करण और स्वर्गीय एस देवराय को 3:36:19 ये प्राप्त हुआ था। मतलब ये व्यक्तिगत 3:36:21 स्तर पर और संस्थागत स्तर पर दोनों में 3:36:23 दिया जाता है। ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा 3:36:24 गांधी पुरस्कार दिया क्यों जाता है? तो 3:36:27 बात वही है वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र 3:36:29 में ये मिलता है। यह वन्य जीव अधिकारियों 3:36:31 को मिल सकता है। शोधकर्ताओं को मिल सकता 3:36:33 है। इस क्षेत्र में समर्पित जो संगठन है 3:36:35 उनको भी मिल सकता है। आवश्यक नहीं है कि 3:36:38 अधिकारी और शोधकर्ता है तो ही मिले। वन्य 3:36:40 जीव संरक्षण के क्षेत्र में अगर आप कुछ भी 3:36:42 उल्लेखनीय योगदान देते हैं जो कि सच में 3:36:44 उल्लेखनीय हो तो यह आपको मिलेगा। इसके बाद 3:36:47 है इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र 3:36:49 पुरस्कार। 1986 ढाई लाख नगद की धनराशि 3:36:53 वनीकरण और बंजर भूमि के विकास में अभिनव 3:36:56 काम जो करता है चाहे वह व्यक्ति हो अथवा 3:36:59 संस्था उसे दिया जाता है। वर्तमान में चार 3:37:01 श्रेणियां सरकारी कर्मचारी संयुक्त वन 3:37:03 प्रबंधन समिति सरकारी संस्थान और गैर 3:37:06 सरकारी संगठन को यह दिया जाता है। तो पहली 3:37:09 प्राप्तकर्ता इसकी थी गौरा देवी। 3:37:12 अगला है मेदिनी पुरस्कार। मेदिनी मतलब 3:37:14 क्या होता है? धरती। मेदिनी मतलब होता है 3:37:17 धरती। तो यह एक तरह का अर्थ अवार्ड है। अब 3:37:20 इसमें आप देखें ₹1 लाख का प्रथम पुरस्कार 3:37:23 है। ₹75000 का दूसरा पुरस्कार है और इसमें 3:37:27 तृतीय पुरस्कार का प्रावधान नहीं है। 3:37:29 हालांकि पहला दूसरा है तो तीसरा भी होना 3:37:30 चाहिए। फिलहाल इसमें नवीनतम वृद्धि की गई 3:37:33 है धनराशि में इसलिए यह अवार्ड का यहां पर 3:37:35 दिया हुआ है। 2018 से इसका जो दाम है मतलब 3:37:38 इसकी जो राशि है वो बढ़ा दी गई है। 1987 3:37:40 से इसको शुरू किया गया था। क्यों दिया 3:37:43 जाता है? तो ये पुस्तक लेखन के क्षेत्र 3:37:45 में दिया जाता है। लेकिन कैसी पुस्तकें? 3:37:47 तो पर्यावरण, वन और वन्य जीव संरक्षण जैसे 3:37:49 जो गंभीर मुद्दे हैं और संवेदनशील भी हैं। 3:37:52 उसमें हिंदी भाषा में उत्कृष्ट मौलिक 3:37:54 पुस्तकें लिखने वाले जो लेखक हैं उनको 3:37:56 प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। और 3:37:58 पहली प्राप्तकर्ता इसके जुगनू इसकी इस 3:38:01 अवार्ड की जो पहली प्राप्तकर्ता थी वो 3:38:03 जुगनू शारदे थी और उनकी किताब थी मोहन 3:38:06 प्यारे का सफेद दस्तावेज। 3:38:08 ठीक है? तो यह मेदिनी पुरस्कार है। यह 3:38:10 लेखन के क्षेत्र में मिलता है। लेकिन 3:38:12 पर्यावरण के संदर्भ में किया गया लेखन। ₹5 3:38:14 लाख घनश्याम दास बिरला अंतरराष्ट्रीय 3:38:17 पुरस्कार हेतु दिए जाते हैं। 3:38:20 ठीक है? ₹5 लाख 1991 से इसको शुरू किया 3:38:23 गया था। तो भारतीय संस्कृति का संरक्षण, 3:38:25 ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, 3:38:27 चिकित्सकीय देखभाल के लिए उत्कृष्ट काम 3:38:30 करने वाले जितने भी लोग हैं उनमें से किसी 3:38:32 उत्कृष्ट व्यक्ति को यह दिया जाता है। 3:38:34 इसके बाद अगला जो अवार्ड है यह आप देखें। 3:38:37 ₹ लाख और ट्रॉफी मिलती है। पदक पदक मिलता 3:38:41 है। शील्ड मिलती है जो आप कहें 1992 का 3:38:44 समय स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिए मिलता है 3:38:45 यह राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार। मतलब 3:38:48 ये कुछ इंडस्ट्रियल यूनिट्स जो हैं उनको 3:38:50 दिया जाता है जो कि प्रदूषण कम करने की 3:38:52 दिशा में काम कर रहे हैं। नेक्स्ट आप यहां 3:38:54 पर देखेंगे प्रदूषण निवारण के लिए 3:38:56 राष्ट्रीय पुरस्कार। तो ₹1 लाख और ट्रॉफी 3:38:59 इसमें भी दी जाती है और प्रदूषण निवारण और 3:39:01 पर्यावरण सुधार की दिशा में काम करने वाली 3:39:04 जो इकाइयां हैं 18 बड़ी और पांच लघु 3:39:06 औद्योगिक इकाइयां जो होती हैं उनको ये 3:39:08 सालाना दिया जाता है हर साल 1992 से इसको 3:39:11 शुरू किया गया था। 3:39:14 बाकी 2027 की तैयारी अगर आप कर रहे हैं तो 3:39:17 उसके लिए आप हमारे बैचेस ज्वाइन कर सकते 3:39:19 हैं। जुड़ने का संपर्क का साधन वही है। 3:39:21 प्री और मेंस दोनों की कंबाइंड स्टडी भी 3:39:23 कर सकते हैं। अलग-अलग भी आप कोर्स लेकर 3:39:25 तैयारी कर सकते हैं। समीक्षा अधिकारी और 3:39:28 बीईओ के लिए भी हमारे बैचेस लगातार चल रहे 3:39:30 हैं। वैकेंसी भी आएगी ही आएगी। इसमें कोई 3:39:32 संदेह नहीं है। तो आप चाहे तो इनसे जुड़ 3:39:34 सकते हैं। चलिए आगे चलते हैं। ये देखिए 3:39:36 कुछ और व्यक्ति हैं यहां पर। अभी तक हमने 3:39:38 पुरस्कार देखे। अब यहां व्यक्तियों के नाम 3:39:40 है और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में 3:39:42 भारत में भारत के संदर्भ में इनका क्या 3:39:45 महत्वपूर्ण योगदान है? असल में अगर हम 3:39:48 पूरी दुनिया के ऐसे लोगों को इकट्ठा 3:39:49 करेंगे तो इनकी तादाद बहुत ज्यादा हो 3:39:51 जाएगी और उनसे प्रश्न बनने की संभावना 3:39:53 लगभग शून्य होती है कुछ गिने चुने लोगों 3:39:56 को छोड़कर। लेकिन भारत के संदर्भ में 3:39:58 जितने हैं वो आपको मालूम होने चाहिए। जैसे 3:40:00 आप ज्यादा उपाय को देख रहे हैं। इन्हें 3:40:02 भारत का वन पुरुष कहा जाता है। ठीक है? 3:40:05 है। इनको भारत का वन पुरुष कहा जाता है और 3:40:08 यह असम राज्य से संबंधित है। मिशिंग 3:40:11 जनजाति के एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। 3:40:13 इन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी का जो रेत युक्त 3:40:15 क्षेत्र है उसमें 1360 एकड़ का वन क्षेत्र 3:40:18 तैयार कर दिया। रेतीली जमीन थी। दूर-दूर 3:40:20 तक कुछ भी नहीं उगा हुआ था। वहां पर 3:40:22 इन्होंने वृक्ष उगा डाले 1360 एकड़ में। 3:40:25 और अब इस वन क्षेत्र को मोलाई वन के नाम 3:40:28 से जाना जाता है। पद्मश्री से इन्हें 3:40:30 सम्मानित किया गया 2015 में। ठीक है? ऐसे 3:40:33 व्यक्ति के लिए पद्मश्री सम्मान छोटा ही 3:40:35 है। इन्हें भारत रत्न जैसे सम्मान से 3:40:37 सम्मानित किया जाना चाहिए। इसके बाद है 3:40:39 सलीम अली बर्ड मैन ऑफ इंडिया इन्हें कहा 3:40:41 जाता है। और इनकी आत्मकथा है फॉल ऑफ अ 3:40:45 स्पेरो। 3:40:46 बुक ऑफ बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स नाम की एक 3:40:49 किताब भारत के पक्षी इन्होंने लिखी है। 3:40:52 मतलब यह वैसे तो मूल रूप से अंग्रेजी भाषा 3:40:54 में है लेकिन इसे हिंदी में भी आप पढ़ 3:40:56 सकते हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट इसका हिंदी 3:40:58 अनुदित संस्करण भी भेजता है। अच्छी किताब 3:41:01 है। चिड़ियों के चित्र भी बने हुए हैं। 3:41:03 इलस्ट्रेशन किया गया है और बकायदा उनके 3:41:05 बारे में हर उनकी जो प्रवृत्ति है, लक्षण 3:41:07 है वो दिए गए हैं। सलीम अली पहले व्यक्ति 3:41:10 थे जिन्होंने कि पहली बार पक्षियों का 3:41:12 व्यवस्थित सर्वे करवाया था और 1947 के बाद 3:41:15 भारत में बने संगठन बॉम्बे नेचुरल 3:41:17 हिस्ट्री सोसाइटी के प्रमुख व्यक्तियों 3:41:19 में से यह एक थे। इनके व्यक्तिगत प्रयास 3:41:22 का ही परिणाम था कि जो केवलादेव नेशनल 3:41:24 पार्क है उसका निर्माण हुआ और साइलेंट 3:41:26 वैली जो केरल की है जो कि बहुत सघन और 3:41:29 अपनी उत्तम जैव विविधता के लिए जानी जाती 3:41:31 है। मतलब बायोडायवर्सिटी वहां सर्वोच्च 3:41:34 दिखाई देती है। है ना? तो वहां पर जो बड़ा 3:41:36 विनाश हो रहा था है तो जैव विविधता 3:41:38 सर्वोच्च ही लेकिन विनाश भी उतनी ही तेजी 3:41:41 से हो रहा था तो उसको रोकने का काम इनके 3:41:43 माध्यम से किया गया जो कि उल्लेखनीय है और 3:41:45 पद्म विभूषण से इन्हें सम्मानित किया गया 3:41:48 1976 में। इसके बाद राजेंद्र राजेंद्र 3:41:51 सिंह हैं। ये भारत के जल पुरुष कहे जाते 3:41:53 हैं। 3:41:55 कुशल जल प्रबंधन और संचयन के लक्ष्य की 3:41:58 दिशा में व्यापक काम इन्होंने किया। 3:41:59 इन्हें मैग्सेसिया अवार्ड भी मिल चुका है। 3:42:01 स्टॉकहोम वाटर प्राइज भी मिल चुका है। जिस 3:42:03 जो कि नोबेल वाटर प्राइज कहा जाता है। इस 3:42:06 तरह के बड़े-बड़े पुरस्कार भी यह प्राप्त 3:42:08 कर चुके हैं। किंकरी देवी हैं। ये भी 3:42:10 पर्यावरण विद है कार्यकर्ता हैं। हिमाचल 3:42:12 प्रदेश में अवैध खनन हो रहा था और उत्खनन 3:42:15 के खिलाफ इन्होंने आवाज उठाई। स्त्री 3:42:17 शक्ति पुरस्कार इन्होंने जीता था 1999 में 3:42:20 और बीजिंग में अंतरराष्ट्रीय महिला 3:42:21 सम्मेलन में हिस्सा भी लिया था। ठीक है? 3:42:24 इसके बाद आगे बढ़ते हैं। यहां देखें आप 3:42:27 महेश चंद्र मेहता हैं। इन्होंने औद्योगिक 3:42:30 प्रदूषण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका 3:42:32 निभाई थी। गंगा को प्रदूषित करने वाले जो 3:42:34 प्रदूषक हैं, ताजमहल के क्षरण का जो कारण 3:42:37 बन रहे हैं, मतलब ताजमहल जो संगमरमर का 3:42:39 बना हुआ है, तो भले ही मकराना मार्बल है, 3:42:41 चमचमाता हुआ सफेद लेकिन उस पर पर्यावरणीय 3:42:44 प्रदूषण का बहुत गहरा असर पड़ता है। संग 3:42:46 संगमरमर एक बहुत ही संवेदनशील चट्टान होती 3:42:49 है। अगर ग्रेनाइट इत्यादि होते तो इतनी 3:42:51 जल्दी प्रभावित नहीं होते। लेकिन संगमरमर 3:42:53 जो कि रूपांतरित शैल होता है वो प्रदूषण 3:42:57 या इस तरह की गतिविधियां जो बाहरी होती 3:42:59 हैं उनसे बहुत तेज रिएक्ट करता है। ठीक 3:43:02 है? तो ऐसी स्थिति में ताजमहल का विनाश हो 3:43:04 ही रहा है। वो अपनी रंगत खो रहा है। उसके 3:43:06 ऊपर एक परत सी जमती जा रही है। अम्ल वर्षा 3:43:09 भी उसको नुकसान पहुंचाती है। कुल मिलाकर 3:43:11 1984 में जब जब इन्होंने एक जनहित याचिका 3:43:14 यानी जो पीआईएल है उसको दायर किया तब से 3:43:16 इन्हें ग्रीन एडवोकेट कहा जाता है। और इसी 3:43:19 के साथ स्नातक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन के 3:43:21 विषय की भी शुरुआत होती है। इसके बाद एम 3:43:23 एस स्वामीनाथन भारत की हरित क्रांति के 3:43:26 जनक के रूप में यह जाने जाते हैं। इतना तो 3:43:29 आप भी जानते हैं। इसमें नया क्या है? 3:43:31 इन्होंने गेहूं की फसलों के एक उच्च 3:43:33 प्रौद्योगिकी आविष्कार का उत्पादन किया 3:43:35 जिससे कि भारत में हरित क्रांति का मार्ग 3:43:37 प्रशस्त होता है। हालांकि इनके जो प्रयास 3:43:39 थे उसका एक दुष्परिणाम भी सामने आया। हरित 3:43:42 क्रांति गेहूं क्रांति बन गई। मतलब अन्य 3:43:45 फसलों के उत्पादन को कहीं पीछे छोड़ दिया 3:43:47 गया। बाद में जब हम देखते हैं तो 3:43:49 इंद्रधनुषी क्रांति, मिश्रित क्रांति मतलब 3:43:51 हरित क्रांति का जब दूसरा चरण शुरू होता 3:43:53 है तो उसमें अन्य फसलों पर भी जोर दिया 3:43:55 जाता है। दूसरी बात कि सरकारी जो सरकारी 3:43:58 इंतजाम किए गए थे और जो वैज्ञानिक प्रयास 3:44:01 थे उनका परिणाम रंग तो लाया लेकिन इससे 3:44:03 उत्पादन बढ़ा। किसानों की दशा में सुधार 3:44:05 नहीं आया। ये एक चीज है। हरित क्रांति का 3:44:08 मतलब क्या है? हम अन्न अधिक उपजाएं। 3:44:12 हरियाली से क्रांति लाएं। और हरियाली किस 3:44:14 चीज की है? फसलों की हरियाली। यही इसका 3:44:16 उद्देश्य है और फसल उगाने वाला कौन? तो 3:44:19 अन्नदाता यानी किसान। किसानों की दशा अपने 3:44:21 देश में अब देखिए क्या सुधर गई है। दो-दो 3:44:24 हरित क्रांतियां आई और चली गई और ना जाने 3:44:26 कितनी योजनाएं हर घंटे बनती हैं। है ना? 3:44:29 लेकिन किसान जस की तस बल्कि और बदतर 3:44:31 स्थिति में है। तो अगर हरित क्रांति इतनी 3:44:33 ही सफल रही अगर इसको देखा जाए तो किसानों 3:44:36 को तो मालामाल हो जाना चाहिए। मालामाल हुए 3:44:38 सिर्फ कुछ हिस्सों के किसान वो भी 3:44:40 गिनेजुने जो पहले से ही संपन्न थे जो 3:44:42 जागरूक थे। जो बिचौलिए और निम्न वर्गीय 3:44:45 किसान थे उनकी दशा में कोई सुधार नहीं 3:44:46 आया। ठीक है? तो ठीक है इन्होंने अपना काम 3:44:49 किया। इन्होंने शोध का काम किया। आविष्कार 3:44:51 का काम किया। वो चीज आप देख रहे हैं। इसके 3:44:53 बाद रविंद्र कुमार सिन्हा असल में किसानों 3:44:55 की दुर्दशा के पीछे सरकारी नीति की विफलता 3:44:58 है। हरित क्रांति को भी एक सही समायोजित 3:45:01 तरीके से चलाने की आवश्यकता थी और उसके 3:45:02 बाद भी जो नीतियां है वो जमीनी स्तर पर 3:45:05 नहीं चलती है। कागज में ज्यादा दिखाई 3:45:07 देती। रविंद्र कुमार सिन्हा एक पद्मश्री 3:45:09 से सम्मानित भारतीय पर्यावरण विध हैं। 3:45:12 अग्रणी शोधकर्ता और संरक्षणवादी हैं। गंगा 3:45:14 डॉल्फिन के संरक्षण के लिए इनके अभिनव 3:45:16 प्रयास हैं। इसीलिए इन्हें भारत का 3:45:18 डॉल्फिन मैन कहा जाता है। इसके बाद है 3:45:21 रामदेव मिश्रा नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ 3:45:23 इकोलॉजी के संस्थापक और भारत में 3:45:25 पारिस्थितिकी के जनक माने जाते हैं। 3:45:27 नॉर्मन बोरलार्ग कृषि वैज्ञानिक थे और यह 3:45:30 कृषि विज्ञानी हैं अमेरिका के। 3:45:33 दुनिया भर में उन पहनों की यह शुरुआत करते 3:45:35 हैं जिससे कि कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी 3:45:38 हो। तो बोरलार्क को अक्सर हरित क्रांति का 3:45:40 जनक माना जाता है। अच्छा हरित क्रांति का 3:45:42 एक दुष्परिणाम भारत में और क्या दिखाई 3:45:44 दिया? तो मिट्टी की गुणवत्ता में तेजी से 3:45:46 गिरावट आई। जो उर्वररा मिट्टी थी मैदानी 3:45:49 इलाकों की मिट्टी कैसी? जलोढ़ मिट्टी। 3:45:51 मैदानों में नदियों के द्वारा जो बाढ़ के 3:45:53 पानी से मिट्टी आती है उसी से परतें बनती 3:45:55 है। तो ये मिट्टी जो है ये अत्यंत उपजाऊ। 3:45:58 एक समय रहता था कि इसमें बीज ऐसे डाल दिया 3:46:00 और जम जाता था अपने से और फसल भी पैदा हो 3:46:02 जाती थी। बहुत कुछ करना नहीं पड़ता था। और 3:46:04 हमें अब है कि इसमें आप खोज खोज कर 3:46:06 फर्टिलाइजर डालते हैं। कीटनाशक का 3:46:08 इस्तेमाल करते हैं। उसके बाद भी फसल 3:46:10 बर्बाद हो जाती है। तमाम तरह के उपाय जतन 3:46:12 करने पड़ते हैं और भविष्य में और करने 3:46:14 पड़ेंगे। तो मिट्टी की उत्पादकता को एकदम 3:46:16 से निचोड़ लिया इस हरित क्रांति ने। जो 3:46:20 अनाज और जो पैदावार और जो मिट्टी से हमें 3:46:22 काम लेना था 10 साल में उसको हमने 2 साल 3:46:24 के अंदर मिट्टी से लिया। तो जो चीज आपको 3:46:27 10 साल में धीरे-धीरे ड्रेन करनी थी उसको 3:46:29 2 साल में अगर आप निचोड़ लेंगे तो जिस चीज 3:46:31 से निचोड़ेंगे वह एकदम से बेजान हो जाएगी। 3:46:33 तो मिट्टी के साथ भी वही हुआ। तो हरित 3:46:35 क्रांति के बहुत सारे काले पक्ष हैं। अब 3:46:38 आगे चलते हैं। यहां देखें कैलाश सा 3:46:41 श्रंखला को देख लीजिए। कैलाश सा श्रंखला 3:46:43 एक भारतीय जीव विज्ञानी और संरक्षणवादी 3:46:46 थे। तो श्रंखला का जो समय है ये 1973 का 3:46:49 है। मतलब भारत में जो प्रोजेक्ट टाइगर 3:46:51 चलाया गया था। अभी पीछे आप देख कर आ रहे 3:46:52 हैं उसके ये पहले निदेशक थे। ठीक है? पहले 3:46:55 डायरेक्टर थे। द टाइगर मैन ऑफ़ इंडिया 3:46:58 इन्हें कहा जाता है। 1992 में पद्मश्री और 3:47:00 2013 में इन्हें राजस्थान रत्न दिया गया 3:47:02 था। इसके बाद है इंदिरा गांधी पूर्व 3:47:05 प्रधानमंत्री। इन्होंने पर्यावरण के 3:47:07 क्षेत्र में वैधानिक रूप से जंतुओं और 3:47:09 पर्यावरण को संर संरक्षित करने के लिए 3:47:12 काफी सारे प्रयास किए थे। इन्होंने 1972 3:47:14 का जो वन्य जीव संरक्षण अधिनियम है उसको 3:47:16 पारित कराकर वन्य जीवों के संरक्षण और 3:47:19 पर्यावरण संरक्षण को कानूनी रूप दिया। यह 3:47:21 भारतीय वन्य जीव बोर्ड की चेयर पर्सन भी 3:47:23 रही। तो एक प्रधानमंत्री के तौर पर ये एक 3:47:26 उल्लेखनीय योगदान है। नहीं तो 3:47:27 प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही लोगों 3:47:29 के दिमाग में सिर्फ अपना फायदा और सत्ता 3:47:31 लोलुपता आ जाती है। ठीक है? हर व्यक्ति के 3:47:34 अपने कुछ काले पक्ष होते हैं। कुछ उजले 3:47:36 पक्ष होते हैं। हर व्यक्ति के व्यक्तित्व 3:47:39 में कुछ खामियां होती है। कुछ अच्छाइयां 3:47:40 होती है। तो अच्छाई यहां पर दिखाई गई। 3:47:43 इसके बाद आगे देखें। मेघा पाटकर और 3:47:46 अरुंधति राय को आप देख रहे हैं। नर्मदा 3:47:48 बचाओ आंदोलन के लिए जाना जाता है इनको और 3:47:51 मेघा पाटकर ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की 3:47:53 शुरुआत की थी। जो निर्माणाधीन बांध 3:47:55 परियोजनाएं नर्मदा पर थी उनका विरोध किया 3:47:58 गया जिससे कि पर्यावरण की क्षति हो सकती 3:48:00 थी और होती भी है। आदिवासी जनजातियों के 3:48:03 अधिकारों के संरक्षण पर काम किया गया। 3:48:05 मेनका गांधी पीपल फॉर एनिमल नाम की जो 3:48:08 संस्था है उसको बना चुकी हैं और उसके 3:48:10 अलावा यह पूर्व पर्यावरण और वन मंत्री भी 3:48:12 रह चुकी हैं। वर्ष का पर्यावरण विद 1994 3:48:16 में इन्हें वर्ष का पर्यावरण विद और साथ 3:48:18 ही साथ शाकाहारी व्यक्ति चुना गया था। 3:48:21 मतलब एनवायरमेंटलिस्ट एंड वेजिटेरियन ऑफ द 3:48:23 ईयर। ये कब चुना गया था? 1994 में। तो 3:48:26 मेनका गांधी समय-समय पर जानवरों की 3:48:29 सुरक्षा के लिए, पशुओं के, वन्य जीवों के 3:48:31 संरक्षण के लिए ना सिर्फ वन्य जीव बल्कि 3:48:33 प्राणी मात्र के संरक्षण के लिए आवाज 3:48:35 उठाती। अभी सुप्रीम कोर्ट का जो डिसीजन 3:48:37 कुत्तों के खिलाफ आया था उसमें भी मेनका 3:48:39 गांधी ने आवाज उठाई थी। जी डी अग्रवाल को 3:48:42 आप देखेंगे 3:48:44 तो यह एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक और सिविल 3:48:46 इंजीनियर हैं। गंगा बचाओ आंदोलन में यह 3:48:49 सक्रिय कार्यकर्ता थे। जी डी अग्रवाल को 3:48:51 पर्यावरण इंजीनियर भी कहा जाता है। 3:48:53 इन्होंने इन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप 3:48:55 सानंद के नाम से जाना जाता है। तो इसमें 3:48:56 अगर दूसरे नाम से पूछ लेता है तो आपको 3:48:58 भ्रमित नहीं होना है। इसके बाद गाडगिल 3:49:01 हैं। माधव गाडगिल हैं और माधव गाडगिल एक 3:49:03 भारतीय पारिस्थितिकी विज्ञानी है 3:49:05 प्रोफेसर। पश्चिमी घाट का जो पारितंत्र है 3:49:08 उस पर इन्होंने काफी सर्वे किया था और उस 3:49:10 पैनल के विशेषज्ञ पैनल वहां गठित किया गया 3:49:13 था 2010 का। ठीक है? 2010 का तो उसमें ये 3:49:16 चेयरमैन भी रहे थे। 2015 में अमेरिकी 3:49:19 समुद्री जैविक वैज्ञानिक थे जेम्स लुबेंको 3:49:22 तो इनके साथ यह प्रसिद्ध टाइलर अवार्ड 3:49:24 साझा करते हैं मतलब दोनों जने को साझा 3:49:26 दिया गया था टाइलर टाइलर अवार्ड इसमें 3:49:28 लुबेक्चो जो है ये भी शामिल थे और साथ ही 3:49:30 साथ गार्डगिल का नाम शामिल था तो भारत 3:49:34 विश्व और मतलब कुल मिलाकर ये दिया क्यों 3:49:36 गया तो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका भारत और 3:49:38 विश्व के अन्य देशों में संरक्षण और सतत 3:49:40 विकास की नीतियों के विकास में इन्होंने 3:49:42 लीड किया था अभिन्न योगदान दिया था और 3:49:45 इन्हें पद्म विभूषण भी मिल चुका है 2006 3:49:47 है। इसके बाद है प्रमोद पाटिल। 3:49:50 यह पक्षी वैज्ञानिक हैं और इन्हें ग्रेट 3:49:53 इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए विशेष 3:49:55 तौर पर जाना जाता है। रॉयल ज्योग्राफिकल 3:49:58 सोसाइटी लंदन जो है यहां देखें आप रॉयल 3:50:01 ज्योग्राफिकल सोसाइटी लंदन की जो है उसके 3:50:03 द्वारा प्रतिष्ठित अवार्ड दिया जाता है 3:50:05 जिसका नाम है विटली। विटली अवार्ड तो उससे 3:50:08 इन्हें सम्मानित किया गया। इस अवार्ड को 3:50:10 ग्रीन ऑस्कर भी कहा जाता है। इसके बाद है 3:50:12 माइक पांडे सोर्स ऑफ साइलेंस। ये पीछे आप 3:50:15 देख ही चुके हैं। इन्हें यह अवार्ड दिया 3:50:18 गया था। मतलब यह वन्य जीवों पर फिल्म 3:50:20 बनाते हैं। करियर की शुरुआत यहीं से करते 3:50:22 हैं। तो वेल पर बनी हुई वेल मछली पर बनी 3:50:24 हुई यह फिल्म है। और 2009 में टाइम्स 3:50:27 मैगजीन के द्वारा मालदीव के राष्ट्रपति 3:50:29 मोहम्मद नशीद कैमरून डियाज़ के साथ माइक 3:50:32 पांडे को हीरो ऑफ द एनवायरमेंट घोषित किया 3:50:36 गया था। इसके बाद आगे बढ़ते हैं। यहां 3:50:39 देखिए आप और भी कुछ है। विटली अवार्ड 3:50:41 इन्हें मिला 1994 में और यह एशिया के पहले 3:50:44 सिर्फ भारत के नहीं एशिया के पहले 3:50:45 निर्माता और निर्देशक हैं। जिन्हें कि 3:50:47 वाइल्ड स्क्रीन पांडा अवार्ड भी दिया गया। 3:50:49 इसके बाद चेवांग नोरफेल है। यहां देखें 3:50:52 आप। लद्दाख में कृत्रिम ग्लेशियर बनाने के 3:50:55 लिए इनको आइस मैन के नाम से जाना जाता है। 3:50:57 हालांकि कोई मनुष्य कितने ग्लेशियर 3:50:59 बनाएगा? यह सिविल इंजीनियर हैं जो कि 3:51:01 जम्मू कश्मीर के ग्रामीण विकास विभाग में 3:51:03 काम करते हैं। सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध 3:51:06 सिविल इंजीनियर मुख्य रूप से शिक्षा और 3:51:08 नवाचार से संबंधित सुधारों से इनका योगदान 3:51:10 जुड़ा रहता है। 2018 में इन्हें रेमन 3:51:13 मैक्स से अवार्ड दिया गया और 2016 में 3:51:15 रोलेक्स अवार्ड प्रदान किया गया। 3:51:18 झीलों का संरक्षण लेह लद्दाख क्षेत्र में 3:51:20 कृत्रिम ग्लेशियर इत्यादि के निर्माण से 3:51:23 इन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली। 3:51:24 एजुकेशन एंड कल्चर मूवमेंट माफ़ कीजिएगा। 3:51:27 एजुकेशन एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख। ये 3:51:30 सेकमोल जो है इसके इन्हीं के द्वारा 3:51:32 स्थापित संगठन है और वर्तमान में ये 3:51:34 पर्यावरण संबंधी जो मुद्दे हैं खासतौर पर 3:51:37 लद्दाख के उनको लेकर अक्सर भूख हड़ताल पर 3:51:40 बैठते हैं। बिलअर्जुन सिंह हैं। ये एक 3:51:42 शिकारी थे और उसके बाद आप देखेंगे कि ये 3:51:45 जीव-जंतु संरक्षक बन जाते हैं। इनके काम 3:51:47 से प्रभावित होकर सरकार ने इन्हें 3:51:49 पद्मश्री दिया। 1995 में 2006 में पद्म 3:51:52 पद्म भूषण दिया गया और उसके बाद वर्ल्ड 3:51:54 वाइल्ड लाइफफ़ फंड के द्वारा इनको गोल्ड 3:51:56 मेडल दिया गया 1996 में। चंडी प्रसाद भट्ट 3:51:59 गांधी जी की विचारधारा पर चलने वाले 3:52:01 पर्यावरण विद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 3:52:04 गोपेश्वर में दशोली ग्राम स्वराज संघ जो 3:52:07 है दशोली यहां देखें दशोली ग्राम स्वराज 3:52:11 संघ इसको डीजीएसएस भी कहा जाता है। तो 3:52:14 इसकी स्थापना करने वाले यही व्यक्ति हैं। 3:52:16 चंडी प्रसाद भट्ट चिपको मूवमेंट उसका यह 3:52:19 मातृ संगठन सिद्ध हुआ। उसके ये मुख्य 3:52:21 कार्यकर्ता भी थे। उसके बाद कम्युनिटी 3:52:23 लीडरशिप के लिए इन्हें रेमन मैक्ससे 3:52:25 अवार्ड दिया गया था। भारत सरकार द्वारा 3:52:27 2005 में पद्म भूषण दिया गया। फिर गांधी 3:52:30 शांति पुरस्कार दिया गया 2013 में। 3:52:33 सामाजिक पारिस्थितिकी पर काम करने के लिए 3:52:35 इनको जाना जाता है और आधुनिक भारत का 3:52:37 प्रथम पर्यावरण विद्वान माना जाता है। 3:52:39 इसके बाद आप देखेंगे बाबा आमटे को मुरलीधर 3:52:42 देवीदास आमटे इनका नाम है। इनको बाबा आमटे 3:52:44 कहा जाता था। ये भी निश्चित तौर पर 3:52:46 पर्यावरण विद है और समाजसेवी। तो गांधी जी 3:52:49 के विचारों का इन पर भी प्रभाव है। 3:52:52 चंद्रपुर महाराष्ट्र स्थित आनंद वन इनका 3:52:54 प्रमुख स्थान था। कुष्ठ रोगियों के लिए 3:52:57 बहुत सारे आश्रमों की इन्होंने और 3:52:58 समुदायों की स्थापना की। पर्यावरण संरक्षण 3:53:01 के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। पूरा 3:53:03 जीवन वन्य जीव संरक्षण और नर्मदा बचाओ 3:53:05 आंदोलन में समर्पित हो गया। 1971 का समय 3:53:08 पद्मश्री दिया गया। 1985 में रेमन मैक्ससे 3:53:11 और डेमिटन डट्टन माफ़ कीजिएगा डेमियन डट्टन 3:53:15 ये अवार्ड है। 1983 में इनको मिला था 3:53:17 कुष्ठ रोग के क्षेत्र में काम करने के 3:53:19 लिए। और पद्म विभूषण इन्हें प्राप्त हुआ 3:53:21 1986 में और अंततः गांधी पुरस्कार गांधी 3:53:24 शांति पुरस्कार इन्हें दिया गया 99 में। 3:53:26 विश्व की अनेक संस्थाएं इन्हें पुरस्कृत 3:53:29 कर चुकी हैं। इसके बाद है सुंदरलाल 3:53:30 बहुगुणा। 3:53:32 ये भी गांधीवादी पर्यावरण विद है। इनकी 3:53:34 पत्नी है विमला बहुगुणा और मूल विचार जो 3:53:37 चिपको मूवमेंट का है वो इनकी वाइफ का था। 3:53:39 इनकी पत्नी का था। लेकिन उसे मूर्त रूप 3:53:42 देने का काम साकार रूप देने का काम यह 3:53:44 सुंदरलाल बहुगुणा ने किया था। 1980 से 3:53:47 लेकर 2004 3:53:48 इस बीच में टिहरी बांध के निर्माण के 3:53:51 विरोध में जो आंदोलन चल रहा था उसको यह 3:53:52 लीड कर रहे थे और टिहरी बांध का जो बनने 3:53:55 का प्रभाव था उसके कारण जो पड़ने वाला 3:53:58 प्रभाव था उसके संबंध में लोगों को 3:54:00 इन्होंने जागरूक किया। सामाजिक रूप से ये 3:54:02 बहुत ज्यादा सक्रिय थे। महिलाओं और गरीबों 3:54:04 को उनके अधिकार दिलाने का प्रयास हमेशा 3:54:06 करते रहे। दलितों को मंदिर में प्रवेश 3:54:08 दिलाने की कोशिश इन्होंने की थी। इन्हें 3:54:10 वृक्ष मित्र कहा जाता है चिपको मूवमेंट से 3:54:12 जुड़े होने की वजह से और पर्यावरण और 3:54:14 सामाजिक क्षेत्रों में कई सारे काम 3:54:16 इन्होंने किए। कई सारी संस्थाओं ने इन्हें 3:54:18 पुरस्कार दिया। भारत में इन्हें पद्मश्री 3:54:20 मिल चुका है और पद्म विभूषण मिल चुका है। 3:54:23 इसके बाद अब कुछ बायोम देख लेते हैं। वहां 3:54:26 पर व्यक्ति और उससे पहले हमने पुरस्कारों 3:54:28 को देखा। अब यहां बायोम है, अवस्थिति है, 3:54:31 जलवायु है, मृदा है, पादप और जंतु है। 3:54:33 मतलब बायोम कितने प्रकार के होते हैं? नाम 3:54:35 दिया है। कहां पर कौन सा बायोम मिलेगा 3:54:37 आपको? किस अक्षांश में, किस देशांतर में 3:54:40 जलवायु वहां की कैसी होगी? वहां की मिट्टी 3:54:42 कैसी होगी? वहां कौन-कौन से पौधे और 3:54:44 कौन-कौन से जानवर पाए जाएंगे? यह आपको पता 3:54:46 होना चाहिए। तो वही चीज यहां टैबुलर फॉर्म 3:54:49 में है। इसे आप देख रहे हैं। सबसे पहले है 3:54:52 उष्णकटिबंधीय बायोम। तो यह जो 3:54:54 उष्णकटिबंधीय बायोम है, ये आपको विषुवत 3:54:56 रेखा के समीप मिलेगा। यानी इक्वेटर जो बीच 3:54:59 का हिस्सा है। माफ़ कीजिएगा ये पृथ्वी जो 3:55:01 है ये अच्छी नहीं बनी है। चलिए एक कल्पना 3:55:04 से आप बना लीजिए। मतलब ये बीच का जो बीच 3:55:06 की जो काल्पनिक लाइन हम लोग खींचते हैं ये 3:55:08 इक्वेटर होता है। बीचोंबीच से पृथ्वी को 3:55:10 ऐसे आधे-आधे दो कटोरों में बांट देती है। 3:55:12 हेमिस्फयर में बांट देती है। तो इधर वाला 3:55:15 नॉर्दन नॉर्दन हेमिस्फयर हो जाता है। इधर 3:55:17 वाला साउथर्न हेमिस्फयर हो जाता है। 3:55:19 इक्वेटर पर जिन देशों की अवस्थिति या जिन 3:55:21 जमीन के हिस्सों की मतलब भूभागों की 3:55:23 स्थिति पाई जाती है। वहां पर जो जंगल उगते 3:55:25 हैं वो उष्णकटिबंधीय प्रकार के होते हैं। 3:55:27 इन्हें पानी अच्छा खासा मिल जाता है। 3:55:29 बारिश लगभग रोज होती है। तापमान हमेशा 3:55:31 पूरे साल भर ऊंचा बना रहता है। है ना? और 3:55:34 सूर्य का प्रकाश इन्हें प्रचुर मात्रा में 3:55:36 मैक्सिमम प्राप्त होता है। तो यही चीज 3:55:39 यहां दी हुई है। आप देख रहे हैं विषुवत 3:55:41 रेखा के पास वाले इलाके इसमें कवर होते 3:55:43 हैं। और ऐसा जो बायोम होता है इसमें पूरे 3:55:45 साल भर तापमान ऊंचा होता है। 200 3:55:46 सेंटीमीटर से हमेशा ज्यादा ही बारिश होती 3:55:49 है। और आप देखते हैं अपने यहां जो मैदानी 3:55:51 इलाका है जो चार महीने बरसात के जैसे तैसे 3:55:54 होते हैं उसमें भी ठीक से बारिश नहीं होती 3:55:56 है। कभी-कभी मूसलाधार नहीं तो सूखा ही 3:55:58 पड़ा रहता है। है ना? तो इन चार महीनों 3:56:00 में आप देखते हैं कि आपके आसपास चाहे आप 3:56:02 कितने भी अर्बनाइज एरिया में रह रहे हो 3:56:04 हरियाली की मात्रा बढ़ जाती है। हरीभरी जो 3:56:08 वनस्पतियां हैं वो आपको ज्यादा मात्रा में 3:56:10 दिखने लगती है। सिर्फ चार महीने में भी 3:56:11 छिटपुट वर्षा की वजह से ऐसा होता है। तो 3:56:14 अब आप कल्पना करिए कि और गांव गिरावं या 3:56:16 फिर खुले मैदान या ऐसे आइसोलेटेड एरिया 3:56:19 में अगर आप रह रहे हैं तो आप बरसात को 3:56:20 बहुत बढ़िया से एक्सपीरियंस करेंगे। आपको 3:56:22 घास ना जाने कितनी बार अपने एरिया की साफ 3:56:24 करवानी पड़ती है। अभी मैंने अपने फील्ड की 3:56:27 साफ करवाई है। यह घासे जो है घुटने तक 3:56:29 पहुंच जाती है। कटवाइए फिर जम जाती है। 3:56:31 अगर कच्ची जमीन आपके पास है और बरसात का 3:56:33 मौसम है। मतलब वनस्पतियां बहुत तेज-तेज़ 3:56:35 बढ़ती हैं। नीम के पत्ती के पत्ते आप 3:56:38 तोड़िए सुबह के समय खाने के लिए और उसके 3:56:40 बाद फिर अगले दिन जब आइए तो वहां नए-नए 3:56:42 पत्ते फिर तैयार रहते हैं। है ना? मतलब 3:56:44 रात में ही वो अंकुर जो है वो बड़े हो गए। 3:56:47 तो बहुत तेज ग्रोथ होती है बरसात के मौसम 3:56:49 में। अब यही बरसात का मौसम अगर पूरे साल 3:56:51 भर बना रहे तब तो साल भर बना रहेगा और 3:56:55 वैसे ही तापमान उच्च रहेगा तो ये 3:56:57 वनस्पतियों के विकास के लिए एकदम आइडियल 3:56:59 कंडीशन होती है। परिणाम यह होता है कि 3:57:02 पूरे दैत्याकार ऐसे घने और ऊंचे वृक्ष 3:57:04 पैदा होते हैं जो कि सूर्य की रोशनी को भी 3:57:07 जमीन छूने नहीं देते हैं। उनकी कैनोपी 3:57:10 इतनी सघन और आपस में गुथी हुई होती है और 3:57:12 कहा जाता है कि ये सदाबहार है। यानी इनका 3:57:14 पतझड़ कभी नहीं आता है। ऐसा नहीं है। 3:57:16 पतझड़ किसी पेड़ का ना आए। ये वनस्पति के 3:57:18 दृष्टिकोण से वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही 3:57:21 नहीं होता है। पतझड़ होता है लेकिन एक 3:57:23 पेड़ का पतझड़ हुआ। उसके बगल वाला जो 3:57:25 पड़ोसी है वो हराभरा हो गया है। उसने पहले 3:57:27 ही अपने पत्ते झाड़ दिए थे और अब नए पत्ते 3:57:29 आ गए। तो पता ही नहीं चलता है कि कौन सा 3:57:31 पेड़ ठूठा है और किस में पत्तियां लगी। है 3:57:34 ना? मतलब मालूम नहीं होता है। एक का पतझड़ 3:57:36 हुआ तो 10 ठे उसके अगल-बगल जो है वो तैयार 3:57:38 खड़े हैं। पत्तियां उनके पास ढेर सारी 3:57:40 हैं। तो इस वजह से हमेशा हरियाली बनी रहती 3:57:42 है। यहां की जो मिट्टी है पहले एक जमाना 3:57:44 था कि बहुत उपजाऊ थी। लेकिन अब जो हरेभरे 3:57:47 यहां ऊंचे ऊंचे वृक्ष जमे हुए हैं 3:57:49 उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में या बायोम 3:57:51 में तो यह वृक्ष उन मिटियों को पूरी तरह 3:57:54 से निचोड़ चुके हैं और ऊपर से जो बारिश का 3:57:56 पानी वहां लगातार पहुंचता रहता है उसकी 3:57:58 वजह से मिट्टी की ऊपरी परत साफ हो गई। तो 3:58:01 यहां लैटराइट प्रकार की मिट्टी पाई जाती 3:58:03 है। पोषक तत्व और उर्वरता दोनों ही कम है। 3:58:05 ऐसा नहीं था कि शुरुआत में ऐसा था। अगर 3:58:08 शुरुआत में इसी प्रकार की स्थिति रही होती 3:58:09 तो पौधे इतने सघन नहीं पैदा हुए होते। 3:58:11 बारिश चाहे जितनी हो। है ना? लेकिन ये वजह 3:58:14 है लंबे समय से वहां पर दोहन हो रहा है 3:58:17 मिट्टी का और दोहन पौधे ही कर रहे हैं और 3:58:19 कोई दूसरा नहीं कर रहा है। अब अगर जितने 3:58:21 भी उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन है अमेजन के 3:58:24 जंगल है या जो भी इस तरह के जंगल हैं उनको 3:58:26 अगर काट देना रहे जड़ से और वहां नए सिरे 3:58:28 से जंगल उगाने रहे तो तमाम तरह की 3:58:30 दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और जो 3:58:32 वनस्पतियां हैं वो भी वैसी नहीं पैदा 3:58:34 होंगी। हो सकता है कोई घास का अच्छा खासा 3:58:36 मैदान तैयार हो जाए लेकिन वैसे जंगल 3:58:39 दोबारा दोबारा उगा पाना कम से कम अभी तो 3:58:42 संभव नहीं है। तो यहां की जो जैव विविधता 3:58:45 है ये सर्वाधिक होती है। आर्किड फर्न, 3:58:48 पादप, सरिस्रप, उभयचर जंतु, बंदर और न 3:58:50 जाने कितने तरह के छोटे स्तनधारी जंतु 3:58:53 मतलब जीव-जंतु, कीड़े-मकोड़ों और पक्षियों 3:58:55 की अनगिनत प्रजातियां पाई जाती हैं। 3:58:59 तो जितनी वनस्पतियों की प्रजातियां पाई 3:59:01 जाती है उतने ही जंतुओं की प्रजातियां पाई 3:59:04 जाती हैं। इसके बाद अब मानसूनी वन जो होते 3:59:06 हैं उस उनके बायोम को देख लेते हैं। तो 3:59:08 मानसूनी वन का वन का जो बायोम होता है ये 3:59:10 मध्य अक्षांशों में पाया जाता है। मध्य 3:59:13 अक्षांश का मतलब कि इक्वेटर के पास भी 3:59:14 नहीं और ध्रुवों के पास भी नहीं बीच वाले। 3:59:17 तो ऐसी स्थिति जो होती है मतलब ऐसी 3:59:19 अक्षांशीय स्थिति जो होती है उसमें आप 3:59:21 देखेंगे कि गर्मी और सर्दी दोनों ऋतुएं 3:59:23 स्पष्ट रूप से आती हैं और जो औसत वार्षिक 3:59:27 वर्षा है वो उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन या 3:59:29 जो उष्णकटिबंधीय बायोम है उसके जैसी नहीं 3:59:32 होती है। ट्रॉपिकल बायोम जैसी स्थिति यहां 3:59:33 पर नहीं है। ये मानसूनी बायो बायोम है। तो 3:59:36 मानसूनी बायोम में 75 से 125 सेंटीमीटर की 3:59:39 औसत वार्षिक वर्षा होती है। वो भी बरसात 3:59:41 के मौसम में हमेशा नहीं। तो यहां की 3:59:43 मिट्टी वैसी नहीं है। मतलब धुली हुई नहीं 3:59:45 है। उसके ऊपर एक उपजाऊ परत बनी रहती है। 3:59:48 तो पोषक तत्वों से समृद्ध मिट्टी है। यहां 3:59:50 जो जंगल पाए जाते हैं वो कड़ी लकड़ी वाले 3:59:52 होते हैं। जैसे कि ओक का पेड़, नीम का 3:59:54 पेड़, शीशम का पेड़। हालांकि नीम का पेड़ 3:59:57 तो बहुत तरह के बायोम में आपको दिख सकता 3:59:58 है। ये मल्टीपर्पज होता है तो उसी के 4:00:02 साथ-साथ ये हर जगह पाया भी जाता है। हो 4:00:04 सकता है कि जहां पाया जाए वहां की दशाओं 4:00:07 के हिसाब से इसकी पत्तियों और इसके रंग 4:00:08 रूप में थोड़ा बदलाव देखने के लिए मिल 4:00:10 जाए। लेकिन ये लगभग हर तरह की जलवायु में 4:00:13 पैदा हो सकता है। एक्सट्रीम जो एकदम कोल्ड 4:00:15 डेजर्ट वाला एरिया है उसको छोड़कर 4:00:18 रेगिस्तान में भी ये बड़े आराम से पनप 4:00:20 लेता है। बस यही बात है कि पत्ती झड़ जाती 4:00:22 है। ठूठा एकदम खड़ा रहता है वैसे ही। ठीक 4:00:24 है? तो भेड़िया, भालू, उभयचर जंतु और सर्प 4:00:27 और पक्षी तमाम तरह के कीड़े मकोड़े ये सब 4:00:30 पाए जाते हैं। मानसूनी वन बायोम। इसके बाद 4:00:32 जो मरुस्थलीय बायोम होता है ये मध्य 4:00:34 अक्षांशों में आमतौर पर मिलता है। लेकिन 4:00:37 हर मध्य अक्षांश के क्षेत्र में नहीं जो 4:00:39 महाद्वीपों के पश्चिमी किनारे हैं वहां पर 4:00:41 पाया जाता है। तो मरुस्थल जहां-जहां पाए 4:00:44 जाते हैं मतलब गर्म मरुस्थल जहां-जहां पाए 4:00:47 जाते हैं उनकी बात हो रही है। अत्याधिक 4:00:49 गर्म दिन होते हैं और रातें उतनी ही ठंडी 4:00:51 होती है। हालांकि रेगिस्तान हमेशा गर्म हो 4:00:53 ये आवश्यक नहीं है। ठंडे रेगिस्तान भी पाए 4:00:55 जाते हैं। यहां जो गर्म रेगिस्तान है उसकी 4:00:57 बात हो रही है। खनिज तत्वों से मिट्टी 4:01:00 समृद्ध होती है। लेकिन अपघटक नहीं पाए 4:01:02 जाते या बहुत कम पाए जाते हैं। तो रात 4:01:05 बहुत ठंडी हो जाती है और दिन उतने ही गर्म 4:01:08 होते हैं। बालू जितनी जल्दी गर्म होता है 4:01:11 उतनी जल्दी ठंडा होता है। औसत वार्षिक 4:01:13 वर्षा निहायत ही कम होती है। 25 से 30 4:01:15 सेंटीमीटर उससे भी कम। कैक्टस पाए जाते 4:01:17 हैं। गुच्छेदार घास पाई जाती है। झाड़ियां 4:01:20 पाई जाती है। कुछ पेड़ पाए जाते हैं। 4:01:21 छिटपुट खेजड़ी वगैरह है ना। छिपकली, ऊंट, 4:01:24 सर्प, लोमड़ी इस तरह के जंतु पाए जाते 4:01:26 हैं। ऐसे जानवर होते हैं जो कि बिना पानी 4:01:29 के भी लंबे समय तक सर्वाइव कर सके। इसके 4:01:32 बाद अब घास भूमि जो है उसका अपना बायोम 4:01:34 होता है। तो ग्रासलैंड का इकोसिस्टम या 4:01:36 ग्रासलैंड का जो बायोम है उसको देख लीजिए। 4:01:38 ये मध्य अक्षांशों और महाद्वीपों के 4:01:40 आंतरिक हिस्सों में पाया जाता है। अंदरूनी 4:01:42 भागों में तटवर्ती हिस्सों में नहीं। इसकी 4:01:44 पोषकता बहुत उच्च होती है। मिट्टी काफी 4:01:46 फर्टाइल होती है और शीत और उष्ण दोनों 4:01:50 प्रकार के यह हो सकते हैं। मतलब ठंडे 4:01:52 इलाके में भी हो सकते हैं। गर्म इलाके में 4:01:53 भी हो सकते हैं। वर्षा होती है 25 से 75 4:01:56 के बीच में। ज्यादा नहीं होती है। कम भी 4:01:58 नहीं होती। तो शाकीय वनस्पतियां पाई जाती 4:02:01 हैं। छोटे पौधे होते हैं। कुछ छिटपुट पेड़ 4:02:03 होते हैं। मतलब घास का मैदान ऐसे पूरा 4:02:06 फैला हुआ है। तो उसमें कुछ ऐसे डॉटेड 4:02:08 एरिया के रूप में पेड़ जगह-जगह बिखरे हुए 4:02:10 हैं। लेकिन सघन नहीं होते। तो उत्तर 4:02:12 अमेरिका में प्रयरी डॉग्स की प्रजाति की 4:02:15 जो गिलहरी है, अफ्रीका में लोमड़ी है, 4:02:17 सर्प है, कीट है, हाथी, जेब्रा, शेर, 4:02:20 जिराफ बहुत कुछ जानवर इसमें पाए जाते हैं। 4:02:22 ये जो बड़े वाले जानवर हैं, ये इसलिए यहां 4:02:24 पर मौजूद होते हैं क्योंकि इन्हें शिकार 4:02:26 मिलता है। और छोटे वाले जानवर घास के लालच 4:02:28 में आते हैं। तो एक पूरी फूड चेन यहां 4:02:31 बनती है और एक फूड चेन नहीं अनेकों यानी 4:02:33 पूरा एक फूड नेट तैयार हो जाता है। टैगा 4:02:35 बायोम को देखेंगे। ये मध्य और उच्च 4:02:37 अक्षांशों में पाए जाते हैं। ठंडी बहुत 4:02:39 ज्यादा होती है। ठीक है? मतलब अत्यंत शीत 4:02:42 ऋतु जो है और कुल मिलाकर बात यह है कि 4:02:46 यहां जो औसत वार्षिक वर्षा है एक साल में 4:02:48 वो 50 सेंटीमीटर से कम होती है। यानी 4:02:51 बारिश वैसे भी बहुत ज्यादा नहीं हो रही 4:02:52 है। जो हो रही है वो बस इतनी ही है। 4:02:55 अम्लीय मिट्टी होती है और खनिज तत्वों की 4:02:57 उसमें कमी होती है। तो आप समझ सकते हैं आप 4:03:00 कि अम्लीय मिट्टी है। एसिडिक सोइल है तो 4:03:02 उसमें पौधे उतनी अच्छे ढंग से या एकदम ही 4:03:04 नहीं उग पाएंगे। तो वृक्षों में स्प्रूस 4:03:06 उग सकता है, फल उग सकता है, पाइन और बर्थ 4:03:09 जैसे जो वृक्ष हैं वो पैदा होते हैं। 4:03:10 सदाबहार वृक्ष यहां आमतौर पर रेयर ही 4:03:13 दिखाई देते हैं। तो इसमें भालू, रोडेंट्स 4:03:15 और तमाम तरह के जो अन्य छोटे-छोटे जीव हैं 4:03:19 वो पाए जाते हैं। मिंक, रेंडियर और भेड़िए 4:03:21 भी पाए जाते हैं। ठीक है? भेड़िया भी पाया 4:03:23 जाता है। टुंड्रा बायोम जो है यहां सर्दी 4:03:25 बहुत कड़क पड़ती है। एकदम कठोर लंबी होती 4:03:28 है। ना सिर्फ तगड़ी होती है बल्कि लंबी 4:03:30 होती है। और गर्मी का मौसम बहुत ही छोटा 4:03:32 सा होता है। तो 60° से लेकर 90° अक्षांश 4:03:36 यानी वही जो ध्रुवीय वृत्त है पृथ्वी का 4:03:39 जो पूरा स्ट्रक्चर है इसमें 4:03:42 1 सेकंड। हां। ये जो ऊपर का हिस्सा है 4:03:46 नॉर्थ पोल और नीचे का हिस्सा साउथ पोल। ये 4:03:49 जो हिस्सा है इसको पोलर सर्किल के तौर पे 4:03:51 आप देखते हैं। तो ये आपका आर्कटिक सर्किल 4:03:54 हो गया। ये नीचे अंटार्कटिक सर्किल हो 4:03:55 गया। बीच में आपका इक्वेटर बनाना नहीं 4:03:57 पड़ा। ये लाइन पहले से थी और यहां पे आपका 4:03:59 ट्रॉपिक ऑफ कैंसर। यहां ट्रॉपिक ऑफ़ 4:04:01 कैप्रीिकॉर्न। तो ये वाला जो आर्कटिक 4:04:03 सर्किल है इसके अंदर आने वाला जो हिस्सा 4:04:05 है। ठीक है? 60 से लेकर 90° अक्षांश। 60 4:04:09 से लेकर 90° अक्षांश यहां तक। तो यह वाली 4:04:13 जो कंडीशन होती है, यह वाली जो पोजीशन 4:04:15 होती है, यहां पर बहुत ज्यादा कड़ी ठंडी 4:04:17 पाई जाती है। ध्रुव के पास वाला क्षेत्र 4:04:19 है, सूर्य का प्रकाश ऐसे तिरछा इनको 4:04:21 प्राप्त होता है। सीधा मिलता ही नहीं। तो 4:04:23 साल के आधे समय अंधेरा और आधे समय उजाला। 4:04:26 निम्न पोषण स्तर होता है मिट्टी का और जो 4:04:28 भी मिट्टी है वो एकदम ऊंची मोटी बर्फ की 4:04:30 तह के नीचे दबी हुई होती है। तो कुछ 4:04:32 छिटपुट घास यहां उग जाती है। वो भी गर्मी 4:04:34 के मौसम में। बांस, लाइगेन और तमाम तरह के 4:04:37 छोटे-मोटे पौधे पाए जाते हैं। कैरिबू, 4:04:39 आर्कटिक, लोमड़ी, उल्लू, रोडेंट्स और तमाम 4:04:42 तरह के जो ध्रुवीय जीव हैं वो यहां पर 4:04:44 मौजूद होते हैं। टुंड्रा बायोम को आपने 4:04:46 देखा। इसके बाद अब आगे चलते हैं। यहां 4:04:48 देखें आप आद्रभूमि और रामसर कन्वेंशन। 4:04:51 तो आद्रभूमि दलदल कीचड़ युक्त पीठ युक्त 4:04:54 भूमि होती है। ऐसा पानी का क्षेत्र होता 4:04:56 है जो कि प्राकृतिक अथवा कृत्रिम हो सकता 4:04:58 है या स्थाई भी हो सकता है और अस्थाई भी 4:05:00 हो सकता है। कहीं एक थोड़े समय के लिए 4:05:04 पानी इकट्ठा होना शुरू हुआ और वहां पर 4:05:07 दलदल जैसी स्थितियां बन गई। भाई किसी भी 4:05:09 सूखी पड़ी खाली पड़ी जमीन में लगातार अगर 4:05:11 पानी जाकर स्टोर होगा, रुकेगा तो वह 4:05:14 मिट्टी धीरे-धीरे मुलायम होती जाएगी और 4:05:16 अंत में एकदम धंसने वाली हो जाएगी। अंदर 4:05:18 उसके नमी घुस जाएगी। दलदल बन जाएगा। ठीक 4:05:21 है? तो दलदल युक्त जमीन वो स्थाई भी हो 4:05:24 सकती है, अस्थाई भी हो सकती है। पता लगा 4:05:26 किसी जमीन में ऐसे ही नाली का पानी बह रहा 4:05:29 है। तो कुछ समय के लिए वो छोटी-मोटी गढ़ 4:05:31 बन गई या फिर एक दलदल बन गया। फिर वहां पर 4:05:33 उसको मिट्टी पटवाकर किसी ने अपना फ्लैट 4:05:35 खड़ा कर लिया। अपनी बिल्डिंग बनवा ली। तो 4:05:37 वह दलदल खत्म हो गया। तो मतलब आद्रभूमियां 4:05:39 स्थिर भी हो सकती है, अस्थिर भी हो सकती 4:05:41 हैं। स्थिर में आप कोई तालाब या कोई झील 4:05:43 देख सकते हैं जो कि दलदल युक्त है। बहता 4:05:46 हुआ पानी भी हो सकता है, रुका पानी भी हो 4:05:48 सकता है। शर्त यही है कि दलदल होनी चाहिए। 4:05:50 और हां यह पानी मीठा भी हो सकता है, खारा 4:05:52 भी हो सकता है। तो जैसे समुद्र के किनारे 4:05:56 वाले जो दलदली क्षेत्र हैं जैसे कि ए्चुरी 4:05:58 है, डेल्टा है तो इसमें 6 मीटर तक की 4:06:00 गहराई वाला जो उथला समुद्री क्षेत्र है वो 4:06:03 भी कवर हो जाता है। कुल मिलाकर आप जो पूरी 4:06:06 दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महत्व की 4:06:08 आद्रभूमियां है उनको रामसर कन्वेंशन के 4:06:10 अंतर्गत रामसर साइट के रूप में मान्यता 4:06:12 मिलती है। तो रामसर कन्वेंशन है क्या? 4:06:15 पहली चीज तो यह समझे कि आद्रभूमियों की 4:06:17 इतनी चर्चा ही क्यों हो रही है? यह जो 4:06:19 आद्रभूमियां है यह असल में पृथ्वी के लिए 4:06:21 वृक्क का काम करती है। जैसे उष्णकटिबंधीय 4:06:24 वर्षावन पृथ्वी के फेफड़े कहे जाते हैं 4:06:26 वैसे ही ये पृथ्वी के वृक्क है यानी 4:06:29 पृथ्वी की किडनियां हैं। जैसे किडनी हमारे 4:06:31 खून को छानकर साफ करती है ना और शरीर में 4:06:34 विषैले पदार्थों को इकट्ठा नहीं होने 4:06:35 देती। वैसे ही यह पानी का शोधन करती हैं। 4:06:38 आद्रभूमियां जो हैं ये पानी के अंदर से 4:06:40 हानिकारक तत्वों को रोक लेती हैं और भूमि 4:06:42 जल को रिचार्ज करती हैं। ग्राउंड वाटर 4:06:44 इससे रिफिल रिचार्ज होता है और उतना ही 4:06:46 नहीं ये बहुत सारी जीव-जंतुओं और वनस्पति 4:06:49 प्रजातियों का घर होती है। आपने देखा है 4:06:52 अपने आसपास कोई ऐसी जल में डूबी हुई जमीन 4:06:56 गढ़ही जैसी या झील उसमें क्या होता है? 4:06:58 बहुत तरह के पानी वाले पक्षी बदखे रहते 4:07:01 हैं। अपने आसपास आप ऐसे भी देखेंगे कि 4:07:04 जैसे अभी जो डेवलप हो रही कॉलोनियां होती 4:07:07 हैं। वहां पर कुछ फ्लैट जो है वो बन चुके 4:07:09 हैं खूब भव्य और कुछ फ्लैट जो है अभी खाली 4:07:12 है। उनको किसी ने बनवाया नहीं है। तो होता 4:07:15 ये है कि जो बन चुके हैं वो मकान अब ऊंचे 4:07:17 हो गए हैं। वहां मिट्टी डलवाकर पहले ऊंचाई 4:07:19 बढ़ाई गई। फिर कुर्सी खूब ऊंची ली गई। फिर 4:07:20 ऊंची बिल्डिंग खड़ी की गई। तो उसकी तुलना 4:07:23 में जो बगल वाला फ्लैट है जो कि अभी बना 4:07:24 नहीं है वो नीचा हो जाता है और उस ऊंची 4:07:27 वाली बिल्डिंग उस ऊंचे मकान का जो नया नया 4:07:29 बना हुआ है उसका गंदा पानी उसी फ्लैट में 4:07:31 होकर बहता है। अब वहां पर पानी धीरे-धीरे 4:07:33 करके स्टोर हुआ। वहां एक छोटा-मोटा दलदल 4:07:35 एक गढ़ही जैसी तैयार हो गई। उस छोटे से 4:07:38 फ्लैट में जो बगल में था। अब उसमें आकर 4:07:40 बतखे रहने लगती है। लाल-लाल चोंच वाली बतख 4:07:42 और लंबे-लंबे पैर वाले बगुले है ना और 4:07:45 बहुत तरह के मेंढक तो वो भी एक छोटी मोटी 4:07:47 आदर्द्रभूमि है। कुछ कछुए भी अगर बड़े 4:07:50 साइज का है तो कहने का मतलब कि ये 4:07:52 आद्रभूमियां कहीं भी हो सकती हैं। किसी भी 4:07:54 रूप में हो सकती हैं। और जहां भी होती हैं 4:07:56 ये ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने का काम 4:07:58 करती हैं। वो बगल में जो आद्रभूमि तैयार 4:08:00 हो रही है वो भी पानी में नमी को बनाकर 4:08:02 मतलब पानी की नमी को जमीन में बनाकर 4:08:04 रखेगी। 4:08:05 लेकिन समस्या यह है कि दुनिया भर में यह 4:08:07 बहुत तेज रफ्तार में नष्ट हो रही है। तब 4:08:10 इनके संरक्षण की आवश्यकता है। 2 फरवरी 4:08:13 1971 को ईरान का जो कैस्पियन सागर है उसके 4:08:16 तट पर रामसर नाम का शहर है। वहां पर ये 4:08:18 कन्वेंशन हुआ था। एक सम्मेलन था जिसमें कि 4:08:21 एक अंतरराष्ट्रीय संधि होती है और तमाम 4:08:23 देश उसमें हस्ताक्षर करते हैं। यह संधि 4:08:25 अंतिम में 21 दिसंबर 1975 से जाकर प्रभावी 4:08:28 होती है। 71 का ये कन्वेंशन है लेकिन जो 4:08:31 संधि का प्रभावी होने का मतलब काम करना 4:08:33 करना शुरू करने की तारीख है वो 1975 है। 4:08:37 उद्देश्य बिल्कुल सीधा है कि जो 4:08:39 आद्रभूमियां है उनका संरक्षण करना और हां 4:08:41 उनका बुद्धिमत्ता पूर्ण इस्तेमाल करना। 4:08:43 यानी उनके पारिस्थितिकीय गुण को बनाए रखना 4:08:46 और उसका इस्तेमाल करना और उसका सतत और 4:08:47 संतुलित प्रयोग करना। 4:08:50 तो कुल मिलाकर इसमें जो देश शामिल होते 4:08:52 हैं वह अपने अपने एरिया में अपने-अपने 4:08:55 इलाके में आद्रभूमियों के संरक्षण पर बल 4:08:57 देते हैं। और इसमें जो पार्टीज शामिल है। 4:09:00 पार्टी मतलब देशों की ही बात हो रही है। 4:09:03 172 है वर्तमान में। स्विट्जरलैंड का जो 4:09:05 ग्लैंड शहर है वहां इसका मुख्यालय है, 4:09:07 सचिवालय है और कन्वेंशन की वर्षगांठ हर 4:09:10 साल 2 फरवरी को विश्व आद्रभूमि दिवस यानी 4:09:12 वर्ल्ड वेटलैंड डे के तौर पर मनाई जाती 4:09:14 है। तो ये वही तारीख है जो जिस तारीख पर 4:09:18 रामसर कन्वेंशन को ऑर्गेनाइज किया गया था। 4:09:21 यही चीजें इसमें है। कुछ नया नहीं है। 4:09:22 अच्छा आप यहां कुछ जरूरी फैक्ट देख लीजिए। 4:09:25 जैसे कि ऑस्ट्रेलिया में स्थित है कोबोर्ग 4:09:27 प्रायद्वीप। गारिक गुनाक बारलू राष्ट्रीय 4:09:30 उद्यान इसको कहा जाता है। गारिक गुनाक 4:09:32 बारलू नेशनल पार्क 8 मई 1974 को पहला 4:09:36 रामसर यही घोषित हुआ था और दुनिया में 4:09:39 सबसे ज्यादा जो रामसर साइट है वो यूनाइटेड 4:09:41 किंगडम यानी ब्रिटेन में है। कुल मिलाकर 4:09:43 176 सबसे बड़ा जो आद्रभूमि संरक्षित 4:09:46 क्षेत्र है यानी रामसर क्षेत्र है वह 4:09:47 बोलीविया में है और यह लगभग 14.8 से लगभग 4:09:51 15 मिलियन हेक्टेयर में फैला हुआ है। 15 4:09:53 मिलियन हेक्टेयर इसका क्षेत्रफल है। आप 4:09:55 अंदाजा लगा सकते हैं कितना बड़ा है। तो यह 4:09:57 तो दुनियादारी हो गई। अब अपने देश को 4:09:59 देखें। 1 फरवरी 1982 हस्ताक्षर किया हमने 4:10:03 और भारत भारत में इसके संरक्षण और 4:10:05 क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय पर्यावरण वन 4:10:08 और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ही नोडल है। 4:10:10 इसरो और पर्यावरण मंत्रालय के नवीनतम 4:10:13 मूल्यांकन के हिसाब से जिसे कि राष्ट्रीय 4:10:14 आद्रभूमि सूची और मूल्यांकन कहा जाता है। 4:10:17 भारत का जो टोटल ज्योग्राफिकल एरिया है 4:10:19 भौगोलिक क्षेत्रफल है उसका लगभग 5.12% 4:10:24 5.12% 4:10:26 और वैसे अगर आप आंकड़े में देखेंगे तो 4:10:28 16.89 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र आदर्द्र 4:10:31 भूमि के अंतर्गत आता है। 4:10:34 वैसे अगर अपने देश का हम आकलन करें तो 4:10:37 एशिया में सबसे ज्यादा आद्रभूमियां अपने 4:10:39 पास ही हैं। भारत की पहली जो दो रामसर 4:10:42 साइट्स है शुरुआती उसमें चिल्का है उड़ीसा 4:10:45 की और दूसरा है केवलादेव राजस्थान का। 4:10:48 दोनों को भारत में रामसर अभी समय यानी 4:10:50 रामसर कन्वेंशन के तहत 1 अक्टूबर 1981 को 4:10:53 एक साथ एक साथ अंतरराष्ट्रीय महत्व के 4:10:56 स्थल के रूप में रामसर की सूची में शामिल 4:10:58 किया गया था। तमिलनाडु वर्तमान में 20 4:11:01 रामसर स्थलों के साथ शीर्ष स्थान पर है। 4:11:03 तो जैसे-जैसे रामसर स्थलों की घोषणा होती 4:11:05 है, ये डाटा बदलता रहता है। फिलहाल की यही 4:11:07 स्थिति है कि तमिलनाडु टॉप पर है। 20 4:11:09 रामसर स्थल इसके पास एक समय था कि उत्तर 4:11:12 प्रदेश सबसे ऊपर था। तो ये ऊपर नीचे होता 4:11:14 रहता है। तो समय जब भी आप इस वीडियो को 4:11:16 देख रहे हो इस डाटा को अपडेट करते रहिएगा। 4:11:18 वर्तमान के लिए ये अपडेटेड है और उसके बाद 4:11:22 उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर आता है। पहले 4:11:24 यूपी पहले स्थान पर था अभी दूसरे स्थान पर 4:11:26 चला गया है। 13 अपने पास और तमिलनाडु के 4:11:28 पास है 20। 4:11:30 ठीक है? और उत्तर प्रदेश में खोजा जाए तो 4:11:32 सैकड़ों मिलेंगे और हर प्रदेश की वही बात। 4:11:35 तमिलनाडु 20 रामसर स्थलों के साथ टॉप पर 4:11:37 है। अच्छा अब यहां पर सबसे बड़ा, सबसे 4:11:39 छोटा, सबसे दक्षिणी, सबसे उत्तरी ऐसे करके 4:11:41 आपको देखना है और यह पूछा भी जाता है। तो 4:11:44 सबसे बड़ा जो रामसर स्थल है वो सुंदरवन 4:11:46 है। पश्चिम बंगाल का 4230 के आसपास इसका 4:11:49 वर्ग कि.मी. में दायरा है। सबसे छोटा है 4:11:52 वबनूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स और ये तमिलनाडु 4:11:55 में है। 0.1975 4:11:57 स्क्वायर कि.मी. इसके बाद भारत का जो सबसे 4:12:00 उत्तरी रामसर स्थल है वो वूलर है। सबसे 4:12:02 दक्षिणी है वबनूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स 4:12:04 कन्याकुमारी वाला। अच्छा वूलर वाला आप 4:12:06 जानते ही हैं जम्मू कश्मीर में है। सबसे 4:12:08 पूर्वी यानी ईस्टर्न मोस्ट जो है वो लोकटक 4:12:10 है मणिपुर की। लोकटक झील वही फुंडी आइलैंड 4:12:13 वाली। और सबसे पहला जो कृत्रिम रामसर स्थल 4:12:16 है वो हरिके बैराज है। हरिके बैराज है। 4:12:20 भारत का सबसे पश्चिमी रामसर स्थल ये आपका 4:12:23 छरी ढांड है और ये पड़ता है कच्छ में। 4:12:25 कच्छ के रण में यानी गुजरात में। और ऐसा 4:12:27 राज्य जिसमें कि कोई रामसर नहीं है वो 4:12:29 तेलंगाना है, नागालैंड है और मेघालय है। 4:12:32 ऐसा संभव नहीं है कि यहां पर आद्रभूमियां 4:12:34 नहीं होंगी। लेकिन कायदे से सर्वे नहीं 4:12:36 हुआ है या फिर उन्हें महत्व नहीं दिया गया 4:12:37 है। तो अब ये बड़ी वाली सूची है। इसमें 4:12:40 सारे रामसर स्थलों के नाम राज्यवार दिए 4:12:43 हुए हैं। कहां पर कितने हैं और कौन-कौन 4:12:45 से? तो हम एक क्रम से चलेंगे। जिसके पास 4:12:48 सबसे ज्यादा है उनको सबसे पहले देखेंगे। 4:12:49 तो तमिलनाडु पहले नंबर पर है। 20 रामसर 4:12:51 स्थलों के साथ कौन-कौन से हैं? आइए देखें। 4:12:54 चित्रांगुदी है, मन्नार की खाड़ी है, 4:12:57 करंजीकुलम है, करी किली है, कुथनकुलम है, 4:13:01 पल्ली करनई है। मार्श रिजर्व फॉरेस्ट इसको 4:13:04 कहा जाता है। पिचवरम मैंग्रोव है। पॉइंट 4:13:06 कैलमेरे है। सुचिंद्रम थेरूर वेटलैंड 4:13:09 परिसर है। उदय मार्तंडपुरम पक्षी अभयारण्य 4:13:11 है। वुहूर पक्षी अभयारण है। वेदांगथंगल 4:13:14 पक्षी अभयारण्य है। बेलोड पक्षी अभयारण्य 4:13:16 है। बबनूर है। करावेटी है। लांगवुड शोला 4:13:18 रिजर्व फॉरेस्ट है। काजूवेली है। नंजरायन 4:13:22 है। ठीक है? थेरथंगल है। यह सब पक्षी 4:13:25 अभयारण है। बर्ड सेंचुरी है। सक्काई है या 4:13:27 शराक कोटई इसको कहा जाता है। अब अपने 4:13:30 उत्तर प्रदेश में आ जाइए। पटना पक्षी 4:13:31 अभयारण्य है जो कि असल में पटना में नहीं 4:13:33 बल्कि एटा में है। बखीरा है। हैदरपुर 4:13:36 आद्रभूमि है। नवाबगंज पक्षी अभयारण्य है। 4:13:38 पार्वती अरगा है। समन पक्षी अभयारण्य है। 4:13:40 समसपुर है, सांडी है, सरसई नवार झील है, 4:13:43 सुरसरोवर है जिसको कीथम भी कहते हैं। 4:13:45 अपरगंगा रिवर वाला हिस्सा है। ठीक है? 4:13:48 उसके अलावा शेखा झील है। जयप्रकाश नारायण 4:13:50 पक्षी अभयारण्य यानी सुरहात ताल है बलिया 4:13:53 का। कुल मिलाकर ये 13 हैं। बिहार में भी 4:13:56 छह हैं। कांवर ले है, नांगी है, नकटी है, 4:13:58 गोकुल है और गोगाबील है। साथ में उदयपुर। 4:14:01 उड़ीसा में भी छह हैं। अंसुपा, भदरकणिका, 4:14:03 चिल्का, हीराकुंड, सतकोसिया और तंपारा। 4:14:07 इसके बाद है पंजाब। पंजाब में भी छह हैं। 4:14:10 बिहार में छह, उड़ीसा में छह, पंजाब में 4:14:13 छह। तो पंजाब में आप देखें व्यास संरक्षण 4:14:15 रिजर्व है। व्यास कंजर्वेशन रिजर्व हरिकेय 4:14:18 है कांजली है या ये कृत्रिम है। ध्यान 4:14:20 दीजिएगा। इसके अलावा केशवपुर मियानी है 4:14:22 कम्युनिटी रिजर्व नांगल है रोपण है। 4:14:25 गुजरात में पांच हो गया खिजड़िया नलसरोवर 4:14:27 थोल लेखक बध बधावन या बधवाना कहा जाता है 4:14:31 और छरधांड है जो कि कच्छ के रंग में है। 4:14:34 इसके बाद जम्मू कश्मीर में पांच है हुकेरा 4:14:36 हाईगम शैलबुध सुरिंसर मानसर और वूलर लेक। 4:14:42 नेक्स्ट राजस्थान में पांच है केवलादेव, 4:14:45 सांभर, खींचन यह फलौदी वाला है। मेनार 4:14:48 पक्षी अभयारण्य उदयपुर का और सिलीसरा यह 4:14:50 अलवर का है। मध्य प्रदेश में भी पांच 4:14:53 आद्रभूमियां मतलब रामसर स्थल आपको दिखाई 4:14:55 दे रहे हैं। भोज है, सांख्य सागर है, 4:14:57 सिरपुर है, यशवंत सागर है, तवा जलाशय है। 4:15:00 कर्नाटक में चार हैं। रंगनाथ हिट, 4:15:02 मगाडीगरे, अंक समुद्रम और अग्नाशिनी। 4:15:06 अग्नाशिनी नदी का नाम है। उसका जो मुहाना 4:15:08 है वो असल में एक ऐश्वरी है। इसके बाद 4:15:10 हिमाचल प्रदेश का जो तीन रामसर है उसको 4:15:13 देख लेते हैं। एक तो है चंद्रताल, पोंग 4:15:15 डैम है और रेणुका है। केरल में भी तीन है 4:15:17 अष्टमुदी, षष्क कोटा और वबानद कोल 4:15:20 आद्रभूमि। महाराष्ट्र में भी तीन लोनार 4:15:23 झील, नंदू मधमेश्वर और ठाणेकरी। इसके बाद 4:15:26 हरियाणा को देखते हैं। भिंडावास है और 4:15:28 सुल्तानपुर है। सुल्तानपुर राष्ट्रीय 4:15:31 उद्यान। लद्दाख में भी दो हैं। एक तो सकर 4:15:34 है। दूसरा सरीरी है। ये दोनों झील हैं। 4:15:36 इसके बाद पश्चिम बंगाल में आ जाइए। पूर्वी 4:15:39 कोलकाता आद्रभूमि है और सुंदरवन जो कि 4:15:41 सबसे बड़ा रामसर है। सिर्फ दो ही है लेकिन 4:15:43 बड़े आकार के। आंध्र प्रदेश में कोलेरू, 4:15:46 असम में भी यहां देखिए सब जितने हैं ना सब 4:15:48 में एक-एक है। अब आंध्र में भी एक है। असम 4:15:51 में भी गोवा में भी सब में एक। तो आंध्र 4:15:53 में कोलेरू, असम में देपोर भील, गोवा में 4:15:55 नंदा झील, मणिपुर में लोकटक, मिजोरम में 4:15:58 पाला। ठीक है? त्रिपुरा में रुद्रसागर, 4:16:01 उत्तराखंड में आसन कंजर्वेशन, सिक्किम में 4:16:03 खेचरोपरी, झारखंड में उधवा, छत्तीसगढ़ में 4:16:06 कोपरा जलाशय। ठीक वैसे ही आप देखेंगे 4:16:09 अरुणांचल में गुलाब झील है जो कि अरुणाचल 4:16:11 का पहला रामसर स्थल है। 5 जून 2026 तक की 4:16:15 बात की जा रही है। अब अपने यूपी को 4:16:17 देखेंगे। अब हमने क्या किया? पहले पूरी 4:16:19 दुनिया को देखा। उसके बाद पूरे देश को 4:16:20 देखा। अब प्रदेश को देखेंगे क्योंकि 4:16:22 परीक्षा तो हमें प्रदेश की ही देनी है। 4:16:25 हां, अगर आप यूपीएससी की तैयारी कर रहे 4:16:27 हैं और सहयोग इस वीडियो को देख रहे हैं तो 4:16:29 आप इस हिस्से को छोड़ सकते हैं। यूपी वाला 4:16:32 छोड़ सकते हैं क्योंकि इस चीज को आपने उसी 4:16:34 में देख लिया है। इसे स्पेशली देखने की 4:16:35 आवश्यकता नहीं। 4:16:37 तो रामसर स्थल का नाम देख रहे हैं। यहां 4:16:39 पर अपरगंगा रिवर ब्रज घाट से नरोरा तक यह 4:16:42 पहला इसका घोष इसकी घोषणा हुई थी 2005 4:16:44 में। हापुड़, अमरोहा, बुलंदशहर और संभल को 4:16:47 यह कवर करता है। यह उत्तर प्रदेश का सबसे 4:16:49 पहला और सबसे बड़ा रामसर स्थल है और यह 4:16:52 डॉल्फिन के लिए जाना जाता है। दूसरा है 4:16:56 आपका नवाबगंज 2019 उन्नाव में है। इसका 4:16:59 नया नाम है शहीद चंद्रशेखर आजाद राष्ट्रीय 4:17:01 उद्यान। क्षमा कीजिएगा। पक्षी उद्यान या 4:17:04 पक्षी अभयारण्य आप कह सकते हैं अभयारण्य। 4:17:06 कहेंगे तो आपको समझने में आसानी होगी। 4:17:08 बर्ड सेंचुरी कनेक्ट करना आसान हो जाएगा। 4:17:11 इसके बाद आप पार्वती अरगा को देख रहे हैं। 4:17:13 गोंडा का है और यह सरयू नदी के द्वारा 4:17:16 निर्मित जो धनुषकार झील है पार्वती और 4:17:18 अरगा उनके सौजन्य से बना हुआ है। ठीक है? 4:17:21 दो झील हैं पार्वती और अरगा दोनों आपस में 4:17:24 मिल गई धनुष के आकार में। इसके बाद 2019 4:17:27 का ये गोंडा वाला देख लिया। समन को देख 4:17:29 लीजिए भाई। समन पक्षी अभयारण्य मैनपुरी का 4:17:31 है। यह एक मौसमी धनुषाकार यानी आसबो लेखक 4:17:35 है। धनुषकार कहना बहुत सही नहीं है। 4:17:37 ऑक्सबो यानी गोखुर झील जैसी। गोखुर झील का 4:17:41 मतलब समझ रहे हैं? नदियां अपने रास्ते में 4:17:43 जो पर्वतीय नदियां होती हैं मियंडर्स 4:17:45 बनाती हैं। ऐसे विसर्पण करती हैं। सर्प के 4:17:48 आकार में ऐसे मुड़ते हुए आड़ा तिरछा आड़ा 4:17:50 तिरछा चलती हैं। बहुत से स्थानों पर क्या 4:17:52 होता है कि यही जो नदियों का मोड़ है, ऐसे 4:17:54 ऐसे ऐसे लहरा लहरा कर चल रही हैं। 4:17:56 कहीं-कहीं ये ज्यादा लहराने लगती हैं। जब 4:17:58 ज्यादा लहराने लगती है तो आपस में ऐसे 4:18:00 जाकर गुथ जाती है। फिर यहां से फिर अपना 4:18:02 रास्ता पकड़ के आगे बढ़ जाती हैं। तो ये 4:18:04 बीच में जो लहराकर इन्होंने एक बल खा लिया 4:18:07 था यानी मोड़ ले लिया था। तो इनकी शाखाएं 4:18:09 दोनों जो धाराएं हैं वो आपस में उलझी और 4:18:12 जब प्रवाह धीमा हुआ तो यहां बालू की एक 4:18:14 दीवार खड़ी हो गई। अब यहां जो पानी आया था 4:18:16 वो लौट के वापस नहीं जा सका। पानी यहीं पर 4:18:19 रुक गया और ये छोटा-मोटा मोड़ में ही रहता 4:18:22 है। बहुत बड़े साइज का रहता है और इसमें 4:18:24 पानी का जमाव हो गया। ये मीठा पानी ही है। 4:18:26 अब नदी इसके बगल से होकर गुजरती है और बीच 4:18:29 में नदी के और इस गड्ढे के बीच में एक 4:18:31 बालू की दीवार है। मोटी दीवार। तो ये बन 4:18:34 जाती है झील। और इसी को कहा जाता है गोखुर 4:18:36 झील। क्योंकि आमतौर पे अगर देखा जाए तो 4:18:39 गाय के खुर के जैसी होती है। गाय के खुर 4:18:41 के आकार की होती है। तो ये गोखुर झील है। 4:18:43 यहां चर्चा की गई उसकी। इसके बाद आप देख 4:18:45 रहे हैं और प्रवासी पक्षी ऐसे स्थानों पर 4:18:47 आते ही हैं। समसपुर पक्षी अभयारण्य है 4:18:49 रायबरेली का। पक्षियों की 250 से भी 4:18:51 ज्यादा प्रजातियां यहां पर पाई जाती हैं। 4:18:53 छह झीलों का पूरा एक बड़ा समूह है। 2019 4:18:56 में इसको रामसर में शामिल किया गया। सांडी 4:18:58 जिसको कि दहर झील भी कहा जाता है। यह 4:19:01 सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के लिए एक 4:19:03 महत्वपूर्ण स्थान है। हरदोई जगह 2019 सरसई 4:19:06 नवार इटावा का है। स्थाई दलदली क्षेत्र 4:19:08 है। मूल रूप से सारस क्रेन जो उत्तर 4:19:11 प्रदेश का राजकीय पक्षी है उसके बड़े-बड़े 4:19:13 झुंड यहां पर पाए जाते हैं और दुनिया भर 4:19:15 में फेमस। सुरसरोवर आगरा का है। इसको कीथम 4:19:18 झील भी कहा जाता है। कृत्रिम मानव निर्मित 4:19:20 झील है। लेकिन यह भी पक्षियों का आवास। 4:19:22 हैदरपुर आदर्द्रभूमि हस्तिनापुर वन्य जीव 4:19:24 अभयारण्य की सीमाओं के भीतर है और यह भी 4:19:26 आर्टिफिशियल है। बिजनौर और मुजफ्फरपुर में 4:19:30 इसका विस्तार है। 2021 में इसको मान्यता 4:19:32 मिली थी। इसके बाद है बखीरा। संत कबीर नगर 4:19:36 यानी मगहर में है और ये पूर्वी उत्तर 4:19:38 प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक बाढ़ वाले 4:19:40 मैदान की आद्रभूमि। 2022 में इसको मान्यता 4:19:43 मिली पटना पक्षी अभयारण आपका एटा में है 4:19:45 ही है। क्षेत्रफल के आकार क्षेत्रफल और 4:19:48 आकार के लिहाज से अगर देखा जाए तो ये सबसे 4:19:50 छोटा है। यूपी का सबसे छोटा पक्षी 4:19:52 अभयारण्य है। एटा में मौजूद है। 2026 में 4:19:54 इसको शामिल किया गया। शेखा झील अलीगढ़ की 4:19:58 ताजे पानी की झील है और सबसे छोटा रामसर 4:20:00 स्थल है। ध्यान दीजिएगा यहां पे सबसे छोटा 4:20:03 रामसर नहीं कहा गया था। पटना पक्षी 4:20:05 अभयारण्य जो है यह सबसे छोटे पक्षी 4:20:06 अभयारण्यों में से एक है। लेकिन यहां पर 4:20:09 जो बात हो रही है शेखा की तो यह ताजे पानी 4:20:11 की झील है और हां यह उत्तर प्रदेश का सबसे 4:20:13 छोटा रामसर स्थल है। बलिया का सुरह ताल 4:20:15 यानी जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य ये 4:20:18 भी एक ऑक्सबो लेखक है और बहुत बड़े साइज 4:20:19 की है। 2026 में शामिल हुई। यह बना हुआ है 4:20:22 नक्शा यूपी का और इसमें आप उन सभी पक्षी 4:20:25 अभयारण्यों और रामसर को देख रहे हैं। जैसे 4:20:27 कि देखिए यहां पर हैदरपुर वेटलैंड है 4:20:29 बिजनौर का। एक सेकंड हां हैदरपुर वेटलैंड 4:20:32 है बिजनौर का। सांडी आप देख रहे हैं हरदोई 4:20:34 का ब्रिजघाट नरौरा वाला जो स्ट्रेच है ये 4:20:37 बुलंदशहर का हो गया पटना पक्षी अभयारण्य 4:20:39 एटा का हो गया सुरसरोवर आगरा का समन 4:20:42 मैनपुरी और सरसई नवार इटावा फिर इसके बाद 4:20:46 नीचे रायबरेली का समसपुर है ही है गोंडा 4:20:48 का पार्वती अरगा हो गया वैसे ही सुरह ताल 4:20:51 बलिया का हो गया और भदोही के माफ़ कीजिएगा 4:20:54 यहां पर संत कबीर नगर होना चाहिए संत 4:20:56 रविदास नगर नहीं तो संत कबीर नगर का बखीरा 4:20:59 हो गया ये देखने के बाद अब आगे चलते हैं 4:21:01 यहां देखें आप यूनेस्को की जो वर्ल्ड 4:21:03 हेरिटेज साइट्स हैं भारत में उनको देखने 4:21:05 की आवश्यकता है। तो विश्व धरोहर स्थल क्या 4:21:09 होते हैं? यह ऐसे स्थान होते हैं जिसे कि 4:21:11 संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और 4:21:13 सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को के द्वारा 4:21:16 प्रशासित और कानूनी संरक्षण प्राप्त किया 4:21:18 जाता है। मतलब यूनेस्को इसको कानूनी 4:21:20 संरक्षण देता है। 4:21:23 तो दुनिया भर में सांस्कृतिक और प्राकृतिक 4:21:25 विरासत का क्षेत्र इन्हें माना जाता है और 4:21:27 मानवता के लिए इनका उत्कृष्ट मूल्य है। 4:21:30 2026 तक दुनिया भर में 1273 ऐसे स्थान है 4:21:33 जिन्हें कि वैश्विक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक 4:21:35 और प्राकृतिक महत्व के तौर पर देखा जाता 4:21:38 है। 61 विश्व धरोहर सूत अह स्थान यहां 4:21:41 देखें। 61 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थान जो 4:21:44 हैं वह इटली के पास है और वह दुनिया में 4:21:45 इस मामले में पहले स्थान पर है। दूसरे 4:21:48 स्थान पर है चीन। 60 इसके पास वर्ल्ड 4:21:50 हेरिटेज साइट्स। तीसरे स्थान पर है 4:21:53 जर्मनी। और भारत की स्थिति क्या है? तो 4:21:55 हमारे पास 45 है टोटल। 37 इसमें से कल्चरल 4:21:58 हैं। सात नेचुरल है और एक जो है वो मिक्स 4:22:01 है। ठीक है? अब यहां पर भारत के जो 45 4:22:04 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है उनके साथ यह 4:22:06 छठवें स्थान पर है और इसके इतिहास, 4:22:08 संस्कृति और आध्यात्मिकता के समृद्ध 4:22:10 स्वरूप को हम देख पाते हैं।कि अपने देश 4:22:12 में है तो हम पहले से ही उसके इतिहास और 4:22:14 उसके महत्व से परिचित हैं। अब ये एक 4:22:16 यूनेस्को का अटैक लग गया तो उसे और महत्व 4:22:18 प्राप्त हो गया। हालांकि हमारी जो 4:22:20 सांस्कृतिक विरासतें हैं वो किसी परिचय या 4:22:22 फिर किसी लेबल या तमंगे की मोहताज नहीं 4:22:25 है। उनकी पहचान और उनकी कदर हमें होनी 4:22:27 चाहिए। अपने से होनी चाहिए। अब यहां देखिए 4:22:30 आप सबसे पहली बार जो वर्ल्ड हेरिटेज साइट 4:22:32 के तौर पर शामिल होने वाली इमारत थी वो थी 4:22:34 आगरा का किला 1983 में शामिल हुआ। 4:22:38 ठीक है? तो यहां पर जो 45 यूनेस्को साइट्स 4:22:41 हैं उनका दिया हुआ है। नाम दिया है, वर्ष 4:22:43 दिया है, कब शामिल हुए, राज्य दिया है और 4:22:45 उसके बारे में थोड़ा सा डाटा जो कि आपको 4:22:48 जानना चाहिए। तो आगरा का किला 1983 उत्तर 4:22:51 प्रदेश ऐतिहासिक किला है और मुगल सम्राटों 4:22:54 का मुख्य निवास स्थान यह 1638 तक रहा। जब 4:22:57 बाद में राजधानी को आगरा से दिल्ली 4:22:58 स्थानांतरित किया गया तो इसके बाद फिर 4:23:00 चीजें बदल गई। तो आगरा किला जो है यह 4:23:03 यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में पहले 4:23:05 नंबर पर मतलब पहली बार शामिल हुआ था। इसके 4:23:08 बाद अजंता की गुफाएं हैं। तो अजंता की 4:23:11 गुफाओं को भी 83 में ही महाराष्ट्र की है 4:23:13 और इन्हें शामिल किया गया था। ये बौद्ध 4:23:15 प्रेरणा पर आधारित है। बौद्ध कला है। रॉक 4:23:18 कट गुफाएं हैं। चट्टानों को तराश कर इनको 4:23:20 बनाया गया है। सिंगरिया पेंटिंग जैसी 4:23:22 कलाकृतियां और भित्ति चित्र से भव्य रूप 4:23:24 से इनको चमकाया गया। मतलब ना सिर्फ इसमें 4:23:26 आकृतियां उकेरी गई है बल्कि दीवारों पर 4:23:28 तमाम चित्र आपको दिखाई देते हैं और वही 4:23:30 इसकी खासियत है और चित्र भी काफी चटकमटक 4:23:32 है। इसके बाद आप एलोरा की गुफाओं को देख 4:23:35 रहे हैं। ये हिंदू मंदिरों और जैन, बौद्ध 4:23:37 मठों का घर है। यहां हिंदू, जैन और बौद्ध 4:23:40 तीनों प्रकार की शैलियां और तीनों प्रकार 4:23:42 के जो ऐतिहासिक चित्र हैं वो आपको दिख 4:23:44 जाएंगे। ये भी रॉक कट है। महाराष्ट्र की 4:23:47 है 1983। ताजमहल 1983 में शामिल हुआ यूपी 4:23:50 का। शाहजहां के आदेश पर 1631 से 48 के बीच 4:23:53 में बना। यह मकराना मार्बल से बना हुआ है। 4:23:56 उत्कृष्ट संगमरमर और बहुत सारे कारीगर और 4:23:59 बहुत सारा पैसा उतनी ही मेहनत इसमें खर्च 4:24:01 हुई। शाहजहां ने अपना खजाना ही खाली कर 4:24:03 दिया। इसके बाद महाबलीपुरम के जो स्मारक 4:24:05 स्मारक हैं उनको देख लेते हैं। पल्लव 4:24:07 राजवंश के द्वारा पल्लव डायनेस्टी के 4:24:09 द्वारा इनको बनाया गया है। छवीं शताब्दी 4:24:12 से लेकर नौवीं शताब्दी ईवी के बीच में इन 4:24:14 शासकों ने शासन किया था और यहां के 4:24:16 स्मारकों के समूह में चट्टानों को काटकर 4:24:18 बनाए गए जो गुफा मंदिर हैं, अखंड मंदिर 4:24:20 है, आधार रहित मूर्तियां हैं, संरचनात्मक 4:24:23 मंदिर है। उसके साथ-साथ मंदिरों के खुदाई 4:24:25 के अवशेष भी सम्मिलित है। 1984 कोणार्क का 4:24:29 सूर्य मंदिर ये भी 84 का है। उड़ीसा ये 4:24:32 भारत के पूर्वी तट पर है। पूरी राज्य मतलब 4:24:34 उड़ीसा राज्य के पूरी में स्थित है और 4:24:36 उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से 65 कि.मी. 4:24:39 की दूरी पर गोवा के चर्च और कान्वेंट जो 4:24:42 है ये ओरिएंट के रोम और जो मैनरस्ट बारो 4:24:47 कलारूप है उनका स्वरूप दिखाई देता है। 4:24:49 एशिया में पहला मैनुअल और पहला लैटिन रीट 4:24:53 मास जो है उसके तौर पर ये जाने जाते हैं। 4:24:54 कुल मिलाकर ये भी यूनेस्को की हेरिटेज 4:24:56 साइट में शामिल। फतेहपुर सीकरी उत्तर 4:24:59 प्रदेश में है। 1986 में शामिल हुआ। 37 4:25:01 कि.मी. ये आगरा से दूर पड़ता है। मूल रूप 4:25:04 से लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ ये पूरा शहर 4:25:07 है। और महान सूफी संत थे शेख सलीम चिश्ती। 4:25:10 उनके सम्मान में जलालुदुद्दीन माफ़ 4:25:12 कीजिएगा। जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के 4:25:14 द्वारा इसको बनाया गया। और भव्यता और 4:25:16 विशिष्टता के मामले में ये बेजोड़ है। 4:25:18 मुगल कला का पूरा नमूना है। हम्पी के 4:25:20 स्मारक हैं। वैभवशाली स्थल है हम्पी। और 4:25:23 जो विजयनगर साम्राज्य था उसकी राजधानी के 4:25:25 अवशेष यहां पर पाए जाते हैं। कर्नाटक में 4:25:27 है। 1986 का इसे मान्यता मिली हुई है। तो 4:25:31 यहां की जो संपत्ति है उसमें 4187.24 4:25:35 हेक्टेयर का पूरा ये बड़ा सा क्षेत्र कवर 4:25:36 होता है। तुंगभद्रा का ये पूरा बेसिन 4:25:38 एरिया है। विशिष्टताओं को साथ में जानना 4:25:41 इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्रश्न अब 4:25:43 सीधे-सीधे फैक्ट के तौर पर नहीं पूछे 4:25:45 जाते। मैक्सिमम प्रश्न ऐसे होते हैं 4:25:47 जिनमें तर्क की आवश्यकता होती है। अंदर तक 4:25:49 आपको गहराई तक उतर कर पढ़ने की जरूरत होती 4:25:51 है। ठीक है कि यूपीएससी जितनी गहराई नहीं 4:25:54 होती है लेकिन फिर भी अब प्रश्न उतने उथले 4:25:56 नहीं रह गए। खजुराहो के मंदिर ये मध्य 4:26:00 प्रदेश में है और ये छतरपुर जिला पड़ता है 4:26:02 मध्य प्रदेश का झांसी से लगभग 175 कि.मी. 4:26:04 यानी 109 मील की दूरी पर दक्षिण पूर्व में 4:26:07 हिंदू और जैन मंदिर दोनों का समूह है। 4:26:10 नागर शैली में ये मंदिर बने हुए हैं। 4:26:11 प्रतीकवाद और विशेष रूप से जो कामुक 4:26:13 मूर्तियां हैं, काम वासना से भरपूर 4:26:15 मूर्तियां हैं वो इसकी विशेषता है। ठीक 4:26:18 है? बहुत से परिवार अपने बच्चों के साथ 4:26:21 अपने छोटे जो उत्तराधिकारी हैं उनके साथ 4:26:24 जाने में असहज महसूस करते हैं। मूर्तियों 4:26:27 की मुद्राएं और जो चाल ढाल है वो कुछ ऐसी 4:26:29 है। हालांकि हर स्थान का और हर मूर्तिकला 4:26:32 का अपना महत्व होता है। तो उसका भी अपना 4:26:34 महत्व है। उसका भी अपना सांस्कृतिक महत्व 4:26:36 है। फिलहाल एलिफेंटा की गुफाओं को देखते 4:26:38 हैं। 1987 महाराष्ट्र बौद्ध और हिंदू 4:26:41 गुफाओं हेतु प्रसिद्ध है। अरब सागर में एक 4:26:44 द्वीप स्थित है और मतलब यह द्वीपीय 4:26:46 क्षेत्र है। यह कहने का मतलब है। वैसे तो 4:26:48 पूरा मुंबई और ठाणे जो आप देखते हैं, वह 4:26:51 सालट नाम का द्वीप ही है। लेकिन, यह जो 4:26:53 एलीफेंटा गुफाओं का क्षेत्र है, यह असल 4:26:55 में एक द्वीपीय इलाका है अरब सागर वाले 4:26:57 इलाके में। और इसमें शिव मंदिर और चट्टानी 4:26:59 गुफाएं पाई जाती है। तजावुर यहां देखें आप 4:27:03 यह 12वें नंबर का। तजापुर, गंगईकुंड, 4:27:06 गंगईकुंड, चोलपुरम और दारासुरम में जो 4:27:08 महान चोल मंदिर हैं, चोल राजाओं के द्वारा 4:27:11 बनवाए गए हैं। तीन मंदिरों का यह समूह है। 4:27:13 तमिलनाडु में। नौवीं से लेकर 12वीं 4:27:16 शताब्दी के बीच में दक्षिण भारत पर जो चोल 4:27:18 राजवंश के राजा शासन करते हैं, वह इनको 4:27:20 बनवाते हैं। तजाबुर में बृहदेश्वर मंदिर 4:27:23 जो कि सबसे बड़े आकार का है। गंगाईक 4:27:25 चोलपुरम जो कि गंगा घाटी में विजय प्राप्त 4:27:27 करने के उपलक्ष में गंगकोंड की उपाधि धारण 4:27:30 की गई थी। तो वहां का मंदिर और दारासुरम 4:27:32 का एरावतेश्वर मंदिर। ये सारे जो है इसमें 4:27:35 शामिल हैं। 4:27:37 ठीक है? इसके बाद पदकल 4:27:40 के जो स्मारक है उनको भी देख लेते हैं। 4:27:42 माल प्रभा के तट पर स्थित है यूनेस्को की 4:27:44 वर्ल्ड हेरिटेज साइट। 1987 में इसको 4:27:46 वर्गीकृत किया गया था। सातवीं और आठवीं 4:27:49 शताब्दी के दौरान चालुक्य वास्तुकला की 4:27:51 समृद्धि का ये प्रमाण देते हैं। तो पडक्कल 4:27:54 के ये जो मंदिर हैं ये चालुक्य वास्तु 4:27:56 वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं। बहुत ही 4:27:57 जटिलता से तराशे गए हैं। ठीक है? इसके बाद 4:28:01 सांची के बौद्ध स्मारक हैं और उस समय इस 4:28:03 स्थल पर सबसे पुराना जो संरक्षित स्मारक 4:28:06 था वह अशोक के स्तंभ के साथ जो एगमेड कला 4:28:08 से प्रेरित शेरों के प्रक्षेप मतलब कहने 4:28:11 का तात्पर्य है कि वो अशोक स्तंभ और शेरों 4:28:14 की मूर्तियां उनसे संबंध अब यहां इसमें 4:28:17 अन्य राजवंशों के भी नाम जुड़ते हैं। है 4:28:19 तो यह बौद्ध स्मारक यानी एक धर्म एक 4:28:22 संप्रदाय एक पंथ से जुड़ा हुआ है। लेकिन 4:28:24 इसमें तमाम राजवंशों के नाम आते हैं। जैसे 4:28:26 कि संपूर्ण मौर्य साम्राज्य में उसके बाद 4:28:28 भारत में शुंगों का जब शासन था सातवाहनों 4:28:30 का जब शासन था कुषाणों का जब शासन था यहां 4:28:33 तक कि गुप्तों का शासन था तो उस समय की जो 4:28:35 संस्कृतियां थी और उनकी जो कलाएं थी उनके 4:28:38 प्रसार के लिए मध्यस्थ के रूप में सांची 4:28:40 की भूमिका बड़ी रही है। यानी सांची जो है 4:28:42 वो इन सभी युगों का सभी जो राजवंश है उनके 4:28:45 शासनकाल का साक्षी रहा है और वहां से कुछ 4:28:48 ना कुछ इन सभी राजवंशों के विषय में 4:28:50 प्राप्त ही हो जाता है। इसके बाद हुमायूं 4:28:52 का मकबरा आप देख रहे हैं 1993 का है। यह 4:28:55 प्रारंभिक मुगल कला का मुगल स्थापत्य कला 4:28:58 का नमूना है। वास्तुकला के विकास में यह 4:29:00 मील का पत्थर है। निसंदेह है। 1993 में 4:29:02 इसको डिक्लेयर किया गया था यूनेस्को की 4:29:04 साइट के तौर पर। इसमें एक बीच में रास्ता 4:29:07 है जाने के लिए और किनारे-किनारे नहरे 4:29:09 हैं। बगीचे में मकबरे को बीचों-बीच बनाया 4:29:11 गया है। चारबाग शैली और बगीचा चारों ओर 4:29:13 लगाकर बीच में मकबरा या कब्र को बनाना, ये 4:29:16 बड़ी मतलब पहले की एक प्रचलित कला थी। तो 4:29:19 उसका नमूना यहां पर दिखता है। लेकिन ये 4:29:21 सबसे पुराना नमूना है उस तरह का। इसके बाद 4:29:23 कुतुब मीनार और बाकी इमारतें 102 में 4:29:26 कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा इसको बनवाना 4:29:27 शुरू किया गया था। लेकिन इल्तुतमिश ने 4:29:29 इसको पूरा करवाया। 4:29:31 ठीक है? और बहुत सारे जो अभी के शोधकर्ता 4:29:34 और लोग हैं वो ये मानते हैं कि कुतुब 4:29:36 मीनार भी कोई हिंदू स्थापत्य रहा होगा 4:29:39 जिसको कि ऐबक ने थोड़ा सा मॉडिफाई कर 4:29:41 दिया। जो भी रहा हो लेकिन ये इमारत है 4:29:43 अच्छी और ऐबक के द्वारा कहा जाता है कि 4:29:45 इसको शुरू किया गया था और इल्तुतमिश के 4:29:47 द्वारा अंततः इसे पूरा करवाया गया। फिर 4:29:49 बाद में इस पर बिजली गिर गई। जब बिजली गिर 4:29:51 गई तो इसको फिर से रिपेयर कराने की जरूरत 4:29:53 पड़ी और फिर आप देखेंगे कि मोहम्मद बिन 4:29:56 तुगलक के द्वारा भी इसकी मरम्मत कराई गई 4:29:58 थी। लोग मोहम्मद बिन तुगलक का इसमें नाम 4:30:00 नहीं लेते हैं। सीधे सीधे फिरोज शाह पर आ 4:30:02 जाते हैं। लेकिन एमबीटी के द्वारा भी इसको 4:30:04 रिपेयर करवाया गया था और फिरोज शाह तुगलक 4:30:06 के द्वारा भी इसमें मरम्मत का काम करवाया 4:30:08 गया था। इसके बाद भीमपेटका की गुफाएं हैं। 4:30:10 मध्य प्रदेश की। यह मध्य भारतीय पठार के 4:30:13 दक्षिणी किनारे पर विंध्य पर्वत की तलहटी 4:30:15 में स्थित है। बड़ी-बड़ी बलुआ पत्थर की 4:30:17 चट्टानें और उसके भीतर बनी हुई है ये 4:30:19 गुफा। इसमें तमाम तरह के भित्ति चित्र बने 4:30:22 हुए हैं। दीवारों पर तमाम तरह की आकृतियां 4:30:24 मतलब पेंटिंग उस समय की बनी हुई है। होता 4:30:27 ये था कि यहां पर चरवाहों के बच्चे गाय 4:30:29 चराते हुए और अपने मवेशी चराते हुए रुकते 4:30:31 थे। और आड़ी तिरछी आकृतियां ये दीवारों पर 4:30:35 खुदी हुई और बनी हुई देखकर आकर्षित होते 4:30:37 थे। तो उसमें दो चार अपनी ओर से भी बना 4:30:39 देते थे। लेकिन बाद में जब ध्यान से 4:30:41 जानकारों ने इसे देखा खासतौर पर वाकड़कर 4:30:43 महोदय के द्वारा देखा गया तो समझ में आया 4:30:46 कि इसका असल महत्व क्या है? यह चित्र कोई 4:30:48 साधारण चित्र नहीं है। ये काफी पुराने 4:30:50 हैं। ये हमारे पूर्वज हमारे लिए बनाकर 4:30:52 छोड़कर गए हैं। तब ये जो गुफाओं का समूह 4:30:55 है ये चर्चा में आता है और ये मध्यपाषाण 4:30:57 काल की बात है। ठीक है? मेसोलिथिक काल का 4:31:00 समय था। उस समय के ये बने हुए हैं। ऐसा 4:31:02 माना जाता है। इसके बाद चंपानेर और 4:31:04 पावागढ़ यह पुरातत्व उद्यान है। गुजरात का 4:31:07 2004 में यूनेस्को में सम्मिलित हुआ था और 4:31:10 यह अपनी प्राचीन हिंदू वास्तुकला मंदिर और 4:31:12 विशेष तौर पर जल संरक्षण के लिए जाना जाता 4:31:14 है। महमूद बेगड़ा के द्वारा 16वीं शताब्दी 4:31:17 में निर्मित जो राजधानी शहर है उससे भी 4:31:18 इसका संबंध है। सैन्य कृषि और जो सामाजिक 4:31:22 संरचना है उन सभी का ये केंद्र माना जाता 4:31:24 है। जामा मस्जिद जो है उसमें हिंदू और 4:31:26 मुस्लिम वास्तुकला दोनों का नमूना आप 4:31:28 देखते हैं। इसके बाद लाल किला परिसर है। 4:31:30 शाहजहानाबाद के किले के रूप में इसको 4:31:32 बनाया गया था। भारत के पांचवें मुगल 4:31:34 सम्राट यानी शाहजहां की राजधानी और लाल 4:31:37 बलुआ पत्थर से इसकी बड़ी-बड़ी दीवारें 4:31:39 बनाई गई है और इसीलिए इसको लाल किला कहा 4:31:41 जाता है। तो 2007 में इसको यूनेस्को में 4:31:44 शामिल किया गया था। 1546 में इस्लाम शाह 4:31:47 सूरी के द्वारा जो बनवाया हुआ पुराना किला 4:31:49 है सलीमगढ़ उसी के पास में ये स्थित। तो 4:31:52 ये तो आसपास की बात हो गई। मूल रूप से 4:31:54 हमें लाल किले को देखना था। तो हमने देखा 4:31:56 कब शामिल किया गया और इसमें कब इसे बनवाया 4:31:58 गया। कैसे राजस्थान के पहाड़ी किले ये 4:32:01 अपने आप में बहुत खास है क्योंकि दुश्मन 4:32:03 इनमें घुसने की चेष्टा करते-करते दम तोड़ 4:32:06 देता था। और मराठों और राजपूतों दोनों के 4:32:08 किले जो है वो अपने-अपने क्षेत्र में 4:32:10 प्रसिद्ध थे। तो राजपूत सैन्य रक्षा 4:32:12 वास्तुकला का ये उत्कृष्ट नमूना है। 4:32:14 कुंभलगढ़ का किला, सवाई माधोपुर का किला, 4:32:16 झालवाड़ का किला, जयपुर का किला, जैसलमेर 4:32:19 का किला, चित्तौड़गढ़ का किला। कुछ किले 4:32:21 तो ऐसे होते थे जो कि दूसरे किलों की 4:32:23 निगरानी के लिए बनाए जाते थे। वह जंगल में 4:32:25 छिपे हुए होते थे। आसानी से दिखते नहीं थे 4:32:28 और वह मुख्य किले की सुरक्षा और उसकी 4:32:29 निगरानी के लिए बनाए जाते थे ताकि दूर से 4:32:31 उन पर निगाह रखी जा सके। पाटन में रानी की 4:32:34 बावड़ी है। यह पुराना और बेजोड़ भारतीय 4:32:37 वास्तुकला का नमूना है। बावड़ी मतलब सीढ़ी 4:32:39 वाला कुआं। जमीन को गहराई तक खोदकर जमीन 4:32:42 से पानी निकालेंगे। लेकिन वहां तक पहुंचने 4:32:44 का भी इंतजाम करेंगे। ये नहीं कि बाल्टी 4:32:46 और डोर से खींच रहे हैं। अब राजा रजवाड़े 4:32:48 हैं तो भाई वो बाल्टी और डोर से खींच कर 4:32:50 तो नहाएंगे नहीं। उन्हें सीधा अंदर ही 4:32:52 जाना है। तो अंदर कपड़े बदलने की जगह होती 4:32:54 थी, बैठने की जगह होती थी। कई तरह की कमरे 4:32:57 जैसी संरचना बनी होती थी। सीढ़ियां होती 4:32:59 थी। मतलब सीढ़ी वाला कुआं। नालंदा में और 4:33:02 आजकल वो सस्पेंस और थ्रिलर का डेरा बन गया 4:33:05 है। इसके बाद नालंदा में नालंदा महाविहार 4:33:09 जो नालंदा विश्वविद्यालय था उसी की जड़ पर 4:33:11 इसको बाद में स्थापित किया गया। नालंदा 4:33:13 विश्वविद्यालय को तो बख्तियार खिलजी ने 4:33:14 ध्वस्त कर दिया था। तो कुल मिलाकर 13वीं 4:33:17 शताब्दी ईवी का एक मठ संबंधी शिक्षा 4:33:19 संस्थान और पुरातत्व अवशेष यहां पर मौजूद 4:33:22 है। मतलब तुर्कों के द्वारा इसको ध्वस्त 4:33:24 किया गया, जला दिया गया। तो उसके बाद पूरी 4:33:26 तरह से ये तबाह हो गया। यहां सिर्फ एक 4:33:28 टीला बचा और टीले का जब बाद में अन्वेषण 4:33:30 किया जाता है तो पता लगता है कि यहां तो 4:33:32 पूरी एक यूनिवर्सिटी रहा करती थी। ठीक है? 4:33:35 भारत की पर्वतीय रेलवे जो दार्जिलिंग की 4:33:38 है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे उसको भी 4:33:40 शामिल किया गया यूनेस्को में। चलती फिरती 4:33:41 चीज को भी यूनेस्को में शामिल किया जाता 4:33:43 है और 1881 में इसको शुरू किया गया था। 4:33:46 बाकी 1999 में इसे यूनेस्को की मान्यता 4:33:49 मिलती है। ये वेस्ट बंगाल का है मतलब 4:33:51 सुंदर पर्वतीय क्षेत्र के माध्यम से एक 4:33:53 प्रभावी रेल कलेक्शन स्थापित करने का और 4:33:57 ऐसे पहाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की 4:33:59 संरचना बना पाना मतलब रेलवे पटरी बिछा 4:34:02 पाना और रेल जला पाना ये सही में मुश्किल 4:34:04 काम है। लेकिन उसके बावजूद 1881 में इसको 4:34:06 शुरू किया गया और यह एक साहसिक और 4:34:09 आविष्कारशील जो इंजीनियरिंग समाधान है 4:34:12 उनका इस्तेमाल करती है। मतलब इंजीनियरिंग 4:34:14 का एक उत्कृष्ट नमूना है। कहने का मतलब ये 4:34:16 है। इसके बाद छत्रपति शिवाजी टर्मिनल है। 4:34:18 विक्टोरिया टर्मिनल इसको पहले कहा जाता 4:34:20 था। 19वीं सदी के अंत में रेलवे वास्तुकला 4:34:23 का यह उत्कृष्ट उदाहरण है। विक्टोरियन 4:34:25 गौथिक पुनरुद्धार जो शैली है उसकी ये 4:34:27 विशेषता मतलब यहां पर दिखाई देती है। 4:34:30 महाराष्ट्र में है। 2004 में इसको भी 4:34:32 यूनेस्को में शामिल किया गया था। 4:34:35 अब यहां देखें मतलब पुर्तगालियों से बंबई 4:34:37 शहर अंग्रेजों को उपहार स्वरूप मिलता है। 4:34:41 जब पुर्तगाल और इंग्लैंड के बीच में 4:34:43 वैवाहिक संबंध स्थापित होते हैं तो जो 4:34:45 दहेज में मिला हुआ बॉम्बे था उसको वहां के 4:34:48 मतलब ब्रिटेन के राजा कंपनी को दे देते 4:34:50 हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी को दे देते हैं कि 4:34:52 इसमें हमें किराया चाहिए। तुम लोग व्यापार 4:34:54 करो। तो सालसेट द्वीप जो है उस पर पूरा 4:34:56 व्यापार का काम ये शुरू करते हैं। बंबई 4:34:59 वैसे ही औद्योगिक क्षेत्र के तौर पर 4:35:00 विकसित होता है। इसकी सामरिक स्थिति भी 4:35:02 अच्छी होती है। बोधगया में महाबोधी मंदिर 4:35:05 परिसर है बिहार का। 4:35:08 यह प्रारंभिक ईंट की इमारतों में से एक और 4:35:11 वास्तुकला के विकास का इस पर बहुत ज्यादा 4:35:13 प्रभाव पड़ा है। मतलब स्तंभ स्मारक ये सब 4:35:15 बने हुए हैं। कुल मिलाकर नक्काशीदार पत्थर 4:35:18 का कटघरा और नक्काशीदार पत्थर की उभरी हुई 4:35:20 संरचनाएं ये सब इसकी विशेषता है। तो ये 4:35:23 2002 में शामिल किया गया था। जंतरमंतर 4:35:26 जयपुर का सवाई जय सिंह के द्वारा जय सिंह 4:35:29 द्वितीय के द्वारा इसको बनवाया गया था। ये 4:35:31 1734 की बात है। 2010 में इसको मान्यता 4:35:34 मिलती है और जंतरमंतर टालमिक स्थित स्थिति 4:35:38 खगोल विज्ञान के उत्कृष्ट उदाहरणों में से 4:35:40 एक है। कहने का मतलब ये है कि ये खगोलीय 4:35:43 संरचना है और जंतरमंतर को आप देखते हैं ये 4:35:46 राजस्थान में इसकी अवस्थिति है। लेह 4:35:49 काबुरिए का वास्तु शिल्प कार्य है। ये 4:35:51 चंडीगढ़ का है। मतलब चंडीगढ़ की पूरी जो 4:35:55 वास्तु है संरचना है उसको तैयार करने में 4:35:57 ले काबुर्जिए का अभिनय योगदान है। 17 4:36:00 वास्तुशिल्प परियोजनाएं जो हैं कई देशों 4:36:02 की वो इसमें शामिल हैं। इसके बाद आप 4:36:04 देखेंगे अहमदाबाद के ऐतिहासिक शहर गुजरात 4:36:07 साबरमती के पूर्वी तट पर 15वीं शताब्दी 4:36:09 में सुल्तान अहमद शाह के द्वारा स्थापित 4:36:12 जो चार दीवारी वाले शहर हैं वह काफी 4:36:14 अभिन्न विरासत के तौर पर देखे जाते हैं। 4:36:17 मतलब अंदर के किले उसके बाद बाहर किले बंद 4:36:20 शहर दीवारें, दरवाजे, मस्जिदें, कब्र सब 4:36:22 कुछ और बाद के समय में जो हिंदू और जैन 4:36:25 मंदिर हैं वो भी बनते हैं। मुंबई का 4:36:27 विक्टोरियन गौथिक आर्ट डेको समूह यह भी 4:36:30 शामिल किया गया यूनेस्को में महाराष्ट्र 4:36:32 सरकार की ओर से नवगाथिक की इमारतों में जो 4:36:34 सार्वजनिक इमारतें हैं उसमें यह अभिन्न 4:36:37 योगदान देता है मतलब ये महत्वपूर्ण है और 4:36:39 यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के तौर पर 4:36:41 इसको 2018 में मान्यता मिली थी। इसके बाद 4:36:44 है जयपुर शहर पूरा का पूरा। 1727 में सवाई 4:36:47 जय सिंह द्वितीय के द्वारा एक चारदीवारी 4:36:49 वाला बड़ा शहर बसाया गया था जो कि पहाड़ी 4:36:51 इलाकों के विपरीत अन्य शहरों के जैसा नहीं 4:36:54 था। मतलब अन्य शहरों से इसकी संरचना अलग 4:36:57 थी। पर्वतीय क्षेत्र में इसको ना विकसित 4:36:59 करके मैदानी इलाके में मतलब अरावली के 4:37:01 रेंज में ना विकसित करके जो मैदानी 4:37:03 क्षेत्र था वहां विकसित किया गया। और 4:37:05 वैदिक वास्तुकला का इसमें बढ़िया नमूना 4:37:07 आपको दिखाई देगा। ग्रिड शैली को भी इसमें 4:37:09 फॉलो किया गया है। ग्रिड योजना का पालन 4:37:11 किया गया है। इसके बाद काजीरंगा नेशनल 4:37:14 पार्क एक सींग वाले गैे के लिए जाना जाता 4:37:16 है। बाकी यहां एशियन एलीिफेंट और तमाम तरह 4:37:18 की प्रजातियां रहती हैं। 1985 में ये 4:37:20 शामिल हुआ। असम राज्य का है यह राष्ट्रीय 4:37:22 उद्यान। 4:37:24 गोलाघाट जिले में है आंशिक रूप से और बाकी 4:37:26 नगांव में पड़ता है। तो असम का सबसे 4:37:29 पुराना पार्क है। ब्रह्मपुत्र नदी इसके 4:37:31 उत्तर में पड़ती है और कारबी अगला की जो 4:37:33 पहाड़ियां हैं वो इसके दक्षिण में है। आप 4:37:35 समझ सकते हैं कि एक तरफ नदी और एक तरफ 4:37:37 पहाड़ी। तो ये बीच का जो क्षेत्र है ये 4:37:38 कितना जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए 4:37:41 उत्कृष्ट होगा। तो कुल मिलाकर 430 4:37:44 स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्र में यह फैला 4:37:46 हुआ है। इसके बाद केवलादेव है राष्ट्रीय 4:37:49 उद्यान। यह पहला पहला आर्कटिक जो प्रवासी 4:37:52 जल पक्षी हैं उनका एक शीतकालीन प्रवास 4:37:54 स्थल है। यहां पर वो माइग्रेट करके आते 4:37:56 हैं ठंडी के मौसम में। और गैर प्रवासी जो 4:37:59 निवासी हैं वो भी यहां पर बड़े पैमाने पर 4:38:01 रहते हैं। तो पक्षियों का ये प्रजनन स्थल 4:38:03 है और उनकी आबादी को बनाए रखने के लिए 4:38:05 जरूरी है। तो 1985 में इसको यूनेस्को में 4:38:07 डाला गया। मानस वन्य जीव अभयारण्य ये एक 4:38:10 हॉटस्पॉट भी है। जैव विविधता हॉटस्पॉट 4:38:12 39100 हेक्टेयर के क्षेत्र को ये कवर करता 4:38:15 है। मानस नदी तक ये पूरा फैला हुआ है। 4:38:17 मतलब भूटान के जंगल और पूरा वहां से लेकर 4:38:20 मानस नदी तक इसका विस्तार है। सुंदरवन को 4:38:22 आप पीछे से ही देखते आ रहे हैं। 1987 में 4:38:24 यूनेस्को में भी शामिल हो गया। यहां 4:38:27 दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव जंगल पाए 4:38:29 जाते हैं। सुंदरी के वृक्ष पाए जाते हैं। 4:38:31 इसीलिए इसको सुंदरवन कहा जाता है। सभी 4:38:33 प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों में सबसे 4:38:35 अधिक जैविक रूप से उत्पादक यही है। 4:38:37 उत्पादक जंगलों में से एक है। भारत और 4:38:39 बांग्लादेश के बीच में जो गंगा और 4:38:41 ब्रह्मपुत्र नदियों का मुहाना है उस पर ये 4:38:43 स्थित है। जंगल और जलमार्ग कई लुप्त प्राय 4:38:45 प्रजातियों सहित विभिन्न प्रकार के 4:38:47 जानवरों का घर है। ठीक है? है मैंग्रोव 4:38:49 वैसे भी मैंग्रोव और एस्चुरी और इस तरह के 4:38:51 जो गरान इत्यादि होते हैं वो क्या बहुत 4:38:54 सारी जीव प्रजातियों के निवास स्थान होते 4:38:56 हैं। नंदा देवी और वैली ऑफ़ फ्लावर को आप 4:38:58 देख रहे हैं उत्तराखंड का है 1988 का ये 4:39:01 उच्च तुंगता वाले मतलब ज्यादा ऊंचाई वाले 4:39:04 जो हिमालय क्षेत्र हैं उनमें से एक है और 4:39:06 इसकी जो जैव विविधता है वो काफी उत्कृष्ट 4:39:08 है। पूरे हिमालय क्षेत्र की ही जैव 4:39:09 विविधता अपने आप में अनोखी है। इसीलिए उसे 4:39:11 हॉटस्पॉट के रेंज में रखा गया है। 7817 4:39:15 मीटर ऊंचे नंदा देवी शिखर से यह सुसज्जित 4:39:17 है। और भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है 4:39:20 नंदा देवी ऋषि गंगा गार्ज के रास्ते से। 4:39:23 हालांकि अगर माउंट के टू गॉडविन ऑस्टिन को 4:39:25 हम मानते हैं कि वह सबसे ऊंची चोटी है तो 4:39:27 फिर उस स्थिति में नंदा देवी दूसरा नहीं। 4:39:30 यहां आप देखेंगे 4:39:32 तो दुनिया के सबसे गहरे गार्ज में से एक 4:39:35 यहां पर है। यह ऋषि गंगा गार्ज की बात हो 4:39:38 रही है जो कि यहां के रास्ते में पड़ता 4:39:40 है। रास्ते से होकर पहुंच जाता है। 4:39:43 यहां आप समझ रहे हैं? भारत की दूसरी सबसे 4:39:46 ऊंची चोटी है नंदा देवी और जहां ऋषि गंगा 4:39:48 गार्ज के रास्ते से होकर पहुंचा जाता है। 4:39:50 लोग पहुंचते हैं और दुनिया के सबसे गहरे 4:39:53 गार्ज में से यह एक है। ठीक है? सबसे गहरे 4:39:55 गार्ज में से एक है। सबसे गहरा नहीं है। 4:39:57 नदी के द्वारा इसको तैयार किया गया है। 4:40:00 पश्चिमी घाट कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, 4:40:02 महाराष्ट्र इन राज्यों में फैला हुआ है। 4:40:04 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भूवैज्ञानिक, 4:40:06 सांस्कृतिक सौंदर्य मूल मूल्य सभी के 4:40:08 लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रेट 4:40:10 हिमालयन नेशनल पार्क हिमालय क्षेत्र है 4:40:13 हिमाचल प्रदेश का एरिया और यह पूरा 4:40:15 संरक्षित इलाका है और आप जानते ही हैं कि 4:40:17 2014 में इसको यूनेस्को में शामिल किया 4:40:19 गया था। इसके बाद है कंचनजंगा सिक्किम का 4:40:22 2016 का और दुनिया के सबसे ऊंचे संरक्षित 4:40:25 क्षेत्रों में से एक है। काकतीय 4:40:27 रुद्रेश्वर रामप्पा टेंपल जो है 4:40:28 रुद्रेश्वर रामप्पा टेंपल इसको कहा जाता 4:40:30 है। यह पालमपेट वारंगल तेलंगाना में है। 4:40:32 25 जुलाई 2021 को इसको यूनेस्को में डाला 4:40:35 गया था। तो यह जो रुद्रेश्वर रामप्पा 4:40:37 टेंपल है यह हैदराबाद से लगभग 200 4:40:40 किलोमीटर उत्तर पूर्व में पालमपेट नाम का 4:40:42 गांव है। वहां पर स्थित है। एक दीवार वाले 4:40:45 परिसर के भीतर भगवान शिव का यह मंदिर है। 4:40:47 काकतीय काल के मतलब काकतीय वंश जो था उसके 4:40:50 राजा थे गणपति देव। उनके सेनापति लेजरला 4:40:54 रुद्र के द्वारा इसको बनवाया गया था। इसके 4:40:56 बाद गुजरात के कच्छ के रण में हड़प्पा शहर 4:40:59 धौलावीरा मतलब हड़प्पा संस्कृति का शहर 4:41:01 धौलावीरा। हड़प्पा कहां से गुजरात में आ 4:41:04 जाएगा? तो धौलावीरा को आप देखेंगे। दक्षिण 4:41:06 एशिया में सबसे उल्लेखनीय 2021 में शामिल 4:41:09 हुआ था। सबसे उल्लेखनीय तथा अच्छी तरह से 4:41:11 संरक्षित शहरी बस्तियों में से एक जगपति 4:41:13 जोशी या जगतपति जोशी कहे जाते हैं। इनके 4:41:16 द्वारा इसे खोजा गया था 1968 में। 4:41:18 मोहनजोदड़ो गणवेरी वाला हड़प्पा ये सब 4:41:21 पाकिस्तान में है। वहीं भारत का हरियाणा 4:41:23 का राखीगढ़ सबसे बड़ा और उसके बाद 4:41:25 धौलावीरा जो है वो दूसरे नंबर पर सबसे 4:41:27 बड़ा महानगर है। जब हड़प्पा, मोहनजोदड़ो 4:41:30 इत्यादि भारत का हिस्सा थे तब अलग बात थी। 4:41:32 लेकिन भारत के विभाजन के बाद की यह 4:41:34 स्थिति। इसके बाद नंबर 4:41:35 [गला साफ़ करने की आवाज़] आता है 4:41:36 शांतिनिकेतन का। 2023 में शामिल हुआ 4:41:39 यूनेस्को की सूची में 41वां विश्व धरोहर 4:41:41 स्थल बन जाता है। 45वीं विश्व धरोहर समिति 4:41:44 की बैठक में इसका जो सऊदी अरब में रियाद 4:41:46 में आयोजित हुई थी। वहां पर फैसला लिया 4:41:48 गया था। तो नोबेल पुरस्कार विजेता है 4:41:50 गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर। 1901 में 4:41:52 नोबेल मिला था। उन्हीं के द्वारा यह 4:41:54 स्थापित किया गया है पश्चिम बंगाल के 4:41:56 वीरभूम जिले में। इसके बाद होलसेस मंदिर 4:41:59 है। होलसेस राजवंश के द्वारा इसको स्थापित 4:42:02 किया गया। 11वीं से लेकर 14वीं शताब्दी के 4:42:04 बीच में इसका इस राजवंश का शासन दक्षिण 4:42:07 भारत पर था। तो देवी देवताओं, पौराणिक 4:42:09 प्राणियों और जो हिंदू पौराणिक कथाएं हैं 4:42:12 उनके दृश्य इन मंदिर के जो पत्थर की 4:42:14 दीवारें हैं उन पर उकेरे गए हैं। तो इसे 4:42:17 बेसर शैली के मंदिरों में गिना जाता है। 4:42:19 बेसर शैली होती क्या है? तो उत्तर भारतीय 4:42:21 जो स्थापत्य कला शैली है वो और दक्षिण 4:42:24 भारतीय स्थापत्य कला शैली ये दोनों जब आपस 4:42:26 में मिलने लगती हैं दोनों का संक्रमण होने 4:42:28 लगता है तो बनती है एक नई प्रकार की 4:42:30 स्टाइल जिसको कि कहा जाता है बेसर उत्तर 4:42:33 भारतीय स्थापत्य शैली नागर शैली है। 4:42:35 दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली द्रविड़ शैली 4:42:38 है। नागर शैली और द्रविड़ शैली दोनों के 4:42:40 कुछ ना कुछ गुण जो है वो आपस में मिल गए 4:42:42 लेकिन दोनों में से कोई भी यूनिक नहीं रह 4:42:44 गया। कुछ नया बन गया तो वो कहलाती है बेसर 4:42:46 शैली। तो बेसर शैली में ये बना हुआ है और 4:42:49 सबसे प्रसिद्ध होलसेस मंदिरों में तीन है। 4:42:52 ये मंदिरों का पूरा एक समूह है श्रंखला 4:42:54 है। तो जो होलसेस मंदिर है उसमें से तीन 4:42:56 एक तो बेलूर का है चेन्नकेशव, हेलेबिड का 4:42:59 है होलसेस्वर और सोमनाथपुरम का है केशव 4:43:02 मंदिर। इनको यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज 4:43:04 साइट वाली जो सूची है उसमें 2023 में 4:43:06 शामिल किया गया था। इसके बाद चराईदेव 4:43:09 मोईदाम है। ये असम में पड़ता है। 4:43:11 सांस्कृतिक विरासत ये भी है 46वें नंबर का 4:43:14 और इसे असम में शासन करने वाले जो अहो 4:43:17 राजवंश के सदस्य हैं उनके मृत अवशेषों को 4:43:20 दफनाने की प्रक्रिया के अंतर्गत देखा जाता 4:43:22 है। इसके बाद मराठा सैन्य परिदृश्य इसको 4:43:24 भी यूनेस्को की जो सूची है उसमें स्थान 4:43:27 दिया गया है। तो मराठा सैन्य परिदृश्य में 4:43:30 जो तमिलनाडु का एक किला है और महाराष्ट्र 4:43:32 के 11 मराठा किले हैं उनको शामिल किया गया 4:43:34 है। मराठों के किले उनकी विजय और उनके 4:43:37 साम्राज्य का सबसे मजबूत स्तंभ हुआ करते 4:43:39 थे। यह ऐसे दुर्गम इलाके में और ऐसे 4:43:41 दुर्गम तौर तरीके से बने हुए किले होते थे 4:43:43 कि इसमें सिर्फ मराठा सैनिक ही प्रवेश कर 4:43:45 सकते थे। दुश्मन की अंदर घुसने की या इस 4:43:48 पर धावा बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। 4:43:50 इसके बाद सारनाथ के प्रसिद्ध जो बौद्ध 4:43:52 स्थल है उनको भी देख रहे हैं आप। उत्तर 4:43:54 प्रदेश का सारनाथ यूनेस्को की विश्व धरोहर 4:43:56 सूची में शामिल है और दक्षिण कोरिया के 4:43:58 बुसान में आयोजित जो यूनेस्को की विश्व 4:44:01 धरोहर समिति का 48वां सत्र आयोजित होता है 4:44:04 मतलब 2026 25 जुलाई 2026 उसमें इसकी घोषणा 4:44:08 होती है। तो 45 इसने इसमें हम हमने जो 4:44:11 यूनेस्को के स्थल हैं उन्हें देखा और यहां 4:44:13 चित्र में भी देख रहे हैं। जैसे कि 4:44:16 राजस्थान का आप देखें राजस्थान के पहाड़ी 4:44:18 किले लिए जंतरमंतर जयपुर केवलादेव 4:44:20 राष्ट्रीय उद्यान फिर ग्रेट हिमालयन नेशनल 4:44:22 पार्क हिमाचल का हो गया। हुमायूं का मकबरा 4:44:24 कुतुब मीनार लाल किला परिसर ये सब दिल्ली 4:44:26 का हो गया। वैसे ही ले कारबुजिय का वास्तु 4:44:29 शिल्प कार्य है। ये सब चंडीगढ़ का हो गया। 4:44:32 चंपानेर पावागढ़ पाटन में रानी की बावड़ी 4:44:35 अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर धौलावीरा ये सब 4:44:38 गुजरात का हो गया। इधर आप देखेंगे तो नंदा 4:44:40 देवी वैली ऑफ फ्लावर ये सब उत्तराखंड का 4:44:42 नालंदा और महाबोधी टेंपल परिसर जो है ये 4:44:45 बिहार का हो गया। आगरा का किला, ताजमहल, 4:44:48 फतेहपुर, सीकरी, सारनाथ ये चार जो हैं ये 4:44:50 उत्तर प्रदेश के हो गए। याद रखिएगा। इसके 4:44:53 बाद खजुराहो के मंदिर हैं। सांची में 4:44:54 बौद्ध स्मारक है, भीमबेटका है, कंचनजंगा 4:44:56 है। ये सब आप देख रहे हैं। तो इसमें से 4:44:58 तीन जो है ये खजुराहो, सांची और भीमबेटका 4:45:01 ये तीन जो है ये मध्य प्रदेश के हो गए। और 4:45:03 कंचनजंगा को अगर आप देखेंगे तो कंचनजंगा 4:45:06 सिक्किम का हो गया। इसके बाद यहां असम में 4:45:08 आ जाते हैं। तो असम में काजीरंगा है, मानस 4:45:10 है और चराईदेव मोईदाम अभी जस्ट आपने पीछे 4:45:13 देखा है। पश्चिम बंगाल में सुंदरवन और 4:45:15 शांतिनिकेतन है। वैसे ही उड़ीसा में 4:45:17 कोणार्क का सूर्य मंदिर है। दक्षिण में 4:45:18 जरा चलते हैं। यहां देखें तो दक्षिण में 4:45:21 महाराष्ट्र में ही अगर आप देखेंगे तो 4:45:23 अजंता की गुफाएं, एलोरा की गुफाएं, 4:45:24 एलिफेंटा की गुफाएं, छत्रपति शिवाजी 4:45:27 टर्मिनल, विक्टोरिया, गौथिक आर्ट, डेकोरेट 4:45:29 डेको परिधान ये सब जो हैं ये सब इसमें 4:45:32 शामिल है। उसी प्रकार से गोवा के चर्च और 4:45:34 कॉन्वेंट ये गोवा का हो गया। मराठा सैन्य 4:45:36 परिदृश्य ये भी महाराष्ट्र का ही है। 4:45:38 तेलंगाना में काकतीय रुद्रेश्वर रामप्पा 4:45:40 टेंपल है। हम्पी के स्मारक पटक्कल के 4:45:42 स्मारकों का समूह और होलसाय मंदिर ये सभी 4:45:45 कर्नाटक की विशेषता हैं। तमिलनाडु में 4:45:47 महाबलीपुरम के स्मारक हैं। तजापुर, 4:45:49 गंगेकुंड, चोलपुरम और दारासुरम के जो महान 4:45:51 चोल मंदिर हैं वो शामिल है। भारत की जो 4:45:54 पर्वतीय रेलवे है दार्जिलिंग, नीलगिरी, 4:45:56 काक कालका शिमला और पश्चिमी घाट यह भी जो 4:46:01 यूनेस्को साइट है उनका हिस्सा है। तो यहां 4:46:04 तक आपने देखा। अब इसके बाद आगे बढ़ते हैं। 4:46:08 तो अब हम देखेंगे यूनेस्को को देख चुके 4:46:10 हैं। अब आईयूसीएन को देख लेते हैं। तो 4:46:13 यहां पर भारत जो है ये 1969 में यानी 1969 4:46:16 में एक राज्य सदस्य के रूप में आईयूसीएन 4:46:19 में शामिल हुआ। और भारत की ओर से पर्यावरण 4:46:20 वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा 4:46:23 यह मतलब कहने का मतलब यह है कि आईयूसीएन 4:46:26 का भारत जो है आईयूसीएन इसका भारत सदस्य 4:46:30 है। कब से? 1969 से। 1969 4:46:33 और भारत का जो पर्यावरण मंत्रालय है वह 4:46:36 आईयूसीएन के अंतर्गत नोडल एजेंसी के रूप 4:46:39 में काम करता है। इसका कार्यालय 2007 में 4:46:42 नई दिल्ली में स्थापित किया गया और 4:46:44 सदस्यों के समन्वय हेतु 2001 से एक 4:46:46 राष्ट्रीय समिति यहां पर काम कर रही है। 4:46:49 बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और 4:46:51 डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ये भी इसके 4:46:53 सक्रिय सदस्य हैं। तो इसकी जो रेड लिस्ट 4:46:56 होती है उससे प्रश्न आते हैं। ये 4:46:57 श्रेणीवार आप देखेंगे गंभीर रूप से 4:46:59 संकटग्रस्त यानी क्रिटिकली इनडेंजर्ड जो 4:47:01 प्रजातियां हैं वो सबसे ऊपर दी हुई है 4:47:03 जिनको कि सीआर से व्यक्त किया जाता है। 4:47:05 सीआर से व्यक्त किया जाता है। तो पहले 4:47:08 नंबर पर आता है घड़ियाल 4:47:11 गेंगेटिकस गैवियालिस इसको कहा जाता है। 4:47:14 इसका ये जंतु नाम है। मतलब बायोलॉजी के 4:47:18 हिसाब से इसका वैज्ञानिक नाम है। तो 4:47:20 राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में ये मूल रूप 4:47:22 से पाया जाता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान 4:47:24 और उत्तर प्रदेश। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड 4:47:27 आरडी आरओटिस नाइग्रसेप्स ये इसका पक्षी 4:47:32 मतलब पक्षीगत वैज्ञानिक नाम है। डेजर्ट 4:47:34 नेशनल पार्क राजस्थान और गुजरात में ये 4:47:36 पाया जाता है। भारतीय गिद्ध तो भारत में 4:47:38 गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं। 4:47:40 चार प्रजातियां जो है वो ओरिएंटल वाइट 4:47:42 रम्ड यानी सफेद पीठ वाले गिद्ध, लॉन्ग 4:47:45 बिल्ट, स्लेंडर बिल्ट, पतली चोंच वाले, 4:47:48 रेड हेडेड यानी लाल सिर वाले गिद्धों की 4:47:50 हैं। ये सब गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। 4:47:52 चार प्रजातियां जो हैं, वैसे तो पूरे 4:47:54 गिद्ध ही संकट में हैं। और अभी भी संकट से 4:47:56 बाहर नहीं आए हैं। लेकिन उसमें से भी चार 4:47:58 ऐसे हैं जिन्हें देखना ही दुर्लभ है। 4:48:00 जिसमें से कि सफ़ेद पीठ पीठ वाला गिद्ध है। 4:48:02 अह इसके अलावा लॉन्ग बिल्ड जो भारतीय 4:48:05 गिद्ध कहा जाता है। सिलेंडर बिल्ड पतली 4:48:07 चोंच वाला और लाल सिर वाले भी गिद्ध होते 4:48:10 हैं। तो ये सब गंभीर रूप से संकटग्रस्त 4:48:12 हैं। यानी क्रिटिकली इंडेंजर्ड है। हंगुल 4:48:14 यानी कश्मीरी स्टैग जिसे कि सर्वस हंगुलू 4:48:17 कहा जाता है वैज्ञानिक नाम के तौर पर। यह 4:48:20 जम्मू कश्मीर का राजकीय पशु है। दाचीगाम 4:48:22 नेशनल पार्क में यह एकमात्र संरक्षित है 4:48:25 और यह जो सेंक्लाज का रेंडियर होता है ना 4:48:27 उसी का वंशज है। इसके बाद चीनी पेंगुलिन 4:48:30 मैनिस पेंडाइला इसको कहा जाता है 4:48:32 पेंटाडेडक्टाइला। तो सिक्किम, असम, 4:48:35 अरुणाचल इन राज्यों में ये पाया जाता है। 4:48:38 मांस के लिए और विशेष रूप से इसका जो 4:48:40 चमड़ा होता है, शल्क होते हैं उसके लिए 4:48:42 इसकी तस्करी होती है। इसके बाद है नामदफा 4:48:45 की उड़न गिलहरी जिसको कि बिस्वा मोडप्टस 4:48:47 बिस्वामी विश्वासी कहा जाता है। यह नामदफा 4:48:50 नेशनल पार्क में पाई जाती है। अरुणाचल में 4:48:52 साइबेरियन क्रेन ल्यूको गरेनस ल्यूकोगेरनस 4:48:56 ल्यूकोगेरिनस ल्यूकोगेरनस ये इसका नाम है। 4:48:59 भरतपुर पक्षी अभयारण्य राजस्थान का जो है 4:49:01 केवला देव राष्ट्रीय उद्यान वहां पर ये 4:49:03 पाया जाता है। बंगाल फ्लोरिकन 4:49:06 होबारोप्सिस बेंगासिस ये दुधवा नेशनल 4:49:09 पार्क जो उत्तर प्रदेश का है वहां पर और 4:49:12 मानस और काजीरंगा असम का है उसमें भी पाया 4:49:14 जाता है। हिमालयन बटेर ओसिया सुपरस 4:49:18 सुपरसिलियोसा इसको कहा जाता है। यह 4:49:20 वेस्टर्न हिमालय उत्तराखंड का जो एरिया है 4:49:22 वहां पर पाया जाता है। ठीक है? इसके बाद 4:49:24 आप देख रहे हैं यहां पर तो हिमालय पटेर के 4:49:27 बाद देखेंगे आप जर्डन कोरसर 4:49:30 इसको राइन राइनोप्टिलस 4:49:33 बिटोक्वेटस कहा जाता है। ठीक है? 4:49:35 राइनोप्टिलस बिटोक्वेटस कहा जाता है। लंका 4:49:38 मल्लेश्वर वन्यजीव अभयारण्य जो आंध्र का 4:49:40 है वहां पर ये पाया जाता है। सफेद पेट 4:49:42 वाला बंगला ऑडिया इग्निसिस ये नामदफा में 4:49:45 ही मिलता है। इसके अलावा ये तो हमने देखा 4:49:47 क्रिटिकली इंडेंजर्ड। अब यहां पर 4:49:48 इंडेंजर्ड जो है इ एन से उसको व्यक्त किया 4:49:51 जाता है। कैपिटल ई और कैपिटल एन ये 4:49:53 संकटग्रस्त है। तो ऐसी प्रजातियों में 4:49:56 भारतीय हाथी है। एलिफास मैक्सिममस इंडिकस 4:49:58 इसको कहते हैं। पेरियार केरल का, 4:50:01 बांदीपुर, नागरहोले कर्नाटक का, काजीरंगा 4:50:03 असम का और नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व, 4:50:05 तमिलनाडु केरल का उन सभी स्थानों का नाम 4:50:08 यहां लिया गया है जहां कि एशियन एलीिफेंट 4:50:10 संरक्षित है। बंगाल टाइगर जिसको कि 4:50:12 पैंथेरा टाइगरस कहते हैं। सुंदरवन टाइगर 4:50:15 रिजर्व में तो है ही है। इसके अलावा बुसा, 4:50:17 रणथंबोर, कान्हा, बांधवगढ़, तडोबा अंधेरी 4:50:20 ऐसे तमाम टाइगर रिजर्व एशियाई शेर 4:50:22 पैंथेरा, लियोप परसिका इसको कहते हैं। गिर 4:50:25 राष्ट्रीय उद्यान इसका नेचुरल हैबिटेट है। 4:50:27 इसके बाद गंगा डॉल्फिन है। प्ले 4:50:30 प्लेटानिस्टा गेंगेटिका इसको कहा जाता है। 4:50:33 विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य बिहार का और 4:50:35 गंगा ब्रह्मपुत्र का जो नदी तंत्र है वहां 4:50:37 पर यह पाई जाती है। पिग्मीहग यानी पोरकुला 4:50:40 साल्वेनिया। यह मानस राष्ट्रीय उद्यान में 4:50:43 मिलता है। नेक्स्ट आप यहां पर देख रहे हैं 4:50:47 नीलगिरी ताहर नीलगिरीटस 4:50:49 हलोकियस तो ये अरबीकुलम नेशनल पार्क और 4:50:53 नीलगिरी की पहाड़ियों में चारों तरफ पाया 4:50:54 जाता है। लालंडा एलुरस फुरगेंस ये 4:50:57 कंचनजंगा दार्जिलिंग और नामदफा में मिलता 4:50:59 है। संघाई डियर रूस रूसर्वर एलडीएलडी इसको 4:51:03 कहा जाता है। तो यह एकमात्र पाया जाता है 4:51:05 लोकटक झील की जो घास भूमि है वहां पर 4:51:07 मणिपुर में किबुल लमजाओ नेशनल पार्क जो कि 4:51:11 लोकटक झील के ऊपर बना हुआ है और इस पे 4:51:13 तैरती हुई घास की मोटी-मोटी गद्दियां यानी 4:51:15 जमीन पाई जाती है। दलदली क्षेत्र है। 4:51:17 ब्रह्मपुत्र के पानी के इकट्ठा होने से 4:51:19 बना हुआ है। तो यह जो विशेष प्रकार की घास 4:51:21 की गुजगुजी जमीन होती है उसी पर ये पाया 4:51:23 जाता है। जंगली भैंस बुवालस अरनी इसको कहा 4:51:27 जाता है। ये इंद्रावती और उदंती सीता नदी 4:51:29 बाघ अभयारण्य के क्षेत्र में पाई जाती है। 4:51:31 कोला मरका और काजीरंगा में भी मिलती है, 4:51:34 मानस में भी मिलती है। सिंह पुच्छी मकाक 4:51:36 जिसे कि मका साइलेनस कहा जाता है। यह 4:51:39 साइलेंट वैली नेशनल पार्क में तो पाया ही 4:51:41 जाता है और वेस्टर्न घाट में भी ये आपको 4:51:43 बहुतायत दिख जाएगा। बहुतायत तो नहीं लेकिन 4:51:45 हां झिटपुट दिख जाएगा। इसके बाद है ढोल। 4:51:47 ढोल यानी एशियाई जंगली कुत्ता। यह भी जो 4:51:50 है यह बहुतायत नहीं है। जो आप अपने गली 4:51:52 मोहल्लों में घूमते हुए कुत्तों को देखते 4:51:54 हैं। ज्यादातर जो शहरी इलाकों में आपको 4:51:55 मोटे-मोटे कुत्ते दिखाई देते हैं जिन्हें 4:51:58 कि आप आवारा कुत्ते कहते हैं। असल में वो 4:52:00 आवारा नहीं है। जो आपने ब्रीड डॉग पाले 4:52:02 हुए थे ना उनको उनमें से बहुत से ऐसे 4:52:04 पत्थर दिल लोग होते हैं कि अपने ब्रीड डॉग 4:52:05 को सड़क पर छोड़ देते हैं। उनकी ब्रीडिंग 4:52:08 होती है देसी कुत्तों के साथ। फिर एक 4:52:10 मिक्स ब्रीड पैदा होती है जो कि ना तो 4:52:11 पूरी तरह से भारतीय होती है ना पूरी तरह 4:52:13 से विलायती होती है। ठीक है? तो आपको 4:52:15 कहीं-कहीं डाबरमैन की शक्ल वाले देसी 4:52:18 कुत्ते दिखेंगे। कहीं लेब्राडोर जैसे 4:52:20 मिलती जुलती शक्ल वाले देसी कुत्ते 4:52:21 दिखेंगे। कहीं पर आपको जर्मन शेफर्ड का 4:52:23 नमूना दिख जाएगा। तो ये सब कैसे दिखता है? 4:52:26 ये मिक्स ब्रीडिंग का नतीजा है। क्रॉस 4:52:28 ब्रीडिंग का नतीजा है। फिलहाल ये जो ढोल 4:52:30 है ये शुद्ध भारतीय कुत्ता है। ऐसे ही 4:52:33 डिंगो को आप देखते हैं वो भी भारतीय नस्ल 4:52:34 के ही कुत्तों से विकसित मतलब इंडियन जो 4:52:36 परिग कहे जाते हैं उन्हीं से विकसित हुआ 4:52:39 अफ्रीकी कुत्ता है। अफ्रीकी जंगली कुत्ता 4:52:40 है। तो ढोल जो है ये एशियाई जंगली कुत्ते 4:52:43 हैं। कुवन अल्पाइनस इन्हें कहा जाता है और 4:52:45 ये काफी शिकारी होते हैं। तो यहां देखें 4:52:47 आप पश्चिमी घाट और मध्य भारत के जो टाइगर 4:52:49 रिजर्व है वहां ये पाए जाते हैं। शेरों का 4:52:52 और बाघों का जो बचा हुआ जूठन होता है उसको 4:52:54 यह बड़ी तेज खाते हैं। पश्चिमी हुलॉक गिबन 4:52:59 पूर्वोत्तर भारत में ये कई राज्यों में 4:53:01 पाया जाता है। जैसे असम अरुणांचल मेघालय 4:53:03 और ये एकमात्र भारत में पाया जाने वाला 4:53:05 वनमानुष है। सुनहरा लंगूर ट्रैकीपिथेकस गी 4:53:10 इसको कहा जाता है। चक्रशिला वन्यजीव 4:53:11 अभयारण्य जो असम का है वहां ये पाया जाता 4:53:13 है। इसके बाद वी यू से रिप्रेजेंट करते 4:53:15 हैं वनरेबल को। तो वलनरेबल यानी संवेदनशील 4:53:19 प्रमुख प्रजातियां इसमें हिम तेुआ है, 4:53:20 पैंथेरा, अंसिया ये हेमिस में पाया जाता 4:53:23 है। किबर और पिन वैली जो हिमाचल के पार्क 4:53:26 है वहां पाया जाता है। गंगोत्री में पाया 4:53:27 जाता है और कंचनजंगा यानी सिक्किम में 4:53:29 पाया जाता है। एक सींग वाला गैंडा रायसोरस 4:53:32 यूनिकार्नस इसको कहा जाता है। ये काजीरंगा 4:53:35 मानस में तो मिलता ही है। उसके अलावा ओरंग 4:53:37 में भी मिलता है। पोबितरा जो नेशनल माफ़ 4:53:39 कीजिएगा पार्क है उसमें मिलता है। 4:53:41 जलदापाड़ा में मिलता है। गोरुमारा में 4:53:43 मिलता है। और हां, यूपी के दुधवा में भी 4:53:45 पाया जाता है। अफ्रीकी चीता एसिनोनिक्स 4:53:49 जुबेटस इसको कहा जाता है। कूनों में इसको 4:53:51 लाया गया है। यह पाया नहीं जाता है यहां 4:53:53 पर। यह बाहर से आयात किया गया है, मंगवाया 4:53:56 गया है और नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के 4:53:58 अलग-अलग हिस्सों से इसे इकट्ठा किया गया 4:54:00 है। ओलिब्रिडले ये भी यहां की प्रजाति 4:54:02 नहीं है। ये अमेरिकी जो समुद्री तट है 4:54:04 वहां से चलते हैं समुद्र के एरिया से और 4:54:07 यहां प्रजनन के लिए आते हैं। अंडे देकर 4:54:09 यहां से रवाना हो जाते हैं। बच्चे उनके 4:54:10 पीछे-छे निकलते हैं तो चले जाते हैं। तो 4:54:12 ये सामूहिक रूप से यहां प्रजनन करने और 4:54:14 अंडे देने आते हैं। ऋषिकुल्या नदी का जो 4:54:16 मुहाना है वहां पर गिरमाथा समुद्री 4:54:18 अभयारण्य। तो उस एरिया में जो समुद्री तट 4:54:21 है वो इनके लिए संरक्षित किया गया है। 4:54:22 उसके बावजूद ये शिकार बन रहे हैं। समुद्री 4:54:25 गाय यानी डगोंग मन्नार की खाड़ी पल्लक पाक 4:54:29 जलडमरू मध्य पी एल के पाक इसीलिए पाल्क 4:54:33 लिखा गया है। क्योंकि अगर पाक लिखा जाएगा 4:54:35 तो फिर आप कंफ्यूज हो जाएंगे कि ये 4:54:36 पाकिस्तान का जलडमरू मध्य है। नहीं ये पाक 4:54:39 जो है ये अंग्रेज का नाम था। मतलब एक 4:54:41 ब्रिटिश अधिकारी थे उन्हीं के नाम पर ये 4:54:43 रखा गया है पाक जलडमरू मध्य। तो ये जो पाक 4:54:46 स्टेट है ये तमिलनाडु वाले हिस्से में 4:54:48 यहां पर पाई जाती है समुद्री गाय अंडमान 4:54:50 निकोबार द्वीप समूह के आसपास और कच्छ की 4:54:52 खाड़ी में भी पाई जाती है। ये समुद्री घास 4:54:54 को चरकर अपना जीवन यापन करती है। शाकाहारी 4:54:56 होती है और काफी मोटी ताजी होती है। 4:54:59 समुद्र में रहने वाले कई शाकाहारी जीव ऐसे 4:55:01 हैं जो कि बहुत भारीभरकम होते हैं 4:55:04 हट्टे-कट्टे लेकिन शाकाहारी होते हैं। और 4:55:07 उसी का नमूना धरती पर भी आपको दिखाई देता 4:55:10 है। ये देखें आप बॉस गौरस। 4:55:13 गाय को कहा जाता है बॉस इंडिकस और यह जो 4:55:16 है यह बॉस गौरस है। मतलब क्या? यह गाय के 4:55:18 परिवार का ही भतीजा है। लेकिन यह काफी 4:55:20 हट्टाकट्टा होता है और बहुत एथलीट वाली 4:55:22 इसकी बॉडी होती है। मतलब एकदम बॉडी बिल्डर 4:55:24 जबरदस्त। तो इसे भारतीय बाईसन नहीं कहते 4:55:27 हैं। ये असल में गौर है। इसके आगे भारतीय 4:55:29 लगाने की भी आवश्यकता नहीं क्योंकि गौर वन 4:55:31 एंड ओनली भारत में ही पाया जाता है। ठीक? 4:55:34 तो बांदीपुर, नागर होले, पेरियार, 4:55:36 मधुमलाई, कान्हा, पेंच यह कई सारे स्थानों 4:55:39 पर मिलता है। यह कतई भैंस नहीं है। भैंस 4:55:42 की प्रजाति नहीं है। और बाईसन लिखने का 4:55:44 मतलब है कि वो भैंस बन जाएगा। ठीक है? 4:55:46 इसके बाद नंबर आता है बारसिंघा का। तो 4:55:48 बारसिंघा जो है इसको सर्वस डओसिली कहा 4:55:51 जाता है। कान्हा, दुधवा और काजीरंगा में 4:55:53 ये पाया जाता है। यानी मध्य प्रदेश, असम 4:55:54 और उत्तर प्रदेश में। इसके बाद है सारस 4:55:57 क्रेन। एंटीगोन। एंटीगोन इसका नाम है 4:56:00 वैज्ञानिक नाम। भारत की जो उत्तर प्रदेश 4:56:02 की आद्रभूमियां है वहां पर यह मिलता है। 4:56:04 गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी 4:56:06 पाया जाता है। बाकी ये यूपी का राजकीय 4:56:08 पक्षी है ही है। स्लोथ बियर मेलुरस 4:56:11 उर्सिनस इसको कहा जाता है। ये दारोजी भालू 4:56:14 अभयारण्य जो कर्नाटक का है सतपुड़ा में भी 4:56:16 पाया जाता है और जैसोर अभयारण्य जो गुजरात 4:56:18 का है वहां भी मिलता है। ग्रेट हार्मबिल 4:56:20 इसे बुसेरोस बाईकारिमिस कहा जाता है। 4:56:23 पश्चिमी घाट केरल कर्नाटक पूर्वोत्तर भारत 4:56:25 अरुणाचल प्रदेश नागालैंड के जो घने जंगल 4:56:28 हैं वहां ये पाया जाता है। इसके बाद 4:56:30 लुट्रोगेल पर्स पिसिलाटा है। यह तुंगभद्रा 4:56:33 उद्बलाव संरक्षण रिजर्व जो है कर्नाटक का 4:56:35 वहां मिलता है। काजीरंगा और मानस में 4:56:37 मिलता है। सुंदरवन में भी पाया जाता है और 4:56:39 भीतरकणिका में भी उपलब्ध होता है। 4:56:42 नेक्स्ट आप देख रहे हैं एशियाई ब्लैक 4:56:44 बीियर। उरस थिबेटानस इसका वैज्ञानिक नाम 4:56:48 है। जंतु वैज्ञानिक नाम है। पक्के टाइगर 4:56:50 रिजर्व अरुणांचल, दाचीगाम नेशनल पार्क 4:56:52 जम्मू कश्मीर और सेंचल पश्चिम बंगाल का 4:56:55 वहां ये पाया जाता है। लेदर बैग टर्टल 4:56:58 यानी लेदर बैग कछुआ चमड़े की चमड़े जैसी 4:57:00 पीठ वाला कछुआ इसको डर्मोलिस कोरियासिस 4:57:03 कहा जाता है। कोरियासिया भी कहा जाता है। 4:57:05 तो ये गलाथिया बे में अंडे देने आता है और 4:57:08 ये दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री कछुआ है। 4:57:10 अंडमान निकोबार द्वीप समूह की जो गैलेथिया 4:57:12 बे है वहां ये प्रजनन के उद्देश्य से आता 4:57:15 है। अब इसके बाद जो संकट के निकट 4:57:18 प्रजातियां हैं निकट संकटग्रस्त हैं। मतलब 4:57:19 अभी संकट में है नहीं लेकिन भविष्य में हो 4:57:22 सकती हैं। उनकी आबादी इस कदर पहुंच गई। तो 4:57:25 इनको कहा जाता है नियर थ्रेटेंड। ये एन टी 4:57:27 से डिनोट किया जाता है इनको कैपिटल एन और 4:57:30 कैपिटल टी। तो ऐसी प्रजातियों में आप 4:57:32 देखेंगे भारतीय जंगली गधा है एक्वस 4:57:34 हेमियोनस खुर इसको कहा जाता है। ये कच्छ 4:57:37 के रण में पाया जाता है। धारीदार 4:57:39 लकड़बग्घा हाईना राजस्थान मध्य प्रदेश और 4:57:42 गुजरात के सूखे इलाके निकोबार कबूतर 4:57:44 कैलोनस निकोबारिया इसको कहा जाता है 4:57:46 निकोबारिका तो ये सब जो है ये संकट के 4:57:49 निकट हैं। वैसे ही मालाबार पाइ हर्मबिल 4:57:52 है। ये एंथ्राकोरस 4:57:54 से कोरोनेटस कही जाती है। पश्चिमी घाट और 4:57:58 मध्य भारत के जंगलों में पाई जाती है। कम 4:58:00 चिंताजनक श्रेणी में लीस्ट कंसर्न में आप 4:58:02 कुछ ऐसे जानवरों को रखते हैं जो कि है तो 4:58:04 सुरक्षित लेकिन भारत मेंकि अनुसूची एक में 4:58:07 होने की वजह से उनको सर्वोच्च सुरक्षा दे 4:58:09 दी गई है। लेकिन यूनेस्को के द्वारा उतनी 4:58:12 ज्यादा उसको माफ़ कीजिएगा आईयूसीएन के 4:58:14 द्वारा उन्हें उतनी ज्यादा तवज्जो नहीं दी 4:58:16 गई है। मतलब यह है कि अपने यहां इन्हें जो 4:58:19 अनुसूची एक है उसमें डालकर संरक्षित किया 4:58:21 गया है। विशेष रूप से। लेकिन जो आईयूसीएन 4:58:24 की सूची है उसमें उतना महत्व नहीं मिला 4:58:26 है। जैसे काला हिरण है, काले खारे पानी का 4:58:28 मगरमच्छ है और भारतीय मोर है। तो काला 4:58:31 हिरण जिसे कि एंटीलोप सर्वी कापरा कहा 4:58:35 जाता है। ये बेलाधार नेशनल पार्क राजस्थान 4:58:37 का जो ब्नोई समुदाय द्वारा संरक्षित इलाका 4:58:40 है वहां ये पाए जाते हैं। और खारे पानी का 4:58:42 मगरमच्छ यानी क्रोकोडाइलस पोरोस ये 4:58:44 भीतरकणिका में तो मिलता ही है। सुंदरवन और 4:58:46 अंडमान निकोबार के बड़े हिस्से में पाया 4:58:48 जाता है। सबसे बड़ा जीवित सरिसप है ये। 4:58:51 भारतीय मोर जिसे कि वैज्ञानिक तौर पर पाओ 4:58:54 क्रिस्टेटस कहा जाता है। यह पूरे भारत में 4:58:56 पाया जाता है और राष्ट्रीय पक्षी है ही 4:58:58 है। तो यहां पर आप देखेंगे कि जो रेड 4:59:00 लिस्ट वाली भारतीय प्रजातियां हैं 4:59:02 श्रेणीवार दी हुई है। चित्र के साथ दी है। 4:59:04 सबसे पहले आप देखेंगे क्रिटिकली इंडेंजर्ड 4:59:06 को। तो जो क्रिटिकली इनडेंजर्ड है उसमें 4:59:09 अगर आप देखें 4:59:11 तो घड़ियाल है, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड है, 4:59:14 भारतीय गिद्ध है, वाइट रम, स्लेंडर बिल्ड 4:59:17 इस तरह की कई सारी कई सारी प्रजातियां 4:59:18 हैं। मतलब मूल रूप से चार प्रजातियों को 4:59:20 सीआर में रखा गया है। इसके बाद कश्मीरी 4:59:23 हिरण है। यानी कश्मीरी स्टैग, लाल हिरण 4:59:25 हंगुल इसको कहा जाता है। रेंडियर का 4:59:27 परिवार का वंशज। चीनी पेंगोलिन है। इसकी 4:59:29 जो चमड़ी आप देख रहे हैं ना ये काफी कीमती 4:59:31 होती है। खाल के लिए इसका शिकार होता है। 4:59:33 नामदफा की उड़न गिलहरी है। जब कूदती है तो 4:59:36 ऐसा लगता है कि उड़ रही है और लंबी छलांग 4:59:38 लगाती है। पूछ और अपने जो चमड़े हैं उनका 4:59:41 इस्तेमाल पैराशूट के तौर पे करती है। 4:59:43 साइबेरियन क्रेन जो है ये भी क्रिटिकली 4:59:45 इंडेंजर्ड है। बंगाल फ्लोरिकन जो है वो भी 4:59:47 क्रिटिकली इंडेंजर्ड है। ठीक वैसे ही 4:59:49 हिमालयन बटेर है। जैन जेडन कोरसर है और 4:59:52 सफेद पेट वाला बगुला है। ये सारे 4:59:54 क्रिटिकली इंडेंजर्ड है। अगर आपको ये अपने 4:59:56 आसपास दिखते हैं तो उनका संरक्षण करने का 4:59:59 प्रयास कीजिएगा। इसके बाद इनडेंजर्ड जो है 5:00:01 उनको देख लेते हैं। संकटग्रस्त 5:00:04 तो भारतीय हाथी इसमें है। रॉयल बंगाल 5:00:07 टाइगर है। एशियाई शेर है। गंगेटिक डॉल्फिन 5:00:09 है। पिगमी हॉग है। नीलगिरी ताहर है। लाल 5:00:12 पांडा है। ठीक है? लाल पांडा है। संघाई 5:00:14 डियर है। जंगली भैंस भी इसी में शामिल है। 5:00:17 वैसे ही सिंह पुच्छी मका। ये पूरा शेर ही 5:00:19 आपको दिख रहा है लेकिन असल में ये बंदर है 5:00:21 और ढोल जो कि एशियाई जंगली कुत्ते होते 5:00:24 हैं कुछ ऐसे दिखते हैं हुलाक गिब्बन और 5:00:27 सुनहरा लंगूर ये सब के सब जो है ये 5:00:29 इनडेंजर्ड है इसके बाद नंबर आता है 5:00:32 संवेदनशील यानी वनरेबल 5:00:35 तो हिम तेुआ इसमें सबसे पहले है स्नो 5:00:37 लेपर्ड एक सींग वाला गैडा चीता 5:00:40 क्योंकि भारतीय चीता है ही नहीं अफ्रीकी 5:00:42 चीता है ओलिव्रिडले डगोंग भारतीय बाईसन 5:00:45 नहीं बल्कि गौर सीधे-सीधे बारसिंघा सारस 5:00:49 क्रेन ग्रेट हारबिल स्लोथ बियर 5:00:52 और भारतीय उदबिलाव भी है। इसके अलावा 5:00:55 एशियाई ब्लैक बीियर है। बियर के नाम पे सब 5:00:57 जगह बियर की ही तस्वीर है। लेकिन स्लोथ जो 5:00:59 है उसकी शक्ल थोड़ी अलग होती है। फिलहाल 5:01:01 लेदर बैकग टर्टल कुछ ऐसा दिखता है। ये 5:01:03 चित्र सही है। आगे बढ़ते हैं। इधर आ जाइए। 5:01:07 देखिए अगला है अपना नियर थ्रेटेंड यानी 5:01:11 निकट संकटग्रस्त। भविष्य में इन पर खतरा आ 5:01:14 सकता है। जंगली गधा है, धारीदार लकड़बग्घा 5:01:17 है। है ना? यह ऐसा लग रहा है कि किसी ने 5:01:19 पेंट करवा के बकायदा पार्लर में बाल छटवाए 5:01:22 हो। इसके बाद आप आगे देखेंगे निकोबार 5:01:24 कबूतर है। 5:01:26 यह आपका मालाबार पाइड हर्नबिल है। हर्नबिल 5:01:29 की जो चोंच है ना वो ऐसी होती है और अपने 5:01:31 आसपास भी आप इस हारनबिल पक्षी को देखते 5:01:33 हैं। इनकी आवाज बड़ी सुरीली होती है। 5:01:35 हालांकि ये बहुत तरह की आवाें निकालते 5:01:36 हैं। कभी-कभी ऐसी आवाज निकालते हैं इनसे 5:01:38 लगता है चील बोल रही है या फिर बाज की 5:01:40 आवाज। लेकिन असल में ये हारबिल की आवाज 5:01:43 होती है। और रात में जब ये उड़ते हैं रात 5:01:45 के अंधेरे में ये उड़ने में सक्षम होते 5:01:46 हैं। रात्र रिचर भी होते हैं। झुंड बनाकर 5:01:49 उड़ते हैं तो ऐसी आवाज निकालते हैं जैसे 5:01:50 घुंघरू बज रहा है। मतलब सुनसान इलाके में 5:01:53 अगर आप भूत प्रेत में विश्वास करते हैं तो 5:01:54 आप चुड़ैल समझ लेंगे। लेकिन असल में यह 5:01:57 हर्नबिल की आवाजें होती हैं। हारबिल जो है 5:01:59 वो झुंड बनाकर और खासतौर पर जब मौसम बदल 5:02:01 रहा होता है मतलब बरसात समाप्त हो रही 5:02:03 होती है और सर्दी की शुरुआत हो रही होती 5:02:05 है। यानी अक्टूबर नवंबर का सीजन कार्तिक 5:02:06 महीना जो कहा जाता है उस समय ये माइग्रेट 5:02:09 करते हैं। अपनी जगह बदलते हैं। तो उस समय 5:02:11 सुबह के आसमान में इनकी जो चहचहाट है वो 5:02:14 ऐसे घुंघरूओं की झनझनाहट के तौर पर सुनाई 5:02:16 देती है। ऐसा लगता है घुंघरू बज रहे हैं। 5:02:18 ठीक है? ठीक है? तो ये बहुत ऊंचाई पर उड़ते 5:02:20 हैं। छोटे-छोटे दिखाई देते हैं। लेकिन 5:02:21 नीचे आते हैं तो इनका साइज अच्छा खासा बड़ा 5:02:23 होता है। और सिर पर इनके ऐसे एक दोहरी 5:02:25 चोंच होती है। एक पहली चोंच होती है। उसके 5:02:27 ऊपर एक ऐसी चोंच होती है। ऐसी चिड़िया आपने 5:02:30 देखी है अपने आसपास। अपने यहां जो 5:02:32 हर्निबिल पाए जाते हैं अपने आसपास दिखेंगे 5:02:34 आपको वो भूरे रंग के होंगे। स्लेटी कलर के 5:02:36 होंगे। पूरा स्लेटी ऐसे कलरफुल नहीं 5:02:38 होंगे। चोंच से लेकर पूंछ तक उनका कलर जो 5:02:39 है वो एकदम स्लेटी ग्रे जैसा होगा। डार्क 5:02:42 ग्रे। यह मालाबार का है इसलिए ऐसा है। 5:02:45 इसके बाद आगे देखें तो अगली जो प्रजाति की 5:02:48 श्रेणी है वह है कम चिंताजनक लेकिन भविष्य 5:02:50 में चिंता करनी पड़ेगी। हालांकि इसमें जो 5:02:52 लीस्ट कंसर्न रखा गया है कुछ ऐसे जीव हैं 5:02:54 जो कि अपने यहां अनुसूची एक में वन्य जीव 5:02:56 संरक्षण के अंतर्गत शामिल किए गए हैं। तो 5:02:59 प्रायोरिटी अलग-अलग है। काला हिरण इसमें 5:03:01 शामिल है। खारे पानी का मगरमच्छ है। साल्ट 5:03:03 वाटर क्रोकोडाइल और मोर है। तो ये सारी 5:03:06 बातें आपने देख ली है। अब आगे चलते हैं। 5:03:08 अगला हम देखने वाले हैं पर्यावरणीय 5:03:10 संस्थाएं संगठन स्थापना मुख्यालय के साथ। 5:03:13 तो पहली जो संस्था है वो यूएईपी ही है। 5:03:15 यहीं से शुरुआत करते हैं। संयुक्त राष्ट्र 5:03:17 पर्यावरण कार्यक्रम 1972 में शामिल 5:03:20 स्थापित हुआ था और नैरोबी यानी केन्या में 5:03:22 इसका हेड क्वार्टर है। वर्ल्ड वॉच 5:03:24 इंस्टट्यूट वाशिंगटन डीसी में हेड 5:03:26 क्वार्टर है। 1974 में इसको हिस्सा बनाया 5:03:28 गया था। ग्रीन पीस 1971 का है। एमस्टर्डम 5:03:33 यानी नीदरलैंड में इसका मुख्यालय है। 5:03:35 आईयूसीएन की स्थापना हुई थी 1948 में। 5:03:38 अक्टूबर में ग्लैंड स्विट्जरलैंड का जो है 5:03:40 वहां इसका मुख्यालय है। वन्य पादप और 5:03:43 जंतुओं की संकटापन्न प्रजातियों के लिए 5:03:44 व्यापार अंतरराष्ट्रीय अभिसमय यह जो 5:03:46 कन्वेंशन है ये 1973 का है। जेनेवा 5:03:48 स्विट्जरलैंड में स्थापना मतलब मुख्यालय 5:03:50 क्षेत्र है। वेटलैंड इंटरनेशनल इसका जो 5:03:53 मुख्यालय है वो वेनेजिंजन ये जगह जो है ये 5:03:57 नीदरलैंड में पड़ती है। वहां पर है और 5:03:59 1996 में इसको स्थापित किया गया था। इसके 5:04:02 बाद है वन्य जंतुओं के प्रवासी प्रजातियों 5:04:04 के लिए संरक्षण पर कन्वेंशन अभी समय 1979 5:04:07 में स्थापित हुआ। बोर्न में इसका जर्मनी 5:04:09 में हेड क्वार्टर है। रॉटरडम रॉटरडम में 5:04:11 ही है। नीदरलैंड में 1998 बेसल कन्वेंशन 5:04:14 बेसल नाम की जगह है। स्विट्जरलैंड में 5:04:16 वहीं मुख्यालय है 1989 समय है इसका। विश्व 5:04:19 वन्य जीव कोष 1961 ग्लैंड स्विट्जरलैंड 5:04:22 में इसका हेड क्वार्टर है। बर्ड लाइफ 5:04:24 इंटरनेशनल कैंब्रिज यूके में इसका हेड 5:04:26 क्वार्टर है। 1922 में इसको इस्टैब्लिश 5:04:28 किया गया था। स्टॉकहोम कन्वेंशन 2001 में 5:04:31 इस्टैब्लिश किया गया था। स्टॉकहोम स्वीडन 5:04:33 में इसका हेड क्वार्टर है और ट्रैफिक जो 5:04:35 कि वन्य जीव व्यापार निगरानी नेटवर्क कहा 5:04:37 जाता है। ये कैंब्रिज में इसका हेड 5:04:38 क्वार्टर है। 1976 में इस्टैब्लिश किया 5:04:40 गया था। अब पर्यावरण संरक्षण से संबंधित 5:04:42 जो संस्थाएं हैं उन्हीं के बारे में हम 5:04:44 देखने जा रहे हैं। तो भारतीय वन्य जीव 5:04:47 बोर्ड है सबसे पहले वन्य जीव संरक्षण 5:04:50 अधिनियम के अंतर्गत ये गठित साविधिक संगठन 5:04:52 है और ये केंद्र सरकार को इन वन्य जीवों 5:04:55 और पर्यावरण से जुड़े हुए मामलों पर सलाह 5:04:57 देता है। भारत का प्रधानमंत्री ही इसका 5:05:00 गठन करता है। बोर्ड में 47 सदस्य होते 5:05:02 हैं। उपाध्यक्ष होता है पर्यावरण मंत्री। 5:05:04 वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यह वन्य 5:05:07 जीवों के संबंध में जो संगठित अपराध होते 5:05:09 हैं उस पर रोक लगाने के लिए शुरू किया गया 5:05:11 है। पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन 5:05:13 मंत्रालय के अंतर्गत ये पूरा काम करता है। 5:05:15 मुख्यालय नई दिल्ली में है। पांच इसके 5:05:16 जोनल ऑफिस होते हैं। कौन-कौन से हैं? 5:05:18 दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और 5:05:20 जबलपुर। इसके बाद अगला नंबर आता है भारतीय 5:05:23 जीव-जंतु कल्याण बोर्ड का। पशु क्रूरता के 5:05:26 खिलाफ इसको स्थापित किया गया है और पशु 5:05:29 कल्याण से जुड़े मामलों पर यह काम करता 5:05:31 है। तो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 5:05:33 के अंतर्गत इसको गठित किया गया। 1962 यानी 5:05:36 1962 में। वल्लभगढ़ है हरियाणा का वहां पर 5:05:39 इसका हेड क्वार्टर है। 2018 में स्थापित 5:05:42 हुआ था। रुक्मणी देवी अरुणल इसकी संस्थापक 5:05:44 थी और अपनी मृत्यु से पहले तक इसकी 5:05:46 अध्यक्ष भी थी। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण 5:05:48 और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण ये सब जो है 5:05:51 ये संस्थाएं हैं जो कि पौधे और जंतुओं का 5:05:53 सर्वेक्षण करके पहचान करने के उद्देश्य से 5:05:56 स्थापित की गई हैं। तो जो वनस्पति 5:05:58 सर्वेक्षण है उसकी स्थापना 1890 में होती 5:06:00 है और जंतु सर्वेक्षण की स्थापना होती है 5:06:02 1916 में। दोनों का मुख्यालय कोलकाता में 5:06:05 है और दोनों जो है उनके क्षेत्रीय केंद्र 5:06:07 भी ढेर सारे। इसके बाद अब यहां पर कुछ 5:06:10 महत्वपूर्ण दिवस हैं जो कि पूछे जाते हैं। 5:06:12 सभी पूछा ही जाता है। इंपॉर्टेंट ही है सब 5:06:14 कुछ यहां पर। तो पहला आपका विश्व 5:06:16 आदर्द्रभूमि दिवस है 2 फरवरी वन्य जीव 5:06:18 दिवस विश्व वन्य जीव दिवस 3 मार्च वैश्विक 5:06:21 पुनर्चक्रण दिवस रिसाइक्लिंग डे 18 मार्च 5:06:24 अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 21 मार्च विश्व 5:06:26 पौधार रोपोपण दिवस 21 मार्च विश्व जल दिवस 5:06:30 22 मार्च विश्व मौसम विज्ञान दिवस 23 5:06:32 मार्च शून्य अपशिष्ट दिवस 30 मार्च विश्व 5:06:35 जलीय पशु दिवस 3 अप्रैल अंतरराष्ट्रीय बाघ 5:06:39 दिवस 29 जुलाई विश्व शेर दिवस इसी क्रम 5:06:42 में अगर आप देखें तो विश्व पौधारो ोपण 5:06:44 दिवस मनाया जाता है 21 मार्च को। 5:06:46 अंतरराष्ट्रीय वन वन दिवस मनाया जाता है 5:06:48 21 मार्च को। विश्व जल दिवस का मनाने की 5:06:51 तारीख है 22 मार्च। विश्व मौसम विज्ञान 5:06:54 दिवस 23 मार्च। शून्य अपशिष्ट दिवस 5:06:57 अंतरराष्ट्रीय स्तर का 30 मार्च। विश्व 5:06:59 जलीय पशु दिवस 3 अप्रैल। ठीक है? 3 5:07:02 अप्रैल। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई। 5:07:07 विश्व शेर दिवस 10 अगस्त। विश्व हाथी दिवस 5:07:10 12 अगस्त। विश्व डॉल्फिन दिवस 12 सितंबर 5:07:14 ओजोन परत के लिए जो संरक्षण हेतु ओजोन 5:07:17 दिवस मनाया जाता है 16 सितंबर शून्य 5:07:19 उत्सर्जन दिवस 21 सितंबर विश्व गैंडा दिवस 5:07:22 22 सितंबर विश्व नदी दिवस सितंबर का जो भी 5:07:25 चौथा रविवार पड़े जो भी तारीख पड़े उसमें 5:07:28 मनाया जाता है। विश्व पर्यावास दिवस 5:07:30 अक्टूबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है। 5:07:32 विश्व पशु दिवस 4 अक्टूबर को मनाया जाता 5:07:35 है। 5:07:36 ठीक ऐसे ही पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल टूना 5:07:40 दिवस जो है यह मनाया जाता है 2 मई को 5:07:42 विश्व जैव विविधता दिवस 22 मई विश्व 5:07:45 पर्यावरण दिवस 5 जून महासागर दिवस 8 जून 5:07:48 वैश्विक पवन दिवस 15 जून विश्व वर्षावन 5:07:52 दिवस 22 जून विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 5:07:55 28 जुलाई पर्यावास दिवस को आपने देख ही 5:07:58 लिया पशु दिवस को देख लिया अच्छा ई कचरा 5:08:00 या ई अपशिष्ट दिवस जो है ये मनाया जाता है 5:08:02 14 अक्टूबर पारिस्थितिकी दिवस 1 नवंबर 5:08:05 विश्व मत मत्स्य दिवस 21 नवंबर वन्य जीव 5:08:08 संरक्षण दिवस 4 दिसंबर विश्व मृदा दिवस 5 5:08:12 दिसंबर ठीक है 5 दिसंबर उसके बाद 5:08:15 अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस 11 दिसंबर 5:08:18 राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस 5 अक्टूबर आगे 5:08:21 बढ़ते हैं अब यहां पर ब्लू फ्लैग वाले जो 5:08:24 समुद्री तट है ये कुल मिलाकर 18 अपने पास 5:08:26 है 2025 26 के नए आंकड़ों के हिसाब से 5:08:29 इनको भी जानना आवश्यक है। तो पहले पांच जो 5:08:32 समुद्री तट थे उनको मान्यता दी गई टैग 5:08:35 दिया गया बाद में इनकी संख्या बढ़कर 18 हो 5:08:37 गई। ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन होता क्या है? 5:08:41 यह डेनमार्क का जो कोपेनहगे है वहां पर एक 5:08:44 संस्था है फाउंडेशन फॉर एनवायरमेंटल 5:08:46 एजुकेशन उसके द्वारा हर साल दिया जाता है। 5:08:49 यह एक तरह का इको लेवल होता है जो कि जो 5:08:51 समुद्री तट होते हैं, बीचेस होते हैं या 5:08:53 मरीन और पर्यटन नौकाएं होती हैं उनको दिया 5:08:57 जाता है। 38 प्रकार के क्षमा कीजिएगा। 33 5:09:01 प्रकार के कठोर अंतरराष्ट्रीय मानदंड होते 5:09:03 हैं जिनको कि पूरा करने के लिए सूची बनाई 5:09:07 जाती है और मूल रूप से इन्हें चार भागों 5:09:09 में बांटा जाता है। मतलब जो क्राइटेरिया 5:09:10 रखा गया है उसको चार भागों में बांटा जाता 5:09:12 है। तो आप देखें नहाने के पानी की 5:09:14 गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन, 5:09:17 सुरक्षा और सेवाएं, लाइफ गार्ड्स की 5:09:19 उपलब्धता और पर्यावरण शिक्षा और सूचना। 5:09:22 अंतरराष्ट्रीय जरी इसमें होती है। विशेष 5:09:24 अंतरराष्ट्रीय जरी होती है। और यूएनईपी और 5:09:27 इसके अलावा जो विश्व पर्यटन संगठन है, 5:09:31 आईयूसीएन है, एफ डबलई है मतलब ये डेनमार्क 5:09:33 की जो संस्था है फाउंडेशन है ना तो ये 5:09:36 सारे जो है इसमें सब सब के सब शामिल होते 5:09:39 हैं और इनके सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं। 5:09:41 ब्लू फ्लैग प्रमाणन के मामले में स्पेन का 5:09:43 दुनिया भर में पहला स्थान है। अभी तक 5:09:45 जितने भी देश इसमें शामिल हैं और समुद्र 5:09:47 तट शामिल हैं उसमें नंबर वन पर है स्पेन। 5:09:50 सिर्फ एक साल के लिए वैलिड होता है 5:09:52 क्योंकि हर साल सालाना स्थिति में यह 5:09:53 पुरस्कार माफ कीजिएगा यह जो मान्यता है यह 5:09:56 दी जाती है। हर साल इसके नवीनीकरण की 5:09:59 आवश्यकता होती है। तो भारत के जो 18 हैं 5:10:01 उनको भी देख लेते हैं। ओसा यहां देखें ओसा 5:10:04 का जो तट है गोल्डन बीच चंद्रभागा। भारत 5:10:07 और एशिया के एशिया का पहला भारत का भी 5:10:10 पहला और एशिया का भी पहला ये ब्लू फ्लैग 5:10:12 बीच था। 2018 में इसको मान्यता मिली थी। 5:10:14 दो आपके ओसा के हो गए। गुजरात का है 5:10:17 शिवराजपुर बीच द्वारका का। कासरगोड बीच और 5:10:20 पदुबद्री बीच कर्नाटक का है। ठीक ऐसे ही 5:10:23 यहां देखें 5:10:25 केरल का है कपड़ और चाल श्रीवर्धन रायगढ़ 5:10:29 का नगांव रायगढ़ का परना का पालघर का 5:10:32 गुहागर रत्नगिरी का और लाडघर रत्नगिरी का 5:10:35 ये सब जो है ये महाराष्ट्र के हो गए। 5:10:37 आंध्र में ऋषिकों है विशाखापत्तनम का। 5:10:39 कोवलम बीच है तमिलनाडु का। अंडमान निकोबार 5:10:41 का राधा नगर है। लक्षद्वीप का मिनीिकय 5:10:44 थुंडी और कदमत है। पुुडुचेरी का ईडन है और 5:10:46 दव का घोघला है। नेक्स्ट आप यहां पर उसी 5:10:50 को चित्र के माध्यम से देखेंगे। सब 5:10:51 दक्षिणी हिस्से में है क्योंकि तट जहां 5:10:54 समुद्र का पाया जाएगा वहीं पर ये हो सकता 5:10:56 है। तो इन्हें नीले रंग से दिखाया भी गया 5:10:57 है। शिवराजपुर है आपका द्वारका वाला। इसके 5:11:00 बाद ये घोगला है दीव का। ये परनाका है। 5:11:03 यहां पे आप लाडघर को देख रहे हैं। मतलब 5:11:05 लाडघर को देख रहे हैं महाराष्ट्र का। ये 5:11:06 दोनों महाराष्ट्र के हैं। यहां पे 5:11:08 श्रीवर्धन है। इसी प्रकार से यहां पर आप 5:11:11 गुह को देख रहे हैं। ये नगांव है। यहां पे 5:11:14 पदुबद्री है। कासरगोड़ है। ये कर्नाटक का 5:11:16 हो गया। सारे के सारे वही है जो पीछे आपने 5:11:18 पढ़े हैं। उसमें कुछ नया नहीं है। यहां पे 5:11:20 ये देखिए गोल्डन बीच है। पूरी ओसा का। 5:11:22 ऋषिकों है आंध्र का। यहां पे कोवलम है। 5:11:25 यहां राधा नगर है। अंडमान निकोबार आइलैंड 5:11:27 का हो गया। ये रहा। इसके बाद यह चाल है। 5:11:29 यह कपड़ है। यहां मिनीकाय थुंडी है 5:11:31 लक्षद्वीप का। इस प्रकार से ये सारे जो 5:11:33 ब्लू फ्लैग प्रमाणन बीज हैं ये दिए हुए 5:11:35 हैं। भारत में जल स्रोतों की जो अभी तक की 5:11:38 पहली गणना है वो हुई है वाटर बॉडीज को 5:11:40 पहली बार गिनने का प्रयास किया गया है 5:11:42 देशी स्तर पर। तो मोदी जी के दूरदर्शी 5:11:45 नेतृत्व में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री 5:11:46 गजेंद्र सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में यह 5:11:49 काम किया गया और यह गणना भारत के जल 5:11:51 संसाधनों की एक व्यापक सूची देती है 5:11:53 जिसमें कि प्राकृतिक और मानव निर्मित 5:11:55 दोनों तरह के जो जल स्रोत है उनको शामिल 5:11:57 किया गया है। मतलब वो ताल भी हो सकता है, 5:11:59 कोई टैंक हो सकता है, कोई झोल हो सकता है, 5:12:01 कोई बिल हो सकता है। मतलब बहुत तरह के जल 5:12:04 स्रोत होते हैं। तो वो सभी इसमें शामिल 5:12:06 किए गए। एक डेटाबेस तैयार किया गया और छठी 5:12:08 लघु सिंचाई गणना के अनुरूप एक केंद्र 5:12:10 प्रायोजित सिंचाई गणना की भी शुरुआत की 5:12:12 गई। यह सारा काम हुआ। 5:12:15 जलाशय कहां पर हैं, कितने हैं, कैसे हैं? 5:12:18 उनका उनका अतिक्रमण अगर हो रहा है तो उसकी 5:12:20 स्थिति भंडारण की क्षमता उनके अंदर कितनी 5:12:22 है? सारे पहलुओं पर जानकारी इकट्ठी की गई। 5:12:25 तो जो इंपॉर्टेंट फैक्ट निकल कर आए वह 5:12:27 आपके लिए काफी काम के हैं। जैसे कि देश 5:12:29 में 5:12:31 देखिए 5:12:32 2424540 5:12:35 जल स्रोतों की गणना की गई। 97.1स 5:12:39 जो है वह ग्रामीण क्षेत्र में है और सिर्फ 5:12:41 2.9स जो है वह शहरी क्षेत्र में जो टॉप 5:12:45 फाइव इस मामले में राज्य हैं उसमें पश्चिम 5:12:47 बंगाल पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर 5:12:49 हम लोग हैं यानी उत्तर प्रदेश फिर आंध्र 5:12:51 है फिर उड़ीसा है फिर असम है। कुल मिलाकर 5:12:53 63% तो इसी में कवर होता है। शहरी 5:12:56 क्षेत्रों में जल जल स्रोतों की संख्या के 5:12:58 मामले में शहरी क्षेत्र में जो टॉप राज्य 5:13:01 हैं उनको देखने की जरूरत है। तो शहरी 5:13:03 इलाकों में पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर, 5:13:05 तमिलनाडु दूसरे स्थान पर, केरल तीसरे 5:13:07 स्थान पर, उत्तर प्रदेश चौथे और त्रिपुरा 5:13:09 पांचवें स्थान पर। ग्रामीण क्षेत्रों में 5:13:11 पहले स्थान पर पश्चिम बंगाल है, दूसरे 5:13:13 स्थान पर उत्तर प्रदेश है। तीसरे स्थान पर 5:13:16 आंध्र, चौथे पर उड़ीसा और पांचवें पर असम। 5:13:20 59.5% 5:13:22 जो जल स्रोत है वह तालाब हैं। 5:13:25 उसके बाद टैंक हैं 15.7 बाकी रिजवायर हैं 5:13:29 12.1 जल संरक्षण योजनाएं, रिसाऊ टैंक, चेक 5:13:32 डैम, झीलें ये सब थोड़े-थोड़े हैं। 9.3 5:13:35 झीलों की मात्रा और कम है। 0.9 बाकी जो है 5:13:38 वो 2.5% में आते हैं। उसमें से भी 55.2% 5:13:42 जो जल स्रोत हैं, वह निजी संस्थाओं के पास 5:13:45 है, मतलब उनके कब्जे में हैं। 44.8 जो है 5:13:48 यह सार्वजनिक क्षेत्र के पास है। जो जल 5:13:50 स्रोत सार्वजनिक वाले हैं उसमें ज़्यादातर 5:13:52 स्वामित्व उनका पंचायतों के अधीन आता है। 5:13:54 मतलब पंचायतें उस पर कंट्रोल रखती हैं। और 5:13:57 निजी स्वामित्व वाले में ज्यादातर 5:13:59 व्यक्तिगत हैं। किसानों के पास है या फिर 5:14:01 लोगों के पास है या जो कंपनियां या 5:14:03 संस्थाएं हैं उनके पास। निजी स्वामित्व 5:14:05 वाले जल स्रोत जो हैं उनके मामले में जो 5:14:07 अग्रणी राज्य हैं टॉप फाइव स्टेट्स हैं 5:14:09 उसमें वेस्ट बंगाल यानी पश्चिम बंगाल पहले 5:14:12 नंबर पर दूसरे नंबर पर असम तीसरे नंबर पर 5:14:14 आंध्र, चौथे नंबर पर उड़ीसा और पांचवें 5:14:16 नंबर पर झारखंड आते हैं। उपयोग हो रहे जल 5:14:19 स्रोतों में से जो प्रमुख जल स्रोत हैं 5:14:21 उनको सिंचाई के बाद जो सबसे ज्यादा यूज़ 5:14:23 किया जाता है वो मछली पालने के लिए 5:14:24 इस्तेमाल किया जाता है। पहले नंबर पर इन 5:14:27 पानी के स्रोतों का यूज़ किया जाता है 5:14:28 इरीगेशन के लिए यानी सिंचाई के लिए। दूसरे 5:14:31 नंबर पर इस्तेमाल किया जाता है मछली के 5:14:33 पालन के लिए। तो मत्स्य पालन के लिए जहां 5:14:35 पर इसका प्रचुरता में इस्तेमाल होता है, 5:14:38 ज्यादा इस्तेमाल होता है, उसमें टॉप फाइव 5:14:39 है पश्चिम बंगाल, 5:14:42 असम, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, फिर आंध्र। और 5:14:45 सिंचाई के लिए जहां पर बड़े पैमाने पर 5:14:47 यूज़ होता है, उसमें पहले नंबर पर है 5:14:48 झारखंड, दूसरे पर आंध्र, तीसरे पर 5:14:50 तेलंगाना, चौथे पर वेस्ट बंगाल और गुजरात 5:14:53 है पांचवें पर। अपने यहां तो ज्यादातर 5:14:55 सिंचाई ग्राउंड वाटर से होती है। मतलब 5:14:57 नलकूप सिंचाई होती है। 78% जल स्रोत जो 5:15:00 हैं वो मनुष्य द्वारा बनाए हुए हैं। 22% 5:15:02 जो है वो प्राकृतिक हैं। और इन सभी जल 5:15:05 स्रोतों में से करीब 1.5% या 1.6% 5:15:07 अतिक्रमित हो गए हैं। और ये आंकड़ा सिर्फ 5:15:10 थोड़ा सा है। इससे कहीं ज्यादा अतिक्रमण 5:15:12 के शिकार हैं। अब इसमें से भी 95.4 5:15:15 ग्रामीण क्षेत्रों में कब्जे कर लिए गए 5:15:17 हैं और बाकी शहरी क्षेत्रों में गांव में 5:15:18 कब्जा करने की प्रवृत्ति होती है। गढ़ है 5:15:21 पटवाकर तुरंत घर बनवाओ। हालांकि यह चीज 5:15:24 शहरों में भी है लेकिन गांव में ऐसे खुले 5:15:25 आम कब्जा करते हैं। हालांकि अब भूल एक 5:15:27 खसरा खतौनी की प्रक्रिया ऑनलाइन होने से 5:15:29 चीजें थोड़ी व्यवस्थित हो गई। फिर भी 5:15:33 2937638 5:15:34 जलाशयों के संबंध में पूरी जल विस्तार 5:15:36 क्षेत्र की जानकारी है और इसमें से 72.4 5:15:42 ये जो जल विस्तार क्षेत्र है ये 0.5 5:15:45 हेक्टेयर से कम का है और 13.4 का जो जल 5:15:48 विस्तार क्षेत्र है वो 0.5 से एक हेक्टेयर 5:15:51 के बीच का है। मतलब कहने का तात्पर्य यह 5:15:52 है कि इनकी तादाद भले ही ज्यादा हो लेकिन 5:15:54 विस्तार उतना नहीं है। क्षेत्रफल से आप 5:15:56 इसका अंदाजा बहुत आराम से लगा सकते हैं। 5:15:59 ठीक है? मतलब सिर्फ 3.1% ही जल स्रोत ऐसे 5:16:02 हैं जिनका कि जल विस्तार यानी पूरा जो 5:16:04 फैलाव है पानी के स्रोत का फैलाव है। 5:16:06 तालाब हो, पोखरी हो, ताल हो, तलैया हो कुछ 5:16:09 भी तो उसका फैलाव 5 हेक्टेयर से ज्यादा 5:16:11 हो। ऐसे सिर्फ 3.1सदी है। बाकी छोटे-छोटे 5:16:14 ही ज्यादा है। अब पर्यावरण से जुड़े हुए 5:16:16 कुछ मिसलेनियस है। इन्हें देख लीजिए। जैसे 5:16:18 कि मैंग्रोव वनस्पति स्थल है। तो मैंग्रोव 5:16:21 में आप राज्य देखेंगे वनस्पति कहां-कहां 5:16:24 पाई जाती है वो दी हुई है। तो आंध्र में 5:16:26 पूर्वी गोदावरी 5:16:28 कृष्णा और कोरिंगा तमिलनाडु में मुथुपेट 5:16:31 रामानंद पुलीकट काजूबेली पिंजवरम 5:16:34 अंडमान निकोबार में उत्तरी अंडमान और 5:16:36 निकोबार केरल में कन्नूर और बमबानंद गोवा 5:16:39 में गोवा ही पूरा ही मतलब तटीय क्षेत्र 5:16:41 महाराष्ट्र में विजयदुर्ग वेलनंदूर बिकौली 5:16:44 मुमरा देवी मालवन बसई मनोरी अचला रत्नगिरी 5:16:48 देवघर वेलदूर विकौली वैतरणी और मालवन 5:16:51 गुजरात में खंभात की खाड़ी और कच्छ की 5:16:53 खाड़ी कर्नाटक में साउथ कन्नड़ मुनावर 5:16:56 कारवाड़ मंगलोर और कुंडा पुर नेक्स्ट आप 5:16:59 देखेंगे वेस्ट बंगाल जो है वहां पर 5:17:02 सुंदरवन उड़ीसा में सुवर्ण रेखा धामरा 5:17:04 कच्छ वनस्पति अनुवांशिक संसाधन केंद्र 5:17:07 चिल्का वितरकणिका महानदी और देवी कड़वा 5:17:10 भारत के जो प्रमुख वनस्पति क्षेत्र हैं 5:17:12 इसको आप देखें तो ब्रह्मपुत्र क्षेत्र 5:17:14 दिया है विस्तार दिया है विशेषता दी हुई 5:17:16 है ब्रह्मपुत्र में ब्रह्मपुत्र और असम 5:17:19 क्षेत्र जो है यहां क्षेत्र के नाम के तौर 5:17:21 पर असम का इलाका है तो असम के इलाके में 5:17:24 ब्रह्मपुत्र और सुरमा घाटी है यहां 5:17:27 सदाबहार वन पाए जाते हैं। घने बांसों के 5:17:29 झुरमुट और लंबीलंबी घासें पाई जाती हैं। 5:17:31 सिंधु का मैदानी क्षेत्र पंजाब, पश्चिमी 5:17:33 राजस्थान, उत्तरी गुजरात सूखा और गर्म है। 5:17:36 घटीले जंगल और झाड़ियां मिलती हैं। 5:17:37 मालाबार का इलाका है, प्रायद्वीपीय तट है। 5:17:40 तो यहां पर व्यापारिक फसलें घने जंगल के 5:17:42 अलावा पाई जाती हैं। नारियल, सुपारी, काली 5:17:44 मिर्च, कॉफी, चाय, रबड़, काजू ये सब मिलते 5:17:46 हैं। ठीक बात है। अंडमान निकोबार में आप 5:17:49 देखेंगे सदाबहार, अर्ध सदाबहार, कच्छ 5:17:51 वनस्पति हर प्रकार के जंगल पाए जाते 5:17:53 हैं।कि क्योंकि विषुवत रेखा के ज्यादा 5:17:55 नजदीक है अंडमान निकोबार द्वीप समूह। 5:17:57 इसीलिए यहां पर पारिस्थितिकी और जो 5:18:00 वनस्पतिक विविधता है वो ज्यादा पाई जाती 5:18:02 है। इसकी जो जलवायु है अंडमान निकोबार 5:18:04 द्वीप समूह की वो समूचे भारत की जलवायु से 5:18:06 तनिक अलग है। ये उष्णकटिबंधीय जलवायु के 5:18:08 प्रकार का है। काफी हद तक मतलब पूर्ण नहीं 5:18:11 है लेकिन काफी हद तक है। दूरी भी कम है 5:18:13 इक्वेटर से। इसके बाद आप देखेंगे वेस्टर्न 5:18:15 हिमालयन रीजन को। ये कश्मीर से लेकर 5:18:17 कुमायूं तक का है। इसमें शीतोष्ण कटिबंधीय 5:18:20 क्षेत्र चीड़ देवदार शंकुधारी जो वृक्ष 5:18:23 हैं कोनफर्स हैं। चौड़ी पत्ती वाले 5:18:25 शीतोष्ण पौधे भी पाए जाते हैं। और अल्पाइन 5:18:27 रीजन जो है वहां पर सफेद देवदार मिलता है 5:18:29 जो शीतोष्ण से ऊपर का इलाका है। ऊंचाई 5:18:31 बढ़ती है। सफेद भोज के वृक्ष मिलते हैं। 5:18:34 सदाबहार पेड़ भी कहीं-कहीं मिल जाते हैं। 5:18:36 सिक्किम से ईस्टर्न दार्जिलिंग तक का जो 5:18:38 इलाका है पूर्वी हिमालय का वहां शीतोष्ण 5:18:40 इलाके में ओक, जायफल, द्विफल, बड़े फूलों 5:18:42 वाले सदाबहार पेड़ और वहां छोटी बेत के 5:18:45 जंगल पाए जाते हैं। गंगा का मैदानी इलाका 5:18:47 है। कछारी मैदान वहां गेहूं, चावल और 5:18:49 गन्ने की खेती होती है। दक्कन के मैदान 5:18:52 में पतझड़ वाले जंगल, कई तरह की जंगली 5:18:54 झाड़ियां ये सब मिलती है। कुछ पवित्र उपवन 5:18:56 भी हैं। उनको भी देख लेते हैं। राज्यवार 5:18:58 जानना जरूरी है। जैसे कि पवित्र वन के नाम 5:19:00 से आंध्र में, सरना के नाम से बिहार में, 5:19:02 गुमपावन के नाम से अरुणाचल में, देवराय और 5:19:05 पन्ना के नाम से गोवा में, सरना जहेड़ा के 5:19:07 नाम से झारखंड में। देवराय और देवगड़ी 5:19:10 महाराष्ट्र में, गमखाप मोहक मणिपुर में, 5:19:12 देवरा काडू देवराबाना भूपन बाना या भुतपन 5:19:16 बाना कहा जाता है। नागबाना और देवकन ये 5:19:18 कर्नाटक का है। जोहेरा ठाकुरम्मा ये 5:19:21 उड़ीसा में हो गया। कोविल काडू पुडुचेरी 5:19:24 का स्वामी शोला और कोविल काडू तमिलनाडु 5:19:26 का। गरम थान जाहिरा हरी थान सावित्री थान 5:19:29 संथालपुरी थान पश्चिम बंगाल ओरान बानी 5:19:32 शामलाट दे क्रिस देवबन और जोगमाया 5:19:35 राजस्थान का कीलालिंगदो और किला 5:19:38 कीलामट्यांग ये मेघालय का हो गया कााउस 5:19:40 साराकाबू केरल का सिफिन हिमाचल का 5:19:44 अब इसके बाद कुछ यहां पर जो क्लाइंस है 5:19:46 उनको देख लेते है क्लाइन जो है ये समुद्र 5:19:49 विज्ञान का शब्द है मतलब इसका इस्तेमाल 5:19:53 किया जाता है तरल पदार्थ के अंदर एक लंबी 5:19:55 परत बनाने के है लेकिन यहां पर हम लंबी 5:19:58 परत नहीं बनाते हैं बल्कि एक लंबी रेखा 5:19:59 खींचते हैं जिसमें एक समान गुणवत्ता वाली 5:20:02 चीज को एक साथ कैटेगराइज किया जाता है। तो 5:20:05 ये जो क्लाइन है इनको अलग-अलग रूपों में 5:20:07 देखिए सबसे पहले है हेलो। 5:20:10 अब हेलो क्या चीज है? तो हेलो्लाइन जो है 5:20:13 ये ऊर्ध्वा ऊर्ध्वधर स्थिरीकरण में 5:20:15 महत्वपूर्ण भूमिका मतलब जल निकाय के अंदर 5:20:17 ये लवणता की ढाल होती है। लवणता समान 5:20:20 लवणता वाले जो स्थान है। अब इसमें क्या 5:20:22 किया गया है इसको आप ऐसे समझे। 5:20:25 तो आप समझे कि हेलो का ठीक मतलब क्या होता 5:20:28 है? यहां तो जो आपने देखा इसमें ऊर्ध्वाधर 5:20:30 लवणता की ढाल जैसा कहा गया है। सीधी बात 5:20:33 यह है कि समुद्र की ऐसी परत जहां गहराई के 5:20:36 साथ पानी में जो खारापन है यानी लवणता है 5:20:39 वो तेजी से बदलती है। मतलब कम खारा पानी 5:20:42 आमतौर पर जो ज्यादा खारा पानी होता है 5:20:44 उसके ऊपर तैरता है। सीधी बात है कि नमक 5:20:47 मिला होगा पानी में ज्यादा मात्रा में नमक 5:20:49 होगा। खारापन बढ़ेगा तो यही बात है ना तो 5:20:51 वह पानी भारी होगा। वह नीचे रहेगा और 5:20:54 जिसमें कम नमक की मात्रा रहेगी वह ऊपर 5:20:56 रहेगा। तो जब आप हेलो परत से होकर गुजरते 5:20:58 हैं तो पानी का खारापन अचानक बहुत तेजी से 5:21:01 बढ़ जाता है या कुछ मामलों में घट भी जाता 5:21:04 है। आमतौर पर ये उन स्थानों पर ज्यादा 5:21:06 क्लियर दिखाई देता है जहां नदियों का मीठा 5:21:08 पानी समुद्र के साथ मिलता है या जहां पर 5:21:10 ग्लेशियर से बर्फ पिघल रही होती है और 5:21:12 खारे पानी में मिल रही होती है। तो ये तो 5:21:15 हो गया हेलो। इसके बाद आप देखेंगे 5:21:17 कैमोक्लाइन को। तो ये कैमोक्लाइन क्या चीज 5:21:20 है? 5:21:21 समुद्र की वह परत जिसमें कि गहराई के साथ 5:21:24 पानी की जो रासायनिक संरचना है केमिकल 5:21:26 कंपोजशन है वह अचानक बदल दे बदल बदल जाता 5:21:30 है माफ कीजिएगा और बदलाव कैसा होता है 5:21:32 बड़ा बदलाव होता है परिवर्तन भी ऐसा वैसा 5:21:34 नहीं होता है एक छोटा बदलाव नहीं होता है 5:21:37 बड़ा बदलाव होता है मतलब केमोक्लाइन परत 5:21:40 के ऊपर पानी में भरपूर ऑक्सीजन और इसके 5:21:42 ठीक नीचे आप देखेंगे कि ऑक्सीजन ही नहीं 5:21:44 हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैस आपको जानलेवा 5:21:47 गैसें दिखाई देंगी जैसे काला सागर है ये 5:21:50 इसका उसका सबसे बढ़िया एग्जांपल है 5:21:51 केमोक्लाइन का। उसके बाद आप थर्मोक्लाइन 5:21:54 को देख रहे हैं कुछ यहां पर। ठीक है? तो 5:21:56 थर्मोक्लाइन क्या चीज है वो भी देख लीजिए। 5:21:58 ये ऐसी परत होती है समुद्र में ऐसी लेयर 5:22:01 होती है जहां की गहराई के साथ तापमान में 5:22:03 अचानक से बहुत तेजी से गिरावट आती है। 5:22:06 तापमान तो वैसे भी गहराई में जाने पर घटने 5:22:08 लगता है। सूर्य के प्रकाश का प्रभाव कम 5:22:10 होने लगता है। लेकिन यहां पर क्या होता 5:22:12 है? एकदम से तापमान में गिरावट आती है। तो 5:22:14 पानी के तापमान के आधार पर इसको पहचाना 5:22:16 जाता है। सूर्य की किरणें जो पानी की ऊपरी 5:22:18 सतह है उसको गर्माती है। नीचे का जो 5:22:20 हिस्सा है वो उस संपर्क में आ नहीं पाता। 5:22:23 तो यहां अचानक से तापमान गिरने का अनुभव 5:22:25 करते हैं। और यह परत जो है ये समुद्र के 5:22:27 गर्म ऊपरी पानी को नीचे का जो अत्यधिक 5:22:30 ठंडा पानी होता है उससे अलग करती है। तो 5:22:32 इसको इसको हम कहते हैं थर्मोक्लाइन। इसके 5:22:34 बाद है पिकनोक्कलाइन। 5:22:37 ठीक है? पिकनोक लाइन या पाइनुक लाइन कहा 5:22:39 जाता है। यहां पानी के घनत्व में बहुत तेज 5:22:42 बदलाव आता है। पानी का जो घनत्व है वो 5:22:44 बहुत तेजी से परिवर्तित हो जाता है। 5:22:47 तो घनत्व का सीधा लेना देना आप बहुत अच्छी 5:22:50 तरह से अगर बेसिक साइंस आपने पढ़ा है और 5:22:52 आप आपको पढ़ना ही होता है। जनरल स्टडी में 5:22:55 उतनी साइंस की जानकारी होनी चाहिए। तो आप 5:22:57 जानते हैं कि पानी का पानी के खारेपन का 5:22:59 उसके घनत्व से सीधा ताल्लुक। ठीक है? तो 5:23:02 तापमान और खारापन दोनों घनत्व को प्रभावित 5:23:04 करते हैं। ठंडा और खारा पानी ज्यादा भारी 5:23:06 होता है। ज्यादा भारी होता है मतलब ज्यादा 5:23:09 डेंसिटी वाला होता है। तो ऐसी स्थिति में 5:23:11 पाइनोक्लाइन जो ज़ोन होता है या 5:23:14 पिकनोक्कलाइन जो आप कह रहे हैं 5:23:15 पाइनोक्लाइन जोन जो होता है जो आप इसको 5:23:18 उच्चारण करिए चाहे पिकनोक्कलाइन कहिए चाहे 5:23:19 पाइनोक्लाइन कहिए। इस जोन में पानी का 5:23:21 घनत्व गहराई के साथ अचानक बढ़ने लगता है 5:23:24 और अचानक बहुत तेज बढ़ने लगता है। तो यह 5:23:26 जो महासागरीय जल का ऊर्ध्वाधर मिश्रण होता 5:23:28 है यानी वर्टिकल मिक्सिंग होता है उसको 5:23:30 रोकने का काम करता है। मतलब ऊपर की परत 5:23:33 कुछ अलग व्यवहार करती है महासागर में नीचे 5:23:35 की परत कुछ अलग व्यवहार करती है। तो लोग 5:23:36 कहते हैं कि समुद्र रहस्यमई। ठीक है? इसके 5:23:39 बाद आप इग्नोक्लाइन इको कक्लाइन को देख 5:23:42 रहे हैं। इकोलाइन क्या होता है भाई? 5:23:46 तो इकोलाइन जो है यह प्रजातियों की संरचना 5:23:48 के संदर्भ में एक स्पष्ट सीमा होती है। 5:23:50 इकोक्लाइन का प्रवाह जो है यह पर्यावरणीय 5:23:52 ढाल के पार होता है। मतलब इसमें ऊंचाई, 5:23:55 तापमान, लवणता, गहराई, अजैविक कारकों से 5:23:57 संबंधित जो बदलाव होते हैं उन सबको हम 5:23:59 शामिल करते हैं। ये सब आपने देखा। इसके 5:24:02 अलावा इसमें आप केमोक्लाइन जो शब्द था 5:24:04 इसको भी जान चुके हैं। तो कुल मिलाकर ये 5:24:07 सारे क्लाइन जो है ये थोड़े पता होने 5:24:09 चाहिए। अब यहां जो पशु है और उनकी श्रेणी 5:24:11 है उसको भी देख रहे हैं। तो जेरिकोलस 5:24:13 एनिमल यह मरुस्थलीय जीव होते हैं। सीमित 5:24:16 जल उपलब्धता में अपनी पूरी जिंदगी बिता 5:24:18 लेते हैं और रेगिस्तानी जलवायु और सूखे 5:24:21 वातावरण के लिए इनका शरीर इनका व्यवहार और 5:24:23 इनकी संरचना सब अनुकूल होते हैं। आरबोरियल 5:24:26 एनिमल जो है ये वृक्षय जीव होते हैं। 5:24:28 पेड़ों पर रहते हैं। जैसे बंदर और गिलहरी 5:24:32 फासोरियल बिलकारी या खनिज जीव होते हैं। 5:24:35 ये क्या करते हैं? खुदाई करके जमीन के 5:24:37 अंदर घुस जाते हैं। बिल खोदने वाले जितने 5:24:39 रोडेंट्स होते हैं, कृंतक होते हैं, 5:24:41 कुतुरने वाले प्राणी वो सब इसी कैटेगरी 5:24:43 में आते हैं। छछूंदर भी उसी में शामिल और 5:24:46 कुछ जो है वो टेरेस्ट्रियल होते हैं। ये 5:24:47 जानवर जमीन पर रहते हैं। रेगिस्तानी 5:24:49 परिस्थिति के लिए तो अनुकूल नहीं होते हैं 5:24:51 लेकिन बाकी जो सामान्य मौसमी दशाएं होती 5:24:53 है उसमें ये जमीन पर इत्मीनान से रहते 5:24:55 हैं। तो आवास और अनुकूलन के आधार पर 5:24:57 दुनिया भर की वनस्पतियों को बांटा गया। अब 5:25:00 ये सारे जो फाइट्स हैं उनको आप देख रहे 5:25:02 हैं। सबसे पहले है ट्रोपोफाइट। ट्रोपोफाइट 5:25:05 ऐसी वनस्पतियां होती हैं जो कि नमी और 5:25:07 सूखे के बदलते मौसम के हिसाब से ढली हुई 5:25:09 होती हैं। जैसे पर्णपाती जंगल है, समाना 5:25:11 है। हाइड्रोफाइट बहुत ज्यादा जहां पानी 5:25:13 होता है उसकी सतह पर उगने वाली वनस्पति 5:25:16 मतलब जैसे कमल हो गया, कुमुदनी हो गई। 5:25:18 हग्रोफाइट मतलब जहां आद्रता बहुत ज्यादा 5:25:20 है, दलदली इलाके हैं, वहां पाई जाती हैं। 5:25:22 जेोफाइट्स एकदम सूखे क्षेत्र में पाए जाते 5:25:25 हैं। जहां पे पानी बहुत कम होता है। मानसल 5:25:27 इनके तने होते हैं और आकार छोटा होता है, 5:25:29 कांटेदार होते हैं। जैसे कैक्टस, मेसोफाइट 5:25:32 मध्यम तापमान और सामान्य नमी वाले इलाके 5:25:34 ज्यादातर जो खेतीहर फसलें होती है, चौड़ी 5:25:37 पत्ती वाले जंगल होते हैं। क्रायोफाइट्स 5:25:39 मतलब जहां पे क्रायो टेंपरेचर एकदम नीचे 5:25:42 का टेंपरेचर जीरो डिग्री से कई डिग्री 5:25:44 नीचे माइनस में होता है। वहां पर यह बर्फ 5:25:46 में जीवित रहने वाली वनस्पतियां होती हैं। 5:25:48 लाइकेन और काई वनस्पतियां कम ये मध्यम 5:25:50 प्रजातियां होती हैं। इसके बाद है 5:25:52 हेलोफाइट। यह लवणीय जल में पैदा होते हैं। 5:25:55 खारे पानी में जैसे मैंग्रोव है। लिथोफाइट 5:25:57 जो है यह कठोर चट्टानों पर उग जाती हैं। 5:25:59 पायरोफाइट जो है यह मोटी छाल वाली और 5:26:02 अग्नि को रोकने वाली वनस्पतियां होती है 5:26:04 जो कि घने जंगलों में आमतौर पर पाई जाती 5:26:06 हैं। यह जब जंगल में प्राकृतिक तौर पर आग 5:26:08 लगती है नेचुरली फॉरेस्ट फायर लगती है तो 5:26:11 उसको कंट्रोल करने का काम करती हैं। 5:26:13 प्रिटोफाइट जो है ये बहुत ज्यादा गहरी 5:26:15 जड़ों वाली वनस्पतियां होती हैं और ये 5:26:17 आमतौर पर जो भूमिगत जल होता है, संतृप्ति 5:26:19 क्षेत्र होता है वहां से पानी बटोर ले आते 5:26:21 हैं। जैसे खेजड़ी और बबूल। तो ये आमतौर पर 5:26:23 जेफाइट्स का ही नमूना है। मतलब जो 5:26:25 मरुस्थलीय वनस्पतियां होती हैं वही इस 5:26:27 प्रकार की होती हैं। ठीक है? 5:26:29 नेक्स्ट आप तापमान की स्थिति के आधार पर 5:26:31 वनस्पतियों को देख रहे हैं। तो सबसे पहले 5:26:34 इसमें नंबर आएगा मेगाथर्म का। पूरे साल भर 5:26:36 इन्हें ऊंचा तापमान और नमी की आवश्यकता 5:26:38 अत्यधिक नमी की आवश्यकता होती है। मतलब 5:26:40 सीधी बात है। उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की 5:26:43 चर्चा हो रही है। ठीक है? उष्णकटिबंधीय 5:26:45 वर्षा वन ही इस प्रकार के होते हैं। 5:26:47 जिन्हें खूब सारा पानी और खूब सारा 5:26:49 टेंपरेचर चाहिए होता है। मेसोथर्म जो है 5:26:51 इन्हें गर्मियों में ज्यादा तापमान और 5:26:53 सर्दियों में कम तापमान की आवश्यकता होती 5:26:55 है। उपोष्ण कटिबंधीय और शीतोष्ण पर्णपाती 5:26:57 ऐसे होते हैं। माइक्रोथर्म को पूरे साल भर 5:27:00 कम तापमान ही चाहिए होता है। अल्पाइन 5:27:02 क्षेत्र के जो जंगल है बोरियल टैगा 5:27:04 शंकुधारी है ना हेक्स हेगिस्टोथर्म जो है 5:27:07 ये बहुत ज्यादा ठंडे बर्फीले इलाकों में 5:27:09 पैदा पैदा होते हैं। जहां गर्मी का मौसम 5:27:11 बहुत छोटा या नहीं के बराबर होता है। तो 5:27:13 टुंड्रा वनस्पतियां जिसमें कि लाइकेन और 5:27:15 काई आते हैं और मिट्टी से कई मीटर नीचे 5:27:18 बर्फ के ढकी हुई होती है। वहां पर ये पाए 5:27:20 जाते हैं। यूरथर्मल ऐसे पौधे और जीव होते 5:27:24 हैं जो कि वर्ष भर तापमान में एक विस्तृत 5:27:26 बदलाव को सहन कर सकते हैं। मतलब टेंपरेचर 5:27:28 में बहुत सारा वेरिएशन आता है। 5:27:30 स्टेनोथर्मल ऐसे प्राणी मतलब ऐसी जीव 5:27:33 जातियां होती हैं। खासतौर पर पौधे होते 5:27:35 हैं जो कि तापमान की बहुत छोटी सी लाइन को 5:27:37 को ही सहन कर सकते हैं। मतलब तापमान में 5:27:39 जरा सा अगर अधिक बदलाव हो गया। बहुत 5:27:42 मामूली बदलाव हुआ तब तो चल जाएगा लेकिन 5:27:44 अगर ज्यादा थोड़ा सा भी हुआ तो इनके लिए 5:27:46 जानलेवा होता है। मतलब निहायत ही 5:27:48 संवेदनशील होते हैं। कृषि प्रौद्योगिकी 5:27:50 में अगर आप देखेंगे तो हाइड्रोपोनिक्स जो 5:27:52 है ये जल संवर्धन की विधि होती है और 5:27:55 इसमें खेती मिट्टी के लिए मतलब जो 5:27:58 हाइड्रोपोनिक खेती होती है ये मिट्टी की 5:27:59 उपस्थिति के बिना पानी के अंदर पोषक 5:28:02 पदार्थों को घोल कर की जाती है। यानी पानी 5:28:04 में ही न्यूट्रिएंट्स घोल दिए जाते हैं और 5:28:06 उसी में पौधों को उगाया जाता है। तो पौधे 5:28:08 उग जाते हैं। एक्वापोनिक्स इसमें मछली और 5:28:12 पौध उत्पादन दोनों एक साथ किया जाता है। 5:28:14 दो प्रजातियां इसमें जल कृषि 5:28:15 हाइड्रोपोनिक्स इसमें शामिल होती हैं। 5:28:17 एरोपोनिक्स मिट्टी की आवश्यकता के बिना 5:28:19 धुंध या हवा के वातावरण में पौधा उगाया 5:28:21 जाता है। वातावरण में तैरते हुए ये जो 5:28:24 हाइड्रोपोनिक घोल है उसमें जड़ों मतलब 5:28:26 उन्हीं का जड़ों पर छिड़काव किया जाता है। 5:28:29 एरोपोनिक टावर ये एग्रोटनॉमी यूरोप का एक 5:28:34 वर्टिकल गार्डन है जो कि प्राकृतिक रूप से 5:28:36 भोजन उगाने के लिए टावरों का इस्तेमाल 5:28:38 करता है। सामान्य जैविक खेती में इस्तेमाल 5:28:40 होने वाले 95% पानी को संरक्षित करता है 5:28:43 और 35 से 65% अधिक पोषक तत्वों वाली जो 5:28:46 सब्जियां और फल बूटियां इत्यादि हैं 5:28:48 सब्जियां हैं जड़ी बूटियां हैं उनको 5:28:50 प्राप्त करता है। तो यहां पर औषधियां 5:28:52 किससे कौन सी प्राप्त होती है? वो भी दिया 5:28:54 हुआ है। उसको देखिए। कैफीन ये कहां से 5:28:56 मिलता है? चाय और कॉफी से। मन को स्फूर्ति 5:28:59 देता है। साइक्लो एक्टिव साइको एक्टिव यह 5:29:02 उत्तेजक औषधि है। ज्यादा मात्रा में सेवन 5:29:04 करने पर आपका तंत्रिका तंत्र और पूरा शरीर 5:29:06 प्रभावित होता है। लेकिन कम मात्रा में 5:29:08 सीमित तरीके से सेवन करने पर यह नींद 5:29:10 भगाने का काम करता है। टेट्रासाइक्लन 5:29:12 बैक्टीरियम से प्राप्त होता है। जीवाणु 5:29:14 नाशक है। पेनिसिलिन पेनिसिलियम से प्राप्त 5:29:16 होता है जो कि एक कवक है। ध्यान दीजिएगा। 5:29:18 यह जीवाणु नाशक होने के साथ-साथ जीवाणु 5:29:20 रोधी भी है। पपेन पपीते से प्राप्त होता 5:29:22 है। यह बहुत ज्यादा पाचक होता है। मारफीन 5:29:25 पोस्ते से प्राप्त होता है। पीड़ाहारी 5:29:26 दर्द निवारक है। मेंथाल मेंथा से प्राप्त 5:29:29 होता है। बाहरी त्वचा पे आप लगाते हैं तो 5:29:30 दर्द कम हो जाता है। ए्रोपीन बेलाडोना से 5:29:33 प्राप्त होता है। दर्द निवारक है। कुनैन 5:29:35 सिंकोना से प्राप्त होता है। मलेरिया ज्वर 5:29:38 को दूर रखने का काम करता है। कोकेन कोको 5:29:40 से प्राप्त होता है। पीड़ाहारी और 5:29:41 संवेदनहारी है। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन 5:29:44 सिनकोना के पेड़ की छाल से मिलता है। 5:29:46 मलेरिया रोधी है। 5:29:48 इसके बाद आप भारतीय उत्सर्जन मानक को देख 5:29:50 रहे हैं। तो यहां पर बीएस स्टेज 1 2 3 ऐसे 5:29:53 करके जो वाहनों पर आप लिखा देखते हैं ना 5:29:55 तो वो चीज पहला मानक है भारत स्टेज वन 5:29:58 यूरो वन इसका नाम है। समय था सन 2000 का 5:30:00 राष्ट्रीय स्तर पर इसको लागू किया गया। 5:30:02 दूसरा है टू यूरो 20034 फिर 20045। 5:30:06 राजधानी क्षेत्र और 13 शहरों में पहले 5:30:08 स्टेप में और दूसरे स्टेप में आप देखेंगे 5:30:10 राष्ट्रीय स्तर पर। भारत स्टेज 3 यूरो 3 5:30:13 20045 में 13 शहर और राजधानी उसके बाद 5:30:16 पूरे देश में 2010 में भारत स्टेज फोर को 5:30:19 आप देखेंगे 5:30:20 2017 नेशनल लेवल पर फिर यूरो फाइव भारत 5:30:24 भारत स्टेज फाइव बीएस5 इसको लिखा जाता है 5:30:27 तो नेशनल लेवल पर 2017 में और अभी चल रहा 5:30:29 है BS6 या यूरो सिक्स 1 अप्रैल 2020 से 5:30:32 नेशनल लेवल पर अब यहां ग्रीन हाउस गैसेस 5:30:35 उनके सोर्सेस और सोर्स और इफेक्ट जो है वो 5:30:38 दिए हुए हैं। तो सबसे महत्वपूर्ण और सबसे 5:30:40 बड़ी विलयन है ग्रीन हाउस गैस में कार्बन 5:30:42 डाइऑक्साइड। ऊर्जा उत्पादन के लिए जो हम 5:30:44 फासिल फ्यूल जलाते हैं वहां से कार्बन 5:30:46 डाइऑक्साइड मतलब कार्बन मूल रूप से जो 5:30:48 संचित होता है वो ऑक्सीजन से क्रिया करके 5:30:50 कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में विमोचित 5:30:52 होता है निकलता है। ठीक है? तो पृथ्वी का 5:30:54 तापमान बढ़ा रहा है। ज्यादा मात्रा में 5:30:56 रहेगी तो तापमान बढ़ाएगी क्योंकि ये अपने 5:30:58 अंदर टेंपरेचर को अब्सॉर्ब करने की क्षमता 5:30:59 रखती है। सल्फर डाइऑक्साइड दूसरे नंबर की 5:31:02 ग्रीन हाउस गैस है। सल्फर युक्त ईंधन 5:31:04 जलेगा तो मिलेगी। इससे अम्ल वर्षा होती 5:31:06 है। नाइट्रोजन ऑक्साइड भट्टियों में ईंधन 5:31:08 के जलने से ताप वृद्धि तो होती ही है। साथ 5:31:10 में सांस के रोग पकड़ लेते हैं। ओजोन ओजोन 5:31:13 अगर समताप मंडल में है तो फिर जीवनदाई 5:31:16 नहीं है। लेकिन अगर यह क्षोभ मंडल में 5:31:18 पहुंच गई यानी ट्रोपोस्फीयर में पहुंच गई 5:31:20 और यहां बन गई सेकेंडरी पोलटेंट के तौर पर 5:31:22 तो ये जानलेवा हो सकती है। तो 5:31:24 हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों 5:31:26 की उपस्थिति में ये सेकेंडरी पोलटेंट यानी 5:31:28 द्वितीयक प्रदूषक के रूप में बनती है। और 5:31:30 हां यहां पर अगर क्षोभ मंडल में यह रहेगी 5:31:32 तो यह वैश्विक तापमान बढ़ाएगी और फेफड़ों 5:31:34 में क्षति हो सकती है। मतलब फेफड़े 5:31:37 क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। मिथेन भी ग्रीन 5:31:39 हाउस गैस है। प्राकृतिक तो है ही है। 5:31:41 जानवर और मनुष्य यहां तक कि इसके स्रोत 5:31:43 होते हैं। चावल के खेत भी स्रोत होते हैं। 5:31:45 कोयला की कोयले की जो खदानें होती हैं वो 5:31:47 स्रोत हैं। अपशिष्ट पदार्थों से ये रिलीज़ 5:31:49 होती है। ये भी पृथ्वी का तापमान बढ़ाती 5:31:51 है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन प्रशीतन उपकरण में 5:31:54 इस्तेमाल तो फिर क्लोरोफ्लोरोकार्बन जो है 5:31:56 ये प्रशीतन उपकरण के तौर पर इस्तेमाल होता 5:31:58 है। प्रशीतन उपकरणों में इस्तेमाल होता है 5:32:00 ठंडक रखने के लिए। रेफ्रिजरेटर, एसी ये 5:32:03 सब। ठीक है? और ये लंबे समय तक वातावरण 5:32:06 में बना रहता है। तो ओजोन क्षरण के लिए तो 5:32:08 उत्तरदाई है। ताप भी बढ़ाता है। कई सारे 5:32:10 और हाइड्रोकार्बन है जो कि औद्योगिक 5:32:12 क्रियाओं में निकलते हैं। तापमान बढ़ाते 5:32:14 हैं। आंखों में जलन पैदा करते हैं। फ्लाई 5:32:15 ऐश कोयले का जब दहन किया जाता है, कोयला 5:32:18 जलाया जाता है तो बहुत बारीक राख के कण 5:32:20 निकलते हैं। वह भी इस दिशा में काम करते 5:32:22 हैं। अब आगे चलते हैं। संविधान की जो 5:32:26 सूचियां हैं संघ सूची, राज्य सूची, 5:32:28 समवर्ती उनमें पर्यावरण से संबंधित 5:32:31 कौन-कौन से विषय हैं? तो संघीय सूची में 5:32:32 परमाणु ऊर्जा, खनिज स्रोत, प्रतिरक्षा, 5:32:35 अंतरराष्ट्रीय मामले, अंतरराष्ट्रीय 5:32:36 परिवहन, जहाज, रानी, मुख्य पोत पत्तन ये 5:32:39 सारे मामले। 5:32:41 राज्य सूची में जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, 5:32:43 अस्पताल, कृषि, सिंचाई, जल निकासी, श्मशान 5:32:45 और कब्रिस्तान ये सारे विषय हैं जिनका 5:32:48 संबंध प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से 5:32:50 पर्यावरण से। समवर्ती सूची यानी कनकरेंट 5:32:53 लिस्ट जो है उसमें वन, वन्य जीव, परिवार 5:32:55 कल्याण, खाद्य सुरक्षा और पुरातात्विक 5:32:57 स्थल आते हैं। अंटार्कटिका में भारत के जो 5:33:00 अनुसंधान केंद्र हैं उन पर भी लगे हाथ 5:33:02 निगाह डाल लेते हैं। जैसे कि दक्षिण 5:33:04 गंगोत्री 1983-84 का है। यह भारत का पहला 5:33:08 अनुसंधान केंद्र था, लेकिन, बर्फ में डूब 5:33:10 गया समय के साथ, तो अब काम के लायक बचा 5:33:12 नहीं है। इसको बंद करना पड़ा। मैत्री 88 5:33:15 में स्थापित हुआ था। दूसरा है और यह 5:33:17 शिमचीर मरुद्यान नाम की जो पहाड़ी है उस 5:33:19 पर स्थित है पूर्वी अंटार्कटिका में और 5:33:21 भारतीय 2012 का है लेटेस्ट यह लारसे 5:33:24 पहाड़ी के पास में जो प्रिट्स वे है उस पर 5:33:27 स्थित है और ये अभी वर्तमान में काम कर 5:33:29 रहा है। नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड 5:33:32 ओशन रिसर्च केंद्र ये गोवा का जो वास्कोडि 5:33:34 गामा है वहां पर स्थित है। पृथ्वी विज्ञान 5:33:37 मंत्रालय भारत सरकार का जो है उसी के अधीन 5:33:39 इसको स्थापित किया गया था 25 मई 1998 को। 5:33:42 तो ध्रुवीय और दक्षिण महासागरीय जो 5:33:44 वैज्ञानिक गतिविधियां है उसको यह संचालित 5:33:46 करता है। आगे बढ़ते हैं। चार प्रकार के 5:33:49 कार्बन पाए जाते हैं। ठीक है? पर्यावरण 5:33:52 में चार प्रकार के कार्बन पाए जाते हैं और 5:33:54 इन पर प्रश्न पूछा जाता है। तो सबसे पहले 5:33:57 नंबर पर पाया जाता है ब्लू कार्बन। 5:34:00 मतलब दुनिया भर के महासागरों और जो तटीय 5:34:03 पारिस्थितिकी तंत्र हैं उनके द्वारा सोखा 5:34:05 गया कार्बन। अवशोषित कार्बन जो है उसी को 5:34:07 कहते हैं ब्लू कार्बन। तीन प्रकार 5:34:10 मैंग्रोव, समुद्री घास और ज्वारीय दलदल। 5:34:13 यह ब्लू कार्बन का आधे से अधिक हिस्सा 5:34:15 संग्रहित करते हैं। तो यह क्षेत्र जंगलों 5:34:18 की तुलना में बहुत तेजी गति से कार्बन 5:34:20 कार्बन को अवशोषित करते हैं, संग्रहित 5:34:22 करते हैं। और हां, लाखों साल तक ऐसा कर 5:34:24 सकते हैं। बशर्त कि ये खुद लाखों साल तक 5:34:25 बने रहे। तटीय मिट्टी में पाया जाने वाला 5:34:28 कार्बन हजारों साल पुराना होता है। प्राय 5:34:30 हजारों साल पुराना होता है क्योंकि इनके 5:34:32 सोखने की क्षमता आप देख ही रहे हैं। 5:34:34 नेक्स्ट आप देखेंगे, ब्लैक कार्बन। 5:34:36 अल्पकालिक प्रदूषक होता है यह और ग्रह को 5:34:39 गर्म करने के लिए उत्तरदाई है। ब्लैक 5:34:42 कार्बन को ही हम लोग सामान्य भाषा में 5:34:44 कहते हैं कालिक। यह पर्टिकुलेट मैटर 2.5 5:34:47 का हिस्सा है। जलवायु परिवर्तन में इसका 5:34:49 योगदान आप जानते ही हैं। तो जीवाश्म ईंधन 5:34:51 को अगर अधूरे तौर पर जलाया जाए तो यह 5:34:53 उत्पन्न होता है। ब्राउन कार्बन जो है ये 5:34:56 भूरा धुआं उत्पन्न करता है। ब्लैक कार्बन 5:34:58 और ब्राउन कार्बन दोनों वातावरण में छोड़े 5:35:00 जाते हैं तो ये आपस में साथ-साथ मिलजुलकर 5:35:02 रहते हैं। और यह वातावरण में जो तापमान का 5:35:05 पैटर्न है, बादल बनने की प्रक्रिया है, 5:35:07 सबको प्रभावित करते हैं। यहां तक कि जो 5:35:08 सोलर एनर्जी का पैटर्न है और बादलों की 5:35:10 प्रवृत्ति है, उसको भी ये बदल देते हैं। 5:35:12 मतलब यह विनाशकारी होते हैं, लाभदायक नहीं 5:35:14 होते हैं। इसके बाद नंबर आता है ग्रीन 5:35:17 कार्बन का। यह वैश्विक कार्बन चक्र में 5:35:19 सबसे इंपॉर्टेंट होता है और यह प्राकृतिक 5:35:22 वन में संग्रहित कार्बन होता है जो कि 5:35:24 प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अलग हुआ 5:35:26 होता है। कैसे अलग? कार्बन डाइऑक्साइड को 5:35:28 पौधों ने खींचा और उसमें से अपने काम के 5:35:31 पदार्थों को निकाला और कार्बन को अपने 5:35:33 अंदर संचित कर लिया। ठीक? तो इस प्रकार से 5:35:35 ये पृथक हुआ ग्रीन कार्बन जो कि पौधों के 5:35:38 अंदर संचित। 5:35:39 आगे बढ़ते हैं। तो अगला जो हमारा है वन 5:35:43 लाइनर का मामला है। इसमें जितने भी वन 5:35:45 लाइनर है वह एक साथ सजोए गए हैं। जैसे कि 5:35:47 संसाधनों के उपयोग तथा भविष्य के लिए उनके 5:35:49 संरक्षण की आवश्यकता को संतुलित करने की 5:35:51 जो प्रक्रिया है उसको कहा जाता है सतत 5:35:53 विकास। मतलब हम इस्तेमाल करेंगे अगली जो 5:35:56 पीढ़ी है आने वाली जो नस्लें हैं उनके लिए 5:35:58 भी सुरक्षित रखें। गैर परंपरागत ऊर्जा के 5:36:01 स्रोत और आने वाली नस्लों में सिर्फ अपने 5:36:03 जो मनुष्य द्वारा पैदा किए गए बच्चे 5:36:05 उत्तराधिकारी हैं वही नहीं अन्य जीव 5:36:07 जातियां भी गैर परंपरागत ऊर्जा के वे 5:36:10 स्रोत जो कि नवीकरणीय हैं। वैश्विक ऊर्जा 5:36:14 वैश्विक सूचना संरचना और राष्ट्रीय 5:36:16 सांख्यिकीय व्यवस्थाओं द्वारा सतत 5:36:18 क्षेत्रीय आधार पर संकलित सूचना के आधार 5:36:20 पर जो संधारणीय विकास लक्ष्य हैं उनकी 5:36:22 रिपोर्ट को पेश किया जाता है। मतलब चारों 5:36:24 ओर से डाटा इकट्ठा किया जाता है। सीधी बात 5:36:27 प्राकृतिक संसाधनों का वर्तमान पीढ़ी 5:36:29 द्वारा इस प्रकार से इस्तेमाल किया जाए कि 5:36:30 इनका न्यूनतम क्षरण हो और आगे के लिए हम 5:36:33 इन्हें संरक्षित रख पाए। प्रकृति को कम से 5:36:35 कम नुकसान पहुंचाए। तो यही है सस्टेनेबल 5:36:37 डेवलपमेंट। इन सी2 कंजर्वेशन आप जानते ही 5:36:40 हैं जो प्रजाति जहां की है उसको वहीं पर 5:36:42 उसकी अनुवांशिक विविधता के साथ संरक्षित 5:36:44 करना, उसे सुरक्षा देना, उसका आवास 5:36:46 परिवर्तित ना करना, उसके हैबिटेट को ना 5:36:48 बदलना। उसके हैबिटेट, उसके नीश को ना 5:36:50 बदलना ये कहलाता है इनसी2 कंजर्वेशन। और 5:36:53 यह ज्यादा आसान होता है। संभव हो ज्यादातर 5:36:56 मामलों में अगर संभव हो और उसका जो नेचुरल 5:36:59 हैबिटेट है वह पूरी तरह से तबाह ना हुआ हो 5:37:01 तो हर प्रजाति को इन सी2 कंजर्वेशन के 5:37:04 अंतर्गत ही बचाया जाना चाहिए। क्योंकि x 5:37:05 सी2 कंजर्वेशन में बहुत तरह की दिक्कतें 5:37:07 आती हैं और ज्यादा संभावना होती है कि वो 5:37:09 प्रजाति सर्वाइव नहीं कर पाएगी। इसके बाद 5:37:12 आप देखें यहां पर कि प्राकृतिक वास का 5:37:14 विनाश जो है ये सबसे बड़ा उत्तरदाई कारण 5:37:15 है किसी भी जैव प्रजाति के विलुप्त कर 5:37:17 मतलब विलोपन का। 5:37:20 राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी 5:37:22 प्रौद्योगिकी केंद्र जो है वह केरल में है 5:37:24 और साथ ही साथ आप यहां पर देख रहे हैं कि 5:37:26 केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान 5:37:28 ये जोधपुर में प्रकाश संश्लेषण यानी 5:37:30 फोटोसिंथेसिस के जरिए पृथ्वी के वायुमंडल 5:37:33 में मौजूद कुल ऑक्सीजन का सबसे बड़ा 5:37:35 हिस्सा जो है उत्सर्जित करने का काम ये 5:37:37 अमेज़न के जंगल करते हैं। लेकिन ध्यान 5:37:39 दीजिएगा कि ये स्थलीय पारिस्थितिकी की बात 5:37:41 हो रही है। टेरेस्ट्रियल जो इकोसिस्टम है 5:37:42 उसकी बात हो रही है। जो मैरिन इकोसिस्टम 5:37:45 या इक्वाटिक इकोसिस्टम है उसमें महासागर 5:37:47 के अंदर जो उपस्थित प्रकाश संश्लेषण करने 5:37:50 वाले घटक हैं उनकी बात नहीं हो रही है। वो 5:37:52 अलग से हैं और उनकी तादाद ज्यादा है। 5:37:54 मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व 5:37:56 समुद्री जैव विविधता के दृष्टिकोण से 5:37:57 दुनिया का सबसे समृद्ध क्षेत्र है। इसमें 5:37:59 ऐश्वरी आती है। समुद्र तट आता है। आसपास 5:38:02 के जंगल आते हैं। समुद्री घास है। प्रवाल 5:38:04 भित्ति है। नमकीन पानी के दलदल है। 5:38:06 मैंग्रोव है। इसके साथ-साथ 21 द्वीप इस 5:38:09 प्रकार से समृद्ध अवस्था में मौजूद है। 5:38:11 मतलब इस क्षेत्र में किसी भी तरह की 5:38:13 व्यवसायिक या टूरिस्ट एक्टिविटीज को परमिट 5:38:16 नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन अब आप देख 5:38:18 रहे हैं कि पूरा क्षेत्र जो है वह कवर 5:38:20 किया जा रहा है। कहां अरब अरब सागर और 5:38:22 बंगाल की खाड़ी चारों तरफ टूरिज्म और 5:38:24 व्यवसायकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। 5:38:27 इसके बाद आप आगे देखें किसी स्थान पर 5:38:30 अधिकतम तापमान मैदानी इलाकों में 40° 5:38:32 सेल्सियस और उससे अधिक पहाड़ी क्षेत्रों 5:38:34 में कम से कम 30° सेल्सियस या उससे अधिक 5:38:36 पहुंच जाता है तो हीट वेव मतलब पर्वत में 5:38:38 अगर 30° से ऊपर पहुंचा तो हीट वेव है और 5:38:40 अपने यहां 40 से ऊपर पहुंच गया तो हीट वेव 5:38:43 है। अपने यहां तो पर 12ों महीने हीट वेव 5:38:45 ही चलती रहती है। अब आगे देखें मतलब सर्दी 5:38:48 के कुछ जो एकदम कड़क महीने हैं उनको छोड़ 5:38:50 दिया जाए तो गर्मी का मौसम ही तो आमतौर पर 5:38:52 बना रहता है और भविष्य में वैसा ही होगा 5:38:54 भी। अधिकतम तापमान विचलन सामान्य से 4.5 5:38:58 डिग्री सेल्सियस अधिक अथवा कम होता है। 5:39:00 आमतौर पर अधिक होता है तो उसको हीट वेव 5:39:02 कहा जाता है। नोकनी सिंड्रोम ये पूछा जाता 5:39:05 है कौन से कौन सी बीमारी किस प्रदूषण से 5:39:07 हो रही है? तो नौकनी सिंड्रोम जो है ये 5:39:09 फ्लोराइड के प्रदूषण की वजह से होता है। 5:39:11 हाइड्रोजन फ्यूल सेल विद्युत उत्पन्न करने 5:39:13 के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिश्रित 5:39:15 करते हैं। जिससे कि जल और ऊष्मा उत्सर्जित 5:39:18 होते हैं। पानी और ऊष्मा उत्सर्जित होते 5:39:20 हैं। ध्यान दीजिएगा। अधिकतर रेगिस्तानी 5:39:22 पौधे रात के समय अपने फूलों को खिलाते 5:39:25 हैं। दिन में खिलेंगे तो जलकर भस्म हो 5:39:27 जाएंगे। रेगिस्तानी कीड़े रात के समय ही 5:39:29 सक्रिय भी होते हैं और ये फूल भी दिन में 5:39:31 सूर्य के तीखे प्रकाश और उतनी गर्मी में 5:39:33 सर्वाइव नहीं कर पाएंगे। दोनों चीजें पौधे 5:39:35 नाइट्रोजन को नाइट्रेट के रूप में ग्रहण 5:39:37 करते हैं। कोरिंगा मैंग्रोव जो है ये 5:39:38 गोदावरी के डेल्टा पर है। ये सब फुटकर 5:39:41 बातें हैं लेकिन काम की है। और ये फुटकर 5:39:43 बातें आई कहां से है? ये सब पीवाईक्यू ही 5:39:45 तो है। जितने आप देख रहे हैं फैक्ट ये सब 5:39:47 प्रीवियस ईयर क्वेश्चन से ही उठाए गए हैं। 5:39:49 कोरिंगा मैग्रोव जो है ये गोदावरी के 5:39:51 डेल्टा पर स्थित है। अर्ध स्थलीय जो 5:39:53 पारिस्थितिकी तंत्र है उसमें आप देखेंगे 5:39:55 तो पर्वत का पारिस्थितिकी तंत्र आएगा। 5:39:57 निम्न स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र आएगा। 5:39:59 अर्ध शुष्क जो पारिस्थितिकी तंत्र है वो 5:40:01 भी आएगा। सबसे ज्यादा जो राष्ट्रीय उद्यान 5:40:04 है वह एमपी में है और वन्य जीव अभयारण्य 5:40:06 सबसे ज्यादा अंडमान निकोबार में है। 2001 5:40:10 में पौध किस्मों और किसानों के अधिकारों 5:40:12 के संरक्षण का अधिनियम पारित किया गया था। 5:40:14 वनस्पति वायु का क्षमा कीजिएगा। वनस्पति 5:40:16 जलवायु का उचित मापदंड है। ये कोपेन का 5:40:19 कथन था। कोपेन का जलवायु वर्गीकरण आप 5:40:21 पढ़ते हैं ना तो उसका कथन था। खैर, वृक्ष 5:40:24 उपोष्ण कटिबंधीय वनों में पाए जाते हैं और 5:40:26 सभी जीवित जातियां जो हैं वो जीवित रहने 5:40:28 के लिए एक दूसरे परस्पर निर्भर रहती हैं। 5:40:30 संबंधित रहती हैं। जैवमंडल ऐसे ही काम 5:40:33 करता है और ऐसे ही बनता है पूरा 5:40:35 पारितंत्र। यूकेलिप्टस एक दिन में 7 आठ 5:40:37 लीटर पानी पी जाता है जमीन से तो ये 5:40:39 पर्यावरण के लिए संकट है। डाई क्लोरो मतलब 5:40:42 ये उन इलाकों में लगाया गया था जहां दलदल 5:40:44 हुआ करते थे। दलदली जमीन हुआ करती थी और 5:40:46 इसने कुछ ही महीनों में कुछ वर्षों में 5:40:48 दलदलों को सुखा दिया। तो यह पानी बहुत 5:40:51 ज्यादा खींचता है जमीन से। डाई क्लोरो 5:40:53 डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो इथेन यानी डीडीटी 5:40:55 ये जैव अजैव अपघटनीय है। मतलब जैविक अपघटन 5:40:59 इसका संभव नहीं है। ये लंबे समय तक 5:41:00 वातावरण में बना रहेगा। ऐसा प्रदूषक है और 5:41:03 अब तो मच्छर भी इसके इसका कहना नहीं मानते 5:41:06 हैं। मच्छर भी इसके प्रति अनुकूलित हो 5:41:08 चुके हैं। तो ये किसी काम का नहीं है। 5:41:10 भारत में सौर ऊर्जा द्वारा संचालित जो 5:41:12 पहला हवाई अड्डा है वो कोचीन है। लिमनेटिक 5:41:14 क्षेत्र में पादप लवक अधिकता में वृद्धि 5:41:16 करते हैं और ये पानी का खुला क्षेत्र होता 5:41:18 है। मतलब इतने ज्यादा पादप लवक हो जाते 5:41:20 हैं कि पूरा पानी हरा हो जाता है। ऊन एक 5:41:23 जैव निम्नीकरण पदार्थ है। बशर्त कि ऊन 5:41:25 प्राकृतिक हो। आर्सेनिक प्रदूषित जल में 5:41:28 मिलता है कहां पर? प्राकृतिक तौर पर 5:41:30 प्रदूषित पानी में आर्सेनिक बांग्लादेश 5:41:32 में मिलता है बिना किसी बाहरी अशुद्धि को 5:41:33 मिलाए। कोयला, गोबर और लकड़ी बायोमास 5:41:36 ऊर्जा के स्रोत हैं और पारिस्थितिकी निकेत 5:41:38 उन श्रेणियों को रिप्रेजेंट करता है, 5:41:40 प्रतिनिधित्व करता है जो कि संसाधनों के 5:41:42 उपभोग और पारिस्थितिकी तंत्र में उसकी 5:41:43 कार्यात्मक भूमिका को सहन करते हैं। मतलब 5:41:46 सीधी बात है कि निकेत हर प्रजाति का भिन्न 5:41:48 होता है। गंगा एक्शन प्लान को शुरू किया 5:41:50 गया 1985 में। और हमारे द्वारा इस्तेमाल 5:41:53 की जाने वाली ऊर्जा का ज्यादातर जो स्रोत 5:41:55 है वो संग्रहित सौर ऊर्जा का 5:41:56 रिप्रेजेंटेशन है। जैसे कि बायोमास 5:41:58 एनर्जी, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा ये सब 5:42:01 सूर्य की ऊर्जा का ही व्युत्पन्न है। वहीं 5:42:03 से डिराइव हुआ है। चाहे डायरेक्ट आप उसे 5:42:05 महसूस करें या इनडायरेक्टली देखें। 5:42:09 केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन 5:42:12 मंत्रालय ने 5 अक्टूबर को डॉल्फिन डे 5:42:14 मनाने की घोषणा की। और नेकनामपुर झील पर 5:42:17 बनाया गया जो फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड 5:42:18 है, इसका उद्घाटन 2 फरवरी 2018 को किया 5:42:21 गया था। 3000 स्क्वायर फीट में ये फैला 5:42:23 हुआ है। एफटीडब्ल्यू ध्रुवंश हैदराबाद 5:42:25 मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी और रंग 5:42:27 रेड्डी जिला प्रशासन जो है उसका ये जॉइंट 5:42:29 वेंचर है एक संयुक्त प्रयास 5:42:33 इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया 5:42:34 गया है। पारिस्थितिकी शब्द जो है ये जर्मन 5:42:36 जीव वैज्ञानिक थे अर्नेनेस्ट हेकेल या 5:42:38 एनेस्ट हेल इन्होंने 1866 में इस्तेमाल 5:42:41 किया था। फ्रेडरिक क्लीमेंट्स ने 5:42:42 पारिस्थितिकी को समुदाय का विज्ञान माना 5:42:44 है। समुदाय पारिस्थितिकी के अध्ययन के लिए 5:42:47 जैविक समुदाय अध्ययन की इकाई होती है। और 5:42:49 नीश थ्योरी जो है ये पारिस्थितिकी तंत्र 5:42:51 ऊर्जा प्रवाह और पदार्थों के पुनर्चक्रण 5:42:53 की जो सीमाएं हैं उसको कवर करती है। मतलब 5:42:56 सारे रेफरेंसेस को यूज़ करती है। आपको ये 5:42:58 ध्यान देना है। नेक्स्ट आप यहां पर देख 5:43:00 रहे हैं। 5:43:02 दो भिन्न समुदायों के बीच का जो संक्रांति 5:43:05 क्षेत्र यानी मिश्रित क्षेत्र होता है 5:43:06 उसको हम कहते हैं इकोन। जीव और वातावरण के 5:43:09 बीच का जो पारिस्थितिकी संबंध है, 5:43:11 पारस्परिक संबंध है, उसको पारिस्थितिकी 5:43:13 कहा जाता है। जातियों का उद्भव 5:43:15 पारिस्थितिकी तंत्र की गति और जो गतिक 5:43:17 प्रवृत्ति है, उसको प्रदर्शित करता है। 5:43:18 पारिस्थितिकी तंत्र स्थिर नहीं होता है, 5:43:20 गतिमान होता है। चार्ल्स डार्विन ने 5:43:22 प्राकृतिक चयन यानी नेचुरल सिलेक्शन की जो 5:43:24 संकल्पना है उसको प्रतिपादित किया था। 5:43:27 प्राकृतिक चयन की संकल्पना यह कहती है कि 5:43:29 जीव संख्या में वंशानुगत विभिन्नताएं जाति 5:43:32 अलग-अलग जातियों के उद्भव का आधार होती 5:43:34 है। कहने का मतलब यह है कि दो जीव आपस में 5:43:37 संयोग करके तीसरे जीव का निर्माण करते 5:43:39 हैं। यह जो तीसरा प्राणी बनता है वो इन 5:43:41 दोनों जीवों के लक्षणों को लेकर तो पैदा 5:43:43 होता है लेकिन इन दोनों जीवों से भिन्न 5:43:45 होता है। यहां तक कि उसकी डीएनए संरचना भी 5:43:47 भिन्न होती है। सारा मतलब 100% डीएनए 5:43:50 मैचिंग नहीं हो पाती है। तो यह कुछ अलग 5:43:53 लक्षण लेकर पैदा होता है। कुछ अपने 5:43:55 माता-पिता से, कुछ अपने भिन्न लक्षण। और 5:43:57 फिर जब यह किसी और से सहयोग करके फिर अनेक 5:43:59 अन्य जीवों को उत्पन्न करता है, तो उनके 5:44:01 लक्षण और भी भिन्न होते हैं। ऐसे ही 5:44:03 विभिन्न प्रजातियों और जातियों का निर्माण 5:44:05 होता है। 5:44:07 इसके बाद आप देख रहे हैं यहां पर चरम 5:44:09 समुदाय वाले प्रौढ़ पारिस्थितिकी तंत्र की 5:44:11 जातियों में विविधता ज्यादा होती है और यह 5:44:13 ज्यादा स्थिर होते हैं। जितनी ज्यादा 5:44:14 डायवर्सिटी होगी, उतनी ज्यादा जितनी 5:44:16 ज्यादा विविधता होगी, जितनी ज्यादा 5:44:18 डायवर्सिटी होगी, उतनी ज्यादा स्थिरता 5:44:19 होगी। पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का सबसे 5:44:22 पहली बार इस्तेमाल टसले महोदय ने किया था 5:44:24 1935 में और यह एक गतिमान तंत्र है। बायोम 5:44:27 और निवास क्षेत्र या भौतिक पर्यावरण से ये 5:44:29 मिलकर बनता है। सौर ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण 5:44:32 है और वही मुख्य प्रेरक बल है। उसी से सब 5:44:34 कुछ चलता है। ऊर्जा एक दिशा में चलती है 5:44:36 और हर ट्रॉपिक लेवल पर इसकी मात्रा कम 5:44:38 होती जाती है। इकोक्लाइन एक प्रवणता सूचक 5:44:41 है। पौधों के समुदाय और भौतिक दशाओं में 5:44:43 परिवर्तन को दर्शाता है। तो ये क्लाइंस 5:44:45 हमने पीछे देखे थे। समस्त स्वपोषित पादप 5:44:48 शैवाल जो है यह प्राथमिक उत्पादक की 5:44:49 श्रेणी में आते हैं क्योंकि ये प्रकाश 5:44:51 संश्लेषण करके भोजन का निर्माण स्वयं करते 5:44:53 हैं और दूसरों को भी खिलाते हैं। अपघटन की 5:44:56 क्रिया मृतोपजीवी कवक यानी फंगी और 5:44:58 जीवाणुओं यानी बैक्टीरिया के द्वारा होती 5:45:00 है। क्लोरोफिल युक्त पौधे ही पारिस्थितिकी 5:45:02 तंत्र में उत्पादक होते हैं। जैसे काई, 5:45:04 घास और पेड़। बाकी प्रकाश संश्लेषण की 5:45:08 क्रिया जो है इसमें कार्बन डाइऑक्साइड का 5:45:10 रिडक्शन होता है और जल का ऑक्सीडेशन होता 5:45:12 है। पौधों का मुख्य काम संपूर्ण 5:45:14 पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भोजन उत्पादन 5:45:16 और ऊर्जा संचयन होता है। प्राइमरी 5:45:19 प्रोड्यूसर्स इनको कहा जाता है और अपघटक 5:45:21 जो है वो इसके वेंजर्स कहे जाते हैं यानी 5:45:23 प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाते हैं। जो 5:45:25 नम उष्णकटिबंधीय क्षेत्र हैं वहां पर 5:45:27 अपघटन बहुत तेजी से होता है। तापमान ऊंचा 5:45:29 रहे और नमी रहे। लिग्निन काइटिन यह पौधों 5:45:33 में ज्यादा मात्रा में होने पर अपघटन की 5:45:35 दर घट जाती है। ठीक है? अगर यह ज्यादा हुआ 5:45:38 तो अपर्द जिसमें कि नाइट्रोजन प्रचुरता 5:45:41 में होती है और लिग्नीन की मात्रा कम होती 5:45:42 है। यह बहुत तेजी से विघटित होता है। 5:45:45 दुनिया का विशालतम और सबसे स्थिर 5:45:47 पारिस्थितिकी तंत्र समुद्र है। जैवमंडल एक 5:45:50 भौगोलिक क्षेत्र है जिसमें कि सभी 5:45:52 पारिस्थितिकी तत्वों को एक साथ सम्मिलित 5:45:53 करके एक बड़ी इकाई बन सकती है। मैग्नीशियम 5:45:56 पौधों के जो पत्ते होते हैं उनके 5:45:58 क्लोरोप्लास्ट में पाया जाता है। और ऊर्जा 5:46:01 प्रवाह खनिज चक्र पारितंत्र का गतिक हृदय 5:46:03 कहलाते हैं। प्रकाश संश्लेषण के दौरान 5:46:05 क्लोरोफिल प्रकाश संवेदी कारक के रूप में 5:46:07 काम करता है। प्रकाश के प्रति संवेदना को 5:46:09 जागृत करता है। बैंगनी रंग का जो प्रकाश 5:46:11 होता है उसमें सबसे कम और लाल रंग के 5:46:13 प्रकाश में सबसे ज्यादा प्रकाश संश्लेषण 5:46:15 होता है। कृत्रिम प्रकाश में भी प्रकाश 5:46:18 संश्लेषण हो सकता है। इसमें कोई संदेह 5:46:20 नहीं। प्रकाश संश्लेषण का केंद्र पर्ण 5:46:22 हरित यानी क्लोरोप्लास्ट होता है। 5:46:24 क्लोरोफिल प्राय जो पत्तियां होती है 5:46:26 उन्हीं में पाया जाता है। शैवाल और 5:46:28 हाइड्रला जो कि पानी के अंदर पाए जाते हैं 5:46:30 उनकी पूरी काया ही प्रखर संश्लेषण करती 5:46:32 है। और प्रकाशिक अभिक्रिया क्लिक कोशिका 5:46:35 का जो क्लोरोप्लास्ट होता है उसके अंदर 5:46:37 ग्रेना में होती है। अप्रकाश प्रकाशिक 5:46:40 अभिक्रिया जो है वो स्ट्रोमा में होती है। 5:46:41 दोनों नाम याद रखिएगा। कम प्रकाश की 5:46:44 तीव्रता और उच्च प्रकाश की तीव्रता में 5:46:45 फर्क क्या है? जब आप कम से तीव्र की ओर 5:46:47 बढ़ेंगे तो प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ 5:46:49 जाएगी क्योंकि प्रकाश संश्लेषण की 5:46:51 प्रतिक्रियाएं जो है उनको संचालित करने के 5:46:53 लिए ज्यादा प्रकाश उपलब्ध होगा। जितना 5:46:55 ज्यादा प्रकाश उतनी तेज प्रक्रिया और जैसे 5:46:58 ही आप कम तीव्रता वाले प्रकाश की श्रेणी 5:47:00 में पहुंचेंगे तो वहां घट जाएगी दर। हां 5:47:02 ये है कि बहुत ज्यादा तीव्रता अगर हो गई 5:47:04 प्रकाश अति तीव्र हो गया। उसका जो विकिरण 5:47:06 है वो उच्च पहुंच गया तो ऐसी स्थिति में 5:47:09 पहले तो जानलेवा स्तर पर प्रकाश संश्लेषण 5:47:11 की दर बढ़ेगी। उसके बाद पौधे की क्षमता 5:47:13 नष्ट होने लगेगी और पौधा मरने की कगार पे 5:47:16 पहुंच जाएगा। किसी भी क्षेत्र में बायोमास 5:47:18 की वृद्धि दर क्योंकि एक सीमा होती है हर 5:47:20 चीज की। ऐसा नहीं है कि आप 10 दिन की सौर 5:47:23 ऊर्जा एक ही दिन में उेल देंगे तो पौधा 5:47:24 एकदम बढ़कर घना वृक्ष बन जाएगा। ऐसा नहीं 5:47:27 हो सकता। तो कम प्रकाश की तीव्रता वाला 5:47:30 हमने देखा। अच्छा बायोमास की वृद्धि दर को 5:47:32 उत्पादकता कहा जाता है किसी भी क्षेत्र 5:47:33 में। तो समय विशेष में किसी सकल बायोमास 5:47:36 की जो मात्रा होती है किसी क्षेत्र में 5:47:38 उसको उत्पादन कहा जाता है। बायोमास को 5:47:41 सूखे भार के रूप में भी चिन्हित किया जाता 5:47:43 है। पूर्ण रेगिस्तानों नंगी चट्टानों और 5:47:46 हिमाच्छादित जो भाग है वहां पर न्यूनतम 5:47:48 रेट नेट जो प्राथमिक उत्पादकता है वो दर्ज 5:47:50 की जाती है। गर्मी के मौसम में सर्दियों 5:47:53 की अपेक्षा सकल प्राथमिक उत्पादकता ज्यादा 5:47:55 होती है। उष्ण शुष्क मरुस्थलीय भागों में 5:47:57 जल सीमाकारी कारक होता है। जबकि ध्रुवीय 5:47:59 क्षेत्रों में सूर्य का प्रकाश और तापमान 5:48:02 सीमाकारी होते हैं। लिंडमैन के द्वारा जो 5:48:04 कि एक जीव वैज्ञानिक थे। इन्होंने 10% का 5:48:06 नियम प्रतिपादित किया और यह नियम यह कहता 5:48:08 है कि एक ट्रॉपिक लेवल से यानी एक पोषण 5:48:10 स्तर से दूसरे पोषण स्तर में जाने पर केवल 5:48:13 10% ऊर्जा ही अगले स्तर में पहुंच पाती 5:48:16 है। अगर यहां पर 100 है तो उसका सिर्फ 10% 5:48:19 यानी 10 ही अगले लेवल पर पहुंचेगा। 5:48:22 जो चराई वाली ग्रेजिंग फूड चेन होती है, 5:48:25 अपर्द श्रृंखला होती है उसमें हमेशा 5:48:27 वनस्पतियों से शुरुआत होती है। ठीक है? 5:48:29 वनस्पतियां हैं उनको चरने वाले फिर जीव 5:48:30 आएंगे। उन जीवों को खाने वाले मांसाहारी 5:48:32 आएंगे। फिर सब मरेंगे फिर उनका अपघटन 5:48:34 होगा। ठीक है? ये चलेगा। आहार श्रंखला में 5:48:37 क्रमिक पोषक तत्वों में जातियों की 5:48:39 संख्या, सकल बायोमास और ऊर्जा की सुलभता 5:48:42 और उपलब्धता में कमी होती जाती है। इसीलिए 5:48:44 जो पारिस्थितिकी पिरामिड या किसी भी 5:48:45 पिरामिड को आप देखेंगे तो उसके जो लेवल है 5:48:47 ट्रॉपिक लेवल है वो सीमित होते हैं। चार 5:48:49 पांच से ऊपर के नहीं होते। पौधे करते क्या 5:48:52 है? हैं। ये फोटोसिंथेसिस करके प्रकाश 5:48:54 ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते 5:48:56 हैं। तो ये एक ट्रांसड्यूसर का काम करते 5:48:57 हैं। यानी एक कन्व्टर होते हैं, परिवर्तक 5:48:59 होते हैं। शाकाहारी जीवों को सर्वाधिक 5:49:02 ऊर्जा मिलती है और शीर्ष उपभोक्ताओं को 5:49:04 सबसे कम। पारिस्थितिकी तंत्र में तत्वों 5:49:07 का जो चक्रण होता है उसको भू रासायनिक 5:49:09 चक्र कहा जाता है। पेरोक्सी एसिटिल 5:49:11 नाइट्रेट के बीच में और NO2 NO2 मतलब 5:49:13 नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन इन सबके 5:49:16 बीच सूर्य के प्रकाश की जब उपस्थिति होती 5:49:18 है तो जो प्रकाश रासायनिक धूम्र है वो 5:49:20 बनती है। ऊर्जा का पिरामिड हमेशा 5:49:22 उत्पादकता को दर्शाता है और सभी पिरामिडों 5:49:25 से उत्पादकता पता चलती है। फिलहाल ऊर्जा 5:49:27 का पिरामिड पौधों द्वारा ऑक्सीजन के बनने 5:49:29 और उपयोग की दर प्रकाश संश्लेषण और श्वसन 5:49:31 की सापेक्ष दरों पर निर्भर करती है। नतीजा 5:49:34 कुल मिलाकर यह निकलता है कि प्रकाश 5:49:36 संश्लेषण से श्वसन के लिए जरूरी मात्रा से 5:49:38 कहीं ज्यादा ऑक्सीजन बन जाती है। अब यहां 5:49:40 देखें घास के मैदान वाला जो इकोसिस्टम है 5:49:42 उसकी खाद्य श्रृंखला में उपभोक्ता के तौर 5:49:44 पर सबसे ऊंचे स्तर पर मांसाहारी जीव आते 5:49:46 हैं। अगर हम उत्पादकता यानी प्रोडक्टिविटी 5:49:50 के डिक्रीजिंग ऑर्डर को अरेंज करें, 5:49:51 डिसेंडिंग ऑर्डर को अरेंज करें तो सबसे 5:49:54 ज्यादा प्रोडक्टिव होते हैं मैंग्रोव। 5:49:55 उससे कम प्रोडक्टिव होते हैं घास के 5:49:57 मैदान। उससे भी कम प्रोडक्टिव होती हैं 5:49:58 झीलें और महासागर। साइज मत देखिए। 5:50:01 उत्पादकता देखिए। हरे पौधे दिन के समय में 5:50:04 कार्बन डाइऑक्साइड की बजाय ऑक्सीजन छोड़ते 5:50:06 हैं। दिन के समय वह प्रकाश संश्लेषण करते 5:50:08 हैं। इसलिए उनकी श्वसन दर प्रकाश संश्लेषण 5:50:11 की दर जो है वो श्वसन दर से ज्यादा होती 5:50:12 है। घास भूमि के क्षेत्र में परितंत्र की 5:50:15 मतलब पारितंत्र की जो खाद्य श्रृंखला है 5:50:17 उसमें सर्वोच्च स्तर के उपभोक्ता 5:50:19 मांसाहारी होते हैं। ये दूसरी बार रिपीट 5:50:20 किया हुआ फैक्ट। जो चौथा ट्रॉपिक लेवल 5:50:23 होता है वहां पर सबसे महत्वपूर्ण सदस्य 5:50:25 होता है मनुष्य। बायोलॉजिकल सिस्टम माना 5:50:28 जाता है जीवमंडल को जो कि सबसे बड़े साइज 5:50:30 का है। पृथ्वी कुल मिलाकर एक बंद 5:50:31 पारितंत्र है। यहां स्थलमंडल, वायुमंडल, 5:50:34 जलमंडल और बायोस्फीयर के बीच में सब कुछ 5:50:36 घूमता रहता है। जीवमंडल एक खुले तंत्र का 5:50:38 उदाहरण है। ऊर्जा हमेशा बाहर निकल जाती 5:50:41 है। क्रस्ट मेंटल और कोर ये सब जो है ये 5:50:43 पृथ्वी की संरचना है। तो क्रस्ट और मेंटल 5:50:46 का जो सबसे ऊपरी हिस्सा है। पूरी क्रस्ट 5:50:49 और मेंटल का ऊपरी हिस्सा दोनों मिलकर 5:50:50 स्थलमंडल यानी लिथोस्फीयर का निर्माण करते 5:50:53 हैं। कोर जो है यह सबसे अंदरूनी हिस्सा है 5:50:56 और इसे बेरिस्फीयर भी कहा जाता है। पृथ्वी 5:50:59 की ओर गहराई में अगर अंदर बढ़ेंगे तो आप 5:51:01 देखेंगे कि तापमान बढ़ेगा और कोर तक 5:51:03 पहुंचते-पहुंचते आग लग जाती है। तो 32 5:51:05 मीटर की गहराई तय अगर करते हैं आप तो 1 5:51:07 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ता है। आग्नेय 5:51:10 चट्टाने जो कि प्राइमरी रॉक्स कही जाती 5:51:13 हैं। ये सबसे पहले बनी और इन्हीं से फिर 5:51:15 आप देखते हैं कि जो अवसादी चट्टाने हैं या 5:51:18 रूपांतरित चट्टाने हैं वो बनती हैं। 5:51:20 आग्नेय चट्टाने लावा के ठंडा होने जमने से 5:51:23 बनती हैं। में अवशेष नहीं होते। अवशेषों 5:51:25 का अभाव होता है। 75% हिस्सा अवसादी 5:51:28 चट्टानों से ढका हुआ है धरती पर और बाकी 5:51:29 25% आग्नेय और रूपांतरित। 95% योगदान 5:51:33 आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों का है 5:51:35 क्रस्ट को बनाने में और अवसादी चट्टानों 5:51:37 का सिर्फ 5% योगदान है। पृथ्वी का औसत 5:51:40 तापमान अगर नापा जाए हालांकि ये परिवर्तित 5:51:42 होता रहता है। तो 14 डिग्री सेल्सियस। 5:51:45 वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा भूमध्य 5:51:47 रेखा से अगर आप ध्रुवों की ओर जाएंगे तो 5:51:48 घटती जाएगी क्योंकि गर्मी भी कम होती जाती 5:51:51 है। तो जलवाष्प भी उसी अनुपात में कम होती 5:51:53 जाएगी। क्षोभ मंडल यानी ट्रोपोस्फीयर में 5:51:55 ऊंचाई के साथ तापमान कम होता है। जमीन के 5:51:58 स्तर पर तापमान ज्यादा रहेगा। जैसे-जैसे 5:52:00 आप ऊपर जाएंगे तापमान घटता जाएगा। हालांकि 5:52:02 आप समताप मंडल में जब पहुंचेंगे ना तो 5:52:04 शुरुआती लेवल जो है वहां पर तापमान आपको 5:52:06 ज्यादा दिखाई देगा क्योंकि वहां पर ओजोन 5:52:08 परत पाई जाती है। मतलब ऑक्सीजन के परमाणु 5:52:11 आपस में जुड़ रहे होते हैं और वो यूवी 5:52:13 रेडिएशन को अपने अंदर अब्सॉर्ब कर रहे 5:52:15 होते हैं। तो सौर विकिरण के वहां ज्यादा 5:52:17 मात्रा में स्थिर होने की वजह से तापमान 5:52:19 ज्यादा होता है। तभी तो ओजोन बनती है। तो 5:52:21 ये चीज है। कुल मिलाकर तापमान आमतौर पर जो 5:52:24 वायुमंडल की परतों में गिरता है वो 1 5:52:26 डिग्री सेल्सियस प्रति 165 मीटर की रेंज 5:52:28 में गिरता है। स्ट्रेटोस्फीयर जो ओजोन 5:52:31 मंडल होता है वहां सघनता ओजोन की 20 से 35 5:52:33 किलोमीटर की ऊंचाई में ज्यादा होती है। 5:52:36 इसके बाद जो आयन मंडल है जहां की जो 5:52:38 रेडियो तरंगे हैं वहां से परावर्तित होकर 5:52:40 धरती पर लौट आती हैं। तो आयन मंडल में भी 5:52:43 थोड़ा सा तापमान बढ़ जाता है क्योंकि यहां 5:52:44 पर चार्ज पार्टिकल पाए जाते हैं आवेश। इस 5:52:47 वजह से सौर विकिरण लघु तरंगों के रूप में 5:52:50 पृथ्वी पर पहुंचता है। समताप रेखा 5:52:51 काल्पनिक रेखा है। थर्मल एनिमली जो है यह 5:52:54 विसंगति असल में देखें आप कि किसी औसत 5:52:56 तापमान और उस अक्षांश में औसत तापमान का 5:52:58 जो अंतर है मतलब स्थान का औसत तापमान कुछ 5:53:01 और अक्षांश का औसत तापमान कुछ और ये जो 5:53:03 विसंगति है इसको कहा जाता है तापमान की 5:53:05 विसंगति। 5:53:07 जलवाष्प सूर्य से आने वाली सूर्यात तप के 5:53:09 कुछ अंश को अवशोषित कर लेती है और पृथ्वी 5:53:11 धारा द्वारा विकरित ऊष्मा को सजोए रहता 5:53:13 है। कंबल की तरह से काम करती है जलवाष्प 5:53:16 और जितनी भी ग्रीन हाउस गैसेस हैं सभी 5:53:18 क्षोभ मंडल वायुमंडल की सबसे निचली और सघन 5:53:20 परत होती है। 75% पूरा जो वायु का संपूर्ण 5:53:23 भार है उसमें यह हिस्सा पाया जाता है। तो 5:53:26 ये संवहन मंडल भी कहलाता है। सभी प्रकार 5:53:28 की जो जलवा और मौसमी घटनाएं होती हैं। 5:53:30 बादलों का निर्माण, तूफान, चक्रवात ये सब 5:53:32 क्षोभ मंडल में ही घटित होता है। ठीक है? 5:53:34 इन सबका निर्माण क्षोभ मंडल के अंदर ही 5:53:36 होता है। पौधे जीवमंडलीय पारिस्थितिकी 5:53:38 तंत्र के जैविक और अजैविक संघटकों के बीच 5:53:40 में एक इंटरमीडिएट होते हैं। की स्टोन 5:53:42 प्रजातियां जो कि किसी समुदाय में 5:53:44 प्रचुरता और जैव भार की अल्पता के बावजूद 5:53:47 सामुदायिक अभिलक्षणों में अपना पूरा एक 5:53:49 प्रभावशाली अस्तित्व बनाकर रखती है। जैसे 5:53:51 कि हाथी की स्टोन प्रजाति। कोर इफेक्ट 5:53:54 क्या होता है? इसमें दो पारिस्थितिकी 5:53:55 तंत्र या पारितंत्र आपस में मिलते हैं। 5:53:58 वनस्पति समुदाय की अंतिम प्रावस्था को 5:54:00 सेरे या चरम समुदाय या चरम अनुक्रम या 5:54:03 जलवायु चरम या चरम वनस्पति कहा जाता है। 5:54:05 तो सेरे परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र का 5:54:07 द्योतक है। 15 से 20 गुना सामान्य से 15 5:54:10 से 20 गुना ज्यादा जो कार्बन डाइऑक्साइड 5:54:12 की मौजूदगी है ये प्रकाश संश्लेषण की दर 5:54:15 को घटा देती है। पौधे एक रेंज तक ही 5:54:17 प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं। उसके बाद वो 5:54:19 भी जवाब दे देते हैं। दुनिया का सबसे बड़ा 5:54:22 जो प्रबल भित्ति क्षेत्र है वह 5:54:23 ऑस्ट्रेलिया के उत्तरपूर्वी हिस्से में 5:54:25 प्रशांत महासागर में ग्रेट बैरियर रीफ है। 5:54:29 बाकी आप एल्बिटो इफेक्ट को देख रहे हैं। 5:54:31 ये देर संध्या काल और सुबह जो प्रातः काल 5:54:33 का समय होता है उस समय ऊंचा होता है। 5:54:36 दुनिया का वह हिस्सा जो कि मानव अधिवास के 5:54:38 लिए उपयुक्त है उसको एक्यूमन कहा जाता है। 5:54:41 और नॉन एक्यूमन उन्हें कहा जाता है जहां 5:54:43 कि मनुष्य के आवास की कोई संभावना नहीं बन 5:54:46 सकती। नाइट्रोजन प्रोटीन के निर्माण में 5:54:48 और संश्लेषण में सहायक होता है। फास्फोरस 5:54:50 जो है वो कोशिका द्रव्य बनाता है। ठीक है? 5:54:52 है ऊर्जा स्थानांतरण और उसके प्रवाह में 5:54:54 सहायक होता है। सल्फर जीवों में अमीनो 5:54:56 एसिड का निर्माण करता है। प्रोटीन निर्माण 5:54:58 में सहायता करता है। और कैल्शियम पेक्टेट 5:55:01 जो है वो एक नेचुरल ग्लू कहा जाता है। 5:55:03 नेचुरल ग्लू के तौर पे यानी प्राकृतिक 5:55:05 गोंद के तौर पर क्योंकि ये प्लांट सीमेंट 5:55:07 की भूमिका निभाता है। मजबूत ऊतक बनाता है 5:55:09 और पादप कोशिकाओं को आपस में पादप 5:55:11 कोशिकाओं को आपस में जोड़ता है। 5:55:13 मैग्नीशियम पौधों में क्लोरोफिल के 5:55:15 निर्माण और उसके सही संचालन के लिए 5:55:17 अनिवार्य है। वायुमंडलीय नाइट्रोजन का 5:55:19 स्थिरीकरण जो है यह कुछ विशेष प्रकार के 5:55:21 जीवाणुओं द्वारा किया जाता है जो कि दलहनी 5:55:23 पौधे जो लेगुमिनस प्लांट्स होते हैं उनकी 5:55:25 जड़ों में गांठों के अंदर पाया जाता है। 5:55:28 राइजोबियम, एजीटोबैक्टर, नील हरित शैवाल, 5:55:31 क्लॉस्टीड्रियम ये सब जो जीव है ये 5:55:33 नाइट्रोजन स्टेबलाइजेशन का काम स्थिरीकरण 5:55:35 का काम करते हैं। जब पौधे और जंतु मर जाते 5:55:38 हैं तो अपघटक इनका विघटन करके कैल्शियम को 5:55:40 वातावरण में रिलीज़ कर देते हैं। भारतीय 5:55:43 वन नीति 1952 सबसे पुरानी वाली। इसके 5:55:45 हिसाब से देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 5:55:47 33% हिस्सा जंगल होने ही चाहिए। मैदानी 5:55:50 हिस्सों में 20% और पर्वतीय क्षेत्रों में 5:55:52 60% और आज तक हम उस लक्ष्य को प्राप्त 5:55:54 नहीं कर पाए। भारतीय वन सर्वेक्षण का जो 5:55:57 हेड क्वार्टर है वो देहरादून में है। इसका 5:55:59 काम देश के वन क्षेत्रों और वन संसाधनों 5:56:01 के आंकड़े और सूचना को इकट्ठा करना है। 5:56:03 भारत और बांग्लादेश के बीच में स्थित 5:56:05 सुंदरवन वनस्पति क्षेत्र दुनिया का सबसे 5:56:07 बड़ा कच्छ वनस्पति क्षेत्र है और यहां पर 5:56:09 रॉयल बंगाल टाइगर की सबसे ज्यादा आबादी 5:56:11 रहा करती है। सुंदरवन मैंग्रोव वनस्पति 5:56:14 क्षेत्र जो है ये देश के कुल मैंग्रोव 5:56:16 वनस्पति का 50% हिस्सा कवर करता है। 5:56:19 अंडमान में सब प्रकार की वनस्पतियां पाई 5:56:22 जाती हैं। मतलब सदाबहार, पर्णपाती, 5:56:24 मैंग्रोव सब कुछ मिलेगा। कार्बन क्रेडिट 5:56:26 की अवधारणा जो क्योटो प्रोटोकॉल है वहां 5:56:29 से निकली हुई है। किसी क्षेत्र में जंगल 5:56:30 उगाने की अपेक्षित मतलब जंगल उगाने के लिए 5:56:33 जंगल छोड़िए पौधे उगाने के लिए पेड़ उगाने 5:56:35 के लिए सबसे कम जो तापमान है वो 4 डिग्री 5:56:37 सेल्सियस है। अगर 4 डिग्री सेल्सियस से कम 5:56:40 तापमान रहेगा तो पौधे आमतौर पर नहीं 5:56:42 उगेंगे। हो सकता है कुछ वनस्पतियां उग जाए 5:56:44 क्योंकि जीरो से कई डिग्री नीचे तापमान पर 5:56:46 भी ऐसा होता है। लेकिन आमतौर पर जो पौधे 5:56:48 होते हैं वो नहीं पैदा होंगे। तो जंगल को 5:56:50 हरा सोना कहा जाता है और यह गलत नहीं है 5:56:52 और यह सोना नहीं है बल्कि सोने से भी 5:56:54 ज्यादा कीमती है। पृथ्वी का 8% हिस्सा 5:56:57 उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन से आच्छादित है। 5:56:59 लेकिन इन जंगलों में पृथ्वी के आधे से 5:57:01 अधिक जंतु और पेड़-पौधे पाए जाते हैं और 5:57:03 बाकी इलाके में मनुष्य ने हाथ पैर फैलाया 5:57:06 हुआ है। समानापा विषुवतीय और मरुस्थलीय 5:57:09 प्रदेश के बीच का संक्रमण स्थल है। 5:57:10 प्रकृति ने मनुष्य को बतौर गार्जियन बनाया 5:57:13 हुआ है। एक अभिभावक की भूमिका दी हुई है 5:57:16 कि तुम्हारे पास बुद्धि ज्यादा है। तो तुम 5:57:18 प्रकृति और वन्य जीवों का और जितने अन्य 5:57:20 प्राणी है उनका संरक्षण करो। उनकी देखरेख 5:57:22 करो। उनका ख्याल रखो। उनके साथ सह 5:57:25 अस्तित्व में रहो। उन्हें भी खुश रखो। तुम 5:57:27 भी खुश रहो। उनसे लो और उन्हें दो। लेकिन 5:57:30 मनुष्य क्या करता है? मनुष्य उनका यूज़ 5:57:32 करता है अपने फायदे के लिए। और जहां वह 5:57:34 फायदे के फायदे के दायरे में नहीं आते 5:57:37 हैं, निकम्मे हो जाते हैं मनुष्य के 5:57:38 दृष्टिकोण से तो उन्हें नष्ट कर देना 5:57:40 चाहता है और वही वो इस समय कर रहा है। 5:57:42 यानी प्रकृति द्वारा जो सौंपी हुई भूमिका 5:57:44 है उससे हट चुका है। आगे आप देखिए समाना 5:57:48 बायोम में तीन प्रकार की कृषि झूम कृषि, 5:57:50 पशुचारण और सतत कृषि की जाती है। और नहीं 5:57:53 तो जो धर्म ग्रंथ बाद में लिखे गए हैं। 5:57:55 वेदों की बात नहीं हो रही है। वेद में तो 5:57:56 प्रकृति को सर्वोच्च माना गया है। और 5:57:58 प्रकृति के ही घटकों की हम पूजा करते हैं। 5:58:01 लेकिन जो पौराणिक इतिहास हमारा है जो कि 5:58:02 गुप्त काल में सबसे ज्यादा फला फूला तो 5:58:04 उसमें कह भी दिया गया कि पृथ्वी तुम्हारी 5:58:06 है और इसको वीर भोग गया वसुंधरा। जो वीर 5:58:09 है वो वसुंधरा का भोग करेगा। मतलब वीर है 5:58:12 आप पुरुषार्थी है तो आप पृथ्वी का भोग 5:58:14 करने के लिए आप उसको दूसरे अर्थ में लेते 5:58:16 हैं कि बहादुर पुरुष है तो पृथ्वी को 5:58:17 जीतेगा और उसका उपभोग करेगा। वही राजा 5:58:20 बनेगा। वही शासन करेगा। वही योग्य है। 5:58:23 लेकिन मनुष्य जो है वो पृथ्वी का उपभोग 5:58:25 करने के लिए पैदा हुआ है। पृथ्वी उसकी भोग 5:58:27 वस्तु है। यह बात नहीं है। ये पौराणिक 5:58:29 मान्यता है। वैदिक मान्यता जो कि हमारी 5:58:32 असली मान्यता है उसमें प्रकृति को एक 5:58:34 पूज्य घटक के रूप में माना गया है और उसके 5:58:36 हर अवयव की हम पूजा करते हैं। है ना? 5:58:40 टुंड्रा बायोम को आप देख रहे हैं 10° 5:58:42 समताप रेखा से टैगा वन क्षेत्र से ये अलग 5:58:44 हो जाता है। और बड़े-बड़े शिकारों की जमीन 5:58:46 मतलब लैंड ऑफ बिग गेम या बिग गेम कंट्री 5:58:48 कहा जाता है सवाना प्रदेश को। आगे आप 5:58:51 देखेंगे यहां पर उष्णकटिबंधीय जो प्रदेश 5:58:53 है इसको सतत दुर्गमताओं का प्रवेश का 5:58:55 प्रदेश कहा जाता है। पश्चिमी घाट जैव 5:58:57 विविधता के मामले में सबसे समृद्ध है। जो 5:58:59 साइट्रस फ्रूट्स है ये भूमध्यसागरीय 5:59:01 प्रदेशों में पाए जाते हैं। जैसे अंगूर 5:59:03 है, नींबू है, संतरा है, शहतूत है, 5:59:05 नाशपाती है, अनार भी। इसके बाद आप देखेंगे 5:59:08 कृषि विकास के लिए जो तीव्र गति से 5:59:10 दृष्टिगत घास क्षेत्र बायोम है वह भविष्य 5:59:12 के भंडार माने जाते हैं। इनको ब्रेड 5:59:14 बास्केट भी कहा जाता है। जैसे मध्य 5:59:15 अक्षांश वाले जो घास के मैदान है ये 5:59:18 कुदरती ब्रेड बास्केट माने जाते हैं। रोटी 5:59:20 की टोकड़ी 5:59:21 चिरहरित वन यानी जो सदाबहार वन होते हैं। 5:59:24 यहां जैव विविधता सबसे ज्यादा होती है। 5:59:25 इकोलॉजिकल फुटप्रिंट यह जमीन का न्यूनतम 5:59:28 हिस्सा है जो कि किसी व्यक्ति या आबादी के 5:59:30 जीवन को पूरी तरह से बनाए रखने के लिए 5:59:32 जरूरी होता है। दक्षिणी अमेरिका में अमेजन 5:59:35 बेसिन द्वारा सवाना बायोम को दो भागों में 5:59:37 बांटा गया है। एक तो उत्तरी हिस्सा है 5:59:38 लानोस और दूसरा जो दक्षिणी हिस्सा है उसको 5:59:40 कैमपोस कहा जाता है। बायोम के समस्त 5:59:42 पादपों और प्राणियों की सामान्य विशेषताएं 5:59:44 एक समान होती हैं। और कुल मिलाकर आप 5:59:47 देखेंगे कि जो पारिस्थितिकी तंत्र हैं 5:59:49 जिसमें कि जीव-जंतु, पेड़-पौधे सभी आते 5:59:51 हैं और ये अलग-अलग क्षेत्रों के अलग-अलग 5:59:53 होते हैं। तो इन्हें बायोम कहा जाता है। 5:59:55 ठीक है? घास स्थल का अपना बायोम है, 5:59:57 समुद्र का अपना है। 1972 का स्टॉकहोम 6:00:00 सम्मेलन स्वीडन में हुआ था और वहां पर 6:00:02 यूएईपी का जन्म होता है और 5 जून को 6:00:04 पर्यावरण दिवस सेलिब्रेट किया जाता है। ये 6:00:06 चीज हमने शुरू में देखी थी। जो पर्टिकुलेट 6:00:08 मैटर है प्राथमिक वायु प्रदूषक की भूमिका 6:00:10 में उसमें कालिक धुआ धूल एस्बेस्टस 6:00:12 कीटनाशक कार्बन मोनोऑक्साइड हाइड्रोकार्बन 6:00:15 और सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन 6:00:17 डाइऑक्साइड जैसी जो गैसें हैं ये सब आते 6:00:19 हैं। कहने का मतलब ये कि जो प्राइमरी 6:00:21 पॉलटेंट है उसमें कणिकय पदार्थ यानी ये जो 6:00:23 पर्टिकुलेट मैटर आपने कोष्क के अंदर देखे 6:00:25 ये सारे हैं और ये सारी गैसें भी हैं। 6:00:27 जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड है, 6:00:28 हाइड्रोकार्बन है, सल्फर डाइऑक्साइड, 6:00:30 नाइट्रोजन डाइऑक्साइड। बाकी कार्बन 6:00:33 डाइऑक्साइड, ग्रीन हाउस गैस तो है ही है 6:00:35 जो कि मीथेन, ओजोन और बाकी जलवाष्प के साथ 6:00:37 मिलकर इंफ्रारेड रेडिएशन को सोख लेती है 6:00:39 और पृथ्वी के तापमान को बढ़ा देती है। 6:00:41 क्लोरोफ्लोरोकार्बन से समतापी ओजोन की 6:00:43 मात्रा में कमी आती है। और जो पराग कण और 6:00:46 बीजाणु है कुछ पौधों के वो कुछ लोगों को 6:00:48 एलर्जी कर देते हैं। सिंदूर में शीशे का 6:00:51 ऑक्साइड होता है। मतलब लेड के ऑक्साइड 6:00:52 होते हैं और कुमकुम में पारे के ऑक्साइड 6:00:55 होते हैं। ठीक है? मतलब जो कुमकुम आप 6:00:58 लगाते हैं उसमें मरकरी का मरकरी का 6:01:00 ऑक्साइड होता है और सिंदूर में लेड का 6:01:02 ऑक्साइड होता है। मतलब ये नुकसानदेह है। 6:01:04 पारे से क्या होता है? आपके अंग शून्य पड़ 6:01:06 जाएंगे। निगाह धुंधली पड़ जाएगी। शीशे से 6:01:08 भ्रम और पागलपन और अंततः मृत्यु हो सकती 6:01:11 है। मतलब दोनों आपके सेंट्रल नर्वस सिस्टम 6:01:13 को और जो न्यूरॉन है उनको प्रभावित करते 6:01:15 हैं। ये सबसे खतरनाक स्थिति है। क्योंकि 6:01:17 न्यूरॉन इतने कीमती है जितना कि कीमती 6:01:19 आपके जीवन में कुछ भी नहीं है। वो बन एक 6:01:21 बार जो बन के मिल गए उतने ही है। नष्ट हो 6:01:23 जाएंगे दोबारा नहीं मिलेंगे। 6:01:25 यहां देखिए पारे के विषैलेपन से मिनीमाटा 6:01:27 सिंड्रोम होता है और अपंगता और मृत्यु 6:01:29 इसका अंतिम उपाय होता है। ताजमहल का 6:01:32 संगमरमर पीला पड़ रहा है। क्यों? अम्ल 6:01:34 वर्षा का परिणाम है। प्रदूषण का परिणाम 6:01:36 है। आगे आप देखेंगे फ्लाई ऐश जलीय 6:01:38 वनस्पतियों के प्रकाश संश्लेषण की 6:01:40 प्रक्रिया में बाधा डालती है। शाहजहां अगर 6:01:42 जिंदा होता तो कहता कि अब पता होता तो 6:01:44 इतना पैसा ही नहीं बर्बाद करते। अच्छा आगे 6:01:47 देखें शैव जैव सीएनजी जो जैविक सीएनजी 6:01:50 होती है ये बायोगैस का एक प्योर फॉर्म है 6:01:54 मतलब शुद्ध रूप असल में ये होती है 6:01:56 बायोगैस ही बायोगैस से बहुत अलग नहीं है 6:01:58 लेकिन उसका एकदम प्यरेस्ट फॉर्मेट और 6:02:01 इसमें सारी अशुद्धियों को दूर करने के बाद 6:02:03 ही इस्तेमाल किया जाता है। कुल मिलाकर 93% 6:02:05 इसमें मीथेन होती है। बायोगैस का जो संगठन 6:02:09 होता है अच्छा पुणे में जो जैव सीएनजी का 6:02:11 संयंत्र है उसको स्थापित किया गया है। 6:02:13 बायोगैस का जो औसत संगठन होता है उसमें 6:02:15 मीथेन 55% होती है। कार्बन डाइऑक्साइड 35 6:02:18 होती है। हाइड्रोजन 7 1/2 होती है। 6:02:20 नाइट्रोजन 2.4सदी होती है। और आप देख रहे 6:02:24 हैं सीएनजी में मीथेन की मात्रा 80 से 90% 6:02:27 तक चली जाती है। प्रोपेन और ब्यूटेन गैसें 6:02:29 ये लिक्विड पेट्रोलियम गैस के अंदर होती 6:02:31 है। एलपीजी जो है उसमें ब्यूटेन की मात्रा 6:02:33 भारत के अंदर जो एलपीजी है उसमें ब्यूटेन 6:02:35 की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। 85% मीथेन 6:02:38 नेचुरल गैस में पाई जाती है। 10% इथेन पाई 6:02:40 जाती है। और उसी तरीके से आप देखेंगे 6:02:42 ब्यूटेन, पेंटेन और एल्केनेंस जो है वो भी 6:02:44 पाए जाते हैं। एलपीजी में जो एथिल 6:02:47 मरकेप्टन है वो मिलाया जाता है C2H5sh जो 6:02:50 कि बहुत गंदी महत्व वाला होता है और इसी 6:02:52 वजह से हमें मालूम होता है कि गैस लीक कर 6:02:53 रही है। गैसोहॉल गैसोलन मतलब बाकी जो गैस 6:02:56 हैं एलपीजी के अंदर मूल रूप से प्रोपेन 6:02:59 प्रोपेन और ब्यूटेन उनकी अपनी कोई गंध 6:03:02 नहीं होती है। अगर ना मिलाया जाए एथिल मेक 6:03:05 मर माफ़ कीजिएगा। एथिल मरकेप्टन तो पता ही 6:03:08 नहीं चलेगा कि गैस लीक कर रही है। 6:03:11 यहां आप देखिएगा गैसोहॉल जो है वह गैसोलिन 6:03:13 और इथेनॉल का मिश्रण है। ज्वारीय ऊर्जा के 6:03:15 संभावित क्षेत्र गुजरात में कच्छ की 6:03:17 खाड़ी, खंभात की खाड़ी और पश्चिम बंगाल 6:03:19 में दुर्गाधवानी और सुंदरवन है। नदियों के 6:03:21 जल की गुणवत्ता का निर्धारण जैविक ऑक्सीजन 6:03:23 मांग यानी जो बीओडी होती है बायोलॉजिकल 6:03:25 ऑक्सीजन डिमांड उसके आधार पर किया जाता 6:03:28 है। रासायनिक ऑक्सीजन मांग से भी पूरा 6:03:30 किया जाता है। मतलब पता किया जाता है। जो 6:03:32 डाइल्यूट ऑक्सीजन है उससे भी मालूम होता 6:03:34 है और पीएच पता करके भी एक सामान्य तौर पर 6:03:36 हम जान सकते हैं। 6:03:38 जिस जल में जैविक अपशिष्टों का प्रदूषण 6:03:41 होता है, वहां पर ई कोलाई और कोलिफ़ार्म 6:03:44 जैसे जो बैक्टीरिया है, वह ज्यादा मात्रा 6:03:45 में पाए जाते हैं। सूक्ष्म जीवों की अपघटन 6:03:47 के लिए आवश्यक सूक्ष्म जीवों द्वारा अगर 6:03:50 अपघटन आपको करवाना है तो ऑक्सीजन की 6:03:52 मात्रा जो है उसको जितनी वहां पर आवश्यक 6:03:54 होती है। क्योंकि सूक्ष्म जीव भी जो है वो 6:03:56 सड़े गले पदार्थों को खा पीकर सफाई करते 6:03:58 हैं। ठीक है? लेकिन उसके लिए उन्हें चाहिए 6:04:01 होती है ढेर सारी ऑक्सीजन और जितनी 6:04:03 ऑक्सीजन उनको चाहिए होती है आमतौर पर अगर 6:04:05 पानी के अंदर की बात है तो वो पानी में 6:04:06 घुली हुई ऑक्सीजन को यूज करते हैं। तो 6:04:08 इनकी जो ऑक्सीजन की मात्रा मतलब डिमांड 6:04:10 इनकी इनके द्वारा झुकी की हुई है उसी को 6:04:13 कहा जाता है जैविक ऑक्सीजन डिमांड या 6:04:15 बीओडी। 6:04:17 भारत की सर्वाधिक प्रदूषित नदी है 6:04:18 अमलाखेड़ी और ये गुजरात की है। भूमिगत जल 6:04:22 के जो सबसे प्रदूषित तत्व होते हैं मतलब 6:04:24 जमीन का जो पानी है प्रदूषित होता है तो 6:04:26 उसमें आर्सेनिक और फ्लोराइड जो है ये सबसे 6:04:28 बड़े प्रदूषक होते। मध्य प्रदेश को बाघ 6:04:30 राज्य कहा जाता है। सबसे अधिक जो रॉयल 6:04:32 बंगाल टाइगर है वो मतलब ये सुंदरवन का जो 6:04:36 मैंग्रोव क्षेत्र है वो इसके लिए प्रसिद्ध 6:04:37 है। सबसे बड़ा बाघ आरक्षित क्षेत्र 6:04:39 नागार्जुन सागर श्रीसैलम है जो कि आंध्र 6:04:41 प्रदेश का है। ठीक है? और सफेद बाघों के 6:04:44 लिए उड़ीसा का नंदन कानन जाना जाता है। 6:04:46 बाघ संरक्षण का पहला अंतरराष्ट्रीय 6:04:48 सम्मेलन 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग 6:04:50 में और दूसरा जो है वो 2012 में थिमपू में 6:04:52 तीसरा नई दिल्ली में 2016 में। उभयचर 6:04:55 पर्यावरणीय परिवर्तन के लिए ज्यादा 6:04:57 संवेदनशील होते हैं। एफीबियन जो है सबसे 6:04:59 पहले प्रतिक्रिया देते हैं पर्यावरण में 6:05:01 बदलाव का। बायोटेक्नोलॉजी पार्क लखनऊ में 6:05:03 है और पृथ्वी का औसत वार्षिक तापमान 14 6:05:06 डिग्री सेल्सियस है। नगरीकरण के कारण जो 6:05:08 सतह का एल्बिडो है वो कम हो जाता है। 6:05:10 प्रदूषण की वजह से कम हो जाता है असल में। 6:05:13 और आप देखेंगे 6:05:15 तो नगरीकरण के कारण नगरों के मध्य ऊष्मा 6:05:18 द्वीप यानी हीट आइलैंड जो है निचले 6:05:20 वायुमंडल में प्रदूषण गुंबद का निर्माण 6:05:21 करते हैं। ब्लैक कार्बन एक गैस नहीं है 6:05:24 बल्कि ठोस कण या एरोसॉल होता है जो कि 6:05:26 सामान्य रूप से कालिक के नाम से जाना जाता 6:05:28 है। भूरा कार्बन एरोसॉल है जो कि प्रकाश 6:05:30 अवशोषित करने वाला एक कार्बनिक पदार्थ 6:05:33 होता है। ऊंचाई के साथ तापमान वृद्धि 6:05:35 ऋणात्मक होती है। मतलब तापमान में कमी आती 6:05:37 है तो इसे तापमान का प्रतिलोमन कहा जाता 6:05:39 है। कार्बन डाइऑक्साइड तथा आयोडीन से बादल 6:05:42 बनाकर कृत्रिम वर्षा कराई जाती है और इसको 6:05:44 मेघ पीजन यानी क्लाउड सीडिंग कहा जाता है। 6:05:47 जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया है इसके 6:05:49 द्वारा वातावरण के कार्बन डाइऑक्साइड से 6:05:51 जो कि कार्बन से निकलकर माफ़ कीजिएगा जो 6:05:53 कार्बन निकलकर पौधे और मिट्टी में 6:05:55 संग्रहित होता है उसको ग्रीन कार्बन कहते 6:05:57 हैं। और नगरीय धूम्र कोहरे के कारण दृश्य 6:05:59 दृश्यता घट जाती है और सौरिक विकिरण जो है 6:06:01 वो कम मात्रा में प्राप्त होता है। कार्बन 6:06:04 सिंक आप देखते हैं जो कि कार्बन 6:06:05 डाइऑक्साइड को प्राकृतिक तौर पर अवशोषित 6:06:07 करते हैं। समुद्र और जंगल दोनों कार्बन 6:06:09 सिंह के बेहतरीन उदाहरण। अगला हम लोग देख 6:06:12 रहे हैं प्रवाल भित्तियों को महासागरों और 6:06:14 उष्णकटिबंधीय वर्षावनों के तौर पर यहां 6:06:18 देखेंगे। 6:06:19 प्रवाल भित्तियों को महासागरों का 6:06:21 उष्णकटिबंधीय वर्षावन कहा जाता है। जैसे 6:06:23 धरती पर उष्णकटिबंधीय वर्षावन ऑक्सीजन 6:06:26 उत्पत्ति का काम करते हैं और प्रकृति को 6:06:28 बहुत कुछ देते हैं। ठीक वैसे ही प्रशांत 6:06:30 महासागर का सोलमन आइलैंड जल स्तर में 6:06:32 वृद्धि की वजह से डूबने के कगार पे है। 6:06:34 सुपरसोनिक जेट विमानों के उड़ने से ओजोन 6:06:36 परत को नुकसान पहुंचता है और ओजोन का सबसे 6:06:39 पहला छेद हमने देखा था अंटार्कटिका पर। 6:06:42 एजेंडा 21 सतत विकास से जुड़ा हुआ है। 6:06:44 ब्राउन एयर शब्द का इस्तेमाल प्रकाश 6:06:46 रासायनिक धुएं के लिए किया जाता है। आइस 6:06:48 कोर को जलवायु परिवर्तन का क्रायोजेनिक 6:06:50 संकेतक माना जाता है। और क्योटो प्रोटोकॉल 6:06:53 जो आप देख रहे हैं ये ग्रीन हाउस गैस की 6:06:55 मात्रा को कम करने से संबंधित है। ओजोन 6:06:57 गैस ऑक्सीजन का एक अपरूप है जिसके 6:06:59 प्रत्येक कण में प्रत्येक अणु में तीन 6:07:02 परमाणु होते हैं। मतलब O3 तो सतही ओजोन जो 6:07:05 है ये द्वितीयक पॉलटेंट होती है। ये 6:07:07 फायदेमंद नहीं होती है। नाइट्रोजन 6:07:08 डाइऑक्साइड, परऑक्सी, एसिटल, नाइट्रेट 6:07:10 यानी पेन, सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड 6:07:12 ये सब जो है ये सेकेंडरी पोलटेंट है। सारे 6:07:15 के सारे स्मोग यानी धुआं। 6:07:18 यह आवश्यक रूप से प्रकाश 6:07:21 वायुमंडल में नाइट्रोजन और सल्फर के 6:07:23 ऑक्साइड की उपस्थिति की वजह से होता है। 6:07:25 मतलब इसमें फागग और स्मोक दोनों मिले हुए 6:07:28 होते हैं। ओजोन का सर्वाधिक सांद्रण समताप 6:07:30 मंडल के बीच में पाया जाता है। ओजोन परत 6:07:32 को पृथ्वी का छाता यानी अंब्रेला ऑफ़ अर्थ 6:07:34 भी कहा जाता है। मतलब ये अल्ट्रावायलेट 6:07:36 रेडिएशन को अब्सॉर्ब करने का काम करता है। 6:07:38 ओजोन मिश्रण का अनुपात 35 कि.मी. की ऊंचाई 6:07:41 पर सबसे ज्यादा होता है। लेकिन इसका जो 6:07:43 अधिकतम घनत्व आप देखते हैं, वो 20 से 25 6:07:46 कि.मी. के बीच में पाया जाता है। ओजोन का 6:07:48 सर्वाधिक सांद्रण उच्च अक्षांशों पर 6:07:50 अर्थात दोनों गोलार्धों में 50° ध्रुवों 6:07:52 के मध्य तथा मतलब 50° ध्रुवों से ध्रुवों 6:07:55 के मध्य तथा जो न्यूनतम सांद्रण है, वो 6:07:57 भूमध्य रेखा के ऊपर पाया जाता है। यानी 6:07:59 50° से लेकर ध्रुवों तक 90° तक ज्यादा 6:08:02 होता है और इधर जो विषुवत रेखा है इधर कम 6:08:05 होता है। ओजोन के मुख्य दोषी कारक जो है 6:08:08 वो हैलोजन गैस हैं जो कि इसे नष्ट करने का 6:08:10 काम करती है। क्लोरीन डायमर कहा जाता है 6:08:12 स्वीट C12O2 को। दक्षिणी ध्रुव के ऊपर 6:08:16 समताप समतापीय जो ओजोन परत है ये समताप 6:08:19 मंडलीय जो ओजोन परत है ये पतली हो जाती 6:08:21 है। जिस कारण ओजोन छिद्र का निर्माण होता 6:08:23 है। और आप देख रहे हैं कि ओजोन क्षरण की 6:08:25 प्रक्रिया को रोकने का सबसे पहले प्रयास 6:08:27 वियना कन्वेंशन में किया गया था ऑस्ट्रिया 6:08:29 में 1985 में। अंतरराष्ट्रीय समझौता 6:08:32 मॉन्ट्रियल में हुआ था कनाडा में 87 में 6:08:34 और 16 सितंबर को ओजोन दिवस मनाया जाता है। 6:08:36 मॉन्ट्रियल कन्वेंशन की डेट है। डोबसन में 6:08:39 नापी जाती है ओजोन की कंसंट्रेशन और जो 6:08:41 हरित गृह गैस हैं यानी ग्रीन हाउस गैस हैं 6:08:44 उन्हें प्रकृति का कंबल कहा जाता है। 6:08:46 पृथ्वी का ब्लैंकेट कहा जाता है। अगर ये 6:08:47 ना होती तो पृथ्वी का तापमान शून्य से भी 6:08:49 कई डिग्री नीचे चला जाता। प्रमुख जो ग्रीन 6:08:52 हाउस गैस हैं उसमें कार्बन डाइऑक्साइड, 6:08:54 मीथे, नाइट्रस ऑक्साइड, ओजोन, 6:08:56 हाइड्रोफ्लोरोकार्बन, जलवाष्प ये सारे आते 6:08:58 हैं। तो ग्रीन हाउस इफेक्ट की खोज 1824 6:09:02 में जोसेफ हूरियर के द्वारा की गई थी जो 6:09:03 कि एक फिजिक्स के वैज्ञानिक थे, भौतिक 6:09:05 शास्त्री थे। हानिकारक पराग्नी किरणों से 6:09:08 रक्षा करने का काम ओज़ोन परत करती है और 6:09:10 इसको नष्ट करने का काम सीएफसी करता है। 6:09:13 कार्बन व्यापार के द्वारा हरित द्रव गैसों 6:09:15 के उत्सर्जन में कटौती की जाती है। रियो 6:09:17 डीजेनरियो में जो सम्मेलन हुआ था उसमें 6:09:18 कार्बन टैक्स पर विचार विमर्श हुआ था। 6:09:20 1992 में कार्बन क्रेडिट की कीमतें गतिशील 6:09:24 होती हैं। यह बाजार की शक्तियों के हिसाब 6:09:26 से निर्धारित और परिवर्तित होती है। 6:09:28 कार्बन कर क्या है? तो कार्बन कर जो है ये 6:09:31 कार्बन का मूल्य है जो कि कोयला, 6:09:32 पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस जैसे जो ईंधन है 6:09:34 उनको जलाने से उत्सर्जित होता है। ये एक 6:09:36 तरह का एनवायरमेंट टैक्स। संयुक्त राष्ट्र 6:09:38 की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने 1970 के 6:09:41 दशक में सबसे पहले कार्बन ट्रेडिंग थ्योरी 6:09:42 को पेश किया था। जिसका उद्देश्य था CO2 6:09:45 गैस के उत्सर्जन में कटौती करना। एक 6:09:47 वैश्विक विचार मंडल जिसे कि क्लब ऑफ रोम 6:09:49 कहा जाता है। इसने धारणीय विकास का विचार 6:09:51 सबसे पहली बार 1972 में पेश किया था और 6:09:54 जैव सुरक्षा यानी बायोसेफ्टी का जो 6:09:55 कार्टाजेना प्रोटोकॉल है ये पर्यावरण और 6:09:58 वन मंत्रालय के द्वारा कार्वित होता है। 6:10:00 इसके बाद आप देख रहे हैं यहां पर एक पेड़ 6:10:02 मां के नाम अभियान है। लेकिन उससे पहले 6:10:04 कुछ पॉइंट्स और हैं। जैसे एक जल चक्र 6:10:05 हाइड्रोलॉजिकल साइकिल वनों की महत्वपूर्ण 6:10:08 भूमिका इसमें होती है। वन वर्षा के जल को 6:10:10 रोकने, संग्रहित करने और धीरे-धीरे 6:10:12 वायुमंडल में वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से 6:10:14 वापस भेजने का काम करते हैं। 10% का नियम 6:10:17 वही है रेमंड लिंडमैन वाला। मतलब 10% 6:10:19 ऊर्जा ही अगले ट्रॉपिक लेवल में पहुंच 6:10:21 पाती है और बाकी जो 90% है वो बर्बाद हो 6:10:23 जाती है। रासायनिक ऊर्जा में खपत हो जाती 6:10:26 है। जै माफ़ कीजिएगा ऊष्मीय ऊर्जा में खपत 6:10:29 हो जाती है। जैव उर्वरक जीवित सूक्ष्म 6:10:31 जीवों की एक प्रकार की कृषि है जो कि 6:10:33 मिट्टी में डाले जाने पर पौधों की वृद्धि 6:10:35 को बढ़ावा देते हैं। और ये सूक्ष्म जीव 6:10:37 मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता को 6:10:39 बढ़ाते हैं और पौधों को स्वस्थ और ज्यादा 6:10:40 उपजाऊ 6:10:42 माहौल बनाकर देते हैं। एक पेड़ मां के नाम 6:10:45 अभियान यह शुरू किया गया था प्लांट फॉर 6:10:48 मदर इस नाम से और नरेंद्र मोदी जी के 6:10:50 द्वारा शुरू किया गया वर्ल्ड एनवायरमेंट 6:10:52 डे के मौके पर बुद्ध जयंती पार्क नई 6:10:54 दिल्ली का वहां से अपनी माता जी की स्मृति 6:10:55 में इन्होंने एक पीपल का पेड़ लगाया था 6:10:57 मुख्य उद्देश्य है सीधी बात है निर्नीकरण 6:11:00 को रोकना पर्यावरण का संरक्षण करना और 6:11:02 धरती माता के प्रति अपने सम्मान को व्यक्त 6:11:04 करना नोडल मंत्रालय वही पर्यावरण मंत्रालय 6:11:07 फिर इसके बाद इसका 2.0 यानी 2025 में 6:11:09 दूसरा फेज चला मिशन लाइफ वेब पोर्टल और 6:11:12 इको क्लब जैसी चीजें इसमें शामिल हुई और 6:11:14 माइक्रोसाइट्स के तौर पे इसमें इसको मतलब 6:11:17 मॉड्यूल इसका जो है इन्वॉल्व किया गया। तो 6:11:19 दूसरा फज़ इसका 2.0 के नाम से जाना गया। ये 6:11:21 सब करंट अफेयर में था। आपने पढ़ा था। 6:11:24 डिजिटल मॉनिटरिंग इसकी हुई थी। मतलब पेड़ों 6:11:26 की निगरानी और डेटा संकलन के लिए डिजिटल 6:11:28 टेक्नोलॉजी का यूज़ किया गया था। और सारे 6:11:30 मंत्रालय इसमें कहीं ना कहीं शामिल थे। सब 6:11:33 बड़े पैमाने पर अपनी-अपनी तरीके से हिस्सा 6:11:35 ले रहे थे। इसके बाद हरित क्रेडिट 6:11:37 कार्यक्रम था जो कि जीसीपी कहा जाता है। 6:11:39 ग्रीन क्रेडिट को शुरू किया गया। मतलब इस 6:11:41 नियम को शुरू किया गया 2023 में। मतलब 6:11:44 लोगों, समुदायों, कंपनियों को स्वेच्छा 6:11:45 से, पर्यावरण सुधारने के लिए काम करने के 6:11:47 लिए प्रेरित करना इसका उद्देश्य था। 6:11:48 क्योंकि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकार का 6:11:50 कर्तव्य नहीं है। ये हर नागरिक की ड्यूटी 6:11:52 है और हर नागरिक जब इसमें इन्वॉल्व होगा 6:11:54 तभी ये सफल हो पाएगा। तो कुल मिलाकर आप 6:11:57 देखेंगे कि मार्च 2026 तक 12 राज्यों में 6:12:00 करीब 4391 हेक्टेयर खराब हो चुकी जो जमीन 6:12:03 है जंगली जमीन है उसको फिर से हराभरा करने 6:12:06 के लिए चुना गया है और जो जंगल है उनको 6:12:07 तेजी से काटा जा रहा है। वन सन वन वर्ल्ड 6:12:11 वन ग्रिड ये जो पहल है इसको 2018 में 6:12:13 प्रस्तावित किया गया था। नवीकरणीय ऊर्जा 6:12:15 के लिए अन्य देशों के साथ आदान प्रदान के 6:12:17 लिए ढांचा तैयार करना इसका उद्देश्य था। 6:12:19 तो भारत और यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त 6:12:21 रूप से इसको इस इनिशिएटिव को स्टार्ट किया 6:12:23 था। अंतरराष्ट्रीय जलवायु साझेदारियों को 6:12:25 आकार देना इसका उद्देश्य था। सौर ऊर्जा के 6:12:28 इस्तेमाल पर ही आधारित है। सीधी बात। फिर 6:12:30 G20 न्यू दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन 2023 6:12:33 ग्रीन डेवलपमेंट पैक्ट भी इसको कहा जाता 6:12:35 है। इसको अपनाया गया 9 सितंबर 2023 को 6:12:38 हरित विकास और समावेशी विकास जो है उसको 6:12:40 मजबूत बनाना तेज बनाना इसका उद्देश्य था। 6:12:43 और इसमें एक आम सहमति बनाने वाले देश के 6:12:45 रूप में भारत को स्थापित करके 6:12:47 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने 6:12:49 का पर्पस था। डॉल्फिन अनुमान रिपोर्ट को 6:12:51 आप देख रहे हैं। 3 मार्च 2025 को इसको 6:12:53 जारी किया गया। कुल 6327 नदी डॉल्फिन पाई 6:12:57 जाती हैं। 28 नदियों में इसका अध्ययन करके 6:12:59 बताया गया है और करीब 3150 कार्य दिनों 6:13:03 में 8500 कि.मी. की दूरी को तय किया गया। 6:13:06 सिंधु नदी डॉल्फिन जो है ये वर्तमान में 6:13:08 सिर्फ व्यास नदी में देखी गई जो कि चिंता 6:13:10 की बात है। तो ये इनकी कुल संख्या है। 6:13:12 गंगा डॉल्फिन है 6324। सिंधु डॉल्फिन 6:13:15 सिर्फ तीन है। अध्ययन की जानकारी प्राप्त 6:13:18 हुई। आठ अलग-अलग जो राज्य हैं, राष्ट्रों 6:13:20 के हिस्से हैं और नदियां हैं कुल मिलाकर 6:13:22 28। 6:13:24 डॉल्फिनों की संख्या सबसे ज्यादा यूपी में 6:13:26 है। उसके बाद दूसरे नंबर पर बिहार में है। 6:13:28 फिर तीसरे नंबर पर वेस्ट बंगाल में है। 6:13:29 चौथे नंबर पर असम, फिर झारखंड, फिर 6:13:31 राजस्थान, फिर एमपी, फिर पंजाब। ठीक है? 6:13:34 ये रिपोर्ट आपने देखी। और यहीं पर हमारी 6:13:37 जो यात्रा है वह समाप्त होती है। बाकी अगर 6:13:39 आप हमारे पेड कोर्सेस से जुड़ना चाहते हैं 6:13:41 और हमारा जो मटेरियल है कंटेंट है उसे 6:13:43 प्राप्त करना चाहते हैं तो अब तो ऑफलाइन 6:13:45 हमारा जो सेंटर है कानपुर में वहां से आप 6:13:47 इसकी जो हार्ड कॉपी है उसको भी प्राप्त कर 6:13:49 सकते हैं। सिर्फ आप पीडीएफ पर आप निर्भर 6:13:51 नहीं रह सकते। अगर आपको किताबें और कागज 6:13:53 पर मटेरियल पढ़ने का शौक है तो आप वहां से 6:13:55 बुकलेट प्राप्त कर सकते हैं और नहीं तो 6:13:57 ऑनलाइन परचेस कर सकते हैं। तो इसमें इतना 6:14:00 ही बहुत सारी शुभकामनाएं आगामी परीक्षा के 6:14:02 लिए।