0:00 वेलकम वेलकम वेलकम प्यारेप्यारे एएफएम के स्टूडेंट्स अगर आप अपना एग्जाम देने वाले हैं सीए फाइनल एएफएम के लिए और आप सीए इंस्टट्यूट से परेशान हैं तो यह वीडियो आपके लिए है। आपकी परेशानी के कारण है नए आने वाले कुछ क्वेश्चंस जिसमें इंस्टट्यूट अब ऐसे क्वेश्चन देने लगा है जो पहले उन्होंने कभी नहीं पूछे 10 20 साल में और ऐसे क्वेश्चन बनाने लगा है चैट जीपीटी और क्लाउड के आने की वजह से जो पहले वह खुद नहीं बना पाते थे। यानी अब काम बड़ा आसान हो गया है। किसी एक पैराग्राफ को उठाना है किताब में से। क्लॉड को बोलना है कि बेटा मेरे लिए सीए फाइनल एएफएम का सिलेबस बेस्ड एक क्वेश्चन इसमें अच्छा सा बना दो। वो बना के दिखा देगा। फिर उसे कह दो इसका सॉल्यूशन भी कर दे। वो सॉल्यूशन भी कर देगा। और बस वो उठा के कॉपी पेस्ट करके बच्चे के एग्जाम में डाल देना है। है ना? क्या सर आपने ये किया? मैंने भी यही किया है। मैंने भी कोई मैं कोई अपने घर पे कोई अंतरिक्ष से थोड़ी ना आया हूं जो मैं नए-नए क्वेश्चन बनाता रहूंगा। मैंने भी यही किया है। बट फिर आपके कराने में उनमें 1:02 बेटा वो तो क्वेश्चन कम से रीड भी नहीं करते कि क्वेश्चन में कोई मिस्टेक तो नहीं है। क्लॉड भी तो मिस्टेक कर सकता है। और नीचे लिखा हुआ भी आता है कि चैट जीपीटी एन क्लॉड कैन मेक मिस्टेक्स। वो ये भी नहीं समझते। वो कॉपी करते हैं, दे देते हैं। तो हमने कम से कम उस क्वेश्चन को पढ़ा है, समझा है, कांसेप्ट को रीफाई किया है और उसके बाद आपके लिए एक फोल्डर बनाया है। इस फाइल में मैंने ज्यादातर नए क्वेश्चंस दिए हैं। कुछ क्वेश्चंस ऐसे भी हैं जो आपकी बुक में ऑलरेडी हैं। पर मुझे लगता है बच्चे कम पढ़ कर जाते हैं तो वो भी रखे हैं। जैसे कि ब्लैक शोज़ ऑप्शन प्राइिंग मॉडल के कुछ क्वेश्चंस मैंने बुक वाले भी रखे हैं। जैसे रियल ऑप्शंस के कुछ क्वेश्चंस मैंने बुक वाले भी रखे हैं। ठीक है जी? बोलिए यह बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा? यानी यह सारे के सारे जो क्वेश्चंस हैं यह जब से एआई प्रचलित हो गया है सभी एग्जाम्स में चाहे सीए हो चाहे सीएस हो चाहे सीएमए हो उसमें नए क्वेश्चन इंट्रोड्यूस होने लगे हैं। इन अ वे अच्छा भी है। बट इसका बुराई यह है कि आपके पास एग्जाम हॉल में एआई नहीं है। या तो आपको 2:02 भी अलऊ करें कि बेटा ये रहा लैपटॉप अब तू करके दिखा। फिर तो बच्चा भी कॉपी मारेगा और बोलेगा बेटा अब इसका आंसर करके दिखा। या तो बात बढ़ा लड़ाई हो रही है तो बराबरी में हो ना और वो बराबरी पे नहीं हो रही। बट कोई बात नहीं हमें तो एग्जाम देना है। हमें पास होना है। हमें इस लड़ाई से क्या लेना देना? तो मैं क्या लेकर आया हूं आपके लिए? ये कुछ क्वेश्चंस हैं चैप्टर वाइज। हम इन्हें चैप्टर वाइज पढ़ते चलेंगे। ये वो कुछ टॉपिक्स हैं जो प्रिवेलेंटली एग्जाम में नहीं पूछे जाते थे पहले। अब लेकिन पूछे जा रहे हैं या जा सकते हैं। क्या आपको बात समझ आ गई? नेक्स्ट वीडियोस का इंपॉर्टेंस समझ आ गया? ज्यादा इधर-उधर की बातचीत नहीं करते। सीधा-सीधा टॉपिक वाइज पढ़ना स्टार्ट करते हैं। मैं फास्ट स्पीड में पढ़ाऊंगा। उनके क्वेश्चन सॉल्यूशन दोनों दूंगा। ज्यादातर सॉल्यूशन इस फाइल में है। जो नहीं है उनका हैंड रिटन सॉल्यूशन मैं आपको दे दूंगा कंपाइल करके। ठीक है? आइए जी हम सिक्योरिटी वैल्यूएशंस इक्विटी जो कि मेरी किताब के हिसाब से मैं शुरू में टॉपिक पढ़ाता हूं। पहला टॉपिक यही पढ़ाता हूं। उसी के क्वेश्चन नंबर वन को देखते हैं। ये कौन से क्वेश्चन है? या नेक्स्ट ईयर क्वेश्चंस हैं। यानी ये एक्स्ट्रा क्वेश्चंस हैं जो आप अपना करिकुलम पढ़ने के बाद पढ़ते हैं। कुछ-कुछ 3:04 क्वेश्चन इनके ऊपर बेस्ड। चलिए पहला है एच मॉडल का क्वेश्चन। अ देखिए अब एच मॉडल होता क्या है? पहले अगर मैं आपको एकदम ब्रीफ में ये बता दूं कि एच मॉडल आपको क्या समझाता है? देखिए हमने लीनियर डिक्लाइन के बारे में पढ़ा था। लीनियर इंक्रीज के बारे में पढ़ा था। याद है आपको कि ग्रोथ रेट जो होता है वो लीनियरली इंक्रीज या डिक्रीज कर सकता है। मतलब हम ऐसे कह सकते हैं कि कभी-कभी हमने ऐसे क्वेश्चन पढ़े थे कि पहले 20% का ग्रोथ रेट होगा। फिर 5 साल लगेंगे फिर वो ग्रोथ रेट 10% पे पहुंच जाएगा। और फिर उसके बाद वो 10% के हिसाब से चलेगा। यानी पहले 2 3 साल 20% फिर उसके बाद 5 साल लगेंगे। 1 2 3 4 5 और फिर वो 10% हो जाएगा फॉर एवर के लिए। याद है? ऐसे क्वेश्चन हमने क्लास में पढ़े हुए हैं लीनियर इंक्रीज डिक्रीज के। तो ये तो आपको आते हैं। इसमें हम क्या करते थे? इसमें हम पहले यहां का डिविडेंड निकालते थे दो-ती साल का। फिर इन सब इयर्स का डिविडेंड निकालते थे। फिर यहां पे टर्मिनल वैल्यू निकाल देते थे। जब डिविडेंड परपेचुअल हो जाता था। पर ये मैनुअल मेहनत था। मतलब मैनुअल मेहनत मतलब 4:06 इसमें हम सारी की सारी मेहनत लिखकर करते थे। हमें ये पूरी की पूरी स्टेटमेंट क्रिएट करनी पड़ती थी। उनकी प्रेजेंट वैल्यू निकालनी पड़ती थी। मेहनत करनी पड़ती थी ओवरऑल। राइट? उसी का शॉर्टकट मेथड है एच मॉडल। इसी का एक शॉर्टकट मॉडल है एच मॉडल। अब एच मॉडल में क्या बताया जाता है? जैसे सोचिए कि शुरू में हमारे पास कोई ग्रोथ रेट है जो हाई है जो एब्नॉर्मली हाई ग्रोथ रेट है जो सस्टेनेबल नहीं है। सस्टेनेबल मतलब वो कोई बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकती। मान लेते हैं कि अभी हमारी ग्रोथ रेट है 20%। लेकिन उसके बाद 5 साल बाद वो ग्रोथ रेट या 10 साल बाद मान लो कि 10 साल बाद वो ग्रोथ रेट हो जाएगी 10% और वो फिर परपेचुअल चलेगी। तो हमें यह बात तो समझ आ गया कि ग्रोथ रेट बाद में 10% परपेचुअल चलेगी और अभी वो 20% है। क्या ये दोनों शब्द आपको समझ आ रहे हैं मैंने क्या कहा। और ये लाइफ है जिस लाइफ के दौरान जिस पीरियड के दौरान यह ट्रांजिशन पीरियड है जिसमें धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे करके वह ग्रोथ रेट कम 5:06 होगी। अब मैं आपको एक जुगाड़ की बात बताता हूं। या तो मैं 10 बार अलग-अलग करके रेट लूं जैसे 19% 18% 17% 16% ऐसे करके 10% तक मैं धीरे-धीरे करके आऊं और 10 बार कैलकुलेशन करूं। बोलो हां या ना? मेरी बात आपको समझ आ रही है? या एक काम क्यों ना करूं? मैं इन दोनों ग्रोथ की एवरेज लेके इन दोनों ग्रोथ की एवरेज रेट लेके उसे सीधा फाइव से इंटू कर दूं। मतलब 10 साल में अगर ऊपर से नीचे तक जाएंगे तो अगर मैं उसकी हाफ लाइफ ले लूं यानी पांच मिडिल में ग्रोथ रेट इन दोनों की एवरेज ले लूं तो इस मॉडल पे बेस्ड है एच मॉडल। मैं पहले फार्मूला लिखवाता हूं फिर उसके बारे में समझाता हूं कि वो फार्मूला एक्चुअली में आपको कह क्या रहा है। ठीक है जी? देखिए फार्मूला ये कहता है कि जो प्राइस ऑफ़ द शेयर आज होगा। ये सब कुछ भी लिखने की जरूरत नहीं है। मैं अपने हैंड रिटन फाइल भी आपको दूंगा। आपने बस सिर्फ समझना है। सिर्फ समझना ताकि हम स्पीड बिल्ड अप कर सकें। ठीक है? फार्मूला कहता है कि आज का शेयर प्राइस क्या होगा? तो आप बोलोगे देखो आज का जो शेयर प्राइस है वह दो हिस्सों में डिपेंडेंट है। दो हिस्सों पर बटा है। 6:09 एक तो यह मानो कि जो आज का डिविडेंड है यानी D0 है उस पे वो वाली ग्रोथ रेट लगाओ जो कि हम मान सकते हैं कि हमारी लंबे समय तक चलनी है। जो नॉर्मल ग्रोथ रेट है जो नॉर्मल ग्रोथ रेट है मतलब जो लंबे समय तक की ग्रोथ रेट है उसके बारे में बात करूं कि अगर मान लेते हैं कि लॉन्ग टर्म ग्रोथ रेट मैंने कहा 10% है तो यहां 10% की ग्रोथ रेट लिखो कि अगर मैं जीरो पीरियड के डिविडेंड के बाद 10% की ग्रोथ लगाता तो ke - gn क्या होता? n यहां पर कहने का मतलब क्या है? n का मतलब है नॉर्मल पीरियड की ग्रोथ रेट। नॉर्मल पीरियड ग्रोथ रेट यानी यह वह ग्रोथ रेट है जो बाद में होगी। यानी हमारे क्वेश्चन में यह ग्रोथ रेट 10% है। यानी सर आप यहां की जगह यहां प्राइस निकाल रहे हो। हां, मैं यहां पे प्राइस निकाल रहा हूं। ये तो समझ आ गया आपको? ऐसे ही हम करते थे। d0 1 + d / k - d g निकालते थे। ये वो प्राइस निकाल ली। यानी यहां पे हमने 7:09 टर्मिनल वैल्यू निकाल दी। तो बेसिकली ये टर्मिनल वैल्यू निकल गई। बट सर यहां से यहां तक की वैल्यू कैसे निकलेगी? इस पीरियड की भी तो वैल्यू निकलेगी। ठीक बात है। तो वो निकालने के लिए आप क्या करोगे? आप दिखाओगे d0 मतलब इनिशियल पीरियड का डिविडेंड यहां का और अब इन दोनों को माइनस कर दो। मतलब यहां से यहां तक आने में कितना समय लगेगा? आप मुझे बताओ यहां से यहां तक आने में कितना समय लगेगा? सोच कर देखो। तो आप यह बोलोगे कि अगर यह ग्रोथ रेट थी जीc यानी इनिशियल ग्रोथ रेट जो सुपर ग्रोथ रेट है इनिशियल पीरियड तो अब इसे नाम आप कुछ भी दे दो GI बोल दो, GI बोल दो इनिशियल पीरियड के लिए GA बोल दो, कुछ भी नाम दे दो। वो तो नाम है। तो हमने बोला GC - GN मतलब चेंज इन ग्रोथ रेट। यानी हमें 20% से 10% की ग्रोथ पे आना है। लेकिन ये जो 20% से 10% की ग्रोथ पे आना है, हमें तो इसकी एवरेज ग्रोथ रेट लेनी चाहिए। हमें तो इसकी एवरेज क्योंकि मैं अगर हर साल की कैलकुलेशन नहीं कर रहा तो मुझे एवरेज ग्रोथ रेट लेनी चाहिए। ठीक है? उसे 8:12 उन्होंने लेने की जगह क्या किया? उसे H से मल्टीप्लाई कर दिया। अब ये H का मतलब है हाफ लाइफ। H का मतलब है हाफ लाइफ। हाफ लाइफ कहने का मतलब होता है जो ट्रांजिशन इयर्स हैं 10 इयर्स उसे डिवाइड बाय टू करो तो ये फाइव आ जाएगा। यानी यहां पे आपको फाइव को लिखना है। ये फाइव को क्यों लिखना है? मैं उसका लॉजिक भी आपको समझा देता हूं। क्योंकि हम यह मान रहे हैं कि ये जो बदलाव आ रहा है 10% का ये एवरेज तौर पर आ रहा है। मतलब धीरे-धीरे करके हर साल एक-ए 1-1% कम करके आ रहा होगा। तो एवरेज पे आ रहा है। इसीलिए हमने जब एवरेज करते हैं तो किसी भी चीज को डिवाइड बाय टू करना पड़ता है। क्योंकि अगर ओपनिंग क्लोजिंग वैल्यू्यूज हो तो आपको डिवाइड बाय टू करना पड़ता है। तो चेंज की ट्रांजिशन दिखाने के लिए हमने इधर h को रख दिया। और अब हम इसे डिवाइड कर देंगे। किससे? डिवाइड कर देंगे ke - gn से मतलब डिवाइड इसी से करेंगे जो इधर किया था नॉर्मल पीरियड की ग्रोथ रेट से सर अब इसमें और इसमें अंतर क्या है देखो दोनों में अंतर है यहां पे हमने नॉर्मल तरीके से 9:13 डिस्काउंट करके प्राइस निकाला भाई d0 * 1 + ग्रोथ / k - g नॉर्मल वाला नॉर्मल वाला मतलब ये वाले पीरियड के लिए हमने नॉर्मल तरीके से प्राइस निकाल लिया नॉर्मल तरीके से प्राइस निकाल लिया और इस फज़ के लिए क्या किया जब हमारा प्राइस धीरे-धीरे करके ट्रांजिट करेगा नीचे गिरेगा उस पीरियड के लिए हमने ज़ीरो पीरियड वाला डिविडेंड रखा। KE - G सेम रखा। यानी मैं कहूं कि ये वाला पीरियड और ये वाला पार्ट तो सेम रहेगा। बस फर्क ये है कि यहां पे GC - GN रखा। यानी ग्रोथ ऑफ़ जो एक नॉर्मल ग्रोथ है माइनस नॉर्मल ग्रोथ * H कर दिया। और H का मतलब है हाफ लाइफ। H का मतलब होता है हाफ लाइफ। इस फार्मूला पे ड्रिवन हमारे कांसेप्ट चलेंगे। इस फार्मूला पे ड्रिवन हमारा क्वेश्चन चलेगा। आइए क्वेश्चन देखते हैं। देखिए आराम से बैठिए पहले समझिए। सनराइज Industries हैज़ रिसेंटली पेड अ डिविडेंड ऑफ़ ₹5 तो हमें रीसेंट डिविडेंड पता चल गया। यानी हमें डी ज़ीरो पता चल गया। 10:14 ठीक है? सिर्फ सुनना है। कुछ भी लिखना नहीं है। इस पूरी फाइल मैं आपको दे दूंगा। अपनी हैंड रिटन फाइल भी दे दूंगा। ये जो इसमें मैं लिख रहा हूं मार्क्ड फाइल ये भी दे दूंगा। द कंपनी इज करेंटली एंजॉयंग अ सुपर नॉर्मल ग्रोथ रेट ऑफ 18% इन डिविडेंड। अभी हमारे पास सुपर नॉर्मल ग्रोथ चल रही है 18% की। यह नॉर्मल नहीं है। यह हमेशा नहीं रहेगी। यह सिर्फ शुरू-शुर के समय पे रहेगी। द ग्रोथ रेट इज़ एक्सपेक्टेड टू डिक्लाइन लीनियरली। वो ये कहता है ये जो हमारी ग्रोथ रेट है, यह लीनियरली डिक्लाइन करेगी ओवर द नेक्स्ट 10 इयर्स टू रीच द इंडस्ट्री नॉर्मल एवरेज ग्रोथ रेट ऑफ़ 7%। यानी ये धीरे-धीरे करके 7% पे आ जाएगी। यानी ये धीरे-धीरे करके 7% पे आ जाएगी। यानी 18% से 7% पे आ जाएगी। तो बेसिकली यह हमारा ग्रोथ रेट कर पीरियड का हो गया। यह ग्रोथ रेट नॉर्मल पीरियड का हो गया। जी मतलब ग्रोथ रेट ऑफ़ करंट पीरियड एंड GN मतलब ग्रोथ रेट ऑफ़ नॉर्मल पीरियड। अब वो ये कहता है व्हिच विल कंटिन्यू इनडेफिनेटली। फिर उसके बाद यही रेट आगे चलेगा हमेशा के लिए। द रिक्वायर्ड रेट ऑफ़ इन्वेस्टर्स इज़ KE इज़ 15%। यानी KE जो 11:16 इन्वेस्टर का है वो 15% है। हमारी ट्रांजिशन लाइफ 10 इयर्स है। पूरी लाइफ में 10 इयर्स लगेंगे। हमने हाफ पीरियड पहले ही निकाल लिया। हाफ पीरियड कैसे आ गया? 10 का आधा यानी 5 इयर्स। क्या यहां तक की बातें आपको समझ आ गई? जी हां। अब आपने ये आज के प्राइस का फार्मूला लिखा। आज के प्राइस का फार्मूला क्या है? ये टर्मिनल वैल्यू है। टर्मिनल वैल्यू कैसे आई? d0 1 + gn / ke -n यानी इसका मतलब हो गया d0 कितना था? ₹5 का। तो ₹5 का डिविडेंड और 1 प्लस ग्रोथ रेट ऑफ 7% जो नॉर्मल ग्रोथ रेट है अप ke - g तो यह टर्मिनल वैल्यू आ गई। यह हमारी अंत की टर्मिनल वैल्यू आ गई। अब बात बचती है कि ट्रांजिशन पीरियड की वैल्यू क्या होगी? ये तो टर्मिनल वैल्यू है। ट्रांजिशन पीरियड की वैल्यू क्या है? देखिए वो है d0 यानी ₹5 h. H मतलब हाफ लाइफ। हाफ लाइफ मतलब 5 इयर्स। ट्रांजिशन पीरियड की हाफ लाइफ और GC - GN मतलब एबनॉर्मल ग्रोथ माइनस नॉर्मल ग्रोथ। तो एब्नॉर्मल ग्रोथ माइनस नॉर्मल ग्रोथ / KE - नॉर्मल ग्रोथ / KE - नॉर्मल 12:18 ग्रोथ। तो इसे सॉल्व किया। यानी हमारे प्राइस में दो कॉम्पोनेंट हैं। कौन-कौन से दो कॉम्पोनेंट हैं? मैं आपको दोबारा समझा देता हूं। प्राइस में दो कॉम्पोनेंट हैं। एक वो जो टर्मिनल वैल्यू को रिप्रेजेंट करता है। कि भैया डिविडेंड पे अगर नॉर्मल ग्रोथ ही लगती तो हमारे शेयर का प्राइस क्या होता? इसका मतलब है अगर हमारे शेयर पर सिर्फ नॉर्मल ग्रोथ लग रही होती तो शेयर का प्राइस क्या होता? फिर हमने क्या किया? हमने इसी d0/ ke - GN पे यानी इसको सेम रखा। इसे हाफ लाइफ से इंटू किया और GC - GN किया। GC - GN किया। मतलब जो हाई ग्रोथ रेट है, जो एबनॉर्मल हाई ग्रोथ रेट है और जो नॉर्मल ग्रोथ रेट है उन दोनों का गैप निकाला। यानी हमने उस ट्रांजिशन को निकाला। ट्रांजिशन गैप को निकाला और उस ट्रांजिशन गैप को h से इनू कर दिया और उसे h से मल्टीप्लाई कर दिया। क्या यह बात आपको समझ आ गई बेटा? मैंने क्या कहा? जी हां। तो यही हमारे पास पूरा का पूरा 13:19 कहानी है। यही पूरी की पूरी कांसेप्ट है। इसको बस अप्लाई किया। इसका क्वेश्चन सॉल्व किया। यह हमारा टोटल शेयर प्राइस आ गया। फिर वो कहता है कि करंट मार्केट प्राइस हमारे हिसाब से इतना होना चाहिए। लेकिन मार्केट प्राइस कम है तो जितना प्राइस होना चाहिए मार्केट में उससे कम है तो आप चाहो तो बाय कर सकते हो। मार्जिनली अंडर प्राइस्ड है पर बहुत ज्यादा बड़ा गैप है नहीं तो आप छोड़ भी सकते हो। बाय करना चाहो बाय करो। नहीं बाय करना चाहते मत करो। तो ये हमने पढ़ लिया पूरा का पूरा क्वेश्चन नंबर वन। ऐसे ही क्वेश्चन नंबर टू भी है। उसे थोड़ी सी स्पीड बढ़ाकर पढ़ लेते हैं। एक बच्चे ने कहा कि सर अगर हम लीनियर इंक्रीज डिक्रीज के मेथड से करें और इससे करें। देखो अगर क्वेश्चन में खाली लीनियर इंक्रीज डिक्रीज करा है आप किसी भी मेथड से कर सकते हो। पर अगर H मॉडल बोला होगा तो सिर्फ H मॉडल लगाना। मतलब एग्जाम में अगर आप इसी क्वेश्चन को लीनियर इंक्रीज डिक्रीज से करना चाहते थे तो कर सकते थे क्योंकि उसने स्पेसिफाई नहीं किया। पर एग्जाम में अगर स्पेसिफाइड है कि H मॉडल से करना है तो फिर आपको H मॉडल ही करना चाहिए। फिर आपको कोई और मॉडल नहीं लगाना चाहिए। समझ गए आप मेरी बात? 14:19 ठीक है जी। चलिए क्वेश्चन नंबर टू पर आते हैं। यह हमें कहता है zenत farma lited हैज़ जस्ट रिपोर्टेड एन ईपीएस ऑफ़ 20। देखो जस्ट रिपोर्टेड एन ईपीएस ऑफ़ 20 मतलब ये ज़ीरो पीरियड का ईपीएस है एंड पेड अ डिविडेंड ऑफ़ एट। तो यानी उन्होंने D0 भी दे दिया, e0 भी दे दिया। ठीक है? वो कहता है रेट ऑफ़ रिटर्न इज़ 20%। यानी आपको इसके हिसाब से हेल्प मिल जाती है ग्रोथ रेट निकालने में। आपको याद है ग्रोथ रेट का एक फ़ूला होता था B * R रिटेंशन रेट * रेट ऑफ़ रिटर्न। तो जब वो आपको रेट ऑफ रिटर्न दे रहा है और यहां पे रिटेंशन बता रहा है तो आपके मन में कहीं ना कहीं ग्रोथ रेट आ रही है। द रिटेंशन रेट एंड हेंस ग्रोथ रेट इज़ एक्सपेक्टेड टू डिक्लाइन लीनियरली ओवर द नेक्स्ट सिक्स इयर्स। वो धीरे-धीरे करके लीनियरली डिक्लाइन करेगी अंटिल इट रीचेस दी इंडस्ट्री स्टेबल लॉन्ग टर्म ग्रोथ रेट ऑफ़ 6%। यानी क्वेश्चन ने आपको इनिशियल ग्रोथ रेट नहीं दी है। टर्मिनल ग्रोथ रेट दे रखी है। क्वेश्चन ने आपको इनिशियल ग्रोथ रेट नहीं दी है। टर्मिनल ग्रोथ रेट जो बाद वाली ग्रोथ रेट है वो दे रखी है और 15:19 वो कांस्टेंट रहेगी। बीटा हमारा 1.2 है। जब भी क्वेश्चन में बीटा दिया होता है सीएपीएम मॉडल लगने की बात आ जाती है। यानी इस क्वेश्चन में KE जो है वो सीएपीएम से निकल आएगा। क्या होता है? रिस्क फ्री रेट बीटा टाइम errm - RF उस वाले फ़ूला से हमें KE निकालना पड़ेगा। हमें बीटा दिया है, रिस्क फ्री रेट दिया है, एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑन मार्केट दी हुई है। तो इससे हमारा KE निकल गया मन में। इन तीनों की मदद से हमारा KE निकल चुका है। हमें अब देखो क्वेश्चन में क्या-क्या पता है? अगर मैं आपको इस क्वेश्चन की वैल्यू्यूज लिख के बताऊं। तो देखो आप ये कहोगे कि सर इस क्वेश्चन में मुझे ग्रोथ रेट ऑफ़ नॉर्मल पीरियड ऑलरेडी पता है। मुझे हाफ लाइफ जो होगी क्योंकि वो कहता है कि लीनियरली डिक्रीज करेगा सिक्स इयर्स में। तो अगर मैं सिक्स को डिवाइडेड बाय टू कर दूं तो हाफ लाइफ 3 इयर्स की होगी। ये भी समझ आ गया। और मुझे D0 भी ₹8 का ऑलरेडी पता है क्वेश्चन में। और हमें KE भी पता है। KE कैसे आएगी? यह देखो KE इस तरीके से आएगी। जब हम रिस्क फ्री रेट को निकालेंगे और प्लस कर देंगे बीटा टाइम - RF तो हमारा KE 16:20 आ गया 16.6% लेकिन पूरा कुछ गिवन है लेकिन इस क्वेश्चन में इनिशियल ग्रोथ रेट मिसिंग है। इस क्वेश्चन में इनिशियल ग्रोथ रेट मिसिंग है। GC मिसिंग है। तो GC पहले हमें निकालना पड़ेगा। यानी जो शुरू वाले पीरियड में जो शुरू वाले पीरियड में हाई ग्रोथ रेट है वह नहीं पता। तो वह हमें डिराइव करनी पड़ेगी। तो कैसे करेंगे? सुनो। पहले हमने रिटेंशन रेशियो निकाली ईपीएस - डीपीs / ईपीएस। तो रिटेंशन रेशियो आ गई 60%। तो ग्रोथ रेट कितनी होती है? B * R है ना? ये B है ये R है। तो B * R 12% यानी इनिशियल ग्रोथ रेट जो हाई पीरियड की ग्रोथ रेट है वो है 12%। लेकिन 6 साल बाद वो 6% पे आ जाएगी। तो 12% से धीरे-धीरे करके कम करके 6% पे आ जाएगी। क्या इस क्वेश्चन को हम बिना H मॉडल के कर सकते हैं? कर सकते हैं। पर हमने h मॉडल की प्रैक्टिस करनी है। इसलिए हम h मॉडल पे प्रैक्टिस कर रहे हैं। हमने फिर से वही वाला फ़ूला लिखा। फ़ूला याद है आपको? देखो। d0 यानी ज़ीरो पीरियड का डिविडेंड / KE - नॉर्मल पीरियड की ग्रोथ। KE - नॉर्मल पीरियड की ग्रोथ। यहां भी d0 17:22 आ गया। यहां H आ गया। H का मतलब होता है हमारा हाफ लाइफ। हाफ लाइफ मतलब 3 साल। और GC - GN. Gc - GN का मतलब आपकी ग्रोथ रेट कॉन्सेंट पीरियड की कितनी है? अह जो करंट पीरियड की कितनी है? और नॉर्मल पीरियड की कितनी है? उनका गैप उनका डिफरेंस। इस पूरे के पूरे फार्मूला को हमने यूटिलाइज किया। फार्मूला को यूज़ करने के बाद दोनों कॉम्पोनेंट को सॉल्व किया और दोनों कॉम्पोनेंट सॉल्व करके ऐड कर दिए। यह हमारा करंट इंट्रेंसिक वैल्यू आ गया। यानी हमारे हिसाब से शेयर अभी के लिए इतने प्राइस पे बिकना चाहिए। मार्केट में प्राइस 210 है। यानी मार्केट ओवरप्राइस चल रही है। मार्केट ऑलरेडी ओवरप्राइ है। अगर आपके पास शेयर है तो बेच दो। सेलिंग का डिसीजन है हमारा। इसलिए हमारा डिसीजन क्या है? कि अगर हमारे पास यह शेयर है तो हमें बेच देने चाहिए। बोलिए दोस्तों क्या यह कहानी समझ आ गई? क्या मैं मान के चलूं आपको एच मॉडल क्लियर हो गया? दोस्तों, अब हम बिजनेस वैल्यू्यूएशन के नेक्स्ट ईयर के क्वेश्चंस पढ़ेंगे। यानी एक्स्ट्रा क्वेश्चन जो आपको पढ़ने चाहिए। दो मिनट ध्यान दीजिएगा। मैं उम्मीद के साथ पढ़ा रहा हूं कि आपने बिजनेस वैल्यू्यूएशन 18:23 टॉपिक अच्छे से पढ़ रखा है। मतलब आपको सिक्योरिटी वैल्यूएशन, बिज़नेस वैल्यू्यूएशन दोनों टॉपिक अच्छे से आते हैं। आपको बेसिक फार्मूलाज़, डिस्काउंटिंग सब कुछ आती है। एफसीएफएफ वगैरह के मॉडल्स वगैरह सब पता है आपको। है ना? तो मैं उस नॉलेज के साथ आगे पढ़ाना स्टार्ट कर रहा हूं। ये वो एक्स्ट्रा क्वेश्चन है जो मैं चाहता हूं कि आप एग्जाम से पहले पढ़ कर जाएं। इस चैप्टर में फॉररेक्स के अलावा सबसे अधिक क्वेश्चन है जो एक्स्ट्रा आपको पढ़ने हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि बिजनेस वैल्यू्यूएशन चैप्टर में ना बहुत बढ़िया थ्योरी गिवेन है। और वो थ्योरी सारे के सारे प्रैक्टिकल टॉपिक्स की है। और उन टॉपिक्स पे क्वेश्चन बनाना बहुत आसान है इंस्टट्यूट के लिए। नए क्वेश्चन अगर इन टॉपिक्स पे बनाए जाएं तो बहुत इजी होंगे। इसलिए इस चैप्टर में थोड़ा समय ज्यादा लगेगा। इस चैप्टर के क्वेश्चन थोड़े ज्यादा होंगे। चलिए, पढ़ना स्टार्ट किया जाए। बोलिए आप तैयार हैं? सुनो। शुरू के दो चार क्वेश्चन आसान हैं। उनमें तो फील भी नहीं होगा कि कुछ नई बात है। अगर मैं आपको ये बताऊं नहीं कि ये नई बात है तो आपको पता भी नहीं लगेगा। आप खुद ही सॉल्व कर दोगे। आइए। पहला टॉपिक जो हम पढ़ने वाले हैं वो है 19:24 मॉडिफाइड डिस्काउंटेड कैश फ्लो वैल्यू्यूएशन मेथड। देखो मॉडिफाइड डिस्काउंटेड कैश फ्लो वैल्यू्यूएशन का मतलब क्या होता है? पहले यह समझो। यानी हम नॉर्मली डिस्काउंटेड कैश फ्लो मेथड तो फॉलो करते हैं। पर यह मॉडिफाइड कैसे की जाती है? देखो नॉर्मल क्वेश्चन में प्लीज सुनिए। आपने आज तक ज्यादातर क्वेश्चन जो पढ़े हैं, आपने जिस तरीके से क्वेश्चन सॉल्व किए हैं, आप हमेशा क्या करते हैं? आप बेटा जब भी ये क्वेश्चन आपको दिया जाता है। मैं एक नॉर्मल क्वेश्चन की बात पूछता हूं आपसे। नॉर्मल क्वेश्चन आपको कैसे पूछा जाता है कि इमेजिन करो आप फर्स्ट ईयर में इतना कमाओगे, सेकंड ईयर में इतना कमाओगे, थर्ड ईयर में इतना कमाओगे। फिर उसके बाद आप परपेचुटी तक कितना कमाओगे? ऐसे ही क्वेश्चन आते हैं। यानी अगर मैं आपको यह बोलूं जैसे सोचो कि एफसीएफएफ की बात करूं तो हम ऐसे ही बोलते हैं ना एफसीएफएफ वन, एफसीएफएफ टू, एफसीएफएफ थ्री और फिर उसके बाद परपेचुअल ग्रोथ आ जाती है। मान लो शुरू में 10% की ग्रोथ होती है। पहले 3 साल 10% की ग्रोथ है। फिर उसके 20:26 बाद हम कह देते हैं जी 8% की ग्रोथ परपेचुअल होगी। तो फिर हम उसके हिसाब से यहां पे टर्मिनल वैल्यू निकाल देते थे। कितने लोगों को याद आ रहा है कि यहां पे टर्मिनल वैल्यू निकाल देते थे एफसीएफ 4 करके अप - मतलब जो भी उसकी डिस्काउंटिंग का रेट करना था फिर हम उसे मतलब एफसीएफ 4 को पहले अगर फर्म है फर्म तो ko - g कर देते थे। अच्छा अगर यही क्वेश्चन एफसीएफ का होता फ्री कैश फ्लो टू इक्विटी का होता तो फिर हम यहां kee लिख देते। यह तो पता है ना छोटी-छोटी बातें कि दोनों में क्या डिफरेंस है। यह तो पता है। सर, यह बात तो हमें पता है। तो फिर इसमें नया क्या है? आप यह क्यों कह रहे हो कि यह नया टॉपिक है। यह नया टॉपिक इसलिए है क्योंकि अगर बिजनेस डिस्ट्रेस में होता है। सुनो मेरी बात। अगर एक बिजनेस डिस्ट्रेस में होता है तो क्या होता है कि मान लो 3 साल तक डिस्ट्रेस है। उसके बाद वो बिज़नेस चल पड़ेगा। बढ़िया चल पड़ेगा। तो जब तक वो डिस्ट्रेस में होता है उसकी केओ जो होती है वह हाई होती है। इमेजिन करो कि क्वेश्चन आपको यह कहे कि शुरू के 3 साल जो केओ है वो 20% है। 21:29 लेकिन बाद में केओ हो जाएगी 16%। यानी इसका मतलब है कि डिस्काउंटिंग रेट चेंज हो रहा है। इसीलिए इसे मॉडिफाइड डिस्काउंटेड कैश फ्लो अप्रोच बोलते हैं। बाकी कुछ भी फर्क नहीं है। अच्छा बस सर इतना फर्क है कि डिस्काउंट रेट दो दे देगा वो एक की जगह नॉर्मली क्वेश्चनों में आज तक आपने जितने भी क्वेश्चन पढ़े हैं उनमें एक ही डिस्काउंट रेट होता है हमेशा। आपने यही जाना है आज तक आपने जितने भी ज्यादातर क्वेश्चन किए होंगे उन सब में एक ही डिस्काउंट रेट होता है पूरे क्वेश्चन में। उसी डिस्काउंट रेट यानी बट जब कभी क्वेश्चन को डिस्ट्रेस हो रहा हो। कंपनी को डिस्ट्रेस हो रहा हो। कंपनी डूब सकती हो। तो जब तक वो डूब सकती है तब तक उसे महंगा पैसा मिलता है। लेकिन जब वो स्टेबल हो जाती है तो उसे सस्ता पैसा मिलता है तो उसका केओ फॉल कर जाता है। यानी इस पीरियड की डिस्काउंटिंग जो होगी वो 20% के रेट से होगी। लेकिन इस पीरियड की जो कैलकुलेशन होगी वो 16% से होगी। पर ऑब्वियस एक बात बताऊं कहां गलती होगी? जब आप इस टर्मिनल वैल्यू को निकाल दोगे जब TV3 को निकाल दोगे तो जो TV3 निकलेगी वो तो थर्ड ईयर के एंड की वैल्यू निकलेगी। 16% को यूज़ करके निकलेगी। पर जब उसे डिस्काउंट करना है पीछे तो इस फेज में तो डिस्काउंटिंग रेट 22:30 20 है तो उसे डिस्काउंटिंग वापस 20 से ही करनी पड़ेगी क्योंकि जिन 3 साल में वो पीछे आएगी वहां 20% ही लेना यहां गलती हो जाती अगर ये पड़ा नहीं होता अब नहीं होगी अब याद रखोगे कि हां देखो इस पीरियड की डिस्काउंटिंग रेट 16% है मान गए लेकिन जब यहां पे टर्मिनल वैल्यू आएगी और टर्मिनल वैल्यू से मैं पीछे लेकर आऊंगा तो जब पीछे लाऊंगा तो इस फेस की तो डिस्काउंटिंग 20% के रेट पर ही होगी ठीक है जी। आइए इस क्वेश्चन में कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं है। मैं आपको बता रहा हूं। ऐसे नॉर्मल क्वेश्चन हमने पढ़ रखे हैं क्लास के अंदर। बट अगर एग्जाम में डिस्ट्रेस कंपनी लिखा हुआ आ जाता है बच्चा घबरा जाता है। इसलिए मैं उसका एक दो क्वेश्चन प्रैक्टिस करा रहा हूं। हां। पर जो जेन्युइन डिस्ट्रेस वाले क्वेश्चन हैं प्रोबेबिलिटी वाले वो भी कराऊंगा। अभी आप बंधे रहें। ध्यान से पढ़ते रहें। सुनो। लिखने की कोई जरूरत नहीं है। मैं सारे नोट्स आपको हैंड रिटन भी फाइल दे रहा हूं। एबीसी लिमिटेड एक फेस कर रहा है एक टेंपरेरी फाइनेंसियल डिस्टेंस। देखो उसने वर्ड यूज़ किया टेंपरेरी फाइनेंसियल डिस्ट्रेस। इसका मतलब ये जो डिस्ट्रेस है ये फॉर एवर नहीं है। परमानेंट नहीं है। थोड़ी देर का है। 23:32 ऑपरेशनल इन एफिशिएंसी क्या? वैल्यू्यूएशन एनालिस्ट बिलीव दैट द कंपनी कैन बी रिस्ट्रक्चरर्ड एंड रिवाइव्ड ओवर टाइम। वो कहता है थोड़े समय बाद हमारी कंपनी ठीक हो जाएगी। भैया अगर हमने ढंग से कुछ कामवाम किए तो। वो कहता है करंट एफसीएफएफ एक्सपेक्टेड नेक्स्ट ईयर। यानी वो एफसीएफएफ ज़ीरो पीरियड का दे ही नहीं रहा। वो एफसीएफएफ सीधा वन पीरियड का दे रहा है। तो हमें यह बात तो समझ आ गई कि हमें एफसीएफएफ वन पीरियड का पता है। ड्यू टू डिस्ट्रेस द एफसीएफएफ इज़ एक्सपेक्टेड टू ग्रो ओनली एट 4% एनुअली फॉर द नेक्स्ट थ्री इयर्स। यानी पहले 3 साल की ग्रोथ वन, ग्रोथ टू और ग्रोथ थ्री तीनों के तीनों 4% है। आफ्टर सक्सेसफुल रीस्ट्रक्चरिंग। 3 साल बाद हम अपनी कंपनी को रीस्ट्रक्चर करेंगे और नॉर्मल ग्रोथ रेट 8% की आ जाएगी। यानी उसके बाद की जो नॉर्मल पीरियड की ग्रोथ रेट है वो 8% है और परपेचुअल रहेगा। परपेचुअल मतलब वो फिर फॉर एवर रहेगी। डब्ल्यूएसीसी ड्यूरिंग डिस्ट्रेस पीरियड 16% है और नॉर्मल डब्ल्यूएससीसी बाद में 12% है। यानी शुरू में 16% का डिस्काउंट रेट रहेगा। बाद में 12% का डिस्काउंट रेट रहेगा। ठीक है? और वो कहता है जी हमें 24:35 डिस्काउंटिंग रेट वो पहले 3 साल का डिस्काउंटिंग रेट भी दे रहा है और पीवी फैक्टर 16% पे थर्ड ईयर का दे दिया उसने। हमें थोड़ा सा दिमाग तो चलाना पड़ेगा। एक बात बताओ यहां पे उसने डिस्काउंटिंग रेट 12% वाला क्यों नहीं दिया? क्योंकि वो एक्चुअली में इस क्वेश्चन में टर्मिनल वैल्यू निकालने के अलावा कहीं यूज़ ही नहीं हो रहा होगा। अब पहले नंबर लाइन बना लेते हैं। सुनो मेरे साथ। यानी इस क्वेश्चन में फर्स्ट ईयर है। सेकंड ईयर है। थर्ड ईयर है और फिर उसके बाद परपेचुटी है। यहां पे ग्रोथ रेट थी 4%। यहां पे भी ग्रोथ रेट थी 4%। यहां पे भी ग्रोथ रेट थी 4% उसके बाद ग्रोथ रेट है 8% वह भी परपेचिटी तक। तो देखो हमें एफसीएफ1 तो ऑलरेडी पता है। एफसीएफएफ वन तो हमें ऑलरेडी पता है। है ना? अब एक काम करो इसमें 4% ग्रोथ करो। तो आपको एफसीएफ2 पता लग जाएगा। फिर आप FCF3 25:36 भी निकाल लोगे। कैसे? देखो यह कितना आ रहा है? यह आ रहा है बेटा 20.8 और अगर इसमें भी हम 4% ग्रोथ कर दें तो वह आ जाएगा 21.632 मैं मान के चलूं आपको फर्स्ट ईयर, सेकंड ईयर और थर्ड ईयर की एफसीएफएफ पता लग गई है। अब मुझे उसके बाद की टर्मिनल वैल्यू चाहिए। यानी मुझे 3 साल बाद की टर्मिनल वैल्यू चाहिए। TV3 चाहिए। अब मुझे बताओ TV3 कैसे आएगा? TV3 के लिए आपको पहले एफसीएफ 4 निकालना पड़ेगा और फिर KO - G करना पड़ेगा। उस पीरियड के लिए। ठीक है जी। बोलिए क्लियर है? तो एफसीएफएफ 4 कितना होगा? आप यह बोलोगे 21.632 यानी थर्ड ईयर का एफसीएफएफ और उस पे अब नई वाली ग्रोथ रेट नई वाली ग्रोथ रेट 8% की है और नया वाला केओ नया वाला केओ 12% का है और ग्रोथ रेट 8% की है। तो इस सब की मदद से मेरी टर्मिनल वैल्यू आ जाएगी। तो यह उसने निकाल के दिखाई होगी। यह रही 26:37 टर्मिनल वैल्यू आफ्टर रिकवरी। हम देखो यह आ रही है। हमने इसमें पहले एफसीएफ 4 निकाला। एफसीएफ 4 को 12% - 8% से डिवाइड किया तो ये आ गया 584.047584.075 ये हमारी टर्मिनल वैल्यू ऑफ़ द थर्ड ईयर एंड आ गया। ये हमारा टर्मिनल वैल्यू एट दी थर्ड ईयर एंड आ गया। बोलिए जी ये बातें क्लियर है आपको? मतलब हमने यह अलग-अलग एफसीएफएफ निकाल लिया और टर्मिनल वैल्यू एट द एंड ऑफ थर्ड ईयर निकाल लिया। अब क्या करना है? अब बस अब इन सबको डिस्काउंट कर देना है और ऐड कर देना है। वैल्यू ऑफ़ द फर्म आ जाएगा। तो तो आसान है फिर अब तो कुछ नहीं करना। अब तो बस इसकी भी प्रेजेंट वैल्यू निकाल ली और इन तीनों की भी प्रेजेंट वैल्यू निकाल ली 16% पे और टोटल कर दिया दोनों को और हमारी टोटल वैल्यू ऑफ़ द फर्म आ गई। बस यह ध्यान रखना है कि जो डिस्काउंटिंग करनी है वह सभी की 16% पे ही होगी। यानी 16% पे होगी। ये भी 16% के रेट पर डिस्काउंट होगी। ये भी 16% के रेट पे 2 इयर्स डिस्काउंट होगी। ये भी 27:39 16% के रेट पे 3 साल डिस्काउंट होगी। और ये भी 16% के रेट पे 3 साल डिस्काउंट होगी। और फिर इन सबको टोटल करेंगे। हम टेबल बनाकर करते हैं। उन्होंने अलग-अलग करके दिखाया। बट बात आई होप समझ आ गई आपको। यानी अगर मैं आपसे पूछूं नॉर्मल क्वेश्चन के अलावा इस क्वेश्चन में नई बात क्या थी तो आप क्या कहोगे? आप कहोगे सर कुछ भी नया नहीं था। बस ये थोड़ा सा ध्यान रखना था कि डिस्काउंट रेट दो अलग-अलग हैं। ग्रोथ रेट अलग-अलग हैं। बट ऐसे क्वेश्चन हमने क्लास में कर ही रखे हैं। डिस्ट्रेस का नाम नहीं दिया। बाकी सब कुछ तो कर ही रखा है। एग्री और डिसएग्री? आप कहोगे हां सर हमने ऐसे क्वेश्चन पढ़ रखे हैं। इससे अगला क्वेश्चन सेम है। बस प्रैक्टिस का क्वेश्चन है। ये होमवर्क में कर लीजिएगा। यह प्रैक्टिस के लिए हमने बनाया है आपके लिए। ठीक है? क्वेश्चन नंबर टू। अब आता है क्वेश्चन नंबर थ्री से नया टॉपिक आता है। यह टॉपिक आपकी बुक्स में आपके आईसीएआई की पब्लिकेशन में ठीक है जी। यह क्वेश्चन थ्योरेटिकली डिस्कस्ड है। बट ये प्रैक्टिकली डिस्कस नहीं है। तो इसे प्रैक्टिकली डिस्कस कर लेते हैं। सुनो। 28:42 देखिए कन्वेंशनल मेथड जो अभी-अभी हमने पढ़ा जो कि हमने डिस्काउंटेड कैश फ्लो का मेथड पढ़ा वो कभी-कभी मिस स्टेट कर सकता है डिस्ट्रेस फर्म को। उससे मिस्ट्रेस हो मतलब हमारी जो स्टेटमेंट्स हैं वो करेक्ट आंसर नहीं देती। यानी क्वेश्चन नंबर वन और टू जो है वो रियल वर्ल्ड में डिस्ट्रेस्ड कंपनी के लिए एकदम करेक्ट आंसर नहीं देता। तो उसे हमें मॉडिफाई करना पड़ता है। अब ये होता है मॉडिफाइड डिस्काउंटेड कैश फ्लो वैल्यू्यूएशन। यानी उसकी मॉडिफिकेशन करना। यानी जो क्वेश्चन वन और टू में हम पढ़कर आए हैं अब उसको मॉडिफाई करो। सुनो। इसका कोर आईडिया यह है कि एडजस्ट करो दोनों कैश फ्लोस को भी और डिस्काउंट रेट को भी फॉर पॉसिबिलिटी ऑफ डिफॉल्ट। डिफॉल्ट के लिए दोनों को मॉडिफाई करो। कैसे करते हैं? हम अपने एक्सपेक्टेड कैश फ्लो को मानते हैं कि जो नॉर्मल कैश फ्लो है उसे 1 माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ डिस्ट्रेस से इनू करो। मतलब एक बात बताओ आप मुझे कह रहे हो कि फर्स्ट ईयर में सर इतना कैश फ्लो आएगा सर सेकंड ईयर में इतना कैश फ्लो आएगा सर थर्ड ईयर में इतना कैश फ्लो आएगा कितना था 21.63 समथिंग ना 29:43 632 वैसे एक बात बताओ आप तो कह रहे हो ये तीनों साल इतनाइतना कैश फ्लो आएगा मैं कैसे विश्वास करूं आपके कैश फ्लो मैं एक एक सवाल पूछ रहा हूं जब एक कंपनी डूब रही है तो क्या पक्का है कि यह कैश फ्लो आएंगे सोच के बताओ। नहीं सर यह कैश फ्लो आने भी तो पक्के थोड़ी ना है। कोई गारंटी थोड़ी ना आएंगे। तो इन्हें मल्टीप्लाई करो किससे? उस प्रोबेबिलिटी से करो जो वन माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस है। देखो प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस का मतलब कंपनी बंद हो जाएगी, टूट जाएगी, दब जाएगी, बर्बाद हो जाएगी, खत्म हो जाएगी, तबाह हो जाएगी। और वन अगर मान लो तबाह होने के चांसेस हैं 60% तो 40% चांसेस सर्वाइवल के हैं। भाई अगर एक कंपनी डिस्ट्रेस के चांसेस 60% है तो ना डिस्ट्रेस होने के चांसेस 40% है। इसीलिए हम इसे इन सब कैश फ्लोस को 1 माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस कर रहे हैं। वन माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस का मतलब हम प्रोबेबिलिटी ऑफ़ गोइंग कंसर्न कर रहे हैं एक तरीके से। ध्यान से सोचो। 30:44 तो इसका मतलब है प्रोबेबिलिटी ऑफ़ नॉन डिस्ट्रेस। मैं यह बात लिख दूं कि इसका मतलब है 1 माइनस अगर प्रोबेबिलिटी ऑफ डिस्ट्रेस कर रहा हूं तो एक्चुअली में मैं प्रोबेबिलिटी ऑफ नॉन डिस्ट्रेस कर रहा हूं। नॉन डिस्ट्रेस मतलब कि कंपनी डूबेगी नहीं। भाई कैश फ्लो तो तभी आएगा ना। अगर कंपनी नहीं डूबी तो कैश फ्लो आते रहेंगे। कंपनी डूब गई तो कैश फ्लो नहीं आएगा। तो इसलिए हमने कैश फ्लो को प्रोबेबिलिटी ऑफ़ नॉन डिस्ट्रेस से इंटू कर दिया। तब हमें एक्सपेक्टेड कैश फ्लो पता लगेगा। ठीक है जी? और फिर इसकी मदद से हम प्रोबेबिलिटी यूज करके इसकी मदद से हम डिस्काउंटिंग यूज करके प्रेजेंट वैल्यू निकाल लेंगे। तो जो वैल्यू्यूएशन ऑफ इक्विटी आएगी यह पहला मेथड है हमारा। दूसरा मेथड क्या कहता है कि अगर हमने डीसीएफ वैल्यू ऑफ़ इक्विटी निकाल दिया, डिस्काउंटेड कैश फ्लो ऑफ़ इक्विटी निकाल लिया, उसे प्रोबेबिलिटी ऑफ़ नॉन डिस्ट्रेस से इंटू करो। और अगर आपने डिस्ट्रेस सेल वैल्यू ऑफ़ इक्विटी निकाल दी कि अगर मान लो कंपनी डूब गई और कंपनी डूब कर बेचनी पड़ी। 31:46 मैं दोबारा बोलता हूं। अगर मैं आपको यह बोलूं कि वैल्यू्यूएशन ऑन सर्वाइवल कितनी है और वैल्यू्यूएशन ऑफ डिस्ट्रेस कितनी है? देखो कंपनी के पास दो रास्ते हैं। या तो वो सर्वाइव कर जाएगी या वो डिस्ट्रेस हो जाएगी। एग्री? पहले आराम से सोचो। बाकी सब छोड़ दो। या तो कंपनी चलती रहेगी या कंपनी बंद हो जाएगी। दो ही रास्ते हैं। अगर चलती रहेगी तो कंपनी की यह वैल्यू है और अगर कंपनी डूब जाएगी तो कंपनी की यह वैल्यू है। यह क्वेश्चन इक्विटी के लिए भी पूछ सकता है, फर्म के लिए भी पूछ सकता है। तो अगर फर्म के लिए पूछेगा तो हम यहां फर्म की वैल्यू लिखेंगे और अगर इक्विटी के लिए पूछेगा तो इक्विटी की वैल्यू सर्वाइवल और डिस्ट्रेस के लिए लिखेंगे। ठीक है? यानी कंपनी चल के चलती रही तो ये वैल्यू है। कंपनी डूब गई तो ये वैल्यू है। अब आप एक काम करो। इन्हें मल्टीप्लाई करो प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सक्सी मतलब सर्वाइवल से और इसे मल्टीप्लाई करो प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस से। इसका मतलब आप VS को इंटू कर 32:47 रहे हो 1 - प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस से और वैल्यू्यूएशन ऑफ़ डिस्ट्रेस को प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस से। मतलब यहां तो प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस रखी लेकिन यहां 1 माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस रखी। यानी प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सर्वाइवल रखी। अगर कंपनी चलती रही इसके चांसेस कितने हैं? और कंपनी के चलते वे में वैल्यू कितनी है? कंपनी अगर डूब गई इसके कितने चांसेस हैं और डूबने पर वैल्यू्यूएशन कितनी है और इन दोनों को टोटल करोगे तो यह कंपनी की एक्सपेक्टेड वैल्यू आएगी। यह कंपनी की एक्सपेक्टेड वैल्यू आएगी। क्या ये कहानी समझ आई? यही इस बात में लिखी है। यही इस फार्मूला में लिखी है कि यानी अगर डीसीएफ वैल्यू ऑफ़ इक्विटी कितनी है? डिस्काउंटेड कैश फ्लो वैल्यू ऑफ़ इक्विटी कितनी है? इंटू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ नॉन डिस्ट्रेस। और डिस्ट्रेस सेल वैल्यू ऑफ़ इक्विटी कितनी है? इंटू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस। यह दोनों फार्मूले अगर आप ध्यान से पढ़ेंगे तो आपके मॉड्यूल में यह एक्सप्लेंड हैं। यह दोनों के दोनों फॉर्मूले आपके मॉड्यूल में एक्सप्लेंड है। ठीक है जी? सीए इंस्टट्यूट के मॉड्यूल पे ले आऊं तो ये कहता है वैल्यूएशन ऑफ़ डिस्ट्रेस कंपनी। यहां पे बात करता है। अब वो बोलता है कि इसमें मेथड कौन-कौन से हो सकते हैं? ये मेथड हो सकते हैं। सुनिए। 33:50 एक मेथड तो हो सकता है। देखो जिसे हमने बोला डिस्काउंटेड कैश फ्लो वैल्यू्यूएशन मेथड जिसका हमने अभी दो क्वेश्चन पहले वाले दो क्वेश्चन पढ़े और मैंने बोला वो इतना अच्छा मेथड नहीं है। उसमें हमने क्या पढ़ा था? मल्टीपल डिस्काउंट रेट अलग-अलग हो सकते हैं। यानी गुड पीरियड का डिस्काउंट रेट अलग और बैड पीरियड का डिस्काउंट रेट अलग। ये हमने टेक्निक पढ़ी। ठीक है जी। अब इसमें मेथड्स ऑफ़ वैल्यू्यूएशन में ये वाला हमने मेथड पढ़ लिया। मॉडिफाइड डिस्काउंटेड कैश फ्लो। इसके ऊपर बेस्ड क्वेश्चन नंबर वन एंड टू पढ़ लिया। फिर अब हम इस पर हैं। डिस्काउंटेड कैश फ्लो वैल्यू्यूएशन प्लस डिस्ट्रेस वैल्यू। इसका मतलब क्या है? जितनी भी टीसीएफ वैल्यू ऑफ़ इक्विटी होगी इंटू 1 माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस प्लस डिस्ट्रेस सेल वैल्यू ऑफ़ इक्विटी इंटू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस। इससे वैल्यू्यूएशन ऑफ़ इक्विटी आएगी। ये इक्विटी के लिए कर रहा हूं। सेम फार्मूला फर्म के लिए भी लगा सकता हूं। आपको समझ आया मैं फार्मूला निकाल के कहां से लाऊं? ये मैंने नहीं बनाया बेटा। ये फार्मूला आपके मॉड्यूल में गिवन है। पर उन्होंने इसके क्वेश्चन नहीं दिए हुए। अब जब वह क्वेश्चन दे देगा, बोलेगा मैंने तो पढ़ाया था। बच्चा पढ़ के क्यों नहीं आया? 34:51 आपको समझ आ रहा है मैंने क्या कहा? क्योंकि वो यही तो कह रहा है कि भैया मैंने तो फार्मूला लिखवाया है। अब बच्चा इसके क्वेश्चन नहीं पढ़कर आया। मैं क्या करूं? इसलिए मैं अब इसके एक दो क्वेश्चन करा रहा हूं। आई होप अब क्वेश्चन पढ़ने में थोड़ा ज्यादा मन लगेगा। आपको समझ आ गया कि ये फार्मूला मैंने घर पे नहीं बनाया। आपके इंस्टट्यूट ने ही कहा है। और ये वाला फार्मूला भी आपके इंस्टट्यूट ने ही कहा है कि कैश फ्लो को प्रोबेबिलिटी से इंटू कर दो। व कैश फ्लो * 1 - प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्टेंस। बेटा 1 माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस मतलब प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सक्सेस। प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सर्वाइवल। ये मतलब है। आइए। तो ये भी आपको समझ आ गया। कैश फ्लो को 1 माइनस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस से कर देते हैं। तो ये एक्सपेक्टेड कैश फ्लो आ जाता है। दूसरा मेथड भी समझ आ गया। ये दोनों मॉड्यूल के ही फार्मूलाज़ हैं। मेरे नहीं है। आइए फिर पढ़ते हैं। पहला सवाल। XYZ लिमिटेड इज़ करेंटली अंडर सीवियर फाइनेंसियल डिस्ट्रेस। बहुत भयंकर डूबने के चांसेस चल रहे हैं। ठीक है? अ वैल्यूएशन एनालिस्ट एस्टेट द नॉर्मल डीसीएफ वैल्यू ऑफ द फर्म एस 500 देखो वह कहता है नॉर्मल डीसीएफ है अगर कंपनी सर्वाइव कर जाती है यानी अगर कंपनी सर्वाइव कर जाएगी तो यह सर्वाइवल वाली 35:51 वैल्यू है कि अगर कंपनी नहीं डूबी तो 500 करोड़ की तो कंपनी फिर भी है बट वो यह कहता है कि 35% प्रोबेबिलिटी है कंपनी में फेल तो यानी प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस कितनी दे रहा है आपको 35% चांसेस दे रहा है प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस के और तो फिर एक बात बताओ अगर प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस 35% है तो प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सर्वाइवल कितनी हो गई? 65% हो गई। भाई ऑब्वियस सी बात है अगर 35% डूब जाएगी तो 65% बच भी जाएगी। ठीक बात है। इन केस ऑफ़ लिक्विडेशन द रियलाइज़बल डिस्ट्रेस वैल्यू इज़ एस्टेटेड टू बी 180 करोड़। मतलब अगर कंपनी डूब गई यह तो वैल्यू ये तो सर्वाइवल वैल्यू ऑफ़ द फर्म है। यह डिस्ट्रेस वैल्यू ऑफ़ द फर्म है। मतलब अगर कंपनी बुरे से बुरे हालात में भी बिकी तो 180 करोड़ की बिकेगी। और अगर कंपनी अच्छे हालात में बिकी तो 500 करोड़ की हो जाएगी। और प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सर्वाइवल तो हमें पता ही लग गया था। हमने खुद ही बता दिया था। वह कहता है एक्सपेक्टेड वैल्यू ऑफ द फर्म कौन सा है? तो, यह वाला फार्मूला लगेगा। क्यों? क्योंकि उसने आपको वैल्यू ऑफ फर्म सर्वाइवल की और प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सर्वाइवल, वैल्यू ऑफ़ डिस्ट्रेस एंड प्रोबेबिलिटी ऑफ़ 36:51 डिस्ट्रेस सब पता है। तो, आप बस इसे मल्टीप्लाई कर दो। बड़ा आसान क्वेश्चन है। पर सोचो अगर नहीं पढ़ा होगा, तो मार्क्स चले जाएंगे। आपको पता है 500 करोड़ आने के चांसेस हैं 65% और 180 करोड़ आएंगे इसके चांसेस हैं 35%। बस इसे सॉल्व कर दो। इसे सॉल्व करके आपने इन दोनों को सॉल्व कर दिया। टोटल कर दिया। यह 388 करोड़ वैल्यू हो गई। समझ आ गया? दो मार्क का क्वेश्चन आएगा। अगर आएगा तो दो मार्क अब आप प्राप्त कर लोगे। अब आपको भूलोगे नहीं आप। याद रहेगा आपको। ये वाला फार्मूला बस आपको याद रखना है कि वैल्यू ऑफ़ सर्वाइवल * प्रोबेबिलिटी ऑफ़ सर्वाइवल, वैल्यू ऑफ़ डिस्ट्रेस इंट प्रोबेबिलिटी ऑफ़ डिस्ट्रेस। बस ये फार्मूला लिख के रख लेना कहीं। चलो, आगे पढ़ते हैं। और एक क्वेश्चन पढ़ते हैं। इसमें मैंने काफी सारे अच्छे-अच्छे क्वेश्चन बनाए हैं। ध्यान देना। वो ये कहता है, LMN लिमिटेड इज़ फाइनेंसियली स्ट्रेस्ड कंपनी। यह भी फाइनेंसियली स्ट्रेस्ड है। एज़ पर दी वैल्यू्यूएशन। इफ द फर्म सर्वाइव इट्स वैल्यू इज़ दिस। एंड इफ द फर्म फेल्स तो इसकी वैल्यू इतनी है। तो ये तो सिंपल हो गया। यह खुद कर लेना। होमवर्क हो गया। ये तो सेम ही क्वेश्चन हो गया। अरे भैया सेम ही क्वेश्चन हो गया दोबारा। सिमिलर है बस प्रैक्टिस क्वेश्चन है। तो ये होमवर्क में कर लेना। 37:54 आइए अब बात करते हैं। एबीसी हैज़ द प्रोवाइडेड दी फॉलोइंग इनेशन फॉर वैल्यू्यूएशन। वो कहता है एफसीएफएफ ईयर वन के लिए 40 है। चलिए अगर मुझे एफसीएफएफ ईयर वन के लिए पता है तो मैं एक काम करूं जब भी हमें ईयर बेस्ड डाटा मिलता है हम एक टेबल बनाना स्टार्ट कर सकते हैं। जी हां सर एक नंबर लाइन बना लेते हैं। चलो वो मुझे कहता है कि हमें एफसीएफएफ फर्स्ट ईयर का पता है। एफसीएफएफ फर्स्ट ईयर का कितना है? वो कहता है एफसीएफएफ वन जो है वो 40 है। ठीक है? फिर वो अलग-अलग पीरियड की ग्रोथ रेट देने लग जाएगा। फिर वो हमें अलग-अलग पीरियड की ग्रोथ रेट देने लगेगा। क्या बोलता है? पढ़ो। वो कहता है देखो जी हमारी ग्रोथ रेट फॉर द नेक्स्ट 3 इयर्स इज़ 10%। ठीक है? यानी अच्छी खासी ग्रोथ हो रही है तो फिर कंपनी डिस्ट्रेस में क्यों है? अगर इतनी ग्रोथ हो रही है तो फिर आपके मन में यही थॉट आ रहा होगा फिर डिस्ट्रेस में कहां है? अच्छी खासी। तो इतनी तो अच्छी कुशल मंगल कंपनियां नहीं कमाती। और वो कहता है बाद में स्टेबल ग्रोथ रेट आ जाएगी 5% की। तो यानी शुरू में 3 साल तक 38:58 ग्रोथ रेट है 10% 10% 10% और फिर उसके बाद ग्रोथ रेट है 5% फॉर एवर ठीक है तो हम एफसीएफएफ वन एफसीएफ टू एफएफसी एफसीएफ थ्री निकाल लेंगे फिर उसके बाद इसकी टर्मिनल वैल्यू निकाल लेंगे यानी यहां पे उसकी टर्मिनल वैल्यू थ्री भी निकालनी पड़ेगी इसमें डिफरेंट क्या है इसमें नई बात क्या है इसमें वैल्यू ऑफ डे भी गिवन है और यह फर्म की वैल्यू है। तो, एक बात बताओ, जब मैं इसे सॉल्व करूंगा, सुनना पहले अच्छे से। जब मैं इसकी कंपाउंडिंग कर इसको प्रेजेंट वैल्यू निकालूंगा, तो यह मेरे पास वैल्यू ऑफ़ फर्म आएगी। फिर वैल्यू ऑफ़ फर्म में से अगर मैं वैल्यू ऑफ़ डेप्ट हटा दूंगा, तो वैल्यू ऑफ़ इक्विटी आएगी। अग्री बेटा, पहले फर्म की वैल्यू निकलेगी। फिर फर्म की वैल्यू में से आप डेप्ट की वैल्यू हटाओगे, तो इक्विटी की वैल्यू आएगी। वही वो कर रहा है। पहले फर्म की वैल्यू पूछ रहा है, फिर इक्विटी की वैल्यू पूछ रहा है। फिर वो कहता है इसके आंसर को जो शेयरहोल्डर वैल्यू एनालिसिस है उसके फॉर्मेट में लिखो। एसवीए के फॉर्मेट में लिखो। यह मुझे पढ़ाना है। आपको यही बात नहीं बतानी है कि शेयरहोल्डर वैल्यू एनालिसिस क्या होता है? मैं आपको एक बात 39:59 याद दिलाता हूं। आपने क्लास के अंदर दो चीजें बहुत अच्छे से पढ़ी हैं। कौन-कौन सी? आपने ईवीए पढ़ा है, इकोनॉमिक वैल्यू एडेड और एमवीए भी पढ़ा है। मार्केट वैल्यू एडेड भी पढ़ा है। बट शेयर होल्डर वैल्यू एडेड के बारे में बहुत डिटेल में नहीं पढ़ा है। शेयरहोल्डर वैल्यू एनालिसिस के बारे में। तो वो हम अब कवर कर रहे हैं। हम अगले टॉपिक पर आ गए हैं। क्या वो मॉड्यूल में है? हां बेटा इस सब के बाद मॉड्यूल में बिल्कुल एसवीए का टॉपिक है। मैं एक ब ढूंढ देता हूं। पीछे होगा आगे होगा। ये रहा शेयरहोल्डर वैल्यू एनालिसिस। यह एक टॉपिक है। वो यही बोलता है कि ईवीए और एमवीए तो आपने पढ़ लिया। आपने एसबीए नहीं पढ़ा तो एसबीए के बारे में बात कर रहा है वो। अब मैं आपको एसवीए का टॉपिक पढ़ा रहा हूं। सर यह टॉपिक हमारे कोर्स में है। बेटा मुझे नहीं पता आपके मॉड्यूल में तो है। अब आपने पढ़ना है नहीं पढ़ना वह आपकी इच्छा है। मैं क्या कर सकता हूं? थ्योरेटिकली तो हम पढ़ाते हैं बट प्रैक्टिकली भी हम दो-द क्वेश्चन पढ़ लेते हैं। जिन बच्चों ने मेरी नई वाली थ्योरी क्लासेस पढ़ी होंगी उन्हें पता है मैंने थ्योरी में इसके प्रैक्टिकल भी कवर कराए 41:00 हुए हैं। मैंने थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल भी कवर कराए हुए हैं नए वाले बैच में। देखिए तो यह उसने इनफैक्ट इसका एक न्यूमेरिकल इधर डिस्कस भी किया है। एक न्यूमेरिकल उसने इसका डिस्कस भी किया है। तो क्या वह क्वेश्चन मैं नहीं दे सकता। आपको क्या पता आपके एग्जाम में यही आ रहा हो। मैं कैसे बोल सकता हूं? सर पढ़ाओ यार हमें डराओ मत। चलो इधर देखो आपने क्या करना है आपने अलग-अलग एफसीएफएफ निकाल ली टर्मिनल वैल्यू अभी तक तो आपको अंतर भी नहीं लग रहा था ईमानदारी से बताऊं मैंने आपके आगे एसवीए एसवीए करना स्टार्ट किया तो आपको डर लगने लगा आपको पहले दो पार्ट तक तो कोई डर भी नहीं लग रहा था आपको लग रहा था ये तो मैं खुद ही कर दूंगा क्या करना है मेरे को एफसीएफ वन पता है टू निकाल लूंगा थ्री निकाल लूंगा फोर निकाल के ऊपर ko - g करके टर्मिनल वैल्यू निकाल लूंगा इन सबको उठाके डिस्काउंट कर दूंगा टोटल वैल्यू निकाल लूंगा वैल्यू ऑफ़ फ़र्म निकालूंगा उसमें से वैल्यू ऑफ़ डेप्ट माइनस कर दूंगा वैल्यू ऑफ़ इक्विटी आ जाएगी सब बात ख़तम यही करना है। यही करना है। कुछ ज्यादा लॉजिक नहीं चलाने। सुनिए हमने क्या करना है? इसको 10% बढ़ाओगे तो ये 44 हो जाएगा। इसको 10% बढ़ाओगे तो ये 48.4 हो जाएगा। फिर इसकी टर्मिनल वैल्यू निकालोगे 42:02 तो वो तो आपको पता ही है 48.4 में हम 5% और ऐड करेंगे। फिर इधर KO - 5% करेंगे। जो भी करना है हमें। KO पता ही होगी क्वेश्चन में। KO WCC 14% की है। तो यह निकल आएगी। फिर हम क्या करते हैं? इसके बाद इसके बाद हम इन सब की प्रेजेंट वैल्यू निकालते हैं। प्रेजेंट वैल्यू निकाल लेते हैं। ठीक है जी। एक बच्चे ने कोई बहुत तगड़ी भांग खाई हुई है। कह रहा है इसमें एच मॉडल लगा सकते हैं। देखो बेटा जिन भी मुझे पता है मैं क्लास रात को लेट ले रहा हूं। मेरी भी मिस्टेक है। बट हो सके तो जिन दिन क्लास होती है उन दिन सही रहे। ठीक है ना? ठीक है बेटा। कम से कम उन दिन सेवन मत करो ना गलत चीजों का। चलिए। कह रहा है इसमें एच मॉडल लगा दें। अलग कुछ भी मुझे पता है मुझे 9:00 बजे के बाद क्लास नहीं लेनी चाहिए। कुछ बच्चे सेट हो जाते 43:03 हैं। ध्यान दो। इधर ध्यान दो। निकम्मा पढ़ाई कर लो। पहले सीए तो बन लो। ये हमने पहले अलग-अलग इयर्स का प्रेजेंट वैल्यू निकाल दिया। यह सॉरी एफसीएफ वन निकल गया। एफसीएफ टू निकल गया। एफसीएफ थ्री निकल गया। फिर टर्मिनल वैल्यू भी निकल गई। तो ये हमारी टर्मिनल वैल्यू भी हो गई। फिर हमने इन सबको डिस्काउंट करा। ईयर वन, ईयर टू, ईयर थ्री के लिए इन्हें डिस्काउंट कर दिया। ये उनकी टर्मिनल और फिर टर्मिनल वैल्यू की भी प्रेजेंट वैल्यू निकाल दी। फिर ये वैल्यू ऑफ़ फर्म आ गया। फिर वैल्यू ऑफ़ फर्म में से वैल्यू ऑफ़ डेप्ट को हटा दिया। तो यह वैल्यू ऑफ़ इक्विटी आ गया। सर, इसमें एसवीए एनालिसिस हुआ क्या? सर यह एसवीए एनालिसिस क्या होता है? हमें तो पता भी नहीं लगा। हमें तो फील भी नहीं हुआ। है ना? आपको इसलिए नहीं फील हुआ क्योंकि मैंने जानबूझ के पहला क्वेश्चन ईजी बनाया था। अब पहले क्वेश्चन में हल्का हाथ रखा जाता है बच्चे पे। मैंने कोई एडजस्टमेंट नहीं डाली थी। अब एडजस्टमेंट के साथ कराता हूं। अब स्टार्ट करें बेटा एसबीए। आप मुझसे पूछोगे कि एसबीए क्या है? तो 44:04 देखो आपका मॉड्यूल क्या कहता है? आपका मॉड्यूल ये बोल रहा है। मैं नहीं बोल रहा। वो बोलता है कि यार ये जो ईवीए है ना और मतलब इकोनॉमिक वैल्यू एडेड और मार्केट वैल्यू एडेड इन दोनों में ना गड़बड़ है। ये दोनों एक बात को पूरा नहीं बताते। यह दोनों कहीं ना कहीं गैप छोड़ देते हैं। इसीलिए उसी गैप को भरने के लिए एसवीए का कांसेप्ट आता है। एसवीए लुक्स टू प्लग इन द गैप बाय ट्वीकिंग द वैल्यू एनालिसिस टू टेक इंटू फॉर ए सर्टेन ड्राइवर्स दैट कैन एक्सपेंड दी होरजन ऑफ़ द वैल्यू क्रिएशन। तो इसमें वो कहता है कि हमें की ड्राइवर्स को यूज करना होता है। अर्निंग पोटेंशियल फ्यूचर की भी देखनी होती है और इंक्रीमेंटल कॉस्ट ऑफ कैपिटल को देखना चाहिए। मतलब कॉस्ट ऑफ कैपिटल कितनी चेंज हो रही है। देखो ईवीए वगैरह में एक पंगा है। मैं आपको समझाता हूं ईवीए एमवीए जो दोनों है वो बैकवर्ड लुकिंग है। वो क्या है? बैकवर्ड लुकिंग। वो पुराने डाटा को देख रहे हैं कि पिछले ईयर या पास्ट में हमने कितनी वैल्यू ऐड करी, कितनी मार्केट वैल्यू ऐड करी। मतलब बुक वैल्यू से कितनी ज्यादा मार्केट वैल्यू पे इक्विटी बिक पा रही है। हम पास्ट को एनालाइज़ करते हैं। बट 45:04 क्या पास्ट हमेशा फ्यूचर प्रेडिक्ट कर सकता है? पास्ट क्या हमेशा? नहीं। तो एसवीए उसी गैप को भर रहा है। एसबीए फ्यूचर लुकिंग हो रहा है। एसवीए क्या कर रहा है? फ्यूचर लुकिंग हो रहा है। तो इसलिए एसवीए में क्या करते हैं? पढ़िए जरा। मैं इसको अपने नोट्स से ही पढ़ाता हूं। मैंने आपके लिए इसमें नोट्स भी लिखे हैं थोड़ा नीचे जा के। यहां पर लिखे मैंने पेज नंबर थोड़ा नीचे आ जाओगे मिल जाएंगे देख लेना पेज क्या है यह [नाक से की जाने वाली आवाज़] एसवीए का एनालिसिस है बिफोर एसवीए वी स्टडीड ईवीए एंड एमवीए एसवीए बिल्ट ऑन अ गैप लेफ्ट बाय ईवीए मतलब इन्होंने जो गैप छोड़ दिया था एसबीए वहां पे बनाया गया इट प्लग्स द गैप बाय एक्सप्लसिटली ब्रिंगिंग दी फॉरवर्ड लुकिंग वैल्यू ड्राइवर रेदर देन रिलाइंग ऑन दी पास्ट अकाउंटिंग प्रॉफिट बेटा ईवीए की दिक्कत क्या है कि ईवीए पास्ट पे देखता है ये सब आपका थ्योरी क्वेश्चन है ये मैंने थ्योरी में पढ़ा रखी है थ्योरी बुक उठा लेना मिल जाएंगे ये सब कि ईवीए पास्ट को देखता है। एसबीए कहता है रुको पास्ट को मत देखो फ्यूचर को देखो। तो यह कुछ की ड्राइवर्स आपको देता है। यानी आपको किन बारे में सोचना है वो बताता है। उनके तीन 46:07 मेन ड्राइवर्स हैं। वो कहता है एक तो अर्निंग पोटेंशियल को देखो कि फ्यूचर में हम कितना कमा सकते हैं? यानी फ्री कैश फ्लो टू फर्म या फ्री कैश फ्लो टू इक्विटी कितना कमा सकते हैं? इन्वेस्टमेंट कहां-कहां कर सकते हैं? और कॉस्ट क्या है? मतलब फ्यूचर में हमारे केओ क्या होगा? केई क्या होगी? उसको सोचो। पास्ट की कॉस्ट को मत देखो। फ्यूचर की कॉस्ट को देखो। पास्ट की अर्निंग को मत देखो। फ्यूचर की अर्निंग को देखो। यह कहता है एसबीए। अब पढ़ना कि एडजस्टमेंट कहां आएगी। पहले आप फ्यूचर कैश फ्लोस निकाल लो। तो सर ये तो हमने निकालने सीख लिए कि फ्यूचर कैश फ्लो निकाल लो। एफसीएफएफ वन, एफसीएफएफ टू, एफसीएफ थ्री और फिर टर्मिनल वैल्यू। कि भाई अगर पहले साल, दूसरे साल, तीसरे साल ग्रोथ पता है, बाद में फिर परपेचुअल ग्रोथ पता है तो फिर हम टर्मिनल वैल्यू निकाल लेंगे। यानी ये वन पीरियड, टू पीरियड और यहां पर टर्मिनल वैल्यू यानी एफसीएफएफ वन, एफसीएफएफ2, एफसीएफएफ थ्री और फिर टर्मिनल वैल्यू। सर ये सब हम कर लेंगे। हमें कोई दिक्कत नहीं है यहां तक। ये हमें समझ आ गया। 47:10 ठीक है जी। अब डिस्काउंट दिस कैश फ्लो विद डब्ल्यूएससीसी। सर, इन सबको डिस्काउंट करो। यानी इन सबको प्रेजेंट वैल्यू पे लाओ। सर, यह तो पुराना ही मेथड हो गया ना। इसमें फिर नया क्या है? अब आएगा नया। यहां तक आपको समझ आ रहा है? यहां तक आप बचपन में पढ़कर आए हो। बोलो हां या ना? सर पता है। फिर वह कहता है कि ऐड दी टर्मिनल वैल्यू टू फाइंड दी प्रेजेंट वैल्यू। यानी यहां पे प्रेजेंट वैल्यू निकाल दो। सर आप पका रहे हो। ये सब तो हमें पता है क्या नया कब आएगा? अब आएगा। देखिए ऐड दी करंट मार्केट वैल्यू ऑफ नॉन कोर एसेट। आप इसमें नॉन कोर एसेट्स की मार्केट वैल्यू को ऐड करो। मार्केटेबल इन्वेस्टमेंट्स को ऐड करो और अगर कोई वैल्यू ऑफ़ डेप्ट है तो उसे डिडक्ट करो और तब आपके पास वैल्यू ऑफ़ इक्विटी आएगी। यानी एसवीए में सिर्फ एक स्टेप बदलता है। क्या बदलता है? कि इक्विटी की वैल्यू निकालने से पहले हमें जो नॉन कोर एसेट्स हैं जो 48:13 हमारे बिजनेस में यूज नहीं हो रहे लेकिन हमारे पास हैं। जैसे मैं एक एग्जांपल लूं मैं ट्यूटर हूं। मैं पढ़ाता हूं। अब मान लो मेरे पास कोई बिल्डिंग है। अब वो मेरे को पढ़ाने में मदद नहीं कर रही। मैं तो उसे किराए पे चढ़ाया हुआ है। तो मेरा नॉन कोर एसेट है। नॉन बिज़नेस एसेट है। पर उसे भी इक्विटी की वैल्यू्यूएशन में ऐड करो क्योंकि वो बिज़नेस ने ओन की है। समझ आया आपको? नॉन कोर एसेट को भी ऐड करो और मार्केटेबल इन्वेस्टमेंट्स को भी ऐड करो। तो अगर आपने ऐसी इन्वेस्टमेंट खरीदी है जो मार्केटेबल हैं कि भ शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट्स वगैरह की हुई है जब दिल करेगा उन्हें बेच देंगे उन्हें भी ऐड करो क्योंकि वो भी आपकी कंपनी की ओनरशिप में अगर हैं तो कंपनी की ओनरशिप में उसे भी ऐड करो और फिर उसमें से वैल्यू ऑफ़ डेप्ट डिडक्ट करो। यानी सर ये बस डी पॉइंट को छोड़कर बाकी सब हमें आता था। सच बताओ हां या ना? यानी सर डी पॉइंट को छोड़कर बाकी सब तो हमें भी आता था कि एफसीएफएफ निकालना है। फिर उसकी एंड में टर्मिनल वैल्यू निकालनी है। फिर उन सब की प्रेजेंट वैल्यू निकालनी है। इससे वैल्यू ऑफ़ फर्म आ जाएगी। लेकिन वैल्यू ऑफ़ फर्म जो आएगी, यह तो ऑपरेशनल आएगी ना। यह तो वो वैल्यू ऑफ़ फर्म आई, जो बिज़नेस में लगे हुए एसेट्स हैं, उनकी वैल्यू क्या है? लेकिन बिज़नेस के पास ऐसे एसेट्स भी तो होंगे जो बिज़नेस में लगे 49:11 ही नहीं है। अभी उन्हें भी ऐड करो। ये नया पॉइंट है। बस ये डी पॉइंट नया है। बाकी कुछ भी नया नहीं है। पर एग्जाम में जब आएगा तो इस एक पॉइंट की वजह से ही तो पूरे चार मार्क्स जाएंगे क्योंकि आपको इसकी एडजस्टमेंट नहीं समझ आएगी। गलती तो एक पॉइंट पे ही होगी ना बेटे। सब पे थोड़ी ना होगी। बाकी तो आप कर ही लोगे। ये सारा तो आप कर ही लोगे। वो कहता है टर्मिनल वैल्यू ऑफ़ द फर्म निकाल लो। फर्म के अंदर आप नॉन करंट एसेट और मार्केटेबल इन्वेस्टमेंट्स को भी ऐड कर दो और फिर वैल्यू ऑफ़ द डे को माइनस कर दो। क्या यह बात समझ आ गई आपको? देखिए, इसके क्वेश्चन देखते हैं एक दो और फिर आगे की बात करते हैं। क्वेश्चन नंबर सिक्स देखो। यह थोड़ा एडवांस क्वेश्चन है। थोड़ा सा एक लेवल बढ़कर क्वेश्चन है। पढ़िए। वो यह कहता है कि एक कंपनी है। वह हमें कुछ समझा रही है। हमने कहा बताओ भैया समझाओ जरा जल्दी जल्दी। वह कंपनी हमें कह रही है कि ऐसा है एफसीएफएफ वन जो है पहले साल की कमाई है वह है 60 करोड़ यानी फर्स्ट ईयर में हम कितना कमाएंगे 50:13 एफसीएफएफ वन होगा 60 करोड़ का ठीक है ग्रोथ रेट फर्स्ट टू इयर्स में 8% है यानी पहले 8% है दोबारा से 8% है अगर दोबारा से 8% है तो एफसीएफएफ टू कितना होगा 64.8 करोड़ हो जाएगा ठीक है? यानी हमें पहले 2 साल की एफसीएफएफ पता लग गई। ठीक है सर। अब उसके बाद कहता है ग्रोथ रेट स्टेबल हो जाएगी। उसके बाद ग्रोथ रेट 6% पे स्टेबल हो जाएगी फॉर एवर के लिए। तो अब मैं यहां पे टर्मिनल वैल्यू निकाल सकता हूं। टीवी2 कैसे? 64.8 में 6% की ग्रोथ और k और WCC कितना था? 13% तो 13% - 6% तो टर्मिनल वैल्यू भी आ जाएगी। अब आप क्या करोगे? अब सर हम इन तीनों को प्रेजेंट वैल्यू निकाल कर ऐड कर देंगे। तो ये प्रेजेंट वैल्यू आ गई। यहां तक तो मैं ना भी सिखाता मैं ना भी बताता तो भी आप 51:13 पहुंच जाते। बोलो हां या ना? हां सर। अब इधर पहुंच गए। अब इसमें वो कहता है नॉन ऑपरेटिंग एसेट है हमारे पास। तो अब यही बस एक एडजस्टमेंट है कि यह सब जब आप निकाल लोगे आप वैल्यू ऑफ दी कोर ऑपरेटिंग निकाल लोगे। यह देखो आपने यहां पे एंटरप्राइज की वैल्यू निकाल ली। अब इस एंटरप्राइज की वैल्यू में नॉन ऑपरेटिंग एसेट्स को ऐड करो। नॉन ऑपरेटिंग एसेट्स कितने के थे हमारे? 25 करोड़ के। उन्हें ऐड करो। यानी जो आपके पास वैल्यू ऑफ़ फर्म आ रही है, वैल्यू ऑफ़ फर्म आ रही है कितनी? 872। यह जो 872.17 वैल्यू ऑफ फर्म आ रही है, इसमें आप वैल्यू ऑफ नॉन कोर एसेट और मार्केटेबल एसेट अगर होंगे अगर मार्केटेबल इन्वेस्टमेंट होती तो वो भी ऐड कर देते तो जो वैल्यू आपके पास आती वो आती 897.197 52:14 अब उसमें से वैल्यू ऑफ़ डेप्ट माइनस करो तो आपके पास एस शेयर होल्डर वैल्यू आ जाएगी। 52:31 यानी ये वैल्यू ऑफ़ इक्विटी आ जाएगी। बट इसी को शेयरहोल्डर वैल्यू एनालिसिस बोलते हैं। इसी को शेयरहोल्डर वैल्यू एनालिसिस बोलते हैं। क्या एडजस्टमेंट है? मतलब अगर मैं आपको बोलूं कि पिछले 15 मिनट के डिस्कशन से एक लाइन आपको याद करके जानी है एग्जाम में वो क्या है कि पूरी कैलकुलेशन में अगर मुझे नॉन कोर एसेट या मार्केटेबल इन्वेस्टमेंट गिवन होगी तो वो भी मैं वैल्यू ऑफ़ इक्विटी में ऐड करूंगा। वो भी वैल्यू ऑफ़ इक्विटी का पार्ट बनेंगे। नॉन कोर एसेट और मार्केटेबल सिक्योरिटी। बस ये लाइन लिखोगे तो बात बन जाएगी। चलिए फिर अगले मेथड पे आ जाते हैं। अगला मेथड होता है फर्स्ट शिकागो मेथड। यह कोई नई बात नहीं है। यह अब पता है क्या है? एग्जाम बना दूंगा मैं पर मैं लिख दूंगा जी उसमें फर्स्ट शिकागो मेथड। यह देखो अगर मैं इधर लिखूं शिकागो ये आपकी बुक में डिस्कस्ड है। ये डिस्कस्ड है। फर्स्ट शिकागो मेथड। अब मैं आपको बोलूं बेटा फर्स्ट शिकागो मेथड से कर दो। आपको दिक्कत पता है क्या है? आता हुआ क्वेश्चन भी आप खराब कराओगे। आपको आप क्वेश्चन के नाम से इतना डर जाओगे 53:32 कि यह कुछ नई बात आ गई। यह कुछ भी नहीं है बेटा। सिनेरियो वैल्यू्यूएशन है। सिंपल सिनेरियो वैल्यूएशन है। आपको मल्टीपल सिनेरियोस दिए होंगे। हर सिनेरियो की वैल्यू दी होगी। उससे मल्टीप्लाई करके प्रोबेबिलिटी निकाल के मल्टीप्लाई करके आंसर करना है। कुछ भी नहीं करना। मतलब अगर वो नाम अब मैं आपको एक बताऊं इंस्टट्यूट आपसे खेल कैसे रहा है? पहले वो क्वेश्चन देता था और बच्चा कॉमन सेंस से क्वेश्चन कर आता था। अब वो नाम देने लग गया आजकल। एक बात बताओ मे 2026 के एग्जाम में अगर वो एच मॉडल नहीं कहता वर्ड ना यूज करता तो शायद बच्चा लीनियर इंक्रीज डिक्रीज से सेम क्वेश्चन कराता सॉल्व। पर अब वो नाम लिख देता है ना तो बच्चा कंफ्यूज हो जाता है कि यह कौन सा नाम लिख दिया भाई मतलब मूर्खता की तरफ बढ़ रहे हैं कि नाम याद होना चाहिए फर्स्ट शिकागो मेथड ये क्या बोलता है कि अलग-अलग सिनेरियो दिए होंगे हर सिनेरियो की वैल्यू्यूएशन करो और उसे प्रोबेबिलिटी से मल्टीप्लाई करो और वेटेड एवरेज वैल्यू निकालो फर्म की बस ये इतना सा देखो आपके मॉड्यूल में बस इतना सा डिस्कस्ड है ये इतना मॉड्यूल में डिस्कस्ड है चार लाइन में मतलब क्या है इसका इसका मतलब है अलग 54:32 अलग-अलग सिनेरियो दिए होंगे। सिनेरियो की अलग-अलग वैल्यू निकलेगी। वैल्यू को प्रोबेबिलिटी से मल्टीप्लाई कर देना। खुद ये कह रहा है इन सिचुएशंस को प्रोबेबिलिटी से मल्टीप्लाई कर देना और फिर वेटेड एवरेज वैल्यू निकाल देना। बस यही करना है बेटे। चलो मैं अभी करा देता हूं। देखो फर्स्ट शिकागो मेथड के क्वेश्चन देखिए। अवेंचर कैपिटलिस्ट एनालिस इज़ इवैलुएटिंग अ स्टार्टअप। वो कहता है जी हमारे पास चार चार साल के आउटकम है। देखो अगर वह कहता है बेस्ट केस हुआ तो यह प्रोबेबिलिटी है। इतनी वैल्यू होगी और वर्स्ट केस में इतनी वैल्यू होगी। ठीक है? एडिशनल इन डिस्काउंट रेट है 20% का और प्रेजेंट वैल्यू फैक्टर एट द रेट ऑफ 20% है फॉर फोर इयर्स इतना। वह कहता है जी एक्सपेक्टेड फ्यूचर इक्विटी वैल्यू यूजिंग फर्स्ट शिकागो मेथड और प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ इक्विटी एंड इसकी एप्लीकेशन क्या है? ये तो थ्योरी में कवर हो गया। तो इसे छोड़ देते हैं। थर्ड पार्ट छोड़ देते हैं थ्योरी का है। ठीक है जी। सुनिए। हां। एडवांस कैपिटल वेस्टिंग में भी सेम टॉपिक कवर होता है। पर मेरा काम है कि मैं आपको हर नाम पढ़ा के चलूं। सुनो। हमें यह बात पता है कि हमारे पास तीन केस थे। 55:33 तीनों केस की प्रोबेबिलिटी पता थी। तीनों केस की इक्विटी वैल्यू पता थी। मल्टीप्लाई करो तो ये एक्स वेटेड इक्विटी वैल्यू आ गई। वेटेड इक्विटी वैल्यू को टोटल करो। तो ये टोटल एक्सपेक्टेड इक्विटी वैल्यू आ गई। यहां तक कोई डाउट तो नहीं है? जी? यानी सर ये तो नाइंथ क्लास का बच्चा भी कर लेगा कि प्रोबेबिलिटी से इंटू करके वेटेड एवरेज निकालनी है। वेटेड वैल्यू निकालनी है। निकाल दी। अब ये जो वैल्यू है इस वैल्यू की प्रेजेंट वैल्यू निकालो। यानी इसे डिस्काउंटिंग फैक्टर से इनू करो। सर, यह क्यों कर रहे हैं? यह बताओ। देखो क्योंकि क्वेश्चन आपको यह कहता है। पढ़ो सही क्वेश्चन को लैंग्वेज को। दी एनालिस्ट हैज़ एस्टेटेड द फॉलोइंग पॉसिबल बिज़नेस आउटकम आफ्टर 4 इयर्स। यानी ये जो वैल्यूज़ हैं ये 4 साल बाद की हैं। तो यानी ये जो एक्सपेक्टेड वैल्यू भी निकल रही है, ये ज़ीरो पीरियड पे नहीं निकल रही। मेरी बात को समझो। 1 साल, 2 साल, 3 साल और ये 4 साल। 4 साल के बाद वैल्यू आ रही है 525। इधर क्या था हमें कुछ नहीं पता। पहले 3 साल का कुछ नहीं पता। वो सीधा फोर्थ ईयर के एंड की वैल्यू दे रहा है। तो क्या वो फोर्थ ईयर एंड की वैल्यू आज की वैल्यू 56:33 नहीं सर। तो उसे पहले प्रेजेंट वैल्यू पे लाऊंगा तभी तो आज की वैल्यू आएगी इक्विटी की। समझ आया आपको? उसे पहले आज की वैल्यू पे लाना पड़ेगा मुझे। तो मैं क्या करूंगा? मैं इस वैल्यू को आज की वैल्यू पे कन्वर्ट करूंगा। प्रेजेंट वैल्यू पे। तो मैंने उसे प्रेजेंट वैल्यू फैक्टर से इंटू किया। वो आज की वैल्यू बन गई 253.05। अच्छा अगर मुझे इसमें नंबर ऑफ इक्विटी शेयर्स पता होते तो मैं क्या कर सकता था? इसे नंबर ऑफ इक्विटी शेयर्स से डिवाइड करके वैल्यू पर इक्विटी शेयर भी निकाल सकता था। मैं पर शेयर भी निकाल सकता था अगर मुझे क्वेश्चन में नंबर ऑफ शेयर्स पता होते। इस क्वेश्चन में नहीं पता वो एक अलग बात है। क्लियर मेरी बातें? इज इट ऑल एब्सोलुटली क्लियर? बताइए मुन्ना। आप कह रहे हैं जी हां सर। हमें यह बात भी समझ आ गई है अच्छे से। फिर यह एक और क्वेश्चन है। इसमें मैंने एक छोटी सी एडजस्टमेंट और डाल दी है कि डेप्ट की वैल्यू भी दे दी है। तो बस वैल्यू ऑफ़ डेप्ट वैल्यू ऑफ़ इक्विटी 57:35 में से माइनस करनी है। एक एडजस्टमेंट और है। यानी आप क्या करोगे? देखो आप एंटरप्राइज की वैल्यू दिखाओगे। उसमें से डेप्ट की वैल्यू माइनस करोगे। यानी क्वेश्चन में आपको एंटरप्राइज की वैल्यू गिवन है। उसमें से डेप्ट की वैल्यू माइनस करो। तो इक्विटी की वैल्यू आ जाएगी। फिर इक्विटी की वैल्यू को प्रोबेबिलिटी से इंटू करो। तो यह एक्सपेक्टेड वैल्यू ऑफ इक्विटी आ जाएगी। लेकिन यह कितने साल बाद की है? क्वेश्चन ने बोला होगा यह 5 साल बाद की है। तो यह तो 5 साल बाद की वैल्यू है। तो फिर उसकी प्रेजेंट वैल्यू निकालो। आज की डेट पे ये आज की वैल्यू आ गई और उसे नंबर ऑफ शेयर्स से डिवाइड कर दो। तो पर शेयर की वैल्यू आ जाएगी। ये आएगा एग्जाम में अगर मुझे लगता है आएगा तो ये आना चाहिए। इसमें थोड़े-थोड़े स्टेप ज्यादा हैं। आसान है। सब कुछ आसान है। और वैसे भी कोई और करा रहा हो तब तो वैसे भी आसान होता है। दिक्कत एग्जाम आप यही क्वेश्चन घर पर आकर करोगे हो जाएगा। एग्जाम में नहीं होगा क्योंकि एग्जाम में आप ना थोड़ा प्रेशराइज्ड होते हो। आपका ब्रेन फोक करता है। आपका ब्रेन कहता है अरे ये क्या हो गया? ये क्या हो गया मेरे साथ? मैंने तो ये बात ही नहीं पढ़ी कभी ऐसे-ऐसे नाम सुन के। 58:37 ठीक है? एक बच्चा कह रहा है क्या हम सर इसे अलग-अलग पीवी निकाल कर अलग-अलग करके भी कर सकते हैं? मतलब उसे ये लग रहा है कि ये फर्स्ट ईयर, सेकंड ईयर, थर्ड ईयर, फोर्थ ईयर की वैल्यू है। नहीं बेटा ज़ीरो मिल जाएगा। यह फर्स्ट, सेकंड, थर्ड, फोर्थ ईयर की वैल्यू नहीं है। यह कंबाइंड वैल्यू एट द एंड है। यानी यह 5 साल बाद की वैल्यू दे रहा है आपको। यानी वो आपको 1, 2, 3, 4 5 अलग-अलग ईयर की वैल्यू नहीं दे रहा बेटा। वो पांचव साल की ही एक्स अलग-अलग सिचुएशंस की वैल्यू दे रहा है। आप गलत इंटरप्रेट कर रहे हो बेटा क्वेश्चन को। बाकी सब क्लियर है मेरे साथ? यहां तक बिल्कुल ठीक-ठाक पहुंच गए हैं। 59:15 अच्छा आप ये कह रहे हो कि आप बच्चा ये कह रहा है कि सर मैं डेट को भी प्रोबेबिलिटी से इंटू कर दूं। वैल्यू को भी प्रोबेबिलिटी से इंटू कर दूं और फिर उन दोनों को माइनस करूं मैं तब भी ज़ीरो ही दूंगा। क्योंकि मुझे क्वेश्चन में डेट के आगे प्रोबेबिलिटी पता नहीं है। तो मैं कैसे मान लूं कि ये प्रोबेबिलिटी इधर के लिए सेम है। मैं फिर भी ज़ीरो ही दूंगा क्वेश्चन में। चाहे आंसर बाय डिफॉल्ट सेम आ रहा हो लेकिन मैं जीरो ही दूंगा आंसर में। अब समझ आ रहा है आपको? मैंने क्या कहा? कि आप वो काम करने की कोशिश करो जो क्वेश्चन में कहा नहीं है। ठीक है ना? देखो जो क्वेश्चन में लिखा है हमें उसी इंफॉर्मेशन के साथ स्टिक करना है। हमें क्वेश्चन के अंदर चेंजज़ नहीं करने। ठीक है? बोलो बेटा ये बातें क्लियर है? समझ आ गया क्वेश्चन? नेक्स्ट टॉपिक पे चलें। ठीक है? नेक्स्ट टॉपिक आता है नॉन ऑपरेटिंग कोर एंड एंटरप्राइज वैल्यू। आप ध्यान दीजिएगा। मैंने इसके बारे में क्लास के अंदर फार्मूला लिखवाया हुआ है। मैं आपको अपनी क्लास का फार्मूला भी दिखा देता हूं जो मैंने क्लास के अंदर लिखवाया हुआ है। आप रिकॉल कर पाओगे। याद करो ये फार्मूला लिखा हुआ है। कांसेप्ट नंबर अब अलग-अलग बैचेस में क्योंकि मल्टीपल बैचेस होते हैं। कांसेप्ट नंबर ऊपर नीचे हो सकता है आपका। बट ये फार्मूला आपके पास लिखा 1:00:16 हुआ होगा। मैंने ऐसे लिखवाया होगा। एंटरप्राइज़ वैल्यू बिज़नेस की वैल्यू्यूएशन करता है। पूरे इकट्ठे बिज़नेस की होल वैल्यू्यूएशन करता है। इट इज़ मोर कॉम्प्रिहेंसिव दैन इक्विटी वैल्यू्यूएशन। यह इक्विटी वैल्यू्यूएशन से ज्यादा इबोरेट वैल्यू्यूएशन करता है कंपनी की। इसमें हम क्या करते हैं? सुनो। ये फार्मूला आपको पता होना चाहिए क्योंकि मुझे अब लगता है इसका ना आंसर इसके ना प्रैक्टिकल क्वेश्चन नहीं आते। यहां तक के आते हैं लेकिन इसके आगे वाले नहीं आते। पर मुझे ऐसा लगता है कि अब इसके आगे वाले भी आने लगेंगे। मतलब फ्यूचर में आप यह देखोगे कि इसके आगे आने वाले क्वेश्चन भी अब एग्जाम में आया करेंगे। पढ़िए जरा। इस फ़ूला को पढ़िए। इसमें हम क्या कर रहे हैं? ठीक है जी? पढ़ा आपने ये फार्मूला। देखो इसमें मेन बात क्या है कि यहां तक तो आसान है फार्मूला कि इक्विटी की वैल्यू, प्रेफरेंस की वैल्यू, डेप्ट की वैल्यू प्रेफर करो कि मार्केट वैल्यू लो, मार्केट वैल्यू ना हो तो बुक वैल्यू को लो। है ना? डेप्ट इंटरेस्ट बेयरिंग होता है। है ना? जिसमें हम इंटरेस्ट दे रहे होते हैं। इसमें माइनॉरिटी इंटरेस्ट भी ऐड कर देते हैं। कैश भी माइनस कर देते हैं। इससे हमारे पास एंटरप्राइज वैल्यू या टोटल एंटरप्राइज वैल्यू आ जाती है। पर अगर क्वेश्चन में हमें मार्केटिंग मतलब बेसिकली मार्केट वैल्यू मार्केटिंग वैल्यू नहीं बोलना 1:01:18 चाहिए। मुझे मार्केट ओो ज्यादा माइनस हो गया। मतलब अगर हमें मार्केट वैल्यू ऑफ़ नॉन ऑपरेटिंग एसेट पता हो तो वो माइनस करो। उससे ऑपरेटिंग एंटरप्राइज वैल्यू आती है। उसमें से नॉन कोर एसेट्स को माइनस करो तो कोर एंटरप्राइज वैल्यू आती है। ये दो नई बातें हैं कुछ बच्चों के लिए। कुछ बच्चों ने ये वर्ड नहीं पढ़े होते कि अगर वो एग्जाम में ये मांग ले तो क्या होगा? ये फार्मूला याद होना चाहिए। फार्मूला याद है तो बहुत आसान है। बस सिर्फ वैल्यू लिखनी है और मतलब इस टेबल में आपको एग्जाम में जो क्वेश्चन आएगा वह इस टेबल में वैल्यू लिखकर आएगा। इसका 2 मिनट में जरा शॉर्ट में मीनिंग भी बता दूं। एंटरप्राइज वैल्यू मतलब पूरी कंपनी की वैल्यू। उसमें सब कुछ आ गया आपका। चाहे आपके पास ऐसे एसेट भी हो जो आप बिज़नेस में यूज़ नहीं कर रहे। उनकी भी वैल्यू आ गई। पर अगर आप ऐसे एसेट को हटा देते हो जो आप अपने बिज़नेस में यूज़ ही नहीं कर रहे। उन्हें हटा देते हो जो नॉन ऑपरेटिंग एसेट्स हैं। तो आपके पास ऑपरेटिंग एंटरप्राइज वैल्यू आ जाती है कि बिजनेस को करने की कितनी वैल्यू है हमारी। उसमें से नॉन कोर एसेट्स भी अगर आप हटा देते हो तो कोर एंटरप्राइज वैल्यू आ जाती है। देखो 1:02:19 बिजनेस के अंदर भी कुछ चीजें कोर होती हैं, कुछ नॉन कोर होती हैं। कुछ मेन काम होते हैं, कुछ अन्य काम होते हैं। तो नॉन कोर को भी हटा दो तो कोर एंटरप्राइज वैल्यू आ जाती है। ठीक है जी। वापस आते हैं अपने क्वेश्चन पे। अब इस क्वेश्चन में पूछता है वो टोटल ऑपरेटिंग एंड कोर एंटरप्राइज वैल्यू निकालो। क्या यह आपके मॉड्यूल में डिस्कस्ड है? बिल्कुल डिस्कस्ड है। अगर मैं आपके मॉड्यूल में आपको इसे पढ़वाऊं कोर वर्ड से हम ढूंढ लेते हैं। कोर एंटप्राइज वैल्यू 1:02:56 थ्यरेटिकली तो डिस्कस किया हुआ है उसने। चलो ढूंढ लेना इसमें अलग-अलग जगह पर कहीं ना कहीं कोई कुछ ऐसे टॉपिक्स भी हैं जो मैं इस चैप्टर में पढ़ाता हूं। उन्होंने किसी आगे आगे पीछे वाले टॉपिक में दिए हुए हो। मिल जाएगा आपको अगर आप मॉड्यूल में ढूंढना चाहेंगे तो मैं 2 मिनट बाद ढूंढ भी दूंगा। पहले क्वेश्चन करा दूं फ्लो बना हुआ है अभी। ठीक है जी। देखिए अगर मुझे यह पता है कि मार्केट कैप कितनी है और इंटरेस्ट बियरिंग डे भी पता है, माइनॉरिटी इंटरेस्ट भी पता है और कैश भी पता है जिसे नेट करना है। तो आप इन तीन चीजों को ऐड करो और कैश को माइनस कर दो। तो आपके पास टोटल एंटरप्राइज वैल्यू आ जाएगी। अब आप टोटल एंटरप्राइज में ऑपरेटिंग एंटरप्राइज वैल्यू निकाल लो। ऑपरेटिंग एंटरप्राइज वैल्यू में क्या होगा? जो नॉन ऑपरेटिंग एसेट्स हैं वो माइनस कर दो। ये दोनों नॉन ऑपरेटिंग एसेट्स थे हमारे। ये दोनों माइनस कर दो और फिर एंड में क्या करो? जो नॉन कोर एसेट्स हैं वो भी माइनस 1:03:57 कर दो। तो आपके पास कोर एसेट्स की भी वैल्यू्यूएशन आ जाएगी। क्या यह क्वेश्चन भी समझ आ गया? किस एप्रोच पे बेस्ड है? इस फार्मूला पे बेस्ड है। आपको डायरेक्टली यह फार्मूला समझ आना चाहिए। अगर यह फार्मूला समझ आता होगा, तो आप पूरा का पूरा कर लेंगे। सीधा-सीधा फार्मूला ड्रिवन है। कुछ दिमाग नहीं लगाना, कोई दिमाग नहीं चलाना। अभी आपको यह सब पढ़ते हुए थोड़ा सा बोर लग सकता है क्योंकि आपको लगेगा या अरे क्यों पढ़ रहा हूं मैं ये सब। बेटा बेटा आजकल एग्जाम में आ रहा है ना आजकल वो थ्योरी के अंदर-अंदर से क्वेश्चन पूछ रहा है। अब पूछ लेगा तो मार्क्स चले जाएंगे चार मार्क। चार मार्क प्राप्त करने हैं तो ये फार्मूला पढ़ जाओ। ये फार्मूला पढ़ कर चले जाओ और ये क्वेश्चन कर कर चले जाओ। हो जाएगा फिर जब भी एग्जाम में आएगा। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। रिलेटिव वैल्यू्यूएशन के बारे में बात करते हैं। रिलेटिव वैल्यू्यूएशन क्लास में बहुत डिटेल में हमने पढ़ रखा है। आई एम श्योर सभी बच्चों ने पढ़ रखा है। रिलेटिव वैल्यू्यूएशन का मतलब क्या होता है? रिलेटिव वैल्यू्यूएशन का मतलब होता है कि ना हम किसी और कंपनी की वैल्यू से किसी और के डेटा से अपनी वैल्यू निकालते हैं। याद है? जैसे मैं क्लास में HDFC बैंक और ICIC 1:04:58 बैंक के बीच में एनालिसिस बताता हूं कि उनकी पीई रेशियो यूज़ करके हम अपनी वैल्यू डिराइव कर सकते हैं। तो उस तरीके को बोलते हैं। उसमें एंटरप्राइज वैल्यू बाय एबिटा का बहुत बार क्वेश्चन बन सकता है। मतलब जिसके चांसेस हैं बहुत बार क्योंकि आरटीपी वगैरह में डिस्कस्ड है। उसका एक क्वेश्चन मैंने रखा है। ध्यान से समझिए क्या कहता है क्वेश्चन। ईजी क्वेश्चन है। इसमें कोई नई बात नहीं है। तो आपका मन ये भी करेगा कि सर ये मत ही पढ़ाओ। हां, कुछ नया नहीं है। नई भी पढ़ोगे तो आपने क्लास में ये सब पढ़ रखा है। बट मैं सिर्फ एक एक्स्ट्रा क्वेश्चन कराना चाहता हूं। तो करा रहा हूं। सुनो। एक अनलिस्टेड सब्सिडरी है डेल्टा जिसकी रिलेटिव वैल्यू्यूएशन करनी है। डेल्टा लिमिटेड का एबिटा कितना है? 450 लैक्स। तो याद रखना हमारा एबिटा है और वो कह रहा है बाकी लिस्टेड कंपनियां जो कंपेरेबल हैं मतलब हमारी डेल्टा से जो लिस्टेड कंपेरेबल कंपनीज़ हैं उनका एंटरप्राइज वैल्यू बाय एबिटा की रेशियो ये चलती है मतलब वो ये कह रहा है हमारी कंपनी का जो डेल्टा है डेल्टा का एबिटा हमें पता है और जो हमारे से कंपेरेबल कंपनीज़ हैं उनका ईवी बाय एबिटा की ये रेशियो है तो हम 1:06:00 क्या करें अगर हमसे कंपेरेबल एक से ज्यादा कंपनी होती है तो हम क्या करते हैं उन तीनों को ऐड करके सिंपल एवरेज निकाल लेते हैं अगर अगर उसने वेटेड एवरेज ना बताई हो तो सिंपल एवरेज निकालते हैं। तो इन तीनों को ऐड करो डिवाइड बाय 3 करो। आपके पास सिंपल एवरेज ऑफ द इंडस्ट्री आ जाएगा कि इंडस्ट्री में क्या एवरेज चल रही है। फिर उस इंडस्ट्री एवरेज को हम अपने 450 से इंटू कर लेंगे। तो हमारी भी एंटरप्राइज वैल्यू आ जाएगी डेल्टा की भी। डेल्टा की भी ईवी आ जाएगी। तो देखो हमने क्या किया? हमने कंपेरेबल कंपनीज़ की ईवी बाय एबिटा की रेशियो को ऐड करके डिवाइड बाय 3 करके एवरेज निकाल लिया। उस एवरेज को अपनी 850 एबिट से इंटू कर दिया। तो हमारे को अपनी एंटरप्राइज वैल्यू पता लग गई। यानी डेल्टा कंपनी की एंटरप्राइज वैल्यू पता लग गई। यहां तक तो सब सही है। अब पढ़िए। वो कहता है देखो पहले तो मल्टी ये निकालो। निकाल दिया। अब वो कह रहा है कि भाई मुझे एंटरप्राइज वैल्यू यूजिंग द रिलेटिव वैल्यू्यूएशन अप्रोच भी निकालना है। ठीक है? पहले मल्टीपल निकालना था। मल्टीपल निकाल लिया और फिर वैल्यू्यूएशन निकालनी थी। वैल्यू्यूएशन भी निकाल ली। अब वह कहता है 1:07:01 इक्विटी की वैल्यू भी निकालो। देखो एंटरप्राइज वैल्यू पूरी कंपनी की होती है। मतलब एंटरप्राइज वैल्यू सिर्फ इक्विटी की नहीं होती। वह तो इक्विटी और फर्म मतलब इक्विटी और डेप्ट मिलाकर होती है। ठीक है? तो हम क्या करेंगे? अब आगे पढ़ेंगे। वो कहता है हमारी टोटल डेप्ट इतनी है, कैश इतनी है, माइनॉरिटी इंटरेस्ट इतनी है, प्रेफरेंस शेयर कैपिटल इतनी है। तो ये सब भी दे दिया उसने। तो अब एक बात को समझो। अगर मुझे एंटरप्राइज वैल्यू पता है तो उसमें से मैं डेप्ट हटाऊंगा, माइनॉरिटी इंटरेस्ट हटाऊंगा, प्रेफरेंस शेयर हटाऊंगा, कैश ऐड करूंगा। रिवर्स कर रहा हूं। सर ये क्या उल्टा क्यों हो रहा है समझ नहीं आ रहा। यह सब आप वापस क्यों कर रहे हो? इधर देखो बेटा फार्मूला। अगर मुझे एंटरप्राइज वैल्यू पहले ही पता है और अब मैं यहां से इक्विटी पे जा रहा हूं तो बेटा ये साइन चेंज हो जाएंगे ना सारे। आप इस बात को समझो। इस ये क्वेश्चन रिवर्स क्वेश्चन है। अगर मुझे एंटरप्राइज वैल्यू पहले ही मिल चुकी है। मिल गई ना एंटरप्राइज वैल्यू। औरों से कंपेयर करके मुझे अपनी डेल्टा की एंटरप्राइज वैल्यू मिल गई। अब मुझे इधर से वापस इक्विटी तक जाना है। तो इक्विटी तक जाने के लिए क्या 1:08:02 करूंगा? कैश को ऐड करूंगा और इन सबको माइनस करना पड़ेगा। समझ गए बेटा ये फार्मूला कि फार्मूला अगर फॉरवर्ड काम करेगा तो बैकवर्ड भी तो काम करेगा ना। तो अब हम बैकवर्ड जा रहे हैं। बैकवर्ड जाने का मतलब हम एंटरप्राइज वैल्यू में से डे माइनॉरिटी इंटरेस्ट, प्रेफरेंस शेयर माइनस कर देंगे। कैश को ऐड कर देंगे तो हमारे पास इक्विटी वैल्यू आ जाएगी। और जो इक्विटी वैल्यू आ गई उसे नंबर ऑफ शेयर्स से डिवाइड कर दो। इक्विटी वैल्यू पर शेयर आ जाएगी। यह अच्छा स्टेप था ना कि वह एंटरप्राइज वैल्यू का रिवर्स स्टेप है। यह रिवर्स कैलकुलेशन है। अब एक क्वेश्चन ऐसा कर लिया तो अब गलती नहीं होगी। अब आप एग्जाम में कर लोगे। आपको यह बात पता है कि इन सबकी वैल्यू को ऐड करके अगर एंटरप्राइज वैल्यू आती है तो एंटरप्राइज वैल्यू में से रिवर्स जाकर भी इक्विटी वैल्यू निकल सकती है। सिंपल। क्लियर है यह बात? नो डाउट। गुड। चलिए 1:09:07 ये लिवरेज बाय आउट पढ़ने से पहले ना एक बारी ये बता दूं मैं कि ये जो टॉपिक हमने कवर किया है रिलेटिव वैल्यू्यूएशन से पहले ये जो टोटल ऑपरेटिंग एंड कोर मैं ये टॉपिक बिज़नेस वैल्यू्यूएशन में कवर करता हूं। बट अगर आप मॉड्यूल के हिसाब से देखेंगे तो ये सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन तभी मॉड्यूल में नहीं मिल रहा था ना बिज़नेस वैल्यू्यूएशन में। उन्होंने इसे सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन वाले टॉपिक में डिस्कस किया है। फ़र्क नहीं पड़ेगा। हमने चैप्टर पढ़ लिया। हमने टॉपिक पढ़ लिया। चाहे बिज़नेस वैल्यू्यूएशन में पढ़ा हो, चाहे इधर पढ़ा हो। ये जो अभी हमने टॉपिक पढ़ा ना टोटल एंटरप्राइज वैल्यू्यूएशन क्या होती है? उसमें से कोर एंटरप्राइज और नॉन कोर एंटरप्राइज ये जो मैंने आपको फार्मूला बनवाया है ना ये वाला। कुछ बच्चों ने ये फार्मूला कभी नहीं पढ़ा होगा। जो बच्चे सेल्फ स्टडी कर रहे होंगे। तो उन्हें लग रहा होगा सर ने पता नहीं कौन सा नया फार्मूला पढ़ा दिया। बेटा ये नया फार्मूला नहीं है। ये पूरी की पूरी बातचीत आपके मॉड्यूल में यहां डिस्कस्ड है। अगर आप इंग्लिश अच्छे से पढ़ो और ये सारी लैंग्वेज को पढ़ो ध्यान से तो जो मैंने लिखवाया है वही इधर उन्होंने फॉर्मूले में डिस्कशन की है। यही बात टोटल ऑपरेटिंग एंड कोर एंटरप्राइज वैल्यू में उन्होंने डिस्कस किया है। जो मैंने आपको पढ़ाया है। टोटल ऑपरेटिंग एंड कोर एंटरप्राइज वैल्यू 1:10:08 में यही डिस्कस किया है उन्होंने। तो बट आपको ये थ्योरी पढ़ने की जरूरत ना पड़े इसलिए मैंने इसे फार्मूला फॉर्मेट में बना दिया है। ठीक है? चलिए वापस आते हैं। अब हम पढ़ेंगे लिवरेज बाय आउट के बारे में। ठीक है जी। यह कुछ ऐसे टॉपिक्स हैं बेटे जैसे लिवरेज बाय आउट है। अब वो बिनेस वैल्यू्यूएशन में भी आ सकता है। मर्ज एंड एक्वज़ में भी आ सकता है। तो ये मर्ज है। मतलब ये टॉपिक दोनों जगह पे है। तो आपका काम है पढ़ के जाना। आप पढ़ लो भाई। आपको टॉपिक से लेना देना नहीं है। चैप्टर के नाम से कोई लेना देना है नहीं। चलो। लिवरेज बाय आउट क्या होता है? लिवरेज बाय आउट का मतलब होता है कि आप यह मान के चलो कभी-कभी क्या होता है कि एक कंपनी ने छोटी कंपनी ने बड़ी कंपनी को खरीदना होता है। किसी और को खरीदना होता है और हम ज्यादा डेप्ट उठा के किसी कंपनी को खरीदें तो उसे बोलते हैं लिवरेज बाय आउट। इमेजिन करो मेरे पास मैं एक कंपनी खरीदने जा रहा हूं 100 करोड़ की। लेकिन मेरी जेब में सिर्फ 20 करोड़ है। और मैं बाकी 80 करोड़ इक्विटी से ले डेप्ट से ले रहा हूं। तो इसलिए बोलते हैं इसे लिवर्ड बाय आउट। लिवरेज बाय आउट। क्योंकि हमने जो कंपनी खरीदी है वो ज्यादातर डेप्ट से खरीदी है। अपनी जेब से बहुत कम पैसा डाला है। 1:11:08 ज्यादातर डेप्ट लेके उस कंपनी को खरीदा है। तो उसे लिव बाय आउट बोलते हैं। ये कॉमर्स यानी बिजनेस के अंदर चलने वाला एक टॉपिक है। वो ये ये पूरा जो मैंने आपको टॉपिक ये पढ़ा रहा हूं। ये पूरी की पूरी आपकी मॉड्यूल की लैंग्वेज है। मेरी लैंग्वेज नहीं है। उन्होंने इसमें बेसिकली एक एग्जांपल के थ्रू अपने मॉड्यूल में अगर आप देखोगे तो उन्होंने लिवरेज बाय आउट को एक एक एग्जांपल के थ्रू समझाया है। ठीक है जी। अगर आप उनकी बातें देखेंगे तो उन्हें मैं ढूंढ देता हूं जरा। 1:11:50 यहां पे उन्होंने डिस्कस किया है। लिवरेज बाय आउट्स का मतलब क्या होता है? कि जब आप डेप्ट को इस्तेमाल करके किसी कंपनी को खरीदते हैं तो उसे लिवरेज बाय आउट कहते हैं। यह दो टॉपिक्स में डिस्कस्ड है हमारे और इसके बारे में उन्होंने इधर एक क्वेश्चन दिया है। यह एग्जांपल मैं आपको पढ़वाना चाहता हूं। यही एग्जांपल मैं रीड करवा रहा हूं। ध्यान देंगे इस एग्जांपल में वो क्या कहता है? उसने कुछ ज्यादा बड़ी बातचीत नहीं लिखी है। उसने बोला कि एक कंपनी है स्मॉल सॉफ्टवेयर कंपनी है जो कि प्रोवाइड कर रही है डाटा कंट्रोल के काम को। उसके पास 60 एंप्लई काम करते हैं। एबिटा है 100 लाख का। ध्यान रखना। एबिटा कितना है? 100 लाख पर ईयर का। और वो यह कहता है अ वेंचर कैपिटलिस्ट कन्वसेस द मैनेजिंग डायरेक्टर ऑफ़ द कंपनी टू सेल ऑफ द मेजॉरिटी स्टेक टू हिम एंड वैल्यू एट अ प्रीमियम ऑफ़ 100% पर शेयर। वो कहता है जितनी आपकी बुक वैल्यू है उसमें 100% ऊपर दूंगा मैं और एक बार की गुडविल भी दूंगा 50 लै की। यानी वो आपको क्या बोल रहा है? आपकी बुक वैल्यू से 100% प्रीमियम भी दूंगा मैं आपको और 50 लाख की गुडविल भी दूंगा आपको यूजिंग द इनकम 1:12:51 वैल्यू्यूएशन अप्रोच। द टोटल कंसीडरेशन कम्स आउट टू 250 लाख। वो कहता है भाई जो टोटल कंसीडरेशन सोची है वो 250 लाख की आ रही है। नेक्स्ट द वीजी इरोप्स द बैंकर टू पंप 200 लाख। वो कहता है भाई इस कंपनी को खरीदने के लिए 200 लाख देखो 250 लाख का ऑफर दे रहा है वो उसे। सुनना मेरी बात। यहां तक तो जनरल बात है कि आप एक कंपनी खरीदने गए। आपने 250 लाख का ऑफर दिया 250 लाख का। उस ₹0 लाख में से 200 लाख का तो आप लोन लेने गए हो। बैंक के पास गए बैंक को बोल रहे हैं हमें लोन दे दे। तो वही 80% तो लोन ले रहे हो। तो लिव बाय आउट का क्वेश्चन हो गया। आप किसी कंपनी को 250 लाख में ऑफर देकर आ रहे हो और पीछे से 200 लाख का लोन उठा रहे हो तो एक तरीके से लिव बाय आउट ही हो गया क्योंकि मेजर पैसा तो लिवरेज से ही आ रहा है। तो कहता है कि फिर बाकी का पैसा हम खुद डाल देंगे। द गैप ऑफ 50 लाख हम अपनी इक्विटी प्रमोटर्स डालेगी। ठीक है? तो 200 लाख का हम लोन लेंगे और 50 लाख अपनी जेब से डालेंगे तो हम 250 लाख की पेमेंट देंगे। सिंस द कोर ऑपरेशन टीम इज नॉट डिस्मेंटल द कंपनी इजीली अचीव्स एन अप्रोक्समेट 20% एवरेज ग्रोथ रेट इन ईच ऑफ द नेक्स्ट थ्री ईयर। नेक्स्ट तीन साल हमारी ग्रोथ रेट 20% की होगी। इसका मतलब 1:13:53 अगर पहले हमारा बेटा 100 था तो 20-20% 3 साल तक बढ़ता रहेगा। एट द एंड ऑफ़ द थर्ड ईयर जब थर्ड ईयर एंड हो जाएगी। मतलब थर्ड ईयर के एंड पे द वीसी पुट्स द कंपनी ऑन द सेल। फिर आप उसे कंपनी बेटा कई लोग ऐसा ही करते हैं। किसी डूबती हुई कंपनी को किसी कम चलने वाली कंपनी को खरीदते हैं। उसको दो-ती साल अच्छे से चलाते हैं। फिर उसे महंगे में बेचते हैं। ये काम कर रहे हैं हम। तो 3 साल बाद हम इसे बेचना चाहते हैं। और वो कहता है कि एमएसी को बेचेंगे सात टाइम्स एबिट पे। मतलब जो भी हमारा अर्निंग बिफोर डेप्रिसिएशन एक्यूमुलेट एंड टैक्स वगैरह होगा अमोटाइजेशन एंड टैक्सेस वो उसके सात गुना। तो जो 3 साल बाद का हमारा आएगा ना ईबीडीएटी यानी जो 3 साल बाद का आएगा 3 साल बाद की वैल्यूएशन आएगी उसके सात गुना वैल्यू पर हम कंपनी बेचना चाहते हैं। उसके सात गुना वैल्यू पे हम कंपनी बेचना चाहते हैं। तो आपने क्या किया? फर्स्ट ईयर, सेकंड ईयर, थर्ड ईयर का ईवीडीएटी निकाला। उसे इंटू से किया। यह उसकी कंपनी की वैल्यू्यूएशन हो गई। कैपिटलाइज़ वैल्यू एट द एंड ऑफ़ थ्री इयर्स हो गई। अब उसमें से डेप्ट जो माइनस 1:14:54 किया है ना 100 ये नहीं समझ आएगा। बस इस वजह से मैं समझा रहा हूं। वरना मैं ये क्वेश्चन नहीं कराता। आपको बाकी सब कुछ समझ आ जाएगा। आपको डेप्ट समझ नहीं आएगी इस क्वेश्चन में। अब जो इंस्टट्यूट का आंसर पढ़ोगे ना ये वाला तो आपको ये सब समझ आ जाएगा। बट ये उन्होंने 100 कैसे ले लिया? डेप्ट ये नहीं समझ आएगा क्योंकि आपके दिमाग में तो 200 लाख का लोन था। तो एंड में 100 लाख का कैसे बचा? ये नहीं समझ आएगा आपको। बाकी सब तो समझ आ गया होगा। बाकी सब क्लियर है? हां सर एक नॉर्मल क्वेश्चन है सर। उसमें एबिटा दिया हुआ है। हमने उसमें से इंटरेस्ट माइनस किया। ये सब कुछ माइनस किया, टैक्स माइनस किया। आफ्टर टैक्स निकाल लिया। और फिर इस वैल्यू्यूएशन के अंदर हमने मल्टीपल टाइम्स में से को मल्टीप्लाई कर दिया। तो हमारे पास वैल्यू्यूएशन ऑफ द फर्म आ गई। लेकिन उसमें से लोन 100 का कैसे हो गया? देखो क्यों? क्योंकि डेप्ट प्रिंसिपल को मान रहे हैं कि वो रीप कर दिया होगा लीनियरली इन सिक्स इयर्स। मतलब हमने जो 200 लाख की डेप्ट ली थी वो लीनियरली थोड़ी-थोड़ी थोड़ी-थोड़ी पे करी है 6 साल में। अब यह कैसे माना? यह क्वेश्चन में गिवन होगा। यह क्वेश्चन में गिवन होगा। तो अगर 6 साल में अगर पूरा पे ऑफ होगा तो 3 साल में आधा पे ऑफ हो गया 1:15:55 होगा। बेटा अगर मैं किसी लोन को लीनियरली पे ऑफ कर रहा हूं तो 3 साल में आधा पे हो गया होगा। यानी 200 लाख में से 100 लाख पे हो गया होगा। तो इसका मतलब यहां पे बैलेंस लोन खाली 100 लाख बचा होगा। तो इसलिए हमने 100 लाख दिखाया। सर लोन की पेमेंट दिखाई तो है नहीं। बेटा लोन की पेमेंट इस स्टेटमेंट में नहीं आती ना। वो कोई प्रॉफिट पे थोड़ी ना चार्ज होती है। वो तो लोन फ्री पेमेंट है। हां इंटरेस्ट आना था। देखो इंटरेस्ट भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। क्यों? क्योंकि पहले साल लोन दिया होगा 18% पूरे 200 लाख पे। फिर अगले साल जब लोन दिया होगा तो 200 में से 166 लोन कम हो गया होगा तो थोड़ा कम हो गया होगा मतलब 32 लाख के आसपास कम हो गया होगा तो 167 लाख के आसपास कुछ बचा होगा तो उस पे किया होगा 18% फिर ऐसे ही और कम हो गया होगा फिर उस पे किया होगा तो उससे इंटरेस्ट कम होता जा रहा है समझ आ रही है आपको बात इसलिए उन्होंने 100 लाख माइनस किया ये इक्विटी की वैल्यू है बस इसी बात को समझना है आपने यह लिव बाय आउट का क्वेश्चन था मैंने एक क्वेश्चन जो इंस्टट्यूट ने अपनी पब्लिकेशन में दिया है मैंने वो रीड आउट करा दिया है मैंने कोई नया क्वेश्चन नहीं बना के पढ़ाया बट यह वाला क्वेश्चन मैंने 1:16:56 आपको पढ़ा दिया है। ठीक है जी। एसवीए हम डिस्कस कर चुके हैं। एसवीए का भी उन्होंने एक अपने मॉड्यूल में एसवीए का ये एक एग्जांपल प्रिंट किया हुआ है। ये एग्जांपल आपको पढ़ने की आप एक बार रीड कर लीजिएगा कि कैसे उन्होंने वैल्यू ऑफ़ एंटरप्राइज वैल्यू निकाली है पूरी। फिर उसमें से डेप्ट माइनस करके इक्विटी की वैल्यू निकाली है। यह उन्होंने पूरा का पूरा एक क्वेश्चन प्रिंट किया हुआ है। मैंने उसे एज़ इट इज़ आपके लिए दे दिया। आप रीरीड कर सकते हो। ठीक है? एडवांस जो एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू का टॉपिक है, यह मैं इस चैप्टर में कवर नहीं करता हूं क्योंकि मैं आगे एक और चैप्टर में इसे कवर करूंगा। इसके मैंने तीन क्वेश्चन इस कराने हैं पर इस चैप्टर में नहीं पढ़ाने। आगे जाके पढ़ाने हैं। एडवांस कैपिटल लिस्टिंग वगैरह वाले टॉपिक में कवर करूंगा ये। ठीक है ना? फिर एक लास्ट टॉपिक है इसके अंदर पढ़ने वाला बिज़नेस वैल्यू्यूएशन में वो है स्कोर कार्ड वैल्यू्यूएशन मेथड। देखो स्कोर कार्ड वैल्यू्यूएशन के बारे में अगर हम बात करें तो आपके मॉड्यूल में थ्योरेटिकली डिस्कस्ड है। यह देखिए आपके मॉड्यूल में इसका स्कोर 1:17:58 कार्ड के ऊपर बेस्ड इन्होंने एक टॉपिक दिया हुआ है। पर इसके ऊपर बेस्ड कोई क्वेश्चन नहीं बनाया हुआ। तो मैं इसके ऊपर बेस्ड एक क्वेश्चन बना के पढ़ा रहा हूं आपको। उस क्वेश्चन से आपको थ्योरी भी समझ आ जाएगी। क्वेश्चन भी समझ आ जाएगा। ठीक है? एक क्वेश्चन और पढ़ लें जरा जल्दी से। देखिए स्कोर कार्स्ट बेस्ड वैल्यू्यूएशन बेसिकली स्टार्टअप्स वगैरह के लिए यूज़ होता है। जिनके लिए ना देखो कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनका फाइनेंसियल बहुत स्टंग नहीं होता। फाइनेंसियल अभी भी हुआ नहीं होता या प्रॉफिट बहुत ज्यादा नहीं हो रहा होता। ठीक है जी। तो उस केस में हम क्या करते हैं? उस केस में हम किस हर एक चीज को ना पॉइंट देने लग जाते हैं। एग्जांपल लो आपको कोई एक चीज खरीदनी है, कोई नई कार खरीदनी है तो आप उसे पॉइंट्स देते हो कि इसके डिज़ाइन के कितने पॉइंट्स हैं? इसकी माइलेज के कितने पॉइंट्स हैं? इसकी मान लो कि इसके सीट कंफर्ट के कितने पॉइंट्स हैं। ऐसे अलग-अलग चीजों की रेटिंग देके आप एवरेज निकाल के देखते हो कि बाकी गाड़ियों के मुकाबले वो गाड़ी कैसा परफॉर्म कर रही है। क्योंकि आप एक चीज पे डिसीजन नहीं ले सकते। आपको एवरेज ऑफ़ ऑल डिसीजन लेना पड़ता है। वैसे ही हम इधर वैल्यू्यूएशन कर रहे हैं। सुनो nimbers टेक वेंचर्स इज़ अ प्री रेवेन्यू 1:18:58 एआई बेस्ड स्टार्टअप सीकिंग एंजल फंडिंग। वह स्कोर कार्ड वैल्यू्यूएशन यूज कर रहे हैं। एवरेज प्री मनी वैल्यू्यूएशन ऑफ द कंपेरेबल प्री रेवेन्यू स्टार्टअप इन द सेम सेक्टर इज 8 करोड़। अब देखो यह इंपॉर्टेंट है। यानी हमारे ही जैसा कोई और जो है उसकी वैल्यू्यूएशन 8 करोड़ है। हमारे ही जैसी कोई और कंपनी है उसकी वैल्यू्यूएशन 8 करोड़ है। यह हमें पता है। कंपेरेबल कंपनी पता है। तो हम क्या करेंगे? पहले हम यह देखेंगे कि औरों के मुकाबले हम स्कोर कार्ड में ऊपर जा रहे हैं या नीचे जा रहे हैं। अगर हम 100 से ऊपर जा रहे हैं तो हम उतने परसेंट का प्रीमियम डिमांड करेंगे और अगर हम नीचे जा रहे हैं तो हम उतने परसेंट का डिस्काउंट ऑफर करेंगे अपनी प्राइिंग पे। क्लियर बात है यार अगर आप एवरेज से अच्छे हो तो आप ऊपर का प्रीमियम लोगे और आप एवरेज से बुरे हो तो फिर डिस्काउंट दोगे। तो देखो पढ़ो नंबर्स के लिए पढ़ते हैं। वो यह कहता है कि हमारी स्ट्रेंथ ऑफ टीम 0 टू 30% का वेट देखा जाता है। पर उसने नीचे एक बात बोल दी है। मैं बोर नहीं करना चाहूंगा। सीधा बात ही पढ़ा देता हूं कि जो बेस वेट है वो 1:20:00 हमेशा रेंज में से जो हाई मैक्सिमम पॉसिबल वेट है उसे लो। यानी इस क्वेश्चन में हम हर एक के लिए यह मैक्सिमम वेट को मानेंगे। यानी मिनिमम वेट को नहीं मानना। इस क्वेश्चन में मिनिमम वेट को नहीं मानना। उसने खुद ही बोला कि हर क्राइटेरिया के लिए हम मैक्सिमम परमिसिबल वेट को लेने वाले हैं। ठीक है? वेट्स हायर साइड वाले लेंगे। अच्छा इसी क्वेश्चन में अगर वो कहता है कि हम एवरेज वेट्स लेंगे तो क्या करते आप? मान लो सेम क्वेश्चन आ जाए एग्जाम में। लेकिन वो बोले कि एवरेज वेट लेंगे। मैक्सिमम नहीं लेंगे तो क्या करते? फिर हम ज़ीरो और 30 की एवरेज लेते। ज़ीरो और 30 क्या होता होता है। ज़ीरो और 30 की एवरेज होती है 15 तो हम वेट्स लेते 15% 12.5% 7.5% 5% 5% 2.5% 2.5% उन वेट्स को लेके क्वेश्चन आगे करते हैं। पर अभी हम क्या कर रहे हैं? अभी हम मैक्सिमम को ले रहे हैं क्योंकि क्वेश्चन ने बोला है मैक्सिमम वाले वेट्स को लेना है। क्या सवाल समझ आ रहा है? यानी ये वो अलग-अलग फैक्टर्स हैं जिन फैक्टर्स पे हमें अपनी कंपनी को नापना है। और यह वेट्स हैं और यह हमारी कंपेरेटिव रेटिंग है। मतलब हम 1:21:02 इंडस्ट्री के मुकाबले कैसे हैं? हम इंडस्ट्री के मुकाबले टीम में 120% है। मतलब इंडस्ट्री में अगर 100% लोगों की टीम है तो हमारी टीम 20% स्ट्रांग है। अपॉर्चुचनिटी हमारी कंपनी में 10% ज्यादा है। प्रोडक्ट या सर्विस हमारी कंपनी की 30% बेटर है। पर कॉम्पिटिटिव एनवायरमेंट हमारी कंपनी का 90% है। मतलब 10% नुकसान पे हैं हम। मार्केटिंग हमारी 50% अच्छी है। लेकिन नीड फॉर एडिशनल इन्वेस्टमेंट हमारे पास 20% और है। अभी मतलब हम बेकार हैं इंडस्ट्री से। अदर्स में 100% है। तो आप एक सिंपल सी बात करो। वेट को रेटिंग से इंटू करो। यह बेस वेट्स हो गए। ये रेटिंग हो गई। इन दोनों को आपने इंटू किया। फिर आपने टोटल किया। आपका टोटल स्कोर बना 116%। यानी आपका टोटल एवरेज स्कोर कितना है? 116%। इसका मतलब आप आप अपने कंपेरेबल कंपनी से 16% अधिक वैल्यू रख सकते हैं। यानी आप अपनी कंपेरेबल कंपनी से 16% अधिक वैल्यू डिमांड कर सकते हैं। तो अगर आपने क्या किया है यहां पे? यह जो टोटल कंपैरिजन फैक्टर्स थे इन सबकी एवरेज इन 1:22:02 सबको ऐड करके टोटल निकाल दिया। और अगर औरों की वैल्यू्यूएशन 8 करोड़ है तो आप 8 करोड़ में 116% वैल्यू डिमांड कर सकते हैं। यानी 16% अधिक वैल्यू डिमांड कर सकते हैं। तो आपकी वैल्यू 9.28 करोड़ हो जाएगी। यानी nimbers कंपनी की वैल्यू्यूएशन 9.28 होनी चाहिए। अब समझ आ रहा है आप जो शार्क टैंक में प्री मनी वैल्यू्यूएशन वगैरह देखते हो वह किस तरीके से निकल रही होती है? उन्होंने अपने आप को अलग-अलग क्राइटेरिया के हिसाब से वैल्यूएट किया होता है और फिर देखा होता है। ऑब्वियस सी बात है इसके इंडिकेटर्स बने हुए हैं। ये इंडिकेटर हमें मानने पड़ेंगे। क्या आप लोगों को ये तरीका समझ आया? पता है क्या है? क्वेश्चन टफ नहीं है। एक भी क्वेश्चन किया होगा तो इस टाइप का आप कर लोगे। हां, परेशानी ये है कि अगर सीधा एग्जाम में ये आ जाए। अब एक बात तो एग्जाम में ये आ जाए। जबकि वो सारी बात बता रहा है कि वेट हायर वाले लेने हैं। वेट को रेटिंग से इंटू करना है। एवरेज रेटिंग निकालनी है। फिर जो रेटिंग आएगी उसको हम 8 करोड़ के साथ मल्टीप्लाई करके अपनी वैल्यू निकालेंगे। बट ये बात क्लिक नहीं होगी एग्जाम में बैठ के। एग्जाम में बैठ के डर जाएगा बच्चा कि ये क्या आ गया? पेपर मतलब आउट ऑफ कोर्स आ गया। उसे ऐसा लगने लग जाता है। इसीलिए ये सारे क्वेश्चन आपने एक बार देखे होंगे तो 1:23:03 यू कैन डेफिनेटली सॉल्व देम वेरी ईजीली। समझ आ गई आपको ये बात? बिजनेस वैल्यूएशन में अनेक्स क्वेश्चन थोड़े ज्यादा हैं। बाकी चैप्टर में उतने ज्यादा नहीं है। ठीक है रे? वेलकम वेलकम वेलकम। हम लोग नेक्स्ट वीडियोस के बारे में बात कर रहे थे। यानी ये वो क्वेश्चन है जो एक्स्ट्रा क्वेश्चन है। एक्स्ट्रा मतलब आपको ये क्वेश्चन मेरे हिसाब से पढ़ने चाहिए। कब पढ़ने चाहिए? ये सारे के सारे क्वेश्चन आपको पढ़ लेने चाहिए एग्जाम में जाने से पहले। ये एक्स्ट्रा क्वेश्चंस हैं जो कि आपके रेगुलर करिकुलम में कवर नहीं होते हैं या होते भी हैं तो थ्योरेटिकली कवर होते हैं, प्रैक्टिकली कवर नहीं होते हैं। उनका एक-ए दो-दो क्वेश्चन हमने बना कर रखे हैं। आइए आज का जो हमारा टॉपिक है उसका नाम है म्यूच्यूल फंड्स। म्यूच्यूल फंड पढ़ने के बाद ये एक्स्ट्रा दो-तीन क्वेश्चन आपको पढ़ लेने चाहिए। पहला है ट्रेल कमीशन का। ठीक है जी? ट्रेल कमीशन क्या होती है? पहले जरा ध्यान से सुनो। जब आप म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर बनते हैं। अगर आप कभी म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर बने हैं। म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर वो इंसान होता है बेटे जो ना म्यूच्यूल फंड खरीदने में आपकी मदद करता है। जो मिडिलमैन होता है। जैसे ये म्यूच्यूल फंड हाउस है। ये आप है। तो आप दोनों के बीच में एक बंदा होता है जिसका नाम होता है म्यूच्यूल फंड 1:24:03 डिस्ट्रीब्यूटर। मैं वैसे थोड़ी सी ऐड भी कर दूं। मैं इसका भी कोर्स पढ़ाता हूं। हमारी एक वेबसाइट है ऑनलाइन finance स्कूल के नाम से। ऑनलाइन finance school.com उस पे आपको एनआईएसएम के बड़े सारे कोर्सेस मिलते हैं। उसमें से एक कोर्स होता है म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर। यह मैं पढ़ाता हूं। हजारों बच्चे अक्रॉस इंडिया पढ़ते हैं और बच्चे क्या प्रोफेशनल्स भी पढ़ते हैं। बैंक में काम करने वाले, बड़ी-बड़ी एजेंसीज में काम करने वाले लोग भी यह कोर्स हमसे पढ़ते हैं। म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर तो इन लोगों का काम क्या होता है? ये कमाते कैसे हैं? ये ऐसे कमाते हैं कि जब आप जैसे मानो आपने म्यूच्यूल फंड खरीदा ₹1 लाख का। तो जब आप 1 लाख कंपनी को दे भेज रहे होते हैं ना म्यूच्यूल फंड को। आपको लगता है आप 1 लाख भेज रहे हो। लेकिन जैसे ही आपकी जेब से ₹1 लाख जाते हैं। इन लोगों को कुछ कमीशन मिलती है। मान लो कि कमीशन मिलती है 1% मान लेते हैं। तो 1% इनिशियल कमीशन मिल जाएगी। यानी जितने पैसे आप जमा कराओगे आपने पैसे जमा कराए 1 लाख लेकिन उसके में से 1% उन्हें मिल गया। तो यह तो उनकी इनकम हो गई म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर की। फिर इसके बाद ये इनका पेट नहीं भरता। इसके बाद ये रेकरिंग कमीशन मांगते हैं। रेकरिंग कमीशन मांगने का मतलब क्या होता है कि जैसे आप आगे बढ़ते जाएंगे ना हर साल जितना-जितना आपका एयूएम होगा एसेट अंडर 1:25:04 मैनेजमेंट होगा आपका। मतलब आपका पैसे की जो वर्थ होगी हर साल उस वर्थ पे भी इन्हें कुछ परसेंटेज हर साल म्यूचुअल फंड देता है। उसे बोलते हैं ट्रेल कमीशन। ट्रेल मतलब ट्रेल की तरह पीछे-पीछे चलती है। वो फॉलो करती है। यानी यानी सर इसका मतलब यह है कि अगर मैंने आज एक बार म्यूच्यूल फंड में पैसे लगाए म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के थ्रू तो जब तक मेरा म्यूच्यूल फंड इन्वेस्टेड रहेगा तब तक हर साल उसे कुछ इनकम मिलेगी। जी हां आपने बिल्कुल ठीक सुना। हर साल उन्हें कुछ इनकम मिलेगी। चाहे वो बहुत थोड़ी हो.5% हो। लेकिन वो हर साल 0.5% आपके पैसों में से उन्हें भी मिलेगा। यानी सर इसका मतलब यह है कि मैं ₹100 लगाता हूं तो मैं कमा रहा हूं ₹12। तो मेरे पैसों में से आधा रुपया वो भी कमा रहा है। हां ऐसा हो सकता है ₹2 या 60 पैसे वो भी कमा रहा हो हर साल। तो सोचो एक म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर जिसने हजारों लोगों के म्यूच्यूल फंड बिकवाए हो। हजारों लोगों को तो उसको कभी-कभी मतलब मैं ऐसे म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को पर्सनली जानता हूं जिनकी एनुअल कमाई 5 करोड़ के आसपास आती है। यानी उनकी अपनी कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है। उन्होंने और लोगों को म्यूच्यूल फंड बिकवाए हैं। और वो और लोगों के म्यूच्यूल फंड पे जो उन्हें परसेंटेज मिलती है। इनिशियल भी मिलती है पहले ज्यादा मिलती है 1:26:05 फर्स्ट ईयर के लिए। फिर हर साल जो ट्रेल कमीशन मिलती है वो सब मिलाकर 5प 88 करोड़ हर साल उनके पास आते हैं। ऐसे म्यूचल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को मैं पर्सनली जानता हूं। ऑब्वियसली खर्चा भी करते होंगे काम भी करते हैं, टीम भी बनाते हैं, ऐप भी बनाते हैं। अपना पैसा भी खर्चते हैं थोड़ा। चलो वापस आते हैं। मिस्टर आनंद इन्वेस्टेड ₹ लाख इन द ग्रोथ फंड। ठीक है भाई। आप मिस्टर आनंद हो। आपने ₹20 लाख लगाए हैं। ग्रोथ फंड में लगाए हैं म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के थ्रू। थ्रू ह म्यूचल फंड डिस्ट्रीब्यूटर। जिनका नाम क्या है? वेल्थ केयर एडवाइज़र्स। ये नाम है म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स का। बहुत बढ़िया। द डिस्ट्रीब्यूटर चार्जेस अ ट्रेल कमीशन ऑफ़6% पर एनम। ट्रेल कमीशन हर साल इतनी लेता है वो। और जितने भी आपके एसेट अंडर मैनेजमेंट होंगे मतलब आपका पैसा जितना भी हम संभाल रहे हैं जितनी उस पैसे की वर्थ होगी उस पे मैं 6% लूंगा। बढ़िया जी। और वो ये कहता है पहले 6 महीने में कुछ ये सब था। ठीक है? और एडिशनली वेल्थ केयर जो है जो हमारा मतलब म्यूचल फंड डिस्ट्रीब्यूटर है वो 1% कमीशन इनिशियल इन्वेस्टमेंट पे भी लेता है। तो दो तरीके की इनकम ले रहा है। एक इनिशियल इन्वेस्टमेंट पे ले रहा है इनिशियल कमीशन और एक ट्रेल कमीशन ले रहा है। ठीक है जी। 1:27:08 तो ये सब पैसा देना पड़ेगा आपको। वो कहता है जी कंप्यूट करो मंथली ट्रेल कमीशन अर्न बाय वेल्थ केयर एडवाइज़र्स फ्रॉम द सिक्स मंथ्स। इन 6 महीने में उसने कितना कमाया होगा? तो बड़ी सिंपल सी बात है। हर महीने का एयूएम दे रखा है तो हर महीने का 6% कर दो और वो भी 1 महीने का क्योंकि ये 6% तो एनुअल है ना पर एनम है तो उसे इंटू 1/12 भी करना पड़ेगा। समझ रहे हो आप मेरी बात? क्योंकि हमें मंथली निकालना है। तो देखो हमने क्या किया? मैं सिर्फ शो कर रहा हूं आंसर कि ये एयूएम था। ये 6% था। एयूएम पे6% 12 से डिवाइड कर दिया। तो ये एक पहले महीने की कमीशन है। तो ये दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा। तो यानी जैसे-जैसे आपके एसेट अंडर मैनेजमेंट की वैल्यू बढ़ेगी घटेगी उस हिसाब से उसकी भी कमीशन बढ़ेगी घटेगी। यानी एक तरीके से सिस्टम ऐसा बनाया हुआ है कि आपका पैसा बढ़ेगा तो म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर को भी फायदा होगा। रिपीट करना मैंने क्या कहा? आपका पैसा बढ़ेगा तो म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर को भी फायदा होगा। इसीलिए उनकी कमीशन भी आपके एयूएम के साथ टिकी हुई है। ठीक है? तो अगर मुझसे कोई पूछे टोटल ट्रेल कमीशन कितनी है? 6 महीने की तो इन सबको टोटल कर दो भैया। इन सबको टोटल करोगे तो ₹5725 1:28:10 यानी देखो आप एक बात समझो आपने लगाए हैं ₹20 लाख आपने लगाए हैं ₹20 लाख तो आपकी ₹20 लाख की इन्वेस्टमेंट पे 6 महीने में उसने ₹6000 कमा लिए लगभग तो 12 महीने में लगभग ₹12,000 तो वो आपके पैसे से यानी अगर आपने 20 लाख का म्यूच्यूल फंड में इन्वेस्टमेंट किया मेरे थ्रू मैं म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर हूं तो मेरे को ₹12,000 साल के मिलने लग जाएंगे हर साल जब तक आपका पैसा लगा रहेगा। ठीक है जी और लेकिन अप्रट कमीशन भी ली होगी यानी वन टाइम इनिशियल कमीशन भी ली होगी पूरे 20 लाख का 1% यानी 2000 वो भी लिया होगा लेकिन यह खाली फर्स्ट ईयर मिलता है ये हर ईयर नहीं मिलता तो मेरी टोटल कमीशन कितनी आ गई 2000 और 525750 यानी कुल मिला के मुझे फर्स्ट ईयर पहले 6 महीने में इतनी कमीशन मिल जाएगी क्या क्वेश्चन समझ आ गया क्वेश्चन तो बहुत आसान था लॉजिक भी बहुत आसान था पर अगर पढ़ रखा हो तो आसान है अब आपने इसका एक क्वेश्चन कर लिया तो अब एग्जाम में जब भी आएगा आप कर पाओगे थोड़ी बहुत वेरिएशन भी आएगी तो भी आप कर पाओगे बोलो लॉजिक समझ आ गया ट्रेल कमीशन का और इनिशियल कमीशन का यानी म्यूच्यूल फंड डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाली कमीशन है। यह आपकी बुक में आपके मॉड्यूल में थ्योरेटिकली डिस्कस्ड है। प्रैक्टिकली हमने अब आज पढ़ लिया। ठीक है जी। हां मुझे पता है बेटा ये आसान है। देखो मैं आपको 1:29:11 बोल रहा हूं आसान है। पर एक बात बताऊं अब ये अभी पढ़ते हुए क्लास हमें 6 मिनट हो गए हैं। अब ये आसान है। ये क्वेश्चन मैं आपको 6 मिनट पहले दे देता। तो देयर आर चांसेस कि आप में से 80% बच्चे गलत कर देते। कुछ ना कुछ गड़बड़ कर देते। चाहे बहुत आसान था। बस एक बार ना पढ़ा हुआ होना चाहिए। कंफर्ट होना चाहिए उसका। जैसे अब अगला क्वेश्चन है। अगले में भी कोई बड़ी बात नहीं है। आपने ट्रैकिंग एरर के बारे में थ्योरिटिकली आप जानते हो क्या होता है ट्रैकिंग एरर? तो आप ये बोलोगे सर ट्रैकिंग एरर का मतलब होता है कि जैसे अगर हमने एक म्यूच्यूल फंड में पैसे लगाए और वो म्यूच्यूल फंड जो है वो पैसिव म्यूच्यूल फंड है। पैसिव म्यूच्यूल फंड होने का मतलब होता है कि वो म्यूच्यूल फंड ना किसी इंडेक्स को फॉलो कर रहा है। किसी इंडेक्स मान लेते हैं सबसे आसान इंडेक्स होती है निफ्ट्टी 50। मान लेते हैं वो निफ्ट्टी 50 को फॉलो कर रहा है। यानी हमने पैसा दिया म्यूच्यूल फंड को। हमने पैसा दिया म्यूच्यूल फंड को लेकिन वो म्यूच्यूल फंड इंडेक्स को फॉलो कर रहा है। यानी हमारा जो भी पैसा है वो उन्हीं 50 कंपनियों में लगा होना चाहिए जो इंडेक्स में 50 कंपनी है। उसी रेशियो में लगा होना चाहिए जो इंडेक्स की 50 रेशियो की 50 कंपनियों की रेश्यो है। ठीक है मेरी बातें समझ आ रही है आपको? आपने कहा हां सर यानी हमारा पैसा उन्हीं 1:30:08 50 कंपनियों में लगा होना चाहिए जो निफ्ट्टी 50 के इंडेक्स में है। पर होता क्या है? निफ्ट्टी 50 तो रोज चेंज होता है। रोज इंडेक्स थोड़ी बढ़ती है, थोड़ी घटती है। कभी Reliance का शेयर ऊपर चला जाएगा। किसी बैंक का शेयर नीचे चला गया HDFC का है ना? तो इंडेक्स में तो रोज उतार-चढ़ाव, उतार-चढ़ाव, उतार-चढ़ाव चलते रहेंगे। अब मैं अगर यह कहूं कि रोज इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, उतार-चढ़ाव चलते रहेंगे, तो इसका मतलब यह है कि क्या हमारा पोर्टफोलियो मैनेजर रोज बेच सकता है, रोज खरीद सकता है, रोज बेच सकता है रोज? नहीं। वो इतनी ज्यादा चर्निंग तो नहीं कर सकता। तो इसीलिए क्या म्यूच्यूल फंड इंडेक्स को पूरी तरह 100% रेप्लिकेट कर पाता है? पूरी तरह फॉलो कर पाता है। नहीं। मान लो इंडेक्स ने कमाया 10% तो हो सकता है हमारे म्यूच्यूल फंड ने कमाया हो 9.25% तो इन दोनों के बीच में जो गैप रह गया वो होता है ट्रैकिंग एरर। दैट इज कॉल्ड ट्रैकिंग एरर। क्या ये वर्ड समझ आया? ट्रैकिंग एरर का मतलब क्या है? मतलब हमने म्यूच्यूल फंड को पैसा दिया और हमने कहा था जा इंडेक्स को फॉलो कर। लेकिन वो इंडेक्स को पूरी तरह फॉलो नहीं कर पाया। इंडेक्स को फॉलो करते हुए थोड़ा पीछे या थोड़ा आगे रह गया। आगे भी हो सकता है। मैं ये मैं ये क्यों बोलूं कि बुरा परफॉर्म करा है। हो सकता है अच्छा भी परफॉर्म किया हो। 10 की जगह 10.25% कमा 1:31:08 दिया हो। ये भी हो सकता है। बट एग्जैक्ट 10 कमाना मुश्किल है क्योंकि म्यूच्यूल फंड के खर्चे भी हैं। अब एक बात समझो म्यूच्यूल फंड में परेशानियां क्या है? पहली म्यूचल फंड की परेशानी है कि म्यूच्यूल फंड को कुछ पैसा कैश में रखना पड़ता है ताकि अगर कोई रिडीम कराने आ जाए तो उसको रिडीमशन देनी है तो उतने पैसे पर म्यूच्यूल फंड कमा नहीं पाता। म्यूचल फंड में कुछ खर्चे भी होते हैं, एक्सपेंसेस भी होते हैं। अभी आपने पढ़ा ट्रेल कमीशन देनी है, ये कमीशन देनी है। प्लस जो म्यूचल फंड मैनेजर्स हैं, जो फंड मैनेजर्स हैं उन्हें भी तो पैसा देना है। तो उनकी भी तो एक्सपेंसेस इनवॉल्वड है। तो यानी म्यूच्यूल फंड में एक्सपेंस इनवॉल्व है। जबकि निफ्ट्टी 50 में तो एक्सपेंस इन्वॉल्व नहीं है। तो क्या इन दोनों की कमाई हमेशा बराबर आ सकती है? टेक्निकली स्पीकिंग बराबर नहीं आनी चाहिए। बोलना जरा मैंने क्या कहा? टेक्निकली स्पीकिंग बराबर नहीं आनी चाहिए। तो आती भी नहीं। तो वो थोड़ी ऊपर या थोड़ी नीचे होती है। उस चीज को बोलते हैं ट्रैकिंग एरर। पर ट्रैकिंग एरर निकालते कैसे हैं? ये इंपॉर्टेंट है क्योंकि इसका एक टिपिकल फार्मूला है। स्टैंडर्ड डेविएशन का फार्मूला है। लेकिन उसमें भी एक वेरिएशन है। स्टैंडर्ड डेविएशन जब हम निकालते थे याद करो। जैसे हम x - x² / n कर देते थे। यहां n नहीं होगा n - 1 होगा। यह भी याद 1:32:10 रखना है। फॉर्मूला याद रखना पड़ेगा आपको, है ना? देखिए। तो अल्फा इंडेक्स है वह निफ्ट्टी 50 को ट्रैक कर रहा है और मंथली रिटर्न कितनी है? 6 महीने की देखो यह फंड की रिटर्न है और यह बेंचमार्क की रिटर्न है। बेंचमार्क मतलब ये निफ्ट्टी 50 की रिटर्न होगी। जो हमारा बेंचमार्क है जिसको हम नाप रहे हैं जिसको हम फॉलो कर रहे हैं। मेरी स्पीड ठीक है। ज्यादा तेज तो नहीं चल रहा मैं? ठीक है ना? यानी हमने 6 महीने में इतना पैसा कमाया। और बेंचमार्क यानी जो निफ्ट्टी 50 है उसने 6 महीने में इतना पैसा कमाया। तो भैया हम निफ्टी को तो फॉलो कर रहे हैं। बात तो सही है सर हम निफ्टी को फॉलो कर रहे। लेकिन हम जब निफ्टी को फॉलो करें तो क्या पूरा फॉलो कर रहे हैं? नहीं। यहां पर हमने ज्यादा कमाया। यहां पे हमने कम कमाया। यहां पे हमने ज्यादा कमाया। यहां हमने कम कमाया। यहां हमने कम कमाया। यहां हमने ज्यादा कमाया। तो इसलिए हमने डी निकाल दिया। डी मतलब डेविएशन निकाल दी। फंड की रिटर्न माइनस बेंचमार्क रिटर्न। यही सर यही तो पढ़ रहे हैं सर। हमें डेविएशन ही तो पढ़नी है। हमें ट्रैकिंग दी एरर ही तो करना है। ट्रैकिंग दी एरर ही तो 1:33:13 करना है कि हमारी कमाई में और इंडेक्स की कमाई में कितने का गैप रह गया। तो ये गैप रह गया। तो अब इन सबका मीन निकालो। मीन कैसे आता है? मीन आता है सम ऑफ़ ऑब्जरवेशन अपॉन नंबर ऑफ़ ऑब्जरवेशन। तो मीन कैसे आया? यानी मैं अगर डेविएशन बाहर निकालूं तो उसका मतलब होगा सम ऑफ डेविएशंस अपॉन नंबर ऑफ डेविएशंस। सर बात तो सही है। सम ऑफ डेविएशन अप नंबर ऑफ डेविएशन। सम ऑफ डेविएशन आ रहा है वन। नंबर ऑफ डेविएशन आ रहा है सिक्स। तो ये आ गया 0.167%। सर ये परसेंटेज क्यों आ रही है? क्योंकि ये सारी चीजें परसेंटेज में ही है मुन्ना। ये जो डेविएशन निकल रही है ये सब परसेंटेज में ही निकल रही है। ये देखो ये हमारी कमाई भी परसेंटेज में थी। बेंचमार्क भी परसेंटेज में था। तो जब दोनों को माइनस करोगे तो डेविएशन की भी परसेंटेज ही आ रही है। मतलब डाटा ही परसेंटेज में है। तो यह भी 1% / 6 था तो 1667 हो गया। क्या आपको डेविएशन निकालने तक समझ आ गया? d बार निकालने तक समझ आ गया। मतलब मीन निकालने तक समझ आ गया। यह एवरेज ऑफ डेविएशन है। अब 1:34:13 क्या करते हैं? d - d बार तो ये डेविएशन हुई। मतलब बेसिकली d - d बार करो और फिर उसका स्क्वायर करो। मतलब जो डेविएशन आई है आपकी उसका मीन निकालो और उसका स्क्वायर करो। फिर डेविएशन निकाली फिर उसका स्क्वायर किया। ये हमारा टोटल आ गया। मतलब अगर मैं आपको यह पूछूं कि ट्रैकिंग एरर का फार्मूला क्या है? तो पता है आप मुझे क्या बताओगे? आप कहोगे सर देखो ट्रैकिंग एरर का फार्मूला जिसे हम TE बोलते हैं प्यार से। उसका मतलब होता है अंडर रूट ऑफ़ σ d - d बार² / n - 1 ये फार्मूला होता है ट्रैकिंग एरर का। ये फ़ूला हमने थ्योरी में पढ़ रखा है। आप थ्योरी बुक खोल लो। आपको ये फार्मूला मिल जाएगा। ये फ़ूला क्या कहता है? d - d बार d बार तो हमने निकाल लिया था। तो हर d में से d बार माइनस करो। फिर उसका स्क्वायर करो। फिर डिवाइड बाय n - 1 करो। फिर अंडर रूट करो। तो ट्रैकिंग एरर आएगा। यानी हमारा ट्रैकिंग एरर आया 0.42% 1:35:15 ट्रैकिंग एरर आया 0.42%। अब इसका मतलब क्या है? अगर मैं आपको यह बोलूं कि ट्रैकिंग एरर 0.42% है। तो इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है द ट्रैकिंग एरर ऑफ़ 0.442% शोज़ दैट द फंड क्लोजली मिरर्स दी बेंचमार्क। यानी हम बेंचमार्क के बहुत नजदीक चल रहे हैं। ठीक है जी पैसिव फंड के लिए। बट अगर हायर ट्रैकिंग एरर होता तो वह इसलिए होता है क्योंकि ट्रांजैक्शन कॉस्ट ज्यादा है। एएमसी की फीस है एसेट मैनेजमेंट की। कैश रखना पड़ रहा है हमें। सैंपलिंग की बायस है। हम उस तरीके से शेयर्स को सेलेक्ट नहीं कर पा रहे। है ना? [गला साफ़ करने की आवाज़] तो बेसिकली द गोल फॉर अ पैसिव फंड इज़ ट्रैकिंग एरर नियर ज़ीरो। यानी हमारा ऐ ये होता है कि हम ट्रैकिंग एरर ज़ीरो के नजदीक ले आए। जितना वह जीरो के नजदीक होगा उतना अच्छा म्यूच्यूल फंड माना जाएगा। उतना अच्छा इंडेक्स फंड माना जाएगा। उतना अच्छा हम फंड मैनेजर की परफॉर्मेंस को समझेंगे जितना आप ट्रैकिंग एरर को जीरो के नजदीक ले आओगे। बट ज़ीरो पूरा ज़ीरो तो भगवान ही ला सकता है बेटा। इंसान नहीं ला सकता। इंसान से तो मिस्टेक होगी। इंसान तो 1:36:15 गलतियों का पुतला है। ठीक है जी। बोलिए ये बातें आपको समझ आई? मैंने क्या कहा? अच्छे से अच्छे बच्चे को समझ आ गया? बहुत बढ़िया। दोबारा तो ना बताऊं। समझ आ गया ट्रैकिंग एरर भी। एरर है बेटा। देखो एरर का मतलब है मूवमेंट है। अब वो पॉजिटिव भी हो सकती है, नेगेटिव भी हो सकती है। एरर का मतलब है मूवमेंट है। यानी ज्यादा या कम कमा रहे हैं। पर वो ट्रैकिंग एरर पॉजिटिव भी हो सकता है, नेगेटिव भी हो सकता है। इस पे हम चर्चा नहीं कर रहे हैं यहां। आइए एक नया कांसेप्ट पढ़ते हैं। साइड पॉकेटिंग। ये भी मैंने थ्योरी में पढ़ा रखा है बहुत डिटेल में और इसका प्रैक्टिकल भी मैं एक पढ़ाना चाहता हूं। ठीक है जी? आइए जरा क्या कहते हैं? सुनो एकदम आराम से पढ़ो। बेसिकली मैं एक लाइन और लिखवाना चाहूंगा इसमें अगर अगर आप लिखना चाहो तो कि ये हमारे फंड की परफॉर्मेंस है। ये बेंचमार्क की परफॉर्मेंस है। पहले हमने इन दोनों में से बेसिकली डेविएशन निकाली। डिफरेंस 1:37:16 निकाला। फिर इस डिफरेंस का स्टैंडर्ड डेविएशन निकाला। इस d का स्टैंडर्ड डेवशन मतलब d की मीन निकाली। d का पहले मीन निकाला। फिर d में से d का मीन माइनस किया। फिर उसको स्क्वायर किया। फिर उसको टोटल किया। फिर उसका स्टैंडर्ड डेविएशन निकाला। तो बेसिकली हम स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ द डेविएशन निकाल रहे हैं। ध्यान से सोचो। तुम स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ द डेविएशन निकाल रहे हैं। ऑफ द एरर निकाल रहे हैं। है ना? कूल। वापस आते हैं साइड पॉकेटिंग पे। साइड पॉकेटिंग क्या होता है? पहले इसकी कहानी सुन लो। जिन बच्चों ने मेरी थ्योरी पढ़ रखी है उन्हें तो ये पता होगा। जिन्होंने नहीं पढ़ रखी है वो शायद कंफ्यूज्ड हो इसलिए ध्यान से सुन लो कि क्या होती है साइड पॉकेटिंग। वैसे मैंने क्लास के अंदर बहुत डिटेल में समझा रखा है जब म्यूच्यूल फंड की थ्योरी पढ़ाई है। देखो होता क्या है? पहले कहानी को सुनते हैं। इमेजिन करो कि मेरे पास एक म्यूच्यूल फंड है। ठीक है जी। अब म्यूच्यूल फंड में मान लेते हैं कि कुछ सिक्योरिटीज है। आप इसके इन्वेस्टर हो। कहानी को सुनो। कहानी इंपॉर्टेंट है क्योंकि इस कहानी के बाद 1:38:17 क्वेश्चन बहुत आसान लगेगा। ठीक है जी। जीआई मतलब मान लो गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के पास मैंने पैसे लगाए 40 करोड़ के। मान लेते हैं कोई पीएसयू कंपनी के पास पैसे लगाए 25 करोड़ के। मान लो हमने Zenit कंपनी के पास पैसे लगाए 20 करोड़ के। और मान लो ओमेगा कंपनी के पास पैसे लगाए हमने 15 करोड़ के। तो बताना हमारी टोटल इन्वेस्टमेंट कितनी है? तो आप बोलोगे सर हमारी तो टोटल इन्वेस्टमेंट 100 करोड़ की है। क्या यहां तक बात समझ आ रही है? कुछ कर लिखने की जरूरत नहीं है। सब मैं फाइल वाइल आपको सब दे दूंगा। आप सिर्फ सुनो। भैया हमारे पास म्यूच्यूल फंड है। हमारा म्यूचल फंड जो है वो मान लो ₹100 करोड़ उसमें लगे हुए हैं। मान लो वो डेप्ट फंड है। डेप्ट फंड का मतलब क्यों? क्योंकि ये सारी डेप्ट में इन्वेस्टमेंट कर रखी है ना। बॉन्ड्स खरीदे हैं आपने अलग-अलग कंपनियों के। तो डे की बात हो रही है। ठीक है सर। कहानी को दोबारा समझाता हूं। हम सब लोग इन्वेस्टर हैं। हम लोगों ने एक म्यूच्यूल फंड को पैसा दिया। म्यूचल फंड ने वो पैसा डेप्ट में लगा रखा है अलग-अलग चार जगह पे। सरकार 1:39:17 की डेप्ट में, पीएसयू की डेप्ट में, ज़थ की डेप्ट में, ओमेगा की डेप्ट में। बढ़िया। इन सबकी डेप्ट हमने खरीदी हुई है। बॉन्ड्स खरीद रहे हैं। ठीक है? अब इन सब की अच्छी खासी रेटिंग है। जिंदगी बढ़िया चल रही थी। मान लेते हैं कि हम 5 करोड़ इन्वेस्टर्स हैं। मतलब 5 करोड़ म्यूच्यूल फंड यूनिट्स हैं। तो एक बात बताइए हर एक फंड की एनएवी जो होती है वो कितनी होगी इस वक्त? अगर 100 करोड़ की टोटल एनएवी है। 5 करोड़ यूनिट्स हैं तो हर एक यूनिट अभी ₹20 का होगा। यहां तक कहानी क्लियर है? यानी हर एक एनएवी अभी तक ₹20 का था। फिर आई बुरी खबर। अचानक से 15 अप्रैल की दिन था। अचानक से मैंने सुबह-सुबह अखबार खोला और मैंने पढ़ा कि ओमेगा कंपनी का दिवाला निकल गया है। अब कंपनी का दिवाला निकला है ओमेगा का। लेकिन परेशानी मुझे हो रही है। क्यों? क्योंकि मैं एक ऐसा इन्वेस्टर हूं। मैंने ओमेगा कंपनी के शेयर नहीं खरीदे हुए? नहीं खरीदे हुए। लेकिन मेरे पास एक म्यूचल फंड है। उस म्यूच्यूल फंड ने ओमेगा कंपनी में पैसा लगाया हुआ है। तो बताओ इनडायरेक्टली तो मैं भी एक्सपोज्ड हूं ओमेगा कंपनी के लिए। ठीक बात है। अब ओमेगा मैंने अखबार पढ़ा देखा भाई ओमेगा कंपनी डूब गई। अब ओमेगा कंपनी डूब गई तो मैंने सोर्सेस 1:40:19 वर्सेस से फोन करी। म्यूच्यूल फंड मैनेजर को फोन करा। मैंने कहा भैया ये तो कुछ बुरी खबर सुनने को आ रही है। कह रहा हां सर बुरी खबर तो हो गई है। जो आपकी 15 करोड़ की इन्वेस्टमेंट थी। अब आप ऐसे समझो कि बाकी की इन्वेस्टमेंट आपकी 85 करोड़ की रह गई है। ऐसे समझो मुझे समझा रहा है कि सर बाकी की इन्वेस्टमेंट तो आपकी 85 करोड़ की गुड इन्वेस्टमेंट है। उसके लिए तो आप खुश रहो। लेकिन यह जो 15 करोड़ की इन्वेस्टमेंट थी ओमेगा वाली। अरे भैया इसका तो बर्बादी हो गई है ओमेगा की वह तो 3 करोड़ की रह गई है वह इन्वेस्टमेंट। मतलब जो हमने बॉन्ड खरीदे हुए थे वह 20% ऑफ़ द वैल्यू पर आ गए। अब अचानक से मेरे दिमाग में क्या आएगा? मेरे दिमाग में आएगा जल्दी-जल्दी म्यूचल फंड से पैसा निकाल लेता हूं मैं। क्यों? क्योंकि अगर मैं जल्दी पैसा निकाल लूंगा तो शायद ओमेगा कंपनी का जो नुकसान है वो नहीं आएगा। अगर मैं म्यूचल फंड के पास पहुंच जाऊं और उनको बोलूं मेरे फंड रिडीम करो। तो जब वो मेरे फंड रिडीम करेंगे तो ये सारी इन्वेस्टमेंट्स अच्छी वाली इन्वेस्टमेंट बेचेंगे, पैसा देंगे। मेरी मेरे को हो सकता है पुरानी वाली एनवी वापस मिल जाए। ₹20 एनवी मिल जाए। तो मैं चला गया म्यूचल फंड के पास अपना पैसा रिडीम 1:41:19 कराने। एक बात बताओ क्या खाली मैं समझदार हूं? नहीं। सारे लोग ही समझदार हैं। इंफॉर्मेशन तो सभी के पास होगी। तो सब लोग पहुंच गए। आप सब भी पहुंच गए पैसा लेने। तो म्यूचल फंड बेचारा एक तरफ तो वैसे ही मार पड़ गई ओमेगा की। और अगर सारे लोग पैसा वापस मांगने आ जाएंगे तो बाकी के फंड भी बेचने लगेंगे। उनका भी दाम गिरने लगेगा और उनको भी पैसा वापस देना पड़ेगा। तो आपको नहीं लगता कि एक अनड्यू किसी एक कंपनी के डूबने की वजह से पूरी मार्केट को नुकसान होने लग जाएगा। पूरी मार्केट का दाम गिरने लग जाएगा। इसे रोकने के लिए बहुत दिमाग लगाया लोगों ने क्या करें? फिर एक कांसेप्ट बनाया गया साइड पॉकेटिंग। साइड पॉकेटिंग यूजुअली डेप्ट वाले म्यूच्यूल फंड्स में लगता है। क्यों? क्योंकि इक्विटी वाले म्यूच्यूल फंड में तो ऐसे कोई बता ही नहीं सकता कि कंपनी की सिचुएशन बुरी है। जब डूब जाती है तब पता लगता है। डूबने से पहले पता ही नहीं लग सकता। तो डूबने के बाद तो वैसे ही एनवी फॉल हो गई होगी। तो सुनो अब ये सिचुएशन है। तो आज अब क्या कांसेप्ट होता है म्यूच्यूल फंड में? म्यूच्यूल फंड में साइड पॉकेटिंग होती है। यानी अब आपका म्यूच्यूल फंड हाउस क्या कहता है? आपके पास मान लो आप एक अच्छे इन्वेस्टर हो। मान लो आपके पास 500 यूनिट्स थे। तो म्यूचल फंड कहता है कि भैया देखो ऐसा है आपके पास 1:42:19 500 यूनिट थे ₹20 वाले आपने कहा हां हां हां तो म्यूचल फंड कहता है कि अब ना हमने इसको अलग म्यूचल फंड मान लिया गुड वाला और यह स्ट्रेस्ड म्यूचल फंड है यानी डिस्ट्रेस्ड म्यूच्यूल फंड है यानी ये डिस्ट्रेस वाली पॉकेट अलग हो गई इसे पॉकेट अलग बोलो या म्यूच्यूल फंड अलग बोलो यानी एक तरीके से एक म्यूच्यूल फंड के दो हिस्से कर दिए जाते हैं। गुड वाले को अलग कर दिया जाता है 85 करोड़ को और जो 15 करोड़ का म्यूच्यूल फंड खराब हो गया जो जिसकी वैल्यू 3 करोड़ हो गई उसे अलग कर दिया जाता है। यानी आपके पास अगर 5 करोड़ टोटल यूनिट्स थे तो इसकी वैल्यू ₹17 पर यूनिट हो जाएगी। इसकी वैल्यू 60 पर यूनिट हो जाएगी। यानी हम सबके म्यूच्यूल फंड की वैल्यू अब कितनी हो गई? यानी अब जिन-जिन के पास 500 म्यूच्यूल फंड थे पुराने वाले उनके पास ये वाले भी 500 यूनिट रहेंगे और ये वाले भी 500 यूनिट आ जाएंगे। यानी आपके पास दोनों को पास दोनों के अलग-अलग 50-5000 यूनिट आ जाएंगे। यानी एक तरीके से [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेन पोर्टफोलियो को एक गुड पोर्टफोलियो रहने देते हैं और सेग्रगेट कर देते हैं। यानी अलग कर देते हैं डिस्ट्रेस पोर्टफोलियो को। यही इसका नाम है साइड पॉकेटिंग। साइड 1:43:20 पॉकेटिंग मतलब एक अलग पॉकेट बना देना। जैसे आप भी ऐसा करते हो कि आपके मम्मी पापा ने आपको कुछ पैसे दिए और बोला बेटा यह मान लो आपको ₹500 दिए उसमें और ₹100 दिए। बोला कि बेटा यह इस प इन इन ₹500 में से ₹100 मंदिर में चढ़ा देना। तो, आप ₹100 अलग जेब में रखते आपको पता है यह वाले खर्च नहीं होने चाहिए। वरना आपकी जेब में रहेंगे तो हो जाएंगे। तो आप उसे अलग जेब में रखते हो ना बाकी 400 खर्चते हो। तो इसी तरीके से साइड पॉकेट कर दिया। साइड पॉकेट करने का मतलब एक अलग पॉकेट में रख दिया कि भैया ये म्यूच्यूल फंड हमारे डूब चुके हैं। ये वाला पैसा हमारा डूब चुका है। 15 करोड़ की वैल्यू अब 3 करोड़ हो चुकी है। अब इसकी वैल्यू 60 पैसे। अगर आपको रिडीम कराना है। अगर आप आपको ज्यादा जोश है कि रिडीम कराना है तो करा लो भाई रिडीम। तो यह वाले यूनिट के ₹17 आपको मिल जाएंगे। यह वाले यूनिट के आपको 6 मिल जाएंगे। यानी आपको टोटल 17.6 पर यूनिट मिल जाएगा। मुझे एक बात बताना मुझे पर यूनिट कितने का नुकसान हो गया है? सर मेरा अच्छा खासा यूनिट ₹20 का था। अब उसकी टोटल वैल्यू 17.6 हो गई है। तो मुझे ₹2.6 पर यूनिट पे नुकसान ₹2.40 पर यूनिट पे नुकसान हो गया है। क्योंकि 12 करोड़ का नुकसान था। ऐसे भी सोच सकते हो 12 करोड़ का नुकसान हुआ। 5 करोड़ लोगों को तो हर एक यूनिट को ₹2.4 का नुकसान हुआ। ये बात क्लियर हो गई आपको? सेग्रगेशन समझ आ गई? 1:44:21 बढ़िया सर। सर मुझे ये पूरी बात समझ आ गई। फिर क्या होता है? फिर समय बीतता रहता है। इसकी वजह से क्या होता है पता है? फायदा क्या होता है कि म्यूच्यूल फंड वाले लोग ना रिडीम करने के लिए भागते हुए नहीं आते कि मेरे पैसे वापस दो। मेरे पैसे सबको पता है। हो गया नुकसान। एक अलग यूनिट बन गया। अब बिकना है बेचे। अब लेकिन क्या है कि आपके पास ये पड़ा है। ठीक है? अब क्या सर ऐसा भी हो सकता है कि मैं इसको रिडीम करा लूं और इसको रिडीम ना कराऊं कि ये कल को रिकवरी ज्यादा की होगी तब वापस पैसे लूं। हां ये भी कर सकते हो। ये समझदारी की बात है। मतलब आप इसे रिडीम मत करो क्योंकि आज कंपनी डूबी है पर कंपनी को रिऑर्गेनाइज करने वाले लोग आएंगे। एनसीएलटी बैठेगा। कोई और बैठेगा। कुछ तो रिकवरी ज्यादा हो सकती है। मान लो एक साल बीत गया। 1 साल बाद आपके इस वाले फंड की वैल्यू जो 90 जो 85 करोड़ के थे मान लो वो 95 करोड़ के हो गए। और यह जो 3 करोड़ की वैल्यू थी मान लो यह 6 करोड़ की हो गई तो अब क्या होगा? 1 साल बाद आपकी एनएवी कितनी हो जाएगी? देखो इसकी वैल्यू ₹19 हो जाएगी और इसकी वैल्यू कितनी हो जाएगी? ₹1.2 तो यानी आपकी टोटल वैल्यू कितनी हो जाएगी म्यूच्यूल फंड की? ₹20.2 यानी रिकवरी और थोड़ी-थोड़ी रिकवरी होने लगी है। 1 साल बाद ऐसा भी हो सकता है 1:45:23 कि आपके मेन पोर्टफोलियो की वैल्यू ₹19 हो गई और डिस्ट्रेस पोर्टफोलियो की वैल्यू 1.2 हो गई। तो ऐसे तो कहानी में कुछ भी ट्विस्ट हो सकता है। समझ आ गई बात? सर मुझे बात समझ आ गई। अब इसका क्वेश्चन कराओ। बिल्कुल ठीक है। चलो क्वेश्चन करना स्टार्ट करते हैं। पढ़िए। ये जो कहानी मैंने डिस्कस करी यही आपका क्वेश्चन है। मैंने एक तरीके से उसी क्वेश्चन को कहानी बना के आपके लिए डिस्कस कर दिया था ताकि आप जल्दी से जल्दी ये सारी बातें मेरी समझ पाएं, सुन पाएं, जान पाएं। आइए दोस्तों, हम इस कहानी को और डिटेल में समझने की कोशिश करते हैं। देखिए, वो यह कहता है कि सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज परमिटेड साइड पॉकेटिंग इंडिया में अलव कर दी है डेप्ट वाले इंस्ट्रूमेंट्स की म्यूच्यूल फंड के लिए। अल्फा कॉर्पोरेट फंड है जिसने इन चार जगहों पे पैसे लगाए हुए हैं और उसकी रेटिंग इतनी इतनी है। उसका टोटल एसेट अंडर मैनेजमेंट 100 करोड़ है। यानी हमने इधर पैसा लगाया हुआ है। टोटल पैसा 100 करोड़ का लगाया हुआ है। यूनिट आउटस्टैंडिंग 5 करोड़ है तो 100 करोड़ लगाए हुए हैं। 5 करोड़ यूनिट है। तो यानी हर एक यूनिट अभी ओरिजिनल टाइम पे ज़ीरो पीरियड पे ₹20 का होगा। ठीक है। सर ठीक है। आगे बताओ। अब वो 1:46:25 कहता है कि भैया ऐसा है। ऑन 15th अप्रैल अचानक से 15 ये 1 अप्रैल की बात अचानक 15 दिन बाद ओमेगा इंफ्रा डिफॉल्टेड ऑन द इंटरेस्ट पेमेंट। अबे यार यह ओमेगा इंफ्रा ने कोई गलती कर दी और उसकी वैल्यू जो है वह 15 करोड़ से 3 करोड़ पे आ गई। यानी आपके टोटल पोर्टफोलियो के अब दो हिस्से हो जाएंगे। 85 करोड़ गुड वाला पोर्टफोलियो, 15 करोड़ ओमेगा वाला पोर्टफोलियो और उस 15 करोड़ की वैल्यू अब 3 करोड़ हो गई। ठीक है? एएमसी डिसाइडेड टू क्रिएट अ सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो यानी साइड पॉकेट। यानी हमने इसे सेग्रगेट करने का सोच लिया, अलग करने का सोच लिया। द मेन पोर्टफोलियो रिटेन हेल्दी एसेट्स। मेन पोर्टफोलियो में सारे के सारे हेल्दी एसेट्स को रखा और अनहेल्ी एसेट को अलग रखा। ठीक है जी। द सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो कंटेन डिस्ट्रेस ओमेगा इंफ्रा वैल्यूड एट 3 करोड़ यानी अलग कर दिया डिस्ट्रेस वालों को 3 करोड़ के पोर्टफोलियो को अलग कर दिया। आफ्टर सेग्रगेशन मेन पोर्टफोलियो 85 करोड़ का है। सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो 3 करोड़ का है। टोटल रिवाइज़्ड वैल्यू 88 करोड़ है। और एग्ज़िस्टिंग इन्वेस्टर रिसीव्ड यूनिट इन बोथ पोर्टफोलियोज़ प्रोपोर्शननेटली। यानी जिनके पास 500 यूनिट था। जिनके पास एक यूनिट था। मान लो मेरे पास इधर एक यूनिट 1:47:27 था तो मुझे अब दोनों का एक-एक यूनिट मिल जाएगा। अगर मेरे पास पांच यूनिट थे तो मुझे दोनों के पांच-प यूनिट मिल जाएंगे। गुड वाले के भी और डिस्ट्रेस वाले के भी। समझ आता है ना आपको कि सेम रेशियो में दोनों को यूनिट मिल जाएंगे। चलिए क्वेश्चन पढ़ते हैं। वो आफ्टर वन ईयर की बात कर रहा है। एक साल बाद मेन पोर्टफोलियो 95 करोड़ का हो गया। यानी जो 85 करोड़ का पोर्टफोलियो था, एक साल बाद यह 95 करोड़ का हो गया। और जो सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो था, वह 6 करोड़ का हो गया। जो सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो 3 करोड़ का होता था, वह फ्यूचर में 6 करोड़ का हो गया। तो नंबर ऑफ यूनिट्स तो तब भी सेम ही रहेंगे। तो दोनों की वैल्यू 19 और 1.2 आ गई। ठीक है? आप मिस्टर राजेश हो जिसके पास 500 यूनिट है। आप हो मिस्टर राजेश और राजेश के पास है 500 यूनिट। कूल सुपर कूल सर। यहां तक की सारी की सारी बातें हमें आ जाती हैं समझ। अब आगे बढ़ते हैं। पहला एमसीक्यू। व्हाट वाज़ द एनएवी ऑफ़ द स्कीम बिफोर द क्रेडिट इवेंट? मतलब ये नुकसान होने से ये पंगा पड़ने से पहले हमारी वैल्यू कितनी थी? बताओ। सर देखो इस पंगा के पढ़ने से पहले हमारे पास 100 करोड़ के म्यूच्यूल फंड 1:48:27 एसेट्स थे और 5 करोड़ यूनिट थे। तो यानी हमारे म्यूच्यूल फंड की वैल्यू ₹20 थी। तो हमारे म्यूच्यूल फंड की वैल्यू ₹20 थी। यही हमारा उत्तर होना चाहिए ₹20। अगला व्हाट इज द इमीडिएट लॉस इन एयूएम? लॉस इन एयूएम कितना होगा? जब ओमेगा इंफ्रा डूबता है। जब ओमेगा इंफ्रा डूबता है, उसकी ओरिजिनल वैल्यू थी 15 करोड़। रिवाइज्ड वैल्यू है 3 करोड़। यानी 12 करोड़ का लॉस है। अगर 12 करोड़ का लॉस है तो यह 12 करोड़ का जो लॉस है यह 5 करोड़ यूनिट होल्डर्स सहेंगे तो नुकसान हो गया 2.4 का। तो नुकसान कितने का हो गया? 2.4 का नुकसान हो गया हमारा। 12 करोड़ का टोटल नुकसान। 2.4 करोड़ पर यूनिट का नुकसान। अच्छा अगर उसने टोटल मांगा है तो टोटल में 12 करोड़ पर यूनिट मांगता तो 2.4 करोड़। ₹2.4 पर यूनिट। यही आ रहा था ना? कूल। अब वो यह कहता है कि व्हाट इज द एनएवी ऑफ़ द मेन प्रोजेक्ट इमीडिएटली 1:49:29 आफ्टर सेग्रगेशन? यानी इस बंटवारे के बाद मेन जो पोर्टफोलियो था उसकी वैल्यू क्या थी? ₹17 पर यूनिट। ₹17 पर यूनिट। क्यों थी? क्योंकि वो ₹85 करोड़ की वैल्यू थी और 5 करोड़ यूनिट होल्डर तो ₹17 की वैल्यू आएगी। यानी ₹17 की वैल्यू थी। ठीक है सर। व्हाट [नाक से की जाने वाली आवाज़] इज़ द एनवी ऑफ़ सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो? जिस पोर्टफोलियो को हमने अलग कर दिया है, बाहर निकाल दिया है, उसकी क्या वैल्यू थी आफ्टर साइड पॉकेटिंग? तो, उसकी वैल्यू थी 3 करोड़। डिवाइडेड बाय 5 करोड़ यूनिट। यानी 0.60। यानी उसकी वैल्यू थी 0.60। यह भी क्लियर है? जी हां सर। अब टोटल अवेलेबल ऑन टू एकिस्टिंग इमीडिएटली आफ्टर सेग्रगेशन। इमीडिएटली आफ्टर सेग्रगेशन कितना हो गया? 17 + 0.6 यानी 17.6 आपकी कंबाइंड वैल्यू थी। तो कंबाइंड वैल्यू कितनी थी? 17.6। 1:50:34 ठीक है सर। हाउ मेनी सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो यूनिट विल मिस्टर राजेश रिसीव? एक बात बताओ अगर आप मिस्टर राजेश हो आपके पास ओरिजिनल यूनिट 500 थे तो नए यूनिट कितने मिलेंगे वो भी 500 ही मिलेंगे सेम मिलेंगे उसमें कोई डिफरेंस थोड़ी ना है तो 500 ही मिलेंगे व्हाट [नाक से की जाने वाली आवाज़] इज द वैल्यू ऑफ़ मिस्टर राजेश इन्वेस्टमेंट इमीडिएटली आफ्टर सेग्रगेशन जैसे ही सेग्रगेशन होगा आपके पास ₹00 टोटल यूनिट है तो ₹00 ₹17 वाले यूनिट होंगे और ₹006 वाले यूनिट होंगे तो आपकी टोटल वैल्यू कितनी बन जाएगी 500 * 17.6 यानी आपके पास टोटल वैल्यू बन जाएगी 880 की। आपके पास टोटल वैल्यू हो जाएगी 8,80,000 की। ठीक है जी। जी हां। अब वो कहता है वन ईयर लेटर व्हाट इज द एनवी ऑफ़ द मेन पोर्टफोलियो? वो कहता है जब एक साल बीतेगा तो 1 साल के बाद हमारे मेन पोर्टफोलियो की एनवी क्या होगी? जब एक साल बीत जाएगा तो हमारे मेन पोर्टफोलियो की एनवी क्या होगी? 1:51:35 तो आप कहोगे देखो जी भैया जब एक साल बीत जाएगा तो हमारा मेन पोर्टफोलियो जो है उसकी एनएवी होगी इतनी। देखो जरा ध्यान से कहानी को 19 होगी मेन पोर्टफोलियो की और सेग्रगेटेड की होगी 1.2 और टोटल होगी 20.2 तो कह रहा है एक साल बाद मेन की पोर्टफोलियो की वैल्यू क्या होगी? ₹95 करोड़। यूनिट्स हम मान के चल रहे हैं सेम ही है। तो उसकी वैल्यू होगी ₹19 पर यूनिट। तो ₹19 पर यूनिट। यह हमारा आंसर होगा। व्हाट इज द एनवी ऑफ़ सेगटेड पोर्टफोलियो आफ्टर रिकवरी? रिकवरी के बाद कितनी हो जाएगी? जब रिकवरी हो जाएगी तो 6 करोड़ की वैल्यू हो जाएगी। 5 करोड़ से डिवाइड हो जाएगी। तो ₹1.2 हो जाएगी वैल्यू। यानी बी पार्ट आंसर होगा। व्हाट इज द वैल्यू ऑफ़ मिस्टर राजेश इन्वेस्टमेंट आफ्टर वन ईयर? बताना। वन ईयर बाद आपकी वैल्यू क्या होगी इन्वेस्टमेंट की? वन ईयर बाद देखो बेटा, हमारे पास दो पोर्टफोलियो हैं। एक ₹19 वाला, एक ₹1.2 वाला। हमारे पास इसमें भी 500 यूनिट है। इसमें भी 500 यूनिट है। तो कंबाइंड वैल्यू 1:52:38 कितनी हो जाएगी हमारे यूनिट्स की? 1010000 यानी ये हमारे पोर्टफोलियो की कंबाइंड वैल्यू हो जाएगी। मैं जो स्पीड ले रहा हूं, ठीक है? आपको समझ आ रही है सारी बातें? व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग बेस्ट एक्सप्लेन साइड पॉकेटिंग? साइड पॉकेटिंग का मतलब क्या होता है? तो आप बोलोगे इसका मतलब होता है सेपरेशन ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट फ्रॉम हेल्दी एसेट। यही तो कहानी सुनाई मैंने कि हमारे पास जो टोटल एसेट है उसमें से हेल्दी एसेट्स को अलग कर देते हैं। स्ट्रेस्ड एसेट्स को उसमें से निकाल कर बाहर कर देते हैं। साइड पॉकेट में रख देते हैं। अलग से एक पॉकेट में रख देते हैं। मतलब यह पता है कैसे हो रहा है? जैसे सोचो आपके घर में एक फ्रिज में एक बास्केट में टमाटर पड़े हैं। 10 टमाटर पड़े हैं। अब 10 में से दो टमाटर सड़ रहे हैं। थोड़े खराब हो रहे हैं। इतने भी नहीं हो रहे कि फेंक दो। लेकिन इतने भी नहीं हो रहे कि गुड टमाटर उसमें पड़े रहने दो। तो आप क्या करते हो? तो उन्हें उठाकर एक अलग टमाट अलग बास्केट में रख देते हो ताकि वो खराब ना करें और अच्छे टमाटर को। तो इसी को बोलते हैं बेटा साइड पॉकेटिंग कि आप खराब टमाटर अलग कर दोगे। वही हम कर रहे हैं कि खराब इन्वेस्टमेंट्स को अलग कर 1:53:38 देंगे। प्राइमरी ऑब्जेक्टिव क्या है इसका? साइड पॉकेटिंग का। देखो प्राइमरी ऑब्जेक्टिव है प्रिवेंट पैनिकिक रिडमशन ऑर्बिट्राज। मैंने आपको बोला ना कि वरना क्या होता है? लोग अचानक से ऑर्बिट्राज करने आ जाते हैं। जल्दी-जल्दी अपने अपनी यूनिट रिडीम करने आ जाते हैं कि अरे ओमेगा डूब गया, हमारा पैसा ना डूब जाए। चलो रिडीम करो। इधर लोगों को पता है भैया डूब गया तो डूब गया। ओमेगा की अलग पोर्टफोलियो बन चुका है। बाकी का अच्छा पोर्टफोलियो। अब आप रिडीम करोगे अच्छे वाले पोर्टफोलियो को तो उल्टा कमाई नहीं आएगी फ्यूचर में। तो लोग संतुष्ट हो जाते हैं कि चलो अब हो गया नुकसान कोई बात नहीं। अब अब रिडीम करके आप कमाने की एक्स देखो एक बात बताओ। अगर आपके यूनिट हाई वैल्यू पे रिडीम हो जाए तो आपको नहीं लगता कि बाकी लोगों का नुकसान हो जाएगा। सोच के देखो अगर आपके यूनिट हाई वैल्यू पर रिडीम हो जाए तो आपको नहीं लगता बाकी लोगों का नुकसान है। सर बाकी का क्यों नुकसान है? यार एक बात बताओ आपने अपने यूनिट गुड वैल्यू पर रिडीम कर लिए और नुकसान सारा का सारा ओमेगा का बचे हुए यूनिट होल्डर को हो जाएगा। तो बाकियों का नुकसान है ना उसे रोकने का तरीका है ये। पैनिकिक सेलिंग का रोकने का तरीका है। व्हिच इन्वेस्टर रिसीव सेग्रगेटेड 1:54:40 पोर्टफोलियो। किन्हें मिलता है सेग्रगेटेड पोर्टफोलियो? उन सबको मिलता है जिनके पास पहले यूनिट्स थे। यानी इन्वेस्टर एक्सिस्टिंग ऑन दी सेग्रगेशन डेट? जिस दिन सेग्रगेशन हुआ उस दिन जितने भी इन्वेस्टर हैं सबको मिलेगा। साइड पॉकेटिंग इज़ जनरली अलाउड इन डेप्ट म्यूच्यूल फंड्स। तो ये ध्यान रखना डे म्यूच्यूल फंड जिनके ऊपर कोई क्रेडिट इवेंट हुआ है। क्रेडिट इवेंट मतलब जिनके साथ कोई दुर्घटना हुई है जिनकी कोई इन्वेस्टमेंट डूबी है उन लोगों के लिए अलाउड है। अब आगे पढ़िए। इन अस्यूम इंस्टेड ऑफ़ 6 करोड़ रिकवरी फाइनल रिकवरी फ्रॉम ओमेगा Infraided इज़ 10 करोड़। अच्छा जी। फाइनल रिकवरी 10 करोड़ की है। यानी ऐसे समझो हमारे पास दो पोर्टफोलियो थे। एक 85 करोड़ वाला, एक 3 करोड़ वाला। इसकी वैल्यू एक साल बाद हो गई है 95 करोड़। लेकिन इसकी वैल्यू पहले हम बोल रहे थे 6 करोड़। अब कह रहा है सिक्स नहीं है। सिक्स की जगह 10 करोड़ हो गई है उसकी वैल्यू। उसकी वैल्यू 10 करोड़ हो गई है। तो अब क्या करें? अब आप इधर समझो। इसे डिवाइड बाय 5 करोड़ यूनिट करो। इसे डिवाइड बाय 5 करोड़ यूनिट करो। ये 19 हो जाएगा। ये टू हो जाएगा। तो टोटल वैल्यू आपके यूनिट की ₹21 हो जाएगी। 1:55:40 टोटल वैल्यू आपकी यूनिट की 21 हो जाएगी। तो यह पूछ रहा है टोटल वैल्यू 21 हो जाएगी। 21 * 50000 यानी आपकी टोटल वैल्यू ₹150000 पे आ जाएगी। क्या मेरी बातें आपको समझ आई? आपके पैसे की टोटल वैल्यू ₹1,50,000 पे आ जाएगी। क्या ये बातें क्लियर है बेटे आपको? इसी के साथ म्यूचल फंड में जो जो क्वेश्चंस हमने पढ़ने चाहिए थे एक्स्ट्राचर में वो हमने पढ़ लिए हैं और मैं आशा करता हूं ये सब आपको समझ भी आ गए होंगे। ठीक है जी कर लेना इन्हें रिवाइज अच्छे से। ठीक है बेटा दोस्तों कुछ बच्चे शार्पी रेश्यो और सॉर्टिनो रेशियो के बारे में जानना चाहते थे। ये कुछ ऐसे टॉपिक्स हैं जो आपके मॉड्यूल में थ्योरिटिकली देखो शार्पी के तो क्वेश्चन हमने प्रैक्टिकली पढ़े हुए हैं। सर्टिनो प्रैक्टिकली डिस्कस्ड नहीं है लेकिन उसकी थ्योरी बुक में डिस्कस्ड है। अगर आप इंस्टट्यूट की किताब उठाकर देखते हैं म्यूच्यूल फंड चैप्टर में तो 1:56:42 उन्होंने मेजर्स के अंदर शार्पी रेशियो को भी इंडिकेट किया हुआ है जिसके हमने क्वेश्चंस पढ़े हुए हैं। और उन्होंने ट्रेनर ट्रेनर के भी प्रैक्टिकल हमने पढ़े हुए हैं। सर्टिनो भी डिस्कस किया है। अब सर्टिनो का प्रैक्टिकल नहीं पूछा गया है। मॉड्यूल के अंदर नहीं है प्रैक्टिकल। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि इसे पढ़ लेना चाहिए, इसे समझ लेना चाहिए। क्या मतलब है इसका? आइए इसका डिफरेंस को समझते हैं। देखो जब हम शारपी रेशियो निकालते हैं तो वो मानता है कि हमारा पोर्टफोलियो जो है वो कितनी एक्सेस रिटर्न कमा रहा है। एक्सेस रिटर्न कमाने का मतलब होता है कि रिस्क फ्री रेट से कितना अधिक कमा रहा है। तो इसे बोलते हैं एक्सेस रिटर्न। यही बात हम सर्टिनो में भी देखते हैं कि एक्सेस रिटर्न कितनी है। यानी हम रिस्क फ्री रेट से कितना कमा रहे हैं। बेसिकली हम यह कह सकते हैं कि जो रिस्क फ्री रेट है मान लो अगर 6% है रिस्क फ्री रेट तो हम रिस्क फ्री से कितना ज्यादा कमा रहा है हमारा पोर्टफोलियो तो वो जोखिम की कमाई है ना बेसिकली जोखिम लेने की वजह से हम कितना अधिक कमा रहे हैं तो ये हमारी एक्सेस रिटर्न न्यूमैरेटर में आ जाती है। बट शार्पी क्या करता है? टोटल स्टैंडर्ड डेविएशन लेता है। पूरे पोर्टफोलियो की स्टैंडर्ड डेविएशन लेता है। यानी हमारे पोर्टफोलियो में मान लो पांच छह शेयर्स हैं। तो उन पांच छह शेयर्स की कुल मिला के 1:57:40 स्टैंडर्ड डेविएशन कलेक्टिवली कितनी बनती है वो डिनोमिनेटर में हम दिखाते हैं। पूरे पोर्टफोलियो की स्टैंडर्ड डेविएशन। चाहे वो शेयर अच्छा परफॉर्म कर रहे हो, चाहे बुरा परफॉर्म कर रहे हो। मतलब उन्होंने हमारे बेंचमार्क से ज्यादा कमाया हो, हमारी मिनिमम एक्सेप्टेबल रेट से ज्यादा कमाया हो, रिस्क रेट से ज्यादा कमाया हो या रिस्ट्री रेट से कम कमाया हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। हमने सबको लेना है। ये कहता है शारपी रेशियो और लेकिन सर्टिनो कहता है कि ये गलत है। आप सब तरफ कैसे ले सकते हो? देखो अगर मान लो आपने रिस्क फ्री रेट लिया है 6%। मान लेते हैं क्वेश्चन में गिवन होगा। आपको एग्जाम में जब आप क्वेश्चन करोगे तो आपको गिवन होगा। मान लो रिस्क फ्री रेट है 6%। तो अगर आपने 6% रिस्क लिया है तो 6% से अधिक की कमाई देख रहे हो। तो आपको स्टैंडर्ड डेविएशन भी उन्हीं की देखनी चाहिए जो 6% से नीचे कमा रहे हैं। जब रिस्क हो रहा है क्योंकि आपको डिनोमिनेटर में रिस्क रखना है। रिस्क का मतलब क्या है? जब डाउन साइड डेविएशन आई है जब डिनोमिनेटर जो है हमारा वो 6% से भी कम कमा पाए तब की डेविएशन निकालनी चाहिए। तो सर्टिनो का और शार्पी का एक कंट्रास्ट है। ये कहता है सभी रिस्क देखो रिटर्न अगर 6% से ज्यादा आ रही है वो भी रिस्क है। 6% से कम आ रही है वो भी रिस्क है। लेकिन सर्टिनो कहता है ये गलत है। ऐसा नहीं है। 1:58:40 अगर 6% से ज्यादा कमाई आ रही है वो तो पॉजिटिव है। वो तो खुश होने की बात है। वो कोई रिस्क थोड़ी ना है। पर अगर 6% से कम कमाई आ रही है। मतलब जो आपकी मिनिमम एक्सेप्टेबल रिटर्न है क्वेश्चन में मेंशंड। उससे अगर आप कम कमा रहे हो तब आपको दिख दुख है ना तब आपकी डाउन साइड डेविएशन है ना। अपसाइड डेविएशन को क्यों गिन रहे हो? ये कहता है सर्टिनो तो सर्टिनो ने सिर्फ डाउन साइड स्टैंडर्ड डेविएशन को लिया जबकि शार्पी ने टोटल स्टैंडर्ड डेविएशन को लिया। अब देखो डिफरेंस प्रैक्टिकली बेटर समझ आएगा। शार्पी कैसे निकाल रहे हैं? मान लो हमारे पास 6 इयर्स का डेटा है। 6 साल में हमारे पोर्टफोलियो ने इतना इतना इतना इतना इतना कमाया। तो टोटल कितना हो गया? 40 यानी 40 की कमाई हुई 6 साल में तो डिवाइड बाय सिक्स करके एवरेज रिटर्न आ गई 6.67 यानी हमारे पोर्टफोलियो ने ऑन एन एवरेज 6.67 कमाया है। क्वेश्चन में गिवन है रिस्क फ्री रेट है 6%। तो हमारे पोर्टफोलियो ने 6.67% कमाया यानी थोड़ा तो अच्छा परफॉर्म किया 67% तो ज्यादा कमाया। ठीक है? तो एक्सेस रिटर्न आ गई 67% क्योंकि रिस्क फ्री रेट 6% था और हमारे पोर्टफोलियो ने कमाया 6.67 यानी हमने67% ज्यादा कमाया। लेकिन इस ज्यादा को कमाने के लिए रिस्क भी 1:59:42 तो लिया। तो रिस्क कितना लिया वो नापता है शार्पी टोटल स्टैंडर्ड डेविएशन से। तो हमने डेविएशन निकाली। डेविएशन कैसे निकालते हैं? जो हमारी ये रिटर्न्स हैं इन्हें एवरेज रिटर्न से माइनस करो। यानी रिटर्न में से एवरेज रिटर्न माइनस कर दो। ये आपकी डेविएशन आ गई। अब इन सब डेविएशन को स्क्वायर कर दो। तो अगर आप डेविएशंस को स्क्वायर कर दोगे और फिर इन सबका टोटल कर दोगे तो डेविएशंस का टोटल आ गया। अब डेविएशन के टोटल को न्यूमैरेटर में रखो। डिवाइड बाय नंबर ऑफ इयर्स करो। जैसे ये 6 साल थे तो नंबर ऑफ़ टर्म्स एट सिक्स से डिवाइड किया। अंडरू रूट किया। स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो आ गई। ऐसे ही तो निकालते हो। अब स्टैंडर्ड डेविएशन पोर्टफोलियो। लेकिन आपको पता है स्टैंडर्ड डेविएशन पोर्टफोलियो निकालते हुए आप एक गलती कर रहे हो। क्या? आप पॉजिटिव को भी डेविएशन गिन रहे हो। अरे भैया पॉजिटिव को डेविएशन क्यों गिन रहे हो? अगर आप ज्यादा कमा रहे हो तो वो डेविएशन थोड़ी ना है। वो तो भली बात है। पर यहां पे हम उसे भी डेविएशन में गिन रहे हैं। उसे भी रिस्क में गिन रहे हैं। तो ये हमने टोटल रिस्क निकाला। टोटल रिस्क को डिनोमिनेटर में रखा। ये हमारी शार्पी रेशियो आई। शारपी रेशियो 567 आने का मतलब क्या है? कि अगर हम 1% एक्स्ट्रा रिस्क ले रहे हैं तो उसकी वजह से हम 0.567% एक्स्ट्रा कमा रहे हैं। 2:00:42 मतलब अगर हम 1% एक्स्ट्रा जोखिम ले रहे हैं। डेविएशन यानी जोखिम यानी रिस्क। अगर हम स्टैंडर्ड डेविएशन 1% ले रहे हैं तो हम इतना एक्स्ट्रा कमा रहे हैं उसकी मदद से तो ये इसकी इंटरप्रिटेशन हो गई। शार्पी तो आपको आता है। आपने बहुत सारे क्वेश्चन इसके प्रैक्टिकली पढ़े हुए हैं। हमने शार्पी, ट्रेनर, जसन के बहुत सारे क्वेश्चंस किए हुए हैं क्लास में। अब आते हैं सर्टिनो पे। सॉर्ट इनो क्या कहता है? देखो सर्टिनो रेशियो ये कहती है कि भैया ऐसा है अगर आप अधिक को भी रिस्क गिन रहे हो तो आप गलत कर रहे हो। तो आप क्या करो? जब भी आपने कमाई करी ये रिटर्न करी रिटर्न से एवरेज निकाल ली। यानी ये पोर्टफोलियो की एवरेज रिटर्न आ गई। ठीक है। पर इसमें एक बात डिफरेंट है। जैसे शार्पी में तो हम आर बार को माइनस करते थे ना जो एवरेज रिटर्न आती थी वो यहां माइनस करते थे। सॉर्टिनो में यूजुअली मिनिमम एक्सेप्टेबल रेट को माइनस करते हैं। मैं आपको वो बता रहा हूं जो ग्लोबली फॉलो होता है। ग्लोबली क्या फॉलो होता है कि आप रिटर्न में से मिनिमम एक्सेप्टेबल रिटर्न को माइनस करो। मिनिमम एक्सेप्टेबल रिटर्न यूजुअली आरएफ होती है। आरएफ मतलब रिस्क फ्री रेट होती है। ठीक है ना? तो जो क्वेश्चन में रिस्क 2:01:43 फ्री रेट है उसे सब में से माइनस करो। तो माइनस करके जबजब पॉजिटिव आया है तो उसे डेविएशन मत मानो क्योंकि पॉजिटिव का मतलब आप रिस्क फ्री रेट से ज्यादा कमा रहे हो। अगर आप रिस्क फ्री रेट से ज्यादा कमा रहे हो तो रिस्क किस बात का? फिर तो रिस्क ही नहीं है। तो उस रिस्क को ज़ीरो मानो। यानी स्टैंडर्ड डेविएशन को मतलब उनकी डेविएशन को ज़ीरो मानो। पर जब नेगेटिव है तो उसे रिस्क मानो। तो आपने इसको स्क्वायर किया, इसको स्क्वायर किया, इसको सबको स्क्वायर किया, टोटल किया। अब देख रहे हो ये टोटल कम कितना कम हो गया। क्योंकि अब हमने पॉजिटिव वाली डेविएशन को नहीं गिना। सिर्फ नेगेटिव वाली डेविएशन को गिना। तो फिर हमने स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ द पोर्टफोलियो निकाला बट डाउन साइड रिस्क के लिए डाउन साइड रिस्क मतलब सिर्फ जब सिक्योरिटीज का हमारी रिटर्न कम हो रही है 6% से तब के रिस्क तब का जो हमारा रिस्क आ रहा है वो 8.21 आ रहा है लेकिन यहां टोटल में थ्री नहीं लेंगे टोटल में सिक्स ही लेंगे ये बात ध्यान रखना कई बच्चे गलती से टोटल थ्री ले लेते हैं वो कहते हैं तीन ही बारी डाउन साइड है तो थ्री से नहीं इन ज़ीरो को भी काउंट करेंगे टोटल में तो डिवाइड बाय सिक्स करेंगे ठीक है ना तो ये हमारी डाउन साइड रिस्क हो गई अब वैसे ही न्यूमैरेटर तो सेम ही रहेगा पोर्टफोलियो की एक्सपेक्टेड रिटर्न कितनी ज्यादा है और 2:02:41 नीचे स्टैंडर्ड डेविएशन कितनी ज्यादा है? तो इसको गिन लिया हमने डेविएशन गिन ली। तो यह हमारा आंसर आ गया। यानी इंटरप्रिटेशन क्या है? कि अगर हम 1% ज्यादा रिस्क लेते हैं तो 0.0816% ज्यादा कमाते हैं। ये इंटरप्रिटेशन हो गई सर्टिनो की। अब आप मुझे बताओ कि आप किसको बेटर मानते हो? शार्पी को या सर्टिनो को? अलग-अलग बच्चों की अलग-अलग चॉइस हो सकती है। देखो एग्जामिनेशन में ज्यादातर शरारपी पूछा जाता है। पर अगर सर्टिनो कभी पूछ लिया गया तो कैसे करना है? मैंने वह भी आपको समझा दिया है। कि आपको मेरी बात समझ आ गई? मैंने क्या कहा? सर्टिनो भी समझ आ गया। सर्टिनो में एक बात समझो। अब क्योंकि इसके बारे में ICI ने कोई क्लेरिटी नहीं दी है। तो मुझे ऐसा लगता है कि शायद कभी-कभी गड़बड़ बुक कर सकते हैं। वो ये भी कर सकते हैं कि जो मिनिमम एक्सेप्टेबल रिटर्न की जगह यहां इसी 6.67% से ही आंसर निकाल दें। यानी जो डेविएशन है वो 6.67% से ही निकाल दें। तो उसमें आंसर थोड़ा सा चेंज हो जाएगा। देखो डेविएशन तो वो भी है पर अब डेविएशन किस बेंचमार्क के अगेंस्ट नाप रहे हो वो डिपेंड करेगा। मैंने आपको बताया कि ग्लोबली क्या 2:03:42 एक्सेप्ट होता है। दुनिया में एमएआर को यानी मिनिमम एक्सेप्टेबल रेट को रिस्क फ्री रेट को एक्सेप्ट किया जाता है। रिस्क फ्री रेट को एमआर मान के डेविएशन निकाली जाती है सर्टिनो की। बट क्या सर्टिनो रेशियो की कोई और वेरिएशन हो सकती है जहां हम एमए आर की जगह rf को ही माइनस ना करें। हम r ड को ही माइनस करें। कर सकते हो। वो उसका डेविएटेड वर्जन होगा। डिफरेंट वर्जन होगा। इट मे आल्सो बी एक्सेप्टेड एज करेक्ट। ठीक है जी? बातें समझ आ गई। बस इतना ही डिफरेंस था। शार्पी टोटल रिस्क को डिनोमिनेटर में रखता है और सर्टिनो कहता है सिर्फ डाउन साइड रिस्क को डिनोमिनेटर में रखो। बस यही फर्क है और कोई फर्क नहीं है। चले बेटा हम इससे आगे समझ आ गया आपको ये बात? चलो शार्पी और सर्टिनो का डिफरेंस भी आपको समझ आ गया। वेलकम दोस्तों आज जो टॉपिक हम एनेक्शस में यानी एक्स्ट्रा क्वेश्चंस में पढ़ रहे हैं वो है ब्लैक शोज़। पहले डेरिवेटिव्स पढ़ना है। डेरिवेटिव्स में पहला टॉपिक है ब्लैक शोज़ ऑप्शन प्राइिंग मॉडल। यह मॉडल हम क्लास में पढ़ चुके हैं। रेगुलर में, फास्ट ट्रैक में दोनों में कवर कर चुके हैं। यह हम कांसेप्ट 2:04:42 ब्रह्मास्त्र वाली टॉपिक में भी पढ़ चुके हैं। कांसेप्ट्स मैं आपको इसके बता चुका हूं। यह देखिए अगर आपने कांसेप्ट ब्रह्मास्त्र पढ़ी है तो उसके अंदर कांसेप्ट नंबर 13 में मैं इसके बारे में पूरा समझा चुका हूं। राइट? ये पूरे के पूरे नोट्स हैं उसके। आपने मुझसे क्लास में पढ़ाई करी है तो क्लास वाले नोट्स आपके पास डिटेल्ड वाले नोट्स होंगे। ये जो ब्लैक शोल ऑप्शन प्राइिंग मॉडल के नोट्स हैं। मैं एक बारी जरा जल्दी से नोट्स पढ़ा देता हूं। और यह दो-तीन क्वेश्चन आपको बताता हूं। सुनो ब्लैक शोन ऑप्शन प्राइिंग मॉडल पहली बात तो नाम से पता चल गया। यह एक ऑप्शन प्राइिंग का मॉडल है। मतलब इस मॉडल की मदद से इस मेथड की मदद से हम ऑप्शन की दाम पता लगाते हैं। यह थ्योरेटिकल ऑप्शन प्राइस पता लगाता है। राइटली मार्केट का असली दाम तो कोई भी पता नहीं लगा सकता। मार्केट का असली दाम तो मार्केट पता लगाएगी। तो यह थ्योरेटिकल प्राइस मतलब अंदाजन जो हमें लगता है वह प्राइस पता लगाता है। इसकी [नाक से की जाने वाली आवाज़] कुछ एजम्पशनंस होती हैं कि इसमें सिर्फ यूरोपियन ऑप्शंस का दाम निकल सकता है। अमेरिकन का नहीं निकल सकता। इसमें ट्रांजैक्शन कॉस्ट नहीं होती। माना जाता है कि शॉर्ट टर्म इंटरेस्ट रेट गिवन होगा और कांस्टेंट होगा। मान लिया जाता है कि स्टॉक डिविडेंड नहीं देंगे। पर फिर इसको 2:05:44 मॉडिफाई करके डिविडेंड इंक्लूड करके भी पढ़ाया गया। वो भी मैं पढ़ाऊंगा अभी। मतलब इस एजम्पशन को फ्यूचर में चेंज भी कर लिया गया। स्टॉक प्राइस मूवमेंट इज़ सिमिलर टू रैंडम वॉक। मतलब वो रैंडम वॉक है। उसका कोई प्रेडिक्टेड पैटर्न नहीं है कि वो एक अप जा रही हो या डाउन जा रही हो। ऐसा कोई प्रेडिक्टेड पैटर्न नहीं है। स्टॉक रिटर्न्स आर नॉर्मली डिस्ट्रीब्यूटेड। स्टॉक रिटर्न्स नॉर्मली डिस्ट्रीब्यूटेड होती हैं। मतलब नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन की तरह चलती हैं। वो कोई जे शेप्ड या कोई बेल शेप्ड नहीं होती हैं। वो नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन की तरह पैटर्न पे चलती हैं। ठीक है? वेरियंस ऑफ़ रिटर्न रेट इज़ कॉन्स्टेंट। वेरियंस भी कांस्टेंट है। इंटरेस्ट रेट भी कांस्टेंट था और कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग को यूज़ किया जाता है। यानी जैसे 1 + RT / 100 सिंपल इंटरेस्ट को नहीं यूज़ किया जाता। 1 + i रे टू पावर N यानी कंपाउंड इंटरेस्ट को भी यूज़ नहीं किया जाता। जबकि e की पावर RT वाला कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग का फार्मूला यूज़ किया जाता है। ठीक है सर। बीएसओपी कॉल ऑप्शन के लिए क्या कहती है? ध्यान से पढ़ना। क्योंकि ये थ्योरी अच्छी इंपॉर्टेंट पढ़ी होनी चाहिए। मैं आपको सच्चाई बताऊं। यदि आप थ्योरी ठीक पढ़ के जाते हो ना जो 2:06:45 मैंने ये फॉर्मूले के साथ लिखा होता है। अगर ये पढ़ कर जाते हो तो आप प्रैक्टिकल बेटर तरीके से सॉल्व कर पाते हो। ऐसा हमने मे26 के एग्जाम क्वेश्चन में भी देखा। उन्होंने ये जो मैं लिखवाता हूं ना इस थ्योरी के ऊपर बेस्ड क्वेश्चन पूछ लिया बीएसओपी का प्रैक्टिकल क्वेश्चन बट उसमें ये बात पूछ ली। अब जिस बच्चे ने ये ये लैंग्वेज नहीं पढ़ी होगी। सिर्फ फार्मूला रटा होगा वो फंस जाता। मैं अभी मैं आज कराऊंगा अभी वो क्वेश्चन भी कराऊंगा। देखना। देखो एस का मतलब क्या होता है? एस का मतलब है स्पॉट प्राइस ऑफ दी अंडरलाइन एसेट। मान लो हम Reliance के शेयर का ऑप्शन प्राइस पता लगा रहे हैं। तो Reliance के शेयर का आज का स्पॉट प्राइस कितना है। ठीक है? और एक्सरसाइज़ प्राइस कितना है जो हम 3 महीने बाद देने वाले हैं। एक्सरसाइज प्राइस मतलब हम कितने में बुक कर रहे हैं कि कितने का खरीद सकते हैं हम फ्यूचर में। तो वो एक्सरसाइज प्राइस। लेकिन एक्सरसाइज प्राइस क्योंकि 3 महीने बाद का है। आप उसे कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग से डिस्काउंट करके प्रेजेंट वैल्यू निकाल लेते हो। आप उसे प्रेजेंट वैल्यू निकाल लेते हो। ठीक है जी। क्या यह बातें आपको समझ आई? मैंने क्या कहा? यानी आप सर ऐसा क्यों कर रहे हैं? 2:07:46 क्योंकि याद करो कॉल ऑप्शन की वैल्यू्यूएशन हमने पढ़ी भी ऐसे ही है। s - x 0 मैक्स। कितने बच्चों को याद है ये? यही फार्मूला तो पढ़ा था कि s आएगा x बाद में आएगा। ठीक है? पर एक बात बताओ कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी। इसके क्या चांसेस हैं? तो आप यह कहोगे सर, कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी। इसके ये चांसेस हैं कि s शुड बी ग्रेटर दैन x. अगर s यानी स्पॉट रेट एक्सरसाइज प्राइस से ज्यादा होगा। जिस भी दिन हम एक्सरसाइज कर रहे हैं लास्ट दिन जो एक्सपायरी डेट है अगर हम उसकी बात करें या किसी भी दिन की भी हम वैल्यू्यूएशन की बात करें तो s शुड बी ग्रेटर दैन x तभी तो फायदे में आएगी ना। तभी तो इन द मनी होगी कॉल ऑप्शन। तो अगर इन द मनी चाहिए तो s शुड बी ग्रेटर। तो यानी हम यहां पे इसी की प्रोबेबिलिटी मल्टीप्लाई कर रहे हैं कि s अप्लाई हो पाए। यानी प्रोबेबिलिटी दैट द प्राइस इज़ गोइंग अप। यानी इस ND1 का मतलब होता है कि प्राइसेस ऊपर की ओर जाएंगे यानी स्पॉट प्राइस बढ़ेगा। इसकी प्रोबेबिलिटी क्या है? और ND2 का मतलब है प्रोबेबिलिटी ऑफ़ द कॉल ऑप्शन बीइंग एक्सरसाइज्ड। ND2 का मतलब होता है कि क्या प्रोबेबिलिटी है कि कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज 2:08:47 होगा। यानी अगर S ग्रेटर दैन X होगा तभी तो कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी। तो ND2 हमें यह बताता है कि कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगा। इसकी क्या प्रोबेबिलिटी है? ND1 हमें बताता है कि प्राइस और बढ़ेगा। इसकी क्या प्रोबेबिलिटी है? ठीक है जी। तो सर यह फार्मूला तो समझ आ गया कि आज का स्पॉट रेट, प्राइस बढ़ने की प्रोबेबिलिटी और फ्यूचर का एक्सरसाइज प्राइस, उसकी आज की प्रेजेंट वैल्यू और फिर कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होने की प्रोबेबिलिटी ये होती है। ठीक है सर। मुझे फार्मूला क्लियर है सर। ठीक है? लेकिन अब सर ये क्लियर नहीं है कि ये ND1 ND2 क्या है? यही तो मेहनत का काम है। ध्यान से सुनो कि ये ND1 ND2 क्या होता है? देखो बेटा, ND1, ND2 पढ़ने के लिए पहले D1, D2 क्या होता है? वो फार्मूला पता होना चाहिए। देखो d1 का ये फार्मूला है। लॉग नेचुरल स्पॉट रेट बाय एक्सरसाइज प्राइस प्लस r +5 की पावर स्टैंडर्ड डेविएशन का स्क्वायर यानी वेरियंस हो गया ये इंटू टाइम अप स्टैंडर्ड डेविएशन अंडर रूट ऑफ़ टाइम। ये हमारा d1 का फार्मूला है। वैसे मैं आपको एक बात बताऊं अपने एक्सपीरियंस से कि मुझे ऐसा लगता है कि ज्यादातर एग्जाम में जो क्वेश्चन आएगा उसमें ये d1 2:09:49 दिया होगा या nd1 दिया होगा। या तो nd1 की ही वैल्यू दे देगा या d1 की वैल्यू दे देगा। ये बेकार का फार्मूला लगवाने के साथ उसकी कोई आपसे देखो वो इस फार्मूला के थ्रू कोई फाइनेंस चेक नहीं कर रहा वो आपका। इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि ये फार्मूला दिया होगा। बट फिर भी आप बुरे से बुरे चीज के लिए प्रिपेयर करो। टफ से टफ पेपर के लिए प्रिपेयर करो। इसलिए आप इसे पढ़ कर जाओ। आप सोचो कि भैया ये अगर नहीं भी दिया होगा तो हमारे को ये फ़ॉर्मूला पता होना चाहिए कि d1 कैसे आता है। और d1 की मदद से d2 आसानी से निकल जाता है। क्यों? क्योंकि d1 की मदद से d2 निकल जाता है। d1 - स्टैंडर्ड डेविएशन * t ये आसान फार्मूला है। अगर मैं मे 26 के एग्जाम की भी बात करूं जो क्वेश्चन पूछा उन्होंने उसमें d1 दिया हुआ था प्रिंट करके। क्वेश्चन में ही d1 दे दिया था और d1 से d2 आपको निकालना था। ये तो आसानी से निकल जाता। ठीक है? अब सवाल उठता है कि सर d1 d2 तो चलो हमने निकाल लिए या दिए होंगे। बट फिर nd1 n2 क्या होता है? इसका मतलब होता है हमें क्यूम्युलेटिव नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन वैल्यू निकालनी है d1 की और क्यूमुलेटिव नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन वैल्यू निकालनी है d2 की। ये कैसे निकलती है बेटा? ये टेबल 2:10:50 देखकर निकलती है। यूजुअली टेबल भी पूरा नहीं देखना पड़ेगा। टेबल का भी एक्सट्रैक्ट वो आपको दे देगा या इनकी वैल्यू दे देगा। या तो भैया बहुत ही आसान क्वेश्चन बना रहा होगा तो इनकी वैल्यू ही दे देगा आपको सीधी। और अगर वैल्यू नहीं देगा तो फिर इसकी वैल्यू डिराइव करने का तरीका बताएगा। ठीक है? अब इसमें आगे बढ़ने से पहले आपको log नेचुरल कैसे आता है? ये मैंने समझा रखा है कि log नेचुरल ऑफ़ a कैसे आता है। आप पहले a को टाइप करो। जो भी log आपने जिसका भी निकालना है उसे अंडर रूट करो 12 बार -1 इक्वल टू करो और इंटू 4096 इक्वल टू करो। इस प्रोसेस से आपका log नेचुरल निकल जाता है। अगर हमें यहां पे log निकालने की डिराइव करने की जरूरत हो। क्वेश्चन में log नेचुरल हमें ना दिया हो तो। ठीक है सर। अगला सवाल है इंटरपोलेशन कैसे करते हैं? मतलब ये जो आप कह रहे हो सर ND1 ND2 ये कैसे निकालते हैं? देखो ये निकालते हैं इंटरपोलेशन की मदद से। यही एग्जाम में यूज़ किया। मतलब अगर मैं फिर से एक बात बोलूं मे 26 के एग्जाम में जो क्वेश्चन आया उसमें यही बात दो बार यूज़ करनी थी। दो बार इंटरपोलेशन लगानी थी उसमें। क्यों? देखो आपको अगर निकालना है मान लो NP निकालना है। np मतलब 2:11:51 यहां पे निकालना है। मान लो ये nd है। ऐसे सोचो। है ना? तो इसका मतलब पहले आप उससे थोड़ी छोटी। मान लो आपको ये निकालनी है n ऑफ़.5325 तो इसका मतलब आप कहां पे होगे? पहले आप n निकालोगे.53 का कितना है? फिर आप n देखोगे54 का कितना है? मतलब 53 और 54 के बीच में देखो क्योंकि 53 और 54 के बीच में आता होगा ना 55325 तो इंटरपोलेशन देखो। पहले उससे थोड़ी छोटे n की वैल्यू देखो। उससे थोड़े बड़े n की वैल्यू देखो। फिर वही अपना irr वाला टाइप का फार्मूला बना के लिख दो। कैसे? लोअर वैल्यू को लिख दो। यानी x को लिख दो। फिर डिफरेंस ऑफ़ वैल्यूज़ को लिख दो। यानी इन दोनों वैल्यूज़ में कितना डिफरेंस है? और फिर अपॉन डिफरेंस ऑफ n जो d1 d2 है उसकी वैल्यू लिख दो जो भी a और b है और फिर p - a मतलब जहां पहुंचना है वहां से a तक का डिफरेंस लिख दो कि मुझे a से इतनी आगे बढ़ना है। मतलब मुझे a से इतने पोजीशन आगे आना है। ये आप लिख दो। तो मतलब 2:12:51 p - a यह आपका पूरा का पूरा np निकालने का। मुझे पता है यह अभी थोड़ी कंफ्यूजन क्रिएट कर रहा होगा। बट मैं अभी दो तीन क्वेश्चन कराऊंगा। बात क्लियर हो जाएगी। इंटरपोलेशन क्वेश्चंस के थ्रू समझाता हूं। ये तो हो गया बीएसओपी कॉल ऑप्शन का सबसे आसान वाला फार्मूला। सबसे पॉपुलर फार्मूला यही फार्मूला एग्जाम में मेजरली आता है। बट अगर पुट आ जाए पुट क्या होता है? पुट उल्टा हो जाता है फार्मूला। मतलब जो कॉल का था उससे पुट क्या होता है? जैसे कॉल के लिए s - x होता है। तो पुट के लिए क्या होगा? x - s फ़ॉर्मूला पलट जाएगा। और जहां पे प्रोबेबिलिटी थी कि भैया आप मुझे प्रोबेबिलिटी बताओ प्राइस के ऊपर जाने की। वहीं पर अब प्रोबेबिलिटी हमें पढ़नी पड़ेगी प्राइस के नीचे जाने की। क्यों? क्योंकि पुट ऑप्शन तब एक्सरसाइज़ होगा जब प्राइस नीचे जा रहा होगा। उल्टा होगा ना यार। कॉल ऑप्शन की एक्सरसाइजिंग और पुट ऑप्शन की एक्सरसाइजिंग बिल्कुल उलट चल रही होगी। उलट मतलब उल्टी चल रही होगी। तो इसका मतलब अगर मुझे वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन निकालनी है तो मैं क्या बोलूंगा? देखो S पीछे चला गया। X और X की प्रेजेंट वैल्यू आगे आ गई। और जो D1 था ND इसके साथ ND2 था ना? तो ND2 की जगह 1 - ND2 हो गया। यानी अगर कॉल 2:13:54 ऑप्शन एक्सरसाइज होने की प्रोबेबिलिटी ND2 है। तो 1 - nd2 जो है वह पुट ऑप्शन एक्सरसाइज होने की प्रोबेबिलिटी है। पुट ऑप्शन होने की एक्सरसाइज होने की प्रोबेबिलिटी। क्योंकि अगर इमेजिन करो अगर मैं यह कहता हूं कि nd1 क्या है? nd2 क्या है? ND2 ये कहता है कि कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगा। यानी कि s > x होगा। ये ये मतलब है। तो 1 - nd1 nd2 क्या होगा? तो इसका मतलब है कि पुट ऑप्शन एक्सरसाइज होगा। यानी x > s होगा। ये इसकी प्रोबेबिलिटी हो गई। ठीक है सर यह बात भी हमें समझ आ गई रिकॉल हो गई क्या मैं मान के चलूं आपको ब्लैक शोल्ड ऑप्शन प्राइसिंग मॉडल कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन दोनों का समझ आ गया ठीक है फ़ूला सब उलटपुलट हो गया मतलब आप ये समझो कॉल के लिए फ़ूला क्या था कॉल के लिए फ़ूला था s - x की प्रेजेंट वैल्यू पुट के लिए क्या हो जाएगा x की प्रेजेंट वैल्यू - s और यहां क्या था प्राइस के ऊपर जाने की 2:14:55 प्रोबेबिलिटी और यहां पे क्या आएगा वन माइनस प्राइस के नीचे जाने की प्रोबेबिलिटी। यहां पे क्या था कि कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी और ये क्या है कि पुट ऑप्शन एक्सरसाइज होगी वन माइनस करके। है ना? इसे वन में से माइनस करो। इसे वन में से माइनस करो। तो ये बातें हमें समझ आ गई। लेकिन एक इन फार्मूलाज़ में एक प्रॉब्लम है। क्या प्रॉब्लम है कि इनमें डिविडेंड का ट्रीटमेंट नहीं सिखाया गया। इनमें डिविडेंड का ट्रीटमेंट नहीं सिखाया गया। सर क्या वो हमें पढ़ना भी चाहिए? बेटा मुझे नहीं पता। इंस्टट्यूट क्या पढ़ाना चाहता है? क्या नहीं पढ़ाना चाहता? मैं एक फार्मूला जरूर डिस्कस करूंगा। मुझे नहीं पता कि वो देगा नहीं देगा। अगर वो डिविडेंड दे देता है साथ में डिविडेंड का अमाउंट दे देता है तो हम उस अमाउंट को कहां-कहां ट्रीट करते हैं। देखो याद करो आपने जब वैल्यू्यूएशन भी पहले भी पढ़ी थी तो आपने ये पढ़ा था कि अगर मैं किसी भी चीज की वैल्यू्यूएशन कर रहा हूं और बीच में मुझे कहीं डिविडेंड मिल रहा हो तो हम डिविडेंड की प्रेजेंट वैल्यू को स्पॉट प्राइस में से माइनस कर देते थे। याद आया? हम ऐसे ही करते थे ना? जब हमने नॉर्मल वैल्यू्यूएशन भी पढ़ी है तो नॉर्मल वैल्यूएशन में भी हम ऐसे ही करते थे। अगर हमें बीच में डिविडेंड मिल रहा होता था तो उसकी प्रेजेंट वैल्यू को उठा के हम स्पॉट रेट में से माइनस कर देते थे। वही अब हम 2:15:56 करेंगे। वो भी अब हम यहीं करेंगे। देखो तो जहां स्पॉट रेट है जैसे कॉल ऑप्शन के फार्मूला में वहां पे प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ डिविडेंड माइनस कर दो। और जहां पे भी जैसे स्टेप नंबर टू में भी D1 निकालते हुए भी स्पॉट रेट यूज़ होता है वहां भी प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ डिविडेंड माइनस कर दो। मतलब जहां और पुट ऑप्शन में भी जहां स्पॉट रेट था वहां प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ डिविडेंड माइनस कर दो। मतलब सिंपल फ़ूला क्या? जहां-जहां पे स्पॉट रेट आएगा उसमें से प्रेजेंट वैल्यू ऑफ डिविडेंड को माइनस कर देना। सिंपल। यानी अगर क्वेश्चन में डिविडेंड आ गया तो क्या ब्रह्मास्त्र याद किया हुआ है? क्या आपने अपने दिमाग में फार्मूला याद किया हुआ है? आपने सिंपल सी बात याद की हुई है कि जहांजहां भी मेरे पास फार्मूला में s आता है। s यानी स्पॉट रेट उसमें से प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ डिविडेंड को माइनस कर दूंगा। अगर मुझे डिविडेंड की प्रेजेंट वैल्यू मतलब अगर मुझे अमाउंट में डिविडेंड पता होगा। लेकिन एक केस और हो सकता है। अगर डिविडेंड की ईल्ड गिवन हो। डिविडेंड का अमाउंट गिवन ही ना हो। डिविडेंड ईल्ड गिवन हो। मान लो कह दे कि डिविडेंड ईल्ड है 11% 12% साल की तो 3 महीने की हो गई 3%। अगर डिविडेंड की ईल्ड पता हो तो क्या करेंगे? तो थोड़ा सा फार्मूला बदलेगा। जहां स्पॉट रेट है उधर 2:16:59 डिविडेंड ईल्ड के रेट से प्रेजेंट वैल्यू निकाल दो स्पॉट की। जहां स्पॉट रेट है उसे डिविडेंड ईल्ड के रेट से प्रेजेंट वैल्यू निकाल दो स्पॉट की। और क्योंकि हमें डिविडेंड मिल रहा है। डिविडेंड मिल रहा है तो वो हमारी कॉस्ट को कम कर रहा है एक तरीके से। ठीक है ना? और अगर D1 के फार्मूला में रेट जो है उसे डिविडेंड ईल्ड माइनस कर दो। रेट में डिविडेंड ईल्ड माइनस कर दो। ठीक है जी? बोलिए ये बातें आपको समझ आ गई मैंने क्या कहा। एक बच्चा कह रहा है सर अगर डिविडेंड ज़ीरो पीरियड पे ही मिल जाए तो ऑब्वियस सी बात है। अगर डिविडेंड ज़ीरो पीरियड पे ही मिल जाएगा तो उसकी प्रेजेंट वैल्यू सेम ही रहेगी। डिवाइड बाय अगर मान लो मुझे डिविडेंड ज़ीरो पीरियड पे ही मिल गया। यही मिल गया। तो अगर ₹100 का डिविडेंड मिला तो ₹100 को डिवाइड बाय 1 + 10% रे टू पावर 0 कर दूंगा यानी वन कर दूंगा। कॉमन सेंस की बात है तो मेरे पास 100 ही आ जाएगा बेटा भाई। अगर आज है तो आज की प्रेजेंट वैल्यू तो आज ही है ना। सिंपल या फिर मैंने नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन भी डायग्राम भी समझाए थे कैसे-कैसे देखा जाता है। ये आप नहीं भी पढ़ोगे अभी तो चल 2:18:00 जाएगा। ठीक है? ये नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन टेबल के अलग-अलग मैंने मेथड्स बताए थे। कैसे-कैसे टेबल्स होते हैं। बट आइए क्वेश्चन पे आते हैं वापस। अब मेरे को लगता है मैंने बेसिक्स आपको बता दिए। क्वेश्चन देखते हैं। सुनो आराम से पढ़ना। वो कहता है कि करंट शेयर प्राइस है 185 का। तो भैया हमें S पता लग गया। ऑप्शन एक्सरसाइज प्राइस यानी X पता लग गया। रिस्क फ्री रेट मतलब R पता लग गया। टाइम ऑफ़ एक्सपायरी ऑफ़ द ऑप्शन ये भी पता लग गया। और हमें स्टैंडर्ड डेविएशन भी दी हुई है। यानी स्टैंडर्ड डेविएशन भी दी हुई है। वो कह रहा है जाओ मेरे लिए आप ब्लैक शोल्ड ऑप्शन प्राइिंग मॉडल से वैल्यू ऑफ़ दी ऑप्शन निकालो और वह भी कॉल ऑप्शन निकालो। यह बात उसने बोल दी है कि कॉल ऑप्शन की वैल्यू्यूएशन निकालो। सिंपल फार्मूला स्ट्रेट फॉरवर्ड बिना डिविडेंड वाला बिना डिविडेंड वाला ब्लैक शोल्ड ऑप्शन प्राइिंग मॉडल बट हां बड़ा क्वेश्चन क्यों बड़ा क्वेश्चन क्योंकि सब कुछ आपको खुद करना है क्वेश्चन ने कोई जानकारी नहीं दी क्वेश्चन ने कोई आपको D1 निकाल के नहीं दिया कोई ND1 निकाल के नहीं दिया कोई टेबल प्रिंट करके नहीं दिया टेबल भी खुद ढूंढो स्टैंडर्ड डेविएशन का सब कुछ खुद करो तो देखो क्या करेंगे इस क्वेश्चन 2:19:01 में हमें s पता है x पता है रेट ऑफ इंटरेस्ट पता है और टाइम टू एक्सपायरी पता है, स्टैंडर्ड डेविएशन पता है। ठीक है सर। पहले ब्लैक शॉल ऑप्शन प्राइिंग मॉडल में कॉल ऑप्शन का फार्मूला लिखो। कॉल ऑप्शन का फार्मूला होता है स्पॉट रेट एनडी1 यानी प्राइस ऊपर जाने की प्रोबेबिलिटी। फिर प्रेजेंट वैल्यू ऑफ दी एक्सपायरी प्राइस जो हमारा बेसिकली सेटलमेंट प्राइस है इस केस में। या फिर आप इसे एक्स ऐसे भी बोल सकते हो सेटलमेंट प्राइस या फिर बोलो एक्सरसाइज़ प्राइस या गो टू प्राइस कुछ भी नाम दे दो आप इसे। और यहां पे एनडी टू दिखा दो। ठीक है? ND2 होता है कि स्पॉट रेट इज़ ग्रेटर> x यानी कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी। ये राइट है। ठीक है? स्पॉट रेट हमें पता था। x हमें पता था। x की प्रेजेंट वैल्यू निकालो। तो e की पावर 7% * 3 इयर्स हैं। 3 साल की बात हो रही है। 3 साल बाद x पे करना है। तो 3 साल का प्रेजेंट वैल्यू निकाल दिया। पहले बताओ यहां तक की बातें समझ आ गई। 3 साल का प्रेजेंट वैल्यू निकाल दिया। सर ये भी समझ आ गया। ये भी समझ आ गया। अब सवाल सिर्फ इन 2:20:02 दोनों का है। मतलब मैं सच्चाई बताऊं तो पूरे क्वेश्चन में सिर्फ यही दोनों चीजें तो टफ हैं कि ND1 ND2 कैसे आएगा? क्योंकि ND1 ND2 के लिए पहले d1 d2 निकालना है वो भी टफ है। तो चलो [नाक से की जाने वाली आवाज़] पहले d1 d2 निकालते हैं। d1 d2 d1 कैसे आएगा? लॉग नेचुरल स्पॉट रेट इंटू एक्सरसाइज अपॉन एक्सरसाइज प्राइस प्लस रेट जितना भी रिस्क फ्री रेट है जो हमारा प्लस फाइव इंटू वेरियंस। तो रिस्क फ्री रेट लिखा 5 लिखा इंटू वेरियंस लिखा और मतलब स्टैंडर्ड डेविएशन का स्क्वायर मतलब वेरियंस होता है तो वेरियंस लिखा फिर इस सबको इंटू t करा और ये log नेचुरल 185 / 180 किया तो log नेचुरल की वैल्यू मैंने आपको निकालनी बताई थी थोड़ी देर पहले फार्मूला में याद करो मैंने आपको बताया था ना कि अगर log नेचुरल मुझे निकालना हो क्विक मेथड में तो मैं कैसे निकाल सकता हूं ये देखिए ये लॉग नेचुरल में जो भी अंदर आ रहा है उसको टाइप करो अंडर रूट 12 बार करो -1 इक्वल टू करो फिर * 40 096 करो इक्वल टू तो आपके पास आंसर आ जाती है। तो यही बात हमने इधर इसके लिए निकाल ली। इसे सॉल्व करके ये वैल्यू निकाल ली। ठीक है जी? 2:21:05 बोलिए क्लियर है? रेट ऑफ इंटरेस्ट 7% 5 और ये वेरियंस और इंटू टाइम इन सबको सॉल्व और नीचे स्टैंडर्ड डेविएशन अपॉन इंटू t स्टैंड डेविएशन * t अब इस पूरे को मैथमेटिकली सॉल्व करा d1 आ गया। d1 आ गया तो d2 बड़ी आसानी से आ जाता है। d2 मैं कई बारी ऐसे भी याद कराता हूं कि d2 कैसे आता है? d1 - डिनोमिनेटर। तो ये जो डिनोमिनेटर है ये माइनस करना होता है। d2 कैसे आता है? d1 - डिनोमिनेटर। d1 - डिनोमिनेटर। तो d1 की ये वैल्यू थी। d1 रख दिया। माइनस डिनोमिनेटर जो भी डिनोमिनेटर आ रहा होगा वो वैल्यू रख दो। तो सॉल्व कर लो। d2 आ गया। यानी अब मुझे d1 भी पता है। d2 भी पता है। लेकिन d1 d2 नहीं चाहिए। हमें n d1 और n d2 चाहिए। यानी हमें तो n d1 और n d2 चाहिए। मतलब नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन की वैल्यू चाहिए D1 की। अब D1 है कितना? D1 है 1.1007। तो बेटा ये देखो ये 1.10 और 1.11 के बीच में आएगा। मतलब 1.10 और 1.11 के बीच में आएगा कहीं। है ना? सर बात तो सही है। इन दोनों के बीच में 2:22:08 आएगा। सर ये वाली वैल्यू आप कैसे ढूंढोगे? देयर आर हाई चांसेस कि क्वेश्चन टेबल में इतना टेबल एक छोटा सा टेबल बनाकर दे देगा। उस टेबल में से आप ये निकाल लोगे। वरना पूरा टेबल दे देगा प्रिंट करके एक शीट पे। तो उस पूरे टेबल में से आप इनकी वैल्यू ढूंढ लोगे। जैसे वन के सामने और पॉइंट वन के नीचे तो जो वैल्यू आ रही होगी 1.1 की वैल्यू होगी। तो इसकी वैल्यू आ गई। इसकी वैल्यू आ गई नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन टेबल से। अब हमें इंटरपोलेशन करनी है। इंटरपोलेशन कैसे करते हैं? इंटरपोलेशन का मतलब होता है लोअर वैल्यू को लिखो। लिख दिया। फिर डिफरेंस ऑफ़ वैल्यूज़ को लिखो। इन दोनों डिफरेंसेस का वैल्यूज़ का डिफरेंस लिख दिया। डिफरेंस ऑफ़ n वैल्यूज़ लिखो। यानी इन दोनों के अंदर की वैल्यूज़ का डिफरेंस लिखो। इन यहां से यहां कितना मूव करना है? मतलब p - A पूरा सॉल्व करके हमारे पास ND1 आ जाएगा। इस पूरे को सॉल्व करके हमारे पास ND1 आ गया। इसमें एक बच्चे ने मुझसे पूछा कितने डिजिट तक जाना चाहिए? कम से कम इसमें फोर डिजिट तक जाना चाहिए। जो ND1 की वैल्यू है वो कम से कम डेसिमल के बाद फोर डिजिट तक जाना चाहिए। 2:23:09 ठीक है जी। क्यों? क्योंकि देखो मैं अभी आपको एक क्वेश्चन भी दिखाऊं जो एग्जाम में आया। जैसे यह मे 26 के एग्जाम में आया। इसमें उन्होंने जो टेबल बनाकर दिया था, उसमें भी फोर प्लेस ऑफ डेसिमल तक था। इसका मतलब हमें वह चाहता है कि फोर प्लेस ऑफ डेसिमल तक जाए इन कैलकुलेशंस में। समझ आ गई आपको बात? तो, हम फोर प्लेस ऑफ़ डेसिमल्स तक जाएंगे। क्या ये बातें आपको समझ आई? पहले ये ND1 आ गया। फिर इसी तरीके से इसी तरीके से इंटरपोलेशन मेथड से ND2 आ गया। क्या आपको ये इंटरपोलेशन मेथड समझ आ रही है? बेटा हम कैसे करते हैं? क्या फार्मूला बताया मैंने आपको? बताओ। लोअर वैल्यू फिर डिफरेंस ऑफ वैल्यूस अपॉन डिफरेंस ऑफ n की वैल्यूज़78.79 का डिफरेंस इंटू यहां से यहां तक जहां तक जाना है आपको 7889 तो यानी P - A अब मेरे पास ND1 ND2 दोनों आ गए। 2:24:10 अब ND1 ND2 दोनों आ गए। यहां रख दो और इन्हें सॉल्व कर दो और वैल्यू ऑफ़ द कॉल ऑप्शन निकाल लो। जल्दी से बताइए वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन समझ आ गई आपको? वैसे मजा पता है कब आएगा? जब वो वैल्यू ऑफ़ कॉल और पुट दोनों पूछेगी। क्योंकि अगर वो पुट पूछेगा तो वो जल्दी निकल जाएगी। बताओ जल्दी क्यों निकलेगी? रीज़न देना कि सर सारा मसाला तो बना रखा है। बस इधर-उधर ही तो करना है। आगे पीछे तो करना है। मतलब इस टर्म को उठा के आगे ले जाना है। इस टर्म को उठा के पीछे ले जाना है। इसको आगे ले जाना है 1 माइनस करके और इसे पीछे ले जाना है 1 माइनस करके। तो बस उतना ही तो करना है। उतना कर दो तो वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन भी जल्दी से आ जाएगी। बोलिए जी बातचीत समझ आई आपको? देखिए जी जो क्वेश्चन नंबर टू है वो क्या-क्या कहता है? वन तो समझ आ गया था पूरा हमें। सुपरफास्ट स्पीड में सेकंड देखते हैं। वो हमें पहली बात तो यह कहता है कि जी ऐसा है दोस्तों। करेंटली प्राइस्ड एट ₹415 हमारा प्राइस कितना है? ₹415 2:25:11 एंड कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज़बल इन 3 मंथ्स टाइम। ठीक है जी। एन एक्सरसाइज रेट ऑफ ₹00 है। ठीक है? यह बात भी हमें समझ आ गई। यानी हमें यह पता है कि स्पॉट रेट कितना है। 3 महीने की कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी और यह एक्सरसाइज प्राइस है। कॉल ऑप्शन की बात हो रही है। रिस्क फ्री रेट है 5%। ठीक है जी। R भी पता है हमें। स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ दी शेयर प्राइस इज 22%। वह कहता है जी स्टैंडर्ड डेविएशन 22% है हमारा। अब वो कहता है जी ऑप्शन क्या हमें ₹25 में खरीदनी चाहिए? तो पहले आप एक काम करो अपने हिसाब से वैल्यू्यूएशन ऑफ़ कॉल ऑप्शन निकालो। आपको क्या लगता है कॉल कितने की होनी चाहिए? पहले वह पता लगाओ। फिर इसे 25 से कंपेयर करो। तो देखो आप क्या करोगे? आपने यह सारी बातें तो जो तो जो जो क्वेश्चन में गिवन थी लिख दी। पहले आपने फेयर वैल्यू ऑफ द कॉल ऑप्शन निकाली। sd1 2:26:13 - x/ rt nd2 हमने इन सबकी वैल्यू्यूएशन करी। कैसे? स्पॉट रेट पता था, एक्सरसाइज प्राइस पता था। उसकी प्रेजेंट वैल्यू निकाली। ये वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन आई। अब आप पूछोगे ND1 कैसे आया? ND1 के लिए पहले d1 कैसे आया? ये d1 का फार्मूला है। d1 को सॉल्व किया। ये d1 आ गया। d1 फिर d2 निकाल दिया। d2 कैसे आता है? d1 माइनस डिनोमिनेटर करके d2 आ गया। अब ये n d1 d2 आ गया। अब d1 d2 से nd1 n2 निकालो। मतलब d1 की नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन वैल्यू और d2 की भी नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन वैल्यू। तो यह कैसे आई? यह हमने उसी इंटरपोलेशन मेथड से निकाली होगी। याद है आपको इंटरपोलेशन मेथड जो आपने टेबल बनाया होगा टेबल पे इंटरपोलेशन करके ये वैल्यू्यूज डिराइव करी होंगी आपने। ठीक है जी। तो वैल्यू ऑफ़ द कॉल ऑप्शन हमारे अकॉर्डिंग है इतनी। हमारे अकॉर्डिंग वैल्यू है 29.48। जबकि मार्केट में वैल्यू चल रही है 25। तो मार्केट में जो यह कॉल ऑप्शन है यह अंडर प्राइस है। तो अगर आप इसे बाय करना चाहते हो तो आप बाय कर लो। मतलब मार्केट में अंडर प्राइस है। अगर आप 2:27:14 इसे बाय करना चाहते हो तो बाय कर लो। क्या ये बातें आपको क्लियर हो गई मैंने क्या कहा? बहुत बढ़िया। अब इसी तरीके से आप आगे वाले पार्ट्स खुद कंसीडर कर सकते हैं। वह इजी पार्ट्स हैं। मतलब सिमिलर पार्ट्स की मल्टीपल सब पार्ट्स हैं। तो आई रियली डोंट थिंक कि मुझे वो कराने चाहिए आपको। मैं सीधा आपको ना एक काम करता हूं। क्वेश्चन नंबर थ्री डिस्कस करता हूं आपके साथ जो कि आपका मे 26 के एग्जाम का क्वेश्चन है। ठीक है? ध्यान से पढ़िएगा। इसमें क्या-क्या पूछा गया। वो कहता है दी करंट प्राइस ऑफ़ एफ लिमिटेड शेयर इज़ दिस। तो ये स्पॉट प्राइस हो गया। यूरोपियन ऑप्शन विद द एक्सरसाइज प्राइस ऑफ दिस। तो, यह एक्सरसाइज प्राइस हो गया। एक्सपायर इन 50 डेज। तो, यह आपको टाइम पीरियड दे रहा है कि कितने समय में मतलब t लिख दो इसे। चलो 50 डज़। और टोटल एक साल में 365 डेज होते हैं। तो, 50/ 365 टाइम हो जाएगा हमारे लिए। और वह कहता है एनुअल कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग रिस्क फ्री रेट ऑफ रिटर्न जो है वह 8% है। स्टैंडर्ड डेविएशन 30% है। 2:28:16 तो हमें सारी बातें पता है जो जो हमें चाहिए होती हैं। स्टैंडर्ड तौर पे हमें यही सब बातें तीनों क्वेश्चनों में यही सब बातें गिवन होती हैं। ठीक है जी। अब वो कहता है यूजिंग द ब्लैक शोज़ ऑप्शन प्राइिंग मॉडल यू रिक्वायर्ड टू कैलकुलेट दी हैेज रेशियो। अब वो बोलता है कि आप मुझे बताइए कि हैेज रेशियो क्या होगी? अब यह इंपॉर्टेंट है। पहले आप ND1 ND2 निकालिए। देखिए, आप सबसे पहले क्या करेंगे? अबे हैज़ रेशियो निकालने के लिए आपको ND1 निकालना पड़ेगा। तो, आप पहले d1 आपको गिवेन है क्वेश्चन में। ध्यान से देखो। क्वेश्चन में वैल्यू ऑफ़ D1 ऑलरेडी दी हुई है। तो, अगर मुझे d1 पता है, तो मुझे nd निकालना पड़ेगा। अगर ये 5375 पता है, तो मुझे n ऑफ़ D1 निकालना पड़ेगा। अब n d1 यानी 53 है। 53 किसके बीच में आएगा? सोचो। 5354 और 53 के बीच में आएगा। यानी इन दोनों वैल्यूज़ के बीच में कहीं लाई करेगा। ऐसे समझो ना बेटे। 2:29:19 अगर मैं n ऑफ़ 53 लिख दूं और n ऑफ़ 54 लिख दूं तो यह और यह वैल्यूज़ आ जाएंगी। यानी719 और यह आ जाएगी754 और इन दोनों के बीच में कहीं आएगा जो हमें चाहिए क्या? n ऑफ 0.5375 तो बताइए क्या फार्मूला बताया था आप वो पूरा ऐसे लिख के करते हैं। मैंने आपको डायरेक्ट एक फार्मूला बताया हुआ है। याद करो फार्मूला क्या था? मैंने आपको बताया था लोअर वैल्यू। याद करो फार्मूला क्या था? लोअर वैल्यू प्लस डिफरेंस ऑफ वैल्यूज़ यानी इन दोनों का डिफरेंस अपॉन डिफरेंस ऑफ़ n वैल्यूज़ 53 और 54 का डिफरेंस। इन दोनों का डिफरेंस यानी p - a तो इन दोनों का डिफरेंस बस इस फार्मूला को लगाओ आपके पास डायरेक्टली एरिया अंडर दी क्यूमुलेटिव कर्व्स डायरेक्टली निकल कर आएगा आपको समझ आया मैंने क्या कहा फार्मूला अपना वाला फार्मूला यूज़ करो जो हमने पढ़ा है हमने कौन सा फार्मूला पढ़ा है 2:30:19 हमने डायरेक्टली ये फार्मूला पढ़ा है लोअर वैल्यू प्लस डिफरेंस ऑफ़ पहले लोअर वैल्यू को लिखो यानी x को लिखो फिर x और y को माइनस करो फिर अंदर जो a और b लिखा उन दोनों को माइनस करो। जो भी बड़ा है उसमें से छोटे को माइनस करो ना सिंपल। और P - A P - A मतलब ये जो हमें जहां जाना है वहां को लोअर वैल्यू माइनस करो। तो हमारे पास डायरेक्टली N ऑफ़ P आ जाता है। ये इंटरपोलेशन का मेथड है। यही हम आईआरआर में भी यूज़ करते हैं। यही हम YTM निकालते हुए भी यूज़ करते हैं। है ना? ये वो मेथड है। तो इस मेथड को यूज़ कर लो। ये पूरे इतनी बड़ी मत करो। तो जो इसका आंसर आएगा वो हैज रेशो कहलाता है। यानी जो ND1 आता है वो हैेज रेश्यो कहलाता है। वो क्या कहलाता है बच्चे? हैेज रेशियो बोलिए यह बात समझे आप मैंने क्या कहा तो जहां पर मैं ND1 लिखवा रहा था इसी के साथ आप इसे ऐसे भी बोल सकते हो आल्सो कॉल्ड हैेज रेशियो ND1 को ही आप क्या बोल देते हो हैेज रेशियो बोल देते हो याद रखोगे ये बात 2:31:21 जो हम कॉल ऑप्शन में निकालते हैं उसे हैेज रेशियो भी कहा जाता है। ठीक है सर। यानी आप यह कह रहे हो कि यह जो ND1 है यह हैज रेशियो भी कहलाता है। बिल्कुल ठीक कह रहे हो। तो हमने हैज रेशियो निकाल दी। अब वो हमें कहता है द प्रोबेबिलिटी दैट द प्राइस इन द स्पॉट मार्केट ऑन द एक्सपायरेशन वुड बी हायर देन दी एक्सरसाइज प्राइस ऑफ द कॉल ऑप्शन। वह हमें कहता है अब मुझे यह बताओ। ठीक है जी। द प्रोबेबिलिटी दैट द प्राइस इन द स्पॉट मार्केट अब ध्यान से सुनो कि जो स्पॉट मार्केट का प्राइस है वह एक्सपायरी प्राइस से ज्यादा होगा। इसकी प्रोबेबिलिटी बताओ। तो देखो जरा स्पॉट प्राइस एक्सपायरी प्राइस से ज्यादा होगा। इसकी प्रोबेबिलिटी को क्या बोलते हैं? ND2 बोलते हैं। बेटे स्पॉट प्राइस एक्सपायरी प्राइस से ज्यादा होगा। इसकी प्रोबेबिलिटी का मतलब है। यही तो मतलब है कि कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी। कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज होगी। यानी वो ND2 पूछ रहा है। तो यानी वो 2:32:23 इधर वाले पार्ट में सेकंड वाले पार्ट में ND टू पूछ रहा है। मतलब मैं शॉर्ट में बोलूं तो फर्स्ट पार्ट में उसने ND1 की वैल्यू मांगी थी। सेकंड पार्ट में उसने ND2 की वैल्यू मांगी थी। ठीक है जी। बोलिए ये बातें आपको क्लियर हो गई मैंने क्या कहा? जी हां बेटे। जी हां सूर्य प्रकाश। तो ये ND2 हो गया। तो बस ND2 निकालो। देखो उसने क्या किया। पहले d2 निकाला। d2 कैसे आता है? d1 - डिनोमिनेटर वाली वैल्यू। तो nd2 आ गया। मतलब d2 आ गया हमारे पास। अब हम क्या करेंगे? जब हमारे पास d2 आ गया तो फिर n2 निकालेंगे वही वाले फार्मूले से। आपको तरीका समझ आता है। मैं ये वाला स्टेप स्टेप स्किप कर दूं। ये वाला स्टेप स्किप कर दूं। आपको समझ आता है ना? वही क्या? लोअर वैल्यू प्लस डिफरेंस ऑफ़ वैल्यू अपॉन डिफरेंस ऑफ़ A एंड B * P - A वो वाला कांसेप्ट लगाओ और डायरेक्टली वैल्यू निकालो तो यही वैल्यू आ जाएगी। यानी इसका मतलब है 66.51 यानी 67 लिख सकता हूं मैं 2:33:24 इसे राउंड ऑफ करके। यानी अप्रोक्सिममेटली 67% चांसेस हैं कि जो स्पॉट प्राइस है वो एक्सरसाइज़ प्राइस से ज्यादा होगा। यानी कॉल ऑप्शन को हम एक्सरसाइज़ कर पाएंगे। कॉल ऑप्शन को एक्सरसाइज़ कर पाएंगे। अब आपको समझ आया? यह क्वेश्चन उन बच्चों ने किए होंगे जिन्होंने फार्मूला पढ़े थे। सच बताओ हां या ना? बिना फार्मूला पढ़े कोई गया है और बिना फार्मूला समझे कोई गया है। कोई ये लैंग्वेज नहीं पढ़कर गया तो फिर तो फंस ही गया ना क्वेश्चन। फिर कहां से हो जाएगा सॉल्व? एग्जाम में। तीसरा अब तो बस कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन की वैल्यू मांग रहा है। वो तो आसान काम है कि स्पॉट रेट। देखो हम कैसे करते हैं? स्पॉट रेट * nd1 - x / e की पावर rt। अच्छा x e की पावर rt को अगर मैं ऊपर ले जाऊंगा तो x ^ - rt हो जाएगा। ये भी जानते हो आप। x के साथ e की पावर - rt हो जाएगा। इंटू nd2 कर दिया हमने। तो इसे भी हमने दिखा दिया। समझा दिया ये बात। तो यह वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन हो गया। यह वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन हो गया। बस इन्हें 2:34:24 सॉल्व कर दिया। हमारे पास ब्लैक शोल्ड ऑप्शन प्राइिंग मॉडल के जो तीन क्वेश्चन हमने देखने थे, वह हमने देख लिए। बोलिए समझ आया? अच्छा डिविडेंड होता है तो मैं क्या ट्रीटमेंट करना है? मैं आपको पहले ही बता चुका हूं कि स्पॉट रेट जहांजहां होता है वहां पर प्रेजेंट वैल्यू ऑफ डिविडेंड को जो डिविडेंड होगा उसकी प्रेजेंट वैल्यू को माइनस कर देना होता है। अगर डिविडेंड दिया है ₹5 या ₹10 का तो प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ जो भी जहां-जहां स्पॉट रेट होगा क्वेश्चन में वहां वहां प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ डिविडेंड को माइनस कर देते हैं। कुछ याद आया आपको? क्या मैं मान के चलूं? आपको ब्लैक शोल्ड ऑप्शन प्राइिंग मॉडल के ये तीनों क्वेश्चन रिकॉल हो गए। यह एक तरीके से रिवीजनरी सेशन था आपका जिसमें मैंने ये तीनों के तीनों क्वेश्चन करा कर आपको बेसिक्स एक बार रिकॉल करा दिए हैं। ठीक है जी? वेलकम दोस्तों। अब जो अनेस्चर का हम टॉपिक पढ़ रहे हैं वो डेरिवेटिव्स चैप्टर के अंदर जो हम स्पेशल चीजें पढ़ते हैं ना जैसे ऑप्शन ग्रीक्स जिन्हें कहते हैं उनके बारे में है। ध्यान से सुनिए। ऑप्शन ग्रीक्स में डेल्टा क्या कहता है? डेल्टा का मतलब होता है जिसे हम कई बारी 2:35:25 ऑफन हैेज रेशियो भी बोलते हैं। उसका मतलब होता है चेंज इन वैल्यू ऑफ ऑप्शन अपॉन चेंज इन वैल्यू ऑफ़ अंडरलाइन कितना है? क्या कहा मैंने? चेंज इन वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन अपॉन चेंज इन वैल्यू ऑफ़ अंडरलाइन एसेट जो होता है वो क्या है? तो बेसिकली डेल्टा यह बताता है कि अगर अंडरलाइंग एसेट ₹20 बढ़ रहा है तो जो वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन है वो कितने रुपए बढ़ेगा? ठीक है जी। जी हां सर। यह बात हमें समझ आ गई। गामा का मतलब क्या होता है? गामा का मतलब होता है कि डेल्टा कितना चेंज होगा जब एसेट का अंडरलाइन एसेट का प्राइस चेंज होगा। रो हमें यह कहता है कि ऑप्शन की वैल्यू कितनी चेंज होगी? जब चेंज इन इंटरेस्ट रेट होगा। 1% है। थीटा यह कहता है कि वैल्यू का ऑप्शन जो वैल्यू है हमारी ऑप्शन की वो कितनी चेंज होगी? जब टाइम पीरियड चेंज होगा। वेगा यह नापता है कि वैल्यू ऑफ ऑप्शन कितनी चेंज होगी जब स्टैंडर्ड डेविएशन यानी वेलेटिलिटी चेंज होगी। यानी इन 2:36:28 पांचों को याद करने का तरीका क्या है? ध्यान दीजिए। इन चारों में न्यूमैरेटर सेम है। इन चारों का न्यूमैरेटर सेम है। चेंज इन द वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन है। चेंज इन वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन, चेंज इन वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन, चेंज इन वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन, चेंज इन वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन। ठीक है जी? अब डे डेल्टा के डिनोमिनेटर में अंडरलाइन एसेट आता है। रो के डिनोमिनेटर में रेट ऑफ़ इंटरेस्ट आता है। थीटा में टाइम पीरियड आता है। वेगा में वोलेटिलिटी आता है। v फॉर वोलेटिलिटी, टी फॉर टाइम, आर फॉर रेट और यहां पे डेल्टा में दाम आता है। दाम मतलब अंडरलाइन एसेट का प्राइस। बस गामा सबसे अलग है। गामा में चेंज इन डेल्टा आता है। चेंज इन डेल्टा अपॉन चेंज इन अंडरलाइन एसेट। तो इन दोनों का डिनोमिनेटर सेम है लेकिन न्यूमरेटर अलग-अलग है। यहां पर चेंज इन द वैल्यू ऑफ ऑप्शन होता है। यहां पर चेंज इन डेल्टा होता है। तो आपको ये पांचों फार्मूला याद होने चाहिए। तब आप बेहतर तरीके से अंडरस्टैंडिंग बना सकते हैं अपने इस टॉपिक की जो हम पढ़ने जा रहे हैं क्वेश्चंस। आइए क्वेश्चन नंबर फोर्थ को ध्यान से देखिए। क्या कहता है क्वेश्चन नंबर फोर हमें? 2:37:28 ठीक है जी। देखिए वो कहता है अ कॉल ऑप्शन ऑन द इक्विटी शेयर्स ऑफ़ अल्फा। कोई एक कंपनी है जिसका नाम है अल्फा। ठीक है जी। उसके कॉल ऑप्शन के बारे में बता रहा है। करंट मार्केट प्राइस ऑफ द शेयर कितना है? यानी हमें करंट मार्केट प्राइस ऑफ द शेयर यानी स्पॉट रेट पता है। एक्सरसाइज प्राइस यानी कि x पता है। ठीक है जी? ये दोनों बातें पता है हमें। अब वो कहता है कॉल ऑप्शन प्रीमियम कितना है? यानी ऑप्शन प्रीमियम कितना चल रहा है? अब वो बोलता है डेल्टा कितना है? ठीक है? अगर कोई मुझे डेल्टा बता देगा और कोई मुझे गामा बता देगा। तो देखो डेल्टा का मतलब क्या होता है? अपने मन में सोचो। डेल्टा का मतलब हमने क्या बताया था? डेल्टा का मतलब होता है चेंज इन ऑप्शन प्राइस अपॉन चेंज इन अंडरलाइंग एसेट। यानी कि इसका मतलब होता है चेंज इन ऑप्शन प्राइस अपॉन चेंज इन एसेट। मतलब जो शेयर है। और जबकि गामा का मतलब क्या होता है? इसका मतलब होता है चेंज इन डेल्टा अपॉन चेंज इन एसेट प्राइस। जो भी अंडरलाइंग एसेट है मतलब शेयर है जैसे हमारे इस एग्जांपल में उसका प्राइस। 2:38:30 अब वो बोलता है कि एस्टीमेट करिए द चेंज इन दी ऑप्शन प्रीमियम यानी ऑप्शन प्रीमियम में कितना चेंज आएगा न्यूमैरेटर की बात कर रहा है इसके अगर शेयर प्राइस चेंज होगा ₹12 तो एक बात बताओ डेल्टा क्या कहता है सोच के देखो डेल्टा यह कहता है कि चेंज इन ऑप्शन प्राइस कितना होगा जब चेंज इन शेयर प्राइस ₹12 बढ़ रहा है तो यानी चेंज इन शेयर प्राइस ₹12 है और डेल्टा है कितना डेल्टा है7 तो चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम कितना होगा इन दोनों दोनों को इंटू करो तो यानी आप यह बोलोगे चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम होगा ₹8.4 यानी ऑप्शन प्रीमियम ₹8.4 बढ़ेगा। क्यों? क्योंकि अब इसे इस बात को समझो क्योंकि कॉल ऑप्शन है। कॉल ऑप्शन जैसे-जैसे शेयर का प्राइस बढ़ता जाएगा और एक्सरसाइज प्राइस ना बढ़े तो कॉल ऑप्शन और महंगा होता जाएगा। कॉल ऑप्शन और महंगा होता जाएगा। क्यों? क्योंकि कॉल ऑप्शन का देखो फार्मूला क्या होता है? ऑप्शन प्राइस का फार्मूला क्या होता है? वो होता है s - x 2:39:30 0 मैक्स मतलब ये वैल्यू ऑफ वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन के बराबर होती है। यानी s - x 0 s - x 0 बोलो ये बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा? जी हां सर हमें यह बातें समझ आती हैं। हमें वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन प्राइस पता है। हमें यह वैल्यू ऑफ ऑप्शन प्राइस पता है। यानी s - x बोलिए कोई दिक्कत तो नहीं है आपको यहां तक? ठीक है सर। सर हमें यह बात समझ आ गई कि अगर हमारा ऑप्शन प्राइस बढ़ रहा है तो उसके हिसाब से हमने 80 देखिए पहले ₹8.4 प्राइस बढ़ना है। पहले ₹35 का ऑप्शन प्रीमियम था तो अब इतने का हो जाएगा। यानी वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन इतनी बढ़ जाएगी। अब वो कहता है कैलकुलेट दी रिवाइज़ डेल्टा आफ्टर इंक्रीज इन द शेयर। अब नया डेल्टा बताओ कितना होगा? देखिए हमारा डेल्टा जो होता है वह गामा की मदद से चेंज होता है। तो अब इधर देखो गामा क्या होता है? आप 2:40:32 कहोगे जो गामा होता है वो चेंज इन डेल्टा होता है। अपॉन चेंज इन एसेट। ठीक है जी। अब मुझे बताओ हमारा गामा कितना है? गामा इस क्वेश्चन में कितना था?04 04 चेंज इन डेल्टा तो हमसे एग्जाम में पूछ रहा है और शेयर प्राइस चेंज हो रहा है ₹12 तो अगर ₹12 ये चेंज हो रहा है तो ये कितना होगा 48 चेंज इन डेल्टा तो हमारा पहले डेल्टा कितना था एक बात बताओ ओल्ड डेल्टा कितना था प्लस चेंज इन डेल्टा ऐड कर दो तो न्यू डेल्टा आ जाएगा ओल्ड डेल्टा था 70 चेंज इन आ गया 48 तो टोटल नया डेल्टा आ गया 1.18 वैसे 1.18 डेल्टा होता नहीं है। वन पर रुक जाता है। प्रैक्टिकली वन पर रुक जाता है। बट जब क्वेश्चन कर रहे होते हैं तो क्वेश्चन में थोड़ा हायर भी आ सकता है। क्योंकि क्वेश्चन उतने एग्जैक्ट नहीं होते। रियल लाइफ में अगर हमारा इन द मनी कॉल ऑप्शन 2:41:33 है। इन द मनी मतलब फायदे में है कॉल ऑप्शन। तो जितना-जितना शेयर प्राइस बढ़ेगा उतना उतना ऑप्शन का प्रीमियम बढ़ता रहता है। ₹1 प्राइस बढ़ेगा, ₹1 बढ़ेगा, ₹10 बढ़ेगा, ₹10 बढ़ेगा। तो यानी डेल्टा वन हो जाता है। बट इधर वन से भी ज्यादा हो रहा है, सर। सर डेल्टा वन से ज्यादा कैसे हो सकता है? रियल लाइफ में तो नहीं हो सकता बट थ्योरिटिकल कैलकुलेशन में हो सकता है। क्या आपको यह तरीका समझ आया? मैंने क्या कहा? यानी जो क्वेश्चन आप थ्योरेटिकली ऐसे फार्मूला पढ़ते थे उनके प्रैक्टिकल क्वेश्चन करा रहे हैं हम। आपको ये बातें समझ आई? जल्दी से मुझे रिसोंड करो। समझ आया ये? चलिए आगे देखते हैं। अब वो कहता है थीटा और वेगा की कैलकुलेशन देखिए। सुनो। एक यूरोपियन कॉल ऑप्शन है। फिर से कॉल ऑप्शन का क्वेश्चन है और वह कहता है जी करंट ऑप्शन प्रीमियम इतना है। यानी अभी हमारा ऑप्शन प्रीमियम इतना है। थीटा इतना है। वेगा इतना है। अब एक बात बताओ थीटा क्या बताता है? थीटा बताता है चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम कितना होगा? जब चेंज इन टाइम पीरियड होगा। 2:42:34 वेगा क्या बताता है? चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम कितना होगा? जब चेंज इन वोलेटिलिटी होगा। यही मतलब होता है इसका। ठीक है? अब वह कहता है कि टाइम टू एक्सपायरी डिक्रीसेस बाय 6 डेज। यानी जो टाइम टू एक्सपायरी है वह 6 दिन कम हो गया है। 6 दिन ठीक है? तो यानी डेल्टा T कितना है? सिक्स। और वोलेटिलिटी इनक्रीस हो गई है 4%। ठीक है? तो यानी उसने इन दोनों में चेंज कितना-कितना आ रहा है टाइम में। और वोलेटिलिटी में वो बता दिया हमें। बहुत बढ़िया। अब हमें चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम ही निकालना होगा। यानी चेंज इन वैल्यू ऑफ़ दी ऑप्शन निकालना होगा। ठीक है जी। अब वो कहता है कैलकुलेट करिए द इंपैक्ट ऑफ टाइम डीके ऑन ऑप्शन प्रीमियम तो यह वाला फार्मूला लग जाएगा। तो आप ऐसे लिखोगे एक्सप्लेन करोगे आप कि थीटा इक्वल टू चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम अप चेंज इन टाइम पीरियड और थीटा है कितना हमारे केस में थीटा है माइनस - 0.18 तो चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम सिक्स डज़ टाइम पीरियड कम हो गया है तो इसे इससे इंटू कर 2:43:34 दो अगर इन दोनों को इंटू कर दोगे कितना इफेक्ट आ जाएगा एक बच्चे ने अच्छा सवाल पूछा कि सर टाइम डिक्रीज हो रहा है तो नेगेटिव साइन क्यों नहीं डाल रहे अगर मैं इधर नेगेटिव डालूंगा तो नेगेटिव नेगेटिव पॉजिटिव हो जाएगा। ऑप्शन प्रीमियम बढ़ जाएगा। क्या समय कम होने पे ऑप्शन प्रीमियम बढ़ता है? नहीं, घटता है। इसलिए उन्होंने थीटा को ऑलरेडी नेगेटिव दे रखा है। थीटा को उन्होंने ऑलरेडी नेगेटिव दे रखा है। आप मतलब बेटा ऐसे मंदबुद्धि की तरह नहीं चलना कि डिक्रीज हो रही है तो नेगेटिव ही होगी। पहले आप इधर-उधर का साइन भी तो देखो कि थीटा ऑलरेडी नेगेटिव गिवन है। थीटा अगर ऑलरेडी नेगेटिव गिवन है तो यहां नेगेटिव मत डालो। वरना तो रिवर्स हो जाएगा। समझ आ गई बेटा आपको बात? चलिए शाबाश। इन दोनों को इंटू करो बेटा कितना आता है? माइनस 0 नहीं वन आएगा। वन 1.08 इक्वल टू चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम। यानी ऑप्शन प्रीमियम इतना कम होगा क्योंकि समय कम हो रहा है। समय कम होने से ऑप्शन प्रीमियम रिड्यूस होगा। यानी उसने हमसे 2:44:35 क्या पूछा था? इंपैक्ट पूछा था। इंपैक्ट मतलब चेंज पूछा था। तो यानी हमें चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम समझ आ गया। यह थीटा का आंसर हो गया। अब बोलता है वोलेटिलिटी का क्या इंपैक्ट होगा? वोलेटिलिटी 4% बढ़ी थी। तो देखिए वेगा क्या होता है? वेगा होता है चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम अपॉन चेंज इन वोलेटिलिटी और वेगा है कितना?6 और वोलेटिलिटी बढ़ी है 4% बेटा इन दोनों को इंटू कर दो तो आपके पास कितना आंसर आ जाएगा? और यहां पर परसेंटेज मत लिखो। खाली फोर लिखो क्योंकि हमें आंसर रुपीज में ही चाहिए। सर परसेंटेज को 4 ना लिखूं। नहीं नंबर लिखेंगे। न्यूमेरिक नंबर लिखेंगे सीधा। ठीक है ना? ऐसे क्वेश्चन में सीधा न्यूमेरिक नंबर लिखते हैं। तो 2.4 ही ऑप्शन प्रीमियम है। तो हमारा चेंज इन ऑप्शन प्रीमियम कितना आ रहा है? 2.4 पॉजिटिव। 2:45:36 कैलकुलेट दी रिवाइज़ ऑप्शन प्रीमियम। यानी ये जो रिवाइज्ड ऑप्शन प्रीमियम है ये इन दोनों चेंजेस को मिलाकर है। तो एक बात बताइए न्यू ऑप्शन प्रीमियम कितना होगा? पहले कितना था बेटा ऑप्शन प्रीमियम ₹28 था। तो ₹28 में 1.08 कम हो जाएगा और 2.4 बढ़ जाएगा। तो आप मुझे बता सकते हो कितना हो जाएगा ऑप्शन प्रीमियम? यह हो जाएगा 29.32 ऑप्शन प्रीमियम कितना हो जाएगा? 29.32 समझ आ गई बेटा बात? जी हां सर समझ आ गई बात। फिर सिग्निफिकेंस है ये तो उसमें थ्योरी लिखनी है और कुछ नहीं लिखना। अपने आप लिख लेना। थ्योरी क्लास में पढ़ा चुका हूं मैं। अच्छा ये ना एक एक्स्ट्रा क्वेश्चन यहां पे प्रिंट हो गया इस टॉपिक के साथ। बट करा देता हूं। मैं हो गया है तो करा ही देता हूं। देखो वो ये कहता है कि इमेजिन करिए एक बैंक है। वो 100 होम मोड गेजेस को पूल करता है। याद है आपको? सिक्योरिटाइजेशन के बारे में मैंने बताया था कि हम पूल करते हैं सिक्योरिटीज को और फिर आगे देते हैं 2:46:37 उनके मतलब जैसे मान लो एक बैंक है उसने बड़े सारे होम लोन दिए हुए हैं। वो होम लोन इकट्ठे करता है। फिर एक स्पेशल पर्पस जो व्हीकल होता है उसे बेच देता है। फिर वो वहां से सिक्योरिटीज इशू करता है। लोगों से पैसा लेता है। तो बेसिकली यह एक तरीके से सिक्योरिटाइज एसेट होती हैं। सिक्योरिटाइज क्योंकि वो किसी और के दम पे चल रही हैं। ठीक है? तो ये उसका प्रैक्टिकल क्वेश्चन है। इमेजिन करो एक बैंक ने 100 होम मोड गेजेस को पूल करा। हर एक की वर्थ $1 मिलियन थी। तो टोटल 100 मिलियन का पोर्टफोलियो था। उन्होंने इससे तीन ट्रंचेस ऑफर करी। मतलब बैंक ने यह जो पूल करा इससे तीन ट्रंचेस मतलब तीन टुकड़ों में लोगों को नई सिक्योरिटी बेची। एक होती है सीनियर ट्र। बेटा सीनियर ट्रच कहने का मतलब होता है सबसे पहले पैसा इन्हें मिलता है। ठीक है ना? यह 70 मिलियन के हैं। इन्हें सबसे पहले पैसा मिलता है। जब भी नया पैसा कोई भी पैसा रियलाइज़ होगा इनके पास सबसे पहले जाएगा। इनकी प्रायोरिटी होगी। लेकिन इन्हें रेट ऑफ़ इंटरेस्ट कम मिलता है क्योंकि यह जोखिम सबसे कम ले रहे होते हैं। फिर आएगी मेज़नाइन। मेज़नाइन ट्रेंच के लिए मैंने क्या बताया 2:47:38 था? थ्योरी में याद करो। यह मीडियम वाली होती है। मिडिल लेवल होती है। यह है 20 मिलियन। यानी अगर सीनियर को देने के बाद कुछ पैसे बचे तो मेज़नाइन को मिलेंगे। मतलब इनका मीडियम रिस्क होता है। इसलिए इन्हें मीडियम इंटरेस्ट रेट मिलता है। फिर सबसे नीचे आती है इक्विटी ट्रेंच। जो होती तो डेप्ट है लेकिन उसे मानते इक्विटी के बराबर हैं क्योंकि सारा रिस्क वह सह रहे होते हैं। वह है 10 मिलियन। यानी अगर डूबा अगर मान लो पीछे से कोई भी मोडगेज बाउंस हो गई फेल हो गई उनका पैसा नहीं आ पाया तो अगर उनका पैसा नहीं आ पाया तो सीनियर को भी मिल जाएगा। मेज़ाइन को भी मिल जाएगा। इक्विटी वाले का पैसा सबसे पहले साफ होगा। यह सबसे नीचे होते हैं। सबसे लास्ट प्रायोरिटी पे होते हैं। लेकिन इनका इंटरेस्ट रेट सबसे ज्यादा होता है। क्योंकि सबसे ज्यादा रिस्क भी ले रहे होते हैं। यह सबसे पहले रिस्क को अब्सॉर्ब करते हैं। कोई भी लॉस होगा सबसे पहले यह सहेंगे। फिर लॉस यह सहेंगे। फिर हुआ तो यह सहेंगे। यूजुअली सीनियर ब्रांच को लॉस होता ही नहीं है। यूजुअली ठीक है सर। केस ए पहले केस में क्या हुआ? एट मजेस डिफॉल्ट हो गई। यानी $8 मिलियन का नुकसान हो गया। क्योंकि हर एक मोट गेज $1 मिलियन 2:48:40 की थी। यानी जिन लोगों को हमने लोन दे रखे थे उनमें से एट लोगों ने अपना लोन चुकाना बंद कर दिया। आठ लोगों ने अपना लोन चुकाना बंद कर दिया। उन्होंने कहा जी हम नहीं दे रहे आपको लोन। तो अब क्या होगा? अगर आठ लोगों ने अपना लोन चुकाना बंद कर दिया तो सबसे पहले 8 मिलियन इनमें से गायब होंगे। यानी यह 8 मिलियन का नुकसान सहेंगे। इनकी वैल्यू 2 मिलियन बचेगी। यानी जो इक्विटी ट्रेंच है वह 8 मिलियन को अब्सॉर्ब कर लेगा लॉस को। यानी उनका 80% पोर्टफोलियो गायब हो जाएगा। लेकिन बाकी दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पर अगर केस बी है लॉस हो गया 25 मजेस का। अब यहां पे 25 लोगों ने नुकसान कर दिया तो 25 में से पहले 10 लोग तो यह सह लेंगे। फिर 15 लोग यह सह लेंगे। इनके पास सिर्फ 5 मिलियन की वैल्यू बचेगी। इनकी 20 मिलियन में से 15 मिलियन वैल्यू चली जाएगी। सिर्फ 5 मिलियन की वैल्यू बचेगी। यानी इनकी 15 मिलियन की वैल्यू उड़ जाएगी। सिर्फ और सिर्फ सीनियर ट्रंचेस बचेगा। सिर्फ और सिर्फ कौन बचेगा? सीनियर ट्रंच बचेगा। 2:49:42 क्या आपको मेरी बातें समझ आ गई? मैंने क्या कहा? सीनियर ट्रच अनटच रहेगा। मेज़नाइन के पास 5 मिलियन बचेंगे क्योंकि 15 मिलियन लॉस कर दिया होगा उन्होंने और जूनियर ट्रंच जो है जो इक्विटी ट्रेंच है उनके तो भैया पूरे पैसे उड़ गए होंगे। क्या ये कहानी समझ आई आपको यानी क्या कहा? एब्सोलुटली। इसके बाद आ जाते हैं रियल ऑप्शंस। रियल ऑप्शंस के ये जो सारे के सारे क्वेश्चन है ना ये मैंने क्लास में करा रखे हैं। बट मैंने सिर्फ प्रैक्टिस के लिए यहां रखे हैं। तो मैं क्लास वीडियो इसके वीडियो के आगे कनेक्ट कर दूंगा। यानी मैं आपको अपनी क्लास की वीडियो दे दूंगा जिसमें मैंने सारे के सारे रियल ऑप्शंस वाले सारे क्वेश्चंस और ये अमेरिकन ऑप्शन की कैलकुलेशन का क्वेश्चन कराया हुआ है। अमेरिकन ऑप्शन मुझे नहीं पता एग्जाम में आएगी कि नहीं आएगी पर मैंने क्लास में कराई हुई है तो मैं आपको इसका एक क्वेश्चन दे दूंगा। बड़ा क्वेश्चन है। अमेरिकन ऑप्शन थोड़ी अलग तरीके से कैलकुलेट होती है। तो इसका ध्यान रख लीजिएगा। ये वीडियो मैं साथ में कनेक्ट करके आपको दे दूंगा। तो आपके ये सारे क्वेश्चन कवर हो जाएंगे। ठीक है बेटे? बोलिए जी बातचीत। समझ आ गई आपको? मैंने क्या कहा? अबब्सोलुटली रियल ऑप्शंस के बारे में 2:50:44 देखिए अभी तक जितने भी हमने ऑप्शंस के बारे में डिस्कशन किया वो सारे के सारे जो ऑप्शंस थे वो ना फाइनशियल थे। फाइनेंसियल ऑप्शंस कहने का मतलब है कि वो पैसे मतलब स्टॉक के बारे में थे। इंडेक्स के बारे में मतलब वहां पे हम बात कर रहे थे कि मैं Reliance के शेयर्स फ्यूचर्स में खरीद सकता हूं तो यह कॉल ऑप्शन है। फ्यूचर में Reliance के शेयर बेच सकता हूं तो यह पुट ऑप्शन है। फ्यूचर में इंडेक्स को रेप्लिकेट करके बाय कर सकता हूं या बेच सकता हूं तो वो कॉल ऑप्शन या पुट ऑप्शन है। तो हमने वो सारी बातें करी है। अभी तक सिर्फ पैसे से रिलेटेड एसेट्स के बारे में बात कर रहे थे। करेक्ट? लेकिन यहां पे पहली बार अब आप पढ़ने जा रहे हो रियल ऑप्शंस। रियल ऑप्शंस का मतलब क्या होता रियल ऑप्शंस का मतलब होता है ऐसे ऑप्शंस जिनमें अंडरलाइंग एक्चुअल में कोई बिनेस है। मैं जैसे आपसे एक एग्जांपल पूछता हूं। सुनना मेरी बातों को बहुत गहराई से। अब आप बताओ पुट ऑप्शन क्या होती है? सोचना। पुट ऑप्शन क्या होती है? लिखो मत। अभी सोचो। पुट ऑप्शन का मतलब होता है ऑप्शन टू सेल। पुट ऑप्शन का मतलब क्या होता है? ऑप्शन टू सेल। यानी आपकी मर्जी है कि फ्यूचर में अगर आप चाहोगे तो उस चीज को बेच सकते हो। जो भी अंडरलाइन है उसे बेच सकते हो। 2:51:44 करेक्ट? यही मतलब होता है पुट ऑप्शन का। अब अगर मैं कहूं कि आप एक बिजनेस चला रहे हो। मानो आपने एक एक बिजनेस खोला। सोचो आपने एक स्टोर खोला। एक शोरूम खोला और उस शोरूम में आपके पास एक ऑप्शन है कि अगले साल अगर आप चाहो तो ये शोरूम बेच सकते हो 5 करोड़ में। मान लो आपके पास एक शोरूम है और मैं आपको बोल रहा हूं कि आपकी रियल लाइफ की सिचुएशन है। रियल लाइफ में आपके पास एक ऑप्शन है कि इस शोरूम को अगर आप चाहो तो अगले साल 5 करोड़ में बेच सकते हो। तो बताओ ये एक रियल ऑप्शन हुआ कि नहीं हुआ? ये है तो पुट ऑप्शन। क्यों? ऑप्शन टू सेल इज अ पुट ऑप्शन बट यह रियल लाइफ का पुट ऑप्शन है। रियल लाइफ का पुट ऑप्शन है। आप समझते हैं मेरी बात? मैं और एक एग्जांपल लेता हूं। देखो जैसे ना कई लोगों को आप देखते हो बड़ी-बड़ी गाड़ियां रखते हैं। है ना? Mercedes लेकर आते हैं। तो ये Mercedes, Mercedes लीज़ ऑप्शन पे भी गाड़ी देती है। ये सिर्फ समझाने के लिए बता रहा हूं। मतलब डोंट टेक इट। अदरवाइज। सिर्फ एक कांसेप्ट समझाने की बात कर रहा हूं। यह गाड़ियां ना एक बायबैक क्लॉज़ के साथ आती हैं। बायबक क्लॉज़ के साथ आती हैं। अगर आप 2:52:45 चाहो तो लीज़ के साथ-साथ ही आजकल ऐसे क्लॉज़ भी होते हैं जो बायबैक क्लॉज़ होते हैं। इसका मतलब क्या है? कि आप गाड़ी खरीदेंगे। मान लो 60 लाख की गाड़ी है। ठीक है? अब आप 60 लाख की गाड़ी खरीदोगे। उसको पहले ही बता दिया जाता है कि 5 साल बाद हम यह गाड़ी इतने की बाय कर लेंगे आपसे। मान लो कि एग्जांपल लेते हैं कि मान लो उन्होंने बोला 30 लाख की खरीद लेंगे या 20 लाख की खरीद लेंगे। मैं ये सिर्फ काल्पनिक फिगर्स ले रहा हूं। मुझे एक्चुअल फिगर्स नहीं पता है इसकी। ठीक है? तो मतलब आपने गाड़ी खरीदी आज 60 लाख की। लेकिन ये गारंटी है कि 5 साल बाद वो 20 लाख की आपसे गाड़ी खरीद लेंगे। तो ऑब्वियस सी बात है अगर तब आप चलानी चाहोगे तो चलाते रहो। बेचनी चाहोगे तो बेच देना। यानी आपके पास ऑप्शन टू सेल है 5 साल बाद का। आपके पास कब बेचने का ऑप्शन है? 5 साल बाद बेचने का ऑप्शन है। तो ये पुट ऑप्शन हुआ ना कि प्राइस फिक्स्ड है। और आप चाहोगे तो बेचोगे। नहीं चाहोगे तो नहीं बेचोगे। नहीं चाहोगे तो गाड़ी चलाते रहो। तो ये पुट ऑप्शन का अंश हुआ ना? तो यह इसे यूज़ुअली हम अपनी भाषा में बोलते हैं अबेंडनमेंट ऑप्शन। बोलो अबेंडनमेंट। अबेंडन मतलब अबेंडन कर देना। अबेंडन मतलब बेच देना, छोड़ देना, फेंक देना। तो, अगर 2:53:48 आपके पास ये ऑप्शन होता है, तो यह भी तो एक पुट ऑप्शन है। इसी तरीके से रियल लाइफ में कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन भी एक्सिस्ट करते हैं। रियल बिज़नेसेस में भी एक्सिस्ट करते हैं। इन्हीं के बारे में हम बात करने वाले हैं। थोड़ा सा लिखते हैं। फिर लिखने के बाद मैं असलियत में थोड़ा इसे और डेप्थ में समझाता हूं। लिखो जरा। ऐसे लिखिएगा कि रियल ऑप्शंस 2:54:17 आर दोज़ ऑप्शंस चाहे वह कॉल हो, चाहे वह पुट हो वि हैव अंडरलाइन प्रोजेक्ट्स यह वर्ड ध्यान रखना प्रोजेक्ट यानी इनके अंडरलाइन क्या है? जैसे हम अभी तक कॉल ऑप्शन Reliance की बोल रहे थे। पुट ऑप्शन Reliance की बोल रहे थे। वहां पे Reliance का शेयर था अंडरलाइन। अंडरलाइन कौन था? मतलब किसके प्राइस के बेसिस पे ऑप्शन का प्राइस डिसाइड हो रहा था? Reliance के शेयर के बेसिस पे या निफ़ी वाला था तो निफ़ी के बेसिस पे। बट यहां पर अंडरलाइन एक एक्चुअल बिजनेस है। एक प्रोजेक्ट है, एक काम है, एक चाहे वो शोरूम है, चाहे वो गाड़ी है, चाहे वो कोई बिजनेस है, कुछ है उसके नीचे कुछ अंडरलाइन कोई बिजनेस है जिसको बेचने की बात हो रही है या जिसे खरीदने की बात हो रही है। जैसे एक्सपेंशन भी हो सकता है। एक्सपेंशन का मतलब क्या है कि आपके आपने एक बिज़नेस खोला जिसमें एक ऑप्शन है कि आप चाहो तो 2:55:17 एक्सपेंड कर सकते हो। रिपीट करना मैंने क्या कहा? जिसमें एक ऑप्शन है कि अगर आप चाहो तो एक्सपेंड कर सकते हो। एक्सपेंड करने का मतलब क्या होता है? कि आप फ्यूचर में चाहो तो उसको बढ़ा सकते हो। समझ गए आप मेरी बात? अगर आप चाहो तो फ्यूचर में उसे बढ़ा सकते हो। बढ़ा तो वो भी तो एक तरीके का कॉल ऑप्शन हुआ कि आप चाहो तो बिज़नेस को और खरीद सकते हो। बिज़नेस को और खरीद सकते हो ना। कॉल एक्सपेंड करना क्या है कि आप और बाय कर सकते हो बिज़नेस और अपने बिज़नेस को बढ़ा सकते हो। एक शोरूम और डाल सकते हो। आपके पास एक फैक्ट्री है। आप एक फैक्ट्री और लगा सकते हो। तो ये कॉल ऑप्शन हुआ फ्यूचर के लिए। यानी इसमें क्या होता है? अंडरलाइन एसेट्स अंडरलाइन प्रोजेक्ट्स अवेलेबल होते हैं। ठीक है जी। इट इज़ लिखिए जरा। इट इज़ बेस्ड ऑन प्रोजेक्ट कैश फ्लोस। यानी इसकी वैल्यू किसके बेसिस पे डिसाइड होती है? प्रोजेक्ट के कैश फ्लोस। अंडरलाइन एसेट के बेसिस पे नहीं। प्रोजेक्ट के कैश फ्लोस के बेसिस पे। क्योंकि प्रोजेक्ट के बढ़ने या घटने का है यह। 2:56:21 लाइफ ऑफ रियल ऑप्शंस। इज यूजली वन ईयर और ग्रेटर। इनकी लाइफ ज्यादा होती है। ठीक है जी। बोलिए इतनी बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा? चलिए इसके ना कुछ एग्जांपल्स के बारे में बात करते हैं हम। सर जैसे एग्जांपल्स कौन-कौन से हो सकते हैं? जैसे सोचो अब जो मैं एग्जांपल लिखूंगा इनसे आपको बातचीत जल्दी समझ आएगी। सुनिए पहला एग्जांपल जैसे मैं बोलता हूं लॉन्ग कॉल लॉन्ग कॉल लॉन्ग कॉल रियल ऑप्शंस वो कौन से हो सकते हैं? जैसे इसका 2:57:21 एग्जांपल हो सकता है राइट टू इन्वेस्ट ऑन सम फ्यूचर डेट है ना राइट टू इन्वेस्ट ऑन सम फ्यूचर डेट इमेजिन करो आपके सामने एक प्रपोजल आता है एक प्रोजेक्ट आता है और वो कह रहा है कि आप अभी भी पैसे लगा सकते हो या चाहो तो एक साल बाद भी लगा सकते हो चाहो तो 2 साल बाद भी लगा सकते हो तो वो क्या है वो लॉन्ग कॉल है कि मैं अगर चाहूं तो आज एक ऐसा ऑप्शन अपने लिए अेल कर सकता हूं कि मैं इन्वेस्टमेंट एक साल बाद करूंगा यानी खरीदूंगा एक साल बाद तो मेरे लिए वो कॉल हुआ ना कि मैं खरीदूंगा लेकिन आज नहीं खरीदूंगा एक साल बाद खरीदूंगा तो कॉल ऑप्शन हुआ ठीक है मैं इसका एक एग्जांपल देता हूं रियल लाइफ एग्जांपल देता हूं जैसे ना बहुत सारे आजकल बिल्डर्स हैं आपने देखा है कभी कभी-कभी ऐसे एक ऑफर आती है जैसे मैं एक एक रियल लाइफ सिनेरियो समझाता हूं आपको। जैसे 2:58:21 शाहरुख ने एक अपना प्रोजेक्ट ल्च किया। वैसे शाहरुख ने नहीं ल्च किया। डनोबे ने डनोबे करके कोई बिल्डर है। उन्होंने दुबई में शाहरुख के साथ एक प्रोजेक्ट ल्च किया। आजकल बड़ा एक नया सा ट्रेंड चल चुका है कि स्टार रेजिडेंसीज और ब्रांडेड रेजिडेंसी। अब घर भी ब्रांडेड होने लगे। अभी तक पहले घर तो हम अपने हिसाब से बनवाते थे। अब घर भी ब्रांडेड होने लगे कि Rolls रॉयस के घर होंगे या मैक्लरेन के घर होंगे। है ना? ऐसे शाहरुख के घर होंगे। मतलब शाहरुख के घर में मतलब शाहरुख का घर नहीं होगा वो बट वो जो अपार्टमेंट होगा या जो कंपाउंड होगा वो पूरा शाहरुख के हिसाब से उसकी थीम को लेके डिजाइन हुआ होगा उसका नाम है उन अपार्ट ऑब्वियस सी बात है शाहरुख का नाम अटैच होते ही वो घर जैसे 10 करोड़ का घर 15 का हो जाएगा 5 करोड़ वैल्यू बढ़ जाएगी दीज़ आर कॉल्ड ब्रांडेड रेजिडेंसीज़ तो आपने सुना है जैसे कभी-कभी कहते हैं कभी आप न्यूज़पेपर पढ़ते होगे या कभी कहीं डिटेल पढ़ते होगे तो ऐसे सुनते होगे कि एक घंटे में सारे घर बिक गए तो कभी-कभी हमारा दिमाग घूमता है जैसे Mahindra कहता है अभी कुछ समय पहले Mahindra इंद्रा ने कुछ नई गाड़ियां ल्च करी। बोला एक घंटे में हमने पता नहीं 90,000 कार्स बेच दी। ऐसा कुछ क्लेम था उनका। 9000 या 90,000 ऐसा कुछ 2:59:24 क्लेम था। तो हमारा दिमाग खराब हो जाता है भाई कैसे बिक जाएंगी? रियल लाइफ में ऐसे नहीं होता है। रियल लाइफ में बिज़नेस कैसे चलता है। अब मैं लिख आपने लिखना नहीं है। सिर्फ समझना है कि यह भी एक ऑप्शन है। ये लोग क्या करते हैं कि ना पहले ईओआई मांगते हैं। एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगते हैं लोगों से। लोगों को कहते हैं भाई देखो जैसे शाहरुख के घरों का एग्जांपल लेते हैं दुबई में है वो है ना शाहरुख नाम है ना क्या नाम रखा है उसने ऐसे ही कुछ नाम है शाहरुख जेड है एंड में शायद कुछ तो बोलते हैं कि चलो मान लो जैसे हमारे पास मान लो फोन आया कि भाई किसी एजेंट का कि ऐसेसे ये रेजिडेंसीज ल्च हुई है आपने लेनी है इमेजिन करो कि मेरा दिल कर गया कि चलो लेते हैं मैंने लिया नहीं है वैसे मैं ईमानदारी से बताऊं दीपक कोई ऐसा एसेट नहीं है बट मान लो क्योंकि मुझे लगा कि हां चलो अच्छी चीज है बढ़ेगी प्राइस बढ़ेगा ले लेते हैं। है ना? तो वो हमसे क्या बोलते हैं कि चलो एग्जांपल लो कि 20 लाख ₹ लाख का कुछ चेक दे दो। ऑब्वियस सी बात है वो दरम्स में कन्वर्ट होगा। उनकी यूएई की जो करेंसी है 3:00:24 उसमें कन्वर्ट होगा। है ना? तो मान लो उन्होंने बोला कि 20 लाख या 30 लाख का आप चेक दे दो। तो हमने उन्हें पहले ही चेक दे दिया। ऐसे वो क्या करते हैं? पहले से ही मान लो अगर 500 फ्लैट हैं तो वह पहले ही 5 600 लोगों से ईओआई लेके रख लेते हैं। ईओआई मतलब होता है एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट। अब एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जो है ना 20 लाख वो 20 लाख एक तरह की कंडीशनल पेमेंट है। उसमें आपने घर बुक नहीं किया है। फिर वो एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के बाद जिस दिन जैसे मानो ऐसे एक एक महीने तक इकट्ठे करते रहेंगे। फिर एक महीने बाद एक ही दिन इकट्ठे ल्च करेंगे कि आज हम फ्लैट ल्च कर रहे हैं। आज फ्लैट ल्च कर रहे हैं तो आप सबको बुलाएंगे वहां मीटिंग में खानावाना फाइव स्टार में होगा। है ना? और वहां पे आपको मैप पेप दिखाएंगे। बड़े सारे काउंटर बने होंगे। उन मैप्स पे बैठ के वो लोग आपको बताएंगे कि देखो यह वाला फ्लैट है। यह वाला फ्लैट है। यह वाला फ्लैट है। आपको कौन सा पसंद है? फिर वो ईओआई के नंबर के हिसाब से आपको फ्लैट अलॉट करेंगे। अब आपकी मर्जी आपको पसंद आ रहा है कि नहीं आ रहा? सन फेसिंग है या नहीं है? ईस्ट फेसिंग है या नहीं है? नॉर्थ फेसिंग है या नहीं है? आपको कैसा चाहिए? अब अगर आपको वहां पसंद 3:01:25 आएगा तो आप उसे पक्का बुक करोगे। नहीं करोगे तो आपके यह पैसे वापस हो जाएंगे। आपके यह पैसे वापस हो जाएंगे। आप मेरी बात समझ पा रहे हैं? मैंने क्या कहा? हां या ना? तो ये ईओआई के बेसिस पे वो बोल रहे होते हैं कि बुकिंग मिल गई। बुकिंग मिल गई। क्योंकि बुकिंग तो पहले ही उठा चुके होते हैं। तो 1 घंटे में सब लोगों को बुलाकर इकट्ठे सारे फ्लैट बुक कर दिए। तो बुक ही हो गए ना वो। और कहने को हो गया एक घंटे में हो। जबकि मेहनत तो वह दोस्त 2 महीने से कर रहे थे। 2 महीने से लोगों से ईआई के चेक उठा रहे थे। तो लेकिन पब्लिकली यह बताया जाता है कि एक घंटे में सारे फ्लैट बिक गए। क्योंकि यस सारे लोगों को बुलाकर एक घंटे में उधर ही फ्लैट अलॉट किया आपने। क्या? तो ये सर अब ये ये ऑप्शन कैसे थी? आपने क्यों एग्जांपल दिया? यह मैंने इसलिए एग्जांपल दिया क्योंकि यह एक तरीके से ऑप्शन है कॉल ऑप्शन। कि आप सिर्फ ₹ लाख का एक चेक देकर कॉल ऑप्शन बुक कर रहे हो कि मैं चाहूंगा तो खरीदूंगा, नहीं चाहूंगा तो नहीं खरीदूंगा। उस दिन मुझे पसंद आया तो खरीदूंगा। उस दिन नहीं पसंद आया तो नहीं खरीदूंगा। 3:02:26 बोलिए बातें आपको समझ आई मैंने क्या कहा? आइए जरा। तो जैसे मैं आपको बताता था वो ईआईवीआई का बिज़नेस भी वो भी क्या है? एक लॉन्ग कॉल ऑप्शन है। लॉन्ग कॉल ऑप्शन मतलब आपके पास ऑप्शन है कि आप खरीदना चाहो तो खरीदो, नहीं खरीदना चाहो तो ना खरीदो। क्या यह बात आपको समझ आ गई? मैंने क्या कहा? अबब्सोलुटली। तो रियल ऑप्शंस में कॉल ऑप्शंस हो सकती हैं। सर और कोई और कोई तरीका बताओ। मतलब जिसमें राइट टू एक्सपेंड राइट टू एक्सपेंड बिजनेस लेटर लेटर मतलब जिसमें हमारे पास यह ऑप्शन हो कि हम फ्यूचर में बिजनेस को बड़ा कर सकते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है जी। 3:03:26 अच्छा जी। लॉन्ग पुट रियल ऑप्शंस कौन होंगी? बताओ पुट क्या होता है? सच सच से बताओ। पुट क्या होता है बेटे? पुट होता है कि हमारे पास बेचने का अधिकार होगा। पुट का मतलब होता है हमारे पास बेचने का अधिकार होगा। किसी चीज को हम सेल कर सकते होंगे। करेक्ट? तो जैसे इसमें आ सकता है राइट टू अबेंडन इन फ्यूचर। आप फ्यूचर में किस चीज को बेच सकते हो? यानी राइट टू सेल क्लोज बिजनेस इन फ्यूचर कि हम फ्यूचर में किसी बिजनेस को अपने बिजनेस को बंद कर सकते हैं ठीक है ना इसे डिसइन्वेस्ट भी बोल सकते हैं या एग्जिट फ्रॉम बिजनेस भी बोल सकते हैं 3:04:29 अगर हम फ्यूचर में किसी चीज को बेच सकते हैं, बिजनेस को बेच सकते हैं। ठीक है जी। अच्छा मैंने ना दोनों के एग्जांपल लॉन्ग के नजरिए से दिए हैं। अगर शॉर्ट बोलता तो उल्टा हो जाता। शॉर्ट का मतलब क्या हो जाता? उल्टे। इन्हीं आंसर को उल्टा लिखते। फिर कैसे? शॉर्ट का मतलब होता है जैसे यहां पे राइट टू इन्वेस्ट ऑन सम फ्यूचर प्रोजेक्ट कि हम इन्वेस्ट करेंगे फ्यूचर डेट पे और उधर क्या हो जाता मतलब हमें एक्सेप्ट करनी पड़ती इन्वेस्टमेंट किसी और से फ्यूचर डेट पे अगर हम इसे शॉर्ट कॉल बोलते तो इन्हीं को उल्टा करके लिख देते राइट की जगह उल्टा हो जाता फिर यह पैसा हमें मिलेगा ठीक है बोलिए मेरी बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा इज इट ऑल अबब्सोलुटली क्लियर? 3:05:32 बहुत ही बढ़िया। चलिए फिर क्वेश्चन करते हैं। पहले ना एक दो काम करते हैं। एक क्वेश्चन करते हैं। फिर वापस आते हैं। है ना? रियल ऑप्शंस के पहले क्वेश्चन देखते हैं। क्वेश्चन नंबर 32 देखो। बढ़िया क्वेश्चन [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्वेश्चन नंबर 32 प्लीज वो कहता है राम केमिकल देखिए जरा क्वेश्चन नंबर 32 प्लीज वो कहता है जी राम केमिकल है इज इन द प्रोडक्शन लाइन ऑफ़ केमिकल्स ठीक है जी हमारा केमिकल्स का कुछ बिज़नेस है कंसीडरिंग अ प्रपोजल ऑफ़ बिल्डिंग हम क्या बनाना चाहते हैं बिल्डिंग अ न्यू प्लांट टू प्रोड्यूस पेस्टिसाइड ठीक है द प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द न्यू प्रपोजल इज़ 150 अभी की वैल्यू क्या है अभी की वैल्यू है 150 आफ्टर कंसीडरिंग द स्क्रैप वैल्यू ठीक है जी यानी इसका मैं एक चित्र बनाता हूं हूं आपके लिए। आइए मेरे साथ-साथ डायग्राम बनाइए। सॉल्यूशन नंबर 32 अभी की प्रेजेंट वैल्यू क्या है? 150 ठीक है? सिंस दिस इज़ अ न्यू प्रोडक्ट मार्केट। 3:06:33 सर्वे इंडिकेट दैट द फॉलोइंग वेरिएशन इन द प्रेजेंट वैल्यू कंडीशन अगर फेवरेबल होगी तो प्रेजेंट वैल्यू इंक्रीस हो जाएगी 30%। यानी 1 साल में अगर फेवरेबल कंडीशन हुई तो जो प्रेजेंट वैल्यू होगी वह 150 + 30% हो जाएगी। 150 + 30% कितना हो गया? 195 ठीक है। अच्छा और अगर कंडीशन स्लगिश हुई अगर कंडीशन कैसी हुई? स्लगिश तो हमारी प्रेजेंट वैल्यू डिक्रीज भी हो सकती है। 40% 40% डिक्रीज भी हो सकती है। तो 150 - 40% दैट विल गिव यू 90. ठीक है? तो ये भी हो गया। बेसिकली ये एक तरीके से हाई प्राइस हो गया। ये एक तरीके से लो प्राइस हो गया। और ये करंट मार्केट प्राइस हो गया। ऐसे समझ सकते हैं शेयर्स के केस में अपने मन में समझो। जैसे शेयर वाले एग्जांपल में मैं क्या कहता था? अभी के प्राइस को करंट मार्केट प्राइस को प्रेजेंट वैल्यू हो गई। हाई प्राइस ये हो गया। लो प्राइस ये हो गया। एक तरीके से 3:07:33 कूल। तो ये तीनों बातें समझ आ गई सर। अब आगे बताइए। इन एडिशन रामा केमिकल हैज़ एन ऑप्शन टू अबेंडन द प्रोजेक्ट एट द एंड ऑफ द ईयर एंड डिस्पोज इट फॉर 100 करोड़। यानी अगर हम चाहें तो उसे एक साल बाद ये सब कुछ अभी एक साल बाद की बात हो रही है ना? अगर हम चाहें तो एक साल बाद उसे बेच सकते हैं। तो ये स्ट्राइक प्राइस हो गया। कितने का? 100 करोड़ का। तो ये स्ट्राइक प्राइस हो गया। बताओ ये ये कौन सी ऑप्शन है? कि अगर हम चाहें तो बिजनेस को 1 साल बाद बेच सकते हैं। सोच के बताओ। अगर हम चाह तो बिजनेस को एक साल बाद बेच सकते हैं। तो यह पुट ऑप्शन हुआ। यह अबेंडनमेंट वैसे भी आपको पता लग जाना चाहिए था। इसमें उसने वर्ड बोला था अबंडन। अबंडन से ही पता लग जाना चाहिए था कि मैंने नोट्स में क्या लिखवाया था? देखो याद करो कि जब अबेंडनमेंट लिखा होगा। ठीक है जी। मैंने इधर एम लिख दिया जोश जोश में वो एन आना चाहिए था। अबंडन ठीक है जी। 3:08:34 [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह बात भी समझ आ गई कि 100 करोड़ का बिक सकता है वह बिजनेस। इफ द रिस्क्री रेट ऑफ इंटरेस्ट इज 8%। ठीक है? व्हाट विल बी द प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द पुट ऑप्शन? वो कह रहा है पुट ऑप्शन की वैल्यू बताओ। पुट ऑप्शन की वैल्यू यानी आज का ऑप्शन प्रीमियम बताओ। यानी आज की वैल्यू बताओ। ठीक है जी। तो चलिए पहले बताओ क्या क्वेश्चन समझ आ गया? बस यही है रियल ऑप्शन में। देखो आंसर तो मैं करा ही दूंगा आपको। मेरे बच्चे आंसर तो मैं आपको करा ही दूंगा इसका। बट आई होप आपको कांसेप्ट समझ आना चाहिए। आपको थीम समझ आनी चाहिए कि करना क्या होता है। थीम समझ आ गई आपको कि पुट ऑप्शन का क्वेश्चन है सर कुछ नहीं है। बस कहानी पढ़नी है और पुट ऑप्शन का क्वेश्चन करना है। चलो सर अब किससे करें? अब देखो या तो आप रिस्क न्यूट्रल से कर दो क्योंकि इसमें प्रोबेबिलिटी गिवन नहीं है। या तो रिस्क न्यूट्रल से कर लो या बाइनोमियल से करो। किससे करेंगे? बायनॉमियल प्रेफर करें। चलो अच्छा क्या इसमें एक्सप्पोनेंशियल लगेगा? क्या कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग है? नहीं। क्यों? क्योंकि E बोला भी नहीं है और कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग वर्ड भी मेंशन नहीं किया। तो नॉर्मल इंटरेस्ट रेट लगाएंगे सिंपल वाला। चलिए तो बताओ मुझे 3:09:34 दिस इज एन अबेंडनमेंट प्रपोजल सो पुट ऑप्शन सो ये पुट ऑप्शन है। ठीक है जी। तो चलिए स्टेप बताइए। अब याद करिए बाइनॉमियल के क्या स्टेप्स थे? याद है आपको? पहला स्टेप क्या होता था? पहले आप मुझे बताओ वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन। सबसे पहले हम वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन निकालते थे। पुट ऑप्शन का फार्मूला होता है x - s 0 मैक्स एट हाई प्राइस। एट हाई प्राइस कितना होगा? हाई प्राइस था 195 और माइनस नहीं मैंने उल्टा लिखा है। x था 100 और यह है 195 0 मैक्स। तो एट हाई प्राइस तो जीरो ही हो जाएगा। एट लो प्राइस लो प्राइस में 100 - 90 0 3:10:35 मैक्स यानी ये 10 हो जाएगा। तो वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन एट हाई प्राइस एट लो प्राइस आ गया। स्टेप नंबर टू प्रोबेबिलिटी निकालते हैं। ठीक है जी। तो हम इधर निकालना स्टार्ट करते हैं। प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस। यानी P वो कैसे आती थी? करंट मार्केट प्राइस 1 + RT - लो प्राइस। अपॉन हाई प्राइस माइनस लो प्राइस सबको याद है ना ये कहानी तो करंट मार्केट प्राइस क्या थी 150 इंटरेस्ट रेट कितना था 8% वो भी 1 ईयर के लिए लो प्राइस था 90 और अपॉन हाई प्राइस कितना था जी हमारा अब आप बोलिए हाई प्राइस कितना था अब आप बोलेंगे हाई प्राइस था 195 तो 195 - 90 बताइए जी आप मुझे बताइए p कितना होगा तो अगर आप इस पूरे को सॉल्व करें 686 150 + 8% - 90 72 न्यूमैरेटर में आ गया और नीचे 105 3:11:37 आ गया 686 685 नहीं 686 आएगा बेटे 686 ये p आ गया ठीक है फिर q निकाल लीजिए क्योंकि प्रोबेबिलिटी ऑफ लो प्राइस भी निकालेंगे यानी q निकालेंगे q होगा 1 - यानी वो कितना आ जाएगा?314 तो यानी हमारे पास प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस, प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस, वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन एट हाई प्राइस एंड वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन एट लो प्राइस दोनों आ गए। ठीक है जी? स्टेप वन, स्टेप टू। अब आइए जरा स्टेप थ्री पे। स्टेप थ्री में हम निकालते हैं वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन। वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन। है ना? वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन कैसे आता है? वैल्यू एट हाई प्राइस इन प्रोबेबिलिटी ऑफ हाई प्राइस वैल्यू एट लो प्राइस इन प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस अप 1 + RT / 1 + RT 3:12:38 वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन एट हाई प्राइस तो वह हो गया ज़ीरो 0 *686 वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन एट लो प्राइस 10 *314 अप 1 + 8% * 1 तो इस पूरे की वैल्यू कितनी है? 2.907 करोड़। तो ये हमारी वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन है। यानी वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन आज कितनी है? वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन है इतनी। बोलिए यह बातें आपको क्लियर है मैंने क्या कहा? क्योंकि इस क्वेश्चन में उसने केवल हमसे वैल्यू ऑफ ऑप्शन मांगी थी। इसलिए हमने खाली वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन निकाली है। पूरी वैल्यू ऑफ़ प्रोजेक्ट नहीं मांगी। उसने एक्सपेक्टेड वैल्यू ऑफ़ द प्रोजेक्ट नहीं मांगी। खाली वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन मांगी है। तो, हमने खाली वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन निकाली है। क्या ये बात आपको समझ आई? मैंने क्या कहा? 3:13:38 मैं इसे एक दो क्वेश्चन अभी और कराना चाहता हूं। आई होप थिंग्स आर क्लियर। अच्छा देखो मैंने जो इसमें मेथोडोलॉजी यूज़ करी है ये वाली ये बायनॉमियल वाली है। अगर आप बायनॉमियल की जगह चाहते तो रिस्क न्यूट्रल मेथड भी यूज़ कर सकते थे। आपको पता है ना दोनों सेम ही आंसर आता है। तो आप कोई भी यूज़ कर सकते थे। कंप्लीट हो गया? थम्स अप करिए तो मैं आगे बढ़ जाऊंगा। आपने कहा जी सर। समझ आ गया सर। 32 समझ आ गया। 32 अगर आपको समझ आ गया तो 34 पढ़िए। 32 के जैसा ही है 34 भी। बट मैं ना इसके होमवर्क नहीं देना चाहता। यह सारे करा दूंगा। तो इस पे आप लिखिए सिमिलर टू क्वेश्चन नंबर 32 यह 32 के जैसा ही है। पहले इसी को करते हैं। 34 आइए जरा। 32 के जैसा ही 34 है। पहले वह करते हैं। आइए 3:14:41 स्पीड बढ़ाएंगे अब थोड़ी सी। आईपीएल ऑलरेडी इज़ इन द प्रोडक्शन ऑफ़ फर्टिलाइज़र। कोई कंपनी है जो ऑलरेडी फर्टिलाइज़र बना रही है। इट इज़ कंसीडरिंग अ प्रपोजल ऑफ़ बिल्डिंग अ न्यू प्लांट टू प्रोड्यूस पेस्टिसाइड। अब हम पेस्टिसाइड बनाने की सोच रहे हैं। सपोज़ द प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द प्रपोजल इज़ 100 करोड़। ठीक है? उसकी प्रेजेंट वैल्यू कितनी है? 100 करोड़। यानी अभी की प्रेजेंट वैल्यू कितनी है? 100 करोड़। ठीक है? विदाउट द अबेंडेंटमेंट ऑप्शन बिना अबेंडनमेंट ऑप्शन के। अभी इसमें अबेंडनमेंट ऑप्शन इंक्लूडेड नहीं है। ठीक है? हाउएवर द मार्केट कंडीशन ऑफ़ द पेस्टिसाइड टर्न आउट टू बी फेवरेबल। देखो वही वाली बात हो रही है। अगर फेवरेबल हो गया तो द प्रप द प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द प्रपोजल शैल इंक्रीज़ बाय 30% तो ये 130 हो जाएगा। क्योंकि 100 + 30% हो जाएगा तब यह और अगर हम इसे नीचे ले जाते हैं ऑन द अदर हैंड इफ द मार्केट कंडीशन रिमेन स्लगिश मतलब अगर मार्केट स्लगिश रहती है 3:15:43 नीचे चली जाती है बोलिए मेरी बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा इफ द मार्केट कंडीशंस रिमेन स्लगिश द प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द प्रपोजल शैल बी रिड्यूस्ड बाय 40% तो प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द प्रपोजल शैल बी रिड्यूस बाय 40% तो ये 60 पे आ जाएगा। बोलिए ये दोनों बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा? कूल। इन द केस द कंपनी इज नॉट इंटरेस्टेड इन कंटिन्यूएशन ऑफ़ द प्रोजेक्ट। इट कैन बी डिस्पोज्ड ऑफ फॉर 80 करोड़। यानी वह यह कहता है कि अगर कंपनी [नाक से की जाने वाली आवाज़] नहीं अच्छा मानेगी तो फिर 80 करोड़ में अपने प्रोजेक्ट को बेच भी सकती है। तो हमारा स्ट्राइक प्राइस क्या है? यानी एक्सरसाइज प्राइस क्या है? यानी एक्सरसाइज प्राइस है 80 करोड़। ठीक है? रिस्क फ्री रेट इज़ 8%। आप लग रहा 3:16:43 है ना? बिल्कुल वैसा ही क्वेश्चन है। बिल्कुल वैसा ही क्वेश्चन है या नहीं है? डिट्टो क्वेश्चन है। बट फिर भी एक बारी तेज स्पीड में निपटा देते हैं ताकि हम इसे पेंडिंग नहीं छोड़ना चाहते। ठीक है जी? बोलिए तैयार हैं आप इसे करने के लिए? आइए फिर मेरे साथ इसे भी निपटा के खत्म कर देते हैं। स्टेप वन देखो पहली बात यह है कि यह पुट ऑप्शन है। ठीक है? स्टेप वन। स्टेप वन होगा पहले वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन। तो वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन होती क्या है? पहले आप मुझे यह बताइए। तो आप कहेंगे सर वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन होती है वही वाला फार्मूला हमारा x - s 0 मैक्स यह वाला फार्मूला लगता है। तो अगर मैं पूछूं ऐड हाई प्राइस क्या होगा? तो आप बोलोगे सर हम 80 का बेच सकते हैं। 130 पे बेच सकेंगे 3:17:44 30 करोगे 80 - 130 - 150 होगा। तो -50 0 इन दोनों में से जो बड़ा है बताओ -50 और 0 में से कौन बड़ा है? ज़ीरो बड़ा है। तो ज़ीरो आंसर आएगा ना? फिर ये तो पता है आपको? टाइम पीरियड बेटा कुछ नहीं कहेगा तो वन ईयर ही मानेंगे। जब क्वेश्चन कुछ नहीं बोलेगा तो पूरा वन ईयर मानेंगे। ठीक है ना? अब ये कितना है? जी x 80 लेकिन अब s हो गया 60 लो प्राइस वाले ऑप्शन में। तो यह 20 हो गया। स्टेप टू ठीक है जी। अब स्टेप टू करना है हमें। तो हमें पहले प्रोबेबिलिटी ऑफ हाई प्राइस निकालनी चाहिए। प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस यानी P वो कैसे आएगी? करंट मार्केट प्राइस। अच्छा एक बात बताओ, मैं ये ऑप्शन लगा रहा हूं। मैं बार-बार बायनॉमियल लगा रहा हूं। क्या आप इसे रिस्क न्यूट्रल वाले मॉडल से भी कर सकते हो? बिल्कुल कर सकते हैं सर। हमारी इच्छा है बट ये ज्यादा स्मूद है। बट याद रखना रिस्क न्यूट्रल में भी वो वाला मॉडल लगेगा जो बिना एक्सप्पोनेंशियल वाला है। 3:18:46 याद करना एक बारी मैं आपको एक चीज याद दिलाऊं। जब रिस्क न्यूट्रल मॉडल हमने पढ़ा था तो उसमें दो मॉडल पढ़े थे। मैं एक बारी ध्यान दिलाता हूं आपको। देखो रिस्क न्यूट्रल में दो मॉडल पढ़े थे। एक पढ़ा था कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग वाले केस के लिए। इससे प्रोबेबिलिटी निकालते हैं और सिंपल इंटरेस्ट वाले केस में इससे निकालते हैं। तो, यह वाला मॉडल यूज़ करोगे अगर यूज़ करना है इन क्वेश्चनों में। क्योंकि ये सिंपल कंपाउंडिंग वाले हैं। ये कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग वाले मॉडल नहीं है बेटे। मेरी बात समझ गए आप? मैंने क्या कहा? ये कंटीन्यूअस कंपाउंडिंग वाले मॉडल नहीं है। तो सिंपल वाले हैं तो ये वाले फॉर्मूले यूज़ होएंगे। अगर करना भी हो रिस न्यूट्रल तो कर सकते हो आप। सर आप ऐसे क्यों बोल रहे हो? क्योंकि मॉड्यूल ने जो ये क्वेश्चन करे हैं वो रिस न्यूट्रल से करें हैं। बट इससे फर्क नहीं पड़ता। आंसर बराबर आता है। और मेथड का नाम लिखा नहीं है। तो दोनों में मार्क्स देने पड़ेंगे उसे। ये जो क्वेश्चन मैं आपको करा रहा हूं ये इलस्ट्रेशन है आपके मॉड्यूल की। आपके मॉड्यूल में यह इलस्ट्रेशन है। शायद पांचवी इलस्ट्रेशन है यह वाला क्वेश्चन। चलिए करंट मार्केट प्राइस बताते हैं। करंट मार्केट प्राइस थी 100 इंटरेस्ट रेट है 8%। टाइम पीरियड कुछ नहीं बोलेगा तो वन 3:19:47 मंथ वन ईयर मानेंगे सॉरी। लो प्राइस कितना था? 60 अपॉन हाई प्राइस माइनस लो प्राइस। किसी ने निकाली है प्रोबेबिलिटी बचे। 130 - 60 कोई है ऐसा जो प्रोबेबिलिटी निकाल लेता हो सीधा-सीधा। ये कितनी आ जाएगी? मैं देखूं यह आ जाएगा 108 108 - 60 48 आ गया न्यूमैरेटर में है ना डिवाइड बाय 70 तो 686 फिर से वही आ रही है 686 ये आ रही है बेटा ठीक है तो P आ गया Q कितना आएगा Q आएगा 1 - P यानी 314 तो हमें P भी पता लग गया Q भी पता लग गया वैल्यू ऑफ़ प्रोबेबिलिटी एट हाई प्राइस लो प्राइस भी पता लग गया। बस अब तो तीसरा स्टेप बचा है। बताइए वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन क्या होता है? तो वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन होगा। अब वैल्यू एट हाई प्राइस इंटू प्रोबेबिलिटी 3:20:47 ऑफ़ हाई प्राइस। वैल्यू एट लो प्राइस इंट प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस। अप 1 + RT 3:21:16 1 + RT R मतलब रेट और फिर टाइम है ना रेट 8% है। टाइम 1 ईयर है। तो इसे सॉल्व कर लीजिएगा। कितना आ रहा है? निकालिए लीजिए इसका आंसर। 3:21:46 5.814 करोड़। ठीक है? बट अभी तक ये जो दोनों क्वेश्चन हमने पढ़े इनमें सिर्फ वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन पूछा है। पूरे प्रोजेक्ट की वैल्यू नहीं पूछी। सिर्फ जो ऑप्शन है उसकी वैल्यू पूछ रहा है कि ये जो बिकने का ऑप्शन है इसकी वैल्यू क्या है? हम खाली किसकी वैल्यू निकाल रहे हैं दोस्त? जो बिकने का ऑप्शन है उसकी वैल्यू निकाल रहे हैं। पूरे प्रोजेक्ट की ऑप्शन वैल्यू नहीं निकाल रहे। खाली जो बिक सकता है उसकी वैल्यू निकाल रहे हैं कि बिकने के राइट की वैल्यू है ये। अगर इस इस प्रोजेक्ट में मान लो बिकने का राइट नहीं होता। तो फिर ये वाली एडिशनल वैल्यू ना आती उनके पास। सर ये बात अभी ढंग से समझ नहीं आ रही जो आप कह रहे हो। अगले क्वेश्चन में इसे समझाता हूं। ठीक है? सुनिएगा जरा। क्वेश्चन नंबर 36. तो, इसके साथ आप लिख लीजिए कि यह बिग डैडी ऑफ़ क्वेश्चन नंबर अभी हमने कौन-कौन से करे हैं? 32 और 34, 32 एंड 34 मतलब अगर यह क्वेश्चन कर लोगे तो फिर 32, 34 रिवाइज़ मत करना। तीनों की 3:22:47 रिवीज़ में सिर्फ एक ही रिवीज़ करना। नहीं, वैसे कर लेना फिर भी। क्योंकि उसमें डायरेक्ट प्रेजेंट वैल्यू दी हुई इसमें हमें निकालनी है। इसमें इनिशियल इन्वेस्टमेंट से क्वेश्चन हो रहा है। तो मेरी एडवाइस है कि तीनों ही करना रिवीज़ में क्योंकि वरना ये ना रियल ऑप्शन ऐसे हैं जो आप कंफ्यूज हो सकते हो। वैसे वो है समझ आ जाएगा आपको कि ये है बिग डैडी उनका। मतलब ये उन्हीं का बड़ा वर्जन है। सुनो अ फर्म इज़ कंसीडरिंग अ प्रपोजल टू सेट अप अ सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट। ठीक है? आप यह सोच रहे हो कि यार मैं ना किसी तरीके से अपना एक सीमेंट का प्लांट खुद का लगा लूं। ठीक है? वैसे बड़ा महंगा लगता है सीमेंट प्लांट। शायद कोई दो चार पांच लाख में नहीं लग सकता। पता है ना आपको यह बात? यानी बड़ी फैक्ट्रियां लगती है बेटे। बहुत मोटा काम होता है। जैसे अपनी हम देसी भाषा में बोले ना मोटा काम है ये। थोड़ा भारी काम है। ठीक है। ठीक है सर। होगा मोटा काम। हमें क्या लेन देना? हमें तो आप ये बताओ हम कितने पे लगाएंगे? सुनो। वो कह रहा है एक फर्म सोच रही है कि एक प्रपोजल है। चलो सेटअप कर लेते हैं सीमेंट की फैक्ट्री। इनिशियल इन्वेस्टमेंट होगी ₹10 करोड़ की। ठीक है 3:23:50 सर। करिए जरा क्वेश्चन। अब इसे थोड़ा संभल के करना। आप यह कह रहे हो कि इनिशियल इन्वेस्टमेंट होगी। यानी जब ईयर जीरो होगा तो इनिशियल इन्वेस्टमेंट होगी 150 करोड़ की। तो ये 150 करोड़ हमारी जेब से जा रहा है। ये आउट फ्लो हो रहा है। ये ज़ीरो पीरियड पे ये आउट फ्ल्लो है। ये आज का प्राइस नहीं है। तो अब ये क्वेश्चन नॉर्मल तरीके से नहीं होगा। क्यों? देखो शेयर वाले क्वेश्चनों में यहां पर करंट मार्केट प्राइस होता था। पॉजिटिव चीज होती थी कि शेयर आज इतने का बिक सकता है। आज ये बिक नहीं रहा। उल्टा आज तो इस प्रोजेक्ट को लगाने पे 150 करोड़ लग रहे हैं। आज तो इस सीमेंट की फैक्ट्री को लगाने में 150 करोड़ लगेंगे। ठीक है? फिर वो कहता है कि द फर्म हैज़ एन ऑप्शन टू अबेंडन द प्रोजेक्ट आफ्टर वन ईयर। लेकिन एक साल बाद हम इसे अबेंडन कर सकते हैं। अबेंडन मतलब पुट ऑप्शन बाय सेलिंग इट टू कॉम्पिटिट फॉर 100 करोड़ 3:24:51 और तब हम बेच सकेंगे 100 करोड़ की तो स्ट्राइक प्राइस 100 होगा। ठीक है? इफ द मार्केट कंडीशन आर अनफेवरेबल एंड द डिमांड इज लो द प्रोजेक्ट वैल्यू विल डिक्लाइन बाय 60% अच्छा देखो जितने की हमने प्रोजेक्ट लगाया है हमारे लिए तो उसकी वही वैल्यू है ना हमने एक प्रोजेक्ट हमने एक बिल्डिंग खरीदी या हमने एक फैक्ट्री लगाई 150 करोड़ में अगर हमारे जो फेवर में नहीं हुआ सब कुछ अनफेवरेबल हुआ तो फोटो वैल्यू विल डिक्लाइन बाय 60% 60% दाम गिर सकता है तो इसका ये मतलब है कि ये जो वैल्यू है यह अगर अनफेवरेबल हुआ अगर सब कुछ हमारे अनफेवरेबल हुआ तो यह जो वैल्यू थी उसकी 60% फॉल कर सकती है यानी ये वैल्यू कितने पे पहुंच सकती है अगर 1 साल बाद अगर हम पुट ऑप्शन को यूज़ ना करें तो कितने की बिकेगी फिर ये फैक्ट्री तो 3:25:52 फैक्ट्री अ टोटल में 150 - 60% करिए जरा कितने कितने की बिक जाएगी? 60% पे आ गई थी या कितने पे आ गई थी? एक बार देखें। इस लाइन को एक बारी पूरा दोबारा पढ़ लेते हैं। वो ये कहता है कि प्रोजेक्ट की जो वैल्यू है वो अभी या तो 50% बढ़ सकती है। यदि फेवरेबल कंडीशन आई तो 50% बढ़ सकती है। क्या आप मेरी बात समझते हैं? मैंने क्या कहा? या फिर 60% घट सकती है। मतलब मैं आपको ये समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि जब ये वैल्यू नीचे जाएगी तो 60% घटेगी। लेकिन जब ये वैल्यू ऊपर जाएगी ना देखो इसने ये भी बोला है कि अगर वैल्यू बढ़ गई अगर डिमांड ऑफ सीमेंट बढ़ गई तो ये 50% बढ़ भी सकती है। अब आप मुझे बताओ अगर ये वैल्यू बढ़ गई तो कितनी होएगी? आप मुझे यह बताओ। तो 150 में यह 50% बढ़ भी सकती है। कितनी हो सकती है? या तो 225 की हो सकती है या तो 60 की हो सकती है। अगर यह फेवरेबल हो 3:26:54 गया सब कुछ हमारे पसंद का हो गया तो। क्या यह बात क्लियर हो गई आपको? लेकिन अभी ये क्वेश्चन खत्म नहीं होगा। इस बात में ध्यान रखना ये क्वेश्चन में एक नया स्टेप आएगा एक्स्ट्रा स्टेप। पहले चलो एक काम करते हैं। वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन निकालते हैं। उसने क्या पूछा है पहले ये बताओ। देखो, व्हाट विल बी द वैल्यू ऑफ़ अबेंडनमेंट ऑप्शन? ये तो हो गया हमारे ए पार्ट का आंसर। यही अभी तक हमने किया है। लेकिन, यह जो वैल्यू ऑफ़ द प्रोजेक्ट विद अबंडनमेंट है, यह अभी तक हमने नहीं किया है। बी पार्ट इस क्वेश्चन का बी पार्ट हम पहली बार करने वाले हैं। बी पार्ट हमने अभी तक नहीं किया है। तो, चलो, पहले ए पार्ट को सॉल्व करते हैं। यानी आप यहां पे ऐसे लिखिए मेन सॉल्यूशन ए पार्ट। वैल्यू्यूएशन ऑफ ऑप्शन। यह एक तरह की पुट ऑप्शन है। क्योंकि हम प्रोजेक्ट को एक साल बाद चला के बेच सकते हैं। बताइए जी। आप जल्दी-जल्दी मुझे स्टेप बताइए। स्टेप क्या होती है? वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन क्या होती है? तो आप बोलोगे वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन होती है 3:27:55 x - s 0 मैक्स। तो पहले आप निकालिए इसे हाई प्राइस पे। फिर आप इसे निकालिए लो प्राइस पे। हाई प्राइस पर 100 - 100 माइनस या तो 225 माइनस होगा या 60 माइनस होगा। तो ऊपर वाले में तो ज़ीरो आ जाएगा। नीचे वाले में 40 आ जाएगा। स्टेप टू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस। बताइए जी। प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस यानी P कितना होता है? मैं बायनॉमियल से निकाल रहा हूं। अगर आप चाहो तो दूसरे किसी मेथड से भी निकाल सकते हो। 3:28:39 बताइए जी प्रोबेबिलिटी कितनी आएगी? किसी ने निकाली है बेटा? करंट मार्केट प्राइस कितना था? 150 ठीक है। 1 + RT रेट कितना था? 8% टाइम कितना था? 1 ईयर। माइनस लो प्राइस। बताइए जी लो प्राइस कितना आएगा हमारा? लो प्राइस होएगा 60 अपॉन हाई प्राइस माइनस लो प्राइस। किसी ने किया है तो बताइए मुझे। अगर अभी तक कोई बच्चा इसे कंप्लीटली सॉल्व कर चुका है तो मुझे बता दीजिए इसका आंसर कितना आ रहा है। 618618 देखिए मैं आप पे भरोसा कर रहा हूं। गलत मत बोलिएगा। प्रोबेबिलिटी ऑफ लो प्राइस यानी q। q मतलब होता है 1 - p वो कितना होगा? 3:29:40 382 ठीक है। ठीक है जी। अच्छा एक चीज ध्यान रखिएगा। इस क्वेश्चन को करते हुए यहां नेगेटिव मत डाल दीजिएगा। कई बच्चे गलती क्या करते हैं? सुनिए। यहां माइनस डाल देते हैं। वो यह सोचते हैं कि अरे हमने 150 करोड़ लगाए थे तो यह नेगेटिव फिगर है। ऐसा नहीं बेटे प्रोबेबिलिटी निकालते हुए नेगेटिव मत डाल देना इधर। देखो आप जब शेयर भी खरीदते हो तो शेयर के लिए भी तो पैसा दिया होता है तो भी तो माइनस होता है। जब शेयर खरीदोगे आज बट उसके आगे माइनस डाल के नहीं दिखाते ना यह कैलकुलेशन में। इसलिए यहां मत डालना। अब मुझे बताइए थर्ड पॉइंट में कि वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन क्या होगी? 3:30:33 बताइए जी। तो आप बोलेंगे वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन होता है वैल्यू एट हाई प्राइस इंटू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस वैल्यू एट लो प्राइस इंटू प्रोबेबिलिटी एट लो प्राइस अप 1 + RT और इसका रेट कितना था? जी 8% था। तो वैल्यू एट हाई प्राइस तो 0 था। लो प्राइस था 40 3:31:08 अब ये 1 + 8% * 1 14.148 3:31:24 ठीक है जी। तो यह हमारी वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन हो गई। यह हमारा ए पार्ट का आंसर आ गया। यही उसने पूछा था वैल्यू ऑफ दी अबेंडनमेंट ऑप्शन। तो वही हम लिख देते हैं। वैल्यू ऑफ अबेंडनमेंट ऑप्शन। यह अभी हमारा ए पार्ट का आंसर आ चुका है। क्या मैं मान के चलूं आप सभी को यह ए पार्ट का आंसर समझ आ गया दोस्तों? 3:32:02 बोलिए हां या ना? 3:32:25 कोई दिक्कत तो नहीं है? जी 3:32:36 एब्सोलुटली क्लियर। आगे बढ़ते हैं। अब इसके सेकंड पार्ट को देखो। यही इसी वजह से मैं उसे बोल रहा था कि ये बिग डैडी क्वेश्चन है। क्यों? क्योंकि यह वाला पार्ट पिछले किसी भी क्वेश्चन में नहीं आया था। आया था क्या? नहीं आया था। अगर आप ईमानदारी से देखो तो यह वाला पार्ट किसी भी क्वेश्चन में नहीं आया था। कौन सा? देखिए, वैल्यू ऑफ दी प्रोजेक्ट विद दी अबेंडनमेंट ऑप्शन। मतलब अबेंडनमेंट ऑप्शन अलग चीज है। वैल्यू ऑफ ऑप्शन अलग चीज है। और वैल्यू ऑफ ऑप्शन विद अबेंडनमेंट एक अलग चीज है। आप ऐसे समझो जैसे आप कोई सामान खरीदने जाते हो दुकान पे है ना? तो मानो आपने ए चीज खरीदी वो अलग है। ठीक है? जैसे चलो एक बहुत देसी एग्जांपल देता हूं। आप किसी ढाबे पे जाते हो खाना खाने। ठीक है ना? आप उन्हें बोलते हो मुझे एक रोटी चाहिए। तो वह रोटी होती है ₹20 की मान लो लेकिन आप बोलते बोलते हो बटर रोटी चाहिए तो फिर वह उसी रोटी को ₹25 का कर देंगे 3:33:38 करेंगे कि नहीं करेंगे बताओ तो मतलब है वो रोटी का ही दाम लेकिन विद बटर है इसीलिए उसमें ₹5 एक्स्ट्रा ऐड हो गए ऐसे ही समझो एक होती होगी वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन एक होती होगी वैल्यू ऑफ प्रोजेक्ट जो मांग रहा है तो उसने बोला ना वैल्यू ऑफ़ प्रोजेक्ट तो एक तो होती होगी वैल्यू ऑफ़ प्रोजेक्ट वह निकालेंगे हम। फिर वैल्यू ऑफ प्रोजेक्ट विद अबेंडनमेंट निकालना है। विद अबेंडनमेंट। विद अबेंडनमेंट मतलब उसके अंदर यह वाली वैल्यू भी ऐड होगी। जो बटर लगाने का पैसा है वो एक्स्ट्रा से ऐड होगा। पहले वैल्यू ऑफ़ प्रोजेक्ट निकालो और फिर उसमें अबेंडनमेंट की वैल्यू को ऐड करो। समझ आ रहा है मैंने क्या कहा? यानी अब मुझे क्या करना है? सेकंड पार्ट में यानी बी पार्ट में क्या करना है? तो देखो जरा बी पार्ट को पढ़ो। बी पार्ट में हमें टू कैलकुलेट क्या कैलकुलेट करना है? वैल्यू ऑफ प्रोजेक्ट विद अबेंडनमेंट विद अबेंडनमेंट ऑप्शन। 3:34:41 तो यानी हमें क्या निकालना है? बेसिकली हमें वैल्यू ऑफ प्रोजेक्ट पहले विदाउट अबेंडनमेंट निकालना पड़ेगा। प्लस वैल्यू ऑफ अबेंडनमेंट ऑप्शन ऐड करना पड़ेगा। अब यह हमें निकालना नहीं आता। लेकिन यह हम निकाल कर ऑलरेडी बैठे हैं। ओ हो अब समझ आ रही है सर बात? यानी ये जो आंसर निकाला ये तो सिर्फ ऑप्शन की वैल्यू्यूएशन थी ना कि मैं बेच सकता हूं। इस बेचने की ऑप्शन है। प्रोजेक्ट के ऑप्शन थोड़ी ना है। प्रोजेक्ट की वैल्यू तो अलग से निकलेगी। वो दोनों ऐड होंगी। अब आपको समझ आ रहा है यह रोटी है और यह बटर है। तो हम बटर रोटी का दाम निकालना चाहते हैं। एग्जांपल समझ आ रहा है? क्या बोल रहा हूं 3:35:42 मैं? तो पहले रोटी का दाम तो निकालो। आपने बटर का पहले दाम निकाल रखा है दाम। कहानी समझ आ रही है? कूल। तो देखो हमें पहले वैल्यू ऑफ़ द प्रोजेक्ट निकालनी है। अब मुझे बताओ यह जो प्रोजेक्ट की वैल्यू होगी, यह क्या होनी चाहिए? एक बात बताओ, अगर प्रोजेक्ट का मुझे यह बात पता है कि एक साल बाद का प्रोजेक्ट है। अब जरा समझो। वैसे मैं इसके जैसा भी एक क्वेश्चन ऑलरेडी थोड़ा-थोड़ा करा चुका हूं। याद है मैंने आपको बताया था कि ऑप्शन कमाती कितना है? वह कैसे निकालते हैं? अब जरा दो मिनट के लिए पेन रख देना। पहले मेरी बात सुनना। फिर कॉपी करना। साथ-साथ मत कॉपी करना। साथ-साथ करोगे फंस जाओगे। देखो यह जो प्रोजेक्ट है यह एक साल बाद या तो 225 का हो जाएगा या तो यह 1 साल के बाद यह प्रोजेक्ट 60 करोड़ का हो जाएगा। करेक्ट? करेक्ट? तो अगर मैं इसकी एक्सपायरी डेट की वैल्यू्यूएशन निकालूं तो आप यह कहोगे कि देखो सर या तो यह प्रोजेक्ट 225 का होगा 3:36:44 और इसकी प्रोबेबिलिटी ऑफ मतलब प्राइस ऊपर बढ़ने के या तो ये 60 करोड़ का होगा और प्रोबेबिलिटी ऑफ़ नीचे जाने के। बट ये जो वैल्यू्यूएशन आएगी यह वैल्यू्यूएशन तो आखिरी दिन पे निकलेगी। पर मुझे तो आज वैल्यू्यूएशन करनी है। मुझे वैल्यू प्रेजेंट वैल्यू आज निकालनी है। अभी रुक जाना बेटा जल्दबाजी नहीं। यह तो वो है ना कि यह प्रोजेक्ट मुझे 1 साल बाद कितने पैसे का बिकेगा? या तो 1 साल बाद इतने पैसे का बिकेगा और इसकी अगर मैं प्रेजेंट वैल्यू निकाल लूं 1 + 8% * 1 से तो ये तो आज की वैल्यू आ जाएगी। बेसिकली ये पीवीसीआई आ जाएगी। लेकिन ये जो पीवीसीआई आ जाएगी इसमें पीवीसीओ को भी तो माइनस करोगे। तभी तो प्रोजेक्ट की एनपीवी आएगी। सच बताओ। हां या ना? आप मुझे बताओ यह प्रोजेक्ट मुझे क्या कमा के देगा? यह कैसे पता लगेगा? यह तो तभी पता लगेगा जब मैं उसे डिस्काउंट करूंगा। एम आई क्लियर अबाउट ऑल दिस? 3:37:48 बेटे देखो मेरी बातों को समझो। यह पैसा मैं आज लगा रहा हूं 150 करोड़। यह पैसे मुझे 1 साल बाद मिलेंगे। तो जो 1 साल बाद मिलेंगे उसके भी मिलने की प्रोबेबिलिटी अलग-अलग है। तो पहले मैं अगर इन्हें प्रोबेबिलिटी से मल्टीप्लाई करूं और ऐड करूं तो यह मेरी एंड की एक्सपेक्टेड वैल्यू आ जाएगी। लेकिन ये तो ईयर एंड की एक्सपेक्टेड वैल्यू है ना। पर मुझे पहले उस एक्सपेक्टेड वैल्यू को प्रेजेंट वैल्यू पे लाना पड़ेगा। क्योंकि मैं इसके साथ माइनस करके आज की वैल्यू निकालना चाहता हूं प्रोजेक्ट की। प्रोजेक्ट की आज की वैल्यू निकालना चाहता हूं। देखो मैं इसे प्रॉपर स्टेप बाय स्टेप कराना चाहता हूं। क्योंकि अच्छा चलो मैं आपको ये बात बता दूं। ये वाला जो क्वेश्चन मैं करा रहा हूं ये एग्जाम का क्वेश्चन है। ये 2024 के एग्जाम में आ चुका है। नवंबर 24 के एग्जाम में आया था। तो अब तो ध्यान से पढ़ोगे। अब तो हवाबाजी नहीं करोगे। भाई एग्जाम में आया तो कभी भी दो चार पांच साल में कभी भी रिपीट हो सकता है। ध्यान दो। दोबारा सुनते हैं। देखो, मुझे निकालना है वैल्यू ऑफ़ प्रोजेक्ट। पहले ना आप मेरे माइंडसेट को पढ़ो कि मैं क्या बोल रहा हूं। 3:38:49 मुझे प्रोजेक्ट की वैल्यू निकालनी है बिना ऑप्शन के। क्योंकि ऑप्शन की वैल्यू तो मेरे को पता है अलग से। मेरे को ऑप्शन की वैल्यू अलग से पता है। ठीक है? तो मुझे खाली रोटी रोटी की वैल्यू निकालनी है। प्रोजेक्ट की वैल्यू क्या होती है बेटा? किसी भी प्रोजेक्ट की वैल्यू होती है उसकी एनपीवी। किसी भी प्रोजेक्ट की वैल्यू क्या होती है? उसकी एनपीवी। वो प्रोजेक्ट हमें क्या कमा के दे सकता है? वही उसकी वैल्यू है उसके लिए हमारे लिए। अग्री? ठीक है ना? तो, हमें निकालना पड़ेगा पीवीसीआई और पीवीसीओ। प्रेजेंट वैल्यू ऑफ कैश इनफ्लो और प्रेजेंट वैल्यू ऑफ कैश आउटफ्लो। तो मैं इधर नीचे लिखवा रहा हूं। पहले मुझे लिखने देंगे। अभी साथ-साथ कॉपी नहीं करेंगे। वर्किंग नोट नंबर वन। देखिए आप पहले यह समझो कि एक्सपेक्टेड कैश फ्लो एट एंड ऑफ ईयर वन क्या होगा? या तो इस प्रोजेक्ट से हमें ₹225 मिलेंगे जिसके चांसेस हैं 618 प्रोबेबिलिटी के साथ 3:39:49 या तो हमें ₹60 मिलेंगे जिसके चांसेस हैं 382 यही दोनों थी ना प्रोबेबिलिटीज इनकी। ठीक है जी। तो आप मुझे बताइए कि हमारी एक्सपेक्टेड वैल्यू ऑफ़ द प्रोजेक्ट एट द एंड ऑफ़ ईयर वन क्या होएगी? एक्सपेक्टेड वैल्यू ऑफ द प्रोजेक्ट एट द एंड ऑफ ईयर वन क्या होएगी? बताइए जी। 161.97 161.97 एक पूरी एग्जैक्ट बता देना। ठीक है ना? लेकिन ये तो एंड ऑफ़ द ईयर है। तो अगर हम यह बोलें कि प्रेजेंट वैल्यू क्या होगी? पीवीसीआई क्या होगी? 161.97 * PV फैक्टर तो यह 1 + 8% की पावर 1 तो इसकी डिस्काउंटिंग करके आज की वैल्यू कितनी आएगी बताइए? 161.97 / 1.08 3:40:53 161.97 / 1.08 149.97 972 कर लेते हैं। चलो खाली 97 भी लिख सकते हो। 972 लिखना है टू लिख दो। ठीक है? ये पीवीसीआई आ गया। माइनस पीवीसीओ जो इनिशियल आउट फ्लो था प्रोजेक्ट का। 3:41:27 तो इस प्रोजेक्ट की एनपीवी कितनी है? यानी वैल्यू ऑफ प्रोजेक्ट विदाउट ऑप्शन 3:41:46 ये आ जाएगा नेगेटिव 0.02 8 कर दो इसे राउंड ऑफ करके है ना ये वैल्यू है प्रोजेक्ट की बिना ऑप्शन के ये वर्किंग आपको समझ आई है मैंने क्या किया है बोलिए हमने क्या किया एक साल बाद यह प्रोजेक्ट कितने का होगा? अगर ऑप्शन ना हो अगर ऑप्शन ना हो तो यह प्रोजेक्ट या तो हाई वैल्यू पे बिकेगा इतने चांसेस हैं। लो वैल्यू पे बिकेगा इतने चांसेस हैं। यानी ये उसकी एक्सपेक्टेड वैल्यू है। बट ये तो एक साल बाद की है। पर क्या मैं 1 साल बाद वाली वैल्यू में से आज की वैल्यू माइनस कर सकता हूं? नहीं। क्योंकि प्रेजेंट वैल्यू पे तो करनी पड़ेगी। तो इसको प्रेजेंट वैल्यू फैक्टर से इंटू करो। तो ये आज की वैल्यू बनेगी। यह आज का आउटफ्लो है। तो इसका मतलब आज की डेट पर हमें नुकसान है। यानी इस प्रोजेक्ट से हमें नुकसान है। तो यह प्रोजेक्ट माइनस का है। 0.028 करोड़। अब इन दोनों को नेट कर दीजिए। तो नेट करने के बाद आपके पास डायरेक्ट आंसर आ जाएगा। कितना आ रहा है? 14.148 - 3:42:48 028 तो यह बना 14.12 करोड़। यह आपका वैल्यू ऑफ़ द प्रोजेक्ट विद अबेंडमेंट ऑप्शन है। यह फेयर आंसर है। यह आई है वैल्यू ऑफ़ प्रोजेक्ट विद अबेंडनमेंट ऑप्शन 3:43:21 बोलिए मेरी बातें आपको समझ आई मैंने क्या कहा? क्लियर है जी? यानी अबेंडनमेंट ऑप्शन कमा के दे रही है। प्रोजेक्ट तो एक्चुअली में लॉस में है। चलो कॉपी करो इसे जल्दी से। एक क्वेश्चन इसका और कर लेंगे। फिर अबेंडनमेंट नहीं करेंगे। मतलब कोई और टाइप का कर लेंगे। जल्दी से कॉपी करो इसे। यह वाला पेज भी कॉपी करिए। कर लिया जी आपने कॉपी कर लिया सभी ने। चलिए एक क्वेश्चन और पढ़ते हैं इसके ऊपर बेस्ड। 3:44:00 आइए जी। क्वेश्चन नंबर ये था हमारा 36। हमारा एक क्वेश्चन रहता है 33 क्वेश्चन रहता है इसमें करना भी है ना आइए 33 क्वेश्चन पढ़ते हैं। देखिए सपोज़ MIS लिमिटेड कोई कंपनी है जिसका नाम क्या है? एमआईएस लिमिटेड इज़ कंसीडरिंग इंस्टॉलेशन ऑफ़ अ सोलर इलेक्ट्रिसिटी जनरेटिंग प्लांट। ठीक है? सोलर प्लांट लगा रहे हैं ताकि सोलर इलेक्ट्रिसिटी बने हमारे पास फॉर लाइटनिंग दी स्टाफ क्वटर्स। द प्लांट शैल कॉस्ट ₹2.5 करोड़। प्लांट कितने का है? मतलब आज की डेट पर आउट फ्ल्लो कितने का है? 2.5 करोड़ का। शैल लीड टू अ सेविंग इन द इलेक्ट्रिसिटी एक्सपेंस एट द करंट टेरिफ बाय ₹21 लाख पर ईयर फॉर एवर। मतलब अगर हम आज के हिसाब से देखते हैं तो ₹21 लाख हम हर साल बचा सकते हैं। ठीक है जी। 3:45:00 आइए मेरे साथ-साथ क्वेश्चन नंबर 30 थर्ड को करना स्टार्ट करते हैं। पहले रिक्वायरमेंट पढ़ लेते हैं। उससे हमें क्लेरिटी मिल जाती है। मांग क्या रहा है? डिसाइड वेदर एमआईएस शुड एक्सेप्ट द प्रोजेक्ट और वेट एंड सी। दो बातें हैं। या तो अभी प्रोजेक्ट को एक्सेप्ट करें या वेट करें और देखें। ठीक है जी। तो देखो एक ऑप्शन तो यह है कि अभी एक्सेप्ट करें या ना करें। ठीक है जी। इफ वी कंसीडर एक्सेप्टिंग दी प्रोजेक्ट टुडे इटसेल्फ। यानी अगर हम यह सोचें कि भैया इस प्रोजेक्ट को अभी के अभी एक्सेप्ट करो। तो एक बात बताइए इस प्रोजेक्ट में आउट फ्लो 3:46:00 कितने का बता रहा है? वह कह रहा है आउट फ्लो है 250 करोड़ का और इनफ्लो कितने का बता रहा है? वो कह रहा है जी इनफ्लो होगा 21 लाख पर ईयर फॉर एवर फॉर एवर मतलब इंफिनिटी तक। तो इसकी प्रेजेंट वैल्यू कैसे लगेगी? और हमें डब्ल्यूएससीसी पता है 10% है। डब्ल्यूएससीसी 10% है। इनफ्लो है ₹1 लाख फॉर एवर। तो यानी प्रेजेंट वैल्यू ऑफ इनफ्लो कितनी होगी जो अच्छा एक बात बताओ अगर हर साल 21 21 हमेशा मिलते रहेंगे तो उसकी आज की वैल्यू क्या है तो ये परपेचुटी लग गई याद है ना परपेचुअल एनविटी लग गई उसका फार्मूला क्या होता है याद करो जो चीज हमेशा हमेशा हमेशा हमेशा मिलती रहेगी उसका आज की वैल्यू क्या होती है a / और अगर वो ग्रोथ के साथ होती है तो फार्मूला होता है a / i - g बट इसमें ग्रोथ तो है नहीं हर साल 21 लाख ही मिलते रहेंगे तो उसकी वैल्यू हो हो गई 21 3:47:01 लाख डिवाइड बाय 10% यानी 2.1 करोड़ यानी अगर हम आज की डेट पे एनपीवी टुडे देखें अगर हम इनफ्लो माइनस आउट फ्लो करें तो तो भैया यह प्रोजेक्ट बेकार 2.1 करोड़ - 2 210 करोड़ है। ये लैक्स था ना यार एक जीरो कम कैसे बैठ रहा है? अच्छा वो 22.5 करोड़ था बेटा। 2.5 था। राइट? - 0.4 करोड़। सो लॉस दस वी कैन से 3:48:05 दिस प्रोजेक्ट इज़ नॉट एक्सेप्टेबल टुडे इफ एक्सेप्टेड एंड कंसीडर्ड टुडे। यानी ध्यान रखिएगा उसने दो बातें पूछी थी कि आज एक्सेप्ट करें या आगे का सोच के एक्सेप्ट करें। यही बात पूछी थी। आज के लिए तो नॉट एक्सेप्टेबल है। क्या फर्स्ट पार्ट समझ आया? यूनिक था ना या अलग था? पहले वाले दोनों क्वेश्चनों से तीनों क्वेश्चनों से अलग था। वो ये कह रहा है आज एक्सेप्ट करें कि नहीं? तो भैया आज तो मना है। क्यों? अगर आज के हिसाब से देखते हो तो आपके पैसे लगेंगे 2.5 करोड़। ₹5 करोड़ लग जाएगा और वापस आएगा 2.1 करोड़। तो भैया बेकार है। कोई बैठे-बैठे नुकसान करना अच्छा लगता है क्या? यह तो ऐसी बात हो गई कि आप बैंक से लोन ले लो और 3:49:06 एफडी करा दो। बैंक से लोन ले लो 9% पे और एफडी करा दो 7% पे और बोलो वाह मजा आ गया। तुम नालायक हो फिर। यह तो श्योर श लॉस का तरीका है। कि आपने खर्चा ज्यादा कर दिया और इनफ्लो कम है आपका। क्या मेरी बातें आपको समझ आती है? मैंने क्या कहा? यह तो श्योर शॉट खर्चे का तरीका है। नुकसान का तरीका है। क्लियर है यह बात? आपने कहा जी हां सर। यह बात मुझे क्लियरली समझ आती है। मुझे कोई और परेशानी इस सब में नहीं है। कूल। लेकिन उसने एक बात और बोली थी। शुड एक्सेप्ट द प्रोजेक्ट और वेट। वेट एंड सी। चलो अब वेट एंड सी का मतलब होता है कि यहां पे हम ऑप्शंस को देखते हैं। फ़्यूचर के ऑप्शन को देखते हैं। ठीक है ना? तो देखिए हाउएवर आफ्टर वन ईयर विद द चेंज इन द गवर्नमेंट इन द स्टेट बेटा अगले साल इलेक्शन होने हैं। इलेक्शन के बाद सरकार चेंज होगी। अब सरकार चेंज होगी तो दो रूप होंगे। या तो सरकार सोलर पावर को अच्छा मानेगी या बुरा मानेगी। 3:50:09 अगर द रेट ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी सब्जेक्टेड टू चेंज। अकॉर्डिंगली द सेविंग इन द इलेक्ट्रिसिटी कैन बी ₹12 लाख और 35 लाख। मतलब अगले साल फ़ायदा भी हो सकता है, नुकसान भी हो सकता है। मतलब इस बात को आप ऐसे समझो कि सेकंड पार्ट की बात कर रहा हूं मैं। अभी ना लिखने से ज्यादा फोकस करना। मैं जो समझाने की कोशिश कर रहा हूं उस पे। या तो आप 2.5 करोड़ का आज की डेट पे आउटफ्लो करो। लेकिन अगले साल से जब सरकार चेंज हो जाएगी तो या तो आपको 35 लाख ईच ईयर मिलने लगेगा। इसका मतलब होता है 35 लाख बाय 10% परपेचुटी का फार्मूला। तो 3.5 करोड़। यानी या तो इस प्रोजेक्ट की वैल्यू 3.5 करोड़ बन जाएगी आपके लिए। या फिर बुरा भी हो सकता है या तो बिजली का रेट कम भी हो सकता है। कितना कम हो सकता है? 12 लाख पर भी आ सकती है सेविंग्स। 3:51:10 बेटा मनी सेव्ड इज़ मनी अर्न माना जाता है। ठीक है ना? तो या तो 12 लाख पे भी आ सकती है सेविंग। परपेचुअल कि सिर्फ 12 लाख ही बचेगा। तो यह तो 1.2 करोड़ बनेगा। यानी आपको इस प्रोजेक्ट में खाली 1.2 करोड़ का इनफ्लो भी मिल सकता है। अब डिपेंड करता है कि एक साल बाद आपका इनफ्लो फेवरेबल भी हो सकता है, अनफेवरेबल भी हो सकता है। अगर हम रुके अगर हम यह सोचें कि चलो हम आज नहीं कर रहे ये प्रोजेक्ट एक साल बाद करेंगे सोलर पावर का प्रोजेक्ट या आज ना करके फ्यूचर के हिसाब से सोचते हैं। वेट एंड सी करते हैं। यही बात हुई ना? उसने बोला था या तो आज के बारे में सोचो। आज के बारे में सोचोगे तो तो 21 लाख मिलेंगे फॉर एवर। तब तो 2.1 करोड़ आया। पर अगर एक साल बाद के बारे में सोचेंगे तो 3.5 करोड़ भी सोच सकते हैं या फिर 12 करोड़ भी मतलब 1.2 करोड़ भी सोच सकते हैं। ठीक है सर यह बात भी हमें समझ आ गई। कोई परेशानी तो नहीं है? अब आगे देखिए। 3:52:12 और [नाक से की जाने वाली आवाज़] रिस्क फ्री रेट 8% है। यानी जिससे डिस्काउंटिंग होनी है आगे के लिए वह यह रेट है। तो बताइए क्या करें? तो हमें इसमें वैल्यू ऑफ ऑप्शन निकालनी पड़ेगी। देखिएगा ध्यान से यहां पर एनपीवी कितनी हो जाएगी? अगर एक साल बाद स्टार्ट करें। इमेजिन करो अगर मैं प्रोजेक्ट को एक साल बाद स्टार्ट करूं तो मेरे जेब से मतलब यह तब की बात है कि अगर हम आज स्टार्ट ना करें आफ्टर वन ईयर करें। इस पे ना लिख लो सेकंड पार्ट पे 3:52:57 यानी अगर हम आज प्रोजेक्ट को स्टार्ट ना करें। प्रोजेक्ट को स्टार्ट करें वन ईयर के एंड पे। अगर हम प्रोजेक्ट को आज स्टार्ट ना करें। प्रोजेक्ट को कब स्टार्ट करें? वन ईयर के एंड पे। ठीक है जी। तो अब यहां पर दो एनपीवी निकलेंगे। देखिए जरा इफ इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट राइज़ेस एंड इफ इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट फॉल्स तो पीवीसीआई क्या होगा? इनफ्लो क्या होगा? 3.5 करोड़। और पीवीसीओ क्या होगा तब तब हमने प्रोजेक्ट पर लगाए होंगे 2.5 करोड़। अच्छा आपको यह समझ आ रहा है कि ये कौन सा ऑप्शन है? कितने बच्चों को समझ आ रहा है? यह अबेंडनमेंट ऑप्शन नहीं है। यह यह ऑप्शन है कि हम प्रोजेक्ट आज स्टार्ट करें या एक 3:53:57 साल बाद स्टार्ट करें। तो यानी यह हम कॉल ऑप्शन है क्योंकि यह फ्यूचर में हम स्टार्ट कर सकते हैं। यानी फ्यूचर में इस प्रोजेक्ट को परचेस किया जा सकता है। यह वैसी वाली बात हो गई कि आज आप फ्लैट की खाली ईयूआई भर रहे हो। आपने खरीदना नहीं खरीदना बाद में सोचोगे। ठीक है ना? इस केस में तो एनपीवी 1 करोड़ हो सकती है। यहां पे पीवीसीआई कितनी थी? 1.2 करोड़। पीवीसीओ कितना होगा? प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ कैश आउट फ्लो 2.5 करोड़। तो यहां पे तो आपकी नेगेटिव एनपीवी आ जाएगी दोस्तों। कितनी? नेगेटिव 1.3 करोड़। तो या तो आप कमा सकते हो पैसा या तो आप गवा सकते हो पैसा। ठीक है जी। या तो आप पैसा कमाओगे या तो आप गवाओगे। कोई प्रॉब्लम तो नहीं है? जी। एब्सोलुटली। 3:55:00 तो चलिए हम एक काम करते हैं। प्रोबेबिलिटी निकाल लेते हैं। यानी अब इसमें स्टेप्स कर देते हैं। वैल्यू ऑफ ऑप्शन के स्टेप वन। वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन एट हाई प्राइस। हाई प्राइस पे उसकी वैल्यू है पॉजिटिव 1 करोड़। एंड वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन एट लो प्राइस वो है - 1.3 करोड़। नेगेटिव में है। स्टेप टू होता है प्रोबेबिलिटी निकालना। प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस यानी P वो कैसे आ सकती है? करंट मार्केट प्राइस 1 + RT - लो प्राइस अप हाई प्राइस माइनस लो प्राइस। इस वाली प्रोजेक्ट की कीमत को देखिए जरा कैसे आएगा। अगर मैं लिखूं 2.5 1 + 8% * 1 3:56:04 माइनस लो प्राइस है 1.2 अपॉन हाई प्राइस माइनस लो प्राइस करिए बेटा किसने निकाली है प्रोबेबिलिटी एक बारी क्विकली प्रोबेबिलिटी निकाल के बताइए आप मुझे 3:56:29 अरे निकम्मो 2.7 - 1.2 तो ऊपर आ गया 1.5 नीचे आ गया 2.3652 3:56:51 यह P आ जाएगा। फिर आप मुझे बताइए कि प्रोबेबिलिटी ऑफ लो प्राइस कितना होगा? यानी Q348 3:57:13 स्टेप थ्री में वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन कितना होगा? 1 करोड़ *652 नेगेटिव 1.3 *348 अपॉन डिस्काउंटिंग। डिस्काउंटिंग कितनी थी? जी इस क्वेश्चन में रेट ऑफ डिस्काउंटिंग कितना था? देखिए अब इसमें रिस्क फ्री रेट था 8% लेकिन हमारी कॉस्ट ऑफ कैपिटल थी 10% दो अलग-अलग रेट दिए हुए हैं उसने इस क्वेश्चन में डिस्काउंटिंग फैक्टर में वही 8% ही यूज़ करोगे ना डब्ल्यूएससीसी तो प्रेजेंट वैल्यू निकालने के काम आया तब जो हमें परपेचुटी पता थी उसके लिए अदरवाइज बाकी सब जगह पे इन क्वेश्चंस में हम वैल्यू्यूएशन ऑफ ऑप्शन करते हुए रिस्क फ्री रेट को यूज़ करते हैं। 3:58:18 इसका डायरेक्ट आंसर बता दीजिए। 18.5 लाख 18.15 लाख 3:58:39 18.48 आ रहा है। 18.48 बेटा पॉइंट में लिखोगे तो करोड़ में आंसर आएगा। अच्छा अगर आप इसे 10% से भी कर दोगे तो भी इंस्टट्यूट मार्क्स देगा आपको। अगर यहां पे आप डिस्काउंटिंग फैक्टर 10% भी यूज़ कर दोगे तो भी मार्क्स देगा। कोई ऐसी चिंता की बात नहीं है। उन्होंने भी अपने आंसर में दोनों ही दिखाए हुए हैं। तो ये 18.48 लैक्स आ गया। बोलिए ये बातें आपको समझ आती है? देखो अब अगर एक साल बाद प्रोजेक्ट स्टार्ट करेंगे तो एनपी भी पॉजिटिव है। इसका मतलब अब एक्सेप्ट कर सकते हो इसे। यानी आपकी एडवाइस क्या चेंज हो जाएगी? अब यहां पे पहले हमने एडवाइस दी थी कि मत करो ये प्रोजेक्ट। क्यों? हमने कहा था कि भैया अगर आज स्टार्ट करने की सोच रहे हो तो मत करो ये प्रोजेक्ट स्टार्ट। पर अगर एक साल बाद स्टार्ट करने की सोच रहे हो तो यह प्रोजेक्ट में एनपी पॉजिटिव आ रही है। ठीक है जी। तब आप बोलोगे कि अब इसे स्टार्ट कर सकते हो। लिखिए जरा। इट इज एडवाइबल टू वेट एंड सी 3:59:43 एज एनपीवी मे टर्न पॉजिटिव आफ्टर वन ईयर यानी 1 साल बाद अगर आप देखोगे तो पॉजिटिव आ सकता है आंसर क्यों 1 साल बाद वेट कर देखो बेटा सीधी सी बात है एक साल वेट करो नई गवर्नमेंट को आने अगर नई गवर्नमेंट आने के बाद इलेक्ट्रिसिटी का दाम बढ़ गया तो प्रोजेक्ट स्टार्ट कर लेना वरना मत करना। भाई जबरदस्ती अपने पैर पे कुल्हाड़ी थोड़ी ना मारनी है। अगर एक साल बाद जो गवर्नमेंट आई वो फेवर वाली आई जिसने बिजली का रेट बढ़ा दिया तो फिर आप स्टार्ट करना सोलर पावर प्लांट वरना मत करना वरना नुकसान क्यों कराना है अपना? ठीक है जी। एक मैंने बहुत बड़ा क्वेश्चन बनाया। इतना बड़ा क्वेश्चन कभी भी एग्जाम में नहीं आएगा। लेकिन ये सिर्फ प्रैक्टिस के लिए बनाया है। क्वेश्चन नंबर 37 पढ़िए। वो यह कहता है कि करंट मार्केट प्राइस इज डॉलर 600 इन द फर्स्ट 3 मंथ पीरियड द प्राइस कैन गो अप और डाउन बाय 10% इन द नेक्स्ट 3 मंथ पीरियड द प्राइस कैन गो अप एंड डाउन बाय 4:00:43 5% ठीक है तो उसने हमें यह साफ-साफ बता दिया है कि प्राइस कहां-कहां जा सकता है। तो चलो मेरे साथ करना स्टार्ट करो। स्पीड पकड़ेंगे। क्वेश्चन नंबर 37 करेंगे। पहले हम प्रोबेबिलिटी निकालते हैं। बाकी बातें बाद में करेंगे। अभी का करंट मार्केट प्राइस कितना है? पहले यह बताओ। करंट मार्केट प्राइस है 600। यह ऊपर भी जा सकता है और नीचे भी जा सकता है 10%। वो यह कहता है कि 10% ऊपर या 10% नीचे जा सकता है। तो अगर प्राइस ऊपर चला गया तो 660 पे चला जाएगा। प्राइस अगर नीचे चला गया तो 540 पे चला जाएगा। ठीक बात है। बट उसके बाद अगर अगले 3 महीने में प्राइस कैन गो अप एंड डाउन बाय 5%। प्राइस ऊपर या नीचे जा सकता है 5% +5% -5% यानी यहां पे भी +5% -5% 4:01:43 तो प्राइस कितना हो सकता है? 693, 627, 567 या फिर 53 अब इनके नाम दे दो। यह है ए बी सी डी ई एफ जी। अब यह देख रहे हो यह दोनों प्राइसेस अलग-अलग आए हैं। चांस की बात है अलग-अलग भी आ सकते हैं। ठीक है? अच्छा अब एक बात बताओ इसमें इस लूप में अलग प्रोबेबिलिटी होगी P और Q। इन दोनों लूप्स में अलग होंगी P और Q। इन दोनों की P और Q सेम होगी। लेकिन यहां की नहीं होगी सेम। क्योंकि यहां 10% है। यहां 55% है। जहां-जहां 5% है और यह वाला सेम है। इनकी P और Q सेम होगी। लेकिन इनकी P और Q सेम नहीं होगी। यह बात पता चल रही है ना? आपको मैं क्या बोल रहा हूं? आपको लूप्स के नाम याद है कैसे होते हैं? देखो अगर मैं आपको सच्चाई बताऊं तो यह देखो ये जो है ये लूप वन है। है ना? यह जो है यह लूप टू है। 4:02:49 और यह जो है यह लूप थ्री है। जो मैंने पेंसिल से मार्क किया है लूप 1 2 3 वह समझ आ रहा है आपको? मैंने क्या किया है? लूप वन टू थ्री सबको समझ आ गया? कूल। तो पहले हम प्रोबेबिलिटी निकालते हैं। बेसिक रखते हैं अपनी बातचीत को। ज्यादा टेंशन नहीं लेते। है ना? क्वेश्चन तो स्टार्ट हो ही जाएगा। पढ़ो। वो कहता है 8% का कंपाउंडेड कंटीन्यूअसली का रेट है और स्ट्राइक प्राइस है 588। स्ट्राइक प्राइस कितना है? $58। ठीक है? 8 पर्सन कंपाउंडेड है और 3 महीने की बात हो रही है। तीन-ती महीने की बात हो रही है। यानी दोनों जो पीरियड है वो 33 मंथ्स है। तो पहले एक बात बताइए प्रोबेबिलिटी ऑफ लूप थ्री। पहले लूप थ्री बताइए। एंड डिक्रीज। 4:03:52 तो यहां पे प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस क्या होगी? करंट मार्केट प्राइस * e की पावर RT. RT मतलब होता है 8% * 3/12 माइनस लो प्राइस यानी 540 अपॉन हाई प्राइस माइनस लो प्राइस। तो इसे सॉल्व करिएगा। यह आ जाएगा702 यह P आ गया Q कितना आ जाएगा 1 -702 यानी 2980 तो हमारे पास प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस आ गया लूप थ्री के लिए लेकिन प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लूप वन एंड एंड टू जिनमें 5% इंक्रीज डिक्रीज था 4:04:54 उनके लिए P और Q क्या होगा? देखिए अब उनके लिए यहां से निकालते हैं। इसे करंट मार्केट प्राइस मान के इसे हाई और इसे लो मान के इसकी सेल स्यूशन कर लो। तो ये बन जाएगा 660 * e की पावर 8% * 3 मंथ्स माइनस लो प्राइस। लो प्राइस था 627 अपॉन हाई प्राइस माइनस लो प्राइस हाई प्राइस था 59 693 ठीक है जी इस पूरे को सिंपलीफाई कर दीजिए और मुझे बता दीजिए 4:05:43 कि अगर मुझे हाई प्राइस और लो प्राइस करना है तो क्या होगा? बोलिए क्लियर है ये बातें? 4:05:53 तो यह आ जाएगा आपके पास 2980 नहीं मैंने पिछले वाले का ही लिख दिया है 60 मैंने ऊपर नीचे कर दी है बेटे वैल्यूस ना यह जो6610 है यह एक्चुअली में इसकी कैलकुलेशन है और इसकी कैलकुलेशन यह वाली है। इसकी कैलकुलेशन यह वाली है। हम हम चेंज करना पड़ेगा आपको। एक्चुअली हम में से किसी ने भी कैलकुलेट नहीं करी ना। हमने वो गिवन वैल्यूज़ ही यूज़ कर ली। 4:06:50 6010 ये आ जाएगा तो हमारे पास P और Q दोनों सिचुएशनंस में आ गया। आई होप ये तो आप खुद भी कर लेते थे। अब ये तो आप खुद भी कर लेते हो। हां या ना? वो तो यह है कि अभी हमें स्पीड में करना है क्योंकि हमें जल्दी क्वेश्चन निपटाना है। इसीलिए हम साथ-साथ कर रहे हैं। वरना यह आप स्वयं भी कर सकते हैं। फिर सर आप यह करा ही क्यों रहे हो? जब यह मैं खुद ही कर सकता हूं। मैं चाहता हूं मैं पुट वाले करा दूं। कॉल वाले होमवर्क दे दूं। क्या कहते हो? क्योंकि कॉल की हमने खूब प्रैक्टिस कर ली है। पुट की नहीं की है। पुट की यूरोपियन और अमेरिकन दोनों मैं करा देता हूं। मतलब मैं थर्ड और फोर्थ पार्ट करा देता हूं। फर्स्ट और सेकंड होमवर्क दे दूंगा। फिर उसका हैंड रिटन सॉल्यूशन शेयर कर दूंगा आपके साथ। ठीक है ना? वो आज होमवर्क में कर लेना। मतलब इसमें चार पार्ट्स हैं। देखो यूरोपियन कॉल, यूरोपियन पुट, अमेरिकन कॉल, अमेरिकन पुट। तो मैं सेकंड और फोर्थ मैं 4:07:51 पुट वाले मैं करा देता हूं। सेकंड और फोर्थ। सेकंड और फोर्थ पार्ट मैं करा देता हूं। है ना? चलो फिर हम इसे सॉल्व करना स्टार्ट कर देते हैं। आइए सॉल्यूशन नंबर 37 का सेकंड पार्ट। फॉर यूरोपियन पुट ऑप्शन। हम किसके लिए सॉल्व करना स्टार्ट कर देते हैं? यूरोपियन पुट ऑप्शन के लिए सॉल्व करना स्टार्ट कर देते हैं। तो बताइए जी पहले क्या करेंगे? सबसे पहले हम करेंगे सॉल्विंग फॉर लूप वन। लूप वन में कौन-कौन आता है बताओ? लूप वन में आता है बी डी ई नोड जो है वह बी डी ई आएंगे। इसका स्टेप वन इसका स्टेप वन क्या होगा बताओ? 4:08:54 वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन एट हाई प्राइस। हाई प्राइस मतलब d तो बताइए पुट ऑप्शन का प्राइस कैसे आता है? याद रखना अपने दिमाग में। x - s 0 मैक्स इस फार्मूला से आता है बेटे। तो x को पहले रखना है। है ना? तो इसमें x कितना था? x था 588 है। 588 - d वाज़ 643 चेक करो। 6 नहीं 93 था सॉरी। तो यह तो जीरो ही आ जाएगा। वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन एट लो प्राइस। लो प्राइस मतलब E लो प्राइस मतलब नोड E पे 588 - 627 तो वो भी ज़ीरो ही हो गया। 4:10:01 प्रोबेबिलिटी ऑफ हाई प्राइस यानी P प्रोबेबिलिटी ऑफ लो प्राइस यानी Q इसके लिए थी 702 980 4:10:28 ठीक है जी। अब सुनिए। अब अगर मुझे DE पता है, PQ पता है। चले हम आगे। 4:10:47 तब आप यह निकालिए। 4:10:57 वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन एट न B नड B पे क्या वैल्यू होगी 0 *702 + 0 *2980 अपॉन E की पावर 8% * 3/12 तो आंसर तो जीरो ही आ जाएगा। 4:11:29 न बी तक तो ज़ीरो ही है। पहले आप मुझे बस इतना बता दीजिए। क्या आपको लूप वन समझ आ गया? सर ये इतने सारे ज़ीरो क्यों आ रहे हैं बेटा? क्योंकि ये पुट ऑप्शन है। पुट ऑप्शन में वैल्यू बढ़ने पे आंसर खत्म हो जाए। ज़ीरो आएगा। वैल्यू घटने पे पॉजिटिव आंसर आएगा। याद है? पुट में कब फायदा होता जब दाम गिरता है तो जब इस विंग में इमेजिन करो जब यहां पे दाम बढ़ रहा है बी में और फिर बी के बाद डी और ई में बढ़ रहे मतलब बढ़ रहा है ना ऊपर की तरफ जा रहा है तो यहां पे तो वैल्यू लेस ही होगी पुट ऑप्शन नीचे जब आएगा तब वैल्यू फुल होगी है ना तब उसमें कुछ वैल्यू होगी तो पढ़िए सॉल्विंग फॉर लूप टू लूप टू में नड कौन-कौन से कवर होते हैं सी एफ जी सी एफ एंड जी बताइए जी स्टेप वन वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन 4:12:31 एट हाई प्राइस यानी F पे F कितना था 567 तो 588 - 567 0 मैक्स यानी यह आ गया 21 वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन एट लो प्राइस लो प्राइस हो गया g कितना हो गया 588 - 513 तो ये तो वैल्यू और बढ़कर आएगी 75 स्टेप टू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस यानी P यानी पॉइंट 702 प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस यानी Q यानी2980 स्टेप थ्री वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन एट नोड C 4:13:33 21 *702 75 * 0.2980 4:13:45 e की पावर 8% * 3/12 तो इसको जब सॉल्व कर लोगे तो इसका आंसर आ जाएगा 36.3575 क्या बात है। नोड सी की भी वैल्यू आ गई। नोड बी की भी वैल्यू आ गई। लूप वन भी सॉल्व हो गया। लूप टू भी सॉल्व हो गया। लूप वन भी सॉल्व हो गया, लूप टू भी सॉल्व हो गया। क्या आपको डिफरेंस पता चल रहा है ना कि पुट ऑप्शन में कैसे आंसर में अंतर आ रहा है? सच-सच बताओ। आपको आंसर में अंतर समझ आ रहा है ना कि पुट ऑप्शन में आंसर अलग कैसे आ रहा है? कूल है। 4:14:41 बहुत ही बढ़िया। ठीक है सर। यह भी समझ आ गया। अब सर कुछ जीवन में हमारे नया करो। ठीक बात है। अब हम एक काम करते हैं। सॉल्विंग फॉर लूप थ्री करते हैं। जिसमें नोड कौन-कौन से हैं? A, B एंड C। अब आप मुझे बताओ A पे वैल्यू क्या है? B पे वैल्यू क्या है? और C पे वैल्यू क्या है? C पे तो वैल्यू है। 4:15:23 देखिए बच्चे B नोड पे वैल्यू है ज़ीरो। C नोड पे वैल्यू है 36.3575। A पर करंट मार्केट प्राइस चल रहा है 600 का। है ना? तो इसका स्टेप वन क्या है? वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन एट हाई प्राइस। हाई प्राइस मतलब B पे वह ज़ीरो है। वैल्यू ऑफ़ पुट ऑप्शन एट लो प्राइस यानी C पे वो है 36.3575 स्टेप टू होता है प्रोबेबिलिटी प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस इसकी कितनी है? यह इसकी अलग थी। देखो इसकी थी यह ऊपर वाली 6010610 और प्रोबेबिलिटी ऑफ लो प्राइस यानी Q 4:16:26 39903990 4:16:36 यानी हम B C PQ यहां तक तो पहुंच ही गए। अब हम इसकी वैल्यू निकाल लेते हैं स्टेप थ्री करके। वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन एट नोड ए नोड ए की वैल्यू बताओ कितनी? 0 *6010 और फिर 36.3575 *3990 अप e की पावर 8% * 3/12 बोलिए क्लियर है ये बात e की पावर 8% * 3/12 यहां तक कोई दिक्कत तो नहीं है जी 4:17:47 तो इस पूरे का आंसर कितना हो जाएगा जी 4:17:57 इस पूरे को सॉल्व करने पर आपके पास वैल्यू बनेगी 14.225 यहां पर हमारा यूरोपियन आंसर खत्म हो जाता है। कितने बच्चों को समझ आ गया कि हां सर यूरोपियन इज वेरी कूल। यूरोपियन में तो कोई भी पंगा है ही नहीं। जल्दी से आप मुझे बताइए। 4:18:36 ठीक है जी। बहुत बढ़िया। अब आइए हम अमेरिकन ऑप्शन सॉल्व करते हैं। कौन सा ऑप्शन सॉल्व करते हैं बेटे? अमेरिकन ऑप्शन सॉल्व करते हैं। देखिएगा अच्छे से। अभी तक हम 37 का सेकंड पार्ट सॉल्व कर रहे थे। अब हम 37 का फोर्थ पार्ट सॉल्व करेंगे। लिखिए। 37 का फोर्थ पार्ट। अब आप लिखेंगे अमेरिकन पुट ऑप्शन। अगर यह अमेरिकन पुट ऑप्शन होती तो क्या होता? तो देखो आप पहले एक टेबल बनाते। टेबल में आप नोट्स की वैल्यू लिखते, नोट्स लिखते, कैलकुलेटेड वैल्यू लिखते, इंट्रेंसिक वैल्यू लिखते। ठीक है जी? यहां पर आप नोड की वैल्यू लिखते। यहां पर आप कैलकुलेटेड वैल्यू लिखते। 4:19:39 यहां पर आप इंट्रेंसिक वैल्यू लिखते। और इंट्रिंसिक वैल्यू कैसे आती है बेटा? x - s 0 मैक्स क्योंकि ये पुट ऑप्शन है। और फिर इन दोनों में से हायर को चुनते। और फिर इन दोनों में से हायर को चुनते। क्या ये बातें आपको क्लियर है? ठीक है? नोड्स हमारे पास कौन-कौन से हैं? सोच के देखो। एक नोड है बी, एक नोड है सी और फिर एक नोड है ए। इसी ऑर्डर में लिखो। बी [नाक से की जाने वाली आवाज़] सी ए। आगे वाले लिखने की जरूरत नहीं है। बताओ क्यों नहीं है जरूरत? बाकी सारे नड में सेम ही आना है। तो उसे लिख के दिखा के ना कोई फर्क नहीं पड़ना। तो उसके कोई मार्क्स तो मिलने नहीं आपको। तो इग्नोर कर दिया। अभी 2 मिनट रुक जाना। अब थोड़ी देर रुकना क्योंकि इस क्वेश्चन में आंसर बदल रहा है। पिछले क्वेश्चन में आंसर नहीं बदलता। जब भी कॉल का ऑप्शन होता है ना आंसर नहीं बदलता। पुट में आंसर बदलता है। क्यों सर ऐसा 4:20:40 क्यों कह रहे हो? मैं बता रहा हूं ना आपको बदलता है। तो मैं वही समझाना चाहता हूं। क्यों बदलता है? सुनो। वो भी सब जगह नहीं बदलता। कभी-कभी बदलता है। सुनना। थोड़ी देर रुक जाओ। पेन रख दो। इसी चीज को समझाने के लिए ये क्वेश्चन मैंने कराया। वरना ना कराता। कैलकुलेटेड वैल्यू B की कितनी है? देखो B पॉइंट की कैलकुलेटेड वैल्यू थी 0 C पॉइंट की C नोड की कैलकुलेटेड वैल्यू थी 363575 4:21:14 A नोड की कैलकुलेटेड वैल्यू थी 14 225 ठीक है अब पेन रखो प्लीज समझाओ प्लीज सुनो इंट्रिंसिक वैल्यू कितनी होगी? B पॉइंट पे B पे देखो बेटा [नाक से की जाने वाली आवाज़] जो B नोड है वो है 660 और ये है 540 और हमारा प्राइस है 588। स्ट्राइक प्राइस है 588। तो यह तो ज़ीरो ही होगा। यह लेकिन 48 होगा। क्यों? देखो B नड पे तो 588 - 660 0 मैक्स तो वह जीरो ही आएगा। तो इन दोनों में से हायर भी जीरो है। प्लीज रख दो बैन और सुनो। यहां पे कितना है? 588 - 540 यही था ना? 4:22:15 अब आप मुझे बताओ इन दोनों में से हायर कौन है? अब आप कहोगे इन दोनों में से तो सर हायर 48 है। अब पहली बार ऐसा हुआ कि इंट्रिंसिक वैल्यू ज्यादा आ गई कैलकुलेटेड वैल्यू से। अभी जो पिछला क्वेश्चन हमने किया था उसमें ऐसा नहीं था। उसमें सारी वैल्यू्यूज ही सेम आ रही थी। जो कैलकुलेटेड वैल्यू थी वही ज्यादा थी। क्योंकि कैलकुलेटेड वैल्यू ज्यादा थी इसलिए वही आउटर कॉलम में आ रही थी। याद करो। पर अब यहां पे गेम बदल गया। कैसे गेम बदल गया? पहली बार ऐसा हुआ है कि जो कैलकुलेटेड वैल्यू है उससे ज्यादा इंट्रिंसिक वैल्यू आ गई है। तो अब हमें आउटर कॉलम में इंट्रेंसिक वैल्यू लिखनी है। यानी अब B की वैल्यू अब हम ये मानेंगे और C की वैल्यू अब हम ये नहीं मानेंगे। ये मानेंगे। अच्छा अब एक बात बताओ अगर B और C में से किसी भी एक की वैल्यू चेंज हो गई तो अब A की वैल्यू भी चेंज होगी। सर ऐसे क्या है? A की वैल्यू चेंज होएगी। हम बात नहीं समझ पा रहे। क्योंकि [नाक से की जाने वाली आवाज़] अब मेरी बात को समझो। अगर B और C हमने यहां B और C की ये वैल्यू लेके सॉल्व किया था A को। पर अगर C की वैल्यू ही चेंज हो गई 48 आ गई। तो अब A की वैल्यू रिकंप्यूट करनी पड़ेगी ना अब आपको? 4:23:19 अब A की ये वैल्यू गलत है। क्यों गलत है? यार एक बात बताओ। आप अभी भी ना समझ नहीं रहे। आप रट्टा लगाना चाहते हो। मैं आपको समझाना चाहता हूं। सुनो। हम ये कह रहे हैं कि भैया अगर मेरे पास अमेरिकन ऑप्शन है। बोलो मेरे साथ। अगर मेरे पास अमेरिकन ऑप्शन है तो मैं अपने लिए हमेशा हायर ऑप्शन को चुनूंगा। तो B में हायर ऑप्शन कौन था? तो ज़ीरो था जीरो ही ले लिया। इन दोनों में से हायर ऑप्शन कौन है? 48 है तो 48 लूंगा। तो जब C पॉइंट पे मैं इसे यूज़ नहीं करूंगा। 48 को यूज़ करूंगा तो जब B और C से बैकवर्ड जाके A की वैल्यू निकलेगी तो A की वैल्यू भी तो चेंज होगी। अगर C की वैल्यू चेंज हो गई। तो अब हमें C क्योंकि C चेंज हो गया है। इसीलिए वी विल हैव टू रीकंप्यूट वैल्यू फॉर A. अब देखो इधर मैं क्या लिख रहा हूं। सुनो नोट। वैल्यू ऑफ नोड C हैज़ चेंज्ड फ्रॉम 36.3575 248 सो 4:24:20 वी विल हैव टू कंप्यू्यूट वैल्यू ऑफ नोड A अगेन तो अब नोड ए यानी वैल्यू ऑफ पुट ऑप्शन एट नोड ए दोबारा निकलेगा। कैसे? देखो हाई प्राइस * प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस 6010 लो प्राइस इंटू प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस अपॉन e की पावर 8% * 3/12 तो अब जो इसका आंसर आएगा वो आएगा 18.773 इसका वैल्यू कितना आएगा 18.773 यानी जो कैलकुलेट ेटेड वैल्यू पहले 14 थी। अब हम उसे 14 नहीं मान सकते। अभी हमें उस वैल्यू को इसे काट के 18.773 4:25:21 को लेना पड़ेगा कैलकुलेटेड वैल्यू में। अच्छा यानी ये रियल टाइम अपडेट हो रहा है। रियल टाइम अपडेट का मतलब अगर B और C चेंज हुए या B और C में से कोई भी चेंज हुआ तो इसकी हेल्प से A की वैल्यू चेंज हो जाएगी। अब A की कैलकुलेट वैल्यू चेंज होगी ना। यार एक बात बताओ आपने कैसे निकाली थी? A की वैल्यू? A की वैल्यू? B और C की वैल्यू यूज़ करी थी। पर अगर अब C की वैल्यू ही चेंज हो गई है 48 हो गई है तो फिर A की वैल्यू दोबारा रीकंप्यू्यूट करनी पड़ेगी ना आपको। इसीलिए पुट ऑप्शन टफ होता है क्योंकि पुट ऑप्शन में हर वक्त वेरिएबल चेंज हो सकते हैं। इसीलिए ICI ने आज तक कभी भी एग्जाम में नहीं पूछा। कभी भी नहीं पूछा। कभी भी नहीं पूछा। मतलब यह वाला आंसर कभी भी नहीं पूछा। आरटीपी में पूछा लेकिन उसमें भी सॉल्व नहीं किया। पुट ऑप्शन सॉल्व ही नहीं किया। कॉल से सॉल्व करके दिखा दिया। मुझे तो समझ नहीं आ रहा। जब आप आरटीपी प्रिंट कर रहे हो तो भाई जवाब किसे दोगे कि आधा आंसर प्रिंट किया है। कि ना कोई पूछने वाला ना कोई बताने वाला और वह भी बहुत पुरानी बात नहीं कर रहा मे 2023 की आरटीपी है देखना जाके घर और मैं एक बहुत बुरी बात बोलूं आपको सच्चाई मैं दावे के साथ बोल सकता हूं ये 4:26:21 जो मैं पोर्शन करा रहा हूं ना ये 80% टीचर्स भी सॉल्व नहीं कर पाएंगे क्योंकि अमेरिकन ऑप्शन ना आईसीएनए को आती है ना बहुत सारे टीचरों को आती है क्योंकि रीजन है ना इस चीज को पढ़ाने के लिए डेप्थ में स्टडी करनी पड़ेगी विदेशी बुक्स को पढ़ना पड़ेगा। मैंने भी पढ़ी है। मैं यह नहीं कह रहा कि मैंने कोई घर पर थोड़ी ना बनाया मेथड। मैंने भी विदेशी बुक्स पढ़ी है। बेटा अन्य मटेरियल पढ़ा और उसके हिसाब से आपको पढ़ा रहा हूं। अच्छा कैलकुलेटेड वैल्यू देख लेते हैं इसकी। देखो यहां पे वैल्यू हो जाएगी 588 - 600 0 मैक्स। तो वो होगी ज़ीरो। तो अब इन दोनों में से हायर कौन है? इन दोनों में से हायर है 18.773 बस यह हमारा आंसर है। यह अमेरिकन पुट का आंसर है। कॉपी कर लो। बाकी सारे नोट्स क्यों नहीं दिखाए आपको? 4:27:22 समझ आया? कॉपी कर लीजिए। मैं हट जाता हूं जरा स्क्रीन से। बट ना इसमें कोई बहुत ज्यादा चैलेंज नहीं है बेटा। देखो मैं आपको भी ये बात बोल रहा हूं। 99.9% नहीं आएगा एग्जाम में ये। पर जो बच्चा 100 की तैयारी कर रहा है ना कि जिसे मार्क्स नहीं खोने वो जरूर पढ़ के जाए। जो 95 के लिए पढ़ रहा है वो छोड़ जाए इस क्वेश्चन को जाए। उसकी इच्छा है। मैं आपको और एक सच्चाई देता हूं। मैं अपने ही फास्ट ट्रैक बैच में एक टॉपिक नहीं कराता। क्योंकि वहां पर हम 99% करिकुलम पढ़ाना चाहते हैं। यह जो सिर्फ एक्स्ट्रा 1% है यह छोड़ देते हैं। तो अगर मैं अपने ही फास्ट ट्रैक में ये टॉपिक नहीं पढ़ाता हूं। जबकि करिए इसे कॉपी क्विक करें बेटा कॉपी। आई कार्तिक कह रहे हैं कि आईसीआई क्या किसी सब्जेक्ट में 100 देता है? हां बेटे एएफएम और एफआर में देता है। बाकी सब्जेक्टों का मैं नहीं कह सकता। वो आपको बाकी टीचर्स बताएंगे। बट हां एएफएम और एफआर में 100 आ जाते हैं क्योंकि 4:28:24 प्रैक्टिकल सब्जेक्ट्स हैं। है ना? ऑब्वियसली आपका पेपर एक्सेप्शनली वेल होना चाहिए। देखो जो बच्चे पास जो बच्चे पास नहीं हो रहे होते यह कॉपी कर लिया क्योंकि अब मैं जिन्होंने जाना है वो छुट्टी कर दूंगा। बट कॉल ऑप्शन भी मैं अभी के अभी कराऊंगा। जिन्होंने मेरे साथ करनी है होमवर्क आज के कंप्लीट करके जाना है वो मेरे साथ कंप्लीट कर सकते हैं। जिन्होंने घर पे करनी होगी घर पे कर लेना। बट मैं अभी के अभी कराऊंगा लाइव में ही। ठीक है ना? क्योंकि अभी मोमेंटम बना हुआ है। अभी आप 10 मिनट में कर लोगे घर पे आपको 1 घंटा लगेगा। चलिए ये कॉपी हो गया। [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमने टू और फोर कर लिया है ना? अब हम इसी के नीचे कर लेते हैं। वन और थ्री। चलो स्पीड पकड़ते हैं। इसी क्वेश्चन में अगर कॉल ऑप्शन होती तो क्या करते? देखिए सॉल्यूशन नंबर 37 का फर्स्ट पार्ट यूरोपियन 4:29:27 कॉल ऑप्शन अगर हमारे पास यूरोपियन कॉल ऑप्शन होती तो क्या करते? देखो प्रोबेबिलिटी तो हम पहले ही निकाल चुके हैं। यह लूप थ्री की है और यह लूप वन और टू की है। तो तो बार-बार निकालने की जरूरत नहीं है। सीधा-सीधा सॉल्विंग फॉर लूप थ्री कर देते हैं। लूप थ्री में कौन-कौन से नोड आते हैं? नोड आता है बी डी ई। ठीक है जी। इसका स्टेप वन वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन। एट वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन एट हाई प्राइस हाई प्राइस का मतलब d पर और अब जो फार्मूला लगेगा कॉल ऑप्शन है तो कौन सा लगेगा s - x 0 मैक्स याद रखना अब कौन सा लगेगा s - 0 s - x 0 मैक्स ठीक है जी 4:30:28 देखिए वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन एट हाई प्राइस वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन एट हाई प्राइस ध्यान देंगे बेटा हाई प्राइस क्या होगा बताओ जरा अब यहां पे स्पॉट प्राइस होगा 693 और 627 और x है 588 तो यह बनेगा 693 - 588 0 मैक्स यानी 105 वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन एट लो प्राइस यानी पॉइंट E पर नोड E पर वहां पे था 627 - 588 0 मैक्स यानी ये हो गया 39 स्टेप टू होगा प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस यानी P 4:31:44 ठीक है। चले हम आगे। 4:31:55 प्रोबेबिलिटी ऑफ़ प्राइस P हो गया। कितना था?702 प्रोबेबिलिटी ऑफ लो प्राइस 2980 ठीक है जी। यह भी समझ आ गया। स्टेप वन स्टेप टू स्टेप थ्री। 4:32:35 हम अब हम निकालते हैं वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन एट नोड B बताइए कितनी होगी? 105 * 0.702 + 39 * 0.2980 अपॉन e की पावर 8% * 3/12 तो इसका आंसर कितना आएगा? 4:33:18 लूप वन लिखना चाहिए था। ठीक कह रहे हो आप। मुझे पहले लूप वन से स्टार्ट करना है। मैंने लूप थ्री से लिख दिया। लूप वन ही है ये। बेटा इसका आंसर कितना आ रहा है? निकाला है किसी ने? 83.64 तो इसका आंसर आ रहा है बेटे 83.64 ठीक है जी। यानी हमने न बी सॉल्व कर दिया। ठीक है ना? ये सॉल्विंग फॉर लूप वन हो गया। अब आइए इससे अगला सॉल्विंग फॉर लूप टू। लूप टू में कौन-कौन से नड्स होते हैं? सी होता है। देखो इसमें कौन-कौन होता है? सी एफ और जी। सी एफ एंड जी। स्टेप वन 4:34:19 वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन एट हाई प्राइस यानी F पर वो कितना होगा? जी 567 - 588 0 मैक्स यानी 0 वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन एट लो प्राइस यानी 513 - 588 0 मैक्स ठीक है जी प्रोबेबिलिटी ऑफ़ हाई प्राइस पॉइंट 702 पॉइंट 2980 4:35:20 वैल्यू ऑफ कॉल ऑप्शन एट नोड C 0 *702 + 0 *2980 अपॉन E की पावर 8% * 3/12 तो आंसर आंसर ज़ीरो ही आ गया। अब हमने लूप टू भी सॉल्व कर लिया। अब हम करेंगे सॉल्विंग फॉर लूप थ्री। जिसमें नोड कौन-कौन से होंगे? A, B, C। A पे दम है 600 का। B पे वैल्यू कितनी है? C पे वैल्यू कितनी है? बच्चे, b पे वैल्यू है 83.64 और यहां पे वैल्यू है ज़ीरो। अब अगर हम 4:36:22 इसमें भी स्टेप लिखना चाहें तो स्टेप वन क्या होगा? वैल्यू एट हाई प्राइस कितनी है? 83.64 वैल्यू एट लो प्राइस कितनी है? ज़ीरो। और अगर मैं आपसे यह पूछूं प्रोबेबिलिटी ऑफ हाई प्राइस यानी P कितना है? प्रोबेबिलिटी ऑफ़ लो प्राइस यानी कि Q कितना है? तब ऊपर वाला P और Q यूज़ होगा। लूप थ्री के लिए 6010610 और 3990 स्टेप थ्री वैल्यू ऑफ़ कॉल ऑप्शन एट नोड ए मतलब मेन नोड पे आप लिखोगे 83.64 *6010 0 *3990 4:37:25 e की पावर 8% * 3/12 तो इसका आंसर आया 49.27 49.27 पहले इतना कॉपी कर लो। मैं हट जाता हूं। फिर मैं इसका अमेरिकन ऑप्शन भी निकलवाऊंगा आपको। यह तो यूरोपियन था। अभी इसी का अमेरिकन भी निकालना है अभी हमने। है ना? वो निकालेंगे। अब इसके बाद पहले इतना कॉपी कर लीजिए आप। 4:39:01 चलिए जी फिर आगे बढ़ते हैं। लिख लिया ना इतना एक लास्ट पार्ट भी है वो भी करा देता हूं फिर उसके बाद आगे आपसे बातचीत करेंगे 37 का थर्ड पार्ट सॉल्यूशन नंबर 37 का थर्ड पार्ट यानी हमें चाहिए अब अमेरिकन कॉल ऑप्शन का सॉल्यूशन उसके लिए हम क्या लिखते हैं? तीन नोड्स लिखते हैं। है ना? उनकी कैलकुलेटेड वैल्यू लिखते हैं। उनकी इंट्रेंसिक वैल्यू लिखते हैं और हायर को सेलेक्ट करते हैं। तो यानी यहां लिखते हैं नोड। यहां लिखते हैं कैलकुलेटेड वैल्यू। यहां लिखते हैं इंट्रेंसिक वैल्यू। 4:40:03 और यहां लिखते हैं हायर और यह होता है s - x 0 मैक्स। ठीक है? तो नोड कौन-कौन से हैं? अब आप मुझे ये बताओ कि हमारे नोड्स कौन-कौन से हैं? B C और A कैलकुलेटेड वैल्यू कितनी थी? B पर थी 83.64 C पर थी 0 यहां पर है 49.27 इंट्रिंसिक वैल्यू कितनी होगी? B पे देखो B पे 660 था। 660 - 588 0 मैक्स बताइए बेटा कितना आता है? 72 तो 72 से ज्यादा तो 83.64 ही है तो वही रहेगा। 4:41:05 यहां पे क्या रहेगा जी? 540 तो वो तो ज़ीरो ही रहेगा। तो वापस ज़ीरो ही आ गया। अच्छा अब एक बात अगर ये दोनों सेम ही सेलेक्ट हो गए तो ये आंसर चेंज होगा क्या? अब नहीं होगा। बताओ क्यों नहीं होगा? क्योंकि जब B और C में सेम वैल्यूज़ ही सेलेक्ट हो गई तो ये वाली वैल्यू सेम ही रहेगी जो पहले थी वो चेंज नहीं करनी। बस इसकी अब कैलकुलेटेड वैल्यू निकाल लो। 600 - 588 0 मैक्स तो ये आएगा 12। अब इन दोनों में से भी ज्यादा कौन है? 49.27 तो कुछ और मेहनत करने की जरूरत नहीं है। बस यही आंसर है। सो वैल्यू ऑफ अमेरिकन कॉल ऑप्शन टुडे एट नोड ए इज इक्वल टू ₹49.27 यही वैल्यू है। बात खत्म। अच्छा एक बात और 4:42:07 पुट में मैंने चेंजेस कराए थे। इधर क्यों नहीं कराए? क्योंकि उसमें एक वैल्यू बदल गई थी। हायर वैल्यू सेलेक्ट हुई थी। मतलब इंट्रिंसिक वैल्यू सेलेक्ट हो गई थी कैलकुलेटेड की जगह। जब तक कोई चेंजेस ना हो फिर कोई फर्क नहीं पड़ता। 4:42:33 वेलकम दोस्तों जो अब हम टॉपिक पढ़ रहे हैं अनेक्सर में यानी एक्स्ट्रा क्वेश्चंस में वो फॉररेक्स का इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट नाम का टॉपिक है। यह इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट क्या होता है? मैं आपको बताऊं कि बहुत रिलेटेड है यह। बहुत क्लोजली रिलेटेड है यह एक दो और कांसेप्ट्स के साथ। मैं आपको पहले एक कांसेप्ट रिकॉल कराता हूं। आप में से मुझे बताओ जरा कितने बच्चों को याद है कि आईआरपीटी क्या होता था? इंटरेस्ट रेट पैरिटी थ्योरी क्या होता था? याद है आपको? और परचेजिंग पावर पैरिटी थ्योरी क्या होता था? क्या आपको याद है? ये दोनों के दोनों फार्मूलाज़ हम कैलकुलेट किया करते थे। ये दोनों फ़ूलाज़ हमें यह बताते थे कि अगर हमें स्पॉट रेट पता हो, तो हम फॉरवर्ड रेट कैसे निकाल सकते हैं? याद है आपको? यानी अगर हमें फॉरवर्ड रेट निकालना होता था और स्पॉट रेट हमें पता होता था तो हम 1 प्लस इंटरेस्ट रेट ऑफ डोमेस्टिक करेंसी अपॉन वन प्लस इंटरेस्ट रेट ऑफ फॉरेन करेंसी जैसे रुपीस पर डॉलर 4:43:35 का अगर रेट है तो ऊपर रुपीस नीचे डॉलर ऐसे करके हम सिंपलीफाई कर लेते थे। कितने लोगों को याद है? क्या यह फार्मूला रिकॉल्ड है आपको? बोलिए हां या ना? फॉररेक्स के नोट्स पे ले जाऊं तो यह यह बात आपको लिखी हुई मिल जाएगी। आप देखिए। फॉररेक्स के नोट्स जब हमने पढ़े थे तो हमने कहा था कि दो कंट्रीज का इंटरेस्ट रेट बराबर नहीं होता। तो उस केस में क्या होता है कि फॉरवर्ड रेट बाय स्पॉट रेट निकालने के लिए वन प्लस इंटरेस्ट रेट इन दी न्यूमैरेटर करेंसी यानी डोमेस्टिक करेंसी अपॉन वन प्लस इंटरेस्ट रेट इन डॉलर करेंसी आ जाता है। ठीक है जी। और हमें एक बात पता है कि अगर किसी कंट्री का इंटरेस्ट रेट ज्यादा होता है दूसरी कंट्री से तो उसकी करेंसी डिस्काउंट पे मिलती है फ्यूचर में। यानी फॉरवर्ड रेट उसके डिस्काउंट पे होते हैं। यानी वह करेंसी ज्यादा डेप्रिशिएट करती है। याद आया आपको? यानी जिस जैसे भारत में इंटरेस्ट रेट ज्यादा होता है हमेशा यूएसए से। आप कभी भी कंपेयर करो भारत का इंटरेस्ट रेट ज्यादा है। अब क्योंकि इंडिया का इंटरेस्ट रेट ज्यादा है तो इंडिया की करेंसी जो है वो डेप्रिशिएट करेगी यानी डिस्काउंट होगी। फ्यूचर में 4:44:36 हमारी करेंसी डिस्काउंट होगी। क्या ये बातें आपको समझ आई? जी हां सर। हमें यह बातें समझ आ सकी। करेक्ट। इसी तरीके से हमने परचेसिंग पावर पैरिटी भी पढ़ा था जिसमें हम यहां पर इंटरेस्ट रेट की जगह बस इनफ्लेशन रेट लिख देते हैं। तो वहां इंटरेस्ट रेट की जगह क्या लिख देते थे? इनफ्लेशन रेट। याद आया आपको? फॉरवर्ड रेट अपॉन स्पॉट रेट इज इक्वल टू 1 + इनफ्लेशन रेट डोमेस्टिक करेंसी का और 1 प्लस इनफ्लेशन रेट फॉरेन करेंसी का। जैसे अगर हम रुपीस पर डॉलर बोल रहे हैं तो यह रूपीस होगा। और यह डॉलर होगा। आई होप यह दोनों फार्मूलाज़ तो आपको रिकॉल्ड हैं। यह दोनों के दोनों फार्मूलाज़ तो आपने अच्छे से पढ़ रखे हैं। करेक्ट। जी हां सर, हमने ये दोनों के दोनों फार्मूलाज़ तो अच्छे से पढ़ रखे हैं। अब बात आती है इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट की। अब यह नई क्या बात करता है? कुछ हद तक रिलेटेड बात है। लेकिन ना हमने इन दोनों के 4:45:38 क्वेश्चन पढ़े हुए हैं। इन दोनों के तो क्वेश्चन पढ़ रखे हैं प्रैक्टिकली। इसके क्वेश्चन नहीं पढ़ रखा इसलिए इसका क्वेश्चन पढ़ाना है मुझे। पर उससे पहले इसका कॉन्सेप्ट पढ़ाना है। देखिए कॉन्सेप्ट क्या कहता है। यह इसका एग्जैक्ट फार्मूला यह बोलता है कि अगर 1 + नॉमिनल इंटरेस्ट रेट इन डोमेस्टिक करेंसी को न्यूमैरेटर में रखो और 1 + नॉमिनल इंटरेस्ट रेट इन फॉरेन करेंसी को डिनोमिनेटर में रखो। तो आप बोलोगे सर, यह तो इंटरेस्ट रेट की तरह ही तो हो गया। सर, यह फार्मूला भी तो वैसा ही हो गया कि जैसे इधर था फार्मूला कि इंटरेस्ट रेट इन डोमेस्टिक करें, इंटरेस्ट रेट इन फॉरेन करेंसी। तो सर वही तो फार्मूला है कि 1 + इंटरेस्ट रेट इन डोमेस्टिक करेंसी अपॉन वन प्लस इंटरेस्ट रेट इन फॉरेन करेंसी। लेकिन थोड़ा सा फर्क है एक तो इसमें स्पेसिफाइड है कि जो हम इंटरेस्ट लेंगे वो नॉमिनल होना चाहिए। मतलब उसमें अभी तक जो इनफ्लेशन रेट है 4:46:40 उसके इफेक्ट को हटाया ना हो। यानी हम क्या करेंगे? वन प्लस नॉमिनल इंटरेस्ट रेट इन डोमेस्टिक करेंसी अपॉन 1 प्लस नॉमिनल इंटरेस्ट रेट इन फॉरेन करेंसी रखेंगे। और इसे किसके बराबर रखेंगे? देखो ये हमें कहता है s1 / s0 यानी एक्सपेक्टेड फ्यूचर स्पॉट रेट कितना है और करंट स्पॉट रेट कितना है। यानी यहां पे जो फार्मूला था यहां पे तो हम ऐसे रखते थे ना फॉरवर्ड रेट बाय स्पॉट रेट तो यहां पे हम क्या रखते हैं कि लिखेंगे स्पॉट रेट टुडे कितना है और स्पॉट रेट 1 साल बाद का कितना है? मतलब इधर हम इसे फॉरवर्ड रेट ना बोल के स्पॉट रेट ऑफ एंडिंग ऑन ईयर बोलते हैं। यानी वन ईयर की एंड का स्पॉट रेट। तो यह दोनों का डिफरेंस हुआ। यानी सर बस यह न्यूमैरेटर में फर्क है। हां, एक तरीके से न्यूमैरेटर में फर्क है। यह हमें फॉरवर्ड रेट की एस्टीिमेशन देता है। यह आज बताता है कि फॉरवर्ड रेट कितना होना चाहिए। यह कहता है कि 1 साल बाद का स्पॉट रेट कितना 4:47:42 होगा। ऑब्वियसली गाइड तो यह भी हमें यही बता रहा है कि कितना होना चाहिए। पर यह सीधा इसे स्पॉट रेट लिखता है। फॉरवर्ड रेट नहीं बोलता। आज की फॉरवर्ड रेट का मतलब क्या है? आज आप फ्यूचर का रेट एस्टीिमेट कर रहे हो कि कितना होगा। आज आप बता रहे हो कि फॉरवर्ड रेट कितना होगा? यह कहता है कि नहीं एक साल बाद का रेट कितना होगा? मैं डायरेक्टली वही कोट कर रहा हूं। बात एक ही है बट हम किस पॉइंट पे उसका नाम ले रहे हैं वो नाम अलग-अलग है। पॉइंट अलग-अलग है दोनों का। बात अगर मैं 100% बोलूं तो बात लगभग लगभग एक ही तरीके से हो रही है। ठीक है जी? अब यह एक चीज और बताता है। इसमें ना एक शॉर्टकट फार्मूला भी लगता है। शॉर्टकट फार्मूला यह होता है जो अप्रोक्समेट फार्मूला होता है। यह कॉमनली यूज़ किया जाता है। यह ज्यादा यूज़ किया जाता है। यह तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] आपको समझ आ गया। यह तो बेसिक इंटरनेशनल फिशर इफ़ेक्ट का फार्मूला हो गया। ये लेकिन ये कम यूज़ होता है। इसकी जगह एक और शॉर्टकट फार्मूला है। वो क्या कहता है कि अगर आप दोनों रेट्स को सब्ट्रैक्ट कर दोगे। यानी अगर आप नॉमिनल इंटरेस्ट रेट 4:48:43 ऑफ डोमेस्टिक करेंसी को माइनस कर दोगे नॉमिनल इंटरेस्ट रेट ऑफ फॉरेन करेंसी को मतलब अगर मैं दोनों देशों में इंटरेस्ट रेट को माइनस कर दूं बिना इनफ्लेशन के इफेक्ट को हटाए तो इन दोनों से जो डिफरेंस आएगा वो स्पॉट रेट का परसेंटेज चेंज आ जाएगा यानी जो डिफरेंस आएगा आएगा वह यहां पे स्पॉट रेट का चेंज आ जाएगा आपको। डेल्टाS पता लग जाएगा कि डोमेस्टिक करेंसी कितने परसेंट चेंज होगी। यानी परसेंटेज चेंज इन दी स्पॉट रेट आ जाएगा। यानी यह आपका चेंज इन स्पॉट रेट की परसेंटेज आ जाएगी। अच्छा यानी लेकिन ये एग्जैक्ट नहीं आएगी। यह अप्रोक्सीमेट आएगी। सर ये बात पूरी तरह नहीं समझ आई। मैं दोबारा समझाता हूं। अगर मान लो इंडिया में इंटरेस्ट रेट चल रहा है 9%। मान लो यूएसए में इंटरेस्ट रेट चल रहा है 4% तो दोनों का गैप कितना है? 5% यानी हम यह कह रहे हैं कि जो स्पॉट रेट है करेंसी का वो 4:49:43 वो 5% चेंज होगा। अगर इंटरेस्ट रेट में डिफरेंस 5% का है तो दोनों करेंसीज में जो स्पॉट रेट है वो भी 1 साल बाद 5% चेंज हो जाएगा। मतलब इंडियन करेंसी 5% डेप्रिशिएट कर जाएगी। या ऐसे कहो यूएस करेंसी 5% एप्रिशिएट कर जाएगी। किसी भी तरीके से आप उसे लिखो। मतलब जो दोनों की रेट का फर्क है, इंटरेस्ट रेट्स का फर्क है, वह उनकी स्पॉट रेट के डिफरेंस में फर्क होगा। यानी जो S1 और S2 का फर्क है, वह भी 5% ही होगा। यानी ऐसे बोल सकते हैं S1 और S0 जो है वो भी 5% होगा। मतलब आज के स्पॉट रेट और एक साल बाद के स्पॉट रेट में डिफरेंस जो होगा वो 5% का ही होगा। ये फार्मूला बहुत पॉपुलर है। ये फ़ूला ज्यादा एग्जाम में यूज़ होता है। अगर होगा मतलब अगर क्वेश्चन आएगा तो पढ़िए। हम बात करते हैं एक एनालिस्ट है जो स्टडी कर रहा है एक्सपेक्टेड मूवमेंट इन एक्सचेंज रेट बिटवीन इंडिया एंड यूएसए। वह कहता है देखो हमारी एक्सपेक्टेड इनफ्लेशन रेट्स इतनी इतनी है और हमारी रिस्क फ्री रेट इतनी इतनी है। तो पहली बात तो यह है 4:50:44 कि इनफ्लेशन रेट्स में भी जो गैप है वो 4% का है और इंटरेस्ट रेट्स में भी जो गैप है वो 4% का है। इसका मतलब यह है कि अगर दोनों में ही गैप 4% है तो जो आज से 1 साल बाद का स्पॉट रेट होगा उनमें भी गैप 4% का ही आएगा। इसका मतलब अगर हम इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट को रिलेशनशिप को इस इक्वेशन से वेरीफाई करें। उसने खुद इक्वेशन भी दी है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है इनफ्लेशन रेट में कितना डिफरेंस है और इसका मतलब है इंटरेस्ट रेट में कितना डिफरेंस है? उतना ही स्पॉट रेट में भी डिफरेंस आ जाएगा। उतना ही फॉरेक्स के जो एक्सचेंज रेट है उसमें भी उतने ही परसेंट का फर्क आ जाएगा। अब इस क्वेश्चन में अगर आप ध्यान से देखो अगर मैं इस इनफैक्ट को देखूं इस इफेक्ट को देखूं तो मैं कहूंगा 7% - 3% है इनफ्लेशन का चेंज और 9% - 5% है 9% - 5% है। अगर इन दोनों को मैं माइनस करूं तो यह पता लगेगा हमें कि इफेक्ट इंटरेस्ट रेट का कितना फर्क है। 4:51:46 तो अब इन दोनों के डिफरेंस से आपको पता लगेगा कि जो 4% है जो 4% है वह इन दोनों का डिफरेंस है। यानी जो 4% है वो इन दोनों का डिफरेंस है। क्या ये बातें आपको क्लियर है? मैंने क्या कहा? मतलब अगर इन दोनों का डिफरेंस है 4% तो इसका मतलब जो स्पॉट रेट का डिफरेंस आएगा वो भी 4% का ही आएगा। यानी ये रिलेशनशिप इफेक्ट हो रहा है, वेरीफाई हो रहा है। तो हम पहले ये बोलेंगे कि इनका डिफरेंस भी 4%, इनफ्लेशन का डिफरेंस भी 4%, इंटरेस्ट रेट का डिफरेंस भी 4% इसका मतलब दोनों का डिफरेंस अगर 44% है, तो यानी हम यह मान के चलेंगे कि एक्सचेंज रेट भी 4% ही चेंज होगा। इसका मतलब इंटरेस्ट रेट भी 4% ही चेंज होगा। बोलिए, यह बातें आपको समझ आ गई, बेटे, मैंने क्या कहा? यानी मैंने आपको क्या समझाया कि इंटरेस्ट रेट भी 4% ही चेंज होगा। कोई दिक्कत तो नहीं है आपको यहां तक? नहीं सर अब आगे पढ़ते हैं। वो 4:52:46 हमें कहता है जी एक्सपेक्टेड परसेंटेज चेंज इन द एक्सचेंज रेट 4% आएगा। एक्सपेक्टेड स्पॉट रेट आफ्टर ईयर वन कितना होगा? अगर अभी अगर हमारा अभी स्पॉट रेट है ₹84 ₹84 का $1 है और हमारी करेंसी 4% डेप्रिशिएट करेगी। तो यानी ज्यादा रुपया चला जाएगा क्योंकि हमारी करेंसी डेप्रिशिएट करेगी। तो एक्सपेक्टेड फॉरवर्ड रेट कितना होगा? ₹84 में 4% और ऐड कर दो। यानी हमें ₹87.36 देने पड़ेंगे $1 के। क्यों सर आपने ऐसा क्यों किया? क्योंकि हमारी करेंसी डिग्रेड होगी यानी यूएस डॉलर वैल्यू में बढ़ेगा। तो यूएस डॉलर की वैल्यू को बढ़ा दिया इस तरीके से। पहले $1 कितने का था? अब सोचो पहले $1 था ₹84 का। अब $1 कितने का होगा? $ की वैल्यू 4% बढ़ जाएगी। तो यह हो जाएगा 87 36 का। यह हमारे पास नया यानी एक्सपेक्टेड रेट आ जाएगा कि हमारे हिसाब से उम्मीद हमें यही है कि यह रेट होना चाहिए। 4:53:51 हमें उम्मीद है कि यही रेट होना चाहिए। क्या ये बातें आपको समझ आ गई बेटा? मैंने क्या कहा? हमारी यही उम्मीद है कि यही रेट होना चाहिए। कोई दिक्कत तो नहीं है जी आपको? अबब्सोलुटली नो डाउट। आइए इसके एक दो क्वेश्चन और पढ़ाते हैं। मुझे पता है कि यह पोर्शन थोड़ा सा स्लिपरी है। बट यह मैं बताऊं सच्चाई कहूं तो बहुत आसान है। अब देखो जैसे यह क्वेश्चन है। वो कहता है वन करंट स्पॉट रेट है इतना। $183 का है। इंडिया में इंटरेस्ट रेट चल रहा है इतना। यूएस में इंटरेस्ट रेट चल रहा है इतना। तो यानी अगर मैं आपको यह बात बोलूं कि इंटरनेशनल फिशर का इफ़ेक्ट लगाओ। तो इंटरनेशनल फेशियल का इफेक्ट क्या बोलता है कि स्पॉट रेट एक साल बाद वाला और स्पॉट रेट आज वाला 1 प्लस नॉमिनल इंटरेस्ट रेट इन डोमेस्टिक करेंसी अप 1 + नॉमिनल इंटरेस्ट रेट 4:54:52 इन फॉरेन करेंसी इसके बराबर होना चाहिए। है ना? तो यानी अगर मुझे 1 साल बाद का निकालना है S1 तो S1 तो चलो 1 साल बाद के लिए निकलेगा। लेकिन हमें S0 पता है 83 है और इंडिया का इंटरेस्ट रेट 8% है। यूएस का इंटरेस्ट रेट 3% है। तो इसे सॉल्व कर लो तो यह आ जाएगा 83 * 1.0485 यानी रेट आ जाएगा 87.03 यानी 1 साल बाद डॉलर का रेट क्या होगा? 1 साल बाद यह होगा। अब आप बोलोगे सर ये तो लगभग लगभग इंटरेस्ट रेट रिस्क मैनेजमेंट के बेस पे निकला है। देखो मैं आपको एक बारी आपके मॉड्यूल की लैंग्वेज पढ़वाता हूं। अगर आप मॉड्यूल पे जाते हो तो मॉड्यूल ने एक्सचेंज रेट थ्योरी में तीन थ्योरीज मेंशन की हैं। आपका मॉड्यूल है ये। जिसमें से हम इसके क्वेश्चन पढ़ चुके हैं। इंटरेस्ट रेट पेरिटी के। यह फार्मूला हम पढ़ चुके हैं। क्लास में क्वेश्चन कवर कर चुके हैं। फिर परचेजिंग पावर पैरिटी के भी क्वेश्चन हम पढ़ चुके हैं। और इस वाले 4:55:52 फार्मूला के थ्रू हम इसे भी कवर अप कर चुके हैं। फिर आ जाता है इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट। इसके क्वेश्चन अभी हमने क्लास में नहीं पढ़े थे। तो मैं इसके कुछ एक्स्ट्रा क्वेश्चंस पढ़ा रहा हूं। एक्चुअल में इफेक्ट वाइज तो ऑलमोस्ट इंटरस्टेट प्रायोरिटी थ्योरी वाला ही क्वेश्चन है। ठीक है? बिल्कुल इंटरेस्ट रेट परिटी थ्योरी वाले क्वेश्चन कांसेप्ट से ही होगा। बस फर्क क्या है? फर्क इतना सा है कि जब हम इंटरेस्ट रेट पेरिटी का फार्मूला लिखते हैं तो हम फॉरवर्ड रेट लिखते हैं। देखो जब इंटरेस्ट रेट पेरिटी का फार्मूला लिखते हैं तो फॉरवर्ड रेट लिखते हैं। बाकी सब तो यह सेम ही लिखते हैं और परचेजिंग पावर पैरिटी का फार्मूला लिखते हैं तो यहां इनफ्लेशन रेट लिखते हैं। बाकी यहां फॉरवर्ड रेट लिखते हैं। बस जब इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट लिखते हैं तो यहां फॉरवर्ड रेट की जगह स्पॉट रेट एट द एंड ऑफ़ फर्स्ट ईयर लिखते हैं। स्पॉट रेट एट द एंड फर्स्ट ईयर। पहली बात तो यह डिफरेंस है और यहां नॉमिनल इंटरेस्ट रेट मेंशन करते हैं। यह दो डिफरेंस है। पहले बताओ दो डिफरेंस आपको समझ आ गए? कहां-कहां डिफरेंस है बताना? मैं हाईलाइट कर रहा हूं। यहां यहां 4:56:52 डिफरेंस है। ये तीन चीजें अलग हैं। और एक बात कि जो फिशर का इफेक्ट है उसमें एक फार्मूला और है छोटा सा। वो है एप्रोक्सीमेट फार्मूला। अप्रोक्समेट फार्मूला यह कहता है कि सीधा-सीधा अगर आप इंटरेस्ट रेट को माइनस कर दोगे तो जो इन दोनों का डिफरेंस आएगा डिफरेंशियल ऑफ इंटरेस्ट आएगा इंडिया में और फॉरेन कंट्री में वो ही उतना ही परसेंट स्पॉट रेट चेंज करेगा अप्रोक्समेटली। अगर इंडिया का इंटरेस्ट रेट ज्यादा है तो इंडिया की जो स्पॉट रेट है फ्यूचर में वो डिक्रीज हो रही होगी। हम सब लोग गवर्नमेंट से तो लड़ते हैं। गवर्नमेंट को बोलते हैं कि अरे हमारी करेंसी नीचे जा रही है। डॉलर महंगा होता जा रहा है। बट उसके पीछे बेसिक रीज़न हमें समझना चाहिए। क्योंकि इंडिया में इंटरेस्ट रेट हाई है। अगर इंडिया में इंटरेस्ट रेट हाई है तो धीरे-धीरे करके इंडिया का करेंसी डेप्रिशिएट ही करेगा। ठीक है जी। और अगर इस चीज को और वेरीफाई करें तो इसे ऐसे वेरीफाई कर सकते हैं कि इंटरेस्ट रेट का डिफरेंशियल और इनफ्लेशन रेट का डिफरेंशियल बराबर होगा। यह उसने फर्स्ट क्वेश्चन में आपसे वेरीफाई करवाया था। अगर वह मेंशन करेगा तो उस इक्वेशन को 4:57:53 यूज़ करो। वरना इसी इक्वेशन को यूज़ करो। क्या इक्वेशन बताई मैंने? यह समझ आया। यह एक फार्मूला हो गया। और यह एक फार्मूला हो गया हमारा। बस यह दो फार्मूले आपको पता होने चाहिए। आई होप अब बात समझ आ गई कि इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट कोई नई चीज नहीं है। कोई डिफरेंट चीज नहीं है। कोई आसमान से आया हुआ नया फार्मूला नहीं है। ये इंटरेस्ट रेट पैरिटी थ्योरी के फार्मूला की थोड़ी सी मॉडिफिकेशन है। बस यहां फॉरवर्ड रेट की जगह स्पॉट रेट आ जाएगा। और इन दोनों रेट्स को माइनस करके चेंज इन स्पॉट रेट आ जाएगा। परसेंटेज चेंज इन स्पॉट रेट आ जाएगा। ये डायरेक्टली पता लग सकता है। बट ये अप्रोक्समेट फार्मूला है। और ये दोनों फ़ूले मैंने अपने घर पे नहीं बनाए हैं। मैं आपको बता दूं ये दोनों के दोनों फार्मूलाज़ जो हैं ये मैंने यहीं से ही उठाए हैं। आपके आपके मॉड्यूल के अंदर ही गिवेन है ये फार्मूलाज़। और उन्होंने इनफैक्ट इन तीनों थ्योरीज़ का कंपैरिजन भी यहां पे कर रखा है। अगर आप चाहेंगे तो पढ़ लीजिएगा। मतलब एक्सचेंज रेट थ्योरीज तीन होती हैं। जिनमें से दो आपने क्वेश्चन एग्जाम में पढ़ अपने ऑलरेडी बुक में पढ़ रखे हैं। तीसरे के एक दो क्वेश्चन मैं करा रहा हूं बस। ठीक है जी। यह बात भी समझ आ गई सर। एक आधा 4:58:55 क्वेश्चन और करा दो। देखो वन ईयर एगो। अब एक साल पुरानी बात कर रहा है। वो कह रहा है देखो ऐसा है आज से 1 साल पहले। यानी यह टुडे है। यह वन ईयर एगो है। वन ईयर एगो स्पॉट रेट था इतना। तो मैं इसे S0 बोल दूं। ठीक है? और 1 ईयर का इंटरेस्ट रेट तब था 7% यानी इंटरेस्ट रेट ऑफ डोमेस्टिक करेंसी कितना था? 7% एंड यू यूके में था इतना तो इंटरेस्ट रेट ऑफ फॉरेन करेंसी कितना था? 4% यानी इंडिया में इंटरेस्ट रेट ज्यादा था तो इंडिया की करेंसी डेप्रिशिएट करेगी। ठीक है? वो अब एक बात बताओ अगर हम इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट लगाते उसने बोला ना इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट लगाओ। तो अगर हम इंटरनेशनल फिशर इफेक्ट लगाते तो तो हम यह बोलते कि जो 1 साल बाद का स्पॉट रेट होना चाहिए और जो आज का स्पॉट रेट है वह 1 + 7% / 1 + 4% के बराबर होना चाहिए। 4:59:55 यानी हमारे हिसाब से एक्सपेक्टेड S1 कितना है? एक्सपेक्टेड S1 है 105 * 1.07 / 1.04 यानी हमारे हिसाब से एक्सपेक्टेड S1 कितना है? तो आप बोलोगे हमारे हिसाब से एक्सपेक्टेड S1 जो है मतलब जो S1 की वैल्यू है 1 साल बाद वो कितनी है? 108 वो है 108.03 यानी हमारे हिसाब से 1 साल बाद की वैल्यू इतनी होनी चाहिए। लेकिन आज प्राइस है कितना ग्रेट बिटन पाउंड का? यानी आज का एक्चुअल स्पॉट रेट है 106.5 लेकिन हमारे हिसाब से एक्सपेक्टेड स्पॉट रेट कितना था? हमारे हिसाब से एक्सपेक्टेड स्पॉट रेट था 108.03 5:00:55 क्या ये दोनों बातें आपको समझ आती हैं? यानी हमारे हिसाब से इंटरेस्ट रेट इतना होना चाहिए था। मतलब स्पॉट रेट इतना होना चाहिए था। है इतना। तो क्या मैं यह मान के चलूं कि इंटरनेशनल फिशर इफ़ेक्ट जो है वह होल्ड कर रहा है? नहीं, वह पूरी तरह होल्ड नहीं कर रहा। वो पार्शियली होल्ड कर रहा है। पूरी तरह होल्ड नहीं कर रहा। यानी आप यह कहोगे कि वो होल्ड नहीं कर पा रहा प्रिसाइसली। क्यों? क्योंकि सिर्फ इंटरेस्ट रेट से फ्यूचर का स्पॉट रेट नहीं आता। अन्य फैक्टर भी हो सकते हैं। जैसे कैपिटल फ्लो, गवर्नमेंट पॉलिसी, स्पेकुलेशन और भी चीजें हो सकती हैं। तो, हम ये बोल रहे हैं कि पूरी तरह होल्ड नहीं कर रहा। मतलब हमारे हिसाब से जो एक्सपेक्टेड स्पॉट रेट होना चाहिए था वो आज का स्पॉट रेट नहीं है। इसलिए ये पॉलिसी पूरी तरह ट्रू नहीं होती। एक क्वेश्चन और देख लेते हैं। देखिए वो यह कहता है वन ईयर इंटरेस्ट रेट ऑन आईएआर इज़ 9%। यानी अगर हम आज की बात करें तो इंटरेस्ट रेट डोमेस्टिक करेंसी का है 9%। यूएस डिपॉजिट पे 4% है। तो इंटरेस्ट रेट ऑफ फॉरेन करेंसी 4% है। तो 5% का गैप है। ठीक है? द स्पॉट रेट इज 5:01:59 ₹83 यानी अभी का स्पॉट रेट कितना है? स्पॉट रेट जीरो पीरियड का है हमारा ₹83 तो हमारे हिसाब से एक साल बाद का रेट क्या होगा? हम पता लगा सकते हैं इंटरनेशनल फिशर इफ़ेक्ट से। ठीक है? वो यह कहता है कि एस पर आईएफ इंटरनेशनल फिशर इफ़ेक्ट विल द इन्वेस्टर रन अ पॉजिटिव रिटर्न? क्या आपको पॉजिटिव रिटर्न आएगी एक्सपेक्टेड फ्यूचर स्पॉट रेट के हिसाब से? तो पहले तो बताओ आपका एक्सपेक्टेड फ्यूचर स्पॉट रेट क्या है? तो हमने फार्मूला लगाया एक्सपेक्टेड फ्यूचर स्पॉट रेट निकाल दिया। कैसे आया होगा ये? हमने निकाला होगा s1 / 83 = 1.09 / 1.04 तो इसे सॉल्व कर लो। s1 की वैल्यू आ जाएगी 86.99 क्या हम इसमें कोई आबिट्राज कर सकते हैं? देखो नहीं। क्यों? क्योंकि अगर इंटरेस्ट रेट इंडिया में ज्यादा मिल रहा है तो इंडिया की करेंसी डेप्रिशिएट भी तो कर रही है। इनफैक्ट यह बात मैंने क्लास के अंदर बहुत डिटेल में समझाई भी थी कि अगर कोई ऐसा सोचे कि फॉरेन से पैसा लाके इंडिया में डिपॉजिट कर दूं और इंडिया में हायर इंटरेस्ट रेट कमाऊं तो इसमें कोई कमाई ज्यादा हो नहीं पाएगी। क्यों नहीं हो 5:03:00 पाएगी? क्योंकि जितना आप इंडिया में ज्यादा कमाओगे एक साल बाद जब अपना पैसा लेकर जाओगे तो जब आप एक्सचेंज रेट में उतना पैसा लूज़ भी कर दोगे क्योंकि एक्सचेंज रेट इंडिया का डेप्रिशिएट हो गया होगा। उतना पैसा लूज़ भी कर दोगे। कितने लोगों को ये कहानी याद है कि मैंने क्लास के अंदर ये बात समझाई थी कि अगर आप फॉरेन से इंडिया पैसा लाते हो और हायर रेट पे इंटरेस्ट पे चढ़ाते हो पर जब उसे वापस लेके जा रहे होगे तो एक्सचेंज रेट उतना डीवैल्यू हो जाएगा कि अल्टीमेटली आप ज्यादा नहीं कमा पाओगे। आप एक्सेस नहीं कमा पाओगे। यही बात इधर लिखी है कि हम एक्सेस नहीं कमा सकते। क्योंकि यहां पे जितना हम 5% एक्स्ट्रा इंटरेस्ट कमाएंगे इंडिया में उतना ही 5% हमारी करेंसी डेप्रिशिएट कर जाएगी इंडिया की। तो वापस लेके जाते हुए विदेश पैसे लेके जाते हुए कोई कमाई एक्स्ट्रा दिखाई नहीं देगी। एक्स्ट्रा कमाई दिखाई नहीं देगी। बोलिए यह बात भी आपको समझ आ गई? अब्सोलुटली क्लियर। बहुत बढ़िया। चलिए एक टॉपिक और पढ़ते हैं। आइए इधर। हम एक टॉपिक पढ़ते हैं। करेंसी कूपन 5:04:00 स्वैप। देखो पहली बात आप यह दो अलग-अलग टॉपिक्स को मिक्स कर रहा है। कैसे? स्वैप क्या होता है? स्वैप का मतलब होता है दोस्तों कि भाई मैं आपके साथ कोई डील करता हूं। मैं आपको इमेजिन करो कि फ्लोटिंग रेट दूंगा। आप मुझे फिक्स रेट दे देना। ऐसा हमने कोई स्वाइप किया हो सकता है कि मैं आपको फ्लोटिंग रेट दूंगा। आप मुझे फिक्स रेट देना या वाइसवरसा। तो दिस इज़ इंटरेस्ट रेट स्वैप। सिंपल मैं आपको फ्लोटिंग रेट दूंगा। आप मुझे फिक्स रेट देना। लेकिन यह दोनों चीजें एक ही करेंसी में हो रही होती हैं। दोनों एक ही होती हैं। है ना? बट सर्कस स्वैप क्या होता है या करेंसी कूपन स्वैप क्या होता है? जब सर्कस स्वैप होता है तो इसका मतलब है कि करेंसी भी चेंज हो रही होगी। मतलब स्वैप भी है। मतलब मैं आपको फ्लोटिंग रेट दूंगा। आप मुझे फिक्स रेट देना। लेकिन मैं आपको इंडियन मान लो कि मैं आपको यूएसए की करेंसी का इंटरेस्ट रेट दे रहा हूं। और आप मुझे इंडियन करेंसी का इंटरेस्ट रेट दे रहे हो। तो यानी यहां करेंसी भी डिफर करती है। इसे इसे सर्कस स्वैप कहते हैं। क्यों? क्योंकि इसमें दो 5:05:02 स्वैप्स हैं। दो चीजें मिक्स हो रही हैं। एक्सचेंज भी हो रहा है करेंसी का। करेंसीज का भी एक्सचेंज है। दोनों अलग-अलग करेंसी है और साथ में स्वैप भी हो रहा है। तो पढ़िए करेंसी कूपन स्वैप जिसे सर्कस स्वैप कहते हैं। उसका मतलब होता है कि इसमें इंटरेस्ट रेट का भी स्वैप है कि हम आपको फिक्स दे रहे होंगे, फ्लोटिंग ले रहे होंगे या फ्लोटिंग दे रहे होंगे, फिक्स ले रहे होंगे और साथ में करेंसी का भी स्वैप है। मतलब आप जो यह दोनों एक्सचेंजेस कर रहे हो, यह अलग-अलग करेंसी में है। मान लो मैं आपको यूएस डॉलर का लोन चुका रहा हूं और आप मुझे इंडियन रूपीस का लोन चुका रहे हो तो दोनों के करेंसीज में भी फर्क है। इट इनवॉल्व्स स्वाइपिंग अ फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट पेमेंट इन वन करेंसी। मान लो मैं आपको यूएस डॉलर वाला ब्याज दे रहा हूं। और जबकि बदले में आप मुझे फ्लोटिंग रेट का ब्याज दे रहे हो। लेकिन किसी और करेंसी में। ऐसा हो सकता है ना? मतलब अगर मैं आपको फिक्स दे रहा हूं। आप मुझे फ्लोटिंग दे रहे हो या मैं आपको फ्लोटिंग दे रहा हूं तो आप मुझे फिक्स दे रहे हो। 5:06:04 और यहां पर एक्सचेंज ऑफ प्रिंसिपल भी हो सकता है स्टार्ट पर, एंड पर, बोथ पर या नीदर पर। मतलब हो सकता है हम सच में जो अमाउंट है लोन का वो भी एक्सचेंज कर रहे हो कि मैं आपको शुरू में ₹1 करोड़ रुपए दे रहा हूं और आप मुझे उसके इक्विवेलेंट डॉलर दे रहे हो। ऐसा भी हो सकता है और एंड में हम रिवर्स भी कर रहे हो। सर मतलब इन शॉर्ट आप यह कहना चाहते हो कि यहां पर करेंसी एक्सचेंज भी हो रही है। और इंटरेस्ट रेट स्वैप भी है। हां, बिल्कुल ठीक कहा आपने कि जब दो चीजें इकट्ठी होती हैं, करेंसी एक्सचेंज भी हो रही होती है और इंटरेस्ट रेट स्वैप भी होता है, तो उसे सर्कस स्वैप कहा जाता है। यह नाम समझ आया? एग्जाम में क्या होगा? एग्जाम में अगर कोई आपको सर्कस स्वैप लिख दे तो यह ना हो कि आपको समझ ही नहीं आ रहा तो आपके दिमाग में आ जाना चाहिए। यहां करेंसी भी चेंज होगी और इंटरेस्ट रेट भी चेंज होगा। आपस में एक्सचेंज हो रहा होगा। स्वैप हो रहा होगा। आइए एक क्वेश्चन करते हैं। एक ही क्वेश्चन से पूरी बात समझ आ जाएगी। Zen लिमिटेड एन इंडियन कंपनी 5:07:07 वांट्स टू रेज फ्लोटिंग रेट यूएसडी फंडिंग। मतलब आप क्या चाहते हो? आप यह चाहते हो कि आपको एक फ्लोटिंग रेट फंडिंग मिले। फ्लोटिंग रेट वाली फंडिंग मिले। ठीक है सर मिल जाए तो अच्छा ही हो जाएगा हमारे लिए। तो ठीक बात है। बट हैज़ अ कंपेरेटिव एडवांटेज इन इशुइंग फिक्स्ड रेट आईएआर बॉन्ड्स। मतलब हमें इंटरेस्ट रेट इंडिया में सस्ता पड़ता है। मान लो हमारी कंपनी का नाम बहुत है इंडिया में। तो अगर हम इंडिया में इंटरेस्ट उठाएंगे, पैसा उठाएंगे इंटरेस्ट पे तो हमें बहुत सस्ते में मिल जाएगा। यानी हमें इंटरेस्ट रेट इंडिया में उठाने पे फायदा है। वो यह कह रहा है। ठीक है? क्योंकि हमें इंडिया में सस्ते रेट पर ब्याज मिल जाएगा। अब कहानी को समझो पहले। पूरी डायग्राम को समझते हैं। आप कौन हो? Zenatथ इंडिया लिमिटेड एक इंडियन कंपनी हो। तो मैं डायग्राम के थ्रू समझाता हूं। यह इंडिया है। यह यूएसए है। ठीक है सर। आप एक इंडियन कंपनी हो। 5:08:12 आपको यूएसए में लोन चाहिए। तो आपको यूएसए में लोन चाहिए। कितना? वो भी फंडिंग बताई नहीं है। उसने बस इतना बोला है कि फंडिंग चाहिए। लेकिन आपको इंडिया में सस्ता लोन मिलता है। लेकिन उसने बोला ना कि आपके पास एडवांटेज कहां की है? आपके पास एडवांटेज है इंडियन आईएआर बॉन्ड्स की। मतलब अगर आप इंडिया में बॉन्ड इशू करो तो आपको सस्ता इंटरेस्ट पड़ता है। अब आप क्या करोगे? आप और एक फॉरेन की पार्टी आपस में कॉन्ट्रैक्ट करेंगे। ऑब्वियसली बीच में मिडिलमैन होगा। बट मैं मिडिलमैन को हटा देता हूं। अभी उसको इंक्लूड नहीं कर रहा। आप और फॉरेन की एक पार्टी आपस में एक्सचेंज तय करेंगे। कैसे होगा सुनो। आप उन्हें बैंक मान लो आप अपनी कंपनी से इंडिया में लोन रेज करोगे फिक्स रेट पे यानी आप बॉन्ड्स सेल करोगे अमाउंट रेज करोगे कितने रुपए आप रेज करोगे 5:09:16 ₹415 करोड़ यानी आप बॉन्ड्स देकर ₹415 करोड़ रेज कर लोगे इंडिया और फिक्स रेट होगा 9% और आपको उसके लिए ब्याज कितना देना है? 9% यानी अब आपके सर पर लोन आ गया और लोन पे 9% का ब्याज आ गया। ठीक है? लेकिन पहला बात क्या आपको इंडियन करेंसी में लोन चाहिए था? नहीं सर हमें तो यूएसए में लोन चाहिए। हमने यूएसए में कुछ खरीद रखा है। यूएसए में कोई प्रोजेक्ट लगा रखा है। यूएसए में कोई प्लांट बनाना है। उसके लिए लोन चाहिए। हमें कोई इंडियन करेंसी में लोन थोड़ी ना चाहिए। क्यों ले लिया हमने लोन? क्योंकि हमारे जैसा ही कोई और व्यक्ति फॉरेन में बैठा होगा। वह फॉरेन में बैंक से हमारे लिए एक फ्लोटिंग रेट लोन लेगा। वो हमारे लिए एक फ्लोटिंग रेट लोन लेगा। फॉरेन में वो फॉरेन के बैंक से एक फ्लोटिंग रेट लोन लेगा। अच्छा मतलब यह होगा हम इंडिया में पैसे उठाएंगे। बॉन्ड्स हम बॉन्ड्स बेच के 415 करोड़ उठाएंगे और 5:10:16 वह किसी एक जन को दे देंगे। और वही जन हमें फॉरेन में एक लोन उठाकर हमें दे देगा। कहेगा यह ले भैया तू अपने पैसे ले। मतलब एक तरीके से मैं आपको रुपीस दे दूं और आप मुझे फॉरेन में डॉलर दे दो। मतलब मैं आपको रुपीस दे दूं और आप मुझे फॉरेन में डॉलर दे दो। हां बिल्कुल यही हो रहा है। बिल्कुल यही हो रहा है और कुछ नहीं हो रहा। समझ आ गई आपको बात? ठीक सर। फिर वह यह कहता है कि टर्म्स ऑफ़ स्वैप यह हैं। प्रिंसिपल अमाउंट है ₹415 करोड़ का। एक्सचेंज एट द स्टार्ट एंड रीएक्सचेंज एट द एंड ऑफ़ द स्वैप एट अ स्पॉट रेट ऑफ़ यूएस डॉलर $83 मतलब ₹83 का $1 है। तो अगर मैं मान लो यह मैं हूं Zen इंडिया मैं हूं और यह लो फॉरेन कंट्री में जो रह रहा है बंदा वो आप हो तो मैं आपको कितने रुपए दूंगा? मतलब मैं आपको अमाउंट कितना दूंगा? मैं आपको अमाउंट दे दूंगा ₹415 करोड़ का स्वैप में। मतलब इन शॉर्ट में आपको यह बोलूं कि जीरो मैं पूरी कहानी सुना रहा हूं। पूरी मैं ना क्वेश्चन नहीं पढ़ रहा। पहले पूरी कहानी 5:11:17 सुना रहा हूं। जीरो पीरियड पे मतलब जेनथ जो है वो गिव करेगी क्या? अगर मैं स्वैप की बात करूं तो वो स्वैप में क्या गिव करेगी? 415 करोड़ हम देंगे। और ज़नथ को मिलेगा क्या? उसे 41 करोड़ का यूएस डॉलर का लोन मिल जाएगा। तो मतलब आपको यहां पर ज़नथ को क्या मिल जाएगा? ज़नथ को ₹415 करोड़ बाय 83 कितना बनता है? एक बारी चेक करना कि जब इसे 83 से डिवाइड करते हैं तो कितना बन जाएगा हमारे पास? उतना रुपया उतना अमाउंट हमें मिल जाएगा। मतलब 5 करोड़ 50 मिलियन बोल रहे बच्चे। ठीक है जी। 50 मिलियन। तो मतलब बेसिकली 5 करोड़ लिख देता हूं। सिंपल कर देता हूं। तो हमें 5 करोड़ डॉलर का लोन मिल गया। एक तरीके से अमाउंट मिल गया। तो हमने जो फॉरेन में यूज़ करना था हम यूज़ कर लेंगे। अभी तक तो प्रिंसिपल एक्सचेंज हुए हैं। 5:12:18 मैंने आपको इंडिया में लोन रेज करके आपको पैसे दे दिए। आपने फॉरेन में लोन रेज करके मुझे पैसे दे दिए। और एंड में यही ट्रांजैक्शन क्लोज हो जाएगी। उल्टी हो जाएगी। मतलब जब एंड होगा तो आपने मुझे डॉलर 5 करोड़ का लोन दिया था तो जेनथ रीपे क्या करेगा मैं आपको रीपे कर दूंगा डॉलर 5 करोड़ इसी कोई एक्सचेंज रेट चेंज नहीं होगा उसने बोला सेम एक्सचेंज रेट पे होगा और ज़थ रिसीव्स और ज़थ को वापस मिल जाएगा रिसीव क्या होगा जो मैंने आपको लोन दिया था 415 करोड़ का वह आप मुझे वापस दे दोगे मैं बैंक को चुका दूंगा या बॉन्ड होल्डर्स उसको चुका दूंगा। मेरा लोन खत्म हो जाएगा। मतलब 5 साल बाद आप मुझे 415 करोड़ दोगे इंडिया में। मैं अपना बॉन्ड वापस कर दूंगा और मैं आपको $5 करोड़ दूंगा और आप अपना वहां का लोन चुका दोगे। मतलब एक तरीके से एक्सचेंज हो क्या रहा है? मैं इंडिया में आपके लिए लोन लेके आपको दे रहा हूं। आप फॉरेन में लोन लेके मुझे दे रहे हो। मैं आपको फिक्स्ड रेट का लोन लेके दे रहा हूं। आप मुझे फ्लोटिंग रेट का लोन लेके दे रहे हो। सिंपल। यहां तक बात समझ आ 5:13:20 गई। प्रिंसिपल एक्सचेंजेस समझ आ गए? जी हां। अब इंटरेस्ट एक्सचेंज कैसे होगा? मतलब मैं आपको फ्लोटिंग रेट का लोन दूंगा। ब्याज दूंगा और आप मुझे मेरे इस फिक्स रेट का ब्याज दोगे क्योंकि मैं आपसे ब्याज लूंगा तभी तो मैं बॉन्ड होल्डर्स को ब्याज दूंगा ना। और आप मुझसे फ्लोटिंग रेट का लोन लोगे तभी तो बैंक को लोन दोगे ना। वह तो आप दोगे यानी मेरे लिए तीन ट्रांजैक्शंस होंगी। कौन-कौन सी तीन ट्रांजैक्शन होंगी? अगर मैं ज़नथ की बात करूं। पहली बात तो ज़नथित पे करेगा जो मैंने डे इशू करी थी उसका ब्याज यानी मैंने 415 करोड़ का 9% का इंटरेस्ट उठाया था अपने सर पे मैंने लोन उठाकर आपको दिया है ना तो यह लोन का ब्याज तो मैं भरूंगा जो भी बनेगा यह मैं पे करूंगा लेकिन मैं आपसे रिसीव भी करूंगा मैं स्वैप के अंडर आपसे 415 करोड़ का फिक्स्ड रेट यानी 9% यानी फिक्स्ड रेट रिसीव भी करूंगा। 5:14:21 तो मेरे लिए तो यह ट्रांजैक्शन कैंसिल हो गई क्योंकि मैं आपसे ब्याज लूंगा और बॉन्ड होल्डर्स को दूंगा। तो मेरे लिए तो ये ट्रांजैक्शन कैंसिल हो जाएगी आपस में। लेकिन मैं आपको फ्लोटिंग रेट दूंगा भी सही। मैं आपको फ्लोटिंग रेट दूंगा भी सही $5 करोड़ का। यानी पे क्या करूंगा मैं? पेज़ अंडर स्वैप। मैं स्वैप के अंडर क्या दूंगा? तो आप बोलोगे कि $5 करोड़ का लोन लिया है। फ्लोटिंग रेट पर हम पे करेंगे। जो भी फ्लोटिंग रेट होगा वह पढ़ना पड़ेगा कि आगे क्वेश्चन में फ्लोटिंग रेट कितना दिया है। हमने पे करना है एसओएफआर + 1.5% यानी जो मैंने पे करना है वो एसओ बेंचमार्क रेट + 1.5% करना है और बेंचमार्क रेट 5% है। तो अगर मैं बेंचमार्क रेट 5% है 5% + 1.5% यानी मैं लगभग 6.5% आपको ब्याज दूंगा। यानी यूएस डॉलर $3250 का मैं आपको ब्याज दूंगा और मैं आपसे रिसीव कितना करूंगा 373500 इतना लोन आप मुझे दोगे और इतना ही लोन मैं 5:15:24 बैंक को चुका दूंगा तो यह दोनों एंट्रियां तो कट जाएंगी मतलब ये दोनों एंट्रियां तो आपस में कट जाएंगी। मैंने आपसे लिया और बॉन्ड होल्डर को दिया। आपसे लोन इंटरेस्ट लिया और बॉन्ड होल्डर को दिया। तो यह एंट्रियां तो मेरे कट गई। इफेक्टिवली मुझे खाली फ्लोटिंग रेट फील हो रहा है। मुझे खाली इफेक्टिवली फ्लोटिंग रेट फील हो रहा है क्योंकि मुझे सिर्फ फ्लोटिंग रेट ही आपको विदेश में पे करना पड़ रहा है। बेटा मैं पूरी कहानी सुना रहा हूं। ये वैसे कहानी बहुत सारे अलग-अलग टॉपिक्स के सिमिलर लग रही होगी आपको। आपको इस टॉपिक को पढ़ते हुए बहुत सारे अलग-अलग टॉपिक जो हमने अलग-अलग जगह पे पढ़ रखे हैं वो सारे आपके दिमाग में घूम रहे होंगे। जब हमने डायग्राम बनाता था मनी मार्केट एक्सचेंज जैसे ऐसे बहुत सारी चीजें आपके दिमाग में घूम रही होंगी। पर मैं आपको इस वक्त सर्कस स्वैप करा रहा हूं। सर्कस स्वैप। सर्कस स्वैप मतलब करेंसी भी एक्सचेंज हो रही है। लोन भी एक्सचेंज हो रहा है करेंसी में और इंटरेस्ट भी अलग-अलग स्वैप हो रहा है। मतलब मैं आपको फ्लोटिंग रेट दे रहा हूं और आप मुझे फिक्स रेट दे रहे हैं। क्या ये कहानी समझ आ गई? मुझे लगता है आपको पूरी बात समझ आ गई होगी। अब क्वेश्चन पढ़ लेते हैं। देखो हमारी एडवांटेज है कि हम यूरो बॉन्ड इशू कर सकते हैं डोमेस्टिक 9% पे। 5:16:25 साइमलटेनियसली हम करेंसी कूपन स्वैप बैंक के साथ एंटर कर रहे हैं टू कन्वर्ट इनू फ्लोटिंग रेट यूएसडी फंडिंग। क्योंकि हमें पैसा चाहिए यूएस डॉलर में। तो प्रिंसिपल अमाउंट क्या है? हम आप मुझे मैं आपको $15 करोड़ का लोन बॉन्ड से रेज करके आपको दे दूंगा और एक्सचेंज कर लेंगे $83 के रेट पे। यानी आप मुझे $5 करोड़ दे दोगे उसके बदले में। फिर अंडर दी स्वैप मैं आपको फ्लोटिंग रेट पे करूंगा और रिसीव करूंगा आपसे फिक्स रेट। आपसे फिक्स रेट रिसीव करूंगा और बैंक और बॉन्ड होल्डर्स को दे दूंगा। फिर वह कहता है एसओएफआर फॉर द ईयर 5% है। कंप्यूट दी प्रिंसिपल अमाउंट एक्सचेंज इन आईएआर एंड यूएसडी एट द स्टार्ट ऑफ द स्वैप। मतलब वो कहता है कि प्रिंसिपल अमाउंट भी बताओ एक्सचेंज इन आईएआर कितना है? प्रिंसिपल आईएआर में एक्सचेंज हुआ है इतना। और यूएस डॉलर में हुआ है 5 करोड़। ठीक है जी। इंटरेस्ट अमाउंट रिसीव्ड बाय ज़नथ कितना होगा? हम इंटरेस्ट रेट रिसीव कितना करेंगे? हम रिसीव करेंगे ₹415 करोड़ का 9% और इंटरेस्ट रेट पेड कितना होगा? हम 5:17:27 पे करेंगे $5 करोड़ का 6.5% और वो कहता है कि नेट इफेक्टिव कॉस्ट क्या है? तो देखो मैं बॉन्ड होल्डर्स को इतना इंटरेस्ट दूंगा। आपसे इतना इंटरेस्ट लूंगा और मैं आपको $5 करोड़ पे यूएस डॉलर का ब्याज दूंगा। तो मेरे लिए इफेक्टिव कॉस्ट यही है। और एंड में प्रिंसिपल रीएक्सचेंज कितने का होगा? प्रिंसिपल री एक्सचेंज वही होगा जो मैंने आपको दिया था वह लौटा दूंगा। मतलब वह आप मुझे लौटा दोगे और जो आपने मुझे दिया था लोन वह मैं आपको लौटा दूंगा। क्या यह समझ आ गया कि क्वेश्चन टफ नहीं है। बस इस शब्द को समझकर इस शब्द को पढ़कर बेमतलब में डर मत जाना। मैंने क्या कहा? समझे आप? यानी इस शब्द को समझकर डर मत जाना। आसान है। स्ट्रेट फॉरवर्ड है। सबको समझ आ गया? थम्स अप करके मुझे बता दीजिए। क्या यह बातचीत समझ आ गई आप सबको? बहुत ही बढ़िया। आइए दोस्तों, फॉररेक्स के टॉपिक में एक छोटा सा टॉपिक मुझे आपको समझाना है ब्रोकन पीरियड के प्रीमियम, 5:18:30 डिस्काउंट और एक्सचेंज रेट डिसाइडिंग का। ठीक है जी। आप इस बात को समझिए कि ब्रोकन पीरियड का मतलब क्या है? देखो 99% क्वेश्चंस में तो जो ट्रांजैक्शन हो रही होती है वह हमेशा उसी डेट पर हो रही होती है जिस रेट का हमारे पास फॉरवर्ड रेट अवेलेबल होता है या जिस दिन का स्पॉट फॉरवर्ड रेट हम निकालते हैं। मैं पहले कुछ बातें याद दिलाता हूं। याद है आपको कि अगर मैं ऐसे लिखता हूं कि स्पॉट रेट आज का स्पॉट रेट है मान लो कि $1 इज इक्वल टू $8.00 से ₹89.00 ठीक है जी। अगर मैं बोलता हूं कि बैंक हमें $1 हमसे बाय करेगा इस रेट पे, सेल करेगा इस रेट पे। ये आज की बात है। लेकिन कभी-कभी क्वेश्चन में हमें प्रीमियम दिया होता है। आपको यह बात पता होनी चाहिए कि प्रीमियम दिया होता है। अगर फॉरवर्ड प्रीमियम दिया हुआ है तो वो हम ऐड करते हैं और डिस्काउंट दिया होता है तो हम माइनस करते हैं। मान लो हमें प्रीमियम दिया है 3 महीने का या 1 महीने का तो वो 5:19:33 हम प्रीमियम ऐड कर देते हैं। जैसे 0.30 और यहां पे ऐड कर देते हैं 0 जो भी वो बोलेगा 60 मान लो। तो हमारे पास 1 महीने बाद का फॉरवर्ड रेट पता लग जाता है। हम 88.30 और 89.60 पे पहुंच जाते हैं। करेक्ट। जी हां सर हमें ये बात पता है। बिल्कुल पता है। तो यानी जो क्वेश्चन में ट्रांजैक्शन होगी वो हो भी रही होगी या तो आज या 1 महीने बाद। तो वो दिन है। लेकिन अगर मान लो क्वेश्चन कुछ ऐसी लैंग्वेज लिखे कि जो ट्रांजैक्शन हो रही है वो उन दोनों डेट्स के बीच में हो रही है। अब क्या हुआ? मान लो कि ये 1 महीने की बात हो रही है। ये 30 डेज बाद का 30 डेज बाद का एक्सचेंज रेट फॉरवर्ड रेट है। लेकिन जो ट्रांजैक्शन हो रही है वो आज से 0 से 30 के नहीं बीच वो मान लो कि वो 15 दिन बाद हो रही है। तो अब इधर का प्रीमियम हम कैसे निकालें? यहां का फॉरवर्ड रेट कैसे निकालें? मतलब मुझे यहां का स्पॉट रेट और 30 डेज का फॉरवर्ड रेट तो पता है। पर मुझे चाहिए 15 दिन का फॉरवर्ड 5:20:34 रेट। तो वो मैं कैसे निकालूं? वो मुझे आपको सिखाना है। दैट इज़ कॉल्ड ब्रोकन पीरियड। समझ आ गया? ब्रोकन पीरियड का मतलब क्या है? कि ब्रोकन पीरियड का मतलब है कि वो हमारे गिवन फॉरवर्ड रेट के कहीं बीच में आ रहा होगा। मतलब जितने पीरियड का फॉरवर्ड रेट अपने पास अवेलेबल होगा ना, जितने पीरियड का फॉरवर्ड रेट अपने पास अवेलेबल होगा उसके कहीं बीच में आ रहा होगा। तो बीच का डेट हम कैसे निकालते हैं वो सिखा रहा हूं। वैसे वो बड़ा आसान है। आपको यूनिटरी मेथड लगाना है। यूनिटरी मेथड मतलब हम यह बोलेंगे कि देखो यह जो प्रीमियम है यह प्रीमियम 30 दिन का है। अगर मैं इस प्रीमियम को इमेजिन करो अगर मैं इस प्रीमियम को 30 से डिवाइड करके इंटू 15 कर दूं और इस प्रीमियम को डिवाइड बाय 30 * 15 कर दूं तो मुझे 15 दिन का प्रीमियम पता लग जाएगा। और 15 दिन का प्रीमियम अगर हम आज के स्पॉट रेट में ऐड कर देंगे तो 15 दिन बाद का रेट आ जाएगा। मतलब बात वही है। इंटरपोलेशन ही करनी है। बट उसकी प्रैक्टिस कर लेते हैं। देखो पहली बात ब्रोकन पीरियड का प्रीमियम या डिस्काउंट क्या होगा? जो भी फुल पीरियड का प्रीमियम या डिस्काउंट है जैसे 30 30 दिन का है तो इसे डिवाइड बाय 30 करो * 15 करो 5:21:35 यानी इसे इंटू करो ब्रोकन पीरियड से और डिवाइड करो फुल पीरियड से। अच्छा सर जैसे यहां पे इस क्वेश्चन में ये 30 है। तो ये 030 30 दिन का है। लेकिन हमें चाहिए कितने दिन का? 15 दिन का। तो इसे इंटू 15 कर दीजिए। क्या यह बातें आपको क्लियर है? मैंने क्या कहा?30/ 30 * 15 तो यह आंसर आ गया हमारे पास। अब अगर मैं आपको यह बोलूं कि ब्रोकन पीरियड फॉरवर्ड रेट। ब्रोकन पीरियड फॉरवर्ड रेट क्या होगा? वो होगा स्पॉट रेट में ब्रोकन पीरियड का प्रीमियम या डिस्काउंट ऐड सब्ट्रैक्ट करो। प्रीमियम है तो ऐड करो। डिस्काउंट है तो माइनस करो। यानी इन शॉर्ट सब कुछ वैसा ही चलेगा जैसा आप पहले करते यह जो करते थे बिल्कुल वैसा ही चलेगा। बस यह जो प्रीमियम है उसे प्रपोशननेट बनाना पड़ेगा। जितने दिन दूर जाना है। जितने दिन दूर जाना है उतने दिन तक का प्रपोशननेट बनाना पड़ेगा। सिंपल बस इतनी सी बात है। ठीक है जी। और ऐसे ही मर्चेंट रेट जो है जैसे आफ्टर 5:22:37 लोडिंग बैंक मार्जिन यानी जो भी ब्रोकन [नाक से की जाने वाली आवाज़] पीरियड फॉरवर्ड रेट आएगा उसमें मार्जिन ऐड होंगे। बिल्कुल सिंपल सी बात है। यानी बैंक भी जो अपना मार्जिन लेगा वह 30 दिन बाद वाले रेट पर नहीं लेगा। अगर 15 दिन बाद ट्रांजैक्शन सेटल हो रही है तो 15 दिन वाले रेट पे लेगा। ठीक है? ये भी आसान बात है। चलो क्वेश्चन करते हैं। क्वेश्चन से बात बेटर समझ आती है। है ना? पढ़िए जरा। क्वेश्चन नंबर आपको टू क्या कहता है? वह यह कहता है कि भैया ऐसा है हमारे आज का स्पॉट रेट इतना है। 1 महीने बाद का मार्जिन इतना है। देख रहे हो यह इनक्रीज हो रहा है। अगर मार्जिन इंक्रीज हो रहा है तो प्रीमियम होता है। यह मार्जिन भी इंक्रीज हो रहा है। इसका मतलब यह भी प्रीमियम है। आपको यह बात याद रखनी होगी कि जब भी मार्जिन बढ़ रहा होता है वो प्रीमियम का होता है। और अगर मार्जिन डिक्रीज हो रहा हो तो वो डिस्काउंट का होता है। यह बात हमें पता है। ठीक है सर। वो ये कहता है 45 डे ब्रोकन पीरियड फॉरवर्ड सेलिंग रेट बताओ। देखो फॉरवर्ड सेलिंग रेट बैंक के लिए बैंक के लिए फॉरवर्ड सेलिंग रेट बताना है 45 डेज बाद का। यानी इसकी कैलकुलेशन करनी है। यानी हमें इस क्वेश्चन में यह यूज़ नहीं करना है। उसने खाली सेलिंग रेट की बात करी है। ठीक है सर। सेलिंग रेट की बात करी है। 5:23:37 सेलिंग रेट निकाल देते हैं। अब सुनो। वो भी 45 डेज का। अब मैं ऐसे समझाता हूं। नंबर लाइन से पहले एक बार समझा देता हूं। फिर आपको अंडरस्टैंडिंग ज्यादा बेटर हो जाएगी। सोचो ये ज़ीरो पीरियड है। ज़ीरो पीरियड पे स्पॉट रेट कितना है हमारा? 83.2600 30 दिन क्योंकि यह एक महीना है और यह 2 महीना है तो हम इसे 30 डेज और 60 डेज मान लेते हैं। ठीक है जी। अब आप पहले मुझे यह बताओ कि हमें निकालना कहां है? हमें पहुंचना कहां है? हमें पहुंचना है यहां पे। 45 डेज पे। लेकिन यह किन दोनों के बीच में आएगा? यह इन दोनों के बीच में आएगा। तो पहले तो यहां तक पहुंचो। तो आप मुझे बताइए कि हमारा 30 डेज का जो रेट होगा वह कितना होगा? इसमें अगर हम प्लस कर दें 0.1600 5:24:40 तो यह 30 डेज का फॉरवर्ड रेट आ जाएगा 83.4200 और अगर हम इसमें 60 डेज आगे जाना चाहते हैं तो यह ऐड करेंगे। तो यह 60 डेज का फॉरवर्ड रेट आ गया। 83.5800 अब मुझे पता है इन दोनों के बीच का जो गैप है वो 30 डेज का गैप है। लेकिन मुझे इसमें से सिर्फ 15 डेज आगे जाना है। मुझे 30 डेज आगे जाना ही नहीं है। मुझे इन दोनों में से सिर्फ 15 डेज ही आगे जाना है। तो मैं सिर्फ 15 डेज आगे जाता हूं। क्या आपको मेरी बातें समझ आ रही है? मैंने क्या कहा? यानी अगर मैं 45 डेज का जो प्रीमियम है वह निकालना चाहता हूं तो मैं कैसे निकाल सकता हूं? 83.5800 ये 60 डेज बाद का रेट है। 83.4200 5:25:44 यह 30 डेज बाद का रेट है। इन दोनों को माइनस करो। तो इनके बीच में जो गैप है वह 30 डेज का है। तो गैप को डिवाइड बाय 30 डेज कर दो। लेकिन हमें कितने मूव करना है? हमें खाली 15 डेज मूव करना है। तो इसे इन 15 डेज कर दो। मतलब हमने जो इनका गैप निकाला वह गैप पूरे 30 डेज का है। लेकिन हमें उसमें से सिर्फ 15 डेज आगे जाना है। तो इसलिए इन 15 डेज कर रहे हैं। तो इसका आंसर कितना आ जाएगा बताइए? यानी हमारा 45 डेज का प्रीमियम कितना हो जाएगा? अब यह बताइए। क्या सर हम ऐसे नहीं कर सकते थे कि फॉरवर्ड रेट ना निकालते। सीधा प्रीमियम को ही माइनस कर देते तब भी हो सकता था। सिर्फ इन दोनों प्रीमियम को भी माइनस कर सकते थे। 3200 -1600 / 30 * 15 ऐसे भी कर सकते थे। वो भी करेक्ट है। उसमें भी करेक्ट आंसर ये आएगा। इसका आंसर कितना आ रहा है बेटा? 0.08। ठीक है जी। तो यह हमारे पास 0.08 आ रहा है। तो यानी आज से 45 डेज का जो प्रीमियम है 5:26:45 वो इतना है। तो इसका मतलब अगर मुझे 45 डेज का फॉरवर्ड रेट निकालना है तो स्पॉट रेट प्लस 45 डेज का प्रीमियम होगा। तो आज का स्पॉट रेट है 83। अच्छा नहीं मैंने पूरा 45 डेज नहीं निकाला ना। मैंने तो खाली 15 दिन का निकाला है। तो मैं इसमें ऐड करूंगा 15 दिन आगे। तो स्पॉट रेट जो 30वें दिन है अगर मैं 30वें दिन का स्पॉट रेट ले रहा हूं तो यहां 15 दिन का प्रीमियम लूंगा। 30वें दिन का स्पॉट रेट था 83.42 100 और उसमें 15 दिन का प्रीमियम ऐड कर दो। 0.0800 क्योंकि मैंने सिर्फ प्रीमियम 15 दिन का निकाला है। तो इसे सॉल्व करो। कितना आ जाएगा मेरे पास? तो 45 डेज का फॉरवर्ड रेट क्या आएगा? जो स्पॉट रेट था 30 दिन बाद उसमें 15 दिन का फॉरवर्ड प्रीमियम और ऐड कर दिया। तो इन दोनों को ऐड करके बताइए कितना आ रहा है? 83.500 एक बच्चा कह रहा है कि सर हम स्टार्टिंग से ही सीधा 45 डेज का नहीं निकाल सकते थे 5:27:47 कि सर हम स्टार्टिंग से ही सीधा 45 डेज आगे पहुंच जाए। उसमें ना पता है क्या होगा? एरर आने का ज्यादा चांस है। देखो हमेशा आपने इंटरपोलेशन में भी एक बात पढ़ी थी। जब भी इंटरपोलेशन करना है तो जो नियरेस्ट टर्म्स होती हैं उन्हें लेकर इंटरपोलेट किया जाता है। दूर की टर्म से इंटरपोलेट नहीं किया जाता। एक बात बताओ मुझे अगर 45 डेज का आंसर चाहिए तो मैं 30 और 60 के बीच में आंसर निकालना पसंद करूंगा ना कि ज़ीरो और 60 के बीच में आंसर। क्योंकि अगर मैं ज़ीरो से 60 के बीच में आंसर निकालूंगा तो मेरी एप्रोक्सीमेशन बढ़ जाएगी आंसर में। यानी आंसर में एरर टर्म्स बढ़ जाएंगी। क्या ये बात आपको समझ आ गई बेटा मैंने क्या कहा। ठीक है। चलिए जी। अगला क्वेश्चन देखते हैं। वैसे मैं एक बात बताऊं टॉपिक इतना ही सही था। कांसेप्ट इतना सही था। कांसेप्ट तो इतने में कवर हो गया आपका पूरा। अब इसी की प्रैक्टिस करेंगे। प्रीमियम सिचुएशन विद इंपोर्टर पर्सपेक्टिव। देखो अगर आप एक इंपोर्टर हो। ठीक है जी। और आपको यूएस डॉलर की पेमेंट करनी है। अगर मैं एक इंपोर्टर हूं। मुझे यूएस डॉलर की पेमेंट करनी है। तो यानी मैं बैंक से यूएस डॉलर बाय करूंगा। आप ऐसे समझो अगर आप एक 5:28:49 इंपोर्टर हो तो आप यूएसडी बाय करोगे। यूएसडी बाय करोगे यानी बैंक यूएसडी सेल करेगा। बैंक सेल्स है ना? तो बैंक का सेलिंग रेट यूज़ होगा। यानी इस क्वेश्चन में बाइंग रेट यूज़ नहीं करना। सेलिंग रेट से आंसर करना है। ठीक है? और वो भी 75 डेज की बात हो रही है। और ये 60 डेज और ये 90 डेज होगा बेटा। क्योंकि 2 मंथ 60 डेज होता है और 3 मंथ्स 90 डज़ होता है। तो यानी इन दोनों के बीच में हमें ब्रोकन पीरियड निकालना है। तो देखिए क्या होगा? नंबर लाइन की मदद से समझ लेते हैं। यह ज़ीरो पीरियड है। ये 60 डेज हैं। ये 90 डेज हैं। ये है 82.5600। अगर आप ध्यान से देखो तो ये रेट बढ़ रहा है। यह रेट भी बढ़ रहा है। यानी यह प्रीमियम का क्वेश्चन है। यानी किसका क्वेश्चन है? प्रीमियम। यह कैसे पता चलता है? अगर इन दोनों रेट्स में इंक्रीज आ रहा हो, अगर इन दोनों रेट्स में इनक्रीज आ रहा हो, बड और बड और सेलिंग के रेट में जो फॉरवर्ड पॉइंट्स हैं, वो बढ़ रहे हो, बढ़ 5:29:50 रहे हो, तो फिर वो प्रीमियम के पॉइंट्स माने जाते हैं। प्रीमियम मतलब बढ़ेगा। तो यानी इसके अंदर आप एक काम कीजिए 0.2600 ऐड कर दो और इसके अंदर आप 0.3900 ऐड कर दो। तो आप मुझे बताइए आपके पास 60 दिन बाद का रेट कितना हो जाएगा? आप बोलोगे 60 दिन बाद का रेट हो जाएगा 82.8200 और 90 डेज बाद का रेट कितना हो जाएगा? 82.9500 यानी अब हमें 60 डेज और 90 डेज का रेट पता है। और जो निकालना है वो 75 डेज इन दोनों के बीच में कहीं आता है। यानी मुझे क्या करना है? इस रेट में 15 दिन का प्रीमियम ऐड करना है। इस डेट में 15 दिन का प्रीमियम और ऐड करना है। है ना? तो पहले वह 15 दिन का प्रीमियम निकालते हैं। यानी यहां से यहां तक के लिए 15 दिन वाला प्रीमियम निकालते हैं। तो वह कैसे निकलेगा? 5:30:51 15 डेज प्रीमियम आफ्टर 60 डेज यानी 75 डेज वाला प्रीमियम। बेसिकली हम 75 डेज वाला प्रीमियम निकाल रहे हैं। कैसे निकालेंगे? देखो 82.9500 और 82.8200 इन दोनों रेट्स में जो गैप है इन दोनों रेट्स में जो गैप है वो पूरे 30 दिन का गैप है। तो अगर मैं उसे डिवाइड बाय 30 कर दूं * 15 कर दूं तो मेरे पास 15 दिन के लिए कितना गैप होना चाहिए वह पता लग जाएगा। यानी 15 दिन का प्रीमियम पता लग जाएगा। कितना आ जाएगा? अगर मैं इन दोनों को का गैप निकाल देता हूं। माइनस कर देता हूं। सर क्या हम एग्जैक्ट इससे नहीं कर सकते? बेटा आप कर तो किसी भी मेथड से सकते हो। मैं उसमें मना थोड़ी ना कर रहा हूं। तो ये कितना आ रहा है? आपने कहा 0.0650 आ रहा है। ठीक है? तो यानी इधर हमें 650 ऐड कर देना चाहिए। मुझे 75 डेज बाद का 5:31:51 फॉरवर्ड रेट पता लग जाएगा। यानी 60 डेज का फॉरवर्ड रेट प्लस नेक्स्ट 15 डेज का प्रीमियम। नेक्स्ट 15 डेज का प्रीमियम ऐड कर रहे हैं हम। यानी 60 डेज का फॉरवर्ड रेट। यह कितना था? 82 8200 और 15 दिन का प्रीमियम इसमें ऐड कर दो। तो, यह कितना बन गया? 82.8850 यह हमारा रेट आ गया। 82.8850 यह हमारा ब्रोकन पीरियड का इंटरेस्ट आ गया। मतलब फॉरवर्ड रेट आ गया 75th डे का। यह 75th डे का फॉरवर्ड रेट है जिससे हमें ट्रांजैक्शन सेटल करनी पड़ेगी। यानी अगर हमें यूएस डॉलर इतने बाय करने थे तो इस रेट पे बाय होंगे। यानी $5 लाख इस रेट पे बाय होंगे। यानी इतना पैसा मुझे बैंक को देना पड़ेगा। क्या ये बातें आपको समझ आ गई? मैंने क्या कहा? इसी के ऊपर प्रैक्टिस के लिए मैंने दो 5:32:54 क्वेश्चन और रखे हैं। यह वाले आप खुद कर लीजिएगा। हो जाएंगे यह ईली। ठीक है जी? बस प्रैक्टिस है कर लीजिएगा हो जाएगी। ईजीली हो जाएगी। दो क्वेश्चन मैंने प्रैक्टिस के आपको और दिए हैं। वो आप कर लेना। नंबर लाइन बना के करना जैसे मैंने कराए हैं। तो कांसेप्ट आपका बिल्कुल क्लियर हो जाएगा। ओके? कर लोगे ब्रोकन पीरियड की भी प्रैक्टिस। चलिए एंजॉय करिए बेटा। आइए दोस्तों, अब हम अनेस्चर क्वेश्चंस पढ़ेंगे। इंटरेस्ट रेट रिस्क मैनेजमेंट चैप्टर के ध्यान से देखिएगा। इसे पढ़ने से पहले आपको बेसिकली नॉलेज होनी चाहिए कैप की, फ्लोर की, कॉलर की। तो मैं उम्मीद करता हूं कि आपके पास बेसिक ज्ञान है। मैं वैसे थोड़ा सा बताऊंगा बट आपके पास बेसिक ज्ञान होना चाहिए। क्लास में से आपने कैप फ्लोर पढ़ा होना चाहिए। तो ये क्वेश्चन आपको बेटर समझ आएंगे। आइए। वैसे ऐसे क्वेश्चन हमने क्लास में पार्शियली डिस्कस किए हुए हैं। यह उसी की एक्सटेंडेड वर्जन है बस प्रैक्टिस के लिए। ठीक है ना? देखिए और एक छोटा नया टॉपिक भी है स्वपेशन जिसके 5:33:55 बारे में आपने थ्योरेटिकली पढ़ा होता है, प्रैक्टिकली नहीं पढ़ा होता तो वो भी मैं प्रैक्टिकली पढ़ाने वाला हूं। xyz लिमिटेड हैज़ बोरोड 2 करोड़ हैज़ बोरोड। यानी आप लोन ले चुके हो। 18 मंथ्स का लोन है फ्लोटिंग रेट पर 6 महीने के लिए जिसमें मबर प्लस 1% मार्जिन है। मतलब आपको जो भी मब का रेट चल रहा होगा प्लस 1% मार्जिन देना होगा। रिसेट एव्री सिक्स मंथ्स और हर 6 महीने बाद यह इंटरेस्ट रेट रिसेट होता रहेगा। द इंटरेस्ट पेएबल इन एरियर एट द एंड ऑफ ईच सिक्स मंथ पीरियड। यानी इंटरेस्ट हमेशा 6 महीने बाद पे किया जाता है। तो अगर मैं इसके लिए एक नंबर लाइन बनानी स्टार्ट करूं आपके लिए तो आप क्या कहेंगे? आप यह कहेंगे देखो दोस्त हमारे पास देखिए जरा मुझे नहीं पता कितने पीरियड है ना वो गिनते रहेंगे और अच्छा 18 महीने थे तो फिर तीन तीन ही पीरियड होंगे 6-छ महीने के क्योंकि उसने 18 महीने मेंशन किया हुआ है 5:34:59 तो ये हो गए सिक्स मंथ्स ये हो गए 12 मंथ्स और ये हो गए 18 मंथ्स ठीक है सर लोन लोन की अमाउंट कितनी है? लोन की अमाउंट है हमारी अगर हम ध्यान से देखें 2 करोड़। ठीक है ना? और रेट क्या है? मबर प्लस 1% फ्लोटिंग रेट है मबर + 1% का। ठीक है जी। अब पढ़िए। टू प्रोटेक्ट इटसेल्फ अगेंस्ट अ राइज इन द इंटरेस्ट रेट। आपको डर लग रहा है भैया इंटरेस्ट रेट ना बढ़ जाए फ्यूचर में क्योंकि आपका तो फ्लोटिंग रेट है। फ्लोटिंग रेट में तो हमेशा डर लगा ही रहेगा। बताओ हां या ना? यदि आप फ्लोटिंग रेट का लोन लोगे तो आपको डर लगा रहेगा कि यार इंटरेस्ट रेट ना बढ़ जाए। ठीक है? तो आपको डर लग रहा है कि इंटरेस्ट रेट बढ़ ना जाए। उससे बचाने के लिए आप क्या कर रहे हो? द कंपनी बाय एन 18 मंथ इंटरेस्ट रेट कैप। आपने 18 महीने की इंटरेस्ट रेट कैप खरीद ली। कैप खरीदने का मतलब क्या होता 5:36:00 है? देखो कैप खरीदने का मतलब यह होता है कि अगर मैं यहां खड़ा हूं। ठीक है जी। मेरे लिए जो रेट एप्लीकेबल है वह है मबर + 1% लेकिन अगर मुझे जो इंटरेस्ट रेट फील हो रहा है वो अगर कैप से ऊपर चला गया। अगर कैप से ऊपर चला गया तो मुझे कैप जितना ही इंटरेस्ट पड़ेगा कैप से जितना ऊपर जाएगा उतने कम मुझे जिसके साथ मैंने कैप बुक किया है वो मुझे रीइबर्स करेगा। बेसिकली वो उतना पैसा देगा। यानी अगर ब्याज का रेट कैप से ऊपर चला गया और कैप मैंने कितने पर ली है? कैप रेट लिया है 8% का एप्लीकेबल टू मबर ओनली। मतलब Mybar + 1% को नहीं देखेंगे। सिर्फ Mybar को देखेंगे इस कैलकुलेशन में। यानी इस कैलकुलेशन में हम Mybar + 1% को नहीं देखेंगे। सर मतलब क्या हुआ? मतलब जब कैप की कैलकुलेशन देख रहे होंगे, तो हम खाली Mybar को देखेंगे। Mybar + 1% को नहीं देखेंगे। ये कह रहा है। और हमने कैप फिक्स की है 8%। इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब ये हुआ कि अगर मुझे मब इंटरेस्ट रेट पे करना है। लेकिन अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट कभी भी 8% 5:37:01 से ऊपर चला गया तो जितना ऊपर चला जाएगा उतने परसेंट के लिए जो सामने वाला व्यक्ति है जिसने मुझसे कैप बुक करवाई है वो मुझे कंपनसेेट करेगा। वो मुझे उससे अधिक वाला पैसा वापस कर देगा। तो यानी मैंने जिससे लोन ले रखा है। लोन तो मैंने कहीं अलग ले रखा है ना। एक अलग बैंक के पास मेरा लोन चल रहा है। बैंक को तो मैं Mybar + 1% देता ही रहूंगा। इमेजिन करते हैं। इमेजिन करते हैं कि Mybar हो गया 9%। तो 9% + 1% यानी मैं बैंक को लोन तो 10% पर चुका ही रहा हूं। मेरा तो 10% जा रहा है। लेकिन क्योंकि 8% से 1% ऊपर चला गया है। तो जो 1% ऊपर चला गया है वो 1% मुझे रिफंड होकर वापस आ जाएगा कैप की वजह से। तो यानी मुझे 1% इसमें से कम पड़ जाएगा तो मुझे इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट 9% का पड़ जाएगा। मुझे इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट नौ पड़ जाएगा। नौ ही पड़ना चाहिए था क्योंकि कैप है एट तो 8 + 1 9 होता है। तो मुझे नौ ही पड़ना चाहिए था। नौ पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट अगर 11 हो गया, 12 हो गया, 13 हो गया, तब भी मेरे को कोई दिक्कत नहीं। मुझे 9% का ही ब्याज पड़ेगा नेट क्योंकि मेरी कैप 8% पर बुक्ड है। तो और कैप अगर 8% पे बुक्ड है तो कैप + 1 यानी मतलब मॉर प्लस वन यानी मुझे 9% 5:38:03 ही फील होगा हमेशा। पर हां अगर इससे नीचे रहा इंटरेस्ट तो क्या मैं कैप को इंड्यूस करवाऊंगा। क्या मैं कैप को यूज़ करूंगा? नहीं। फिर कैप यूज़ नहीं होगी। फिर तो मेरे को जो लो रेट पड़ रहा है वही दूंगा मैं। ठीक है ना? फिर उसमें कोई मुझे रिइबर्समेंट कोई पेमेंट नहीं आएगी कैप से। ठीक है सर। अब बताइए। वह यह कहता है हमने 18 महीने की कैप ले ली है 8% रेट पर मब के लिए पेइंग एन अप फ्रंट प्रीमियम 50,000 और हमें ध्यान रखना है कि हमने यहां पे उसके लिए प्रीमियम भी दे दिया है। ₹50,000 का कैप का प्रीमियम भी दे दिया है। बहुत बढ़िया। अब वो कहता है, एज़ पर द मार्केट कन्वेंशन, द सिक्स मंथ पीरियड इज़ एक्सक्लूडेड फ्रॉम द कैप सिंस दैट रेट इज़ ऑलरेडी नोन एट द इंसेप्शन। देखो पहला रेट तो हमेशा पहले से ही पता होता है। तो पहले पीरियड तो अनसर्टेन ही नहीं है। इसलिए वो कैप में काउंट नहीं होगा। इसलिए पहले मंथ में मैंने क्या रेट दिया वो काउंट नहीं होगा। ठीक है जी। द सिक्स मंथ मबर ऑब्जर्व्ड ऑन द टू सबक्वेंट रिसेट डेट्स। अब आगे क्या-क्या रिसेट है? 8.75% 5:39:04 देखिए यहां पर 8.75% का मर दिखाई दे रहा है और यहां पे 7.6% का मॉर दिखाई दे रहा है। मुझे एक बात बताइए अगर मेरी कैप का रेट 8% था। अगर मैं यहां पे लिखूं कैप का रेट था 8% तो आप मुझे एक बात बताइए। कैप यूज्ड मतलब तो यहां पे तो नो कैप यूज़्ड ही नहीं होगी। क्यों? क्यों नहीं होगी कैप यूज़? रीज़न दो। क्योंकि कैप कहां से चलाओगे भैया? किस बात के लिए चलाओगे कैप? क्या यहां पे कैप यूज़ होगी? यस। तो, यहां पे कैप से आपको कितना पैसा मिलेगा? जिस बंदे ने आपको कैप बेची है, वह आपको कितना कंपनसेट करेगा? वो आपको 75% के लिए कंपनसेेट करेगा। कितने दिन के लिए? यह वाला था 184 डेज के तो 184 डेज के लिए वह आपको 75% रिटर्न देगा। यह नहीं देगा 181 5:40:04 डेज के लिए। यानी इसके बाद आपका पीरियड कितना है? 184 डेज का। इसके बाद आपका पीरियड है 181 डेज का। ठीक है सर। सर जी हमें ये बातें समझ आ गई हैं। चलिए फिर देखते हैं क्वेश्चन कैसे सॉल्व होगा। वो कहता है 360 डेज को एक साल मान लेना। कैलकुलेट दी कैप सेटलमेंट अमाउंट। मतलब कैप से मुझे कितने पैसे मिलेंगे? देखो फर्स्ट पीरियड में तो कैप लागू ही नहीं हो रही। उसने मना ही कर दिया कि पहले पीरियड में तो कैप चलेगी नहीं। यहां के लिए कैप चलेगी। जी हां, कैप लगेगी। हां, कैप यूज़ होगी। हां, क्योंकि हमारे को कैप मिली है। हमने 8% की लिमिट रखी है। लेकिन अगर उससे ऊपर इंटरेस्ट चल गया तो हमें कंपनसेशन मिलेगी। हमें कंपनसेशन कितनी मिलेगी? 8.75 - 8 देखो हमें कैप एक्टिवेट होगी। हां। तो 8.75 - 8 184 डेज के लिए वो भी 2 करोड़ पे। तो हमें कुल मिलाकर इतना पैसा मिलेगा। यानी कैप से कंपनसेशन कितनी मिलेगी? इतनी। लेकिन पीरियड थ्री में कंपनसेशन मिलेगी? नहीं। कोई सेटलमेंट नहीं मिलेगी क्योंकि ऑलरेडी इंटरेस्ट रेट नीचे है। ऑलरेडी इंटरेस्ट रेट नीचे है। बेटा कैप तो तब यूज़ होगी ना जब 8% से ऊपर इंटरेस्ट जाएगा। 5:41:07 क्या ये बात आपको समझ आ गई बेटा मैंने क्या कहा? ठीक बात है। हां। कैप हमारी एक ऑप्शन होती है बेटे। कि जब हमें फायदे में होगी तब हम यूज़ करेंगे। जब फायदे में नहीं होगी तो यूज़ नहीं करेंगे। ऑब्वियसली। आइए आगे पढ़ते हैं। अब वो हमें क्या बोलता है? उसने बोला था कैप का सेटलमेंट अमाउंट कितना होगा? होगा वो तो हमें समझ आ गया। फिर वो कहता है कि अच्छा बताओ टोटल इंटरेस्ट पेएबल कितना होगा? लोन बिफोर कंसीडरिंग द कैप। बिफोर कंसीडरिंग कैप। बेटा मेरा एक बात बताओ मैं इधर कैलकुलेशन करता हूं आपके लिए। कैप की सेटलमेंट कितनी होगी? मैं ना एक क्वेश्चन पूरा रिॉल्व करके दिखा देना चाहता हूं ताकि आगे वाले फिर मैं पूरे ना भी सॉल्व करूं तो चल जाएगा। देखो इधर कैप की सेटलमेंट कितनी होगी? 2 करोड़ पे हमें 8.75% - 8% का सेटलमेंट मिलेगा। वह भी 184 डेज के लिए। यहां पर हमें 2 करोड़ पर कोई भी सेटलमेंट नहीं मिलेगा 181 डेज के लिए। ठीक है? और यहां पे इंटरेस्ट पेड कितना 5:42:08 होगा हमारा दोनों पीरियड में यह सुनो। हमने 2 करोड़ पे इंटरेस्ट कितना पे किया होगा? सोच के बताना। भाई देखो जिस पीरियड की बात हो रही है, हमारे को लोन देना पड़ेगा 8.75% यानी मबर बोर + 1% पे। बैंक को तो हम इतने परसेंट पर इंटरेस्ट देंगे जिससे कर्जा लिया हुआ है उसे तो मर इधर मर कितना था 76 181 डेज के लिए हम लोन चुकाएंगे तो यहां पे हम इंटरेस्ट पे कर रहे होंगे 9966.67 यहां पर हम इंटरेस्ट पे कर रहे होंगे 86477.78 और यहां पर हमारा सेटलमेंट अमाउंट कितना था जो हमने रिसीव किया था जीरो और यहां पर कितना था 7666.67 यानी हमने कैप का सेटलमेंट रिसीव करा इतना और हमने इंटरेस्ट पे करा है इतना। तो अब 5:43:11 आप मुझे बताइए कि हमारा नेट इंटरेस्ट पेड कितना है? अगर मैं आपसे यह पूछूं कि हमारा नेट इंटरेस्ट पेड कितना है? तो आप यह कहोगे a - b a - b यानी कि 9966.67 - 86477.78 - 0 - 766.67 5:43:50 तो हमारे पास टोटल कितना बचा? 920 और यहां पे तो इतना ही रह जाएगा 8 यह हमारा नेट इंटरेस्ट पेड हो गया। अगर वह हमसे यह पूछता है कि बताओ इफेक्टिव रेट ऑफ इंटरेस्ट कितना है? अगर वह हमसे यह पूछ ले कि इफेक्टिव रेट ऑफ इंटरेस्ट कितना है? तो आप यह कहोगे कि यहां पर हमें ₹9,20,000 का इंटरेस्ट पड़ रहा है ₹ करोड़ पे। ठीक है जी? वो भी 184 डेज के लिए। वो भी कितने दिन के लिए? 184 डेज। तो, हम इफेक्टिवली देख सकते हैं इसे। क्या करें? देखो, यह जो इंटरेस्ट पड़ रहा है इतने पे, यह पड़ रहा है 184 डेज। तो लेकिन मुझे तो एनुअल चाहिए और यह जो इंटरेस्ट पड़ रहा है यह पड़ रहा है ₹2 करोड़ पे लेकिन यह इंटरेस्ट पड़ रहा है 181 डेज के लिए लेकिन 5:44:52 मुझे तो एनुअल चाहिए तो इधर इंटरेस्ट रेट निकाल लो यहां पे देखो 9% आ रहा होगा और यहां पे 8.6% आ रहा होगा। यानी हमने बस यह समझाया कि कैप यूज एक केस में हुई है। एक केस में नहीं हुई है। अगर आप पूरा क्वेश्चन देखो मैंने टैबुलर फॉर्मेट में कराया। आप ऐसे प्रेजेंट करके आ सकते हैं। एग्जाम में पूरे मार्क्स मिलेंगे। घबराने की जरूरत नहीं है। स्टेटमेंट लिख के आनी है तो स्टेटमेंट लिख के भी आ सकते हो। यानी अगर हम कैप यूज़ करते हैं तो हमारा इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट 9% का है। लेकिन अगर कैप यूज़ नहीं होती है, यूज़ ही नहीं हो पाती तो 8.6 से उल्टा है। क्योंकि मार्केट में इंटरेस्ट रेट कम है। जब मार्केट में इंटरेस्ट रेट कम है तो फिर हमें भी कम ही देना है। बोलिए बातचीत आपको क्लियर हो गई है? एक बार और रिकॉल कर देता हूं। मैं एक मिनट स्क्रीन से हट जाता हूं ताकि आप फुल स्क्रीन देख पाएं। सुनिए। हमने 2 करोड़ का लोन लिया। हमारा इंटरेस्ट रेट है Mybar + 1% जो हमें पे करना है। यह तो हमें पे करना ही करना है Mybar + 1 बट इसमें रिस्क ज़्यादा है। तो, हम एक कैप ले रहे हैं कि 8% की कैप ले लेते हैं। यानी अगर मार्केट 5:45:53 रेट 8% से ऊपर गया, तो जितना भी 8% से ऊपर जाएगा, उतने के लिए हमें कंपनसेशन मिल जाएगी। उतने की हमें सेटलमेंट अमाउंट मिल जाएगी। ठीक है? अगर मार्केट में रेट 8 से ऊपर चला गया तो हमें सेटलमेंट मिलेगी। मार्केट रेट 8% से नीचे रहा तो हमें सेटलमेंट नहीं मिलेगी। हमारी कैप सेटलमेंट कितनी है? देखिए 2 करोड़ के लोन पर हमें 75% का कंपनसेशन मिलेगा।75% का कंपनसेशन मिलेगा। बोलिए बातें आपको समझ आ रही है मैंने क्या कहा? अब इसमें 181/360 डेज के लिए हमने इतना ब्याज हमें मिलेगा वापस। तो यह ब्याज हमें मिलेगा। लेकिन हमें मार्केट में पे कितना करना पड़ेगा बैंक को? बैंक को तो हम एक्चुअल रेट पे पे करेंगे। एक्चुअल मब + 1% पे 184 डेज के लिए ब्याज पे करेंगे। और यहां पे 7.6 1% पे करेंगे। और यहां कैप में कुछ नहीं मिलेगा हमें। तो नेट कैप सेटलमेंट नेट इंटरेस्ट कितना है? इतना हमने पे किया, इतना हमने रिसीव किया तो नेट कर दो। इतना हमने पे किया, इतना हमने रिसीव किया तो ये नेट कर दो। और नेट सेटलमेंट से हम इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट भी निकाल सकते हैं। क्या ये बात पूरी समझ आ गई आपको? जी हां। बहुत ही बढ़िया। अगर 5:46:56 आपको कैप समझ आ गया है। एक आधा क्वेश्चन हम फ्लोर का भी देख लेते हैं। आइए। अच्छा यह कैप फ्लोर का कॉम्बिनेशन है। यह कॉलर का क्वेश्चन है। कॉलर मतलब जब ऊपर नीचे दोनों आ जाते हैं। जब ऊपर और नीचे दोनों। यह ऐसे क्वेश्चन मैं क्लास में करा चुका हूं। याद है आपको? ठीक है जी। क्या ये बातें आपको क्लियर है? से यस और नो। आइए जी। वह यह कहता है एबीसी नाम की कोई कंपनी है जिसने ₹1 करोड़ का फ्लोटिंग रेट लोन लिंक किया हुआ है 3 महीने के टी बिल से रिसेट होता है क्वार्टरली हर तीन-ती महीने में बिल रिसेट होता है टू हैेज इट्स इंटरेस्ट कॉस्ट एट अ लो नेट प्रीमियम अब वो कहता है भैया देखो हमें अपना प्रीमियम कम चाहिए तो उन्होंने क्या किया एंटर कर लिया जीरो कॉस्ट कॉलर जीरो कॉस्ट कॉलर क्या होता है देखो जीरो कॉस्ट कॉलर का मतलब होता है कि मैंने एक कैप बाय करी और मैंने जो फ्लोर 5:47:59 है वह सेल कर दिया। क्लास में यह सब पढ़ रखा है मैंने। बस यह सिर्फ प्रैक्टिस क्वेश्चन की तरह पढ़ो इसे। मैं यहां खड़ा हूं। मुझे यह डर है कि इंटरेस्ट बढ़ ना जाए। तो मैंने कैप को बाय कर लिया। कैप ऑप्शन को बाय कर लिया। लेकिन, इसके लिए मुझे प्रीमियम देना पड़ेगा। तो, मैंने क्या किया? मैंने फ्लोर सेल कर दिया। मैंने फ्लोर सेल कर दिया। कि मुझे लगा इंटरेस्ट रेट घटने का मुझे डर थोड़ी ना है। इंटरेस्ट रेट घटेगा तो फ्लोर सेल कर दिया। तो इससे क्या फायदा हुआ कि इधर जो कैप का प्रीमियम था वो इक्वल टू फ्लोर का प्रीमियम रिसीव हो गया। यानी जितना प्रीमियम मुझे फ्लोर से मिला उतना प्रीमियम मैंने कैप में दिया। तो मेरा नेट प्रीमियम ज़ीरो हो गया। मतलब मेरा नेट प्रीमियम कितना हो गया? ज़ीरो। वो यही कह रहा है कि नेट प्रीमियम ज़ीरो है हमारा। क्या आपको क्वेश्चन समझ आया? नेट प्रीमियम जीरो होने का मतलब क्या है? कि कैप का और फ्लोर का जो नेट प्रीमियम आएगा वह जीरो आ 5:49:00 जाएगा। ठीक है? जीरो कॉलर हो गया। यानी क्योंकि हमने बाइंग अ कैप किया है और सेलिंग अ फ्लोर किया है। मतलब हमने 7% का कैप बाय किया और 5% का फ्लोर सेल किया। तो इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब यह हुआ। सोचो दोस्त। अगर इंटरेस्ट रेट 5% से ऊपर गया। ध्यान से सुनो। अगर इंटरेस्ट रेट सॉरी अगर इंटरेस्ट रेट 7% से ऊपर गया तो मुझे सेटलमेंट अमाउंट मिलेगा। मुझे कंपनसेशन मिलेगा। लेकिन अगर इंटरेस्ट रेट 5% से नीचे गया तो मुझे सेटलमेंट पे करना पड़ेगा। क्योंकि मैंने फ्लोर सेल कर रखा है। फ्लोर सेल कर रखा है। तो जिसने फ्लोर खरीदा है उसे मिलेगा पैसा। मेरे को पे करना पड़ेगा। ठीक है सर। और वो भी क्वार्टरली के हिसाब से। तो बोल रहा है पीरियड टू पीरियड। देखो पहला पीरियड तो सबको पता होता है। इसलिए उस दिन की कैलकुलेशन नहीं होती। तो पीरियड टू पीरियड थ्री में यह इंटरेस्ट रेट्स हैं। यह डेज हैं। अब एक बात बताओ जब 7% से ऊपर है। इसे भी नंबर लाइन बना के सॉल्व कर दूं। नंबर लाइन से करा दूं जल्दी हो जाएगा। देखिए अब कहानी को समझिए। और कितने पीरियड हैं? ये सेकंड, ये थर्ड, 5:50:02 ये फोर्थ। लाइफ कितनी थी? 1 साल होगी ना? ठीक है? यह ज़ीरो पीरियड, यह 3 महीना, यह 6 महीना, यह 9 महीना, यह 12 महीना। और बीच में डेज कितने हैं? इन सबके बीच में वह कह रहा है 9191 डेज ही हैं तीनों में। तो हमें डेज का भी पंगा नहीं है। तीनों में जैसे पिछले क्वेश्चन में तो एक अलग-अलग डेज थे ना। 1801 184 ऐसे था यहां वो भी बराबर है। अच्छा अब एक बात बताओ हमने कैप बाय किया है कितने परसेंट पे? 7% पे। तो अगर इंटरेस्ट रेट 7% से ऊपर गया तो हमें कैप कंपनसेशन मिलेगा। और हमने फ्लोर सेल किया है कितने परसेंट पे? 5% पे। तो अगर इंटरेस्ट रेट 5% से नीचे चला गया तो हमें कंपनसेशन देनी पड़ेगी। बात भी सही है। हमारा अमाउंट कितना था? वो यह कहता है जी अमाउंट कितना था? 1 करोड़ का था। क्या हमने कोई ऑप्शन 5:51:03 प्रीमियम दिया? नहीं। क्योंकि कैप और फ्लोर का ऑप्शन प्रीमियम आपस में कट रहा है। ज़ीरो हो रहा है। हम उसको शो ही नहीं करेंगे। ठीक है? उसकी टेंशन ही खत्म हो गई। आइए क्वेश्चन पढ़ते हैं। फर्स्ट जो सेकंड पीरियड है उसमें 7.5% का ब्याज है। अगर एक्चुअल इंटरेस्ट रेट कितना है? 7.5% तो अब एक बात बताइए कैप आप यूज़ करोगे? क्या आप कैप को एक्सरसाइज करोगे? यस। क्या जो सामने वाला बंदा है वह फ्लोर को एक्सरसाइज करेगा? नो। फ्लोर को एक्सरसाइज नहीं कर पाएगा क्योंकि उसके पास 5% का फ्लोर है। मार्केट रेट ऊपर चला गया। मार्केट रेट ऊपर चला गया तो वह फ्लोर एक्सरसाइज करके क्या करेगा? ठीक है ना? यहां पे इंटरेस्ट रेट कितना है? सेकंड बारी में 4.5 तो क्या कैप यूज़ होगी? नो। फ्लोर यूज़ होगी? यस। वो 1/2% हमसे मांगेगा। क्योंकि 5% से नीचे गया ब्याज। 5:52:03 तो वो 5% हमसे मांगने वाला है। और थर्ड पीरियड में क्या हो रहा है? 6%। 6% तो बीच में आ गया। तो कैप के लिए भी नो और फ्लोर के लिए भी नो। दोनों ही यूज़ नहीं होंगी। ना कैप यूज़ होगी ना फ्लोर यूज़ होगी। दोनों में से किसी को कंपनसेशन नहीं मिलेगा। आइए क्वेश्चन पढ़ते हैं। फॉर ईच पीरियड कैलकुलेट द कैप सेटलमेंट कितना रिसीवबल है? फ्लोर सेटलमेंट सबके लिए निकालो। तो देखिए पहले कैप सेटलमेंट यहां पे आप बताओ कैप का कितना सेटलमेंट मिलेगा? देखो इंटरेस्ट हमने कैप बेची हमने खरीदी हुई है 7% पे और इंटरेस्ट 1/2% ऊपर चला गया तो बचा हुआ 5% हमें मिलेगा। ठीक बात है। तो ऐसे समझो कि 1 करोड़ के लोन पे हमें 7.5% - 7% यानी5% मिलेगा वो भी 91 डेज के लिए। तो कैप का सेटलमेंट कितना होगा बताइए? इंटरेस्ट निकाल के बताइए। 5:53:05 188 सॉरी 12 638.89 यह हमारे को कैप का सेटलमेंट रिसीव होगा। यहां पे ज़ीरो यहां पे ज़ीरो क्योंकि यहां तो कैप यूज़ ही नहीं हो रही। अच्छा जी। फ्लोर सेटलमेंट कितनी है जो पेड होगी? यहां तो ज़ीरो होगी। यहां पर फ्लोर सेटलमेंट होगी। ₹1 करोड़ पे हमें 5% - 4.5% यानी आधा% पैसा उसे देना पड़ेगा 91 डेज के लिए। तो कितना पैसा देना पड़ेगा?5% पे फिर से उतना ही देना पड़ेगा। कितना बन रहा है? बट इस बार यह पेएबल है। पेएबल रिसीवेबल नहीं है। पेएबल है हमारे लिए। ठीक है जी। और लास्ट केस में तो दोनों ही जीरो हैं क्योंकि ना कैप यूज़ हो रही है ना फ्लोर यूज़ हो रही है। दोनों ही खत्म हो गए। पहला पार्ट हमारा ए पार्ट हमारा सॉल्व हो गया। 5:54:06 कैलकुलेट दी नेट सेटलमेंट इन ईच पीरियड। नेट सेटलमेंट। नेट सेटलमेंट मतलब क्या होता है? एक्चुअल इंटरेस्ट कितना है? और फिर इस सेटलमेंट को एडजस्ट करने के बाद नेट इंटरेस्ट कितना है? इस सेटलमेंट को एडजस्ट करने के बाद इंटरेस्ट कितना है। ठीक है जी। तो आइए हमारा नेट सेटलमेंट निकाल लेते हैं एक-एक करके कि कितनी कितनी हमारी नेट कॉस्ट बैठती है आफ्टर कॉलर। यहां पर मार्केट का रेट एक बात आई है। इंटरेस्ट कितना होगा? एक्चुअल इंटरेस्ट कितना होगा? 1 करोड़ का 7.5% जाएगा 91 डेज के लिए। यहां 1 करोड़ पे 4.5% जाएगा वो भी 91 डेज के लिए। यहां पे 1 करोड़ पे 6% जाएगा वो भी 91 डेज के लिए। तो आप मुझे तीनों में इंटरेस्ट बता दीजिए कितना कितना आता है हमारा तीनों केसेस में इंटरेस्ट बता दीजिए लिखने की भी जरूरत नहीं है सब स्यूशन मैं आपको दे ही दूंगा बेटा आप चिंता क्यों कर रहे हो बताओ कितना आया एक्चुअल इंटरेस्ट कितना जा 5:55:07 रहा है वो जा रहा है 189 583.33 डेट पे 1 3750 और 6% के रेट पे कितना आ रहा है बेटे 151 666.67 ये इंटरेस्ट एक्चुअल में हमने पे किया लेस कॉलर सेटलमेंट बेटा कॉलर सेटलमेंट मतलब कैप और फ्लोर दोनों का कंबाइंड सेट सेटलमेंट दिखा दें। यहां पे हमने इतने पैसे रिसीव करें हैं। रिसीव मतलब हमारी कॉस्ट कम हो गई। यहां पर इतने पैसे हमने और पे करे हैं। यहां पे कोई भी सेटलमेंट नहीं है। 5:56:07 तो नेट इंटरेस्ट पेएबल कितना होगा हमारे लिए? यहां पे इंटरेस्ट नेट हो गया 176944 44 और यहां पे इंटरेस्ट कितना पेएबल हो गया? जी इन दोनों को अगर ऐड कर देते हो तो ये आ गया 1 26 388.89 और यहां पे इतना ही हो जाएगा 15166.67 तो ये इफेक्टिव इंटरेस्ट पेड हो गया। अब इसकी परसेंटेज निकालनी है तो वो भी निकाल लो। बोलो बात समझ आ गई कैप फ्लोर की। देखो इस टॉपिक को पढ़ना। ये सब ऐसे क्वेश्चन मैंने दो-दो क्लास के अंदर भी कराए हुए हैं। कैप का भी, फ्लोर का भी, कैप और कॉलर का भी करा रखे हैं। ये उसी के प्रैक्टिस बेस्ड क्वेश्चन है। अब ये क्यों पढ़ाएं सर? क्योंकि मुझे स्वैपेशन पढ़ाना है। स्वैपेशन इसी टॉपिक पे बेस्ड है। देखो अब स्वैपेशन पता है क्या है? कि स्वैप करने की ऑप्शन। अगले क्वेश्चन पे चलते 5:57:08 हैं। ये सब तो आप पढ़ लोगे, अब समझ आ जाएगा थर्ड पार्ट भी। स्वैपेशन पे आइए। देखिए, स्वैपेशन का मतलब क्या होता है? तो स्वैपेशन का मतलब होता है कि इंटरेस्ट के जो रेट है उसकी स्वैपेशन का मतलब स्वाइप करने का ऑप्शन। क्या मतलब हुआ सर इस बात का कि स्वैप करने का ऑप्शन। देखो स्वाइप क्या होता है? एक बारी रिकॉल करते हैं। स्वाइप का मतलब होता है कि मान लेते हैं दो पार्टीज हैं। मान लो मैं हूं और कोई बैंक है। मैंने उसके साथ स्वैप साइन किया है। स्वैप साइन करने का मतलब यह है कि भाई मैं आपको फिक्स्ड रेट का ब्याज दूंगा। आप मुझे फ्लोटिंग रेट का ब्याज देना। या फिर वाइसवर उल्टा भी हो सकता है कि आप मुझे फ्लोटिंग रेट मैं आपको फ्लोटिंग रेट पर ब्याज दूं। आप मुझे फिक्स रेट पर ब्याज देना। ऐसा हम किसी के साथ सेटलमेंट कर लेते हैं। ठीक है? तो ये स्वैप है। पर एक बात बताओ हम आज स्वैप कर लें। पता चला बाद में हमारे लिए स्वैप फेवरेबल ना हो। तो हमें डर लगता है इस बात का। हां। तो इसलिए हम स्वैप के लिए पहले ऑप्शन बुक करते हैं कि मेरे पास एक ऑप्शन है कि मैं स्वैप को फ्यूचर में यूज करूंगा कि नहीं करूंगा। देखो इमेजिन करो। मैं यहां पर खड़ा हूं। 5:58:08 जीरो पीरियड पर। ठीक है? मुझे आज से 6 महीने बाद एक लोन चाहिए 3 साल के लिए। और मान लो तीन किश्तें देनी है। 1 साल, 2 साल, 3 साल। मुझे एनुअल ब्याज देना होगा उस पे। लेकिन यह लोन स्टार्ट कब होगा? आज से 6 महीने बाद। स्टार्ट कब होगा? आज से 6 महीने बाद स्टार्ट होगा। ठीक? अब आयुष ध्यान देना जरा क्या बोल रहा हूं मैं? एक लोन है जो आज से 6 महीने बाद स्टार्ट होगा और 6 महीने बाद मुझे उसे 3 साल तक चलाना है लोन को। मान लो कि मैं फ्लोटिंग रेट लेने वाला हूं तो मुझे इस बात का डर होगा कि यार फ्लोटिंग रेट बढ़ ना जाए। तब आपका दिल करेगा कि फ्लोटिंग रेट का मैं इधर स्वाइप कर लेता हूं। स्वैप का मतलब यह है कि मैं आपको फ्लोटिंग रेट दूंगा। मतलब बेसिकली आप मुझे फ्लोटिंग रेट चुकाना। मैं आपको फिक्स्ड रेट चुकाऊंगा। तो ये इस पीरियड का स्वाइप हो गया। बोलिए हां। हां सर। लेकिन एक बात बताओ अगर उल्टा हो गया। अगर फ्लोटिंग रेट कम हो गया तब तो मुझे मुझे वह स्वैप नुकसान में पड़ेगा। तब तो मेरा नुकसान। तो इसीलिए मैं यहां पे एक ऑप्शन बुक कर रहा हूं कि मैं फ्यूचर डेट 5:59:12 पे स्वैप को यूज करूंगा या नहीं करूंगा। अच्छा स्वैप तो बाद में आएगा पर पहले स्वैप की ऑप्शन आ रही है। तभी इसे स्वैप ऑप्शन बोलते हैं। स्वैपेशन मतलब स्वैप की ऑप्शन खरीदना। आइए सर पढ़ते हैं। यानी हमारे पास होल्डर के पास एक राइट आ जाता है। होल्डर मतलब हम जिसने ऑप्शन होल्ड किए। एक राइट आ जाता है। बट एक ऑब्लिगेशन नहीं आती कि हम चाहे तो इंटरेस्ट रेट स्वैप में फ्यूचर डेट पे फ्यूचर अमाउंट के लिए फिक्स्ड रेट या फ्लोटिंग रेट के हिसाब से एंटर कर सकते हैं। यह भी एक ऑप्शन की तरह है। यह बयर को राइट दे बयर को प्रीमियम देना पड़ता है और सेलर को प्रीमियम रिसीव होता है। यह भी एक ऑप्शन है जो फॉरवर्ड रेट इंटरेस्ट की तरह। बट इसमें फर्क यह है कि इसमें स्वैपिंग हो रही होगी। फ्यूचर डेट पर फिक्स्ड रेट देकर फ्लोटिंग रेट ले रहे होंगे या उल्टा हो रहा होगा। ठीक है जी। अब दो तरह के स्वैपेशन होते हैं। ये आपको याद करने पड़ेंगे। एक होता है फिक्स्ड पेयर स्वैपेशन और एक होता है फिक्स्ड रेट रिसीवर स्वैप। देखो किसी को 6:00:13 तो नाम देना पड़ेगा। तो यहां पर नाम इस तरीके से दिया जाता है। आप फिक्स रेट को सोचते हो कि मेरे को फिक्स्ड रेट पे करना है या फिक्स्ड रेट रिसीव करना है। इसके हिसाब से नाम डिसाइड हुआ है। फिक्स्ड रेट पेयर ऑप्शन एंड स्वैपेशन एंड फिक्स्ड रेट रिसीवर स्वपेशन। ठीक है जी? जो फिक्स्ड रेट पेयर है उसके लिए कॉल स्वैपेशन बोलते हैं उसे। और फिक्स्ड रेट रिसीवर के लिए पुट स्वैपेशन होती है। ठीक है? यह क्या करेगा? पे करेगा फ़र्स्ट लेग। फ़िक्स्ड लेग देगा। फिक्स्ड लेग पे कर रहा होगा क्योंकि फिक्स्ड रेट पेयर है और फ्लोटिंग रेट रिसीव करेगा स्वैप में। अगर स्वैप यूज़ किया तो बात की गहराई को समझो। अगर स्वैप यूज़ किया तो अगर स्वैप यूज़ ही नहीं किया फिर बात खत्म। अगर स्वैप यूज़ ही नहीं किया फिर काहे बात की स्वैपेशन? फिर तो ऑप्शन ही हमने एक्सरसाइज नहीं करी तो स्वैप भी नहीं होगा। ठीक है? और ये उल्टा है। चलिए फिर ये सेटलमेंट डेट्स हैं। ये सब बातें हमें पता है। सीधा हम क्वेश्चन पे आते हैं। आइए। एक्स व जेड कॉरपोरेशन एंटीिसिपेट अभी वह सोच रहा है अभी किया नहीं है रेजिंग अ फ्लोटिंग रेट लोन ऑफ 10 करोड़ इन सिक्स 6:01:16 मंथ्स टाइम फॉर अ थ्री ईयर पीरियड अच्छा यानी अगर सर हम बात करें कि आज आप सोच रहे हो आज आप सोच रहे हो ध्यान से समझो क्वेश्चन को कोई कंपनी है वह आज यह सोच रही है कि 6 महीने बाद मुझे लोन लेना है वह 3 साल तक लोन चलेगा यानी यह जीरो पीरियड है। यह सिक्स मंथ बाद लोन स्टार्ट होगा और वो 1 साल, 2 साल और 3 साल तक उसकी पेमेंट जाएगी आगे। ठीक है सर। वो यह कहता है हमें 10 करोड़ का लोन लेना है 6 महीने बाद 3 साल के लिए। टू प्रोटेक्ट इटसेल्फ अगेंस्ट अ पॉसिबल राइज़ इन द इंटरेस्ट रेट बिफोर इट बोरो। अभी तो हमने बोरो ही नहीं किया। बोरो ही 6 महीने बाद करेंगे। पता चला आज हम सोच रहे हैं 6 महीने बाद रेट ना बढ़ जाए। तो xyz कॉरपोरेशन ने बाय कर लिया एक 6 मंथ्स का इनू 3 ईयर मतलब 6 महीने बाद वह स्टार्ट होगा और 3 साल तक चलेगा। ऐसा पेयर स्वैप पेयर स्वैप क्या होता है? देखो पेयर स्वैप 6:02:18 में मैंने क्या बताया था? पेयर स्वैप का मतलब होता है कि आप फिक्स रेट पे करोगे और फ्लोटिंग रेट रिसीव करोगे। जिसमें नोशनल अमाउंट है 10 करोड़ का। स्ट्राइक प्राइस है फिक्स्ड रेट 7.5% सेटल्ड एनुअली और अप फ्रंट प्रीमियम पे कर रहे हो ₹9 लाख। यानी अब आप समझना यहां पे आपका लोन यहां पे स्टार्ट होगा 10 करोड़ का। लोन तो 3 साल 3 6 महीने बाद स्टार्ट होगा। पर आप प्रीमियम यहीं पे पे कर रहे हो। आप प्रीमियम पे कर रहे हो 9 लाख का। ठीक है? और इस ऑप्शन के लिए प्रीमियम यानी जो आपने ऑप्शन प्रीमियम दिया है बेसिकली मैं इसे ऑप्शन प्रीमियम बोल सकता हूं। वह आपने इस बात के लिए दिया कि 3 महीने 6 महीने बाद मुझे स्वैप लेना है कि नहीं लेना यह सोचूंगा। हो सकता है ना ही लूं अगर फेवरेबल नहीं होगा तो। ठीक है सर। अंडरलाइन स्वैप 10 का 3 साल तीन एनुअल एक्सचेंजेस होंगी। एट द एंड ऑफ़ सिक्स मंथ्स। द मार्केट फिक्स रेट फॉर दी 6:03:19 फ्रेशली थ्री ईयर स्वैप हैज़ राइज़न टू 8.4% यानी यहां पर हमने जो स्वैप ले रखा है, स्वैप बुक जो किया है, वह किस रेट पर किया है? वह कहता है 7.5% पर बुक किया है। मतलब मैंने 7.5% के रेट से स्वैप बुक किया है कि भैया मेरे लिए 3 साल 7.5% का मैं आपको फिक्स रेट दूंगा और आप मुझे फ्लोटिंग रेट दोगे। पर इस दिन जो स्वैप का रेट हो गया है वो यहां पे कितना हो चुका है? 8.4%। अबे तेरी की 8 4% जैसे ही हम मार्केट में गए और हमें पता लगा कि अगले 3 साल का स्वैप अब 8.4% हो रखा है तो हम यहां जोर-जोर के हंसने लगेंगे। बताओ खुश होने लगेंगे। बताओ क्यों खुश होने लगेंगे? रीज़न दो। समझो मेरी बात। मैंने आज ₹9 लाख का प्रीमियम देकर 3 महीने बाद के स्वैप की ऑप्शन को बुक किया है। दोबारा सुन लो। स्वैप की ऑप्शन को बुक किया है। स्वैप को बुक नहीं किया। क्या? मैं यह कह रहा हूं 6:04:20 मैंने स्वैप 3 महीने बाद का बुक कर लिया। मुझे देना ही पड़ेगा 3 साल तक स्वैप क्या मुझे 7% देना ही पड़ेगा क्या यह बात हो रही है नहीं यह बात नहीं हो रही हमने स्वैप ऑप्शन बुक करी है स्वैप अगर स्वैप बुक किया होता तो प्रीमियम थोड़ी ना देते क्या स्वैप में प्रीमियम देते हैं नहीं स्वैप तो बस ये होता है कि बस जब ड्यू डेट्स होती तो एक्सचेंजेस कर रहे होते स्वैप प्रीमियम इसलिए दिया क्योंकि हमने स्वैप ऑप्शन लिया है हमने ये ऑप्शन लिया है कि आज से 3 साल 3 6 महीने बाद हम चाहेंगे तो 75% का स्वैप एक्सरसाइज करेंगे नहीं अगर मान लो मार्केट में रेट 6.4 हो जाता तो क्या मैं स्वैप यूज़ करता नहीं फिर मैं स्वैप को लैप्स होने देता। फिर मैं कहता अरे मार्केट में ही अगर मार्केट का इंटरेस्ट रेट 6.5% पे स्वैप नया मिल रहा तो नया स्वैप लेता। फिर यह वाला स्वैप क्यों यूज़ करता? इसे इग्नोर कर देता। नया डॉक्यूमेंट साइन करता। पर यहां पे क्योंकि हमारे लिए फायदेमंद हो गया। 9% का फायदा हो गया आपको। आपको समझ आया आपने 0.9% का फायदा कमा लिया। कैसे? आपने स्वैप बुक किया हुआ है 7.5% फिक्स पे लेकिन मार्केट में स्वैप चल रहा है 8.4% तो आपका तो बल्लेबले हो गई। ठीक है? आगे बढ़ते हैं। एनुअल एप्लीकेबल रेट इतने हैं यह। अब सर 6:05:21 इस क्वेश्चन में डिस्काउंट रेट क्यों दे रहा है? पहले तो किसी क्वेश्चन में डिस्काउंट रेट नहीं दिया। बेटा पहले जो सेटलमेंट थी वो सेटलमेंट डेट पे ही सेटलमेंट निकालनी थी। मतलब जैसे जो आपकी ड्यू डेट्स थी आप उसी पे सेटलमेंट कर रहे थे। बस वहीं का अमाउंट निकालना था। अब इस क्वेश्चन में आपको ये देखना होगा कि ऑप्शन खरीदने पे फायदा हुआ है कि नहीं। तो आप क्या करोगे? आप जो फ्यूचर की सेटलमेंट्स होंगी उनकी प्रेजेंट वैल्यू निकालोगे और प्रेजेंट से देखोगे कि उसकी प्रेजेंट वैल्यू कितनी है और हमने 9 लाख दिया तो क्या हमें फायदा हुआ कि नुकसान हुआ वह देखेंगे। इस क्वेश्चन में इसीलिए प्रेजेंट वैल्यू दी है उन्होंने। ठीक है? आ जाओ भाई। वो कह रहा है स्टेट विद रीज़ वेदर X व जेड कॉरपोरेशन शुड एक्सरसाइज अ स्वैपेशन। हां भैया। हां। क्योंकि देखो आप एक पेयर स्वैपेशन है। पेयर स्वैपेशन मतलब आपको फिक्स रेट पे करना है। तो अगर आपको फिक्स रेट पे करना है तो फिर अगर मार्केट में फिक्स रेट बढ़ गया है और आपको फिक्स फिक्स रेट कम मिल रहा है तो आपको ऑप्शन एक्सरसाइज करनी चाहिए। आपको ऑप्शन एक्सरसाइज करनी चाहिए। फायदे में आपकी ऑप्शन। ठीक है जी। अब वो कहता है जी व्हाट इज द एनुटी फैक्टर? कंप्यूट दी यह तो दिए ही हुए थे क्वेश्चन में। कुछ करना ही नहीं था। इन तीनों को ऐड कर देना था। टोटल 6:06:22 एनुअटी फैक्टर आ गए। फिर वो कहता है जी हमारी ग्रॉस सेटलमेंट अमाउंट कितनी है? ग्रॉस सेटलमेंट अमाउंट मतलब हमें नेट पैसा कितना ग्रॉस में कितना मिलेगा? देखो 10 करोड़ का लोन है और हमें इतने परसेंट यानी 0.9% का फायदा मिलेगा। वो भी तीन अलग-अलग पेमेंट्स पे। मैं इसे ना इकट्ठा दिखाना नहीं चाहता। मैं इसे अलग-अलग दिखाना चाहता हूं। इधर आओ। सेटलमेंट डेट पे देखो। मुझे आप बताओ हमें हर सेटलमेंट डेट पे कितना-कितना पैसा मिलेगा? इधर देखो यहां पर हमें 8.4% - 7.5% मिलेगा वो भी 1 करोड़ पे 1 साल के लिए। यहां पे भी हमें 1 करोड़ पे इतना ही पैसा मिलेगा। यहां भी हमें 1 करोड़ पर 1 करोड़ पर 4 8.4% माइनस 7.5% मिलेगा। तो हमें कितना पैसा मिलेगा? हर बार हर बार अमाउंट कितना मिल रहा होगा? अमाउंट कैलकुलेट करके देना बेटा जरा। 6:07:23 वन 1 करोड़ था, 10 करोड़ था। एक बार यह भी देख लो। मैं 1 करोड़ पढ़ रहा हूं। नहीं 10 करोड़ था सॉरी। 6:07:40 10 करोड़ का नस लाख होता है यानी हर बार मुझे ₹9 लाख देगा वो बैंक सेटलमेंट डेट पे और यह स्वैप की सेटलमेंट नहीं है। यह अभी ऑप्शन की सेटलमेंट है। स्वैप की तो फिक्स्ड और फ्लोटिंग अलग होगी। वह तो दिया ही नहीं उसने ब्याज रेट कि फिक्स्ड कितना है? फ्लोटिंग कितना है। यह स्वैप की फिक हम फिक्स नहीं कर रहे। यह ऑप्शन जो स्वैप ऑप्शन में ऑप्शन है उसकी सेटलमेंट अमाउंट है। अब ये मुझे कब-क मिलेगी ये मान लो मिलेगी इधर इधर इधर। तीन बारी ही मिलेगी। है ना? तो कहता है ईयर वन, ईयर टू ईयर थ्री। तो ये पैसे मिल रहे होंगे ईयर वन के एंड पे। अच्छा मैंने सिक्स मंथ्स के एंड पे लिख दिए। मुझे इसे उठा के आगे ले जाना चाहिए। यह मिलेगा एक साल के एंड पे, 2 साल के एंड पे, 3 साल के एंड पे। तो अब इस पैसे की हमें प्रेजेंट वैल्यू निकालनी पड़ेगी। इन सब पैसों की प्रेजेंट वैल्यू निकाल लो। पीवी फैक्टर उसने आपको दे ही रखा है। तो उसमें हम अगर मगर कर नहीं सकते। इन पीवी 6:08:41 फैक्टर्स को कंसीडर करो। तो जो आपको ₹90 लाख ₹9 लाख मिल रहे हैं उसको पीवी फैक्टर तीनों के साथ ऐड मल्टीप्लाई करके ऐड कर दिया। जो हमारा आंसर आया वो ये फिगर आई ₹361000 और हमने प्रीमियम कितना पे किया था? ₹9 लाख। हमें मिल कितना रहा है? 2361000 यानी हमें कुल मिलाकर इतने का फायदा हो रहा है। यानी ऑप्शन स्वैप का ऑप्शन बुक करने से इतने की कमाई हुई है। यह स्वैप की सेटलमेंट नहीं है। आप इसमें स्वैप को जबरदस्ती मिक्स मत करो कि स्वैप में क्या होगा? स्वैप में तो 3 साल आगे अपने आप सेटलमेंट होती रहेगी। ये तो स्वैप का जो ऑप्शन बुक किया है, यह उसका सेटलमेंट अमाउंट है कि इसका मतलब पता है क्या है? अगर मैंने यहां सेटल स्वैप बुक किया तो मुझे 7.5% का स्वैप मिल गया जो स्टार्ट ही आज से 6 महीने बाद होगा। लेकिन अगर मैं 6 महीने तक वेट करता 6 महीने बाद स्वैप बुक करने जाता तो मुझे स्वैप ही 8.4% का मिलता। तो यानी स्वैप के रेट में ही 9% की कमाई हो गई मेरी। तो 9% ऑफ़ 10 करोड़ होता है ₹9 लाख। तो मुझे ₹9 लाख हर हर साल के एंड पे मिलेंगे। फिर मैंने उसकी प्रेजेंट वैल्यू निकाल दी। 6:09:42 ठीक है जी। बहुत ही बढ़िया। और एक्चुअल में यह जो प्रेजेंट वैल्यू फैक्टर्स हैं ना यह 1.5 साल, 2ाई साल और 3 साल के होंगे। क्योंकि मुझे तो जीरो पीरियड पर लाना है। मुझे तो इसे 1 1/2 साल तो ये जो प्रेजेंट वैल्यू फैक्टर है ये ऑलरेडी 1 1/2 साल, 2 1/2 साल और 3 साल मतलब 1.5 ईयर, टू 2.5 ईयर और 3.5 ईयर के निकले हुए होंगे। हमें टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। वो सेट जो पीवी फैक्टर हैं वो ऑलरेडी सोच समझ के उसने निकाले होंगे। क्या ये बात क्लियर हो गई आपको? बहुत बढ़िया। फिर वो कहता है नेट गेन कितना है? तो नेट गेन भी मैंने आपको बता ही दिया कि भैया हमने प्रीमियम दिया था ₹ लाख का। हमें फायदा मिल गया ₹23 लाख का। तो हमें ₹1,61,000 का फायदा हो गया। ठीक है जी। अब ये इससे उल्टा क्वेश्चन है। यह बिल्कुल इसी का उल्टा क्वेश्चन है। इसमें पुट स्वैपेशन है। जैसे कॉल थी वैसे पुट कर दी। हमने बिल्कुल उल्टी ऑप्शन कर दी। तो इसे बिल्कुल रिवर्स तरीके से सोचना है। यह आप खुद सोच पाएंगे। नंबर लाइन बना लेना। बिल्कुल वैसे ही सोचना है। यानी स्वैपेशन का क्वेश्चन अगर आएगा सुन लो मेरी बात। तो वो एक्चुअली में एक ऑप्शन का 6:10:45 क्वेश्चन होगा रेदर देन स्वैप क्योंकि स्वैप तो 3 साल बाद में आएगा ना वो तो स्वैप का सेटलमेंट तो अलग से होगा कि भाई हम फिक्स दे रहे हैं फ्लोटिंग दे रहे हैं उसमें क्या सेटलमेंट गेन उसमें तो स्वैप का मतलब यह है कि भैया मेरे को फ्लोटिंग रेट पे रिसीव होगा फिक्स दूंगा मैं या उल्टा हो रहा होगा वो तो एक अलग ट्रांजैक्शन साइकिल है वो तो एक अलग ट्रांजैक्शन सल है। यहां पे मैं बस यह बोल रहा हूं कि भाई मैंने जल्दी स्वैप बुक किया और वह भी 7.5% पे जबकि मार्केट में बाद में स्वैप 6 महीने बाद 8.4% पे है। तो मैंने जल्दी बुक करके कितने का अपने लिए फायदा गेन किया वो निकालो। तो यानी 8.5 और 7.5 का गैप निकाल के हमने ये बताया कि हमें स्वैपेश से कितना फायदा हो रहा है। ठीक है जी। अगर ऐसा क्वेश्चन आएगा एग्जाम में तो इसी अप्रोच पे बेस्ड आएगा। एंड आई होप कि ये अप्रोच आपको क्लिक कर गई है। अब बट मैं फिर से बताऊं यह उन्हीं बच्चों को समझ आ रहा है जिन्होंने इंटरेस्ट रेट रिस्क मैनेजमेंट मेरे साथ अच्छे से पढ़ रखा है। सारे फार्मूलाज़ कैप के, फ्लोर के, स्वैप के, ऑप्शंस के सब डिस्कस किए हुए हैं क्लास के अंदर हमने। सबके दो-दो 6:11:45 तीन-तीन क्वेश्चन हमने प्रैक्टिस किए हुए हैं। वो क्वेश्चन करने के बाद ही ये क्वेश्चन देखना तब समझ आएगा वरना कम समझ आएगा। ठीक है जी? चलिए, एंजॉय। आइए दोस्तों। अब जो अनेक्सचर हम पढ़ रहे हैं, वह बॉन्ड वैल्यू्यूएशन चैप्टर का है। बॉन्ड वैल्यू्यूएशन के यह कुछ एडिशनल क्वेश्चंस हैं जो मैं चाहता हूं आप पढ़ें। जैसे आपने बॉन्ड वैल्यू्यूएशन चैप्टर में थ्योरेटिकली वारंट के बारे में पढ़ा है। लेकिन वारंट के प्रैक्टिकल क्वेश्चन नहीं पढ़े हुए हैं। मॉड्यूल में नहीं है। तो मैं वारंट के प्रैक्टिकल दो क्वेश्चन बनाकर लाया हूं आपके लिए। ये कराना चाहता हूं आपको पहले। ठीक है जी। देखिए वारंट का मतलब क्या होता है? और ये कन्वर्टेबल डिबेंचर से अलग कैसे हैं? पहले सुनो। कन्वर्टेबल डिबेंचर क्या होता कि आपने आज डिबेंचर इशू करे और आपने आज डिबेंचर इशू करे ज़ीरो पीरियड पे और 5 साल बाद आप यह कहते हो कि भैया एक राइट है कि या तो हम डिबेंचर को शेयर में कन्वर्ट करा लें या फिर डिबेंचर को रिडीम करा लें। याद आया आपको मैंने क्या कहा? यानी क्या डिबेंचर ऑटोमेटिकली शेयर बन जाता है? नहीं। ऑटोमेटिकली नहीं बनता। दो चार पांच साल बाद जब कन्वर्ज़ पीरियड उसकी ओवर हो जाती 6:12:45 है। मतलब जब उसकी ब्लॉक पीरियड ओवर हो जाती है। उसके बाद आप उसे चाहो तो कन्वर्ट करा सकते हो। याद आया आपको? यानी उसे आप चाहो तो कन्वर्ट करा सकते हो। यह होता है कन्वर्टेबल डिबेंचर। लेकिन वारंट एक अलग चीज है। वारंट का मतलब है कि एक डिट एक कागज लगा होगा अलग से। और यह जो कागज है यह वारंट है। यह अलग से बिक सकता है। इस वारंट पे यह लिखा होता है कि जिसके पास यह वारंट है, मान लो वो पांच शेयर खरीद सकता है @ @ ऑफ़ 100। मतलब यह एक तरीके का फ्यूचर में शेयर खरीदने का अधिकार है। बोलो मैंने क्या कहा? वारंट एक फ्यूचर में शेयर खरीदने का अधिकार है। यह इस बात पर बेस्ड नहीं है कि पुराने शेयर डिबेंचर रिडीम होंगे तो यह शेयर मिलेंगे। ऐसा नहीं है। यह अपने आप में एक अलग कागज है। एक अलग डॉक्यूमेंट है। एक अलग पेपर है। एक सेपरेट पेपर है व्हिच कैन बी इवन ट्रेडेड सेपरेटली। मतलब इसको मार्केट में अलग से ट्रेड किया जा सकता है। आप यह सोचो मैं आपको एक पेपर पे इमेजिन करो। मैं आपको एक पेपर पे लिख के दे रहा हूं कि आप आज से 3 साल बाद कभी भी 3 साल के बाद कभी भी आप 6:13:48 मुझसे पांच शेयर खरीद सकते हो ₹100 के। तो यानी टाइम पीरियड भी बता दिया, नंबर ऑफ शेयर्स भी बता दिए, प्राइस भी बता दिया और यह कागज आपको बेच दिया मैंने। दिस इज़ वारंट। अब यह वारंट मान लो कि आज से 3 साल बाद शेयर का प्राइस बढ़ता गया, बढ़ता गया, बढ़ता गया। अब शेयर का प्राइस मार्केट में चल रहा है ₹300। लेकिन आपको वह शेयर मिलेगा ₹100 में। तो आपके तो उस वारंट की वैल्यू बढ़ गई ना। वो वैलएबल हो गया। वो जो कागज का टुकड़ा है वो आपके लिए वैलुएबल हो गया। सो दिस इज हाउ वारंट्स आर इवैलुएटेड। क्या यह बात आपको समझ आई? वारंट क्या होते हैं? वारंट एक राइट है जो एंटाइटल करता है होल्डर को जिसके पास भी वो कागज है टू सब्सक्राइब फॉर द इक्विटी शेयर ड्यूरिंग अ स्पेसिफिक पीरियड एट अ स्पेसिफिक रेट। यानी एक स्पेसिफिक पीरियड के बाद स्पेसिफिक रेट पे आप खरीद सकते हो। वारंट्स आर जनरली अटैच टू डिबेंचर या बॉन्ड। मतलब ये डिबेंचर या बॉन्ड के साथ अटैच होते हैं। मतलब ये बॉन्ड को कन्वर्टेबल नहीं बना देते कि आपको बॉन्ड वापस करना पड़ेगा तब शेयर मिलेंगे। ना ये अलग से एक राइट है। तो ये एक तरीके से आप ऐसे समझो आप बचपन में पेंसिल बॉक्स खरीदते थे। कभी-कभी आपने पेंसिल बॉक्स के ऊपर 6:14:48 देखा था एक पेंसिल लगी हुई मिलती थी। यानी एक एक्स्ट्रा गिफ्ट लगा हुआ मिलता था ताकि आप अट्रैक्ट हो जाओ उस पेंसिल बॉक्स को खरीदने के लिए। होता था ना जब हम छोटे बच्चे होते थे वही वाला पेंसिल बॉक्स खरीदते थे जिसके ऊपर एक एक्स्ट्रा पेंसिल लगी होती थी। यानी एक एक्स्ट्रा गिफ्ट दे दिया। वैसे ही एक एक्स्ट्रा गिफ्ट है। यानी मान लो मेरी एक कंपनी है। मेरी कंपनी के डिबेंचर कोई खरीदने को तैयार नहीं हो रहा। तो मैंने कहा अरे क्या दिमाग लगाऊं? क्या दिमाग लगाऊं? चलो साथ में एक वारंट अटैच कर देता हूं। यानी आपको 5 साल बाद मेरे को डिबेंचर वापस करने की जरूरत नहीं है। बट एक वारंट एक अलग से आपको राइट दे दिया कि आज से 3 साल बाद आप मेरे पास आकर मेरे शेयर ₹100 में खरीद सकते हो। हो सकता है मेरी कंपनी तब तक डूब गई हो। ₹100 का शेयर भी ना हो। ₹100 का शेयर नहीं तो वारंट वैल्यूलेस हो जाएगा। लेकिन अगर मेरा शेयर बढ़ गया। अगर मान लो मार्केट में मेरी शेयर कंपनी का ऊपर चला गया तो वारंट वैल्यूुएबल हो जाएगा आपके लिए। तो वारंट इसलिए अटैच किया जाता है। यह एक तरीके से स्वीटनर है टू मेक द डेप्ट इशू मोर अट्रैक्टिव टू द इन्वेस्टर ऑफन फॉलोइंग द कंपनी टू रेज डे एट अ लोअर कूपन रेट। हां ये भी हो सकता है कि मैं आपको जब डेप्ट इशू कर रहा हूं वो कम रेट वाली है। मान लो मार्केट में आपको 10% ब्याज मिल रहा है। 6:15:44 मैं कह रहा हूं 8% ब्याज पे डेप्ट इशू करूंगा। आपने कहा क्यों ले? मैंने कहा लो मैं साथ में एक वारंट अटैच करके दे देता हूं। तो जब वारंट अटैच हो गया तो आपके लिए वो अट्रैक्टिव हो गई। इट इज़ बेसिकली एन अट्रैक्ट अट्रैक्शन मोड। भाई मोमोज वाला भैया एक चटनी की जगह तीन चटनी होगी रख दे तो ज्यादा लोग वहां मोमोज खाने आएंगे। ये वो अट्रैक्शन है। तो वही बेसिकली डिबेंचर इशू करने वाला साथ में एक वारंट लगा दे तो वो एक अट्रैक्शन है बस। तो आई होप इसे पढ़ लेना समझ आ जाएगा। अब पढ़िए। ये बात होती है कि इंट्रेंसिक वैल्यू ऑफ़ द वारंट क्या है? देखो इंट्रेंसिक वैल्यू मतलब आप बेसिकली थ्योरेटिकल वैल्यू क्या है वारंट की? तो आप ये कहोगे थ्योरेटिकल वैल्यू वारंट की वो है जो मार्केट प्राइस ऑफ़ द शेयर चल रहा है और जितनी आपको एक्सरसाइज प्राइस मिल रही है। इमेजिन करो। इमेजिन करो। मैंने आज आपको एक वारंट ऑफर किया। ठीक है? मान लो मैंने बोला कि आप तीन शेयर खरीद सकते हो उस वारंट से। वह भी एट द रेट ऑफ ₹100। आपने कहा ठीक है। लेकिन आप सबसे पहले यह कहोगे ₹100 में शेयर खरीद सकता हूं। मैंने कहा हां तो आप सबसे पहले पूछोगे मार्केट प्राइस ऑफ़ द शेयर टुडे कितना है? पता चला आज शेयर 100 ₹15 का है। आपने अपना दिमाग चलाया अच्छा 115 वाला 6:16:45 शेयर मैं 100 में खरीद सकता हूं। यानी मुझे ₹15 का फायदा मिल रहा है पर शेयर। और तीन शेयर हैं। तो यानी आपके हिसाब से उस वारंट की कीमत वारंट का थ्योरेटिकल प्राइस इंट्रेंसिक वैल्यू 45 है। यानी अगर आप उस वारंट को आज एक्सरसाइज करो तो आपको ₹45 का गेन मिल सकता है। करेक्ट? अगर यह नेगेटिव हुआ तो उसे ज़ीरो मानेंगे। क्यों? क्योंकि लॉस नहीं लोगे आप। ऑब्वियसली सी बात है। आप शेयर लेने आओगे ही तब जब शेयर का दाम ज्यादा होगा। अगर शेयर का दाम ये ऑप्शन की तरह हो गया ना बेसिकली। वारंट इज़ एन ऑप्शन। आप ऐसे लिख लो। वारंट इज़ एन ऑप्शन टू बाय इक्विटी शेयर एट अ फिक्स्ड रेट आफ्टर अ फिक्स पीरियड ऑफ़ टाइम। बस यह डेफिनेशन है वारंट की। यह एक ऑप्शन है टू बाय फिक्स्ड नंबर ऑफ इक्विटी शेयर एट द फिक्स्ड रेट आफ्टर अ फिक्स्ड इंटरवल ऑफ़ टाइम। ये डेफिनेशन है वारंट की। ठीक है जी। तो अगर मार्केट प्राइस देखो वही ऑप्शन की तरह देखो। अगर मार्केट प्राइस ज्यादा है एक्सरसाइज प्राइस से तो इन द मनी ऑप्शन हो गया। इन द मनी वारंट हो गया। और अगर उल्टा है तो आउट ऑफ मनी हो गया। जैसे हम याद है ऑप्शन में s - x देखते थे। 6:17:46 बिल्कुल वैसे ही S की जगह पे मार्केट प्राइस को देखते हैं और X की जगह पे एक्सरसाइज़ प्राइस को देखते हैं कि हम वारंट कितने में एक्सरसाइज़ कर सकते हैं। बिल्कुल उसी तरीके से देखते हैं। सब कुछ उसी जैसा है। मतलब कॉल ऑप्शन की तरह देखना है सब कुछ वैसे ही। ठीक है सर। आइए वारंट का प्रीमियम कितना है? मतलब हम वारंट पे प्रीमियम कितना दे रहे हैं। इमेजिन करो। अब जो वारंट है वो मार्केट में कितने का बिक रहा है? और थ्योरेटिकल वैल्यू हमारे हिसाब से उसकी कितनी है? मतलब हमें वारंट के लिए दो तरीके के फार्मूला पढ़ने हैं। यह दो फार्मूले आपको याद करने हैं। एक थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ वारंट निकालना सीखना है और एक वारंट का प्रीमियम निकालना सीखना है। बस ये दो फ़ूले आपको पता होने चाहिए। आप चाहें तो मैं इन दोनों फार्मूला को एक बारी टेक्निकली लिखवा भी देता हूं आपको। थरेटिकल वैल्यू ऑफ वारंट जिसे इंट्रेंसिक वैल्यू भी बोलते हैं। उसका मतलब होता है मार्केट प्राइस ऑफ़ शेयर माइनस एक्सरसाइज प्राइस ऑफ़ वारंट * नंबर ऑफ़ शेयर्स। अच्छा ये दोनों जो है ना ये 6:18:48 अगर नेगेटिव होगा तो ज़ीरो मान लेंगे। मतलब आप चाहो तो इसे ऐसे लिख सकते हो कि दिस 0 व्हिच एवर इज मैक्सिमम। * n यह बात आपको समझ आई? मतलब अगर इन दोनों को माइनस करने पर नेगेटिव आ रहा होगा तो हम ज़ीरो को सेलेक्ट करेंगे। ऐसे ही हम कॉल ऑप्शन के शेयर्स में भी कॉल ऑप्शन में भी करते थे। बिल्कुल वही फार्मूला है। तो ये थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट आ गया। यानी हमारे हिसाब से वारंट की यह वैल्यू है। पर कभी-कभी क्या होता है कि मार्केट में वारंट महंगा बिक रहा होता है। मतलब जैसे मान लो मेरे हिसाब से वह वारंट मिलना चाहिए ₹45 का। क्यों? शेयर बिक रहा है 115 का। हमारे को शेयर मिलेगा 100 का। तो हमें ₹15 पर शेयर का फायदा है। तीन शेयर का मतलब हमें ₹45 फायदा दिला सकता है वारंट। यानी वारंट मेरे लिए कितनी कीमत रखता है? ₹45। लेकिन मान लो वो मार्केट में बिक रहा है 50 का। तो उसे मतलब मार्केट में मार्केट प्राइस ऑफ वारंट शेयर नहीं मार्केट प्राइस ऑफ़ वारंट माइनस थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ वारंट। यानी वारंट की आपके हिसाब से थ्योरेटिकल 6:19:49 वैल्यू क्या थी? अब आपके हिसाब से थ्योरेटिकल वैल्यू थी 50। लेकिन मार्केट में बिक रहा है 50 का। तो ₹5 की आपकी यह कह सकते हो आप कि प्रीमियम मिल रहा है। प्रीमियम ऑफ वारंट यानी इतने प्रीमियम पर डील हो रहा है। समझ आ गई आपको बात? यानी जो जो वारंट है वो इतने प्रीमियम पे ट्रेड हो रहा है मार्केट में। यह समझ आ गया हमें। बस यही दो फ़ूले पढ़ने हैं। आइए क्वेश्चन पढ़ते हैं। सुनो। पहला क्वेश्चन। ईच वारंट ऑफ XYZ लिमिटेड एंटाइटल्स द होल्डर टू परचेस थ्री इक्विटी शेयर एट एन एक्सरसाइज प्राइस ऑफ 150 पर शेयर। ठीक है? यानी हमारे पास जो राइट है वह कुछ इस तरह का है कि हम तीन शेयर खरीद सकते हैं वारंट के अकॉर्डिंग। वारंट क्या कहता है कि तीन शेयर खरीद सकते हो एट द रेट ऑफ ₹10 पर शेयर। ठीक है? लेकिन जो करंट मार्केट प्राइस चल रहा है वह 180 चल रहा है। क्या बात है? मजा ही आ गया। यानी जो शेयर मार्केट में 180 का 6:20:50 मिलता है, हम उसे 150 में खरीद सकते हैं। तो बताओ वारंट की वजह से हमें कितने का गेन है? यानी थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट क्या है? पहला पॉइंट तो यही पूछ रहा है वो थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट क्या है? तो आप मुझे बताइए कि थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट क्या है? तो आप यह कहोगे कि देखो इस वारंट की वजह से मैं 180 वाला शेयर 150 में खरीद सकता हूं। तो यानी मेरे को ₹30 का फायदा मिलेगा एक शेयर पे। तो मेरे को ₹90 का फायदा मिलेगा एक वारंट से। तो हमारे हिसाब से थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट ₹90 है। मतलब हमारे हिसाब से वह वारंट ₹90 का मार्केट में बिकना चाहिए। ठीक बात है। बट वो कहता है कैलकुलेट दी वारंट प्रीमियम एंड ब्रीफली एक्सप्लेन। देखो वारंट मार्केट में कितने का बिक रहा है? मार्केट में वारंट बिक रहा है 110 का। अच्छा जी। हमारे हिसाब से वारंट होना चाहिए 90 का। लेकिन मार्केट में उसे बेचा जा रहा है 110 6:21:50 का। तो प्रीमियम कितने का है? यानी प्रीमियम कितने का है वारंट के ऊपर? तो आप यह बोलोगे मार्केट में 110 का बिक रहा है। हमारे हिसाब से 90 का होना चाहिए। यानी ₹20 का प्रीमियम है हमारे हिसाब से। यानी इसका मतलब है कि मार्केट में अगर मैं आज वारंट को एक्सरसाइज करूं तो मुझे ₹90 का गेन दे सकता है। लेकिन मार्केट में वह 110 का बिक रहा है। तो वो ₹20 ज्यादा का बिक रहा है। मतलब मार्केट इससे क्या समझ आ रहा है? इससे समझ आ रहा है मार्केट में शायद यह एक्सपेक्टेशन होगी कि शेयर प्राइस अभी और बढ़ेगा। एक बात बताओ लोग 110 में वारंट खरीदने को क्यों तैयार हैं? मूर्ख हैं। नहीं। उन्हें लग रहा होगा यह शेयर अभी 180 से भी और ऊपर जाएगा। शायद उन्हें लग रहा होगा यह शेयर अभी 200, 220, 230, 240 जाएगा। इसीलिए वह वारंट को थोड़ा महंगे खरीदने में भी तैयार हैं। वारंट को थोड़ा महंगा खरीदने में भी तैयार है। क्या यह बात आपको समझ आ गई? यह बिल्कुल वैसा ही लग रहा है ना आपको कॉल ऑप्शन की तरह कि कॉल ऑप्शन का प्रीमियम ज्यादा भी हो सकता है। वैसे ही अब वो कहता है इफ द शेयर प्राइस राइज़ टू 200। मान लो अब इसी क्वेश्चन में जो शेयर प्राइस है वो 6:22:52 200 हो गया। अगर यहां 200 होता तो 200 - 150 यानी 50 50 * 3 मतलब 150 यानी तब इंट्रिंसिक वैल्यू ऑफ़ द ऑफ़ द वारंट क्या हो जाती? थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट क्या हो जाती? 150 हो जाती। तो वही हमने इधर निकाल के दिखाया कि तब न्यू थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट 150 हो जाती। लिख के समझाऊं या बात समझ आ गई आपको? आ गई बात समझ? अब ये तो आसान था। असली बात यह है वह कहता है कंप्यूट द परसेंटेज चेंज इन द वारंट थ्यरेटिकल वैल्यू विवे द परसेंटेज चेंज इन दी शेयर प्राइस एंड कमेंट ऑन दी गियरिंग या लिवरेज इफेक्ट ऑफ वारंट ये लाइन इंपॉर्टेंट है कि वारंट का गेयरिंग इफेक्ट क्या है? देखो लोग वारंट क्यों खरीदते हैं? वारंट इसलिए खरीदते हैं क्योंकि वारंट खरीदने से आप शेयर की अपसाइड को कैप्चर कर सकते हो। अपसाइड को कैप्चर कर सकते हो जब आप 6:23:54 कम पैसे लगाकर भी क्योंकि आपने क्या दिया आपने तो सिर्फ वारंट का ऑप्शन प्रीमियम वारंट का प्रीमियम दिया या वारंट की जो प्राइस है थ्योरेटिकल प्राइस है मार्केट प्राइस है वो दी लेकिन अगर शेयर ऊपर भाग गया तो आपको उसका गेन मिलेगा अब इस बात को समझो अभी कुछ लिखना नहीं सिर्फ समझना देखो शेयर प्राइस कितना था और वारंट का वैल्यू कितनी थी शेयर प्राइस ओरिजिनली कितना था? 180 तो न्यू शेयर प्राइस कितना है? 200 यानी शेयर प्राइस बढ़ा है कितना? ₹20 बड़ा है। ठीक है? लेकिन अगर मैं वारंट की वैल्यू बताऊं तो देखो वारंट की वैल्यू पहले कितनी थी? समझना। 180 - 150 0 मैक्स * 3 यानी पहले ₹90 थी अब कितनी हो गई? 200 - 6:24:55 150 0 मैक्स * 3 यानी 150 यानी जब शेयर का दाम बढ़ा ₹20 तो वारंट का दाम बढ़ा ₹60 यानी जब शेयर का दाम बढ़ा ₹20 तो वारंट का दाम बढ़ा पूरा का पूरा ₹150 करेक्ट। तो अगर मैं आपसे यह पूछूं कि परसेंटेज चेंज इन शेयर प्राइस कितना है? यही बात क्वेश्चन ने बोली है ना परसेंटेज चेंज इन द वारंट थ्यरेटिकल वैल्यू एंड परसेंटेज चेंज इन द शेयर प्राइस तो मैं इधर परसेंटेज चेंज इन द शेयर प्राइस निकाल रहा हूं यानी 20 / 180 * 100 करना बेटा कितना आता है और परसेंटेज चेंज इन थ्योरेटिकल वारंट वैल्यू यानी वारंट की वैल्यू में कितने का फर्क आया तो आप बोलोगे 60/90 * 100 यानी चेंज कितने का है 60/ ओरिजिनल * 100 है ना? 6:25:55 तो आप यहां पे क्या बोलोगे? बोलिए जी। यहां पे आप बोलोगे 11.1% और यहां पे कितना है? 66.66% यानी जब शेयर ऊपर जाएगा सिर्फ 11% तो वारंट ऊपर चला जाएगा 66%। अब ये सोचो छह गुना ज्यादा। तो गेयरिंग का इफ़ेक्ट कितना है? छह गुना। यानी अगर मैं आपसे पूछूं कि गियरिंग कितनी है? यही बात उसने पूछी है कि गेयरिंग कितनी है? तो आप बोलोगे 66.66% गेन मिलेगा जबकि शेयर प्राइस 11.11 था। यानी सिक्स टाइम्स यानी इसका मतलब है कि अगर शेयर प्राइस बढ़ता है तो उससे छह गुना ज्यादा बढ़ता है वारंट का दाम। इसलिए वारंट में इन्वेस्ट करना फायदेमंद रहता है। क्योंकि बट हां उल्टा भी हो सकता है क्योंकि अगर शेयर का प्राइस गिरा तो वारंट एकदम ज़ीरो भी हो जाएगा। तो 100% फॉल हो जाएगा वारंट का दम क्योंकि वारंट एकदम जीरो पे भी आ सकता है। अगर 150 से नीचे शेयर प्राइस चला गया। पर हां जब शेयर प्राइस बढ़ता है तो वारंट कई गुना ज्यादा रिटर्न देता है। क्योंकि पहली 6:26:56 बात तो हर एक वारंट तीन शेयर के बराबर है। ये रीज़न है। फिर उसका उसका बेस और ऊपर जो टॉप वैल्यू है उनमें ज्यादा गैप है। यानी 90 और 150 में ज्यादा गैप आता है। इसलिए उसे गेन इंपैक्ट ज्यादा मिलता है। यही बात वो चाहता था आपको प्रूफ करना कि भैया गेयरिंग का इफ़ेक्ट बताओ। तो देखो बाकी सब शायद आप कर लेते आप यह गेयरिंग वाले पार्ट को शायद इग्नोर कर देते क्वेश्चन में और दो मार्क कटवा लेते बट अब नहीं कटेंगे आपके दो मार्क अब आप कराओगे कराओगे गेयरिंग की बात अच्छा और एक बात ये सारी कैलकुलेशन सेम डे पे हो रही है ये फ्यूचर डेट पे 2 साल 3 साल बाद के लिए नहीं हो रही हम आज ही कैलकुलेट कर रहे हैं सब कुछ इसीलिए इसमें कोई प्रेजेंट वैल्यू कांसेप्ट नहीं लगेगा क्योंकि ऐसा नहीं है कि मैं आज प्रीमियम पे कर रहा हूं और मैं 1 साल बाद थ्योरेटिकल वैल्यू निकाल रहा हूं। मैं आज ही थ्योरेटिकल वैल्यू निकाल रहा हूं इस क्वेश्चन में। इसलिए मैंने कोई प्रेजेंट वैल्यू निकालने का क्लेश नहीं किया। आपने देखा नंबर लाइन पर भी मैं सारी कैलकुलेशन आज ही कर रहा हूं। मैंने कोई फ्यूचर डेट की कैलकुलेशन की ही नहीं है। क्वेश्चन में बताया ही नहीं है फ्यूचर डेट तो सब कुछ आज ही कैलकुलेट हो रहा है। आइए जरा आउट ऑफ मनी वारंट। बेटा आउट ऑफ मनी 6:27:57 वारंट का मतलब क्या होता है? यह ऐसा वारंट होगा जिसमें आज अगर आप एक्सरसाइज करो तो उसमें आपको फायदा नहीं हो रहा होगा। अगर आप आज ऑप्शन एक्सरसाइज करो मतलब वारंट को एक्सरसाइज करो तो आपको फायदा नहीं हो रहा होगा। एक तरीके से आपके मन में यह थॉट आ गया। अब कि अगर वारंट का क्वेश्चन आएगा तो उसे कॉल ऑप्शन की तरह सॉल्व करना है। मन में ऐसे सोच लो। ठीक है? आउट ऑफ मनी का मतलब मार्केट प्राइस ऑफ़ द शेयर शुड बी मतलब आप ये कह या फिर बोल के चलो कि मार्केट प्राइस जो है वारंट का वो कम है। अगर मार्केट प्राइस ऑफ़ द शेयर कम होगा एक्सरसाइज प्राइस से। तो हमारा जो वारंट भी है वो भी एक्सरसाइज़ करने में फायदा नहीं हो रहा होगा हमें। चलो देखते हैं। एबीसी लिमिटेड हैज़ अ वारंट अटैच टू इट्स डिबेंचर इशू। ईच वारंट एंटाइटल द होल्डर टू सब्सक्राइब फॉर फाइव इक्विटी शेयर एट एन एक्सरसाइज प्राइस ऑफ़ ₹80 पर शेयर। यानी वो यह कहता है कि हमारे पास हम कुछ ऐसा वारंट इशू कर रहे हैं आज जो भैया अगर आप ऑप्शन खरीदोगे तो एक वारंट की मदद से आपको पांच शेयर्स मिल जाएंगे। 6:28:58 वह भी ₹80 के एक्सरसाइज प्राइस पे। ठीक है भैया? अब आगे पढ़िए। वो यह कहता है कि और वो कहता है एक्सरसाइजबल एनी टाइम विद इन द नेक्स्ट टू इयर्स। मतलब वो यह नहीं कह रहा 2 साल बाद ही एक्सरसाइज करो। वो कह रहा है कभी भी एक्सरसाइज करो भाई। डू व्हाटएवर यू वांट टू डू। आप इसे यहां से यहां तक कभी भी एक्सरसाइज करो। आप इसे यहां से यहां तक कभी भी एक्सरसाइज करो। लेकिन आप उसे एक्सरसाइज करो। किस रेट पे? ₹80 के रेट पे। बट एबीसी कंपनी का जो शेयर अभी है वह ₹72 का है। और वारंट [नाक से की जाने वाली आवाज़] मार्केट में बिक रहा है ₹1 का। देखो यानी जो अभी करंट मार्केट प्राइस है वह 72 है। तो देखो हम तो नुकसान में हैं। क्यों? जिस शेयर को हम वारंट के थ्रू खरीद सकते हैं 80 का वो मार्केट में 72 का बिक रहा है। तो बताओ वारंट वैलुएबल है या वैल्यूलेस है? थ्योरेटिकली तो उसकी वैल्यू जीरो होनी चाहिए। लेकिन फिर भी मार्केट में भी वैल्यू है। बड़ी अजीब बात यह है कि मार्केट वैल्यू ऑफ 6:29:59 वारंट अभी भी है। चाहे मतलब मार्केट वैल्यू वारंट की अभी भी ₹15 है। मतलब मुझे ऐसा लग रहा है कि मार्केट प्राइस जो होनी चाहिए। मेरी बात को समझो। मुझे ऐसा लग रहा है कि जो मार्केट प्राइस होनी चाहिए वारंट की वो होनी चाहिए ज़ीरो। लेकिन मार्केट में वारंट की प्राइस चल रही है 15। तो वो ऑलरेडी प्रीमियम पे चल रहा है। समझ आ गई आपको बात? अभी क्वेश्चन पढ़ते हैं। अब वह यह कहता है कि ABC लिमिटेड करेंटली हैस 50 लाख इक्विटी शेयर आउटस्टैंडिंग। ठीक है? द ईपीएस ऑफ़ ₹8 मतलब हमारे पास इतने का नेट प्रॉफिट है 4 करोड़ का। देयर आर 10 लाख वारंट आउटस्टैंडिंग इन द टोटल। अगर 10 लाख वारंट है और हर वारंट के लिए पांच शेयर मिलेंगे। तो इमेजिन करो अगर 10 लाख वारंट आउटस्टैंडिंग है पांच शेयर वाले तो बेसिकली 50 लाख शेयर अभी और इशू हो सकते हैं। अगर सब लोग वारंट यूज़ कर लें तो 50 लाख शेयर और इशू हो सकते हैं। ठीक है? पहला सवाल कहता है जी कंप्यूट करिए 6:31:01 थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट एट द करंट प्राइस ऑफ़ 72। करंट प्राइस पे कैसे आएगा? वही वाली बात हो जाएगी। मार्केट प्राइस ऑफ़ शेयर माइनस एक्सरसाइज प्राइस 0 मैक्स * n तो यह आप बोलोगे मार्केट प्राइस है 72 और एक्सरसाइज प्राइस है 80 0 मैक्स अ * 5 तो ये आ जाएगा 0 * 5 यानी आंसर आ जाएगा ज़ीरो यानी अभी हमारे हिसाब से थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट कितनी है? ज़ीरो। समझ आ गया ना ये सब आपको? ये सब प्रिंटेड है बेटा आपके पास आंसर। तो दोबारा करने की जरूरत नहीं है। लिखने की भी जरूरत नहीं है। तो हमने ये मैक्सिमम इसके हिसाब से कर लिया। तो ज़ीरो वैल्यू है। यानी हमारे हिसाब से अभी वारंट का थ्योरेटिकल वैल्यू जो आ रही है वो ज़ीरो आ रही है। अभी वारंट की थ्योरेटिकल वैल्यू ज़ीरो आ रही है। समझ आ गई बात? आपने कहा जी हां सर। थ्योरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट अभी ज़ीरो आ रही है हमारी। कोई दिक्कत तो नहीं है? जी। नो। अब और आगे बढ़ते हैं हम। 6:32:03 थरेटिकल वैल्यू ऑफ़ द वारंट एट द करंट शेयर प्राइस इज 72. कमेंट वेदर द वारंट करेंटली हैज़ एनी इंट्रेंसिक वैल्यू। नो। उसकी इंट्रेंसिक वैल्यू ज़ीरो है। करंट थ्योरेटिकल वैल्यू ज़ीरो है। कंप्यूट द वारंट प्रीमियम बीइंग पेड बाय द इन्वेस्टर इन द मार्केट एंड एक्सप्लेन व्हाई द इन्वेस्टर माइट स्टिल बी पेइंग इंटरेस्ट। देखो वो बड़ी अच्छी बात बोली है। उसने बहुत सुंदर सवाल पूछा है। कह रहा है यार एक बात बताओ। वारंट की वैल्यू है ज़ीरो। लेकिन मार्केट में वारंट बिक रहा है। मार्केट प्राइस ऑफ द वारंट जो है वह ₹15 है। तो कितने रुपए का प्रीमियम दे रहे हो? तो आप बोलोगे ₹15 का पूरा ही प्रीमियम है। क्योंकि ₹15 में वारंट खरीदेंगे ₹ वाला तो ₹15 का प्रीमियम पे कर रहे हैं। भाई जिस चीज की मेरे दिल में वैल्यू ज़ीरो है। मैं उसे मार्केट में ₹15 का खरीद रहा हूं। तो मैं पूरे ₹15 का प्रीमियम दे रहा हूं। लेकिन वो कह रहा है कि क्या इन्वेस्टर मूर्ख है जो अभी भी खरीद रहा है वारंट? क्यों खरीद रहा होगा? क्योंकि शायद उसे यह होप होगी कि आने वाले समय में शेयर प्राइस बढ़ने वाला है। और उसे यह बात पता है कि जब शेयर का प्राइस बढ़ता है तो वारंट जो 6:33:04 है वो कई गुना ज्यादा रिटर्न देता है। अभी हमने पिछले क्वेश्चन में देखा ना छह गुना ज्यादा रिटर्न दी शेयर बढ़ा 11% वारंट बढ़ा 66% तो हमें यह बात पता है कि जब शेयर प्राइस थोड़ा भी बढ़ेगा तो भी गेन बहुत ज्यादा होगा। इसीलिए शायद वह उसे होल्ड करके बैठा है। तो देखो क्या आंसर लिखा है। द एंटायर ₹15 मार्केट प्राइस इज प्योरली द टाइम वैल्यू यानी जो पूरा का पूरा प्रीमियम है। बिकॉज़ हम एक्सपेक्ट कर रहे हैं दैट शेयर प्राइस कुड राइज़ अबव 80 समटाइम विद इन द रिमेनिंग टू इयर्स ऑफ़ द वारंट। हमें यह लग रहा है कि जरूर शेयर प्राइस अगले 2 साल में कभी ना कभी तो 80 से ऊपर जाएगा। कभी ना कभी तो 80 से ऊपर जाएगा। जितने का मेरा एक्सरसाइज प्राइस है उससे ऊपर कभी तो जाएगा 2 साल में। इसीलिए हम खरीदने के लिए तैयार हैं। आगे पढ़िए। एट द एंड ऑफ 2 ईयर द शेयर प्राइस राइज टू 96। अगर मान लो शेयर प्राइस एंड में 96 हो गया तो क्या होगा? अगर शेयर प्राइस एंड में 96 हो गया तो फिर मजा आ गया क्योंकि मैं वो शेयर खरीदूंगा 80 में और मार्केट में बेचूंगा 96 पे तो मुझे वो वारंट की वैल्यू कितनी मिल जाएगी? 6:34:06 96 - 80 यानी ₹16 वैल्यू मिल जाएगी। पांच शेयर मतलब ₹80 की मार्केट ₹80 की थ्योरेटिकल वैल्यू हो जाएगी मेरे इस एक वारंट की। ठीक है जी। अब वह कहता है कि अस्यूम करो सभी 10 लाख वारंट जो थे वह एक्सरसाइज हो गए। तो सभी 10 लाख वारंट अगर एक्सरसाइज हो गए तो 10 लाख * 5 यानी 50 लाख शेयर और इशू हो गए होंगे। यानी 50 लाख शेयर इशूड हो गए और यानी हमारे 50 लाख शेयर्स और इशू हो गए होंगे। क्या मेरी बातें आपको क्लियर हो गई? मैंने क्या कहा? ठीक है जी। यानी मैं अगर आपको यह बोलूं कि हमारे 50 लाख शेयर और इशू हो गए। तो अब टोटल शेयर कितने हो गए? टोटल शेयर 1 करोड़ हो गए। पहले के भी 50 लै थे। अभी के भी 50 लै हैं। टोटल 1 करोड़ हो गए। टोटल कितने हो गए? 1 करोड़। तो डाइल्यूटेड 6:35:08 ईपीएस कितना है? आप यह कहोगे कि हमारा नेट प्रॉफिट कितना है? 4 करोड़ का और अपॉन टोटल सेल्स कितनी है? यह गलत लिख दिया। टोटल सेल्स गलत लिखा है यहां पर टाइपिस्ट ने। यहां पर लिखना चाहिए था टोटल नंबर ऑफ शेयर्स। टोटल सेल्स नहीं टोटल शेयर्स आने चाहिए थे। टाइपिंग मिस्टेक कर दी टीम ने। टोटल शेयर्स कर दो उसे। ठीक है ना? तो ₹1 करोड़ शेयर है। यानी हमारा ई डाइलटेड ईपीएस ₹4 हो जाएगा। जो ईपीएस पहले ₹8 था वो ₹4 हो जाएगा। आई होप ये तो अपने अकाउंट्स में भी कांसेप्ट एफआर में पढ़ रखा है कि अगर कोई भी तरीके से शेयर्स बढ़ रहे हो फ्यूचर में चाहे वो कन्वर्टेबिलिटी की वजह से बढ़ रहे हो किसी भी कारण से बढ़ रहे हो तो हम डाइल्यूटेड ईपीएस निकाल के दिखाते हैं। अर्निंग सेम रखते हैं। लेकिन डिनोमिनेटर में नंबर ऑफ शेयर्स को पोटेंशियल जितने भी शेयर्स होंगे वो बढ़ा देते हैं। तो हमारे पास डाइल्यूटेड ईपीएस आ जाता है कि ईपीएस कितना कम हो जाएगा। क्या मैं मान के चलूं आपको ये वारंट वाला क्वेश्चन पूरा का पूरा समझ आ गया अच्छे से। वारंट का कांसेप्ट क्लियर हो गया? कूल फार्मूलाज़ लिखके रख लेना। वेलकम, दोस्तों। 6:36:09 अब जो एनेक्सचर यानी एक्स्ट्रा क्वेश्चंस हम पढ़ने वाले हैं, वह है पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में कैपिटल मार्केट थ्योरी यानी कैपिटल मार्केट लाइन जिसे हम बोलते हैं, उसके बारे में। थोड़ा सा मैं पहले अपने नोट्स में से आपको रिकॉल करा देता हूं कि नोट्स में मैंने क्या-क्या पढ़ाया हुआ है। देखो, मैं यहां पे सीए एएल कैपिटल एलोकेशन लाइन के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। मैं कैपिटल मार्केट लाइन के बारे में फोकस्ड बात कर रहा हूं। सुनो पहली बात कैपिटल मार्केट लाइन बेस्ड ऑन मार्केट होती है। यह बताती है हमें ऑप्टिमल पोर्टफोलियो मार्केट में क्या है? यानी पूरी मार्केट में बहुत सारे शेयर्स हैं। एक भाई किसी भी वक्त एक कंपनी में मार्केट में 3 4000 5000 शेयर्स होते होंगे। पर आपको उसमें से कौन सा ऑप्टिमल पोर्टफोलियो सेलेक्ट करना चाहिए? यह बताता है यह। इट रिप्रेजेंट्स द बेस्ट कॉम्बिनेशन ऑफ़ रिस्की एंड रिस्क फ्री एसेट्स। हम दो तरीके के एसेट्स को कंबाइन करते हैं। एक रिस्की, एक रिस्क फ्री। रिस्क फ्री का मतलब जैसे किसी को लोन देना, डेप्ट में इन्वेस्ट करना है ना [गला साफ़ करने की आवाज़] और रिस्क फ्री एसेट जो है वो कभी-कभी नेगेटिव भी होता है। नेगेटिव मतलब हम बोरोइंग भी कर रहे हो 6:37:11 सकते हैं। मतलब याद है हमने क्लास में एक बात पढ़ी थी कि अगर हमें रिस्क को घटाना है तो हम क्या करते हैं? हम थोड़ी सिक्योरिटीज बेचते हैं और उस पैसे को रिस्क फ्री एसेट में लगा देते हैं। ठीक है जी। इसे बोलते हैं लेंडिंग पोर्टफोलियो। लेंडिंग पोर्टफोलियो मतलब कि कुछ हमने अपना पोर्टफोलियो कम किया। अपनी मार्केट का एक्सपोज़र कम किया और उस पैसे को हमने लैंडिंग कर दी। लैंडिंग मतलब डेप्ट में लगा दिया। बॉन्ड्स में लगा दिया ताकि हमें फिक्स्ड इंटरेस्ट आने लगे। हम रिस्क फ्री हो गए उतने पार्ट के लिए। उल्टा भी हो सकता है। बोरोइंग पोर्टफोलियो भी हो सकता है। बोरोइंग पोर्टफोलियो का मतलब क्या होता है? कि हमने बोरोइंग कर ली। हमने लोन ले लिया और लोन लेके कैपिटल मार्केट में लगा दिया। स्टॉक मार्केट में पैसा लगा दिया। यानी हमने रिस्क 100 से भी ज्यादा ले गए रिस्क अपना। कैसे? 20% एक्स्ट्रा बोरोइंग करके स्टॉक मार्केट में लगा दिया। यानी जहां मेरे पास 1 करोड़ था मैंने 1 करोड़ 20 लाख स्टॉक मार्केट में लगा दिया। रिस्क को और बढ़ा दिया तो वो होता है बोरोइंग पोर्टफोलियो। सुनो ये वो पॉइंट होता है जहां पे इट हैज़ दी हाईएस्ट शार्पी रेशियो। ये वो पॉइंट होगा जहां पे शार्पी रेशियो सबसे ज्यादा होगी। कैपिटल 6:38:13 मार्केट लाइन कैसे आता है? ये फ्रंट एफिशिएंट फ्रंटियर और सीएमएल जहां पे टेंजेंट होते हैं। ये सब हमने थ्योरिटिकली पढ़ रखा है टॉपिक। है ना? फिर हमने क्या पढ़ा था? देखो अगर हम एफिशिएंट इसकी स्लोप की बात करें पहले अगर हम बात करें स्लोप ऑफ़ सीएमएल की तो वह क्या होगा? एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑफ़ मार्केट माइनस रिस्क फ्री रेट अपॉन हम बोले स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ मार्केट। जिस पॉइंट पे सीएमएल टेंजेंट होती है एफिशिएंट फ्रंटियर के। ये एफिशिएंट फ्रंटियर है। जहां पे ये उसके साथ टेंजेंट होगी। वहां पर बेस्ट कॉम्बिनेशन पोर्टफोलियो का बनता है। यानी बेस्ट पोर्टफोलियो बनता है। वहां पर पोर्टफोलियो बिलो दी एफिशिएंट फ्रंटियर आर इन अगर इससे नीचे वाले पॉइंट्स की बात की जाए तो वो इनफिशिएंट पोर्टफोलियोस माने जाते हैं। इसलिए उन्हें इग्नोर करते हैं। मैं ये सब पढ़ा सिर्फ 1 मिनट में शॉर्ट में रहा हूं क्योंकि ये सब मैं कांसेप्ट क्लास में पढ़ा चुका हूं। मैं सिर्फ रिव्यू करा रहा हूं क्योंकि मुझे अभी इसके लिए प्रैक्टिकल पढ़ाने हैं। ठीक है? एक और बात अगर हम यह पॉइंट हम बोलते हैं कि एफिशिएंट पोर्टफोलियो है तो इससे ऊपर का अगर हम कोई 6:39:13 पॉइंट सेलेक्ट करते हैं तो उसे बोलते हैं बोरोइंग पोर्टफोलियो। बोरोइंग पोर्टफोलियो का मतलब हमने अपना जोखिम ज्यादा बढ़ा लिया। यानी हम लोन लेकर स्टॉक मार्केट में पैसा लगा रहे हैं। ये होगा बोरोइंग पोर्टफोलियो। और ये है लेंडिंग पोर्टफोलियो। लेंडिंग पोर्टफोलियो मतलब हमने इस पॉइंट से अगर हम नीचे आ जाते हैं रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट्स की तरफ। तो अगर हम ज्यादा रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट्स कर रहे हैं। इसका नाम रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट्स में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। मतलब बॉन्ड्स में, डेप्ट्स में, सिक्योरिटाइज्ड एसेट्स पे ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और स्टॉक मार्केट में कम पैसा लगा रहे हैं। तो यही होता है हमारा लेंडिंग पोर्टफोलियो यानी हमने रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट्स में ज्यादा पैसा लगा दिया और बोरोइंग पोर्टफोलियो मतलब रिस्क फ्री जगहों से लोन ले लिया और उसे कहीं मार्केट में पैसा लगा दिया। स्टॉक मार्केट में पैसा लगाया। तो आई होप ये सारी बातें आपको रिकवर हो रही हैं। अब आते हैं इसके प्रैक्टिकल टॉपिक पे। सुनिए। पहली बात स्लोप ऑफ कैपिटल मार्केट लाइन क्या होता है? रिटर्न ऑफ मार्केट माइनस रिस्क फ्री रेट अपॉन स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ मार्केट। और अगर मैं बोलूं कैपिटल मार्केट लाइन की इक्वेशन क्या होती है? तो आप बोलोगे एक्सपेक्टेड रिटर्न इज़ इक्वल टू रिस्क फ्री रेट प्लस ये जो स्लोप है ये स्लोप 6:40:15 यहां लिख दिया इंटू स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो। अब यहां पे फर्क है ये स्टैंडर्ड डेविएशन मार्केट का है। ये स्टैंडर्ड डेविएशन पोर्टफोलियो का है आपके। ध्यान रखना यह स्टैंड डेविएशन पोर्टफोलियो का है। लेकिन यह स्टैंड डेविएशन मार्केट का है। आइए जरा इसके बारे में हम बातचीत करते हैं। कंस्ट्रक्टिंग अ लेंडिंग पोर्टफोलियो यूजिंग दी सीएमएल। यानी अगर मैं एक लेंडिंग पोर्टफोलियो बनाऊं सीएमएल को यूज़ करके तो वो कैसे होगा? आराम से सुनो। क्योंकि आपने इसके प्रैक्टिकल प्रोबेब्ली शायद नहीं पढ़े होंगे ज्यादा। तो एक दो क्वेश्चन से ही मुझे पूरी बात समझानी है। इसलिए 100% फोकस रखना। देखो पहली बात है रिस्क फ्री रेट है 6% एक्सपेक्टेड रिटर्न इन द मार्केट है 14% यानी अगर हम मार्केट में पैसा लगाते हैं तो हम 8% का प्रीमियम प्राप्त करने की सोच रहे हैं। स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ द मार्केट पोर्टफोलियो 20% है। तो यानी अगर मैं एक तरीके से सोचूं तो मुझे यह सारी बातें पता हैं। मुझे एक्सपेक्टेड रिटर्न इन द मार्केट भी पता है। मुझे रिस्क फ्री रेट भी पता है और हमें 20% यह भी पता है। 6:41:15 तो इसका मतलब मेरे मन में स्लोप निकल चुका है। ठीक है? आगे देखिए। एक इन्वेस्टर है। वह विश करता है कि वह कंस्ट्रक्ट करें एक पोर्टफोलियो विद अ टोटल रिस्क यानी स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ 12%। यानी वो अपने स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो चाहता है 12% हो। यानी आपका जो उम्मीद है कि आपके स्टैंडर्ड डेविएशन पोर्टफोलियो कितना होना चाहिए? 12। ठीक है? बाय इन्वेस्टिंग पार्टली इन रिस्क फ्री एसेट एंड पार्टली इन मार्केट पोर्टफोलियो। यानी आप इन्वेस्ट करना चाहते हो पार्टली रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट्स और पार्टली मार्केट में। तो बेसिकली आप कॉम्बिनेशन बना रहे हो दोनों का। तो आप बेसिकली लेंडिंग पोर्टफोलियो की तरफ झुकाव है आपका। लेंडिंग मतलब आप कुछ पैसा रिस्क फ्री जगह लगाओगे। कुछ पैसा मार्केट में लगाओगे। ठीक है? तो पहले तो वो कहता है कि डिराइव करो आप cml की लाइन। तो cml की लाइन तो ये इक्वेशन है। तो इस इक्वेशन के लिए पहले स्लोप चाहिए। स्लोप निकाला यहां रखा और देखो फिर इक्वेशन बनाई। पहले स्लोप निकाला। स्लोप आ गया 4। ये तो समझ आ गया आपको। स्लोप कैसे निकाला? जी हां सर। 6:42:15 स्लोप निकालना तो काफी आसान था। फिर हमने एक्सपेक्टेड रिटर्न की जो इक्वेशन बनानी है वह बनाई रिस्क फ्री प्लस स्लोप इंटू स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो। तो आपका पोर्टफोलियो का स्टैंडर्ड डेवशन आपने 12% बता ही रखा है। आपने खुद ही कहा है कि मुझे अब मेरे पोर्टफोलियो के लिए स्टैंडर्ड डेविएशन 12% चाहिए। तो यहां पे 12% रख दिया बी और स्लोप हमने पहले ही निकाल लिया था और रिस्क रीट 6% है। सॉल्व किया एक्सपेक्टेड रिटर्न 10.8 आ गया। क्या आपको इक्वेशन बनानी समझ आई थी? यह इक्वेशन है। जल्दी बताइए। क्या आप लोगों को इक्वेशन बनानी समझ आई? क्या आपको एक्सपेक्टेड रिटर्न भी समझ आई पोर्टफोलियो की? जल्दी बोलिए। कुछ भी नहीं है। सिर्फ फार्मूला में वैल्यू पुट करी है। मतलब मैंने कुछ भी नहीं किया। पहले फर्स्ट पार्ट में इक्वेशन बनाकर छोड़ दी। सेकंड पार्ट में उसमें यहां पर वैल्यू डाल दी 12% की और मुझे एक्सपेक्टेड रिटर्न भी निकल कर आ गया। ठीक है? 6:43:18 डिटरमाइन द प्रोपोशन ऑफ द इन्वेस्टर्स फंड दैट शुड बी इन्वेस्टेड इन द मार्केट पोर्टफोलियो एंड इन द रिस्क फ्री एसेट। वह आपसे पूछ रहा है कि भाई अगर आपको कंबाइंड स्टैंडर्ड डेविएशन इतनी चाहिए, एक्सपेक्टेड रिटर्न इतनी चाहिए, तो आपको कितना-कितना पैसा कहां-कहां डालना पड़ेगा? दोनों जगह थोड़ा-थोड़ा पैसा रखोगे आप। अब सुनो, तो आप यह कहोगे कि वेट जो कितना होगा? मतलब मार्केट में कितना पैसा लगाऊं? मार्केट में स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ पोर्टफोलियो अपॉन स्टैंडर्ड डेवशन ऑफ मार्केट तो 60% पैसा हम लगाएंगे मार्केट के अंदर। अगर मार्केट में 60% पैसा लगाएंगे तो बचा हुआ 40% पैसा रिस्क फ्री एसेट्स पे लगाएंगे। तो बचा हुआ 40% पैसा मतलब अगर आपके पास ₹1 लाख है तो 60% आप यहां लगा दो और 40% आप यहां लगा दो। यह मतलब हुआ इसका। दोनों बातें क्लियर हो गई। 60 40 कैसे समझ आया? इसके लिए यह फार्मूला है। तो यानी अगर मैं आपसे पूछूं कि वेट ऑफ मार्केट पोर्टफोलियो क्या होगा? मतलब मार्केट में कितना पैसा लगाना है? स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ पोर्टफोलियो अपॉन स्टैंड डेविएशन ऑफ़ मार्केट। यह फार्मूला 6:44:18 भी लिख के रख लो। ठीक है जी? यह फार्मूला भी नोट्स वाली जगह पे भी अगर आप चाहते हो तो लिख कर रख लो अपने लिए कि अगर कोई आपको यह कहे कि आपका वेट ऑफ मार्केट कितना होना चाहिए? वेट ऑफ मार्केट इन्वेस्टमेंट कितनी होनी चाहिए? जो मार्केट में इन्वेस्टमेंट करनी है, वह कितना वेट होना चाहिए? तो आप कहोगे स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ पोर्टफोलियो अपॉन स्टैंडर्ड डेवशन ऑफ मार्केट। तो यानी अगर मैं आपसे पूछूं वेट ऑफ रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट कितनी होनी चाहिए? जो रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट है वो कितनी होनी चाहिए? तो आप बोलोगे 1 माइनस वेट ऑफ़ मार्केट इन्वेस्टमेंट। यानी कि 1 - स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ पोर्टफोलियो अप स्टैंडर्ड डेवशन ऑफ मार्केट। ये फार्मूला भी लिख लो। बोलिए ये फार्मूला समझ आ गया आपको? तो इस फ़ूला को अगर हम अप्लाई कर देते हैं। 6:45:19 यानी अगर हम इस फ़ूला को अप्लाई कर देते हैं, तो हमारे पास वेट ऑफ़ मार्केट इन्वेस्टमेंट और वेट ऑफ़ रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट भी आ जाएगा। यानी हमारे पास वेट ऑफ मार्केट इन्वेस्टमेंट और वेट ऑफ रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट भी निकल कर आ जाएगा। आई होप आपको यह बात भी समझ आ गई है। यहां पे भी लिख के रख लो। ठीक है सर। हमने ये नोट कर लिया। तो हमें मार्केट में कितना पैसा लगाना है? 60% और रिस्क फ्री एसेट में लगाना है 40%। क्योंकि रिस्क फ्री एसेट में पैसा लगा रहे हैं इसलिए यह लेंडिंग पोर्टफोलियो है। क्योंकि रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट में पैसा लगा रहा है 40% इसलिए यह लेंडिंग पोर्टफोलियो है। क्या यहां तक बातें समझ आ गई आपको? अब वो कहता है कि अगर मेरे पास ₹1 लाख हैं तो कैसे इन्वेस्ट करूं? 60 और 40 इन्वेस्ट करेंगे। 60% मार्केट में 40% रिस्क फ्री एसेट्स पे। और वेरिफिकेशन अगर आप करके देख लो तो आप अपने 60% पैसों पर 14% कमाओगे 6:46:22 क्योंकि मार्केट में लगाया है। 40% पैसों पे 6% कमाओगे क्योंकि रिस्क फ्री रेट कमाओगे तो आपकी टोटल रिटर्न 10.8% आ जाएगी। 10.8% आपकी टोटल रिटर्न आ जाएगी जो कि एक्सपेक्टेड रिटर्न यहां पे थी। 10.8 वही आपकी रिटर्न आ जाएगी। बोलिए बेटा दोबारा समझाऊं यह बात क्लियर है? क्लियर है आपको? बहुत बढ़िया। इसी के सेकंड पार्ट पर आते हैं। एक क्वेश्चन और पढ़ते हैं। अब वो कहता है कंस्ट्रक्टिंग अ बोरोइंग पोर्टफोलियो। अब देखो बोरोइंग पोर्टफोलियो क्या होता है? बोरोइंग पोर्टफोलियो उल्टा होता है। लेंडिंग पोर्टफोलियो में हम कुछ पैसा रिस्क फ्री एसेट पे लगाते हैं। बोरोइंग में हम कुछ पैसा बोरो करते हैं और वह भी मार्केट में लगा देते हैं। मतलब मार्केट में जो वेट होगा वो वन से भी ऊपर होगा। मतलब मार्केट में जैसे मान लो वेट हो गया 1.2 और बोरोइंग का जो वेट है वह है -.2 -.2 क्योंकि वहां से बोरोइंग की होगी ना मैंने। ऐसे मैं क्वेश्चन करा चुका हूं। कितने बच्चों को याद है कि ऐसे क्वेश्चन हम क्लास के अंदर पढ़ चुके हैं ऑलरेडी। बट हमने सीएमएल के थ्रू वो क्वेश्चन नहीं 6:47:22 पढ़े। हमने पढ़े हैं। लेकिन वो हमने अंडरस्टैंडिंग से पढ़े हैं। सीएमएल के कांसेप्ट से नहीं पढ़े। इसलिए मैं सीएमएल के कांसेप्ट के साथ जोड़कर उसे पढ़ा रहा हूं। आइए यूजिंग द सेम मार्केट डाटा जो ऊपर हमारा मार्केट डाटा था वही हम यूज़ कर रहे हैं। रिस्क फ्री रेट 6% एक्सपेक्टेड रिटर्न इन द मार्केट 14% मार्केट की स्टैंडर्ड डेविएशन 20% एन अग्रेसिव इन्वेस्टर विद ओन फंड्स ऑफ़ 8 लाख वांट्स टू अर्न अ टारगेट एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑफ़ 20%। अब वो कह रहा है भाई मेरा टारगेट रिटर्न 10.8 नहीं है। मुझे टारगेट रिटर्न ही 20% का चाहिए। मतलब मेरा टारगेट रिटर्न एक्सपेक्टेड रिटर्न 20% है और लिवरेजिंग द मार्केट पोर्टफोलियो। ठीक है जी। एंड बोरोविंग एट द रिस्क फ्री रेट टू इन्वेस्ट मोर देन 100% ऑफ़ द ओन फंड्स इन मार्केट पोर्टफोलियो। समझ आ गया ना आपको? यानी आप रिस्क फ्री जगह से बोरोविंग करोगे और अपने पैसों से ज्यादा पैसा मार्केट में लगा दोगे। आपके पास 8 लैक्स हैं। आप हो सकता है 9 लाख या 10 लाख मार्केट में लगा दोगे। ठीक है? तो पहले तो कहता है यूजिंग द सीएमएल इक्वेशन डिटरमाइन द टोटल रिस्क ऑफ द इन्वेस्टर्स पोर्टफोलियो मस्ट कैरी टू 6:48:23 अचीव द 20% टारगेट रिटर्न। देखो उसने एक बात खुद बोल दी कि मुझे सीएमएल यूज़ करना है। अगर वो क्वेश्चन में कह दे कि सीएमएल यूज़ करना है तो सीएमएल यूज़ करना है। फिर बात खत्म हो गई आपके लिए। ठीक है? और हमारी एक्सपेक्टेड रिटर्न कितनी है? 20%। तो देखिए आप पहले सीएमएल के लिए आपको स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो ढूंढना है। सीएमएल का फ़ूला क्या होता है? मैं एक बारी आपको ऐसे याद दिलाता हूं। देखो एक्सपेक्टेड रिटर्न कितनी होती है हमारी? आप कहते हो रिस्क फ्री रेट प्लस स्लोप इंटू स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो। यही फार्मूला होता है। ये इक्वेशन है किसकी? सीएमएल की। अगर मेरी एक्सपेक्टेड रिटर्न 20% है। रिस्क फ्री रेट 6% है। स्लोप जो है वह तो पहले ही निकाल लिया था। पिछले वाले क्वेश्चन में। कितना आया था? याद है किसी को? मुझे याद दिला दो कितना स्लोप था हमारा। उस पार्ट में 4 तो वही रहने वाला है अभी भी दोबारा 6:49:24 निकाल के दिखाऊं या समझ याद है आपको स्लोप कैसे आता है बेटा वो ऐसे आता है एक्सपेक्टेड रिटर्न इन द मार्केट माइनस रिस्क फ्री रेट अपॉन स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ मार्केट इससे आता है स्लोप तो ये है 20% ये है 6% ये है4 तो बताओ स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ पोर्टफोलियो कितना होगा मतलब मेरे पोर्टफोलियो का स्टैंडर्ड डेविएशन कितना होना चाहिए? 20% के लिए। इसे सॉल्व कर लो। इक्वेशन बनी है। इक्वेशन को सॉल्व करो। कितना आ जाएगा? 20 = 6 *4 तो 35% यानी स्टैंडर्ड डेविएशन पोर्टफोलियो आ जाएगा 35%। यानी अगर मैं अपने पोर्टफोलियो में 35% स्टैंडर्ड डेविएशन यानी रिस्क लेने लगूं तो मैं ज्यादा कमा सकूंगा। मतलब मुझे 35% रिस्क लेना पड़ेगा। तब जाके मैं 20% अर्निंग कर पाऊंगा। क्लियर हो गई यह बात भी आपको कि मैं कितना रिस्क ले पाऊंगा तो मैं कितना अर्न कर पाऊंगा। जी हां सर हमें यह बात समझ आ गई है। अब आगे पढ़िए। अब वो कहता है कि डिटरमाइन द प्रोपोर्शन ऑफ़ द फंड्स दैट मस्ट बी 6:50:25 इन्वेस्टेड। अब वो हमसे वेट की बात कर रहा है। याद करो हमने वेट क्या बताया था आपको? वेट मैंने आपको समझाया था। वेट जो मार्केट में लगाना है पैसा वो कैसे आएगा? स्टैंडर्ड डेवेशन ऑफ़ पोर्टफोलियो अपॉन स्टैंडर्ड ऑफ़ मार्केट यानी 35/20 यानी 1.75 यानी मुझे 1.75 गुना मतलब 175% पैसा मुझे लगाना पड़ेगा मार्केट में यानी 75% का लोन लेना पड़ेगा। यार अगर मेरे पास ₹100 हैं तो मुझे ₹175 मार्केट में लगाने हैं। यार एक बात बताओ वेट कभी भी वन से ऊपर कैसे हो सकता है? अगर किसी चीज का वेट वन से ऊपर है तो दूसरी चीज का वेट वन से नेग मतलब ज़ीरो से कम होएगा। नेगेटिव होएगा उतना। तो दूसरा वेट 1 - 1.75 यानी नेगेटिव है। इसका मतलब यह है कि मुझे 75% ऑफ द ओन मनी बोरो करना है ताकि मैं इन्वेस्ट कर पाऊं 175%। ठीक है जी। इसका मतलब यह है कि मेरे पास अपने फंड्स थे 800 मतलब 8000 मतलब ₹8 लाख। तो मुझे बोरोइंग करनी पड़ेगी 75%। तो यानी मुझे 75% ऑफ 8 लाख बोरोइंग करनी पड़ेगी। 6:51:29 यानी मुझे 8 लाख का 75% बोरोविंग करनी पड़ेगी। तो हमारा मार्केट में जो इन्वेस्टमेंट्स आ जाएगी वो ₹14 लाख की आ जाएगी। तो हमारी जो मार्केट में इन्वेस्टमेंट आ जाएगी वो ₹14 लाख की आ जाएगी। बोलिए बातें क्लियर है आपको? कूल तो वेरिफिकेशन क्या है? जी वेरिफिकेशन इसकी यही है। फिर कंपेयर करके देख लिया हमने। बोलिए बातें क्लियर हो गई? मैं मान के चलूं आपको सीएमएल के क्वेश्चन करने समझ आ गए। इक्वेशन तो हमने बनी हुई थी, पढ़ रखी थी। बस उसकी एप्लीकेशन हमने इस सेशन में सीख ली है। नो डाउट टिल नाउ। जल्दी बताइए बेटे। क्लियर? आइए दोस्तों, अब हम पोर्टफोलियो मैनेजमेंट चैप्टर में शार्पी ऑप्टिमल पोर्टफोलियो वैल्यू्यूएशन इसके बारे में पढ़ते हैं। वैसे यह क्वेश्चन हमने अपनी क्लास में कवर किया हुआ है रेगुलर बैच में। याद करो हमने यह वाला क्वेश्चन अपनी क्लास के अंदर पढ़ रखा है। ये आपकी क्लास में ही मुझे लगता है चैप्टर का लास्ट क्वेश्चन होगा। लास्ट 6:52:31 लास्ट वाला क्वेश्चन होगा। आप ढूंढेंगे तो मिल जाएगा। इसी के ऊपर बेस्ड एक और क्वेश्चन मई 2026 के एग्जाम में भी पूछा गया। तो ये दोनों क्वेश्चन मैं कवर कराना चाहता हूं। शार्पी ऑप्टिमल पोर्टफोलियो वैल्यू्यूएशन। नोट्स में मैं पहले एक बारी आपको रिकॉल करा देता हूं कि मैंने क्या पढ़ाया था। शार्पी ऑप्टिमल पोर्टफोलियो कैसे बनाया जाता है। ठीक है? सुनिए। इसमें हम सबसे पहले सिलेक्शन ऑफ सिक्योरिटीज करना चाहते हैं। वह भी बेस्ट वाली। मतलब हम यह चाहते हैं कि हम कौन-कौन सी सिक्योरिटीज को सेलेक्ट करें ताकि हमारा पोर्टफोलियो एक अच्छा से देखो इसमें दो स्टेप्स होंगे। पहले सिक्योरिटी सिलेक्शन फिर सिक्योरिटी का वेट सिलेक्शन। दो बातें हो गई ना? मान लो मैं मान लो मुझे पैसा इन्वेस्ट करना है। मेरे पास 10 सिक्योरिटीज की लिस्ट है। तो पहले मैं उनमें से सिक्योरिटी सेलेक्ट करूंगा। दो-तीन जो भी मैं जिनमें पैसा लगाना चाहता हूं। फिर मैं उनका वेट सेलेक्ट करूंगा कि उसमें कितना-कितना पैसा लगाऊं। राइट? यही इस क्वेश्चन में करना होता है। तो पहले आप सिलेक्शन ऑफ सिक्योरिटी करते हो। फिर सिलेक्शन ऑफ वेट करते हो। मतलब कैलकुलेशन ऑफ वेट करते हो हर एक सिक्योरिटी के लिए। सिलेक्टेड सिक्योरिटी के लिए। पहला स्टेप सिलेक्शन 6:53:32 ऑफ़ सिक्योरिटी। इसमें क्या होता है? पहले आप कैलकुलेट करो सभी के लिए ट्रेनर रेशियो और रैंक करो सिक्योरिटीज़ को उसके बेसिस पे। ट्रेनर रेशियो क्या होती है? ट्रेनर रेशियो का मतलब होता है जो आपका रिटर्न ऑफ़ सिक्योरिटी आएगी। क्योंकि मैं अलग-अलग सिक्योरिटीज़ को इवैलुएट कर रहा हूं। मान लो मैं Reliance की कंपनी में पैसा लगा सकता हूं। Tata में पैसा लगा सकता हूं, Mahindra में पैसा लगा सकता हूं। ऐसे कुछ भी कंपनीज़ हैं, मैं उनमें पैसा इन्वेस्ट कर सकता हूं। ठीक है? मान लो यह मेरे पास पॉसिबल कंपनीज़ हैं। तो, मैं सबकी ट्रेनर रेशियो निकालूंगा और उसके हिसाब से उन्हें रैंक कर दूंगा। ट्रेनर रेशियो समझते हो क्या होता है? रिटर्न ऑफ़ सिक्योरिटी माइनस रिस्क फ्री रेट अप बीटा ऑफ़ सिक्योरिटी। यानी यहां स्टैंडर्ड डेविएशन नहीं आता। अगर यह स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ सिक्योरिटी आ रहा होता, तो फिर वह शार्पी बन जाता। हमें शार्पी नहीं चाहिए। ट्रेनर चाहिए। ट्रेनर में इधर बीटा आता है। ठीक है? नाउ मेक न्यू टेबल बाय अरेंजिंग सिक्योरिटीज इन द ऑर्डर ऑफ रैंकिंग। यानी अब आप सिक्योरिटीज को दोबारा बनाओ लिस्ट में। लेकिन इस बार रैंक वाइज बनाओ। जो रैंक वन है सबसे ऊपर रैंक टू, रैंक थ्री, रैंक फोर। ऐसे रैंक वाइज बनाओ। ठीक है सर। हम रैंक वाइज़ भी अरेंज कर देंगे उन्हें। अब कैलकुलेट करो 6:54:35 कट ऑफ रेट फॉर ईच सिक्योरिटी। सिक्योरिटीज़ के लिए कट ऑफ रेट से हम सेलेक्ट करते हैं कि इस कट ऑफ रेट से नीचे हम सिक्योरिटीज़ को सेलेक्ट नहीं करेंगे। यानी जो क्यूमुलेटिव के हिसाब से। तो कट ऑफ रेट कैसे आता है? यह फार्मूला यही गंदा स्टेप है। मतलब सच्चाई बताऊं तो पूरे क्वेश्चन में यही एक गंदा स्टेप है। इसीलिए इंस्टट्यूट ने एग्जाम में जब क्वेश्चन दिया तो इसी स्टेप को अवॉइड करने के लिए उन्होंने कट ऑफ रेट खुद दे दिया ताकि बच्चे के लिए बहुत टफ क्वेश्चन ना बने। मैं आपको लेकिन दोनों तरीके से क्वेश्चन कराऊंगा। एक क्वेश्चन कराऊंगा जिसमें कट ऑफ रेट हमें निकालना होता है और एक क्वेश्चन कराऊंगा जो एग्जाम में आए मे 2026 के कि जिसमें कट ऑफ रेट गिवेन होता है। मैं दोनों तरीके का एक-एक क्वेश्चन करा दूंगा आपको। ठीक है? सुनो। तो कट ऑफ रेट कैसे आता है? ये फार्मूला आपको याद करना पड़ता है। कैसे? आप लिखते हो कट ऑफ रेट का मतलब यह है स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ मार्केट का स्क्वायर यानी वेरियंस ऑफ़ मार्केट। तो ये वेरियंस ऑफ़ मार्केट हो गया। अब रिटर्न ऑफ़ इन्वेस्टमेंट्स माइनस रिस्क फ्री रेट * बीटा अपॉन आप ये कह सकते हो अनसिस्टेमैटिक रिस्क। क्योंकि ये कौन सा है? एरर टर्म की बात हो रही है। ये एरर 6:55:36 टर्म की बात हो रही है। यानी अनसिस्टेटिक रिस्क की बात हो रही है डिनोमिनेटर में। अपॉन 1 प्लस वेरियंस ऑफ़ मार्केट इंटू स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ बीटा का स्क्वायर अपॉन अनसिस्टेटिक रिस्क और यह क्यूम्युलेटिव है। क्यूमुलेटिव मतलब ऐड कर करके लिखना होता है। ठीक है ना? अकेला नहीं लिखना होता। एक के पिछले वाले के साथ दूसरे वाले को ऐड करके लिखना होता है। तो सिग्मा मींस क्यूम्युलेटिव वैल्यू। सो वी विल सेलेक्ट सिक्योरिटीज़ ओनली अप टू दी हाईएस्ट कट ऑफ रेट। हम कट ऑफ रेट बनाएंगे। जहां पे कट ऑफ रेट हाईएस्ट होगा वहीं तक की सिक्योरिटीज़ सेलेक्ट होंगी। उसके बाद वाली सिक्योरिटीज़ रिजेक्ट हो जाएंगी। यानी जहां पर भी हमारा हाईएस्ट कट ऑफ रेट आता होगा वही हमारा कट ऑफ पॉइंट हो जाएगा। सो हम उन्हीं सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट करेंगे जो कट ऑफ पॉइंट तक हैं उसके बिय्ड वाली सिक्योरिटीज में पैसा नहीं लगाएंगे। ठीक है? फिर वेट कैलकुलेशन होगा। वेट के लिए क्या फार्मूला है? वेट के लिए ये फार्मूला है। बीटा ऑफ़ सिक्योरिटी को देखो। जिस सिक्योरिटी को हमने सेलेक्ट कर लिया कि भैया चलो इस सिक्योरिटी में पैसा लगाना है। तो उसके बीटा को देखो। उसकी ट्रेनर रेशियो को देखो। माइनस करो उसमें से कट ऑफ 6:56:36 पॉइंट अपॉन करो अनसिस्टेटिक रिस्क। तो इससे आपके पास बीटा आपके पास Z1 आएगा और Z1 / टोटल ऑफ Z1 से वेट आएगा हर एक सिक्योरिटीज का। यानी पहले हर एक जोज सिलेक्टेड सिक्योरिटीज़ हैं सिलेक्टेड उनका ZY निकालो और फिर ZI / टोटल ऑफ़ ZI ये वेट बता देगा आपको हर एक सिक्योरिटी का। मान लो हमने दो सिक्योरिटी सेलेक्ट करी। तो पहले Zi निकालो फर्स्ट का। फिर Zi निकालो सेकंड का। फिर उसको न्यूमैरेटर में रख के टोटल से डिवाइड कर दो। दोनों का वेट आ जाएगा। अगर दो है तो वैसे और भी आसान है। क्यों? क्योंकि अगर पहले का वेट निकाल लिया तो वन माइनस करके दूसरे का वेट निकल आएगा। भाई अगर पहली सिक्योरिटी में मैं 70% पैसा लगा रहा हूं तो दूसरी वाली में 30 लगाऊंगा। बात खत्म हो गई। तो तो फिर सेकंड वाले का वेट निकालने की जरूरत भी नहीं पड़ती। ठीक है सर थोड़ा-थोड़ा तो समझ आया। अब आप इसे क्वेश्चन के थ्रू समझाओ ये बात सारे स्टेप्स। ठीक है बेटे। देखिए रमेश वांट्स टू इन्वेस्ट इन स्टॉक मार्केट। मान लो आपका नाम रमेश है और आप स्टॉक मार्केट में पैसा लगाना चाहते हो। आपके पास कुछ इनफेशन है इंडिविजुअल सिक्योरिटीज वो कहता है ए बी सी डी ई एफ ये ये हमारे पास 1 2 3 4 5 6 छह 6:57:38 सिक्योरिटीज का चॉइस है। ये उनकी एक्सपेक्टेड रिटर्न है। ये उनका बीटा है। ये उनका अनसिस्टेटिक रिस्क है। ठीक है जी। और वो कहता है मार्केट इंडेक्स वेरियंस इज़ 10% मार्केट की इंडेक्स वेरियंस 10% है। तो वेरियंस ऑफ़ मार्केट 10 है। ठीक है? यानी स्टॉक मार्केट जो अगर स्टैंडर्ड डेविएशन बोलोगे तो अंडर रूट ऑफ़ 10 होगी। फिर और रिस्क फ्री रिटर्न 7% है। वो कहता है जी आपको किससे सॉल्व करना है? आपको ऑप्टिमल पोर्टफोलियो निकालना है। ऑप्टिमल पोर्टफोलियो ऑब्वियस सी बात है जब मल्टीपल सिक्योरिटीज होती है और उनमें से मुझे सिलेक्शन करनी होती है तो शार्पी का ऑप्टिमल पोर्टफोलियो मॉडल लगता है। शार्पी का ऑप्टिमल पोर्टफोलियो मॉडल क्योंकि यहां पे एक से ज्यादा सिक्योरिटीज़ हैं। तो मुझे सिलेक्शन करनी है ना किसको सेलेक्ट करूं किसको ना करूं? तो पहला क्या होगा? सिलेक्शन ऑफ़ सिक्योरिटी। दूसरा स्टेप क्या होगा? वेट्स कितने हैं? चलो ठीक है। हम इसका सॉल्यूशन देखते हैं। देखिए जी मैंने इसका वे सॉल्यूशन इधर नहीं लिखा ना। मुझे सॉल्यूशन ना कॉपी में से अपनी उठा के लाना पड़ेगा। ये देखिए ये मैं इधर कॉपी कर दूंगा। क्वेश्चन नंबर 58 है ये हमारी बुक का। देखिए सबसे पहले आप क्या करेंगे? 6:58:41 आप स्टेटमेंट ऑफ रैंकिंग बनाओ। आपने क्या किया? छह की छह सिक्योरिटीज की ट्रेनर रेशियो निकाली। सबकी ट्रेनर रेशियो निकालनी तो बहुत आसान है। रिटर्न ऑफ सिक्योरिटी माइनस रिस्क फ्री रेट होल अप बीटा ऑफ सिक्योरिटी। तो उससे ट्रेनर रेशियो आई। ट्रेनर रेशियो के हिसाब से रैंकिंग करी। यह रैंक वन है। फिर यह रैंक टू है। फिर यह रैंक थ्री है। ऐसे रैंक वाइज बना दिया। अब यह रैंकिंग डिसाइड हो गई। अब सिक्योरिटीज को रैंक वाइज दोबारा लिखो। तो हमने क्या किया? सबसे पहले वन रैंक ए था तो वन रैंक ए है। सेकंड रैंक एफ है। थर्ड रैंक बी है। उसके हिसाब से रैंकिंग के हिसाब से सिक्योरिटीज को अरेंज कर दिया। तो यानी हम कहां पहुंच गए? अगर स्टेप वाइज देखोगे तो आप यह बोलोगे सर हमने ट्रेनर रेशियो निकाल ली, रैंकिंग कर ली। रैंकिंग के हिसाब से अरेंजमेंट कर ली। यहां तक सही है आपको सब कुछ? ठीक है? यानी हमने यहां पर अरेंजिंग दी सिक्योरिटीज तक का काम कर लिया। अब हमें कट ऑफ रेट निकालने हैं सभी सिक्योरिटीज के। कट ऑफ रेट कैसे आएंगे? 6:59:42 वेरियंस ऑफ़ मार्केट हमें पता है 10 है। तो यहां यहां 10 और 1 + 10 हो जाएगा। और फिर यह ri - rf * बीटा अपॉन अनसिस्टेटिक रिस्क निकालो। तो देखो हमने क्या किया? हमने इसके छोटे-छोटे टुकड़े निकालने सॉल्व करें। पहले ri - rf * बीटा / वेरियंस निकाल दिया जो अनसिस्टेटिक रिस्क था। इसे सॉल्व कर दिया। यानी ये वाला पार्ट न्यूमैरेटर वाला पार्ट सॉल्व कर दिया अलग से। ठीक है जी। फिर इसको क्यूम्युलेट कर दिया। इसे क्या कैसे रखना है? क्यूमुलेटिव करके। क्यूमुलेटिव मतलब पहले ये 3 रखा। फिर3 में 35 ऐड कर दिया। 65 हो गया। 65 में 5 ऐड कर दिया 1.15 हो गया। 1.15 में 2 ऐड कर दिया। 1.35 हो गया। ऐसे करके क्यूम्युलेटिव भी कर दिया। क्योंकि मैंने क्या कहा था फार्मूला में? याद करिए। मैंने फार्मूला में आपको बोला था कि ये क्यूम्युलेटिव होना चाहिए। क्यूम्युलेटिव। तो क्यूमुलेट पहले कैलकुलेट की वैल्यू्यूज फिर उन्हें क्यूम्युलेट किया। क्या सर इतना बुरा क्वेश्चन आएगा? बेटा अब आ सकता है। पहले तो मैं भी कहता था नहीं आता। पर जब मे 2026 के एग्जाम में दे सकता है तो फिर आगे 7:00:42 कभी भी दे सकता है वो। है ना? तो ये क्यूम्युलेट कर दिया हमने। अब क्यूमुलेट करने के बाद आपने इसके डिनोमिनेटर को निकालना स्टार्ट किया और फिर उसे क्यूमुलेट करेंगे। तो बीटा² अप वेरियंस ऑफ जो अनसिस्टेटिक रिस्क है। तो बीटा² अप अनसिस्टेटिक रिस्क निकाल के हमने ये डिनोमिनेटर निकाला। अब डिनोमिनेटर को भी क्यूमुलेट करो क्योंकि इसे भी क्यूमुलेटिव करना होता है। तो चलो 56 फिर इसमें इसे ऐड करके दिखा दिया। फिर इसके साथ इसे ऐड करके दिखा दिया। फिर इसके साथ इसे ऐड करके दिखा दिया। यह हमने डिन न्यूमैरेटर भी एक्यूमुलेटिव निकाल दिया और डिनोमिनेटर भी क्यूमुलेटिव निकाल दिया। तो अब ये भी निकल चुका है। ये भी निकल चुका है और 10 और 10 ये भी पता है हमें। तो बस फार्मूला लगाओ 10 / 1 + 10 *3 /056 तो ये आपका पहले वाला कट ऑफ पॉइंट आया। पहली सिक्योरिटी का कट ऑफ पॉइंट आया। फिर ऐसे ही दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा निकाल दिया, छठा। सबके कट ऑफ पॉइंट निकाल दिए। 7:01:43 तो जो कट ऑफ पॉइंट हाईएस्ट आ रहा है वहां तक की सिक्योरिटी सेलेक्ट होंगी। यानी यहां लाइन डाल दो। इसके बाद वाली सिक्योरिटी रिजेक्ट हो जाएंगी। पर सर रिजेक्ट तो तभी होगी ना जब पहले कैलकुलेट तो होगा। कैलकुलेट तो पूरा करना पड़ेगा मुझे। यानी मैं पहले कैलकुलेट करूंगा सबके लिए कट ऑफ पॉइंट और फिर कट ऑफ पॉइंट जहां पे हाईएस्ट आ रहा है वहां तक की सिक्योरिटी सेलेक्ट करूंगा। उसके बाद वाली सिक्योरिटी सेलेक्ट नहीं करूंगा। उसके नीचे वाली सिक्योरिटीज़ हम सेलेक्ट नहीं करेंगे। करेक्ट? तो यानी मुझे सिर्फ वन और टू रैंक वाली सिक्योरिटीज यानी ए और एफ में ही इन्वेस्टमेंट करनी है। मुझे इन्वेस्टमेंट कहां करनी है? ए में और एफ में। ठीक है सर ये बात भी समझ आ गई कि आप अपनी इन्वेस्टमेंट सिर्फ सिक्योरिटी ए में और सिर्फ सिक्योरिटी एफ में करना चाहते हो। फिर आइए वेट पे। वेट कैसे आता है? वेट के लिए पहले zi निकाल लो। zi आएगा बीटा ऑफ़ द सिक्योरिटी * ट्रेनर रेशियो ऑफ़ द सिक्योरिटी माइनस कट ऑफ पॉइंट अपॉन अनसिस्टेटिक रिस्क। यानी आपने क्या किया? आपने पहले zi निकालने का फार्मूला लगा। Zi ऑफ़ A निकाला, Zi ऑफ़ F निकाला। दोनों का Zi निकाल लिया। दोनों का ZI टोटल कर लिया। 7:02:46 टोटल ZI तक पहुंच गए। तो वेट ऑफ़ A कितना होगा? A का ZI / टोटल ZI तो यानी 50.51% पैसा A में लगाएंगे और 49.49% पैसा F में लगाएंगे। तो हमें समझ आ गया कि A सिक्योरिटी में इतना पैसा, B से और F सिक्योरिटी में इतना पैसा। यानी दोनों सिक्योरिटीज में कितना-कितना पैसा मुझे रीइ्वेस्ट करना है। ये बात मुझे समझ आ गई। बोलिए क्लियर हो गई ये बात आपको? क्या मैं मान के चलूं आपको ये सारी की सारी कहानी समझ आ गई है बेटा अच्छे से? बढ़िया तरीके से समझ आ गया। शार्पी ऑप्टिमल पोर्टफोलियो मॉडल भी। ये क्वेश्चन था जो मैंने यहां पे आपको क्वेश्चन नंबर थ्री बना के दिया है नेक्स्ट में। ठीक है ना? ये सेम क्वेश्चन रिपीट करा है ताकि आपका बेस बिल्ड अप हो। ठीक है? मैं आपको इसके नोट्स, इसके क्वेश्चन का सॉल्यूशन सब कुछ दे दूंगा। डोंट वरी। अब आता है मई 2026 के एग्जाम का क्वेश्चन। उन्होंने क्या पूछा? उन्होंने कहा एक पोर्टफोलियो मैनेजर है। वह फिगर आउट कर रहा है फोर सिक्योरिटीज को कंस्ट्रक्ट करना चाहता है ऑप्टिमल रिस्की पोर्टफोलियो यूजिंग शार्पे इंडेक्स मॉडल। ठीक है? हमें पता लग गया शार्पी का मॉडल लगेगा। दी सिक्योरिटीज़ आर ट्रेडेड इन एन एफिशिएंट मार्केट एंड फॉलो सीएपीएम 7:03:48 एजम्पशन। द फॉलोइंग इनफेशन इज़ अवेलेबल। वो कहता है जी चार सिक्योरिटीज़ हैं। एक्सपेक्टेड रिटर्न है। बीटा है और रेडुअल वेरियंस यानी जो हमारी अनसिस्टेटिक वेरियंस है वो बचती है। तो यानी देखो एक्सपेक्टेड रिटर्न यहां थी। यहां भी दी है। बीटा यहां दिया था। यहां भी दिया है। एक और रेडुअल वेरियंस यहां थी। यहां भी दिया है। यानी एक तरीके से मैं यूं कहूं कि पूरा का पूरा क्वेश्चन सेम तरीके से बनाया उसने। हां या ना? बट हमने छह सिक्योरिटीज़ के लिए किया। वो चार सिक्योरिटीज़ हैं। बट क्वेश्चन में एक बड़ा बदलाव है। यहां पे भी रिस्क फ्री रेट 7% था। यहां 6% है। ठीक है जी। और यहां पे एक्सपेक्टेड रिटर्न इन द मार्केट ऑलरेडी 14% आपको दे रखा है निकाल के। और वो यह कहता है कि इधर जैसे मार्केट की इंडेक्स वेरियंस ऑलरेडी 10 पता थी हमें। यहां पर मार्केट की वैरियंस ऑलरेडी04 पता है। ठीक है? बट एक इंपॉर्टेंट चीज उसने एक्स्ट्रा दे दी कट ऑफ रेट। यह कट ऑफ रेट पहले हमें नहीं दिया हुआ था पिछले क्वेश्चन में। और वो यह कह देता है जी हम आपको कट ऑफ रेट पहले ही बता रहे हैं। ठीक है? 7:04:49 अब पहले समझिए गिवेन दी कट ऑफ रेट आइडेंटिफाई द सिक्योरिटीज़ टू बी इंक्लूडेड इन ऑप्टिमल पोर्टफोलियो। वो कह रहा है जी मैं ही आपको कट ऑफ रेट दे रहा हूं। यानी अब आप सिक्योरिटी सेलेक्ट करो। तो देखो हमने क्या किया? हमने पहले सभी के लिए कैलकुलेशन करी एक्सपेक्टेड रिटर्न - RF/ बीटा की। यानी एक तरीके से हमने सभी के लिए पहले ट्रेनर रेशियो निकाल लिया। याद करिए ट्रेनर रेशियो कैसे आता था? रिटर्न ऑफ़ द सिक्योरिटी माइनस रिस्क फ्री रेट अप बीटा ऑफ़ द सिक्योरिटी। यानी एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑफ द सिक्योरिटी माइनस रिस्क फ्री रेट अप बीटा बीटा दिया हुआ है ना क्वेश्चन में क्योंकि हमें बीटा से डिवाइड कर दिया तो यह एक तरीके से हमारे पास ट्रेनर रेशियो निकल आई बोलिए हां या ना कितनी-कितनी आई इसे वेरीफाई कर लो चाहे तो करिए जरा जल्दी-जल्दी वेरीफाई एग्जामिनर ने क्या किया है आपका ट्रेनर रेशियो निकाला ट्रेनर रेशियो आ गई ये वाली लिख लो इसे लिखना है तो ट्रेनर रेशो 7:05:49 अब इस रेश्यो को सीधा कट ऑफ रेश्यो से कंपेयर कर लिया कट ऑफ रेट से कंपेयर कर लिया। अब आप बोलोगे कि क्यों ऐसा किया? क्योंकि देखो वह कहता है सिक्योरिटीज हुस एक्सेस रिटर्न टू रिस्क रेशियो इज अबव द कट ऑफ रेट आर सिलेक्टेड एंड हुस रेशियो इज बिलो आर रिजेक्टेड। मतलब जिनका भी जो हमने ये ट्रेनर रेशियो निकाली है। जिनकी भी ट्रेनर रेशो कट ऑफ रेट से अधिक नहीं है। उन्हें रिजेक्ट कर दो। सर पहले तो ऐसा नहीं था। मैं पहले वाला कांसेप्ट भी दोबारा बताता हूं। ध्यान दो पहले इस पे इसकी सिलेक्शन कर दूं। देखो यहां पे क्या हो रहा है? कट ऑफ रेट से कम है तो यह रिजेक्ट हो गया। यह भी कट ऑफ रेट से कम है तो यह भी रिजेक्ट हो गया। यानी ये भी रिजेक्ट ये भी रिजेक्ट। लेकिन ये कट ऑफ रेट से ज्यादा है। इसकी ट्रेनर रेशियो ज्यादा है। यानी और आपको मैंने बताया था ट्रेनर रेशियो, एसआरपी रेशियो, जसन अल्फा हायर द बेटर होते हैं। जितनी ज्यादा होती है उतनी बेटर है। अब क्योंकि ये ज्यादा है इसलिए ये बेटर हैं। इसलिए इनसिक्योरिटीज़ को सेलेक्ट करेंगे। यानी हम सिक्योरिटी 7:06:50 नंबर बी को सेलेक्ट करेंगे और सिक्योरिटी नंबर डी को सेलेक्ट करेंगे। सर लेकिन पिछले क्वेश्चन में क्या किया था? अगर आप ध्यान से देखो जो मैंने पिछला क्वेश्चन कराया उसमें हमने कट ऑफ रेट निकाला था। तो मैंने क्या कहा था? जहां पे भी कट ऑफ रेट हाईएस्ट आ जाएगा उसके बाद वाली सिक्योरिटी सारी इग्नोर कर दो। क्यों? क्योंकि मैं आपको एक बात समझाता हूं। जो कट ऑफ रेट हमारा आया हाईएस्ट हाईएस्ट कट ऑफ रेट कितना आया? 2.814। हाईएस्ट कट ऑफ रेट कितना आया? 2.814। ये कैलकुलेशन उसने खुद कर दी है। तो एक्चुअल में जिनका भी कट ऑफ रेट 2 814 अगर आ रहा है तो जिनका भी ट्रेनर रेशियो 2.814 से ज्यादा होगा वो सिक्योरिटी सेलेक्ट हुई थी। यानी एक्चुअली में ये सारी सिक्योरिटी रिजेक्ट क्यों हुई थी? क्योंकि इनका ट्रेनर रेश्यो 2.814 से ज्यादा नहीं था। तो खाली वही सिक्योरिटी वन और एफ सेलेक्ट की थी ना पिछले क्वेश्चन में हमने। क्यों? क्योंकि उनका ट्रेनर रेश्यो 2.814 से ज्यादा था। यानी वो सिक्योरिटी सेलेक्ट होती हैं। एक्चुअल में क्या है कि मैंने आसान कैसे बनाया? मैंने उसके लिए रैंकिंग पहले ही करा दी और रैंक के ऑर्डर में लगा 7:07:52 दिया। अब जब रैंक के ऑर्डर में लगा दिया और यहां तक सिलेक्शन करनी है तो इसका मतलब यह है कि इसके नीचे वाली सारी रैंक्स रिजेक्ट हो गई और इससे ऊपर तक की सारी की सारी रैंक सिलेक्ट हो गई। मैंने काम और आसान कर दिया। थॉट ज्यादा नहीं लगवाया। एग्जामिनर ने एग्जाम में क्या किया? क्योंकि ये कॉलम ही नहीं बनवाया उसने। उससे उसने आपसे यह इतनी सारी मेहनत बचवा ली तो अच्छी बात है। थैंक यू बोलो क्योंकि उसने इतनी सारी मेहनत बचवा ली आपकी। तो उसने सीधा आपको हाईएस्ट वाला कट ऑफ रेट दे दिया। तो जुगाड़ क्या है? तरीका क्या है कि अब मैं खुद थोड़ी ना फिर दोबारा सॉल्व करूंगा इन्हें। तो तरीका यह है कि अगर हाईएस्ट कट ऑफ रेट मुझे पता चल चुका है। तो जिनकी भी ट्रेनर रेशियो उससे ज्यादा है उन्हें सेलेक्ट कर लो और जिनकी भी ट्रेनर रेशियो उससे कम है उन सबको रिजेक्ट कर दो। तो यहां भी हमने ऐसा ही किया। जिनकी ट्रेनर रेशियो उससे ज्यादा थी उन्हें सेलेक्ट कर लिया। बाकी सबको रिजेक्ट कर दिया। यह बात आपको समझ आ गई मैंने क्या कहा? ठीक है जी। आगे देखिए। तो हमें सिक्योरिटी से समझ आ गई। अब हम क्या करेंगे? परसेंटेज टू बी इन्वेस्टेड। 7:08:53 वही वाला परसेंटेज टू बी इन्वेस्टेड वाला यही वाला फार्मूला लगाएंगे। बीआई निकालने वाला। तो, हम क्या करेंगे? चलिए, यह फार्मूला उन्होंने लिख दिया बीआई वाला। तो सिक्योरिटीज़ के लिए दोनों के लिए उसने मतलब मैं इसे Zi बोलता हूं। ZI फॉर ईच सिक्योरिटी। तो उसने दोनों की ZI निकाली। देखो दोनों की ZI कितनी-कितनी आई? 22.8 एंड 12.91 और जब दोनों की Zi आई उसे टोटल से डिवाइड कर दो। तो यानी 22.8 को दोनों के टोटल से डिवाइड कर दो। और फिर दूसरे की ZI को भी दोनों के टोटल से डिवाइड कर दो। तो वेट्स आ गए। यानी हमारा वेट कितना है? डी सिक्योरिटी में इतना वेट है और बी सिक्योरिटी में इतना वेट है। यानी हमें पैसा लगाना चाहिए बी सिक्योरिटी और डी सिक्योरिटी में इतनाइतना। ठीक है जी? यह बात भी आपको समझ आ गई। अब क्वेश्चन और क्या बोलता है? यूजिंग सीएपीएम कंप्यूट दी एक्सपेक्टेड रिटर्न एंड द वैल्यू ऑफ़ ईच सिलेक्टेड सिक्योरिटी। दोनों सिक्योरिटी जो सेलेक्ट की है आपने उनका सीएपीएम से निकालो। तो देखो सीएपीएम 7:09:53 क्या कहता है? रिस्क फ्री रेट प्लस बीटा * एक्सपेक्टेड रिटर्न। हमें सब कुछ पता है। हमें इन दोनों सिक्योरिटीज़ का बीटा पता है। एक्सपेक्टेड रिटर्न यहां पे गिवन है क्वेश्चन के अंदर। और हमारे पास बीटा भी पता है। मार्केट का रिस्क फ्री रेट भी पता है। एक्सपेक्टेड रिटर्न भी पता है। तो यह वाली रिटर्न मत देखो। आप सीएपीएम की रिटर्न निकालो। तो आपने सीएपीएम की रिटर्न निकाल दी। जबकि हमें एक्सपेक्टेड रिटर्न कितनी है? 15 और 11 तो 15 और 11 यानी सीएपीएम जो है ध्यान से सुनो। सीएपीएम कहता है कि यह बी सिक्योरिटी कमा देगी 14.8 लेकिन हमें उम्मीद है कि उससे ज्यादा कमाई हो जाएगी। हमें उम्मीद है मार्केट में कि उससे ज्यादा कमाई होगी। इसका मतलब जितना पैसा कमाना चाहिए था उससे भी ज्यादा कमाई हो जाएगी। उससे भी ज्यादा कमाई हो जाएगी। यानी हमारे हिसाब से यह सिक्योरिटी ज्यादा कमाएगी। ज्यादा कमाएगी। मतलब मार्केट में यह अंडरवैल्यूड है। इसे बाय करो। ऐसे यह सिक्योरिटी भी अंडरवैल्यूड है। इसे बाय करो। तभी तो इन्हें बाय कर रहे हैं क्योंकि यह दोनों सिक्योरिटी हमारे नजरिए में अंडरवैल्यूड है। ठीक है जी। 7:10:58 आइए फोर्थ पॉइंट पे। व्हाई इज दी पोर्टफोलियो कंस्ट्रक्टेड यूजिंग शार्पी मॉडल कंसिस्टेंट विद सीएपीएम एजम्पशन? वो कह रहा है कि ये दोनों क्यों कंसिस्टेंट रिजल्ट देते हैं? मतलब जैसे अगर आप सिक्योरिटीज़ को देखो सीएपीएम मॉडल से। तो सीएपीएम मॉडल में जितना कमाना है उससे ज्यादा अगर एक्सपेक्टेड रिटर्न है तो इन सिक्योरिटीज को सेलेक्ट करना चाहिए क्योंकि ये अंडरवैल्यूड है। बाकी सिक्योरिटीज ओवरवैल्यूड आ रही होंगी। ए और बी ए और सी वाली सिक्योरिटी आप करके देखना ओवरवैल्यूड आ रही होगी। यानी सीएपीएम मॉडल के अकॉर्डिंग भी उन्हीं को रिजेक्ट करना है। शार्पी के अकॉर्डिंग भी उन्हीं को रिजेक्ट करना है और बी और डी को ही सेलेक्ट करना है। ऐसा क्यों? क्योंकि द पोर्टफोलियो कंस्ट्रक्टेड बाय शार्पी इंडेक्स मॉडल इज़ फुल्ली कंसिस्टेंट विद सीएपीएम एज़ इट इंक्लूड ओनली सिक्योरिटीज़ ऑफरिंग सुपीरियर रिस्क एडजस्टेड रिटर्न। क्योंकि दोनों का एक ही ऐ है कि उन सिक्योरिटीज को सेलेक्ट करो। उन सिक्योरिटीज को इंक्लूड करो जो सुपीरियर रिस्क एडजस्टेड रिटर्न देती हैं। मतलब जो रिस्क को एडजस्ट करने के बाद ज्यादा रिटर्न देती हैं। जैसे मैं क्लास में बोलता हूं कि हमें सिर्फ ज्यादा रिटर्न नहीं देखनी। मोर रिटर्न विद रिस्पेक्ट टू 7:11:59 रिस्क देखनी होती है। याद है मैंने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और साथ ही साथ म्यूच्यूल फंड दोनों में ये बात समझाई है कि आपको वो रिटर्न कमानी है जो मार्केट से ज्यादा हो। एक्सपेक्टेड रिटर्न ज्यादा हो और रिस्क कम हो रिस्क के नजरिए से तो दोनों ही से इन दोनों में ही रिस्क के नजरिए से अर्निंग को देखा जाता है। इसलिए इन दोनों के रिजल्ट भी कंसिस्टेंट होते हैं। मतलब जो शार्पी कह रहा होगा वही सीएपीएम मॉडल भी कह रहा होगा। दोनों के रिजल्ट सेम आएंगे नेट नेट बेसिस पे दोनों के ही रिजल्ट सेम आएंगे। ये कह रहे हैं हम। समझ आ गई आपको बातचीत? देखो मैं मानता हूं कि बुरे फार्मूला है। बट वैसे अगर आप ध्यान से देखो तो ये जो क्वेश्चन इंस्टट्यूट ने अपने एग्जाम में दिया था वो गंदा नहीं था क्योंकि उसने कट ऑफ रेट वाला जो सबसे बड़ा वाला ये स्टेप है ना ये पूरा का पूरा स्टेप ही उसने स्किप करवा दिया। बट हां बच्चे को इंटरप्रिटेशन पता होनी चाहिए थी कि ये स्टेप स्किप करना है। क्यों? क्योंकि अगर बच्चा यहां फंस जाए कि वो कट ऑफ रेट को किससे कंपेयर करे। क्योंकि कट ऑफ रेट वो उसे समझ ही ना आए कि कंपेयर ट्रेनर से करते हैं तो फंस जाता। तो एक नोट और लिख लो। ऐसे एक नोट लिख लो। इसी फार्मूला के नीचे 7:13:01 एक नोट लिखो। ठीक है ना? 7:13:14 देखिए जी। मतलब स्टेप सी के नीचे कहीं भी आप लिख लो। इफ कट ऑफ रेट इज ऑलरेडी गिवन इन द क्वेश्चन। 7:13:41 यानी अगर कट ऑफ रेट क्वेश्चन में ऑलरेडी गिवन होगा देन वी विल सेलेक्ट सिक्योरिटीज 7:13:57 डायरेक्टली स्किप स्टेप वन सेलेक्ट दोज सिक्योरिटीज यानी उन सिक्योरिटीज को चुनो जिनका ट्रेनर रेशियो इज ग्रेटर देन गिवन कट ऑफ पॉइंट 7:14:32 यानी जिनका भी ट्रेनर रेश गिवन कट ऑफ पॉइंट से ज्यादा होगा। उन सिक्योरिटीज को आप सेलेक्ट कर लो। एंड रिजेक्ट सिक्योरिटीज कौन सी सिक्योरिटीज को रिजेक्ट करूं? हुस ट्रेनर रेशियो इज लेस देन गिवन कट ऑफ रेट। 7:15:09 क्या यह बातें भी आपको समझ आ गई दोस्तों? अच्छे से समझ आ गई जी। कोई प्रॉब्लम तो नहीं मुन्ना? पक्की बात है। यह नोट लिख लो। क्वेश्चन हो जाएगा आपसे। अब आप इन दोनों क्वेश्चंस को ट्राई कर लेना एक बारी। थोड़े बोरिंग तो हैं बट अपने हाथ से ट्राई कर लेना। समझ आ जाएंगे। बढ़िया हो जाएगी लाइफ आपकी। वेलकम दोस्तों। आज जो एक्स्ट्रा क्वेश्चंस हम पढ़ने वाले हैं, नेक्स्ट क्वेश्चंस पढ़ने वाले हैं, वह है टॉपिक इंटरनेशनल फाइनशियल मैनेजमेंट से। इंटरनेशनल फाइनेंसियल मैनेजमेंट टॉपिक में मैं आपको एक छोटी सी नई बात पढ़ाने वाला हूं। नई बात क्या है? वैसे ये डिस्कस्ड है ऑलरेडी। अगर आपने मेरे रीसेंट इसी बैच में एनरोलमेंट कराई है तो ये टॉपिक मैंने क्लास के अंदर पढ़ा रखा है। एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू। पर अगर आप बहुत पुराने किसी बैच में हैं तो उसके अंदर सिर्फ ये थ्योरेटिकली डिस्कस था। प्रैक्टिकली डिस्कस नहीं था। इसीलिए मैं उन बच्चों के लिए ये वीडियो बना रहा हूं। मैं इस टॉपिक पे एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू पे तीन क्वेश्चन कराने वाला हूं। आप जरा ध्यान दीजिएगा। तीनों क्वेश्चंस अभी के अभी हम डिस्कस करेंगे। ठीक है ना? पहले टॉपिक डिस्कस करते हैं कि एडजस्टेड प्रेजेंट 7:16:10 वैल्यू का मतलब क्या होता है? देखिए एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू का मतलब होता है हम बेसिकली किसी प्रोजेक्ट की एनपीवी को दो हिस्सों में बांट रहे होते हैं। जैसे एग्जांपल लेते हैं। कभी-कभी क्या होता है कि हम कोई एक डिसीजन लेते हैं। हम एक प्रोजेक्ट करना चाहते हैं। अब उस प्रोजेक्ट के लिए हम लोन उठाते हैं। देखो जब अगर हम एक प्रोजेक्ट उठाते हैं तो कभी-कभी वो प्रोजेक्ट फायदे में नहीं दिख रहा होता। लेकिन अगर उस प्रोजेक्ट के लिए हम लोन उठा लें और लोन के इंटरेस्ट पे टैक्स सेव करने लगे। क्या कहा मैंने? अगर वो प्रोजेक्ट अपने पैसों से करोगे तो वो नुकसान में है। लेकिन अगर उसी प्रोजेक्ट के लिए लोन ले लोगे तो लोन पर इंटरेस्ट पे करोगे, इंटरेस्ट पे करोगे तो उस पर टैक्स सेव करोगे तो उसकी टैक्स सेविंग की वजह से हो सकता है वो प्रोजेक्ट वायबल हो जाए। वायबल होने का मतलब क्या होता है कि वो प्रोजेक्ट शायद ज्यादा फायदेमंद हो जाए आपके लिए। तो इसी बात को हम इधर पढ़ने वाले हैं एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू के टॉपिक में। आइए सर पढ़ाइए हमें। हम एनपीवी को ब्रेक कर देते हैं दो हिस्सों में। एक होता है बेस केस एनपीवी और एक होता है एनपीवी ऑफ़ फाइनेंसिंग इफेक्ट। मतलब बेस केस एनपीवी का मतलब है अगर वो प्रोजेक्ट 7:17:13 हम अपनी इक्विटी से करते, लोन ना लेते सिर्फ अपने पैसों से करते तो वह प्रोजेक्ट कितना कमाता? बोलो। यानी हम उस प्रोजेक्ट की एनपीवी निकालेंगे। लेकिन उस प्रोजेक्ट की एनपीवी निकालते हुए हम लोन नहीं देंगे। यानी इक्विटी फाइनेंसिंग करेंगे। इसलिए डिस्काउंटिंग रेट को भी केई को मानेंगे। यानी कॉस्ट ऑफ इक्विटी को ही डिस्काउंटिंग रेट मानेंगे। क्योंकि हमने लोन ही नहीं लिया। जब लोन नहीं लिया तो इक्विटी के फाइनेंस यूज़ किया होगा। जब इक्विटी का फाइनेंस यूज़ किया तो केई ही WCC बन जाएगा। यानी KE ही डिस्काउंटिंग रेट बन जाएगा। ठीक है सर। यानी बेस केस एनपीवी का मतलब है हम एनपीवी निकाल रहे हैं किसी प्रोजेक्ट की और उसे मान के चल रहे हैं कि वो इक्विटी फाइनेंस है। डेप्ट उसमें है ही नहीं। तो उस एनपीवी को बोलते हैं बेस केस एनपीवी। इसके अलावा हम अलग से यह देखते हैं कि जो अगर हम अगर हम उस प्रोजेक्ट को करने के लिए लोन लेते तो लोन पर इंटरेस्ट पे करते। इंटरेस्ट पर टैक्स सेव होता तो उस टैक्स सेविंग की प्रेजेंट वैल्यू क्या है? प्लस लोन लेते हैं तो डिस्ट्रेस भी हो सकती है। लोन ले सकते हैं तो हम डूब भी 7:18:15 सकते हैं। लोन लेने से रिस्क भी है डूबने का। तो उनकी भी कॉस्ट को असर्टेन करना। इशू कॉस्ट को भी देखना। फाइनेंसियल डिस्ट्रेस की कॉस्ट को भी देखना। यानी अगर हम एनपीवी में फाइनेंसिंग इफेक्ट देखना चाहते हैं तो फाइनेंसिंग इफेक्ट में क्या-क्या देखेंगे? टैक्स सेविंग ऑन इंटरेस्ट जो कि हमारे लिए फायदेमंद है। पर लोन लेने से हम हमें इशू कॉस्ट करनी पड़ती है। जब कभी-कभी हम लोन लेते हैं 10 करोड़ का तो उसके लिए शुरू में 10-15 लाख खर्चने पड़ते हैं। तो वो इशू कॉस्ट है। फिर फाइनेंसियल डिस्ट्रेस की कॉस्ट है। हो सकता है हम लोन चुका ना पाए, डूब जाए। लोन की वजह से हमारे खर्चे बढ़ जाते हैं। तो वो जो कॉस्ट बढ़ती है डिस्ट्रेस की, डूबने के चांसेस उसकी कॉस्ट को भी कंसीडर करो। क्वेश्चन में गिवन होगी। तो यानी हम इन इसकी एनपीवी निकालते हैं। मतलब डे वाले पोर्शन की एनपीवी निकाल रहे हैं एक तरीके से। तो इसमें एक बात ध्यान रखना कि जो इंटरेस्ट रेट प्री टैक्स होता है उसे डिस्काउंटिंग रेट मानते हैं। इंटरेस्ट रेट पोस्ट टैक्स को नहीं मानते। केडी को नहीं मानते। यानी इसके लिए जब एनपीवी कंप्यूट करेंगे तो इंटरेस्ट रेट प्री टैक्स जो है उसे डिस्काउंटिंग रेट मानना है। KD को या I1 - 7:19:17 T को यूज़ मत करना। ठीक है? यानी सर सिंपल सी बात है। हम एक प्रोजेक्ट स्टार्ट करना चाहते हैं। उस प्रोजेक्ट के अंदर दो हिस्से कर रहे हैं। एक उस प्रोजेक्ट की एनपीवी कितनी है? अगर इक्विटी से फाइनेंस होता और अगर उस प्रोजेक्ट के लिए हम लोन लेते हैं तो उस लोन की एनपीवी कितनी है? उस इंटरेस्ट को पे करने से हमें कितनी सेविंग आ रही है? डिस्ट्रेस कॉस्ट कितनी है? इशू कॉस्ट कितनी है? उन सबको नेट करके मतलब फाइनेंसिंग इफेक्ट की एनपीवी निकालना। ठीक है? ठीक है? आइए क्वेश्चन के थ्रू समझते हैं कि एक्चुअल प्रोजेक्ट की एनपीवी दो हिस्सों में बटी है। बेस केस एनपीवी अगर उस प्रोजेक्ट को बिना डेप्ट के करते अगर उस प्रोजेक्ट को हम डे के साथ करें तो हमारा उसके ऊपर क्या इंपैक्ट आएगा? ये दोनों बातें हम कर रहे हैं। ठीक है जी। आइए क्वेश्चन नंबर वन पढ़ते हैं पहले। xyz लिमिटेड इज़ प्रेजेंटली ऑल इक्विटी फाइनेंस। वह कह रहा है भैया हमारी कंपनी सिर्फ इक्विटी से फाइनेंस है। द डायरेक्टर ऑफ़ द कंपनी हैव बीन इवैलुएटिंग इन्वेस्टमेंट इन अ प्रोजेक्ट व्हिच विल रिक्वायर 270 लाख कैपिटल इन एक्सपेंडिचर। यानी हम एक नया प्रोजेक्ट स्टार्ट करने की सोच रहे हैं। उसके लिए हमें ₹270 लाख चाहिए न्यू मशीनरी के लिए। दे एक्सपेक्ट दैट द कैपिटल इन्वेस्टमेंट टू प्रोवाइड एन एनुअल कैश फ्लो ऑफ़ ₹42 लाख इनडेफिनेटली। 7:20:18 क्या बात है। ऐसा प्रोजेक्ट तो भगवान सबको दे इनडेफिनेटली। मतलब कब तक चलेगी मशीन? सदा-सदा के लिए। बस लगा दो बेटा। बच्चे पोते पोतिया सब खाएंगे बेटा इस पैसे को। मजे ही मजे जीवन में व्हिच इज़ नेट ऑफ़ ऑल टैक्स एडजस्टमेंट्स। क्या बात है। नेट ऑफ टैक्स 42 लाख आएगा हर साल। तो मजा आइए फिर तो बेटा ऐसा प्रोजेक्ट हमें भी दिलाए भगवान। ठीक है? द डिस्काउंट रेट व्हिच इट अप्लाई टू सच इन्वेस्टमेंट इज 14% डिस्काउंटिंग रेट 14% है नेट। ठीक है? द डायरेक्टर्स ऑफ़ द कंपनी बिलीव दैट द करंट कैपिटल स्ट्रक्चर फेल्स टू टेक एडवांटेज टू द टैक्स बेनिफिट ऑफ़ द डे। वो कह रहा है अगर हम अभी की सुने तो भी तो हम खाली इक्विटी फाइनेंस हैं। इक्विटी फाइनेंस है यानी हम लोन नहीं लेते। अगर हम लोन नहीं लेते तो यह सब कुछ होगा उस प्रोजेक्ट में। लेकिन वो कहता है यार हम क्यों ना लोन उठाएं। लोन उठाएंगे तो टैक्स बेनिफिट होगा। बात तो सही है। लोन लेना अच्छी बात है कि बुरी बात है? अगर आप उस लोन से टैक्स बेनिफिट उठा सकते हो, कम रेट पर लोन उठा के ला सकते हो, तो लोन लेना बुरी बात नहीं है। लोन लेना एक अच्छी बात है। बैलेंस देखो एक बात बताऊं जिसे लोन नहीं चाहिए होता वो अगर लोन ले तो उसका भला होता है। 7:21:20 यानी अमीर आदमी जब लोन लेता है तो उसका भला होता है। लेकिन गरीब आदमी जब लोन लेता है तो फंस जाता है। हमेशा ध्यान रखना जिसे लोन की जरूरत है उसे नहीं लेना चाहिए। जिसे जरूरत नहीं है उसे लोन लेना चाहिए। क्योंकि वह उस लोन से पैसा कमा पाएगा। द कंपनी इंटेंड्स टू इशू सफिशिएंट डेप्ट। वह कह रहा है यार डे इशू करते हैं टू कवर द कॉस्ट ऑफ द कैपिटल एक्सपेंडिचर। यानी यह जो 270 लाख की मशीन है ना इसके लिए हम डेप्ट इशू करते हैं। एंड द आफ्टर टैक्स कॉस्ट ऑफ इशू अ ठीक है? द एनुअल ग्रॉस रेट ऑफ़ द इंटरेस्ट रिक्वायर्ड बाय द मार्केट कॉर्पोरेट डेप्ट ऑफ़ द सिमिलर क्लास इज़ 10% मतलब 10% का ब्याज चल रहा है। और जो आफ्टर टैक्स कॉस्ट ऑफ़ इशू है वह ₹1 लाख है। यानी अगर हम डेप्ट बेचेंगे तो डेप्ट बेचने पे ₹1 लाख का तुम्हारा खर्चा भी हो जाएगा। कंपनी का टैक्स रेट है 30% पहली बात समझो मांग क्या रहा है कह रहा है थोड़े मैं तेज चल रहा हूं बट आई होप कि टॉपिक आपको समझ आ जाएगा क्योंकि तीन-तीन क्वेश्चन पढ़ने हैं इसलिए मैं थोड़ा स्फ्टस पे चल रहा हूं और ये सब मैं क्लास में रेगुलर बैच में पढ़ा चुका हूं ऑलरेडी आपको ये तीनों क्वेश्चन सेम पढ़ा चुका हूं कैलकुलेट दी एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ द इन्वेस्टमेंट वो कहता है भाई आप एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू 7:22:21 ऑफ़ द इन्वेस्टमेंट बताओ एडजस्टेड डिस्काउंट रेट भी बताओ ठीक है आइए क्वेश्चन करना स्टार्ट करते हैं देखिए अगर हम 270 लाख की आज इन्वेस्टमेंट कर देंगे तो भगवान ऐसा कुछ कमाल करेगा कि सीएफएटी परपेचुअल आता रहेगा 42 लाख का और हमारी केए 14% यानी यह हमारा डिस्काउंटिंग रेट है ऑल इक्विटी फाइनेंस के केस में अगर हम डेप्ट उठाएंगे तो हमें 270 लाख प्लस 10 लाख यानी 280 लाख की डेप्ट उठानी पड़ेगी। क्यों? बेटा 270 लाख की तो मशीन खरीदनी है। पर वो कह रहा है जब डेप्ट इशू करोगे तभी 10 लाख का खर्चा हो जाएगा। तो आपको डेप्ट 280 लाख की उठानी पड़ेगी। करेक्ट? करेक्ट। मेन सॉल्यूशन देखिए। पहले कहते थे बेस केस एनपीवी। बेस केस एनपीवी मतलब अगर हम लोन ना उठाते तो क्या होता? तो पीवीसीआई कितना होता? 42 लाख फॉर एवर। 42 लाख फॉर एवर। अगर कोई चीज़ फॉर एवर होती है तो हम a / i से उसकी प्रेजेंट वैल्यू निकाल लेते हैं। याद है आपको प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ एन्वटी कैसे आती है? a / i क्योंकि इसमें ग्रोथ रेट तो है नहीं। वरना ग्रोथ रेट कैसे? अगर ग्रोथ रेट होती तो I - G आता। फिर यहां पे पता है ना आपको ये बात? नीचे ग्रोथ रेट 7:23:21 माइनस हो जाता। अगर ग्रोथ होती तो बट इस क्वेश्चन में तो ग्रोथ है नहीं। तो हमने पीवीसीआई निकाला 42 लाख /14% करके। तो यह हमारा पीवीसीआई हो गया। करेक्ट। पीवीसीओ था 270 लै। यह तो बिना डेप्ट के केस है ना। तो बिना डेप्ट के तो हमने ₹70 लाख लगाए और इतना हर साल कमाया तो ये उसकी प्रेजेंट वैल्यू हो गई। तो ये हमारे पास ₹300 लाख - 27 30 लाख का प्रॉफिट है। यानी अगर हम इस प्रोजेक्ट को इक्विटी से फाइनेंस करते हैं तो हम ₹30 लाख कमा लेंगे। यहां तक तो क्वेश्चन क्लियर है। जी हां। यानी इस क्वेश्चन में वो वाली एनपीवी क्यों नहीं करी सर? प्रेजेंट वैल्यू वाली। पीवीसीआई क्यों नहीं करी? क्योंकि इसमें लाइफ अनलिमिटेड है। लिमिटेड नहीं है। वो तो तब करते हैं जब लिमिटेड जैसे 4 साल चलेगा तो 4 साल की पीवी निकालते हैं। है ना? पर यहां तो फिर पूरी लाइफ की पीवी निकालनी है। इसलिए एनुटी वाले फार्मूला से निकाली। ठीक है? लेकिन अब हम करते हैं टैक्स सेविंग जो हो सकती है हमारे पास। पढ़िए। इंटरेस्ट अमाउंट कितना होगा पर एन? 280 लाख का 10% यानी 28 लाख तो हम हर साल का इंटरेस्ट देंगे। और उस इंटरेस्ट पे हमें 30% टैक्स बचेगा। यानी 8.4 लाख हम हर साल बचाएंगे। अब इसमें वापस करने की तो 7:24:22 बात है ही नहीं कि लोन हम 10 साल में, 5 साल में वापस करेंगे। लोन भी परपेचुअल है। जब प्रोजेक्ट परपेचुअल है, लोन भी परपेचुअल है। तो प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ टैक्स सेविंग कितनी है? हर साल 8.4 लाख का टैक्स बचाएंगे तो डिवाइड बाय 10% कर दो। इसे 10% से क्यों कर रहे हैं? इसे हम क्योंकि डिस्काउंटिंग रेट इंटरेस्ट रेट को मान रहे हैं। डिस्काउंटिंग रेट, इंटरेस्ट रेट। याद है? मैंने क्या कहा था? मैंने कहा था कि जो फर्स्ट पार्ट होता है, उसकी कैलकुलेशन में KE को डिस्काउंटिंग रेट मानना। लेकिन सेकंड पार्ट में जो इंटरेस्ट रेट होगा उसे डिस्काउंटिंग रेट मानना। ठीक है जी। तो हमने इंटरेस्ट रेट को डिस्काउंटिंग रेट मानना स्टार्ट कर दिया। क्या यहां तक की बातचीत आपको समझ आ गई? तो हमारी प्रेजेंट वैल्यू ऑफ जो इंटरेस्ट है वो ₹84 लाख हो गई। तो हमारी बेस केस एनपीवी क्या है? कि हमें ₹ लाख तो हम बेस केस से कमा लेंगे। ₹84 लाख हम इंटरेस्ट की टैक्स सेविंग से कमा लेंगे। लेकिन हमें यह सब यह मिलने में 10 लाख का इशू एक्सपेंस भी होगा। वह माइनस कर दो। मतलब इस कमाई को 84 लाख की कमाई करने के लिए हमने 10 लाख का खर्चा भी करा होगा। वह माइनस कर दो। तो हमें कुल मिलाकर एडजस्टेड 7:25:24 प्रेजेंट वैल्यू 104 लाख की मिल जाएगी। हमारी एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू 4 लाख 104 लाख की हो जाएगी। कैसे? यानी अगर मैं इस प्रोजेक्ट में लोन ना लेता तो मैं सिर्फ इतना कमाता 30 लै कमाता। लेकिन अगर मैंने इस प्रोजेक्ट में लोन लिया। लोन पे लोन पे इंटरेस्ट दिया। इंटरेस्ट पे टैक्स बचाया। लोन पे इंटरेस्ट दिया। इंटरेस्ट पे 30% टैक्स बचाया। तो उस टैक्स की प्रेजेंट वैल्यू निकाल दी मैंने टैक्स सेविंग की प्रेजेंट वैल्यू। तो यह हमारा 84 लाख की बचत हो रही है। 10 लाख का खर्चा हो रहा है। तो यानी लोन लेने से 74 लाख की बढ़ाई हो रही है। 74 लाख + 30 लाख तो 104 लाख हमारी एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू हो गई। ठीक है जी। अब इसमें उसने इंटरेस्ट रेट क्या दिया हुआ था? देखिए। द करंट एनुअल ग्रॉस रेट ऑफ़ इंटरेस्ट रिक्वायर्ड बाय द मार्केट ऑन द कॉर्पोरेट डेटेड डे इज़ 10%। तो वो ग्रॉस रेट दे रहा है ना। उसने नेट रेट दिया ही नहीं है। एक बच्चा कह रहा है कि आपको बिफोर टैक्स देना है। बेटा उसने ऑलरेडी इंटरेस्ट रेट ग्रॉस ही तो दिया हुआ है। 7:26:25 क्या मेरी बातें आपको समझ आ रही है? मैंने क्या कहा? यह बेटा केडी नहीं है ये। यह एनुअल इंटरेस्ट रेट है। ग्रॉस। ग्रॉस मतलब बिना टैक्स के। बिफोर टैक्स है। नेट होता तो आफ्टर टैक्स होता। बोलिए ये बात क्लियर हो गई आपको? बोलिए बेटा। एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू तक सबको समझ आ गया? बोलिए क्लियर है? लेकिन अभी हमने एडजस्टेड डिस्काउंट रेट नहीं निकाला। एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू समझ आ गई। यानी अगर इस प्रोजेक्ट में हम पैसा लगाते हैं तो हम ₹14 लाख कमाएंगे। और अगर इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाएंगे और लोन लेके लगाएंगे। दो बातें बोल रहा हूं। अगर हम इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाएंगे तो ₹30 लाख कमाएंगे। ठीक है? लेकिन अगर इस प्रोजेक्ट में लोन लेके पैसा कम लगाएंगे तो हम ₹14 लाख कमाएंगे। यहां तक बात क्लियर है? अब सवाल उठता है एडजस्टेड डिस्काउंट रेट निकालने का जो कि थोड़ा कॉम्प्लेक्स है। ध्यान देना। हमें अब फाइंड आउट करना है एडजस्टेड डिस्काउंट रेट। यह वो रेट होता है जिस रेट पे एनपीवी एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू के बराबर होगी। 7:27:26 यानी ये वो रेट है जिस रेट पे जो हमारी एनपीवी आएगी वो एडजस्टेड प्रे एनपीवी के बराबर होगी? किस रेट पे ये दोनों बराबर आ सकती हैं। तो एक बात बताओ हमारे आउटफ्लोस कितने हैं? अब ये टेबल आपको ये फार्मूला याद करना पड़ेगा। लर्न करना पड़ेगा आपको। हमारे आउट फ्लोस कितने हैं? मतलब कितना पैसा हमने अपनी जेब से लगाया है? तो आप बोलोगे 270 + 10 270 लाख तो मशीन के लिए लगाए थे। प्लस 10 लाख डे इशू के लिए लगाए थे। ठीक है? अगर हमारी एनुअल इनकम x है और डिस्काउंट रेट अगर 14% है तो यानी कितनी एनुअल इनकम मैं करूं कि मेरी एडजस्टेड एनपीवी 104 लाख आ जाए। तो यानी अगर मैं हर साल 24.64 लाख कमाता यानी यहां पर अगर मैं हर साल 24.64 लाख कमाता तो मेरी एडजस्टेड एनपीवी 104 लाख आ जाती। तो एडजस्टेड डिस्काउंट रेट कितना होगा? ये होगा एनुअल इनकम जो आपकी यहां पे डिसाइड हुई डिवाइडेड 7:28:28 बाय टोटल आउटफ्लो जो ये 280 लाख थे इन 100 यानी आपको एडजस्टेड डिस्काउंट रेट मिल जाएगा 8.8% यानी अगर हम डिस्काउंटिंग 8.8% पे करें। क्या कहा मैंने? अगर हम डिस्काउंटिंग 8.8% पे करें, तो हमारी एडजस्टेड एनपीवी आ जाएगी। यानी हम जो ये एडजस्टेड एनपीवी 104 लाख निकाल रहे हैं, यह डायरेक्ट निकल कर आ जाएगी। हम यह कहना चाहते हैं। यानी अगर इतनी एनपीवी आपने कमानी है प्रोजेक्ट से तो प्रोजेक्ट में आपको हर साल इतना कैश फ्लो चाहिए और यह रेट ऑफ डिस्काउंटिंग चाहिए। तो एडजस्टेड डिस्काउंट रेट कैन बी यूज्ड फॉर फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इफ दी बिनेस रिस्क ऑफ न्यू वेंचर इज़ आइडेंटिकल। अब आप यह बोलोगे सर देखो यहां तक तो सब समझ आ रहा था मुझे कि भैया हम एक प्रोजेक्ट में पैसा लगा सुन लो मेरी बात। हम एक प्रोजेक्ट में पैसा लगाना चाहते हैं। हम उस प्रोजेक्ट में इक्विटी से पैसा लगाएंगे तो इतना कमाएंगे। डेप्ट से पैसा लगाएंगे तो इतना कमाएंगे। और इन दोनों को मिलाकर टोटल प्रोजेक्ट में 104 लाख कमाएंगे। यहां तक तो सर आसान था। फिर आगे क्या किया? आगे बेटा हम एक ऐसा रेट निकालना चाहते हैं जो फ्यूचर के लिए हमें 7:29:28 पहले ही पता हो कि इस रेट से ज्यादा अगर प्रोजेक्ट कमा रहा है तो हमारी एडजस्टेड एनपीवी पॉजिटिव है। मतलब हम डेप्ट लेकर उसमें कमाई कर सकते हैं। तो हम रेट निकालना चाहते हैं फ्यूचर की इन्वेस्टमेंट्स के लिए। तो हमने अस्यूम किया कि कब किस रेट पे हमारी एनपीवी एडजस्टेड एनपीवी के बराबर आएगी। तो पहले हमने कैश जो एनुअल इनफ्लो है उसे कंसीडर किया x फिर जो इनकम आई वो 24 आई। अब हमने ये कहा कि अगर टोटल इन्वेस्टमेंट पे हम इतना हर साल कमा लें यानी इसका मतलब है कि अगर हम हर साल अपने पैसों पे जो भी पैसा हम बिज़नेस में लगा रहे हैं उस पे 8.8% कमा लिया करें तो हम अपनी एडजस्टेड एनपीवी वाले रेट को अचीव कर पाएंगे। हमें जितना रेट अचीव करना है हम अचीव कर पाएंगे। मतलब डेप्ट लेना सफल हो जाएगा उस प्रोजेक्ट के लिए। तो इसीलिए एडजस्टेड डिस्काउंट रेट हमें फ्यूचर के रेफरेंसेस देता है। फ्यूचर के रेफरेंसेस बताता है कि फ्यूचर में हमें अगर सिमिलर रिस्क वाला बिज़नेस मिलेगा, कोई और प्रोजेक्ट मिलेगा तो हमें कम से कम उसमें 8.8% का डिस्काउंट रेट यूज करना होगा। तभी हम उस पर कमाई कर पाएंगे। एक क्वेश्चन और देखते हैं। देखिए x अब थोड़ी 7:30:29 स्पीड बढ़ाएंगे। xyz इज़ अ कंपनी इनवॉल्वड इन द मैन्युफैक्चरिंग ऑफ़ द टॉयज़ एंड इज़ प्रेजेंटली ऑल इक्विटी फाइनेंस। वो कह रहा है भैया हमारी एक कंपनी है। वो सिर्फ इक्विटी फाइनेंस है। द डायरेक्टर ऑफ़ द कंपनी हैव बीन इवैलुएटिंग इन्वेस्टमेंट इन द प्रोजेक्ट व्हिच रिक्वायर 400 लाख कैपिटल एक्सपेंडिचर। अब थोड़ी स्पीड बढ़ाएंगे। यानी हम एक प्रोजेक्ट में पैसा लगाने की सोच रहे हैं। जिस प्रोजेक्ट में हमें ₹400 लाख की कैपिटल इन्वेस्टमेंट करनी पड़ेगी। द एक्सपेक्ट दैट तो बस इतना पढ़ लो कि हमारी कैपिटल एक्सपेंडिचर कितनी है प्रोजेक्ट की 400 लाख। और यह चाहते हैं कि ये जो इन्वेस्टमेंट है यह कैश फ्लो देगी 60 लाख की इनडेफिनेटली। ठीक है? नेट ऑफ़ ऑल टैक्स एडजस्टमेंट। बहुत बढ़िया। द डिस्काउंट रेट अभी जो कंपनी का है वो 12% का है। तो यहां तक की इंफॉर्मेशन से हम ओनली इक्विटी वाली यानी बेस केस एनपीवी निकाल सकते हैं। सच बताओ यहां तक की इनफेशन से हम बेस केस एनपीवी निकाल सकते हैं। बढ़िया क्योंकि हम हर साल 60 लाख कमाएंगे डिवाइड बाय 12% कर दो। तो यह हमारा पीवीसीआई आ जाएगा। माइनस पीवीसीओ में आप 400 लाख को माइनस कर दो। हमारे पास एनपीवी आ जाएगी बेस केस की। अब 7:31:30 वह कहता है द डायरेक्टर कंपनी बिलीव दैट द करंट कैपिटल स्ट्रक्चर फेल्स टू टेक एडवांटेज ऑफ द टैक्स ऑफ द डे सेविंग्स। मतलब हम डे पर टैक्स सेव नहीं कर रहे हैं। इसलिए हम लोन लेना चाहते हैं। कंपनी चाहती है कि हम उतना डेप्ट लें ताकि कैपिटल ऑफ़ द जो प्रोजेक्ट है कैपिटल इन्वेस्टमेंट वो भी आ जाए और जो हमारे खर्चे हैं इशू के वो भी आ जाए। फिर वो कहता है कि कंपनी की कॉर्पोरेट अनडेटेड डेप्ट ऑफ़ द सिमिलर रिस्क क्लासेस 9% यानी इंटरेस्ट रेट चल रहा है 9% का मार्केट में। और हमारा आफ्टर टैक्स कॉस्ट ऑफ इशू है 5% ऑफ द इन्वेस्टमेंट अमाउंट रिक्वायर्ड। जितना भी इन्वेस्टमेंट करना होता है उसका 5% हमारा कॉस्ट ऑफ इशू भी होता है। ठीक है? जैसे पिछले क्वेश्चन में तो 10 लाख इशू एक्सपेंस खुद दिया था। इसमें हमें निकालना पड़ेगा परसेंटेज से। कोई नहीं टैक्स रेट 30% सिमिलर क्वेश्चन है। डिट्टो क्वेश्चन है। आपको समझ आ रहा है? डिट्टो क्वेश्चन है। आइए पढ़ते हैं तेज स्पीड में। पहली बात हमारा बेस केस एनपीवी कितना होगा? 60 लाख हर साल कमाएंगे तो डिवाइड बाय 12% कर दो केई से। तो ये पीवीसीआई आ जाएगा। माइनस पीवीसीओ कर दो 400 लाख तो 100 लाख बेस केस एनपीवी यानी अगर मैं इस प्रोजेक्ट को अपने पैसे से यानी इक्विटी से स्टार्ट करूं तो 100 लाख कमा सकता हूं। 7:32:30 यानी अगर मैं इस प्रोजेक्ट को अपने पैसों से करूं तो मैं पूरे के पूरे 100 लाख कमा सकता हूं। बहुत बढ़िया। अमाउंट टू बी रे। हमें कितने पैसों की जरूरत है? वो कहता है जितने पैसे चाहिए उसका 5% हमारा खर्चा भी हो जाएगा। तो हमें 420 लैक्स चाहिए। हमारे को इंटरेस्ट कितना देना पड़ेगा? हर साल 420 लाख का 9% यानी इतना इंटरेस्ट देंगे। जब भी इंटरेस्ट देंगे उस पे 30% टैक्स बचेगा। जब हम इंटरेस्ट देते हैं तो उस पर 30% का टैक्स रेट है तो 30% टैक्स बचेगा। यह टैक्स की सेविंग हो गई। यह टैक्स की सेविंग एक साल है। नहीं सर इनडेफिनेटली है। तो इस टैक्स सेविंग को भी डिवाइड बाय 9% यानी इंटरेस्ट रेट से डिवाइड कर दो। तो ये प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ टैक्स सेविंग आ गया। यानी जो लोन लेने पे हम हर साल का इंटरेस्ट भर रहे हैं। उस इंटरेस्ट पे टैक्स बचा रहे हैं। उस टैक्स सेविंग की आज की प्रेजेंट वैल्यू 126 लाख है। यानी हम 100 लाख कमाएंगे प्रोजेक्ट से। 126 लाख कमा लेंगे लोन लेके। और लेकिन उसको लोन लेने पर 20 लाख का हमारा खर्चा भी होगा। तो देखो बेस केस एनपीवी कितनी थी? आप यह कहोगे हमारी बेस केस एनपीवी थी 100 लाख। लेकिन हमने प्रेजेंट वैल्यू ऑफ़ टैक्स ऑन डे सेविंग्स कितनी ली? 126 लै और इशू एक्सपेंस किया है 20 लाख। यानी हमारी टोटल 7:33:31 एडजस्टेड एनपीवी हो गई 206 लाख। यानी कुल मिलाकर अगर मैं यह प्रोजेक्ट करता हूं और लोन लेकर करता हूं। अगर मैं यह प्रोजेक्ट करता हूं और लोन लेकर करता हूं तो मैं 2006 लाख कमा लूंगा। मुझे लगता है वैसे एग्जाम में देयर आर हायर चांसेस कि यहीं तक का क्वेश्चन पूछेगा एनपीवी तक का। पर अगर उसने आपसे एडजस्टेड एनपीवी के बाद एडजस्टेड डिस्काउंट रेट भी पूछ लिया तो क्या करते हो? सुनो। आप यह कहोगे कि अगर मैं आउटफ्लोस माइनस जो इनफ्लोस हैं उसे एडजस्टेड पीवी के बराबर ले लूं तो मुझे इनफ्लो कितना चाहिए? मुझे कितना इनफ्लो? अभी तो मुझे पता है कि मेरा इनफ्लो 60 लाख का आ रहा है। अगर मैं बोलूं 60 लाख नहीं कितना चाहिए कि इक्वल आ जाए दोनों। तो बताओ कितना इनफ्लो लूं? जिसमें कि तो हमने x का इनफ्लो लिया। यानी अगर मेरा इनफ्लो 25.68 लाख है। अगर इनफ्लो हर साल का 25.68 लाख है तो मेरा एडजस्टेड एनपीवी जितना एनपीवी आ जाएगा। एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू जितना एनपीवी आ जाएगा। तो यानी मुझे इतने रुपए हर साल चाहिए 420 की इन्वेस्टमेंट पे। इतने रुपए हर साल चाहिए 420 की इन्वेस्टमेंट पे। यानी मुझे 6.11% का 7:34:32 रिटर्न चाहिए। तो 6.11% हमारा एडजस्टेड डिस्काउंट रेट है। एडजस्टेड डिस्काउंट रेट यह बताता है कि इस रेट को हम फ्यूचर इन्वेस्टमेंट्स के लिए यूज़ कर सकते हैं कि इतनी रिटर्न हमें चाहिए ही चाहिए। जब नई इन्वेस्टमेंट का आइडेंटिकल बिज़नेस रिस्क होगा। जब कोई नई इन्वेस्टमेंट मिल रही होगी तो हमें सोचना है कि क्या वो इन्वेस्टमेंट 6.11% से अधिक कमा रही है। अगर हां, तो उस प्रोजेक्ट को हां बोल दो वरना ना बोल दो। यानी यह हमारा बेंचमार्क बन जाता है। यह रेट जो होता है, यह हमारा एक तरीके से बेंचमार्क रेट है। इस रेट को हम अपने बेस की तरह यूज करेंगे फ्यूचर में। यह कहा जा रहा है। समझ आ गई यह बात भी आपको? ठीक है सर। आगे बढ़ते हैं। अगला है एक प्रपोजल है टोल रोड बनाने का नेपाल में। ठीक है? वहां पे अगर हम इनिशियल इन्वेस्टमेंट करेंगे तो यूएस डॉलर 250 लैक्स की होगी। ठीक है? इकोनॉमिक लाइफ 10 साल है। लेकिन यहां ध्यान रखो यहां पे प्रोजेक्ट की लिमिटेड लाइफ है। पहले दोनों प्रोजेक्ट लाइफ अनलिमिटेड थी। यहां पे लिमिटेड लाइफ है। तो यहां 10 साल का पी फैक्टर काम आएगा। डेप्रिसिएशन ऑन द इक्विपमेंट विल बी चार्ज ऑन द एसएलएम मेथड। ठीक है? हमारा जो एबिटा है टू बी 7:35:33 कलेक्टेड फ्रॉम द टोल इज़ 33 लाख पर एनम फॉर 20 ईयर। अब एक परेशानी है। लाइफ ऑफ़ द मशीन है 10 साल। लेकिन हमारा एबिटा आएगा 20 साल। तो याद रखना 10 साल तक का डेप्रिसिएशन माइनस होगा। 10 साल तक का सीएफएटी अलग तरीके से निकलेगा। अगले 10 साल का सीएफएटी थोड़ा अलग तरीके से निकलेगा। या फिर ऐसे भी कर सकते हो कि आप सीएफएटी पूरे एक से मतलब जीरो से 20 साल तक सेम तरीके से निकाल लो और टैक्स सेविंग 10 साल के लिए अलग से निकाल लो। वो ज्यादा आसान हो जाएगा। दो-दो कैलकुलेशन नहीं करनी पड़ेगी। ठीक है? और वो कहता है कि नेपाल की जो गवर्नमेंट है ना वो हमें कह रही है कि यार हम आपको ना 15% लोन ऑफर करेंगे। वो भी यूएस डॉलर 150 लाख फॉर एन इंटरेस्ट रेट ऑफ 6% पर एनम। हम आपको 6% पे लोन देने को तैयार हैं। क्योंकि नेपाल की गवर्नमेंट चाहती है कि वहां डेवलपमेंट हो। तो वो कह रहे हैं कि आप हमारे यहां पर आकर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाओ, भारी चीजें बनाओ, मशीनें बनाओ, टोल बनाओ जो बनाना है। हम उसके लिए आपको सस्ते रेट पर लोन देंगे। तो एक तरीके से सब्सिडाइज इंटरेस्ट मिल रहा है। तो इंटरेस्ट की भी सेविंग होगी हमारी। इंटरेस्ट एनुअली देना है और लोन वापस देना 7:36:34 होगा 15 साल बाद। अब क्वेश्चन बड़ा चालाक है। डेप्रिसिएशन 10 साल की, प्रोजेक्ट 20 साल का और लोन 15 साल का। तो जो लोन की टैक्स सेविंग होगी वह 15 साल की होगी। तो तीनों कैलकुलेशन अलग-अलग करना बेटर है। वरना तो 20 साल का टेबल बनाना पड़ेगा। 20 साल का टेबल बनाना बहुत भारी हो जाएगा। है ना? द रिक्वायर्ड रेट ऑफ रिटर्न ऑन द प्रोजेक्ट ऑफ ऑल इक्विटी अगर ऑल इक्विटी होता अगर पूरी तरह इक्विटी होता तो 12% का रेट होता और अगर मैं बोलूं पोस्ट टैक्स कॉस्ट ऑफ डेप्ट 5.6% है। और हमारी टैक्स रेट कितनी है? 30% ऑल कैश फ्लोस विल बी इन यूएसडी। सभी के सभी कैश फ्लो यूएस डॉलर में होगी। हम इग्नोर कर देंगे इनफ्लेशन को। हम इग्नोर कर देंगे इनफ्लेशन को। क्या यह बातें आपको समझ आती है? मैंने क्या कहा? यू आर रिक्वायर्ड टू एडवाइस। आपको एडवाइस करना है कि एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू निकालकर एडवाइस करना है। ठीक है? करते हैं। जी। क्वेश्चन तो याद हो गया। हमारी इनिशियल इन्वेस्टमेंट कितनी है? 10 साल तक की मशीन है। 33 लाख का प्रोजेक्ट की कमाई होगी टोल से। 15 साल तक का लोन लिया है। 150 लाख का इंटरेस्ट का। जैसे तो 15% वाला 7:37:36 लोन। वह हमें 6% पे दे रहे हैं। तो हमें सेविंग करा रहे हैं। चलिए हम इन्वेस्टमेंट करेंगे 250 लाख की। डेप्रिसिएशन चलेगी 10 साल तक 25 लाख। लेकिन लोन प्रीपे रिपे करना होगा 15 साल बाद और अर्निंग पीरियड एंड हो जाएगा 20 साल बाद और हमारा यह बिट है 33 लाख का। देखिए पहले तो डेप्रिसिएशन बताओ। डेप्रिसिएशन है 250 लाख - 0 / 100 यानी कि अपॉन यानी कि 25 लाख पर एनम। अब हर साल डेप्रिसिएशन डेबिट होगी। जब डेप्रिसिएशन डेबिट होगी मेरे पीएनएल में तो मेरा टैक्स बचेगा। मेरे पीएनएल में अगर डेप्रिसिएशन डेबिट होगी तो मेरा टैक्स बचेगा। कितना टैक्स बचेगा? 30% तो जितनी डेप्रिसिएशन डेबिट होगी उसका 30% टैक्स होगा। तो यानी यह 25 लाख है। इस पर 30% करो। तो यह हमारा 7.5 लाख पर एनम का हमारा टैक्स सेविंग ऑन डेप्रिसिएशन हो गया। क्या यह बात भी आपको क्लियर हो गई? यह हमारी टैक्स सेविंग ऑन डेप्रिसिएशन हो गई। आपने कहा हां सर यह बात तो समझ आती है मुझे टैक्स सेविंग ऑन डेप्रिसिएशन। तो अब 7:38:37 वह कहता है एबिटा है 33 लाख का माइनस टैक्स है 9,90,000 का। तो हमारा पैट कितना हो गया? इतना हो गया सर इसमें डेप्रिसिएशन क्यों नहीं माइनस कर रहे क्योंकि डेपिशन की टैक्स सेविंग मैंने अलग से नहीं ली है। सॉरी बोलो यह बात आपको समझ आ रही है मैंने क्या कहा यार आपको पता है ना दो तरीके होते हैं या तो डेप्रिशन माइनस करो फिर टैक्स माइनस करो फिर डेप्रिश ऐड बैक करो तो सीएफएटी आता है वरना बिना टै बिना डेप्रिसिएशन के कर लो क्वेश्चन और डेप्रिसिएशन की टैक्स सेविंग अलग से कर लो वो कर रहा हूं मैंने डेप्रिसिएशन निकाली डेप्रिशन की टैक्स सेविंग अलग से निकाल ली इसकी टैक्स सेविंग का पीवी मैं 10 साल के लिए अलग से निकाल लूंगा और यह मेरा पीएटी 20 साल के लिए आ रहा है यह भी अलग कर लूंगा और इंटरेस्ट क्यों नहीं दिखाया इंटरेस्ट इसमें दिखाता ही नहीं है इंटरेस्ट कभी भी सीएफएटी की कैलकुलेशन में माइनस नहीं होता। याद रखना इंटरेस्ट कभी भी सीएफएटी की कैलकुलेशन में माइनस नहीं होता। तो पहले हम निकालते हैं बेस केस एनपीवी। बेस केस एनपीवी मतलब जब हम डे इंटरेस्ट के बारे में सोच ही नहीं रहे। ठीक है? हमारी जेब से आउट फ्ल्लो कितना होगा? जीरो 7:39:37 पीरियड पे पीवी फैक्टर वन होता है। टू 250 लाख का आउटफ्ल् होगा। हमें इनफ्लो पैड कितना मिलेगा? 1 से 20 साल तक हमारा प्रॉफिट इतना होगा हर साल। और यह 1 से 20 साल का पीवी फैक्टर ऐड करके आ गया। टैक्स सेविंग होगी 1 से 10 साल तक 750 की हर साल। तो यह 10 साल तक का पीई फैक्टर ऐड करके इधर दिखा दिया। तो इन सबको नेट करके हमारी एनपीवी कितनी आ गई? बेस केस एनपीवी आ गई नेगेटिव 35 लाख। हमारी बेस केस एनपीवी कितनी आ गई? नेगेटिव 35 लाख। बोलिए यह बातें आपको समझ आती है मैंने क्या कहा? यानी हमारी बेस केस एनपीवी आती है नेगेटिव 35 लाख। अब आता है सेकंड पार्ट। अगर हम लोन लेंगे तो 150 लाख का लेंगे। इंटरेस्ट रेट होगा 6% तो इंटरेस्ट पेड ईच ईयर कितना है? इतना और टैक्स सेविंग ऑन इंटरेस्ट कितनी हो रही है? जितना भी इंटरेस्ट दोगे उस पे टैक्स बचेगा। उस पे टैक्स बचेगा। तो हम यह कह रहे हैं कि हम इंटरेस्ट पे हर साल ₹70000 का टैक्स बचा लेंगे। तो 1 से 15 साल तक 7:40:40 ₹70000 पे 270000 हमने टैक्स पे बचाया एक से 15 साल तक। तो यह उसकी प्रेजेंट वैल्यू है। यानी यह टैक्स सेविंग ऑन इंटरेस्ट है। क्या यह बात आपको समझ आ गई? मैंने क्या कहा? और मैंने इंटरेस्ट रेट कौन सा लिया है? प्री टैक्स वाला लिया है। यह बात ध्यान रखना। जो डिस्काउंटिंग रेट है वो प्री टैक्स वाला इंटरेस्ट रेट यूज़ होता है। पता है ना आपको ये बात भी? ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये इंस्टट्यूट कह रहा है भाई? जो भी मैं पढ़ा रहा हूं बिल्कुल इंस्टट्यूट की गाइडलाइन के अकॉर्डिंग पढ़ा रहा हूं। मैं अपना दिमाग लगा ही नहीं रहा हूं। जैसे उन्होंने क्वेश्चन किए हैं मैं वैसे ही कर रहा हूं। तो इसका मतलब हमारी प्रोजेक्ट की एनपीवी कितनी है? बेस केस एनपीवी देख रहे हो अगर यह प्रोजेक्ट आप बिना लोन के करते तो नुकसान था। लेकिन लोन लेने के बाद भी थोड़ा नुकसान कम हो गया लेकिन नुकसान में ही है अभी भी क्योंकि अभी भी यह नुकसान में ही है। क्या ये बातें आपको समझ आई? यानी यह प्रोजेक्ट दोनों ही केस में नुकसान में है। चाहे तो आपको नेपाल में वो टोल रोड नहीं बनाना चाहिए क्योंकि अल्टीमेटली आपके नुकसान हो रहा है। वैसे इस क्वेश्चन में हमने एक चीज इग्नोर करी है। क्या इग्नोर करा है सर? सर वो जो डिस्काउंट ऑन इंटरेस्ट है उसे 7:41:41 इग्नोर करा है हमने कि अगर हम किसी और से लोन लेते तो 15% मिलता। नेपाल की गवर्नमेंट ने हमें 6% पे दिया। तो ये एक्स्ट्रा इंफॉर्मेशन है। ये ICI के सॉल्यूशन में नहीं दिखाई गई थी। पर मुझे लगता है ये भी दिखाई जानी चाहिए थी बट नहीं दिखाई थी। नहीं दिखाई तो आप एग्जाम में मत दिखा के आना। जब ये आईसीआई का क्वेश्चन है बेटा। मेरा घर का क्वेश्चन नहीं है ये। पर उन्होंने अपने आंसर में जो दिखाया मैंने उन्होंने अपने आंसर में क्या दिखाया ये समझ आ गया आपको पूरा क्वेश्चन? पर मेरे हिसाब से एक चीज एक्स्ट्रा दिखाई जानी चाहिए थी कि भैया हमने 150 लाख का लोन लिया है। उस पर 9% हमने हर साल बचाया है। तो इतने रुपए हर साल बचाए हैं। जो भी हमारी बचत होती है वो इनकम होती है। जो इनकम होती है उस पे टैक्स जाता है। तो उस इनकम पे टैक्स भी जाएगा। तो हमारी नेट सेविंग इतनी है हर साल। नेपाल की गवर्नमेंट से लोन लेने पे हमारी हर साल इतनी की बचत है। तो जो बचत है उसकी प्रेजेंट वैल्यू भी आनी चाहिए। एक से 15 साल तक। यह एनपीवी में और ऐड होनी चाहिए। तो यह जब एनपीवी में ऐड होगी तो एनपीवी पॉजिटिव आएगी। पर ऐसा आईसीएआई ने नहीं किया हुआ है। यह मेरी कल्पना है। यह मेरी इच्छा है। बट इसे मत एग्जाम में शो करना। मेरी इच्छा पर मार्क्स नहीं मिलेंगे। आईसीआई की इच्छा पे ही मार्क्स मिलेंगे। 7:42:42 सिंपल। बस मैं आपको यह दिखा देना चाहता था कि मुझे ऐसा लगता है होना चाहिए जो ज्यादा करेक्ट आंसर है। बट क्योंकि यह अपॉर्चुनिटी इंटरेस्ट है। यह पूरी तरह अपॉर्चुनिटी इंटरेस्ट है। तो अपॉर्चुनिटी अर्निंग्स को नहीं कंसीडर करता अकाउंट्स। क्योंकि वह कहता है ज्यादा प्रूडेंट होके चलो। ज्यादा खुशनसीब होके मत चलो। इसीलिए वह बदनसीब होकर एनपीवी को नेगेटिव ही करना चाहता है। और यह मेरा आंसर नहीं है। मैं बार-बार एक बात बोल रहा हूं। यह पैटर्न आईसीआई के गाइडेड पैटर्न है जिन पे मैं आपको क्वेश्चन करा रहा हूं। मेरा इनमें कुछ नहीं है। क्या ये बातें आपको समझ आ गई? मैंने क्या कहा? क्या मैं मान के चलूं? एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू रिवाइज हो गया आपका। सीआई की किताब में यह टॉपिक दिखाऊं तो इंटरनेशनल फाइनशियल मैनेजमेंट चैप्टर में उन्होंने यह पूरा एपीवी का टॉपिक डिस्कस किया है जिसके ऊपर बेस्ड अभी हमने आपको क्वेश्चन कराए हैं। वो यही बात इधर आपको समझाता है और उन्होंने यह वाला क्वेश्चन भी दिया हुआ है। ठीक है? चलो ये तो खैर अलग टॉपिक का क्वेश्चन हो गया। बट आपको मेरी बातें समझ आई। मैंने क्या कहा? एपीवी का टॉपिक यहां पर डिस्कस उन्होंने 7:43:43 किया हुआ है जिसके ऊपर बेस्ड हमने क्वेश्चन आपके लिए प्रैक्टिस करा दिए हैं। वेलकम वेलकम वेलकम दोस्तों यह जो क्वेश्चन है यह मैं आपको कराने वाला हूं। मॉनटीकार्लो सिमुलेशन का क्वेश्चन है। यह क्वेश्चन आपके एएफएम की पढ़ाई के लिए चैप्टर एडवांस कैपिटल बजटिंग के लिए कवर हो सकता है। ठीक है जी। आइए। पढ़ते हैं जरा क्वेश्चन। ध्यान दीजिएगा। पहले ना मुझे डिस्कस करने दो क्वेश्चन। मैं फाइल्स आपके साथ शेयर करूंगा ही। आप अच्छे से समझे सिर्फ। ठीक है ना? क्योंकि आपने अगर ये क्वेश्चन समझ लिया आपको इस टॉपिक की थ्योरी भी बेटर समझ आ जाएगी। देखिए एबीसी लिमिटेड इज कंसीडरिंग लॉन्चिंग अ न्यू प्रीमियम स्मार्ट डिवाइस। कोई एक कंपनी है जिसका नाम है एबीसी। वो एक नया प्रीमियम स्मार्ट डिवाइस ल्च करना चाहती है। इस क्वेश्चन में यह फार्मूला यूज़ होना है। पीवीसीआई माइनस पीवीसीओ। हमें पता ही 7:44:44 है एनपीवी का यह फार्मूला होता है। द प्रोजेक्ट रिक्वायर एन इमीडिएट इन्वेस्टमेंट ऑफ 50 लाख। एक यानी उस प्रोजेक्ट को स्टार्ट करने के लिए अभी के अभी ₹50 लाख लगाने पड़ेंगे। तो आप मुझे बताइए यानी जीरो पीरियड पे कैश फ्लो कितना है? देखिए वह हमें कहता है कि जीरो पीरियड पे जो हमारा कैश फ्लो है वह इतना है। जीरो पीरियड पर आउट फ्लो है 50 लै का। ठीक है? हम समझ गए। बढ़िया लगा सर हमें ये जान के। यानी जीरो पीरियड पे 50 लाख लगेंगे। प्रोजेक्ट चलेगा 3 साल। भगवान का शुक्र है तीन ही साल चलेगा। और कोई सेल्वेज वैल्यू का क्लेश ही नहीं है। मतलब यह प्रोजेक्ट कितने साल चलेगा? 3 साल चलेगा। और इसकी सेल्वेज वैल्यू जीरो है। यह भी अच्छी बात हो गई। बोलिए हां या ना? ठीक है? 7:45:46 मैनेजमेंट बिलीव्स दैट एनुअल कैश इनफ्लोस आर अनसर्टेन एंड डिपेंड अपॉन मार्केट डिमांड। ठीक है? कैश इनफ्लो अनसर्टेन है। वो कहता है मार्केट रिसर्च टीम ने यह पॉसिबिलिटीज बनाई है कि एनुअल कैश फ्लो 18 लाख होगा। इसकी प्रोबेबिलिटी इतनी है। 24 लाख होगा इसकी प्रोबेबिलिटी इतनी है। 30 लै होगा इसकी प्रोबेबिलिटी इतनी है। और तीनों टोटल प्रोबेबिलिटी वन आती है। प्रोबेबिलिटी का टोटल वन भी आना चाहिए था। तो उसने तीन अलग-अलग कैश इनफ्लो दे दिए और उनकी प्रोबेबिलिटी दे दी। यहां तक आप मेरे साथ हो? आपको बात समझ आ रही है? ठीक है? द कंपनीज़ कॉस्ट ऑफ कैपिटल इज़ 10%। यानी हमें ये बात भी समझ आ गई कि जब भी हम एनपीवी निकालेंगे हमारा डिस्काउंट रेट कितना होगा? 10%। आपको पता है ना? अगर ये 3 साल का प्रोजेक्ट है तो इसकी एनपीवी कैसे आएगी? याद करो यह पीवीसीओ है और जो 3 साल की कैश फ्लो आएगी कैश फ्लो वन कैश फ्लो टू और कैश फ्लो थ्री आएगा। अब इन्हें 10% के रेट से डिस्काउंटिंग करेंगे। इसे 1 साल के लिए इसे 2 साल के लिए और इसे 3 इयर्स के 7:46:48 लिए। यह बात समझते हैं आप मेरी बात? यानी हम इन्हें डिस्काउंट करने वाले हैं वन टू 3 इयर्स के लिए। और इससे हम एक कंबाइंड एनपीवी निकालने वाले हैं। कूल मैन बताइए दोस्त। यह बात पता है ना? ऐसे भी ऐसे भी सोच सकते हो आप वो टैबुलर फॉर्म में भी सोच सकते हो अपने लिए जैसे हम कभी-कभी टैबुलर फॉर्म में बनाते हैं कि भाई हमारे आउटफ्लोस कितने होंगे? हमारे आउट फ्ल्लोस होंगे ज़ीरो पीरियड पे। जब पी फैक्टर वन होता है तो हमारा 50 लाख का आउटफ्लो होगा। याद आ रहा है आपको ये सब टेबल? मतलब ये अमाउंट होगा। फिर यह पीवी हो जाएगा। यह पीवी फैक्टर होगा। यह टाइम पीरियड होगा। मैं अभी आपके मन में सिर्फ यह कैलकुलेशन बसाना चाहता हूं। तो फिर ये कैश फ्लोस कैश इन फ्लोस आएंगे ईयर वन वाला ईयर टू वाला ईयर थ्री वाला फिर उनके पीई फैक्टर आएंगे 10% के रेट पे जैसे 909826751 है ना आपको याद आ रही है ये बातें जी हां सर हमें ये सारी बातें याद आ रही हैं बट मॉनटी कार्लो में नया क्या है सर सिमुलेशन 7:47:49 का मतलब क्या है सिमुलेशन में क्या एक्स्ट्रा है नया नई बात क्या है देखो बेटा वो कहता है ये तीनों कैश फ्लोस की अलग-अलग प्रोबेबिलिटी है ठीक है वो कहता है द फाइनेंस एनालिस जनरेटेड दी फॉलोइंग रैंडम नंबर। अब आई ना असली बात। मैंने आपको क्या बोला था? जब मैं थ्योरेटिकली पढ़ा रहा था तो मैंने आपको बताया था कि रैंडम नंबर्स का कुछ करना होता है। क्या करना होता है? अब समझो। रैंडम नंबर लेके हमें वैल्यू पता लगती है। जैसे वो कहता है ईयर वन की सिमुलेशन वन में रैंडम नंबर है 15। दोबारा बताओ। ईयर वन का कैश फ्लो इन तीनों में से कौन सा होगा? मुझे तो नहीं पता। ईयर वन का कैश फ्लो इन तीनों में से कौन सा होगा? मुझे नहीं पता। तो वो रैंडम नंबर से पता लगेगा। रैंडम नंबर है 15 यानी 15। अब 15 इन तीनों रैंडम नंबर की रेंज में से किस में लाई करता है? ये बताओ। रेंज में 15 जो है वो इस वाली रेंज में लाई करता है। यानी फर्स्ट ईयर का कैश इनफ्लो है 18। यानी फर्स्ट ईयर का कैश इनफ्लो 15 नहीं है। 15 तो रैंडम नंबर है। रैंडम नंबर को 7:48:49 रेंडम नंबर की रेंज में देखो। और उसके सामने जो कैश इनफ्लो है उसे मानो। यानी जो पहली सिमुलेशन है यानी जो सिमुलेशन वन है उसमें कैश फ्लो ईयर वन का कैश फ्लो कितना होगा? 18 लैक्स। अच्छा जी। ईयर टू का कैश फ्लो कितना होगा? ईयर टू का कैश फ्लो 58 है। 58 रैंडम नंबर इस रेंज में आएगा। इसका मतलब 24 होगा। यानी ईयर टू के लिए ईयर टू के लिए रैंडम नंबर ने 24 लै को सेलेक्ट किया है और ईयर थ्री के लिए 88 को सेलेक्ट किया है। 88 इस रेंज में आ रहा है यानी 30 कैश फ्लो होगा। क्या आपको मेरी बातें समझ आई? मैंने क्या कहा? हमने फर्स्ट ईयर के तीनों कैश फ्लोस मतलब फर्स्ट सिमुलेशन के तीनों कैश फ्लोस पता लगा लिए। फर्स्ट सिमुलेशन के। मतलब जब 7:49:50 पहली बार सिमुलेट करके कैश फ्लो निकाल रहे हैं। ठीक है जी। तो हमें पता लग गया यानी फर्स्ट सिमुलेशन में यह तीनों कैश फ्लोस यूज़ होंगे और यह रहे उनके डिस्काउंटिंग फैक्टर। ठीक है जी। तो एक काम करो वो कहता है सिमुलेट एनुअल कैश फ्लो फॉर ईच सिमुलेशन ट्रायल। ईच ईच मतलब हर एक के लिए। तो हमें ये क्वेश्चन कितनी बार सॉल्व करना होगा? पांच बार। क्योंकि सिमुलेशन 1 2 3 4 5 पांच बार सॉल्व करना है हमें। यानी पांच बार अलग-अलग एनपीवी निकालना है। पर पहले मैं फर्स्ट एनपीवी निकाल के आता हूं आपके लिए। फर्स्ट एनपीवी तक समझे? फर्स्ट एनपीवी में इन्हें इन्हें कैश फ्लो मानना है। तो देखिए हमने सिमुलेशन वन सॉल्व करनी स्टार्ट करी। हमने ईयर वन ईयर टू ईयर थ्री के रैंडम नंबर्स लिखे। उन रैंडम नंबर्स के साथ में कैश फ्लोस लिखे। ये कैसे देखे हैं? मैंने आपको समझ आ गया मैंने इनसे कैसे कैश फ्लोस निकाले रेंज देखकर। और फिर इन कैश फ्लोस की एनपीवी निकालो। यानी ईयर 1 2 3 है। उनके कैश फ्लोस आ गए। उन्हें पीवी फैक्टर से इंटू करो। ये प्रेजेंट वैल्यू आ गई। और 7:50:50 यह टोटल पीवीसीआई आ गई। मतलब यह बेसिकली पीवीसीआई आ गया टोटल। उसमें से आउट फ्लो माइनस कर दो। यह तो इन तीनों का जो टोटल है वो पीवीसीआई आ जाएगा। अब उसमें से 50 लाख माइनस कर दो तो पीवीसीओ माइनस हो जाएगा। तो आपके पास एनपीवी आ जाएगी 8.716 लाख की। यह एनपीवी आ गई केस वन की। बेसिकली सिमुलेशन वन की जिसे मैं केस वन बोल रहा हूं। वह एक्चुअल लाइफ में क्या है? यहां पर सिमुलेशन वन। मतलब पहले तुक्के की यह हो गए। जैसे बेटा लॉटरी में होता है ना जैसे एग्जांपल लो आपने किसी बच्चे को बुलाया और आप बोलते हो चलो यह बॉल्स हैं एक से मतलब मान लो जीरो से ले 99 तक की उनमें से कोई पांच बॉल तीन बॉल्स निकाल लो। तो मान लो पहले बच्चे ने बॉल निकाली कौन-कौन से नंबर की? पहले बच्चे ने बॉल निकाली 15 नंबर 58 नंबर 88 नंबर। तो उससे हमने सोचा कि कितना कैश फ्लो होगा। चलो हमने अब दूसरे बच्चे को बुलाया। हमने कहा बेटा आप आइए। आप बॉल्स चुनिए। तो आप मुझे बताइए सेकंड बच्चे के लिए क्या होगा? आप उसका हिसाब बताओ। बताइए आप मुझे जरा सेकंड बच्चे की सिमुलेशन क्या होगी? 7:51:52 सेकंड बच्चे की सिमुलेशन है 82। 82 किस रेंज में आता है? अगर आप ध्यान से देखो तो 82 इस रेंज में आता है। यानी फर्स्ट ईयर का कैश इनफ्लो होगा। यानी कि आप यह कह सकते हो सिमुलेशन टू जो है 7:52:16 उसमें फर्स्ट ईयर में कैश इनफ्लो कितना है? 82 की वजह से 30 लैक्स। फिर 27 है। 27 24 लै के बराबर है। और ईयर थ्री में कितना है? बताइए। ईयर थ्री में है 63। 63 फिर से इस रेंज में आ जाएगा। फिर से 24 लाख आ जाएगा। तो इस बार एनपीवी ले करना है 30 24 को लेके। किसे लेके? 30 24। आपको बात समझ आ रही है? हम क्या बात कर रहे हैं? यानी हम रैंडम नंबर्स के बेसिस पे रैंडम नंबर्स के बेसिस पे हम एनपीवी कैलकुलेट कर रहे हैं। ठीक है? तो देखो अब हमने यह वाले रैंडम नंबर्स के बेसिस पर इनफ्लोस लिए। फिर इनफ्लोस को हमने यहां पर सिमुलेशन टू में डाल दिया। यहां पर हमने सिमुलेशन टू में डाल दिया और उससे एनपीवी निकाल दी। अब बताइए क्या आपको सिमुलेशन टू समझ आ गई? क्योंकि सेकंड ईयर के कैश फ्लोस हमारे लिए डिसाइड हो गए। उसको पी फैक्टर से इंटू कर दिया तो उनसे प्रेजेंट वैल्यू आ गई। 7:53:17 उन सबका टोटल किया। अगर हम इन सबका टोटल करेंगे तो यह पीवीसीआई आ गया। -50 पीवीसीओ आ गया। तो हमारे पास एनपीवी आ जाएगी 15.118 यह हमारे पास एनपीवी आ जाएगी। क्या ये बातें क्लियर है बच्चा? कूल ऐसे ही पांच बार एनपीवी निकालनी है। ऐसे ही आपने एक बार, दो बार, तीन बार, चार बार, पांच बार रैंडम नंबर लिए। पांच बार एनपीवी निकाली। तो फिर पांचों एनपीवी का एंड में एवरेज निकाल दिया। पांचों एनपीवीस को ऐड किया और डिवाइड बाय 5 करके एवरेज निकाल दी और क्योंकि एवरेज पॉजिटिव आ रही है। एवरेज एनपीवी पॉजिटिव आ रही है। इसका मतलब हमारा डिसीजन है कि प्रोजेक्ट को एक्सेप्ट कर सकते हो क्योंकि पॉजिटिव एनपी है। कहानी समझ आई? यानी अच्छा सर कुछ टफ नहीं है। बस एक बार वो फार्मूला क्लिक कर जाए कि क्या करना है। आपको कहानी समझ आई? लेकिन एक दिक्कत बताऊं। अब मैंने पढ़ा दिया। अब अगर ऐसा क्वेश्चन एग्जाम में 7:54:17 आएगा तो तो आप कर जाओगे। सच बताओ कर जाओगे कि नहीं? लेकिन अगर यह क्वेश्चन बिना मेरे कराए एग्जाम में आ जाए या आप रिवाइज नहीं करके गए आखिरी दिन फिर आ जाए तो वहां पर यह क्वेश्चन ऐसे लगेगा कि पता नहीं कौन सी चाइनीस है समझ ही नहीं आएगा रैंडम नंबर क्यों दिए हैं रैंडम नंबर को क्या करना है रेंज से क्या करना है कैश फ्लो कैसे निकालना है बहुत अब इस पूरे क्वेश्चन में अगर आप ध्यान से देखो तो हमने प्रोबेबिलिटी को यूज़ ही नहीं कराया अब ध्यान से देखिए कहीं पे भी प्रोबेबिलिटी का यूज़ नहीं हुआ क्योंकि उसने एनपीवी निकालने के लिए पीवीसीआई माइनस पीवीसीओ स्टेट फार्मूला बताया है तो हमें वही वाला फार्मूला यूज़ करना देख रहे हो कहीं पे भी प्रोबेबिलिटी यूज़ नहीं हुई है इस क्वेश्चन में। PV फैक्टर यूज़ हुआ है लेकिन प्रोबेबिलिटी यूज़ नहीं हुई। एम आई क्लियर अबाउट इट? पक्की बात है। समझ आ गया? एक क्वेश्चन और देखते हैं बेटा। देखिए, अब ये थोड़ा थोड़ा बड़ा क्वेश्चन देखते हैं। ठीक है? यह क्वेश्चन बेस्ड है इस फार्मूला पे कि कंट्रीब्यूशन आता है सेलिंग प्राइस 7:55:17 माइनस वेरिएबल कॉस्ट इन यूनिट से। आपको याद है पीवीसीआई कैसे आता है? आप मुझे बताओ। आपको यह तो याद है कि पीवीसीआई कैसे आता है? बताओ। बताओ पीवीसीआई का फार्मूला क्या होता है? तो आप ये देखते हो ना कि हमारी सेल्स कितनी है? हमारी वेरिएबल कॉस्ट कितनी है? कंट्रीब्यूशन कितना है? फिक्स्ड कॉस्ट कितना है? फिर डेप्रिसिएशन कितनी है? फिर प्रॉफिट बिफोर टैक्स कितना है? फिर टैक्स कितना है? फिर उसमें डेप्रिसिएशन वापस ऐड बैक होती है। तो जाके सीएफएटी आता है। कुछ याद है आपको? सीएफएटी का फार्मूला। अब यहां पे यह वाले फार्मूला से हमें सीएफटी की तरफ चलना होगा। आइए पढ़ते हैं। वो कहता है पी क्यूआर लिमिटेड इज़ वैल्यूएटिंग अ प्रपोजल टू ल्च अ न्यू इंडस्ट्री इंडस्ट्रियल बैटरी प्रोडक्ट। ठीक है? द प्रोजेक्ट रिक्वायर्स एन इनिशियल इन्वेस्टमेंट ऑफ़ 80 लै। तो हमें यह बात तो समझ आ गई कि ज़ीरो पीरियड पे इन्वेस्टमेंट कितनी है? 80 लै चाहिए। और यूज़फुल लाइफ है 2 इयर्स नो सेल्वेज वैल्यू। भगवान तेरा लाख-लाख शुक्र है कि कोई सेलैज वैल्यू नहीं है। नंबर लाइन बनाऊं या दिमाग में बैठ रही है बात? दिमाग में यह बात तो बैठ रही है कि आज हम जीरो पीरियड पर ₹80 लाख लगा रहे हैं और यह फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर 2 साल तक चलेगी 7:56:18 और इसकी सेल्वेज वैल्यू ज़ीरो होगी। जीरो सैल्वेज वैल्यू है। ठीक है? यानी एक तरीके से पूरा 80 लाख डेप्रिशिएट करना है। आप यह भी तो सोचो कि अगर अब सर पिछले क्वेश्चन में डेप्शन नहीं आई थी। बेटा पिछले क्वेश्चन में उसने ऑलरेडी सीएफएटी दी हुई थी। वहां पर बातचीत जो दे रहा था टेबल में वह डायरेक्टली कैश इनफ्लो दे रहा था आपको। कैश इनफ्लो मतलब होता है सीएफ एटी। कैश फ्लो आफ्टर टैक्स उसमें सब कुछ ऑलरेडी एडजस्टेड है। भाई इस क्वेश्चन में ऑलरेडी सीएफएटी प्रिंटेड थी। यानी जो हम वैल्यू ले रहे थे वो डायरेक्टली सीएफएटी थी। पर अगर सीएफएटी मुझे निकालनी है तो याद है डेप्शन माइनस भी करनी पड़ती है। फिर डेप्शन ऐड भी करनी पड़ती है। याद है? कूल। ध्यान दीजिए। अब वह कहता है कि दी एनुअल फिक्स्ड खर्चे हैं ₹1 लाख के। ठीक है? द प्रॉफिटेबिलिटी ऑफ द प्रोजेक्ट मेनली डिपेंड्स अपॉन द एनुअल सेल डिमांड कि डिमांड कितनी होगी? अब वो मार्केट रिसर्च कहती है कि तीन डिमांड्स हो सकती हैं। 8000 भी हो सकती है, 10,000 भी हो सकती है, 14,000 भी हो सकती है। और इन तीनों केसेस के होने की प्रोबेबिलिटी यही है। द सेलिंग प्राइस है 7:57:18 2500, वेरिएबल कॉस्ट है 1600। तो बताओ कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट कितना है? एक बात बताना। सेलिंग प्राइस माइनस वेरिएबल कॉस्ट यानी 2500 - 1600 2500 - 1600 तो एक यूनिट को बेचने पर ₹900 की कंट्रीब्यूशन आती है पर यूनिट तो जितने भी यूनिट होंगे अब उसके बाद यूनिट 8000 भी हो सकते हैं। उसके बाद यूनिट 10,000 भी हो सकते हैं। उसके बाद यूनिट 14,000 भी हो सकते हैं। तीन केसेस हो सकते हैं। एग्री और डिसएग्री? फिर उसमें से फिक्स्ड कॉस्ट माइनस होगी। फिर उसमें से डेप्शन माइनस होगी। फिर टैक्स माइनस होगी। फिर डेप्शन ऐड बैक होगी। फिर जाके सीएफएटी आएगा। तीन बार अलग-अलग। क्लियर है यह बात? ठीक है? टैक्स रेट दिया हुआ है। डेप्रिसिएशन एसएलएम पे है। पीवी फैक्टर 12% है और 12% के पी फैक्टर प्रिंट करके भी दिए हैं। वो कहता है जी फाइनेंसियल डिपार्टमेंट जनरेटेड दी फॉलोइंग रैंडम नंबर्स। वो कहता है जी ईयर वन में ट्रायल नंबर्स ईयर वन के ये ये हैं पांचों और ईयर टू के ये पांचों। तो इस क्वेश्चन को कितनी बार सॉल्व करना है? पांच बार सॉल्व करना है। एक बार इन दोनों ट्रायल नंबर्स को लेके ईयर वन के लिए ईयर टू के लिए। फिर एक 7:58:20 बार इन दोनों रैंडम नंबर्स को लेके ईयर वन ईयर टू के लिए। फिर एक बार इन दोनों नंबर्स को ईयर वन ईयर टू के लिए। फिर एक बार इन दोनों नंबर्स को ईयर वन ईयर टू। फिर इन दोनों नंबर्स को ईयर वन ईयर टू। मेरी बातें क्लियर हो गई आपको? देखिए अब वो कहता है जी रैंडम नंबर का ये सीक्वेंस है। इस सीक्वेंस को फॉलो करना है। वो कहता है जी सिमुलेट करिए एनुअल सेल वॉल्यूम फॉर ईच ट्रायल। कितनी-कितनी सेल हो सकती है? देखो हमें पहले तो वर्किंग नोट बना लेते हैं। एंड इनिशियल इन्वेस्टमेंट है 80 लाख। लाइफ है प्रोजेक्ट की 2 इयर्स। तो 80 - 0 / 2 यानी हर साल की डेप्रिसिएशन ₹40 लाख हो गई। हर साल की डेप्रिसिएशन ₹40 लाख हो गई। यह तो क्लियर हो गया। मैं थोड़ा तेज़ तो नहीं चल रहा। समझ आ रहा है? मैं सॉल्यूशन करा नहीं रहा हूं। मैं दिखा रहा हूं खाली सॉल्यूशन। बट आई होप समझ आ रहा होगा। ठीक है? फिर वो कहता है जी सिमुलेट करते हैं सेल्स यूनिट को। देखो पहला ट्रायल है 16 और 77। 16 एंड 77। तो बताओ 16 तो इस रेंज में आया। तो फर्स्ट ईयर की सेल है 8000 यूनिट। और सेकंड ईयर में 77 77 इस रेंज में आया 7:59:20 तो यूनिट्स हैं 14,000 यह पहला ट्रायल है। पहला ट्रायल मतलब पहली सिमुलेशन है। यह कौन सी सिमुलेशन है? पहली। तो पहली सिमुलेशन के हिसाब से ईयर वन में 8,000 यूनिट और ईयर टू में 14,000 यूनिट। यानी अगर हम बोलते हैं कि ट्रायल वन की बात कर रहे हैं तो उसमें ईयर वन में 8,000 और ईयर टू में 14,000। फिर ऐसे ही हर ईयर के लिए नीचे बना दिया। ठीक है सर। हम एक काम करते हैं एनुअल कैश फ्लो का फार्मूला बनाते हैं। एक बात बताओ कंट्रीब्यूशन पर यूनिट कितनी है? 2500 - 16900 हो गई। तो हम ये फार्मूला लगा सकते हैं। कंट्रीब्यूशन माइनस फिक्स्ड कॉस्ट माइनस डेप्रिसिएशन * 1 - t + डेप्रिसिएशन cएफ 80 होगा। डायरेक्ट फ़ूला लगा दूं ये वाला। बताओ ये फ़ूला सबको समझ आ रहा है? आसान है बेटा। देखो ना कंट्रीब्यूशन आ गया। सेल प्राइस माइनस वेरिएबल कॉस्ट करके उसमें से अगर हम ये टोटल कंट्रीब्यूशन होना चाहिए इनू यूनिट्स करने के बाद फिर 8:00:21 उसमें से फिक्स्ड कॉस्ट माइनस करो डेपिशन माइनस करो फिर टैक्स माइनस करो फिर डेपिशन ऐड बैक करो तो सीएफएटी आ जाएगा अब बताओ अगर फोर अगर 8000 यूनिट्स होते तो कितना आता तो कंट्रीब्यूशन कितनी आती वैसे चाहो तो इसे टेबल बना के भी कर सकते हो 8000 पे 10 पे और 14000 पे अगर आप चाह तो इसे टेबल बना के भी सॉल्व कर सकते थे आप देखिए पहले आप सेल्स माइनस वेरिएबल कॉस्ट दिखाने की जरूरत नहीं है टाइम वेस्ट करने की। सीधा कंट्रीब्यूशन दिखाओ तो 900 * 8000 900 * 8000 900 * 10000 * 14000 तो यहां पे आ जाएगा 72 लाख। यहां पे आ जाएगा 90 लाख और यहां पे आ जाएगा 126 लाख। फिर फिक्स्ड कॉस्ट माइनस करिए। ₹1 लाख की फिक्स्ड कॉस्ट थी। फिर डेप्रिसिएशन माइनस करिए। 40 लाख की डेप्रिसिएशन थी ना। 8:01:25 ठीक है जी। तो अब आप मुझे बताइए कि प्रॉफिट बिफोर टैक्स कितना आएगा? फिर उसमें से टैक्स माइनस कर दीजिए। तो जैसे 72 में से 606 तो 20 बचा। 20 में से अह टैक्स रेट है 30% तो 6 लाख टैक्स चला गया तो प्रॉफिट आफ्टर टैक्स आ गया 14 लाख अब उसमें डेप्रिसिएशन ऐड बैक कर दो तो 54 लाख आ गया फर्स्ट ईयर का ऐसे ही सेकंड ईयर में 66.6 लाख आ जाएगा थर्ड ईयर मतलब थर्ड केस में 91.8 लाख आ जाएगा। यह ईयर नहीं है। यह केसेस हैं। कि अगर सेल इतनी अगर इतनी यूनिट है तो इतनी कैश फ्लो है 10,000 पे इतनी है और 14,000 यूनिट पे इतनी है। क्या आपको तीनों ईयर तीनों केसेस की सीएफएटी समझ आ गई? आप मुझे बताइए क्या आपको सभी केसेस की सीएफएटी समझ आ गई दोस्तों? ईजी था यह तो। 8:02:31 अब देखिए, अब हम ट्रायल वाइज़ सॉल्व करते हैं। पहला ट्रायल क्या था? पहला ट्रायल कहता है कि भैया ईयर वन में और ईयर टू में ईयर वन में 8000 यूनिट्स और ईयर टू में 14000 यूनिट तो 8000 का एनपीवी निकालो 8000 का सीएफएटी 54 लै और 14000 का सीएफएटी निकालो 91.8 तो 54 और 91.8 को लिया दोनों का पीवी फैक्टर मल्टीप्लाई किया। पीवी निकाली ये टोटल पीवीसीआई आ गया। उसमें से पीवीसीओ को माइनस किया तो ये एनपीवी आ गया फर्स्ट केस फर्स्ट ट्रायल का। यानी यह फर्स्ट ट्रायल का एनपीवी आ गया। ऐसे ही हमें पांच बार अलग-अलग ट्रायल का एनपीवी निकालना है। दोबारा बताऊं या क्लियर है? देखिए ईयर ट्रायल टू भी देख लेते हैं। चलो ट्रायल टू में नंबर्स थे 48 और 32। 48 और 32। अब 48 को देखो। 48 बेटा इस कैटेगरी में आएगा। और 32 भी इसी कैटेगरी में आएगा। यानी फर्स्ट ईयर में भी 10,000 यूनिट। सेकंड ईयर में भी 10,000 यूनिट। यानी 8:03:32 दोनों ईयर में 10,000 यूनिट वाला सीएफएटी आएगा। तो यानी दोनों ईयर में सेम सीएफएटी आएगा। तो उसकी प्रेजेंट वैल्यू निकाली उसको टोटल पीवीसीआई आ गया। पीवीसीआई में से पीवीसीओ माइनस कर दिया 80 लाख। तो ये हमारा एनपीवी आ गया ट्रायल टू का। ऐसे ही हमने ट्रायल वन का एनपीवी निकाला। ट्रायल टू का एनपीवी निकाला। फिर ऐसे ही ट्रायल थ्री का एनपीवी निकाला। ट्रायल फोर का एनपीवी निकाला। ट्रायल फाइव का एनपीवी निकाला। फिर उन सबको ऐड करके डिवाइड बाय फाइव कर दिया। एवरेज एनपी भी आ गया। अब एवरेज एनपी भी पॉजिटिव है। इसलिए हम कह सकते हैं कि प्रोजेक्ट को एक्सेप्ट कर लेना चाहिए। प्रोजेक्ट को एक्सेप्ट कर लेना चाहिए। क्या आपको ये बातें समझ आ गई? पक्की बात है? क्लियर है आपको ये सब कहानी? मॉडल सिमुलेशन का क्वेश्चन अगर एग्जाम में आएगा तो कर लोगे आप। देखो इसी को ही देगा वो घुमा फिरा के। बट आपको बस वो रैंडम नंबर टेबल देखना आना चाहिए कि भ ठीक है रैंडम नंबर देखकर हमें टेबल देखना होता है। एक बार इंस्टट्यूट ने बहुत पुरानी बात 8:04:33 है। तब कॉस्टिंग पढ़ाई जाती थी फाइनल लेवल पे भी। मतलब एग्जाम हुआ करता था इस तरीके का। और उसमें एक बारी उन्होंने क्वेश्चन दिया ऐसा कि ना उन्होंने 10 बारी बोला कि 10 बारी कैलकुलेशन करो। लेकिन जो रैंडम नंबर थे वो 20 दे दिए। मतलब जैसे इधर तो क्लियरली मेंशन किया है ना। देखो इस क्वेश्चन में क्लियरली मेंशंड है कि यह ईयर वन का ट्रायल नंबर है। यह ईयर टू का ट्रायल नंबर है। अब जैसे सोचो इसी क्वेश्चन में वो पता है क्या दे दे? नंबर ऐसे प्रिंट करके दे दे। 16 48 81 62 09 77 32 158 94 अब हमें कैसे पता चलेगा? हमें ये बात पता है कि हमें पांच सिमुलेशन करनी है क्योंकि 10 नंबर दिए हैं और दो ईयर हैं। तो हर बारी दो नंबर एक ईयर के लिए यूज़ होंगे। तो हमें फिर पेअर बनाना पड़ेगा कि ये दोनों ईयर वन के लिए यूज़ होंगे। ये दोनों ईयर टू के लिए यूज़ होंगे। ये दोनों ईयर थ्री के लिए यूज़ होंगे। ये दोनों ईयर फोर के लिए और ये दोनों ईयर फाइव के लिए। 8:05:34 फिर ऐसे पेयरिंग करके यूज़ करना पड़ेगा। बट यहां अच्छा क्वेश्चन है जो क्लियरली उन्होंने बताया है कि ईयर वन के लिए ये नंबर्स हैं और ईयर टू के लिए ये नंबर्स हैं। अलग-अलग ट्रायल में ये वेल ड्राफ्टेड क्वेश्चन है। समझ आ गई आपको मेरी बात? पक्की बात है? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है? तो बेटा मैं यह मान के चल रहा हूं कि मॉनटी के तो क्वेश्चन आपको समझ आ गए अच्छे से। है ना? मैं एक आधा डिसीजन ट्री का भी बड़ा क्वेश्चन बना दे के करा देता हूं आपको ताकि डिसीजन ट्री का भी अगर बड़ा क्वेश्चन एग्जाम में कभी आ गया तो आप हैंडल कर पाओ उसे। ठीक है? देखिए xyz लिमिटेड इज कंसीडरिंग एन इन्वेस्टमेंट इन न्यू टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट। ठीक है? आप एक नई टेक्नोलॉजी का प्रोजेक्ट लगाना चाहते हो। लगाओ भाई कौन मना कर रहा है? रिक्वायरिंग एन इमीडिएट इन्वेस्टमेंट ऑफ़ ₹80 लाख। अगर आज हम उस प्रोजेक्ट को स्टार्ट करते हैं तो हमारे ₹80 लाख लगेंगे। द प्रोजेक्ट हैज़ अ लाइफ ऑफ़ 2 इयर्स। 2 साल चलेगी। द सक्सेस ऑफ़ द प्रोजेक्ट डिपेंड्स अपॉन द मार्केट रिस्पांस इन ईयर वन। सब कुछ डिपेंडेंट है ईयर वन पे। यानी द फॉलोइंग इनफेशन इज़ 8:06:37 अवेलेबल। ईयर वन के आउटकम क्या है? देखो ईयर वन का आउटकम ही वो कह रहा है सबसे इंपॉर्टेंट है डिसाइड करने के लिए आगे। वह कहता है ईयर वन में या तो हाई डिमांड आ सकती है या तो लो डिमांड आ सकती है। ईयर वन में या तो हाई डिमांड आ सकती है या तो लो डिमांड। तो देखो अगर मैं आज की बात करूं अगर मैं इस प्रोजेक्ट को स्टार्ट करता हूं। इमेजिन करिए अगर मैं इस प्रोजेक्ट को आज स्टार्ट करता हूं। इसे ए पॉइंट बोल देते हैं। तो हमारा कितना खर्चा बैठेगा? 80 लाख का खर्चा बैठेगा। अगर आज हम इस प्रोजेक्ट को स्टार्ट करते हैं। क्या यह बात आपको समझ आती है? मैंने क्या कहा? कोई इशू तो नहीं है यहां तक? लेकिन इसके बाद की सिचुएशन क्या हो सकती है? इसके बाद की सिचुएशन ये हो सकती है कि ईयर वन जो है उसमें हाई डिमांड भी हो सकती है जिसके चांसेस ज्यादा हैं और लो डिमांड भी 8:07:39 हो सकती है जिसके चांसेस कम है अग्री और डिसएग्री तो वो कहता है कि अगर हाई डिमांड हुई जिसकी प्रोबेबिलिटी6 है तो हमारा फर्स्ट ईयर का कैश फ्लो आएगा इतना हमारा फर्स्ट ईयर का कैश फ्लो कितना आएगा? 50 लाख। यानी उस केस में ईयर वन का कैश फ्लो 50 लै होगा और ईयर टू का कैश फ्लो 20 लाख होगा। फिर उसके बाद यह बेसिकली एक्चुअल में मैं आपको समझाऊं तो यह एक नोड है। मतलब बट यह ना इवेंट नोड है। मतलब यहां पे 50 लाख आएंगे और यहां पे 20 लाख आएंगे। क्या इसमें मेरा कोई डिसीजन है कि 50 लाख और 20 लाख आएंगे या ये आएंगे ही आएंगे। क्वेश्चन ने ही बोला है कि ईयर वन पे या तो आप 50 लाख कमाओगे या तो आप 20 लाख कमाओगे। बट इफ दी हाई डिमांड अकर्स इन ईयर वन यानी वह 8:08:41 इसकी बात कर रहा है। हाई डिमांड अकर इन ईयर वन द कंपनी में इदर एक्सपेंड द प्रोजेक्ट इमीडिएटली यानी अब आपके पास दो ऑप्शन हो गई यहां पर या तो आप प्रोजेक्ट को फिर से एक डिसीजन लेने वाले हो आप फिर से आप एक डिसीजन लेने वाले हो क्या डिसीजन लेने वाले हो कि या तो आप एक्सपेंड करोगे प्रोजेक्ट को इमीडिएटली विद एन एडिशनल इन्वेस्टमेंट कॉस्ट ऑफ़ 30 लैक्स यानी यहां पे आप डिसीजन लोगे कि या तो आप एक्सपेंड ेंड करोगे और एक्सपेंड करोगे तो 30 लाख की इन्वेस्टमेंट करोगे या फिर कंटिन्यू विदाउट एक्सपेंशन या फिर आप कंटिन्यू विदाउट एक्सपेंशन क्या मेरी बातें आपको समझ आ रही है बच्चे मैंने क्या कहा देखो ध्यान से फर्स्ट ईयर में आप 50 लाख कमाओगे 50 लाख के बाद आप 8:09:42 डिसीजन कि या तो मुझे एक्सपेंशन करनी है या तो नहीं करनी। अगर एक्सपेंशन करनी है तो 30 लाख खर्च होंगे। नहीं करनी तो फिर 30 लाख खर्च नहीं होंगे। और ठीक है जी। एक्सपेक्टेड ईयर टू कैश फ्लोस अंडर हाई डिमांड आर डिसीजन आफ्टर हाई डिमांड कितना था? अगर हमने एक्सपेंड किया तो ईयर टू का कैश फ्लो 70 लाख है। तो अगर हमने एक्सपेंड किया तो ईयर टू का कैश फ्लो 70 लाख है। ठीक है? और अगर हमने एक्सपेंड नहीं किया तो ईयर टू का कैश फ्लो 40 लाख है। और ये सर्टेन है। सर्टेन मतलब इसमें कोई प्रोबेबिलिटी नहीं है। ये सर्टेन है। इसमें ऐसा नहीं है कि इसकी प्रोबेबिलिटी 0.6 है, 04 है। ना सर्टेन है। सर्टेन मतलब पक्का है कि यही होगा। या तो 70 लाख आएंगे या 40 लाख आएंगे ईयर टू में। यहां तक की बात आपको समझ आ गई। मैंने क्या कहा? पक्की बात है। 8:10:42 ठीक है? अब वह यह कहता है कि इफ लो डिमांड अकर्स इन ईयर वन। अगर ईयर वन में ही ईयर वन में ही लो डिमांड हो गई यानी फर्स्ट ईयर में ही अगर लो डिमांड का केस है तो द मैनेजमेंट विल अबेंडन द प्रोजेक्ट एंड रियलाइज़ अ सेल्वेज वैल्यू ऑफ़ ₹1 लाख। तो यानी यहां पे फिर हम अबेंडन कर देंगे। और ₹1 लाख हमें और मिलेंगे। प्लस मिलेगा। मतलब प्लस अब एंडेंडन करने पे हमें ₹1 लाख मिलेंगे। हमारी जेब से जाएंगे नहीं। मिलेंगे उल्टा कॉस्ट ऑफ़ कैपिटल 10 प्लस। अब मुझे एक बात बताओ हमारे पास सिचुएशनंस क्या-क्या हैं? देखो पहली सिचुएशन है कि अगर हम हाई डिमांड में जाते हैं। अगर हाई डिमांड हुआ तो ईयर वन में कैश फ्लो 50 - 30 होगा। बताओ 50 - 30 क्यों होगा? सोच के बताना। ईयर वन में हम 50 लाख कमाएंगे। लेकिन उसमें से 30 लाख तो रीइ्वेस्ट कर देंगे। तो हमारे पास ईयर वन के एंड में मतलब एट टाइम पीरियड वन आउट इनफ्लो कितना आएगा? खाली 20 आएगा और ईयर टू में इनफ्लो 20 आएगा। और अगर हम 8:11:45 एक्सपेंड नहीं करते तो ईयर वन का इनफ्लो रहेगा 50 और ईयर टू का इनफ्लो रहेगा 40 मतलब 50 और 40 ले सकते हैं हम इनफ्लो। फर्स्ट ईयर में 50, सेकंड ईयर में 40 या फिर फर्स्ट ईयर में 30 देखो 50 - 30 20 और या और फिर 70 तो 20 और 70 ले सकते हैं हम या फिर 50 और 40 ले सकते हैं हम इनफ्लो और यहां पे ईयर टू ईयर वन में 30 लै का इनफ्लो आएगा। बताओ 30 क्यों आएगा? राफे बताओ 30 क्यों आएगा दोस्त? बताओ क्योंकि आपने बेटा भले ही ₹20 लाख कमाए थे लेकिन जब प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट को अबेंडन करोगे तब भी तो आपको ₹1 लाख मिल रहे हैं ना अबंडनमेंट का भी तो ₹1 लाख मिल रहा है ना आपको तो वो भी तो मिलेगा आपको मेरी बातें समझ आई आपको या मैंने क्या कहा देखो रियल लाइफ में ना आईसीआई जब अपने डिसीजन टेबल बनाता है तो वो इस तरीके से बनाता नहीं है। देखो उसने अपनी बुक्स में कहा तो यह है कि जब भी डिसीजन लेना हो स्क्वायर बनाओ और जब भी कोई इवेंट की नोड हो तो सर्कल बनाओ। बट रियल लाइफ में वो 8:12:46 इसी से ही चला देता है। ऐसे डिसीजन का टेबल अलग से बनाता नहीं है। देखो अगर मैं आपको उनका भी डिसीजन टेबल बनाऊं। उन्होंने भी अपने हाथ से इधर एक बना के दिखाया हुआ है। वो कहता है डिसीजन के लिए ऐसा बनाते हैं। ये डिसीजन नोड है और ये चांस नोड है। चांस नोड जैसे टू और थ्री चांसेस हैं। फिर आगे पॉसिबल आउटकम्स एक्स व जेड है उनकी। जैसे उसने बनाया कि ये डिसीजन है। फिर ऐसा भी हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है। और फिर उसके बाद हमारे पास ऑप्शंस होगी कि हम क्या करें? कि अगर उसमें सक्सेस करें, एक्सपेंड करें ना करें फिर वह दोबारा डिसीजन लेता है। वह इस तरीके से बनाता है। आपको बातचीत समझ आई? मतलब वो बनाता है स्क्वायर सर्कल स्क्वायर। वो इस तरीके से बनाता है। तो हमने क्या बना के दिखाया आपको? स्क्वायर सर्कल स्क्वायर। समझ आ रहा है आपको? मैं क्या कह रहा हूं? उस पैटर्न को फॉलो करके दिखाया मैंने। चलिए, अब हम पढ़ते हैं। पढ़ना स्टार्ट करें। देखिए। अगर हम एक्सपेंड करेंगे तो क्या 8:13:46 होगा? अगर हम एक्सपेंड करेंगे तो ईयर वन में कैश फ्लो आया था। हमारे कैश इनफ्लो आया था 50। यानी ईयर वन के हमारे पास 50 आए थे। लेकिन इस 50 में से 30 तो हमने इन्वेस्ट कर दिए। तो उसमें से 30 हमने एक्सपेंशन पे इन्वेस्ट कर दिए। तो हमारे पास ईयर वन का कैश फ्लो कितना रह गया? 20 रह गया। और ईयर टू का कैश फ्लो 70 रह गया। मतलब इस केस में इस वाली ज़ोन में हमारे पास क्या रह गया? इस वाली ज़ोन में ईयर वन का कैश फ्लो आया 50। 50 में से 30 हमने इन्वेस्ट कर दिया तो बचा 20 तो 20 हमारे पास फर्स्ट ईयर के लिए बचा और सेकंड ईयर में 70 तो फर्स्ट ईयर में 20 और सेकंड ईयर में 70 उसकी प्रेजेंट वैल्यू फैक्टर से इंटू किया प्रेजेंट वैल्यू निकाली ये उसका टोटल पीवीसीआई आ गया इसमें से अगर आप ये देखो कि एक्सपेंशन की खाली आप एनपीवी निकाल रहे हो तो 76 है। अब सर इसमें से इनिशियल कॉस्ट को भी तो माइनस करो जो हमने 80 लगाई थी। अभी हम खाली कंपेयर कर रहे हैं। अभी हम खाली इसको और इसको कंपेयर कर रहे हैं। इसलिए हम इनिशियल इन्वेस्टमेंट इसमें से माइनस नहीं कर रहे। ठीक है? सिर्फ डिसीजन मेकिंग के लिए। अभी हम सिर्फ क्या देख रहे हैं दोस्तों? 8:14:46 डिसीजन मेकिंग। अब आगे सुनो। अगर हम डू नॉट एक्सपेंड करते। अगर हम डू नॉट एक्सपेंड करते तो हाई डिमांड में क्या होता? फिर ये वाला केस लगता। यानी फर्स्ट ईयर में 50, सेकंड ईयर में 40। यानी फर्स्ट ईयर में 50 कमाए, सेकंड ईयर में 40 कमाए। इसकी प्रेजेंट वैल्यू निकाली। ये हायर है। तो इसका मतलब यह है कि अगर हम एक्सपेंड करते हैं तो हमारी जो एनपीवी आ रही है वो वो जो पीवीसीआई आ रही है वो इतनी आ रही है। इसमें ना एनपीवी लिखना गलत है। ये एनपीवी नहीं लिखते। मैं इसे एनपीवी वर्ड काट देता हूं। मैं सिर्फ इसे पीवीसीआई बोलता हूं। पीवीसीआई 76 लाख है। और यहां पे टोटल पीवीसीआई कितनी है? 78 तो बताओ कौन बेटर है? 78 हायर है। तो यानी वी शुड नॉट एक्सपेंड। तो हमारा डिसीजन क्या है? वी शुड नॉट एक्सपेंड। यहां तक कितने बच्चों को समझ आ गई बात कि हमें एक्सपेंशन वाला डिसीजन तो नहीं लेना। यानी एक्सपेंशन वाला डिसीजन तो गलत है नहीं लेना। तो यानी हम अगर हाई डिमांड होगी तो फर्स्ट ईयर में 50 लै कमाएंगे। सेकंड ईयर में 40 लाख कमाएंगे और खुश 8:15:47 रहेंगे। कितने बच्चों को ये बात समझ आई? कि हम एक्सपेंशन का पंगा नहीं करेंगे। तो हमने एक्सपेंशन का डिसीजन तो रूल आउट कर दिया कि एक्सपेंशन बेकार है। मत करो। ठीक है? अच्छा एक चारा और भी है। यह तो तब की बात है जब हाई डिमांड है। अगर लो डिमांड होती तो क्या होता? अगर लो डिमांड होती तो 30 लै आते फर्स्ट ईयर में। देखिए अब अगर लो डिमांड होती तो तो ईयर वन के एंड पे हमें 20 लै मिले थे। ईयर वन के एंड पे हमें सेल्वेज वैल्यू भी मिली थी। तो टोटल कैश फ्लो 30 लै हो जाता। तो टोटल कैश फ्लो कितना हो जाता? 30 लै उसका। ठीक है जी। तो प्रोजेक्ट की एनपीवी कितनी आएगी? प्रोजेक्ट की एनपीवी कितनी-कितनी आएगी? देखिए अब इसे समझना। ये क्या किया हुआ है? इसे मैं आपको डायग्रामेटिकली समझाता हूं। देखो ये एक प्रोजेक्ट है जिसमें 80 लैक्स इन्वेस्ट किए हैं हमने। अब या तो उसमें हाई डिमांड आएगा या तो उसमें लो डिमांड आएगा। हाई डिमांड की पॉसिबिलिटी है 0.60 लो डिमांड की पॉसिबिलिटी है 0.40। 8:16:48 यहां पे हमारे पास पीवीसीआई कितनी आ रही है? फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की मिला के। अगर हम फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की पीवीसीआई देखते हैं तो 78 49 और अगर हम लो डिमांड के केस में देखें तो पीवीसीआई आ रही है 9 से इंटू करके 27.27 यानी इसके आने के 60% चांसेस हैं। इसके आने के 40% चांसेस हैं। तो यानी 78.49 कम हम कमाएंगे। के 60% चांसेस हैं। 27.27 कमाएंगे। इसके हमारे पास 40% चांसेस हैं। अब इन दोनों को टोटल करिए। तो ये टोटल आया 47.094 तो ये एक्सपेक्टेड पीवीसीआई आ गया। यह हमारे पास आ गया एक्सपेक्टेड पीवीसीआई। 8:17:49 अब उसमें से पीवीसीओ को माइनस कर दो। नहीं सॉरी मैंने गलत लिखा है। यह 58 है। यह वैल्यू आ रही है आपके पास 58.002 58.02 यहां तक की बातें आपको क्लियर है बेटा? 8:18:19 ठीक है जी। 58.002 अब इसमें से 80 लै माइनस कर दो तो प्रोजेक्ट की एनपीवी कितनी आ गई? नेगेटिव आ गई। अप्रोक्समेटली 22 लाख नेगेटिव 22 लाख नेगेटिव तो प्रोजेक्ट को नॉट एक्सेप्ट करो। यानी पूरा का पूरा प्रोजेक्ट बेकार है। क्या आपको डिसीजन ट्री समझ आया मैंने क्या किया? यानी हमने कैलकुलेशन उल्टी स्टार्ट करी। आपने ये बात नोटिस करी कि कैलकुलेशन हमने ईयर टू से स्टार्ट करी। यही बात मैं आपको समझाना चाहता हूं कि डिसीजन ट्री का अगर क्वेश्चन एग्जाम में आता है तो आपको डिसीजन ट्री बनाना होता है लेफ्ट से राइट और सॉल्व करना होता है राइट से लेफ्ट सॉल्व करना होता है राइट से लेफ्ट तो हमने ये देखा कि अगर हम फर्स्ट ईयर में 50 लाख कमाएंगे तो सेकंड ईयर में 70 कमाएंगे बट 30 इन्वेस्ट होगा तो 50 - 30 और फिर सेकंड ईयर में 70 तो यानी या तो हम ₹ लाख और या तो हम यह कमाई करें 20 लाख और 70 लाख तो उसकी एनपी भी कम है और या फिर हम 50 और 40 40 करें उसकी एनपीवी ज्यादा है तो डेफिनेटली यह वाला केस सेलेक्ट करेंगे नॉट एक्सपेंड वाला यह रिजेक्ट ही है एक्सेप्ट 8:19:22 और दूसरा केस है लो डिमांड का लो डिमांड में हमें 30 लैक्स मिल रहे हैं उसकी एनपीवी बनती है इतनी तो हाई केस में इतनी एन पीवीसीआई आ रही है लो केस में इतनी पीवीसीआई आ रही है और इसके 60% चांसेस हैं इसके 40 तो 60 और 40 से इंटू किया यह हमारी एक्सपेक्टेड पीवीसीआई आ रही है यह पीवीसीओ है माइनस करके देखा तो पता चला एनपीवी नेगेटिव है रिजेक्ट कर दिया प्रोजेक्ट बातचीत क्लियर हो गई आपको प्रेजेंटेशन का गेम है। देखो मुझे नहीं लगता कि इतने बड़े लेवल पर यह बच्चों वाले क्वेश्चन पूछे जाने चाहिए। यह सिर्फ वो उस केस में पूछ सकता है चार पांच चार मार्क्स तक का जब अगर वो आपसे डिसीजन ट्री बनवाना चाहता हो। अगर वो चाहे कि आप डिसीजन ट्री बना के दिखाओ क्योंकि उन्होंने अपने मॉड्यूल में एक डिसीजन ट्री ये वाला बना के दिया हुआ है। और यह वाला क्वेश्चन आप इलस्ट्रेशन नंबर 11 है। आपके मॉड्यूल में आप यह भी पढ़ के जा सकते हैं जरूर। [गला साफ़ करने की आवाज़] समझ आ रहा है? जी आपको? इसे भी कवर अप करिएगा जरूर। इलस्ट्रेशन 11 को भी जरूर पढ़ के जाइएगा। उन्होंने इसका भी पूरा रिजल्ट करके सॉल्व करके दिया हुआ है। और ये एक क्वेश्चन मैंने भी करा दिया। 8:20:24 इसे भी पढ़ लीजिएगा। क्लास में हमने दो क्वेश्चन और पढ़े हुए हैं डिसीजन ट्री के। वो भी रिवाइज कर लीजिएगा। ठीक है जी। ऑल कूल। चलिए टेक केयर बेटा। वेलकम वेलकम वेलकम दोस्तों। आज जो हम नेक्स्ट में एक्स्ट्रा क्वेश्चंस पढ़ने वाले हैं वो सिक्योरिटी वैल्यू एनालिसिस सॉरी सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन बोल रहा हूं मैं सिक्योरिटी एनालिसिस चैप्टर के कुछ टॉपिक पढ़ने वाले हैं। ये कौन से टॉपिक है मैं पहले आपको आपके मॉड्यूल में दिखा देता हूं। आपके मॉड्यूल में एक जगह पर डिस्कशन है टेक्निक्स यूज्ड इन इंडस्ट्री एनालिसिस। यानी अगर आप एक इन्वेस्टर हैं। आप किसी इंडस्ट्री में पैसा लगाना चाहते हैं। सोचो आप एक इन्वेस्टर हैं। आप किसी इंडस्ट्री में पैसा लगाना चाहते हैं। तो अगर आप इंडस्ट्री में पैसा लगाना चाहते हैं तो आप उस इंडस्ट्री के लिए सोचते हैं कि भाई इस इंडस्ट्री इस स्पेसिफिक इंडस्ट्री में पैसा लगाऊं या ना लगाऊं। आप यह सोचते हैं कि इस इंडस्ट्री में पैसा लगाऊं ना लगाऊं। तो आप उससे पहले उसे एनालाइज करना चाहते हैं। पढ़ना चाहते हैं कि वो इंडस्ट्री बढ़ेगी, घटेगी, गिरेगी, उछा ऊंचाई उछाई जाएगी, नीचे 8:21:24 जाएगी। कि क्या होगा? तो उसके लिए ये मेथड हमने थ्योरेटिकली पढ़े हुए हैं। रिग्रेशन एनालिसिस, इनपुट आउटपुट एनालिसिस है ना? इनके बारे में हमने बात की हुई है। प्लस कुछ और आगे इसी तरीके के एनालिसिस सीख रखे हैं हमने। मैं अभी आपको आगे भी बता देता हूं। इसी चैप्टर के अंदर और भी जितने भी इस चैप्टर के अंदर एनालिसिस वाले पार्ट थे ना जिनके क्वेश्चंस बन सकते थे, वो सारे क्वेश्चन मैंने इधर बना दिए हैं आपके लिए। आइए, एक-एक करके समझना स्टार्ट करते हैं। आर यू रेडी? सुनिए। मैं सबका एक-एक प्रैक्टिकल क्वेश्चन पढ़ा रहा हूं ताकि अगर एग्जाम में कभी दो मार्क का प्रैक्टिकल आ जाए तो आप कर पाओ। सुनो रिग्रेशन एनालिसिस का डिमांड फॉरकास्टिंग का क्वेश्चन है। बहुत आसान क्वेश्चन है। ये मैं आपको बिना पढ़ाए बता देता ना और बोलता जा बेटा ये कर ले क्वेश्चन तो भी आप कर लेते। आपने 10थ क्लास में लीनियर इक्वेशन पढ़ी है। बस ये लीनियर इक्वेशन है और कुछ नहीं है। इसमें वैल्यू पुट करनी होती है। रिग्रेशन निकालने को थोड़ी ना बोल देगा। कोई फाउंडेशन का मैथ्स का पेपर दोबारा थोड़ी ना लेना स्टार्ट कर देगा कि रिग्रेशन निकालने को बोले। रिग्रेशन इक्वेशन बना कर देगा। उसमें वैल्यू पुट करनी होगी बस। डरो मत। आपको आज तक ना रिग्रेशन के वर्ड से ही नाम से ही डर है क्योंकि फाउंडेशन में ढंग से समय पढ़ा नहीं था। तो आपको इसके नाम से ही डर लगता 8:22:26 है रिग्रेशन के। तो घबराओ नहीं। अब रिग्रेशन करने को नहीं बोलेगा कि इक्वेशन बनाओ। बनी हुई इक्वेशन देगा। बस वैल्यू पुट करनी होगी। सुनो। एन एनालिस्ट वांट्स टू स्टडी द रिलेशनशिप बिटवीन इंडस्ट्री सेल्स यानी y एंड नेशनल डिस्पोजेबल इनकम यानी x। यानी लोगों की इनकम कितनी है? x और इंडस्ट्री में डिमांड कितनी है? y। वह कहता है 5 साल के ट्रेंड के हिसाब से उसने रिग्रेशन इक्वेशन डिराइव कर रखी है। चलो थैंक यू कि रिग्रेशन इक्वेशन डिराइव कर रखी है। यानी वह यह कहता है रिग्रेशन इक्वेशन है y = 45 + 2.5x इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब हुआ जितनी भी लोगों की डिस्पोजेबल इनकम है। जितना पैसा लोगों की जेबों में है खर्चने के लिए मतलब ताई के टैक्स ले लेने के बाद जितना आपके पास जेब में बचेगा। डिस्पोजेबल इनकम समझते हो ना? टैक्स देने के बाद वाली इनकम। तो जितना इनकम आपकी जेब में है जितने आप खर्च सकते हो उस इनकम का ढाई गुना + 45 टाइम्स = y यानी इतनी आप उस प्रोडक्ट की सेल होगी। इतनी उस प्रोडक्ट की सेल होगी जिसके लिए ये रिग्रेशन इक्वेशन है। यानी इसका मतलब क्या है? ये हो गया कांस्टेंट। कांस्टेंट 8:23:28 का मतलब होता है ये डिमांड तो होगी ही होगी। चाहे लोगों की इनकम ज़ीरो भी हो। अगर मैं इनकम ज़ीरो रख देता हूं तो भी 45 की डिमांड तो होगी ही होगी। यानी यह होता है कांस्टेंट 45 यानी इतनी डिमांड जीरो इनकम पर भी होगी और यह वह है जो इनकम डिराइव्ड डिमांड है। यह है इनकम इंडिपेंडेंट डिमांड। मतलब ये वो डिमांड है जो इनकम हो या ना होनी है। ये वो डिमांड है जो इनकम के साथ होनी है। ठीक है जी। अगर वो कहता है नेशनल डिसपॉजिबल इनकम 60 लाख करोड़ है। अगर यहां पर 60 लाख करोड़ है तो 60 को इससे इंटू करो + 45 करो। तो बताइए अगर मैं यहां पे 60 * 2.5 + 45 करता हूं तो मेरे पास y कितना आएगा? यानी सेल्स आएगी 195 करोड़ की। 195 करोड़ की। क्या यह बातें आपको समझ आ गई बेटा? मैंने क्या कहा? एक बात ध्यान रखना एक अजीब बात है यहां पर 8:24:29 जो इस क्वेश्चन में स्केल अलग है। स्केल अलग होने का मतलब यह है कि ये जो x को लेना है वो लाख करोड़ में लेना है। x को किस में लेना है? लाख करोड़ में। लेकिन जो इसे लेना है यह सिर्फ करोड़ में आएगा। यानी y सिर्फ करोड़ में होगा। लेकिन x जो होगा वह लाख करोड़ में होगा। याद रखोगे यह बात? बड़ी विचित्र है कि है होने को एक इक्वेशन है लेकिन इसमें लेफ्ट साइड और राइट साइड में वैल्यू्यूएशन अलग-अलग है। इसका मतलब सर मुझे अगर यहां पे लाख करोड़ है तो उसे डिवाइड बाय 1 लाख कर देना चाहिए मुझे क्योंकि करोड़ लेने हैं मुझे खाली। अब इधर देखो वो कहता है कि अगर डिस्पोजबल इनकम है 60 लाख करोड़ तो मैं 60 लाख करोड़ में खाली 60 वैल्यू पुट करूंगा। और जो इधर आंसर आएगा y का वो y का आंसर जैसे 195 आ रहा है तो मैं उसे 195 लाख करोड़ नहीं बोलूंगा। नहीं सिर्फ करोड़ बोलूंगा क्योंकि उसने बोला है y को करोड़ में आंसर देना और x को लाख करोड़ में लिखना। 8:25:32 अब जो क्वेश्चन कहेगा वो मानना पड़ेगा आपको। क्वेश्चन भगवान है। सर ये तो मैथमेटिकली गलत हो गई इक्वेशन। होने दो। आपका क्या लेन देना है? आप यहां कोई आर्य बेटा बनने थोड़ी ना बैठे हो। आपको क्वेश्चन करना है। वो कहेगा दिन को चांद वो कहेगा जी आज रात को 12:00 बजे सूरज निकला है। आप बोलो निकल गया। मैंने तो गगल्स भी पहन लिए। जो वह कहे वह करो। आपको क्या लेन देना है? इफ द डिस्पोजेबल इनकम फॉर द फॉरकास्टेड ईयर इज़ 60 लाख। ठीक है? एंड द कोरिलेशन कोफिशिएंट ऑफ़ x एंड y इज़ 9 बेटा को-रिलेशन कोफिशिएंट होता है मतलब x और y के बीच में तालमेल कैसा है?9 है। x और y के बीच में तालमेल न है। तो अगर ये पता है मुझे और पूछता है कोफिशिएंट ऑफ़ डिटरमिनेशन कितना है? तो याद करो मैंने कोफिशंट और डिटरर्मिनेशन के बारे में बताया हुआ है। r² होता है। r होता है कोरिलेशन कोफिशिएंट। उसके स्क्वायर को बोलते हैं कोफिशिएंट ऑफ डिटरर्मिनेशन। तो हम r का स्क्वायर कर देंगे तो 9 का स्क्वायर कर दिया। 80 81% हो गया बेसिकली 81 मतलब 81% तो ये हमारा कोफिशिएंट ऑफ़ डिटरमिनेशन है। ये क्या बताता है? ये 8:26:33 बताता है कि यानी अगर मेरे को कभी भी कोई भी चीज समझनी है। देखिए वो कहता है कि अगर हम इस सबको सॉल्व कर देते हैं। ये तो हमें क्लियर हो गया। 81 आने का मतलब क्या है? यानी 81% ऑफ द वेरिएशन इन द इंडस्ट्री सेल्स इज एक्सप्लेंड। यानी 81% वेरिएशन को हम एक्सप्लेन कर सकते हैं। तो जो बची हुई 19% है वो अदर फैक्टर्स की वजह से है। वो एक्सप्लेंड नहीं है। यानी वो अनएक्सप्लेंड है। रिमेनिंग अनएक्सप्लेंड है। याद है आपको यह बात? मैं समझाता हूं। ये मैंने आपको पोर्टफोलियो मैनेजमेंट चैप्टर में नोट्स लिखवाए हुए हैं। ये देखो। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के कांसेप्ट 15 का थर्ड पार्ट यह कहता है कोफिशिएंट ऑफ डिटरर्मिनेशन का मतलब होता है कोरिलेशन कोफिशिएंट का स्क्वायर कोरिलेशन कोफिशिएंट का स्क्वायर करने से आता है और यह हमें बताता है कि जितना अगर यह r² है इतना रिस्क जो है वो एक्सप्लेंड होता है और बाकी का जो रिस्क होता है वह अनएक्सप्लेंड होता है। याद करो। यह बात 8:27:34 मैंने आपको समझाई थी कि r² जितने परसेंट आएगा, यानी उतने परसेंट रिस्क की एक्सप्लेनेशन हमारे पास है। यानी उतने रीज़न हम रीज़न को एक्सप्लेन कर सकते हैं कि इतना चेंज क्यों आया है। तो हम ये बोल रहे हैं कि 81% वेरियंस को हम एक्सप्लेन कर सकते हैं रीज़ंस के साथ। कि वो इनकम के चेंज होने से आया है। बट बाकी के 19% को हम एक्सप्लेन नहीं कर सकते। वो अनएक्सप्लेंड है। वो अदर फैक्टर्स हैं। वो एरर टर्म्स हैं। यही बात आपको इधर से समझाई गई थी। याद है आपको कि रिस्क के बारे में यह बहुत कम लोग पढ़ते और पढ़ाते हैं। मैंने क्लास के अंदर पढ़ाया हुआ है आपको यह टॉपिक कि कोरिलेशन कोफिशिएंट से कैसे हम डिराइव करते हैं रिस्क को। इसी के बारे में ये क्वेश्चन है। यही हम लिख रहे हैं इधर कि कोरिलेशन ऑफ डिटरमिनेशन जब आप निकालते हो अगर वो 81% है। इसका मतलब 81% वेरिएशन हम समझा पा रहे हैं। रीज़ हमें पता है। बाकी के 19% के रीज़ नहीं पता। ये मतलब है। ठीक है जी। तो पहला इंडस्ट्री एनालिसिस समझ आ गया। अगला क्वेश्चन इनपुट आउटपुट एनालिसिस। अब यह क्या कहता है? देखो कई बारी क्या होता है? 8:28:35 समझो पहले समझो कि ना अगर हम किसी इंडस्ट्री की बात करते हैं तो हम उसके इनपुट और आउटपुट को देखते हैं। मतलब इमेजिन करो यह बहुत अच्छा तरीका है। एक बात बताओ आपके घर में कभी-कभी दूध का दाम बढ़ जाता है। जैसे मान लो दुकान पे दूध का दाम बढ़ गया तो आपके घर पर बात होती होगी। अरे दूध बड़ा महंगा हो गया। आटा बड़ा महंगा हो गया। कभी आपने यह सुना है कि आपके घर पर यह बातचीत हो रही हो कि नमक महंगा हो गया या दालचीनी महंगी हो गई। अरे यार मिर्च का मसाला बड़ा महंगा हो गया। जबकि महंगा तो वो भी होता है। बट उसके बारे में बात क्यों नहीं होती? बात इसलिए नहीं होती क्योंकि वो हमारे आउटपुट में जो हम घर पे खाते हैं उस आउटपुट में वो बहुत छोटा हिस्सा होता है। जैसे आपके घर में खाना बनता है तो खाने में मान लो दालचीनी डलती होगी। कोई मसाला होता है वो एक तरह का है ना कुछ मतलब बेसिकली खड़े मसालों का एक हिस्सा है। तो अगर आप खाना बनाते हो तो उसमें दो दाने डालते होगे। तो मतलब अगर आपका खाना बनता है मान लो घर में आपके तो जो भी आप खाना खाते हो मान लो ₹100 का खाना आप बनाते हो 8:29:35 तो उसमें शायद उसकी कीमत ₹1 होती होगी तो थोड़ी सी महंगी भी हो गई तो उससे हमें नुकसान नहीं हो रहा होता तो रहा होता बट इतना फील नहीं हो रहा होता उसका उसके इनपुट का बढ़ना घटना हमें ज्यादा मैटर नहीं करता वो माइनर पोर्शन है पर अगर हमारे सब्जी महंगी होती है जब तेल महंगा होता है घी महंगा होता है तो हमें दिक्कत होता है क्योंकि वो हमारे खाने का मेजर हिस्सा होता है वो मतलब हमारे खाने में बड़ा बड़ा हिस्सा उस चीजों का होता है। है ना? तो उनसे हमें ज्यादा फर्क पड़ता है। ऐसा ही बिज़नेस में होता है। इनपुट आउटपुट एनालिसिस देखा जाता है। इनपुट आउटपुट एनालिसिस मतलब हम ये देखते हैं सिमिलर एग्जांपल मैं आपको अगर बिज़नेस में दूं तो हम ये देखते हैं कि जो हमारी आउटपुट है कि जो हमारी आउटपुट है उसमें इनपुट कितना-कितना लग रहा है अलग-अलग इंडस्ट्री का। मान लो मान लो मैं स्टील बनाता हूं। मान लो जिंदल स्टील आपकी कंपनी का नाम है। ठीक है? अब आप स्टील बनाते हो। लेकिन स्टील बनाने के लिए मान लो आपको कोल की जरूरत होती है। ऑब्वियसली स्टील बनाना है तो कोयले की जरूरत लगेगी। 8:30:37 तो आप यह देख रहे हो कि स्टील बनाने के लिए मेरे को कोल कितना चाहिए? तो आप यह देखोगे कि कोल का कितना इनपुट होता है स्टील की आउटपुट पे। कोल का कितना इनपुट? इमेजिन करो। इमेजिन करो कि 16 किलो कोल लगता है जब 100 किलो स्टील बनता है। तो 16 इनपुट आउटपुट रेशियो हो गई। यानी हमारे इनपुट का 16% कोल से आता है। तो इसका मतलब कोल का प्राइस अगर बढ़ेगा या घटेगा तो उसका हमारे ऊपर 16% इंपैक्ट आएगा। हमारी टोटल आउटपुट पे 16% चीज पे इंपैक्ट आएगा। क्या ये बात आपको समझ आई? ये बोलता है इनपुट आउटपुट एनालिसिस। देखो जैसे स्टील इंडस्ट्री है वो कंज्यूम करता है कोल को और पावर को इंटरमीडिएट इनपुट्स की तरह। तो यहां पे ये एक टेबल बना हुआ क्वेश्चन में मिलेगा आपको कि स्टील के आउटपुट अगर हम देखें आउटपुट ऑफ स्टील देखें तो आउटपुट ऑफ स्टील में अगर हम ये बोले कि भाई कि यूज्ड बाय कितना-कितना हो रहा है? अच्छा यहां पे यूज़्ड बाय है। तो फाइनल डिमांड कोल की कितनी है? 8:31:37 पावर की कितनी है? स्टील की कितनी है? और अगर मैं आपको यह बोलूं कि टोटल आउटपुट कितनी है? कोल की टोटल आउटपुट कितनी है? पावर की टोटल आउटपुट कितनी है? स्टील की टोटल आउटपुट कितनी है? तो यहां पे हमें यह तो समझ आ गया कि स्टील की टोटल आउटपुट 300 है। अब स्टील बनाने के लिए हमें कोल कितना लगता है? यानी कोल स्टील बनाने में कितना यूज़ होता है? यूज़ कितना होता है स्टील में? 50 पावर कितनी यूज़ होती है स्टील बनाने में? 80। तो देखो आपने क्या किया? 50 / 300 यानी 50 इनपुट है। 300 आउटपुट है स्टील का। 80 पावर का इनपुट है और 300 आउटपुट है स्टील का। तो यानी कोल लगता है लगभग 16% 16 17% पावर लगती है लगभग 26 27% यानी जब हम स्टील बनाते हैं तो इसका मतलब उस स्टील को बनाने के लिए 167 कोल चाहिए। 267 हमें क्या चाहिए थी? पावर। 8:32:37 यानी हमारी आउटपुट में इनका मेजर हिस्सा है। इन दोनों चीजों का मेजर हिस्सा है। ठीक है जी। तो हम यह बोल रहे हैं दिस मींस दैट टू प्रोड्यूस ₹1 ऑफ स्टील द इंडस्ट्री रिक्वायर 16 पैसा ऑफ़ कोल एंड 26 पैसा ऑफ पावर। क्या यह बात आपको समझ आई? यानी अगर मैं ₹1 का स्टील बनाना चाहता हूं तो मुझे 16 पैसे का कोल खरीदना पड़ेगा और 26 पैसे का पावर खरीदना पड़ेगा। 26 पैसे का पावर खरीदना पड़ेगा। क्या यहां तक समझ आया? है इनपुट आउटपुट रेशियो कि स्टील के आउटपुट में कोल का इनपुट कितना है?167 स्टील के ₹1 के आउटपुट में पावर का इनपुट कितना है?267 ठीक है सर। इनपुट आउटपुट हमें क्या समझाता है? इनपुट आउटपुट हमें यह समझाता है कि कितने इनपुट मतलब जो मैं आउटपुट बनाना चाहता हूं किसी भी इंडस्ट्री में उसके इनपुट कहां से आते हैं? अगर उसके इनपुट महंगे होंगे तो मेरा इनपुट महंगा हो रहा है। और अगर उस इनपुट का मुझ पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है, ज्यादा रेशियो है उसकी 8:33:38 इनपुट की तो मेरे आउटपुट पर भी इंपैक्ट आएगा। यानी पता है आपको जो बड़े इन्वेस्टर्स होते हैं बहुत बड़े इन्वेस्टर वो इतनी डीप तक भी स्टडी करते हैं। इतनी डीप तक भी स्टडी करते हैं। जैसे मान लो किसी ने बोला कि सर जिंदal steel का आप शेयर खरीद लो। तो कोई बड़ा इन्वेस्टर होगा ना जो वो ये नहीं सोचेगा जिंदल स्टील का शेयर खरीद लूं। कितने पे लिस्ट हो रहा है? कितना गेन हो रहा है? नहीं। क्योंकि दो चार ₹ लाख नहीं लगाना चाहता ना। ना वो तो बड़ा अमाउंट लगाना चाहता है तो वो ये तक भी देखेगा कि अच्छा जिंदल स्टील के आउटपुट पे किन-किन चीजों का प्रभाव पड़ता है। वो चीजों की इंडस्ट्री कैसी चल रही है वो वहां तक भी देखेगा। मतलब वो इनपुट तक को भी स्टडी करेगा। जो मेजर इनपुट है उनको भी स्टडी करेगा कि उनकी इंडस्ट्री का इंपैक्ट क्या आएगा जनरल पे। आज आपने जनरल स्टील खरीद लिया। कल को पता चला कोयला महंगा हो गया। कोल महंगा हो गया तो जनरल स्टील महंगा हो गया। स्टील महंगा हो गया तो स्टील का प्रॉफिट कम हो गया। तो आप यह भी स्टडी करोगे शेयर खरीदने से पहले। यह कहता है इनपुट आउटपुट एनालिसिस। समझ आ गई आपको बात? ठीक है जी। हां। उन्होंने स्टील को भी इनपुट में लिया हुआ है। बट स्टील का इनपुट पूछा नहीं है ना। उसने आपसे क्वेश्चन में 8:34:39 खाली कोल और पावर पूछा है। क्वेश्चन में खाली कोल और पावर के बारे में पूछा है। इसलिए स्टील का स्टील में इनपुट मतलब स्टील बनाने के लिए स्टील लगता है। वो नहीं हम गिन रहे। इनपुट आउटपुट यह बताता है कि फ्लो ऑफ गुड्स कहां से कहां हो रहा है इकॉनमी में। जैसे स्टील की प्रोडक्शन पे कोल और पावर का इफेक्ट है। इस कोफिशिएंट से हमें यह पता लगता है कि इंटर इंडस्ट्री लिंकेज कैसी है। अगर कोल या पावर के दाम महंगे होंगे तो उनकी सप्लाई कम होएगी। सप्लाई पे फर्क पड़ेगा। तो स्टील की प्रोडक्शन और कॉस्ट पे भी फर्क पड़ेगा। इसीलिए हम सोच समझ के डिसीजन लेंगे स्टील का शेयर खरीदना है कि नहीं खरीदना। यानी बेसिकली इनपुट आउटपुट एनालिसिस कहां काम आता है? जहां हम बड़े इन्वेस्टर होते हैं। और हम यह देखना चाहते हैं हम किसी एक पर्टिकुलर कंपनी में पैसा लगाएं या ना लगाएं। क्योंकि उसकी इनपुट के ऊपर क्या इंपैक्ट है? उसकी इनपुट्स को भी स्टडी करते हैं। आई होप बात समझ आ गई। ठीक है? अब एक होती है ब्रेथ इंडेक्स। ठीक है जी? ब्रेथ इंडेक्स अलग तरीके से शेयर 8:35:41 एनालिसिस करने के काम आती है। मार्केट को एनालिसिस करने के काम आती है। अगर मैं आपको आपके मॉड्यूल में दिखाऊं कि ब्रेथ इंडेक्स कहां आती है? तो यहां पे आती है। ये देखिए आपके मॉड्यूल में ये मार्केट इंडिकेटर्स प्रिंटेड है। मार्केट इंडिकेटर्स में बताया जाता है कि ब्रेथ इंडेक्स होती है। वॉल्यूम ऑफ ट्रांजैक्शंस को देखा जाता है। कॉन्फिडेंस इंडेक्स को देखा जाता है। आरएसए को देखा जाता है। ऑड लॉट थ्योरी को देखा जाता है। तो ये सब मार्केट के इंडिकेटर्स हैं कि स्टॉक मार्केट कैसा परफॉर्म कर रही है। यह पांच इंडिकेटर्स हैं स्टॉक मार्केट के। इनको मैं थ्योरेटिकली पढ़ा चुका हूं थ्योरी क्लास में। मैं अब इन सबका एक-एक क्वेश्चन पढ़ाना चाहता हूं। पढ़ा दूं इन सबका भी एक एक क्वेश्चन। देखिए ब्रेथ इंडेक्स क्या कहती है समझो हम पढ़ रहे हैं मार्केट के इंडिकेटर्स पहले अपने ब्रेन को सही करो हम क्या पढ़ रहे हैं मार्केट के इंडिकेटर्स कि मार्केट के कितने इंडिकेटर्स हैं सुनिए अब वो ये कहता है ऑन अ गिवन ट्रेडिंग डे द फॉलोइंग डाटा इज अवेलेबल फॉर द स्टॉक मार्केट आप यह देखो आपके नंबर ऑफ स्टॉक एडवांस्ड 8:36:41 कितने हैं मतलब कितने शेयर्स मार्केट में आगे बढ़ रहे हैं कितने स्टॉक स्टॉक डिक्लाइन हो रहे हैं। मतलब कितने शेयर्स आगे बढ़ रहे हैं? कितने शेयर मार्केट में नीचे जा रहे हैं? नंबर ऑफ स्टॉक अनचेंज्ड कितने हैं? अनचेंज्ड मतलब जिनमें कोई बदलाव नहीं है। और टोटल इशूज़ कितने हुए हैं? मतलब टोटल ट्रेड कितने हुए? तो इन सबको टोटल करके ये टोटल ट्रेड हुआ। और दो ज़ों्स जो है उसी दिन इंडस्ट्रियल एवरेज 120 पॉइंट बढ़ी है। यानी उसी दिन स्टॉक मार्केट में 120 पॉइंट ऊपर गई है। तो देखो हमें क्या पता है? हमें यह पता है कि हमारी मार्केट में यूएस की मार्केट में मान लो 850 शेयर्स ऊपर गए 1600 में से और 620 शेयर्स नीचे गए 1600 में से। 130 शेयर्स को कुछ भी नहीं हुआ आज। तो मेरा एक सवाल बताओ नेट एडवांस कितने हुए? नेट एडवांस मतलब कुल मिलाकर एडवांस कितने हुए? तो एडवांसेस माइनस डिक्लाइन कर लो। तो आप बोलोगे 230 शेयर नेट एडवांस हुए हैं। यानी आज 230 शेयर्स ऊपर गए हैं नेट में। मतलब 8:37:42 जितने शेयर ऊपर गए हैं वो ज्यादा हैं। जितने शेयर नीचे गए हैं वो कम है। तो बेसिकली आज की डेट में 230 कंपनियों के शेयर ज्यादा ऊपर गए हैं नीचे जाने वाली कंपनियों के मुकाबले। क्या ये बात आपको समझ आई? मैंने क्या कहा? जल्दी बताइए। आपने कहा हां सर। मुझे ये बात समझ आई। अच्छा एक बात बताओ। ज्यादा कंपनियों के शेयर्स जो ऊपर गए हैं वह हैं 230 एक्स्ट्रा और मार्केट भी ऊपर गई है। 120 पॉइंट्स यह इसका मतलब है स्ट्रांग इंडिकेटर है कि मार्केट भी ऊपर गई और ज्यादा नंबर ऑफ शेयर्स भी ऊपर गए तो इसे बोलते हैं ब्रेथ इंडेक्स का अच्छा इंडिकेटर स्ट्रांग इंडिकेटर सर इसमें क्या स्ट्रांग हुआ समझ नहीं पाया मैं एक बात बताओ ना एक कम एक एक मार्केट में सारे शेयर्स को देखो 1600 शेयर्स हैं 1600 कंपनियों के शेयर्स हैं मान लो जो आज ट्रेड हुए उनमें से ज्यादा शेयर ऊपर गए और नीचे कम शेयर गए एक बात और मैं आपसे पूछता हूं ज्यादा शेयर ऊपर गए और कम शेयर नीचे 8:38:42 गए। यह एक पॉजिटिव इंडिकेटर है मार्केट के लिए। मार्केट के लिए बुलिश इंडिकेटर है यह। मतलब मार्केट ऊपर जाने मतलब ज्यादा शेयर ऊपर जा रहे हैं। इसका मतलब मार्केट ऊपर जाने की तरफ है। और आज इंडेक्स भी ऊपर गई है। इंडेक्स भी 120 पॉइंट ऊपर गई है। मार्केट इंडेक्स भी ऊपर गई। तो अगर मैं कहूं मार्केट की इंडेक्स भी ऊपर गई और नंबर ऑफ़ शेयर्स जो ऊपर जा रहे हैं, वह भी ज्यादा हैं। तो, यह एक अच्छा स्टंग स्ट्रांग इंडिकेटर है मार्केट का कि मार्केट ऊपर जाएगी। क्योंकि मार्केट ब्रेथ कैसे निकालते हैं? कितने शेयर ऊपर गए टोटल में से? तो मार्केट ब्रेथ पॉजिटिव है। अब देखो ध्यान से क्योंकि ब्रेथ पॉजिटिव है और उसी दिन एवरेज इंडस्ट्रियल इंडेक्स भी ऊपर गई है। मतलब इंडेक्स भी ऊपर गई है। इसका मतलब ये एक अच्छी स्ट्रेंथ को इंडिकेट कर रहा है। यह इंडिकेट कर रहा है कि हमारी अच्छी खासी स्ट्रेंथ है। यह क्या इंडिकेट कर रहा है कि हमारी अच्छी खासी स्ट्रेंथ है। यह इस बात को इंडिकेट करता है। अगर उल्टा होता इमेजिन करो। इमेजिन करो आज 8:39:44 230 शेयर्स ऊपर गए हैं। लेकिन मार्केट की जो इंडेक्स है जैसे निफ्ट्टी 50 है मान लो चलो मैं आपको देसी एग्जांपल देता हूं। आपको ज्यादा बेटर समझ आएगा आपको। इंडिया का एग्जांपल देता हूं। सुनो इंडिया की निफ्ट्टी 50 में 50 कंपनियों के शेयर्स हैं। इसे समझ लो। आज 50 में से 35 कंपनियों के शेयर ऊपर गए। 10 कंपनियों के शेयर नीचे गए और पांच कंपनियों के शेयर्स को कुछ भी नहीं हुआ। तो बताओ आज की ब्रेथ इंडेक्स क्या है? आप ये कहोगे सर 35 ऊपर गए थे और 10 नीचे गए थे तो नेट में 25 ऊपर गए हैं। 25 शेयर ऊपर गए टोटल 50 में से तो 5 की ब्रेथ इंडेक्स है। 5 मतलब पूरी मार्केट में जो इंडेक्स है मैं इंडेक्स को देख रहा हूं। पूरी मार्केट को नहीं देख रहा। वैसे एक्चुअल में पूरी मार्केट देखी जाती है। ठीक है ना? तो इंडेक्स में आधे शेयर ऊपर गए हैं वि इज अ पॉजिटिव इंडिकेटर और वह भी प्लस आ रहा है और पता चला लेकिन आज तो इस सब से आप बुलिश फील कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो 8:40:45 बताओ आप इन सब से बुलिश फील कर रहे हो हां सर मैं तो इन सब से बहुत बुलिश फील कर रहा हूं कि नेट एडवांसेस 25 हैं और ब्रेथ हमारी फाइव है। ठीक है। लेकिन पता चला कि आज निफ्ट्टी 50 जो मार्केट है वो 50 पॉइंट नीचे वो 80 पॉइंट नीचे चली गई है। हे सर ये कैसे हो सकता है? जब ज्यादा शेयर ऊपर जा रहे थे तो फिर मार्केट नीचे कैसे आ सकती है? हो सकता है जो गिरे हैं वो इतने भयंकर गिरे हो कि वो बाकियों की पॉजिटिविटी को भी नीचे ले गए। मान लो आज आईटी स्टॉक पिट गए। सारे के सारे आईटी स्टॉक पिट गए। तो जब सारे आईटी स्टॉक पिट गए तो वो इतने पिट गए कि उन्होंने बाकी सबकी पॉजिटिव जो थी मार्केट में बुलिश फैक्टर था वो भी खत्म कर दिया। तो क्या ये एक अच्छी स्ट्रेंथ इंडिकेट हो रही है? नहीं सर। इसका मतलब यह एक अच्छी स्ट्रेंथ नहीं है कि मार्केट में शेयर ज्यादा ग्रीन दिखाई दे रहे हैं, बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। लेकिन मार्केट नीचे गिर रही है। इसका मतलब इट इज़ नॉट टेक्निकली स्ट्रेंथ फज़। मतलब मार्केट स्ट्रेंथ फज़ में नहीं है। मार्केट वीकनिंग फज़ पे है। इसका मतलब ये है। क्या ये बात आपको समझ आई? यही बात इधर हमने रिवर्स में समझाई है 8:41:46 कि अगर ब्रेथ इंडेक्स भी पॉजिटिव है और मार्केट भी 120 पॉइंट ऊपर गई है। दोनों चीजें सेम दिशा में जा रही हैं, तो यह एक अच्छी स्ट्रेंथ का इंडिकेटर है। पर अगर उल्टा होता। इमेजिन करो ब्रेथ इंडेक्स नेगेटिव होती। जबकि मार्केट ऊपर जा रही होती तो यह मतलब टेक्निकल वीकनेस का फज़ होता। मतलब ये वीकनेस का फज़ है। इसका मतलब ये जो कंपनियां ऊपर जा रही है ये असली में नहीं जा रही। थोड़े दिन में नीचे गिरने लग जाएंगी। ये एक वीकनेस का फज़ दिखाई दे रहा है मार्केट में। यानी ये करेक्शन का फज़ है। बिल्कुल ठीक। समझ आ गई आपको बात? एब्सोलुटली क्लियर। कूल। अगला सवाल है वॉल्यूम ऑफ ट्रांजैक्शन। इसे भी बहुत लोग देखते हैं। यह सब ना आपको सीखना भी चाहिए। अगर आप ट्रेडिंग करते हो, तो यह सारी बातें आपको पता भी होनी चाहिए। देखिए वॉल्यूम ऑफ ट्रांजैक्शन मतलब अगर मान लो प्राइस भी बढ़ रहा है मार्केट में और लोग ज्यादा ज्यादा ट्रेड भी कर रहे हैं। लोग हर दिन ज्यादा ट्रेड कर रहे हैं। इसका मतलब प्राइस बढ़ रहा है और लोग ज्यादा ट्रेड कर रहे हैं तो लोगों का कॉन्फिडेंस बहुत हाई है। इसका मतलब ये स्ट्रांग बाय सिग्नल है। मतलब अगर प्राइस भी बढ़ रहा है 8:42:46 और लोगों का वॉल्यूम भी बढ़ रहा है। इसका मतलब स्ट्रांग बाय सिग्नल है। उल्टा भी हो सकता है। अगर प्राइस भी गिर रहा है और जो ट्रेड है वह उसका वॉल्यूम भी गिर रहा है। लोग अब कम ट्रेड कर रहे हैं। इसका मतलब यह स्ट्रांग सेल सिग्नल है। मतलब यह बियर मार्केट का सिग्नल है। मतलब मार्केट डूबने वाली है। ये मतलब बेसिकली आप ये मान के चलो कि आप नहीं बियर में तो उल्टा हो जाना चाहिए। मैंने एक चीज़ गलत बोली मैंने ना वॉल्यूम घटा दिया। वॉल्यूम मुझे पहले बढ़ाना और घटाना अलग-अलग चाहिए। सुनो दोबारा सुनो। अगर शेयर प्राइस ऊपर जा रहा है और ट्रेड भी ज्यादा ज्यादा हो रहे हैं। शेयर प्राइस ऊपर जा रहा है और ट्रेड भी ज्यादा ज्यादा हो रहे हैं। इसका मतलब ये स्ट्रांग बाय पोजीशन है। मतलब यह बुलिश फज़ में एंट्री हो रही है। आपको बाय कर लेना चाहिए। एक बात बताओ अगर शेयर का प्राइस फॉल हो रहा है मतलब लोग ज्यादा बेच रहे होंगे और बेचने वाले लोग भी बढ़ते जा रहे हैं यानी ज्यादा ज्यादा लोग बेच रहे हैं यानी ये स्ट्रांग बियर सिग्नल है कि ज्यादा ज्यादा लोग इस शेयर को बेच बेच के भाग रहे हैं मतलब ज्यादा ही सेलिंग हो रही है शेयर गिर रहा है लेकिन फिर भी ज्यादा सेलिंग हो रही है तो इसका मतलब ये बियर मार्केट का सिग्नल 8:43:46 है कि अगर फॉलिंग प्राइस में वॉल्यूम बढ़ रहा हो यानी अगर वॉल्यूम बढ़ रहा है तो ये बढ़ते प्राइस के साथ तो यह बाय सिग्नल होता घटते प्राइस के साथ यह बियर सिग्नल होता है यानी बेचने का सिग्नल होता है। अब अगर उल्टा हो मतलब दाम बढ़ रहा है क्वांटिटी घट रही है या फिर दाम घट रहा है क्वांटिटी बढ़ रही है। मतलब अब ये सोचो मतलब ये डिक्रीजिंग वॉल्यूम के साथ कम वॉल्यूम के साथ देखो एक बात और कम वॉल्यूम का मतलब क्या है कि पहले लोग इसमें ज्यादा ट्रेड कर रहे थे अब कम कर रहे हैं। अब कम ट्रेड कर रहे हैं। यानी लोग उस डायरेक्शन में कम इंटरेस्टेड हो रहे हैं। जिस डायरेक्शन में दाम जा रहा है। इसका मतलब क्या है? जिस डायरेक्शन में दाम जा रहा है उस डायरेक्शन में अब कम लोग इंटरेस्टेड हैं। अगर मान लो दाम बढ़ रहा है तो यानी बढ़ते हुए दाम में कम लोग इंटरेस्टेड हैं। कम लोग इंटरेस्टेड हैं। यानी यह बुलिश ट्रेंड अब आगे चलेगा नहीं। दाम बढ़ तो रहा है लेकिन लोग इसमें कम इंटरेस्टेड हैं। कम लोग खरीद रहे हैं उस शेयर को। इसका ना उसका दाम गिरने वाला है, करेक्शन आने वाली है। और अगर दाम कम हो रहा है तो लोग इतने कम दाम पर बेचने को तैयार नहीं है। इसका मतलब मार्केट वापस 8:44:46 उठने वाली है। तो यानी अगर दाम बढ़ रहा है लेकिन लोग कम खरीद रहे हैं तो यह वीकनिंग बुल मार्केट है। मतलब अब बुल मार्केट खत्म होने वाली है। मार्केट गिरने वाली है वापस। और अगर गिरते हुए दाम में भी लोग कम खरीद रहे हैं या कम बेच रहे हैं तो इसका मतलब यह वीकनिंग बियर मार्केट है। मतलब मार्केट रिवर्स करने वाली है। वापस मार्केट उठने वाली है। क्या ये चारों केस समझ आ गए? देखो, अगर क्वांटिटी बढ़ रही है तो यह स्ट्रांग होगा। स्ट्रांग सिग्नल्स हैं और अगर क्वांटिटी घट रही है तो यह वीक सिग्नल्स होंगे। अब वो देखना है आपको कि अगर बढ़ रहा है तो वीकनिंग बुल सिग्नल होगा और अगर प्राइस अगर वॉल्यूम डिक्रीज हो रहा है और प्राइस घट रहा है तो ये वीकनिंग बियर सिग्नल होगा। अब आता है अगला कॉन्फिडेंस इंडेक्स। बेटा कॉन्फिडेंस इंडेक्स क्या बोलता है? देखो इसमें क्या देखा जाता है? यह बहुत इंपॉर्टेंट है आज की दुनिया में। इस वक्त एट प्रेजेंट मुझे लगता है आपको यह देखना चाहिए जरूर रियल वर्ल्ड में भी सोचना चाहिए इसके बारे में देखो अगर मान लेते हैं ईल्ड ऑन हाई ग्रेड बॉन्ड्स 8% है और 8:45:48 ईल्ड ऑन लो ग्रेड बॉन्ड्स 10% है मतलब हाई ग्रेड और लो ग्रेड बॉन्ड समझते हो आप क्या होता है हाई ग्रेड बॉन्ड्स होते हैं जैसे सरकार के बॉन्ड्स जो अच्छी कंपनियों के बॉन्ड्स हैं वरना जो अच्छे बैंकों के बॉन्ड्स हैं जिनमें पैसा लगा के आपका पैसा सेफ है वहां ब्याज कम मिलता है लेकिन लेकिन जो लो ग्रेड बॉन्ड्स हैं उनमें ब्याज ज्यादा मिलता है जो जंक बॉन्ड्स होते हैं। अब देखो इन दोनों की रेश्यो को देखो यानी 8/10 करो 8/10 मतलब8 ये कॉन्फिडेंस इंडेक्स है8 अगले साल 8.5 / 9.5 यानी कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़ गया। यानी कॉन्फिडेंस लोगों का बढ़ गया। लोगों का कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़ गया। इसका मतलब क्या हो रहा है? इसका मतलब है कि लोग लो ग्रेड बॉन्ड पर ज्यादा पैसा लगा रहे होंगे। इस बात को समझो। लोग लो ग्रेड बॉन्ड में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। भले ही वहां सिर्फ 1% एक्स्ट्रा रिटर्न है, लेकिन फिर भी लोग लो ग्रेड बॉन्ड में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं क्योंकि कॉन्फिडेंस बढ़ गया उनका। मेरी बात को समझना। 8:46:51 अगर आप स्ट्रांग बुलिश होते हो, स्ट्रांग बुलिश। अगर मान लो मार्केट बहुत अच्छी चल रही है, सुनहरी मार्केट चल रही है। एकदम भड़भड़ भड़भड़ करके ऊपर जा रही है। जैसे कोविड के बाद गई थी। मतलब लोग पागल हो रखे हैं। एकदम पागल हो रखे हैं। तो लोग ना डरते नहीं है उस फज़ में। उस फज़ में लोग डरते नहीं है। मैंने क्या कहा? उस फेज में लोग डरते नहीं है। तो लोगों को अगर मैं ऑफर दूं इमेजिन करना कि आप सेफ वाले बॉन्ड्स में पैसा लगाओगे जो आपको 8% रिटर्न देंगे या फिर अनसेफ वाले बॉन्ड्स में पैसा लगाओगे जो आपको 9% या फिर इमेजिन करते हैं 8:47:41 या आप अनसेफ बॉन्ड में पैसा लगाओगे तो आप यह कहोगे मैं अनसेफ में लगाऊंगा क्योंकि मैं स्ट्रांग बुलिश हूं। मुझे पता है मार्केट गिरनी ही नहीं है। मेरे को तो एक कॉन्फिडेंस है कि मार्केट तो बढ़ती ही रहेगी, मार्केट तो ऊपर ही जाती रहेगी। अगर मुझे इतना कॉन्फिडेंस है कि मार्केट बढ़ती ही रहेगी, मार्केट ऊपर ही जाती रहेगी तो तो मैं इस 1% के लिए भी मैं सेफ जगह पे पैसा नहीं लगाऊंगा। अनसेफ जगह पे पैसा लगाऊंगा और मैं और बुलिश हो जाऊंगा। तो मैं थोड़े दिनों बाद इसमें भी पैसा नहीं लगाऊंगा। मैं फिर इक्विटी में ले जाऊंगा पैसा। मैं यहां से और आगे ले जाऊंगा। मेरे को पता लग गया 12% कमाना है मेरे को। मैं यहां से भी आगे ले जाऊंगा। क्या यह बात आपको समझ आ रही है? अगर आपका स्ट्रांग बुलिश रिएक्शन है तो लोग सेफ से अनसेफ बॉन्ड और अनसेफ बॉन्ड से इक्विटी की तरफ मूव करते हैं। पर अगर बियरिश होता है अगर आप स्ट्रांग बियरिश हो आपको बहुत भयंकर डर लग रहा है। आपको लग रहा है भैया मार्केट तो उलथल-पुथल जल रही है कभी भी गिरेगी। तो लोग यहां से यहां यहां से यहां नहीं जाते। फिर उल्टा होता है। फिर भले ही सेफ बॉन्ड्स कम ब्याज दे। मान लो सेफ बॉन्ड दे रहे हैं खाली 8% ब्याज। जबकि अनसेफ पर्स अनसेफ बोंड्स पैसा दे रहे हैं 10% जबकि 8:48:42 इक्विटी पैसा देने की बात कर रही है 15% फिर भी लोग इक्विटी से भाग के फिर भी तब लोग इक्विटी से भाग के अनसेफ बॉन्ड्स में आते हैं और अनसेफ बॉन्ड से भाग के सेफ बॉन्ड्स में आते हैं। क्यों? क्योंकि स्ट्रांग बियरिश है। लोगों को डर लग रहा है। अगर कंपनियां डूब जाएंगी। यह इक्विटी की तो कमाई दिखाई की है। तो डूब जाएगी। ज़ीरो हो जाएगी थोड़े दिनों में। और अनसेफ बॉन्ड पे मत लगाओ क्योंकि कंपनियां डूब रही है। अनसेफ बॉन्ड भी डूब जाएंगे। वो सेफ बॉन्ड्स की तरफ भागते हैं। तो यह इंडिकेशन होती है अगर आपकी जो कॉन्फिडेंस इंडेक्स है वो बढ़ रही है या घट रही है। अगर कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़ रही है अगर कॉन्फिडेंस इंडेक्स हाई आती है तो यह मतलब है उसका और अगर कॉन्फिडेंस इंडेक्स लो आती है 8:49:36 देखिए जी अगर कॉन्फिडेंस इंडेक्स हाई आती है या फिर कॉन्फिडेंस इंडेक्स लो आती है। समझ आई आपको मेरी बात? कॉन्फिडेंस इंडेक्स हाई आने पर लोग सेफ बंड में पैसा कम लगाते हैं, अनसेफ बॉन्ड में लगाते हैं और या इक्विटी में लगाते हैं और उल्टा होता है जब कॉन्फिडेंस इंडेक्स लो आती है। ये समझाती है कॉन्फिडेंस इंडेक्स। और कॉन्फिडेंस इंडेक्स निकलती कैसे है? इनफैक्ट इन क्वेश्चनों को पढ़कर आपको थ्योरी भी बेटर समझ आने लगेगी। इन टॉपिक्स की थ्योरी समझ आ जाएगी। वरना कई बच्चों को थ्योरी की लैंग्वेज नहीं समझ आती। ठीक है जी? लिख लिया? सुनो। तो यहां पर हमने कॉन्फिडेंस इंडेक्स इनक्रीज हो रही है। तो अगर कॉन्फिडेंस इंडेक्स राइज हो रही है इसका मतलब जो लो ग्रेड बॉन्ड्स हैं आर फॉलिंग रिलेटिव टू हाई ग्रेड बॉन्ड। दिस हैपन बिकॉज़ द इन्वेस्टर्स आर बिकमिंग मोर कॉन्फिडेंट एंड विलिंग टू एक्सेप्ट लोअर रिस्क प्रीमियम ऑन द हायर रिस्क बॉन्ड। मतलब ज्यादा रिस्की बॉन्ड पे वो कम 8:50:36 पैसा कम आके भी जाने को तैयार हैं। देखो पहले उन्हें 2% का प्रीमियम मिल रहा था। तब भी नहीं जा रहे थे। तब भी यहीं बैठे हुए थे। अब उन्हें सिर्फ 1% का प्रीमियम मिल रहा है। फिर भी जा रहे हैं वह इधर। तब भी वह अनसेप्ट बॉन्ड्स की तरफ जा रहे हैं। यानी बडिंग अप देयर प्राइस एंड पुशिंग ऑन द ईल्ड। अ राइजिंग कॉन्फिडेंस इंडेक्स इज एक्सपेक्टेड टू प्रिसीड अ राइजिंग स्टॉक मार्केट। क्यों? क्योंकि अगर कॉन्फिडेंस इंडेक्स हाई होता जाएगा, राइज़ होता जाएगा तो लोग यहां से पैसा यहां ले जाएंगे, यहां से पैसा यहां ले जाएंगे। इसलिए हमें लगता है कि अब मार्केट सुधरने वाली है। जब भी कॉन्फ ध्यान से सुनो। जब भी कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़ने लगे तो समझ लो अब स्टॉक मार्केट बढ़ेगी। उसके बाद 2 महीने के अंदर-अंदर स्टॉक मार्केट वापस रिकवर करने लग जाएगी। क्या कहा मैंने? जब भी कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़ने लगे तो समझ लो कि थोड़े दिनों में स्टॉक मार्केट बढ़ने लगेगी। ये एक लीडिंग इंडिकेटर है। मतलब ये स्टॉक मार्केट के बढ़ने से पहले ही प्रिडिक्ट कर देता है कि अब स्टॉक मार्केट बढ़ेगी। बट क्या ये अकेला इंडिकेटर है? नहीं। इसे और सारे टूल्स के साथ यूज़ करना चाहिए। 8:51:37 फिर आती है रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स। अब रिलेटिव स्ट्रेंथ का मतलब है कि कोई एक सिक्योरिटी है x वो मार्केट के हिसाब से जैसे सेंसेक्स है या निफ्ट्टी 50 है उसके हिसाब से कैसे मूव कर रही है देखो स्टॉक शेयर बढ़ रहा है मान लो इधर से इधर ₹8 इधर से इधर ₹10 इधर से इधर ₹12 जबकि स्टॉक मार्केट रोज बढ़ नहीं रही कभी बढ़ रही है कभी घट भी रही है कभी बढ़ भी रही है लेकिन जो प्राइस ऑफ़ x है वो तेजी से बढ़ रहा है तो यह देखो कि प्राइस ऑफ़ x मार्केट के हिसाब से कैसा चल रहा है तभी तो बोलते हैं रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स रिलेटिव स्ट्रेंथ मतलब आप किसी कंपनी के शेयर को देख रहे हो तो आप उस शेयर को नहीं देखो उस शेयर को मार्केट के हिसाब से देखो मार्केट के रिलेशन में देखो मार्केट के रिलेटेड स्ट्रेंथ देखो कि मार्केट के हिसाब से वो शेयर कितना स्ट्रेंथ वाला है तो क्या करोगे प्राइस ऑफ़ द सिक्योरिटी डिवाइडेड बाय मार्केट की इंडेक्स यानी निफ्टी 50 या ससेक्स ठीक है जी * 100 कर देते हैं तो 100 / 20000 * 100 यह आ गया 58 / 20020 8:52:39 100 यानी535 तो देख रहे हो आप रिलेटिव स्ट्रेंथ बढ़ती जा रही है। रिलेटिव स्ट्रेंथ बढ़ती जा रही है। चाहे मार्केट बीच में फॉल भी हो रही है, बढ़ भी रही है। मार्केट बढ़ रही है, घट रही है, कुछ भी हो रहा है लेकिन रिलेटिव स्ट्रेंथ बढ़ती जा रही है। इसका मतलब यह सिक्योरिटी बहुत बुलिश है। इस सिक्योरिटी को तेजी से बढ़ने की अपेक्षा है अभी भी कि ये और बढ़ेगी। रिलेटिव स्ट्रेंथ हर महीने बढ़ती जा रही है। इवन जबकि सेंसेक्स फ्लैट भी है ऑलमोस्ट। ससेक्स तो ऑलमोस्ट बराबरी पे चल रहा है। 2300 पॉइंट ऊपर नीचे जा रहा है। दिस कंफर्म दैट सिक्योरिटी एक्स इज राइजिंग फास्ट देन द मार्केट। मतलब हम यह कहेंगे कि सिक्योरिटी एक्स मार्केट से तेज चल रही है। इसका मतलब यह रिलेटिव स्ट्रेंथ को इंडिकेट कर रही है। यानी यह अपनी ताकत को इंडिकेट कर रही है कि मार्केट से ज्यादा ताकत है इस सिक्योरिटी में। मार्केट से तेज चल रही है ये सिक्योरिटी। ये सिक्योरिटी मार्केट से तेज चल रही है। मार्केट तो पिट भी रही है। मार्केट तो नीचे भी गई है। फिर भी इसकी स्ट्रेंथ बढ़े जा रही है। मार्केट के हिसाब से इसकी स्ट्रेंथ बढ़े ही जा रही है। इससे हम कंटिन्यू करेंगे कि एक्सपेक्ट 8:53:39 करेंगे कि सिक्योरिटी एक्स फ्यूचर में और बढ़ेगी। हम इससे एक्सपेक्ट करेंगे कि सिक्योरिटी एक्स फ्यूचर में और बढ़ेगी। ठीक है? अगला आता है ऑड लॉट थ्योरी। ऑड लॉट थ्योरी का मतलब क्या होता है? ठीक है जी। ऑड लॉट ये समझ आ गया ना? रिलेटिव स्ट्रेंथ तो समझ आ गया कि मार्केट के हिसाब से स्ट्रेंथ देखते हो आप। तो आप क्या देखते हो? सिक्योरिटी के प्राइस को मार्केट से डिवाइड कर देते हो मार्केट इंडेक्स से। और देखते हो कि वह बढ़ रहा है तो यानी वह बुलिश ट्रेंड पे है। वह सिक्योरिटी आगे भी बढ़ेगी। और अगर यह गिर रहा होता, डिक्रीज हो रहा होता मार्केट के हिसाब से तो हम बोलते कि फिर यह फॉल करेगी। ठीक है? ऑड लॉट थ्योरी। अब ऑड लॉट थ्योरी का मतलब क्या होता है बेटा? देखो ऑड लॉट थ्योरी। ठीक है जी? बोलिए यहां तक की बातें आपको समझ आई मैंने क्या कहा? ऑड लॉट का मतलब क्या होता है? ऑड लॉट का मतलब है आप यह समझो कि जो स्टॉक मार्केट में हम और आप लोग हैं जो इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स नहीं है, जो बड़े इन्वेस्टर नहीं है, जो बैंक नहीं है, 8:54:40 म्यूच्यूल फंड नहीं है, जो छोटे इन्वेस्टर हैं। रिटेल इन्वेस्टर्स हैं। रिटेल इन्वेस्टर हम लोगों को बोलते हैं। पता है ना आपको ये बात? हम लोग माना जाता है मार्केट में हमेशा गलत करते हैं। मतलब सर हम तो पैसा कमाते हैं। जो आप पैसा कमा रहे हो, वह तुक्के से कमा रहे हो। मतलब आप हमेशा मार्केट में गलत तरफ होंगे। अगर मार्केट बेचना चाहती है, तो आप खरीद रहे होगे। और मार्केट खरीदना चाहती है तो आप बेच रहे होंगे। उल्टा हो रहा होगा। यानी अगर आप देखो बेसिकली यह थ्योरी यह कहती है कि रिटेल इन्वेस्टर हमेशा बेवकूफ होता है। जो वह कर रहा है उससे उल्टा होगा। सर ये तो गजब बेेज्जती हो रही है। बात आप कांसेप्ट समझो ना। आप अपने ऊपर पर्सनल क्यों ले रहे हो? सोचो आपको नहीं बोल रहे। ये क्या कहती है? ऑड लॉट थ्योरी। ऑड लॉट उन्हें बोलते हैं जो हम जैसे रिटेल इन्वेस्टर खरीदते बेचते हैं। ऑड लॉट्स किन्हें कहा जाता है? जो रिटेल इन्वेस्टर छोटे इन्वेस्टर खरीदते बेचते हैं। यह थ्योरी यह कहती है जैसे एग्जांपल लो हमने कितने तीन हफ्तों में हमने कितने स्टॉक खरीदे और कितने बेचे मतलब ये वो लोग ये वो हैं जो रिटेल वालों ने खरीदे और रिटेल वालों ने बेचे इन्हें माइनस करो तो या इन्हें डिवाइड करो सॉरी तो ऑड लॉट थ्योरी 8:55:41 में इन दोनों को डिवाइड कर लो। डिवाइड करने से हमें पता लग गया कि परचेस बाय सेल बढ़ती जा रही है। परचेस बाय सेल की रेशो बढ़ती जा रही है। यानी हम रिटेल इन्वेस्टर्स ज्यादा ज्यादा खरीदते जा रहे हैं। धीरे-धीरे करके रिटेल इन्वेस्टर्स हर हफ्ते और शेयर खरीद रहे हैं और शेयर खरीद रहे हैं और इसका मतलब यह मार्केट अब डूबने वाली है। यानी ये शेयर अब पिटने वाला है। क्योंकि अगर इन्वेस्टर ज्यादा खरीद रहे हैं और वो हमेशा मूर्ख होते हैं। यह थ्योरी बोलती है यह थ्योरी अस्यूम करती है कि जो एवरेज स्मॉल इन्वेस्टर होता है वो हमेशा गलत होता है। अगर वह ज्यादा बाइंग कर रहा है तो इसका मतलब टॉप आने वाला है। मतलब मार्केट का टॉप पहुंचने वाला है इस शेयर का। अब यह गिरेगा। ठीक है जी। और अगर वो ज्यादा बेच रहा है तो इसका मतलब मार्केट का बॉटम आने वाला है। वहां से दोबारा शेयर बढ़ेगा। आपने कई बार नोटिस किया होगा अगर आप ट्रेड करते हो तो जब आप खरीदते हो उसके बाद गिरने लग जाता था दम। और जब आप बेच देते हो तो उसके बाद बढ़ने लग जाता था दम। यही कहती है ऑड लॉर्ड थ्योरी कि रिटेल इन्वेस्टर को पता ही नहीं होता कि जो बड़े प्लेयर्स हैं जो इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर हैं जो मार्केट को चला रहे हैं वो किस तरफ ट्रेड ले रहे 8:56:42 हैं। रिटेल इन्वेस्टर हमेशा रीसेंट पास्ट को देख के ट्रेड लेता है कि शेयर बढ़ रहा है खरीद लेता हूं और बढ़ेगा और पता चला गिरने लग जाता है। तो ये थ्योरी यह मानती है कि अगर ऑड लॉट परचेस बाय सेल बढ़ता जा रहा हो इसका मतलब रिटेल इन्वेस्टर अपना पैसा उस शेयर में बढ़ाता जा रहा है। खरीदता जा रहा है। खरीदता जा रहा है। इसका मतलब है अगर यह बढ़ रहा है शार्पली देख रहे हो यह शार्पली बढ़ रहा है इसका मतलब यह हुआ कि रिटेल इन्वेस्टर आर बिकमिंग इंक्रीजिंगली अग्रेसिवली बयर यानी वो खरीदे जा रहे हैं खरीदे जा रहे हैं खरीदे जा रहे हैं अगर वो खरीदे जा रहे हैं इसका मतलब यह है कि अब वो शेयर नीचे जाने वाला है इसका मतलब है कि वो शेयर अब नीचे जाने वाला है और अगर आप बेचे जा रहे हो तो इसका मतलब अब वो शेयर ऊपर जाने वाला है यह बोलती है ऑड लॉर्ड थ्योरी समझ आ यह भी